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मथुरा पर हिंदुओं को ही ‘नमकहराम’ बता रहे जफरुल इस्लाम, कहा- ईदगाह में हिंदुओं को मिल चुका है उनका ‘हिस्सा’

जफरुल इस्लाम ने एक बार फिर अपनी हिंदू घृणा का प्रदर्शन किया है। उन्होंने मथुरा को लेकर हिंदुओं को नमकहराम बताने की कोशिश की है। साथ ही कहा है कि मथुरा में हिंदुओं को उनका हिस्सा मिल चुका है। ध्यान रहे कि ये वही इस्लाम हैं जिन्हें दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन बनाया था। इसी पद पर रहते हुए उन्होंने हिंदुओं को अरब की धौंस दिखाई थी। वे ‘मिली गैजेट (Milli Gazette)’ नाम से एक मीडिया संस्थान भी चलाते हैं। इसके वे संस्थापक संपादक हैं। यह संस्थान गोधरा में रामभक्तों को ट्रेन में ज़िंदा जलाए जाने वाली घटना को भी जायज बताने की कोशिश कर चुका है।

जफरुल इस्लाम ने उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या का हवाला देते हुए एक ट्वीट किया है। इसमें मौर्या के उस ट्वीट का जिक्र हैं जिसमें उन्होंने कहा था, “अयोध्या, काशी में भव्य मंदिर निर्माण जारी है। मथुरा की तैयारी है।” साथ ही इस्लाम ने लिखा है, “यह धोखा है। हिंदुओं ने पहले ही ईदगाह की जमीन में अपना हिस्सा ले लिया है और एक समझौते के तहत मथुरा में एक भव्य मंदिर का निर्माण किया है।”

अपने ट्वीट के साथ उन्होंने मिली गैजेट पर 8 अगस्त 2020 को प्रकाशित एक लेख का लिंक भी साझा किया है। यह लेख मथुरा पर हिंदुओं के दावे को खारिज करता है। इस लेख में शाही ईदगाह ट्रस्ट और श्री कृष्ण जन्मस्थान सेव संघ के बीच समझौते का जिक्र किया गया है।

इस समझौते का हवाला देकर एक तरह से हिंदुओं से कहने की कोशिश की गई है कि तुम सन् 1670 की बात मत करो। इसी साल औरंगजेब ने मथुरा पर हमला कर केशवदेव मंदिर को ध्वस्त कर दिया था और उसके ऊपर शाही ईदगाह मस्जिद बनवा दी थी। इस जगह के कृष्ण जन्मभूमि होने के तमाम साक्ष्य हैं। लेकिन इन साक्ष्यों को उसी तरह नजरंदाज किया जा रहा जैसा अयोध्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक होता रहता था।

गौरतलब है कि मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ जमीन पर बने शाही ईदगाह मस्जिद पर हिन्दुओं का दावा नया नहीं है और न यह अभी केशव मौर्य के कहने से शुरू हुआ है। राम मंदिर मुक्ति आंदोलन के साथ ही काशी और मथुरा को भी मुक्त कराने की बात चली थी। यहाँ तक कि आजादी के पहले 1935 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने काशी राज को मथुरा में जन्मभूमि के अधिकार सौंपे थे। जहाँ बाद में 1951 में ‘श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट’ बना और यहाँ भव्य मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया गया।

आगे चलकर 1958 में ‘श्रीकृष्ण जन्म सेवा संघ’ का गठन हुआ। कानूनी तौर पर इस संस्था को जमीन पर मालिकाना हक हासिल नहीं था लेकिन इसने ट्रस्ट के लिए तय सारी भूमिकाएँ निभानी शुरू कर दीं। इसके ठीक 10 साल बाद 8 अगस्त 1968 का वह कथित समझौता हुआ जिसका हवाला मिली गैजेट के लेख में दिया गया है।

दरअसल, श्रीकृष्ण जन्म सेवा संघ ने 1964 में पूरी जमीन पर नियंत्रण के लिए एक सिविल केस दाखिल किया था। लेकिन 1968 की तत्कालीन परिस्थितियों में शाही ईदगाह कमिटी और श्री कृष्णभूमि ट्रस्ट के बीच एक समझौता हो गया। इसके अनुसार, जमीन ट्रस्ट के पास रहेगी और मस्जिद के प्रबंधन का अधिकार मुस्लिम कमिटी को दे दिए गए। उसमें मुस्लिमों को शाही ईदगाह मस्जिद के प्रबंधन के अधिकार दे दिए गए। अब इसी समझौते को आधार बनाकर दावा किया जा रहा है कि ईदगाह मस्जिद पर पुनः दावा करने का कृष्ण भक्त हिन्दुओं को कोई अधिकार नहीं, बल्कि यह समझौते का उल्लंघन करते हुए धोखा है।

नाबालिग भतीजी के प्यार में पागल चचा इम्तियाज: इनकार पर लड़की को मारी गोली; बाद में खुद कूद गया मालगाड़ी के आगे

झारखंड के गढ़वा जिले से दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ अपनी नाबालिग भतीजी के एकतरफा प्यार में पड़े सिरफिरे चाचा ने उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। इसके बाद खुद भी ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने उसके पास से मिले सुसाइड नोट के आधार पर उसकी पहचान कर ली है।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना मंगलवार (30 नवंबर 2021) को गढ़वा जिले के खरौधी थाना क्षेत्र के के करिवाडीह गाँव में घटी। यहीं के रहने वाला आरोपित इम्तियाज अंसारी कक्षा 9 में पढ़ने वाली अपनी नाबालिग भतीजी शबनम खातून से पिछले कई साल से एकतरफा प्यार करता था। उसने कई बार लड़की को प्रपोज भी किया, लेकिन हर बार वह उसे दुत्कार देती थी। इससे वो काफी चिढ़ा हुआ था। वहीं लड़की ने आरोपित द्वारा उसे छेड़ने की बात अपने घर वालों को भी बता दी। इसके बाद उसके परिजनों ने युवक के पिता से इसकी शिकायत की तो उसे गुजरात भेज दिया गया।

अभी हाल ही में वो गुजरात से वापस लौटा था। घर वापस लौटते ही उसने फिर से लड़की के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी। उसने लड़की पर निकाह करने का दबाव बनाया। साथ ही धमकी भी दी कि शादी नहीं करने पर उसके लिए ही उसने एक पिस्तौल और 20 कारतूस बचा के रखे हैं। जब पीड़िता ने फिर से इसकी शिकायत अपने परिजनों से की और उन्होंने आरोपित के पिता से ये बात बताई। तो आरोपित की पिटाई भी हुई।

हालाँकि, इससे बौखलाए सिरफिरे आशिक ने लड़की की हत्या का मन बना लिया। इसी क्रम में बीते मंगलवार को जब लड़की अपनी सहेली के साथ स्कूल से लौट रही थी तो आरोपित ने उसे रोक लिया। उसने शबनम को पहले चाकू मारा और बाद में गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद वो वहाँ से फरार हो गया और चोपन रेलखंड पर नगर उंटारी के पास सुसाइड नोट लिखने के बाद मालगाड़ी के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली। इससे उसके दोनों पैर कट गए और शरीर में भी कई जगह कटने के निशान मौजूद थे। बहरहाल मामले की तफ्तीश की जा रही है।

इरफान ने ब्लेड खरीदी और अपना प्राइवेट पार्ट काट डाला, परिजनों ने बताया- बहनों के कारण निकाह में हो रही थी देरी

बिहार के एक युवक ने नेपाल में अपना प्राइवेट पार्ट काट डाला। बताया जाता है कि निकाह में देरी की वजह से उसने ऐसा किया है। उसकी पहचान इरफान शेख के तौर पर हुई है। वह बेतिया के साठी थानाक्षेत्र के गाँव काला बरवा का रहने वाला है। नेपाल में वह मजदूरी करता था। नेपाल की पुलिस से इस घटना के संबंध में जानकारी मिलने के बाद परिजन उसे घर लेकर आए। फिलहाल वह बेतिया के अस्पताल में भर्ती है। उसकी हालत में सुधार हो रहा है। घटना 4 दिन पुरानी बताई जाती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इरफ़ान की माँ ने निकाह में देरी की वजह अपनी गरीबी और 5 बड़ी बेटियों को बताया है। उन्होंने कहा कि उनका मकान अभी पक्का नहीं बना है। इसी के साथ वो पहले अपनी 5 बड़ी बेटियों का निकाह करना चाहती थीं। इसके कारण इरफ़ान के निकाह में देरी लग रही थी। अगर उन्हें पता होता कि वो ऐसा कदम उठा लेगा तो वो पहले उसी का निकाह करवा देतीं।

इरफ़ान के परिवार वालों को उसके घायल होने की सूचना नेपाल पुलिस ने दी। वह नेपाल के पोखरा इलाके में काम करता था। उसके अब्बा इंतज़ार शेख के मुताबिक उसने फोन कर घर आने की जानकारी दी थी। लेकिन उसके अगले ही दिन उसके द्वारा अपना प्राइवेट पार्ट काट लेने की खबर आई। उसको नेपाल के बीरगंज स्थित नारायणी अस्पताल से बिहार बेतिया के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया है।

बताया जा रहा है कि जब उसके परिजन उसको लेने नेपाल के अस्पताल गए थे तब वह वहाँ से भाग गया था। काफी तलाश के बाद वो भारत – नेपाल अंतरर्राष्ट्रीय सीमा पर रक्सौल के पास मिला। घर वालों ने इरफान से पूछा तो उसने बताया कि उसने नेपाल में एक दुकान से ब्लेड खरीदी और अपना प्राइवेट पार्ट काट कर फेंक दिया। इससे ज्यादा वह कुछ नहीं बता रहा है। इलाज कर रहे डॉक्टर प्रमोद तिवारी ने बताया कि उसकी हालत में सुधार हो रहा है।

‘बड़ों के लिए WFH तो बच्चों को स्कूल जाने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है?’: प्रदूषण पर केजरीवाल सरकार को SC की फटकार, कहा- 24 घंटे में पेश करें समाधान

सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी में बढ़ रहे प्रदूषण के बीच बच्चों के स्कूल खोलने पर दिल्ली की केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई है। स्कूल खोलने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की खिंचाई करते हुए पूछा, “जब सरकार ने बड़ों के लिए वर्क फ्रॉम होम (WFH) लागू किया है तो बच्चों को स्कूल जाने पर क्यों मजबूर किया जा रहा है?” कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बावजूद कुछ नहीं किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा, “आपने हमें कहा था कि स्कूल बंद हैं, लेकिन छोटे बच्चे स्कूल जा रहे हैं। बड़े वर्क फ्रॉम होम करें और बच्चे स्कूल जाएँ?” दिल्ली सरकार की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने दिल्ली सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में अदालत को बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र और दिल्ली सरकार को वायु प्रदूषण रोकने के लिए 24 घंटे के अंदर योजना के साथ पेश होने के लिए कहा। कोर्ट ने कहा कि अगर यह सरकार प्रदूषण रोकने में कोई कदम उठाने में चूकती है तो कोर्ट इस बारे में आदेश देगा। सर्वोच्च न्यायालय अब इस मामले में कल (3 दिसंबर 2021) सुबह 10 बजे सुनवाई करेगा। 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (2 दिसंबर 2021) को दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को लेकर 17 वर्षीय छात्र आदित्य दुबे की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हमें लगता है वायु प्रदूषण के मुद्दे पर कुछ हो ही नहीं रहा, जबकि इसका स्तर लगातार खराब होता जा रहा है। सिर्फ समय बर्बाद हो रहा है।” 

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सीजेआई ने कहा, “हम औद्योगिक और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को लेकर गंभीर हैं। आप हमारे कंधों पर रखकर बंदूक नहीं चला सकते। आपको कदम उठाने होंगे। स्कूल क्यों खुले हैं? अगर आप बाहर निकलने का विकल्प देंगे तो घर में कौन करना चाहेगा? हमारे भी बच्चे और नाती-पोते हैं। हम चाहते हैं कि आप इस पर गंभीरता से विचार करें और समाधान निकालें।” 

वहीं, दिल्‍ली में प्रदूषण के हालात पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से सॉल‍िसीटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। मेहता ने अदालत को बताया कि अधिकारी इस दिशा में गंभीरतापूर्वक और तेजी से काम कर रहे हैं और उन उद्योगों को बंद किया जा रहा है, जो नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इस बारे में राज्य सरकारों को भी जानकारी दी गई है। 

‘हम 40 करोड़ हैं, हमें कमजोर न समझो’: सपा सांसद शफीकुर्रहमान ने कहा- मथुरा में अयोध्या जैसे हालात नहीं होने देंगे

उत्तर प्रदेश संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने एक बार भड़काऊ बयान देते हुए कहा है कि भारत में 40 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम हैं और इन्हें कमजोर ना समझा जाए। उन्होंने कहा कि मथुरा में अयोध्या जैसे हालत पैदा किए जा रहे हैं। अगर इस बार ऐसा हुआ तो मुस्लिम अपनी कुर्बानी दे देंगे। बर्क का यह बयान सोशल मीडिया में काफी वायरल हो रहा है।

TV9 उत्तर प्रदेश को दिए इंटरव्यू में उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को लेकर उन्होंने कहा, “जो कुछ भी हो रहा है वह आईन (कानून) के खिलाफ हो रहा। वो (केशव प्रसाद मौर्य) जो कुछ भी कह रहे हैं, वो ताकत के बलबूते पर ही कहना चाहते हैं। वो मुसलमानों को कमजोर समझ रहे हैं। मुसलमान कमजोर नहीं है। उस वक्त उन्होंने मस्जिद तोड़कर मंदिर बनवा लिया और अब इसको भी तोड़ना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। जैसे किसानों ने कुर्बानियाँ दी हैं वैसे हम भी देना शुरू कर देंगे।” उन्होंने कहा कि भाजपा आगामी UP चुनाव हार रही है, इसलिए ऐसे बयान देकर हिन्दू-मुस्लिम को भड़काया जा रहा है। ये सब कुछ चुनाव जीतने के लिए किया जा रहा है।

गौरतलब है कि उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने हाल ही में ट्वीट कर कहा था कि अब ‘मथुरा की तैयारी है’। शफीकुर्रहमान के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए केशव प्रसाद ने कहा है, “शफीकुर्रहमान अखिलेश यादव की गैंग के हैं। अखिलेश यादव को स्पष्ट करना ही पड़ेगा कि वो मथुरा में मंदिर के पक्ष में हैं या विरोध में?”

गौरतलब है कि शफीकुर्रहमान बर्क इससे पहले भी कई बार विवादित बयान दे चुके हैं। इसी साल अगस्त में उन्होंने तालिबान की तारीफ़ करते हुए कहा था कि तालिबान एक ऐसी ताकत है, जिसने रूस और अमेरिका जैसे शक्तिशाली देशों को भी अपने देश पर कब्जा नहीं करने दिया। कोरोना महामारी पर साल जून में उन्होंने कहा था, “कोरोना कोई बीमारी नहीं है बल्कि आजादे इलाही है, जो अल्लाह के सामने गिड़गिड़ाकर माफी माँगने से ही खत्म होगी।”

CM ममता बनर्जी ने बैठे-बैठे ‘जन गण मन…’ शुरू कर बीच में ही छोड़ा: भाजपा नेता ने राष्ट्रगान का अपमान बता कराई FIR

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी द्वारा मुंबई में बुधवार (1 दिसंबर) को एक प्रेस वार्ता के दौरान कुर्सी पर बैठे-बैठे राष्ट्रगान शुरू करने पर विवाद हो गया है। इस मामले में मुंबई भाजपा के नेताओं ने शिकायत दर्ज कराई है। इससे पहले महाराष्ट्र के भाजपा नेता मोहित कम्बोज भारतीय ने राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाते हुए मुंबई पुलिस से ममता बनर्जी और कार्यक्रम के आयोजकों के खिलाफ FIR दर्ज करने की अपील की थी। इसी के साथ ‘…द्राविड़ उत्कल बंग’ तक बोलने के बाद वो ‘जय बिहार, जय महाराष्ट्र, जय भारत’ बोलकर चुप हो गईं थी।

ममता बनर्जी का यह वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस क्लिप को शेयर करते हुए मोहित ने इसे देशद्रोहियों की महफ़िल करार दिया। उन्होंने लिखा, “जब देशद्रोही लोगों की महफिल हो तो राष्ट्रगान का सम्मान कैसे होगा।” मोहित ने ममता बनर्जी पर तंज करते हुए लिखा है कि इनको प्राइम मिनिस्टर बनाना है।

इसी के साथ महाराष्ट्र भाजपा नेता प्रतीक कारपे ने भी ममता बनर्जी को लेकर बयान दिया है। उन्होंने लिखा, “क्या यह राष्ट्रगान का अपमान नहीं है? वहाँ मौजूद कथित बुद्धिजीवी तब क्या कर रहे थे, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बैठ कर राष्ट्रगान शुरू किया। इतना ही नहीं, उन्होंने राष्ट्रगान को बीच में ही बंद कर दिया।”

भाजपा नेता अमित मालवीय ने भी ममता बनर्जी का वीडियो शेयर करते हुए नाराजगी जताई है। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है, “हमारा राष्ट्रगान हमारी राष्ट्रीय पहचान की सबसे शक्तिशाली अभिव्यक्तियों में से एक है। यहाँ बंगाल के सीएम द्वारा गाए गए राष्ट्रगान का एक विकृत रूप है। क्या भारत का विपक्ष इतना गर्व और देशभक्ति से रहित हो गया है?।”

फिलहाल इस पूरे मामले में अभी तक ममता बनर्जी या उनकी पार्टी से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ममता बनर्जी ‘दिल्ली पर नजर’ होने के चलते इस समय महाराष्ट्र के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। वहाँ उन्होंने शिवसेना और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं से मुलाकात की है। इस दौरान ‘एक मजबूत राजनैतिक विकल्प’ पर चर्चा हुई। उन्होंने शरद पवार को सबसे वरिष्ठ नेता बताया। साथ ही कॉन्ग्रेस से दूरी बना कर रखी।

अस्पताल में बवासीर का इलाज करवा रहा है ‘मेरा यशु यशु’ वाला पादरी बजिंदर सिंह? वायरल स्क्रीनशॉट की जानिए सच्चाई

सोशल मीडिया में एक स्क्रीनशॉट काफी तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें ऑपइंडिया का लोगो लगा हुआ है और दावा किया जा रहा है कि हाल ही में ‘मेरा यशु यशु’ के वायरल मीम में गूँगी बच्ची के बोलने का ढोंग करने वाले विवादित पादरी बजिंदर सिंह को बवासीर के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 

वायरल स्क्रीनशॉट में लिखा है, “इसके पास किडनी, फेफड़ा, कैंसर, पोता बढ़ जाना, टट्टी पतली होना, वीर्य का पतला होना, सेक्स क्षमता कम होना, इन सबका इलाज है। गूँगे को 2 मिनट में गायक बना देता है।” इसमें ऑपइंडिया की खबर का स्क्रीनशॉट लगा है। जिसमें लिखा, “मेरा येसु येसु वाला पादरी निजी अस्पताल में बवासीर का इलाज कराते पाया गया।”

हालाँकि, यह स्क्रीनशॉट फेक है। ऑपइंडिया ने कभी भी बजिंदर सिंह के बारे में ऐसी कोई खबर नहीं चलाई है। हम इस बात पर कोई दावा नहीं कर रहे हैं कि बजिंदर सिंह को बवासीर है या नहीं है। हम यह भी नहीं बता सकते हैं कि वह अस्पताल में भर्ती है या नहीं। यह बात बजिंदर सिंह, उनके डॉक्टर और उनके प्रभु के बीच है। हम इस मामले में किसी तरह की पुष्टि नहीं करते हैं, मगर इतना जरूर बता सकते हैं कि वायरल हो रहा स्क्रीनशॉट फर्जी है।

हो सकता है कि इंटरनेट पर ट्रोल्स ने मान लिया होगा कि उन्हें पाइल्स की बीमारी है क्योंकि वह हमेशा अपने वीडियो में खड़े रहते हैं। बवासीर के रोगियों को आमतौर पर बैठने में कठिनाई होती है क्योंकि इसमें दर्द होता है। लेकिन इसे इस तरह प्रचार किया जाता है कि यह राम कथा नहीं है जो बैठकर की जाए।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों एक मीम वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में एक लड़का रो रहा था। फिर बजिंदर सिंह नाम का पादरी उससे पूछता है कि क्या उसकी बहन पहले बोल सकती थी। लड़का ‘नहीं’ में जवाब देता है। फिर उससे पूछा जाता है कि क्या वह अब बोल सकती है, और इस बार वह ‘हाँ’ में जवाब देता है। तभी बैकग्राउंड में गाना बजता है, “मेरा यशु यशु।”

ईसाई पादरी सेबेस्टियन मार्टिन पीठ की चोट के कारण हुआ था अस्पताल में भर्ती

चमत्कार के नाम पर लोगों को उल्लू बनाने वाले पादरी सेबेस्टियन मार्टिन की 2016 में मौत हो गई। ‘हीलर बाबा’ के नाम से जाना जाने वाला सेबेस्टियन मार्टिन जादुई तरीके से लोगों की सारी बीमारियाँ ठीक करने का दावा किया करता था और आरोप है कि इसके जरिए वह गरीब और भोले-भाले लोगों को ईसाई बनाया करता था। मौत से कुछ दिनों पहले सेबेस्टियन मार्टिन पीठ की चोट के कारण मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती था। इसके बाद वह कुछ वक्त तक फरार भी रहा। बाद में उसे वसई में उसके घर में मृत पाया गया।

सेबेस्टिन यह दावा करता था कि उसके पास दिव्य शक्तियाँ है। इन शक्तियों के जरिए वह किसी भी आदमी की बीमारी ठीक कर सकता है। उसके पास उन बीमारियों का भी इलाज है, जिन्हें साइंस ठीक नहीं कर सकता। वह मुंबई के पास वसई में ‘आशीर्वाद प्रार्थना केंद्र’ नाम से हीलिंग सेंटर चलाता था।

‘लड़की पत्रकार को भेज राकेश टिकैत को फँसाने का काम किया’: ट्वीट पर घिरे उदित राज, यूजर्स ने कहा- थू है तुम्हारी मानसिकता पर

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बुधवार (1 दिसंबर 2021) को अपना आपा खोते हुए रिपब्लिक टीवी पत्रकार पर बदतमीजी करने और फिजिकल टच करने का आरोप लगाया था। इसके बाद टिकैत को आलोचना का शिकार होना पड़ा। अब कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने इसका वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया है।

उन्होंने लिखा, “किसान आंदोलन को कमजोर करने के लिए R भारत टीवी ने लड़की पत्रकार को भेजकर राकेश टिकैत को फँसाने का काम किया। लड़की ने गलत रूप से टिकैत को छुआ। अगर गलती से टिकैत ने छू लिया होता तो FIR हो गई होती और आंदोलन कमजोर होता। ऐसे लड़की पत्रकार को क्या कहेंगे।”⁦

इस ट्वीट को लेकर उदित राज को नेटिजन्स ने घेरते हुए उनकी मानसिकता पर सवाल उठाए हैं।के इस ट्वीट की तीखी आलोचना हो रही है। राजेश मिश्रा ने लिखा, “टिकैत और तुम भारत मे सिर्फ दोनों ही कामदेव जैसे खूबसूरत हो जिसे महिला पत्रकार ने गलत तरीके से छुआ। तुम कितने मानसिक गलीच हो जो राजनीति के लिए एक महिला पर घिनौना लाँछन लगा रहे हो। थू है तुम्हारी मानसिकता पर।”

धीरज शर्मा ने लिखा, “काले तीतर तेरे जैसा बेशर्म इंसान नही देखा।”

पंकज शर्मा ने लिखा, “महिलाओं का करो सम्मान। खुद आप वहाँ नहीं थे तो क्यों किसी पर आरोप लगा रहे हो।”

प्रवीण नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा, “भाई साहब, कुछ तो सोच समझ कर बोलिए। आप क्या बोल रहे हो सब जनता पढ़ और सुन रही हैं। राहुल गाँधी जी ऐसे ही नेताओं के कारण कॉन्ग्रेस आम जनता की नज़रों से उतर रही हैं। इनको बाहर का रास्ता दिखाइए।”

राज ठाकुर ने लिखा, “कुछ तो शर्म करो, या पप्पू की गुलामी में इतना डूब चुके हो की नारी के अपमान में भी गौरवान्वित महसूस कर रहे हो। तुम्हारी इसी ओछी सोच की वजह से लोग तुमसे नफ़रत करते हैं।”

अंबुज कुमार ने लिखा, “राकेश टिकैत बेहद बेहूदा इंसान है। इसमें तमीज नाम की कोई चीज नहीं है।”

अमिताभ आर्य ने लिखा, “उदित राज ने आज यह ट्वीट कर अपनी गन्दी मानसिकता उजागर कर दी, इसकी पार्टी अध्यक्ष एक महिला है और प्रियंका वाड्रा कैसे ऐसे इंसान को अपनी पार्टी में रखे हुए हैं।”

एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा, “तुम सच में लतखोर है, किसी लड़की के बारे में ऐसी बात बोलते तुझे शर्म नहीं आती है, जिसकी कोई इज्जत होती है वही दूसरो को भी इज्जत देता है… तेरी तो कोई इज्जत है नही, उस लड़की की जगह तेरी बेटी बीवी होती तो क्या यही बोलता?? और कितना गिरोगे? थू है तेरे ऊपर…”

गौरतलब है कि राकेश टिकैत की बुधवार (1 दिसंबर 2021) को रिपब्लिक भारत न्यूज़ चैनल की महिला पत्रकार से तीखी बहस हो गई। टिकैत ने कहा, “मुझे आर भारत को जवाब नहीं देना है। आपको सुधार करने की जरूरत है।” वह आगे कहते हैं कि इनकी वीडियो बनाओ। ये यहाँ आकर बदतमीजी करते हैं। महिला पत्रकार ने जब हुड़दंग के बीच भी उनसे सवाल पूछना जारी रखा तो राकेश टिकैत महिला पत्रकार पर चिल्लाते हुए बोले, “कोई इसका वीडियो बनाओ। यह मुझसे बदतमीजी कर रही है। पुलिस बुलाओ, यह लड़की बदतमीजी करती है, मुझे टच करती है।”

स्कूल से लौट रही थी, दुपट्टा खींचा-हाथ पकड़ा-शादी करने को कहा… कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा- यह POCSO एक्ट के तहत यौन हमला नहीं

घटना 2017 की है। एक लड़की स्कूल से लौट रही थी। रास्ते में उसका दुपट्टा खींचा गया। हाथ पकड़ा गया। शादी करने का प्रस्ताव दिया गया। कथित तौर पर आरोपित ने धमकी दी कि यदि उसका प्रस्ताव नहीं माना गया तो वह लड़की पर एसिड अटैक करेगा। ट्रायल कोर्ट ने आरोपित को POCSO एक्ट के तहत दोषी माना। लेकिन कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा है कि यह POCSO एक्ट के तहत यौन हमले में नहीं आता।

हाई कोर्ट का कहना है कि महिला के स्कार्फ (दुपट्टा) को खींचना, पीड़िता का हाथ खींचना और उसे शादी के लिए प्रस्ताव देना पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत ‘यौन हमला’ या ‘यौन उत्पीड़न’ की परिभाषा में नहीं आता है। जस्टिस विवेक चौधरी की खंडपीठ ने रिकॉर्ड पर साक्ष्य के मूल्यांकन में ट्रायल कोर्ट की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा, “इसकी वास्तविक भावना में अधिक जोर नहीं दिया जा सकता है क्योंकि ट्रायल कोर्ट न्याय के प्रशासन की बुनियादी संरचना है। यदि मूल संरचना बिना किसी आधार के है, तो सुपर स्ट्रक्चर न केवल गिरेगा, बल्कि यह एक निर्दोष व्यक्ति को न्याय से वंचित करेगा।”

पीड़ित पक्ष का आरोप था कि जब पीड़ित लड़की अगस्त 2017 में स्कूल से लौट रही थी, तब आरोपित ने उसका ‘ओरना’ (स्कार्फ/ दुपट्टा) खींच लिया और उसे शादी का प्रस्ताव दिया। इसके साथ ही उसने यह भी धमकी दी कि अगर पीड़ित लड़की ने उसके प्रस्ताव को मानने से इनकार किया तो वह उसके शरीर पर तेजाब फेंक देगा। इस मामले की सुनवाई जब ट्रायल कोर्ट में हुई तब कोर्ट ने सबूतों की सराहना करते हुए कहा था कि पीड़ित लड़की का दुुपट्टा खींचने और उससे शादी करने के लिए जोर देने का आरोपित का तरीका यौन हमले के इरादे से किया गया था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने यह भी माना कि आरोपित ने हाथ खींचकर यौन उत्पीड़न किया और शादी के लिए अवांछित और स्पष्ट यौन प्रस्ताव दिए। ट्रायल जज ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 8 और 12, भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354बी, 506 और 509 के तहत अपराध करने का दोषी ठहराया। 

वहीं सबूतों की समीक्षा करते हुए, कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की गवाही में असमानताएँ थीं। अदालत के मुताबिक शिकायतकर्ता के चाचा ने FIR में इस बात का जिक्र नहीं किया था कि आरोपित ने पीड़िता का हाथ खींचा। मगर 10 दिनों के बाद CRPC की धारा 164 के तहत दर्ज किए गए अपने बयान में पीड़िता ने पहली बार बताया कि आरोपित ने उसका हाथ खींचा था।

पीड़िता के बयान में विसंगतियाँ पाए जाने के बाद हाई कोर्ट ने इस केस को अलग प्रकार से देखा और कहा, “यहाँ तक ​​कि यह मानते हुए कि अपीलकर्ता ने ‘ओरना’ को खींचने और पीड़ित का हाथ खींचने का कथित कार्य किया है और उसे शादी करने का प्रस्ताव दिया है, ऐसा कार्य यौन उत्पीड़न या यौन उत्पीड़न की परिभाषा में नहीं आता है। इसीलिए वह भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के साथ धारा 354 ए के तहत अपराध करने के लिए उत्तरदायी हो सकता है।”

आगे कोर्ट ने कहा, “इसलिए अपीलकर्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354बी और 509 के तहत आरोप से दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने अपीलकर्ता को पॉक्सो अधिनियम की धारा 8 और 12 के तहत आरोप के लिए भी दोषी नहीं ठहराया।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक आदेश में कहा था कि किसी नाबालिग के ब्रेस्ट को बिना ‘स्किन टू स्किन’ कॉन्टैक्ट के छूना POCSO एक्ट के तहत यौन शोषण की श्रेणी में नहीं आएगा बल्कि IPC की धारा 354 के तहत छेड़छाड़ का अपराध माना जाएगा। हालाँकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्‍बे हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा था कि पॉक्‍सो एक्‍ट में स्‍किन टू स्किन टच जरूरी नहीं है।

370 बहुमत वाली सरकार ही बहाल कर सकती, मुझे नहीं लगता कॉन्ग्रेस को 300 सीटें मिलेगी: गुलाम नबी आजाद बोले- मैं झूठे वादे नहीं करूँगा

कॉन्ग्रेस के वरिष्‍ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर निराशाजनक दावा किया है। उनका कहना है, “अगर मौजूदा स्थिति बरकरार रहती है तो मुझे नहीं लगता है कि 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस 300 सीटें भी जीत पाएगी।” जम्‍मू-कश्‍मीर में अनुच्‍छेद 370 को फिर से बहाल करने के मसले पर विचार प्रकट करते हुए उन्होंने यह बात कही। 

आजाद ने कहा है जम्‍मू-कश्‍मीर में अनुच्‍छेद 370 को सिर्फ सुप्रीम कोर्ट या केंद्र सरकार ही फिर से बहाल कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला लंबित है। बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया है, इसलिए वह इसे बहाल नहीं करेगी। वे पुँछ जिले के कृष्णाघाटी इलाके में एक रैली को संबोधित कर रहे थे।

उन्‍होंने कहा, “मैं लोगों को खुश करने के लिए नहीं बोलूँगा। यह हमारे हाथ में नहीं है। मैं आपसे झूठे वादे करूँ, अनुच्छेद-370 की बात करूँ, ये सही नहीं है। अनुच्छेद 370 को लोकसभा में बहुमत वाली सरकार ही बहाल कर सकती है। सरकार बनाने के लिए 300 सांसद चाहिए। हमारे पास सरकार बनाने के लिए 300 सांसद कब होंगे? इसलिए, मैं अनुच्‍छेद 370 बहाल करने का वादा नहीं कर सकता कि 2024 में हमारे 300 सांसद आएँगे तो मैं इसको करूँगा। अल्लाह करे कि 300 आएँ लेकिन मुझे अभी तो यह नहीं दिख रहा है। इसलिए मैं कोई झूठा वादा नहीं करूँगा। इसलिए अनुच्‍छेद 370 के बारे में बात नहीं करूँगा।”

आजाद ने उमर अब्दुल्ला की उस टिप्पणी का भी खंडन किया जिसमें उनके बयान पर निराशा जताई गई थी। गुलाम नबी ने कहा, “मैं अकेले ही पिछले तीन सालों से संसद में इस बारे में बोल रहा हूँ। सरकार के साथ हमारी लड़ाई यह है कि जब अनुच्छेद 370 को निरस्त किया गया और राज्य का विभाजन किया गया, तो मैंने कहा कि केंद्र सरकार को संविधान में बदलाव लाने का अधिकार है, लेकिन यह जम्मू-कश्मीर की विधानसभा के माध्यम से आएगा, न कि संसद के माध्यम से आएगा।”

जम्‍मू कश्‍मीर के पुँछ और राजौरी के दौरे के दौरान आजाद ने हाल ही में कहा था क‍ि अनुच्‍छेद 370 पर बात करना अप्रासंगिक है। उनका कहना था कि उनकी मुख्‍य माँगें जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य का दर्जा बहाल करना और विधानसभा चुनाव जल्‍दी कराना है। उनके इस बयान की नेशनल कॉन्‍फ्रेंस के नेता उमर अब्‍दुल्‍ला ने निंदा की थी। उनका कहना था कि आजाद ने पहले ही हार मान ली है, जबकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए लंबित है।

गौरतलब है कि हाल ही में कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी की अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति से हटा दिया था। उन्होंने कठुआ में एक बड़ी रैली कर शक्ति-प्रदर्शन भी किया था। रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि वो वही करेंगे जो राज्य के लोग चाहते हैं। इसके बाद उनके खिलाफ यह एक्शन लिया गया था।