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‘PM मोदी की तारीफ की इसलिए वापस माँगी जा रही PhD की डिग्री’: AMU के छात्र दानिश रहीम ने लगाई गुहार, यूनिवर्सिटी ने नकारा

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) फिर से विवादों में है। छात्र दानिश रहीम ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने के कारण उसे प्रताड़ित किया जा रहा है। उससे डिग्री वापस माँगी जा रही है। उसने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। हालाँकि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्र के आरोपों को नकार दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक PhD स्कॉलर दानिश रहीम ने इस मामले में हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की है। उसका कहना है कि AMU ने नोटिस भेजकर लिंग्विस्टिक की डिग्री लौटाने और इसके बदले LAM में डिग्री लेने को कहा। उसका कहना ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उसने पीएम मोदी की तारीफ की थी।

दानिश का कहना है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना के 100 साल पूरे होने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 22 दिसंबर 2020 को संबोधित किया था। इसके बाद मीडिया से बात करने हुए उसने PM मोदी की तारीफ की थी। इसी को लेकर अब लिंग्विस्टिक विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद जहाँगीर उसे प्रताड़ित कर रहे हैं।

दानिश ने कहा है कि उसने एएमयू से भाषा विज्ञान में PHD की है। 9 मार्च 2021 को उसे डिग्री दी गई थी। उसकी सीनियर डॉ. मारिया नईम को पिछले साल नवंबर में PhD की डिग्री मिली थी। लेकिन, अब करीब 6 महीने के बाद डिग्री लौटाने को कहा जा रहा है। उसका आरोप है कि इसी साल 8 फरवरी के आसपास प्रोफेसर मोहम्मद जहाँगीर ने उसे बुलाकर कहा था कि आप एक स्टूडेंट हैं और आपको किसी पार्टी के पक्ष में बात नहीं करनी चाहिए। आपकी भाषा और इंटरव्यू से आप किसी पार्टी के आदमी लगते हो।

यूनिवर्सिटी का जवाब

दानिश रहीम के मामले में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता सैफी किदवई ने आरोपों को पूरी तरह से निराधार करार दिया है। प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने (दानिश) भाषा विज्ञान विभाग के एलएएम (विज्ञापन और मार्केटिंग की भाषा) पाठ्यक्रम में एमए और PhD किया है, जो भाषा विज्ञान में PhD की डिग्री भी प्रदान करता है। चूँकि उन्होंने LAM में MA किया है, इसलिए उन्हें LAM में PhD की डिग्री प्राप्त करनी चाहिए।

प्रवक्ता का कहना है कि दानिश को गलती से भाषा विज्ञान में PhD की डिग्री दे दी गई है। अब गलती को सुधारा जाएगा। इस घटना का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।

‘बुआ बबुआ’ पर अखिलेश यादव का कार्टून: फेसबुक वाले जुकरबर्ग सहित 49 पर FIR, लाइक करने वालों को भी नहीं छोड़ा

सपा के एक नेता ने फेसबुक पेज ‘बुआ बबुआ’ पर कार्रवाई को लेकर मामला दर्ज कराया है। आरोप है कि इस पेज पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ कार्टून और वीडियो पोस्ट कर अभद्र टिप्पणी की जा रही है। कन्नौज में एफआईआर दर्ज कराई गई। रिपोर्टों के अनुसार इसमें फेसबुक के सह संस्थापक मार्क जुकरबर्ग सहित 49 लोगों के नाम हैं। इनमें पेज संचालक से लेकर उस कार्टून को लाइक, कमेंट, शेयर करने वाले भी आरोपित बनाए गए हैं जिसको लेकर सपा नेता को आपत्ति है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस पेज के खिलाफ कन्नौज के सराहती गाँव के रहने वाले सपा नेता व अधिवक्ता अमित यादव ने कोर्ट का रुख किया था। जिसके बाद कन्नौज जिला अदालत के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी धर्मवीर सिंह ने सोमवार (29 नवंबर 2021) को पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। इस मामले में ठठिया थाने में धारा 156 के तहत शिकायत दर्ज की गई है।

शिकायतकर्ता अमित कुमार का आरोप है कि फेसबुक पर बुआ बबुआ नाम से फेसबुक पेज चल रहा है। इस पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर अभद्र टिप्पणी की जा रही है और कार्टून पोस्ट किए जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में अखिलेश यादव का एक कार्टून इस पेज पर पोस्ट किया गया था। ठठिया थाने के प्रभारी नारायण वाजपेयी का कहना है कि अदालत के आदेश के बाद मामला दर्ज कर जाँच की जा रही है।

आरोप है कि बुआ बबुआ पर विपक्षी नेताओं के खिलाफ सामग्री पोस्ट किए जा रहे, साभार: फेसबुक

शिकायतकर्ता अमित कुमार ने आरोप लगाया है कि इसी साल 25 मई को एक रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से उन्होंने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक को आवेदन भेजा था। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया। इस पेज को बंद कराने के लिए कैलिफोर्निया स्थित फेसबुक के मुख्यालय में भी रिपोर्ट भेजी गई है। 

कभी ज़िंदा जलाया, कभी काट कर टाँगा: ₹60000 करोड़ का नुकसान, हत्या-बलात्कार और हिंसा – ये सब देश को देकर जाएँगे ‘किसान’

दिल्ली की सीमाओं पर पिछले एक साल से चल रहे ‘किसान आंदोलन’ से देश को खासा नुकसान हुआ है। जहाँ एक तरफ लाखों लोगों को रोजाना दफ्तर जाने और बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी हुई, वहीं दिल्ली की सीमाओं पर स्थित गाँव वालों को भी कम परेशानी नहीं हुई। इस ‘किसान आंदोलन’ में हिंसा, बलात्कार और हत्या जैसी घटनाएँ हुईं। 26 जनवरी, 2021 को दिल्ली में हुई हिंसा को कौन भूल सकता है? अब जब इसे खत्म किए जाने की बातें चल रही हैं, आइए जानते हैं कि कैसे इस तथाकथित आंदोलन में इस तरह की क्या-क्या हरकतें हुईं।

चर्चा चल रही है कि ‘किसान आंदोलन’ अब ख़त्म हो सकता है और ‘संयुक्त किसान मोर्चा (SKM)’ जल्द ही इसका ऐलान कर सकता है। कुल 32 किसान संगठनों की एक बैठक भी हुई है, जिसमें तय किया गया कि 1 दिसंबर, 2021 को अंतिम फैसला किया जाएगा। पंजाब के किसानों का कहना है कि हम जीत हासिल कर चुके हैं और हमारे पास अब कोई बहाना नहीं है। पराली और बिजली एक्ट से किसानों को निकाले जाने पर भी वो खुश हैं। वहीं अब मृत किसानों के आँकड़े देकर मुआवजे की भी माँग की जा रही है।

जबकि इसके उलट राकेश टिकैत कहते आए हैं कि उनके पास तो 700 माँगों की सूची है और उनमें से सभी पूरे नहीं होंगे, तब तक आंदोलन ख़त्म नहीं होगा। कोई नेता कुछ बोल रहा है, कोई कुछ। अलग-अलग जगहों पर राकेश टिकैत अलग-अलग बयान दे रहे हैं। इसमें खालिस्तानी गुट अलग है, जाट कार्ड खेलने वाला समूह अलग है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही माफ़ी माँग ली हो, लेकिन किसान नेता नहीं चाहते कि उनके समर्थक किसानों के मन में भाजपा के लिए घृणा कम हो।

किसान आंदोलन के कारण देश को 60,000 करोड़ रुपए का घाटा

‘किसान आंदोलन’ के कारण देश को 60,000 करोड़ रुपए का घाटा सहना पड़ा। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने एक आँकड़े में बताया है कि 12 महीनों में देश को इसके कारण इतना नुकसान हुआ। व्यापारियों के संगठन ने कहा है कि ये घाटा मुख्यतः इस आंदोलन के शुरुआती स्टेज में हुई। यानी, नवंबर-दिसंबर 2020 और जनवरी 2021 में ये घाटा हुआ। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही में काफी दिक्कतें आईं।

हालाँकि, व्यापारिक संगठनों के प्रयास ने जब प्रयास किया तो इन रास्तों से सामान की आवाजाही शुरू कर दी गई। लेकिन, तब भी इसमें काफी दिक्कतें आ रही थीं। सप्लाई चेन को ठीक किया गया। साथ ही सरकारों ने भी दिल्ली के रास्ते वस्तुओं को ढोने वाले ट्रक्स को भी अन्य वैकल्पिक रूट उपलब्ध कराए गए। दिल्ली में रोज 50,000 ट्रक्स सामान लेकर आते हैं। इस हिसाब से सोचा जा सकता है कि किस कदर देश को नुकसान हुआ है, जिसका आकलन करना भी मुश्किल है।

‘किसान आंदोलन’ के सहारे परवान चढ़ा खालिस्तानी एजेंडा

अक्टूबर 2021 में

‘सिख्स फॉर जस्टिस’ नाम की कट्टरवादी सिख संस्था ने तथाकथित खालिस्तान का नक्शा जारी किया। उसने कहा हैथाकि भारत को काट कर इस क्षेत्र को सिखों का अपना मुल्क बनाया जाएगा। अक्टूबर 2021 के अंत में इसके लिए उसने लंदन में रेफेरेंडम आयोजित करने का भी निर्णय ले लिया। ‘क्वीन एलिजाबेथ सेंटर’ में ये भारत विरोधी कार्यक्रम आयोजित किया गया। जब ये आंदोलन शुरू हुआ, तभी से इसमें खालिस्तानियों की हिस्सेदारी सामने आने लगी थी और भिंडरवाला के पोस्टर्स इसमें नजर आने लगे थे।

आज के माहौल की बात करें तो अब भी प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस (SFJ)’ एक बार फिर से इसका फायदा उठाने की फिराक में है और अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए वह लगातार युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रहा है। इसमें गुरुपवंत सिंह पन्नू को यह कहते सुना जा सकता है कि देश को आजाद कराने के लिए भगत सिंह ने पार्लियामेंट में बम फेंका था। वो कहता है कि ट्रैक्टर को हथियार बनाकर तुम 29 नवंबर को खालिस्तान के केसरी झंडे को भारत की संसद पर चढ़ा दो।

सबसे बड़ी बात तो ये है कि इस आंदोलन को जिस तरह से कृषि के नाम पर सिख कट्टरवाद और खालिस्तानी अलगाववाद से जोड़ा गया, वो एक बहुत बड़ी साजिश थी। अचानक से लंदन में सिखों के अलग मुल्क के ली रेफरेंडम होने लगा, प्रतिबंधित संगठन SFJ का पन्नू वीडियोज जारी करने लगा, कनाडा के नेताओं ने इस आंदोलन का समर्थन शुरू कर दिया और ISI ने पंजाब में इस आंदोलन को हवा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी – इस बात ने ख़ुफ़िया एजेंसियों तक के कान खड़े कर दिए थे।

पन्नू ने 4 अक्टूबर को एक वीडियो और एक पत्र जारी किया था। इसमें उसने सिखों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ 9 अक्टूबर को ड्रोन और ट्रैक्टर का इस्तेमाल करने के लिए उकसाया था। अपने बयान में पन्नू ने कहा था, “आज यूपी के लखीमपुर में चार किसानों की हत्या कर दी गई। किसानों के विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं। अब खालिस्तान ही एकमात्र रास्ता है। किसान हल खालिस्तान।” अब आप समझ सकते हैं कि किस कदर ये सिख कट्टरवाद इस आंदोलन में घुसा रहा।

सिख फॉर जस्टिस ने भारतीय मूल वाले सभी 18 वर्ष के ऊपर वाले लोगों से वोट देने को कहा था। ये वोटिंग वेस्टमिंनस्टर के एलिजाबेथ 2 सेंटर में हुई। इस दौरान लोगों ने न केवल भारत विरोधी नारे लगाए, खालिस्तान जिंदाबाद कहा बल्कि इन लोगों के हाथों मे खालिस्तानी झंडे भी जगह-जगह दिखाई दिए। रिपोर्ट बताती है कि बैलट पेपर पर लिखा था कि क्या भारत शासित पंजाब को एक स्वतंत्र देश बनना चाहिए? संगठन के संस्थापक खालिस्तानी पन्नू ने कहा था कि 30 हजार सिखों ने जनमत संग्रह पर अपना वोट दिया।

ये कैसा आंदोलन, जहाँ बलात्कार और हत्याएँ भी

अक्टूबर 2021 में आपने भी ये खबर देखी होगी, जब लखबीर सिंह नाम के एक दलित युवक की आदिग्रन्थ की बेअदबी के आरोप में हाथ-पाँव काट कर हत्या कर दी गई थी। लखबीर के घर वालों ने भी कहा था कि वह सिंघु बॉर्डर तक जाने में सक्षम ही नहीं था। कुछ अज्ञात लोग उसे वहाँ लेकर गए थे। परिवार ने इन आरोपों पर आपत्ति जताई थी कि लखबीर ने धर्मग्रंथ का अपमान किया था। उनके अनुसार लखबीर एक धार्मिक प्रवृत्ति का इंसान था। वो किसी धर्म का अपमान कर ही नहीं सकता था।

आरोपित निहंग सरबजीत मात्र 6 वर्ष की ही उम्र में अपने मामा के साथ उनके गाँव गुरुदासपुर स्थित खुजाला में रहने लगा था। सरबजीत के पिता की उम्र 75 वर्ष और माँ की आयु 70 वर्ष है। ये दोनों बगल के गाँव विठवां में रहते हैं। कक्षा 10 पास कर सरबजीत दुबई चला गया था। वहाँ वो लगभग 5 वर्ष रहा। इस मामले में कई निहंगों की गिरफ़्तारी भी हुई, लेकिन सिख कट्टरपंथियों ने बार-बार कहा कि वो इस हत्याकांड को लेकर फख्र महसूस कर रहे हैं और उन्हें इसका कोई मलाल नहीं।

जैसा कि हम जानते हैं, केंद्र सरकार के कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर ‘किसानों’ का प्रदर्शन एक साल तक चला। इसी में शामिल होने के लिए बंगाल से आई 25 वर्षीय युवती के साथ टीकरी बॉर्डर पर गैंगरेप का मामला सामने आया। इस मामले में पुलिस ने पीड़िता के पिता की शिकायत पर 2 महिला आरोपितों समेत 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। पीड़िता के साथ हुई घटना के बारे में आंदोलन से जुड़े बहुत से लोगों को पता चल चुका था, मगर इस मामले में कार्रवाई की पहल नहीं की गई। उसने पीड़िता की आपबीती का वीडियो भी बनाया था।

अब एक और घटना को याद कीजिए। जगदीश चंद्र की तीन संतानों में 42 साल का मुकेश सबसे बड़ा था। लॉकडाउन में काम छूट गया था तो ज्यादातर समय गाँव में ही रहता था। इसी दौरान अपने गाँव से सटे बाइपास पर कब्जा जमाए कुछ प्रदर्शनकारियों के संपर्क में वह आया था। 16 जून की रात करीब 9 बजे परिजनों को उसे जिंदा जलाने की खबर मिली थी। मुकेश की माँ शकुंतला ने ऑपइंडिया को बताया था कि वह घर में खाना बनाने के लिए कहकर निकला था। बाद में उन्हें पता चला कि उनके बेटे को शराब पिलाकर कुछ लोगों ने जिंदा जला दिया।

किसान आंदोलन, इसमें कुछ भी ऐसा नहीं था जिससे इसे आंदोलन कहा जाए

इन घटनाओं को देख कर साफ़ है कि ‘किसान आंदोलन’ को कभी जाट, कभी सिख और कभी किसानों की प्राइड से जोड़ कर इन सभी को भाजपा के खिलाफ भड़काने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध इन लोगों के मन में घृणा भरने के प्रयास किए गए। कभी राकेश टिकैत ने भड़काऊ बयान दिया, कभी गुरनाम सिंह चढूनी कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ करार के आरोपों में फँसे तो कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपशब्दों का प्रयोग कर के उन्हें हत्या तक की धमकी दी गई।

हालाँकि, अभी देखना ये है कि ‘किसान आंदोलन’ ख़त्म होता भी है या नहीं पूरी तरह। अब इसमें भी अलग-अलग गुट हो गए हैं। हर गुट के अलग-अलग हित हैं और उन्हें साधने के लिए भी वो अलग-अलग रुख अख्तियार कर सकते हैं। कोई पंजाब में उम्मीदवार उतार रहा है तो किसी पर उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दल डोरे डाल रहे हैं। पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में भाजपा के विरुद्ध चुनाव प्रचार कर ये पहले ही दिखा चुके हैं कि इनकी घृणा किस दल और किस व्यक्ति से है। इसमें किसानों का कोई हित नहीं।

बारबाडोस 400 साल बाद ब्रिटेन से अलग होकर बना 55वाँ गणतंत्र देश: महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का शासन पूरी तरह से खत्म

कैरिबियाई द्वीपों का सबसे प्रमुख देश बारबाडोस 400 साल बाद मंगलवार (30 नवंबर 2021) को आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन से अलग होकर 55वाँ गणतंत्र देश बन गया है। अब वहाँ से महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का शासन पूरी तरह से खत्म हो गया है। अब उसका अपना राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान होगा। बारबाडोस के एक गणतंत्र देश बनने के अवसर पर सोमवार देर रात समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें ब्रिटेन के राजकुमार चार्ल्स सहित कई नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। एएफपी न्यूज एजेंसी ने इसका वीडियो भी शेयर किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समारोह का आयोजन उस लोकप्रिय चौक पर हुआ, जहाँ पिछले साल एक ब्रिटिश लॉर्ड की प्रतिमा हटाई गई थी। 2 लाख 85 हजार की जनसंख्या वाले देश बारबाडोस में गवर्नर जनरल सैंड्रा मेसन को राष्ट्रपति बनाया गया है। उनकी नियुक्ति क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय द्वारा की गई है। मेसन अटार्नी और जज भी रह चुकी हैं। उन्होंने वेनेजुएला, कोलंबिया, चिली और ब्राजील के राजदूत के तौर पर भी काम किया है।

बारबाडोस को कैरिबियाई देशों का सबसे अमीर देश माना जाता है। इसकी अर्थव्यवस्था पर्यटन पर निर्भर करती है। यह 1966 में आजाद हो गया था, लेकिन तब से यहाँ क्वीन एलीजाबेथ का शासन चलता आ रहा था। इससे पहले गुयाना, डोमनिका, त्रिनिदाद और टोबैगा गणतंत्र देश बने थे। साल 2008 में बारबाडोस ने खुद को गणतंत्र देश बनाने के लिए प्रस्ताव रखा, लेकिन इसे अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया, लेकिन आज 30 नवंबर बारबाडोस गणतंत्र देश बन गया है।

बता दें कि कैरिबियाई द्वीप बारबाडोस को अपने खूबसूरत समुद्र तटों और क्रिकेट प्रेमी के तौर पर जाना जाता है। बारबाडोस ने 1627 और 1833 के बीच 6,00,000 गुलाम अफ्रीकियों को मुक्त कराया, जिन्हें चीनी बागानों में काम करने के लिए रखा गया था। इससे अंग्रेजों में उनके प्रति खौफ बढ़ा था।

विनोद दुआ की हालत नाजुक, अपोलो अस्पताल के ICU में भर्ती: कॉमेड‍ियन बेटी मल्लिका दुआ ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी

वर‍िष्‍ठ पत्रकार विनोद दुआ की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। उनकी बेटी और कॉमेड‍ियन मल्लिका दुआ ने मंगलवार (30 नवंबर 2021) को इंस्टाग्राम पर यह जानकारी दी। 67 वर्षीय पत्रकार को सोमवार की रात डाक्टरों की सलाह पर नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में ले जाया गया। मल्लिका दुआ ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, ”उन्हें कल रात अपोलो अस्पताल के आईसीयू में ले जाया गया, जहाँ उनकी बेहतर देखभाल की जा रही है। उनकी हालत बेहद नाजुक और गंभीर बनी हुई हैं। वह अपने पूरे जीवन में एक योद्धा रहे हैं, जो अडिग और अथक रहे हैं।” विनोद दुआ को कोविड-19 होने के बाद इस साल के शुरुआत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

साभार: इंस्टाग्राम

मल्लिका दुआ ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, ”माँ ने उन्‍हें कभी नहीं छोड़ा होगा या उन्‍हें खुद को हारते हुए नहीं देखा होगा। वह हमें उनके लिए सबसे अच्छा करने के लिए मार्गदर्शन करती थीं। मेरी बहन और मैं ठीक हूँ। हमें सबसे मजबूत लोगों ने पाला है।” उन्होंने कहा कि वह डॉक्टरों से बात करने के बाद अपने पिता की स्थिति के बारे में नई जानकारी साझा करेंगी।

वहीं बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पत्रकार विनोद दुआ की मौत हो गई है। ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार अशरफ वानी ने एक ट्वीट शेयर किया था, जिसमें उन्होंने लिखा, “ये दिल को तोड़ देने वाला और हैरान करने वाला है। मेरे अच्छे दोस्त और प्रतिष्ठित पत्रकार विनोद दुआ अब नहीं रहे। वह कोविड-19 से रिकवर हो रहे थे और पिछले कुछ महीनों से उनकी तबीयत में सुधार भी हो रहा था। लेकिन, ये सबके साथ होना है कभी पहले, कभी बाद में। उनकी आत्मा को शांति मिले।” इसी तरह संजुक्ता बासु ने भी दावा किया था कि विनोद दुआ की मौत हो चुकी है। इसके बाद विनोद दुआ की बेटी मल्लिका ने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी के माध्यम से अपने पिता के जिंदा होने की पुष्टि की है।

इस साल 5.4 करोड़ टन ज्यादा कोयले की सप्लाई, पॉवर प्लांट्स के पास अभी भी 3.2 करोड़ टन कोयला: आँकड़ों से खुली मीडिया की पोल

कुछ सप्ताह पहले मीडिया में जम कर ये खबर चली थी कि अब देश में कोयले का भंडार काफी कम बचा है और इसीलिए बिजली संकट का सामना भी करना पड़ सकता है। हालाँकि, भारत को बिजली संकट का सामना नहीं करना पड़ा और बाद में पता चला कि कोयले की कमी वाली खबर सही नहीं थी। भारत सरकार ने भी कई बार साफ़ किया कि कोयले की कोई कमी नहीं है और आपात स्थिति के लिए भी कोयला रखा हुआ है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी इसमें राजनीति करने कूद पड़े थे।

अब एक RTI से खुलासा हुआ है कि देश में कोयले की कोई कमी नहीं थी। ‘हिन्दू आईटी सेल’ के संस्थापक अक्षित सिंह ने इस सम्बन्ध में सूचना के अधिकार के तहत RTI दायर की थी, जिसका अब जवाब आया है। इस RTI में अक्षित सिंह ने पूछा था कि क्या देश में कोयले की कोई कमी है क्या? इसके जवाब में ‘कॉल इंडिया लिमिटेड’ ने कहा है कि न तो CIL और न ही पॉवर सेक्टर में कोयले की कोई कमी थी। CIL ने स्पष्ट किया है कि कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के बावजूद इसकी सप्लाई पूरी हो, इसके लिए कई प्रयास किए गए।

बताया गया है कि CIL ने पिछले साल अप्रैल महीने से अक्टूबर महीने तक के मुकाबले इस साल इसी अवधि में 2021 में CIL ने इस साल 5.4 करोड़ टन ज्यादा कोयले की सप्लाई की है। इसका अर्थ है कि CIL ने 29.172 करोड़ रुपए का कोयला इस अवधि में सप्लाई किया। पिछले साल अप्रैल से लेकर अक्टूबर 2020 तक CIL ने 23.775 टन कोयले की सप्लाई की थी। यानी, इस बार 23% ज्यादा कोयले की सप्लाई हुई। अप्रैल 2019 से लेकर अक्टूबर 2019 तक की अवधि से इस साल की इस अवधि की तुलना करें तो अब भी CIL ने 15% ज्यादा कोयला सप्लाई किया।

RTI में बताए गए आँकड़ों के अनुसार, इस अवधि में ‘कोल इंडिया लिमिटेड’ ने 25.376 करोड़ टन कोयले की सप्लाई की। ये भी ध्यान देने वाली बात है कि 2019 में तब कोरोना संक्रमण नहीं था। इस साल की बात करें तो 22 नवंबर, 2021 को CIL के पास 3.2 करोड़ टन कोयले का स्टॉक रखा हुआ है। बताया गया है कि अगले कुछ दिनों में कोयले के उत्पादन में बढ़ोतरी भी होने वाली है, ऐसे में आगे जाकर ये स्टॉक और बढ़ेगा। कोयले की कोई कमी नहीं होगी।

दूसरा सवाल ये पूछा गया था कि मीडिया में चल रही झूठी ख़बरों के विरुद्ध एजेंसियों ने क्या कदम उठाए हैं। इस सम्बन्ध में बताया गया कि कोलकाता स्थित CIL के मार्केटिंग विभाग के पास इस सम्बन्ध में कोई सूचना नहीं है। तीसरा सवाल ये पूछा गया कि देश में फ़िलहाल कोयले का कितना स्टॉक है और अगर कोई कमी होती है तो इसे निपटने के लिए कौन से आपात कदम उठाए जा सकते हैं। उससे निपटने के लिए क्या तैयारी है, इस सवाल में ये पूछा गया था।

इसके जवाब में 22 नवंबर, 2021 को जारी की गई ‘सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी’ की एक रिपोर्ट का जिक्र किया गया, जिसमें जानकारी दी गई है कि पॉवर प्लांट्स के पास फ़िलहाल 1.62 करोड़ टन कोयला मौजूद है। साथ ही नवंबर 2021 में प्रतिदिन 2.5 लाख टन के हिसाब से कोयले का स्टॉक बढ़ता ही जा रहा है। वहीं CIL के पास मौजूदा अवधि में 3.246 करोड़ टन कोयले का स्टॉक मौजूद है। आश्वस्त किया गया है कि अगले कुछ दिनों में कोयले का उत्पादन बढ़ेगा और इस स्टॉक में भी बढ़ोतरी होगी।

अक्षित सिंह ने इस RTI को 26 अक्टूबर, 2021 को दायर किया था। वहीं इसके एक महीने और एक सप्ताह बाद, अर्थात 29 नवंबर, 2021 को ‘कोल इंडिया लिमिटेड (CIL)’ ने इस RTI का जवाब दिया। अक्टूबर 2021 में बताया जा रहा था कि चीन में बिजली संकट का कारण है कोयले की काई ज्यादा खपत और बिजली के दाम कम होना। साथ ही भारत में भी मीडिया द्वारा इस तरह की आशंका जताई जा रही थी और कहा गया था कि यहाँ भी पॉवर प्लांट्स कोयले की कमी से जूझ रहे हैं। ‘सेन्ट्रल एलेक्ट्रीसिटी अथॉरिटी’ के आँकड़ों के हवाले से बताया गया था कि पॉवर प्लांट्स के पास औसतन 4 दिनों की ही बिजली के लायक कोयला स्टोर में रखा जा रहा है।

दिल्ली में कोयला ‘संकट’ की बातें चलीं तो केजरीवाल सरकार ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर सारा ठीकरा फोड़ने के लिए खुद को तैयार कर लिया। एक तरफ अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री से पूरे मसले पर हस्तक्षेप को बोल रहे थे, दूसरी ओर उन्हीं के पार्टी के नेता व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया आरोप लगा रहे थे कि केंद्र सरकार इस संकट को नजरअंदाज करने की कोशिश कर रही है। इससे पहले दिल्ली के विद्युत मंत्री सत्येंद्र जैन ने चेतावनी दी थी कि अगर राष्ट्रीय राजधानी को जल्द से जल्द कोयले की सप्लाई नहीं पहुँचती है तो पूरा ‘ब्लैकाउट’ हो सकता है। 

अक्टूबर 2021 में ही देश के विद्युत संयंत्रों में कोयले की कमी और उसको ले कर आने वाले ऊर्जा संकट की वायरल होती खबरों को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह और केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आधारहीन बताते हुए कहा था कि कोयले का स्टॉक पर्याप्त है और विद्युत सप्लाई में कोई कमी नहीं आएगी। भ्रामक खबरों के खंडन के रूप में कोयला मंत्रालय ने आश्वासन दिया था कि देश में कोयले का पर्याप्त भंडार है जो बिजली संयंत्रों की मांग पूरी करने के लिए काफी है।

दूसरी तिमाही में शानदार 8.4 फीसदी GDP ग्रोथ: भारतीय अर्थव्यवस्था में तेज रिकवरी के संकेत, आँकड़े जारी

कोरोना संकट के बीच नरेंद्र मोदी सरकार के लिए लगातार दूसरी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर अच्छी खबर आई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के जीडीपी (Q2 GDP) नतीजे जारी कर दिए हैं। वित्त वर्ष 2021-22 की दूसरी तिमाही में शानदार 8.4 फीसदी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) ग्रोथ के आँकड़े सामने आए हैं, जबकि पिछले साल दूसरी तिमाही में जीडीपी में 7.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। सरकारी आँकड़ों के मुताबिक, जुलाई-सितंबर तिमाही में आर्थिक सुधार तेजी से मजबूत हुआ है।

Ministry of Statistics & Programme Implementation के आँकड़ों के मुताबिक दूसरी तिमाही (Q2) 2021-22 में जीडीपी 35.73 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जबकि 2020-21 की दूसरी तिमाही में 32.97 लाख करोड़ रुपए रहा। वहीं, वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही यानी अप्रैल 2021 से जून 2021 में भारत की जीडीपी की ग्रोथ में 20.1 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई थी।

बता दें कि पिछले साल अप्रैल-जून के दौरान देश की जीडीपी में 24.4 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई थी।

सांसदों ने संसद की गरिमा को भंग किया, माफी माँगे तो निलंबन वापस, कल गाँधी प्रतिमा के सामने धरना देगा विपक्ष

संसद के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही शुरू होते ही राज्यसभा सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। इसके चलते दिन भर में कुल तीन बार लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। हंगामा नहीं थमने पर दोपहर 3 बजे के बाद लोकसभा की कार्यवाही बुधवार (1 दिसंबर 2021) तक के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं, राज्यसभा में भी विपक्ष ने इस मामले को काफी जोर-शोर से उठाया।

दरअसल, राज्यसभा से निलंबित किए गए 12 सांसदों के मामले पर विपक्ष भड़का हुआ है। इन सांसदों को संसद के मानसून सत्र में मार्शलों के साथ बदसलूकी करने के आरोप में निलंबित किया गया है। अब 12 निलंबित विपक्षी सांसद राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखेंगे और अपने निलंबन के खिलाफ दलील पेश करेंगे। साथ ही वे कल संसद में गाँधी प्रतिमा के समक्ष धरना भी देंगे।

सांसदों का निलंबन रद्द करने से सभापति का इनकार

इससे पहले राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने 12 सांसदों के निलंबन को रद्द करने की माँग को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह निलंबन का फैसला संवैधानिक है और इसे वापस नहीं लिया जाएगा। नायडू की इस घोषणा के बाद विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा से वॉकआउट किया। 

‘निलंबित सांसदों को माफी माँगनी चाहिए’

सरकार का कहना है कि निलंबित किए गए सांसदों को माफी माँगनी चाहिए। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, “कल भी हमने उनसे कहा कि आप लोग माफी माँग लीजिए, खेद जाहिर कीजिए। लेकिन उन्होंने इसे खारिज कर दिया, साफ इनकार किया। इसलिए मजबूरी में हमें ये फैसला लेना पड़ा। उन्हें सदन में माफी माँगनी चाहिए।”

12 सांसदों के निलंबन पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष के हंगामे पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “पिछले सत्र में विपक्ष की मंशा सत्र को ना चलने देने की थी। अध्यक्ष का अपमान किया गया, पेपर फेंके गए। लेडी मार्शल को चोट लगी। इसे देखते हुए आवश्यक था कि ये कार्रवाई की जाए। सदस्य को माफी माँगनी चाहिए।”

राहुल बोले- किस बात की माफी?

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने ट्वीट करके कहा कि किस बात की माफी? संसद में जनता की बात उठाने की? बिलकुल नहीं! वहीं, अधीरंजन चौधरी ने कहा कि रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट चल रहा है। सरकार का ये नया तरीका है। हमें डराने का, धमकाने का, हमें जो अपनी बात रखने का अवसर मिलता है उसे छीनने का नया तरीका है। उन्होंने कहा, “यहाँ पर जमींदारी या राजा नहीं है कि हम बात-बात पर इनके पैर पकड़ें और माफी माँगे। ये जबरदस्ती क्यों माफी मँगवाना चाहते हैं। इसे हम बहुमत की बाहुबली कह सकते हैं। ये लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।”

बताया जा रहा है कि राज्यसभा में 12 सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर कॉन्ग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में आठ विपक्षी दलों का एक गुट उपसभापति वेंकैया नायडू से भी मिला। नायडू ने यहाँ विपक्ष को साफ कर दिया कि सांसद अगर माफी नहीं माँगेंगे तो उनका निलंबन जारी रहेगा।

बता दें कि 11 अगस्त को मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में भारी हंगामा करने वाले 12 सांसदों को मौजूदा शीतकालीन सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है। निलंबित होने वाले सांसदों में 6 सांसद कॉन्ग्रेस पार्टी के हैं, 2-2 सांसद शिवसेना तथा तृणमूल कॉन्ग्रेस तथा एक सांसद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का है। निलंबित होने वाले सांसदों पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर मानसून सत्र के दौरान हंगामा किया था। 

निलंबित होने वाले सांसदों में शिवसेना से प्रियंका चतुर्वेदी तथा अनिल देसाई का नाम शामिल हैं। कॉन्ग्रेस से फूलो देवी नेतम, छाया वर्मा, रिपुन बोरा, राजामनी पटेल, सैयद नासिर हुसैन और अखिलेश प्रसाद सिंह का नाम है। तृणमूल कॉन्ग्रेस से डोला सेन और शांता छेत्री एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से बिनॉय विश्वम और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से एलमराम करीम का नाम शामिल है। 

शाही ईदगाह मस्जिद को पवित्र करने का ऐलान, पुलिस सतर्क: उधर CRPF की रिपोर्ट में खुलासा – इबादतगाह में बढ़ी संदिग्धों की संख्या

उत्तर प्रदेश के मथुरा में हिन्दू महासभा ने शाही ईदगाह मस्जिद में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित करने के लिए ‘हिन्दू महासभा’ ने संकल्प यात्रा का ऐलान किया है। कई अन्य हिन्दू संगठनों ने इस तरह के प्रदर्शनों और कार्यक्रमों की योजना बनाई है, जिससे वहाँ का पुलिस-प्रशासन हलकान है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर और वहाँ स्थित शाही ईदगाह मस्जिद परिसर के आसपास ‘येलो जोन’ की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वो सोशल मीडिया पर कोई विवादित पोस्ट न करें।

अफवाहें फैलाने और भड़काऊ पोस्ट वगैरह करने वालों पर पुलिस ने कार्रवाई की भी चेतावनी दी है। ‘हिन्दू महासभा’ ने 6 दिसंबर को मूर्ति स्थापना की घोषणा की है, जिस दिन 1992 में अयोध्या में बाबरी ढाँचे का विध्वंस हुआ था। एक अन्य हिन्दू संगठन ‘नारायणी सेना’ ने ऐलान किया है कि अवैध शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने के लिए विश्राम घाट से लेकर श्रीकृष्ण जन्मस्थान तक मार्च निकाला जाएगा। डीएम नवनीत सिंह चहल स्पष्ट कह चुके हैं कि शांति भंग करने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।

पुलिस पुलिस अधीक्षक (नगर) मार्तंड प्रकाश सिंह ने बताया “पुलिस के जवानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। येलो जोन में पुलिस-पीएसी की तैनाती की गई है।” उधर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉक्टर गौरव ग्रोवर ने भी कहा कि वो स्थिति पर निगरानी बनाए हुए हैं और भड़काऊ पोस्ट डालने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।” अखिल भारत हिन्दू महासभा, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन समिति और नारायणी सेना जैसे संगठन वहाँ सक्रिय हैं।

उत्तर प्रदेश में 2022 में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। वहीं अब उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का भी बयान आया है। उन्होंने कहा कि ‘अयोध्या हुई हमारी, अब काशी-मथुरा की बारी’ वाला नारा संपन्न होता नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र में ‘वाराणसी कॉरिडोर’ का उद्घाटन करने के लिए जाने वाले हैं। मौर्य ने कहा कि उन्होंने राम मंदिर के लिए लाठी भी खाई है और काशी विश्वनाथ में भी वो जब जल चढ़ाने जाते थे तो अंदर लाठीचार्ज होता था।

वहीं CRPF के महानिदेशक ने कहा है कि इबादतगाह के परिसर में संदग्ध गतिविधियाँ चल रही हैं। उन्होंने कहा कि संदिग्ध लोग सुरक्षा व्यवस्था को देख रहे हैं और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की संभावना है। कुछ लोगों की गिरफ़्तारी हुई है और धारा-144 लागू है। 6 दिसंबर को शाही ईदगाह मस्जिद को ‘पवित्र करने’ की बातें भी की गई है। 24 नवंबर, 2021 को CRPF महानिदेशक ने केंद्र सरकार को भेजी गई रिपोर्ट में कहा कि मथुरा में स्थिति ठीक नहीं है और कुछ संदेहास्पद गतिविधियाँ देखी गई हैं।

हाई कोर्ट में इंदिरा जयसिंह दे रहीं थी दलील, अधनंगा बैठा था शख्स; आखिर में पूछना ही पड़ा- माई लॉर्ड क्या चल रहा है?

कर्नाटक हाई कोर्ट में मंगलवार (30 नवंबर 2021) को वर्चुअल सुनवाई के दौरान एक अर्ध-नग्न व्यक्ति शामिल हुआ, उस दौरान महिला वकील इंदिरा जयसिंह इस मामले पर बहस कर रही थीं। उस आदमी को नोटिस जारी किया गया है।

वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने श्रीधर भट्ट नाम के व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने ट्वीट किया, ”मैं इसकी पुष्टि करती हूँ। मेरी आपत्ति के बावजूद एक अर्ध नग्न आदमी पूरे 20 मिनट तक स्क्रीन पर दिखाई दे रहा था। मैं कोर्ट की अवमानना और इस तरह का व्यवहार करने वाले के खिलाफ यौन उत्पीड़न और अदालत की अवमानना ​​की शिकायत रही हूँ। कोर्ट में सुनवाई के दौरान ऐसा करना बेहद परेशान करने वाला है।”

लाइव लॉ के मुताबिक, महिला वकील ने कोर्ट को बताया, “एक व्यक्ति बिना बनियान के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो रही सुनवाई में शामिल हुआ। वह इस कोर्ट रूम में दिखाई दे रहा है। कृपया इस पर न्यायिक संज्ञान लें। कोर्ट में कुछ मर्यादा बरतें। मिलोर्ड, मैं एक महिला वकील हूँ।” उन्होंने अदालत से आगे कहा, “एक महिला के लिए अदालत में एक आदमी को बिना कपड़ों के देखना बहुत ही अपमानजनक है। कोर्ट की सुनवाई दौरान एक आदमी बिना कपड़ों के शामिल होता है, जब एक महिला अदालत में बहस कर रही है? क्या हो रहा है? माई लॉर्ड”। वकील सेक्स सीडी कांड में पीड़िता की ओर से पेश हुई थी।

ऑनलाइन प्रोसीडिंग्स के दौरान ये पहला मामला नहीं है, जब किसी वकील ने डेकोरम का मजाक बनाया हो। इससे पहले जून 2021 में वर्चुअल कोर्ट की प्रोसीडिंग के दौरान वरिष्ठ वकील व कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता अभिषेक मनु सिंघवी कैमरे पर बिना पैंट के पकड़े गए थे। सिंघवी अलग-अलग स्क्रीन का इस्तेमाल करके कई कोर्ट प्रोसीडिंग्स अटेंड कर रहे थे। ऐसे में उनकी एक स्क्रीन जो कलकत्ता हाई कोर्ट से कनेक्ट हो रखी थी, अचानक जमीन पर गिर गई। सिंघवी जो पहले सभी लोगों को एकदम सुर्ख सफेद रंग की शर्ट में दिख रहे थे। इस स्क्रीन के गिरने के बाद पता चला कि उन्होंने ऊपर बस शर्ट पहनी हुई थी जबकि नीचे वह बिना पैंट के सिर्फ रेड शॉर्ट्स में थे। स्क्रीन के गिरने से सिंघवी का ये रूप प्रोसीडिंग अटेंड कर रहे हर व्यक्ति ने देखा।

बता दें कि पिछले साल राजीव धवन राजस्थान हाईकोर्ट की ऑनलाइन हियरिंग में हुक्का पीते दिखे थे। इसी तरह हाल में जूही चावला ने जब कोर्ट की कार्यवाही का लिंक ऑनलाइन शेयर कर दिया था तो उनके फैन्स ने ऑनलाइन जुड़कर गाना गुनगुना दिया था।