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ट्विटर यूजर ने शेयर की बांग्लादेश में हिंदू मंदिर पर हमले की तस्वीर, ममता की पुलिस ने भारतीय कानून का उल्लंघन बता भेजा नोटिस

माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर से 2 दिसंबर 2021 को यूजर MrSinha_ को एक ईमेल मिला कि उन्हें उनके प्लेटफॉर्म पर उनके एक पोस्ट के खिलाफ कंपनी को शिकायत मिली है। ईमेल में देश के कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कोलकाता के सहायक पुलिस आयुक्त (III), विशेष कार्य बल की ओर से सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है।

सिन्हा को मिले ईमेल का स्क्रीनशॉट (साभार: MrSinha_)

इस मामले में ट्विटर ने कोई एक्शन तो नहीं लिया, लेकिन यह याद दिलाया कि पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए सिन्हा को इसकी जानकारी अवश्य दी है। ये ईमेल मानकीकृत प्रारूप में था। ट्विटर इस तरह का ईमेल हर उस व्यक्ति को भेजता है, जिसके बारे में उसे कोई शिकायत मिलती है। ईमेल के जरिए ट्विटर ने सिन्हा को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए उचित कार्रवाई करते हुए अपने वकील से सलाह लेने को कहा है।

बांग्लादेश में तोड़े गए हिंदू मंदिरों की तस्वीर किया था ट्वीट

सिन्हा के खिलाफ यह शिकायत उनके उस ट्वीट को लेकर की गई है, जिसे उन्होंने अगस्त 2021 में किया था। 8 अगस्त 2021 को सिन्हा ने ट्विटर पर दो तस्वीरें पोस्ट की थीं, जिसमें बांग्लादेश के एक मंदिर में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को टूटा हुआ दिखाया गया था। इसमें उन्होंने लिखा था, “ऐसा तभी होता है जब हिंदू अल्पसंख्यक होते हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं के घरों और मंदिरों पर हमला किया गया और मूर्तियों को तोड़ दिया गया। यह खबर ‘धर्मनिरपेक्ष/उदारवादियों’ का ध्यान नहीं खींच पाएगी। कोई भी संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखने वाला नहीं है। हमले में किसी अल्पसंख्यक को निशाना नहीं बनाया गया।”

सिन्हा के द्वारा किया गया ट्वीट (साभार: ट्विटर)

इस मामले की अधिक जानकारी के लिए ऑपइंडिया ने इन तस्वीरों को गूगल पर रिवर्स-सर्च करके देखा तो इससे रिलेटेड कई मीडिया आउटलेट्स की खबरें मिली, जिन्होंने इसे कवर किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना बांग्लादेश में हुई थी। 9 अगस्त 2021 की एक रिपोर्ट में ‘फ्री प्रेस जर्नल‘ ने ‘पाकिस्तान के बाद, बदमाशों ने बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों पर किया हमला: वीडियो देखें:’ टाइटल के साथ रिपोर्ट पब्लिश की थी। इस न्यूज में उसी तरह की इमेज का इस्तेमाल किया गया था, जैसी सिन्हा ने पोस्ट की थी।

इसके साथ ही एक YouTube वीडियो भी एम्बेड किया गया था। एफपीजे के मुताबिक, बांग्लादेश के खुलना जिले के रूपशा उपजिला के शियाली गाँव में हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच विवाद के बाद इस तरह की घटना हुई थी। एफपीजे ने ढाका ट्रिब्यून के हवाले से कहा, ”बदमाशों ने सबसे पहले शियाली महाश्मशान मंदिर पर हमला कर मंदिर की मूर्तियों में तोड़फोड़ की। इसके बाद वो शियाली पुरबापारा गए और वहाँ पर उन्मादी भीड़ ने हरि मंदिर, दुर्गा मंदिर और गोविंदा मंदिर में भी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को तोड़ दिया”

इस रिपोर्ट को पढ़ते समय हमें ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट भी मिली, जिसमें वैसी ही इमेज का इस्तेमाल किया गया था जैसी इमेज सिन्हा ने ट्वीट किया था। केवल उन तस्वीरों को थोड़ा बड़ा कर दिया गया था। इन तस्वीरों को देखने के बाद यह सिद्ध होता है कि ये तस्वीरें बांग्लादेश की ही थीं। इतना ही नहीं इसी तस्वीर को ट्रिब्यून, द वीक, द कम्यून और कई दूसरे मीडिया हाउस ने भी कवर किया था। इस केस में 10 की गिरफ्तारी भी हुई थी।

ऑपइंडिया भी इस रिपोर्ट को कवर कर चुका है। इसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

इस मामले में हैरान करने वाली बात यह है कि ये घटना हिंदुस्तान नहीं, बल्कि बांग्लादेश में हुई थी, लेकिन मामले में शिकायत पश्चिम बंगाल की पुलिस कर रही है।

हिंदुओं पर हमले में ट्विटर की खामोशी का लंबा है इतिहास

हिंदुओं के लिए आवाज उठाने वालों को ट्विटर खामोश करता रहा है। हाल ही में ट्विटर ने ‘स्टोरीज ऑफ बंगाली हिंदू’ नाम के अकाउंट को बंगाल में सताए गए बंगाली हिंदुओं की आवाज उठाने के मामले में नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए सस्पेंड कर दिया था। उस अकाउंट के मालिक डॉ दास ने भी इसके बारे में बताया था कि ट्विटर से एक ईमेल मिला जिसमें कहा गया था कि हमें ‘टाल-मटोल’ के कारण निलंबित कर दिया गया था। खास बात ये है कि जब दास ने इस मामले में ट्विटर से और अधिक स्पष्टीकरण माँगा तो उसने कोई जबाव ही नहीं दिया।

माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ने इससे पहले एक नॉन-लेफ्ट अकाउंट को भी बिना कारण बताए सस्पेंड कर दिया था। इसी साल सितंबर में ट्विटर ने लोकप्रिय ट्विटर अकाउंट ‘प्रिंसेस वोक लिबरल‘ (@workingboxwali)’ को महज इसलिए सेंसर और बैन कर दिया था, क्योंकि उसने एले मैगज़ीन पर इस्लामिस्ट राणा अय्यूब के प्रोपेगेंडा पर सवाल कर दिया था। इसी तरह से पिछले साल भी पेरिस में सिर काटे जाने की निंदा करने के कारण नॉन-लेफ्ट अकाउंट @effucktivehumor को अनिश्चित समय के लिए बंद कर दिया गया था। इसमें यूजर को ट्विटर ने कारण बताया था कि उसके अकाउंट को घृणित आचरण के कारण निलंबित किया गया। हालाँकि, तब भी सोशल मीडिया दिग्गज ने ये स्पष्ट नहीं किया था कि आतंकी हमले की निंदा घृणित कैसे हो सकता है।

भारत में भी ओमिक्रॉन वेरिएंट की दस्तक: कर्नाटक में मिले हैं दो मामले, अब तक 29 देशों में 373 संक्रमित

कोरोना वायरस का नया वेरिएंट ओमिक्रॉन भारत में भी पहुँच चुका है। स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेस में इसकी जानकारी दी। इसके बाद से स्वास्थ्य मंत्रालय और सभी राज्य सरकारें सतर्क हो गई हैं। उन्होंने बताया कि ये दोनों मरीज कर्नाटक राज्य से मिले हैं, और इनकी रिपोर्ट देर रात आई थी। 

संक्रमित व्यक्ति में एक 66 साल के और दूसरे 46 साल का व्यक्ति है। लव अग्रवाल ने कहा कि यह डरने वाली स्थिति नहीं है, लेकिन हमें सावधान रहना है। साथ ही उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “इस वायरस से बचाव के लिए हमें कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना होगा। हमें कोरोना प्रोटोकॉल यानी मास्क पहनना, सोशल डिस्टेसिंग का पालन करना बहुत जरूरी है क्योंकि यही हमें ओमिक्रोन वेरिएंट से बचा सकता है।”

लव अग्रवाल ने कहा कि ओमिक्रोन वेरिएंट के बारे में जानकारी बहुत कम है, इसलिए इस वेरिएंट से हमें कितना नुकसान हो सकता है, अभी इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है। लेकिन इस वायरस के म्यूटेशन को देखकर यह कहा जा सकता है कि यह वायरस बहुत संक्रामक है। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से जल्द से जल्द वैक्सीन की दोनों डोज लेने के लिए कहा।

उन्होंने कहा कि अब तक दुनिया भर के 29 देशों में 373 ओमिक्रॉन वेरिएंट के मामले सामने आ चुके हैं। अमेरिका, इजरायल, जापान जैसे बड़े देश इस लिस्ट में शामिल हैं। अब भारत भी इसमें शामिल हो गया है। बीते कई दिनों से भारत में इसे लेकर सतर्कता बरती जा रही थी और एयरपोर्ट पर सघन जाँच हो रही थी। 

स्वास्थ्य सचिव ने कहा, “फिलहाल दुनिया भर में कोरोना के केसों में एक बार फिर से तेजी देखने को मिल रही है। अकेले यूरोप में बीते एक सप्ताह में दुनिया भर के 70 फीसदी केस पाए गए हैं।” उन्होंने कहा कि 28 नवंबर को समाप्त हुए सप्ताह में यूरोप में 2.75 लाख नए कोरोना केस मिले हैं। इसके अलावा 31 हजार लोगों की मौत दर्ज की गई है। दरअसल ओमिक्रॉन वेरिएंट के इतर भी यूरोप के देशों के अलावा रूस आदि में भी कोरोना के नए केसों में तेजी देखने को मिल रही थी।

जानकारी के मुताबिक यूरोप के मुकाबले एशिया में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। भारत समेत 11 दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में बीते एक सप्ताह में 1.2 लाख ही नए केस मिले हैं, जो पूरी दुनिया के 3.1 फीसदी के बराबर है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर से अलग ट्रेंड यहाँ देखने को मिल रहा है। एक तरफ यूरोप में केसों में इजाफा देखने को मिल रहा है तो इस क्षेत्र में घट रहे हैं।

बता दें कि हाल के महीने में कोरोना पर लगभग काबू पाने जैसी स्थिति आ गई थी। एक माह से कोरोना के मामले लगातार घट रहे हैं और देश में 55 प्रतिशत एक्टिव केस सिर्फ दो राज्यों महाराष्ट्र और केरल से हैं। यानी देश के बाकी के हिस्सों में कोरोना का असर लगभग खत्म होता दिख रहा था। लेकिन ओमिक्रॉन के प्रसार से सारे समीकरण बदल जाएँगे।

वेब सीरिज मिर्जापुर में ‘ललित’ बनने वाले अभिनेता ब्रह्म मिश्रा की मौत, घर के बाथरूम में मिली सड़ी हुई लाश

वेब सीरीज मिर्जापुर में मुन्ना भैया के करीबी साथी का किरदार निभाने वाले एक्टर ब्रह्मा मिश्रा का संदिग्ध परिस्थियों में निधन हो गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार (2 दिसंबर, 2021) को पुलिस ने ब्रह्मा मिश्रा का मृत शरीर सड़ी हुई हालत में उनके वर्सोवा स्थित फ्लैट के बाथरूम से बरामद किया। वहीं शव को पोस्टमार्टम के लिए कूपर अस्पताल भिजवा दिया गया। फिलहाल मौत के कारणों का अभी पता नहीं चल सका है।

अमेजन प्राइम की कल्ट सीरीज मिर्जापुर की पूरी यूनिट इस खबर से सदमें में है। वहीं निर्माता एक्सेल एंटरटेनमेंट ने शोक व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “हम ब्रह्मस्वरूप मिश्रा के आकस्मिक निधन से गहरे सदमे में हैं। उनके परिवार और दोस्तों के प्रति हमारी संवेदनाएँ। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।”

प्राइम वीडियो ने भी अपने आधिकारिक एकाउंट से दिवंगत कलाकार ब्रह्मा मिश्रा को श्रद्धांजलि दी है। प्राइम ने अपने इंस्टा एकाउंट पर लिखा, “ब्रह्मा मिश्रा, हमारे ललित, हमें हँसाने के लिए शुक्रिया। हमें रुलाने के लिए शुक्रिया। शुक्रिया, हमें यह बताने के लिए कि वफादारी और प्यार दोस्ती को जिंदा रखते हैं। श्रद्धांजलि। हमेशा हमारे दिलों में रहोगे।”

वहीं, मुन्ना भैया का किरदार निभाने वाले दिव्येंदु शर्मा ने ब्रह्मा के साथ अपनी एक तस्वीर साझा करके लिखा- श्रद्धांजलि, ब्रह्मा मिश्रा। हमारा ललित नहीं रहा। आइए उसके लिए प्रार्थना करें। बता दें कि दिव्येंदु की इस पोस्ट पर सीरीज से जुड़े कई साथी कलाकारों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी।

गौरतलब है कि ब्रह्मा मिश्रा ने ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’, ‘दंगल’, ‘मांझी’ और ‘हवाईजादा’ जैसी कई बड़ी फिल्मों में काम किया था, लेकिन असली पहचान उन्हें वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ से ही मिली। इस सीरीज में ब्रह्मा मिश्रा के किरदार ललित से दर्शक खूब प्रभावित हुए। सीरीज में ब्रह्मा मिश्रा ने कालीन भैया यानी अखंडानंद त्रिपाठी के नौकर का किरदार निभाया था, जो मुन्ना त्रिपाठी के बेहद करीब होता है। मिर्जापुर-2 में ब्रह्मा मिश्रा के किरदार की मौत कालीन भैया के हाथों होती है।

‘700 मदरसे बंद किए, बाकी को भी स्कूलों में बदलेंगे’: असम के CM सरमा बोले- हर हिंदुस्तानी हिंदू, मथुरा श्रीकृष्ण की

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने गुरुवार (2 दिसंबर 2021) को कहा कि वह भारतीय संस्कृति के प्रति काम करने के लिए ही सत्ता में आए हैं। उन्होंने कहा कि हर हिंदुस्तानी हिंदू है, क्योंकि बाबर के आने से पहले यहाँ सभी हिंदू ही थे। भारत में हिंदू सभ्यता थी और आगे भी रहेगी। CAA को लेकर उन्होंने कहा, “जहाँ भी हिंदू समुदाय के लोगों को तकलीफ होती है, उन्हें भारत लौटकर आने का अधिकार होना चाहिए। हर हिंदू की मातृभूमि भारत है। इसलिए मैं हमेशा CAA का समर्थन करता हूँ। हजारों साल से भारत हिंदू समुदाय का देश रहा है और रहेगा, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि दूसरे समुदाय के लोग यहाँ नहीं रह सकते।”

उन्होंने कहा कि भारत का हर नागरिक हिंदू है, क्योंकि जब बाबर ने यहाँ हमला नहीं किया था, तब तक सभी हिंदू ही थे। उन्होंने कहा, “आज मंदिर की बात करने वाला सांप्रदायिक, लेकिन दूसरे धर्म का स्थान बनाने वाला सेक्युलर हो जाता है। हम सीधे-सीधे हिंदू हैं और हिंदू रहेंगे, लेकिन हिंदू सभी धर्मों का सम्मान करना जानते हैं।”

न्यूज़ 18 के शो ‘चौपाल’ में मदरसे के मुद्दे पर बात करते हुए असम के मुख्यमंत्री ने कहा, “मदरसों को बंद करने का इरादा है। लगभग सात सौ मदरसे बंद हो चुके हैं, बाकी मदरसों को नर्सिंग स्कूल और मेडिकल-इंजीनियरिंग कॉलेजों में बदलने का इरादा है। मैं चाहता हूँ कि मेरे मुसलमान भाई मदरसों में ना जाए और उसकी जगह लोग डॉक्टर-इंजीनियर बनें, समाज को रोशन करें।” उन्होंने आगे कहा, “इससे लोग खुश हैं। जब मैं मदरसे में गया तो पूछा कि क्या बनोगे बेटा, तो बोला ‘मैं डॉक्टर बनूँगा’ तो मैं बोला कि गलत जगह आ गए हो, यहाँ तो मौलवी बनते हैं। इसलिए बच्चों की राय लेकर मदरसों को सामान्य स्कूल में बदलने का फैसला किया। मैंने कौम की भलाई के लिए मदरसा बंद किया।”

मुस्लिम वोट के सवाल पर सरमा ने कहा, “मैं अगर बोलूँ कि मियाँ वोट दो, क्या वे मुझे वोट देंगे? मुझे पक्का मालूम है कि वे मुझे देंगे तो क्यों वोट माँगू? जिस दिन ये बच्चे डॉक्टर-इंजीनियर बन जाएँगे, उस दिन वो लोग मुझे जरूर वोट देंगे। अभी वो स्थिति नहीं है।” असम में मंदिर के पाँच किलोमीटर के दायरे में बीफ बैन करने पर उन्होंने कहा, “मंदिर हो, उसमें तकलीफ नहीं है। तकलीफ होता है, जब गोवध होता है।”

मथुरा पर यूपी के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान को लेकर पूछे गए सवाल पर सरमा ने कहा, मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था तो उसको लेकर कोई मंदिर की बात कहता तो बुरा क्यों लगता है? इसमें कम्यूनल की क्या बात है? दूसरे समुदाय के धर्म स्थान के बारे में बात करने पर सेक्युलर माना जाता है। हमें इस सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। हिंदू स्वभाव से सेक्युलर होता है।”

यूपीए है ही नहीं… विपक्षी एकता की मृगमरीचिका में खुद को राष्ट्रीय नेता साबित करने में लगीं ममता, लगाएँगी कॉन्ग्रेस को पलीता

“क्या ममता बनर्जी को पता नहीं कि यूपीए क्या है? मुझे लगता है उनके पागलपन की शुरुआत हो गई है। उन्हें लगता है सारा भारत ममता-ममता का जाप कर रहा है लेकिन भारत का अर्थ बंगाल नहीं है और बंगाल का अर्थ भारत नहीं है। पिछले (विधानसभा) चुनावों की उनकी रणनीति का धीरे-धीरे खुलासा हो रहा है।” यह किसी भाजपा के नेता का वक्तव्य नहीं है। ऐसा कहना है पश्चिम बंगाल के कॉन्ग्रेसी नेता अधीर रंजन चौधरी का। पिछले लगभग एक महीने से चौधरी ममता बनर्जी और उनकी कार्यशैली से इतने नाराज हैं कि उनेक विरोध में लगातार कुछ न कुछ कहते ही जा रहे हैं। उनकी यह प्रतिक्रिया ममता बनर्जी के उस बयान पर आई है जिसमें उन्होंने भाजपा के विरुद्ध विपक्ष की लड़ाई में यूपीए की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि; कौन सा यूपीए? यूपीए कुछ नहीं है।


वैसे तो देखने से लगेगा कि अधीर रंजन चौधरी की ओर से लगातार आ रही ऐसी प्रतिक्रिया कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा तृणमूल कॉन्ग्रेस में शामिल होने से आ रही है पर यदि थोड़ा और पीछे जाएँ तो पाएँगे कि उनकी ऐसी प्रतिक्रिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के समय से ही आनी शुरू हो गई थी। खासकर तबसे जब किसी रणनीति के तहत कॉन्ग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए पश्चिम बंगाल में अपना वोट ममता बनर्जी के पक्ष में ट्रांसफर करने का फैसला किया था। दल ने न केवल चुनाव प्रचार में ढिलाई बरती बल्कि प्रचार के शुरआती दिनों में ही अधीर रंजन चौधरी को लोकसभा में दल के नेता पद से हटाए जाने की बात भी फैली थी। इसके पीछे चौधरी द्वारा ममता बनर्जी की लगातार की जा रही आलोचना और विरोध को कारण बताया गया।

चौधरी की ऐसी प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी। आखिर, प्रदेश में ममता बनर्जी के विरुद्ध लड़ने वाला कॉन्ग्रेस पार्टी का सबसे बड़ा नेता अपने केंद्रीय नेतृत्व का चाहे जितना सम्मान करे पर खुद की खिसक रही राजनीतिक जमीन से होने वाली निराशा को व्यक्त होने से कैसे रोके? इसलिए चुनाव के दिनों से शुरू हुई ऐसी प्रतिक्रियाएँ बाद में कॉन्ग्रेस के नेताओं द्वारा तृणमूल कॉन्ग्रेस में शामिल होने से और जोर पकड़ती गईं।

अधीर रंजन चौधरी द्वारा दिए गए ये वक्तव्य क्या केवल राहुल गाँधी की विदेश यात्राओं या यूपीए पर आई ममता बनर्जी की टिप्पणियों की वजह से ही हैं? ऐसा लगता नहीं है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के परिणाम से उत्साहित ममता बनर्जी द्वारा खुद के लिए राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ी भूमिका की तलाश निश्चित रूप से कॉन्ग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के असहज होने का कारण बना है। स्वाभाविक है कि राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री के रूप में देखने की सोनिया गाँधी की महत्वाकांक्षा ने यदि कॉन्ग्रेस के अंदर कोई नया नेतृत्व पनपने नहीं दिया तो फिर ममता बनर्जी को उसी भूमिका में कैसे स्वीकार कर सकती है? ऐसे में अधीर रंजन चौधरी के ये वक्तव्य केवल उनके वक्तव्य जान नहीं पड़ते। ये कॉन्ग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के बोल भी हो सकते हैं।

जो बात कॉन्ग्रेस पार्टी को नागवार गुजरी है वो यह है कि ममता बनर्जी ने यूपीए के बारे में अपनी टिप्पणी मुंबई में शरद पवार के साथ मुलाक़ात के बाद दी है। बहुत पुरानी बात नहीं जब शिवसेना के संजय राउत द्वारा शरद पवार को यूपीए का अध्यक्ष बनाने की बात हो रही थी। यह बात और है कि महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने इस प्रस्ताव को तुरंत ठुकराते हुए बयान दिया था कि यूपीए के अध्यक्ष पद का विषय किसी बहस का मुद्दा नहीं हो सकता और सोनिया गाँधी ही यूपीए की अध्यक्षा रहेंगी। बाद में पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम के बाद विपक्ष की एकता के नाम पर शरद पवार का नाम खारिज करके ममता बनर्जी के यूपीए को हेड करने की बात उछाली गई। शायद इस विषय पर कॉन्ग्रेस पार्टी की राय ही ऐसी थी कि आज ममता बनर्जी को खुद कहना पड़ा कि; यूपीए अब अस्तित्व में ही नहीं है।

भारतीय राजनीति में तीसरे मोर्चे की परिकल्पना कोई नई बात नहीं है। यह लगभग ढाई दशक से दी और ली जा रही है। जब इसकी बात होती है तब विपक्ष की तथाकथित एकता की खोज की जाती है। यह बात और है कि इस एकता की केवल परछाई नज़र आती है पर एकता कभी नज़र नहीं आती। विपक्ष की जिस एकता के सहारे ममता बनर्जी प्रधानमंत्री बनना चाहती है उसका कोई एक आधार दिखाई नहीं देता। राज्यों में शासन कर रहे राजनीतिक दलों को वर्तमान केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी से अलग-अलग समस्याएँ हैं। ऐसे में ममता बनर्जी एकता की परछाई के पीछे जाकर एकता को पकड़ लाएँगी, इसकी संभावना कम ही है। शरद पवार ने ममता बनर्जी को विश्वास दिलाने के लिए चाहे जो कहा हो पर विपक्ष के सारे दल उन्हें अपने नेता के रूप में स्वीकार करेंगे, इसकी संभावना दिखाई नहीं देती।

गठबंधन या तो तब चलता है जब गठबंधन में किसी एक दल के पास गठबंधन में भारी बहुमत हो या फिर नेतृत्व सबको लेकर चलने वाला हो। फिलहाल प्रस्तावित विपक्षी एकता और गठबंधन के लिए दो में से कोई एक बात भी दिखाई नहीं दे रही। ममता बनर्जी का लोकतांत्रिक राजनीति में विश्वास मीडिया के कागजों और विपक्षी एकता को लेकर अपनी विशफुल थिंकिंग ढो रहे तथाकथित धर्मनिरपेक्ष बुद्धिजीवियों के कॉलम तक सीमित है। लोकतांत्रिक परंपराओं और मर्यादाओं के लिए उनके मन में कितना सम्मान है, यह देश ही नहीं विपक्षी दलों के नेता भी समझते हैं। इसके अलावा दो-ढाई वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति में अपने दल को दलबदलू नेताओं के दम पर स्थापित कर लेना आसान नहीं है। कॉन्ग्रेस पार्टी लगातार नीचे जा रही है पर पूरे भारत में आज भी उसके पास अपना एक वोट बैंक है जिसके आस-पास पहुँचना तृणमूल कॉन्ग्रेस और ममता बनर्जी के लिए इतने कम समय में संभव नहीं है।

वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में कॉन्ग्रेस पार्टी की अपनी सीमाएँ हैं पर तृणमूल कॉन्ग्रेस की भी अपनी सीमाएँ हैं जिन्हें तोड़ पाना उसके लिए सरल न होगा। अधीर रंजन चौधरी और ममता बनर्जी के बीच वक्तव्यों की यह लड़ाई चाहे जितनी गंभीर हो, कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके केंद्रीय नेतृत्व को पता है कि बिना उनके विपक्षी एकता की कल्पना तो संभव है पर एकता संभव नहीं है। इसके ऊपर राज्यों में शासन कर रहे अन्य दलों और उनके नेताओं की भी अपनी समस्याएँ और सीमाएँ हैं। यह सब देखते हुए यही कहा जा सकता है कि ममता बनर्जी यात्राएँ, बैठकें और प्रेस कांफ्रेंस वगैरह करती रहेंगी पर ये सब मिलकर अभी तक उन्हें विपक्षी एकता की परछाई से आगे ले जाते हुए नहीं दिख रहे।

नाम- शौकीन पर 5 साल तक हिंदू नाम से मोहल्ले में रहा, ‘भोला प्रॉपर्टी’ के नाम से करता है धंधा: दिल्ली के पीड़ित परिवार का दावा

दिल्ली के भलस्वा डेयरी थानाक्षेत्र से 5 नवम्बर 2021 को एक परिवार के साथ मारपीट की घटना सामने आई थी। इस मामले में शौक़ीन, ज़हीम, नईम, आलम और छोटे पर कुसुम देवी के परिवार पर हमले को लेकर FIR की गई थी। घटना थानाक्षेत्र के मुकुंदपुर गली नंबर 1 की थी। अब इस मामले में पीड़ित परिवार ने ऑपइंडिया के साथ बातचीत में चौंकाने वाले दावे किए हैं। इसके अनुसार आरोपितों में से एक शौकीन कई साल तक मोहल्ले में हिंदू पहचान के साथ रहता था। साथ ही पुलिस पर भी इस परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं।

पीड़ित परिवार की सीमा ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा कि दिल्ली पुलिस का व्यवहार उनके परिवार के लिए बेहद निगेटिव रहा है। इस मामले के सभी आरोपितों को जमानत भी मिल चुकी है। साथ ही उन्होंने मोहल्ले की मस्जिदों में अभी भी जोर-जोर से लाउडस्पीकर बजाए जाने से होने वाली परेशानियों के बारे में बताया।

सीमा का आरोप है कि पीड़ित होने के बावजूद उनके परिवार पर पुलिस ने भी दवाब डाला। भलस्वा डेयरी थाने के सब इंस्पेक्टर व केस के विवेचक संदीप नरवाल ने कथित तौर पर केस वापस लेने का दबाव बनाया। उन्होंने उन्होंने स्थानीय पुलिस के व्यवहार की शिकायत वरीय अधिकारियों से करने की बात भी कही है। हम इसकी शिकायत ऊपर करेंगे क्योंकि हमें स्थानीय पुलिस की तरफ से न्याय नहीं मिला है। हालाँकि उन्होंने कहा कि आरोपित परिवार ने उन्हें तब से परेशान नहीं किया और न ही किसी प्रकार का कोई विवाद दुबारा खड़ा हुआ।

सीमा का यह भी दावा है कि मुख्य आरोपित शौकीन 5 वर्षों तक मोहल्ले में हिन्दू नाम से रहा था। वह ‘भोला प्रॉपर्टी’ नाम रख कर धंधा करता है। यह मुद्दा झगड़े के दिन भलस्वा डेयरी थाने में भी कई लोगों के आगे उठा था। उन्होंने कहा कि फिलहाल मोहल्ले में 2 मस्जिदें हैं। इनके लाउडस्पीकर से इतना शोर होता है कि मोहल्ले वाले परेशान रहते हैं। मस्जिदों के अलावा यहाँ लोगों ने घरों पर भी लाउडस्पीकर लगा रखे हैं। वे कहती हैं, “हमारे ऊपर जिस तरह से हमला किया गया, उसके बाद लोग शिकायत करने से भी डरने लगे हैं।”

सीमा ने आगे बताया कि उनके (आरोपितों) छोटे-छोटे बच्चे हमारे बच्चों का पैसा जब भी वो परचून की दूकान पर कुछ लेने जाते हैं तब छीन लेने हैं। झगड़े के समय हमारे घर के एक सदस्य के हाथ में नल के हत्थे को पुलिस ने हथियार बता कर कार्रवाई की धमकी दी। बुजुर्ग पिता को धमकाया और बच्चे को भी डर दिखाया गया। हमले के समय परिवार में सिर्फ 3 लोग मौजूद थे। पीड़ित परिवार के अनुसार बजरंग दल और महाकाल सेना जैसे संगठनों ने उनकी काफी मदद की है।

दावा: भजन बजाने से भी रोका था

सीमा का दावा है कि लाउडस्पीकर्स से होने वाली परेशानी का मसला भी नया नहीं है। करीब सात महीने पहले भी इस पर विवाद हुआ था। उस समय उन्हें अपने घर में म्यूजिक सिस्टम पर भजन बजाने से रोका गया था। कथित तौर पर असलम, कासिम और उनके साथियों ने उनके घर में घुसकर उन्हें इससे रोका था। तब मोहल्ले के अन्य हिन्दुओं ने एकजुट होकर इसका विरोध किया और मस्जिद के लाउडस्पीकर से होने वाले शोर का मसला उठाया था। सीमा के अनुसार इसके बाद मस्जिदों पर 1 के बदले 4 लाउडस्पीकर लगा दिए गए। कई घरों पर भी लाउडस्पीकर लगाए गए हैं।

क्या है मामला?

पुलिस द्वारा जारी प्रेसनोट के अनुसार इस मामले में मोहम्मद शौकीन, मोहम्मद उमर, मोहम्मद ज़ाहिम और मोहम्मद शोएब आलम आरोपित किए गए हैं। पुलिस को 5 नवम्बर 2021 को सुबह 7.32 पर इस मामले की सूचना फोन पर मिली थी। मौके पर पुलिस पहुँची तो पता चला कि दूध लेने जा रहे पीड़ित परिवार के एक बच्चे ने आरोपित पक्ष के एक बच्चे के सामने पटाखे फोड़ दिए। इसी बात को लेकर झगड़ा शुरू हो गया। घायल कुसम देवी ने अपने बयान भलस्वा डेयरी थाने में दर्ज करवाए। अपने आरोपों में उन्होंने अपनी सोने की अँगूठी और कानों से कुंडल भी छीनने का आरोप लगाया। सभी चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया था।

पीड़ित परिवार के आरोपों को लेकर ऑपइंडिया ने सब इंस्पेक्टर संदीप नरवाल से कई बार संपर्क की कोशिश की। लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई। ACP स्वरूप नगर ने बताया कि मौके पर कानून व्यवस्था सामान्य है। पुलिस ने वो सभी कार्रवाई की है जो न्यायसंगत थी।

पुलिस प्रेसनोट

ऑपइंडिया के पास इस केस की FIR मौजूद है। गौरतलब है कि पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे को कुछ लोग नबी मस्जिद की तरफ खींच कर ले जा रहे थे।

लिंग को बताता ‘मैजिक फ्लूट’ खुद को ‘लिंगों का पादरी’, महिलाओं का ‘सेक्स’ से करता इलाज: अधनंगा पकड़ा गया तो कहा- शोध कर रहा था

इटली में सेक्स के जरिए बीमारी ठीक करने का दावा करने वाले डॉक्टर को एक होटल से अर्द्धनग्न अवस्था में गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के वक्त आरोपित डॉक्टर एक ‘बीमार मरीज’ से सेक्स करने के लिए कपड़े खोल रहा था। इटली के इस डॉक्टर का दावा है कि वह सेक्स के माध्यम से बीमारियों को ठीक करने की पद्धति पर रिसर्च कर रहा है।

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. मैजिक फ्लूट के नाम से पहचाने जाने वाले इस डॉक्टर का असली नाम डॉ. जियोवानी मिनिएलो है और इसकी उम्र 60 साल है। होटल से पकड़े जाने के बाद डॉ. मैजिक फ्लूट ने इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने से पहले जो दावे इस डॉक्टर ने किए हैं, उसे सुनकर बड़े-बड़े डॉक्टर अपना माथा पीट रहे हैं। डॉक्टर ने दावा किया है कि वह होटल के कमरे में महिला के साथ सेक्स कर उसकी गुप्त बीमारी का इलाज कर रहा था। वह अपने लिंग (Penis) को ‘मैजिक फ्लूट’ और ‘पाड्रे पियो ऑफ पेनिसेस’ कहता था। बता दें कि पाड्रे पियो 20वीं सदी का एक पादरी था, जो चमत्कार से ‘इलाज’ के लिए जाना जाता था।

डॉक्टर की हरकत उस वक्त सामने आई, जब एक 33 वर्षीय महिला मरीज अन्ना मारिया ने इतालवी अखबार ‘ला रिपब्लिका’ और इन्वेस्टिगेटिव टीवी शो ‘ले लेने’ से संपर्क किया। महिला ने आरोप लगाया कि गर्भधारण नहीं होने को लेकर उसने डॉक्टर को बताया। इसके बाद डॉक्टर ने मारिया को बुलाया और उसके स्तनों (breast) को अनुचित तरीके से छूते हुए कहा कि उसे छोटे स्तनों वाली महिलाएँ पसंद हैं। महिला के अनुसार, डॉक्टर ने बताया कि उसके गर्भाशय पर ‘सफेद धब्बे’ हैं, जो एचपीवी की उपस्थिति के संकेत हैं। इसके बाद उसने उसके साथ सेक्स करने की पेशकश की। डॉक्टर ने यह भी दावा किया कि उसके साथ यौन संबंध बनाने के बाद उसके शरीर में वायरस ले लड़ने वाले एंटी बॉडी पहुँच जाएँगे, जिससे उसकी बीमारी ठीक हो जाएगी।

इसकी पड़ताल के लिए चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन करने का फैसला किया और एक एक्ट्रेस को हायर कर उसे मरीज के रूप में डॉक्टर के पास भेजा। उसने चैनल द्वारा भेजी गई एक्ट्रेस से कहा कि उसे ह्यूमन पेपिलोमावायरस (HPV) है और इससे कैंसर हो सकता है। जबकि अभिनेत्री का टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव था। डॉक्टर ने कहा कि वह उसके साथ यौन संबंध बनाकर उसे वायरस के लिए इम्यूनिटी दे सकता है, क्योंकि उसे टीका लग गया है। लेकिन उसके शरीर में वैक्सीन तभी जा पाएगी, जब वो उसके साथ संबंध बनाएगी। 

डॉक्टर इस बात से बेखबर था कि जिस ‘मरीज’ से वो बात कर रहा है, असल में वह न्यूज चैनल की ओर से भेजी गई एक्ट्रेस है। मरीज बनने का नाटक करने वाली अभिनेत्री डॉक्टर के साथ सेक्स करने के लिए तैयार हो गई। वह उसे होटल में ले गया और इस बात से अनजान की उसकी सारी हरकतें कैमरे में रिकॉर्ड हो रही हैं, उसने अपने कपड़े उतार दिए। वहीं, अंडरकवर अभिनेत्री ने जब डॉक्टर को कंडोम लगाने के लिए कहा तो डॉक्टर ने कहा कि अगर वो कंडोम पहनकर सेक्स करेगा तो उसके शरीर में वायरस से लड़ने वाले एंटी बॉडी नहीं जाएगा।

इससे पहले कि डॉक्टर अभिनेत्री के साथ कुछ कर पाता, चैनल के पत्रकार वहाँ पहुँच गए। कमरे में रिपोर्टर को देखकर डॉक्टर के पैरों तले जमीन खिसक गई और वो कहने लगा कि वो रिसर्च के लिए सेक्स कर रहा है और वो महिलाओं की जान बचाने की कोशिश कर रहा है। डॉक्टर ने कहा- “मैं यह अपनी स्टडी के लिए कर रहा हूँ। मैंने कई लोगों को बचाया है।” लेकिन अगले ही पल जब उसे पता चला कि वो स्टिंग ऑपरेशन में बेनकाब हो गया है, तो चौंक उठा।

पकड़े जाने के बाद अपने वकील के माध्यम से डॉक्टर ने कहा, ”मैंने पिछले 40 सालों से ज्यादा के करियर में सैकड़ों महिलाओं का सफलतापूर्वक इलाज किया है और इस वैकल्पिक उपचार के अच्छे परिणाम सामने आए हैं।” डॉक्टर ने कहा कि उसने कभी भी महिलाओं को अपने साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर नहीं किया। स्टिंग ऑपरेशन के बाद 15 और महिलाएँ सामने आईं हैं, जिन्होंने डॉक्टर पर बीमारी के इलाज के नाम पर सेक्स करने का आरोप लगाया है। खुलासा होने के बाद कई महिलाएँ ने उसकी शिकायत दर्ज करवाई है और अब सरकार ने आरोपित डॉक्टर के खिलाफ जाँच के आदेश दे दिए हैं।

कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल का अकाउंट हैक, ऑस्ट्रेलियाई स्किन केयर कंपनी ‘Dermalyana’ के नाम पर हुआ फेसबुक पेज

कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल का फेसबुक अकाउंट लगता है कि हैक कर लिया गया है। उनके फेसबुक पेज का नाम ऑस्ट्रेलिया की स्किन केयर कंपनी ‘डर्मालियाना’ के नाम पर कर दिया गया है। हैकरों ने 29 नवंबर को ही सिब्बल के पेज का नाम बदल दिया था, लेकिन 2 दिसंबर को सिब्बल के फेसबुक अकाउंट को देखने वाली टीम ने पेज का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया। हालाँकि, तब तक पेज पर स्किन केयर उत्पादों से संबंधित रैंडम पोस्ट और वीडियो सामने आ चुके थे।

सिब्बल के फेसबुक पेज पोस्ट किए गए स्किन केयर प्रोडक्ट्स

साइबर अपराधियों ने 29 नवंबर को सिब्बल के वेरिफाइड पेज का नाम बदलकर डर्मालियाना कर दिया गया था। सिब्बल के पेज को 10 मार्च 2014 में अनौपचारिक पेज के रूप में बनाया गया था, लेकिन अगले दिन 11 मार्च उसे आधिकारिक पेज के रूप में बदल दिया गया। यह पेज लंबे समय से एक्टिव नहीं है। इसमें आखिरी बार साल अप्रैल 2019 में पोस्ट डाली गई थी। हालाँकि, ये भी हो सकता है कि हैकर्स ने उनकी पिछली पोस्ट को डिलीट कर दिया हो।

साभार: फेसबुक

सिब्बल के पेज पर खबर के लिखे जाने तक ‘डर्मालियाना’ से जुड़े दो पोस्ट थे। कल इस पर एक पोस्ट की गई थी, जिसमें एक महिला स्किन केयर कंपनी के प्रोडक्ट्स को अपने हाथ में लिए हुई थी। पोस्ट में लिखा था, “ऑस्ट्रेलिया द्वारा बनाई गई स्किनकेयर और वेलनेस ब्रांड डर्मालियाना आप सभी के लिए एक विशेष उपहार लेकर आया है।”

साभार: फेसबुक

वहीं पेज पर दूसरी पोस्ट पहली पोस्ट के एक घंटे बाद पब्लिश की गई। संभवत: यह किसी टिकटॉक इंफ्लुएंसर का वीडियो है, जो कंपनी के प्रोडक्ट का प्रचार कर रहा है। पोस्ट में लिखा है, “डर्मालियाना का इस्तेमाल करने के लिए धन्यवाद और इसके बारे में अपने दोस्तों को बताएँ।”

साभार: फेसबुक

पेज को देखने पर ये पता चलता है कि इसकी जानकारियों को बदलने से पहले इसको rogerhealthcare.com.au ईमेल से लिंक किया गया था। इसके बाद इसकी कैटेगरी को बदलकर त्वचा विशेषज्ञ कर दिया गया। इतना ही नहीं, हैकरों ने पेज के कवर और फीचर इमेज को भी बदल दिया था। बाद में कपिल सिब्बल की तस्वीर डाल दी गई।

फेसबुक पेज पर बदल दी गई सभी जानकारियाँ (साभार: फेसबुक)

सिब्बल नाम को रीस्टोर करने में लगेगा समय

भले ही सिब्बल की आईटी टीम ने उनके पेज को रीस्टोर कर लिया है, लेकिन अभी भी पेज का नाम डर्मालियाना ही है। दरअसल, फेसबुक की नीतियों के मुताबिक, फेसबुक पेज के नाम को बार-बार नहीं बदला जा सकता है और अगर कोई इसे बदलता है तो फेसबुक द्वारा इसे मंजूर करने में तीन दिन तक का समय लग सकता है। इसमें लिखा है, “यदि आपने पिछले 60 दिनों में अपना नाम बदला है या इसे बार-बार बदलने की कोशिश की है तो आपको अपना नाम बदलने में परेशानी हो सकती है।” बावजूद इन नियमों के, सिब्बल जैसे प्रभावशाली नेता के लिए कंपनी जल्द-से-जल्द उनके नाम को बहाल करने के लिए कदम उठा सकती है।

12 साल से​ बिना मान्यता के चल रहा नोएडा का खेतान स्कूल, धोखाधड़ी-जालसाजी-वसूली के भी आरोप: प्रिंसिपल ने बताया साजिश

उत्तर प्रदेश के नोएडा में द खेतान स्कूल पर 12 वर्षों से बिना मान्यता के चलने का आरोप लगा है। एक शिकायत के आधार पर मेरठ के संयुक्त निदेशक ने इसकी जाँच की है। जाँच में कहा गया है कि स्कूल ने जरूरी मान्यता नहीं ली है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) द्वारा भी इस मामले में जाँच जारी होने की बात कही गई है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक त्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा से स्कूल के खिलाफ शिकायत की गई थी। उपमुख्यमंत्री ने मेरठ के कमिश्नर को जाँच कर जरूरी करवाई के आदेश दिए थे। जाँच के बाद यह पाया गया है कि द खेतान स्कूल नोएडा ने अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम-2009 की धारा-18 के तहत किसी सक्षम अधिकारी से मान्यता नहीं ली है।

आदेश कमिश्नर मेरठ , साभार – नवभारत टाइम्स

शिकायत में स्कूल मैनेजमेंट पर धोखाधड़ी, जालसाजी, अवैध वसूली, अमानत में खयानत के तहत केस दर्ज करने की माँग की गई है। इसी के साथ स्कूल पर हजारों बच्चों का जीवन बर्बाद करने का आरोप लगा है। इस मामले में स्कूल को प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किया गया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल ने नोटिस का जवाब भी दिया है।

इस आरोपों पर ऑपइंडिया ने द खेतान स्कूल नोएडा की प्रिंसिपल रीना सिंह से बात की। उन्होंने बताया, “हमारे खिलाफ जो कुछ भी हो रहा उसकी जानकारी हमको किसी प्रशासनिक अधिकारी से नहीं, बल्कि मीडिया से ही मिल रही है। अभी तक हमें किसी आदेश की कोई प्रति नहीं मिली है। मीडिया में स्कूल के 12 साल से चलने की बात कही जा रही है, जबकि हमारे स्कूल को 26 साल चलते हो चुके हैं। हमारे मान, प्रतिष्ठा के खिलाफ ये साजिश है जिसमे ज़रा सी भी सच्चाई नहीं है। हमारा स्कूल नर्सरी से कक्षा 12 तक CBSE बोर्ड से है।”

प्रिंसिपल रीना सिंह के आगे कहा, “क्या ये सम्भव है कि नोएडा जैसे महानगर में कोई स्कूल 12 साल तक बिना मान्यता के चल जाए? अभी भी हमारा स्कूल बोर्ड की परीक्षाएँ आयोजित करवा रहा है। सभी स्टाफ और छात्र पहले की तरह काम और पढ़ाई कर रहे हैं। हमने कोरोना काल में भी अपने सभी कर्मचारियों को न सिर्फ नौकरी पर बनाए रखा, बल्कि उनकी सैलरी भी समय से बढ़ाई। हमारे स्कूल में 200 से अधिक टीचर और अन्य कर्मचारी काम करते हैं। वो सभी अपने मैनेजमेंट से पूरी तरह से संतुष्ट हैं।”

रीना सिंह ने आगे बताया, “हम जानते हैं कि हमारे खिलाफ ये शिकायत और साजिश कौन कर रहा है। फिर भी हम किसी का नाम नहीं लेना चाहते हैं। कोई भी हमारे स्कूल में आकर हमारे कामकाज को देख और समझ सकता है। हमने कोई भी काम गलत या गैर कानूनी नहीं किया है। मीडिया पता करे कि मेरठ के कमिश्नर ने आदेश की चिट्ठी किस के दबाव में और क्यों भेजी है?” उन्होंने कहा कि स्कूल के पास सभी जरूरी मान्यताएँ हैं। इस संबंध में चल रही खबरें गलत और अफवाह हैं।

कुंभ की तर्ज पर विकसित होगा अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव: श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप की 40 फीट ऊँची प्रतिमा तैयार, सर्किट में 30 नए तीर्थ जुड़े

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में गुरुवार (2 दिसंबर 2021) से अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव (IGM) की शुरुआत हो गई। कुरुक्षेत्र में ही भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के 18 दिन के युद्ध के पहले दिन अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। हरियाणा सरकार कुंभ की तर्ज पर गीता महोत्सव को भी अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाना चाहती है। प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बुधवार (1 दिसंबर 2021) को कहा कि सरकार वार्षिक अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव (IGM) को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न दूतावासों में प्रदर्शनियों के आयोजन पर विचार कर रही है।

यह महोत्सव 2 दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा, जबकि मुख्य कार्यक्रम 9 से 14 दिसंबर तक होंगे। मुख्यमंत्री ने मुख्य आयोजन स्थल ब्रह्मसरोवर में इसका उद्घाटन करते हुए कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 2014 में कुरुक्षेत्र आगमन के दौरान इसे गीता स्थली के रूप में विकसित करने की बात कही थी। इसी क्रम में कुरुक्षेत्र को नए स्वरूप में विकसित किया जा रहा है।

30 नए स्थान जोड़े जा रहे

मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा कि 48 कोस परिक्रमा में 30 नए तीर्थ स्थान जोड़े जा रहे हैं। इन 30 ‘तीर्थों’ में से 13 कुरुक्षेत्र में, 10 कैथल में, 6 करनाल में और एक जींद जिले में स्थित हैं। इस तरह अब कुल मिलाकर 164 तीर्थ हो गए हैं, जो राज्य के पाँच जिलों- कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, पानीपत और जिंद में फैले हैं। इस बार के गीता महोत्सव का थीम ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ रहेगा और इसमें तमाम देशी-विदेशी कलाकार जुड़ेंगे।

सीएम खट्टर ने कहा कि आईजीएम में सामाजिक और धार्मिक समूहों का योगदान काफी बढ़ गया है, इसलिए भविष्य में महोत्सव की योजना एवं आयोजन के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव समिति का गठन करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड, जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस समिति का सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि इस मौके पर 75 स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया जाएगा।

महोत्सव के दौरान कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय गीता संगोष्ठी का आयोजन करेगा। 14 दिसंबर को ब्रह्मसरोवर में करीब 1,100 छात्र गीता पाठ करेंगे, जबकि ऑनलाइन गीता पाठ में देश-विदेश के 55,000 छात्र भाग लेंगे। इस दौरान 75 प्रसिद्ध मूर्तिकार महाभारत और गीता के पर आधारित मूर्तियाँ बनाएँगे।

भगवान कृष्ण की मूर्ति

सीएम खट्टर ने कहा कि देश में 574 जिलों की मिट्टी के मिश्रण से कृष्ण के विशाल रूप को दर्शाने वाली एक भव्य प्रतिमा का निर्माण किया गया है। मूर्ति को गीता के 574 श्लोकों के अनुसार बनाया गया है और भगवान कृष्ण के विराट स्वरूप वाली प्रतिमा की ऊँचाई करीब 40 फीट है। उन्होंने इस महोत्सव को गौरव और सौभाग्य की बात बताते हुए कहा कि इस बार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के अवसर पर गीता के दिव्य संदेश का यह 5,158वाँ साल होगा।

सीएम ने ये भी बताया कि कुरुक्षेत्र केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन योजना के तहत श्रीकृष्ण सर्किट का हिस्सा है। इस योजना के तहत ब्रह्मसरोवर, नरकतारी, ज्योतिसर, सन्निहित सरोवर और बाकी शहर का विकास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन विकास कार्यों पर करीब 97.35 करोड़ रुपये खर्च किए गए। ये मदद केंद्र सरकार की ओर से दी गई है।