Home Blog Page 3098

यौन उत्पीड़न के आरोपित को कॉन्ग्रेस ने बनाया सेक्रेटरी: ‘लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ’ वाली प्रियंका गाँधी की पार्टी में महिला सशक्तिकरण ऐसे

उत्तर प्रदेश (Uttar pradesh) में आगामी चुनावों को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच कॉन्ग्रेस (Congress) का दोगलापन एक बार फिर से सामने आ गया है। एक तरफ कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) महिला सशक्तिकरण (Women empowerment) को लेकर चिल्ला-चिल्ला कर नारा दे रही हैं कि ‘लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ‘ तो दूसरी ओर एक महिलाओं के यौन उत्पीड़न के आरोपित को पार्टी में एक अहम पद दिया जाता है। पिछले सप्ताह ही कॉन्ग्रेस पार्टी ने यौन उत्पीड़न (Sexual harassment) के आरोपित रंजीत मुखर्जी को तीन प्रमुख राज्यों- त्रिपुरा, नागालैंड और सिक्किम का सचिव बनाया है।

मुखर्जी को पिछले साल पार्टी की एक सहयोगी को परेशान करने और एक अन्य महिला के खिलाफ गलत व्यवहार का आरोप लगाए जाने के बाद पार्टी के पदों से हटा दिया गया था। कॉन्ग्रेस ने 23 दिसंबर 2021 को AICC के तीन सचिवों की नियुक्ति की थी। इसमें रंजीत मुखर्जी (Ranajit Mukherjee), जरिता लैतफांग (Szarita Laitphang) और तजिंदर पाल सिंह बिट्टू (Tajinder Pal Singh Bittu) शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक पार्टियाँ अपने-अपने हिसाब से जोर आजमाइश कर रही हैं। समाजवादी पार्टी (Samajwadi party) समेत दूसरे दल जातिगत राजनीति के सहारे चुनावी नदी पार करने की कोशिश कर रहे हैं तो सत्तारूढ़ भाजपा (BJP) यह चुनाव अपने विकास और हिंदुत्व के भरोसे लड़ रही है।

वहीं, कभी भारतीय राजनीति का केंद्र बिंदु रही और अब डूबती नाव बन चुकी कॉन्ग्रेस अभी भी वोटरों को विश्वसनीय विकल्प देने के लिए संघर्ष कर रही है। हमेशा की तरह दिवास्वप्न देखने वाले राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) अपने ही तरीके से पार्टी को पुनर्जीवित करने की कोशिशों में लगे हैं तो ‘दादी की तरह नाक वाली’ उनकी बहन प्रियंका गाँधी अपने भाई की तारीफें करती दिख रही हैं।

प्रियंका गाँधी वाड्रा ने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को भुनाने की कोशिश करते हुए नारा दिया था कि ‘लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ’, लेकिन हाल ही में उन्होंने कहा कि एलपीजी सिलेंडर देना और शौचालय बनवाना महिला सशक्तिकरण नहीं है। उनके इस बेतुके बयान ने इस वास्तविकता को उजागर कर दिया वो हकीकत में सच्चाई से कितनी दूर हैं।

प्रियंका गाँधी ने महिलाओं की सुरक्षा और उनके आगे बढ़ने के लिए किए जाने वाले उपायों को महिला सशक्तिकरण मानने से इनकार कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि कॉन्ग्रेस ने इस मुद्दे को पीछे छोड़ते हुए यौन उत्पीड़न और हिंसक व्यवहार के आरोपित नेता को बहाल कर दिया है।

रंजीत मुखर्जी पर क्या हैं आरोप?

रंजीत मुखर्जी AICC के सचिव थे और पिछले साल उन्होंने उस वक्त अपने पद से इस्तीफा दिया था, जब उनके खिलाफ आंतरिक जाँच हुई थी। राज्यसभा सदस्य राजीव गौड़ा (Rajeev Gowda) ने यह जाँच की थी। राजीव गौड़ा पार्टी के रिसर्च डिपार्टमेंट के प्रमुख हैं। मुखर्जी पार्टी के रिसर्च विंग के सदस्य भी हुआ करते थे। आरोप लगने के बाद उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया था।

गौरतलब है कि 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनावों के दौरान एनएसयूआई की एक महिला कार्यकर्ता ने मुखर्जी के खिलाफ लिखित शिकायत की थी। इसके अलावा, रिसर्च विंग के एक अन्य सहयोगी ने भी आरोप लगाया था कि मुखर्जी हिंसक व्यवहार में शामिल थे। महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने के बावजूद कॉन्ग्रेस ने मुखर्जी को बहाल कर दिया, जबकि उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न की जाँच अभी निष्कर्ष पर नहीं पहुँची है।

मिशनरीज ऑफ चौरिटी को ओडिशा में हरसंभव मदद, CM पटनायक ने दिया आदेश, कहा- जरूरत पड़े तो मुख्यमंत्री फंड का भी करें इस्तेमाल

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने गुरुवार (30 दिसंबर 2021) को जिला कलेक्टरों को मदर टेरेसा द्वारा स्थापित मिशनरीज ऑफ चैरिटी द्वारा संचालित संगठनों के साथ नियमित संपर्क में रहने को कहा। नवीन पटनायक ने जिला प्रमुखों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि इन संगठनों का कोई भी निवासी विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी संकट से पीड़ित न हो। मुख्यमंत्री ने कहा, “जहाँ भी जरूरत हो, मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) से धन का इस्तेमाल इस उद्देश्य के लिए किया जा सकता है।”

बता दें कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी के फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) के नवीनीकरण को मंजूरी देने से गृह मंत्रालय के इनकार के बाद यह कदम उठाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में जानकारी दी थी कि विदेशी अभिदाय विनियमन कानून के तहत पंजीकरण के नवीनीकरण के मिशनरीज ऑफ चैरिटी के आवेदन को 25 दिसंबर को कुछ पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करने के कारण खारिज कर दिया गया है।

हालाँकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) का कहना था कि उन्होंने मदर टेरेसा द्वारा स्थापित ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी MoC)’ के बैंक खातों को फ्रीज नहीं किया, बल्कि सिर्फ रजिस्ट्रेशन की वैधता बढ़ाने की याचिका को रद्द किया। वहीं ‘स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)’ ने बताया कि संस्था ने खुद ही निवेदन भेजा था कि उसके बैंक खातों को फ्रीज कर लिया जाए।

उल्लेखनीय है कि ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी MoC)’ के बैंक खातों को फ्रीज किए जाने की खबरों के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और वामपंथी दल CPI ने आरोप लगाया था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने क्रिसमस पर ईसाइयों पर हमला बोलते हुए MoC के बैंक खातों को जब्त कर दिया। ममता बनर्जी ने दावा किया था कि 22,000 मरीज और कर्मचारी बिना भोजन और दवाओं के बेचैन हैं। बता दें कि मदर टेरेसा द्वारा स्थापित ‘मिशनरी ऑफ चैरिटी’ पर कथित तौर पर बच्चों के ख़रीद-फरोख्त का भी आरोप लग चुका है।

लखनऊ में अखिलेश के ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ पर वाह-वाह, अयोध्या में योगी आदित्यनाथ का विकास ‘सांप्रदायिक’: यूँ ही ‘बेताब’ नहीं है नूर मोहम्मद

नूर मोहम्मद बड़े चाव से हमें एक के बाद एक लखनऊ के स्थल दिखा रहे थे। बड़ा इमामबाड़ा, भूलभूलैया, तीले वाली मस्जिद, रूमी दरवाज़ा, पिक्चर गैलरी, सतखंडा, घंटाघर, आसिफी मस्जिद और छोटा इमामबाड़ा आदि। हमें अपने इ-ऑटोरिक्शा में बिठाकर एक इमारत से दूसरी इमारत तक ले जाते हुए उसकी खासियत बताते जाते थे। कैसे रूमी दरवाजा एक तरफ से महल और दूसरी तरफ से दरवाज़ा लगता है, तथा क्यों चार मंज़िल वाली इमारत सतखंडा कहलाती है इत्यादि। खास लखनवी बतकही अंदाज़ में बात करने वाले नूर हमारे गाइड भी थे और उस छोटे से कोई आधा किलोमीटर इलाके में घुमाने वाले वाहनचालक भी।

इसी हफ्ते की बात है। मैं और पत्नी सीमा अयोध्या से लौटते हुए लखनऊ की सैर पर थे। इ-रिक्शा के साथ ही घोड़ा गाड़ी भी चल रही थी तो कार भी। इस सबके बीच हुसैनाबाद कहे जाने वाले इस इलाके में कोविड टीकाकरण का कैंप भी चल रहा था। जहाँ बड़ी बेतकल्लुफी से बहुत सी औरतें भी टीकाकरण के कतार में थीं। जिनमें बुर्केवाली औरतों की संख्या अधिक थी। जहाँ तहाँ चिपके पोस्टर गवाही दे रहे थे कि उत्तर प्रदेश में चुनाव नज़दीक ही हैं।

लखनऊ का ये छोटा सा इलाका जहाँ ये पुरानी इमारतें हैं, काफी साफ-सुथरा था। यहाँ की सड़क भी कोलतार की जगह इमारतों के रंग के मिले-जुले पत्थर से बनी हुई थी। अच्छी लाइटिंग थी। पार्किंग भी व्यवस्थित थी। आमतौर से देश के शहरों के पुराने इलाकों के मुकाबले बहुत ही करीने से सजा सँवरा इलाका था। बातों-बातों में हमने नूर मोहम्मद से पूछा, “आपका इलाका तो बड़ा बेहतर दिखता है भाई?”

रूमी दरवाजा

तो नूर ने तपाक से जबाव दिया, “अखिलेश (यादव) ने पिछली बार इसे बनवाया था। अगर वो (मुख्यमंत्री) बने रहते तो इसे और भी खूबसूरत बना देते।” उनका ये उत्तर सुनते ही मेरा ध्यान अयोध्या की ओर चला गया जहाँ से हम पिछले ही रोज़ लौटे थे। अयोध्या में हमने निर्माणाधीन रामजन्मभूमि मंदिर का स्थान देखा था। पावन सरयू के दर्शन किए थे। हम हनुमान गढ़ी, जनक महल, राम की पैड़ी, फैज़ाबाद के डोगरा रेजिमेंटल सेंटर के मंदिर और गुप्तार घाट गए थे। दशरथ किला, सुग्रीव किला और वहाँ के अन्य कई प्राचीन और जर्जर होते हुए मंदिरों की इमारतों को भी देखा था।

नूर मोहम्मद के जबाव से एक सवाल मन में कौंधा जिसका उत्तर पाना ज़रूरी है। जब अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री रहते नबाव आसफ उद्दौला की बनाई इमारतों के आसपास के इलाकों का सौंदर्यीकरण किया तो उसे साम्प्रदायिक नहीं कहा गया था? लेकिन मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गुप्तार घाट व अयोध्या में अन्य स्थानों पर किए जाने वाले विकास कार्य को कई लोग साम्प्रदायिक कह रहे हैं। ऐसा क्यों है? राम की पावन भूमि अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर का निर्माण क्योंकर साम्प्रदायिक हो सकता है? उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद बनाए जा रहे मंदिर का विरोध क्यों?

हनुमान गढ़ी और दशरथ महल

मान लिया कि राम मंदिर का मामला अदालत में था इसलिए पहले की सरकारें उस मामले में कुछ नहीं कर सकतीं थी। पर अयोध्या में तीर्थयात्रियों को सामान्य सुविधाएँ देने में अबतक की सरकारों को क्या परेशानी थी? ये सही है कि अयोध्या में अब राममंदिर का निर्माण हो रहा है एवं अन्य निर्माण कार्य भी करवाए जा रहे है। लेकिन वहाँ जाकर लगा कि किस तरह तीर्थयात्रियों को दोयम दर्ज़े का नागरिक मानकर इतने लम्बे समय तक उनकी उपेक्षा की गई। वहाँ के गली कूँचों की हालत देख कर मन में गहरी क्लान्ति और पीड़ा हुई। अधिकतर प्राचीन मंदिर जर्जर हालत में हैं। क्या तीर्थयात्रियों के लिए आवास, साफ-सफाई, शौचालय, स्नानागार और परिवहन की बेहतर व्यवस्था इसलिए नहीं की गई क्योंकि ऐसा करने से कुछ दलों का सेकुलरवाद खतरे में पड़ जाता?

आप रामजी को भगवान नहीं मानते तो न माने, ये आपकी मर्ज़ी है। पर राम के नाम पर जो लोग अयोध्या में आते रहे हैं उन्हें तीर्थयात्री न समझकर पर्यटक ही मान लेते तो आपका क्या घिस जाता? हालत तो ये है कि पिछले 75 वर्षों में राम की नगरी के लिए दिल्ली से आपने एक ढंग की ट्रेन तक नहीं शुरू की है। कोई ढंग का बाज़ार तक सूर्यवंशी राजा राम की नगरी में नहीं है। रहने तक के लिए आपको फैज़ाबाद शहर में जाना पड़ता है क्योंकि कोई पर्यटकों के लिए को ठीकठाक आवासीय व्यवस्था अयोध्या नगरी में नहीं है। यह कैसी विचारधारा और कैसी राजनीति है जो रामभक्तों को देश के आम नागरिकों को मिल रही सामान्य सेवाओं से भी वंचित रखती है? और अब जब मौजूदा केंद्र व राज्य सरकार अयोध्या के पुनरोद्धार के लिए काम कर रही है तो आप उसे साम्प्रदायिक बताकर सेकुलरवाद के लिए बड़ा ख़तरा बता रहे हैं?

अयोध्या के बाजार और सरयू नदी

सवाल नूर मोहम्मद के अनायास उत्तर से पैदा हुए ख्याल मात्र का नहीं हैं। ये सवाल आज भारत की राजनीति ही नहीं समूचे सामाजिक जीवन का सबसे प्राथमिक और मूल प्रश्न है। सेकुलर और साम्प्रदायिक होने का मनमाना प्रमाणपत्र बाँटने वालों की एक बड़ी जमात आज़ादी के बाद खड़ी हो गई है। ये कथित बुद्धिजीवी अपनी राजनीतिक/वैचारिक पसंद और सुविधा के अनुसार किसी को भी साम्प्रदायिक और किसी को सेकुलर बता देते हैं।

विकृत और छद्म सेकुलरवाद का कीड़ा इन्हें इतने भीतर तक काट गया है कि ये पूरे समाज को बस साम्प्रदायिकता और सेकुलरवाद के चश्मे से ही देखते हैं। ये सावरकर और गाँधी को ही खाँचों में बाँटकर सीमित नहीं रह जाते। इनके लिए तो हमारी हर विरासत, हर धरोहर, इतिहास की हर घटना और हर परम्परा इसी नज़रिए की गुलाम है। इन भाई लोगों ने तो हमारे महान साहित्यकारों तक को नहीं छोड़ा। इसी संकीर्ण, विघटनकारी और संकुचित मानसिकता के चलते इन कथित ठेकेदारों ने तुलसी और कबीर को भी बाँट दिया है। कितना हास्यास्पद है कि इन्होंने कबीर को सेकुलर और तुलसी को साम्प्रदायिक घोषित किया हुआ है।

इनके लिए तो गाँधी के राम और अयोध्या के राम भी अलग-अलग हैं। समाज को बाँटने की कोई मानसिकता है तो यही कथित सेकुलर मानसिकता है। इसी के नाम पर तुष्टीकरण और उससे उत्पन्न दुष्चक्र पूरे भारत को सालों से हिंसा, विघटन और राजनीतिक विद्वेष की भट्टी में झोंकता रहा है। लखनऊ की सड़कों और अयोध्या के गली कूँचों में जिस दिन ये लोग फ़र्क़ करना बंद कर देंगे उसी दिन ये भारत के असली रूप को पहचानेंगे अन्यथा दीवार पर लिखी इबारत तो साफ़ है ही।

वसीम रिजवी की ‘मुहम्मद’ पर बैन नहीं: दिल्ली हाई कोर्ट का सुनवाई से इनकार, सारी कॉपी नष्ट करने की थी डिमांड

हाल ही में इस्लाम मजहब को त्यागकर हिंदू धर्म अपनाने वाले जितेंद्र त्यागी उर्फ ‘वसीम रिजवी’ की किताब ‘मुहम्मद’ पर प्रतिबंध लगाने की माँग करने वाली याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। याचिका में कहा गया था कि पुस्तक में इस्लाम, कुरान और पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ टिप्पणी की गई है।

कमर हसनैन द्वारा दायर याचिका में ‘रिजवी’ को भविष्य में इस तरह के कृत्य करने से रोकने के लिए 2,05,00,000 रुपए का हर्जाना देने की माँग की गई थी। इसके अलावा उन्होंने जितेंद्र त्यागी (वसीम रिजवी) को इस तरह के भड़काऊ बयान देने या उन्हें किसी भी मंच पर प्रकाशित करने से रोकने के लिए स्थायी रोक की माँग की थी।

याचिकाकर्ता ने कहा था कि पुस्तक की सभी प्रतियों को नष्ट कर दिया जाए, जो बिक गई है उसे भी और जो नहीं बिकी है उसे भी। याचिका में यह भी माँग की गई थी कि प्रिंट की गई किताबों को वापस लिया जाए। हालाँकि जस्टिस संजीव नरूला की सिंगल-जज बेंच ने खारिज कर दिया।

याचिकाकर्ता ने इस्लाम मानने वाले सभी लोगों की तरफ से दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और दावा किया था कि यह पुस्तक न केवल इस्लाम मानने वालों के लिए अपमानजनक है, बल्कि किसी अन्य पाठक के लिए भी आक्रामक, घृणित और परेशान करने वाली है। जस्टिस संजीव नरूला ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस मामले में आधार की कमी है क्योंकि जो राहत माँगी गई वह व्यक्तिगत रूप से नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि मामले को बनाए रखने के लिए, याचिकाकर्ता को व्यक्तिगत कानूनी अधिकार या कानूनी क्षति होनी चाहिए जो कि वर्तमान मामले में नहीं है। ऐसे में उन्हें इस अदालत का दरवाजा खटखटाने का कोई अधिकार है। अदालत ने कहा कि याचिका की सुनवाई जारी रखने के लिए कानून का कोई प्रावधान नहीं दिखाया गया है। इसलिए इसे खारिज किया जाता है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन ‘वसीम रिजवी’ ने सनातन धर्म अपनाया था। इसके साथ ही उनका नाम भी बदल गया। शुरू में कई मीडिया रिपोर्टों में रिजवी का नया नाम हरबीर नारायण त्यागी बताया गया, लेकिन उनका नाम जितेंद्र नारायण त्यागी रखा गया है। इस बात की पुष्टि ऑपइंडिया से स्वयं महंत नरसिंहानंद गिरि ने की थी। बता दें कि यति नरसिंहानंद ने ही वसीम रिजवी को हिंदू धर्म में शामिल करवाया था।

हिंदू धर्म अपनाने के बाद रिजवी ने कहा था, “मुगलों ने हमेशा परंपरा दी हिंदुओं को हराओ। जो पार्टी हिंदुओं को हराती है मुसलमान एकजुट होकर उसे वोट करते हैं। मुसलमान सिर्फ और सिर्फ हिंदुओं को हराने के लिए वोट करता है। मुझे इस्लाम से बाहर कर दिया गया है, हमारे सिर पर हर शुक्रवार को ईनाम बढ़ा दिया जाता है, आज मैं सनातन धर्म अपना रहा हूँ।”

‘कब्जा करने से रोकने पर एक माफिया ने मुँह पर फेंका था कागज’: CM योगी ने बताई राजनीति में आने की वजह, कहा- ये कोरोना से भी अधिक खतरनाक

हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने खुद के राजनीति में आने की वजह बताई। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में खुलासा किया कि मठ छोड़ कर राजनीति में उनके आने का मकसद माफियाओं का खात्मा करना था और इन साढ़े चार साल के कार्यकाल में सीएम योगी ने एक ऐसे मुख्यमंत्री के रूप में अपनी छवि गढ़ी है, जो प्रदेश में माफियाओं के खिलाफ ऐक्शन लेने में तनिक भी नहीं हिचकते।

इंटरव्यू के दौरान सीएम योगी बताते हैं कि एक बार अवैध कब्जा कर रहे एक माफिया ने उनके चेहरे पर कागज उछाल दिया था। ऐसी कई और घटनाएँ सामने आईं, तब उन्होंने मन बनाया कि वह माफियाओं का सफाया करने के लिए राजनीति में कदम रखेंगे।

इस बारे में विस्तार से बात करते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें गोरखपुर में एक अमीर व्यक्ति का फोन आया। उन्होंने कहा कि उनके घर पर एक मंत्री कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। जब वो उस जगह पर पहुँचे तो देखा कि घर के सामान को बाहर फेंका जा रहा था। 

योगी आदित्यनाथ ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जब मकान मालिक ने घर बेचा नहीं तो कोई उसे कैसे ले सकता है। लोगों की भीड़ सब देख रही थी, लेकिन कोई कुछ बोल नहीं रहा था। योगी के सवाल-जवाब करने पर माफिया ने उनके चेहरे की तरफ कुछ पेपर उछाले। इसके बाद उन्होंने भीड़ से उन्हें पीटने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि ऐसी ही कुछ घटनाएँ थी, जब उन्होंने राजनीति में कदम रखने का मन बना लिया।

एक ऐसी ही घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि साल 1994-95 के दौरान गोरखपुर में एक मशहूर परिवार हुआ करता था। उस परिवार की दो हवेलियाँ थीं। राज्य सरकार ने दोनों हवेलियों को माफियाओं को सौंप दिया। परिवार ने दोनों इमारतों को ढहा दिया। सीएम योगी ने बताया कि वह उस परिवार के लोगों से मिले और पूछा कि क्या हुआ था। उस व्यक्ति ने बताया कि अगर वह बिल्डिंग नहीं गिराते तो वह सब कुछ गँवा देते। अब कम से कम जमीन तो उनके पास रहेगी।

सीएम योगी ने कहा कि आज यूपी में कोई भी इस तरह की हरकत नहीं कर सकता। सभी अपराधी अच्छी तरह से जानते हैं कि अगर वे गैर-कानूनी तरीके से कुछ भी कब्जा करने की कोशिश करेंगे तो बुलडोजर चल जाएगा। उन्होंने माफिया को कोरोना वायरस से भी खतरनाक बताया। इसके साथ ही सीएम ने आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी के प्रचंड जीत की बात भी दोहराई।

उल्लेखनीय है कि यूपी में इस साल घटे बड़े घटनाक्रमों की बात करें तो सबसे ऊपर नाम सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा माफिया के हौसले तोड़ने पर ही होगा। सीएम योगी का बुलडोजर माफिया की संपत्ति पर ऐसा चला कि इन अपराधिक छवि वालों का मनोबल टूट कर ही रह गया। उत्तर प्रदेश के 25 माफिया पर योगी सरकार का बुलडोजर चला है। इससे 11 अरब से अधिक की संपत्ति को जब्त करने में मदद मिली है। 

‘समाजवादी इत्र’ लाने वाले सपा MLC पुष्पराज जैन के ठिकानों पर आयकर की छापेमारी, अयूब मियाँ के घर पर भी रेड

अवैध संपत्ति को लेकर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh News) में लगातार जारी है। इत्र कारोबारी पीयूष जैन (Piysuh Jain) के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के विधान पार्षद (MLC) और इत्र कारोबारी पुष्पराज जैन (Pushpraj Jain) उर्फ पम्पी (Pumpi) के खिलाफ इनकम टैक्स (Income Tax- IT Raid) की छापेमारी जारी है। इनके ठिकानों पर शुक्रवार (31 दिसंबर) को सुबह 7 बजे कार्रवाई शुरू की गई, जो खबर लिखे जाने तक जारी है।

वहीं, इत्र कारोबारी अयूब मियाँ (Ayub Miyan) के खिलाफ डायरेक्टरेट ऑफ गुड्स एंड जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) और याकूब परफ्यूम के यहाँ आयकर विभाग छापेमारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि याकूब परफ्यूम कंपनी के मालिक की पहले ही मौत हो चुकी है और बेटे का नाम फैजान है। 

उत्तर प्रदेश के कन्नौज में सदर कोतलवाली क्षेत्र के छिपट्टी स्थित पुष्पराज जैन के घर और फैक्ट्री में छापेमारी हो रही है, जिसे इनकम टैक्स विभाग की मुम्बई यूनिट द्वारा अंजाम दिया जा रहा है। इस तरह, उत्तर प्रदेश के कन्नौज, नोएडा, कानपुर और मुंबई समेत करीब 50 जगहों पर छापेमारी की कार्रवाई अभी जारी है।

इस कार्रवाई को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) चिढ़ गए हैं। सपा ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए कहा कि इस मसले पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव कन्नौज में प्रेसवार्ता करेंगे। ट्वीट में लिखा गया, “आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी के कन्नौज में प्रेसवार्ता की घोषणा करते ही भाजपा सरकार ने सपा एमएलसी पम्पी जैन के यहाँ छापामार कार्यवाही करनी शुरू कर दी। भाजपा का डर और बौखलाहट साफ है, जनता भाजपा को सबक सिखाने के लिए तैयार है!”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कन्नौज के स्वरूप नारायण इंटरमीडिएट कॉलेज से कक्षा 12 तक पढ़ाई करने वाले 60 वर्षीय पुष्पराज जैन कन्नौज के इत्र व्यापारी हैं। पुष्पराज जैन साल 2016 में इटावा-फर्रुखाबाद से एमएलसी चुने गए थे। चुनावी हलफनामे में उन्होंने बताया था कि उनके परिवार के पास लगभग 37.15 करोड़ रुपए की चल संपत्ति और 10.10 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति है। पुष्पराज जैन ने समाजवादी इत्र भी लॉन्च किया था। तब पुष्पराज ने कहा था कि नफरत की आँधी मिटाएगा समाजवादी इत्र।

पुष्पराज जैन का एक पेट्रोल पंप और एक कोल्ड स्टोरेज है। वह प्रगति अरोमा ऑयल डिस्टिलर्स प्राइवेट लिमिटेड के सह-मालिक हैं। उनके पिता सवैललाल जैन ने साल 1950 में इसकी नींव रखी थी। पुष्पराज का मुंबई में एक घर और ऑफिस है। वहाँ से मध्य-पूर्व के लगभग 12 देशों के साथ होने वाली व्यापारिक गतिविधियों को संचालित किया जाता है। उनके तीन भाइयों में से दो मुंबई ऑफिस में काम करते हैं, जबकि तीसरा उनके साथ कन्नौज में मैन्युफैक्चरिंग सेटअप पर काम करता है।

बता दें कि कन्नौज के ही इत्र व्यापारी पीयूष जैन (Piyush Jain) के यहाँ छापेमारी के दौरान पुष्पराज जैन का नाम भी खूब उछला था। मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि पीयूष जैन के घर पर छापेमारी के दौरान पुष्पराज जैन के साथ उसके कनेक्शन मिले थे।

खोजी पत्रकारिता के नाम पर इंडियन एक्सप्रेस का फरेब: 15 किमी की दूरी को 5 किमी में समेटा… दूसरे जिले की जमीन को भी राम मंदिर से जोड़ा

तारीख: 24 दिसंबर 2021। इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की। श्यामलाल यादव और संदीप सिंह की यह रिपोर्ट अयोध्या में जमीनों की खरीद से जुड़ी है। ‘खोजी पत्रकारिता’ के नाम पर इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कुछ ऐसे लोगों या उनके रिश्तेदारों ने जमीन खरीदी है जो ‘पद के दुरुपयोग’ का मामला हो सकता है। ऐसे 14 लोगों का जिक्र इस रिपोर्ट में है। इनमें स्थानीय जन प्रतिनिधि, वे अधिकारी जो अयोध्या में तैनात हैं या रहे हैं, स्थानीय रेवेन्यू अधिकारी और इनके करीबियों के बारे में सवाल उठाया गया है।

इस रिपोर्ट में इंडियन एक्सप्रेस ने ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं रखा था, जिससे जमीनों की खरीद में गड़बड़ी दिखे। ​रिपोर्ट में जिनलोगों का उसने जिक्र किया था, उनलोगों ने भी बातचीत में उसके दावे खारिज कर दिए थे। फिर भी इन जमीनों की खरीद विवादित दिखे, पाठकों के मन में संदेह पैदा हो, ऐसा लगे कि राम मंदिर के नाम पर अयोध्या में लूट मची हुई है, रिपोर्ट में सारी जमीनों को राम मंदिर साइट के 5 किलोमीटर की परिधि में बता दिया गया।

इंडियन एक्सप्रेस की इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मामले जाँच के निर्देश दिए थे। ऑपइंडिया ने भी रिपोर्ट में जिक्र की गई जमीनों की खरीद की पड़ताल शुरू की। हर जगह जाकर जमीन देखी। जैसे ही हमने पड़ताल शुरू की खोजी पत्रकारिता के नाम पर इंडियन एक्सप्रेस की फरेब की परत एक के बाद एक खुलती गई।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का अंश

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में IAS एमपी अग्रवाल, IPS दीपक कुमार, SDM पीयूष चौधरी, DSP अरविन्द चौरसिया, राजस्व अधिकारी पुरुषोत्तम दास गुप्ता, प्रदेश सूचना आयुक्त हर्षवर्धन शाही, रिटायर्ड IAS अधिकारी उमाधर द्विवेदी, लेखपाल बद्री उपाध्याय, कानूनगो सुधांशु रंजन, पेशकार दिनेश ओझा, अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय, गोसाईंगंज से भाजपा विधायक इंद्रप्रताप तिवारी खब्बू, अयोध्या से भाजपा विधायक वेद प्रकाश गुप्ता और प्रदेश OBC आयोग के सदस्य बलराम मौर्या का जिक्र किया गया है।

ऑपइंडिया ने पाया कि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का यह दावा झूठा है कि उसकी रिपोर्ट में उल्लेखित सारी जमीन 5 किलोमीटर के दायरे में है। जिन जमीनों का जिक्र किया गया है उसमें से केवल 5 भूखंड ही ऐसे हैं जो इसके दायरे में आते हैं। कई जमीन दूसरे थाना क्षेत्र और दूसरे जिले तक में भी हैं, लेकिन इन्हें भी राम मंदिर से जोड़ दिया गया है।

OBC आयोग के सदस्य बलराम मौर्या

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में राज्य OBC आयोग के सदस्य बलराम मौर्या का भी नाम है। मौर्या द्वारा महेशपुर में जमीन खरीदने की बात कही गई है। महेशपुर जिला अयोध्या की सीमाओं से बाहर जिला गोंडा में है। साथ ही इसकी राम मंदिर परिसर से दूरी 12 किलोमीटर है, जो इंडियन एक्सप्रेस के 5 किलोमीटर के दावे से ज्यादा है। धर्मनगरी अयोध्या और इस स्थान के मध्य सरयू नदी भी पड़ती है। लगभग 1 किलोमीटर लम्बाई बीच में पड़ने वाले पुल की ही है।

(साभार – गूगल मैप)

सूचना आयुक्त हर्षवर्धन शाही

उत्तर प्रदेश सूचना आयुक्त हर्षवर्धन शाही की पत्नी और बेटे द्वारा जमीन खरीदने की बात कही गई है। यह जमीन अयोध्या के सरायरासी माँझा क्षेत्र में है। जमीन राममंदिर परिसर से इंडियन एक्सप्रेस के 5 किलोमीटर के दावे से उलट लगभग 14 किलोमीटर दूर है। इस स्थान का थाना क्षेत्र भी राम मंदिर परिसर थाना क्षेत्र से अलग है।

सरायरासी माँझा की जमीन

ऑपइंडिया ने सरायरासी गाँव का दौरा किया। वह क्षेत्र अभी अधिकतर वीरान है। यह वही गाँव है जहाँ के कई लोगों ने अयोध्या मंदिर पर बाबर के हमले के दौरान मंदिर बचाते हुए अपने प्राण दिए थे।

(साभार- गूगल मैप)

SDM आयुष चौधरी

SDM आयुष चौधरी की चचेरी बहन शोभिता रानी द्वारा रामजन्मभूमि मंदिर परिसर के 5 KM के अंदर 2 अलग-अलग जमीन खरीदे जाने की बात कही गई है। ऑपइंडिया ने इन दोनों स्थानों का दौरा किया। मई 2020 में खरीदी गई पहली जमीन गाँव बिरौली में है, जो राम मंदिर परिसर से लगभग 13 KM दूर है। जमीन झुरमुटों और बेहद ऊबड़-खाबड़ इलाके में है। रास्ता धूल से भरा है।

SDM आयुष के कथित रिश्तेदारों की जमीन तक जाने वाली सड़क

यह सड़क बिलहरघाट और मसौधा नाम के 2 स्थानीय बाजारों को जोड़ती है।

दूसरी जमीन अयोध्या के गाँव मलिकपुर में है। यह स्थान राम मंदिर से लगभग 10 KM के फ़ासले पर है। दोनों जमीनों के थाना क्षेत्र भी जन्मभूमि परिसर से अलग हैं। यह जमीन नवम्बर 2019 में शोभिता द्वारा संचालित एक संस्था के नाम पर खरीदने का दावा किया गया है। SDM आयुष चौधरी अयोध्या जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अक्टूबर 2019 से अक्टूबर 2021 तक तैनात रहे हैं। फिलहाल उनकी तैनाती कानपुर जिले में है।

कानूनगो सुधांशु रंजन और लेखपाल बद्री उपाध्याय

रिपोर्ट के मुताबिक कानूनगो सुधांशु रंजन और लेखपाल बद्री उपाध्याय के परिजनों ने गंजा गाँव में जमीन खरीदी। कानूनगो सुधांशु की पत्नी अदिति द्वारा मार्च 2021 जमीन खरीदने का दावा किया गया है। वहीं लेखपाल बद्री उपाध्याय के पिता वशिष्ठ नारायण ने भी मार्च 2021 में ही उसी क्षेत्र में जमीन ली।

गंजा गाँव में ऑपइंडिया रिपोर्टर राहुल पांडेय

ऑपइंडिया की टीम ने इस गाँव का दौरा किया। गंजा गाँव भी राम मंदिर परिधि से लगभग 9 KM दूर है। इसका थानाक्षेत्र भी रामजन्मभूमि से अलग है। यह स्थान अयोध्या-प्रयागराज राजमार्ग पर पड़ने वाले डाभासेमर बाज़ार के पास एक गाँव में आता है।

(साभार- गूगल मैप)

DSP अरविन्द चौरसिया

इंडियन एक्सप्रेस का दावा है कि अरविन्द चौरसिया के रिश्तेदारों ने अयोध्या के हरकारा का पुरवा और कोरखाना में जमीन खरीदी। यह जमीन चौरसिया के ससुर संतोष कुमार और सास रंजना के नाम से हैं। जमीन जून और सितम्बर माह 2021 में खरीदी गई है। चौरसिया अयोध्या जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में बतौर DSP जुलाई 2017 से अगस्त 2020 तक तैनात रहे। ऑपइंडिया ने इन दोनों स्थानों का दौरा किया। दोनों जमीनों के थाना क्षेत्र राम मंदिर से अलग पाए गए। पहली जमीन हरकारा का पुरवा राम मंदिर से लगभग 15 KM और दूसरी जमीन कोरखाना लगभग 7 KM दूर है। हरकारा का पुरवा अयोध्या-आज़मगढ़ मार्ग पर स्थित है, जबकि कोरखाना अयोध्या कैंट क्षेत्र की बाहरी सीमाओं पर है।

DSP अरविन्द चौरसिया वर्तमान में मेरठ शहर के DSP कोतवाली हैं। जमीन खरीदे जाने के समय भी यहीं थे। पिछले माह मेरठ के कुख्यात कबाड़ी हाजी गल्ला पर कानूनी कार्रवाई करने वाली टीम में वो भी शामिल रहे हैं। हाजी गल्ला के आपराधिक प्रभाव की चर्चा खुद मुख्यमंत्री योगी और उसके इलाके सोतीगंज का नाम प्रधानमंत्री मोदी ने भी लिया था। हाजी गल्ला को पिछली सरकारों के राजनैतिक संरक्षण होने की भी बात कही गई थी।

MRVT की जमीन

विवाद के सबसे प्रमुख विषय के रूप में MRVT (महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट) का नाम है। इस ट्रस्ट की कुछ जमीनों पर न्यायालय में केस चल रहा है। इसी ट्रस्ट पर दलित से जमीन खरीदने के भी आरोप हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में इन जमीनों को IAS एमपी अग्रवाल, वर्तमान में ADM गोरखपुर पुरुषोत्तम दस गुप्ता, गोसाईंगंज विधायक इंद्रप्रताप तिवारी उर्फ़ खब्बू, वर्तमान DIG अलीगढ़ IPS दीपक कुमार, रिटायर्ड IAS उमाधर द्विवेदी से जोड़ा गया है।

बरहटा माझा में अधिकारियों के रिश्तेदारों द्वारा खरीदी गई जमीन पर ऑपइंडिया रिपोर्टर राहुल पांडेय (बाउंड्री के अंदर)

ऑपइंडिया की टीम ने बरहटा माझा का दौरा किया। यह स्थान इंडियन एक्सप्रेस के राम मंदिर से 5 किलोमीटर दायरे के दावे के अंदर पाया गया। यहाँ पर 3 बड़े-बड़े प्लॉटों में बाउंड्री और बड़े गेट लगे दिखे। स्थानीय लोगों ने इन्ही जमीनों को कमिश्नर और DIG के संबंधियों द्वारा खरीदी जमीन बताया। इस स्थान से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर नदी के पास दावे के मुताबिक भाजपा विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ़ खब्बू के रिश्तेदार द्वारा ली गई जमीन है। इंद्रप्रताप तिवारी उर्फ़ खब्बू तिवारी फिलहाल एक अन्य मामले में अयोध्या की जेल में हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ये वहीं जमीनें हैं जिनकी दलितों से खरीद को लेकर विवाद चल रहा है, क्योंकि MRVT की सभी जमीनें विवादित नहीं हैं।

विधायक वेद प्रकाश गुप्ता और मेयर ऋषिकेश उपाध्याय

बरहटा माझा में भाजपा विधायक वेद प्रकाश के परिजन द्वारा जमीन लिए जाने का दावा है। यह जमीन राम मंदिर से 5 किलोमीटर के दायरे में जरूर है, लेकिन इसकी खरीदारी MRVT ट्रस्ट से नहीं हुई है। यहाँ पर अधिकतर जमीनों पर मकान बने हुए हैं। सड़कों की हालत ठीक नहीं। नदी के किनारे बने बाँध के बगल स्थित इस इलाके में अधिकतर जमीनें MRVT ट्रस्ट की हैं। मेयर ऋषिकेश उपाध्याय द्वारा काजीपुर चितावा में जमीन लिए जाने का जिक्र है। इस जमीन की दूरी राम मंदिर से 5 किलोमीटर से कुछ ही अधिक है। यह जमीन भी MRVT ट्रस्ट की नहीं है।

IAS अनुज कुमार झा

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में आईएएस अनुज कुमार झा का जिक्र नहीं है। पर कई मीडिया रिपोर्टों में उनके रिश्तेदारों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। वे अयोध्या में डीएम रह चुके हैं। इन आरोपों पर उनका जवाब भी सामने आ चुका है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने या उनके किसी संबंधी ने महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट से जमीन नहीं खरीदी है। उनके पिता ने एक अन्य स्थान पर रहने के लिए 320 स्क्वायर मीटर जमीन खरीदी है, जिसका MRV ट्रस्ट से कोई लेना-देना नहीं है। वह जमीन किसी दलित की भी नहीं है। यह भी बताया है कि उनके पिता ने यह जमीन किसी ट्रस्ट को नहीं बेची। इसका किसी सरकारी काम में उपयोग नहीं किया गया है।

किसान आंदोलन का ‘हीरो’ जगमीत माँ और दोस्त सहित गिरफ्तार, आतंकी संगठन ‘SFJ’ के रेफरेंडम-2020 को कर रहा था प्रमोट

पटियाला पुलिस ने 28 वर्षीय जगमीत सिंह, उसकी माँ 50 वर्षीय जसवीर कौर और उसके दोस्त 23 वर्षीय रविंदर सिंह को आतंकवादी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ के तथाकथित ‘जनमत संग्रह 2020’ के लिए कथित रूप से प्रचार करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। उन पर सोशल मीडिया पर सिखों से जनमत संग्रह के लिए वोट करने की अपील करने का आरोप लगाया गया है। जगमीत सिंह ने नवंबर 2020 में किसान विरोध के चेहरे के रूप में उस वक्त सुर्खियाँ बटोरी थीं, जब उन पर हरियाणा पुलिस की पानी की बौछार वाले वीडियो वायरल हुए थे।

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने कहा कि तीनों के खिलाफ कोई पिछला मामला दर्ज नहीं है। जगमीत और उसकी माँ मूल रूप से गुरदासपुर के दुर्गापुर गाँव की रहने वाले हैं और फिलहाल वे बानूर की हाउसफेड सोसायटी में रह रहे हैं। उसका दोस्त रविंदर फतेहगढ़ साहिब के मंडी गोबिंदगढ़ के जसदा गाँव का रहने वाला है। ये तीनों पिछले कुछ समय से जनमत संग्रह के लिए प्रचार कर रहे हैं। तीनों को छह दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कैंपेन के लिए उन्हें विदेशों से भी धन मिला था या नहीं।

तीनों पर राजपुरा में लंगर के दौरान जनमत संग्रह के लिए प्रचार करने का आरोप है। इस लंगर का आयोजन माता गुजरी देवी और गुरु गोबिंद सिंह के पुत्रों की शहादत को याद करने के लिए किया गया था। इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए, 505 (2), 505 (3), 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया है।

राजपुरा के डीएसपी जीएस बैंस ने कहा कि जगमीत वही व्यक्ति है, जिसका वीडियो पिछले साल किसान विरोध के दौरान वायरल हुआ था। उन्होंने कहा, “तीनों आरोपी प्रतिबंधित संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे)’ के साथ मिलकर जनमत संग्रह के लिए कैंपेन कर रहे थे और जनमत संग्रह के लिए जनता को ऑनलाइन वोट देने के लिए भी प्रेरित कर रहे थे। जसवीर प्रमुख प्रचारक था। सभी आरोपियों के बैंक खातों की जाँच की जा रही है, ताकि पता लगाया जा सके कि कहीं उन्हें विदेशी फंडिंग तो नहीं मिली।”

पटियाला के एसएसपी एचएस भुल्लर ने कहा कि पुलिस ने तथाकथित जनमत संग्रह 2020 के लिए 692 फॉर्म और पर्चे, प्लास्टिक प्लेट, स्प्रे बोतल, पेन और अन्य प्रचार सामग्रियाँ बरामद की है। उन्होंने कहा, “जसवीर का देवर मंजीत सिंह ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल ग्रुप’ का एरिया कमांडर था, जबकि उसके पति कुलदीप सिंह चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग में सुपरिटेंडेंट के पद पर कार्यरत थे। रविंदर जगमीत का दोस्त है।”

दूसरी ओर, किसान नेताओं ने कहा कि किसान प्रदर्शन में भाग लेने के लिए जगमीत को दंडित किया जा रहा है। किसान मजदूर संघर्ष समिति के नेता एसएस पंढेर ने कहा, “अगर किसानों के आंदोलन का समर्थन करने के लिए जगमीत को दंडित किया गया तो हम इसका गंभीरता से संज्ञान लेंगे।”

25 नवंबर 2020 को जब प्रदर्शनकारी अब निरस्त किए जा चुके कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की ओर बढ़ रहे थे तब हरियाणा पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। उस दौरान जगमीत वाटर कैनन के सामने खड़े थे और कई मिनटों तक सामने से नहीं हटे। जगमीत के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गए और किसान आंदोलन के समर्थकों ने उन्हें ‘हीरो’ बताया।

किसान विरोध के दौरान सबूतों से पता चला कि इस आंदोलन को खालिस्तानी संगठनों, नक्सल समर्थकों और पेशेवर प्रदर्शनकारियों सहित भारत विरोधी ताकतों ने हाईजैक कर लिया था। खालिस्तानी आतंकवादी संगठन एसएफजे ने 26 जनवरी 2021 को लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले को नकद इनाम देने की घोषणा की थी। दिल्ली में दंगों के बीच सिख धर्म के पवित्र चिन्ह वाले दो झंडे फहराए गए थे।

उम्र: 62 साल, काम: मंदिरों की दान पेटी में कंडोम डालना; गिरफ्तारी के बाद बोला- फैला रहा था यीशु का संदेश, कोई अफसोस नहीं

कर्नाटक के दक्षिणी मंगलुरु पुलिस ने इलाके के विभिन्न हिंदू मंदिरों की दान पेटियों और परिसरों में इस्तेमाल किए गए कंडोम को फेंकने के आरोप में जॉन देसाई के बेटे देवदास देसाई (62) नाम के एक ईसाई व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। इस तरह की बार-बार अभद्रता करने वाले आरोपी को पिछले एक साल से पुलिस तलाश कर रही थी और आखिरकार उसे गिरफ्तार कर ने में सफलता हासिल कर ली।

मंगलुरु में कम-से-कम पांच मंदिरों ने परिसर में इस्तेमाल किए गए कंडोम मिलने पर इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई थी। हालाँकि, पुलिस आरोपी का पता नहीं लगा पाई, लेकिन 27 दिसंबर को कोरज्जाना कट्टे गाँव के एक मंदिर की दान पेटी में इस्तेमाल किया हुआ कंडोम मिलने के बाद उस व्यक्ति को पकड़ लिया गया। इस घटना की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मंदिर और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज की जाँच की जिसमें वह व्यक्ति दान पेटी में कुछ गिराने के बाद वहाँ से जाते हुए देखा गया।

सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने उस व्यक्ति को पकड़ लिया और पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि इसी तरह से उसने कई मंदिरों को अपवित्र किया था। हालाँकि, मामला सिर्फ पाँच मंदिरों के संबंध में ही दर्ज हैं, लेकिन आरोपी ने बताया कि उसने कुल 18 जगहों को अपवित्र किया है। देसाई ने केवल हिंदू धार्मिक स्थलों को ही नहीं, बल्कि गुरुद्वारों और मस्जिदों सहित अन्य पवित्र स्थानों को भी अपवित्र किया था।

मंगलुरु के पुलिस आयुक्त एन शशिकुमार ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस टीम आरोपी को पकड़ने में कामयाब रही। आरोपी की पहचान हुबली के उनकल के मूल निवासी देवदास देसाई के रूप में हुई है, जो पिछले 20 सालों से मंगलुरु में रह रहा है। आरोपी ऑटो चालक का काम करता था, लेकिन अपनी उम्र के कारण उसने यह काम छोड़ दिया और और आजीविका चलाने के लिए प्लास्टिक इकट्ठा कर उसे कबाड़ में बेचने का काम करता है।

कमिश्नर शशिकुमार ने कहा, “अपने पिता के दिनों से ही उसका पूरा परिवार ईसाई धर्म का पालन कर रहा है। उसने कई साल पहले अपनी पत्नी और बच्चे को छोड़ दिया है और अब उनके संपर्क में नहीं है। वह एक कट्टर ईसाई है।” पुलिस ने कहा कि देसाई ने लोगों को अपने धर्म का पालन कराने के लिए दूसरे धर्मों के धर्मस्थलों को अपवित्र किया।

शशिकुमार ने बताया, “आरोपी ने गुरुद्वारों के साथ-साथ क्षेत्र की मस्जिदों में भी इस्तेमाल किए गए कंडोम फेंके थे। उसने उन सारी जगहों के बारे में जानकारी दी, जहाँ उसने ऐसी हरकतें की हैं। पूछे जाने पर कि उसे सभी स्थान याद कैसे हैं, उसने कहा कि वह 15 वर्षों तक ऑटो चालक के रूप में काम किया है और वह सभी स्थानों से अच्छी तरह वाकिफ है। वह इस्तेमाल किए गए कंडोम को कचरे के ढेर से इकट्ठा करता था।” कमिश्नर ने बताया कि आरोपी के घर से अन्य धर्मों के खिलाफ कुछ लेख भी मिले हैं।

मीडिया से बात करते हुए आरोपी ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि वह यीशु का संदेश फैलाने के लिए ऐसा कर रहा था। उसने कहा, “मैं पिछले 15 वर्षों से यीशु के संदेश का प्रसार कर रहा हूँ। बाइबल कहती है कि यीशु के अलावा और कोई ईश्वर नहीं है। मैं कंडोम इसलिए फेंकता था, क्योंकि अशुद्ध चीजों को अपवित्र स्थानों पर ही फेेंकना चाहिए। मुझे कोई पछतावा नहीं है। गॉड ने हमें 70 साल का जीवन दिया है और मैं पहले से ही 62 साल का हूँ।”

इस्तेमाल किए गए कंडोम के अलावा देसाई भक्तों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले पत्र और नेताओं की विकृत तस्वीरों को भी दान पेटी में डाल देता था। पुलिस ने पाया है कि आरोपी मानसिक रूप से बीमार नहीं है। वह पढ़ और लिख सकता है और पूछे गए सभी सवालों के जवाब देता है। इससे स्पष्ट होता है कि वह मंदिरों को जानबूझकर अपवित्र कर रहा था।

गौरतलब है कि इस साल जनवरी में मेंगलुरु में उल्लाल के पास कोरगज्जा गुलिगाजा दैवस्थानम की हुंडी से ईसाई संदेशों के साथ तत्कालीन सीएम बीएस येदियुरप्पा और उनके बेटे बीवाई विजयेंद्र की विकृत छवियों के साथ इस्तेमाल किए गए कंडोम और पोस्टर मिले थे। पोस्टरों में पीएम मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा और अन्य भाजपा नेताओं की विकृत तस्वीरें भी मिलीं। अब इस बात की पुष्टि की जा सकती है कि इस घटना के पीछे देवदास देसाई का हाथ था।

हर साथी को धन्यवाद, सभी सहयोगी का आभार… आप लोगों से ही है OpIndia हिंदी

गणित में एक सवाल होता है। घोंघे वाला। वो एक पोल पर चढ़ रहा होता है। कुछ दूर चढ़ता है, फिर फिसलता है। फिर मेहनत करके चढ़ता है, फिर फिसल जाता है। गणित के कारण इसमें दूरी, मिनट जैसे मानकों को डाला जाता है ताकि विद्यार्थी उत्तर निकाल सके। जो मानक ऐसे सवालों में लिखित नहीं होते हैं, वो जीवन जीने के काम आते हैं। लक्ष्य तक पहुँचना और कभी हार न मानना – ऐसे सवालों के अलिखित मानक होते हैं।

OpIndia हिंदी के लिए साल 2021 की शुरुआत फिसलते घोंघे जैसी ही हुई थी। ट्रैफिक (मतलब हमारी जितनी खबरें लोग पढ़ते हैं) अच्छी नहीं थी। टीम का उत्साह भी इसके कारण प्रभावित था। फरवरी के महीने में हम अपने सबसे नाजुक दौर से गुजर रहे थे। जो मुख्य स्तंभ थे, वो टीम का साथ छोड़ने का मन बना चुके थे। साथ में कुछ लोगों को टीम से बाहर भी कर दिया गया था।

किसी संस्थान की छवि उसके कर्मचारियों से ही बनती है। OpIndia हिंदी भी अपवाद नहीं। हालाँकि सत्य यह भी है कि कोई संस्थान किसी अकेले के भरोसे न चला है, न चलेगा। OpIndia हिंदी के लिए यहाँ भी अपवाद नहीं है। मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, लेकिन इसी मीडिया को यह नहीं भूलना चाहिए कि लिखने वाले, पढ़ने वाले, प्रभावित होने वाले, साथ चलने वाले, हौसला बढ़ाने वाले, सहायता करने वाले… कंटेंट की दुनिया के लिए ये सभी खंभों की तरह हैं। विपरीत धार में बहते हुए हमने इस मूल मंत्र को और कस कर पकड़ लिया।

OpIndia हिंदी के खंभे

टीम छोटी, खबरें कम, ट्रैफिक नीचे… सब कुछ विपरीत धार में बहने जैसा था। ऐसे में कोई साथ था, तो वो आप थे… OpIndia हिंदी के पाठक थे। वैसे पाठक जिन्होंने कभी साथ नहीं छोड़ा। आपके भरोसे पर हमने फिर से टीम बनाई। टीम को बताया कि चाहे जो भी हो परिस्थिति, पाठकों के मानक पर हमेशा खरा उतरना है।

फरवरी से लेकर अप्रैल तक टीम के नए सदस्यों को चुनने, उन्हें ढालने, पाठकों के मानकों पर कसने में खर्च किया गया। यह पूरी प्रक्रिया आसान नहीं रही। समय-घंटे (ऑफिस के तो 8-9 घंटे हो गए, काम खत्म) देखे बिना काम करना पड़ा। और यह अकेले की बात नहीं थी। टीम के हर एक साथी ने हर बाधा को पार किया। किसी ने श्रम से, तो किसी ने दिमाग से, किसी ने समय लगाया तो किसी ने पैसा।

अजीत झा, रवि अग्रहरी, जयन्ती मिश्रा, अनुपम कुमार सिंह, रचना कुमारी – OpIndia हिंदी के ये वो खंभे हैं, जिन्होंने संघर्ष के दिनों में साथ बनाए रखा। इन लोगों ने ही खाद-पानी-पसीना देकर तो कभी गुस्सा-पुचकार से नई पौध भी तैयार की। हमारे जागरूक पाठकों के मानकों पर आज शिव मिश्र, सुधीर गहलोत, सुनिता मिश्रा, कुलदीप सिंह, राहुल पांडेय खरे उतरे हैं, तो उसका श्रेय OpIndia के इन्हीं कंधों पर जाता है।

वामपंथी इकोसिस्टम से लड़ाई

मई आते-आते हमारी टीम बन गई थी। ऐसा लग रहा था कि पटरी पर बस लौटने ही वाले हैं। खबरें भी फास्ट पब्लिश होने लगी थीं, ट्रैफिक भी जोर पर था। हमारे पाठक भी जिन खबरों को मिस कर रहे थे, जिस फ्लेवर-कलेवर में खबरों को चाहते थे, वो OpIndia हिंदी के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होने लगे थे। वामपंथी नैरेटिव को लेकिन यह रास नहीं आया।

5 मई से 2 जुलाई तक फेसबुक ने हमारे पेज की पहुँच को बाधित किया। औसतन एक चौथाई ट्रैफिक रह गया था OpIndia हिंदी का। जिस वजह से फेसबुक ने यह रिस्ट्रिक्शन (फेसबुक पर शेयर किए गए आर्टिकल पाठक को दिखेगा ही नहीं, नोटिफिकेशन भी नहीं जाएगा) लगाया था, वो ज्यादा हास्यास्पद था। हास्यास्पद क्योंकि जिस फोटो के लिए फेसबुक ने आपत्ति जताई थी, वो अन्य वेबसाइटों पर लगी भी थी, फेसबुक पर शेयर भी की गई थी। खैर हमने लड़ाई जारी रखी। तर्क पर तर्क देते गए, मेल का खेल खेला गया… और जीत हमारी हुई।

जीत हालाँकि क्षणिक (साल भर के 365 दिनों की तुलना में चंद दिन) ही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ मनाने की घोषणा की, तो OpIndia हिंदी ने इस पर रिपोर्ट बनाई। दो दिनों के बाद डायरेक्ट एक्शन डे को लेकर एक स्पेशल रिपोर्ट भी बनवाई गई। फेसबुक को इससे भी दिक्कत हुई। पेज को फिर से रिस्ट्रिक्ट किया गया। मतलब दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक नेता की बात को काट कर उसी लोकतंत्र में बिजनेस करने की हनक फेसबुक जैसी कंपनियों ने खुलेआम दिखाई। हमने हार नहीं मानी… न ही कभी रार ठानी।

कॉर्पोरेट के बने-बनाए ढर्रे पर मेल/मैसेज करते गए, बात रखते गए। इसके बाद भी दो मौकों पर फेसबुक ने अपना यही रवैया रखा। लड़ाई आज भी चल रही है। संघर्ष खुशियाँ भी देती हैं, इस बात को भी हमारी टीम ने साबित कर दिखाया। दिसंबर 2021 के चौथे सप्ताह में OpIndia हिंदी ने ट्रैफिक की ऐतिहासिक ऊँचाई को छुआ है। हम एक दिन में उस पायदान तक पहुँचे हैं, जहाँ तक पहले हम हफ्ते-दस दिन में पहुँचते थे। यह दिखाता है कि बाधाएँ आती-जाती रहती हैं, शायद आगे रहेंगी भी… लेकिन न तो हम झुकेंगे, न ही टूटेंगे। हम लड़ेंगे, हम जीतेंगे!

हिंदू-हित व राष्ट्र हमारे साध्य, साधन हैं पाठक

टीम छोटी हो या बड़ी, विरोधी एक हो या अनेक, जीत मिले या लड़ते रहें… यह सब हमारे संघर्ष के साथी हैं। विरोधी को भी संघर्ष का साथी बोलने पर चौंकिए मत। वो इसलिए क्योंकि विरोधियों ने ही इतने काँटे बोए हैं, तभी तो OpIndia हिंदी जैसे प्लेटफॉर्म हैं। वो जब तक हिंदू घृणा की राजनीति और उससे होने वाले फायदे की बात करते रहेंगे, हम आवाज उठाते रहेंगे। वो जब-जब हमारे राष्ट्र को खोखला करने की बात करेंगे, हम उनके खिलाफ लिखते रहेंगे, उनकी पोल-पट्टी खोलते रहेंगे।

कैसे? आपके भरोसे। OpIndia हिंदी के जागरूक पाठकों के भरोसे। आप जब तक हमारे साथ हैं, हमारी लड़ाई चलती रहेगी। मीडिया मठाधीशों का पर्दाफाश होता रहेगा। हर उस राजनीतिक दल, राजनेता और उनकी राजनीति को हम बेनकाब करते रहेंगे, जो भारत को खोखला करने का सपना देखते हैं। हर उस प्रोपेगेंडा पर प्रहार जारी रहेगा, जो देश को तोड़ने के मकसद से रचा जाता है… लेकिन आपके बिना यह संभव नहीं। आप हमारे वो स्तंभ हैं, जिसके सहारे हमें लक्ष्य तक पहुँचना है।

साधन और साध्य दोनों की शुचिता का संबल है OpIndia हिंदी के पास। इसी दम पर हम आगे बढ़ते रहे हैं, आगे बढ़ते रहेंगे। हिंदू-हित और राष्ट्रहित ही हमारे लिए सर्वोपरि है, इससे न कभी विचलित हुए हैं, न कभी होंगे। अपने हितों के लिए हम समाज का निर्माण भी करेंगे, सरकार भी बनाएँगे। सरकारें डगमगाएँगी तो उसी समाज से सरकारों को दिशा-निर्देश देने से लेकर उसे बदल डालने तक की क्षमता भी पैदा करेंगे।

“मैं बंदूकें बो रहा हूँ”

भगत सिंह ने ये कहा था। उम्र तब कम थी। शायद ही पता रहा होगा इसका मतलब भी! दरअसल बो तो वो आजादी रहे थे। वो भी दूसरों के लिए। आजादी ऐसी, जो खुद वो आँखों से देख नहीं पाए। मानसिक आजादी वो प्राप्त कर चुके थे, इसमें कोई शक नहीं। समाज में इसी मानसिक आजादी के बीज बोने का काम करना है – हमें भी, आपको भी।

साल 2021 में जिस चट्टान की तरह आपने हमारा साथ दिया, उसके लिए दिल की गहराइयों से धन्यवाद। आपका प्यार, आपका सहयोग OpIndia हिंदी की टीम के लिए संजीवनी है। 2022 में हम और भी बेहतर करेंगे, कुछ नई चीजें भी आपके लिए लाएँगे… और उम्मीद है कि आपका न सिर्फ साथ होगा बल्कि लक्ष्य तक पहुँचने के लिए सार्थक सहयोग भी होगा। भरसक कोशिश होगी कि हम गलतियाँ न करें लेकिन मानवीय गलतियों पर रोकने-टोकने-सुधारने के लिए आप स्वतंत्र हैं। पूरी टीम की ओर से एक बार फिर आप सभी पाठकों का धन्यवाद, शुक्रिया, आभार!