इटली से पंजाब आई एक फ्लाइट के 125 यात्रियों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। इटली से आई यह चार्टर्ड फ्लाइट अमृतसर में उतरी थी। इस फ्लाइट में कुल 179 यात्री सवार थे। एयरपोर्ट पर सभी यात्रियों का कोरोना टेस्ट किया गया, जिसमें 125 यात्री संक्रमित मिले। गुरुवार (6 जनवरी 2022) को एयरपोर्ट डायरेक्टर वीके सेठ ने यह जानकारी दी है।
Punjab | 125 passengers of an international chartered flight from Italy have tested positive for Covid-19 on arrival at Amritsar airport pic.twitter.com/YGBpArLC0T
वहीं, कई मीडिया रिपोर्ट में इस फ्लाइट को एयर इंडिया का बताया गया था। बाद में एयर इंडिया ने ट्वीट कर इसे खारिज करते हुए बताया कि उसका रोम से फिलहाल किसी उड़ान का संचालन नहीं होता। एएनआई ने अमृतसर एयरपोर्ट के डायरेक्टर वीके सेठ के हवाले से बताया है कि जिस फ्लाइट से उतरे यात्री संक्रमित पाए गए हैं वह एक इंटरनेशनल चार्टर्ड फ्लाइट है।
#FlyAI : Several Media houses has reported that Passengers of Air India flight from Rome to Amritsar have been tested covid positive. This is wrong and baseless. Air India doesn't operate any flight from Rome currently.
बता दें कि पंजाब में कोरोना संक्रमण की दर बढ़कर 7.95 प्रतिशत पर पहुँच गई है। सक्रिय मामले भी 4,434 दर्ज किए गए हैं। पटियाला, मोहाली और पठानकोट जिलों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। राज्य में अब तक 1,69,05,814 लोगों के नमूने लिए जा चुके हैं, जिनमें 6,08,723 लोग संक्रमित मिले। वहीं, राज्य में अब तक 16,657 लोग कोरोना के कारण अपनी जान गँवा चुके हैं।
Correction | 125 passengers of an international chartered flight from Italy have tested positive for Covid-19 on arrival at Amritsar airport. Total passengers on the flight were 179: VK Seth, Amritsar Airport Director pic.twitter.com/AOVtkYmQiy
भारत में गुरुवार (6 जनवरी 2022) को ओमिक्रॉन के एक दिन में सर्वाधिक 495 नए मामले सामने आए, जिसके बाद इस वैरिएंट से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 2,630 हो गई है। ओमिक्रॉन के महाराष्ट्र में सबसे अधिक 797 मामले सामने आए, इसके बाद दिल्ली में 465, राजस्थान में 236, केरल में 234, कर्नाटक में 226, गुजरात में 204 और तमिलनाडु में 121 मामले सामने आए।
मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक, भारत में एक दिन में कोविड-19 के 90,928 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3,51,09,286 हो गई है। मंत्रालय ने बताया कि देश में 325 और संक्रमितों की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 4,82,876 हो गई है।
केंद्र सरकार की ओर से कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार को देखते हुए राज्यों को लगातार दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। बुधवार को ही केंद्र ने नौ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों (तमिलनाडु, पंजाब, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मिजोरम, मेघालय, जम्मू-कश्मीर और बिहार) को कोरोना संबंधी जाँच बढ़ाने के लिए कहा है, ताकि संक्रमण ना फैले।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बागी भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी को बड़ा झटका दिया है। गुरुवार (6 जनवरी 2022) को अदालत ने स्वामी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया को रद्द करने और प्रतिवादी अधिकारियों की भूमिका और कामकाज की जाँच की माँग की गई थी। मामले की सुनवाई जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ ने की।
Breaking: Delhi High Court DISMISSED Subramanian Swamy’s plea challenging disinvestment of Air India.@Swamy39#AirIndia
बता दें कि स्वामी ने एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया को रद्द करने और अधिकारियों द्वारा इसे दी गई मँजूरी पर रोक लगाने के अनुरोध के साथ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। केंद्र सरकार ने भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की अर्जी का ये कहते हुए विरोध किया था कि टाटा संस पूरी तरह से भारतीय कंपनी है, जिसने एयर इंडिया को खरीदा है, लिहाजा सुब्रमण्यम स्वामी के आरोप पूरी तरह गलत है।
फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से याचिका खारिज होने की जानकारी दी और विस्तृत आदेश जल्द ही हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा। सुब्रमण्यम स्वामी ने इसकी पुष्टि करते हुए ट्वीट किया कि वह अदालत द्वारा आदेश अपलोड किए जाने के बाद इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार करेंगे।
The Delhi HC dismisses my WP on Air India. But reasoned Order is being uploaded. After reading that we shall decide on going to SC
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद 4 जनवरी को मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया था। याचिकाकर्ता सुब्रमण्यम स्वामी ने याचिका में आरोप लगाया था कि कर्ज में डूबी राष्ट्रीय विमानन कंपनी में विनिवेश की बोली प्रक्रिया मनमानी, भ्रष्ट, दुर्भावनापूर्ण, असंवैधानिक और जनहित के खिलाफ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि टाटा संस के पक्ष में पूरी प्रक्रिया में धाँधली की गई थी।
राज्यसभा सांसद ने एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया से संबंधित सभी कार्रवाइयों और फैसलों को रद्द करने की माँग की थी। उन्होंने इस प्रक्रिया में अधिकारियों की भूमिका और कामकाज की सीबीआई जाँच की माँग करते हुए कहा था कि विस्तृत जाँच रिपोर्ट अदालत को सौंपी जानी चाहिए।
हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह विनिवेश के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि केवल उस प्रक्रिया के खिलाफ हैं, जिसके तहत टाटा संस को विजेता बोलीदाता के रूप में चुना गया था। उन्होंने हाईकोर्ट में कहा था, ‘मैं विनिवेश के पक्ष में हूँ। मैंने हमेशा ओपन मार्केट के विचार में विश्वास किया है।”
स्वामी के अनुसार, प्रक्रिया में एक अन्य बोली लगाने वाला स्पाइसजेट बोली लगाने के लिए योग्य नहीं था, क्योंकि एयरलाइन दिवालियापन की प्रक्रिया मद्रास हाईकोर्ट में चल रही है। इसलिए टाटा एकमात्र बोली लगाने वाला था और ऐसी परिस्थिति में बोली नहीं हो सकती है।
हालाँकि, केंद्र ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि विनिवेश एक नीतिगत फैसला है। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि एयर इंडिया लगातार घाटे में चल रही है और सरकार अधिक नुकसान नहीं उठा सकती है। टाटा संस ने भी याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि विजेता बोली लगाने वाला 100% भारतीय कंपनी है।
पिछले साल अक्टूबर में टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी टैलेस प्राइवेट लिमिटेड को घाटे में चल रही एयर इंडिया का अधिग्रहण करने के लिए विजेता बोलीदाता के रूप में चुना गया था। टाटा संस ने एयर इंडिया के लिए 18,000 करोड़ रुपए की विजेता बोली लगाई थी, जिसमें 15,300 करोड़ रुपए का कर्ज और 2700 करोड़ रुपए का नकद शामिल है।
बेंगलुरु के एक स्कूल में एक बच्ची को सजा देने के लिए उससे इस्लामी ढंग से प्रार्थना करवाई गई। कथिततौर पर ऑर्किड इंटरनेशनल स्कूल (Orchid International School) की मैथ टीचर ने छात्रा से एक सवाल हल न होने पर कहा कि वो अल्लाह के नाम से दुआ पढ़े और इस बारे में किसी को कुछ न बताए। स्कूल पर लगे आरोपों को प्रबंधन द्वारा नकारा गया है।
बता दें कि बेंगलुरु स्कूल में ‘शिक्षा जिहाद’ से संबंधी ये मामला विक्रम सिम्हा द्वारा रिकॉर्ड की गई वीडियो के बाद चर्चा में आया जिसमें उनकी बेटी बता रही थी कि कैसे उनकी मैथ टीचर उन्हें हाथों को आधा खोलकर (कटोरे की तरह) अल्लाह से दुआ माँगने के लिए कहती है।
a teacher named Sarika Rana from @Orchids_School BTM Layout, Bengaluru is has forced kids to Pray to All@ claiming All@h is a better god.@swati_gs@ShefVaidya
बच्ची वीडियो में कहती हैं, “मैथ की प्रॉब्लम बहुत कन्फ्यूज करने वाली थी। हम उसे नहीं कर पा रहे थे। इसलिए टीचर ने कहा कि हम अल्लाह से दुआ माँगे। हमने बताया कि हम हिंदू हैं और अल्लाह की प्रार्थना नहीं कर सकते। इस पर टीचर ने हमें डांटा और हाथ को आधा खोलकर दुआ करने को कहा।” बच्ची के मुताबिक, सारिका राणा नाम की टीचर ने उन्हें कहा था कि अल्लाह बेहतर भगवान हैं और वो सब उन्हीं से दुआ माँगें।
स्कूल का बयान
स्कूल ने बच्ची के इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वीडियो में बच्ची झूठ बोल रही है और स्कूल के शिक्षक किसी भी तरह के मजहबी अभ्यास का प्रचार-प्रसार नहीं करते। स्कूल के आधिकारिक बयान के अनुसार, “हमने माता-पिता से बात की है। ऐसी कोई घटना मैथ क्लास में नहीं हुई क्योंकि टीचर अपने विषय पर ही फोकस करती है। उसने कभी मजहब के बारे में नहीं कहा।”
ऑर्किड इंटरनेशनल स्कूल ने कहा, “स्कूल प्रशासन ने इस मामले में पता लगाने के लिए तेजी से गहन जाँच की, जिसके बाद पता चला कि शिक्षिका खुद भी उस धर्म का पालन नहीं करती जिसे बढ़ावा देने की बात कही जा रही है। बच्चे और माता-पिता द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। हमने क्लास के सीसीटीवी फुटेज चेक किए हैं और दूसरे बच्चों से भी बात की है। उन सभी ने ऐसी किसी भी घटना के होने से इनकार किया है।”
वहीं हाथ को आधा खोलकर दुआ पढ़ने की क्रिया को स्कूल ने व्यायाम कार्य कहा है। स्कूल ने कहा, “यह ऑनलाइन सत्रों के दौरान आयोजित दो मिनट का नेत्र व्यायाम है, जिसका उद्देश्य बच्चों की आँखों को स्क्रीन से आराम देना है।”
विक्रम सिम्हा का आरोप
बता दें कि विक्रम सिम्हा की एक अन्य वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद स्कूल ने अपना ऑफिशियल ट्विटर हैंडल लॉक कर दिया है। सिम्हा ने कहा कि स्कूल ने जो भी बयान दिया है वो सच नहीं है। हालाँकि ये बात सही है कि उनकी स्कूल प्रशासन से बात हुई लेकिन ये भी सच है कि उनकी बेटी को स्कूल ने नहीं बोलने दिया।
The frightened kid clearly calls out the Teacher’s name as Sarika & her shameless Wahhabi campaign in spite of kids telling “We are Hindus!” So stop this makeover & accept it & take action against the Teacher. We are not fools to believe your stupid PR.pic.twitter.com/jh18QwySayhttps://t.co/RTSLbljTTr
अन्य वीडियो में उन्होंने कहा कि स्कूल प्रिसिंपल ने बच्चों की बात को सुना ही नहीं। वहीं छात्रा ने भी सारिका राणा द्वारा कही गई बात को बेखौफ होकर बताया। उसने कहा कि टीचर ने कहा था अल्लाह एक बेहतर भगवान हैं। उसने किसी प्रकार के व्यायाम क्रिया से इनकार किया। उसने कहा कि उसे मालूम है कि 2 मिनट वाली आँखों की एक्सरसाइज कैसे होती है जिसमें हाथ रगड़कर आँखों पर रखना होता है लेकिन टीचर ने कटोरे की तरह हाथ को करवाया और अल्लाह से दुआ माँगने को कहा।
अब इस वीडियो पर कई बीजेपी नेता और कार्यकर्ता बच्ची के समर्थन में आए हैं और स्कूल पर टीचर के विरुद्ध कार्रवाई करने को कह रहे है। हालाँकि पुलिस द्वारा इस मामले पर संज्ञान लिया जाना अभी बाकी है।
इंदौर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने 67 साल के उस पति को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है, जिस पर 27 साल छोटी पत्नी को यौन प्रताड़ना देने का आरोप है। आरोप है कि पति शादी के पहले दिन से ही महिला के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध स्थापित करता था। उसके प्राइवेट पार्ट को दाँत से काटता था। कोर्ट ने उसकी नकली बत्तीसी जब्त करने का भी आदेश दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इंदौर की रहने वाली महिला की शादी 28 अक्टूबर 2021 को गुजरात के एक ज्वेलर से हुई थी। महिला की यह दूसरी शादी है, जिसे उसने अपने रिश्तेदारों के दबाव में आकर किया। शादी के बाद कुछ दिनों तक महिला ने प्रताड़ना को बर्दाश्त किया, लेकिन धीरे-धीरे उसके पति की हैवानियत बढ़ती ही गई। एक बार पति उसे लेकर उदयपुर गया। वहाँ भी सेक्स के दौरान यही वही हरकत की। उसके शरीर और प्राइवेट अंगों को दाँतों से काट डाला।
दिसंबर 2021 की शुरुआत में किसी तरह से पति के चंगुल से निकलकर पीड़िता इंदौर पहुँची। वहाँ उसने महिला थाने में जाकर अपनी आपबीती बताई। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आऱोपित के खिलाफ अननैचुरल सेक्स की धारा के तहत केस दर्ज कर लिया।
नकली दाँतों से करता था गंदी हरकत
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसके पति के दाँत नहीं है। उसने अपने मुँह में नकली दाँत लगवा रखे हैं। इसके साथ ही उसने पुलिस को अपने पति द्वारा दिए गए जख्मों को भी दिखाया। पीड़िता के मुताबिक, ज्वेलर की पहली पत्नी की मौत कोरोना के दौरान हो गई थी। वह भी लंबे समय से अपने पति से अलग रह रही थी। इस कारण रिश्तेदारों के दबाव के कारण उसने उससे शादी की।
परिवार को खत्म करने की देता था धमकी
दलित समाज से ताल्लुक रखने वाली पीड़िता ने कोर्ट को बताया है कि जब भी वह अपने पति की इस हरकत का विरोध करती थी तो वो कहता था कि मैं बहुत बड़ा ज्वेलर हूँ। अगर पुलिस या अपने परिवार को बताया तो गुजरात से ही इंदौर में तेरे परिवार को खत्म करवा दूँगा। बहरहाल, आरोपित 7 दिसंबर से ही फरार चल रहा है और इंदौर जिला अदालत ने पुलिस को जल्द से जल्द उसे गिरफ्तार करने का आदेश दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के पंजाब (Punjab) दौरे के दौरान उनकी सुरक्षा में जान-बूझ कर चूक की गई। जब पीएम की काफिला हुसैनीवाला से करीब 30 किमी दूर ही था तो एक फ्लाईओवर पर कथित किसान प्रदर्शनकारियों ने ने 20 मिनट तक रोके रखा। ‘टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट’ के मुताबिक, भारतीय किसान यूनियन (Bhartiya kisan union) ने इस प्रदर्शन की जिम्मेदारी ली है। बीकेयू ने इस बात को स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री के रूट की जानकारी लीक की गई थी। इस मामले में पूरा देश एक होकर पंजाब सरकार की जवाबदेही पर सवाल कर रहा है, लेकिन वामपंथी मीडिया पोर्टल ‘द क्विंट’ ने एक आर्टिकल के जरिए इस सुरक्षा चूक को झूठे तथ्यों के आधार पर जस्टिफाई कर रहा है।
पीएम मोदी के दौरे पर द क्विंट ने अपने ‘पत्रकार’ आदित्य मेनन की ‘पीएम मोदीज पंजाब विजिट कैंसिल्ड: 2 एंगल्स टू द फियास्को- सिक्योरिटी एंड पॉलिटिक्स’ शीर्षक से एक रिपोर्ट को प्रकाशित किया। मेनन ने पीएम मोदी की सुरक्षा में हुई चूक को जस्टिफाई करने के लिए झूठ बोला और कहा कि पीएम मोदी पाकिस्तान की सीमा से लगे इलाके में 20 मिनट तक फँसे नहीं रहे।
साल 2017 की घटना का हवाला देते हुए आदित्य मेनन ने दावा किया कि उस दौरान नोएडा में करीब 2 घंटे तक प्रधानमंत्री का काफिला जाम में फँसा रहा, लेकिन तब उनकी जान को कोई खतरा नहीं बताया गया था। इस आर्टिकल को आदित्य मेनन और क्विंट ने अपने हैंडल से ट्विटर पर शेयर किया है।
द क्विंट के पत्रकार के द्वारा किया ट्वीट
मेनन के इस लेख को ‘द वायर’ की जानी-पहचानी लेफ्ट-लिबरल पत्रकार रोहिणी सिंह समेत अन्य लिबरल्स ने भी सोशल मीडिया पर शेयर किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुरक्षा खतरे को नकारते हुए पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार को इस मामले में बचाने की कोशिश की।
रोहिंणी सिंह के द्वारा किया गया ट्वीट
रोहिणी सिंह ने आदित्य मेनन के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए ‘नोएडा के चैनलों’ पर पीएम मोदी की जान को खतरा बताते हुए बदनाम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तथ्य यह है कि पीएम मोदी का काफिला ‘नोएडा में 2 घंटे से अधिक समय तक फँसा रहा’ और यह एक ‘बेहद महत्वपूर्ण बिंदु’ था, लेकिन बाकी मीडिया ‘पंजाबियों को राष्ट्र-विरोधी’ दिखाने की कोशिश कर रहा था।
द क्विंट के मुताबिक, 2017 में पीएम मोदी 2 घंटे ट्रैफिक में फँसे रहे, लेकिन किसी ने उनकी जान को खतरा होने का दावा नहीं किया। अब वही मीडिया कॉन्ग्रेस सरकार पर सवाल उठा रही है, क्योंकि उन्हें पंजाबियों से नफरत है।
द क्विंट के द्वारा पब्लिश किया गया आर्टिकल
दरअसल इस घटना का जिक्र करके आदित्य मेनन ने झूठी खबर फैलाने की कोशिश की है कि पंजाब में यह घटना होने के कारण इतना अधिक तूल दिया जा रहा है, जबकि ऐसा ही उत्तर प्रदेश में हुआ था तो किसी ने भी इस पर आपत्ति जाहिर नहीं की।
झूठ बोल रहा द क्विंट
पीएम मोदी के काफिले के 2 घंटे तक फँसने को लेकर द क्विंट का यह आर्टिकल पूरी तरह से झूठ पर आधारित है। सच ये है कि साल 2017 में पीएम मोदी का काफिला केवल 2 मिनट के लिए ट्रैफिक में फँसा था।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उस दौरान सुरक्षा में चूक के कारण दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। दरअसल, पुलिसकर्मियों ने गलत टर्न ले लिया था, जिसके कारण पीएम मोदी का काफिला महज दो मिनट के लिए ट्रैफिक में फँस गया था।
साभार: इंडियन एक्सप्रेस
खास बता यह है कि 2017 में नोएडा में जो हुआ और पंजाब में जो हुआ उसमें बहुत बड़ा अंतर है। साल 2017 में जो पीएम मोदी के काफिले के साथ हुआ, उसमें पुलिसकर्मियों की गलती थी। वहीं, पंजाब में वहाँ की पुलिस ने पीएम मोदी के काफिले के रूट को खुद ही लीक कर दिया। इस दौरान वायरल वीडियो में पंजाब पुलिस के जवान प्रदर्शनकारियों के साथ चाय की चुस्कियाँ लेते देखे गए थे।
आंदोलकारियों को पहले से पता था पीएम मोदी का रूट
कथित प्रदर्शनकारियों में से एक स्थानीय गवाह ने खुलासा किया है कि आंदोलनकारियों को पहले से इस बात की जानकारी दे दी गई थी कि प्रधानमंत्री का काफिला किस रूट से होकर गुजरने वाला है। इस सीक्रेट इन्फॉर्मेशन को पंजाब पुलिस और स्थानीय प्रशासन तक सीमित होना चाहिए था, लेकिन यह लीक की गई। वहीं, प्रदर्शनकारियों को हटाने के मुद्दे पर भी पंजाब पुलिस ने झूठ भी बोला। पुलिस का कहना है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की थी, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सके। वहीं, प्रत्यक्षदर्शी प्रदर्शनकारी के मुताबिक, पुलिस ने रास्ता खाली कराने की कोशिश ही नहीं की।
जब प्रदर्शनकारी से पूछा गया कि क्या किसी ने बातचीत या बलपूर्वक प्रदर्शनकारियों को सड़क खाली करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की तो उसने कहा, “अगर पुलिस ऐसा करने की कोशिश भी करती तो उसे अच्छी तरह से पता था कि उसके साथ क्या होने वाला था, क्योंकि किसानों की संख्या पुलिसवालों से अधिक थी। किसानों को वहाँ से हटाने के लिए पर्याप्त पुलिस फोर्स नहीं थी। हमने मोदी के प्रशंसकों को भी वहाँ से निकलने नहीं दिया। हम ये जानते थे कि अगर उन्हें ऐसा करने दिया तो वो कुछ न कुछ जरूर करते। हम (किसान) जानते थे कि पीएम सिर्फ इसी रास्ते से गुजरेंगे और हम नहीं चाहते थे कि वे अपनी रैली या कार्यक्रम में पहुँचें।”
पंजाब सरकार ने ही पीएम मोदी के रूट को लेकर जानकारी लीक की है, इसका इस बात से पता चलता है कि राज्य के सीएम ने इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, लेकिन उन्होंने कई विरोधाभासी बयान दिए। इससे स्पष्ट होता है कि वो इस मुद्दे से बचने की कोशिश कर रहे थे। इसके अलावा, टाइम्स नाऊ को दिए इंटरव्यू में भी बीकेयू पीएम मोदी के रूट की जानकारी लीक किए जाने की बात को स्वीकार किया था। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में खलल डालने से पहले प्रदर्शन कर रहे कथित किसान बसों और भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला करते दिखे।
लोगों ने द क्विंट के झूठ का किया पर्दाफाश
द क्विंट के इस झूठ का पर्दाफाश करते हुए कई ट्विटर यूजर ने वामपंथी पोर्टल की पोल खोल दी। एक्टिविस्ट अंशुल सक्सेना ने ट्वीट कर बताया कि द क्विंट ने अपनी रिपोर्ट में झूठ बोला है।
To defend PM’s security breach in Punjab, The Quint spread fake news that in 2017, PM’s convoy was stuck in traffic for over 2 hours in UP’s Noida.
Fact is PM’s convoy was stuck in traffic for 2 minutes.
अपनी बेइज्जती होती देख द क्विंट ने चुपचाप अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया।
क्विंट ने डिलीट किया ट्वीट
इसके साथ ही द क्विंट ने अपनी रिपोर्ट को अपडेट करते हुए उसमें से ‘2 घंटे’ वाले अपने झूठ को हटा दिया। हालाँकि, बाकी उसने उसी तरह से अपने एजेंडे को आगे बढ़ाया।
द क्विंट की अपडेटेड रिपोर्ट
बता दें कि साल 2017 की घटना से इस घटना की तुलना करके द क्विंट केवल कॉन्ग्रेस सरकार को डिफेंड करने की कोशिशें कर रहा है। वो यह साबित करना चाहता है कि पीएम मोदी के सुरक्षा को खतरा पैदा करने पर सवाल करने वाले पंजाब से नफरत करते हैं।
आदित्य मेनन ने शरजील इमाम का भी किया था बचाव
सीरिया से कश्मीर की इमेज पर व्याख्यान देने वाले द क्विंट के पत्रकार आदित्य मेनन ने साल 2020 में शाहीन बाग के मास्टरमाइंड शरजील इमाम की अलगाववादी और हिंसक टिप्पणियों को तर्कसंगत बनाने की कोशिश की थी।
शरजील का बचाव करते हुए मेनन ने तर्क दिया था जेएनयू के पूर्व छात्र ने बस ‘चक्का जाम या असम की ओर जाने वाले राजमार्गों और रेलवे की नाकाबंदी’ के लिए कहा था। हालाँकि, इसके साथ ही उन्होंने 2008 के अमरनाथ आंदोलन का भी जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर हिंदू संगठनों ने जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग को जाम कर दिया था। द क्विंट पत्रकार का कहना था कि अगर हिंदू संगठनों के विरोध को देशद्रोह नहीं माना जाता है तो इमाम द्वारा असम की ओर जाने वाली सड़कों और रेलवे को अवरुद्ध करने के आह्वान को अलगाववादी भी नहीं माना जाना चाहिए।
आदित्य मेनन के दो कुतर्क
पहला ये कि शरजील इमाम ने भारत को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने वाले 22 किलोमीटर के उस गलियारे (चिकन नेक) को अलग करने के लिए आह्वान किया था, ताकि पूर्वोत्तर को शेष भारत से अलग किया जा सके। लेकिन मेनन ने बड़ी ही चालाकी से इसे ‘चिकन नेक’ के संदर्भ को ही नजरअंदाज कर दिया। खास बात ये है कि अपने लेख के जरिए मेनन ने शरजील इमाम को सभी तरह के आरोपों से मुक्त करते हुए उसे केवल इस बात का दोषी माना कि बौद्धिक अहंकार के कारण उसने ऐसा कहा।
इसी तरह से इस मामले में भी मेनन ने प्रदर्शनकारियों को उन सभी बलात्कार, हत्या और हिंसाओं के अपराधों से मुक्त बताया है, जिनमें ये शामिल रहे हैं। इसके अलावा आदित्य मेनन ने 26 जनवरी की हिंसा और पीएम मोदी की सुरक्षा के उल्लंघन वाले दिन बसों और भाजपा कार्यकर्ताओं पर किए गए हमले को भी भुला दिया।
इसका दूसरा पहलू गलत तुलना को लेकर है। आदित्य मेनन शरजील इमाम के विनाशकारी दावों को सही ठहराने की कोशिश करते हैं। जिस अमरनाथ ब्लॉकेड का जिक्र कर आदित्य मेनन शरजील इमाम की भड़काऊ बयानबाजी को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं, वो 26 मई 2008 की घटना है। उस दौरान केंद्र सरकार द्वारा श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) को कश्मीर घाटी की करीब 99 एकड़ जंगली भूमि देने के आदेश के बाद विरोध हुआ था। इस भूमि पर हिंदू तीर्थयात्रियों के लिए अस्थायी आश्रय और सुविधाओं का निर्माण किया जाना था।
केंद्र सरकार के इस फैसले का कश्मीरी मुस्लिमों ने जमकर विरोध किया था। इन प्रदर्शनों की अगुवाई जेकेएलएफ जैसे संगठनों ने की। इसमें शब्बीर अहमद शाह, सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारूक, ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस जैसे अलगाववादी नेताओं की भागीदारी भी देखी गई थी। बाद में मुस्लिमों के विरोध के आगे झुकते हुए केंद्र ने जमीन देने के फैसले को रद्द कर दिया था।
केंद्र के इस फैसले से आहत कम से कम 35 हिंदू संगठनों ने जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर हिंदुओं को जमीन की बहाली की माँग को लेकर विरोध किया। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद समेत तमाम हिंदू संगठनों ने सरकार के फैसले के खिलाफ दिल्ली में कश्मीर हाउस के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। लेकिन, मेनन ने अपने रीडर्स को सच नहीं बताया। उन्होंने झूठा दावा करते हुए कहा कि हिंदुओं ने जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया, जिससे कश्मीर को शेष भारत से अलग कर दिया गया था। जबकि, भारत सरकार, सेना, जिला प्रशासन नाकेबंदी से इनकार करते हैं।
सच ये भी है कि किसी भी हिंदू संगठन ने न तो भारत के संविधान को चुनौती दी और न ही जिन्ना के जयकारे लगाए। बीजेपी ने भी किसी भी नाकेबंदी से इनकार करते हुए इस थ्योरी को ‘आईएसआई द्वारा फैलाया गया झूठ’ करार दिया, जिसका कोई ठोस सबूत नहीं था। बीजेपी ने दावा किया कि झूठा प्रचार करके घाटी के लोगों को गुमराह कर अलगाववादी अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने की फिराक में थे।
वहीं आदित्य मेनन मौजूदा घटना की तुलना 2017 की घटना से करके पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार और प्रदर्शनकारियों को दोषमुक्त कर रहे हैं।
आतंकवादी समूह सिख फॉर जस्टिस के गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक और आग लगाने वाला वीडियो जारी किया है जिसमें उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धमकी देते हुए दावा किया है कि खालिस्तानी पंजाब को भारत से अलग करने के लिए तैयार हैं। हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब पन्नू ने इस तरह से धमकी दी हो। पंजाब में सिखों को भारत का विरोध करने के लिए उकसाने के लिए पन्नू अक्सर अपने यूट्यूब चैनल पर ऐसे ही भड़काऊ वीडियो अपलोड करता है।
इस वीडियो में, पन्नू को यह घोषणा करते हुए सुना जा सकता है कि 5 जनवरी को फ्री खालिस्तान जनमत संग्रह आंदोलन शुरू हो गया है और पंजाब के लोगों ने स्वतंत्रता की ओर कदम बढ़ा दिया है।
अपने आपत्तिजनक वीडियो में पीएम मोदी और भारत सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए पन्नू ने कहा कि फ्री खालिस्तान जनमत संग्रह अभियान 5 जनवरी को तब शुरू हुआ जब ‘तिरंगवाले (भारतीय)’ पंजाब से दिल्ली भाग गए, जबकि ‘खंडे और केसरी वालों (सिख)’ ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पंजाब से भागने पर मजबूर कर दिया।
भारत सरकार को परोक्ष रूप से धमकी देते हुए प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन प्रमुख ने कहा कि पंजाब ने आजादी की ओर पहला कदम बढ़ाया है। पंजाब की जनता ने आज फैसला कर लिया है। मोदी और उनकी सरकार को ध्यान देना चाहिए, कि जब “इंदिरा हथियारों के साथ पहुँची थी, तो उन्होंने एहसान वापस कर दिया था” (पूर्व पीएम इंदिरा गाँधी की हत्या की तरफ इशारा)।
पन्नू यहीं नहीं रूका उसने आगे कहा, “आप सभी पंजाब में डर पैदा करने आए थे, लेकिन पंजाब के लोगों ने आपको चुपचाप घर लौटने के लिए मजबूर कर दिया।”
उसने आगे कहा कि खालिस्तान जनमत संग्रह बम के बजाय वोटों पर आधारित है और वह वोट की इस शक्ति का उपयोग पंजाब को भारत के चंगुल से मुक्त कराने के लिए करेगा। पन्नू ने कहा कि पंजाब ने फैसला किया है कि पंजाब में जनमत संग्रह उस समय होगा जब पंजाब में 2022 में विधानसभा चुनाव होंगे और कोई भी राजनीतिक दल जो केसरी के खिलाफ खड़ा होगा, चाहे वह कॉन्ग्रेस का चन्नी हो, सिद्धू, भाजपा, या ‘झाड़ू वाले (आप),’ उन्हें खंड के साथ जवाब दिया जाएगा।
पन्नू ने यह भी कहा, “तिरंगे का समर्थन करने वालों को पंजाब छोड़कर दिल्ली चले जाना चाहिए।”
प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के आईएसआई समर्थित खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू हमेशा भारत में रहने वाले सिखों को विशेष रूप से खालिस्तानी आंदोलन से सहमत लोगों को उकसाने में लिप्त रहा है। एसएफजे प्रमुख पन्नू, जो यूनाइटेड किंगडम और अन्य देशों में जनमत संग्रह का दावा करता रहा है, ने अपने पिछले वीडियो में बार-बार कहा है कि एसएफजे 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान पंजाब में एक जनमत संग्रह आयोजित करेगा।
गौरतलब है कि पिछले साल 11 जनवरी, 2021 को जारी एक अन्य वीडियो में, पन्नू ने सिख युवकों से इंडिया गेट पर खालिस्तानी झंडा फहराने और इंडिया गेट के साथ-साथ दिल्ली के हर कोने से भारतीय ध्वज को हटाने के लिए कहा था। पन्नू ने इंडिया गेट पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले को 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर का पुरस्कार देने की भी घोषणा की थी। उस वीडियो में भी उसने भारत सरकार को धमकी देते हुए कहा था कि अगर शांतिपूर्ण विरोध की अनुमति नहीं दी गई, तो सिख सशस्त्र विद्रोह में शामिल होने से नहीं हिचकिचाएँगे।
दरअसल, 18 दिसंबर को स्वर्ण मंदिर में हुई मॉब लिंचिंग से दो दिन पहले, पन्नू, जिस पर पिछले साल सितंबर में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को हत्या की धमकी देने का भी मामला दर्ज किया गया था, ने पाकिस्तान के पीएम इमरान खान को पत्र लिखकर जनमत संग्रह और ‘दिल्ली के पतन’ में उनके हस्तक्षेप की माँग की थी। उसी पत्र में पन्नू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को एसएफजे को “मुक्त पंजाब” का समर्थन करने और “खालिस्तान” बनाने के लिए भी लिखा था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (6 जनवरी 2022) को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने राष्ट्रपति भवन पहुँच पंजाब में अपनी सुरक्षा में हुई चूक के बारे में बताया। इससे पहले राष्ट्रपति ने इस घटना पर चिंता भी जताई थी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुँच चुका है। ऐसे में पंजाब पर किसी कड़े फैसले को लेकर अटकलें भी लगनी शुरू हो गई है। इस घटना के बाद से ही कई लोग राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग भी कर चुके हैं।
President Ram Nath Kovind met PM Narendra Modi at Rashtrapati Bhavan today and received from him a first-hand account of the security breach in his convoy in Punjab yesterday. The President expressed his concerns about the serious lapse: Rashtrapati Bhavan pic.twitter.com/pC6IVYkYXB
President Ramnath Kovind expressed concern on the security breach in PM’s Punjab visit. PM to meet the President shortly: Govt Sources pic.twitter.com/5DpkQm0PQs
वहीं, सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री की लंबी आयु के लिए #LongLivePMModi ट्रेंड हो रहा है और कई जगहों पर पीएम मोदी के लिए पूजा पाठ होते भी देखा गया है। पोस्ट में देख सकते हैं कि देश भर में पीएम मोदी की लंबी उम्र के लिए महामृत्युंजय जाप करने का आह्वान किया गया।
सामान्य जनों की प्रार्थना के अलावा बीजेपी के पार्टी नेता भी पीएम मोदी की लंबी आयु के लिए पूजा पाठ कर रहे हैं। सामने आई तस्वीरों में देख सकते हैं कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के गुफा मंदिर में विधि-विधान से पूजा करते हुए पीएम की लंबी आयु के लिए कामना की।
Madhya Pradesh Chief Minister Shivraj Singh Chouhan performs special prayers for the long life of Prime Minister Narendra Modi at the Gufa temple in Bhopal pic.twitter.com/FHphfxhE4Y
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा ने दिल्ली के झंडेवालान मंदिर में प्रधानमंत्री की लंबी आयु के लिए महामृत्युंजय जाप का पाठ किया। इसी तरह देश के उपराष्ट्रपति वैंकया नायडू ने भी इस सुरक्षा चूक के बाद पीएम से बात कर अपनी चिंता जताई।
BJP National Vice President Baijayant Jay Panda performed ‘Mahamrityunjay Jaap’ for the long life of Prime Minister Narendra Modi in the Jhandewalan temple in Delhi pic.twitter.com/r6J0q1X0gv
कोरोना काल में भारत में दो स्वदेशी वैक्सीन बनी। पहली सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने कोविशील्ड (Covishield) बनाई और दूसरी भारत बायोटेक (Bharat Biotech) ने कोवैक्सीन (Covaxin)। कोविशील्ड को ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका (Oxford AstraZeneca) द्वारा विकसित किया गया जबकि भारत बायोटेक कोवैक्सीन स्वदेशी तरीके से ही विकसित की गई। भारत सरकार ने जब इस कोवैक्सीन को अप्रूव किया तो कई मीडिया संस्थानों ने भारत पर सवाल उठाते हुए यहाँ निर्मित वैक्सीन को भी निशाना बनाया और झूठी खबरों से अपना प्रोपगेंडा चलाते रहे।
दिलचस्प बात ये है कि मीडिया संस्थान उस वैक्सीन पर अपना खेल खेलने में लगे थे जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पास कर दिया था। अब इसी प्रोपगेंडा का पर्दाफाश करने के लिए भारत बायोटेक ने कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का फैक्ट चेक किया है।
भारत बायोटेक ने जनहित में ये फैक्ट करते हुए एक-एक रिपोर्ट की पोल खोली। सबसे पहले बारी आई मनी कंट्रोल की। भारत बायोटेक ने मनी कंट्रोल में 29 दिसंबर 2021 को प्रकाशित एक लेख का फैक्ट चेक किया। इसमें उन्होंने संशय जताया था कि 15-18 साल वाले समूह को 10 करोड़ वैक्सीन मिल पाना थोड़ा संदेहास्पद है।
भारत बायोटेक का फैक्ट चेक
भारत बायोटेक ने कहा कि उन्होंने पिछले 11 माह में करोड़ों डोज वैक्सीनेशन अभियानों में पहुँचाई है और 15-18 साल वाले समूह के लिए भी इसे किया जाता रहेगा। भारत बायोटेक के टेक ट्रांस्फर प्रोजेक्ट को असफल बताने वाले मीडिया कंट्रोल के बयान बर बायोटेक ने बताया कि वो टेक ट्रांस्फर प्रोजेक्ट 3 कंपनियों के साथ कर रहे हैं। एक में पहले ही निर्माण किया जा रहा है और जिस कंपनी (Haskins Veterinary Institute) का नाम खबर में लिखा गया है वो तो अस्तित्व में ही नहीं है। फिर मनीकंट्रोल में भारत बायोटेक को लेकर ये भी कहा कि ये कंपनी उन चंद कंपनियों में से हैं जिनके पास ’18 ऑड’ आयु वर्ग में परीक्षणों का अनुभव है। हालाँकि कंपनी ने उन्हें कहा कि वो अपने क्लिनिकल ट्रायल 2-18 साल वाले बच्चों पर लेते रहे हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया
इसी तरह टाइम्स ऑफ इंडिया के फेक न्यूज का पर्दाफाश करने के लिए 25 दिसंबर की खबर उठाई गई। आर्टिकल में लिखा था कि ऐसा दावा है कि बेंगलुरु के प्राइवेट अस्पतालों में जो 5.5 लाख डोज हैं कोवैक्सीन की, वो एक्सपायर हो गई हैं। भारत बायोटेक ने इस रिपोर्ट पर बयान दिया कि उनके पास जो डेटा है उसके मुताबिक ये आंँकड़ा सिर्फ 1 लाख डोज का है।
भारत बायोटेक का फैक्ट चेक
डेक्कन हेराल्ड का फर्जी दावा
डेक्कन हेराल्ड ने 5 जनवरी 2022 के आर्टिकल में बच्चों को टीका लगने से पहले उनके अभिभावकों को डराने का काम किया और बताया गया कि कैसे बच्चों को लगने वाली वैक्सीन का कम ट्रॉयल हुआ है। इस पर भारत बायोटेक ने बताया कि उन्होंने अब तक 26000 लोगों पर क्लिनिकल ट्रॉयल किया है, जिसके रिव्यू विदेशी जर्नल्स में भी छपे हैं। शेल्फ लाइफ एक्स्टेंशन पर डेक्कन हेराल्ड के झूठ से पर्दा हटाते हुए कंपनी ने बताया कि जो बात कही जा रही है 6 लाख डोज में से 90% एक्सपायर थीं, उसका सच ये है कि कंपनी सप्लाई की जाने वाली डोज और मौजूदा डोज का डेटा रखती हैं। बेंगलुरु के अस्पतालों में 6 लाख एक्सपायर डोज है ही नहीं। ये आँकड़ा एक लाख से भी कम का है।
द वायर का झूठ
भारत बायोटेक ने द वायर में प्रकाशित 29 दिसंबर 2021 की रिपोर्ट का फैक्ट चेक किया और इस लाइन का जवाब दिया जिसमें दावा किया गया था कि कोवैक्सीन से पैदा होने वाली इम्यून पर कोई डेटा नही है। भारत बायोटेक ने कहा कि कोवैक्सीन से कितना इम्यून बनता है इस पर कई अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में रिपोर्ट छपी हैं। इसके अलावा बूस्टर का डेटा भी अधिकारियों पर जमा है।
भारत बायोटेक ने कहा कि ये मीडिया संस्थानों द्वारा फैलाई गई फर्जी न्यूज का केवल उदाहरण हैं। कई लोगों ने वैक्सीन और कंपनी को लेकर झूठ बोला है और वो इन फर्जी दावों का फैक्ट चेक करना जारी रखेंगे। उन्होंने मीडिया संस्थानों को सलाह दी कि वो रिपोर्टिंग के दौरान थोड़े जिम्मेदार बनें और ही रिपोर्टिंग करें। कंपनी ने कहा कि दवाई, विज्ञान, वैक्सीन जैसे चीजों पर आर्टिकल वैज्ञानिक तथ्यों और आँकड़ों के आधार पर होना चाहिए, न कि वैचारिक, राजनीतिक और आर्थिक झुकाव की तरफ।
‘बुल्ली बाई’ ऐप मामले में दिल्ली पुलिस की ‘इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशन (IFSO)’ यूनिट की टीम ने असम से मुख्य साजिशकर्ता को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार साजिशकर्ता की पहचान 20 वर्षीय नीरज बिश्नोई के रूप में हुई है। वह असम के जोरहाट के दिगंबर एरिया का रहने वाला है। नीरज भोपाल के वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Vellore Institute of Technology) में बीटेक का छात्र है। बताया जा रहा है कि कम-से-कम तीन राज्यों की पुलिस की कई यूनिट्स इसकी तलाश में जुटी थीं।
‘Bulli Bai’ app case: Main conspirator arrested by Delhi Police’s IFSO special cell from Assam pic.twitter.com/4IKBiBKC8d
डीसीपी (IFSO) केपीएस मल्होत्रा ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की IFSO टीम द्वारा असम से गिरफ्तार नीरज बिश्नोई GitHub पर ‘बुल्ली बाई’ का मुख्य साजिशकर्ता और निर्माता है। इसके साथ ही वह ऐप का मुख्य ट्विटर अकाउंट होल्डर है। उसे दिल्ली लाया जा रहा है।
#UPDATE | Neeraj Bishnoi (20), arrested by Delhi Police Special Cell’s IFSO team in ‘Bulli Bai’ app case, is a resident of Digambar area of Assam’s Jorhat. He is a BTech student of Vellore Institute of Technology, Bhopal: IFSO
केपीएस मल्होत्रा ने बुधवार (5 जनवरी 2022) को बताया था कि बुल्ली बाई केस को IFSO के पास ट्रांसफर कर दिया गया है। मल्होत्रा ने कहा कि ‘सुल्ली’ ऐप मामले में म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) प्रक्रिया भारत में पूरी हो गई है और जल्द ही इसे न्याय विभाग को सौंप दिया जाएगा। बता दें कि पिछले साल हुए सुल्ली डील्स ऐप केस के बाद इस वर्ष की शुरुआत में बुल्ली बाई ऐप सामने आई थी, जो गिटहब एपीआई पर बनी थी।
इससे पहले जीआईवाईयू44 (@giyu44) नामक यूजर ने ट्वीट कर खुद को मुस्लिम महिलाओं की नीलामी वाले इस ऐप का मास्टरमाइंड बताया था। उसने कहा था कि मुंबई पुलिस बेगुनाहों को परेशान करना बंद करे। ऐसा नहीं होने पर उसने Bulli Bai 2.0 लॉन्च करने की धमकी भी दी।
इस यूजर ने कहा, “मैंने ही अपने दोस्तों- श्वेता और विशाल के ई-मेल अकाउंट का प्रयोग किया था। उन दोनों को तो पता भी नहीं है कि ऐसा कैसे हुआ। उन्हें मेरी वजह से गिरफ्तार किया गया है। अगर कोई मेरे लिए फ्लाइट का टिकट इंतज़ाम कर दे तो मैं खुद को कानून के हवाले करने को तैयार हूँ।”
उल्लेखनीय है कि ‘बुल्ली बाई’ ऐप के सिलसिले में इससे पहले तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस संबंध में मुंबई के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया था कि शहर पुलिस की साइबर इकाई द्वारा उत्तराखंड से गिरफ्तार की गई 18 वर्षीय महिला श्वेता सिंह मुख्य आरोपित है, जिसने ऐप का ट्विटर हैंडल बनाया था।
मामले में बुधवार तड़के उत्तराखंड से मयंक रावल (21) को गिरफ्तार किया गया। श्वेता सिंह को मंगलवार को उत्तराखंड के ही रुद्रपुर से गिरफ्तार किया गया था, जबकि इंजीनियरिंग के छात्र विशाल कुमार झा (21) को सोमवार को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया था। मुंबई पुलिस ने दो जनवरी को ऐप के बारे में शिकायत मिलने के बाद FIR दर्ज की। जिसके बाद जाँचकर्ताओं ने ऐप और संबंधित ट्विटर हैंडल का तकनीकी विश्लेषण शुरू किया।
दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (DUTA) ने केजरीवाल सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित डीयू के 12 कॉलेजों को पूर्ण रूप से अनुदान जारी नहीं करने के विरोध में गुरुवार (6 जनवरी, 2022) को हड़ताल का आह्वान किया है। डूटा द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि इन 12 कॉलेजों के कर्मचारियों को वेतन और अन्य भत्तों का भुगतान नहीं होने के कारण आप सरकार द्वारा की गई फंड में कटौती है। इस मुद्दे पर चर्चा के लिए DUTA की एक ऑनलाइन आपात बैठक भी सोमवार (3 जनवरी, 2022) को हुई थी। जिसमें आज गुरुवार को हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया गया।
DUTA ने अपने बयान में कहा है, “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की केजरीवाल सरकार द्वारा फंड में कटौती किए जाने के कारण दिल्ली सरकार द्वारा वित्त पोषित 12 कॉलेजों में दो-छह महीने के वेतन और अन्य भत्तों का भुगतान नहीं हुआ है, जिससे इन विभिन्न कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मचारियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी है।”
रिपोर्ट के अनुसार, DUTA ने कहा कि दिल्ली की आप सरकार द्वारा ग्रांट्स और फंड्स का अनियमित और अधूरा वितरण किया जाना अस्वीकार्य है। ऐसे में केजरीवाल सरकार द्वारा बरती जा रही अनियमितता के खिलाफ एसोसिएशन ने शिक्षकों से सभी आधिकारिक कार्यों से दूर रहने और हड़ताल के दिन ऑनलाइन शिक्षण का भी बहिष्कार करने की अपील की है।
डूटा के सदस्य आनंद प्रकाश ने भी हड़ताल में साथ देने की ट्विटर पर अपील करते हुए कहा, “आप सभी साथियों से अपील है कि डूटा द्वारा आयोजित हड़ताल में अपना समर्थन दें। 12 कॉलेजों में शिक्षकों कर्मचारियों को पिछले कई महीनों से दिल्ली सरकार द्वारा वेतन नहीं दिया जा रहा है। मेडिकल सुविधा, एलटीसी और अन्य सुविधाएँ भी बंद कर दी गई हैं।”
आप सभी साथियों से अपील है की कल डूटा द्वारा आयोजित हड़ताल में अपना समर्थन दें। 12कॉलेजों में शिक्षकों कर्मचारियों को पिछले कई महीनों से दिल्ली सरकार द्वारा वेतन नहीं दिया जा रहा है। मेडिकल सुविधा एलटीसी और अन्य सुविधाएँ भी बंद कर दी गई है@jharajesh@ArvindKejriwal@OfficeOfPC_pic.twitter.com/IgDJmqdmbn
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली में सैलरी और अन्य भत्तों के समय से भुगतान न होने कारण हड़ताल या आंदोलन हो रहा है। पिछले काफी समय से फंड के रिलीज को लेकर दिल्ली यूनिवर्सिटी और केजरीवाल सरकार के बीच खींचतान चल रही है।
इस विवाद के पीछे की वजहों पर बात करते हुए DUTA ने कहा कि 12 कॉलेजों में शासी निकाय (governing bodies) का गठन विवाद की जड़ है, हालाँकि, पिछले साल 17 दिसंबर, 2021 को हुई कार्यकारी परिषद (executive council) की बैठक में शासी निकायों के सदस्यों के नाम दिल्ली सरकार को भेजे जाने के लिए अंतिम रूप दिए गए थे। लेकिन अभी मामला सुलझता नजर नहीं आ रहा है। शिक्षा पर जोर देकर दलीलें देने वाली आप सरकार का ये हाल है कि उसके द्वारा वित्तपोषित 12 कॉलेजों के शिक्षक आए दिन अपने वेतन और भत्तों के समय से भुगतान के लिए हड़ताल और आंदोलन करते नजर आते हैं।