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तिब्बत की निर्वासित संसद के कार्यक्रम में शामिल हुए भारतीय सांसद, चीनी दूतावास के ऐतराज पर लगाई लताड़, पत्र भेजने पर भारत ने जताई आपत्ति

जब कभी तिब्बत की बात होती है तो चीन के पेट में मरोड़ उठने लगती है। अवैध कब्जा जो किया है। इसी क्रम में हाल ही में पार्टी लाइन से इतर केंद्रीय राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ( Rajeev Chandrasekhar) की अध्यक्षता में छह भारतीय सांसदों ने तिब्बत की निर्वासित संसद द्वारा आयोजित एक रात्रिभोज के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इसके बाद चीनी दूतावास ने पत्र लिखकर अपनी कड़ी आपत्ति जताई है।

इस कार्यक्रम में चंद्रशेखर के अलावा, भाजपा की मेनका गाँधी (Maneka Gandhi) और केसी राममूर्ति (KC Ramamurthy), कॉन्ग्रेस सांसद जयराम रमेश (Jairam Ramesh) और मनीष तिवारी (Jairam Ramesh), बीजू जनता दल के सुजीत कुमार (Sujeet Kumar) 22 दिसंबर 2021 को दिल्ली के इंपीरियल होटल में हुए कार्यक्रम में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में निर्वासित तिब्बती संसद के अध्यक्ष खेंपो सोनम तेनफेल भी मौजूद रहे।

तिब्बती संसद की वेबसाइट में बताया गया है कि सांसदों ने ऑल-पार्टी इंडियन पार्लियामेंट्री फोरम फॉर तिब्बत (APIPFT) की वकालत कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम एक सप्ताह से अधिक समय तक चला। कहा जा रहा है कि 6 सांसदों के अलावा केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, स्वपन दासगुप्ता, चंदेश्वर प्रसाद, सुरेश कुमार कश्यप, सबतागिरी उल्का और रानी प्रतिभा सिंह भी इस कार्यक्रम में शामिल हुई थी।

आधिकारिक तिब्बती कार्यक्रम में शामिल होने वाले मंत्रियों और सांसदों के इस कदम को इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि 22 फरवरी 2018 को भारत सरकार ने द्विपक्षीय संबंधों को देखते हुए वरिष्ठ नेताओं और सरकारी पदाधिकारियों को तिब्बती नेताओं द्वारा आयोजित कार्यक्रमों से दूर रहने को कहा था।

गौरतलब है कि चीनी राजनयिक के राजनीतिक सलाहकार झोउ योंगशेंग ने इस मामले में पत्र लिखकर ‘तिब्बती स्वतंत्रता बलों’ का समर्थन करने से परहेज करने को कहा था।

सांसदों ने चीनी दूतावास को दिखाया आईना

चीन की इस हरकत पर APPFI के संयोजक बनाए गए बीजू जनता दल के सांसद सुजीत कुमार ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा, “दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सांसदों को पत्र लिखने वाला चीनी दूतावास का राजनीतिक सलाहकार होता कौन है? भारतीय सांसदों को पत्र भेजने की आपकी हिम्मत कैसे हुई? अगर कुछ भी हो तो आप आधिकारिक चैनल के माध्यम से अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं। मुझे लगता है कि इस मामले में विदेश मंत्रालय को स्टैंड लेना चाहिए।” इसी तरह का एक पत्र कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश को भी मिला है।

सीमा पर लगा रहे थे बाड़, तालिबान ने खदेड़ा तो सामान छोड़कर भागी पाकिस्तानी आर्मी: वीडियो वायरल

पाकिस्तान (Pakistan) और अफगानिस्तान (Afghanistan) के बीच की सीमा रेखा को डूरंड लाइन (Doorand line) माना जाता है, लेकिन तालिबान (Taliban) इसे स्वीकार नहीं करता। तालिबान ने पाकिस्तान द्वारा सीमा पर कंटीले तारों से की जा रही बाड़बंदी का विरोध किया है। बाड़बंदी कर रहे पाकिस्तानी सैनिकों को तालिबानी लड़ाकों ने खदेड़ दिया। इसका एक वीडियो सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के सैनिक अफगानिस्तान के निमरोज प्रांत के चार बोरजाक जिले से लगती सीमा पर बाड़ लगा रहे थे। इसकी खबर लगते ही बड़ी संख्या में तालिबानी लड़ाके वहाँ पहुँच गए और पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ दिया। अफगानिस्तान के पत्रकार बिलाल सरवरी ने इस घटना को लेकर ट्वीट किया, “तालिबान के अधिकारियों ने मुझे बताया कि पाकिस्तानी सेना पश्चिमी अफगानिस्तान के निमरोज प्रांत के चार बोरजाक जिले में बाड़ लगाना चाहती थी। तालिबान वहाँ पहुँचे और पाकिस्तानी सेना अपने सारे उपकरण छोड़कर वहाँ से भाग गई।”

बिलाल ने अगले ट्वीट में कहा, “बड़ी संख्या में तालिबान लड़ाके वहाँ पहुँचे। वे हाई अलर्ट पर हैं।” उल्लेखनीय है कि बिलाल द्वारा शेयर किए गए वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि वहाँ पर कारों में लदकर बड़ी संख्या में तालिबानी लड़ाके पहुँचे। वहीं एक अन्य इमेज से पता चलता है कि घटनास्थल पर बड़ी संख्या में बाड़ लगाने के लिए लोहे के खंबे और तार पड़े हुए हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले 25 दिसंबर 2021 को तालिबान और पाकिस्तानी सेना के बीच डूरंड लाइन पर बाड़बंदी को लेकर झड़प भी हुई थी। इसमें तालिबान के स्नाइपर ने पाकिस्तान के दो जवानों को मार गिराया था। हालाँकि, बाद में दावा किया गया कि दोनों देशों के बीच विवाद सुलझ गया है। दोनों में यह तय हुआ था कि बाड़ लगाने का काम अब आपसी सहमति से किया जाएगा।

24 घंटे में 9, दिसंबर में 24 और इस साल 182 आतंकियों को सुरक्षाबलों ने किया ढेर, जम्मू कश्मीर में ऑपरेशंस का भी शतक पूरा

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों ने आतंकियों को गहरी चोट दी है। गुरुवार (30 दिसंबर 2021) को हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने 3 और आतंकियों को ढेर कर दिया । हालाँकि, इस मुठभेड़ में चार जवान भी घायल हुए हैं। ये मुठभेड़ पंथा चौक पर हुई थी। इसी के साथ बीते 24 घंटे के दौरान 9 आतंकियों को मार गिराया गया है। कश्मीर पुलिस के आईजी विजय कुमार ने बताया कि मारे गए आतंकियों में दो पाकिस्तानी नागरिक थे।

पंथा चौक पर हुई मुठभेड़ को लेकर आईजी विजय कुमार ने बताया कि मारे गए आतंकियों में से एक की पहचान सुहैल अहमद राथर के रूप में हुई है। जबकि 2 अन्य अज्ञात हैं। वहीं पुलिस के मुताबिक, शुरुआती गोलीबारी में तीन पुलिसकर्मी और एक सीआरपीएफ का जवान घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, दो अन्य मुठभेड़ों में कुल 6 आतंकी मारे गए थे। इसमें सेना का एक जवान भी वीरगति को प्राप्त हो गया था। ये आतंकी 13 दिसंबर 2021 को श्रीनगर में बस में हुए हमले में शामिल थे।

दिसंबर में 24 आतंकी ढेर

आईजी विजय कुमार के मुताबिक, इस साल दिसंबर 2021 में विभिन्न मुठभेड़ों में 5 पाकिस्तानियों समेत कुल 24 आतंकियों को मार गिराया गया है। इन आतंकियों के पास से अमेरिका में बनी 2 एम-4 कार्बाइन, 15 एके-47, दो दर्जन पिस्तौल, आईडी और हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए हैं।

इस साल 100 सफल ऑपरेशन

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा, “कल रात तक 100 ऑपरेशन का लक्ष्य पूरा हुआ। वर्ष 2021 में 182 आतंकियों को मार गिराया गया, इनमें 44 आतंकवादी A, A+ श्रेणी वाले थे और इन 44 में लश्कर के 26 टॉप कमांडर, जैश के 10, हिज़बुल मुजाहिद्दीन के 7 और अलबदर का एक कमांडर शामिल था।”

उन्होंने आगे कहा कि 134 स्थानीय युवा आतंकवादी जो अलग-अलग संगठन के साथ जुड़े थे उनमें से 72 मारे गए, 22 आतंकवादी पकड़े गए हैं। वहीं इस साल UAPA एक्ट के तहत 497 केस दर्ज किए गए थे, जिनमें से 80 को गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा 30,000 मामले अलग-अलग अपराध को लेकर दर्ज़ हुए हैं।

डीजीपी दिलबाग के मुताबिक, साल 2021 में जम्मू-कश्मीर पुलिस के 2500 जवान कोरोना पॉजिटिव हुए थे, जिनमें से 12 की मौत हो गई थी। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर पुलिस के 20 जवान और अन्य सुरक्षा बलों के 23 जवान इस राज्य में बलिदान हुए।

पुलिस अधिकारी ने हैदरपोरा एनकाउंटर के मामले में एसआईटी रिपोर्ट पर हो रही राजनीति पर दुख जताया है।

इस्लाम में शादी से पहले सेक्स हराम है फिर भी आप करते हो: उर्फी जावेद ने कट्टरपंथियों को लताड़ा

सोशल मीडिया सेंसेशन उर्फी जावेद को चरमपंथी मुस्लिमों की सोच से दिक्कत है। अपनी इस परेशानी को उर्फी जावेद कई मौकों पर मुखर होकर बता चुकी हैं। वैसे उन्हें ट्रोल करने वालों में ज्यादातर मुस्लिम ही होते हैं। सोशल मीडिया फैनक्लब पर उर्फी जावेद का एक वीडियो सामने आया है, जहाँ उन्होंने चरमपंथियों पर निशाना साधा है।

वीडियो की शुरुआत में उर्फी जावेद हाथों में बिल्ली को पकड़े हुए नजर आ रही हैं। उर्फी जैसे ही बोलती हैं कि वो मुस्लिम कट्टरपंथियों के बारे में बोलना चाहती हैं, तभी बिल्ली उनके हाथ से कूद कर भाग जाती है। तब उर्फी कहती हैं, “मैंने मुस्लिम चरमपंथियों का नाम लिया तो ये भी बेचारी खौफ में आ गई।”

उर्फी कहती हैं, “मुस्लिम चरमपंथी मेरी फोटो पर कमेंट कर कहते हैं कि मैं तो इस्लाम के नाम पर धब्बा हूँ, मैं मुस्लिम के नाम पर ये हूँ… वो हूँ… मेरे खिलाफ फतवा जारी कर देना चाहिए। मेरे कपड़े ये नहीं… मेरे कपड़े वो नहीं… आदि आदि।”

मुस्लिमों के धर्म ग्रंथ को कुरान को लेकर वो कहती हैं, “कुरान में ये कहीं भी नहीं लिखा है कि मुस्लिम महिलाओं को जबरन पर्दा कराओ। हाँ, ये जरूर लिखा है कि एक औरत को पर्दा करना चाहिए, लेकिन ये नहीं लिखा कि वो नहीं करना चाहती जबरदस्ती उसको गालियों की बौछार करो, इतना शर्मिंदा करवाओ… उसको नंगी बुलाओ… उसको इतना शर्मिंदा करो कि वो खुद ही पर्दे में आ जाए। ये नहीं लिखा है यार। आप जाकर फिर से कुरान पढ़ो। हाँ, ये जरूर लिखा है कि मर्दों को नजरों का पर्दा करना जरूरी है। मतलब कि एक आदमी शादी से पहले औरत को उस नजर से देख ही नहीं सकता है।”

उर्फी जावेद ने माफी माँगते हुए बोला कि जो लोग इंस्टा पर आकर लड़कियों को देखते हैं, फिर उनकी फोटो पर फालतू के कमेंट भी करते हैं। वो हराम है। वह कहती हैं, “आप नहीं कर सकते ये सब। आप ऐसी औरतों के पिक्चर्स नहीं देख सकते यार…. स्पेशली जब उन्होंने कपड़े नहीं पहने हैं। बहुत गलत कर रहे हो आप।”

इस्लाम को लेकर उर्फी ने कहा, “जो इस्लाम के रूल्स बने थे ना वो डेढ़ हजार साल पहले बने थे, जब औरतों के पास कोई राइट्स नहीं थे। वो शोषित थीं। इस्लाम में चार शादियाँ भी इसीलिए अलाउ है, क्योंकि उस वक्त जब औरतों के पति मर जाते थे, तब उनका रेप कर लेते थे। उनके साथ न्याय नहीं हो पाता था। तब उनकी मॉडेसटी को बचाने के लिए 4 शादियाँ बनाई गईं।”

उर्फी ने आगे कहा, “बट ‘कट्टू’ (कट्टरपंथी) डेढ़ हजार साल बाद… क्या मैं आपको एक दबी हुई कमजोर मुस्लिम महिला लग रही हूँ? नहीं। मैं आपकी मदद नहीं माँग रही हूँ। मुझे आपकी सलाह की जरूरत भी नहीं है। सलाह देना बंद करें कि मुझे अपने शरीर के साथ क्या करना है… मुझे कैसे कपड़े पहनने हैं… आदि आदि।”

कट्टरपंथियों पर निशाना साधते हुए उर्फी ने कहा, “आप लोग भी कई सारी ऐसी इस्लामिक चीजें हैं, जिसे खुद फॉलो नहीं करते हो और एक लड़की को सलाह देते हो कि ऐसे नहीं वैसे कपड़े पहनो। क्या आपलोग जानते हो कि इस्लाम में शादी से पहले सेक्स करना हराम है, लेकिन तब भी आप वो करते हो। कितने ऐसे लोग हैं, जो पाँचों वक्त का नमाज पढ़ते हैं? मुझे तो लगता है कि ऐसा कोई नहीं होगा। अगर पाँचों वक्त का नमाज पढ़ रहे होते तो इंस्टाग्राम पर लड़कियों की पिक्चर पर कमेंट करने का टाइम नहीं मिलता आपको।”

उर्फी जावेद ने कहा, “अगर आप दिल से कुछ नहीं कर रहे हो, सिर्फ ऊपर जाने के लिए कर रहे हो तो आप कर रहे हो ना पाँच वक्त की नमाज या जो कुछ भी…आपको कभी जन्नत नसीब नहीं होगी। इससे बेटर है कि आप जाकर किसी इंसान की हेल्प कर दो। और औरत को उस नजरिए से देखना बंद कर दो। तब जाकर फिर भी कुछ हो सकता है।”

उर्फी जावेद ने वीडियो में ये ऐलान किया कि वो इस्लाम को नहीं मानती हैं। उर्फी जावेद ने साफ कहा कि वो स्प्रिचुअल हैं, वो किसी धर्म को नहीं मानतीं। वो अच्छे काम करने में यकीन रखती हैं। उनका ये वीडियो कई सवाल खड़े करता है। सोशल मीडिया पर खुद का आईना देखे बिना दूसरों को फ्री का ज्ञान देने वालों के लिए उर्फी जावेद का ये वीडियो बड़ा सबक है। उर्फी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। 

‘खुले में नमाज’ बर्दाश्त से बाहर: CM खट्टर ने कहा- इसे न बनाएँ शक्ति प्रदर्शन का जरिया

गुरुग्राम में ‘खुले में नमाज’ पढ़ने के मामले पर हरियाणा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपना फिर बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग नमाज पढ़ने को शक्ति प्रदर्शन का जरिया बना रहे हैं। दिल्ली में महिला पत्रकारों से बात करते हुए सीएम खट्टर ने अपनी यह टिप्पणी की।

वह बोले, “नमाज को नमाज की तरह होना चाहिए। कुछ लोग इसे शक्ति प्रदर्शन का जरिया बना रहे हैं। अगर कोई सार्वजनिक स्थल पर पूजा करना चाहता है तो वो ये काम प्रशासन से बात करके कर सकता है। ऐसे आयोजनों के लिए कुछ नियम हैं जो हर धर्म के लिए एक हैं।”

बता दें कि सीएम खट्टर ने इससे पहले बयान दिया था कि खुले में नमाज पढ़ना किसी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकेगा। इसी के साथ गुरुग्राम प्रशासन ने 37 निर्धारित स्थलों में से 8 पर नमाज अदा करने की अनुमति को वापस ले लिया था। जिला प्रशासन के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, स्थानीय लोगों और आरडब्ल्यूए की आपत्ति के बाद अनुमति रद्द कर दी गई थी।

इससे पहले सीएम ने कहा था “सभी धर्मों के लोग मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्चों जैसी धार्मिक जगहों पर ही प्रार्थना करते हैं। इसके अलावा सभी बड़े त्योहारों के मौके पर खुले में प्रार्थना की अनुमति दी जाती है। लेकिन ताकत का प्रदर्शन करना जो दूसरे समुदाय की भावनाओं को भड़काता है, उचित नहीं है।” मुख्यमंत्री के मुताबिक, किसी को भी खुले इस तरह के आयोजन नहीं करने चाहिए। यह हम सब जिम्मेदारी है कि शांतिपूर्ण माहौल बना रहे।

10 दिसंबर को भी सीएम ने सख्त हिदायत देते हुए कहा था कि खुले में नमाज की प्रथा को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि खुले में नमाज किसी भी हाल में नहीं होना चाहिए। खट्टर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था, “हमने यहाँ पुलिस को भी कहा है और डिप्टी कमिश्नर को भी कहा है। इस विषय का समाधान निकालना है। कोई अपनी जगह पर नमाज़ पढ़े या पूजा-पाठ करे, इससे हमें कोई दिक्क्त नहीं है। धार्मिक स्थल इसीलिए बने होते हैं। खुले में ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं होना चाहिए। ये नमाज़ पढ़ने की जो प्रथा यहाँ खुले में शुरू की गई है, वो कतई सहन नहीं की जाएगी। सबके साथ बैठकर इसका समाधान निकाला जाएगा।”

‘दम हो तो रोक लो राम मंदिर निर्माण’ : हनुमानगढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना कर विपक्षी दलों पर बरसे गृहमंत्री अमित शाह, कहा- इस बार करेंगे 300 पार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या पहुँचकर देश के गृहमंत्री अमित शाह ने आज (31 दिसंबर 2021) विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने अयोध्या में प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की और फिर जनता को संबोधित करना शुरू किया।

राम मंदिर को बनाने के लिए कितने साल संघर्ष हुआ इस पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, “श्रीराम के भव्य मंदिर को बनने से रोकने के लिए कॉन्ग्रेस, सपा और बसपा ने अपने शासन में ढेर सारे प्रयत्न किए। आप सभी को याद होगा, इन लोगों ने कारसेवकों पर गोली चलाई थी। राम सेवकों पर डंडे बरसाए थे, रामसेवकों को मारकर सरयूं नदी में बहा दिया गया था।”

शाह ने पूछा, “राम लला को इतने साल टेंट में क्यों रहना पड़ा? किसने कार सेवकों पर गोलियाँ चलाईं? किसान राम मंदिर बनने से रोका। हमें ये सब याद रखना है। कोई भी राम मंदिर निर्माण को अब नहीं रोक सकता।”

वह बोले, “जब देश के जनता ने पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनाई, नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनें और आज मैं देख कर आया हूँ कि रामलला का मंदिर उसी स्थान पर आज बन रहा है। भाजपा की सरकार में अयोध्या को अपना प्राचीन गौरव वापस दिलाने का काम किया है। अयोध्या में प्रभु श्रीराम के नाम से जोड़कर श्रीराम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बन रहा है जो दुनिया के सभी स्थानों से राम भक्तों को अयोध्या लाने का काम करेगा।”

भाजपा और सपा के बीच फर्क बताते हुए अमित शाह ने कहा, सपा के शासन में तीन ‘P’ हुआ करते थे: 1- परिवारवाद, 2- पक्षपात, 3- पलायन। जबकि भारतीय जनता पार्टी तीन ‘V’ के आधार पर चलती है: 1- विकास, 2- व्यापार, 3- सांस्कृतिक विरासत।

सपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “ये बुआ बबुआ और कॉन्ग्रेस पार्टी कभी यूपी का विकास नहीं कर सकती। सपा के शासन में यहाँ पूरे प्रदेश में गुंडों और माफिया का बोलबाला था। हमारे लोगों को पलायन पर मजबूर कर दिया जाता था। योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद पलायन करवाने वाले, खुद भाग रहे हैं। पहले माफियाओं से पुलिस डरती थी, जबकि आज माफिया पुलिस के सामने सरेंडर कर रहा है।”

अयोध्या के बाद संतकबीर नगर में जनता को संबोधित करते हुए गृहमंत्री ने कहा, “मैं उत्तर प्रदेश में जब भी आता हूँ तो बहुत ही भावुक और रोमांचित हो जाता हूँ। 2014 में मैं भाजपा का प्रभारी था, 2017 और 2019 में पार्टी का अध्यक्ष था। इन तीनों चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता ने भाजपा पर भोले शंकर की तरह कृपा की है।”

प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा करवाए गए कार्यों पर अमित शाह ने कहा, “पीएम मोदी ने गोरखपुर में खाद का कारखाना लगाया, बायोफ्यूल प्लांट लगाया और अभी कुछ ही दिन पहले काशी में औरंगजेब के समय से जो बाबा विश्वनाथ का दरबार सूना पड़ा था, बाबा विश्वनाथ के  दरबार का पुनरोद्धार करने का काम पीएम मोदी ने किया है।”

सपा पर तंज कसते हुए वह बोले, “ये समाजवादी पार्टी के लोग जिन्होंने कारसेवकों पर डंडे बरसाए, गोलियाँ चलवाईं, ये लोग ताना मारते थे कि मंदिर वहीं बनाएँगे, तिथि नहीं बताएँगे। अरे अखिलेश बाबू दम हो तो मंदिर निर्माण रोक लो। प्रधानमंत्री मोदी ने 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में भूमि पूजन कर मंदिर निमार्ण का शिलान्यास कर दिया है।”

आगामी चुनावों को लेकर शाह ने कहा, “पूरे पूर्वांचल का दौरा किया सब जगह ऐसी ही भीड़ दिखाई देती है और ये बताता है कि 2022 में होने वाले चुनाव में 300 पार होने वाला है।” उन्होंने कहा कि मोदी दोबारा पीएम बने ये यूपी की 22 करोड़ जनता का आशीर्वाद है।

‘पाकिस्तानी आतंकी इस्लाम के नाम पर युवाओं की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं’: आतंकी की विधवा ‘रजिया’ की आपबीती, कहा- भारत में बहुत खुश हूँ

ये कहानी है पाकिस्तान (Pakistan) से भारत लौटी एक आतंकी की बीवी ‘रजिया बीबी‘ की, जिसने भारत आने के बाद पाकिस्तान को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रजिया ने बताया कि पाकिस्तान ने किस तरह उसका इस्तेमाल किया और बाद में उसे बेसहारा छोड़ दिया। रजिया ने बताया कि भारत ने न केवल उसे स्वीकार किया, बल्कि उसका पुनर्वास (Rehabilitation) भी किया।

रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर (Jammu kashmir) के बांदीपोरा सेक्टर में जन्मी रजिया को बेहद छोटी उम्र (4 साल) में पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद ले जाया गया था। साल 2008 में उसका निकाह हिज्बुल मुजाहिदीन के एक आतंकी के साथ करवा दी गई। हालाँकि, उसका ये वैवाहिक जीवन अधिक दिनों तक गुलजार नहीं रह सका। दरअसल, भारतीय सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ के दौरान 4 आतंकियों के साथ उसके शौहर को भी मार गिराया गया था।

रजिया ने बताया कि शौहर के मारे जाने के बाद पाकिस्तान सरकार की ओर से हर्जाने के तौर पर 30,000 दिए गए थे। इसके बाद खर्च चलाने के लिए उसे हर महीने कभी 10,000 तो कभी 12,000 रुपए दिए जाते थे। रजिया बताती हैं कि पाक सरकार के द्वारा जो पैसे उसे दिए जाते थे वो काफी नहीं थे। वो पैसे केवल कमरे के किराए और बच्चों की पढ़ाई में खर्च हो जाता था। बाकी के खर्चे के लिए उसे कभी-कभी पड़ोसियों के यहाँ बर्तन धोकर या कपड़े सिलकर निकालने पड़ते थे। कभी खाते थे, कभी भूखे रहते थे।

पाकिस्तान में अपने जीवन को लेकर रजिया ने कहा, “यह डरावना था, हर दिन मैं इस डर में रहती थी कि अगर मेरे पास अगले दिन अपने बच्चों को खिलाने के लिए कुछ नहीं बचेगा तो क्या होगा।” रजिया ने आगे कहा कि साल 2020 में पाकिस्तान सरकार ने उसे खर्चे के लिए मिलने वाले पैसे भी देने बंद कर दिए।

उसने कहा कि जब उसका पैसा रोक दिया गया तो उसे यह समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। रजिया ने कहा, “एकमात्र विकल्प भारत लौटना था। पैसे नहीं थे, लेकिन दोस्तों ने मदद की। इसके बाद हमने उड़ान भरी। हम पाकिस्तान से कतर गए और वहाँ से काठमाँडू के लिए फ्लाइट ली। इसके बाद नेपाल से दिल्ली होते हुए कश्मीर पहुँचे। भारत ने मुझे स्वीकार किया, मेरा पुनर्वास किया। अब मेरा परिवार यहाँ ठीक है। वे खुश हैं।”

रजिया ने ये भी बताया कि जब वह पाकिस्तान से कश्मीर पहुँची तो उसे पुलिस कस्टडी में चार दिन तक रखा गया। उसने कहा, “पहले दिन मैं डर रही थी कि एक आतंकी की बीवी होने के कारण कैसा सुलूक होगा, लेकिन थाने में मेरा और मेरे बच्चों का बहुत अच्छे से खयाल रखा गया। भारत आए करीब 15 दिन हो गए हैं। काफी सुकून में हूँ।”

लोगों की जिंदगियाँ बर्बाद कर रहे पाकिस्तानी आतंकी

एक संदेश में रजिया ने कहा, “पाकिस्तान स्थित ये आतंकवादी समूह कई लोगों की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। वे आतंकवादियों से वादा करते हैं कि अगर उन्हें कुछ भी होता है तो वे उनके परिवारों की देखभाल करेंगे और उन्हें इस्लाम के नाम पर मरने के लिए भेज देते हैं। वे इस्लाम का दुरुपयोग करते हैं और जब आतंकवादी मर जाते हैं तो उनके परिवार को बेसहारा छोड़ देते हैं।”

पाकिस्तान ने टेरी मंदिर में दर्शन करने के लिए भारत, US, UAE के 250 हिंदू श्रद्धालुओं को दिया न्यौता, मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा तोड़ने के बाद SC के आदेश पर हुआ पुनर्निर्माण

भारत, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका के 250 हिंदू भक्तों का एक समूह पाकिस्तान का दौरा करेगा। यह समूह यहाँ के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में परमहंस जी महाराज के एक शताब्दी पुराने मंदिर में दर्शन करेगा। इस मंदिर को पिछले साल 30 दिसंबर को कट्टरपंथी इस्लामी संगठन जमीयत उलेमा इस्लाम-फजल ने तोड़ दिया था।

यह मंदिर संत श्री परमहंस दयाल जी महाराज को समर्पित है। बता दें कि साल 1919 में परमहंस जी महाराज के निधन के बाद उन्हें इस क्षेत्र के करक जिले में स्थित टेरी गाँव में दफनाया गया था और समाधि बनाई गई थी। इसके बाद साल 1920 में यहाँ मंदिर का निर्माण किया गया था।

पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, पाकिस्तान हिंदू परिषद (PHC) ने बताया कि ये सभी श्रद्धालु पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के निमंत्रण पर यहाँ आ रहे हैं और वो टेरी में स्थित समाधि स्थल पर जाएँगे। पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करने वाले पीएचसी के अध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार वंकवानी ने कहा कि यह दूसरा मौका है, जब काउंसिल ने दूसरे देशों में बसे हिंदू श्रद्धालुओं को यह दिखाने के लिए बुलाया है कि पाकिस्तान में एक सहिष्णु और बहुलतावादी सोसायटी का भी अस्तित्व है। बता दें कि डॉक्टर रमेश कुमार वंकवानी पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य भी हैं। काउंसिल ने पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के सहयोग से यह पूरा कार्यक्रम आयोजित किया है।

इससे पहले नवंबर में भारत, कनाडा, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और स्पेन के 54 हिंदुओं ने टेरी मंदिर के दर्शन किए थे। उनका नेतृत्व परमहंस जी महाराज के पाँचवें उत्तराधिकारी श्री सतगुरु जी महाराज जी ने किया था।

हिंदू परिषद ने पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश के साथ दरगाह पर मनाई दिवाली

आठ नवंबर को पीएचसी ने एक शताब्दी पुराने इस मंदिर में दिवाली मनाने के लिए एक समारोह का आयोजन किया था। संगठन ने पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुलजार अहमद का शुक्रिया अदा करने के लिए दिवाली में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया था। इस मंदिर में इस्लामवादियों द्वारा तोड़फोड़ और अदालत के आदेश पर पुनर्निर्मित होने के बाद यह पहला उत्सव था।

कोर्ट ने दिया था मंदिर बनवाने का आदेश

पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश के आदेश पर इस धर्मस्थल का जीर्णोद्धार कराया गया है। शीर्ष अदालत ने अक्टूबर 2021 में खैबर पख्तूनख्वा प्रांतीय सरकार को एक सदी पुराने इस समाधि स्थल में तोड़फोड़ करने में शामिल 123 दोषियों से 3.3 करोड़ रुपए (1,94,161 अमेरिकी डॉलर) की वसूली करने का भी आदेश दिया था।

हालाँकि, इस्लामवादियों ने पाकिस्तान के हिंदुओं को अपना जुर्माना भरने के लिए मजबूर किया था। PHC ने मुल्क के हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच अंतरधार्मिक सद्भाव बढ़ाने के लिए ‘सद्भावना’ के नाम पर 11 मुस्लिम मौलवियों का जुर्माना खुद भरा था। इसके बाद बाकी आरोपितों ने भी उनके जुर्माने को भरने के लिए हिंदुओं पर शुरू कर दिया।

इससे पहले साल 1997 में तीर्थस्थल पर पहली बार हमला किया गया था, जिसमें यह स्थान बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। पीएचसी प्रमुख वंकवानी ने 2015 में शीर्ष अदालत का रुख किया था और धर्मस्थल के जीर्णोद्धार तथा वहाँ वार्षिक तीर्थयात्रा को फिर से शुरू कराए जाने का अनुरोध किया था। 

‘हम यहाँ DM की बुआ ज#न करने आए हैं’: कौन है वह ‘गालीबाज पत्रकार’ जो अयोध्या में जमीन सौदों की कर रहा था पड़ताल

अयोध्या राम मंदिर को विवादित बनाने के मकसद से इंडियन एक्सप्रेस ने जमीनों की खरीद पर किस तरह फैक्ट गढ़े, यह हमने अपनी पिछली रिपोर्ट में आपको बताया है। इस तरह की रिपोर्टिंग से स्थानीय लोग हैरान हैं। उनका मानना है कि ऐसा धर्मनगरी को बदनाम करने की नीयत से किया जा रहा है। लोगों की माने तो जमीनों के सौदे पर रिपोर्टिंग को लेकर जो कथित पत्रकार अयोध्या में घूम रहे हैं, वे गालीबाज भी हैं। इन निवासियों में छात्र, व्यापारी, किसान और संत शामिल हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में जिन इलाकों में जमीन के सौदे को लेकर संदेह जताया गया है, 27 और 28 दिसम्बर 2021 को ऑपइंडिया के रिपोर्टर ने इन जगहों पर समय बिताया। लोगों से बात की। सबने इस रिपोर्ट को भ्रामक और सत्यता से परे बताया।

‘बेवजह के विवाद से बदनाम कर दिया’

राम मंदिर परिसर से लगभग 12 KM दूर है बिरौली, जहाँ आयुष चौधरी की कथित रिश्तेदार ने जमीन की खरीद की है। यहाँ हमारी मुलाकात भूमि बेचने वाले परिवार के सदस्य संजय कुमार वर्मा से खेतों में ही हो गई। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “ऐसी खबरों से बेवजह का विवाद पैदा कर हमारे इलाके को बदनाम कर दिया गया। हम और हमारी जमीनें साफ सुथरी और विवादों से परे थीं। फिर भी हमें विवाद का विषय बना डाला। सौदे के दौरान हमें हमारी जमीन का पूरा पैसा मिला। सभी जरूरी कानूनी नियमों का पालन किया गया। हमसे किसी ने कोई भी जोर जबरदस्ती नहीं की। लेकिन अब बदनामी ऐसी कर दी गई है कि आगे से कोई भी यहाँ जमीन खरीदने में भी संकोच करेगा।”

संजय कुमार वर्मा से बात करते ऑपइंडिया के रिपोर्टर राहुल पांडेय

‘यहाँ बरसात में भर जाता है पानी’

बिरौली में ही हमारी मुलाकात संदीप वर्मा से भी हुई। उन्होंने बताया, “मैंने इंडियन एक्सप्रेस की खबर पढ़ी। उसमे सब अफवाह लिखी है। मेरी भी यहाँ आस-पास जमीन है। हम पर तो कभी किसी अधिकारी या नेता ने कोई दबाव नहीं बनाया। इस खबर के बाद जमीन के खरीदार इधर आने बंद हो गए हैं। अब हम लोगों की प्रॉपर्टी शक की नजर से देखी जा रही है। राम मंदिर यहाँ से 10 KM से ज्यादा दूर है फिर भी लिख दिया कि यह जगह मंदिर के बगल में है। यहाँ बरसात में पानी भर जाता है। अभी यहाँ कोई परियोजना या होटल आदि का दूर–दूर तक नामोनिशान भी नहीं है। लेकिन फिर भी हमारे इस इलाके को न जाने क्यों बदनाम कर दिया।”

संदीप वर्मा से बात करते ऑपइंडिया के रिपोर्टर राहुल पांडेय

‘यह विकास रोकने का षड्यंत्र’

अयोध्या शहर की ओर जाने के रास्ते में है इटौरा चौराहा (हनुमत नगर)। यहाँ पर मिले रवि तिवारी। उन्होंने बताया, “मैं इसी क्षेत्र का रहने वाला हूँ। ये क्षेत्र अभी विकास शुरू भी नहीं कर पाया था कि यहाँ कुछ विपक्ष वालों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। यहाँ से राममंदिर कम से कम 12 किलोमीटर दूर है। फिर भी 5 किलोमीटर की अफवाह उड़ी हुई है। ये इलाका देहात क्षेत्र में आता है। हर कोई अपनी चीज किसी अच्छे व्यक्ति को ही देना चाहता है। उड़ाई गई खबर इस क्षेत्र का विकास रोक देगी। इसके पीछे क्षेत्र का विकास रोकने का षड्यंत्र है।”

रवि तिवारी से बात करते ऑपइंडिया के रिपोर्टर राहुल पांडेय

‘पत्रकार दे रहे थे गंदी-गंदी गालियाँ’

सबसे ज्यादा विवाद बरहटा मांझा क्षेत्र में जमीन के सौदों को लेकर है। यहाँ अधिकतर जमीन MRVT (महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट) से संबंधित हैं। यहाँ जिन अधिकारियों के रिश्तेदारों द्वारा जमीन खरीदने का दावा किया गया है, उनमें कमिश्नर, DIG, मेयर और भाजपा विधायक हैं। ऑपइंडिया उस स्थान पर पहुँचा, जहाँ कमिश्नर एमपी अग्रवाल और DIG दीपक अग्रवाल के रिश्तेदार द्वारा जमीन खरीदे जाने का दावा है। वहाँ कुछ स्थानीय लोग मिले। एक महिला ने बताया, “4-5 दिन पहले भी कुछ पत्रकार यहाँ आए थे। उनको पहली बार देखा था। वे आपस में बात करते हुए DM को गाली दे रहे थे। एक छोटे कद का पत्रकार था, वह कह रहा था- हम यहाँ DM की बुआ जवान करने आए हैं।”

पत्रकारों की भाषा को लेकर शिकायत करने वाले स्थानीय

‘MRVT की सभी जमीन विवादित नहीं’

ऑपइंडिया ने बरहटा मांझा के खालिक पुरवा में रहने वाले इन्द्रराज निषाद से बात की। उन्होंने बताया, ‘मैंने भी MRVT से जमीन लिया था। MRVT के सभी स्थान विवादित नहीं हैं। सभी अधिकारी गलत नहीं हैं। अगर कहीं किसी ने गलत किया है तो वो जाँच में आएगा। इस झूठी खबर ने चारों तरफ इलाके को बदनाम कर दिया। अब इधर जमीन के खरीदार न के बराबर आ रहे हैं। मैं खुद ही अपना एक छोटा प्लॉट बेचने के चक्कर में था लेकिन अब इस खबर के बाद उसे भी खरीदने वाला कोई नहीं आ रहा। हम मीडिया वालों से आग्रह करते हैं कि जो भी खबर चलाएँ वो सही चलाएँ।”

बरहटा मांझा में इन्द्रराज निषाद के साथ ऑपइंडिया के रिपोर्टर राहुल पांडेय

‘भाजपा सरकार को बदनाम करने का प्लान’

राम मंदिर से कुछ ही दूरी पर जमीन के कारोबार से जुड़े वासुदेव घाट के बाबूराम गुप्ता से ऑपइंडिया ने बात की। उन्होंने बताया, “मैंने पूरी खबर पढ़ी है। ये सरासर झूठ है। 15 और 20 किलोमीटर के दायरे वाली जमीनों को भी 5 किलोमीटर के अंदर बताया गया है। अधिकारियों के बहाने भाजपा सरकार को बदनाम करने का प्लान बनाया गया है। ये तमाम भ्रम विपक्षी लोग फैला रहे हैं।”

वासुदेव घाट अयोध्या निवासी बाबूराम गुप्ता ने खबर को निराधार बताया

अयोध्या के संत आक्रोशित

हनुमानगढ़ी के संत राजू दास ने ऑपइंडिया से फ़ोन पर बात की। उन्होंने बताया, “अयोध्या में कोई भी बाहरी पैसे का निवेश न करे ये सब उसकी ही साजिश है। साजिशकर्ता वही हैं जिन्होंने भगवान् को काल्पनिक तक बताया था। जिनके जमीन खरीदने पर विवाद खड़ा किया जा रहा क्या उन्होंने पैसा किसी की हत्या कर या कोई आपराधिक हरकत कर कमाया था? यह वामपंथी और विकृत सोच वालों की साजिश है धर्मनगरी को बदनाम करने की।”

महंत अजय दस व अन्य साधु संत

अयोध्या के प्रमोद वन स्थित नायक मंदिर के महंत ने बताया, “हो सकता है कि कुछ लोगों ने गलतियाँ की हों। लेकिन जिस प्रकार से मामले में सबको लपेटा जा रहा वो सही नहीं है।” ऑपइंडिया ने अयोध्या के रघुनंदन कुञ्ज मंदिर रायगंज के महंत अजय दास से भी बात की। उन्होंने बताया, “यह सब मीडिया का फैलाया भ्रम है। अधिकारियों के रिश्तेदारों ने धार्मिक भावनाओं के साथ जमीन खरीदी थी। उन्हें बेवजह बदनाम किया गया। अंत में सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।”

‘माँ-बाप की मर्जी से शादी, वरना वेश्यावृत्ति’ : पढ़ें News 24 ने कैसे किया बिहार DGP के बयान के साथ खिलवाड़, अब लग रही लताड़

किसी के बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करना हमेशा से मीडिया की आदत रही है। इसी आदत के चलते इस बार न्यूज-24 को सोशल मीडिया पर लताड़ लग रही है। दरअसल, मीडिया चैनल ने 30 दिसंबर 2021 को बिहार पुलिस डीजीपी एस के सिंघल की एक वीडियो पोस्ट की और ऐसे दर्शाया मानो उनका कहना हो कि जो लड़कियाँ माँ-बाप को छोड़कर घर से भागती हैं उन्हें आखिर में वेश्यवृत्ति में जाना पड़ता है। 

नीचे ट्वीट के स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं कि कैसे न्यूज 24 ने डीजीपी की वीडियो का एक क्लिप शेयर करके डीजीपी के नाम पर कहा है, “माँ-बाप की मर्जी से करें शादी, वरना वेश्यावृत्ति में जाना पड़ सकता है।- बिहार पुलिस के डीजीपी एस के सिघल की लड़कियों को नसीहत।”

जबकि, यदि पूरी वीडियो देखें तो पता चलता है कि डीजीपी ने अपने बयान में उस अनुभव की बात बताई है जो समाज में घटित हो रही घटनाओं के आधार पर है।

इस वीडियो में उन्होंने कहा, “एक और समस्या जो आ रही है। वो ये है कि कई सारी लड़कियाँ हमारी बेटियाँ बिना माँ-पिता की मर्जियों के चली जाती हैं। इसके इतने दुखद परिणाम निकलते हैं। कइयों की तो हत्या हो जाती है लड़का हो या लड़की हो। कई सारी जो हमारी बेटियाँ हैं वो वेश्यावृत्ति तक में पहुँच जाती हैं। उनका कोई ठिकाना नहीं रहता कि वो जिंदगी में क्या कर पाएँगी क्या नहीं कर पाएँगी। वो कुछ सही प्रकार से नहीं होता। उसका बहुत ज्यादा दुख परिवार के सदस्यों और माता-पिता को उठाना पड़ता है। मैं अनुरोध करूँगा कि बेटा-बेटी से लगातार बात करें उन्हें अच्छे से अच्छे संस्कार दें, उनकी भावनाओं को अच्छे से समझें और अपने परिवार को बहुत मजबूती के साथ जोड़ें।”

अब इस बयान को अगर पंक्ति दर पंक्ति पढ़ें तो पता चलेगा कि इस बयान में कुछ भी गलत नहीं है और कहीं से कहीं तक वो संदेश नहीं जा रहा जो न्यूज 24 ने रिपोर्ट किया। इसकी अंतिम लाइन में तो स्पष्ट तौर पर है कि डीजीपी ने लड़कियों को नसीहत नहीं दी बल्कि माँ-बाप से अनुरोध किया है कि वो अपने बच्चे को समझें ताकि उनके बच्चे परिवार से जुड़े रहें और सारी बातें परिवार से साझा कर  सकें। रही बात तो ‘वेश्यावृत्ति’ शब्द के इस्तेमाल की तो डीजीपी सिंघल के बयान से साफ है कि ये विचार उन्हीं घटनाओं से उपजे हैं जब समाज में ऐसा हुआ। इसलिए ऐसा कहना है कि डीजीपी सलाह दे रहे थे कि अगर कोई लड़की माँ-बाप की पसंद से शादी न करे तो वेश्यावृत्ति में चली जाती है, सरासर गलत है और यही वजह कि तोड़-मरोड़ कर रिपोर्ट करने के लिए न्यूज 24 को आलोचना सहनी पड़ रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के एनालिस्ट दिव्य कुमार सोती ने इस ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “डीजीपी ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है। वो अनुभव के आधार पर सिर्फ बता रहे हैं कि घर पर बिना बताए गायब होने में कुछ जोखिम हैं। सलाह वो पेरेंटस् को दे रहे हैं कि बच्चों से दोस्तों जैसा व्यवहार करें। ये सबको पता है कि बिहार एक सक्रिय मानव तस्करी रूट पर स्थित है। आप समाज में चरस बोना बंद करें।”