Home Blog Page 3074

अशरफ ने संपत्ति के लिए प्रेमिका के वृद्ध पिता की कुल्हाड़ी से की हत्या: परिवार में अकेला पुरुष था 65 वर्षीय मृतक, पंजाब पुलिस ने किया अरेस्ट

पंजाब के लुधियाना से एक दिल को दहलाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक मुस्लिम शख्स ने अपनी प्रेमिका के 65 वर्षीय वृद्ध पिता की संपत्ति को हड़पने के लिए कुल्हाड़ी मारकर उसकी हत्या कर दी। आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित की पहचान 38 वर्षीय अशरफ अली के रूप में हुई है और वह मलेरकोटला में फोटो स्टूडियो चलाता है। उसने बुजुर्ग शिंदर सिंह का घर हथियाने के लिए उसकी हत्या की थी।

जानकारी के मुताबिक, लुधियाना के देहलो गाँव का निवासी शिंदर सिंह वन विभाग में दिहाड़ी मजदूर करते थे। मलेरकोटला का रहने वाला अशरफ अली उनके घर आया करता था। इसी दौरान अशरफ ने उनकी बेटी को फाँस लिया। मृतक की बेटी अपने पति से अलग हो चुकी थी और पिता के साथ ही रहती थी। इसी आन-जान के दौरान दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए।

इस रिश्ते ​की जानकारी जब मृतक वृद्ध को हुई तो उन्होंने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। पति से अलग हो चुकी थी मृतक की बेटी अशरफ के साथ निकाह करना चाहती थी। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, वह उसके साथ अलग घर में रहना चाहती थी, लेकिन आरोपित की नजर उसके परिवार के घर पर थी।

रिपोर्ट में एक पुलिस अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि शिंदर के परिवार में चार लोग थे, लेकिन मृतक अपने परिवार में अकेले पुरुष थे। आरोपित अशरफ ने सोचा कि अगर उन्हें वह रास्ते से हटा देगा तो इस परिवार की संपत्ति पर उसका आसानी से कब्जा हो जाएगा।

मृतक बुजुर्ग 23 दिसंबर को बुटाहारी नहर के किनारे पेड़ों की पेंटिंग करने के लिए घर से निकला था, तभी अशरफ मौके पर पहुँचा और उसके साथ शराब पीने लगा। बाद में अशरफ ने वृद्ध पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया, जिसके कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। अगले दिन लोगों को नहर के पास एक बुजुर्ग का शव मिला। पहचान करने के बाद आरोपित ने मृतक की बेटियों के साथ मिलकर उसका अंतिम संस्कार किया, ताकि किसी को भी उस पर शक ना हो। हालाँकि, बाद में वह घबराकर वहाँ से भाग गया। इस पर लोगों को शक हुआ और उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

‘बाबर की तरह ओवैसी का भी नाम और निशान मिट जाएगा’: तेलंगाना में CM सरमा की ललकार – नए भारत में ओवैसी-औरंगजेब की जगह नहीं

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि भारत को कोई रोकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि जैसे अनुच्छेद-370 ख़त्म हो गया और राम मंदिर के निर्माण का कार्य शुरू हो गया, तेलंगाना में भी निजाम का नाम और निशान मिट जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि ओवैसी का भी नाम और निशान मिट जाएगा। उन्होंने कहा कि वो दिन ज्यादा दूर नहीं है, क्योंकि भारत अब जाग उठा है। असम के सीएम ने कहा कि भारत अब उन नेताओं को मानने के लिए तैयार नहीं है, जो छद्म सेक्युलर राजनीति करते हैं।

हिमंता बिस्वा सरमा ने तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में आयोजित एक रैली में ये बात कही। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास हमें बताता है कि बाबर, औरंगजेब और निजाम के दिन ज्यादा दिन नहीं चलते। असम सीएम ने कहा कि वो इस बात को लेकर निश्चित हैं कि निजाम की विरासत का अंत होगा और हैदराबाद में भारतीय संस्कृति पर आधारित एक नई सभ्यता का विकास होगा। बता दें कि हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी तेलंगाना पहुँचे थे।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस का भी कार्यक्रम हैदराबाद में प्रस्तावित है। वारंगल में सीएम सरमा ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री केसीआर ने 2 लाख नौकरी का वादा किया था, लेकिन अब वो भूल गए। उन्होंने भाजपा की सरकार बनने पर एक साल में 1 लाख नौकरी का शत-प्रतिशत वादा किया। उन्होंने कहा कि सरकार में वैकेंसी के बावजूद नौकरी नहीं जारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि केसीआर अपने बेटे के लिए समर्पित हैं, जबकि ‘राजा’ का कोई बेटा नहीं होता।

उन्होंने कहा, “लाखों सरकारी कर्मचारी तेलंगाना की TRS सरकार के खिलाफ है। पुलिस आपके समर्थन में है, लेकिन उसे लेकर आपका राज़ नहीं चलेगा। जब भाजपा की सरकार बनेगी तो पुलिस भाजपा के साथ आ जाएगी। आपकी दोस्त जनता है, लेकिन उसके साथ आप गद्दारी कर रहे। बाबर जैसे ख़त्म हो गया, वैसे ही ओवैसी भी ख़त्म हो जाएगा। 2023 में केसीआर की बात सुनने वाला कोई नहीं होगा। हमें एक नए भारत के निर्माण का शपथ लेना है, जहाँ किसी ओवैसी-औरंगजेब की जगह नहीं होगी।”

अजमेर में 100+ छात्राओं का बलात्कार: कॉन्ग्रेसियों और दरगाह के खादिमों की करतूत की सज़ा कब? 30 साल हो गए, कई अब भी फरार

राजस्थान (Rajasthan) के अजमेर शहर में आज से 30 साल पहले 1992 में एक वीभत्स सेक्स स्कैंडल हुआ था, जिसे ‘अजमेर सेक्स स्कैंडल’ के नाम से जाना जाता है। इस घटना ने समूचे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस घटना में एक गर्ल्स स्कूल की 100 से अधिक स्कूली लड़कियों की अश्लील तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल कर उनका यौन शोषण किया गया था। इस कांड का असली गुनाहगार कॉन्ग्रेस नेता और अजमेर शरीफ दरागाह का खादिम था। मास्टरमाइंड था अजमेर शहर के यूथ कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष फारुक चिश्ती, नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपितों ने सबसे पहले एक बिजनेसमैन के बेटे के साथ कुकर्म कर उसकी अश्लील तस्वीर उतारी और उसे अपनी गर्लफ्रेंड को लाने के लिए बाध्य किया। उसकी गर्लफ्रेंड से रेप करने के बाद उसकी भी अश्लील तस्वीर उतारी गई और उसे भी अपनी सहेलियों या दूसरी लड़कियों को लाने के लिए बाध्य किया गया। इसी तरह मजबूर होकर आने वाली हर लड़की का रेप किया जाता और उसे अपनी सहेली को लाने के लिए ब्लैकमेल किया जाता। इस तरह एक चेन बनाते हुए 100 से अधिक रसूखदार घरानों की हिंदू लड़कियों का यौन शोषण किया गया।

पीड़ितों में कई बड़े-बड़े अधिकारियों और शहर के नामचीन घरानों की लड़कियाँ थीं। बताया जाता है कि इस दौरान बदनामी के डर से कई लड़कियों ने आत्महत्या कर ली थी। 30 साल पुराने इस केस में संपूर्ण न्याय मिलना अभी भी बाकी है। हालाँकि, इस कांड से जुड़े 10 दोषी तो जेल की सलाखों के पीछे पहुँच चुके हैं, लेकिन कई अभी भी बाहर घूम रहे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरो सिंह शेखावत की सरकार ने इसकी जाँच सीबी-सीआईडी को सौंप दी। शुरुआत में 18 आरोपितों, जिनमें फारूक चिश्ती (तत्कालीन यूथ कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष), हरीश दोलानी, अनवर चिश्ती (तत्कालीन यूथ कॉन्ग्रेस का ज्वाइंट सेक्रेटरी), नफीस चिश्ती (तत्कालीन यूथ कॉन्ग्रेस का वाइस प्रेसीडेंट), पुरुषोत्तम उर्फ बबली, इकबाल भाटी, कैलाश सोनी, सलीम चिश्ती, सोहैल गनी, अल्मास महाराज, जमीर हुसैन, इशरत अली, मोइजुल्लाह उर्फ पूतन इलाहाबादी, परवेज अंसारी, नसीम उर्फ टारजन, महेश लोदानी, शम्शू उर्फ माराडोना, जऊर चिश्ती के खिलाफ जाँच शुरू की गई थी। इस केस में 12 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसमें से 8 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

उल्लेखनीय है कि जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद एक आरोपित पुरुषोत्तम उर्फ बबली ने आत्महत्या कर ली। नसीम उर्फ टारजन तो जमानत पर बाहर आते ही फरार हो गया था। 2010 में पुलिस ने उसे फिर से पकड़ा। मास्टरमाइंड फारूक चिश्ती को 2007 में सजी सुनाई गई थी, लेकिन उसे सिजोफ्रेनिया की बीमारी के बाद मेंटल घोषित कर दिया गया।

नफीस को 2003 में अरेस्ट किया गया था, लेकिन अब वो बेल पर बाहर घूम रहा है। इकबाल भाटी भी बेल पर बाहर है। सलीम चिश्ती को उस घटना के 20 साल बाद 2012 में गिरफ्तार किया गया था। उस दौरान वह बुर्के में पकड़ा गया था, लेकिन बेल पर वह भी बाहर है। सोहेल गनी चिश्ती ने साल 2018 में आत्मसमर्पण किया था और अब बेल पर बाहर है, जबकि अल्मास महाराज के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुआ है।

पुलिस ने इस केस की जाँच के बाद सप्लीमेंट्री चालान पेश नहीं किया था। इस कारण गवाहों को बार-बार कोर्ट में गवाही देने के लिए आना पड़ा। इसी गलती के कारण यह केस आज भी खींच रहा है।

क्या है मामला?

90 के दशक में अजमेर यूथ कॉन्ग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष फारुक चिश्ती, नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती ने यह घिनौना कुकृत्य किया था। ये लोग तब राजनीतिक और धार्मिक रूप से इतने प्रभावशाली थे कि इनके खिलाफ कोई मुँह खोलने को तैयार नहीं होता था। जानकारी होने के बावजूद पुलिस कार्रवाई करने से इसलिए बच रही थी कि शहर में दंगा ना भड़क जाए। ये खुद को अजमेर शरीफ के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के खादिम थे और खुद को चिश्ती का वंशज बताते थे। खास बात ये थी कि पीड़िताओं में हिंदू लड़कियाँ ही थीं, जबकि अधिकांश आरोपित मुस्लिम थे।

अमेरिका में सिख कैब ड्राइवर को घूसों से पीटा, पगड़ी नोच कर फेंक दिया: Video आया सामने, भारत ने दर्ज कराई कड़ी आपत्ति

अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित जॉन एफ केनेडी (JFK) एयरपोर्ट पर एक सिख ड्राइवर पर हमला हुआ है। अज्ञात हमलावर ने भारतीय मूल के व्यक्ति को गाली भी दी। साथ ही उक्त सिख ड्राइवर की पगड़ी भी छीन कर फेंक दी। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी शेयर हो रहा है। इसे ‘हेट क्राइम’ और रेसिज्म से जोड़ कर भी देखा जा रहा है। सिख एक्टिविस्ट नवजोत पाल कौर ने 26 सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। 4 जनवरी, 2022 को शेयर किए गए वीडियो के बारे में उन्होंने बताया कि एक राहगीर ने इसे शूट किया था।

इसमें अज्ञात हमलावर को देखा जा सकता है कि वो सिख ड्राइवर को गाली देते हुए न सिर्फ उसे लगातार पीट रहा है, बल्कि उसकी पगड़ी भी उखाड़ रहा है। हमलावर ने भारतीय मूल के व्यक्ति को कई मुक्के जड़े। नवजोत पाल कौर ने कहा कि वीडियो के राइट्स उनके पास नहीं हैं, लेकिन वो ये दिखाना चाहती हैं कि सिख कैब ड्राइवरों पर यहाँ लगातार हमले होते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी समाज में इस तरह की घृणा आज भी कायम है। न्यूयॉर्क में भारत के काउंसलेट जनरल ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।

उन्होंने वीडियो को काफी व्यथित करने वाला बताते हुए कहा कि उन्होंने अमेरिकी प्रशासन से इस वीडियो के सम्बन्ध में कार्रवाई करने का आग्रह किया है। इस हिंसक घटना के कारणों का पता नहीं चल सका है। इसी तरह 2019 में वाशिंगटन में एक सिख व्यक्ति पर हमले का वीडियो सामने आया था। 2017 में एक 25 वर्षीय सिख कैब ड्राइवर को शराब के नशे में कुछ लोगों ने पीटा था और उसकी पगड़ी छीन कर फेंक दी थी। ताज़ा घटना के सम्बन्ध में अमेरिकी सरकार ने भी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

अमेरिका ने कहा कि दोषियों को सज़ा दिला कर इस मामले में न्याय किया जाएगा। अमेरिका के ‘ब्यूरो ऑफ साउथ एंड सेन्ट्रल एशियन अफेयर्स (SCA)’ ने कहा कि वो इस तरह की ‘हेट क्राइम्स’ की निंदा करता है और वो विविधता ही है जो अमेरिका को महान बनाता है। सिख समुदाय के कई लोगों ने इस घटना की निंदा की है। चूँकि इससे पहले भी इस तरह की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, ऐसे में लोग पूछ रहे हैं कि अमेरिका में ये रेसिज्म और हेट क्राइम्स कब रुकेंगी?

‘रेप के बाद समझौता से महिला का सम्मान नष्ट’: पीड़िता से शादी के बाद आरोपित अधिकारी का केस रद्द करने की माँग, HC ने इनकार किया

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi high court) ने रेप (Rape) के बाद पीड़िता से शादी करने के बाद दर्ज केस को रद्द करने की माँग करने वाली आरोपित की याचिका को खारिज करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि रेप महिला के शरीर के खिलाफ किया गया जघन्य अपराध है। एक महिला अपने शरीर को मंदिर मानती है। समझौता करके केस को रद्द करना महिला के सम्मान को नष्ट करने जैसा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस रजनीश भटनागर ने इस मामले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि रेप का अपराध समझौते के लायक नहीं होता है, क्योंकि इससे ये स्पष्ट नहीं होता है कि उक्त समझौता पीड़िता की सहमति से ही हुआ हो। कोर्ट ने आशंका व्यक्त की कि हो सकता है कि पीड़िता पर समझौते के लिए जबरन दबाव डाला गया हो। ऐसी परिस्थिति में इस समझौते को मानने पर पीड़िता के ऊपर अलग से बोझ बढ़ जाएगा।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “मौजूदा मामले में याचिका दायर करने वाला एक सरकारी कर्मचारी है, जो कि भारत सरकार के सीजीएसटी और कस्टम विभाग में अधीक्षक है। ये एक राजपत्रित पद है। एक सरकारी कर्मचारी से उम्मीद की जाती है कि वो अपने निजी और सार्वजनिक जीवन में उच्च नैतिकता और सत्यनिष्ठा का पालन करेगा और अपने कुकर्मों से पद की प्रतिष्ठा को बदनाम नहीं करेगा।”

अदालत के मुताबिक, एक सरकारी कर्मचारी का समाज के प्रति उत्तरदायित्व होता है। बलात्कार केवल पीड़िता की व्यक्तिगत पहचान को ही नहीं बर्बाद करता, बल्कि यह कई सालों के लिए उसके मानसिक संतुलन को भी बिगाड़ देता है। दुष्कर्म केवल महिला के खिलाफ ही नहीं, समाज के खिलाफ भी बड़ा अपराध है। इसके साथ ही कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुनाए गए कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि रेप, डकैती और हत्या जैसे अपराधों में समझौते को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, रेप पीड़ित महिला की मुलाकात आरोपित से मैट्रिमोनियल वेबसाइट Jeevansathi.com पर हुई थी। पीड़िता द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत में कहा गया है कि आरोपित ने ही साइट पर उससे उसका मोबाइल नंबर माँगा था। इसके बाद धीरे-धीरे दोनों में बातचीत शुरू हुई। आरोपित ने पीड़िता को बताया कि उसकी उम्र 32 साल है। उसकी पहली पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी। फिलहाल, वो सिंगल है। पीड़िता जब उससे शादी की बात करने के लिए गई तो उसने उसका रेप किया। बाद में आरोपित ने पीड़िता के साथ कार में भी रेप किया।

इस घटना के बाद पीड़िता ने पुलिस में शिकायत की। आरोपित के खिलाफ आईपीसी की धारा 376, 323 और 506 के तहत केस दर्ज कर लिया गया, लेकिन बाद में वह थाने गया और पीड़िता से शादी का वादा किया। इसके बाद दोनों ने कोर्ट में हलफनामा देकर कहा कि उन्होंने शादी कर ली है। इसलिए एफआईआर को रद्द कर दिया जाए।

Statue Of Oneness: ओंकारेश्वर में समुद्र तल से 918 फ़ीट ऊँची शंकराचार्य की प्रतिमा, गुरुकुल, संग्रहालय और रिसर्च सेंटर भी

मध्य प्रदेश के खंडवा स्थित ओंकारेश्वर में जगद्गुरु शंकराचार्य की 108 फ़ीट ऊँची प्रतिमा के निर्माण पर कार्य शुरू हो गया है। इसे ‘Statue Of Oneness’ कहा जाएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि जीवन में व्यावहारिक वेदांत कैसे उतारा जाए, इसका भी ये प्रतीक होगा। बहुधातु की इस प्रतिमा के सहारे सौहार्दता का सन्देश दिया जाएगा। ये एक ऐसा महत्वपूर्ण स्थल होगा, जहाँ शंकराचार्य के जीवन के साथ-साथ मठ परंपरा और पर्यावरण संरक्षण की भी जानकारी मिलेगी।

इस सम्बन्ध में ‘आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास’ के सदस्यों ने कई सुझाव दिए हैं, जिन पर मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने अमल करने का आश्वासन दिया है। सीएम चौहान ने इसकी दूसरी बैठक को सम्बोधित भी किया। संतों ने कहा कि ये एक विश्वव्यापी केंद्र बनेगा, जहाँ सभी सम्प्रदायों और आचार्यों को जोड़ा जाएगा। इसे एक दर्शनीय केंद्र बनाया जाएगा, जहाँ लोगों को भी जोड़ा जाएगा। इसके लिए 58.30 हेक्टेयर (143.21 एकड़) भूमि भी उपलब्ध करा दी गई है।

प्रतिमा के लिए अस्थायी मॉडल तैयार करने का कार्य फ़िलहाल चालू है। केन्द्र का मुख्य द्वार जगन्नाथ पुरी मंदिर के द्वार को प्रदर्शित करने वाला होगा। ओंकारेश्वर को इसके बाद एक ‘टेम्पल टाउन’ के रूप में विकसित किया जाएगा। निर्माण के लिए कलात्मक शैली का इस्तेमाल किया जाएगा। एक गुरुकुल का भी निर्माण किया जाएगा। जिस कंपनी ने दुबई स्थित ‘बुर्ज खलीफा’ और केवडिया के ‘स्टेचू ऑफ यूनिटी’ का निर्माण किया है, उसी कंपनी को इसका कार्य भी सौंपा जाएगा।

ओंकारेश्वर में शंकराचार्य प्रतिमा और संग्रहालय परिसर में और क्या-क्या होगा (साभार: पत्रिका)

27 फ़ीट ऊँचे बेस पर ये मूर्ति स्थित होगा, जो कमल के फूल के आकार का होगा। समुद्र के तल से मूर्ति की ऊँचाई 280 मीटर (918 फ़ीट) होगी। प्रतिमा जिस प्लेटफॉर्म पर होगी, उसकी ऊँचाई 54 फ़ीट रखी जाएगी। अंतरराष्ट्रीय शोध केंद्र और समन्वय केंद्र भी बनेगा। सात स्कूल भी इस अद्वैत वेदांत संस्थान के अंतर्गत बनाए जा रहे हैं। संग्रहालय और संस्थान की घोषणा फरवरी 2017 में ही हुई थी। संग्रहालय में थिएटर, नौका विहार और वास्तु विक्रय केंद्र भी होंगे।

टीचर ने हिंदू छात्रा को अल्लाह की इबादत करने के लिए मजबूर किया, स्कूल ने दर्ज करा दिया छवि खराब करने का केस

बेंगलुरु स्थित ऑर्किड इंटरनेशनल स्कूल (Orchid International School) की एक छात्रा के पिता विक्रम सिम्हा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज की गई है। स्कूल ने दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा पर स्कूल को बदनाम करने का आरोप कहा कि उसकी वजह से स्कूल एक बड़े विवाद में फँस गया था। छात्रा ने अपनी मैथ की टीचर पर आरोप लगाया था कि गणित का एक सवाल हल नहीं करने पर सजा के रूप में सबसे बेहतर भगवान अल्लाह की इबादत करने के लिए मजबूर किया था। और इस बारे में किसी को कुछ न बताने के लिए भी बोला था। वहीं, स्कूल ने अपनी शिकायत में छात्रा पर स्कूल की छवि को खराब करने का आरोप लगाते हुए पुलिस से इस मामले की जाँच करने का अनुरोध किया है।

छात्र पर स्कूल की छवि करने का आरोप

शिकायत के अनुसार, “दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली विक्रम सिम्हा की बेटी ने एक वीडियो जारी कर ऑर्किड इंटरनेशनल स्कूल पर मजहबी एजेंडा लागू करने आरोप लगाया था। वीडियो के बारे में स्कूल को 4 जनवरी को दोपहर 02:20 बजे पता चला, जिसके बाद स्कूल के अधिकारियों ने छात्रा से इस बारे में पूछताछ की। छात्रा ने वीडियो को सार्वजनिक करने की बात स्वीकार की है। इसको देखते हुए स्कूल ने छात्रा पर स्कूल को बदनाम करने की शिकायत पुलिस में दर्ज की है। इस घटना से हमारे स्कूल की छवि को काफी नुकसान पहुँचा है, इसलिए हम आपसे इसकी जाँच करने का अनुरोध करते हैं।”

बता दें कि ऑपइंडिया द्वारा 6 जनवरी को इस घटना के बारे में रिपोर्ट किए जाने के बाद हमें ऑर्किड इंटरनेशनल स्कूलों की ओर से शाओली चक्रवर्ती से एक ईमेल प्राप्त हुआ था, जिसमें हमें स्कूल के पिता विक्रम सिम्हा के खिलाफ दर्ज की गई शिकायत के बारे में बताया गया था। वीडियो में छात्रा अपनी टीचर के खिलाफ बोल रही है।

ईमेल में कहा गया है, “स्कूल ने इस मामले की पूरी तरह से जाँच की है और पाया है कि यह आरोप निराधार और पूरी तरह से झूठे हैं। वर्तमान में हमने बच्चों के माता-पिता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। इससे हमारे स्कूल की छवि को नुकसान पहुँचाने वाले इस मामले की पुलिस जाँच कर रही है।” 7 जनवरी को ऑर्किड इंटरनेशनल स्कूलों की ओर से ऑपइंडिया को भेजे गए ईमेल को आप नीचे पढ़ सकते हैं। स्कूल ने हमारे साथ मीको लेआउट पुलिस स्टेशन (Mico Layout police station) (बी.टी.एम.लेआउट), बेंगलुरु में दर्ज कराई गई शिकायत की एक कॉपी साझा की है।

शिकायत की कॉपी

दरअसल, बेंगलुरु इस स्कूल की छात्रा ने आरोप लगाया है कि टीचर ने पूरी क्लास को सजा के रूप में ‘सबसे अच्छे भगवान’ अल्लाह को याद करने के लिए मजबूर किया। विक्रम सिम्हा ने अपनी बेटी का एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें उसने कहा था कि उसे ऑर्किड इंटरनेशनल स्कूल, बीटीएम शाखा, बेंगलुरु में अल्लाह की इबादत करने के लिए उसे मजबूर किया गया था।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में लड़की ने कहा कि उसकी टीचर ने हिंदू छात्रों को अपने दोनों हाथों को कटोरे की तरह जोड़ते हुए अल्लाह की इबादत करने के लिए कहा था। स्कूल का कहना है, “हमने कक्षा के सीसीटीवी फुटेज की जाँच की है और अन्य बच्चों से भी इस बारे में बात की है। उन सभी ने ऐसी किसी भी घटना के होने से इनकार किया है।”

बता दें कि हाल ही में बेंगलुरु के इस स्कूल में एक बच्ची को सजा देने के लिए उससे इस्लामी ढंग से प्रार्थना करवाई गई। कथिततौर पर ऑर्किड इंटरनेशनल स्कूल (Orchid International School) की मैथ टीचर ने छात्रा से एक सवाल हल न होने पर कहा था कि वो अल्लाह के नाम से दुआ पढ़े और इस बारे में किसी को कुछ न बताए। बेंगलुरु स्कूल में ‘शिक्षा जिहाद’ से संबंधी ये मामला विक्रम सिम्हा द्वारा रिकॉर्ड की गई वीडियो के बाद चर्चा में आया जिसमें उनकी बेटी बता रही थी कि कैसे उनकी मैथ टीचर उन्हें हाथों को आधा खोलकर (कटोरे की तरह) अल्लाह से दुआ माँगने के लिए कहती है। 

‘अल्लाह ने सूरज को पैदा किया, मुस्लिम उसका सजदा नहीं कर सकते’: JDU नेता गुलाम रसूल, सूर्य नमस्कार का विरोध

बीजेपी ने बिहार में 12 जनवरी को सूर्य नमस्कार दिवस मनाने का फैसला किया है। इसका विरोध जताते हुए जेडीयू के विधान परिषद सदस्य गुलाम रसूल बलियावी (Gulam Rasool Balyawi) ने बेतुका बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वे इस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले सकते हैं, क्योंकि इस्लाम उन्हें सूर्य नमस्कार की इजाजत नहीं देता है।

गुलाम रसूल बलियावी ने कहा, “सूर्य नमस्कार एक धार्मिक परंपरा है। भारतीय संविधान में धार्मिक मान्यताएँ मानने और ना मानने की पूर्ण स्वतंत्रता है। संविधान में कहा गया है कि जिसे जो मजहब पसंद है, वो उसे अपनाए और उससे जुड़ी मान्यताओं का पालन करे। ऐसे में सूर्य नमस्कार को कोई अपना धार्मिक मुद्दा मानता है तो मानें। इस पर हमें कोई टिप्पणी नहीं करनी।”

जेडीयू एमएलसी ने आगे कहा कि इस्लाम में सिर्फ अल्लाह को ही सजदा करने के योग्य माना गया है। जिस चीज को अल्लाह ने पैदा किया है, हम उसका सजदा नहीं करेंगे। सूरज को भी अल्लाह ने पैदा किया है, इसलिए मुस्लिम उसका सजदा बिल्कुल नहीं करेंगे।

बता दें कि बीते हफ्ते ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने भी 1 से 7 जनवरी के बीच स्कूलों में ‘सूर्य नमस्कार’ आयोजित करने के केंद्र सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई थी। मोदी सरकार के फैसले का विरोध करते हुए बोर्ड ने कहा था, “इस्लाम सूर्य नमस्कार की इजाजत नहीं देता, क्योंकि यह सूर्य पूजा का ही रूप है।”

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने एक बयान जारी कर कहा था, “भारत एक धर्मनिरपेक्ष, बहु धार्मिक और बहु सांस्कृतिक देश है। इन्हीं सिद्धांतों पर हमारा संविधान लिखा गया है। स्कूल पाठ्यक्रमों को भी इसका ध्यान रखकर बनाया गया है। लेकिन यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि वर्तमान सरकार इस सिद्धांत से भटक रही है।”

अवैध मस्जिद निर्माण के विरोध पर हिंसक हुई मुस्लिम भीड़, पुलिस के सामने ही BJP कार्यकर्ताओं पर हमला: गाड़ियाँ तोड़ी, पत्थरबाजी भी

आंध्र प्रदेश के कुर्नूल स्थित बंदी आत्मकूर में मुस्लिम भीड़ ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला बोल दिया। शनिवार (8 जनवरी, 2022) की इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है। इस दौरान श्रीशैलम के भाजपा नेता बुड्डा श्रीकांत रेड्डी भी मौके पर मौजूद थे। इस हमले में कई भाजपा नेता घायल हुए हैं। भाजपा के नेशनल सेक्रेटरी वाई सत्य कुमार ने बताया कि एक अवैध मस्जिद के निर्माण का विरोध करने पर इस घटना को अंजाम दिया गया। आंध्र प्रदेश भाजपा के जनरल सेक्रेटरी विष्णुवर्धन रेड्डी ने भी इस घटना पर बयान जारी किया है।

उन्होंने कहा, “आत्मकूर शहर में अवैध निर्माणों को लेकर भाजपा नेताओं ने राज्य में मुख्यमंत्री जगन रेड्डी की YSRCP सरकार से सवाल पूछे थे। जब वो लोग प्रशासन के सामने अपना विरोध दर्ज करा रहे थे, तभी हिंसक भीड़ ने पुलिस की मौजूदगी में ही उन पर हमला बोल दिया और उनकी गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर डाला। ये शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा इस घटना की निंदा करती है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की माँग करती है। ये हत्या का प्रयास है।”

पार्टी ने इस घटना की निष्पक्ष जाँच की माँग भी की है। आंध्र प्रदेश के DGP का कहना है कि कुर्नूल में कुछ लोग हिंसा भड़काना चाहते थे। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर लोगों को भड़काने वाले के खिलाफ पुलिस कड़ी कार्रवाई करेगी। उन्होंने एसपी को कार्रवाई के निर्देश भी दिए। भाजपा का कहना है कि पार्टी के जिलाध्यक्ष श्रीकांत रेड्डी की हत्या का प्रयास किया गया। पद्मावती स्कूल के पीछे मस्जिद के निर्माण पर हिन्दुओं और मुस्लिमों में भी संघर्ष हुआ है।

मुस्लिम समूह ने पुलिस थाने का भी घेराव किया और भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला बोला। पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी। अभी भी इलाके में भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है।श्रीकांत रेड्डी की कार इस हिंसा में क्षतिग्रस्त हो गई। भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस पर मुस्लिम भीड़ ने पत्थरबाजी भी की। भाजपा की माँग है कि घटना में शामिल लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज हो। एक युवक की मौत की बात भी कही जा रही है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

UP के प्राइवेट स्कूल नहीं बढ़ा सकेंगे फीस: CM योगी का निर्देश, मैनपुरी सैनिक स्कूल का नाम जनरल बिपिन रावत के नाम पर

योगी सरकार (Yogi Government) ने इस साल उत्तर प्रदेश के किसी भी प्राइवेट स्कूल स्कूल को फीस न बढ़ाने का आदेश दिया है। यह कदम कोरोना काल में लोगों पर से महँगाई का बोझ कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। यह आदेश CBSE, CISCI, UP बोर्ड के साथ अभी अन्य सभी बोर्ड द्वारा संचालित प्राइवेट स्कूलों पर लागू होगा। यह लगातार तीसरा वर्ष होगा, जब निजी स्कूल फीस नहीं बढ़ा पाएँगे। यह आदेश 7 जनवरी (शुक्रवार) को जारी हुआ है।

आदेश

माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला द्वारा आदेश में कहा गया है, “अगर कोई निजी स्कूल फीस बढ़ाता है तो उत्तर प्रदेश स्व-वित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अधिनियम, 2018 की धारा-8(1) के तहत गठित जिला शुल्क निर्धारण नियामक समिति से अभिभावक व छात्र इसकी शिकायत करेंगे। साथ ही उस पर कार्रवाई की जाएगी। सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वो सख्त नजर रखें कि कोई प्राइवेट स्कूल फीस न बढ़ा सके।”

जारी आदेश में अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वो इस बात का ध्यान रखें कि छात्रों और उनके अभिभावकों को कोई दिक्कत न होने पाए। इस आदेश की प्रति मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव गृह विभाग, उत्तर प्रदेश शासन को भी भेजी गई है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के सैनिक स्कूल का नाम दिवंगत CDS जनरल बिपिन रावत के नाम पर कर दिया गया है। अब यह स्कूल ‘जनरल बिपिन रावत सैनिक स्कूल’ नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी घोषणा की। इस घोषणा का लोगों ने स्वागत किया और कहा कि जनरल रावत के नाम पर स्कूल होना सम्मान की बात है।