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₹1600 करोड़ के फ्रॉड में फँसे अशोका यूनिवर्सिटी के संस्थापक बंधु, जाली सर्टिफिकेट से बैंकों से लिया लोन: 12 जगहों पर CBI की छापेमारी

अशोका यूनिवर्सिटी (Ashoka University) के दो संस्थापक- प्रणव गुप्ता और विनीत गुप्ता करोड़ों रुपए के बैंक धोखाधड़ी (Bank fraud) के मामले में फँस गए हैं। केंद्रीय जाँच एजेंसी CBI ने दोनों पर 1,600 करोड़ रुपए से अधिक के बैंक फ्रॉड का आरोप लगाया है। इस मामले में CBI ने 31 दिसंबर 2021 को दिल्ली और NCR में 12 स्थानों पर छापेमारी की थी, जिसके बाद इसका खुलासा हुआ है। CBI ने उनकी दवा कंपनी पैराबोलिक के खिलाफ केस दर्ज किया है।

विनीत गुप्ता सोनीपत में अशोका विश्वविद्यालय के संस्थापक और ट्रस्टी हैं, जबकि प्रणव गुप्ता बोर्ड के सह-संस्थापक और ट्रस्टी हैं। इन दोनों ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया समेत दूसरे बैंकों से 1,626.74 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था और उसमें हेराफेरी की। सीबीआई ने उनकी चंडीगढ़ स्थित दवा कंपनी और उससे जुड़े गुप्ता बंधुओं और 10 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। दोनों भाईयों पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंकों को ठने का आरोप है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुप्ता बंधुओं की दवा कंपनी पैराबोलिक ड्रग्स ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank Of India), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State bank Of India), यूको बैंक (Uco bank), स्टेट बैंक ऑफ पटियाला (State bank of patiala), ICICI बैंक, IDBI बैंक, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI), बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB), एक्जिम बैंक (Axim bank), केनरा बैंक (Canara Bank) और सिडबी बैंक से कर्ज लेने के लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।

छापेमारी के बाद सीबीआई की प्रेस विज्ञप्ति का स्क्रीनग्रैब

अशोका विश्वविद्यालय से जब से राजनीतिक विश्लेषक प्रताप भानु मेहता ने फैकल्टी मेंबर के तौर पर अपने पद से इस्तीफा दिया है, तभी से यूनिवर्सिटी विवादों में है। मेहता के इस्तीफे के बाद पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यम ने भी ‘अकादमिक स्वतंत्रता’ की कमी का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था।

सीएम योगी ने यूपी के किसानों को दी बड़ी सौगात: बिजली का रेट 50% घटाया, छात्र-छात्राओं को बाँटे टैबलेट-स्मार्टफोन

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Aadityanath) ने प्रदेश की जनता को बड़ी सौगात दी है। उन्होंने प्रदेश के किसानों को बिजली के बिल में 50 फीसदी की छूट देने का ऐलान किया है। इससे प्रति वर्ष यूपी पॉवर कार्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) पर लगभग 1,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आएगा। इसके लिए सरकार UPPCL को अनुदान देगी।

मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने निजी नलकूपों के लिए बिजली के मौजूदा रेट में यह छूट देने का ऐलान किया है। सरकार से अनुदान मिलते ही बिजली के वर्तमान रेट में बदलाव होगा। इससे ग्रामीण इलाकों के मीटर वाले कनेक्शन में 2 रुपए प्रति यूनिट से लगने वाला चार्ज घटकर एक रुपए हो जाएगा, जबकि फिक्स चार्ज 70 से घटकर 35 रुपए हो जाएगा। वहीं, बिना मीटर वाले कनेक्शन पर फिक्स चार्ज 170 से घटकर 85 रुपए हो जाएगा।

ऊर्जा की बचत वाले पंपों में जहाँ पहले 1.65 यूनिट के हिसाब से 70 रुपए का फिक्स चार्ज देना पड़ता था, नई घोषणा के बाद यह घटकर 0.83 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से 35 रुपए ही लगेगा। वहीं, शहरों के निजी नलकूपों में यह दर 6 रुपए प्रति यूनिट से घटकर 3 रुपए हो जाएगी। मुख्यमंत्री के इस ऐलान से प्रदेश के 13 लाख लोगों को सीधे तौर पर फायदा होगा।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh yadav) और अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने भी 300-300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया था। हालाँकि, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में मुफ्त बिजली देना व्यवहारिक नहीं है, लेकिन इसमें कटौती की जा सकती है, जो कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया है।

छात्रों को टैबलेट की सौगात

सीएम योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार (6 जनवरी 2021) को काशी का दौरा किया। यहाँ उन्होंने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में जिले के 1,500 छात्र-छात्राओं को टैबलेट और स्मार्टफोन बाँटे। जिले के सभी कॉलेज के छात्र-छात्राओं को मिलाकर कुल 90 हजार से अधिक छात्रों को टैबलेट और स्मार्टफोन बाँटे जाने की योजना है।

‘पंजाब में PM मोदी की सुरक्षा चूक योजनाबद्ध साजिश’: 16 पूर्व डीजीपी सहित 27 पूर्व IPS अधिकारियों ने राष्ट्रपति को पत्र लिख की त्वरित कार्रवाई की माँग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के पंजाब दौरे के दौरान उनकी सुरक्षा में पंजाब सरकार द्वारा बरती गई लापरवाही के मामले में अब 16 पूर्व DGP समेत 27 पूर्व IPS अधिकारियों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) को पत्र लिखकर त्वरित कार्रवाई का अनुरोध किया है। इन अधिकारियों ने पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार (Punjab Congress Government) की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए इस घटना को योजनाबद्ध तरीके से की गई साजिश करार दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पत्र में अधिकारियों ने लिखा है कि पंजाब में चुनाव होने हैं, ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले भय रहित वातावरण बेहद आवश्यक है। पूर्व अधिकारियों के मुताबिक, पंजाब एक बॉर्डर स्टेट है, इसलिए फ्री एंड फेयर इलेक्शन के लिए एक्शन लेना आवश्यक है। अधिकारियों ने राष्ट्रपति के अलावा पत्र की एक कॉपी को सुप्रीम कोर्ट को भी भेजा है।

अधिकारियों ने पीएम मोदी की सुरक्षा में लापरवाही के लिए सीधे तौर पर राज्य सरकार को दोषी माना है। इन्होंने पत्र में लिखा है कि मीडिया रिपोर्टों से स्पष्ट पता चलता है कि यह घटना राज्य सरकार की लापरवाही समेत राज्य के पदाधिकारियों की इसमें संलिप्तता को भी उजागर करती है। पूर्व IPS अधिकारियों के मुताबिक, जिन लोगों को PM की सुरक्षा व्यवस्था के लिए नियोजित किया गया था वो पीएम के वैकल्पिक रूट को जानते थे।

पत्र में इस बात का भी उल्लेख है कि जिस वक्त खुली सड़क पर प्रधानमंत्री का काफिला 20 मिनट तक बेबस और लाचार मुद्रा में खड़ा था, उस दौरान पंजाब पुलिस के जवान और अधिकारी प्रदर्शनकारियों के साथ चाय का लुत्फ ले रहे थे। ये उनके इरादों को साफ बयान करता है। इसके अलावा, मीडिया रिपोर्टों और वीडियो से साफ पता चलता है कि उस वक्त वहाँ पर पंजाब पुलिस का कोई सीनियर अधिकारी मौजूद नहीं था।

पूर्व IPS अधिकारियों ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा कि वे उन्हें ये पत्र इसलिए लिख रहे है, क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है कि पीएम की सुरक्षा में चूक के मामले में राज्य की एजेंसियाँ बहाने बना रही हैं। इसके साथ ही राज्य के मुख्यमंत्री भी विरोधाभासी बयान दे रहे हैं।

गौरतलब है कि 5 जनवरी 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब के फिरोजपुर के दौरे पर जा रहे थे, लेकिन बीच रास्ते में कथित किसान प्रदर्शनकारियों ने उनके रास्ते को ब्लॉक कर दिया था। लगभग 20 मिनट तक वहाँ फँसे रहने के बाद पीएम का काफिला भठिंडा एयरपोर्ट पर वापस लौट आया। इसके बाद पीएम मोदी ने पंजाब के अधिकारियों से कहा था, “अपने मुख्यमंत्री को धन्यवाद कहना कि मैं भठिंडा एयरपोर्ट तक जिंदा पहुँच गया।”

चीनियों ने ही खोली चीन की पोल, बताया- एक्टर को PLA फौजी बनाकर शूट हुआ था गलवान फ्लैग ‘प्रोपेगेंडा’ Video

नए साल पर गलवान घाटी को लेकर फैलाए गए चीन के प्रोपेगेंडा का पर्दाफाश हुआ है। ये खुलासा चीन की माइक्रो ब्लॉगिंग साइट वीबो पर ही कुछ लोगों ने किया है। कहा जा रहा है कि जो वीडियो चीन ने 1 जनवरी को जारी की उसके लिए उन्होंने अपने फौजियों का नहीं बल्कि चीनी एक्टर्स का इस्तेमाल किया था। मीडिया रिपोर्ट्स दावा कर रही हैं कि वीबो पर लोगों ने वू जंग (Wu Jung) नामक एक्टर की फोटो शेयर करके बताया है कि सीसीपी ने वू जंग और उनकी बीवी जाई नन (Xie Nan) को वीडियो के लिए इस्तेमाल किया। ये दोनों टीवी होस्ट भी हैं।

इन रिपोर्टों में कहा गया है कि जिस जगह पर पूरा कार्यक्रम हुआ वह गलवान घाटी से लगभग 28 किलोमीटर पीछे थी। इसके अलावा यह भी ध्यान देने वाली बात है कि जिस एक्टर का नाम वीबो पर लोगों ने लिया है वह चीन की कई सारी फिल्मों में एक हीरो के तौर पर देखा जा चुका है। उसने कई बार पीएलए सैनिक के तौर पर भी फिल्मों में भूमिका निभाई है। वहीं उसकी पत्नी भी एक चीन की एक्ट्रेस है।

चीनी फौजियों पर बनी ‘द बैटल एट लेक चांगजीन (The Battle at Lake Changjin)’ में वू ने चीनी फौजी का ही रोल अदा किया था। ये फिल्म चीन की सबसे महंगी फिल्मों में से एक थी, जिसे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के 100 साल पूरे होने पर सीसीपी द्वारा अप्रूव भी किया गया था।

चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों का दावा है कि 24 दिसंबर को वू, जाई और कुछ पीएलए फौजी गलवान की ओर गए थे। उन्होंने वहाँ 4 घंटे शूटिंग की और फिर वहाँ से लौटे।

बता दें कि एक ओर जहाँ ये खबरें मीडिया में आना शुरू हुई हैं। वहीं ये भी कहा जा रहा है कि जैसे ही वीबो पर यूजर्स ने चीन के प्रोपेगेंडे की पोल खोली और एक्टर्स की तस्वीर सहित सच्चाई बतानी शुरू की, प्लेटफॉर्म पर इन लोगों का अकॉउंट ही सस्पेंड कर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि 1 जनवरी 2022 को जब चीन की ओर से प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए वीडियो जारी की गई तो भारत में कई मीडिया संस्थानों ने इस निराधार खबर को आगे बढ़ाया। लेकिन कुछ ही समय बाद में रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट कहा कि ये वीडियो चीन के प्रोपेगेंडा का हिस्सा है और उनके ही इलाके में शूट किया गया है। इसके अलावा प्रोपगेंडे के तूल पकड़ने पर गलवान घाटी से एक तस्वीर सामने आई थी जिसमें भारतीय सैनिक वहाँ तिरंगा लेकर खड़े थे। उनके बंकर पर भी तिरंगा साफ देखा गया था।

पंजाब के भागूपुर हवेलियाँ गुरुद्वारे में बेअदबी के आरोप में एक गिरफ्तार: पहचान की पुष्टि में लगी पुलिस, संगत ने केंद्र पर मढ़ा दोष

पंजाब के एक और गुरूद्वारे में बेअदबी के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। यह मामला अमृतसर जिले के अजनाला शहर स्थित भागूपुर हवेलियाँ गुरुद्वारा का है। हालाँकि, यह उसकी पहचान और कहाँ का रहने वाला है, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। मामला बुधवार (5 जनवरी) का है और इसका एक वीडियो वायरल हो रहा है।

वायरल हो रहे वीडियो में एक व्यक्ति को कुछ लोगों ने घेर रखा है। उसका नाम-पता पूछने के साथ यह पूछा जा रहा कि उसे किसने भेजा है। पकड़े गए व्यक्ति के चेहरे पर मिट्टी आदि लगी है। वो बेहद घबराया लग रहा है। वह किसी को ठीक से कुछ भी बता नहीं पा रहा है। वीडियो में वह मानसिक रूप से असंतुलित भी नजर आ रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित ने भागने की कोशिश की। इसके बाद उसे गाँव वालों ने उसे पकड़ लिया। बाद में उसे एक कमरे में बंद कर दिया गया था। दमदमी टकसाल के छात्र और सिख उपदेशक भाई रंजीत सिंह ने बताया, “एक अनजान व्यक्ति ने गुरुग्रंथ साहिब के सरूप को पालकी साहिब से उठा कर मेज पर रख दिया। इसके बाद उसने गुटका साहिब को उठाकर अपनी जेब में डाल लिया।”

बताया जा रहा है कि उसने रुमाल साहिब को भी उठाकर जेब में रख लिया और भागने की कोशिश करने लगा। इसी दौरान गुरूद्वारे के प्रबंधकों ने उसे पकड़ कर एक कमरे में बंद कर दिया। बताया जा रहा है कि पकड़े जाने के तुरंत बाद आरोपित ने कुछ कैप्सूल निगल लिया। वहीं, संगत वाले आरोपित को पुलिस के हवाले करने के बजाय पूछताछ के लिए उसे कुछ दिन और अपने पास रखना चाहते थे।

दमदमी टकसाल के मुखी अमरीक सिंह ने इस घटना के लिए केंद्र पर दोष मढ़ दिया। उन्होंने कहा, “सब जानते हैं कि इसके पीछे कौन है। ये सब केंद्र सरकार की सोची-समझी साजिश है। लोगों को खरीद कर, पैसे का लालच देकर ये सब कराया जा रहा है। ये उन गुरुद्वारों को निशाना बनाते हैं, जहाँ कोई सेवादार नहीं होता।”

उन्होंने आगे कहा, “सिंघु बॉर्डर पर कुछ समय पहले जिस व्यक्ति को निहंगों ने मारा था उसने खुद कई बातें कबूल की थीं। तब उसने बताया था कि 20 लोगों को बेअदबी करने के लिए नियुक्त किया गया है। नोज़ामपुर के व्यक्ति ने यहाँ तक माना था कि 9 लोगों को 10 लाख रुपए बेअदबी के लिए दिए गए हैं।”

पुलिस ने बताया कि यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपित कहाँ का रहने वाला है। पकड़ा गया आरोपित कभी दिल्ली तो कभी शाहजहाँपुर से आने की बात कह रहा है, लेकिन अभी तक उसके असली ठिकाने का पता नहीं चल पाया है। वहीं, जिले के SSP ने बताया कि यह भी जाँच की जा रही है कि आरोपित ने बेअदबी की है या नहीं।

CM उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि को महाराष्ट्र की राबड़ी देवी कहने पर बिना वारंट मुंबई पुलिस ने बीजेपी नेता को उठाया, घंटों हुई पूछताछ

महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की पत्नी रश्मि ठाकरे (Rashmi Thackeray) को लेकर 4 जनवरी 2022 को किए गए पोस्ट के बाद मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने महाराष्ट्र बीजेपी के सोशल मीडिया सेल के प्रमुख जितेन गजरिया (Jiten Gajaria) को हिरासत में ले लिया है। मुंबई पुलिस बीजेपी आईटी सेल के चीफ से पिछले तीन घंटों से पूछताछ कर रही है।

इस घटना को लेकर बीजेपी (BJP) नेता प्रतीक करपे (Pratik Karpe) ने ऑपइंडिया को बताया कि महाराष्ट्र पुलिस के तीन अधिकारियों की टीम गुरुवार की सुबह करीब 10 बजे जितेन गजरिया के ऑफिस पहुँची। पुलिसवालों के पास जितेन गजरिया के खिलाफ कोई कानूनी नोटिस या वारंट नहीं था, लेकिन फिर भी उन्होंने उन्हें उठा लिया। पुलिसवाले गजरिया को लेकर साइबर पुलिस स्टेशन बीकेसी लेकर गए। वहाँ पर उनसे बीते तीन घंटे से भी अधिक समय से पूछताछ की गई है।

मुबई बीजेपी के सचिव और सोशल मीडिया प्रभारी प्रतीक करपे ने ट्विटर के जरिए उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र सरकार के अत्याचार के खिलाफ अपनी आवाज उठाई थी।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना सरकार के इशारे पर महाराष्ट्र पुलिस ने बीजेपी नेता के खिलाफ उनके दो ट्वीट को लेकर मनमानी कार्रवाई की। दरअसल 4 जनवरी 2021 को किए गए अपने पहले ट्वीट में गजरिया ने सीएम उद्धव ठाकरे की पत्नी का जिक्र किया था। उन्होंने रश्मि ठाकरे को महाराष्ट्र की राबड़ी देवी करार दिया था।

वहीं गजरिया ने अपने दूसरे ट्वीट में उन्होंने रश्मि ठाकरे और अजीत पवार पर तंज कसते हुए 2013 में महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित किसानों की भूख हड़ताल का मजाक उड़ाने वाली पवार की बकवास टिप्पणी का हवाला दिया। दरअसल उस दौरान सूखे पर बात करते हुए अजीत पवार ने कहा था, “हम उन्हें पानी कहाँ से देंगे? क्या हमें बाँधों में पेशाब करना चाहिए?”

जितेन गजरिया का ट्वीट

गजरिया ने मराठी में किए गए अपने मजाक में अप्रत्यक्ष रूप से अजित पवार की असंवेदनशील टिप्पणी का जिक्र किया था। उनके मराठी ट्वीट का हिंदी अनुवाद है, “अगर रश्मि सरकार चला रही हैं, तो क्या मैं सिर्फ पेशाब करने के लिए डिप्टी सीएम हूँ? – @AjitPawarSpeaks to @OfficeofUT.

उन्होंने इस मामले में चुटकी लेते हुए कहा कि अजीत पवार (Ajit Pawar) उद्धव ठाकरे की सरकार से पूछ रहे होंगे कि अगर रश्मि ठाकरे सरकार चला रही होती तो उपमुख्यमंत्री के रूप में उनकी क्या स्थिति होती। क्या वह सिर्फ पेशाब करने के लिए सरकार में हैं?

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब उद्धव ठाकरे सरकार ने विरोधियों और उनकी आलोचना करने वालों के खिलाफ अपनी असहिष्णुता दिखाई है। पिछले साल 2021 में शिवसेना के छह गुंडों ने उद्धव ठाकरे का कार्टून शेयर करने के बाद एक सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी के साथ मारपीट की थी। व्हाट्सएप फॉरवर्ड कथित तौर पर उद्धव ठाकरे और उनके सहयोगियों शरद पवार और सोनिया गाँधी पर आधारित व्यंग्यपूर्ण कार्टून था। यहीं नहीं इसी तरह से शिवसेना के गुंडों ने फेसबुक पर टिप्पणी करने के मामले में एक व्यक्ति के साथ मारपीट करने के बाद उसका सिर मुंडवा दिया था।

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के दूसरे चरण को मंजूरी: ₹12000 करोड़ की इस परियोजना से 7 राज्यों को फायदा, भारत-नेपाल के बीच पुल की भी स्वीकृति

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार (6 जनवरी 2022) को कैबिनट की बैठक हुई, जिसमें कई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें इंट्रा स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (Green Energy Corridor) के फेज-2 की स्वीकृति भी शामिल है। कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने दी।

इंट्रा स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के दूसरे फेज पर लगभग 12,000 करोड़ रुपए खर्च होंगे। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि फेज-2 में देश के सात राज्य- गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और राजस्थान शामिल हैं और इनमें 10,750 सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण होगा।

नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, इस परियोजना से वर्ष 2030 तक अक्षय ऊर्जा इंस्टॉल्ड क्षमता को 450 गीगाबाइट किए जाने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। इस के साथ ही इससे लंबी अवधि के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी और पर्यावरण के अनुकूल विकास होगा। मंत्रालय ने बताया कि इससे बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके से रोजगार सृजन होगा।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंत्रिमंडल के इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के दूसरे चरण का क्रियान्वयन वर्ष 2021-22 से लेकर 2025-26 के दौरान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना में किए जाने वाले कुल निवेश का 33 फीसदी केंद्रीय मदद के रूप में देने का प्रावधान है।

क्या है ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर?

नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, ग्रीन एनर्जी परियोजना का उद्देश्य सोलर और पवन ऊर्जा जैसे पर्यावरण के अनुकूल स्रोत से मिलने वाली बिजली को ग्रिड के जरिए पारंपरिक बिजली स्टेशनों की मदद से देश के के विभिन्न हिस्सों के लोगों तक पहुँचाना है। केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रदेश जरूरत के हिसाब से ग्रीन एनर्जी का उत्पादन कर सकते हैं, लेकिन ट्रांसमिशन की बेहद ऊँची लागत की वजह से इस बिजली को दूसरे हिस्सों में भेजने की समस्या है।

उन्होंने कहा कि इसी वजह से ग्रीन कॉरिडोर की योजना बनाई गई है, जिससे राज्यों को जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में मदद मिलेगी और देश की खपत में ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ेगी। ग्रीन एनर्जी से प्राप्त बिजली के इस्तेमाल के लिए मंत्रालय ने 2015-16 में इंट्रा स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। इसके पहले चरण में 8 राज्य- तमिलनाडु, राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश शामिल हैं। अनुराग ठाकुर ने कहा कि पहले चरण का करीब 80 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। पहले चरण के लिए 10,142 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे।

अनुराग ठाकुर ने आगे बताया कि भारत-नेपाल के बीच धारचूला में महाकाली नदी पर ब्रिज बनाया जाएगा। इससे उत्तराखंड और नेपाल के लोगों को काफी फायदा होगा। यह परियोजना करीब 12 हजार करोड़ रुपए की है और इसको लेकर दोनों देशों के बीच जल्द ही एमओयू साइन होगा।

‘ये एक्टिंग महामारी से कम नहीं है’ : चकदा एक्सप्रेस में झूलन गोस्वामी बनकर लौटीं अनुष्का शर्मा, लुक्स से लेकर एक्सेंट सबका उड़ा मजाक

बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ‘चकदा एक्सप्रेस’ में भारतीय महिला क्रिकेटर झूलन गोस्वामी के जीवन पर आधारित फिल्म के साथ स्क्रीन पर वापसी कर रही हैं। अभिनेत्री ने इस घोषणा के साथ ही एक भावनात्मक मैसेज लिखा है। उन्होंने कहा है कि ये फिल्म महिला क्रिकेट के बारे में लोगों की आँख खोलेगी। उन्होंने लिखा कि जब झूलन ने अपना करियर शुरू किया था तब महिलाओं के लिए खेल खेलने के बारे में सोचना भी बहुत मुश्किल हुआ करता था।

उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें महिला होने के नाते झूलन की कहानी ने कितना गौरवान्वित किया। उन्होंने लिखा, “एक महिला के तौर पर मुझे झूलन की कहानी सुनकर गर्व हुआ और उनके जीवन को दर्शकों और क्रिकेट प्रेमियों के सामने लाने की कोशिश करना मेरे लिए सम्मान की बात है। एक क्रिकेट राष्ट्र के रूप में, हमें अपनी महिला क्रिकेटरों को उनका हक देना होगा।”

इंस्टाग्राम पर अनुष्का शर्मा का ये पोस्ट देखने के बाद कई लोग उनका स्वागत कर रहे हैं। हालाँकि कुछ ऐसे भी हैं कि जो इस फिल्म में उनकी कास्टिंग से नाखुश हैं। एक यूजर ने ये ट्रेलर देखकर कहा कि वो अनुष्का को पसंद करते हैं पर इस रोल के लिए वो ठीक कास्टिंग नहीं है। कुछ अन्य यूजर्स ने कहा, “बायोपिक बना रहे हो तो कम से कम स्किन कलर ही मैच कर लेते।” कुछ ने कहा, “बंगाली एक्ट्रेस को इस रोल के लिए चुना जाना चाहिए थे।” एक यूजर ने पूछा कि आखिर गाढ़े रंग वाली लड़की को इस रोल के लिए क्यों नहीं लिया गया। तुम लोगों को क्या परेशानी है डार्क रंग से।” यूजर्स ने अनुष्का के बंगाली एक्सेंट का भी मजाक बनाया। वहीं कुछ ने कहा झूलन गोस्वामी भारत की स्पोर्ट्स आइकन हैं और वो कुछ बेहतर डिजर्व करती हैं।

द स्किन डॉक्टर ने इस ट्रेलर को देख कहा, “झूलन गोस्वामी के प्रति पूरा सम्मान है। वह महिला क्रिकेट जगत की महान शख्सियत हैं लेकिन ट्रेलर बहुत चापलूसी से भरा है। आखिर असल बायोपिक क्यों नहीं बनती बिन किसी वोकनेस के असली कहानी पर। कास्टिंग भी बहुत घटिया है। झूलन एक लंबी, सांवली लड़की हैं। रोल में अनुष्का फिट नहीं होती।”

एक यूजर ने इस वीडियो में अनुष्का की एक्टिंग को देख कहा कि ये किसी महामारी से कम नहीं है।

कुछ यूजर ने कहा, “ये बंगाली कम्युनिटी के लिए बेहद अपमानजनक है। आखिर जबरदस्ती ऐसा एक्सेंट क्यों। ऐसा लग रहा है ये बंगाली बोली का मजाक उड़ा रही हैं। महा बेकार कास्टिंग।”

खड़क सिंह नाम के यूजर ने कहा, “कोहली के क्रिकेट की वाट लगाने के बाद अब खुद के क्रिकेट की वाट लगाएगी ये औरत।”

मनीषा राजपूत ने लिखा, “कितनी भयानक लग रही है ये ऊपर से बंगाली एक्सेंट। मुझे अपनी महान क्रिकेटर पर दया आ रही है। झूलन को कोई और नहीं मिला इस बायोपिक के लिए। कोहली की बराबरी करने के लिए फिल्म में क्रिकेटर बन रही है।”

बता दें कि एक ओर अलग-अलग प्रतिक्रियाँ सोशल मीडिया पर लगातार आ रही हैं और दूसरी तरफ महिला क्रिकेट की शान झूलन गोस्वामी ने ये ट्रेलर अपने अकॉउंट से शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “जब आप भारत को रिप्रेसेंट करते हैं तो आपके दिमाग में एक ही बात होती है- तुम देश के लिए खेल रहे हो, अपने लिए नहीं…11 महिलाएँ खेलीं टीम इंडिया का नाम इतिहास में लिखने के लिए। कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्होंने कहा- लड़कियाँ नहीं खेल सकती।”

CM योगी ने माफियाओं से मुक्त कराई 64,366 हेक्टेयर जमीन से बनाया ‘लैंड बैंक’, 63 बांग्लादेशी हिंदू परिवारों को दी घर के लिए जमीन

उत्तर प्रदेश (Uttar pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Aaditynath) ने गुरुवार (6 जनवरी 2021) को राजधानी लखनऊ में नायब तहसीलदारों और चयनित प्राध्यापकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इस मौके पर सीएम ने कहा कि उनकी सरकार ने माफियाओं के कब्जे से 64,366 हेक्टेयर जमीन मुक्त कराई। इनमें से कुछ जमीनें बांग्लादेश से उत्तर प्रदेश में आकर बसे हिंदू परिवारों को भी दी गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, “पाकिस्तान और बांग्लादेश से जिन हिंदुओं को निकाला गया था, वो लोग दशकों से मेरठ में रह रहे थे, लेकिन उनको घर के लिए जमीन नहीं मिल पाई थी। ऐसे 63 बंगाली हिंदू परिवारों को हमने कानपुर देहात में प्रति परिवार दो एकड़ भूमि पट्टा के रूप में और 200 वर्ग गज जमीन मकान बनाने के लिए दिए हैं। इसके अलावा, इनके लिए वहाँ पर मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत एक-एक मकान बनवाने का कार्य संपन्न किया है। इस योजना के तहत प्रति परिवार एक लाख 20 हजार रुपए प्रति परिवार दिए जा रहे हैं। जमीनें उन्हें बिल्कुल मुफ्त दी गई हैं।”

अतिक्रमण मुक्त जमीनों से बना ‘लैंड बैंक’ (Land Bank)

अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराई गई जमीनों को लेकर सीएम योगी ने बताया कि इन जमीनों से प्रदेश में ‘लैंड बैंक’ (Land Bank) तैयार किया गया है। इसके तहत जिन गरीबों के पास जमीन नहीं है, उन्हें जमीन का आवंटन किया जा रहा है। इसके अलावा, इन जमीनों पर राज्य सरकार स्कूल, उद्योग धंधे जैसे कई कार्यक्रम कर सकती है।

समाजवादी पार्टी (Samajwadi party) पर निशाना साधते हुए सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले पूर्ण पारदर्शिता के साथ नौकरी दे पाना अपने आप में एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन भाजपा सरकार ने तय समय-सीमा के अंदर चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, अब तक 1,75,000 से अधिक शिक्षकों को तैनाती की गई है। कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने 57 नायब तहसीलदारों, राजकीय महाविद्यालयों के 141 प्रवक्ताओं और 69 सहायक अध्यापकों को नियुक्ति पत्र सौंपा।

गौरतलब है कि 1970 के दशक में बांग्लादेश से आए 63 विस्थापित हिंदू परिवारों के पुनर्वास योजना को योगी सरकार ने 10 नवंबर 2021 को मंजूरी दी थी। इसके तहत इन सभी को कानपुर देहात के रसूलाबाद तहसील के भैंसाया गाँव में बसाने की योजना तय की गई थी।

क्या AIMIM प्रमुख ओवैसी को मुरादाबाद के एक ‘हिंदू’ होटल में कमरा देने से मना कर दिया गया था? जानें क्या है सच्चाई: ऑपइंडिया Exclusive

तमाम सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) यूपी के अध्यक्ष शौकत अली को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक होटल के रिसेप्शन पर बहस करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में दावा किया गया है कि एक ‘हिंदू होटल’ ने AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को कमरा देने से मना कर दिया। बता दें कि ओवैसी आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर 4 जनवरी, 2022 को एक राजनीतिक रैली को संबोधित करने के लिए मुरादाबाद गए थे।

2.20 मिनट के वीडियो में, AIMIM उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष शौकत अली को होटल के रिसेप्शन पर बैठे व्यक्ति के साथ तीखी बहस करते और फिर उसके बाद अपनी पार्टी के सदस्यों के साथ परिसर से निकलते हुए देखा जा सकता है। गुस्से में नजर आ रहे शौकत अली परिसर से बाहर निकलते समय फोन पर बात करते हैं। थोड़ी देर बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी होटल में घूमते नजर आते हैं। परिसर से बाहर निकलने और अपनी कार में बैठने से पहले कुछ समय के लिए उन्हें रिसेप्शन एरिया में प्रतीक्षा करते देखा जा सकता है।

वीडियो इस दावे के साथ फैलाया जा रहा है कि AIMIM प्रमुख जैसे लोगों को उनके हिंदू विरोधी रुख के कारण उत्तर प्रदेश के ‘हिंदू होटल’ में कमरों से वंचित किया जा रहा है। लखनऊ हिंदी समाचार जैसे कई मीडिया हाउसों ने वीडियो शेयर किया, जिसे बाद में माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर व्यापक रूप से प्रसारित किया गया।

लाइव हिंदुस्तान और एबीपी न्यूज ने भी रिपोर्ट किया कि AIMIM के सदस्यों ने मुरादाबाद में Drive-In 24 में कमरा बुक किया था, लेकिन ओवैसी के पहुँचने पर होटल के अधिकारियों ने उन्हें कमरा देने से इनकार कर दिया।

सच क्या है

हिंदुस्तान की रिपोर्ट में होटल मैनेजर विपुल के हवाले से कहा गया है कि गाइडलाइंस के मुताबिक किसी भी राजनीतिक शख्सियत को रूम अलॉट करने से पहले उन्हें परमिशन की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, “राजनीतिक व्यक्तियों के लिए परमिशन आवश्यक है। जब परमिशन मुझे मिल जाएगी तो मैं रूम देने के लिए तैयार हूँ। किसी व्यक्ति विशेष को लेकर कमरा ना देने जैसी कोई बात नहीं है। हम लोग नियम कानून के तहत ही काम करते हैं।”

ऑपइंडिया ने अरविंद सिंह कठेरिया नाम के एक होटल कर्मचारी से बात की, जिसने दावा किया कि उसने पूरी AIMIM टीम की व्यवस्थाओं की देख-रेख की, जो 4 जनवरी से 6 जनवरी तक होटल में रुकी थी। उन्होंने मीडिया में चल रही खबरों का खंडन किया कि ओवैसी को होटल में कमरा देने से मना कर दिया गया। इसके विपरीत, कठेरिया ने पुष्टि की कि असदुद्दीन ओवैसी को 4 जनवरी को उनके आगमन पर तुरंत एक कमरा आवंटित किया गया था और और 6 जनवरी को चेक आउट करने से पहले होटल के कर्मचारियों को व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद दिया था।

घटनाओं के बारे में बताते हुए कठेरिया ने कहा कि ओवैसी होटल पहुँचे थे और चेक-इन करने के बाद, वह तुरंत एक मीटिंग के लिए निकल गए। उनके साथ आए कुछ लोगों ने देर शाम चेक इन किया। अधिक जानकारी देते हुए होटल के कर्मचारियों ने बताया कि प्रोटोकॉल के अनुसार, जब भी कोई वीआईपी गेस्ट आता है, तो LIU टीम को पहले से सूचित किया जाना चाहिए ताकि उनकी सुरक्षा व्यवस्था की जा सके।

उनके अनुसार, यदि किसी राजनीतिक दल का कोई सदस्य किसी होटल में चेक इन करता है, तो जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय की तरफ से एक पत्र एडवांस रूप से जारी किया जाता है। जिसके बाद होटल को अलर्ट किया जाता है और वह टीम के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था करता है। इस मामले में होटल को जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय से कोई पत्र नहीं मिला था क्योंकि यह उन्हें एआईएमआईएम टीम द्वारा एडवांस में नहीं दिया गया था।

उन्होंने कहा, “हम जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय से प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे थे तभी AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली बौखला गए। उन्होंने माँग की कि उन्हें तुरंत कमरे उपलब्ध कराए जाएँ। हमने उन्हें सिर्फ थोड़ा इंतजार करने के लिए कहा था। जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय से पत्र प्राप्त करने से पहले ही उनका चेक-इन किया गया था। केवल कुछ औपचारिकताएँ बाकी थीं, क्योंकि यह सुरक्षा का मामला है और हम कोई जोखिम नहीं उठा सकते।”

इसी दौरान AIMIM सदस्यों में से एक ने अफवाहें फैलाना शुरू कर दिया कि होटल ने उन्हें कमरा देने से मना कर दिया। इसके बाद अफवाहें फैल गई कि AIMIM प्रमुख को धार्मिक भेदभाव पर होटल में एक कमरे से इनकार कर दिया गया था। इसे अरविंद सिंह कठेरिया ने ‘पूरी तरह से झूठा और निराधार’ बताया। उन्होंने कहा कि यह एक छोटा सा मुद्दा था जिसे जरूरत से ज्यादा बढ़ा दिया गया और गलत तरीके से पेश किया गया।

कठेरिया ने कहा, “वह (ओवैसी) हमारी सेवाओं से बहुत खुश थे और आज (6 जनवरी) को चेक आउट करने से पहले होटल के कर्मचारियों को व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद दिया।”

उल्लेखनीय है कि AIMIM सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने आगामी राज्य विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सांप्रदायिक रास्ता अपनाया है। वह अपने चुनाव अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर थे। दिलचस्प बात यह है कि ओवैसी ने उत्तर प्रदेश 2022 के राज्य चुनावों के लिए अयोध्या से अपने अभियान की शुरुआत करते हुए दावा किया था कि ‘यूपी के मुसलमान जीतेंगे’ और तब से उन्होंने कई भड़काऊ भाषण दिए, मुसलमानों को एक इस्लामी नेता चुनने के लिए उकसाया और अन्य राजनीतिक पार्टियों के ‘दल्लाओं’ पर भरोसा नहीं करने के लिए कहा।