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गाड़ी से निकल बोले पंजाब के डिप्टी CM- मोदी जिंदाबाद, PM की सुरक्षा में चूक पर लोगों ने लिया था रोक

पंजाब (Punjab) दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की सुरक्षा में चूक को लेकर चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) की नेतृत्व वाली राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार (Congress Government) की हर तरफ आलोचना हो रही है। इस मामले को लेकर पंजाब के भाजपा (BJP) कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और उप-मुख्यमंत्री ओम प्रकाश सोनी की गाड़ी को रोक लिया।

पंजाब भाजपा कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार द्वारा जान-बूझ कर पीएम मोदी को खतरे में डालने को लेकर अमृतसर जा रहे राज्य के उप-मुख्यमंत्री ओम प्रकाश सोनी की गाड़ी के सामने जमकर नारेबाजी की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘जय श्रीराम’ और ‘मोदी जिंदाबाद’ के नारे लगाए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

बताया जा रहा है कि पंजाब सरकार के रवैये को लेकर गुस्साए लोगों ने सोनी की गाड़ी के सामने आ गए। इस दौरान सोनी गाड़ी निकल कर ‘मोदी जिंदाबाद… मोदी जिंदाबाद’ नारे लगाए। इसके बाद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा थोड़ा ठंडा दिखा और उन्होंने सोनी को आगे जाने दिया।

इससे पहले गुरुवार (6 जनवरी 2022) को पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के काफिले को भी प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने घेर लिया। तब चन्नी ने विरोध को देखते हुए अपने ड्राइवर को गाड़ी रोकने के लिए कहा था और खुद प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की थी।

बता दें कि पंजाब के फिरोजपुर के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के काफ़िले को एक फ्लाईओवर पर करीब 20 मिनट तक रूके रहना पड़ा था। उनके काफिले को गुजरने वाले रास्ते को कथित किसानों ने ब्लॉक कर दिया था। इसे पीएम की सुरक्षा में एक बहुत बड़ी चूक माना जा रहा है और इसका देश भर में विरोध हो रहा है।

जम्मू-कश्मीर: पूर्व मुख्यमंत्रियों (अब्दुल्ला+महबूबा+आजाद) की विशेष सुरक्षा छिनेगी, SSG को खत्म करने की तैयारी

जम्मू कश्मीर के चार पूर्व मुख्यमंत्रियों डा. फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, गुलाम नबी आजाद, महबूबा मुफ्ती और उनके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा का जिम्मा सँभाल रही जम्मू कश्मीर पुलिस का विशेष सुरक्षा दल (एसएसजी) को केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन भंग करने की तैयारी में है। साल 2000 में गठित एसएसजी को प्रदेश सरकार पूरी तरह भंग करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस फैसले से जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री, फारूक अब्दुल्ला, उनके बेटे उमर अब्दुल्ला, गुलाम नबी आजाद और महबूबा मुफ्ती इस फैसले से प्रभावित होंगे। बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता आजाद को छोड़कर बाकी तीन श्रीनगर में रहते हैं।

यह निर्णय सुरक्षा समीक्षा समन्वय समिति द्वारा लिया गया था जो जम्मू और कश्मीर में महत्वपूर्ण नेताओं की खतरे की धारणा की देखरेख करता है। पिछले साल 31 दिसंबर को, जम्मू-कश्मीर प्रशासन के अवर सचिव राशिद रैना ने यूटी प्रशासन के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी), सुरक्षा, को इस बात से अवगत कराया कि केंद्र ने एसएसजी को सही आकार देने के लिए मंजूरी दे दी है।

सुरक्षा व्यवस्था को तार्किक बनाने और सुधार की इस प्रक्रिया के बाद चारों पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा का जिम्मा संबंधित जिला पुलिस या पुलिस का सुरक्षा संभाग संभालेगा। बता दें कि चारों पूर्व मुख्यमंत्रियों को जेड प्लस श्रेणी की सुविधा पहले की तरह उपलब्ध रहेगी। एसएसजी को भंग करने के बाद इसके अधिकारियों व जवानों को उनके साजो सामान समेत सुरक्षा संभाग और उपराज्यपाल की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे विशेष सुरक्षा बल (एसएसएफ) में भेजा जाएगा। प्रशासन इस बल की ताकत को ‘न्यूनतम’ तक कम करके एसएसजी को ‘सही आकार’ देगा। अब इसका नेतृत्व पुलिस अधीक्षक के पद से नीचे के एक अधिकारी द्वारा किया जाएगा, जबकि निदेशक, जो कि पुलिस महानिरीक्षक और उससे ऊपर रैंक का होगा।

गौरतलब है कि एसएसजी का गठन वर्ष 1996 में डा. फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में तत्कालीन सरकार ने किया था। यह संवेदनशील घटनाओं के दौरान संरक्षित व्यक्तियों, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और सुरक्षित स्थानों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया था। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के लागू होने के बाद 31 मार्च 2020 में एसएसजी अधिनियम में संशोधन कर पूर्व मुख्यमंत्रियों व उनके परिजनों को एसएसजी सुरक्षा प्रदान करने वाले खंड को हटा दिया गया।

एसएसजी अब केवल सेवारत मुख्यमंत्रियों और उनके परिवार के सदस्यों को ही सुरक्षा मुहैया कराएगा। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्रियों को कुछ और सुरक्षा मिलती रहेगी।

फारूक अब्दुल्ला और गुलाम नबी आजाद को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड का सुरक्षा कवच मिलता रहेगा क्योंकि ये दोनों जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त हैं। उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती को जम्मू-कश्मीर में जेड प्लस सुरक्षा मिलेगी। लेकिन केंद्र शासित प्रदेश के बाहर उनकी सुरक्षा कम की जा सकती है। इसके अलावा, इन नेताओं को जिला पुलिस द्वारा खतरे के आकलन के आधार पर सुरक्षा प्रदान की जाएगी।

केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के सुरक्षा विंग में एसएसजी के कुछ जवानों को ‘क्लोज प्रोटेक्शन टीम’ के हिस्से के रूप में तैनात करने का फैसला किया है। एसएसजी के अतिरिक्त वाहनों और गैजेट्स को जम्मू-कश्मीर पुलिस के सुरक्षा विंग में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

एसएसजी के आकार में कटौती के साथ, कुलीन समूह के शेष कर्मियों को उनके ज्ञान, प्रशिक्षण और विशेषज्ञता का सर्वोत्तम उपयोग करने के लिए अन्य विंगों में तैनात किया जाएगा।

‘हिंदुओं को मुस्लिमों ने सभ्य बनाया, उनसे बाबरी मस्जिद वापस लो’: ISIS ने कहा- भारत सरकार के खिलाफ करें हिंसक जिहाद

ISIS की प्रोपेगेंडा डिजिटल पत्रिका ‘वॉयस ऑफ हिंद’ ने अपना नया संस्करण जारी किया है, जिसमें उसने मुस्लिमों को ‘हिंदुओं से बाबरी वापस लेने’ के लिए उकसाया है। ISIS के मुखपत्र के ताजा संस्करण के कवर में लिखा है, “यदि आप एक मुस्लिम हैं तो आपको आतंकवादी होना चाहिए, इसलिए उन्हें आतंकित करें …।”

साभार: ISIS मुखपत्र

अगले पन्ने पर एक इमारत के ऊपर भगवा झंडे के साथ हिंदुओं की एक तस्वीर है, जिसका शीर्षक है: “ओ मुवाहिद हिंदुओं से बाबरी मस्जिद वापस ले लो।” बता दें कि मुवाहिद का अर्थ है एक ‘अच्छा’ मुस्लिम बताया जाता है, जो अल्लाह के सिवाय किसी में विश्वास नहीं करता।

साभार: ISIS मुखपत्र

ISIS पत्रिका ने बाबरी ढाँचे को लेकर विस्तार से बात की है। उसने मुस्लिमों को उकसाते हुए ‘ऐसी सजा’ की बात कही, जो ‘हिंदुओं की आने वाली पीढ़ियों को याद’ रहे। इसके अलावा, ISIS ने भारतीय मुस्लिमों को भारत सरकार के खिलाफ हिंसक जिहाद छेड़ने का आह्वान किया। इसमें कहा गया है, “खुद का बचाव करने के बजाय हमें हमला करने की जरूरत है क्योंकि ‘हमला सबसे अच्छा बचाव है।”

ISIS मुखपत्र

हिंदुओं को ‘गायों की पूजा करने वाले बहुदेववादी’ के रूप में संदर्भित करते हुए ISIS समर्थित पत्रिका ने बाबरी ढाँचे के विध्वंस को ‘हिंदू मुशरीकीन की एक पागल भीड़ द्वारा भारत के मुस्लिमों पर सबसे शर्मनाक और कपटी हमला’ कहकर मुस्लिमों को उकसाया। बता दें कि हिंदू धर्म में गायों को पवित्र माना जाता है और इसकी पूजा की जाती है।

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि आमतौर पर इस्लामवादियों द्वारा हिंदुओं के खिलाफ घृणा दिखाने के लिए ‘गोमूत्र’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। पुलवामा के आत्मघाती हमलवार ने भी बमबारी को ‘गोमूत्र पीने वालों’ की सजा बताया था। यह वीडियो उसने खुद को उड़ाने से पहले बनाया था।

ISIS की प्रोपेगेंडा पत्रिका ने उन्हीं पुरानी बयानबाजी को हवा देना जारी रखा कि हिंदुओं ने बाबरी मस्जिद के खंडहरों पर एक मंदिर का निर्माण किया। इसने यह कह कर हिंदू धर्म का मजाक उड़ाया कि हिंदू जिन देवी-देवताओं की पूजा करते हैं, वे असलियत में नहीं हैं, बल्कि उनकी कल्पना की उपज हैं। इतना ही नहीं, मैगजीन ने दावा किया कि मुस्लिम आक्रमणकारियों ने ही हिंदुओं को सभ्य बनाया। इनके आने से पहले हिंदू अभद्र और असभ्य थे।

साभार: ISIS मुखपत्र

इसके बाद यह भारतीय खुफिया संगठनों और हमारे देश के सैनिकों को उकसाता है। पत्रिका दावा करता है कि उन्हें केवल भारत सरकार द्वारा मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। आईएसआईएस ने भारतीय सैनिकों से पूछा कि क्या वे जनरल बिपिन रावत और अन्य सैनिकों के समान मरना चाहेंगे जो अपनी सरकारों के लिए लड़ाई लड़ते हुए मर जाते हैं।

साभार: ISIS मुखपत्र

ISIS पत्रिका ने भारत में मूर्तियों को नष्ट करने का किया था आह्वान

उल्लेखनीय है कि आईएसआईएस ने अपनी पत्रिका के पहले संस्करण में भारत में देवताओं की मूर्तियों को तोड़ने की धमकी दी थी। इस संस्करण के कवर में भगवान शिव की एक कंप्यूटर जनित मूर्ति दिखाई गई थी, जिसमें टूटी हुई मूर्ति के शीर्ष पर ISIS का झंडा लहरा रहा था। मूर्ति के नीचे कवर में लिखा था, ‘इट्स टाइम टू ब्रेक फॉल्स गॉड (यह झूठे देवताओं के ध्वंस का समय है)’।

‘वॉयस ऑफ हिंद’ ने अपने एक संस्करण में कोरोना को मौके की तरह इस्तेमाल करने और कोविड 19 का कैरियर (वाहक) बनकर भारत पर हमला करने के लिए उकसाया था। ऑनलाइन पत्रिका में कहा गया था, “हमेशा हथियारबंद रहिए और कभी भी ज़्यादा-से-ज़्यादा कुफ़्रों को जान से मारने का मौक़ा मत छोड़िए। अपने पास चेन, रस्सी और तार रखिए, जिससे उन्हें पीट-पीट कर और तड़पाकर मारा जा सके।” इसके अलावा पत्रिका में यह भी लिखा था कि कैंची और हथौड़े जैसे हथियारों की मदद से कुफ़्रों को मारने में आसानी होगी।

पाकिस्तान की पैदाइश, ब्रिटेन में भारत विरोधी एजेंडा: ‘अब मोदी की बारी है’ कहने वाला लॉर्ड नजीर अहमद बच्चों के यौन शोषण का दोषी

भारत विरोधी प्रोपेगेंडा चलाने वाला पाकिस्तानी-ब्रिटिश नेता नजीर अहमद बच्चों का यौन शोषण करने के मामले में दोषी पाया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अहमद ने 1970 में अपनी युवावस्था में छोटे बच्चों के साथ यौन शोषण और बलात्कार का प्रयास किया था। इसी मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ‘लॉर्ड’ नजीर अहमद को अप्राकृतिक मैथुन और रेप के प्रयास का दोषी पाया।

अब उसकी सजा का ऐलान 4 फरवरी 2022 को किया जाएगा। बताया जा रहा है कि इस मामले में नजीर के साथ उसके दो भाई मोहम्मद फारूक और मोहम्मद तारिक भी दोषी करार दिए गए हैं। हालाँकि उम्र ज्यादा होने के कारण दोनों को ट्रायल में शामिल होने के लिए अनफिट पाया गया।

मालूम हो कि ये नजीर अहमद का जन्म POK में हुआ था और बचपन में ये परिवार समेत ब्रिटेन चले गए थे। ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से नजदीकियों के चलते साल 1998 में पहली बार इन्हें ब्रिटेन में हाउस ऑफ लॉर्ड्स में शामिल किया गया। बाद में, लगातार विवादों में रहने के कारण इन्हें लेबर पार्टी से निष्कासित कर दिया गया

नजीर अहमद के कुकर्मों का चिट्ठा

यहाँ बता दें कि नजीर अहमद को उनके भारत विरोधी बयानों के कारण कई बार मीडिया में जगह मिली है। लेकिन पिछले कुछ समय से वो यौन शोषण और रेप के मामलों में ही खबरों में आए। कुछ दिन पहले एक महिला ने भी नजीर अहमद पर रेप के प्रयास के आरोप लगाए थे। महिला ने कोर्ट को बताया था कि नजीर अहमद ने साल 1973 और 1974 में रेप का प्रयास किया था। लड़की की उम्र तब सिर्फ 16 या 17 थी।

‘हाउस ऑफ लॉर्ड्स’ में जगह मिलने का अहमद ने उठाया फायदा

इसके अलावा नजीर अहमद ने ब्रिटेन में हाउस ऑफ लॉर्ड के सदस्य के पद पर रहते हुए मार्च 2, 2017 को ताहिरा नाम की महिला का यौन उत्पीड़न किया था। अहमद ने महिला से झूठ बोला था कि वह एक हकीम (FAITH HEALER) के ख़िलाफ़ मेट्रोपॉलिटियन पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने में उसकी मदद करेगा। इस मामले में ब्रिटिश संसद के उच्च सदन की आचार संबंधी समिति द्वारा मामले की जाँच के बाद अहमद पर लगे आरोपों को सही पाया गया। जिसके कारण उसने साल 2020 में 14 नवंबर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

कार क्रैश से लेकर भारत विरोधी प्रोपगेंडा फैलाने तक

इन मामलों के अतिरिक्ट अहमद का ट्रैक हमेशा से दागी रहा। केवल भारत के संदर्भ में ही नहीं आपराधिक तौर पर भी। उसने यौन शोषण और रेप के प्रयास मामलों में अपनी जितनी थू-थू करवाई है उसके साथ उसे साल 2007 में कार क्रैश के कारण जेल की सजा भी हो चुकी हैं। वो साल 2018 में सिख अलगाववादियों के लिए यूके में प्रदर्शन भी कर चुका है। 26 जनवरी 2018 को ब्रिटेन के उच्चायोग में आयोजित एक कार्यक्रम के बीच खालिस्तानी आजादी और आरएसएस आतंकवादी के नारे कुछ पाकिस्तानियों द्वारा लगाए गए थे।

साल 2018 में गणतंत्र दिवस पर खबर आई थी कि ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग के बाहर ब्लैक डे मनाते हुए जो प्रदर्शन हुए वहाँ भारतीय झंडे को फाड़ने जैसे कृत्य अंजाम दिए गए। खबरों के अनुसार, इस पूरे प्रदर्शन को आयोजित पाकिस्तान में जन्मे ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में शामिल हुए पहले मुस्लिम नेता नजीर अहमद ने किया था। उस दिन उसने 5 बिलबोर्ड वैन लगवाई हुई थीं। जिसमें फ्री कश्मीर, फ्री खालिस्तान, फ्री असम, फ्री नागालैंड और फ्री मणिपुर लिखा हुआ था। इन वैनों के जरिए वो पूरे लंदन में भारत विरोधी प्रोपेगेंडा का विस्तार कर रहा था। नजीर पर अक्सर पर कश्मीर पर जहरीली बयानबाजी के आरोप लगते हैं। उसने एक बार पीएम मोदी की मौत की दुआ भी थी। साल 2019 में उसने ट्वीट करके लिखा था, “विपक्ष के बीजेपी पर जादू, टोना, तंत्र-मंत्र वाली बातों के बीच, अरुण जेटली मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम गौर, सुषमा स्वाराज, अटल वाजपेयी, गोवा के सीएम मनोहर पर्रिकर सभी का साल भर के अंदर निधन हो गया। अब नरेंद्र मोदी की बारी है।”

पंजाब में इंदिरा गाँधी के हत्यारों की याद में श्रद्धांजलि सभा, SGPC ने ‘शहीद’ बता उनके परिजनों का किया सम्मान

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) अमृतसर ने 6 जनवरी 2022 (गुरुवार) को इंदिरा गाँधी के हत्यारों को याद किया। दरबार साहिब परिसर स्थित गुरुद्वारा झंडा बुंगा में उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान हत्यारों को शहीद बता याद किया गया। कार्यक्रम में उनके परिवारों को भी सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि साल 1989 में 6 जनवरी के ही दिन सतवंत सिंह और केहर सिंह को दिल्ली के तिहाड़ जेल में फाँसी हुई थी।

SGPC अमृतसर ने ट्विटर के माध्यम से इसकी जानकारी भी दी है। ट्वीट में इसे ऐतिहासिक कार्यक्रम बताया गया है। ट्वीट में कहा गया है, “ऐतिहासिक दिन, शहीद भाई सतवंत सिंह और भाई केहर सिंह को फाँसी दी गई। फाँसी के बाद इन शहीदों के शवों का दिल्ली जेल के अंदर अंतिम संस्कार किया गया और पूरे पंजाब में कर्फ्यू लगा दिया गया।”

श्रद्धांजलि सभा में सतवंत सिंह के भाई वारयान सिंह भी थे। उन्हें भी अन्य लोगों के साथ सम्मानित किया गया। उन्हें सम्मान के साथ लबादा ओढ़ाया गया। यह सम्मान ज्ञानी गुरमिंदर सिंह, SGPC सदस्य मंजीत सिंह और वकील भगवंत सिंह सिआलका ने दिया। याद में प्रार्थना प्रेम सिंह द्वारा की गई और ज्ञानी गुरमिंदर सिंह ने पवित्र हुक्मनामा का पाठ किया।

इंदिरा गाँधी के हत्यारों को SGPC द्वारा सम्मानित करने की ये पहली घटना नहीं है। यह आयोजन लगभग हर साल 6 जनवरी को होता है। पिछली कई रिपोर्ट के मुताबिक यह एक सालाना परम्परा के जैसे चल रहा है। वर्ष 2012 में यह शुरू हो कर अब तक जारी है। 31 अक्टूबर 2021 को SGPC ने बेअंत सिंह को भी श्रद्धाजंलि दी थी।

PM मोदी की सुरक्षा में चूक: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार की समिति को जाँच से रोका, हाईकोर्ट से रिकॉर्ड कब्जे में लेने को कहा

पंजाब (Punjab) के फिरोजपुर (Firozepur) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सुरक्षा में चूक को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया है। इससे संबंधित मामले की शुक्रवार (7 जनवरी 2022) को सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को पंजाब यात्रा के दौरान पीएम मोदी की मूवमेंट के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और पंजाब सरकार को अपने मौखिक आदेश में पीएम की सुरक्षा चूक की जाँच कर रही संबंधित समितियों की कार्यवाही को अगले सोमवार तक स्थगित करने के लिए कहा।

केस की सुनवाई के दौरान भारत सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह मामला क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म का है और इसे किसी पर छोड़ा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि NIA के अधिकारी इस केस की जाँच में सहयोग कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन, सिख फॉर जस्टिस के प्रमुख का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें सार्वजनिक रूप से लोगों को ‘xyz’ करने के लिए कहा गया है। यह सीमा पार आतंकवाद का विषय हो सकता है।”

सॉलिसिटर जनरल ने कहा, “जब भी पीएम का काफिला आगे बढ़ता है तो संबंधित राज्य के डीजी से पहले सलाह लेनी होती है और जब वह कहते हैं तभी पीएम का काफिला आगे बढ़ता है। इस मामले में प्रभारी ने वह संकेत दिया था। उन्होंने यह नहीं कहा था कि आगे कोई रुकावट है। हालांँकि, वीडियो के अनुसार, स्थानीय पुलिस चाय का आनंद ले रही थी, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि नाकाबंदी है। ट्रक और ट्रैक्टर से अवरुद्ध फ्लाईओवर पर कोई बड़ा हादसा हो सकता था। यह अंतरराष्ट्रीय शर्मिंदगी का विषय बन जाता।”

मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ कर रही थी। ‘लॉयर वॉयस’ नाम के एक एनजीओ ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कोर्ट की निगरानी में पीएम की सुरक्षा में हुई चूक के मामले की जाँच करने का आग्रह किया था।

एनजीओ की तरफ से कोर्ट में उपस्थित सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह ने एसपीजी ऐक्ट का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला राज्य सरकार के विधि-व्यवस्था के अंतर्गत नहीं आता। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है। इसलिए मामले की जाँच राज्य सरकार नहीं कर सकती। इसे कोर्ट की निगरानी में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी द्वारा कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा सेवानिवृत जज की अगुआई में समिति गठित की गई है, जो कि उपयुक्त नहीं है।

…तो PM मोदी की हत्या की प्लानिंग थी: पंजाब के फ्लाईओवर पर जो हुआ खालिस्तानियों ने 1 साल पहले ही तैयार कर लिया था उसका वीडियो प्लान

पंजाब में 5 जनवरी 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में बड़ी चूक ने कई सवाल खड़े किए हैं। अब सोशल मीडिया में एक एनिमेटेड वीडियो वायरल हो रहा है। इसे संयोग कहा जाए या साजिश, जो कुछ पंजाब में हुआ वैसा ही कुछ इस वीडियो में दिख रहा है। खालिस्तानियों द्वारा बनाया गया यह एनिमेटेड वीडियो करीब साल भर पुराना है। इसमें किसानों को फ्लाईओवर पर प्रधानमंत्री को घेरते और नीचे फेंकते दिखाया गया है। यह भी उल्लेखनीय है कि पंजाब की घटना के बाद आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने इसे ‘खालिस्तान आजादी’ की शुरुआत करार दिया है।

यह वीडियो 1 दिसंबर 2020 को खालिस्तानी संगठन की तरफ से यूट्यूब चैनल पर DHAKKA GAMING पर अपलोड किया गया है। इस वीडियो में फ्लाईओवर पर एक तरफ से पीएम मोदी को सुरक्षाकर्मी के साथ गाड़ी में आते हुए दिखाया गया है और दूसरी तरफ से किसानों के काफिले को। ये किसान ट्रैक्टर पर सवार होकर आते हैं और पीएम मोदी का रास्ता रोक लेते हैं। 

काफिला रोका, लाठी-डंडों से लैस होकर घेरा

एनिमेटेड वीडियो में दिखाया गया है कि पीएम मोदी गाड़ी से उतर जाते हैं। सभी प्रदर्शनकारी जमा होकर उनकी तरफ दौड़ते हैं, जिनसे डरकर वह भागने लगते हैं, तभी ट्रैक्टर पर सवार एक प्रदर्शनकारी उनका रास्ता रोक लेता है। फिर प्रधानमंत्री दूसरी तरफ दौड़ते हैं, लेकिन यहाँ भी एक ट्रैक्टर उनका रास्ता रोक देती है। वह वहाँ से भागना शुरू करते हैं, लेकिन पाते हैं कि प्रदर्शनकारियों ने उन्हें घेर लिया है। वह लोग लाठी-डंडों से लैस होते हैं।

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा है, “YouTube पर एक साल पहले ये एनिमेटेड वीडियो खालिस्तानियों द्वारा डाला गया। इसमें मोदी जी को फ्लाईओवर के ऊपर नकली किसानों द्वारा रोक कर, घेर कर मारने की कोशिश की जाती है। जैसा इस वीडियो में है। हूबहू वैसे ही पंजाब में करने की कोशिश की गई। यह बेहद चिंताजनक है।”

बैरिकेड तोड़े, पैर में रस्सी बाँध फ्लाईओवर के नीचे लटकाया

इसी यूट्यूब चैनल पर 6 दिसंबर 2020 को एक और वीडियो अपलोड किया गया। इसमें ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों को ट्रैक्टर लेकर हुड़दंग मचाते हुए देखा जा सकता है। वह ट्रैक्टर लेकर बैरिकेड को रौंदते नजर आते हैं। इन ट्रैक्टर पर ‘किसान एकता जिंदाबाद’ लिखा होता है। जब किसान बैरिकेड तोड़ देते हैं तो पीएम मोदी को डर कर भागते हुए दिखाया गया है। वह आगे-आगे भाग रहे होते हैं और प्रदर्शनकारी उनके पीछे। इसी दौरान एक ट्रैक्टर उनका रास्ता रोक लेती है और फिर प्रदर्शनकारी उनके पैर में रस्सी बाँध उन्हें फ्लाईओवर के नीचे लटका देते हैं।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में हुई बड़ी चूक की घटना के बाद सिख फॉर जस्टिस’ के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू ने भारत सरकार को परोक्ष रूप से धमकी देते हुए कहा था, “पंजाब ने आजादी की ओर पहला कदम बढ़ाया है। पंजाब की जनता ने आज फैसला कर लिया है। मोदी और उनकी सरकार को ध्यान देना चाहिएकि जब इंदिरा हथियारों के साथ पहुँची थी, तो उन्होंने एहसान वापस कर दिया था (पूर्व पीएम इंदिरा गाँधी की हत्या की तरफ था इशारा)।”

वहीं 3 जनवरी 2022 को अपलोड एक वीडियो में खालिस्तानी संगठन ने पंजाब में पीएम मोदी का विरोध करने के लिए ‘किसानों’ को भड़काया था और इनाम की भी घोषणा की थी। उसने वीडियो में कहा था, “पीएम मोदी 5 जनवरी को पंजाब में आ रहा है। ये 3700 किसान भाइयों की मौतों का जिम्मेदार है। अभी उनकी लाश ठंड भी नहीं हुई और ये तुम्हारे बीच 5 जनवरी को आकर वोट माँगने वाला है। इसका विरोध करना पड़ेगा। इसे जूती दिखाओ और 1 लाख डॉलर (74,41,015 रुपए) पाओ। ये रकम सिख फॉर जस्टिस देगी।”

बता दें कि बुधवार को, पीएम मोदी 42,750 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का उद्घाटन करने और फिरोजपुर में एक रैली को संबोधित करने गए थे। लेकिन सुरक्षा चूक के कारण उन्हें वापस दिल्ली लौटना पड़ा। गृह मंत्रालय के अनुसार, पीएम मोदी खराब मौसम के कारण हेलिकॉप्टर के बजाय सड़क मार्ग से राष्ट्रीय शहीद स्मारक का दौरा करने वाले थे। हुसैनीवाला से लगभग 30 किमी दूर, कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के काफिले को ब्लॉक कर दिया, जिसके कारण पीएम मोदी 15-20 मिनट तक फ्लाईओवर पर फँसे रहे। इसके बाद वापस लौट आए।

‘अकेले मरा तो वह मेरी पत्नी-बेटियों को नहीं छोड़ेगा’: परिवार के साथ जिंदा जले रामकृष्ण का Video, पत्नी ‘माँग’ रहा था MLA का बेटा

तेलंगाना के भद्रादरी-कोठागुडम जिले के पलोंचा कस्बे में दो जनवरी 2022 की रात एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और दो जुड़वा बेटियों के साथ आग लगा ली थी। इस मामले में अब एक सेल्फी वीडियो सामने आया है​, जिससे पता चला है कि इस व्यक्ति की पत्नी को लेकर एक विधायक के बेटे ने अपमानजनक टिप्पणी की थी। अप्रत्यक्ष तौर पर उसके साथ सेक्स का दबाव डाला था। ये विधायक हैं, वी वेंकटेश्वर राव (MLA Vanama Venkateswara Rao)। वे सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) से जुड़े हैं और इस इलाके में उनका खासा दबदबा बताया जाता है। उनका आरोपित बेटा वनमा राघव राव (राघवेंद्र) फरार बताया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि 45 वर्षीय रामकृष्ण ने अपनी 12 वर्षीय दो जुड़वा बेटियों साहित्य और सहिति तथा 40 वर्षीय पत्नी लक्ष्मी के साथ आत्मदाह कर लिया था। इस घटना में दंपती और उनकी एक बेटी की मौत हो गई थी। एक अन्य बेटी की बाद में इलाज के दौरान कोठागुडम सरकारी अस्पताल में मौत हो गई।

जाँच के दौरान पुलिस को मृतक का सुसाइड नोट भी मिला था। लेटर में भी राघवेंद्र का जिक्र था। साथ ही मृतक ने अपनी माँ सूर्यवती और बहन माधवी का भी नाम लिखा था। इसमें कहा गया था कि माँ और बहन ने मृतक को पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी नहीं दी। उस पर 30 लाख रुपए का कर्ज था और उसको किराया भी देना पड़ता था। इस मामले के समाधान के दौरान उसकी बहन ने स्थानीय विधायक के बेटे से उस पर दबाव डलवाया। विधायक के बेटे ने मृतक से ‘समस्या के समाधान के बदले’ कथित तौर पर अपनी पत्नी को पेश करने को कहा था।

वायरल हो रहे वीडियो में मृतक रामकृष्णन को कहते सुना जा सकता है, “MLA के बेटे वनमा राघव (Vanama Raghava) ने कई परिवारों को बर्बाद कर दिया है। ऐसे लोगों से कोई सुरक्षित नहीं है। इन्हे बड़ा न बनने दें और न ही इनके अत्याचारों को सहन करें। वनमा राघव ने जो कुछ भी मेरी पत्नी के लिए कहा उसको कोई भी पति सुन नहीं सकता। वह मेरी पत्नी को मेरे बच्चों के बिना ही हैदराबाद बुला रहा था। अगर मैंने अकेले आत्महत्या की तो वह मेरी पत्नी और बच्चों को नहीं छोड़ने वाला। इसलिए मैंने सबके साथ मरने का फैसला किया है। मेरे बुरे हालातों में मेरी माँ और बहन ने मुझे प्रताड़ित किया। एक साथ मैं सभी से नहीं लड़ सकता।”

इस मामले में शिकायतकर्ता मृतक रामकृष्ण के साले हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि विधायक के बेटे वनमा राघव के समर्थकों ने फोन कर मुकदमा वापस लेने की धमकी दी है। उनको पैसे का भी लालच दिया जा रहा है। इस मामले में वनमा राघव के साथ मृतक की माँ और बहन को भी आरोपित किया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपितों पर धारा 302, 306 & 307 IPC के तहत केस दर्ज किया गया है। आरोपितों की तलाश में पुलिस की 8 टीमें लगाई गई हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वनमा राघव ने खुद को निर्दोष बताया है। उन्होंने बताया कि उनका नाम बीच में क्यों आया उन्हें ये भी पता नहीं। इसी के साथ उन्होंने इस पूरे मामले को अपने राजनैतिक कैरियर के खिलाफ एक साजिश बताया है। वनमा राघव की गिरफ्तारी पर अभी संदेह है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में वनमा राघव की गिरफ्तारी की खबर प्रकाशित हुई है। ETV का दावा है कि खुद विधायक ने अपने बेटे को पुलिस के हवाले कर दिया है। साथ ही बेटे को बेगुनाह बताते हुए पुलिस की जाँच में पूरा सहयोग करने की भी बात कही है। इस मामले में विपक्षी दलों ने 7 जनवरी कोठागुडम विधानसभा में बंद का आह्वान किया है।

‘इस्लामी आतंकियों का पक्ष ले रहा ट्विटर’: पत्रकार आरती टिक्कू ने Twitter को कोर्ट में खींचा, भाई की जान को खतरा बताने पर अकाउंट कर दिया था लॉक

न्यूज वेबसाइट ‘द न्यू इंडियन’ की को-फाउंडर पत्रकार आरती टिक्कू सिंह ने ट्विटर द्वारा अपना अकाउंट सस्पेंड करने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने ट्विटर के फैसले को रद्द करने की माँग करते हुए याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने कहा है कि संविधान के तहत उनके अधिकारों का उल्लंन हुआ है। 

याचिका में कहा गया है कि ट्विटर उनके अकाउंट को लॉक कर इस्लामी आतंकवादियों का पक्ष ले रहा है। ट्विटर की कार्रवाई भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत उनके अधिकारों का उल्लंघन करती है और सोशल मीडिया कंपनी के फैसले को रद्द करने की माँग की है।

रिपब्लिक को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “मैंने एक रिट याचिका के साथ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है, जिसमें भारत सरकार से मेरे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन के मौलिक अधिकार की रक्षा करने के लिए कहा गया है। सरकार मेरे प्रति जवाबदेह है। यह सिर्फ आरती टिक्कू बनाम ट्विटर के बारे में नहीं है, यह हर उस भारतीय नागरिक के बारे में है, जिसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ट्विटर द्वारा किसी न किसी बहाने से रोक दी जाती है। कभी-कभी यह सनकी होता है, कभी-कभी यह एल्गोरिदम होता है और कभी-कभी यह इस्लामी आतंक के शिकार लोगों के खिलाफ ट्विटर के अपने पूर्वाग्रह होते हैं।”

बता दें कि 15 दिसंबर 2021 को अपने भाई को ‘मौत की धमकी’ देने वाले इस्लामी आतंकवादियों का एक वीडियो शेयर करने के बाद ट्विटर ने आरती के अकाउंट को सस्पेंड कर दिया था।

ट्विटर को टैग करते हुए एक ट्वीट में, उन्होंने आरोप लगाया कि ट्विटर इंडिया ‘पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों’ को भारतीयों को धमकाने और कश्मीरी पंडितों के खिलाफ साजिश के सिद्धांतों को गढ़ने के लिए ‘ट्विटर स्पेस’ फीचर का इस्तेमाल करने की अनुमति दे रहा है। ट्वीट में, उन्होंने ‘इनोसेंट किलिंग्स बंद करो’ (‘Stop Innocent Killings’) टाइटल वाले एक सत्र की एक स्क्रीन रिकॉर्डिंग पोस्ट की थी, जिसमें सदस्यों को आरती के भाई साहिल टिक्कू को निशाना बनाते हुए देखा गया। साहिल श्रीनगर का रहने वाले हैं और भारतीय जनता युवा मोर्चा की जम्मू-कश्मीर यूनिट के प्रवक्ता भी हैं।

आरती सिंह टिक्कू का ट्वीट

ट्विटर ने साहिल टीकू को लेकर फैलाई गई नफरत के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इसके उलट प्लेटफॉर्म ने ‘नियमों का उल्लंघन’ बताते हुए आरती के ट्वीट को डिलीट कर दिया। बाद में 15 दिसंबर को ट्विटर ने हेटफुल स्पीच के खिलाफ अपने नियमों का हवाला देते हुए उनके अकाउंट को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया। 

चूँकि उनका ट्विटर अकाउंट लॉक है, आरती टिक्कू सिंह ने अब ट्विटर के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और सरकार से उनके अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन के मौलिक अधिकार की रक्षा करने के लिए कहा है। वकील मुकेश शर्मा के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि जिस तरह से उनके भाई को कुछ सदस्यों द्वारा निशाना बनाया गया था, वह जनवरी 1990 की याद दिलाता है। हालाँकि, वह यह देख कर चौंक गईं कि ट्विटर ने उन्हें इस ट्वीट के लिए यह कहते हुए नोटिस दिया कि यह उसके नियमों के खिलाफ है। 

टिक्कू ने ट्विटर के आरोप पर कहा है कि उनके ट्वीट ने स्पष्ट रूप से किसी समुदाय के खिलाफ हिंसा या घृणा को नहीं उकसाया गया है। वह सिर्फ अपने भाई के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की रिपोर्ट कर रही थी। साहिल टिक्कू को इस्लामवादियों द्वारा ऑनलाइन धमकियाँ मिलती रहती हैं। जिसके बाद उन्होंने 18 दिसंबर को श्रीनगर पुलिस में एक FIR दर्ज की थी। ट्विटर स्पेस से सामने आए वीडियो में, कुछ सदस्यों को टिक्कू को टारगेट करने की बात कहते हुए देखा जा सकता है। 

माहौल बनाने के लिए ‘थूकना’ पड़ता है… जावेद हबीब का Sorry वाला Video देखा क्या: बालों में थूकने पर FIR, महिला आयोग भी सख्त

जावेद हबीब (Jawed Habib) का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह एक महिला के बालों (Spitting On Hair) में थूकता नजर आया था। चौतरफा घिरने के बाद हबीब ने अब इस करतूत के लिए माफी माँगी है। मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर थाना में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी उसके खिलाफ कार्रवाई को लेकर उत्तर प्रदेश और दिल्ली की पुलिस को पत्र लिखा है।

वायरल वीडियो उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का था। जावेद हबीब ने होटल किंग विला में आयोजित वर्कशॉप में डेमोस्ट्रेशन देते हुए पूजा गुप्ता के बालों में थूक दिया था। वीडियो वायरल होने के बाद पूजा गुप्ता भी सामने आईं थी और हबीब के करतूतों के बारे में बताया था।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मामले पर संज्ञान लिया है। आयोग की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने उत्तर प्रदेश के DGP और दिल्ली पुलिस से जाँच करवा कर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

एक इंस्टाग्राम पोस्ट में जावेद हबीब ने सफाई देते हुए इस घटना को लेकर माफी माँगी है। वीडियो में हबीब ने कहा है, “मेरे सेमिनार से कुछ लोगों को ठेस पहुँची है। हमारे सेमिनार प्रोफेशनल सेमिनार होते हैं। ये हमारे लम्बे शो होते हैं। जब शो लम्बा होता है तो थोड़ा माहौल बनाना पड़ता है। पर अगर आपको ठेस पहुँची है तो Sorry, मैं दिल से माफ़ी माँगता हूँ।”

इस बीच जिस पूजा गुप्ता नाम की महिला के बालों में हबीब ने थूका था वो उन्होंने बताया है, “मुजफ्फरनगर में अमान सर के माध्यम से एक सेमिनार था। जावेद हबीब को मुख्य अतिथि के तौर पर वंडर सॉफ्ट कम्पनी वालों ने बुलाया था। कार्यक्रम होटल किंग विला में था जो सुबह 10.30 से शुरू हुआ था। वहाँ पर जावेद हबीब से मैंने सवाल किया तो उन्होंने मुझे पॉर्लर चलाने वाली कहा। बाद में हबीब ने कटिंग सिखाने के लिए मुझे स्टेज पर बुलाया। सबसे पहले उन्होंने मेरे सिर पर पुश किया तो मैंने उन्हें रोका। इसके बाद कटिंग शुरू कर मेरे सिर में 2 बार थूक दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर पॉर्लर में पानी कम हो तो कस्टमर के बाल थूक कर भी काट सकते हो। अपने थूक की मात्रा को बताते हुए उन्होंने कहा कि मेरे थूक में कितना दम है ये देखो।”

पूजा गुप्ता ने खुलासा किया, “वीडियो मेरे पति संजीव गुप्ता ने बनाई है। उनके पास सबूत है। जब मैं नीचे आई तब उनके (जावेद हबीब) के सहयोगी ने इसे एक मज़ाक कहा। जब मैंने इस हरकत का विरोध किया तो वहाँ किसी ने भी मेरा साथ नहीं दिया। ऐसे टिप्स अगर हम अपने पॉर्लर में इस्तेमाल करेंगे तो हमसे बाल कटवाने कोई नहीं आएगा। हम वहाँ सीखने गए थे न कि अपनी बेइज्जती करवाने। उन्होंने मेरा कैरियर चौपट कर दिया है।”

गौरतलब है कि वायरल वीडियो में हबीब कुर्सी पर बैठी महिला के बालों को सेट करते नजर आ रहा है। महिला के बालों को गंदा बताते हुए शैम्पू करने को कह रहा है। इसी क्रम में वो आगे पानी कम होने की बात करते हुए महिला के बालों पर थूक देता है। साथ ही कहता है, “इस थूक में जान है।” इस दौरान वहाँ मौजूद तमाम लोग तालियाँ बजाते हँसते दिखाई देते हैं।

इस बीच जावेद हबीब का एक और वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में भी वो एक लड़की के बालों पर थूकता नजर आ रहा। वीडियो में भी थूकने के बाद वहाँ मौजूद तमाम लोग तालियाँ बजाते और हँसते हुए दिखाई दे रहे हैं।

गौरतलब है कि जावेद हबीब के कुल 846 सैलून हैं। उनके लगभग 15 लाख से अधिक ग्राहक 24 राज्यों और 110 शहरों में हैं।