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REET में पद बढ़ाकर 50 हजार करने की माँग को लेकर राजस्थान में बेरोजगारों का प्रदर्शन, कड़ाके की ठंड में अर्धनग्न प्रदर्शन से कइयों की तबीयत बिगड़ी

राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET Exam 2021) भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाकर 50 हजार करने का मुद्दा पिछले कुछ दिनों से ट्विटर पर छाया हुआ है। वहीं, रीट पास अभ्यर्थियों को पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट का समर्थन मिलने के बाद गहलोत सरकार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। दरअसल, 26 दिसंबर 2021 को 31 हजार पदों पर आयोजित रीट भर्ती परीक्षा में पदों की संख्या 50 हजार करने की माँग को लेकर शहीद स्मारक पर पिछले करीब दो महीनों से बेरोजगारों का धरना चल रहा है। यही नहीं, बेरोजगारों ने अपनी माँगों को मनवाने के लिए इस कड़ाके की ठंड में अर्द्धनग्न प्रदर्शन भी शुरू किया है, जिससे उनकी तबीयत खराब होने लगी है, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई भी सुनवाई नहीं होने पर इन लोगों में खासा आक्रोश है।

REET_के_पद_बढ़ाकर_50000_करो और #REET_50000_नहीं_तो _वोट_नहीं लिखकर बीते कुछ दिनों से ट्रेंड किया जा रहा है। ट्विटर पर राजस्थान की किरकिरी होने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अभ्यर्थियों को आश्वासन देते हुए ट्वीट किया। उन्होंने गुरुवार (30 दिसंबर 2021) को लिखा, “वर्ष 2022 में 14-15 मई को रीट परीक्षा आयोजित करने का निर्णय किया है, जिससे प्रदेश को करीब 20,000 नए शिक्षक मिल सकेंगे। इस भर्ती में विशेष शिक्षकों हेतु भी प्रावधान किया जाएगा। इससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।”

वहीं, आमरण अनशन पर बैठे अभ्यर्थी मुकेश चौधरी का कहना है, “शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में पद खाली हैं। इसके बावजूद सरकार इस पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। आमरण अनशन को 8 दिन हो गए हैं, लेकिन हमारी माँगे पूरी नहीं की गई हैं। यदि हमारी माँगे पूरी नहीं होती हैं तो हम धरना स्थल पर ही अपनी जान दे देंगे, लेकिन आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। कड़ाके की सर्दी में बेरोजगारों की तबीयत भी खराब होती जा रही है। जब तक माँग पूरी नहीं होगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा।”

बता दें कि बेरोजगारों के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला से 29 दिसंबर को मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने पीटीआई और विशेष शिक्षक के मामले पर उनसे चर्चा की, जिसके बाद कल्ला ने बेरोजगारों को आश्वासन दिया कि सीएम अशोक गहलोत जल्द ही पद बढ़ाने की मंजूरी दे सकते हैं। गहलोत सरकार ने 31 हजार से 50 हजार शिक्षकों के पद बढ़ाने की पूरी तैयारी कर ली है।

‘राज्य सरकार को रुचि नहीं’: केरल यूनिवर्सिटी का राष्ट्रपति को डॉक्टरेट डिग्री देने से इनकार, ठुकराया राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का प्रस्ताव

देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath kovind) को डॉक्टरेट ऑफ लिटरेचर (D Lit) की मानद उपाधि देने के केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Arif Mohammad khan) के अनुरोध को केरल विश्वविद्यालय (Kerala University) ने ठुकरा दिया है। अब इस मामले में राज्य सरकार और वामपंथी पी विजयन सरकार (P vijyan Government) के बीच टकराव बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि कथित राजनीतिक दवाब में आकर विश्वविद्यालय ने राष्ट्रपति को डी लिट की मानद उपाधि देने से इनकार कर दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यपाल के अनुरोध पर केरल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ वीपी महादेवन पिल्लई ने गवर्नर को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार और विश्वविद्यालय सिंडिकेट को राष्ट्रपति कोविंद को डी लिट की डिग्री देने में कोई रुचि नहीं है।

राष्ट्रपति कोविंद को डी लिट की उपाधि देने के बजाय संस्कृत विश्वविद्यालय ने पहले अभिनेत्री शोभना, म्यूजिशियन डॉ टीएम कृष्णा और अपने ही पूर्व कुलपति डॉ एनपी उन्नी को यह डिग्री देने का फैसला किया था। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने विश्वविद्यालय की इस सिफारिश को स्वीकार भी कर लिया था। इसके साथ ही उन्होंने यह इशारा भी किया कि राज्य सरकार द्वारा लिए गए कुछ निर्णयों ने देश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाई है।

राज्यपाल ने यूनिवर्सिटी के कुलपति को राजभवन बुलाकर राष्ट्रपति को डी लिट की डिग्री देने के लिए कहा था। उन्होंने ये लिखित में भी दिया था। लेकिन, उनके अनुरोध को खारिज कर दिया गया। बताया जाता है कि वीसी ने सिंडिकेट सदस्यों को राज्यपाल के निर्देश से अवगत कराया था। इसको लेकर राजनीतिक कार्यकारिणी से भी बात की गई. बाद में कुलपति ने राज्यपाल से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर राष्ट्रपति को डी लिट की डिग्री देने से इनकार कर दिया।

कॉन्ग्रेस ने राज्य सरकार से माँगा जवाब

राष्ट्रपति को डी लिट की डिग्री देने से केरल सरकार के निर्देश पर खारिज किया गया। इस पर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्नितला (Ramesh channithala) ने पिनरई विजयन सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने की माँग की है कि आखिर उसने किस आधार पर राष्ट्रपति को डी लिट की डिग्री देने की सिफारिश को खारिज किया।

गौरतलब है कि राज्यपाल आरिफ मोहम्मद विश्व विद्यालय के कुलाधिपति हैं। इस पर उन्होंने कहा है कि उन्हें कुलाधिपति बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है और वो उच्च शिक्षामंत्री को कुलाधिपति के अधिकार को ट्रांसफर करने के लिए तैयार हैं।

‘क्या तुम मुझसे शादी करोगी?’: अहमद पटेल के बेटे ने अमीषा पटेल को किया प्रपोज, फिर डिलीट किया ट्वीट, अमीषा ने लिखा था ‘डार्लिंग’

कॉन्ग्रेस के दिवंगत नेता और सोनिया गाँधी के बेहद करीबी रहे दिवंगत नेता अहमद पटेल के बेटे फैसल पटेल इन दिनों ट्विटर पर किए गए अपने पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। दरअसल, दो दिन पहले फैसल का बर्थडे था। बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल ने उन्हें Twitter पर बर्थडे विश करते हुए लिखा था,”हैप्पी बर्थडे माय डार्लिंग, लव यू। तुम्हारे लिए ये साल सबसे ज्यादा खास रहे।”

इसके जवाब में फैसल ने लिखा, “धन्यवाद अमीषा, मैं पब्लिकली तुम्हें आधिकारिक रूप से प्रपोज कर रहा हूँ। क्या तुम मुझसे शादी करोगी।” हालाँकि, थोड़ी देर बाद ही फैसल ने अपने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया, लेकिन तब तक ये पोस्ट वायरल हो चुका था। सियासी गलियारों से लेकर बॉलीवुड हस्तियों के बीच ये चर्चित हो गई और लोग इस पर कमेंट करने लगे।

45 वर्षीय अमीषा और फैसल को कई बार एक साथ स्पॉट किया गया है, लेकिन दोनों ने कभी भी अपने रिश्ते को ऑफिशियल नहीं किया है। हालाँकि, फैसल का निकाह हो चुका है। उनकी पहली बीवी जैनब नेडोउ थी। जैनब की कार्डियक और न्यूरोलॉजी से जुड़ी बीमारियों के चलते जून 2017 में मौत हो गई थी।

बता दें कि अमीषा पटेल और फैसल पटेल ने इंस्टाग्राम और ट्विटर पर एक साथ कई तस्वीरें साझा की हुई हैं। इनमें ये दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब नजर आ रहे हैं। वर्कफ्रंट की बात करें तो अमीषा पटेल सनी देओल के साथ इस साल ‘गदर 2’ में नजर आएँगी।

बेटे की जमानत याचिका ख़ारिज होने का जश्न मना रही थी शिवसेना, पिता ने MVA को दे दिया तगड़ा झटका: कोंकण में MVA की बड़ी हार

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं माध्यम उद्योग मंत्री नारायण राणे ने महाराष्ट्र के कोंकण में सत्ताधारी MVA (महा विकास अघाड़ी) गठबंधन को बड़ा झटका दिया है। सिंधुदुर्ग जिला बैंक चुनाव को लेकर भाजपा और शिवसेना में खींचतान चल रही थी। इस चुनाव में 19 में से 11 सीटों पर भाजपा समर्थक उम्मीदवारों की जीत हुई है। इसके बाद कोंकण के भाजपा कार्यकर्ता जश्न के मूड में हैं। 8 जगहों पर शिवसेना-कॉन्ग्रेस-NCP समर्थित उम्मीदवारों की जीत हुई है। इसके बाद कोंकण में नारायण राणे के वर्चस्व और बढ़ गया है।

सतीश सावंत इस चुनाव में MVA सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जिनके राजनीतिक कद पर बुरा असर पड़ा है। हालाँकि, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेंद्र पीढ़ी को भी हार का सामना करना पड़ा। कोंकण में नारायण राणे ने एक बार फिर से साबित कर दिया कि इस इलाके में उनके वर्चस्व में कोई कमी नहीं आई है। इस चुनाव में MVA सरकार की तरफ से सहकार समृद्धि पैनल और बीजेपी की तरफ से सिद्धिविनायक समृद्धि पैनल मैदान में था। उनके पुत्र और विधायक नितेश राणे भी जोश में हैं।

पुलिस उनकी तलाश कर रही है और उन्हें खोजने के लिए छापेमारी भी चल रही है, लेकिन उन्होंने कुछ दिनों बाद अचानक से शुक्रवार (31 दिसंबर, 2021) को उन्होंने अपने फेसबुक प्रोफ़ाइल पर ‘गाड़ दिया’ लिख कर अपनी एक तस्वीर पोस्ट की। इसके बाद उनकी ‘एडमिन टीम’ के हवाले से एक अन्य वीडियो शेयर किया गया, जिसमें भाजपा कार्यकर्ता जश्न मनाते हुए दिख रहे हैं। सिंधुदुर्ग की एक अदालत उनकी अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज कर चुकी है, जिसमें उन पर हत्या के प्रयास का आरोप है।

उनका कहना है कि उन्हें झूठे मामले में फँसाया गया है और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उनकी अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज होने के बाद शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने जम कर आतिशबाजी की थी। इसके बाद पोस्टर्स लगाए गए कि नितेश राणे खो गए हैं। उन्हें ढूँढ कर लाने वाले को इनाम में मुर्गी देने की बात कही जा रही है। पोस्टर्स किसने लगाए हैं, इसे लेकर सिर्फ कयास ही लगाए जा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने कहा कि ताज़ा चुनाव परिणाम उनके परिवार के खिलाफ शिवसेना की गंदी राजनीति की हार है।

वामपंथी कविता कृष्णन ने अखबार में यूपी के विज्ञापन को ‘इस्लामोफोबिक’ बताया, यूजर बोले- दंगाई का अर्थ ये मुस्लिम बता रही हैं

वामपंथी नेता कविता कृष्णन ने आज (शनिवार, 1 जनवरी 2022) ट्विटर पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अखबारों में दंगा मुक्त उत्तर प्रदेश से संबंधित एक विज्ञापन को लेकर हंगामा खड़ा कर दिया है। विज्ञापन में कहा गया है कि 2017 से पहले दंगाइयों ने कैसे तबाही मचाई थी और अब वे योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा की गई कड़ी कार्रवाई के कारण माफी मांगने के लिए कतार में हैं। कृष्णन ने इस विज्ञापन को ‘इस्लामोफोबिक’ कहा।

कृष्णन ने ट्वीट किया, “प्रिय @rajkamaljha – इस @IndianExpress के फ्रंट पेज पर एक नज़र डालें, जिसमें यूपी सरकार का एक बड़ा इस्लामोफोबिक विज्ञापन का आनंद लिया जा रहा है। आप यह ढोंग नहीं कर सकते कि यह केवल एक व्यावसायिक निर्णय है – यह विज्ञापन संपादकीय निर्रणय है और यह अखबार को फासीवाद का वाहक बनाता है। यह डराने वाला है।”

दिलचस्प बात यह है कि कविता कृष्णन ने विज्ञापन को इस्लामोफोबिक कहा था, लेकिन विज्ञापन को करीब से देखने पर पता चलता है कि कविता की यह ‘फ्रायडियन स्लिप’ है। विज्ञापन में कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं है कि दंगा करने वाला मुस्लिम है। कहने का अर्थ है कि दंगाई के ऊपर कोई धार्मिक निशान नहीं है- उसने सिर पर टोपी नहीं पहनी हुई थी या ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे कहा जा सके कि विज्ञापन में बताए गए दंगाई का अर्थ मुस्लिम ही है।

विज्ञापन ने बस इतना कहा गया कि प्रशासन में अंतर स्पष्ट है – 2017 से पहले लोगों को दंगाइयों का डर था और 2017 के बाद दंगाई माफी माँग रहे हैं। विज्ञापन में ही नीचे नारा है, ‘सोच ईमानदार, काम दमदार’। इसका अर्थ है, ‘ईमानदार इरादे, अच्छे काम’।

दंगाइयों से संबंधित विज्ञापन को ‘इस्लामोफोबिक’ कहते हुए कई लोगों ने सोचा कि क्या कविता कृष्णन ने चुपचाप स्वीकार कर लिया कि सभी दंगाई वास्तव में मुस्लिम समुदाय के ही हैं। जब इस बारे में कविता कृष्णन से पूछा गया तो उनका मूड खराब हो गया। लेखक अनीश गोखले को जवाब देते हुए कृष्णन ने कहा, “विज्ञापन योगी सरकार द्वारा एक ‘डॉग ह्वीसिल’ था और योगी के डॉग ह्वीसिल को सुनकर तुम भागते चले आए।”

कविता कृष्ण के इस्लामोफोबिक कहने पर कहने पर कई लोगों ने सवाल उठाया। एक यूजर ने पूछा कि इसमें रीलिजन कहाँ लिखा गया है? वहीं, एक यूजर ने कहा कि दंगाई का अर्थ कविता कृष्ण मुस्लिम बता रही हैं। एक यूजर ने इसे ‘चोर की दाढ़ी में तिनका बताया’।

कविता कृष्णन को जब अपनी गलती का अहसास हुआ तब उन्होंने दावा किया कि विज्ञापन में दंगाइयों ने कैफिया पहना हुआ है। इसलिए यह स्पष्ट था कि विज्ञापन का अर्थ था कि दंगा करने वाला एक मुस्लिम था।

कैफिया स्कार्फ से फैशन में आया है। आमतौर पर यह कपास से बना होता है और कई डिज़ाइनों में आता है। सऊदी अरब में सिर के चारों ओर पहने जाने वाले सादे सफेद कपड़े को भी कैफिया कहा जाता है। यह मूल रूप से सिर या गले में पहना जाने वाला चौकोर दुपट्टा होता है। Kefiyah के लिए कोई विशिष्ट पैटर्न नहीं है। फिर कविता कृष्णन इस निष्कर्ष पर कैसे पहुँचीं कि दंगाइयों द्वारा पहना जा रहा दुपट्टा विशेष रूप से कैफिया है, यह तर्क से परे है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की रकार ने गैंगस्टरों, माफिया सरगनाओं और दंगाइयों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। सीएए विरोधी हिंसा के दौरान योगी प्रशासन ने दंगाइयों, जो कि मुस्लिम समुदाय से संबंधित थे, को गिरफ्तार किया गया और हिंसा के कारण राज्य को हुए नुकसान की भरपाई के लिए उनकी संपत्ति को कुर्क किया। विकास दुबे जैसे गैंगस्टरों के खिलाफ भी योगी सरकार ने जबरदस्त कार्रवाई की।

यह स्पष्ट है कि गैंगस्टरों के खिलाफ सरकार की किसी भी कार्रवाई को कम्युनिस्ट और उदारवादी भय का कारण बताएँगे, क्योंकि योगी आदित्यनाथ भगवा पहनते हैं। केंद्र की नरेंद्र मोदी और राज्य में योगी आदित्यनाथ की की लोकप्रिय सरकार का विरोध करना इनका प्राथमिक उद्देश्य है।

15 से 18 की आयु के बच्चों के लिए टीकाकरण, नए साल 2022 में CoWin पर रजिस्ट्रेशन शुरू

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच शनिवार (1 जनवरी 2022) से 15 से 18 की आयु के बच्चों के लिए कोविड-19 टीकाकरण के लिए कोविन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया (Mansukh Mandaviya) ने ट्वीट किया, “बच्चे सुरक्षित, तो देश का भविष्य सुरक्षित। नव वर्ष के अवसर पर आज से 15 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के कोविड 19 टीकाकरण के लिए कोविड पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन शुरू किए जा रहे हैं। मेरा परिजनों से आग्रह है कि पात्र बच्चों के टीकाकरण हेतु उनका रेजिस्ट्रेशन करें।”

सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक, बच्चे आज से अपने आईडी कार्ड के अलावा 10वीं कक्षा के आईडी कार्ड का इस्तेमाल कर CoWin ऐप पर स्लॉट बुक कर सकते हैं। बच्चों के टीकाकरण के लिए वॉक-इन और ऑनलाइन पंजीकरण दोनों सुविधा उपलब्ध होंगे।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर, 2021 को 15-18 वर्ष के आयु वर्ग के लिए टीकाकरण शुरू करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था, “15 वर्ष से 18 वर्ष तक की आयु के बीच जो बच्चे हैं, उनका टीकाकरण अभियान सोमवार (3 जनवरी, 2022) से शुरू किया जाएगा। इससे स्कूल-कॉलेजों में जा रहे बच्चों और उनके माता-पिता की चिंता दूर होगी।

15-18 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के अलावे जो कोरोना वॉरियर्स हैं (स्वास्थ्यकर्मी और फ्रंटलाइन वर्कर्स) हैं, उन्हें भी वैक्सीन की ‘प्रिकॉशन डोज’ दी जाने की घोषणा पीएम मोदी ने की थी। इसकी शुरुआत सोमवार (10 जनवरी, 2022) से होगी। इसके अलावा, 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले बीमार लोगों को डॉक्टरों की सलाह पर वैक्सीन के प्रिकॉशन डोज भी उपलब्ध होंगे। यह भी 10 जनवरी, 2022 से ही शुरू होगा। 

15-20 साल के भीतर भारत में मुस्लिम इंकलाब: कुरान को लेकर त्यागी बने रिजवी ने किया अलर्ट, पैगंबर पर भी बात

इस्लाम मजहब त्यागकर सनातन धर्म स्वीकार करने वाले सैयद वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण त्यागी ने कहा कि मदरसे बंद करने के उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया तो और 15-20 सालों में देश में मुस्लिम इंकलाब आएगा और उन्हें एक और जमीन का टुकड़ा देना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि आज मदरसों में ISIS की विचारधारा पढ़ाई जा रही है और बच्चों को जेहाद के लिए ट्रेंड किया जा रहा है।

हिंदुस्तान टाइम्स को दिए साक्षात्कार में त्यागी ने कहा, “मदरसों में पहली पढ़ाई कुरान की होती है। मदरसों में कुरान पढ़ाया नहीं, समझाया जाता है। इसका परिणाम ये हो रहा है कि छोटे-छोटे बच्चे जहनी (दिमागी) तौर पर कट्टर होते जा रहे हैं। वक्त पड़ी तो वे बंदूक भी उठाएँगे।”

उन्होंने आगे कहा, “मदरसों में जो चीजें बच्चों को पढ़ाई जा रही हैं और इस कारण जो खून-खराबा और जिहाद हो रहा है, ये सब कुरान की देन है। कुरान में अल्लाह का स्पष्ट आदेश है कि जो अल्लाह में यकीन नहीं करता, मोहम्मद को रसूल नहीं मानता, अल्लाह की किताब पर भरोसा नहीं करता, उससे जिहाद करो।”

रिजवी ने कहा, “जो आतंकी किताब है उसे फॉलो करके पूरी दुनिया में आतंक मचा हुआ है और इन लोगों का जेहाद इसी पर कायम है। अल्लाह की तरफ से ये हमारी ड्यूटी है कि जो इस पर विश्वास ना करे, उससे मुस्लिम जिहाद करें। कुरान को हम डिफेम नहीं, इसको लेकर लोगों को अलर्ट कर रहे हैं।”

रिजवी ने बताया कि यही सोचकर वे कुरान की 26 आयतों को हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गए थे, लेकिन वहाँ मामला खारिज कर उन पर जुर्माना लगा दिया गया। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट को मेरे प्वॉइंट पर नोटिस लेना चाहिए था। उनके आदेश से मैं संतुष्ट नहीं था। पचास हजार पेनाल्टी लगाई, मैंने जमा की। लेकिन ये थोड़े ना है कि मेरा दिल मुतमईन (संतुष्ट) हो गया इस ऑर्डर से। मेरे दिल के ऊपर ऑर्डर थोड़े ना कर सकते हो।”

रिजवी ने बताया कि उनके सनातन धर्म अपनाने से पहले ये सवाल उठा था कि वे किस जाति में जाएँगे, तब डासना मंदिर के महंथ यति नरसिंहानंद के पिता ने उन्हें एडॉप्ट करते हुए त्यागी समाज में स्वीकार करने की बात कही थी। रिजवी ने कहा, “सनातनी बनने के लिए तो मैं किसी भी जाति में जाने के लिए तैयार था। अगर लोअर कास्ट भी मुझे एडॉप्ट करता तो मैं उसे स्वीकार कर लेता।”

उन्होंने आतंकवाद खत्म करने को अपना राजनीतिक एजेंडा बताया। रिजवी ने कहा, “मेरा पोलिटिकल एजेंडा यही है कि मुस्लिमों की ताकत को हिंदुस्तान में कम करना है, क्योंकि हर मस्जिद में, हर मदरसे में आईएसआईएस की ट्रेनिंग हो रही है। एक बहुत बड़ी साजिश हो रही है, जिसे सेक्युलर नहीं समझ पाएँगे।”

46 साल बाद इस्लाम छोड़ने के सवाल पर रिजवी ने कहा कि अगर राम मंदिर का मामला न आता तो शायद ये भी ना होता। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी किताब में उन्होंने किसी की तौहीन नहीं की है। रिजवी ने कहा, “मोहम्मद को प्रोफेट कहकर हमारी सोच की तौहीन की जा रही है।”

साक्षात्कार में रिजवी ने कहा कि अगर राममंदिर का मुद्दा सामने नहीं आता तो वे शायद सनातनी भी नहीं बनते। उन्होंने कहा कि विवाद के बीच उन्होंने कुरान का अध्ययन किया और उसे समझने के बाद इस्लाम त्याग करने का विचार किया।

उन्होंने बताया कि मुस्लिम भी इस बात को मानते थे कि अयोध्या में अगर उनके पक्ष में फैसला आ जाता है, फिर में वहाँ स्थापित रामलला की प्रतिमा को नहीं हटाया जा सकता, क्योंकि इससे खून-खराबा हो जाता। रिजवी ने बताया कि बाबरी ढाँचा के मुद्दे को मुस्लिम इसलिए भी नहीं छोड़ना चाहते थे, क्योंकि इससे हिंदू उन मस्जिदों पर भी दावा करने लगते, जो हिंदू मंदिरों को तोड़कर बनाए गए हैं।

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अतीक अहमद का शिकार बना उसका साढ़ू: जेल से ही फोन पर 5 करोड़ की रंगदारी, बेटे अली से पिटवाया भी

गुजरात में अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है गैंगस्टर अतीक अहमद (Atiq Ahmed)। अतीक पर जेल के भीतर से ही फोन कर अपने रिश्तेदार से पाँच करोड़ रुपए की फिरौती माँगने, धमकाने और गालीगलौज का आरोप लगा है। इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने शुक्रवार (31 दिसंबर 2021) को अतीक के बेटे अली अहमद के दो साथियों को प्रॉपर्टी हड़पने और जानलेवा हमले के मामले में गिरफ्तार किया है।

प्रयागराज की पुलिस ने अली अहमद के दो साथियों के पास से एक कार और पिस्टल भी बरामद की है। पीड़ित ने अतीक अहमद, उसके बेटे अली अहमद और अन्य 15 के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस फरार अली अहमद की तलाश में कई स्थानों पर दबिश दे रही है।

यह मामला प्रयागराज के करेली थाना क्षेत्र के एनुद्दीनपुर स्थित करोड़ों की प्रॉपर्टी से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सपा के पूर्व सांसद अतीक अहमद के साढ़ू इमरान का परिवार उत्तर प्रदेश के चकिया में रहता है। इमरान के भाई मोहम्मद जीशान ने पुलिस को बताया कि वह प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता है। शुक्रवार को वह अपने भाई और भतीजे समेत छह युवकों के साथ करेली के एनुद्दीनपुर में अपने पैतृक प्लॉट पर काम करा रहे थे। तभी वहाँ अतीक का बेटा अली अहमद, असद, कछौली, सैफ, इमरान गुड्डू, अमन, संजय सिंह समेत अन्य 15 लोगों के साथ पहुँचा और अपने अब्बा से बात करने को कहा। जीशान ने यह भी बताया कि जब उन्होंने फोन पर अतीक से बात करने के लिए मना कर दिया तो उसने उसके ऊपर पिस्टल तान दी और कहा कि अगर तूने बात नहीं की तो तुझे मार देंगे।

उन लोगों ने फोन को स्पीकर पर रखा हुआ था। जीशान के बोलते ही दूसरी तरफ से अतीक अहमद ने कहा कि यह प्लॉट मेरी बीवी के नाम कर दो, नहीं तो तेरे और तेरे भाई के हाथ-पैर तोड़ देंगे। या फिर इसके बदले में पाँच करोड़ रुपए मेरे बंगले पर पहुँचा दे। इसके बाद अतीक के गुंडों ने उसकी (जीशान) जमकर धुनाई शुरू कर दी। किसी तरह से भाग निकलने में कामयाब रहा जीशान अपने साथियों के साथ सीधे करेली थाने पहुँचा, जहाँ उसने पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई।

दूसरी तरफ अतीक अहमद के गुंडों ने जेसीबी से जीशान के प्लॉट की बाउण्ड्रीवाल को गिराना शुरू कर दिया था। तभी इंस्पेक्टर विजेंद्र यादव समेत कई पुलिसकर्मी मौके पर पहुँच गए, जिन्हें देखते ही अली अहमद अपने साथियों के साथ भाग निकला, लेकिन पुलिस ने सैफ और असद को पकड़ लिया। करेली पुलिस अली के दोनों साथियों को पकड़ कर थाने ले गई।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अतीक के बेटे के हमले में जीशान का भाई घायल हो गया है, जबकि उसके भतीजे को गंभीर चोटें आईं हैं। डीआईजी सर्वश्रेष्ट त्रिपाठी ने बताया कि दो आरोपितों को पिस्टल के साथ गिरफ्तार किया गया है और इनके अन्य साथियों की तलाश जारी है।

बता दें कि अतीक अहमद के साथ उसका साढ़ू इमरान भी जुर्म की दुनिया में सक्रिय रहा है। दो साल पहले देवरिया जेल के अंदर प्रॉपर्टी डीलर जैद की पिटाई मामले में अतीक के साथ इमरान का भी नाम सामने आया था, जिसे बाद में रिहा कर दिया गया था। वहीं, जीशान का कहना है कि देवरिया जेल कांड के बाद से उसके पूरे परिवार ने अतीक से दूरी बना ली। इसके बाद भी फोन करके रुपए माँग रहा है।

वैष्णो देवी मंदिर में भगदड़ से 12 लोगों की मौत: PM मोदी ने मृतकों के लिए ₹2 लाख और घायलों को ₹50 हजार देने की घोषणा की

नए साल के पहले दिन माता वैष्णो देवी मंदिर में भगदड़ मचने के कारण कम-से-कम 12 श्रद्धालुओं की मृत्यु हो गई है, जबकि लगभग 26 लोगों के घायल होने की बात कही जा रही है। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है और घटनास्थल पर राहत एवं कार्य जारी है। वहीं, इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शोक व्यक्ति किया है। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50,000 रुपए देने की घोषणा की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घटना तड़के लगभग 2:45 बजे की है। इस दुखद घटना के पीछे दो लोगों के बीच आपसी झगड़ा था। दो लोगों के बीच बहस धक्का-मुक्की में बदल गई, जो भगदड़ का कारण बनी। नए साल के शुरुआत होने के कारण बड़ी संख्या में दर्शनार्थी माता के दर्शन करने के लिए पहुँचे थे। इस घटना के बाद बहुत से श्रद्धालु वापस लौट गए। मृतकों में अधिकांश लोग दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के बताए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दुर्घटना पर शोक करते हुए कहा, ”माता वैष्णो देवी भवन में मची भगदड़ में लोगों की मौत से अत्यंत दुखी हूँ। सभी शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूँ। दुर्घटना में घायल लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ। मैंने जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा जी और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह जी से बात कर स्थिति की जानकारी ली।”

ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. गोपाल दत्त ने बताया, ‘माता वैष्णो देवी मंदिर में भगदड़ से 12 लोगों की मौत हुई है, लेकिन अब तक सही आँकड़ा सामने नहीं आया है। घायलों को इलाज के लिए नारायणा अस्पताल में पहुँचाया गया है।” अब तक 14 घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका है। 

जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (DGP) दिलबाग सिंह ने बताया कि शुरुआती रिपोर्ट में हमें पता चला है कि यह हादसा कुछ लोगों के बीच हुई बहस के कारण हुई। बहस के बाद धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई और इसके बाद लोग भागने लगे। इस तरह यह हादसा हुआ।

वैष्णो देवी मंदिर परिसर के ड्यूटी ऑफिसर जगदेव सिंह ने बताया कि अब तक मृतकों में से 7 लोगों की पहचान कर ली गई है। 5 अन्य लोगों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अर्धकुँवारी और बाणगंगा यात्रा को रोक दिया गया है। जगदेव सिंह ने बताया कि मंदिर में लगभग 80 हजार श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुँचे थे। बताया जा रहा है कि श्राइन बोर्ड ने श्रद्धालुओं की संख्या तय नहीं की थी, जिसके कारण इतनी भारी संख्या में लोग पहुँच गए थे।

नया साल 2022: सतर्क रहें, स्वस्थ रहें… हर कदम पर जंग है, हमें जीतनी सब है

“मर कर किसी ने लड़ाई नहीं जीती। लड़ाई जीती जाती है दुश्मन को खतम करके।”

यह एक फिल्मी डायलॉग है। सन्नी देओल ने कही थी। फिल्म का नाम है बॉर्डर। डायलॉग भैरो सिंह (किरदार निभाया था सुनील शेट्टी ने) के लिए था। निशाने पर थे पाकिस्तानी हमलावर फौजी।

फिल्म की बात हो गई। अब काम की बात। 2021 के बुरे वक्त को हम सब ने देखा है, झेला है। इन सब के बीच विदेशी वैक्सीन की लॉबी से लेकर सत्ता-लोलुप नेताओं और मीडिया की प्रोपेगेंडा रिपोर्टिंग तक से हम उबर कर यहाँ पहुँचे हैं।

सुख-दुख में एकसाथ खड़े होकर, बाधाओं को पार हमारे इसी समाज ने किया है। इसी दौरान दुनिया ने हमारी जिजीविषा भी देखी, वैज्ञानिक अनुसंधान-शोध भी। संकट की घड़ी में मित्र राष्ट्रों की सहायता कर हमने पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुम्बकम का परिचय भी कराया। फिर अब चूक क्यों, लापरवाही किसके लिए?

ओमिक्रॉन को हराना हो उद्देश्य

भारत के इस समग्र परिश्रम को यूँ ही जाने मत दीजिए। यह किसी एक नेता/पार्टी/धर्म/सरकार/समाज/समुदाय आदि-इत्यादि की बात नहीं है। यह बात हमारे-आपके राष्ट्र की है, इसके सुरक्षा की है। संसाधनों की है, हमारे अपने जानने-पहचानने वालों के हितों की है। ओमिक्रॉन पैर पसार रहा है। सरकार या स्वास्थ्य विभाग या किसी एजेंसी से पहले नागरिक के तौर पर अपने कर्तव्यों का पालन हमें खुद करना होगा, करना चाहिए।

साल 2022 आ चुका है। नव वर्ष की आप सभी को शुभकामनाएँ! ध्यान बस ये रहे कि सावधानी बरतनी है। हमेशा सतर्क रहना है। मत भले किसी भी राजनैतिक पार्टी के साथ हो, सरकार या स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों का बेझिझक पालन करें। यह न सिर्फ आपके लिए, बल्कि आपके चाहने वालों के लिए भी बेहद जरूरी है।

नया साल 2022: पढ़ना है, लड़ना है

रवीश कुमार कहते हैं कि पढ़िए। वैचारिक मतभेद अपनी जगह लेकिन बात में दम तो है। इसलिए पढ़िए। पढ़िए और पढ़ कर उनके फैलाए प्रोपेगेंडा को काटिए। सिर्फ उनका ही क्यों? हर उस प्रोपेगेंडा को काटिए, जो हिंदू हितों पर चोट करते हैं। वामपंथी मीडिया के फैलाए सड़ांध को आप लफ्फाजी से नहीं काट सकते, इसलिए पढ़िए।

पढ़िए उन चीजों को भी, जो आपके धर्म से जुड़ी हो, राष्ट्र से जुड़ी हो, समाज से जुड़ी हो। कुछ नहीं तो सिनेमा को ही पढ़िए। समझिए कि कैसे हिंदू-घृणा से सनी मानसिकता का शिकार है अपना बॉलीवुड। उस इतिहास को भी पढ़िए, जिसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाता रहा है। क्योंकि वही इतिहास गवाह रहा है उन जंगों का, जो जीती जाती है पुरुषार्थ से। और वही इतिहास यह भी बतलाता है कि मानसिक/राजनैतिक जंग आप अनपढ़ होकर नहीं जीत सकते। समय-काल-परिस्थिति के अनुसार खुद को ढाल कर, विरोधी के पैंतरों को पहचानने की क्षमता विकसित कर, ईंट का जवाब पत्थर से देकर जीती जाती है ऐसी जंगें।

स्वस्थ रहिए, बुलंद रहिए

निश्चित ही यह संकट काल है। जिन्हें आभास नहीं, कृपया चेत जाएँ। ओमिक्रॉन को हल्के में न लें। हाँ यह निहायत जरूरी है कि तनाव मुक्त रहें। शारीरिक गतिविधि करते रहें। व्यायाम या योग जो भी मन को भावे, वो करें।

स्वस्थ शरीर में ही बुलंद मस्तिष्क का निर्माण होगा। विचारों का तेज वहीं से निकलेगा। कराहते शरीर से राष्ट्र का निर्माण या धर्म का प्रचार-प्रसार संभव नहीं, यह याद रखें। भावनाओं के आवेग में आकर भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने का मन हो तो ऐसे मानसिक भावों से बचें। कोरोना अभी गया नहीं है। ओमिक्रॉन के रूप में यह इंग्लैंड, अमेरिका, यूरोप में तेजी से फैल रहा है। भारत को इससे दूर रखने में जितना सार्थक सहयोग कर सकते हैं, कृपया कीजिए।

2021 के लिए धन्यवाद, 2022 की शुभकामनाएँ

OpIndia हिंदी है आपका हितैषी। आप हैं तो हम हैं। आप स्वस्थ रहें, यही हमारी कामना है। आपको-हमको एक साथ चलना है, आगे बढ़ना है। अभी तक के आपके स्नेह के लिए हम आभारी हैं। नए साल 2022 में आप और आपके चाहने वाले तरक्की करें… इसी शुभकामना के साथ, नव वर्ष की एक बार फिर से बधाई!