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ISIS से जुड़े ‘कुरान सर्किल’ के सदस्य शकील मन्ना को NIA ने किया गिरफ्तार : आतंकियों की भर्ती, फंडिंग और सीरिया भेजने के आरोप

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने आतंकी संगठन ISIS से कनेक्शन रखने वाले ज़ुहैब हमीद उर्फ़ शकील मन्ना को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपित शकील मन्ना कुरान सर्किल समूह का एक प्रमुख सदस्य भी है। मन्ना पर आतंकी समूहों के लिए धन जुटाने और मुस्लिम युवाओं को चरमपंथ की तरफ धकेलने का आरोप है। NIA ने यह जानकारी 17 नवम्बर 2021 को एक प्रेसनोट के माध्यम से दी है।

गिरफ्तार 32 वर्षीय शकील मन्ना बेंगलुरु का रहने वाला है। NIA ने इसके खिलाफ केस नंबर – RC 33 / 2020 / NIA . DLI के तहत केस दर्ज किया था। यह केस 19 सितम्बर 2020 में दर्ज हुआ था। इसमें शकील मन्ना के साथ तौकीर मोहम्मद, इरफ़ान नासिर और मोहम्मद शोएब को भी आरोपित किया गया था। NIA ने इस केस से अन्य तीन आरोपितों को पहले भी गिरफ्तार कर लिया था। इन सभी आरोपितों पर धारा 120 बी, 125 IPC के साथ UA (p) एक्ट के सेक्शन 17, 18 और 18 बी के तहत कार्रवाई की गई है। गिरफ्तार 32 वर्षीय शकील मन्ना पूर्वी बेंगलुरु शहर के तिलक नगर का रहने वाला है। उसे कम्प्यूटर की अच्छी जानकारी है।

ज़ुहैब मन्ना मुस्लिम युवाओं को भड़काने के लिए सीरिया की वीडियो दिखा कर वहाँ मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार की बात करके उन्हें भड़काता था। शकील मन्ना पिछले साल से ही फरार चल रहा था। पिछले वर्ष इसे दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतरर्राष्ट्रीय हवाई अड़े से 17 नवम्बर को गिरफ्तार किया गया था। उस समय मन्ना सऊदी अरब के दम्माम से वापस आया था। जाँच में यह भी प्रकाश में आया था कि क़ुरान सर्किल के माध्यम से मुस्लिम युवाओं को सीरिया भेजा गया था। बताया जा रहा है कि साल 2013 में आरोपित तौकीर मोहम्मद ने अपने साथियों संग सीरिया की यात्रा की थी। वहाँ उसने दाएश नेतृत्व को भारतीय मुस्लिमों के समर्थन की घोषणा की थी।

कुरान सर्किल की जाँच NIA ने केस नंबर RC-11/2020/NIA/DLI के तहत की थी। यह जाँच इस्लमिक स्टेट खोरासन से संबंधित थी। इसी जाँच के दौरान NIA ने बंगलुरु के डॉक्टर अब्दुर रहमान उर्फ़ डॉक्टर ब्रेव को गिरफ्तार किया था। अब्दुर रहमान सोशल मीडिया एप बनाया करता था। इन एप के माध्यम से वो सीरिया में ISIS लड़ाकों की भर्ती करता था।

जाँच के दौरान एक पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया था। इस मामले में हुए खुलासे के अनुसार अहमद अब्दुल, इरफ़ान नासिर और कुछ और लोग मिल कर एक समूह चला रहे थे। इस समूह का नाम हिज़्ब उत तहरीर था। इन सभी ने मिल कर एक ग्रुप बना रखा था जिसको इन्होने कुरान सर्किल का नाम दिया था। इस ग्रुप में आतंकी समूह ISIS से जुडी गतिविधियाँ संचालित की जाती थीं। NIA ने पिछले माह भी अहमद अब्दुल और इरफ़ान नासिर को तमिलनाडु के रामनाथपुरम और बेंगलुरु से गिरफ्तार किया था। अहमद अब्दुल बिजनेस एनालिस्ट के तौर पर चेन्नई में काम करता था। दूसरा आरोपित नासिर चावल का व्यापारी था।

रेप दोषियों को नपुंसक बनाने के लिए Pak संसद में बिल पारित, जमात-ए-इस्लामी के सांसद ने बताया- शरिया के खिलाफ

पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बुधवार (नवंबर 17, 2021) को संसद के संयुक्त सत्र में बलात्कारियों को सजा देने के लिए एक बिल पारित किया गया। इस विधेयक में केमिकल के जरिए बलात्कारी को नपुंसक बनाने की सजा का उल्लेख है। आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक 2021 में पाकिस्तान दंड संहिता, 1860 और आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1898 में संशोधन करने की बात है।

इसमें लिखा है, “केमिकल कास्ट्रेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे प्रधानमंत्री द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा विधिवत अधिसूचित किया जाता है। इससे एक व्यक्ति अपने जीवन में कभी भी संभोग करने में असमर्थ हो जाता है। इसे अदालत द्वारा दवाओं के माध्यम से निर्धारित किया जाता है। ये अधिसूचित मेडिकल बोर्ड द्वारा संचालित होता है।”

इस बिल के पारित होने के बाद से पाकिस्तान में कुछ संगठन विरोध कर रहे हैं। जमात-ए-इस्लामी के सांसद मुश्ताक अहमद ने इसे गैर-इस्लामी बताया और शरिया के विरुद्ध कहा। उनके मुताबिक बलात्कारी की सजा सरेआम लटकाए जाने की होनी चाहिए। नपुंसक बनाने का उल्लेख शरिया में नहीं मिलता।

बता दें कि पाकिस्तान में बलात्कारियों को सजा देने के लिए नए कानून पर विचार पिछले साल से हो रहा था। नवंबर 2020 में प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस कानून को बनाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके बाद खबरें आई थीं कि कैबिनेट की बैठक में पाकिस्तान के कानून मंत्रालय ने इस बिल का मसौदा पीएम के सामने पेश किया था।

उल्लेखनीय है कि साल 2018 में लाहौर में 7 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या और फिर लाहौर में ही मोटरवे गैंगरेप केस के बाद रेप के दोषियों को सख्त सजा देने की माँग उठ रही थी। पीटीआई सांसद फैसल जावेद खान ने दावा किया था कि नए कानून को जल्द ही पाकिस्तान की संसद में लाया जाएगा। अब उसी माँग को लेकर यह बिल पारित हुआ है।

मालूम हो कि केमिकल कास्ट्रेशन एक मेडिकल प्रक्रिया है। इसके तहत शख्स को ऐसा इंजेक्शन या दवाएँ दी जाती हैं जिससे उसकी यौन क्षमता खत्म हो जाती है ये इंजेक्शन व्यक्ति के हॉरमोन्स पर असर डालता है और वो किसी स्थिति में संभोग करने लायक नहीं बचता।

‘मेरी कामयाबी से जलते थे पति, गला दबाकर मारने की हुई कोशिश’: हीरोइन ने हीरो पति और उनके परिजनों पर कराई FIR

मराठी एक्ट्रेस स्नेहा चव्हाण ने अपने पति और अभिनेता अनिकेत विश्वासराव के खिलाफ मारपीट और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई है। स्नेहा ने पुणे के अलंकार पुलिस थाने में अपने पति अनिकेत और ससुरालवालों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

स्नेहा ने अपनी शिकायत में ये उल्लेख किया है कि उनके ससुराल वालों ने भी उनके साथ मारपीट की और गला घोंटकर उन्हें जान से मारने का भी प्रयास किया। रिपोर्ट में ये भी लिखा गया है कि स्नेहा का कहना है कि उनके पति अनिकेत विश्वासराव उनकी कामयाबी से जलते थे, उन्हें डर था कि फिल्म इंडस्ट्री में स्नेहा का नाम उनसे ज्यादा न हो जाए। इसके अलावा स्नेहा ने शिकायत में यह भी बताया कि वह अक्सर सभी के सामने स्नेहा का अपमान किया करते थे।

स्नेहा का आरोप है कि अनिकेत के पिता चंद्रकांत विश्वासराव और माँ अदिति विश्वासराव हर उस गलत चीज में उनका समर्थन करते थे, जो वह स्नेहा के साथ करते थे। फिलहाल, पुलिस ने स्नेहा की शिकायत पर अनिकेत और उनके माता-पिता के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है। इस मामले में किसी की गिरफ्तारी हुई है। बताया जा रहा है कि जल्द ही अनिकेत को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।

आपको बता दें कि स्नेहा और अनिकेत मराठी इंडस्ट्री का एक जाना माना नाम हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अनिकेत की पर्सनल लाइफ काफी सुर्खियों में रही है। अनिकेत करीब आठ साल तक हिंदी और मराठी टीवी एक्ट्रेस पल्लवी सुभाष के साथ रिलेशनशिप में रहे थे। जब दोनों अलग हुए तो उनके फैंस को बहुत बड़ा झटका लगा था।

दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया था। इन दोनों के अलग होने की खबरें काफी लंबे समय तक मीडिया की सुर्खियों में रही थीं। पल्लवी से रिश्ता टूटने के बाद साल 2018 में अनिकेत ने स्नेहा से शादी की। दोनों की शादी में केवल खास लोग ही शरीक हुए थे। दोनों को एक आइडल कपल के तौर पर देखा जाता था, लेकिन इस खबर ने इनके फैंस को हैरान कर दिया है।

‘सब जानते हैं कंगना को क्या-क्या चाटने से पद्मश्री मिला’: अब शिवसेना MP ने की अमर्यादित टिप्पणी, कॉन्ग्रेसी मंत्री ने बताया था- नचनिया

हाल ही में पद्मश्री से सम्मानित की गईं बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत पर शिवसेना सांसद कृपाल तुमाने ने अभद्र टिप्पणी की है। गुरुवार (18 नवंबर 2021) को उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा,

“महात्मा गाँधी जी अगर सत्ता के लालची होते तो उस समय प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति सब कुछ बन सकते थे। कंगना रनौत को क्या करके पद्म श्री मिला, किसके पाँव चाटने से, क्या-क्या चाटने से ये मिला है इसे दिल्ली के सभी सांसद, विधायक बहुत अच्छे से जानते हैं। दिल्ली में लॉबिंग करने वाले लोग भी जानते हैं। ऐसी लेडी के बारे में बोलना तुच्छपना होगा। ऐसी तुच्छ लेडी के बारे में मैं कुछ नहीं बोलना चाहूँगा।”

कॉन्ग्रेस के मंत्री ने कहा- नचनिया 

इससे पहले महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के मंत्री विजय वडेट्टीवार ने कंगना रनौत को ‘नचनिया’ कहा था। उन्होंने बुधवार (17 नवंबर 2021) को कहा, “वह महात्मा गाँधी पर टिप्पणी करने के लायक नहीं है। वह एक ‘नचनिया’ है, जिसे विवादास्पद लोगों में से एक माना जाता है। महात्मा गाँधी पर उनकी टिप्पणी सूरज पर थूकने के समान है। अगर आप सूरज पर थूकते हैं, तो थूक आप पर पड़ता है।”

सपा नेता कहा था- तलवे चाटने वाली

सपा नेता अबू आजमी ने कंगना को ‘तलवे चाटने वाली औरत’ बताते हुए कहा था कि उसे जेल भेज देना चाहिए।

कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता ने चरित्रहीन बताया

कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता विनय ओझा ने एक ट्वीट में लिखा था, “पुरस्कार भीख में मिल गया तो भिखारन ने सोचा होगा कि आजादी भी भीख में मिली होगी।” वहीं एक अन्य ट्वीट में ओझा ने लिखा था, “पद्मश्री को पाना इतना आसान नहीं, जितना आप सोच रहे हैं। बहुत मेहनत करनी पड़ती है… जब राजा चरित्रहीन होता है तब तवायफों के कोठे गुलजार होते हैं।”

उदित राज ने बताया मानसिक बीमार

कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने कंगना रनौत को मानसिक बीमार की संज्ञा दी थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्बोधित कर ट्वीट किया था, “मोदी सरकार ने मानसिक बीमार कंगना रनौत को पद्मश्री देकर संविधान, जनतंत्र और स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान किया है। पद्मश्री छीनकर इस पागल को गिरफ़्तार किया जाए।”

वरुण गाँधी ने देशद्रोही बताया

सांसद वरुण गाँधी ने भी कंगना के बयान पर अपनी आपत्ति जताई थी और कहा था कि इस सोच को देशद्रोह कहूँ या पागलपन, समझ में नहीं आता। उन्होंने यह बात कंगना के ‘भीख में मिली आजादी’ वाले बयान पर कही थी।

नवाब मलिक ने ड्रग्स से जोड़ा

एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा था, “मोहतरमा मलाणा क्रीम लेकर ज़्यादा बोल रही हैं। मलाणा क्रीम (हशीश- एक विशेष किस्म की ड्रग्स, जो हिमाचल में उगती है) का डोज ज्यादा हो गया है इसलिए उल-जुलूल की बातें कर रहीं हैं। हम माँग करते हैं कि केंद्र सरकार कंगना रनौत का पद्मश्री वापस ले।”

गौरतलब है कि हाल ही में कंगना ने एक पुरानी खबर शेयर की, जिसमें लिखा था कि किस तरह महात्मा गाँधी इस बात को लेकर राज़ी हो गए थे कि अगर सुभाष चंद्र बोस मिलते हैं तो उन्हें अंग्रेजों को सौंप दिया जाएगा। कंगना रनौत ने लिखा, “जिन्होंने सच में आज़ादी की लड़ाई लड़ी, उन्हें उन लोगों ने अपने मालिकों को सौंप दिया, जिनके खून में वो साहस, गर्मी और आग नहीं ही कि वो स्वतंत्रता के लिए लड़ सकें।” अभिनेत्री ने आगे लिखा कि भारतीयों पर अत्याचार करने वालों के विरुद्ध लड़ने का साहस न रखने वाले कुछ नेता सत्ता के भूखे थे, धूर्त थे। उससे पहले उन्होंने पूछा था कि जब दक्षिणपंथी लड़ कर लेने के लिए तैयार थे, तब आज़ादी कॉन्ग्रेस के भीख के कटोरे में क्यों डाली गई? साथ ही कहा था कि हमारे पास भौतिक आज़ादी तो थी, लेकिन 2014 में हमारी चेतना को आज़ादी मिली और एक मृत सभ्यता उठ खड़ी हुई, उसने अपने पंख लहराए।

‘महापंचायत में खलल पड़ी तो पीएम मोदी और सीएम योगी को यूपी में कदम नहीं रखने देंगे’: राकेश टिकैत ने दी धमकी

केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है और 26 नवंबर 2021 को इसके एक साल भी पूरे हो जाएँगे। इसके अलावा अगले साल यूपी में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। जिसके मद्देनजर किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की है। टिकैत ने धमकी दी है कि 22 नवंबर को लखनऊ में होने वाली किसान महापंचायत में किसी भी तरह का व्यवधान उत्पन्न होता है तो वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश में पैर नहीं रखने देंगे

गढ़ मुक्तेश्वर के कार्तिक मेले में हिस्सा लेने पहुँचे टिकैत बीजेपी पर जोरदार निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी को चुनना एक गलती थी यूपी के लोगों को कमल के फूल को खत्म कर देना चाहिए।

टिकैत ने ‘एक भूल, कमल का फूल’ नारा दिया। इस नारे को विस्तार से समझा जाय तो इसका मतलब यह है कि लोगों को दोबारा से बीजेपी को वोट देने की गलती नहीं करनी चाहिए।

अपने समर्थकों के साथ कार्तिक मेले में पहुँचे टिकैत ने मेले में समारोह के लिए बने मंच का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक पिपाशा को शांत करने के लिए किया। उन्होंने मंच से भड़काऊ भाषण दिया। जब इसको लेकर उनसे यह पूछा गया कि अपनी राजनीति चमकाने के लिए वह कार्तिक मेले का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं तो उन्होंने कहा, “मैं राजनीति के बारे में और कहाँ बात करूँगा? यदि मैंने राजनीतिक बयान दिया है तो आप मेरे खिलाफ केस दर्ज करने के लिए स्वतंत्र हैं। अगर कोई राजनीतिक बयान नहीं सुनना चाहता तो वो हमारी बैठकों में क्यों आ रहे हैं?” उल्लेखनीय है कि कार्तिक मेला बहुत ही प्रसिद्ध मेला है, जिसमें बड़ी संख्या में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लोग पहुँचते हैं।

उन्होंने राज्य की योगी सरकार को धमकी भी दी। टिकैत ने कहा, “उन्हें उत्तर प्रदेश में कई और जगहों का दौरा करने की आवश्यकता है। अगर वे लखनऊ में महापंचायत में खलल डालने की कोशिश करेंगे तो न तो प्रधानमंत्री और न ही मुख्यमंत्री यूपी में उतर पाएँगे। विधानसभा चुनाव की तरफ इशारा करते हुए टिकैत ने कहा कि सीएम अपनी रैलियाँ कर रहे हैं और हम अपनी रैलियाँ कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव

अगले साल 2022 की शुरुआत में ही उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होना तय है। इसी के मद्देनजर राजनीतिक पार्टियों ने प्रचार करना शुरू कर दिया है। चूँकि उत्तर प्रदेश जनसंख्या की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य है, इसलिए यह लोकसभा चुनाव में इसकी काफी अहमियत होती है। यूपी चुनाव के रिजल्ट राजनीतिक पार्टियों को 2024 के लिए एजेंडा तय करने में मदद करते हैं।

‘पॉक्सो एक्ट में स्किन-टू-स्किन टच जरूरी नहीं’: SC ने पलटा बॉम्बे HC का फैसला, कहा- ऐसा हुआ तो ग्लव्स पहनकर दुष्‍कर्म करने वाले बच जाएँगे

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (18 नवंबर 2021) को बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को पलटते हुए बड़ा फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया था कि यौन उत्‍पीड़न के लिए स्किन-टू-स्किन टच होना जरूरी है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्‍बे हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा है कि पॉक्‍सो एक्‍ट में स्‍किन टू स्किन टच जरूरी नहीं है। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह नहीं कहा जा सकता है कि यौन उत्‍पीड़न की मंशा से कपड़े के ऊपर से बच्‍चे के संवेदनशील अंगों को छूना यौन शोषण नहीं है। अगर ऐसा कहा जाएगा तो इससे कानून का मकसद ही पूरी तरह से समाप्‍त हो जाएगा, जिसे बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाने का काम किया गया है।

सुनवाई के दौरान शीर्ष कोर्ट ने कहा कि इस परिभाषा को मान लिया गया तो फिर ग्लव्स पहनकर दुष्‍कर्म को अंजाम देने वाले लोग अपराध से बच जाएँगे। जो बेहद अजीब स्थिति होगी। नियम ऐसे होने चाहिए कि वे कानून को मजबूत करें न कि उनके मकसद को ही खत्म करने का काम करे।

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्‍बे हाई कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए आरोपित को 3 साल की सजा सुनाई है। बता दें कि बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ द्वारा पारित विवादास्पद फैसले के खिलाफ एजी केके वेणुगोपाल द्वारा एक याचिका दाखिल की गई थी।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने आदेश में कहा था कि किसी नाबालिग के ब्रेस्ट को बिना ‘स्किन टू स्किन’ कॉन्टैक्ट के छूना POCSO एक्ट के तहत यौन शोषण की श्रेणी में नहीं आएगा बल्कि IPC की धारा 354 के तहत छेड़छाड़ का अपराध माना जाएगा। अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने सुनवाई के दौरान तर्क दिया कि आईपीसी की धारा-354 एक महिला से संबंधित है न कि 12 साल के बच्चे के लिए, जैसा कि इस मामले में है। पॉक्सो एक विशेष कानून है जिसका उद्देश्य उन बच्चों की रक्षा करना है। ऐसे में कोई यह नहीं कह सकता किआईपीसी की धारा-354 की प्रकृति में समान है।

बॉम्‍बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने यौन उत्‍पीड़न के एक आरोपित को यह टिप्‍पणी करते हुए बरी कर दिया था कि अगर आरोपित और पीड़िता के बीच सीधा स्किन टू स्किन संपर्क नहीं है, तो पॉक्सो एक्‍ट के तहत यौन उत्पीड़न का कोई अपराध नहीं बनता है। हालाँकि हाई कोर्ट के इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। साथ ही भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने मामले के आरोपित को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब माँगा था।

‘ममता बनर्जी की पैंटी में आग, मायावती आदमी जैसी’: गंदी बातों का ‘वीर’ है ये कॉमेडियन, सेक्स का ‘दास’, रेप भी इसे लगता है फनी

कुछ दिन पहले अमेरिका के जॉन एफ केनेडी सेंटर में खड़े होकर कथित कॉमेडियन वीर दास ने अपने वनलाइनर्स से जमकर भारत विरोधी प्रोपगेंडा फैलाया था। 7 मिनट तक उसने देश की पत्रकारिता, यहाँ की राजनीति, नारी की इज्जत, प्रधानमंत्री मोदी, लखीमपुर खीरी जैसे स्थानीय मुद्दे सब पर सवाल खड़े किए। उसकी वीडियो के सामने आने के बाद भारत में कई जगह उसके विरुद्ध शिकायतें हुईं और लोगों ने भारत का अपमान करने के आरोप में उसे सजा देने की माँग की।

इन सबके अलावा सोशल मीडिया पर उसके कुछ पुराने पोस्ट और ट्वीट सोशल मीडिया पर सामने आए जिसने दर्शाया कि वो वीर दास जो भारत को बलात्कारियों का देश बताता है वो असल में खुद महिलाओं पर भद्दी टिप्पणियाँ करने से कभी गुरेज नहीं करता। उसने न किसी की माँ को उलटा बोलने पर शर्म आती है, न महिलाओं के अंगों पर।

वीर दास ने साल 2010 से ही सोशल मीडिया पर अपनी गंदे विचार पोस्ट करने शुरू कर दिए थे। खबर में जोड़े गए ट्वीट्स में देख सकते हैं कि महिलाओं की छाती से लेकर ममता बनर्जी की पैंटी तक पर वीर दास ने कैसे भद्दी कॉमेडी की हुई है। 

उसकी कॉमेडी की एक वीडियो है जिसमें उसने यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री और दलित नेता मायावती को मर्दों जैसा बताया। उनकी आवाज को पेंगुइन जैसा कहा। 

इतना ही नहीं वीर दास के मन में बुजुर्ग महिलाओं के प्रति कितनी इज्जत है इसका मालूम भी उनके ट्वीट से चलता है जिसमें उसने लिखा है कि उसकी 17 घंटे काम करने के बाद उसकी आँख दादी माँ की छाती जैसी हो गई है।

उसका एक ट्वीट एयरपोर्ट पर घोषणा करने वाली महिला के लिए भी है। जिसमें उसने लिखा, “मैं चाहता हूँ कि कोई एयरपोर्ट पर अनाउंसमेंट करने वाली महिला के साथ सेक्स करना शुरू करे और बीच में रुक जाए ताकि वो बोल सके- कृपया ध्यान दीजिए।”

दिलचस्प बात ये है कि देश की आम महिलाओं से लेकर प्रतिष्ठित पदों पर रहने वाली महिलाओं को लेकर भद्दी राय देने वाले वीर दास आज भारत के लिबरल धड़े में सबसे मशहूर हैं। खुलकर उनकी देशविरोधी कविता पर उनको समर्थन दिया जा रहा है और केवल वीर दास ही नहीं…ऐसे तमाम कॉमेडियन हैं जिनकी भाषा हमेशा भारत विरोधी और महिला विरोधी नोटिस की गई। 

उदाहरण के लिए तन्मय भट्ट का ट्वीट देखिए। एक छोटी बच्ची को लेकर ये राय रखते हैं कि अगर वो उनके सामने नंगी आ जाए तो उनके दिमाग में चलेगा…”हा हा- मैं तुम्हारे b***s देख लिए।” संजय राजौरा भी एक कॉमेडियन ही हैं जिनपर एक युवती ने यौन शोषण का आरोप लगाया था और बताया था कि कैसे संजय ने अपने दोस्तों के सामने शेखी बघारते हुए उन्हें शर्मिंदा किया था।

सलमान खुर्शीद की किताब पर रोक लगाने से हाई कोर्ट का इनकार, हिंदुत्व की तुलना ISIS और बोको हरम से करने पर बढ़ा विवाद

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने एक किताब लिखी, जिसका नाम ‘सनराइज ओवर अयोध्या: नेशनहुड इन आवर टाइम्स’ है। किताब प्रकाशित हो चुकी है। इस किताब में खुर्शीद की हिंदुओं के प्रति नफरत साफ देखने को मिली है। किताब के जरिए उन्होंने हिंदुत्व की तुलना खतरनाक इस्लामिक आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट और बोको हरम से की। इसी मुद्दे पर खुर्शीद के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर पुस्तक पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाते हुए उस पर रोक लगाने की माँग की गई, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

कोर्ट ने इस मामले में बुधवार को इस मामले में सुनवाई करते हुए एकतरफा फैसला देने से इनकार कर दिया। सलमान खुर्शीद द्वारा लिखी गई विवादित पुस्तक के खिलाफ हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर हिंदू भावनाओं को आहत करने के मामले में ‘सनराइज ओवर अयोध्या’ नामक किताब के प्रकाशन, प्रसार और बिक्री को रोकने की माँग की थी।

इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल और सीएम अरविंद केजरीवाल को भी पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता पर हिंदू धर्म को बदनाम करने का आरोप लगाया है। याचिका में ये भी बताया गया है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में विधानसभा चुनाव से ऐन पहले इस तरह की किताब के जरिए मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश की जा रही है।

कोर्ट ने क्या कहा?

इस मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए एडिशनल जज प्रीती परेवा ने किताब पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “प्रथम दृष्टया अदालत की राय में ऐसा कोई मामला नहीं बनता है कि इस पर एकतरफा आदेश दिया जाय। इसलिए इस मामले को खारिज किया जाता है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि लेखक को किताब लिखने और उसे प्रकाशित करने का अधिकार है। न्यायाधीश ने कहा, “इसके अलावा, वादी यह स्थापित करने में विफल रहा है कि सुविधा का संतुलन उसके पक्ष में है। इसलिए, इस स्तर पर अंतरिम एकतरफा राहत के लिए निवेदन को अस्वीकार कर दिया गया है।”

कोर्ट ने कहा कि लेखक और प्रकाशक को किताब लिखने और प्रकाशित करने का अधिकार है। जस्टिस परेवा ने आगे कहा, “वादी यह साबित करने में असफल रहा है कि उसे किताब या उसके कथित विवादित हिस्से से उसे असुविधा हो रही है। दूसरी ओर रोक लगाए जाने से प्रकाशकों को कठिनाई के साथ ही लेखक के भाषण और अभिव्यक्ति के अधिकार का हनन होगा।”

गौरतलब है कि सलमान खुर्शीद ने अपनी नई किताब में हिंदुत्व की तुलना आतंकी संगठन आईएसआईएस से की थी। वहीं हमेशा की तरह इस बार भी कॉन्ग्रेस पार्टी ने उनके बयान से किनारा करते हुए इसे उनका निजी विचार करार दिया है।

असम के CM सरमा ने उल्फा के साथ बातचीत के संबंध में TOI की खबर को बताया फर्जी, कहा- देश की संप्रभुता से समझौता नहीं

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने फेक न्यूज प्रकाशित करने के लिए टाइम्स ऑफ इंडिया को फटकार लगाई है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस खबर में दावा किया है कि असम सरकार उल्फा (आई) आतंकवादियों के साथ बातचीत करने और संप्रभुता की माँग सहित अन्य मुख्य मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है।

सरमा ने टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट की तस्वीर शेयर करते हुए कहा कि वह इस तरह के दावों को देखकर हैरान हैं।

सरमा ने गुरुवार (18 नवंबर, 2021) को ट्वीट किया, “कोई भी मुख्यमंत्री भारत की संप्रभुता पर किसी के साथ चर्चा नहीं कर सकता है। यह बातचीत करने के लायक नहीं है। हम सभी भारतीय, चाहे हमारे पद कुछ भी हों, भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए यहाँ हैं। मैं इस खबर का पुरजोर खंडन करता हूँ। यह फर्जी है।” टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार (17 नवंबर 2021) को कहा कि उल्फा (आई) की संप्रभुता की मूल माँग पर चर्चा करनी होगी।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 1979 में अविभाजित उल्फा की स्थापना के बाद पहली बार राज्य के एक मुख्यमंत्री ने उल्फा की मूल माँग पर सकारात्मकता के साथ चर्चा करने का साहस किया। सरमा से पहले के मुख्यमंत्री ने या तो सैन्य विकल्प चुना था या इस मुद्दे को संबोधित करने से कतराते थे। इसमें कहा गया है कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने 2005 में एक बार कहा था कि केंद्र ‘मुख्य मुद्दों’ पर चर्चा के लिए तैयार है। पद ग्रहण करने के तुरंत बाद, सीएम सरमा ने कहा था कि उल्फा से निपटने के लिए एक नए दृष्टिकोण की जरूरत है।

सितंबर में, सरमा ने कहा था कि उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के साथ बात की थी और शांति वार्ता शुरू करने के लिए उल्फा प्रमुख परेश बरुआ से बात करने की अनुमति ली थी। उन्होंने आगे स्पष्ट किया था कि यह शुरुआती स्तर पर है और इससे कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि गृह मंत्रालय ने उनसे कहा है कि उल्फा के साथ किसी भी तरह का संवाद एक स्ट्रक्चर्ड डायलॉग होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों में असम में कई विद्रोही समूहों के साथ शांति प्रक्रिया पर सफलतापूर्वक बातचीत हुई है। जनवरी 2020 में, गृह मंत्री अमित शाह ने बोडो समूहों के साथ शांति समझौता किया था। इसके बाद, नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के सभी चार गुटों के 1600 से अधिक कार्यकर्ताओं ने अपने हथियारों को सरेंडर कर दिया था। इस ऐतिहासिक घटना के बाद समाज में उनका स्वागत किया गया। इस साल सितंबर में, छह विद्रोही समूहों ने केंद्र के साथ कार्बी शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे कार्बी-आंगलोंग क्षेत्र में दशकों से चल रही हिंसा और अशांति का अंत हुआ।

चाइल्‍ड पोर्नोग्राफी के 100 देशों से जुड़े तार, 3 साल में 24 लाख केस: जानिए 76 शहरों में CBI छापे के बाद क्यों मची हलचल

चाइल्ड पोर्नोग्राफी को लेकर CBI ने बड़ी कार्रवाई की है। देश के 14 प्रदेशों-केंद्रशासित प्रदेशों के के 76 शहरों में जाँच एजेंसी ने छापे मारे हैं। अब तक कुल 20 लोगों को हिरासत में लिया है। सीबीआई ने 23 अलग-अलग मामलों में 83 आरोपितों के विरुद्ध केस भी दर्ज किया है। छापेमारी की की कार्रवाई मंगलवार (16 नवम्बर 2021) को की गई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सीबीआई की यह छापेमारी आंध्र प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार, ओडिशा, तमिलनाडु, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में हुई। छापेमारी के दौरान ओडिशा के ढेनकनाल जिले में CBI टीम पर हमला भी किया गया। स्थानीय पुलिस ने इस हमले से CBI टीम को किसी तरह बचाया।

CBI के रडार पर कई विदेशी नागरिक भी हैं। शुरुआती जाँच में 50 से अधिक ग्रुप और रैकेट से जुड़े 5 हजार से अधिक लोगों की जानकारी मिली है। इस रैकेट के तार 100 देशों में जुड़े पाए गए हैं। इस छापेमारी में खुलासा हुआ है कि तमाम लोग चाइल्ड पोर्नोग्राफिक कंटेंट का धंधा कर रहे हैं। वो इसे बना कर विभिन्न प्लेटफॉर्म पर इसको बेचते हैं। मुगलसराय निवासी आरोपित सूरज के मोबाइल से सीबीआई को इस रैकेट से जुड़े पुख्ता सबूत मिले। सीबीआई की टीम सूरज के घर लगभग 4 घंटे तक रही थी।

सीबीआई के अनुसार सभी आरोपी आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट और शेयर करने के लिए वेबपेज का सहारा लेते हैं। इस अपराध को रोकने के लिए सीबीआई अब मीडिया वेबसाइट्स और होस्टिंग प्लेटफॉर्म के साथ इस मुद्दे को उठाने पर विचार कर रही है। अब तक की जाँच के अनुसार इस रैकेट में पाकिस्तान के 36, कनाडा के 35, अमेरिका के 35, बांग्लादेश के 31, श्रीलंका के 30, नाइजीरिया क 28, अजेरबैजान के 27, यमन के 24 और मलेशिया के 22 संदिग्ध शामिल मिले हैं।

इस अपराध में शामिल आरोपितों के बैंक अकाउंट चाइल्ड पोर्नोग्राफी दिखाने वाली साइटों पर उपलब्ध हैं। यहाँ भुगतान के बदले ये अश्लीलता परोसते हैं। जाँच एजेंसी इस मामले में यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अश्लील इमेज आती कहाँ से है। इसके लिए वो इंटरनेशनल चाइल्ड सेक्सुअल एक्सपोलइटेशन डाटाबेस के साथ भी समन्वय बना रही है।

इंटरपोल की रिपोर्ट अनुसार साल 2017 से 2020 के मध्य 3 वर्षों में भारत में यौन उत्पीड़न के शिकार बच्चों के 24 लाख से अधिक केस आए हैं। इसमें 80 प्रतिशत बच्चियाँ हैं, जिनकी उम्र 14 साल से कम है। इसी के साथ बाल यौन शोषण से जुड़े वीडियो देखने वालों की भी संख्या इंटरनेट पर तेजी से बढ़ी है। एक अनुमान के अनुसार सर्च इंजन पर हर रोज 1 लाख 16 हजार से ज्यादा सवाल चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े होते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार साल 2020 में इंटरनेट पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी से संबंधित लगभग 18.4 मिलियन रिपोर्ट मिली है। इनमे से बच्चों को सेक्सुअली अब्यूज करते हुए लगभग 45 मिलियन फोटो और विडियो शामिल हैं।