भारत में अगर कोई भगवान श्रीकृष्ण की उपासना करता है उनके भजन गाता है तो आश्चर्य करने वाली कोई बात नहीं है, लेकिन ये आश्चर्य की बात है कि अमेरिका की रहने वाली अच्युत गोपी नाम कृष्ण भक्त अपनी इसी भक्ति के कारण बहुत ही प्रसिद्ध हो गई हैं। दूर-दूर से लोग उनके पास केवल श्रीकृष्ण का भजन सुनने के लिए आते हैं।
ग्रेमी अवार्ड्स के लिए नॉमिनेट हो चुकी अच्युत गोपी हिंदू धर्म को मानती हैं। उनके साथ-साथ उनका परिवार भी भगवान श्रीकृष्ण का भक्त है। गोपी आध्यात्मिक विषयों पर लिखती हैं। वो कहती हैं कि उन्हें गाने लिखने का काफी शौक रहा है। वो अपने भक्ति गीतों के लिए कई सारे पुरस्कार जीत चुकी हैं।
अच्युत गोपी कहती हैं कि उन्होंने अपने जीवन का एक उद्देश्य बना लिया है कि उन्हें भजन कीर्तन के जरिए भगवान की भक्ति करनी है। वो बताती हैं कि बचपन से ही भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अगाध आस्था रही है। इसमें उनका परिवार भी सहयोग करता है। उच्युत ने कहा, “मेरे परिवार और टीचर्स की आशीर्वाद के कारण मैं आज यहाँ तक पहुँची हूँ। मुझे पूरी दुनिया घूमने का मौका मिला। मुझे गाने और लिखने का शौक है।”
अच्युत ने ‘प्रेम माला’ नाम की एक किताब भी लिखी है, जिसके लिए उन्हें आध्यात्म श्रेणी 2020 नेक्स्ट जेनरेशन इंडी बुक अवार्ड भी मिल चुका है।
गोपी के मुताबिक, उन्होंने अपने जीवन में अब तक ध्यान-समाधि और भक्ति गीतों पर कई सारी कार्यशालाएँ आयोजित कर चुकी हैं। इसके कारण उनका जीवन काफी बेहतर हुआ है। उनका मानना है कि कृष्ण भक्ति के कारण अच्छी जिंदगी जीने का मौका मिला है। अच्युत कहती हैं कि इससे अच्छा जीवन कुछ और नहीं हो सकता है।
अच्युत गोपी के वेब पेज का स्क्रीनशॉट
उन्होंने कहा, “अब अपने परिवार के साथ मैंने एनवाईसी समुदाय पर अपना ध्यान केंद्रित किया है और कीर्तन, लेखन व भक्ति योग की अविश्वसनीय रूप से परिवर्तनकारी की सुंदर प्रथाओं में अपना दिल लगा लिया है।”
गौरतलब है कि अच्युत गोपी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर उनकी कृष्ण भक्ति से जुड़े कई सारे वीडियोज उपलब्ध हैं।
तमिलनाडु के कोयम्बटूर में लोगों ने एनवी रामासामी पेरियार की मूर्ति के साथ छेड़छाड़ की है। रविवार (9 जनवरी, 2022) को सुबह मूर्ति क्षतिग्रस्त मिली। ये मूर्ति वेल्लालर स्थित ‘पेरियार स्टडी सेंटर’ के सामने स्थित है। मूर्ति को जूतों की माला भी पहनाई गई थी। साथ ही मूर्ति के सिर पर भगवा पाउडर छींट दिया गया था। इसके बाद स्थानीय लोगों ने राजनीतिक दल द्रविड़ार कझगम (DK) के कार्यकर्ताओं और नेताओं को इसकी सूचना दी। उन्होंने पोदानुर पुलिस थाने को इस सम्बन्ध में सूचित किया।
इसके बाद पुलिसकर्मियों की एक टीम मौके पर पहुँची। DK के कार्यकर्ताओं ने भगवा पाउडर को पेरियार की मूर्ति के सिर पर से हटाया और गले में से जूतों की माला भी हटाई। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने मूर्ति के सामने ही विरोधस्वरूप धरना प्रदर्शन का आयोजन किया। उनकी माँग है कि पुलिस पेरियार की मूर्ति के साथ छेड़छाड़ करने वालों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करे। पुलिस के आश्वासन के बाद DK के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन को रोक दिया।
पुलिस ने आसपास लगे कुछ सर्विलांस कैमरों को खँगाला है। आरोपितों को चिह्नित कर के ट्रैक करने की कोशिश की जा रही है। इस मामले में और जाँच की जा रही है। बता दें कि हिन्दू देवी-देवताओं और ब्राह्मणों के खिलाफ घृणा फैलाने वाले पेरियार को तमिलनाडु में ‘दलित चिंतक’ के रूप में जाना जाता है। जबकि सच्चाई ये है कि पेरियार ने हिन्दुओं के खिलाफ घृणा फैला कर दक्षिण भारत को तोड़ने की कोशिश की और अंग्रेजों का समर्थन कर के गद्दारी की।
अपने से 40 वर्ष छोटी लड़की से शादी करने वाले और हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरें जलाने वाले तमिलनाडु के पेरियार को ‘द्रविड़ आंदोलन’ का जनक माना जाता है। पेरियार के अनुयायियों ने 15 अगस्त, 1947 को काले झंडे लेकर ‘शोक दिवस’ मनाया था। चेन्नई में भी पेरियार की पार्टी के लोग काले कपड़े पहन कर निकले थे। उनका कहना था कि ये आज़ादी ‘सच्ची’ नहीं है। पेरियार द्वारा स्थापित ‘द्रविड़ कझगम’ के मौजूदा अध्यक्ष के वीरामणि तो अभी भी अपनी पार्टी के उस स्टैंड का बचाव करते हैं।
तुगलक मैगजीन की 50वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान पेरियार ईवी रामासामी को लेकर सुपरस्टार रजनीकांत ने कहा था कि पेरियार हिंदू देवी-देवताओं के कट्टर आलोचक थे और उन्होंने 1971 में सलेम में अंधविश्वास उन्मूलन सम्मेलन के दौरान भगवान राम और सीता की आपत्तिजनक तस्वीरें भी दिखाई थीं। लेकिन इसके बाद भी किसी ने पेरियार की आलोचना नहीं की। FIR हुई और मामला अदालत तक पहुँचा, लेकिन सुपरस्टार ने माफ़ी माँगने से साफ़ इनकार कर दिया था।
नाइजीरिया (Nigeria) में आतंकियों ने जमकर कहर बरपाया है। देश के उत्तर पश्चिमी राज्य जाम्फारा में राज्य में 200 लोगों को गोलियों से भून डाला। कहा जा रहा है कि पिछले सप्ताह नाइजारियाई सैनिकों ने इन आतंकियों के ठिकाने पर हमले कर 100 को ढेर कर दिया था, जिसके बाद आतंकियों ने अपने लोगों के मारे जाने का बदला लिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार का कहना है कि आतंकियों के हमलों में 58 लोग मारे गए हैं। लेकिन इस बर्बर हमले में अपनी पत्नी औऱ तीन बच्चों को खोने वाले स्थानीय व्यक्ति उमरारू माकेरी के मुताबिक, 154 लोग दफनाया गया है। लोगों का कहना है कि इस हमले कम से कम 200 लोगों की मौत हुई है। करीब 300 आतंकियों ने 10 गाँवों में हमला किया था।
आतंकियों के हमले से प्रभावित गाँवों में से एक समुदाय के नेता बलाराबे अल्हाजी ने कहा, “हमने हमलों में आतंकियों द्वारा मारे गए कुल 143 लोगों को दफनाया है।” इसी तरह से कुर्फा दन्या गाँव के रहने वाले बबंदी हमीदु ने बताया कि आतंकवादी किसी को भी देखते ही गोली मार रहे थे। हमीदु ने बताया कि 10 गाँवों में 140 से अधिक लोगों को दफनाया गया है। बाकी के शवों की तलाश की जा रही है।
गौरतलब है कि सेना ने सोमवार को जाम्फारा के गुसामी के जंगल और पश्चिमी त्समरे गाँव में कई ठिकानों पर हवाई हमले किए थे, जिसमें 100 से अधिक आतंकियों की मौत हो गई थी। इसमें इनके दो टॉप लीडर्स भी मारे गए थे।
इस घटना को लेकर नाइजीरिया के अबुजा स्थित बीकन कंसल्टिंग के एक सिक्योरिटी एनालिस्ट कबीर अदामू ने एएफपी को बताया कि इस सप्ताह की छापेमारी सैन्य अभियानों के जवाब में हो सकती है। राष्ट्रपति कहा आतंकी
नाइजीरिया के राष्ट्रपति मुहम्मदु बुहारी ने शनिवार को एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा, “डाकुओं द्वारा निर्दोष लोगों पर किए गए ताजा हमले सामूहिक हत्याओं का हताशा भरा कार्य है। ये हमारे सैन्य बलों के दबाव में हैं।” बुधवार को नाइजीरियाई सरकार ने इन डाकुओं को आतंकी करार दिया। अब इनपर समर्थकों के खिलाफ सख्त प्रतिबंध लगाया जा सकेगा। बुहारी ने इस सप्ताह नाइजीरियाई टीवी से कहा था, “हमने उन्हें आतंकवादी करार दिया है। हम उनसे आतंकियों की तरह से निपटने जा रहे हैं।”
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले विवादित छवि वाले इमरान मसूद (Imran Masood) कॉन्ग्रेस का हाथ छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव के इस कदम से प्रियंका गाँधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) के मिशन यूपी को बड़ा झटका लग सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, मसूद ने सार्वजनिक रूप से कहा, “यूपी में यदि बीजेपी को हराना है तो समाजवादी पार्टी के साथ ही आना होगा। सपा ही उत्तर प्रदेश में भाजपा (BJP) को टक्कर दे सकती है।”
इमरान मसूद ने न्यूज 18 से बातचीत में कहा कि वह सोमवार (10 जनवरी 2022) को कार्यकर्ताओं के साथ इस मामले पर बात करेंगे। उसके बाद समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ज्वॉइन करेंगे। इमरान को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) का करीबी माना जाता है, लेकिन अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) से लखनऊ में उनकी मुलाकात से लगभग तय माना जा रहा है कि वह विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Election 2022) समाजवादी पार्टी की तरफ से लड़ने वाले हैं।
मालूम हो कि इमरान मसूद के साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले ‘नरेंद्र मोदी के टुकड़े-टुकड़े‘ करने की धमकी देने वाले बयान पर बड़ा हंगामा हुआ था। इसके बावजूद कॉन्ग्रेस ने उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की चुनाव समिति का हिस्सा बनाया था।
यही नहीं, सोशल मीडिया पर इमरान मसूद का अपनी बीवी के साथ एक समारोह में डांस करने का वीडियो वायरल होने के बाद मुस्लिम संगठनों और मौलानाओं ने उन्हें जमकर फटकार लगाई थी। मौलानाओं ने कहा था कि ऐसा करना इस्लाम के खिलाफ है। इमरान को इस कृत्य के लिए माफी माँगनी होगी। इस वीडियो में कुछ महिलाएँ ‘उड़ें जब-जब जुल्फें तेरी’ गाने पर डांस कर रही थीं, जिनमें इमरान की बीवी भी शामिल थीं। इस वीडियो में बाकी महिलाएँ और उनकी बीवी इमरान को डांस करने के लिए लगातार कह रही थीं।
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलियों ने प्यार में पड़कर नक्सल कैंप छोड़कर भागने के आरोपित अपने ही दो साथियों को जन अदालत लगाकर हत्या कर दी। इन दोनों पर पर पुलिस की मुखबिरी करने का शक था। मारे गए दो नक्सली प्रेमी जोड़े कमलू और मांगी थे। ये दोनों नक्सलियों की मंगलूर एरिया कमेटी से जुड़े हुए थे।
बस्तर रेंज के आईजी पी सुंदरराजन के मुताबिक, गुरुवार (6 जनवरी, 2021) को नक्सलियों ने तीन लोगों की हत्या की थी, जिसमें से ये दो नक्सली थे, जबकि तीसरा एक ग्रामीण था। आईजी ने कहा कि मारे गए नक्सली कमलू पुनेम मिलिशिया प्लाटून कमांडर था, जबकि मांगी मिलिशिया सदस्य थी। तीन लोगों की हत्या के मामले में स्थानीय पुलिस को विभिन्न सूत्रों के हवाले से ये सूचना मिली है कि माओवादी ने ये हत्याएँ जिले के अंदरूनी हिस्से गंगलूर क्षेत्र में की है।
पुलिस को मिले इनपुट्स के अनुसार कमलू और मांगी नक्सलवादी के तौर पर साथ में काम करते हुए एक दूसरे के करीब आए और दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो गया। आईजी सुंदरराजन ने कहा कि शादी करने के लिए दोनों अपनी नक्सल रैंक को छोड़कर भाग निकले, लेकिन उनके कॉमरेड साथियों ने उन्हें ढूँढ लिया। इसके बाद इंदीनार गाँव में जन अदालत लगाकर दोनों को मौत की सजा सुनाई गई। वहीं तीसरे व्यक्ति को लेकर कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।
दोनों के खिलाफ चल रहे थे कई केस
रिपोर्ट के मुताबिक, कमलू के खिलाफ 11 आपराधिक मामले चल रहे थे, उसकी गर्लफ्रेंड मांगी बीजापुर जिले के कई पुलिस थानों में तीन मामलों में वाँटेड थी।
नक्सलियों में असंतोष
नक्सली सुरक्षा बलों से बार-बार मिल रही मात से बौखलाए हुए हैं। इसी असंतोष के कारण केवल शक होने पर वे अपने ही साथियों की निर्मम हत्याएँ कर रहे हैं। पश्चमी बस्तर संभाग में खास तौर से इस तरह की घटनाएँ बढ़ी हैं।
शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना (Saamana) के साप्ताहिक कॉलम ‘रोखठोक’ में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) को आड़े हाथों लिया है। शिवसेना सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने गोवा विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस विरोधी रुख अख्तियार करने के लिए ममता बनर्जी की आलोचना करते हुए कहा कि उनका यह कदम भाजपा के लिए फायदेमंद साबित होगा। शिवसेना ने यह भी आरोप लगाया है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) गोवा में मतदाताओं को लुभाने के लिए पैसों का जमकर इस्तेमाल कर रही हैं।
शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि गोवा में कॉन्ग्रेस को जड़ से खत्म करने का संकल्प टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के लिए घातक साबित होगा। राउत ने लिखा है, “गोवा में कॉन्ग्रेस का अस्तित्व नहीं बचना चाहिए, ऐसी भूमिका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या भारतीय जनता पार्टी की हो सकती है, परंतु भाजपा से लड़ने वाली ममता बनर्जी उसी कॉन्ग्रेस विरोधी रुख का समर्थन कर रही हैं। आखिर में इससे लाभ किसको होगा?”
उन्होंने कहा कि गोवा के पिछले विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस के 17 विधायक थे, लेकिन अब दो रह गए हैं। गोवा का चुनाव जीतना बीजेपी के लिए टेढ़ी खीर है, लेकिन आम आदमी पार्टी (AAP) और टीएमसी (TMC) जैसे बाहरी राजनीतिक दल उनकी मदद करने के लिए कॉन्ग्रेस (Congress) की राह में रोड़े अटका रहे हैं। गोवा में दोनों पार्टियों की नजर ईसाई वोटों पर है, लेकिन ये समुदाय कॉन्ग्रेस के साथ खड़ा रहेगा। भाजपा में शामिल हुए कॉन्ग्रेस के कुछ बागी अब पुरानी पार्टी में वापस आ गए हैं, क्योंकि उन्हें पता चल गया है कि उन्हें भाजपा में टिकट नहीं मिलेगा, लेकिन कॉन्ग्रेस पार्टी ने ऐसे गद्दारों से दूरी बनाने का फैसला किया है।
राउत ने गोवा चुनावों में टीएमसी द्वारा खर्च किए बेहिसाब पैसों को लेकर भी सवाल उठाया है। उन्होंने दावा किया है कि इसका स्रोत ‘कहीं और’ है। शिवसेना सांसद ने भाजपा पर भी हमला करते हुए कहा, “पिछले 10 वर्षों से यह पार्टी गोवा पर शासन कर रही है, लेकिन कभी भी बहुमत हासिल नहीं कर सकी। वह केवल चुनावों के बाद अन्य दलों के विधायकों को ‘खरीदने’ में लिप्त रही है। मैं ऐसे लोगों से मिला हूँ, जो इस बात को लेकर पूरी तरह से आश्वसत हैं कि इस बार भी सत्ताधारी पार्टी को बहुमत नहीं मिलेगा, लेकिन टीएमसी की मौजूदगी भाजपा की मदद करेगी।”
बीजेपी विधायक राम कदम ने राउत के इस कॉलम पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि शिवसेना सांसद को गोवा और भाजपा के भविष्य की चिंता नहीं करनी चाहिए। इसके बजाए उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए कि शिवसेना जिस भी राज्य में चुनाव लड़ी, उसमें एक भी सीट क्यों नहीं जीत पाई। उन्हें महाराष्ट्र में अपने शासन के बारे में चिंतित होना चाहिए, जहाँ उद्योगपतियों से पैसा इकट्ठा करने के लिए ‘वसूली गिरोह’ सक्रिय हैं और जहाँ मेट्रो लाइन जैसी बुनियादी परियोजनाएँ ठप पड़ी हैं।
विधायक राम कदम ने आगे कहा, “हम विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद शिवसेना को मिठाई भेंट कर गोवा में अपनी जीत का जश्न मनाएँगे।” बता दें कि गोवा में 14 फरवरी को एक ही चरण में 40 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले जाएँगे।
1983 क्रिकेट विश्व कप पर आधारित कबीर खान की फिल्म ’83’ के फ्लॉप होने के बाद रणवीर सिंह ने निर्णय लिया है कि अब वो बायोपिक मूवीज नहीं करेंगे। इस फिल्म के लिए उन्होंने मोटी रकम भी ली थी और प्रॉफिट में से भी उन्हें हिस्सा मिलना था। उनकी पत्नी दीपिका पादुकोण भी फिल्म के निर्माताओं में से एक थीं, जिन्होंने इसमें एक किरदार भी निभाया था। लेकिन, फिल्म ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 73 करोड़ रुपए का नेट कारोबार किया है, ऐसे में प्रॉफिट के लिए इसे 173 करोड़ और कमाने पड़ेंगे।
हालाँकि, थिएटरों से ये रकम आने की संभावना अब न के बराबर है। इसीलिए, रणवीर सिंह ने बायोपिक फिल्मों से फ़िलहाल तौबा कर ली है। फिल्म में उन्होंने पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव का किरदार निभाया था, जबकि दीपिका पादुकोण ने उनकी पत्नी रोमी भाटिया का। मीडिया में सूत्रों के हवाले से चल रहा है कि हाल ही में मेघना गुलजार ने फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की बायोपिक उन्हें ऑफर की थी, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। अब कैटरीना कैफ के पति विक्की कौशल इस फिल्म को कर रहे हैं।
इससे पहले संजय लीला भंसाली की फिल्मों ‘पद्मावत (2018)’ में उन्होंने दिल्ली के सुल्तान अल्लाउद्दीन खिलजी और ‘बाजीराव मस्तानी (2015)’ में सातवें मराठा पेशवा बाजीराव बल्लाल का किरदार निभाया था। ये दोनों ही वास्तविक लोगों पर आधारित किरदार थे और दोनों फ़िल्में खासी सफल रही थीं। अब रणवीर सिंह को यशराज (YRF) की ‘जयेशभाई जोरदार’ और करण जौहर की ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ नामक फिल्मों की रिलीज का इंतजार है।
No more biopics for Ranveer Singh after lackluster performance of 83 https://t.co/Zi2VJ65T8U
अब ’83’ के निर्देशक कबीर खान कह रहे हैं कि कोरोना महामारी की तीसरी लहर से फिल्म की कमाई पर बुरा असर पड़ा है। उनका मानना है कि फिल्म को काफी सारा प्यार मिला है। फिल्म के रिलीज से पहले इसके बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचने की बातें कही जा रही थीं। कबीर खान का कहना है कि कई राज्यों में थिएटरों में 50% ओक्यूपेन्सी और दिल्ली-हरियाणा में सिनेमाघरों के पूरी तरह बंद होने से फिल्म पर असर पड़ा। उन्होंने कहा कि फिल्म की रिलीज से 48 घंटे पहले ही टीम को आभास हो गया था कि चीजें नियंत्रण से बाहर जा सकती हैं।
छत्तीसगढ़ सरगुजा के कुंदीकला गाँव के ग्रामीणों द्वारा मुस्लिमों के बहिष्कार का वीडियो वायरल होने के बाद ऑपइंडिया ने इस मामले की जमीनी पड़ताल की। इस मामले में ऑपइंडिया ने अब तक का अपडेट लिया। गौरतलब है कि 1 जनवरी को नए साल पर जश्न के दौरान आरा गाँव के मुस्लिम समुदाय के कुछ लड़के कुंदीकला गए थे। वहाँ पर दोनों पक्षों में किसी बात को ले कर विवाद हुआ था। विवाद कुंदीकला गाँव के सरपंच के बेटों से हुआ था। कुछ दिन तक तो मामला शांत रहा, लेकिन अचानक एक दिन मुस्लिम पक्ष ने कुंदीकला गाँव पर हमला बोल दिया। उनके निशाने पर सरपंच का परिवार था, लेकिन रास्ते में ग्राम सचिव वीरेंद्र यादव का घर दिखा तो उन्हें भी घटना का जिम्मेवार मानकर उनके परिवार पर हमला बोल दिया गया।
ऑपइंडिया ने हमले के शिकार परिवार के सदस्य व ग्राम सचिव वीरेंद्र यादव से बात की। उन्होंने बताया कि इस मामले में पहले 6 आरोपित पकड़े गए थे, लेकिन वो सब उसी दिन छूट गए थे। उसके बाद फिर से 7 आरोपित पकड़े गए और ये सब भी उसी दिन छूट कर वापस घर आ गए। कुल 13 हमलावरों में से अभी एक भी जेल में नहीं है।
वीरेंद्र यादव के मुताबिक, “हमारे गाँव के पास गागर नदी है। वहाँ पर बाँध बना हुआ है। इस बाँध पर लोग घूमने आते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि दोनों पक्षों का झगड़ा वहाँ शुरू हुआ, जबकि कुछ का कहना है कि विवाद पहले बाजार से शुरू हुआ था। हमारा गाँव दलित समुदाय का है। हमलावर उनके घर वालों को मारने आए थे, लेकिन उन्होंने हमारे परिवार पर हमला कर दिया। हमलावरों की तरफ से भी हमारे ग्राम प्रधान के परिवार पर केस दर्ज करवाया गया है।”
पीड़ित ने आगे बताया, “मुख्य हमलावर BDC सदस्य इलियास से मेरी पहले जान-पहचान थी। फिर भी उसने हमारे परिवार को मारा। इन सबके तमाम उलटे-सीधे काम हैं। हमलावरों के गाँव आरा में आधी आबादी हिन्दू की और आधी मुस्लिमों की है। उनका गाँव हमारे कुंदीकला गाँव से लगभग 4-5 किलोमीटर दूर है।”
इस बीच भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया।
पीड़ित परिवार के साथ BJYM के सदस्य
ऑपइंडिया ने इस घटना के संदर्भ में कॉन्ग्रेस पार्टी के स्थानीय विधायक डॉ प्रीतम राम से बात की। उन्होंने बताया, “पीड़ित परिवारों की इच्छा अधिक-से-अधिक सजा दिलाने की होती है, लेकिन कार्रवाई कानूनी धाराओं के अंतर्गत ही की जाती है। मैं सभी प्रशासनिक अधिकारियों से सम्पर्क में हूँ और उन्हें न्यायोचित कार्रवाई करने को कहा हूँ। बीच में भाजपा और RSS के कुछ लोगों ने मामले को हिन्दू-मुस्लिम करने का प्रयास किया और एक शपथ दिलाने का वीडियो बीच में आया। गाँव वाले समझदार हैं और वो उनके बहकावे में नहीं आने वाले।”
दलित परिवार से हुई मारपीट पर SC/ST एक्ट न लगने और एक नाबालिग बच्ची की पिटाई के सवाल पर विधायक ने कहा, “मैंने भी सरपंच (मुखिया/प्रधान) से बात की है। पुलिस ने मौके से जो भी तथ्य जुटाए हैं, उसी के आधार पर कार्रवाई हुई है। गाँव वालों ने इस मामले में सच बताया है। बच्ची ने भी तब कहीं अपने साथ छेड़छाड़ आदि की लिखित शिकायत नहीं दी, अन्यथा पॉक्सो एक्ट व अन्य धाराओं में पुलिस कार्रवाई करती। मैं स्वयं पूरे मामले पर नजर रखे हुए हूँ।”
अंबिकापुर के एक अन्य कॉन्ग्रेसी विधायक चिंतामणि महाराज ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “जिस प्रकार से लोगों के एक पूरे समूह को शपथ दिलाई गई, उससे समाज को एक अच्छा संदेश नहीं जाएगा। यह गलत कदम था, जिसका विरोध होना चाहिए।”
ऑपइंडिया ने इस मामले में अंबिकापुर के एडिशनल SP विवेक शुक्ला से बात की। उन्होंने बताया कि 1 जनवरी नए साल को जो विवाद हुआ था उस मामले में FIR पहले दर्ज की गई थी। उस FIR की जाँच अभी चल ही रही थी। इस बीच उसी घटना के गुस्से में इलियास पक्ष ने कुंदीकला गाँव में घटना की। इस घटना की FIR यादव परिवार ने दर्ज करवाई है। हमने नियमानुसार कार्रवाई की है। घटना में अब तक 13 आरोपित चिन्हित किए गए थे। उन्हें पकड़ कर न्यायालय भेज दिया गया। बाकियों को चिन्हित करने का हम प्रयास कर रहे हैं। मामले की विवेचना अभी जारी है।”
बिहार के मुंगेर से मॉब लिंचिंग का मामला प्रकाश में आया है, जहाँ कुछ मुस्लिमों ने चोरी का आरोप लगाते हुए एक युवक के घर में घुसकर उसे बाहर खींच लिया और फिर खंबे से बाँधकर उसे बुरी तरह पीटा। आरोपित युवक को लात-घूँसे और लोहे की रॉड से तब तक मारते रहे, जब तक कि वह बेहोश नहीं हो गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, घटना मुंगेर जिले के तारापुर थाना क्षेत्र के गाजीपुर गाँव की है। शनिवार (8 जनवरी 2021) को सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के आधार पर पुलिस घटनास्थल पर पहुँची तो वहाँ इब्राहिमपुर मोहल्ले का रहने वाला इनाम उर्फ मिंटू घायल अवस्था में पड़ा मिला। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए इलाज के लिए उसे भागलपुर रेफर कर दिया गया है।
अस्पताल में होश में आने के बाद मिंटू ने अपने गाँव के दो आरोपितों- मोहम्मद बासित और मोहम्मद सज्जाद पर जान से मारने का आरोप लगाया। मिंटू का कहना है कि शनिवार को ये दोनों पिस्टल लेकर उसके घर में घुस गए और उसे गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए मारपीट करने लगे। दोनों उसे घसीटकर इमामबाड़ा के पास लेकर गए और बेरहमी से पीटा। वहाँ पर पहले से के साथी हसन, सलमान और सद्दाम पहले से मौजूद थे। इस दौरान सब ने मिलकर उसे बेरहमी से मारा।
इसके बाद आरोपित उसे लेकर लकड़ी के गोदाम के पास गए और वहाँ एक खंबे से उसे बाँध दिया और फिर सभी ने उसे पीटा। वायरल वीडियो में भी कुछ लड़कों को एक व्यक्ति को जमीन पर गिराकर बेरहमी से लात और लाठियों से पीटते देखा जा सकता है।
बहरहाल, इस मामले में पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। एसडीपीओ पंकज कुमार ने बताया कि मोहम्मद इनामुल नाम के पीड़ित पर चोरी का आरोप लगाकर उसे बेरहमी से पीटा गया है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान की जा रही है।
अभिनेता सोनू सूद की बहन मालविका ने कॉन्ग्रेस का दामन थाम लिया है। पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्हें मोगा से उतारे जाने की संभावना है। मालविका सूद सच्चर ने शनिवार (8 जनवरी, 2022) की देर शाम कॉन्ग्रेस पार्टी की सदस्यता ली। राज्य में विधानसभा चुनाव के ऐलान हो चुके हैं। 14 फरवरी को एक चरण में मतदान और 10 मार्च को चुनाव परिणाम की तारीख़ तय की गई है। पार्टी के जिला प्रभारी कमलजीत सिंह बराड़ ने मालविका सूद सच्चर के कॉन्ग्रेस में शामिल होने की पुष्टि की।
तीन भाई बहनों में सबसे छोटी मालविका अपने क्षेत्र में सामाजिक कार्यों की तस्वीरें अक्सर सोशल मीडिया पर पोस्ट करती रहती हैं। वहीं सोनू सूद की बड़ी बहन मोनिका शर्मा फार्मास्यूटिकल क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं और अमेरिका में रह रही हैं। मालविका पेशे से कम्प्यूटर इंजीनियर हैं, जो मोगा में आइलेट्स कोचिंग सेंटर भी चलाती हैं। ये कोचिंग संस्थान ज़रूरतमंद छात्राओं को मुफ्त में पढ़ाई की सुविधा देने का दावा करता है। उनकी माँ का 2007 में और पिता का 2016 में निधन हो गया था।
मालविका सूद के पति गौतम सच्चर भी चैरिटी संस्थाओं में सक्रिय हैं। मालविका का कहना है कि उनके भीतर पंजाबियत है और हमारा परिवार किसी को दर्द में नहीं देख सकता है, इसीलिए हमने कोविड-19 काल में गरीबों की मदद की। संभावना जताई जा रही है कि सोमवार (10 जनवरी, 2022) को कॉन्ग्रेस पार्टी की तरफ से ये ऐलान किया जाएगा कि मोगा से वो विधानसभा उम्मीदवार होंगी। सोनू सूद खुद राजनीति में आने से इनकार कर चुके हैं, लेकिन अपनी बहन के साथ अक्सर दिखते हैं।
भारत निर्वाचन आयोग ने सोनू सूद को पंजाब के चुनाव आइकॉन के रूप में नियुक्त किया था, लेकिन उनके परिवार के राजनीति में सक्रिय होने के कारण अब इस फैसले को रद्द कर दिया गया है। लगभग एक साल पहले उन्हें चुनाव आइकॉन बनाया गया था। पंजाब के मुख्य चुनाव अधिकारी एस करुणा राजू ने बताया कि 4 जनवरी को ही ये फैसला वापस ले लिया गया है। सोनू सूद पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से भी मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि वो दो दलों की तरफ से राज्यसभा सांसद की पेशकश ठुकरा चुके हैं।