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‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ देश की जरूरत, केंद्र उठाए कदम’: इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी, मुस्लिम कर रहे विरोध

इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद देश में एक बार फिर यूनिफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा गरमा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जस्टिस सुनीत कुमार की अगुआई वाली सिंगल जज की बेंच ने मोदी सरकार से संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को पूरे भारत में लागू करने के लिए कदम उठाने को कहा है।

मायरा उर्फ ​​वैष्णवी विलास शिरशिकर और दूसरे धर्म में शादी से जुड़ी 16 अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए 19 नवंबर (शुक्रवार) को कोर्ट ने यह बात कही। जस्टिस सुनीत ने सरकार से यूनिफॉर्म सिविल कोड के मामले में संविधान के अनुच्छेद 44 को लागू करने के लिए एक पैनल का गठन करने को कहा है। यह अनुच्छेद कहता है, “भारत के पूरे क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा”।

लंबे वक्त से लंबित है यह मुद्दा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा समान नागरिक संहिता लागू करने से संबंधित कानून लंबे समय से लंबित है और इसे स्वैच्छिक नहीं बनाया जा सकता है। कोर्ट के कमेंट ने एक बार फिर से यूसीसी को लेकर जारी बहस को तेज कर दिया है। उल्लेखनीय है कि केंद्र में सत्तासीन बीजेपी समान नागरिक संहिता के समर्थन में रही है, लेकिन दुर्भाग्य से मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए कॉन्ग्रेस और अन्य छद्म धर्मनिरपेक्ष दलों ने हमेशा यूसीसी का विरोध किया है।

कोर्ट के मुताबिक, 75 साल पले बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि समान नागरिक संहिता को ‘विशुद्ध रूप से स्वैच्छिक’ नहीं बनाया जा सकता है। उन्होंने उस दौरान भी अल्पसंख्यक समुदाय के डर और आशंकाओं को देखते हुए यह बात कही थी। कोर्ट ने आगे कहा, “इस मामले पर अनावश्यक रियायतें देकर कोई भी समुदाय बिल्ली के गले की घंटी को बजाने की हिम्मत नहीं करेगा। यह देश की जरूरत है और यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वो नागरिकों के लिए यूसीसी को लागू करे और उसके पास इसके लिए विधायी क्षमता है।”

उच्च न्यायालय ने हिंदू परिवार संहिता की सराहना करते हुए कहा कि यह एक समान नागरिक संहिता के रूप में कार्य करता है और नागरिकों को एक संयुक्त हिंदू नागरिक के रूप में एकीकृत करता है। ​​

दिल्ली हाईकोर्ट भी कर चुका है टिप्पणी

इस साल जुलाई में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी देश में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए सरकार से कहा था। दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने टिप्पणी की थी कि समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने से समाज में होने वाले झगड़ों और विरोधाभासों में कमी आएगी, जो अलग-अलग पर्सनल लॉ के कारण उत्पन्न होते हैं।

UCC पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

साल 2019 में सर्वोच्च न्यायालय ने देश में समान नागरिक संहिता लागू नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई थी। शीर्ष अदालत ने सरकारों को गोवा से सीखने की सलाह देते हुए कहा था कि वहाँ पर यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है। जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि गोवा में कुछ बदलावों के साथ पुर्तगाली सिविल कोड ही लागू है। गोवा के स्थानीय निवासी किसी भी अन्य राज्य में भी बसे हों, तब भी वो इसके दायरे में आते हैं।

कोर्ट ने कहा था कि गोवा का मुस्लिम नागरिक एक से ज्यादा निकाह नहीं कर सकता और न ही मौखिक तलाक़ ही दे सकता है। लेकिन, देश के अन्य हिस्सों में वे अपने पर्सनल लॉ से चलते हैं।

क्या है समान नागरिक संहिता

संविधान का अनुच्छेद 44 देश में समान नागरिक संहिता को लागू करने का अधिकार देता है। यूसीसी सामान्य शब्दों में एक तरह का पंथनिरपेक्ष कानून की बात कहता है, जो सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होगा। इस कानून के अस्तित्व में आने के बाद सभी धर्मों के लिए एक ही कानून मान्य हो जाएगा।

30-40 वर्ष के 40 हजार तमिल ब्राह्मणों को यूपी-बिहार में दुल्हन की तलाश, इस कारण से शादी के लिए नहीं मिल रही लड़कियाँ

शादी के इंतजार में उम्र के तीसवें दशक में पहुँच चुके तमिलनाडु में 40,000 से अधिक तमिल ब्राह्मणों को दुल्हन का अभी भी इंतजार है। लड़कियों की कमी के कारण उनके लिए राज्य में दुल्हन मिलना मुश्किल हो रहा है, इसलिए शादी के लिए ये लोग उत्तर प्रदेश और बिहार का रूख कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तमिल ब्राह्मण पुरुषों की दुल्हन खोजने लिए तमिलनाडु ब्राह्मण एसोसिएशन (टीबीए) ने इन दो राज्यों में विशेष अभियान शुरू किया है। बता दें कि चेन्नई से लखनऊ की दूरी तकरीबन 2 हजार किलोमीटर है।

टीबीए के अध्यक्ष एन नारायणन ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, “हमने अपना विशेष अभियान शुरू किया है।” कुछ आँकड़ों का हवाला देते हुए नारायणन ने कहा कि 30-40 साल के 40,000 से ज्यादा तमिल ब्राह्मण पुरुष शादी करने में असमर्थ हैं क्योंकि तमिलनाडु में दुल्हन नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर विवाह योग्य 10 ब्राह्मण लड़के हैं तो इसके मुकाबले लड़कियाँ केवल 6 हैं।

उन्होंने बताया कि तमिल ब्राह्मण पुरुषों के लिए दुल्हन खोजने के लिए देश की राजधानी दिल्ली, लखनऊ और पटना में समन्वयक नियुक्त किए जाएँगे। इनमें वे लोग शामिल होंगे हिंदी जो पढ़, लिख और बोल सकते हैं। एसोसिएशन के मुताबिक, वह लखनऊ और पटना के लोगों के संपर्क मे है। नारायणन ने आगे बताया कि कई ब्राह्मणों ने इस मुहिम का स्वागत किया है, लेकिन कई के विचार इससे मेल नहीं खा रहे।

शिक्षाविद्, एम परमेश्वरन ने कहा कि लिंग अनुपात में भारी अंतर के कारण राज्य में विवाह के योग्य तमिल ब्राह्मण लड़कियाँ मिल नहीं रही हैं। उन्होंने बताया कि लड़के के साइड से हमेशा धूमधाम और जोरो-शोरों से शादी की उम्मीद ही क्यों जाती है? लड़कों के माता-पिता क्यों चाहते हैं कि शादियाँ आलीशान मैरिज हॉल में ही हों? साधारण तरीके से भी तो शादी कराई जा सकती है।

परमेश्वरन ने कहा कि लड़की के परिवार को शादी का पूरा खर्च उठाना पड़ता है और यह तमिल ब्राह्मण समुदाय का अभिशाप है। बड़ी शादियाँ एक स्टेटस सिंबल बन गई हैं और यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। समुदाय को प्रगति चुननी चाहिए और दिखावे को अस्वीकार करना चाहिए।

जम्मू-कश्मीर में शक्ति-प्रदर्शन पर गुलाम नबी आजाद को कॉन्ग्रेस ने अनुशासन समिति से हटाया, समर्थक 20 नेता छोड़ चुके हैं पार्टी

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच कॉन्ग्रेस में जारी अंदरूनी घमासान उभर कर सामने आ गया है। इसी क्रम में कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी की अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति से हटा दिया है। दरअसल, कठुआ में गुलाम बनी आजाद ने एक बड़ी रैली कर अपना शक्ति-प्रदर्शन किया था और रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि वो वही करेंगे जो राज्य के लोग चाहते हैं। इसके बाद उनके खिलाफ यह एक्शन लिया गया।

कठुआ में रैली के दौरान हाल ही में कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देने वाले नेता भी शामिल थे। पार्टी से इस्तीफा दे चुके नेताओं का कहना था है कि राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर गुलाम नबी आजाद ही लोगों की पहली पसंद हैं न कि कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर। उल्लेखनीय है कि गुलाम नबी आजाद का इसी साल राज्यसभा के सदस्य के तौर पर कार्यकाल समाप्त हुआ था, जिसके बाद उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए नामित नहीं किया गया।

कॉन्ग्रेस ने डिसिप्लिनरी कमिटी का गठन किया और नवगठित कमिटी से आजाद के अलावा अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुकुट मिठी और सुशील कुमार शिंदे को बाहर कर दिया गया है। पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि अंबिका सोनी, जेपी अग्रवाल, तारिक अनवर और जी परमेश्वर सदस्य के तौर पर शामिल हैं।

जम्मू-कश्मीर कॉन्ग्रेस में आई दरार

इससे पहले गुलाम नबी आजाद के समर्थक पूर्व मंत्रियों एवं विधायकों सहित 20 कॉन्ग्रेस नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इनमें जीएम सरूरी, जुगल किशोर शर्मा, विकार रसूल, डॉ मनोहरलाल शर्मा, गुलाम नबी मोंगा, नरेश गुप्ता, सुभाष गुप्ता, अमीन भट, अनवर भट, इनायत अली शामिल हैं।

इन सभी का कहना है कि गुलाम अहमद की अध्यक्षता में जम्मू-कश्मीर में कॉन्ग्रेस अपने पतन की ओर बढ रही है। इनका आरोप है कि मीर और उनके बेटे के डीडीसी के चुनाव हारने के बाद भी पद पर बने रहने दिया गया। इसके अलावा, उपेक्षा के शिकार पार्टी के कई नेताओं ने मीर के शासनकाल के दौरान पार्टी भी छोड़ दी है।

‘अर्बन नक्सलवाद’ पर चिंतित हुए शरद पवार, कहा – सरकार के खिलाफ फैलाई जा रही है घृणा, तत्काल कार्रवाई की ज़रूरत

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार ने भी अब अर्बन नक्सलियों के खतरे पर चिंता जाहिर की है। शरद पवार ने उसी गढ़चिरौली में ये बातें कहीं, जहाँ पिछले रविवार (14 नवंबर, 2021) सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मिलिंद तेलतुंबड़े सहित 27 नक्सली ढेर हो गए थे। NCP सुप्रीमो का कहना है कि नक्सलवाद सिर्फ महाराष्ट्र के पूर्वी हिस्सों के कुछ गाँवों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के कई बड़े शहरों में भी ‘अर्बन नक्सलवाद’ देखने को मिल रहा है।

पत्रकारों से से बात करते हुए महाराष्ट्र की सत्ताधारी ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ गठबंधन के सूत्रधार शरद पवार ने गढ़चिरौली में नक्सली समस्या पर चिंता जाहिर की, जिसकी सीमाएँ पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ से लगती हैं। उन्होंने कहा कि परिस्थितियाँ अब सुधर रही हैं, लेकिन अब एक नया खतरा चालू हो गया है। उन्होंने बताया कि कुछ जगहों पर सरकार के खिलाफ घृणा फैलाई जा रही है। साथ ही उन्होंने इसे ‘अर्बन नक्सलवाद’ के रूप में परिभाषित किया।

केंद्रीय कृषि मंत्री रहे 80 वर्षीय नेता ने कहा, “इस तरह की (अर्बन नक्सलियों) कुछ ताकतें नागपुर, पुणे और मुंबई के अलावा सह्याद्रि पहाड़ियों वाले इलाकों में भी सक्रिय हैं। वो केरल तक फैले हुए हैं। एक वर्ग ऐसा है जो जनता के मन में सरकार के विरोध में घृणा बिठाना चाहता है। इस पहलू को लेकर तत्काल कार्रवाई किए जाने की ज़रूरत है। ऐसा नहीं किया जाता है तो नई समस्याएँ खड़ी होंगी।” बता दें कि महाराष्ट्र की मौजूदा सरकार में गृह मंत्रालय NCP के ही हिस्से है।

बता दें कि ‘अर्बन नक्सलियों’ को लेकर पहले भी बात हो चुकी है, जब भीमा-कोरेगाँव हिंसा में गिरफ्तार किए गए अधिकतर नक्सली लेखक, पादरी और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अलावा दलित सुधारक का चोला ओढ़ कर घूम रहे थे। इस मामले में जिन 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया, वो सभी समाज की मुख्यधारा में हिंसक नक्सलियों का मुखौटा थे। इन्होंने ‘एल्गार परिषद’ के बैनर तले हिंसा भड़काई। कम्युनिस्ट पार्टियाँ भी नक्सलियों के समर्थन में बोलती रहती हैं।

विधानसभा में हुए पत्नी के अपमान से आहत चंद्रबाबू नायडू ने खाई सदन में न घुसने की कसम, फूट-फूटकर रोए: देखें वीडियो

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और तेलगु देशम पार्टी (TDP) अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू विजयवाड़ा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भावुक होकर खूब रोए। वह विधानसभा सत्र में हुए अपने पत्नी नारा भुवनेश्वरी के अपमान से आहत थे। इस दौरान उन्होंने कसम खाई कि अब वो सत्ता में लौटने के बाद ही विधानसभा में कदम रखेंगे, उससे पहले नहीं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि आज की विधानसभा कार्यवाही में उनके ऊपर निजी हमले हुए। उनका कहना है कि YSRCP के विधायकों ने उनके परिवार और पत्नी के ख़िलाफ़ अपशब्द बोले। उनका चरित्र हनन किया। अपनी बात रखते हुए चंद्रबाबू नायडू इतने भावुक हो गए कि वो फूट-फूट कर रोने लगे। 

उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी को लेकर जो अपशब्द बोले गए वो उससे दुखी हैं। उन्होंने कहा, “पिछले ढाई साल से मैं अपमान सह रहा हूँ लेकिन चुप रहा। आज उन्होंने मेरी पत्नी को भी निशाना बनाया है, मैं हमेशा सम्मान के लिए और सम्मान के साथ रहा, मैं इसे और नहीं सह सकता।”

बता दें कि आज विधानसभा सदन की कार्यवाही में निजी हमलों के कारण चंद्रबाबू नायडू सदन से निकलकर बाहर आ गए थे और इसके बाद वह सीधे पार्टी मुख्यालय गए। यहाँ उन्होंने कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इसी बीच जब उनसे सवाल पूछे गए तो वह अपने आँसू नहीं रोक पाए और खूब रोए।

नायडू बोले, “मेरी पत्नी की राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं रही। 40 साल का मेरा पॉलिटिकल करियर हो या फिर उनके पिता NTR जब मुख्यमंत्री रहे और मैं भी सीएम रहा, लेकिन मेरी पत्नी ने कभी भी राजनीति में रुचि नहीं ली। शायद ही कभी ऐसा हुआ होगा जब प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उन्हें मेरे साथ मौजूद रहना पड़ा होगा। उन्होंने पूरा जीवन मुझे आगे बढ़ाने में खपा दिया लेकिन आज उनका चरित्र हनन किया गया। उन्हें ये भी नहीं पता कि टीडीपी में कौन क्या है।”

वह बोले, “मैंने अपने पूरे राजनीतिक करियर में ऐसी बयानबाजी का सामना नहीं किया। जीवन में कई उतार-चढ़ाव जरूर आए लेकिन विपक्ष की ओर से ऐसे बयान किसी भी मर्यादा के विरुद्ध हैं। हम भी सरकार में थे। आज विपक्ष हैं। लेकिन हमारे नेताओं ने कभी ऐसा बर्ताव नहीं किया।”

बता दें कि एक ओर जहाँ चंद्रबाबू नायडू सदन में न आने की शपथ ले चुके हैं। वहीं दूसरी ओर वाईएसआर कॉन्ग्रेस के सदस्यों ने ऐसी प्रतिक्रिया को और नायडू की प्रतिज्ञा को नाटक बताया। इस बीच नायडू के समर्थक श्रीनिवासुलु ने आधा सिर और मूंछ कटवा लिया है। उसका कहना है कि जबतक चंद्रबाबू की सरकार नहीं बन जाती, वो ऐसे ही रहेगा। टीडीपी नेता ने अपने गले में एक स्लेट भी लटकाई है। इसमें लोगों से नायडू को फिर से वोट देने की बात कही गई है।

‘हमारे साहब (एसपी) को नोटिस भेजते हो, तुम्हारी औकात बताता हूँ’: SHO और दारोगा ने जज को बुरी तरह पीटा, पिस्टल ताना और गंदी-गंदी गालियाँ दीं

बिहार के मधुबनी में एसपी और पुलिस को कोर्ट में तलब करने पर थाना इंचार्ज और दारोगा ने चैंबर में घुसकर जज को पीटा, उन पर रिवॉल्वर तान दी और गंदी-गंदी गालियाँ दीं। इस दौरान दोनों पुलिस अधिकारी कह रहे थे, “मेरे साहब (एसपी) को नोटिस भेजकर कोर्ट बुलवाते हो। आज मैं तुम्हें बताता हूँ। आज मैं तुम्हारी औकात दिखा दूँगा।” गुरुवार (18 अक्टूबर) दोपहर को घटित इस अप्रत्याशित घटना के दौरान जज डर से थर-थर काँप रहे थे। हालाँकि, दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

बिहार के मधुबनी के एडीजे अविनाश कुमार पर पुलिसकर्मियों द्वारा किए गए हमले के बाद मामला पटना हाईकोर्ट पहुँच गया है। मधुबनी के इंचार्ज डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज ने इस मामले में पटना हाईकोर्ट को पत्र भेजकर शिकायत की है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने बिहार के मुख्य सचिव, डीजीपी, गृह विभाग के प्रधान सचिव एवं मधुबनी के एसपी को नोटिस जारी किया है। पटना हाईकोर्ट की जस्टिस राजन गुप्ता व मोहित कुमार साह की बेंच ने इन्हें नोटिस जारी किया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 29 नवंबर को होगी। कोर्ट ने 29 नवंबर को बिहार के डीजीपी को कोर्ट में हाजिर होकर मामले में स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “प्रथम दृष्टया, प्रतीत होता है कि यह प्रकरण न्यायपालिका की स्वतंत्रता को खतरे में डालता है। इसलिए, हम बिहार के मुख्य सचिव और डीजीपी बिहार को नोटिस जारी करना उचित समझते हैं।”

जानकारी के मुताबिक, पुलिस वाले एडीजे अविनाश कुमार को यहाँ तक कह रहे थे कि “तुम्हारी हिम्मत कैसे हो गई कि तुम हमारे साहब (मधुबनी एसपी सत्य प्रकाश) को कोर्ट में बुलाओ? तुम्हारा पावर सीज हो गया है। तुम बेवजह सबको परेशान करते रहते हो। तुमको हम एडीजे-फेडीजे नहीं मानते हैं। बॉस (एसपी) के आदेश पर ही हम तुम्हे तुम्हारी औकात दिखाने आए है।”

अविनाश कुमार ने FIR में बताया, “चैंबर में प्रवेश करते ही थानाध्यक्ष ऊँची आवाज में बात करने लगा। जब हमने शांति से बात करने को कहा तो उसने कहा कि हम इसी अंदाज में बात करेंगे। क्योंकि यही मेरा अंदाज है। इसी बीच थानाध्यक्ष ने गाली-गलौज शुरू करते हुए कहा कि तुम मेरे बॉस (एसपी साहब) को नोटिस देकर कोर्ट बुलाते हो। आज तुम्हारी औकात बता देता हूँ। इसी बीच थानाध्यक्ष का सहयोगी एसआई अभिमन्यु कुमार शर्मा भी जबरन हमारे चैंबर में घुस आया। इसके बाद दोनों ने मिलकर मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान थानाध्यक्ष ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर निकालकर मुझ पर तानते हुए कहा कि आज मैं तुम्हें दुनिया से रुखसत (विदा) ही कर देता हूँ। क्योंकि तुमने हमारे बॉस (एसपी साहब) को परेशान कर रखा है। बॉस के आदेश पर ही हम तुम्हें तुम्हारी औकात दिखाने आए हैं।” 

कोर्ट ने आला अधिकारियों से माँगा स्पष्टीकरण

कोर्ट ने जहाँ राज्य के आला अधिकारियों से मामल में स्पष्टीकरण माँगा, वहीं मधुबनी के वकीलों में इसको लेकर व्यापक रोष है। एडीजे अविनाश कुमार के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार वकीलों ने कहा है कि पहले अपराधियों से सुरक्षा की जरूरत होती थी, लेकिन अब पुलिस वालों से न्यायिक पदाधिकारी व वकीलों को सुरक्षा की आवश्यकता हो गई है। तो वहीं आरोपित पुलिस वालों के समर्थन में बिहार पुलिस एसोसिएशन आ गया है। एसोसिएशन ने इस मामले में आरोपित पुलिसकर्मियों का बचाव किया है और इस मामले की जाँच हाईकोर्ट के जज से कराने की अपील की है।

एडीजे अविनाश कुमार पर दारोगा ने किया था हमला

बता दें कि मधुबनी के झंझारपुर न्यायालय के एडीजे अविनाश कुमार पर बिहार पुलिस के घोघरडीहा के थानाध्यक्ष गोपाल प्रसाद यादव और सब इंस्‍पेक्‍टर अभिमन्यु शर्मा ने हमला कर दिया। दोनों वे जज पर पिस्टल तान दी और उन्हें गंदी-गंदी गालियाँ दी।

बताया जा रहा है कि विधिक सेवा समिति के समक्ष एक महिला उषा देवी ने थानाध्‍यक्ष द्वारा झूठे मुकदमे को लेकर आवेदन दिया था। इसी मामले को लेकर एडीजे ने थाना प्रभारी को कोर्ट में तलब किया था, लेकिन थाना प्रभारी निर्धारित दिन नहीं पहुँचे। इसके बाद जब अगले दिन का भी वक्‍त दिया गया तो वो विलंब से आए और चैंबर में घुसकर रिवॉल्वर तान दी थी।

झंझारपुर बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बलराम साह ने बताया कि हंगामा होते ही वे लोग जज के चैंबर में घुसे और वहाँ देखा कि SI अभिमन्यु कुमार शर्मा जज अविनाश कुमार पर पिस्टल ताने हुए हैं और उन्हें गंदी-गंदी गालियाँ दे रहे हैं। जज डर से थर-थर काँप रहे थे। इसके बाद वहाँ मौजूद सभी वकील और कोर्ट कर्मी आए और जज को सुरक्षित निकाला।

उल्लेखनीय है कि एडीजे अविनाश कुमार ने कई अनोखे फैसले देकर खूब सुर्खियाँ बटोरी हैं। छेड़छाड़ के आरोपित ललन कुमार साफी को इस शर्त के साथ जमानत दी कि उसे छह महीने तक गाँव की हर महिला के कपड़े धोने और इस्त्री (आयरन) कर उन्हें घर-घर जाकर लौटाना होगा। एक अन्य मामले में उन्होंने एक शिक्षक को पहली क्लास से 5वीं तक के गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देने की शर्त पर जमानत दी थी।

जज अविनाश कुमार की कोर्ट ने भैरव स्थान थाने में दर्ज एक FIR में पॉक्सो एवं बाल विवाह अधिनियम 2006 नहीं लगाने पर केंद्र और राज्य सरकार को 14 जुलाई 2021 को एक साथ पत्र जारी किया था। इस पत्र में उन्होंने मधुबनी SP, झंझारपुर DSP और भैरव स्थान थाना के अलावा व्यवहार न्यायालय के एक अधिकारी पर सवाल खड़े करते हुए इन्हें कानून सिखाने के लिए कहा था।

हाल ही में पटना हाईकोर्ट के महानिबंधक ने मधुबनी के झंझारपुर सिविल कोर्ट के एडीजे (प्रथम) अविनाश कुमार का पावर सीज करने का आदेश जारी किया। हाईकोर्ट ने एडीजे अविनाश कुमार के न्यायिक कार्य करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया है।

मंदिर की मूर्ति से ही साधु और साध्वी की हत्या, परिसर में ही मिले दोनों के शव: यूपी के महाराजगंज की घटना

उतर प्रदेश के महराजगंज जिले में एक मंदिर से पुजारी और साध्वी का शव बरामद हुआ है। इन दोनों के हत्या की आशंका जताई जा रही है। यह घटना परसा मलिक थाना क्षेत्र के महदेइया गाँव की है। घटना गुरुवार (18 नवम्बर 2021) रात की बताई जा रही है। ग्रामीणों ने दोनों शव शुक्रवार (19 नवम्बर 2021) की सुबह मंदिर परिसर में देखा। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर शव को कब्ज़े में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

इस घटना की पुष्टि महराजगंज पुलिस ने की है। घटनास्थल पर गोरखपुर जोन के ADG अखिल कुमार और महाराजगंज SP प्रदीप गुप्ता ने दौरा किया। पुलिस ने इस हत्याकांड के खुलासे के लिए फील्ड यूनिट, डॉग स्क्वॉड व कई अन्य टीमों को लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हत्यारों ने हमले के लिए मंदिर में ही लगी एक मूर्ति का प्रयोग किया है। इस मूर्ति से दोनों के सिर पर वार किया गया है। यह दुर्गा माता का मंदिर है, जिसे गाँव के ही राम रतन मिश्रा ने बनवाया था। उनकी उम्र लगभग 73 वर्ष थी। वो उसी मंदिर में पुजारी थे। उसी मंदिर में लगभग 20 वर्षों से नेपाल के धकढाई चेनपुरवा की कलावती भी रहती थीं। उनकी उम्र लगभग 65 वर्ष थी। वह भी मंदिर में पूजा-पाठ किया करती थीं। कलावती को स्थानीय लोग साध्वी के नाम से पुकारते थे। इन्हीं दोनों की हत्या की गई है।

मृतक मिश्रा अविवाहित थे और यह मंदिर उन्होंने अपने निजी पैसे से बनवाया था। जिस मूर्ति से पुजारी और साध्वी पर हमला किया गया, वह एक हाथी की थी। कुछ ही दिन पहले मिश्रा वाराणसी से हनुमान जी की एक मूर्ति खरीद कर लाए थे। इस मूर्ति को मंदिर में स्थापित करवाने के बाद उन्होंने भंडारा भी करवाया था।

इस मामले में पुलिस अधीक्षक महाराजगंज ने बताया कि हत्या से जुड़े हर पहलू की जाँच की जा रही है। पहली नजर में विवाद सम्पत्ति का लग रहा है। पुलिस ने संदेह के आधार पर पूछताछ के लिए कुछ लोगों को बुलाया है। दोनों मृतकों का एक-एक कमरा बना हुआ है वो उसी में रहते थे। मंदिर गाँव के बाहर सुनसान इलाके में है।

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, पुजारी के 2 अन्य भाई भी हैं। घटना के कुछ ही दिन पहले निर्माणाधीन रोहिन बैराज में मृतक की ज़मीन निकली थी। बताया जा रहा है कि जमीन के बदले मुआवजे में मृतक को 14 लाख रुपए मिले थे। ग्रामीणों को शक है कि हत्या की वजह रुपए और पारिवारिक संपत्ति हो सकती है।

उस जज का तबादला जिसने अनिल देशमुख को जेल में नहीं दी थी घर के खाने की इजाजत

₹100 करोड़ रुपए की वसूली केस में जेल में बंद महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ ईडी की रिमांड याचिका पर सुनवाई करने वाले एडिशनल सेशन जज एचएस सतभाई का तबादला कर दिया गया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस सप्ताह उनका ट्रांसफर कर उन्हें यवतमाल भेज दिया। अजीब बात यह है कि हाल ही में जस्टिस सतभाई ने अनिल देशमुख के घर के खाने की माँग को ठुकरा दिया था। इसके बाद अब उनका ट्रांसफर हुआ है।

अनिल देशमुख ने कोर्ट में याचिका दायर कर जेल में घर का बना खाना देने की माँग की थी, जिसे खारिज करते हुए जस्टिस सतभाई ने भ्रष्टाचार के मामले में देशमुख को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। हालाँकि, कोर्ट ने 71 साल के देशमुख के स्वास्थ्य को देखते हुए जेल में उनके लिए बेड को मंजूरी अवश्य दे दी थी। जज के फैसले के बावजूद भी देशमुख घर के बने खाने की माँग पर अड़े रहे। इस पर जज ने कहा, “आप पहले जेल का खाना खाइए, अगर नहीं खाएँगे तो मामले पर मैं विचार करूँगा।”

उल्लेखनीय है कि अनिल देशमुख के भ्रष्टाचार के मामले की सुनवाई करने से पहले जस्टिस सतभाई अगस्त 2020 से जुलाई 2021 तक स्पेशल जज के तौर पर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम से संबंधित मामलों की सुनवाई कर रहे थे।

किसी भी हाईकोर्ट के पास स्पेशल जज का ट्रांसफर करने के पॉवर नहीं होते। अगर उच्च न्यायालय किसी भी विशेष न्यायाधीश का ट्रांसफर करना चाहता है तो इसके लिए उसे पहले सर्वोच्च न्यायालय की विशेष अनुमति लेनी पड़ती है। इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने अनिल देशमुख का केस देख रहे जस्टिस सतभाई का ट्रांसफर करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय की इजाजत ली थी। इसके लिए उन्होंने शीर्ष अदालत को प्रशासनिक आवश्यकताओं का हावाला दिया है। कोर्ट ने 13 नवंबर को उक्त जज के ट्रांसफर की इजाजत दी थी।

15 नवंबर को जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, “हाईकोर्ट ने सिटी सिविल कोर्ट और मुबई के अतिरिक्त सेशन जज एचएस सतभाई का तबादला यवतमाल जिले के केलापुर में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के तौर पर किया गया है।”

पवार ने देशमुख को जेल भेजने वालों को धमकाया

भले ही जस्टिस सतभाई का तबादला कर दिया गया है, लेकिन इसके पीछे शरद पवार का बड़ा हाथ माना जा रहा है। पवार ने अनिल देशमुख को जेल भेजने वालों को धमकाते हुए कीमत चुकाने की बात कही थी। उन्होंने यह बात बुधवार शाम नागपुर में एक रैली के दौरान कही।

उन्होंने कहा, “आप एक व्यक्ति के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं। वह (देशमुख) मुझसे मिले थे और कहा था कि पुलिस कमिश्नर ने शिकायत की है। जाँच पूरी होने तक वह इस पद पर नहीं रहना चाहते और गृह मंत्री का पद छोड़ रहे हैं। आपने उसे जेल भेज दिया। आपको देशमुख के हर दिन और घंटे की कीमत चुकानी होगी।”

देशमुख की गिरफ्तारी

महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख को ₹100 करोड़ के वसूली (मनी लॉन्ड्रिंग) केस में इसी महीने 2 नवंबर को करीब 12 घंटे तक पूछताछ करने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। 71 वर्षीय देशमुख ने करीब पाँच बार एनसीबी के नोटिस को नजरअंदाज कर दिया था। अधिकारियों के अनुसार, देशमुख पूछताछ के दौरान एजेंसियों का सहयोग नहीं कर रहे थे।

‘माफियाओं पर बुलडोजर चल रहा है…’: PM मोदी को भेंट की गई आल्हा-ऊदल की प्रतिमा, बोले – किसानों को उलझाए रखना कुछ दलों का आधार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (19 नवंबर, 2021) को महोबा में बुंदेलखंड क्षेत्र को कई योजनाओं की सौगात दी। सीएम योगी ने बनाफर वंश के राजा परमाल के सेनापति सदराज के पुत्रों आल्हा-ऊदल की प्रतिमा देकर उनका स्वागत किया। जल संकट को दूर करने के लिए कई परियोजनाओं का उद्घाटन हुआ। अर्जुन सहायक परियोजना, रतौली वियर परियोजना, भवानी बाँध परियोजना और मझगाँव-मिर्च छिड़काव परियोजना की सौगात दी गई। 3250 करोड़ रुपए की इन परियोजनाओं से महोबा, हमीरपुर, बांदा और ललितपुर के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद दिलाया कि गुलामी के उस दौर में भारत में नई चेतना जगाने वाले गुरुनानक देव जी का आज प्रकाश पर्व भी है। देश और दुनिया के लोगों को गुरु परब की शुभकामनाएँ देते हुए उन्होंने ये भी याद दिलाया कि आज ही भारत की वीर बेटी, बुंदेलखंड की शान, वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की जयंती भी है। पीएम मोदी ने कहा कि बीते 7 वर्षों में हम कैसे सरकार को दिल्ली के बंद कमरों से निकालकर देश के कोने-कोने में लाए हैं, महोबा, इसका साक्षात गवाह है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये धरती ऐसी योजनाओं, ऐसे फैसलों की साक्षी रही है जिन्होंने देश की गरीब, माताओं-बहनों के जीवन में बड़े बदलाव किए हैं। उन्होंने याद किया कि कुछ वक्त पहले यहीं से उज्ज्वला योजना के दूसरे चरण की शुरुआत हुई थी और कुछ वर्ष पहले उन्होंने महोबा से ही देश की मुस्लिम बहनों से वादा किया था कि वो उन्हें तीन तलाक की कुप्रथा से मुक्ति दिलाएँगे – ये वादा भी पूरा हो चुका है। पीएम मोदी ने कहा कि दिल्ली और उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक शासन करने वालों ने बारी-बारी से बुंदेलखंड को उजाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

विपक्षी दलों के शासन की याद दिलाते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने बताया कि कैसे यहाँ के जंगलों, संसाधनों को माफिया के हवाले किया गया, ये किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने कहा कि अब इन्हीं माफियाओं पर बुलडोजर चल रहा है, तो कुछ लोग हाय-तौबा मचा रहे हैं। साथ ही चेताया कि ये लोग कितनी भी तौबा मचा लें, यूपी के विकास के काम, बुंदेलखंड के विकास के काम रुकने वाले नहीं हैं। पीएम मोदी ने कहा कि किसानों को हमेशा समस्याओं में उलझाए रखना ही कुछ राजनीतिक दलों का आधार रहा है। उन्होंने कहा कि ये समस्याओं की राजनीति करते हैं और हम समाधान की राष्ट्रनीति करते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों को ध्यान दिलाया कि केन-बेतवा लिंक का समाधान भी उनकी ही सरकार ने निकाला है। उन्होंने कहा कि दशकों तक बुंदेलखंड के लोगों ने लूटने वाली सरकारें देखी हैं, पहली बार बुंदेलखंड के लोग यहाँ के विकास के लिए काम करने वाली सरकार देख रहे हैं। इस कटु सत्य को कोई भुला नहीं सकता है कि वो उत्तर प्रदेश को लूटते नहीं थकते थे और हम काम करते-करते नहीं थकते हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि परिवारवादियों की सरकारों ने दशकों तक यूपी के अधिकतर गाँवों को प्यासा रखा है।

महोबा में पीएम मोदी ने कहा, “परिवारवादियों की सरकारें किसानों को सिर्फ अभाव में रखना चाहती थीं। वो किसानों के नाम से घोषणाएँ करते थे, लेकिन किसान तक पाई भी नहीं पहुँचती थी। जबकि पीएम किसान सम्मान निधि से हमने अब तक 1 लाख 62 हजार करोड़ रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजे हैं। हम बुंदेलखंड से पलायन को रोकने के लिए इस क्षेत्र को रोज़गार में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और यूपी डिफेंस कॉरिडोर भी इसका एक बहुत बड़ा प्रमाण है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महोबा के लोगों को जानकारी दी कि हमारी सरकार ने बीज से लेकर बाजार तक हर स्तर पर किसानों के हित में कदम उठाए हैं। आँकड़े गिनाते हुए उन्होंने बताया कि बीते 7 वर्षों में 1,600 से अधिक अच्छी क्वालिटी के बीज तैयार किए गए हैं, जिनमें से अनेक बीज कम पानी में अधिक पैदावार देते हैं। इसके बाद झाँसी में भी पीएम मोदी का कार्यक्रम है। आज ही पीएम मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की भी घोषणा की, जिसके बाद पंजाब में बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल हो रही है।

दिल्ली पुलिस ने जबरन साइन करवाया, मोहसिन दे रहा धमकी: सीलमपुर के पीड़ित दलित परिवार का दावा, मुस्लिम समूह ने किया था हमला

दिल्ली के सीलमपुर में 24 अक्टूबर 2021 को एक दो महीने के बच्चे और उसके पिता के साथ मारपीट की घटना हुई थी। इसका वीडियो सोशल मीडिया में काफी वायरल हुआ था। पीड़ित पक्ष का दावा है कि उन पर मामले को रफा-दफा करने का दबाव बनाया जा रहा। वे पु​लिस पर भी सहयोग नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं। साथ ही अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं। हालाँकि पुलिस इसे सामान्य घटना बता पीड़ित परिवार के दावों को नकार रही है।

दावा 1: मेरे पिता से जबरन साइन करवाया

इस मामले में आशु, रफीक, समीर और चाँद मोहम्मद नामजद आरोपित हैं। इनके हमले का शिकार बना परिवार दलित है। हमले में घायल हुए दीपक की लेडीज फुटवियर की दुकान है। उनके दो महीने के बेटे, भाई नवीन और 70 वर्षीय पिता रामस्वरूप को भी हमले के दौरान चोटें आई थी। ऑप इंडिया से बातचीत में दीपक ने दावा किया कि सीलमपुर पुलिस ने अपने हिसाब से एफआईआर दर्ज की और उनके पिता पर दबाव डालकर साइन करवा लिया। मामले को रफा-दफा करने के लिए उनके ऊपर दबाव बनाया जा रहा है। इसमें पुलिस के अलावा कुछ स्थानीय नेता और आपराधिक छवि के लोगों के शामिल होने का भी वे दावा करते हैं। हालाँकि अपने परिवार की सुरक्षा का हवाला दे उन्होंने इनका नाम बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने सीलमपुर के एसएचओ मनोज कुमार पर अभद्र व्यवहार का भी आरोप लगाया है।

दावा 2: शिकायतों पर कार्रवाई नहीं

दीपक ने बताया कि उनके भाई नवीन ने घटना के अगले दिन DCP को शिकायत पत्र दिया था। इसके बाद 30 अक्टूबर को दीपक ने खुद दिल्ली के उपराज्यपाल, DCP नार्थ ईस्ट दिल्ली और SHO सीलमपुर को शिकायत भेजी थी। उनका आरोप है कि इन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

दावा 3: मोहसिन बार-बार धमका रहा

दीपक के अनुसार आशु उर्फ़ आश मोहम्मद ने उनके घर में ईंट मारी थी। उसके भाई चाँद मोहम्मद ने हमले के दौरान उन्हें पकड़ रखा था। दीपक ने बताया कि इस घटना से पहले वे शांति से धंधा कर रहे थे। लेकिन अब उन्हें अपना परिवार खतरे में लगता है। उन्होंने कहा कि जेल से बाहर आने के बाद से समीर उर्फ़ मोहसिन बार-बार दुकान पर आकर उन्हें धमका रहा है। मिली जानकारी के अनुसार इस घटना के दो अन्य आरोपित रफीक और चाँद मोहम्मद की जमानत याचिका पर भी सुनवाई पूरी हो चुकी है। अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है।

‘भीम आर्मी की जरूरत नहीं’

दीपक का कहना है कि उनका परिवार अकेले लड़ाई लड़ रहा है। दलितों के नाम पर राजनीति करने वालों से उन्हें कोई मदद नहीं मिली है। भीम आर्मी को मुस्लिमों का समूह बताते हुए वे कहते हैं, मैं हिन्दू हूॅं। मुझे भीम आर्मी जैसे संगठनों की कोई जरूरत नहीं है।

पुलिस ने आरोपों को किया खारिज

दीपक के आरोपों को सीलमपुर पुलिस बेबुनियाद और झूठे बता रही है। SHO मनोज कुमार का कहना है कि मामले को बेवजह तूल देने के लिए अनर्गल बातें की जा रही। तथ्य को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। वे घटना में किसी तरह का सांप्रदायिक एंगल होने से इनकार करते हैं। साथ ही बताया कि पुलिस निष्पक्षता से इस मामले की जाँच कर रही है और घटना के सभी चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

दीपक के दावों के बाबत हमने पुलिस के उच्चाधिकारियों से सम्पर्क करने का भी प्रयास किया। DCP नार्थ ईस्ट दिल्ली ने फोन नहीं उठाया। ACP सीलमपुर का कहना है कि जिस SHO ने पहले ही दिन केस दर्ज कर न्यायसंगत धाराएँ लगाई उस पर ऐसा आरोप कोई कैसे लगा सकता है। ये कहना गलत है कि पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है। पुलिस ने वह सब कुछ किया है जो कानूनी रूप से उचित है। ऐसे में पीड़ित पक्ष ऐसा आरोप क्यों लगा रहा है ये समझ से परे है। DCP से बात होते ही हम इस खबर को अपडेट करेंगे।

कबूतरबाजी या पाकिस्तान की जीत का जश्न?

दिल्ली पुलिस के DCP नार्थ ईस्ट ने इस मामले में 27 अक्टूबर को ट्वीट कर कहा था कि घटना में कोई भी साम्प्रदायिक एंगल नहीं है। पुलिस इसे कबूतर उड़ाने को लेकर हुई सामान्य मारपीट बता रही है। ऑप इंडिया के पास इस मामले की FIR मौजूद है। इसके अनुसार आरोपित पक्ष कबूतरों को उड़ाने के लिए पत्थर मार रहे थे। जब वो पत्थर पीड़ित परिवार के घर में गिरे तो उन्होंने ऐसा करने से रोका। इसी बात ने तूल पकड़ा और मामला मारपीट तक जा पहुँचा। हालाँकि दीपक इससे इनकार कर रहे हैं। उनका दावा है कि हमले की वजह टी-20 क्रिकेट में पाकिस्तान की जीत का जश्न मनाने से रोकना है। इस हमले के विरोध में हिन्दू संगठन कलिंग राइट ग्रुप ने कड़ा एतराज दर्ज करवाया था। संगठन ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) से भी शिकायत की थी।