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‘यूरेशिया से आए मुट्ठी भर ब्राह्मण, निहत्थे बौद्ध भिक्षुओं का किया कत्लेआम’: आदिवासी सम्मेलन में बाँटी विवादित किताब

हाल ही में राजस्थान के जयपुर में आदिवासी विकास परिषद का सम्मेलन आयोजित किया गया। यह आयोजन 2 दिन तक चला। इस आयोजन के दौरान एक किताब बाँटी गई, जिसका टाइटल था- ‘अधूरी आजादी’। ‘अधूरी आजादी’ नाम के इस किताब को लिखा है रिटायर्ड आईआरएस रूपचंद वर्मा ने। किताब के सामने आते ही यह विवादों में फँस गया है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पुस्तक में कई आपत्तिजनक बातें हैं। इसमें ब्राह्मणवाद से लेकर महात्मा गाँधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू तक के बारे में आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं। महात्मा गाँधी को जहाँ रुढिवादी, नस्लभेदी, काइयाँ, दोहरे चरित्र का व्यक्ति और व्याभिचारी बताया गया तो वहीं पंडित नेहरू को परिवार और ब्राह्मणवाद को हवा देने वाला बताया गया। इसी तरह ब्राह्मणों के बारे में विवादित टिप्पणी करते हुए उन्हें यूरेशिया से आया हुआ आक्रांता बताया है।

किताब के पेज नंबर 9 पर महात्मा गाँधी के बारे में लिखा है, “लंगोटी पहन कर फकीरी के दावेदार गाँधी को उद्योगपति बिरला के दिल्ली स्थित आलीशान बँगले में निवास करने तथा ब्रह्मचरित्र का प्रयोग करने के लिए अपनी जवान पोती के साथ सोने से परहेज नहीं था।”

इतना ही नहीं, किताब के पेज नंबर 13 पर ब्राह्मणों पर विवादित टिप्पणी करते हुए लिखा है “मुट्ठीभर ब्राह्मण अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए मौके के हिसाब से रणनीतियाँ और चालें बदलते रहे हैं। यह सिलसिला बौद्धकाल से लेकर आज तक चालू है। बौद्ध धर्म के बढ़ते प्रभाव से घबराए ब्राह्मणों ने क्रूरता की हदें लाँघ कर निहत्थे, अहिंसक बौद्ध भिक्षुओं का कत्लेआम किया। धर्म ग्रंथों को जलाया। नालंदा, तक्षशिला विश्वविद्यालयों को बर्बाद किया। बौद्ध अनुयाइयों को अछूत घोषित कर उन्हें मैला उठाने के लिए मजबूर किया।”

इसके अलावा किताब में पंडित नेहरू को लेकर लिखा है कि उन्होंने आजाद भारत की बागडोर सँभालते ही ब्राह्मणवाद और परिवारवाद को खूब हवा दी। इतना ही नहीं, रूपचंद वर्मा ने अपनी किताब में गाँधी, नेहरू, कॉन्ग्रेस के दोगलेपन और धोखेबाजी के खुलासे की भी बात कही। उन्होंने कहा कि नेहरू ने अपनी कैबिनेट में किसी आदिवासी काे मंत्री नहीं बनाया। उनका ब्राह्मणवादी दोगलापन भूप्रबंधन, शिक्षा, कश्मीर समस्या, इंडियन सिविल सर्विस की अंग्रेज प्रशासनिक व्यवस्था में साफ दिखाई देता है।

रूपचंद वर्मा ने आजादी का श्रेय महात्मा गाँधी को दिए जाने पर भी सवाल उठाया और कहा कि षडयंत्रकारी बँटवारे के कारण भारतीय उपमहाद्वीप में ‘पैशाचिक नरसंहार’ हुआ। करोड़ों लोगों की जान-माल की क्षति हुई। इसे ‘साबरमती के तथाकथित संत गाँधी की बिना खड़ग बिना ढाल की अहिंसक आजादी’ नहीं कह सकते हैं।

बता दें कि इस सम्मेलन में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था। हालाँकि वह उपस्थित नहीं हुए। इसमें बीजेपी और कॉन्ग्रेस नेता शामिल हुए थे। सम्मेलन में आयोजित सभी नेताओं को यह किताब बाँटी गई।

जब नाम चला कुछ नहीं मिला, जब कहीं नाम नहीं था तो… पुष्कर सिंह धामी ने बताया कैसे बने उत्तराखंड के CM

साल 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद यदि भारतीय जनता पार्टी सत्ता में वापस लौटती है तो पुष्कर सिंह धामी ही राज्य के मुख्यमंत्री बनाए जाएँगे। धामी के दोबारा सीएम बनने पर सवाल उठने के बाद आज (22 दिसंबर) यह घोषणा उत्तराखंड के भाजपा अध्यक्ष मदन कौशिक ने की है। उन्होंने टाइम्स नाऊ नवभारत से बात करने के दौरान कहा कि कॉन्ग्रेस पर तंज कसा कि जो अपने लिए अध्यक्ष नहीं चुन पाए वो नेतृत्व की बात कर रहे हैं। वो लोग अपने परिवार से ही बाहर नहीं पा रहे।

बता दें कि एक तरफ जहाँ मदन कौशिश ने सभी अटकलों पर विराम लगाया है। वहीं उत्तराखंड के सीएम की एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई है। इस वीडियो में वह बेहद सहजता से बता रहे हैं कि कैसे साल 2017 के विधानसभा चुनावों से ही वह उम्मीद लगा रहे थे कि शायद सरकार में उन्हें जगह मिले, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, फिर सरकार के चार होने पर नेतृत्व बदला तो भी उन्हें कोई पद मिलने की उम्मीद थी, लेकिन फिर भी ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद वह अपना सारा सामान लेकर देहरादून से लौट आए और उम्मीद ही छोड़ दी कि उन्हें कोई पद मिलेगा। मगर 2021 में वो समय आया जब उन्हें अपने सब्र का फल मिला।

यूथ कैन के प्रोग्राम में वह कहते हैं, “जब 2017 में विधानसभा का चुनाव हुआ और नतीजा आया, तो मैं भी चूँकि युवा मोर्चा में था, विद्यार्थी परिषद में था..सभी संगठनों में काम भी किया। सभी से जान पहचान भी थी। मुझे लगता था कि अभी मंत्रीपरिषद बन रही है तो इसमें मेरा नाम जरूर आएगा। लेकिन मेरा नाम नहीं आया। थोड़ा बहुत झटका तो लगता ही है। हर किसी को अपेक्षा होती है। ये मनुष्य का स्वभाव है कि वो दूसरों को जितना समझा ले लेकिन जब खुद पर बीतती है तो उसको संभालना थोड़ा कठिन होता है…बड़े-बड़े ज्ञानी-विज्ञानी के साथ जब कुछ घटित होता है तो उन्हें दिक्कत होती है लेकिन वो दूसरों को समझाते हैं। हमारे साथ भी यही हुआ। धक्का लगा। मगर फिर सब ठीक हो गया। क्योंकि इस पार्टी ने शुरू से ही सिखाया था राष्ट्र प्रथम है, संगठन द्वितीय है, और व्यक्ति अंतिम है। हम काम पर लग गए।

साल 2019 के लोकसभा चुनावों के समय का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने सोचा जब मेरा नाम मंत्री परिषद में नहीं आया तो मुझे लोकसभा का टिकट मिलना चाहिए। मैंने प्रयास किया। मगर, हमें मना कर दिया गया क्योंकि विधायक के जीतने से सीट खाली हो जाती फिर उपचुनाव होते…. इसके कुछ दिन बाद पार्टी का अध्यक्ष बनना था, फिर मेरा नाम जोर-शोर से चला, लेकिन उसमें भी मेरा नाम नहीं आया। इस बार मैं निराश नहीं हुआ क्योंकि मुझे आदत हो गई थी।”

राज्य में सीएम बदलने पर बात करते हुए वह बोले, “सरकार के जब चार साल पूरे हुए तो नेतृत्व परिवर्तन हो गया। सीएम बनने से पहले भी मेरा नाम आया। कभी सीएम में कभी डिप्टी सीएम में। जब दो दिन बाद शपथ हुई तो फिर कोई नाम नहीं था। अब की बार मैंने अपना सारा सामान देहरादून से लिया और चला गया। मैंने सोचा जब किसी काम से पार्टी बुलाएगी, जरूरी बैठक होगी तभी यहाँ आऊँगा। मैं भूल गया था सब। मन में निराकार भाव आ गया था। ये भाव वो होता है जब ईश्वर के अलावा कोई कुछ नहीं लगता। मैं सोचने लगा कि इस दुनिया में कोई कुछ करने वाला नहीं। मैंने पद के बारे में जब सोचना बंद कर दिया। इतने में नई स्थिति पैदा हुई। एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन हुआ। मैंने मनाया कि मेरा नाम कहीं न छपे। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन इन सबसे चाहने वालों और समर्थकों को बुरा लगता है। उन्हें समझाना मुश्किल हो जाता है।”

वह कहते हैं, “मैं यमुना कॉलोनी में आकर लेटा और वहाँ से निकला ही नहीं। एक दो बार मुझे फोन भी किया गया। हल्का-फुल्का नाम आ रहा था। मैंने कहा कि कहीं भी मेरा नाम नहीं है। मैंने पत्रकारों से भी कह दिया कि मेरा नाम बिलकुल मत निकालना। सच बताऊँ तो इसके बाद किसी ने मेरा नाम लिखा भी नहीं। एक ने भी नहीं लिखा और पिर 3 जुलाई 2021 को विधान दल मंडल की बैठक होती है और मैं पीछे जाकर बैठा। नरेंद्र सिंह तोमर ने आकर माइक पकड़ा और कहा विधान मंडल दल नेता के लिए एक ही नाम आया है और सर्वसम्मति से उनका नाम सुन लिया जाता है, तब जाकर मैं आगे गया।”

युवाओं के बीच लोकप्रिय पुष्कर सिंह धामी

बता दें कि 3 जुलाई 2021 को उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी को बीजेपी विधायक दल ने अपना नया नेता चुना था, जिसके बाद ये तय हो गया है कि वो राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे। भाजपा के आलाकमान ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को पर्यवेक्षक के रूप में देहरादून भेजा था, जिनकी उपस्थिति में ये निर्णय लिया गया। पुष्कर सिंह धामी खटीमा से विधायक थे, जो उधम सिंह नगर में पड़ता है। वो वहाँ से लगातार दूसरी बार विधायक बने थे।

मुख्यमंत्री बनने से पहले युवाओं के बीच पुष्कर सिंह धामी की अच्छी लोकप्रियता और पकड़ थी। बेरोजगारी समेत अन्य मुद्दों पर वो खासे मुखर रहते हैं। 2002 से 2008 के दौर में उन्होंने पूरे प्रदेश में भ्रमण कर के कई बेरोजगार युवाओं को संगठित किया था और कई विशाल रैलियाँ की थीं। राज्य के उद्योगों में युवाओं को 70% आरक्षण दिलाने में उनकी ही सबसे बड़ी भूमिका रही थी। ऐसे कई कारणों से पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है।

‘जिन्ना ने भारत को आज़ाद कराया, उनसे बस एक ही शिकायत’: महबूबा मुफ़्ती ने कहा – अंग्रेजों के जूते चाटने वाले राष्ट्रभक्ति सिखा रहे

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख और जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। जम्मू में एक रैली को संबोधित करते हुए महबूबा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वो लोग कहते हैं जिन्ना ने देश को बाँटा, लेकिन देश में ऐसे हजारों जिन्ना मिल जाएँगे जो न केवल जमीन बल्कि लोगों को भी बाँट रहे हैं।

महबूबा ने ये भी कहा कि य़े वो लोग हैं, जिनका देश की आजादी में कोई योगदान नहीं रहा। उन्होंने कहा कि वे अंग्रेजों के जूते चाट रहे थे और आज आज वे हमें देशभक्ति सिखाते हैं। महबूबा ने ये भी कहा कि हम जिन्ना को दोष देते हैं जिन्होंने जवाहर लाल नेहरू, गाँधी जी, सरदार पटेल, सर सैय्यद अहमद खान और अंबेडकर जी के साथ स्वतंत्रता संग्राम लड़ा और भारत को स्वतंत्र कराया। लेकिन हमें एक शिकायत है कि उन्होंने हमारे देश को विभाजित किया और हम आज उनका नाम लेने से बचते हैं।

मोदी सरकार पर हमला करते हुए पीडीपी चीफ ने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर का इस्तेमाल ‘परीक्षण प्रयोगशाला’ के तौर पर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन राज्य की पार्टियों के साथ बातचीत के बजाय सेना को बुलाया गया।

जिया उल हक से की भारत की तुलना

महबूबा ने जम्मू में रैली के दौरान खुद को पीड़ित और शोषित दिखाने की कोशिश में भारत की तुलना पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और जनरल मोहम्मद जिया-उल-हक से की। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में पाकिस्तान में मॉब लिंचिंग हुई तो पीएम इमरान खान ‘इसके खिलाफ सामने आए’, जबकि भारत में लोगों को इसी तरह के अपराधों के लिए ‘सम्मानित’ किया जाता है। महबूबा ने ये भी दावा किया कि वर्ल्ड हंगर इंडेक्स में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुकाबले काफी आगे है।

अपने भाषण के दौरान किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए पीडीपी चीफ ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं से केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन करने का आह्वान किया।

पाकिस्तान: हिंदू महिला को सरेआम घसीट कार में ले गए अपहरणकर्ता, रेप के बाद जबरन निकाह: किशोर का भी बंदूक की नोक पर दुराचार के बाद धर्मांतरण

कश्मीर में मानवाधिकार की दुहाई देने वाले पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हमले लगातार जारी हैं। इसी क्रम में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की महिला को लेकर एक दहला देने वाला वीडियो सामने आया है। वीडियो में दिख रहा है कि कुछ लोग सरेआम एक हिंदू महिला का अपहरण (Abduction) कर लिया। महिला मदद के लिए चिल्लाती रही, लेकिन भीड़ केवल तमाशबीन बनी रही और आरोपित उसे कार में डालकर ले गए।

इस घटना का वीडियो भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा (Manjinder singh sirsa) ने शेयर किया है। उन्होंने कहा कि यह घटना पाकिस्तान (Pakistan) के सिंध प्रांत की है। सिरसा ने ट्वीट किया, “नि:शब्द! देखिए कैसे दिन के उजाले में पाकिस्तान के उमरकोट के सेशन कोर्ट के बाहर से एक हिंदू महिला का अपहरण किया जाता है। वह मदद के लिए चिल्ला रही है, लेकिन उन्हें पुलिस या किसी कार्रवाई डर नहीं है और वे महिला को बालों से खींचकर कार में डाल रहे हैं।” ट्वीट में सिरसा ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S Jaishankar) और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran khan) को टैग कर उनका ध्यानाकर्षित करने की कोशिश की है।

सिरसा ने विदेश मंत्री को टैग कर कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कुछ भी नहीं कर रहे हैं, ऐसे में भारत ही उनकी एकमात्र आशा है।

वायरल हो रहे 18 सेकेंड के वीडियो में देखा जा सकता है कि तीन लोग बीच सड़क पर एक महिला का बाल पकड़कर उसे घसीटते हैं। महिला जमीन पर गिर जाती है, लेकिन दरिंदों ने उसे नहीं छोड़ा। वे उसका बाल पकड़कर उसे जबरन कार में बिठाया और लेकर चले गए। वीडियो में ये भी देखा जा सकता है कि जिस वक्त आरोपित वारदात को अंजाम दे रहे होते हैं उस दौरान सड़क पर कई गाड़ियाँ गुजर रही होती हैं, लेकिन किसी ने भी उसे बचाने की जहमत नहीं उठाई। खास बात ये है कि वीडियो में स्पष्ट रूप से सुना जा सकता है कि आरोपित महिला को गाड़ी में डालने के लिए कह रहे हैं।

अपने अगले ट्वीट में सिरसा ने अपहरण की गई पीड़िता के बारे में बताया है। उन्होंने लिखा, “पाकिस्तान के हिंदुओं ने अपहरण की गई 19 वर्षीय हिंदू लड़की हरियान मेघवार के बारे में साझा किया है। उसका सामूहिक बलात्कार किया गया था, जबरन इस्लाम में परिवर्तित किया गया था। उसका अपहरण करने वाले भाई खान, जो 31 साल का है उससे निकाह किया। जबकि वो पहले से ही शादीशुदा है। पाक मीडिया द्वारा इसे सहमति विवाह के रूप में रिपोर्ट करते देखना शर्मनाक है।”

इसके साथ ही बीजेपी नेता ने एक और वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने बताया है कि 14 साल के हिंदू लड़के अवनीश कोल्ही को बंदूक की नोक पर उसके घर से अपहरण कर लिया गया। उसके बाद उसका यौन शोषण किया गया और फिर जबरन धर्मान्तरण करा दिया गया।

मुख्तार अंसारी की पत्नी के गजल होटल की 17 दुकानें कुर्क, लगा करोड़ों का फटका: योगी सरकार ने गाजीपुर में की कार्रवाई

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गाजीपुर में विधायक मुख्तार अंसारी के परिवार की संपत्ति पर एक बार फिर से कार्रवाई की है। यहाँ गजल होटल की इमारत के नीचले मंजिल पर बनी दुकानों पर कुर्की की कार्रवाई को अंजाम दिया गया। यह होटल मुख्तार अंसारी की पत्नी आफशा अंसारी और बेटों के नाम पर दर्ज है। मुख्तार के खिलाफ यह कार्रवाई गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई। इससे पहले भी कई जगहों पर मुख्तार अंसारी और उनके परिवार की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।

बता दें कि गाजीपुर में थाना कोतवाली के महुआबाग में गजल होटल के नाम से इमारत बनी है। बुधवार (22 दिसंबर 2021) को शासन-प्रशासन का अमला भारी पुलिस बल के साथ वहाँ जा पहुँचा और होटल से लगी दुकानों पर कुर्की की कार्रवाई शुरु कर दी। इस दौरान होटल की इमारत के करीब मौजूद कुल 17 दुकानें खाली कराई गई। कुर्की के दौरान पीएसी और कोतवाली पुलिस टीम मौजूद रही। कुर्क की गई संपत्तियों की अनुमानित कीमत 10 करोड़, 10 लाख रुपए के करीब है।

उल्लेखनीय है कि गजल होटल के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई बीते वर्ष अक्टूबर महीने में हुई थी। इसके बाद कई और स्थानों पर भी मुख्तार की बेनामी संपत्ति को कुर्क करने की कार्रवाई की गई थी। 2020 में हुए इस ध्वस्तीकरण में गजल होटल बिल्डिंग में ऊपरी मंजिल पर बने होटल को ध्वस्त किया गया था और भूतल की दुकानों को छोड़ दिया गया था। अब पूरी प्रॉपर्टी को कुर्क करने की कार्रवाई की गई। 21 दिसंबर को डीएम एमपी सिंह ने गजल होटल के दुकानों को कुर्क करने का आदेश जारी किया था।

दुकानदारों ने नहीं माना आदेश

इधर निर्देश मिलते ही मंगलवार (21 दिसंबर 2021) देर शाम महुआबाग पहुँची कोतवाली पुलिस ने सभी 17 दुकानों को खाली करने का आदेश दिया। आदेश के बाद भी दुकानदारों द्वारा दुकान खाली नहीं किया गया। ऐसे में बुधवार सुबह 10 बजे पहुँची पुलिस टीम ने दुकानदारों से दुकान खाली करने को कहा। सुबह 10.30 बजे सीओ ओजस्वी चावला और सदर एसडीएम मौके पर पहुँच गए। दोपहर 12.57 बजे मुनादी कराने के बाद 17 दुकानों को कुर्क कर दिया गया। 

इससे पूर्व सभी दुकानों में राजस्व विभाग की टीम ने ताला बंदकर सील करने की कार्रवाई की। इस दौरान सड़क के दोनों तरफ लोगों की भीड़ लगी रही। सीओ ओजस्वी चावला ने बताया कि गैंग लीडर मुख्तार अंसारी की बेनामी संपत्ति को जिलाधिकारी के आदेश पर कुर्क किया गया है। वहीं अटकलें लगाई जा रही हैं कि मुख्तार अंसारी 2022 में यूपी चुनाव में अपना किस्मत आजमाने उतरेंगे। फिलहाल वह बांदा जेल में बंद हैं।

चीन के शीआन में कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते लॉकडाउन, शहर से बाहर जाने पर जाने पर रोक, दो दिन में एक बार सकेंगे जरूरी सामान

चीन में कोरोना के नए मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। चीनी सरकार ने कोरोना की रफ्तार पर काबू पाने के लिए बुधवार (22 दिसंबर 2021) को शीआन शहर में लॉकडाउन की घोषणा करते हुए 13 मिलियन यानी 1.30 करोड़ लोगों को घरों में रहने का आदेश दिया है।

चीन की राजधानी बीजिंग फरवरी 2022 के शीतकालीन खेलों की मेजबानी करने वाली है, लेकिन कई शहरों में कोरोना के बढ़ते प्रकोप के कारण चीन हाई अलर्ट पर है। शीआन में बुधवार (22 दिसंबर) को कोरोना संक्रमण के 52 नए मामले दर्ज किए हैं। इसके साथ ही यहाँ संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 143 हो गई है।

सिटी गवर्नमेंट ने अपने आधिकारिक वीबो सोशल मीडिया अकाउंट पर कहा, “22 दिसंबर की आधी रात से सभी लोगों को घर के अंदर रहने का आदेश दिया गया है। हर दो दिन में केवल एक बार घर का एक सदस्य जरूरत का सामान खरीदने के लिए बाहर जा सकता है।”

उन्होंने आगे कहा, “लोग जब तक बहुत जरूरी ना हो शहर से बाहर नहीं जाए। यदि कोई आवश्यक कार्य के चलते शहर से बाहर जाना चाहता है तो उन्हें विशेष परिस्थितियों से इससे संबंधित प्रमाण देना होगा और इसकी स्वीकृति के लिए आवेदन देना होगा।”

सरकारी नोटिस में यह भी कहा गया है कि लंबी दूरी के बस स्टेशनों को बंद कर दिया गया है। अधिकारियों ने शीआन से बाहर हाईवे पर कोरोना की रैंडम टेस्टिंग के आदेश दिए हैं। वहीं, फ्लाइट ट्रैकर वैरीफ्लाइट के मुताबिक, शहर के मुख्य हवाई अड्डे से आने-जाने वाली 85 फीसदी से ज्यादा उड़ानें रोक दी गई हैं।

कर्नाटक में कई हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियों के टुकड़े करने वाला गिरफ्तार: पुलिस ने आरोपित की पहचान छिपाई, सुरक्षा कारणों का दिया हवाला

हाल ही में कर्नाटक पुलिस हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को तोड़ने वाले शख्स पर शिकंजा कसने में कामयाब रही। कर्नाटक (Karnataka) पुलिस (Police) ने 10 दिसंबर को केआर नगर के पास सालीग्राम गाँव से मूर्तियों को तोड़ने वाले शख्स को गिरफ्तार किया था। आरोपित ने पुलिस को बताया कि वह हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को इसलिए तोड़ रहा था, क्योंकि उसे लग रहा था कि पत्थर की मूर्तियों की पूजा करके लोगों को मूर्ख बनाया जा रहा है और उन्हें धोखा दिया जा रहा है। पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए आरोपित की पहचान को गुप्त रखा है।

भेर्या गाँव (Bherya village) स्थित श्री सिद्धलिंगेश्वर और महादेश्वर मंदिर (Male Mahadeshwar Temple) में तोड़-फोड़ कर आरोपित ने ‘शिवलिंग’ को भी खंडित कर दिया था। इसी 7 दिसंबर को हुई इस घटना के बाद से इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी।

एक रिपोर्ट के अनुसार, जिला अधीक्षक आर. चेतन ने घटनास्थल का दौरा किया और पुलिस उपाधीक्षक ए.आर. सुमित के नेतृत्व में स्पेशल टीम का गठन कर मामले की जाँच शुरू कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपित ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।

बताया गया था कि आरोपित ने लक्ष्मी देवी की मूर्ति को खंडित कर उसे कुएँ में फेंक दिया था। यह घटना केआर पेट ग्रामीण थाना क्षेत्र की है। आरोपित ने पुलिस को बताया कि वह बीरवल्ली गाँव में ताला तोड़कर हनुमान मंदिर में प्रवेश करने वाला था, लेकिन स्थानीय लोगों के मौके पर पहुँचते ही उसे भागना पड़ा।

पुलिस के अनुसार, आरोपित लंबे समय से हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को निशाना बना रहा है। उसका मानना है कि लोगों को धोखा दिया जा रहा है, क्योंकि वे मूर्तियों की पूजा करते हैं। उसने मंदिरों में सोने, चाँदी के आभूषणों और चढ़ाए गए पैसों को भी नहीं चुराया। इस मामले की जाँच जारी है।

बता दें कि इस साल अप्रैल में कर्नाटक के मंगलुरु में एक मंदिर की दान पेटी से कंडोम मिलने के बाद दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। यह मंदिर स्वामी कोरगज्जा का था, जिन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान मंगलुरू के जोकट्टे इलाके के रहीम (32) और तौफीक (35) के रूप में हुई थी, जिन्होंने मंदिर की दान पेटी में पेशाब करने की बात भी कबूल की थी।

‘RSS क्यों खतरनाक है? मनमोहन सरकार की उपलब्धियाँ बताएँ’: यूपी में प्रवक्ता बनाने लिए परीक्षा ले रही कॉन्ग्रेस, मात्र 4% महिलाएँ

कॉन्ग्रेस पार्टी अब उत्तर प्रदेश में प्रवक्ताओं की नियुक्ति के लिए परीक्षा ले रही है। प्रोफेशनल तरीके से सवाल पूछे जा रहे हैं, जिससे पार्टी के नेता भी परेशान हैं। 45 मिनट तक परीक्षा की समयावधि रखी गई है। सवालों में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) खतरनाक क्यों है’ से लेकर ‘2009 में कॉन्ग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं’ जैसे प्रश्न शामिल हैं। 20 ऑब्जेक्टिव और 2 विश्लेषणात्मक सवाल पूछे जा रहे हैं। प्रवक्ता बनने आए लोगों का कहना है कि ये परीक्षा UPSC से कम नहीं।

प्रवक्ता के अभ्यर्थियों से उत्तर प्रदेश में जिलों और प्रखंडों की संख्या को लेकर भी एक सवाल है। एक अन्य सवाल ये है कि उत्तर प्रदेश की आरक्षित लोकसभा सीटों की संख्या बताएँ। विधानसभा में सीटों की संख्या से लेकर 2004 और 2009 में कॉन्ग्रेस द्वारा यहाँ जीती गई सीटों की संख्या को लेकर भी एक सवाल है। एक सवाल में मनमोहन सरकार की ‘अच्छाई’ का कारण उसकी उपलब्धियों के बारे में पूछा गया है। योगी सरकार को ‘विफल’ करार देकर इसका भी कारण पूछा गया है।

कॉन्ग्रेस पार्टी इसके लिए आवेदन भी मँगा रही है, जिसमें सोशल मीडिया प्रोफाइल्स के लिंक्स से लेकर नाम, जन्मतिथि, शिक्षा, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी जैसी जानकारियाँ भी माँगी जाती है। साथ ही कॉन्ग्रेस पार्टी की सिद्धांतों के प्रति निष्ठा की शपथ के साथ-साथ देश की प्रगति, एकता और अखंडता के लिए काम करने के लिए भी इसमें शपथ दिलाई जाती है। 75 जिलों के 2850 लोगों ने इन परीक्षाओं में हिस्सा लिया है। लखनऊ, हरदोई, सीतापुर और लखीमपुर में भी परीक्षाएँ पार्टी ने ली हैं।

आपको याद होगा कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 40% महिला उम्मीदवारों की बात कही थी, लेकिन सच्चाई ये है कि इन परीक्षाओं में 4% महिलाएँ भी हिस्सा नहीं ले रही हैं। जब प्रशांत किशोर पार्टी की रणनीति देख रहे थे, तभी उन्होंने सिफारिश की जगह चुनाव के फॉर्मूले का नियम बनाया था। जून 2018 में ऐसी ही परीक्षा लेकर 18 लोगों को चुना गया है। 3 साल तक कुछ नहीं हुआ। अब फिर कॉन्ग्रेस जागी है। इन सभी के सोशल मीडिया डिटेल्स भी लिए गए हैं और देखा जा रहा है कि ये ऑनलाइन कितने सक्रिय रहते हैं।

उनसे पूछा गया है कि वो कितने दिनों पर सोशल मीडिया पर कंटेंट पोस्ट करते हैं। विश्लेषणात्मक सवालों कुछ इस प्रकार से पूछे जा रहे हैं – ‘उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस की क्या भूमिका है?’, ‘कॉन्ग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश के लिए क्या-क्या किया है?’, ‘मीडिया की आज की तीन बड़ी खबरें बताएँ, जिन पर कॉन्ग्रेस प्रवक्ताओं को बयान जारी करने चाहिए’, ‘RSS का इतिहास बताएँ’, ‘स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कौन हैं?’, ‘कॉन्ग्रेस पार्टी का इतिहास बताएँ’, ‘स्वतंत्रता संग्राम में कॉन्ग्रेस पार्टी के योगदान के बारे में बताएँ’ इत्यादि।

‘तलाकशुदा, सेकेंड हैंड आइटम…’: ₹50 करोड़ लूटने के आरोप का सामंथा ने दिया जवाब, फिर डिलीट हुई ट्वीट

दक्षिण भारतीय फिल्मों की अभिनेत्री सामंथा रूथ प्रभु ( Samantha Ruth Prabhu) के नागा चैतन्य (Naga Chaitanya) से तलाक लेने के बाद से ही आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया जा रहा है। इसी क्रम में एक ट्रोलर ने उनके चरित्र पर सवाल उठाते हुए सामंथा को तलाकशुदा, बर्बाद और सेकेंड हैंड आइटम कह दिया। व्यक्तिगत टिप्पणी के बाद सामंथा ने ट्रोलर को ऐसा जवाब दिया कि उसे अपना ट्वीट तक डिलीट करना पड़ा।

दरअसल, कमाराली दुकानदार नाम के ट्रोलर ने सामंथा पर व्यक्तिगत कमेंट करते हुए ट्वीट किया, “सामंथा एक तलाकशुदा, बर्बाद और सेकेंड हैंड आइटम हैं, जिन्होंने एक सज्जन व्यक्ति से टैक्स फ्री 50 करोड़ रुपए लूट लिए।”

सामंथा के ट्वीट का स्क्रीनशॉट (साभार: ट्विटर)

इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणी के बाद सामंथा ने यूजर को रिप्लाई किया, “भगवान आपकी आत्मा को शांति दे।” फिलहाल एक्ट्रेस के इस सधे हुए जवाब की खूब तारीफ हो रही है। हालाँकि, ट्विटर यूजर ने अपनी खिंचाई होती देख बाद में अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया।

गौरतलब है कि सामंथा ने एक्टर नागार्जुन (Nagarjun) के बेटे नागा चैतन्य से साल 2017 में शादी की थी। दोनों ने हाल ही में अपने रिश्ते खत्म करने का ऐलान किया था। सामंथा ने 2 अक्टूबर 2021 को सोशल मीडिया के जरिए कहा था, “हमारे सभी शुभचिंतकों को बताना चाहती हूँ कि काफी विचार-विमर्श के बाद मैंने और चैतन्य ने पति-पत्नी के रूप में अलग होने का फैसला किया है। हम सौभाग्यशाली हैं कि एक दशक की हमारी दोस्ती हमारे रिश्ते का मूल हिस्सा थी। विश्वास है कि हमारे बीच हमेशा एक बंधन रहेगा।”

माना जाता है कि सामंथा के ससुर नागार्जुन उनके बोल्ड सीन करने से खुश नहीं थे। बहरहाल नागा और सामंथा के तलाक के बाद अब हाल में उनकी नई फिल्म पुष्पा (Pushpa) रिलीज हुई है। इसमें एक्ट्रेस ने आइटम नंबर ‘ऊँ अंटावा’ किया है, जिसे काफी पसंद किया जा रहा है। इस फिल्म में सामंथा के अलावा रश्मिका मंडन्ना और अल्लू अर्जुन (Samantha, Rashmika mandanna and Allu arjun) हैं। फिल्म चंदन की लकड़ी की तस्करी पर आधारित है।

‘अब विश्राम का समय, केदारनाथ मार्गदर्शन करें’: किन लोगों ने बाँध दिए हरीश रावत के हाथ-पाँव? चुनाव से पहले उत्तराखंड कॉन्ग्रेस में कलह

उत्तराखंड (Uttrakhand) में अगले साल विधानसभा चुनाव (Assembly polls) होने हैं, जिसको लेकर प्रदेश में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। इधर चुनाव से पहले राज्य कॉन्ग्रेस (Congress) के अंदरूनी मतभेद उभकर सामने आ गए हैं। राज्य के पूर्व सीएम हरीश रावत (Harish Rawat) ने पार्टी से अपनी नाराजगी जताते हुए सोशल मीडिया के जरिए कहा है कि लगता है अब विश्राम का वक्त आ गया है।

हरीश रावत के ट्वीट से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उत्तराखंड में पार्टी नेतृत्व में उनकी बातों को तवज्जो नहीं दी जा रही है। रावत ने ट्वीट कर कहा, “है न अजीब सी बात, चुनाव रूपी समुद्र को तैरना है, सहयोग के लिए संगठन का ढाँचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुँह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है।”

रावत का कहना है कि चुनाव रूपी जिस समंदर में वो तैरना चाहते हैं वहाँ सत्ता ने मगरमच्छ छोड़ रखे हैं। रावत ने एक अन्य ट्वीट किया, “जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पाँव बाँध रहे हैं। मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि #हरीश_रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिए, अब विश्राम का समय है!”

उत्तरांखंड के पूर्व सीएम रावत ने आगे लिखा, “फिर चुपके से मन के एक कोने से आवाज उठ रही है ‘न दैन्यं न पलायनम्’। बड़ी ऊहापोह की स्थिति में हूंँ, नया वर्ष शायद रास्ता दिखा दे। मुझे विश्वास है कि #भगवान_केदारनाथ जी इस स्थिति में मेरा मार्गदर्शन करेंगे।”

हरीश रावत के इस बयान ने देवभूमि में राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि वो कुछ बड़ा कदम उठा सकते हैं। दरअसल, कॉन्ग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व राज्य में सभी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की इच्छा को जाहिर कर चुका है तो वहीं हरीष रावत ने चुनाव से पहले सर्वे का हवाला देकर खुद को सीएम फेस के तौर पर घोषित करने की मंशा को जता दिया है। जबकि, प्रदेश में कॉन्ग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अविनाश कुमार पांडेय ने राहुल गाँधी के नाम पर चुनाव लड़ने की बात कही है।

हरीश रावत के इस ट्वीट के बाद राजनीतिक गलियारे में तूफान उठ गया है। रावत के बयान के बाद भाजपा ने कहा, “रावत अपनी पार्टी के प्रदेश प्रभारी के बयान से दुखी हैं, क्योंकि उन्होंने कहा था कि चुनाव राहुल गाँधी बनाम बीजेपी होगा।” भाजपा का कहना है कि हरीश रावत कॉन्ग्रेस के लिए उत्तराखंड के ‘कैप्टन अमरिंदर सिंह’ हो सकते हैं।

वहीं, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने भी हरीश रावत के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। तीरथ सिंह रावत ने कहा, “हरीश रावत कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता हैं और उनकी तरफ से ऐसा बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका पार्टी में विरोध होने का अर्थ है कि कॉन्ग्रेस अंदर तक बिखरी हुई है।”