कॉन्ग्रेस पार्टी अब उत्तर प्रदेश में प्रवक्ताओं की नियुक्ति के लिए परीक्षा ले रही है। प्रोफेशनल तरीके से सवाल पूछे जा रहे हैं, जिससे पार्टी के नेता भी परेशान हैं। 45 मिनट तक परीक्षा की समयावधि रखी गई है। सवालों में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) खतरनाक क्यों है’ से लेकर ‘2009 में कॉन्ग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं’ जैसे प्रश्न शामिल हैं। 20 ऑब्जेक्टिव और 2 विश्लेषणात्मक सवाल पूछे जा रहे हैं। प्रवक्ता बनने आए लोगों का कहना है कि ये परीक्षा UPSC से कम नहीं।
प्रवक्ता के अभ्यर्थियों से उत्तर प्रदेश में जिलों और प्रखंडों की संख्या को लेकर भी एक सवाल है। एक अन्य सवाल ये है कि उत्तर प्रदेश की आरक्षित लोकसभा सीटों की संख्या बताएँ। विधानसभा में सीटों की संख्या से लेकर 2004 और 2009 में कॉन्ग्रेस द्वारा यहाँ जीती गई सीटों की संख्या को लेकर भी एक सवाल है। एक सवाल में मनमोहन सरकार की ‘अच्छाई’ का कारण उसकी उपलब्धियों के बारे में पूछा गया है। योगी सरकार को ‘विफल’ करार देकर इसका भी कारण पूछा गया है।
कॉन्ग्रेस पार्टी इसके लिए आवेदन भी मँगा रही है, जिसमें सोशल मीडिया प्रोफाइल्स के लिंक्स से लेकर नाम, जन्मतिथि, शिक्षा, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी जैसी जानकारियाँ भी माँगी जाती है। साथ ही कॉन्ग्रेस पार्टी की सिद्धांतों के प्रति निष्ठा की शपथ के साथ-साथ देश की प्रगति, एकता और अखंडता के लिए काम करने के लिए भी इसमें शपथ दिलाई जाती है। 75 जिलों के 2850 लोगों ने इन परीक्षाओं में हिस्सा लिया है। लखनऊ, हरदोई, सीतापुर और लखीमपुर में भी परीक्षाएँ पार्टी ने ली हैं।
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— TV9 Uttar Pradesh (@TV9UttarPradesh) December 21, 2021
प्रवक्ता बनाने के लिए एग्जाम ले रही कांग्रेस।
'बने यूपी की आवाज़' अभियान के तहत यूपी विधानसभा चुनाव से पहले परीक्षांए हो रही है, 75 जिलों में 2850 लोगों ने परीक्षा दी, 3 स्तरीय परीक्षा के बाद ही पास होंगे उम्मीदवार।@INCIndia | @INCUttarPradesh | pic.twitter.com/yBVNiTPDHT
आपको याद होगा कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 40% महिला उम्मीदवारों की बात कही थी, लेकिन सच्चाई ये है कि इन परीक्षाओं में 4% महिलाएँ भी हिस्सा नहीं ले रही हैं। जब प्रशांत किशोर पार्टी की रणनीति देख रहे थे, तभी उन्होंने सिफारिश की जगह चुनाव के फॉर्मूले का नियम बनाया था। जून 2018 में ऐसी ही परीक्षा लेकर 18 लोगों को चुना गया है। 3 साल तक कुछ नहीं हुआ। अब फिर कॉन्ग्रेस जागी है। इन सभी के सोशल मीडिया डिटेल्स भी लिए गए हैं और देखा जा रहा है कि ये ऑनलाइन कितने सक्रिय रहते हैं।
उनसे पूछा गया है कि वो कितने दिनों पर सोशल मीडिया पर कंटेंट पोस्ट करते हैं। विश्लेषणात्मक सवालों कुछ इस प्रकार से पूछे जा रहे हैं – ‘उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस की क्या भूमिका है?’, ‘कॉन्ग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश के लिए क्या-क्या किया है?’, ‘मीडिया की आज की तीन बड़ी खबरें बताएँ, जिन पर कॉन्ग्रेस प्रवक्ताओं को बयान जारी करने चाहिए’, ‘RSS का इतिहास बताएँ’, ‘स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कौन हैं?’, ‘कॉन्ग्रेस पार्टी का इतिहास बताएँ’, ‘स्वतंत्रता संग्राम में कॉन्ग्रेस पार्टी के योगदान के बारे में बताएँ’ इत्यादि।


