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इस बार भी मायावती नहीं लड़ेंगी विधानसभा चुनाव: न जनसभा-न रैली, फिर भी बसपा का UP में सरकार बनाने का दावा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2022 (Uttar Pradesh Assembly Elections 2022) से पहले बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने बड़ा ऐलान किया है। पार्टी महासचिव और सांसद सतीश चंद्र मिश्रा (Satish Chandra Misra) ने मंगलवार (11 जनवरी 2022) को कहा कि बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) और वो खुद इस बार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में किसी भी सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे।

बता दें कि प्रदेश में 10 फरवरी से मतदान होगा और 7 चरणों तक चलेंगे, लेकिन अभी तक किसी प्रचार की कमान मायावती ने खुद नहीं सँभाली है। इसके बावजूद सतीश चंद्र मिश्रा उत्तर प्रदेश की सत्ता में बीएसपी की वापसी का दावा कर रहे हैं।

मिश्रा ने कहा कि यूपी में बसपा की सरकार बनने जा रही है और बीजेपी तथा समाजवादी पार्टी दूसरे और तीसरे नंबर पर रहेंगी। उन्होंने यह भी ऐलान किया है कि चुनाव से पहले और बाद में बीएसपी किसी के साथ भी गठबंधन नहीं करेगी।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के 400 सीटें जीतने के दावे पर बसपा महासचिव ने कहा, “समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के पास तो 400 उम्मीदवार ही नहीं हैं तो फिर इतनी सीटें वे कैसे जीतेंगे? एसपी या फिर बीजेपी सत्ता में नहीं आएँगे। इस बार बसपा यूपी में सरकार बनाने जा रही है।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सतीश चंद्र मिश्रा काफी दिनों से अकेले ही पार्टी के लिए प्रचार कर रहे हैं। अवध से लेकर पूर्वांचल और पश्चिम यूपी तक उन्होंने दौरा कर ब्राह्मणों को लुभाने के लिए कई आयोजन किए हैं, लेकिन मायावती ने चुनाव को लेकर न तो कोई जनसभा की और ना ही कोई रोड शो निकाला।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटों के लिए 10 फरवरी से मतदान शुरू हो रहे हैं। इस बार यूपी के चुनाव में 29 फीसदी लोग नए वोटर्स हैं। ये लोग पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। कोरोना सकंट की वजह से इस बार एक घंटे अधिक समय तक वोट डाले जाएँगे।

सोनू सूद की बहन मालविका के कॉन्ग्रेस में आते ही बढ़ा विवाद, बागी MLA हरजोत कमल ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया

बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद (Sonu Sood) की बहन मालविका सूद सच्चर (Malvika Sood Sachar) के कॉन्ग्रेस में शामिल होते ही पार्टी में अंतर्कलह बढ़ गई है। मोगा सीट से कॉन्ग्रेस विधायक हरजोत कमल (Harjot Kamal) के साथ कॉन्ग्रेस का एक बड़ा गुट पार्टी के खिलाफ हो गया है। कमल ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।

विधायक हरजोत कमल ने खुद को नजरअंदाज करने के बाद कॉन्ग्रेस के खिलाफ बागी रुख अख्तियार कर लिया है। दरअसल, कॉन्ग्रेस ने मालविका को पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 (Punjab Assembly election 2022) में मोगा (Moga) सीट से उतारने का फैसला किया है, जिसको लेकर इस सीट से मौजूदा विधायक ने आपत्ति जताई है।

हरजोत कमल ने घर के बाहर जमा कार्यकर्ताओं से भावुक होकर कहा कि सभी के दिए सुझावों के बाद वह ऐलान कर रहे हैं कि चुनाव लड़ेंगे। भले वह किसी भी पार्टी से हो या निर्दलीय लड़ें। विधायक ने कार्यकर्ताओं से यह भी कहा कि वो कसम खाएँ कि वो साथ देने से पीछे नहीं हटेंगे।

कार्यकर्ताओं से हरजोत कमल ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Punjab Chief Minister Charanjit Singh Channi) का टिकट कटने पर भी वह निर्दलीय चुनाव लड़े थे और अब वह भी निर्दलीय चुनाव लड़ेगे। उन्होंने कहा कि निर्दलीय लड़ने का ये मतलब नहीं है कि वे लावारिस हो गए हैं, कभी दिल्ली से तो कभी चंडीगढ़ से उनके पास फोन आ रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बताया जा रहा है कि मालविका सूद को कॉन्ग्रेस में शामिल कराने को लेकर मोगा में पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी और राज्य के पार्टी प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू (Congress Punjab President Navjot Singh Siddhu) को हरजोत कमल के समर्थकों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जब सिद्धू और चन्नी मालविका के घर पहुँचे तो विधायक के समर्थक भी उधर निकल पड़े। इस दौरान पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक लिया और कार्यकर्ताओं के साथ उनकी जमकर हाथापाई हुई।

बता दें कि मा​लविका हाल ही में चरणजीत सिंह चन्नी और पार्टी प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू की मौजूदगी में कॉन्ग्रेस में शामिल हुईं। कॉन्ग्रेस के पार्षद और सरपंच रविवार को विधायक हरजोत कमल के घर के बाहर जमा हुए थे। उन्होंने विधायक का टिकट कटने की अटकलों को लेकर अपना विरोध जताया था, लेकिन मालविका सूद की एंट्री के बाद उन्होंने खुले तौर पर कॉन्ग्रेस पार्टी का विरोध जताया।

CAA के नियम बनाने को लेकर छठी बार बढ़ाई गई समय सीमा: बंगाल BJP के शरणार्थी प्रकोष्ठ ने जताई आपत्ति, मतुआ समुदाय भी नाराज़

CAA को लेकर नियम बनाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फिर से समयसीमा बढ़ा दी है। इस कानून को बने 2 साल हो चुके हैं। इससे पहले पाँच बार CAA को लेकर नियम निर्धारित करने की समयसीमा बढ़ाई जा चुकी है। पहली बार जून 2020 में इसके लिए और समय बढ़ाने की बात कही गई थी। अब संसदीय समितियों से इसे लेकर फिर से और समय माँगा गया है। 11 दिसंबर, 2019 को संसद ने पारित किया था। अगले ही दिन इसे राष्ट्रपति ने भी मंजूरी दे दी थी।

उधर पश्चिम बंगाल में प्रदेश भाजपा के ‘शरणार्थी प्रकोष्ठ’ ने भी इस देरी को लेकर आपत्ति जताई है और पार्टी लेटरहेड पर ही पत्र जारी किया है। इसमें कहा गया है कि शरणार्थियों को कानूनी दाँवपेंच से जूझना पड़ रहा है, पुलिस उन्हें प्रताड़ित कर रही है और शिक्षा एवं नौकरी के अलावा विदेश यात्राओं में भी उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है। सभी दलों से अपील की गई है कि वो CAA के रूल्स नोटिफाई करने के लिए दबाव बनाएँ। इस देरी से परेशानियों का जिक्र करते हुए तुरंत कदम उठाने की माँग की गई है।

इस बयान में कहा गया है कि ये न सिर्फ शरणार्थियों, बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल के लिए महत्वपूर्ण है। प्रकोष्ठ के संयोजक मोहित रॉय ने भाजपा आलाकमान पर इसका दोष मढ़ा। उन्होंने कहा कि नियमों को तय करने में कुछ दिन से ज्यादा का समय नहीं लगता, इसीलिए वो पार्टी का सदस्य होने के बावजूद केंद्र सरकार पर आरोप लगा रहे। उन्होंने कहा कि उनके लिए शरणार्थियों का हित महत्वपूर्ण है और इससे 1972 के बाद पश्चिम बंगाल में आए 1 करोड़ शरणार्थियों पर असर पड़ेगा।

पश्चिम बंगाल में भाजपा का मतुआ समुदाय से भी मतभेद चल रहा है। मतुआ समुदाय के अधिकतर लोग बांग्लादेश से आए थे और वो पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में बसे हुए हैं। उनकी माँग है कि CAA के नियम तय कर के इसे जल्द से जल्द लागू किया जाए। साथ ही पार्टी की समितियों में भी प्रतिनिधित्व माँगा है। भाजपा ने 2021 विधानसभा चुनाव में भी CAA लागू करने का वादा किया था। खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोविड-19 महामारी कम होने पर CAA के नियम तय करने का आश्वासन दिया था।

संसदीय कार्य सम्बंधित नियमावली कहती है कि राष्ट्रपति की विधेयक को सहमति मिलने के 6 महीने के भीतर नियम तय कर लिए जाने चाहिए। ऐसा न होने की स्थिति में लोकसभा और राज्यसभा की समितियों से समय में विस्तार की माँग की जाती है। अब फिर से सेवा विस्तार की माँग की गई है। इसकी अधिसूचना के बाद ही पात्र लाभार्थियों को नागरिकता मिल पाएगी। इस कानून से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए प्रताड़ित हिन्दुओं, सिखों और ईसाईयों को भारतीय नागरिकता मिलेगी।

SFI लीडर की हत्या के मामले में केरल यूथ कॉन्ग्रेस का कार्यकर्ता गिरफ्तार, पुलिस ने कहा- कॉलेज चुनाव के कारण हो रही झड़पें

केरल (Kerala) स्थित इडुक्की के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) कार्यकर्ता धीरज राजेंद्रन की निर्मम हत्या (Murder) कर दी गई थी। इस मामले में अब केरल पुलिस ने यूथ कॉन्ग्रेस (Youth congress activist arrested) के कार्यकर्ता निखिल पैली को सोमवार (10 जनवरी 2022) को गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटना के बाद एर्नाकुलम स्थित महाराजा कॉलेज में SFI और कॉन्ग्रेस की छात्र इकाई केरल कॉन्ग्रेस यूनियन (KSU) के बीच झड़प हुई। इसमें KSU के 11 कार्यकर्ता घायल हो गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना सोमवार (10 जनवरी 2022) की है, जब कन्नूर निवासी धीरज पर दोपहर करीब एक बजे चाकू से हमले किए गए। इसके बाद घायल अवस्था में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी मौत हो गई। इस झड़प में SFI के दो अन्य सदस्य, अभिजीत और अमल भी घायल हुए थे, जिनका अभी इलाज चल रहा है। पुलिस का कहना है कि कॉलेज में चुनाव चल रहे हैं, जिस कारण से बीते कुछ दिनों में विभिन्न छात्र संगठनों के बीच आपसी झड़पें हुई हैं। छात्रों के मुताबिक, मृतक छात्र पर हमला कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता ने किया था। उसी ने उसे चाकू मारा औऱ मौके से फरार हो गया।

इस घटना के बाद केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (P Vijyan) ने फेसबुक के जरिए SFI कार्यकर्ता की हत्या की निंदा की। उन्होंने ये संदेश दिया कि कॉलेजों में दंगे भड़काने की कोशिशों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

CPM कार्यकर्ताओं ने प्रदेशभर में निकाला मोर्चा

SFI के कार्यकर्ता की हत्या के विरोध में CPM और उसकी स्टूडेंट इकाई की तरफ से प्रदेश भर में विरोध मार्च निकाला गया। इस दौरान भी यूथ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं और CPM में भिड़ंत हुई। मलप्पुरम DYFI का विरोध करते कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता उनसे भिड़ गए। इसी तरह से कन्नूर में कॉन्ग्रेस के कार्यालय पर SFI के कार्यकर्ताओं ने पत्थरबाजी की। जबकि त्रिचंबरम में कॉन्ग्रेस के फ्लैगपोस्ट को ध्वस्त करने के साथ ही कार्यालय की खिड़कियों को तोड़ दिया गया।

जबकि कोझिकोड के पेरम्बरा स्थित कॉन्ग्रेस कार्यालय पर भी हमले किए गए। इतना ही नहीं SFI-DYFI कार्यकर्ताओं ने चावरा में कोल्लम के सांसद एन के प्रेमचंद्रन की कार पर भी हमला कर उसके शीशे और बोनट तोड़ दिया।

बाप हिंदू, अम्मी मुस्लिम: 8 साल के बच्चे को मेला दिखाने के बहाने ले गए नाना-नानी, खतना कराकर बना दिया शमशाद

छत्तीसगढ़ में एक बार फिर धर्मांतरण का मामला सामना आया है। ताजा मामला राज्य के जशपुर जिले के सन्ना थाना क्षेत्र का है। यहाँ नानी ने 8 साल भी के बच्चे का धोखे से खतना करा दिया। पिता चितरंजन सोनवानी ने थाने में शिकायत की है कि उसकी पत्नी, सास और ससुराल के अन्य सदस्यों ने उसके बच्चे को धोखे में रखकर सुन्नत करवा दिया। इसके साथ ही उसने बच्चे का धर्मांतरण करवा कर उसका नाम शमशाद रख दिया। बच्चे का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह कह रहा है कि उसकी नानी और नाना मेला देखने के बहाने के जाकर सुन्नत करा दिए।

मामले में बीजेपी नेता प्रबल प्रताप सिंह जूदेव का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि जिले के सन्ना थाना में दर्ज खतना मामले में हिंदू पिता की सहमति के बिना पुत्र का खतना कर धर्मांतरित किया जाना असहनीय है। प्रशासन इसमें लिप्त सभी कुकर्मियों को अविलंब गिरफ्तार करे और धर्मांतरण पर अंकुश लगाए। मालूम हो कि प्रबल प्रताप सिंह जूदेव धर्मांतरित लोगों का घर वापसी और धर्मांतरण के खिलाफ लगातार जागरूकता फैलाते रहे हैं। इसके बावजूद धर्मांतरण रुकने का नाम नहीं ले रहा।

इसके अलावा बीजेपी सांसद गोमती राय ने मामले में कार्रवाई नहीं होने पर धरने पर बैठने की धमकी दी है। घांसी समाज के प्रदेश अध्यक्ष देवधन नायक ने कहा कि दलित समाज रीति- रिवाजों व परंपराओं का अपमान है। कार्रवाई नहीं होती है तो समाज आंदोलन करेगा।

इस पूरे मामले में बताया जा रहा है कि ग्राम सन्ना नगरटोली निवासी चितरंजन सोनवानी हिंदू धर्म के घांसी समाज का है। उसने पिछले करीब 10 से 12 वर्ष पहले डुमरकोना के हर्राडिपा गाँव की एक मुस्लिम महिला से लव-मैरिज करते हुए हिंदू रीति-रिवाज से शादी की थी। दोनों हिंदू रीति रिवाज से जीवन-यापन कर रहे थे।

सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था, लेकिन पिछले साल नवंबर में जब उसकी पत्नी बच्चों के साथ मायके गई तो वहाँ उसकी माँ और मायके वालों ने उसके बेटे का खतना करवा कर इस्लाम में धर्मांतरित करा दिया। मायके से वापस लौटने के बाद जब बच्चे के पिता को इस बात की जानकारी हुई तो मामला बिगड़ गया। यह भी बताया जा रहा है कि पूरे परिवार को मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए पूर्व में भी कई तरह का प्रलोभन दिया गया था। इसकी खबर पिता और समाज को लगी तो सन्ना में लगातार बैठकों का सिलसिला जारी हो गया। आक्रोशित समाज के साथ शिकायकर्ता थाना पहुँच गया और पूरे मामले की लिखित में शिकायत दर्ज करवाई।

शिकायतकर्ता पिता ने आवेदन में लिखा है, “मैं चितरंजन (टिडु) सोनवानी पिता दामडे सोनवानी जाति घासी ग्राम पंचायत सन्ना का स्थाई निवासी हूँ। निवेदन है कि मैं ग्राम सन्ना में रहता हूँ, हिंदू धर्म का पालन करता हूँ। आज से लगभग 10 वर्ष पूर्व मेरा शादी हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार डुमरकोना हर्राडिपा निवासी रेशमा बेगम के साथ हुई है। उसके बाद से हम लोग हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार सन्ना में जीव-यापन कर रहे थे। हमारे दाम्पत्य सम्बंध से दो बच्चे हैं, जिनका नाम सौरभ सोनवानी उम्र 8 वर्ष एवं द्वितीय पुत्री सानिया सोनवानी उम्र 6 वर्ष है।”

शिकायत में आगे कहा गया है, “मेरे बड़े पुत्र सौरभ सोनवानी उम्र 8 वर्ष को मेरी बीवी रेश्मा बेगम द्वारा मायके ले जाकर एवं मायके पक्ष के कुछ लोगों के साथ मिलकर माह नवम्बर में आस्ता सरडिह ले जाकर वहाँ से अम्बांधपुर ले जाया गया और वहाँ मेरे पुत्र को मेरे मर्जी के खिलाफ इस्लाम धर्म में धर्मान्तरण कराने के उद्देश्य से उसका खतना कर दिया गया है, जिसकी जानकारी मुझे बाद में हुुई। महोदय ज्ञात हो कि मेरे ससुराल वालों के द्वारा मेरे विवाह के पश्चात से मुझे लगातार मुझे इस्लाम धर्म स्वीकार करने का दबाव बनाया जाता रहा है। इस हेतु मुझे कई प्रलोभन भी दिए जाते रहे हैं, जिसमें पिकअप गाड़ी देने की बात कही गई थ, लेकिन मैं इस्लाम धर्म स्वीकार करने के पक्ष में बिल्कुल तैयार नहीं था और नहीं हूँ। इसी कारण से मेरी बीबी रेश्मा बेगम और उसके मायके पक्ष भाई वगैरह मिलकर मेरे नाबालिग पुत्र सौरभ सोनवानी का इस्लाम धर्म में धर्मान्तरण करा दिया। अतः श्रीमान से निवेदन है कि उक्त सम्बन्ध में जाँच कर दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही करने की कृपा करें।”

मामले को लेकर थाने में आज समाज के दर्जनों महिला पुरुष आए थे और उन्होंने कारवाई की माँग की है। सन्ना थाना प्रभारी ने बताया कि सोमवार (10 जनवरी 2022) को इस पूरे मामले की शिकायत हुई है। मामले की जाँच की जा रही है। एक वीडियो में पीड़ित बच्चे ने बताया है कि उसकी नानी उसे मेला दिखाने के बहाने लेकर गई थी।

‘सायना ने देश के लिए मेडल जीता… सिद्धार्थ ने क्या किया’: बेटी पर आपत्तिजनक कमेंट के बाद हरवीर सिंह नेहवाल का सवाल

सायना नेहवाल पर आपत्तिजनक कमेंट करके एक्टर सिद्धार्थ ने जो अपनी भद्द पिटवाई है उसके बाद अब सायना नेहवाल के पिता ने भी इस मामले पर बयान जारी किया है। टाइम्स नाऊ से बात करते हुए हरवीर सिंह नेहवाल ने एक्टर पर निशाना साधते हुए सीधा सवाल किया कि जिस समय सायना देश के लिए बैडमिंटन कोर्ट में मेडल जीत रही थीं, उस समय एक्टर की ओर से देश के लिए क्या योगदान दिया जा रहा था।

उन्होंने कहा, “मुझे बहुत बुरा लगा जब उसने मेरी बेटी के लिए ऐसे शब्द का इस्तेमाल किया। उसने (सिद्धार्थ ने) देश के लिए क्या किया है। मेरी बेटी ने मेडल जीते। भारत का नाम रौशन किया।” वह कहते हैं, “मैंने हमेशा विश्वास किया कि भारत एक महान समाज है और सायना के पास पत्रकारों का व खेल हस्तियों का समर्थन है क्योंकि ये लोग जानते हैं कि एक खिलाड़ी किस संघर्ष से गुजरता है।”

बता दें कि सायना नेहवाल पर कमेंट करने के कारण जगह-जगह सिद्धार्थ की बेईज्जती हो रही है। हाल में पूर्व खेल मंत्री किरण रिजिजू ने सायना के बचाव में उन्हें एक ओलंपिक मेडलिस्ट होने के अलावा एक राष्ट्रवादी करार दिया। सिद्धार्थ के लिए उन्होंने कहा कि ऐसे घटिया कमेंट करना वो भी ऐसी महान शख्सियत पर सिर्फ नीच मानसिकता को दर्शाता है।

नेहवाल के अपमान के बाद उनके समर्थन में सदगुरु ने भी बयान दिया है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “सायना नेहवाल राष्ट्र का सम्मान हैं। बेहद घटिया और घिनौना, हम सार्वजनिक बातचीत को किस स्तर तक ले जा रहे हैं।”

बता दें कि इससे पहले सिद्धार्थ की भद्दी टिप्पणी पर सायना ने खुद सीएनएन से बातचीत में कहा था, “मुझे नहीं पता कि सिद्धार्थ का क्या कहना था। मैं उसे एक्टर के तौर पर पसंद करती थी। लेकिन ये अच्छा नहीं था। वो अपनी बात को अच्छे शब्दों के साथ भी बता सकता था। मगर ये ट्विटर है मुझे लगता है कि यहाँ ऐसे शब्द और कमेंट से ही नोटिस होते हैं लोग। राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस संबंध में पुलिस और ट्विटर को नोटिस भेजा है।” 

उल्लेखनीय है कि सिद्धार्थ ने सायना नेहवाल के लिए किए गए अपने ट्वीट में सेक्सुअल टिप्पणी कर उनका मजाक उड़ाया था। पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सायना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में हुई चूक के बाद अपने ट्विटर पर एक ट्वीट किया और घटना की निंदा की। इसी ट्वीट पर सिद्धार्थ ने उन्हें लिखा, “दुनिया की छोटी कॉक चैंपियन…ईश्वर का शुक्र है हमारे पास भारत के रक्षक हैं।”

‘लाउडस्पीकर से अजान’ पर रोक को लेकर इंदौर में वकील आए आगे, कहा- मस्जिदों से जानलेवा ध्वनि प्रदूषण, आम जनता पीड़ित

मध्य प्रदेश के इंदौर में वकीलों ने प्रशासन का ध्यान मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर और उससे होने वाली समस्याओं की ओर खींचा है। इस संबंध में ज्ञापन सौंपते हुए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक की माँग की गई है। कहा गया है कि ये लाउडस्पीकर बिना किसी कानूनी इजाजत के लगाए गए हैं। इनसे होने वाला ध्वनि प्रदूषण जानलेवा है और इससे आम लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।

सोमवार (10 जनवरी 2022) को इस संबंध में कमिश्नर को सौंपे गए ज्ञापन पर 300 वकीलों ने हस्ताक्षर किए हैं। इसमें कहा गया है कि इंदौर स्वच्छता के मामले में देश में नंबर वन है। अब शहर को ध्वनि प्रदूषण रहित बनाने की जरूरत है। वकीलों के मुताबिक, शहर की घनी बसाहट वाली जगहों में मस्जिदों से दिन में कई-कई बार लाउडस्पीकर से तेज आवाज में अजान की जाती है। इससे आम जनता को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। दावा है कि मस्जिदों से ध्वनि के मानकों से कहीं अधिक तेजी के साथ प्रदूषण किया जा रहा है।

प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन

वकीलों का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 19 (1) A और अनुच्छेद 21 को ध्वनि प्रदूषण से जान के खतरे के तौर पर माना गया है। इसके अलावा अनुच्छेद 51 A (G) में भी व्यक्ति के मौलिक कर्तव्यों के तौर पर पर्यावरण संरक्षण को बताया गया है। इसमें मौलाना मुफ्ती सईद बनाम पश्चिम बंगाल सरकार के मामले में कोलकाता हाई कोर्ट (Kolkata high court) के फैसले का भी जिक्र किया गया है, जिसमें हाई कोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण के मसले पर कहा था कि प्रत्येक व्यक्ति को उसके धर्म का पालन करने का अधिकार तो है, लेकिन इससे उसे ध्वनि प्रदूषण फैलाने का अधिकार नहीं मिल जाता है।

ज्ञापन में कहा गया है कि IPC की धारा 268 के तहत ध्वनि प्रदूषण फैलाने को पब्लिक न्यूसेंस (सार्वजनिक उपद्रव) माना गया है। वहीं IPC की धारा 290 में इसको लेकर सजा का भी प्रावधान किया गया है। धारा 135 के अंतर्गत इस मामले में कार्रवाई का अधिकार मजिस्ट्रेट के पास होता है, लेकिन इंदौर में कमिश्नरी व्यवस्था होने के कारण इसका पावर कमिश्नर के पास है।

प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन

सऊदी अरब में बैन है लाउड स्पीकर से अजान

वकीलों ने सऊदी अरब (Saudi Arab) का जिक्र करते हुए कहा है कि वहाँ 94,000 मस्जिदें हैं, लेकिन सऊदी के सांस्कृतिक मंत्रालय (culture ministry) ने इबादत के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगा रखी है। यह रोक शोर कम करने के लिए लगाई गई है।

240 सीटों के साथ UP में फिर से योगी सरकार, 5 में से 4 राज्यों में BJP को बहुमत: सर्वे में राम मंदिर और काशी कॉरिडोर से पब्लिक गदगद

‘टाइम्स नाउ’ और ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ के ओपिनियन पोल्स में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ की सत्ता में वापसी तय दिख रही है। जहाँ ‘टाइम्स नाउ’ के हिसाब से भाजपा को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में 227-254 सीटें मिलने का अनुमान है, ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ ने पार्टी को 240 सीटें मिलने का अंदेशा जताया है। समाजवादी पार्टी को ‘TN नवभारत’ के ओपिनियन पोल में 143 और मायावती की बसपा को 10 सीटें मिलती दिख रही हैं।

वहीं वोट प्रतिशत के मामले में भी भाजपा का ही बोलबाला दिखाया जा रहा है। चैनल द्वारा किए गए ओपिनियन पोल की मानें तो भाजपा 39.4% वोटों के साथ पहले नंबर पर रहेगी और अखिलेश यादव की सपा 34.6% वोट के साथ दूसरे नंबर पर। बसपा को 12.9% और कॉन्ग्रेस को 6.9% वोट मिलता दिखाया गया है। कॉन्ग्रेस को इस ओपिनियन पोल में महज 8 सीट ही दी गई है, जो दिखाता है कि पार्टी की दुर्गति बनी रहेगी। कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रचार की कमान प्रियंका गाँधी संभाल रही हैं।

वहीं अगर उत्तराखंड की बात करें तो TNN के ओपिनियन पोल में यहाँ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक बड़े बहुमत के साथ सत्ता में लौटते दिख रहे हैं। पहाड़ी राज्य में भाजपा को 48 और कॉन्ग्रेस को 14 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं। वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) भी राज्य में अपना खाता खोलेगी और उसे 7 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं। इस तरह भाजपा यहाँ दो तिहाई बहुमत से सत्ता में वापस आती दिख रही है। पार्टी को पिछले एक साल में 3 बार मुख्यमंत्री का बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

सबसे चौंकाने वाले नतीजे पंजाब के दिखाए जा रहे हैं, जहाँ AAP की सरकार बनती हुई दिख रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी को यहाँ 56 सीटों पर जीत मिलते हुए दिखाया गया है, जबकि कॉन्ग्रेस 44 पर रह जाएगी। ‘शिरोमणि अकाली दल (SAD)’ को 13 और भाजपा को महंत 2 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। गोवा में भी AAP 10 सीटें जीतते हुए दिख रही है, जबकि 20 सीटों के साथ भाजपा बहुमत प्राप्त करती हुई दिख रही है।

इस ओपिनियन पोल की मानें तो मणिपुर में भी भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता में वापसी करेगा। वहीं ‘टाइम्स नाउ’ के हिसाब से 57.84% लोगों का कहना है कि राम मंदिर और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण से भाजपा को फायदा होगा, जबकि 36.73% लोग इसके उलट सोच रखते हैं। जिस पश्चिमी उत्तर प्रदेश को ‘जाटलैंड’ कहा जाता है और जहाँ किसान आंदोलन का असर था, वहाँ भी भाजपा को 37.61% वोट मिलते दिख रहे हैं। 46.32% लोगों ने कहा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार किसान विरोधी नहीं है।

PM मोदी की सुरक्षा चूक में पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार का क्या था रोल: अब NIA से जाँच कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की सुरक्षा चूक के मामले में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) द्वारा जाँच कमेटी गठित किए जाने के बाद एक और जनहित याचिका (PIL) शीर्ष अदालत में दायर की गई है। इसमें पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Chief Minister Charanjit Singh Channi) और राज्य के तत्कालीन डीजीपी (DGP) समेत दूसरे सरकारी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक एक्शन लेने की माँग की गई है।

रिपब्लिक टीवी की खबर के मुताबिक, सर्वोच्च अदालत में यह याचिका 7 जनवरी 2022 (शुक्रवार) को वकील नीरज कुमार ने दायर की थी। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले की जाँच आतंकवाद के एंगल और पंजाब पुलिस और कॉन्ग्रेस सरकार की कथित भूमिका की राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) से करवाने की माँग की है।

याचिका में इस बात को प्रमुखता से उठाया गया है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला फँसा था तो उस संकट के समय पंजाब सरकार की ओर से कोई सहयोग नहीं किया गया। याचिका में कहा गया है, “यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक का प्रधानमंत्री की अगवानी और उनके आधिकारिक कार्यक्रमों से दूर रहने का इरादा था। यह जानबूझकर उनकी सुरक्षा को खतरे में डालने की साजिश का एक हिस्सा है।”

याचिका में पंजाब सरकार पर आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शनकारियों को जान-बूझ कर पीएम मोदी के काफिले तक पहुँचने दिया गया। ये राज्य तंत्र और राज्य की राजनीतिक स्थापना द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा का गंभीर और अक्षम्य उल्लंघन था।

सोमवार (10 जनवरी, 2022) को पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक मामले की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक रिटायर्ड जज के नेतृत्व में एक समिति बनाने का निर्णय लिया था। इस कमिटी में चंडीगढ़ के डीजीपी, NIA के आईजी, पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल और पंजाब के ADGP (सिक्योरिटी) को शामिल किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि 5 जनवरी 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे के दौरान फिरोजपुर जाते वक्त उनके काफिले को हुसैनीवाला के एक फ्लाईओवर पर प्रदर्शनकारियों ने रोक दिया था। वहाँ तकरीबन 20 मिनट तक पीएम का काफिला फँसा रहा था।

बेकरी में अभिषेक का गला घोंटा, लाश को बेडशीट में लपेटा-थैली में डाल मंदिर के पास फेंका : 5 गिरफ्तार, नाम: अफजल, राशिद, मोहम्मद…

पिछले दिनों दिल्ली पुलिस को इंद्रलोक के तिकोना पार्क स्थित मंदिर के पास एक लाश मिली थी। मृतक की पहचान अभिषेक (20) के तौर पर हुई थी। उस पर चोरी के कई मामले दर्ज थे। अब इस मामले में पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान मुख्य आरोपित अफजल अंसारी (45), उसके भाई सवजल अंसारी (38), सहयोगी राशिद अंसारी (30) मोहम्मद इसराफिल (20) और अबरार अंसारी (27) के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपितों के पास से वारदात में इस्तेमाल स्कूटर और यमुना नदी में फेंका गया मृतक का मोबाइल बरामद कर लिया है।

अभिषेक की हत्या 6 जनवरी को की गई थी। उसके बाद उसकी लाश को बेडशीट में लपेट पॉलिथीन की थैली में डाला गया था। फिर स्कूटर की मदद से उसे मंदिर के पास सड़क किनारे फेंक दिया गया।

चोरी के लैपटॉप, ब्लैकमेल

अभिषेक के परिजनों के साथ पूछताछ के दौरान पुलिस को आरोपितों के साथ उसके विवाद के बारे में पता चला। इसके बाद छानबीन करती हुई पुलिस पदम नगर स्थित आरोपित की बेकरी तक पहुँच गई। जिस चादर में लिपटा हुआ अभिषेक का शव मिला था, उसका कुछ हिस्सा व पॉलिथीन बेकरी से बरामद किया गया। इसके बाद पूछताछ करने पर बेकरी मालिक अफजल अंसारी ने अभिषेक की हत्या की बात कबूल कर ली। अफजल से पूछताछ के बाद बाकी आरोपितों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। अफजल ने बताया कि एक साल पहले उसने अभिषेक से 5-5 हजार रुपए में चोरी के दो लैपटॉप खरीदे थे। इसके बाद अभिषेक ने चोरी का माल खरीदने की बात कर अफजल को धमकाना शुरू कर दिया था। वह धीरे-धीरे एक लाख रुपए उनसे ले चुका था। छह जनवरी को वह बीस हजार रुपए की डिमांड कर रहा था। 

शव को चादर में लपेट ठिकाने लगाया

घटना के वक़्त खजूरी में बेकरी चलाने वाला अफजल का भाई सवजल भी मौके पर था। पहले अभिषेक को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन वह नहीं मना। सभी ने मिलकर उसकी बेकरी के ही दूसरे कमरे में गला घोंटकर हत्या कर दी। बाद में शव को चादर में लपेट पॉलिथीन की थैली में डाला। फिर स्कूटर की मदद से ठिकाने लगा दिया। खजूरी जाते समय आरोपित सवजल ने अभिषेक का मोबाइल यमुना में फेंक दिया। पुलिस ने स्कूटी और मृतक का मोबाइल बरामद कर लिया है। अन्य आरोपित राशिद, इसराफिल और अबरार ने हत्या में सहयोग किया।

अभिषेक चोरी व लूटपाट के 20 मामलों में शामिल

उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त सागर सिंह कलसी के अनुसार सात जनवरी को इंद्रलोक इलाके में चादर में लिपटा शव बरामद हुआ था। मृतक के गले व हाथ पर चोट के निशान थे। सराय रोहिल्ला थाना पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी। जाँच के दौरान मृतक की शिनाख्त प्रताप नगर निवासी अभिषेक के रूप में हुई। छानबीन में पता चला कि आरोपित अभिषेक चोरी और लूटपाट के 20 मामलों में शामिल रहा था।