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रेप कर नाबालिग को प्रेग्नेंट करने वाले पादरी की सजा हाई कोर्ट ने आधी कर दी, केरल की पीड़िता ने 2017 में दिया था बच्चे को जन्म

केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार (1 दिसंबर, 2021) को कोट्टियूर रेप केस (Kottiyoor Rape case), जिसमें 2016 में एक नाबालिग के साथ बलात्कार और गर्भवती होने पर दोषी पाए गए सेंट सेबेस्टियन चर्च के पूर्व पादरी फादर रॉबिन वडक्कमचेरिल (Father Robin Vadakkamcheril) को दी गई सजा को कम कर दिया

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पॉक्सो एक्ट के तहत अपराधों के परीक्षण के बाद विशेष न्यायाधीश थालास्सेरी ने आईपीसी की धारा 376 (2) (एफ) और पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी पाए गए पादरी फादर रॉबिन वडक्कमचेरिल को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी और तीन लाख रुपए का जुर्माना लगाया था।

इस मामले में, अभियोजन पक्ष के अनुसार मई 2016 में एक दिन, पहले आरोपित पादरी ने नाबालिग पीड़िता को अपने शयनकक्ष में जाने के लिए कहा। इसके बाद पादरी ने उसका यौन शोषण और उसके साथ दुष्कर्म किया। नतीजतन, पीड़िता गर्भवती हो गई और 2 फरवरी, 2017 को एक बच्चे को जन्म दिया।

वहीं अब केरल हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति नारायण पिशारदी ने दोषी पादरी की सजा को कम करके 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने विशेष पॉक्सो अदालत द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ दोषी पादरी द्वारा दायर अपील पर यह आदेश जारी किया।

गौरतलब है कि इस मामले में जब बलात्कार पीड़िता द्वारा आरोपित पादरी से शादी करने की इच्छा व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था तो लोगों ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया था। वहीं पादरी रॉबिन वडक्कमचेरिल ने भी एक याचिका दायर कर पीड़िता से शादी करने के लिए सजा पर रोक लगाने की माँग की थी। हालाँकि, शीर्ष अदालत ने तब दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

अगली फिल्म के लिए सिर्फ ₹125 करोड़ लेंगे सलमान खान: कोरोना को देख दोस्त साजिद नाडियावाला की मानी सलाह

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘अंतिम: द फाइनल ट्रूथ’ बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा रही है। इसी बीच खबर है कि सलमान खान जनवरी 2021 से अपनी अपकमिंग फिल्म ‘कभी ईद कभी दीवाली’ की शूटिंग शुरू करने वाले हैं। बॉलीवुड इंडस्ट्री के महँगे सितारों में शामिल ‘बजरंगी भाईजान’ के अभिनेता ने इस फिल्म के लिए अपनी हाई फीस को कम कर दिया है।

बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के मुताबिक, सलमान खान जब साजिद नाडियाडवाला से डेट शेड्यूल पर बात करने के लिए पहुँचे थे, तब फिल्ममेकर ने अभिनेता से कोरोना काल में फिल्म मॉर्केट की कंडीशन को देखते हुए उनसे कम फीस लेने की गुजारिश की थी।

साजिद नाडियाडवाला से सहमत होते हुए सलमान खान बिना देर किए अपनी फीस घटाने पर राजी हो गए। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि सलमान खान 150 करोड़ रुपये की जगह अब सिर्फ 125 करोड़ रुपये फीस के साथ ‘कभी ईद कभी दीवाली’ में काम करने को तैयार हो गए हैं। अपने प्रोड्यूसर दोस्त साजिद नाडियाडवाला को सलमान खान ने अपनी फीस में 15 प्रतिशत से थोड़ा अधिक का डिस्काउंट दिया है।

दरअसल, सलमान ने यह फिल्म कोरोना काल से पहले साइन की थी। इसके लिए उन्होंने 150 करोड़ रुपये की फीस पर डील की थी। कोरोना महामारी आने की वजह से फिल्म की शूटिंग शुरू नहीं हो पाई थी। हालाँकि, फिल्म के रिलीज होने के बाद उन्हें मुनाफे का कुछ हिस्सा मिलेगा। यही वजह है कि सलमान खान का बैनर SKF (सलमान खान फिल्म्स) भी इस फिल्म से जुड़ा हुआ है।

बता दें कि पिछले साल साजिद नाडियाडवाला के लिए ‘सूर्यवंशी’ फिल्म के अभिनेता अक्षय कुमार ने भी फीस कम की थी। फिल्ममेकर ने अक्षय से ‘बच्चन पांडे’ के लिए फीस कम करने गुजारिश की थी। अक्षय इस फिल्म के लिए 117 करोड़ से 99 करोड़ रुपए में काम करने के लिए राजी हो गए थे। ‘बच्चन पांडे’ अगले साल मार्च में सिनेमाघरों में दस्तक देगी।

तिरंगा यात्रा निकालने वाले हिंदू छात्र नेता को भी AMU ने निकाला था, दानिश रहीम की गुहार के बाद लोगों को याद आए अजय सिंह

एक छात्र दानिश रहीम ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने के कारण उसे AMU प्रशासन द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। उससे डिग्री वापस माँगी जा रही है। उसने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। हालाँकि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्र के आरोपों को नकार दिया है। PHD स्कॉलर दानिश रहीम ने इस मामले में हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की है। उसका कहना है कि AMU ने नोटिस भेजकर लिंग्विस्टिक की डिग्री लौटाने और इसके बदले LAM में डिग्री लेने को कहा। उसका कहना ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उसने पीएम मोदी की तारीफ की थी। इस घटना ने लोगों को ठाकुर अजय सिंह की याद दिला दी है।

याद दिला दें कि इस साल अप्रैल महीने में उत्तर प्रदेश में स्थित ‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU)’ के हिन्दू छात्र नेता ठाकुर अजय सिंह को प्रतिबंधित कर दिया। इतना ही नहीं, उनके आगे की पढ़ाई करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। हिन्दू छात्रों पर हो रहे उत्पीड़न को लेकर मुखर रहे ठाकुर अजय सिंह को एक तरह से AMU में शिक्षा के अधिकार से आजीवन वंचित कर दिया गया। उन्हें 13 फरवरी, 2019 को ही निलंबित किया जा चुका था। AMU से सम्बद्ध अन्य संस्थानों में भी उनके लिए एंट्री बैन कर दी गई थी।

इसके बाद अंतिम निर्णय के लिए AMU ने अपनी अनुशासन समिति के पास रिपोर्ट भेजी थी। उन्हें समिति के समक्ष और कुलपति के दफ्तर में हाजिरी लगाने के लिए समन भी भेजा गया था। AMU का दावा है कि ठाकुर अजय सिंह अनुशासन समिति के समक्ष पेश हुए और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया गया। AMU द्वारा जारी किए गए पत्र में कहा गया है कि छात्र ठाकुर अजय सिंह ने कहा कि वो विश्वविद्यालय का सम्मान करते हैं और वो किसी को ठेस नहीं पहुँचाना चाहते थे।

उन्होंने कहा कि अगर कुछ दुर्भाग्यपूर्ण हुआ भी तो वो अंडरस्टैंडिंग की कमी के कारण हुआ। दावा किया गया कि अपने व्यवहार के लिए वो अफ़सोस जता रहे हैं। अब कुलपति ने आदेश जारी किया है कि ठाकुर अजय सिंह के LLM परीक्षा के परिणाम जल्द से जल्द जारी किए जाने चाहिए। साथ ही उन्हें विश्वविद्यालय में आगे की किसी प्रकार की भी पढ़ाई के लिए प्रतिबंधित किया जाता है। हालाँकि, उनके पास इस निर्णय के खिलाफ AMU की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के पास अपील करने के विकल्प खुले हैं।

बता दें कि फरवरी 2019 में AMU में हिन्दू छात्रों की पिटाई और उनकी गाड़ियाँ जलाने के आरोप लगे थे, जिसमें अजय सिंह भी घायल हो गए थे। AMU के छात्रों ने मीडिया के साथ भी हाथापाई की थी। इस मामले में FIR भी दर्ज हुई थी। रीढ़ की हड्डी और सिर में जख्म के कारण अजय सिंह को एक सप्ताह अस्पताल में गुजारने पड़े थे। इसके बाद हिन्दू छात्रों ने AIMIM के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन किया। आरोप लगाया गया कि उनके उकसाने पर ही हिन्दू छात्रों के खिलाफ हिंसा हुई।

ऑपइंडिया ने इस मामले में ठाकुर अजय सिंह से बात की। हिन्दू छात्र नेता ने बताया कि उन्होंने 2011 में AMU में दाखिला लिया था। उस दौरान वो लोग इतने सक्रिय नहीं थे। इंटरमीडिएट के बाद 2013 में उन्होंने स्नातक के कोइस के लिए दाखिला लिया। उन्होंने बताया कि इसके बाद वो छात्र राजनीति में सक्रिय हुए और हिन्दू छात्रों के हक़ के लिए आवाज़ उठाने लगे। उन्होंने 2017 में छात्र संघ अध्यक्ष पद के लिए चुनाव भी लड़ा, जहाँ वो सेकंड रनर अप रहे।

उन्हें ‘तिरंगा यात्रा’ निकालने के लिए भी विश्वविद्यालय की तरफ से ‘कारण बताओ नोटिस’ भेजा गया। दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने पर भी उन्हें ‘शो कॉज नोटिस’ जारी किया गया। उन्होंने कहा कि AMU में भाजपा नेताओं का विरोध होता था, यहाँ तक कि राष्ट्रपति का भी विरोध हुआ। ठाकुर अजय सिंह बताते हैं कि 2019 में हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी का यहाँ कार्यक्रम प्रस्तावित हुआ और देश की सभी इस्लामी पार्टियों को मिला कर एक मुस्लिम फ्रंट बनाने की कोशिश की गई।

बता दें कि ‘तिरंगा यात्रा’ निकालने के बाद AMU ने हिन्दू छात्रों कई गंभीर आरोप लगाए थे– बिना अनुमति यात्रा निकालना, यूनिवर्सिटी कैंपस में शैक्षणिक माहौल को ख़राब करना, क्लास में पढ़ रहे छात्रों को बहका कर रैली में ले जाना, यात्रा में असामाजिक तत्वों का शामिल होना, AMU को बदनाम करना, और छात्रों के बीच भय का माहौल पैदा करना। भाजपा सांसद सतीश गौतम ने तब केंद्र सरकार को पत्र लिख कर AMU प्रशासन पर कार्रवाई की भी माँग की थी।

वो बताते हैं, “हमने असदुद्दीन ओवैसी का विरोध किया। हमारे ऊपर गोलीबारी भी हुई। हमारी गाड़ियों को जला दिया गया। गाड़ियों के नंबर इंटरनेट पर सर्च कर-कर के 15 गाड़ियाँ जला दी गईं। उसी दौरान हमारा निलंबन कर दिया गया। मुझे अब आगे की पढ़ाई के लिए भी रोक दिया गया है। अब मैं विश्वविद्यालय से बाहर हूँ। मैं एक पारिवारिक समस्या में भी पड़ा हुआ था। अब मैं उच्च-न्यायालय का दरवाजा खटखटाऊँगा। पहले भी न्यायालय से मुझे मदद मिली थी।”

नोएडा SOG टीम के प्रभारी शावेज खान बर्खास्त, ₹20 लाख और क्रेटा कार लेकर ATM हैकरों को छोड़ा था, मिल चुका है पुलिस सम्मान

उत्तर प्रदेश के नोएडा में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) टीम के प्रभारी इंस्पेक्टर शावेज खान और कॉन्स्टेबल अमरीश यादव को एटीएम चोरों से रिश्वत में बड़ी रकम और कार लेकर छोड़ने के आरोप में पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह ने मंगलवार (30 नवंबर) को सेवा से बर्खास्त कर दिया। इसके साथ इनकी संपत्ति की जाँच का भी आदेश दिया गया है। खान को इसी साल 15 अगस्त को पुलिस सम्मान से सम्मानित किया गया था।

हाल ही में गाजियाबाद के इंदिरापुरम में एटीएम मशीन काटकर रुपये चुराने वाले गिरोह के सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि अगस्त में भी इन लोगों को पकड़ा गया था, लेकिन शावेज खान ने 20 लाख रुपये और क्रेटा कार लेकर आरोपियों को छोड़ दिया था। शावेज ने आरोपियों से 50 लाख रुपये की माँग की थी। आरोपियों ने बताया कि अभी उनके पास इतने पैसे नहीं थे, उसके बाद वे पैसे देने के लिए एसओजी के पुलिसकर्मियों को अपने घर लेकर गए। वहाँ शावेज खान एक नई क्रेटा कार खड़ी देखी, जिस पर नंबर भी नहीं पड़ा था। इसके बाद आरोपियों को धमकाकर कि यह कार ठगी के पैसे से खरीदी गई है, उसे अपने साथ लेते आए।

घटना की जानकारी सामने आने के बाद कमिश्नर ने मामले की जाँच डीसीपी (क्राइम) अभिषेक को सौंपा, जिसमें इन दोनों आरोपियों की संलिप्तता पाई गई। जाँच में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज भी बरामद की है। गाजियाबाद में एटीएम हैक कर रुपये निकालने के मामले में पुलिस ने शाहनवाज, सगीर, मोहम्मद उमर, जमीर शेख और मेहराज को गिरफ्तार किया था।

शावेज खान की संलिप्तता सामने आने के बाद कमिश्नर ने SOG टीम को भंग कर दिया है और इसके सदस्यों की भूमिका की भी जाँच की जा रही है। इस टीम में 11 पुलिसकर्मी शामिल थे। इन सभी को पुलिस लाइन हाजिर किया गया है। आरोपियों की संपत्ति की जाँच का जिम्मा अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) लव कुमार को सौंपी गई है। पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह ने बताया कि आय से अधिक पाए जाने पर आरोपियों की संपत्ति जब्त की जाएगी।

वहीं, पुलिस कमिश्नर के आदेश पर क्रेटा कार की तलाश की जा रही है। हालाँकि, उसके बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है। आशंका यह भी जताई जा रही है कि कार को किसी अवैध कबाड़ी के यहाँ ले जाकर उसे कटवा दी गई है।

मामला सामने आने के बाद शावेज खान ने अपना मोबाइल भी बंद कर लिया था। कई अधिकारियों ने उनसे बात करने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं हो पाई। इसके बाद शावेज खान पर शक और गहरा हो गया। जाँच के बाद आरोपों की पुष्टि होने के बाद खान की बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया गया। इतना ही नहीं, शावेज द्वारा की गई पहले की गई कार्रवाईयों की भी जाँच की जाएगी। इन घटनाओं को लेकर इनका नाम चर्चा में रहा है।

जिले में करीब तीन साल की तैनाती में शावेज कोतवाली फेज-टू सेक्टर-58 समेत अन्य कोतवाली के प्रभारी भी रहे हैं। नोएडा से पहले वह गाजियाबाद में तैनात थे। जिले में एसएसपी रूल से लेकर पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम तक शावेज महत्वपूर्ण भूमिका में रहे। शावेज को तेज-तर्रार पुलिस अधिकारी माना जाता था। इसी आधार पर उन्हें पुलिस सम्मान भी दिया गया था। गौरतलब है कि इससे पहले भी वर्ष 2018 में उगाही की रेट लिस्ट वायरल होने के बाद तत्कालीन एसएसपी डॉ. अजय पाल शर्मा ने पूरी एसओजी टीम को भंग कर दिया था।

ये भी आरोप है कि सितंबर 2020 में सुदर्शन न्यूज चैनल में मुस्लिमों द्वारा गए तोड़फोड़ के दौरान चैनल के प्रमुख सुरेश चव्हाणके ने सेक्टर-58 पुलिस स्टेशन से सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों की माँग की थी। चव्हाणके ने आरोप लगाया था कि तब सेक्टर-58 में SHO रहे शावेज खान ने उनकी माँग को अनसुना कर दिया था और किसी तरह की सुरक्षा नहीं उपलब्ध कराई थी।

सुदर्शन न्यूज ने ट्वीट कर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें दिख रहा है कुछ लोग सुदर्शन न्यूज के ऑफिस में पहुँचकर धमका रहे थे और कह रहे थे कि हमेशा हिंदू-मुस्लिम की न्यूज चलाते रहता है। गौरतलब है कि सुदर्शन न्यूज हिंदुओं की आवाज को मुखरता से उठाने के जाना जाता है। सुदर्शन न्यूज ने ट्वीट कर बताया था, “जबरन घुसने पर आमादा थे कट्टरपंथी सुदर्शन मुख्यालय में। कुछ संदिग्ध आस पास भी घूमते दिखे थे। 1 साल से SHO शावेज़ खान से किया जा रहा निवेदन पर उन्होंने नहीं दिया ध्यान। लगातार फोन व पत्रों से आ रही धमकियाँ।”

कंगना रनौत के सोशल मीडिया पोस्ट्स सेंसर हो, सारे FIR मुंबई ट्रांसफर करने का दें निर्देश: सुप्रीम कोर्ट में याचिका

अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इनका नाम सरदार चरणजीत सिंह चंद्रपाल है। चंद्रपाल ने अपनी याचिका में कंगना के सारे सोशल मीडिया पोस्ट सेंसर करने और उनके खिलाफ दर्ज सारे एफआईआर मुंबई के खार पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर करने की अपील की है। साथ ही कहा है कि इन मामलों में छह महीने में चार्जशीट दायर कर दो साल में ट्रायल पूरा करने का निर्देश दिया जाए।

याचिका किसान आंदोलन को खालिस्तान से जोड़ने वाले कंगना के पोस्ट के खिलाफ दाखिल की गई है। देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उनके सभी सोशल मीडिया पोस्ट को भविष्य में सेंसर करने की माँग की गई है। याचिकाकर्ता ने माँग की है कि कंगना के सभी सोशल मीडिया पोस्ट केंद्र और राज्य सरकारों की अनुमति मिलने पर ही प्रकाशित हों।

दरअसल, कृषि कानूनों की वापसी के ऐलान के बाद कंगना ने ने यह पोस्ट किया था। इसके बाद उनके खिलाफ कई मामले दर्ज कराए गए था। वहीं दिल्ली विधानसभा की एक समिति ने उन्हें पेश होने के लिए समन भेजा था।

याचिकाकर्ता का कहना है कि वह कंगना के इंस्टाग्राम पोस्ट से काफी आहत हुआ। इसमें कहा गया था, “खालिस्तानी आतंकवादी भले ही आज सरकार को दबा पा रहे हों, पर एक औरत को नहीं भूलना चाहिए। एक अकेली महिला प्रधानमंत्री ने इन लोगों को अपनी जूती के नीचे कुचला था। इस देश को चाहे उस महिला ने कितने भी कष्ट दिए हों, परंतु उसने इन मच्छरों को अपनी जान की बाज़ी लगाते हुए कुचला था, लेकिन देश के टुकड़े नहीं होने दिए। उस महिला की मृत्यु के दशकों बाद भी ये लोग आज भी उसके नाम से काँपते हैं। इनको वैसा ही गुरु चाहिए।”

याचिका मे कहा गया है, “इस तरह के बयान नस्लीय भेदभाव को बढ़ाते हैं। विभिन्न धर्मों के बीच नफरत पैदा करते हैं। सोशल मीडिया पर तीखी बहस का कारण बन सकते हैं और यहाँ तक ​​कि इससे दंगे भी हो सकते हैं। ऐसी चीजों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।”

मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में भक्तों से ठगी, ऑनलाइन बुकिंग ऐप के जरिए एजेंट ऐंठ रहे पैसा: ऐसे हुआ घोटाले का पर्दाफाश

कोविड-19 महामारी के बीच, स्कैमर्स लोगों की मेहनत की कमाई को लूटने के लिए अलग-अलग तरीके खोज रहे हैं। ऐसे ही एक घोटाले का पर्दाफाश मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में, महाराष्ट्र के डॉक्टर अमित थधानी (Amit Thadhani) ने किया है। एक ट्वीट थ्रेड में, थधानी ने बताया कि कैसे मंदिर के बाहर खड़े घोटालेबाज मंदिर में दर्शन के लिए लोगों से प्रति व्यक्ति 300 रुपए तक चार्ज कर रहे हैं, जो कि मुफ्त में होना चाहिए था।

कैसे हो रहा है घोटाला?

सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट ने हाल ही में एक मोबाइल ऐप लॉन्च किया है जिसके माध्यम से भक्त दर्शन के लिए बुकिंग कर सकते हैं। इसका उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना है ताकि कोविड के प्रसार की संभावना को कम किया जा सके। यदि कोई दर्शन करना चाहता है, तो पूर्व ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “सभी सरकार द्वारा नियंत्रित मंदिरों की तरह, यहाँ ऑनलाइन दर्शन में भी एक घोटाला चल रहा है।”

थधानी ने कहा कि वह कुछ रिश्तेदारों के साथ मंदिर गए थे, जहाँ एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया, जो फूलों की एक दुकान के बाहर खड़ा था। उस व्यक्ति ने उन्हें बताया कि यह दर्शन केवल पूर्व ऑनलाइन बुकिंग से ही संभव है। उसने दावा किया कि वह पैसे लेकर तुरंत उनके लिए ऑनलाइन पास की व्यवस्था कर सकता है।

थधानी को पहले तो उस पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जब उन्होंने ऐप डाउनलोड किया और एक नई बनाई गई आईडी के साथ लॉग इन किया, तो पता चला कि सभी स्लॉट बुक हो गए हैं। घोटालेबाज ने उनसे कहा कि वह प्रति व्यक्ति 300 रुपए के हिसाब से दर्शन की व्यवस्था कर सकता है। थधानी के साथ दस लोगों का समूह था। उसने आगे कहा कि उनके लिए ‘बुकिंग’ करने के लिए उसे पाँच मोबाइल फोन की आवश्यकता होगी क्योंकि ऐप में प्रति फोन केवल दो लोगों की बुकिंग अनुमति है।

उन्होंने और समूह के अन्य चार लोगों ने उन्हें अपने मोबाइल फोन दिए। तभी स्कैमर, अपनी साइडकिक के साथ, हरकत में आ गया, और कुछ ही मिनटों में उन सभी के लिए बुकिंग कन्फर्म हो गई।

अपनी बात की पुष्टि के लिए उन्होंने अपने डिवाइस में व्यक्ति का लॉग इन रखा और थधानी को इस बात का अंदाजा लग गया कि वे कैसे घोटाले को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “ये लोग विभिन्न फर्जी आईडी के जरिए सभी उपलब्ध स्लॉट को पहले ही ब्लॉक कर देते हैं। इसलिए सच्चे भक्तों के लिए कोई स्लॉट उपलब्ध नहीं है।”

उन्होंने अपने ट्वीट थ्रेड में फेक एकाउंट के स्क्रीनशॉट पोस्ट करते हुए कहा, “यह वह फेक एकाउंट है जिनके माध्यम से उपलब्ध बुकिंग स्लॉट को ब्लॉक किया गया था (जाहिर है उस व्यक्ति का नाम वास्तव में सिद्धिविनायक नहीं है)। तो याद रखना दोस्तों, अगर आपको सिद्धिविनायक के दर्शन के लिए जगह नहीं मिल रही है, तो संभावना है कि मंदिर के बाहर के स्थानीय दलालों ने पहले ही उन सभी को ब्लॉक कर दिया है।”

ऑपइंडिया ने अब तक क्या पाया

हमने ऐप डाउनलोड किया और जाँच की कि क्या दिन के लिए कोई स्लॉट खुला है। ऐप ने दिखाया कि 1 दिसंबर और 2 दिसंबर के लिए सभी स्लॉट बुक किए गए थे। वहीं 3 दिसंबर के लिए, बुकिंग अभी तक नहीं खोली गई थी।

स्क्रीनशॉट्स में साफ दिख रहा है कि स्लॉट्स उपलब्ध नहीं है।

दिलचस्प बात यह है कि थधानी ने अपने थ्रेड में जो कहा वह हमारे द्वारा ऐप की जाँच में भी सही पाया गया। ऐसी कई दूसरे रिव्यू में भी बताया गया है कि उन्हें मंदिर के बाहर वे घोटालेबाज मिले जो स्लॉट खुलते ही सभी जगह बुक कर लेते हैं और भक्तों से दर्शन के लिए मनमाना शुल्क लेते हैं।

सिद्धिविनायक ऐप की समीक्षा में इसी तरह की शिकायतों की भरमार है। स्रोत: Google Play Store पर सिद्धिविनायक ऐप पेज

ऑपइंडिया ने मंदिर के कार्यालय से भी फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन रिपोर्ट पब्लिश होने के समय तक हमारा मंदिर कार्यालय से कोई संपर्क नहीं हो पाया था।

राजेश यादव बन अब्दुल मोमिन ने फँसाया, भगाकर ले गया मुंबई; जबरन कबूल करवाया इस्लाम: 3 निकाह पहले ही कर चुका था

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से लव जिहाद की घटना सामने आई है। यहाँ के मौदहा कस्बे की रहने वाली युवती को करीब 4 साल पहले राजेश यादव बनकर अब्दुल मोबिन ने अपने जाल में फँसाया। फिर उसे अपने साथ भगा ले गया। बाद में जबरन धर्मान्तरण करवाकर उससे निकाह किया। मामले में पीड़िता की शिकायत पर आरोपित के खिलाफ धर्मान्तरण कानून समेत अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

घटना का खुलासा मंगलवार (23 नवंबर 2021) को उस वक्त हुआ जब बजरंग दल के नेता आशीष सिंह के साथ पीड़िता के परिजन जिले के पुलिस अधीक्षक के पास शिकायत लेकर पहुँचे। मामले की गंभीरता को देखते हुए जाँच के आदेश दिए गए हैं। पुलिस को दी शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि आरोपित ने 4 साल पहले फोन के जरिए उससे दोस्ती की थी। उस दौरान उसने खुद को राजेश यादव बताया। लड़की को लगा कि वो भी हिंदू ही है और इसी झाँसे में आकर वो आरोपित के साथ रिश्ते में आगे बढ़ती गई।

आरोपित को जब लगा कि लड़की उसके जाल में फँस गई है तो उसे शादी का झाँसा देकर घर से भगा ले गया। पहले उसे बलरामपुर ले गया। फिर मुंबई लेकर गया जहाँ युवती से जबरन इस्लाम कबूल करवाकर निकाह किया गया। निकाह के बाद युवती का नाम बदलकर आयशा मोबिन कर दिया गया। वह उसके साथ मारपीट भी करता था। समय बीता और आरोपित से युवती को एक बच्चा भी हुआ। फिर एक दिन अचानक उसे पता चला कि अब्दुल मोबिन पहले से शादीशुदा है। वह पहले भी तीन लड़कियों से भी निकाह कर चुका था।

बाद में किसी तरह से उसके चंगुल से बचकर भागी पीड़िता अपने मायके पहुँची। एसपी के आदेश पर मोदहा पुलिस स्टेशन में आरोपित के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 376, 461 और पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित नाबालिग करीब 4 साल पहले 2018 में अपने घर से लापता हो गई थी। इस मामले में उसके परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस उसे तलाश नहीं कर पाई थी।

‘बांग्लादेश सीमा पर पशु तस्करी में 5 गुना कमी’: BSF ने माना – बॉर्डर के गाँवों में डेमोग्राफिक असंतुलन से पैदा हुई समस्या

सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने जानकारी दी है कि असम के गुवाहाटी फ्रंटियर क्षेत्र में पशु तस्करी में 5 गुना कमी आई है। बुधवार (1 दिसंबर, 2021) को सुरक्षा बल के 57वें ‘रेजिंग डे’ के मौके पर इंस्पेक्टर जनरल संजय सिंह गहलोत ने कहा कि पशु तस्करी को नियंत्रित करने में में पिछले एक साल में काफी प्रभावी सफलता मिली है। खासकर, बांग्लादेश से लगने वाली उत्तर-पूर्वी राज्य असम की सीमा पर पशु तस्करी में भारी कमी आई है। BSF ने बताया कि असम पुलिस की मदद से ये संभव हुआ है।

बता दें कि गुवाहाटी फ्रंटियर की स्थापना 1 अक्टूबर, 2011 को हुआ था। इसके बाद इसे 509 किलोमीटर की बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी इसे सौंपी गई, जो असम और पश्चिम बंगाल से लगती है। इसके पास 11 BSF बटालियन और 1 वॉटर विंग भी है। इसके अलावा इसके पास 80 विभिन्न प्रकार के वॉटरक्राफ्ट्स हैं। इन्हें सेक्टर मुख्यालयों के 142 BOPs के अंतर्गत तैनात किया गया है। 1 जनवरी, 2021 से लेकर अब तक इस सीमा पर 10.67 करोड़ रुपए की अवैध वस्तुएँ जब्त की गई हैं।

इस दौरान पशुओं के 7820 पशुओं को तस्करी से बचाया गया। साथ ही ‘Phensydyl’ की 25,600 बोतलें, 2936 किलो गाँजा, 48,398 ‘Yaba’ टेबलेट्स, और 3.98 लाख रुपयों की नकली भारतीय मुद्रा भी जब्त की गई। जानने लायक बात ये भी है कि BSF के गुवाहाटी फ्रंटियर ने 124 भारतीय और 110 बांग्लादेशी तस्करों को गिरफ्तार करने में कामयाबी पाई। पकड़े गए बांग्लादेशी तस्करों की संख्या कम इसीलिए है क्योंकि वो अक्सर सीमा को पार नहीं करते और अपने भारतीय साथियों के जरिए अपराध को अंजाम देते हैं।

बांग्लादेश और भारत की सीमा के दोनों तरफ सामाजिक-राजनीतिक-धार्मिक परिदृश्य अलग-अलग हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर दोनों तरफ अलग-अलग माहौल है। साथ ही पश्चिम बंगाल का कूच बिहार, असम में डुबरी और सलमारा मांकचर जैसे इलाकों की भौगोलिक परिस्थितियाँ भी अलग-अलग हैं। हालाँकि, ब्रह्मपुत्र नदी और पेचीदा माहौल के बावजूद BSF ने पशु तस्करी को कम करने में कामयाबी पाई है। ऐसे समय में जब विपक्षी दल सवाल पूछ रहे हैं कि BSF के अधिकार क्षेत्र को सीमा से 50 किलोमीटर अंदर तक क्यों बढ़ाया गया, ये आँकड़े आईने की तरह हैं।

BSF के डायरेक्टर जनरल पंकज कुमार सिंह ने जानकारी दी है कि पश्चिम बंगाल और असम में डेमोग्राफिक बैलेंस सही नहीं है, इसीलिए ये समस्या आ रही है। उन्होंने कहा कि कई कारणों से इन सीमावर्ती क्षेत्रों में डेमोग्राफिक बदलाव हुए हैं और इस कारण उन क्षेत्रों में अक्सर अशांति बनी रहती है। विरोध प्रदर्शन होते हैं और दंगे होते हैं। उन्होंने कहा कि BSF को 15 की जगह 50 किलोमीटर का अधिकार क्षेत्र देने से सरकार को लगा कि घुसपैठ में कमी आएगी।

उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गाँवों में डेमोग्राफिक बदलाव हुए हैं, ऐसा BSF के सर्वे में भी पता चला है। उन्होंने कहा कि BSF के सामानांतर बल की तरह काम नहीं कर रही है, बल्कि जाँच करने और चार्जशीट दायर करने का अधिकार पुलिस के पास बना रहेगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय पुलिस का इससे हाथ मजबूत ही होगा। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान के शासन को देखते हुए भी सीमा पर सुरक्षा बढ़ाई गई है। हालाँकि, विपक्षी दल लगातार इस कदम का विरोध कर रहे हैं।

रामलीला में काम करने वाले दलित युवक का गुप्तांग काटा, नरगिस-जोया गिरफ्तार: मिला था लहूलुहान, 6 आरोपित

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में गुप्तांग काटकर एक दलित युवक की हत्या करने की कोशिश के मामले में पुलिस ने दो किन्नर को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान नरगिस उर्फ फुरकान और जोया उर्फ तालिम के तौर पर हुई है। मामले में मुन्ना किन्नर सहित कुल 6 आरोपित हैं।

यह घटना 23 नवंबर 2021 की है। बताया जाता है कि पीड़ित युवक को जब उसके पिता खोजते हुए मुन्ना किन्नर के घर पहुँचे तो पाया कि उसका गुप्तांग काट दिया गया है। वह लहूलुहान था। विरोध करने पर हत्या की धमकी देते हुए आरोपित वहाँ से फरार हो गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित के परिजनों ने मामले की शिकायत कोतवाली में की। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पुराना कस्बा के कुरैशियान मोहल्ले की रहने वाली नरगिस उर्फ फुरकान और देशराज मोहल्ले की रहने वाली जोया उर्फ तामिल को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपितों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 326, 307, 506 और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2) 5 के तहत कार्रवाई की गई है।

पीड़ित पिता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि मंगलवार (23 नवंबर 2021) की रात 10 बजे अपने मित्र के साथ वे बेटे को ढूँढते हुए किन्नर मुन्ना के घर गए थे। वहाँ उन्होंने देखा कि मुन्ना के अलावा नरगिस उर्फ फुरकान, जोया उर्फ तालिम, नासिर तथा दो अन्य लोगों ने जानलेवा हमला कर उनके बेटे का गुप्तांग काट दिया था। जब उन्होंने रोकने की कोशिश की तो आरोपितों ने उन्हें भी हत्या की धमकी दी।

शिकायत के बाद पुलिस पीड़ित को अस्पताल लेकर गई। लेकिन उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे रेफर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया। कोतवाली प्रभारी तपेश्वर सिंह का कहना है कि अन्य आरोपितों को पकड़ने की कोशिशें की जा रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार युवक रामलीला में काम करता था। घटना की सूचना मिलने पर श्री रघुवर रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों ने भी थाने जाकर विरोध जताया था।पदाधिकारी संजय रुहेला, विपिन रुहेला और अजय शर्मा समेत कई लोगों ने थाने पहुँचकर इसका घटना का विरोध किया।

छात्र नेता अनिमेष की मॉब लिंचिंग, 48 घंटे के भीतर असम पुलिस की गाड़ी से टकरा कर मारा गया काला गुंडा (Kola Lora)

असम के जोरहट में छात्र नेता अनिमेष भुइयाँ की पीट-पीट कर हत्या (मॉब लिंचिंग) मामले का मुख्य आरोपित नीरज दास (उर्फ काला गुंडा, Kala Gunda उर्फ Kola Lora) पुलिस की गाड़ी से भागने के चक्कर में दूसरी पुलिस गाड़ी से टकरा गया। इस टक्कर में वो घायल हुआ। उसे जोरहट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसे बुधवार (1 दिसंबर 2021) मृत घोषित किया गया।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अनिमेष भुइयाँ की मॉब लिंचिंग का आरोपित नीरज दास (उर्फ काला गुंडा, Kala Gunda उर्फ Kola Lora) पुलिस जाँच अधिकारी को गुमराह कर रहा था। वो उन्हें ड्रग्स लोकेशन और उसकी रिकवरी के बहाने बरगला रहा था। इसी दौरान वो चलती पुलिस जीप से कूद गया और पीछे से आ रही एक अन्य पुलिस कार से टकरा कर गंभीर रूप से घायल हो गया।

जोरहट में सोमवार (29 नवंबर 2021) को ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के नेता अनिमेष भुइयाँ की दिन-दहाड़े मॉब लिंचिंग की गई थी। इस घटना के बाद पूरे राज्य में सनसनी फैल गई थी। लोग अनिमेष की मौत के लिए न्याय की माँग कर रहे थे।

ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के नेता अनिमेष भुइयाँ की मॉब लिंचिंग के वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे 50-60 लोगों की भीड़ ने 3 लोगों को घेर कर मारा। इनमें से अनिमेष की मौत हो गई जबकि अन्य दो गंभीर रूप से घायल हैं।

आपको बता दें कि इस मामले में छात्र संगठनों ने तब तक अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखने की बात कही थी, जब तक अपराधियों को सजा नहीं दी जाती। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पुलिस को मामले की त्वरित सुनवाई और एक महीने के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया था। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने इसके अलावे विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) जीपी सिंह को व्यक्तिगत रूप से मामले की निगरानी और हमलावरों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश भी दिए थे।

विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) जीपी सिंह ने 1 दिसंबर 2021 की रात 2 बज कर 29 मिनट पर एक ट्वीट भी किया है। हालाँकि इस ट्वीट में किसी का नाम नहीं है लेकिन स्थानीय मीडिया इस ट्वीट को नीरज दास की मौत से जोड़ कर देख रहे हैं।

असम पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य आरोपित नीरज दास (उर्फ काला गुंडा, Kala Gunda उर्फ Kola Lora) सहित 13 लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस के चंगुल से भागने के दौरान ही नीरज पुलिस की दूसरी गाड़ी की चपेट में आकर मारा गया।