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अखिलेश के जिन्ना वाले बयान की लीपापोती में उतरे ऑल्ट न्यूज और द वायर, बता डाला- फर्जी खबर जबकि वास्तव में बयान मौजूद

वामपंथी प्रोपेगेंडा ‘फैक्ट-चेक’ बेबसाइट Alt News अब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बचाव में उतर आया है। इस वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल द्वारा सपा प्रमुख के बचाव में लिखे गए एक आर्टिकल में कहा गया कि अखिलेश के बयान को गलत तरीके से और संदर्भ से अलग हटकर लिया गया। बता दें कि पाकिस्तान के संस्थापक और भारत के विभाजन के कर्ता-धर्ता मोहम्मद अली जिन्ना का महिमामंडन करने को लेकर अखिलेश यादव को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।

9 नवंबर, 2021 को Alt News ने अखिलेश यादव के जिन्ना वाले बयान को ‘फेक न्यूज’ साबित करने के लिए एक आर्टिकल पब्लिश किया। Alt News ने दावा किया कि यादव ने यह नहीं कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना ने भारत को आजादी दिलाई थी, क्योंकि उन्होंने सिर्फ जिन्ना का नहीं, बल्कि सरदार पटेल और अन्य लोगों के नाम का भी उल्लेख किया था। Alt News का आर्काइव वर्जन यहाँ पर देखा जा सकता है।

9 नवंबर की रिपोर्ट में अखिलेश यादव के जिन्ना वाले बयान को व्हाइटवॉश किया

जैसे ही Alt News ने अखिलेश के जिन्ना के बयान की ‘फैक्ट-चेक’ की, अल्ट्रा-लेफ्ट प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ ने भी इसको फॉलो किया। 11 नवंबर को इसने ऑल्ट न्यूज़ द्वारा किए गए ‘फैक्ट-चेक’ को प्रकाशित किया। ‘द वायर’ रिपोर्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहाँ देखा जा सकता है।

अखिलेश यादव की जिन्ना टिप्पणी पर 11 नवंबर को ‘द वायर’ द्वारा प्रकाशित ‘फैक्ट-चेक’

यहाँ दिलचस्प बात यह है कि समाजवादी पार्टी प्रमुख को क्लीन चिट देने की जल्दबाजी में ऑल्ट न्यूज़ और द वायर ने स्वीकार किया कि अखिलेश यादव ने वास्तव में वही टिप्पणी की थी, जिसके लिए उनकी आलोचना की जा रही है। ऑल्ट न्यूज़ और वायर के लॉजिक के अनुसार, यदि आप भारत के असली स्वतंत्रता सेनानियों में उनका नाम शामिल करते हैं तो जिन्ना की प्रशंसा करना सही हो जाता है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा 31 अक्टूबर को समाजवादी विजय रथ यात्रा के दौरान एक रैली को संबोधित करते हुए मुहम्मद अली जिन्ना का महिमामंडन करने के बाद विवाद छिड़ गया था। बैठक यूपी के हरदोई जिले में आयोजित की गई थी, जहाँ समाजवादी पार्टी प्रमुख को जिन्ना की प्रशंसा करते देखा गया था।

सरदार पटेल को याद करने के बहाने अखिलेश यादव ने कहा था, “सरदार पटेल जमीन को पहचानते थे और जमीन को देखकर फैसले लेते थे, इसीलिए उन्हें आयरन मैन के नाम से जाना जाता है। सरदार पटेल जी, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और जिन्ना एक ही संस्था में पढ़कर बैरिस्टर बने थे। वह बैरिस्टर बने, उन्होंने आजादी दिलाई। अगर उन्हें किसी भी तरह का संघर्ष करना पड़ा होगा तो वे पीछे नहीं हटे।”

जैसे ही अखिलेश यादव की उनके विवादास्पद बयान के लिए व्यापक आलोचना होने लगी, Alt News समाजवादी पार्टी के नेता का बचाव करने और उन्हें भाजपा के प्रोपेगेंडा के शिकार के रूप में चित्रित करने के लिए दौड़ पड़ा। इसने बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय और कंचन गुप्ता द्वारा पोस्ट किए गए ट्वीट्स का हवाला देते हुए दावा किया कि अखिलेश यादव के बयान को ‘संदर्भ से बाहर’ लिया गया था।

Alt News का लॉजिक

Alt News के अनुसार, अखिलेश यादव ने जिन्ना के साथ-साथ बाकी स्वतंत्रता सेनानियों का भी जिक्र किया था तो उनके दावे में कुछ गलत नहीं था। इसका कहना कि अमित मालवीय ने क्रॉप्ड वीडियो शेयर किया था, जिसमें मोहम्मद अली जिन्ना के भारत को स्वतंत्रता दिलाने की बात है। प्रोपेगेंडा वेबसाइट का कहना है कि भाषण के पूरे क्लिप में अखिलेश यादव को सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गाँधी के साथ जिन्ना का नाम लेते हुए सुना जा सकता है। ऑल्ट न्यूज़ ने दावा किया, “अपने भाषण में यादव ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में केवल जिन्ना का उल्लेख नहीं किया था। उनके बयान को क्लिप कर दिया गया और इसे गलत संदर्भ में प्रसारित किया जा रहा है।”

हालाँकि, Alt News के फैक्ट-चेक में एक समस्या है। वह यह है कि अगर अखिलेश यादव ने पहले सरदार पटेल और फिर दूसरे स्वतंत्रता सेनानियों का नाम लिया था तो इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने जिन्ना का जिक्र नहीं किया। जिन्ना के साथ स्वतंत्रता सेनानी का नाम लेने से सब OK नहीं हो जाता है। बता दें कि अखिलेश यादव के इस बयान को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘शर्मनाक’ और ‘तालिबानी मानसिकता’ वाला बताया था और इसके लिए अखिलेश यादव को माफी माँगने की बात कही थी। वहीं, अखिलेश ने लोगों को फिर से इतिहास की किताबें पढ़नी की नसीहत दी थी।

इस बीच बरेली की एक अदालत के आदेश पर जिन्ना की तारीफ करने पर अखिलेश यादव के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। अदालत ने वकील वीरेंद्र गुप्ता की शिकायत पर सपा प्रमुख के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया। गुप्ता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस द्वारा मामला दर्ज करने से इनकार करने के बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इस पर संज्ञान लेते हुए एसीजेएम कोर्ट ने पुलिस को अखिलेश यादव के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया

‘किसान का बेटा है नीरज चोपड़ा इसलिए मोदी ने नहीं दिया पद्म पुरस्कार’ : जानें वामपंथियों के कुतर्क कहाँ हुए फेल

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 8 नवंबर को साल 2020 के पद्म पुरस्कारों से 141 हस्तियों को सम्मानित किया। इसमें 7 पद्म विभूषण, 16 पद्म भूषण और 118 पद्म श्री पुरस्कार थे। मोदी सरकार में दिए गए पद्म पुरस्कार अभूतपूर्व रहे। इन पुरस्कारों से देशवासियों ने उन विभूतियों के बारे में जाना जिनके बारे में अधिकतर लोगों ने पहले कभी सुना ही नहीं था। कई लोगों का मानना है कि अब पुरस्कार सुयोग्य लोगों को ही मिल रहे हैं। इसे एक सकारात्मक बदलाव के तौर पर भी देखा जा रहा है।

हालाँकि, हर बार की तरह इस बार भी कुछ लोग ऐसे हैं जो संतुष्ट नहीं दिख रहे। इन लोगों में सबसे आगे वामपंथी बुद्धिजीवी खड़े हैं। सबसे पहले इन वामपंथियों ने कंगना रनौत को पद्म श्री पुरस्कार देने पर आपत्ति जताई थी। उनके अनुसार कंगना रनौत अक्सर नफरत भरे बयान देती हैं। अब उसी समूह को मोदी सरकार का विरोध करने का एक नया मुद्दा मिल गया है।

ये नया मुद्दा टोक्यो ओलंपिक्स के गोल्ड मेडेलिस्ट नीरज चोपड़ा से जुड़ा है। वामपंथी नीरज के कंधे पर बंदूक रखकर मोदी सरकार को घेर रहे हैं। खुद को लिबरल, सेकुलर और एंटी भक्त बताने वाले राजेश कुमार ने लिखा है, “नीरज चोपड़ा को पद्म पुरस्कार इसलिए नहीं मिला क्योंकि वो किसान का बेटा है और वो किसानों की माँगों का समर्थन कर रहा है।”

इसी प्रकार एक अन्य लिबरल और सेक्युलर ने अलग सवाल किया है। ReasonYourSelf नाम के इस हैंडल से सवाल किया गया है कि नीरज चोपड़ा को पद्म पुरस्कार न देने की वजह उसके द्वारा धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों का समर्थन करना है। इस ट्वीट में भी नीरज चोपड़ा के किसान परिवार से होने की बात कही गई है।

एक अन्य यूजर विवेक के अनुसार सोनू सूद और नीरज चोपड़ा पद्म पुरस्कारों के लिए सबसे योग्य हैं। इस ट्वीट में विवेक ने सोनू सूद और नीरज चोपड़ा को टैग भी किया है।

लगभग इसी प्रकार की बातें कई अन्य यूजर ने लिखी हैं। उसमें से कई ने नीरज चोपड़ा को पद्म पुरस्कार न देने पर सवाल खड़े किए हैं। कुछ ने कंगना रनौत को पद्म पुरस्कार देने पर आपत्ति जताई है।

अब यहाँ बता दें कि ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले नीरज चोपड़ा का पद्म पुरस्कार न पाना चौंकाने वाला जरूर है। लेकिन उसके पीछे जो कारण है वो बेहद मजबूत और तार्किक है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि यह पुरस्कार 8 नवंबर 2020 के नामित हैं। नीरज चोपड़ा ने ओलंपिक खेलों में पदक 2021 में जीता था। इन पुरस्कारों के विजेताओं के नामों की घोषणा 26 जनवरी 2021 (गणतंत्र दिवस) पर ही की जा चुकी थी। उधर टोक्यो ओलम्पिक खेलों का आयोजन जुलाई 2021 से अगस्त 2021 के बीच हुआ था।

इसलिए 7 अगस्त 2021 को भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीतने वाले नीरज चोपड़ा का नाम काफी पहले 26 जनवरी को ही घोषित लिस्ट में नहीं जोड़ा जा सकता था। संभावना इस बात की जताई जा रही है कि अगले वर्ष के पदम् पुरस्कारों में नीरज चोपड़ा का नाम हो सकता है। वो पुरस्कार साल 2021 में उपलब्धि हासिल करने वालों के लिए होंगे। ऐसे में नीरज चोपड़ा के नाम पर मोदी सरकार की आलोचना का कोई आधार नहीं दिख रहा है।

आलोचकों को यहाँ यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि मोदी सरकार द्वारा नीरज चोपड़ा को पहले ही मेज़र ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। यह भारत में खिलाडियों के लिए सर्वोच्च सम्मान है। इस वर्ष इस पुरस्कार के लिए कुल 11 खिलाड़ियों का चयन किया गया है। यह पुरस्कार 13 नवम्बर 2021 (शनिवार) को राष्ट्रपति द्वारा दिए जाएँगे।

अखिलेश यादव की सरकार में मंत्री रहे गायत्री प्रजापति को गैंगरेप में उम्रकैद, ₹2 लाख जुर्माना

समाजवादी पार्टी की सरकार में परिवहन, खनन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभागों में मंत्री का दायित्व संभालने वाले गायत्री प्रसाद प्रजापति को चित्रकूट के चर्चित गैंगरेप मामले में एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। प्रजापति के साथ मामले के अन्य दोषी आशीष शुक्ला और अशोक तिवारी को भी उम्रकैद की सजा दी गई है। तीनों दोषियों पर 2-2 लाख रुपए का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है।

इससे पहले पूर्व मंत्री को लखनऊ की एक अदालत ने 10 नवंबर को सामूहिक बलात्कार का दोषी करार दिया था। चित्रकूट की एक महिला से गैंगरेप के मामले में लखनऊ के एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट ने उन्हें दोषी पाया था। उनके साथ साथी अशोक तिवारी और आशीष शुक्ला को भी इस मामले में दोषी पाए गए थे। वहीं दूसरी तरफ विकास वर्मा, रूपेश्वर, अमरेंद्र सिंह, पिंटू और चंद्रपाल को कोर्ट ने बरी कर दिया था।

बता दें कि गायत्री प्रसाद प्रजापति पर एक महिला ने आरोप लगाया था कि जब वो पूर्व मंत्री से उनके आपस पर मिलने पहुँची थीं तो नशा देकर उनकी नाबालिग बेटी के साथ गैंगरेप किया गया। साथ ही किसी को बताने पर जान से मरने की धमकी भी दी। पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ और 824 पन्नों की चार्जशीट दायर की गई थी। बाद में कोर्ट की सुनवाई के समय 17 गवाह और पुलिस की चार्जशीट के आधार पर गायत्री प्रजापति को दोषी पाया गया

अफगानिस्तान: नंगरहार प्रांत की मस्जिद में जोरदार विस्फोट, तीन की मौत 15 घायल

अफगानिस्तान में तालिबान शासन शुरू होने के बाद भी बम धमाकों से मुल्क को छुटकारा नहीं मिला। अराजकता और अस्थिरता के साथ-साथ बम धमाके अफगानिस्तान का नसीब बन गया है। हालात ये है कि वहाँ से आए दिन ब्लास्ट की खबरें आ रही हैं। इसी क्रम में शुक्रवार (12 नवंबर 2021) को नंगरहार प्रांत के स्पिनघर जिला स्थित एक मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान ब्लास्ट हुआ, जिसमें कम-से-कम तीन लोगों की मौत की खबर है। इस धमाके में कई अन्य लोगों के घायल होने की भी खबर है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना में नमाज पढ़ा रहे मस्जिद के मौलवी सहित तकरीबन एक दर्जन लोग बुरी तरह से घायल हुए हैं। तालिबान के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत में बम ब्लास्ट की पुष्टि की है। अधिकारी ने कहा, “मैं स्पिन घर जिले में एक मस्जिद के अंदर जुमे की नमाज के दौरान विस्फोट की पुष्टि करता हूँ। इसमें मौत भी हुई है और लोग घायल भी हुए हैं।” नंगरहार प्रांत के सरकारी प्रवक्ता कारी हनीफ ने एपी समाचार एजेंसी को बताया कि ऐसा लगता है कि बम मस्जिद में रखा गया था।

वहीं, इलाके के रहने वाले अटल शिनवारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि विस्फोट स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 1:30 बजे (09:00 GMT) हुआ था। स्थानीय अस्पताल के एक डॉक्टर ने एएफपी को बताया कि इस धमाके में कम-से-कम तीन लोग मारे गए हैं, जबकि 15 लोग घायल हुए हैं। अभी तक इस धमाके की जिम्मेवारी किसी ने नहीं ली है, लेकिन इस्लामिक स्टेट पर संदेह जताया जा रहा है।

गौरतलब है कि इससे पहले 15 अक्टूबर को अफगानिस्तान के गुरुद्वारा दशमेश में हथियारबंद आतंकी घुस गए थे। इसके अलावा दक्षिण अफगानिस्तान के शहर कंधार में एक शिया मस्जिद में बम विस्फोट की घटना हुई थी। इसमें 16 लोगों के मारे गए थे। ये विस्फोट भी शहर की इमाम बारगाह मस्जिद में जुमे की नमाज के समय ही हुआ था।

इससे पहले 8 अक्टूबर को उत्तरी अफगानिस्तान के कुंदुज प्रांत में स्थित एक शिया मस्जिद में ब्लास्ट हुआ था, जिसमें कम-से-कम 100 लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। आशंका जताई गई थी कि वह हमला इस्लामिक स्टेट के आतंकियों ने किया है। उस दौरान स्थानीय लोगों ने बताया था कि विस्फोट शुक्रवार की नमाज के दौरान हुआ। शुक्रवार का दिन मुस्लिमों के लिए काफी अहम होता है।

गुरुग्राम में जहाँ खुले में होती थी नमाज वहाँ हिंदुओं ने बैठकर खाई मूँगफली, हिन्दू संगठनों ने कहा- यहाँ वॉलीबॉल कोर्ट बनाएँगे

हरियाणा के गुरुग्राम सेक्टर-12ए में खुले में हर जुमे नमाज पढ़े जाने से रोकने के लिए हिंदू संगठनों ने नई तरकीब निकाली है। आज (नवंबर 12, 2021) सुबह से ही हिंदू संगठन के लोग नमाज़ पढ़ने वाली जगह पर बैठकर मूँगफली खा रहे हैं। 

बता दें कि पिछली बार शुक्रवार (5 नवंबर 2021) को उसी जगह पर गोवर्धन पूजा आयोजित की गई थी। इसमें बीजेपी नेता कपिल मिश्रा भी शामिल हुए थे। इस दौरान यहाँ पर गोबर के उपले लगाए गए थे, जिसे हिंदू संगठनों ने हटाने नहीं दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हिंदू संगठनों का कहना है कि किसी भी कीमत पर नमाज नहीं होने देंगे। हिन्दू संगठनों का ये भी कहना है कि वो यहाँ पर वॉलीबॉल कोर्ट बनाएँगे

वहाँ पर बैठे एक शख्स ने कहा, “हम यहाँ चुपचाप बैठे हैं … लेकिन नमाज की अनुमति नहीं देंगे। हम यहाँ एक खेल की योजना बनाएँगे।” वहीं एक अन्य ने कहा, “हम नेट लगाएँगे… यहाँ वॉलीबॉल कोर्ट बनाएँगे (और) बच्चे खेलेंगे। नमाज नहीं होने देंगे, चाहे कुछ भी हो।”

बता दें कि हाल ही गुरुग्राम प्रशासन ने 8 स्थानों पर नमाज पढ़ने की अनुमति को रद्द कर दिया था। गुरुग्राम के प्रशासन ने यह आदेश मंगलवार (2 नवंबर, 2021) को वापस लेने की घोषणा की। जनता के विरोध प्रदर्शन के बाद यह फैसला लिया गया। स्थानीय लोग और कई हिंदू संगठनों ने इसके विरुद्ध आवाज़ उठाई थी, क्योंकि आमजनों को इससे परेशानी हो रही थी और घंटों ट्रैफिक जाम भी लग रहा था। कई अन्य इलाकों में भी स्थानीय लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई है। गुरुग्राम प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि उन जगहों पर भी यही कार्रवाई होगी।

उल्लेखनीय है कि पुलिस ने कुल 37 जगहों पर नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी थी। इसके विरोध में हिंदू महिलाओं के साथ बड़ी संख्या में लोग लगातार पाँच सप्ताह तक भजन-कीर्तन और नारेबाजी करते हुए सड़क पर निकल आए थे। विरोध करने की कड़ी में गुरुग्राम के सेक्टर-12-ए इलाके में पहुँचे हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों को गुरुग्राम पुलिस ने हिरासत में भी लिया था। 

ये है कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान: मंत्री बुजुर्ग को करता है ‘बेइज्जत’, दिव्यांग कर्मचारी को लाभ के बदले बेटी से माँगी जाती है ‘इज्जत’

राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार चल रही है। जब से यह सरकार बनी है आपसी मतभेद को लेकर ही चर्चा में रहती है। फिलहाल गहलोत कैबिनेट के विस्तार, उसमें सचिन पायलट के समर्थकों को जगह मिलेगी या नहीं मिलेगी, जैसी खबरों को लेकर मीडिया में चर्चा चल रही है। इन चर्चाओं के शोर में जिन जमीनी हकीकतों को दबा दिया जाता है, वह है राजस्थान की ध्वस्त कानून-व्यवस्था और मंत्री-अधिकारियों का मनमाना रवैया।

हालत यह है कि गहलोत सरकार के मंत्री जनता को बेइज्जत करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। इसका एक और नमूना बुधवार (10 नवंबर 2021) को देखने को मिला। रह्या के उद्योग विकास मंत्री परसादी लाल मीणा ने एक कार्यक्रम के दौरान मदद माँगने आए वृद्ध को डपटकर भगा दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है।

घटना राजस्थान के दौसा जिले के लालसोट कस्बे की लाडपुरा पंचायत की है। परसादी लाल मीणा एक प्रशासनिक अभियान में शामिल होने आए थे। मंत्री के आगमन का पता चलते ही करनपुरा गाँव के बुजुर्ग मितलाल अपने परिवार के साथ कार्यक्रम में पहुँच गए। उन्होंने मंत्री को बताया कि 2 साल पहले उनका छोटा बेटा बुद्धिप्रकाश काम की तलाश में महाराष्ट्र गया था। उसे वहाँ से आने नहीं दिया जा रहा है। जब भी वह गाँव वापस लौटने की बात करता है तो उसे हत्या की धमकी दी जाती है।

बुजुर्ग ने बताया कि इस संबंध में 10 दिसंबर 2019 को उन्होंने दो लोगों के खिलाफ शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 2 साल के समय की बात सुनते ही गुस्साए मंत्री ने चिल्लाते हुए कहा, “मैं क्या करूँ? क्या पिछले 2 साल से मरे हुए थे? बाहर निकलो।” इसके बाद उन्होंने उसे भगा दिया।

दिव्याँग की बेटी से माँगी अस्मत

अब राज्य के अधिकारियों का भी हाल देख लीजिए। राजस्थान के झुंझुनू में चतुर्थ श्रेणी के एक दिव्यांग कर्मचारी को 27 साल की सेवा पर मिलने वाले चयनित वेतनमान के लाभ के बदले राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने उसकी बेटी से अस्मत की माँग की। लाभ देने के एवज में राजस्व अपील अधिकारी के कार्यालय में काम करने वाले सीनियर असिस्टेंट गोपाल जोशी और चिरंजीलाल ने पहले लड़की से घूस माँगी। फिर 20 अक्टूबर को बुलाकर उसके साथ जबरदस्ती की। हद तो तब हो गई जब वहाँ पहुँचे राजस्व अपील अधिकारी ने उल्टे पीड़िता को ही मुँह बंद रखने की धमकी दी और कहा कि किसी से कुछ कहा तो उसके पिता को नौकरी से हटा देंगे।

इस मामले में पीड़िता ने 24 अक्टूबर को मामला दर्ज कराया। इसी तरह पीड़िता ने जयपुर में राजस्व विभाग के कर्मचारी भागीरथ यादव के खिलाफ बगड़ थाने में 23 अक्टूबर को रिपोर्ट दी थी। इसमें कहा था कि यादव ने काम करने के एवज में उसे मोबाइल नंबर पर कई बार गंदे मैसेज भेजे। शारीरिक संबंध बनाने को कहा।

आर्यन खान के लिए 500 पेड़ लगाएँगी जूही चावला, जमानत का बॉन्ड भी भरा था: NCB दफ्तर में हाजिर हुआ शाहरुख खान का बेटा

बॉलीवुड ऐक्टर शाहरुख खान के बेटे और ड्रग्स मामले में जमानत पर चल रहे आर्यन खान को जूही चावला ने ट्विटर पर जन्मदिन की बधाई दी है। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों की सामूहिक तस्वीर शेयर करते हुए एक खास संकल्प भी लिया। बता दें कि ड्रग्स मामले मे आर्यन की जमानतदार बनी थीं। जूही चावला शाहरुख खान की को-ऐक्टर और खास दोस्त हैं। वहीं, आज (12 नवंबर) अपने जन्मदिन पर आर्यन खान ने मुंबई के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के दफ्तर में हाजिरी भी दी।

जूही चावला ने अपने बच्चों और आर्यन की बचपन की तस्वीर शेयर कर जन्मदिन के बधाई संदेश में लिखा, “हैप्पी बर्थडे आर्यन। हमारी दुआएँ हमेशा तुम्हारे साथ हैं। ऊपरवाले का आशीर्वाद सदा तुम पर बना रहे और वह तुम्हारी रक्षा करे तथा तुम्हें राह दिखाए। लव यू। तुम्हारे नाम के 500 पेड़ लगाने का संकल्प लिया है।” इस तस्वीर में आर्यन खान अपनी बहन सुहाना खान और जूही के बच्चों- जाह्नवी, अर्जुन और अन्य के साथ दिख रहे हैं।

इधर जन्मदिन के मौके पर आर्यन खान को शुक्रवार (12 नवंबर 2021) को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के दफ्तर जाते हुए स्पॉट किया गया। बॉम्बे हाईकोर्ट से मिली जमानत की शर्तों में से में एक, आर्यन खान को हर हफ्ते एनसीबी दफ्तर में पेश होने को कहा गया था। इसी के चलते आर्यन खान दक्षिण मुंबई के एनसीबी दफ्तर में साप्ताहिक हाजिरी के लिए शुक्रवार को पहुँचे। आर्यन खान के साथ उनके वकील भी मौजूद थे।

आर्यन को 28 दिनों बाद जेल से जमानत मिली थी। एक्टर ने बेटे की रिहाई के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालाँकि, कोर्ट ने आर्यन को बेल तो दी, लेकिन उनके सामने 13 शर्तें भी रखीं। जूही चावला ने आर्यन खान की जेल से रिहाई में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वो आर्यन की जमानतदार बनीं और 1 लाख रुपए के जमानत बॉन्ड पर हस्ताक्षर की थीं।

आर्यन को एनसीबी ने 3 अक्टूबर को मुंबई से गोवा जा रहे क्रूज पर ड्रग्स पार्टी को लेकर हिरासत में लिया था। आर्यन के साथ उनके दोस्त अरबाज़ मर्चेंट और मुनमुन धमेचा को एनसीबी ने हिरासत में लिया था। बाद में इन सबको अरेस्ट कर लिया गया था। आर्यन पर ड्रग्स लेने के आरोप लगे हैं। एनसीबी हिरासत ख़त्म होने के बाद आर्यन को कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। उनकी ज़मानत पहले मुंबई की निचली अदालत और बाद में सेशंस कोर्ट ने रिजेक्ट कर दी थी। इसके बाद आर्यन खान ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। आर्यन कई दिनों तक मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद रहे थे।

‘हिंदू और हिंदुत्व दो अलग चीजें… हिंदुत्व में सिख और मुस्लिम को पीटा जाता है’ : खुर्शीद और अल्वी के बाद अब राहुल गाँधी ने उगला जहर

हिंदुत्व को समाज के सामने घृणित तरह से पेश करने वाले कॉन्ग्रेसी एक के बाद एक अपना चेहरा उजागर कर रहे हैं। पहले खुर्शीद ने हिदुत्व को आतंवाद से जोड़ा, फिर राशिद अल्वी ने श्रीराम का नारा लगाने वालों को राक्षस कहा और अब खुद राहुल गाँधी ने दावा किया है कि हिंदू और हिंदुत्व दो अलग-अलग चीजें हैं।

राहुल गाँधी ने कहा, हिंदुस्तान में 2 विचारधाराएँ हैं, एक कॉन्ग्रेस पार्टी की और एक RSS की। आज के हिन्दुस्तान में बीजेपी और RSS ने नफरत फैला दी है और कॉन्ग्रेस की​ विचारधारा जोड़ने, भाईचारे और प्यार की है। उनका कहना है कि आरएसएस की विचारधार आज प्यार-भाईचारे पर हावी हो गई है।

उन्होंने कहा, “बीजेपी हिंदुत्व की बात करती है। हिंदू और हिंदुत्व में क्या फर्क है, क्या ये एक हो सकते हैं? अगर हैं तो इनका नाम क्यों एक जैसा नहीं है। ये सच में अलग हैं। क्या हिंदू धर्म में ये है कि सिख और मुस्लिम को पीटा जाए? हिंदुत्व में ये है।”

राशिद अल्वी के अनुसार, “आजकल कुछ लोग जय श्री राम का नारा लगाकर देश के लोगों को गुमराह करते हैं, ऐसे लोगों से होशियार रहना चाहिए। आज जो जय श्री राम बोलते हैं, वे बिना नहाएँ बोलते हैं। आज भी बहुत लोग जय श्री राम का नारा लगाते हैं, वे सब मुनि नहीं वे निसिचर घोरा है।”

बता दें कि राहुल गाँधी और राशिद अल्वी की तरह ही सलमान खुर्शीद ने हिंदुत्व पर कमेंट करते हुए अपनी किताब में विवादित बात लिखी थी। उन्होंने हिंदुत्व की तुलना ISIS और बोको हराम जैसे जिहादी संगठनों से की है। सलमान खुर्शीद ने हिन्दू धर्म की सबसे बड़े प्रेरणा गाँधी द्वारा बताए गए सिद्धांतों को माना है। हिंदुत्व की राजनीति पर सलमान खुर्शीद का कहना है कि उनकी पार्टी में कुछ नेताओं को अल्पसंख्यक समर्थक छवि होने का पछतावा है। उनके अनुसार पार्टी का एक धड़ा पार्टी की पहचान जनेऊधारी के रूप में स्थापित करना चाहता है।

इच्छाधारी हिंदू हैं राहुल गाँधी- BJP नेता संबित पात्रा

उल्लेखनीय है कि राहुल गाँधी के बयान के बाद भाजपा प्रवक्त संबित पात्रा ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हिंदू और हिंदुत्व पर प्रहार करना कॉन्ग्रेस का चरित्र है। कॉन्ग्रेस वही पार्टी है जिसकी ओर से भगवा आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल किया गया था। बीजेपी नेता बोले कि एक वक्त था जब कहा गया था संस्कृति की वजह से बलात्कार होते हैं। कॉन्ग्रेस हमेशा वोट बैंक की राजनीति करती है। राहुल ने कहा था कि मंदिर जाने वाले लड़कियाँ छेड़ते हैं। सोनिया गाँधी ने भगवान राम के लिए हलफनामा दिया था। इन लोगों ने भारत का संविधान नहीं पढ़ा, उपनिषद तो दूर की बातें हैं। भाजपा प्रवक्ता ने कहा राहुल गाँधी इच्छाधारी हिंदू हैं, क्योंकि अगर वह हिंदू दर्शन समझते तो इस तरह की गालियाँ न निकालते। संबित पात्रा ने कहा कि कॉन्ग्रेस की तुष्टिकरण की नियत क बारे में हिंदुस्तान को पता है और भारत की संस्कृति को जो लोगा इस तरह के शब्दों से अलंकृत करते है उन्हें जनता कभी माफ नहीं करेगी।

काम- फेसबुक चलाते ही थप्पड़ मारना, सैलरी- हर घंटे ₹595: भारतीय बिजनेसमैन ने रखा है स्टाफ, एलन मस्क ने भी दिया रिएक्शन

मनीष सेठी नाम के एक भारतीय-अमेरिकी उद्यमी ने अपने काम के दौरान फेसबुक खोलने पर थप्पड़ मारने के लिए एक महिला को नौकरी पर रखा है। जिस महिला को इस काम के लिए नियुक्त किया गया है, उसका नाम कारा है। मनीष सेठी का कहना है कि इससे उनका काम बेहतर ढंग से हो रहा है। मनीष सेठी की इस खबर पर टेस्ला के CEO एलन मस्क ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।

मनीष सेठी ने साल 2012 से इस महिला को नौकरी पर रखा है। उनका कहना है कि थप्पड़ मारने वाली महिला जब उनके साथ होती है, तब उनके काम की प्रोडक्टिविटी 98 प्रतिशत तक होती है, लेकिन उस महिला की गैर-मौजूदगी में यह घटकर 35 से 40 प्रतिशत रह जाती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार थप्पड़ मारने के लिए कारा को 8 डॉलर प्रति घंटे के हिसाब से तनख्वाह मिलती है।

लगभग 9 साल पहले मनीष सेठी ने इसका विज्ञापन भी जारी किया था। वर्ष 2012 के विज्ञापन में सेठी ने स्टाफ की आवश्यक योग्यता के बारे में बताया था। तब उन्होंने लिखा था कि, “जब मैं समय बर्बाद कर रहा हूँ तो आपको मुझ पर चिल्लाना होगा या जरूरत पड़ने पर मुझे थप्पड़ मारना होगा।”

मनीष सेठी की कंपनी पावलोक जिम, मेडिटेशन से जुड़ी डिवाइस बनाती है। एलन मस्क ने सेठी की खबर पर फायर का दो इमोजी पोस्ट किया। एलन की प्रतिक्रिया पर सेठी ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने जवाबी पोस्ट में लिखा, “इस तस्वीर में दिख रहा लड़का मैं ही हूँ। एलन मस्क के शेयर के बाद शायद मेरी रीच अब ज्यादा हो जाएगी।”

झाबुआ में ईसाई धर्मान्तरण कराने का प्रयास कर रहे 9 को MP पुलिस ने किया गिरफ्तार: 10 पर FIR, विहिप ने की सख्त कार्रवाई की माँग

मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में धर्मान्तरण का प्रयास करते हुए 9 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी विश्व हिन्दू परिषद के एक कार्यकर्ता की शिकायत पर की गई है। घटना बुधवार (10 नवम्बर 2021) की है। यह गिरफ्तारी थांदला थानाक्षेत्र के गाँव मानपुर से की गई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गिरफ्तार आरोपितों में से 7 लोग राजस्थान और गुजरात से हैं। थांदला पुलिस के SDOP एम एस गवली ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उनके अनुसार बुधवार को मानपुर गाँव में कुछ बाहरी लोगों के आने की सूचना मिली थी। उनके बारे में शिकायत हुई कि ये स्थानीय लोगों को लालच दे कर ईसाई धर्म अपनाने को कह रहे हैं। यह कार्यक्रम स्थानीय निवासी नारू डामोर के घर पर चल रहा था।

मौके पर पुलिस कुछ स्थानीय लोगों को लेकर पहुँची। सूचना सही पाई गई और गुजरात, राजस्थान के 7 निवासियों सहित कुल 10 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। मौके से 9 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया। इन सभी पर मध्य प्रदेश धर्मान्तरण विरोधी क़ानून की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। आवश्यक कार्रवाई के बाद इन सभी को गुरुवार (11 नवम्बर 2021) को जेल भेज दिया गया है।

इससे पहले बुधवार को अवैध धर्मान्तरण के विरोध में विश्व हिन्दू परिषद ने इंदौर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें विहिप महासचिव मिलिंद परांडे ने पत्रकारों को सम्बोधित किया था। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने झाबुआ के कुछ सरकारी अधिकारियों पर ही धर्मान्तरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। विहिप ने धर्मान्तरण में शामिल हर किसी पर कठोर कार्रवाई की माँग भी की थी।

झाबुआ में धर्मान्तरण के विरोध में मिलिंद परांडे ने ट्वीट भी किया है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा है, “झाबुआ ज़िले के वनवासी क्षेत्र में मालवा प्रांत में विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं ने अवैध चर्च निर्माण तथा धर्मांतरण के षड्यंत्रों के विरूद्ध प्रदर्शन किया। अभी ऐसे 55 से अधिक अवैध चर्च तथा अवैध रीति से घोषित पादरियों की सूचि प्रशासन को कारवाई हेतु सौंपी है।”

इस बीच जनजाति सुरक्षा मंच के संयोजक गणेश राम भगत का भी धर्मान्तरण पर बयान आया है। अरुणाचल प्रदेश की मिशमी जनजातियों पर ईसाई धर्म के बढ़ते प्रभाव पर एक रिसर्च के हवाले से गणेश राम भगत ने कहा है कि दुनिया भर के हर समाज की अपनी खुद की विश्वास प्रणाली है जो हर क्षेत्र में पनपने के लिए समाज की आधारशिला है। इसमें कोई भी बदलाव समाज के भीतर विरोध का कारण बन सकता है।