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जहाँ दकियानूसी ईसाई चला रहे टीके के खिलाफ अभियान, उन्हीं की मीडिया को करारा जवाब है भारत का 100+ करोड़

अमेरिका, इंग्लैंड, रूस, फ्रांस, और जर्मनी की पूरी जनसंख्या को मिला दिया जाए तो वह तकरीबन 68 करोड़ के आसपास बैठती है। 100 करोड़ यानी इन पाँच उन्नत देशों की समूची आबादी के डेढ़ गुने के बराबर!

ये पाँचों देश स्वास्थ्य सेवाओं एवं उसके ढाँचे, टेक्नोलॉजी, वैज्ञानिक शोध तथा शिक्षा के स्तर में भी भारत से कहीं आगे माने जाते हैं। कोरोना का टीकाकरण इन देशों में भारत से कहीं पहले शुरू हो गया था। हमारे देश में दो तीन महीने तो इसी झंझट ही में निकल गए थे कि राज्य सरकारें टीकाकरण चलाएँगी या केंद्र सरकार। जून के महीने में प्रधानमंत्री मोदी ने सभी वयस्क नागरिकों के लिए मुफ्त टीकाकरण की घोषणा की थी। इसके बावजूद इन पाँच कथित उन्नत देशों में कुल मिलाकर कोरोना टीके की 81 करोड़ खुराकें दी गईं हैं। यानी हमारा देश अभी तक इनसे सवा गुणा टीकाकरण कर चुका है।

आज भी अपने देश में टीकाकरण की तेज़ रफ़्तार जारी है। जबकि इन देशों में अब टीका लगवाने लोग ही नहीं आ रहे। टीका संकोच या वैक्सीन हैजिटेन्सी इन देशों में इतनी ज्यादा है कि लोगों को टीका लगवाने के लिए लालच देने पड़ रहे हैं। अमेरिका की बाइबल स्टेट बेल्ट में टीकों के खिलाफ बाकायदा दकियानूसी ईसाई एक अभियान चला रहे हैं। इन बाइबल राज्यों में टीकाकरण बहुत धीमा है। इससे अमेरिका की सरकार परेशान है। उधर रूस के कई हिस्सों में सरकार के प्रति इतना अविश्वास है कि लोग उसका बनाया टीका लगवाना ही नहीं चाहते।

याद कीजिए कि कोरोना शुरू होते ही पश्चिमी देशों की मीडिया में लगातार ऐसे लेख आए थे जिनमें कहा गया था कि भारत जैसे अनपढ़, अनुशासनहीन, अराजक, स्वास्थ्य सुविधाहीन और गंदगी से भरे देश में ये महामारी आएगी तो संभल नहीं पाएगी। कुछ अखबारों और कथित बुद्धिजीवियों, जिनमें कई अपने देश के भी हैं, ने भविष्यवाणी की थी कि हिन्दुस्तान में इस बीमारी से करोड़ों लोग मारे जाएँगे। वे ये तुलना करते नहीं थकते थे कि 1918 में जब स्पेनिश फ्लू आया था तो देश में करोड़ों लोग मारे गए थे। वे भूल गए थे कि ये इक्कीसवीं सदी का भारत है, यदि प्रधानमंत्री मोदी को उद्धृत किया जाए तो, जो बड़े लक्ष्य बनाना और उनको हासिल करना जानता है। उस लक्ष्य सिद्धि के लिए वह वांछित रणनीति बनाता है और उसके लिए अटूट मेहनत भी करता है।

ये हमारे समाज की अन्तर्निहित ताकत का ही परिणाम है कि टीका संकोच जैसी कोई बात लोगों में फैलने नहीं दी। किसी धार्मिक और सामाजिक नेता ने टीकों का विरोध नहीं किया। देश के नेतृत्व ने सोच समझकर एक रास्ता बनाया। केंद्र और राज्यों ने मिलकर काम किया। कभी दिए जलाकर, कभी थाली तो कभी ताली बजाकर लोगों में कोरोना के संकट के प्रति जाग्रति पैदा की। और आम भारतीय ने संदेह, आशंका और भ्रान्ति फ़ैलाने की तमाम कोशिशों के बावजूद सरकार पर अटूट भरोसा जमाए रखा।

पश्चिम की शब्दाबली के ‘गरीब, अनपढ़, गँवार और मैले कुचैले भारतीय समाज’ ने अपनी सहज बुद्धि, आध्यात्मिक सोच और अपने कर्म से कथित आधुनिक और संपन्न समाजों को कहीं पीछे छोड़ दिया है। दरअसल हमारा समाज आमतौर पर प्रगतिशील है। भारतीय विरासत उसे तार्किक और वैज्ञानिक तौर से सोचने को प्रोत्साहित करती है। हाँ, एक नैरेटिव है जो पिछले कई सौ सालों से उसे पिछड़ा प्रमाणित करने पर तुला है। 100 करोड़ का ये आँकड़ा भारत और भारतीयों के बारे में सदियों से फैलाए इस झूठ की बखियाँ उधेड़ता दिखाई देता है।

ये टीकाकरण उन निजी और सरकारी स्वास्थ्य कर्मियों, प्रशासनिक अधिकारियों, उस ढीले ढाले तंत्र और राजनीतिक व्यवस्था ने किया है, जिसे हम सुबह शाम पानी पी पीकर कोसते हैं। ये टीकाकरण हमारे उन वैज्ञानिकों और प्राइवेट कंपनियों की बदौलत हो पाया है, जिनके खिलाफ देश में कुछ लोगों ने पूरा एक अभियान चलाया था। सोचिए, यदि कोविशील्ड बनाने वाली सीरम रिसर्च इंस्टिट्यूट और कोवैक्सीन बनाने वाली भारत बायोटेक जैसी निजी कम्पनियाँ देश में नहीं होतीं तो कहाँ से इतने टीके भारत में बनते? हम आज दुनिया के सामने एक एक टीके के लिए मोहताज होते – गिड़गिड़ा रहे होते। उसके बाद भी इसकी कोई गारंटी नहीं थी कई हमें कोई टीके देता।

आज भी देश में निजी कंपनियों के खिलाफ अंटशंट बयानबाजी होती ही रहती है। किसी ने इन टीकों को बीजेपी का टीका बताया था। किसी ने इन्हें अधकचरा और असत्यापित कहा था। कुछ लोग तो विदेशी टीकों की वकालत करते नज़र आते थे। कुछ मुख्यमंत्रियों ने तो खरीद के लिए कंपनियों को चिठियाँ भी लिख दीं थी। किसी ने कहा था कि इस रफ़्तार से तो देश में सबको टीका लगाते लगाते सालों-साल लग जाएँगे। कुछ लोगों ने देश के लिए महत्वपूर्ण वैक्सीन मैत्री कार्यक्रम पर ही निम्न स्तरीय टिप्पणियाँ कीं थीं। इन सब राजनीतिक बयानबाजियों के बीच प्रशंसा का पात्र है वह नेतृत्व और तंत्र जो एकाग्रता, कुशलता और समर्पण के साथ राष्ट्रसेवा के अपने इस काम में जुटा रहा।

कल्पना कीजिए इस अप्रैल के महीने के उस भयानक मंज़र को जब चीन से आई इस बीमारी ने देश में कहर ढाया था। देश का कोई घर-आँगन नहीं बचा था, जिसने उसकी तपिश नहीं झेली थी। टीकाकरण न होने की स्थिति में वो मंजर और अधिक खतरनाक भी हो सकता था और बार-बार दोहराया भी जा सकता था। लेकिन एक बात ध्यान रखने की है कि 100 करोड़ का लक्ष्य एक अर्धविराम ही है। महामारी अभी गई नहीं है। खतरा अभी टला नहीं है। इस आँकड़ें से अगर लोगों में ये धारणा आ गई कि सब कुछ सामान्य हो चला है तो ये एक बड़ी भूल होगी। हमने इस उपलब्धि पर खुद को शाबाशी ज़रूर देनी है लेकिन इस हिदायत के साथ कि अभी सबको टीका लगना बाक़ी है।

अभी भी ध्यान रखना है – सावधानी हटी, तो दुर्घटना घटी।

करवा चौथ के विज्ञापन में पति-पत्नी दोनों लड़की, नाराज़ हिन्दुओं ने Dabur से पूछा – ‘समलैंगिक’ ज्ञान देने के लिए हमारे ही त्योहार क्यों?

डाबर कंपनी के एक विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर लोग नाराज़ हैं। ये विज्ञापन डाबर के प्रोडक्ट ‘फेम’ को लेकर है, जिसमें एक समलैंगिक जोड़े को ‘करवा चौथ’ का त्योहार मनाते हुए देखा गया है। लोगों का कहना है कि क्या त्योहारों को उसी रूप में नहीं रहने देना चाहिए, जिस रूप में हम उन्हें मनाते आ रहे हैं? साथ ही पूछा कि हमेशा हिन्दू त्योहारों से ही क्यों छेड़छाड़ की जाती है, मुस्लिम या ईसाई त्योहारों से क्यों नहीं?

दरअसल, डाबर के इस विज्ञापन में एक महिला दूसरी महिला को क्रीम लगाते हुए दिखाई दे रही है। इसके बाद वो कहती है, “ये लग गया तेरा फेम क्रीम गोल्ड ब्लीच।” इस पर दूसरी महिला जवाब देती है, “धन्यवाद! तुम सबसे अच्छी हो।” इसके बाद वो पूछती है कि करवा चौथ का इतना ‘कठिन व्रत’ क्यों रख रही हो? इस पर महिला जवाब देती है कि उनकी ख़ुशी के लिए। यही सवाल फिर पूछे जाने पर दूसरी महिला जवाब देती है कि उनकी लंबी उम्र के लिए।

इसके बाद एक अन्य महिला आकर कहती हैं कि ये उन दोनों का पहला करवा चौथ है। साथ ही वो दोनों को साड़ियाँ भी देती हैं। वो कहती है, “एकदम चाँद का टुकड़ा लगोगी दोनों।” फिर रात के समय दोनों महिलाओं को छलनी की जाल की तरफ से चाँद को और फिर एक-दूसरे को देखते हुए दिखाया गया है। रोजी नाम की ट्विटर यूजर ने पूछा कि हमेशा इस तरह के प्रयोग हिन्दू त्योहारों के साथ ही क्यों किए जाते हैं?

बता दें कि हाल के दिनों में कई ब्रांड्स ने हिन्दू त्योहारों का मजाक बनाते हुए विज्ञापन जारी किए हैं। फैबइंडिया ने दीपावली पर ‘जश्न-ए-रिवाज’ कैंपेन शुरू कर दीवाली का मजाक बनाया और इसके उर्दूकरण की कोशिश की। कंपनी ने कपड़ों के एक कलेक्शन के विज्ञापन में दीपावली को जश्न-ए-रिवाज बताया था। लेकिन सोशल मीडिया पर इसका लगातार विरोध होने के बाद उन्होंने इस हिंदू विरोधी विज्ञापन को हटा लिया।

इसी तरह CEAT टायर के विज्ञापन में बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान को स्कूली बच्चों को यह कहते हुए दिखाया गया, “सड़क गाड़ी चलाने के लिए है पटाखे जलाने के लिए नहीं है। सोसायटी में बम फोड़े, ताकि सड़क पर किसी को असुविधा ना हो।” भाजपा सांसद अनंत कुमार हेगड़े ने सिएट टायर्स (CEAT Tyres) के एमडी और सीईओ अनंत वर्धन गोयनका को पत्र लिख कर नमाज के लिए सड़कों को अवरुद्ध करने से लोगों को होने वाली परेशानियों को लेकर एक विज्ञापन जारी करने का आग्रह किया है।

गर्ल्स हॉस्टल में बैन था, फिर भी सेक्स रैकेट में शामिल लड़कियाँ रखती थीं मोबाइल: छात्रा का दावा, पटनायक सरकार पर मंत्री को बचाने का आरोप

ओडिशा के बलांगीर जिले के तुरेकेला प्रखंड स्थित झरनी गाँव की रहने वाली 24 साल की शिक्षिका ममिता मेहर के अपहरण और हत्या के मामले ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। इस अपहरण और हत्या का खुलासा होने के बाद भाजपा नेता बैजयंत जय पांडा ने नवीन पटनायक सरकार पर अपने मंत्री को बचाने को लेकर निशाना साधा है।

इस मामले में पांडा ने एक रिपोर्ट शेयर कर लिखा, “पढ़ो और रोओ। एक महिला की हत्या, लड़कियों का कथित रूप से शोषण, उथल-पुथल की स्थिति, लेकिन @Naveen_Odisha ने इस व्यक्ति को अपनी सरकार से हटाने से इनकार कर दिया। ममिता मेहर मामला: ओडिशा के मंत्री गर्ल्स हॉस्टल जाते थे, छात्राएँ बताती हैं कि गोविंद साहू सेक्स रैकेट चलाते थे।”

जय पांडा ने एक लेख का हवाला दिया। इसमें जहाँ ममिता पढ़ाती थीं, वहीं स्कूल के एक छात्रा के माध्यम से बताया गया है कि कैप्टन दिब्य शंकर मिश्रा गर्ल्स हॉस्टल जाते थे। छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल की प्रबंध समिति के अध्यक्ष और हत्याकांड के मुख्य आरोपित गोविंद साहू सेक्स रैकेट चला रहे हैं।

माना जाता है कि साहू और मिश्रा बहुत बेहद करीबी हैं। ऐसी कई तस्वीरें और वीडियो हैं, जिनमें दिब्यशंकर मिश्रा स्कूल के कार्यक्रमों में शामिल हुए और साहू की प्रशंसा की थी। छात्रा ने खुलासा किया कि उन सभी पर मोबाइल फोन रखने पर रोक है, लेकिन रैकेट का हिस्सा रही लड़कियों को गोविंद ने स्कूल परिसर में मोबाइल फोन रखने की इजाजत दे रखी थी।

ममिता मेहर का अपहरण और हत्या

सनशाइन इंग्लिश मीडियम स्कूल की शिक्षिका ममिता मेहर 8 अक्टूबर को लापता हो गई थीं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें कथित तौर पर गोविंद ने किसी आधिकारिक काम के लिए स्कूल आने के लिए बुलाया था। उन्हें बलांगीर जिले के चंदोतारा आने के लिए कहा गया, जहाँ से उन्हें साहू की कार में लिफ्ट दी गई।

बस से चंदोतारा पहुँचने के बाद शिक्षिका लापता हो गई और उसका मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो गया। ममिता का पता नहीं लगा पाने के बाद उसके परिवार के लोगों ने केगाँव पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।

दूसरी शिकायत सिंधकेला थाने में दर्ज कराई गई। पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए शिक्षिका की तलाश में अभियान शुरू किया। जाँच के दौरान पुलिस ने गोविंद की कार को जब्त कर लिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीआईजी (उत्तरी रेंज) दीपक कुमार ने कहा कि बलांगीर पुलिस ने कालाहांडी जिले का दौरा किया और पीड़ित और मुख्य आरोपित की आवाजाही का पता लगाने के लिए विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी फुटेज की जाँच की।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि गोविंद साहू के कबूलनामे के साथ-साथ बयानों, सामग्री और वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्य से पता चलता है कि यह साजिश के तहत की गई हत्या थी। आरोपित बीते 8 अक्टूबर को जब भवानीपटना से केगाँव लौट रहा था उसी दौरान उसने कार में ही ममिता का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।

कथित तौर पर ममिता को मुख्य आरोपित गोविंद साहू के दो अवैध संबंधों के बारे में पता चल गया था और उसने अवैध संबंधों को उजागर करने की चेतावनी दी थी। इस जाँच में शामिल एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि ममिता की हत्या गोविंद ने बदला लेने के इरादे से की थी, क्योंकि उसने गोविंद के अवैध संबंधों का खुलासा करने की धमकी दे दी थी।

मेहर के शरीर को टुकड़ों में काटा

लापता होने के 11 दिन बाद 19 अक्टूबर को ममिता के अवशेष मिले। कालाहांडी जिले के महालिंग में सनशाइन इंग्लिश मीडियम स्कूल के स्टेडियम निर्माण स्थल से उसके शरीर की हड्डियों को निकाला गया। उसी स्कूल में ममिता पढ़ाती थीं। वहीं, पुलिस को शव को ठिकाने लगाने में गोविंद के साथियों के शामिल होने का अंदेशा है।

बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस ने कहा कि 8 अक्टूबर को गोविंद ने ममिता की हत्या कर दी थी। इसके बाद वह शव स्कूल के निर्माणाधीन स्टेडियम में ले गया। वहाँ उसने शव को दफनाने से पहले गत्ते और टायर की मदद से जला दिया।

बुधवार को गोविंद को गंडामुंडा की एक अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे 5 दिन की पुलिस रिमाँड पर भेज दिया गया। डीआईजी के मुताबिक, “क्राइम सीन को फिर से रीक्रिएट किया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारी बहुत ही करीब से इस पर नजर बनाए हुए हैं। जल्द ही इसकी चार्जशीट दाखिल की जाएगी और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की जाएगी।”

मृत जवान के परिजनों से मिले गृह मंत्री, पत्नी को दी सरकारी नौकरी: सुरक्षा पर बड़ी बैठक, जानिए अमित शाह के J&K दौरे में क्या-क्या

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार (23 अक्टूबर, 2021) को केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के दौरे पर पहुँचे। इस दौरान उन्होंने आतंकियों द्वारा मार डाले गए जम्मू कश्मीर पुलिस के जवान परवेज अहमद दार के परिजनों से मुलाकात की। वहाँ श्रद्धांजलि देने के बाद उन्होंने उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी का पत्र भी सौंपा। अमित शाह ने कहा कि पूरे देश को उनकी बहादुरी पर गर्व है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस जम्मू कश्मीर की कल्पना की है, उसे साकार करने में यहाँ की पुलिस पूरी तन्मयता से प्रयासरत है।

राजधानी श्रीनगर स्थित राजभवन में उन्होंने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक की। अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद ये अमित शाह का पहला जम्मू कश्मीर दौरा है। श्रीनगर एयरपोर्ट पर उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने उनका स्वागत किया। जम्मू कश्मीर में पिछले कुछ दिनों में कई आम नागरिकों को निशाना बनाया गया है। खासकर अन्य राज्यों से यहाँ कमाने आए मजदूरों की हत्याएँ हुई हैं।

ऐसे में केंद्रीय गृह मंत्री का ये दौरा अहम माना जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पहले से ही कई रणनीतिक इलाकों में स्नाइपर्स, ड्रोन और शार्पशूटर्स तैनात कर रखे हैं। राजभवन में RAW प्रमुख सामंत कुमार गोयल, सेना के उच्चाधिकारियों, IB के मुखिया समेत 12 बड़े सुरक्षा अधिकारियों के साथ एक अमित शाह की एक उच्च-स्तरीय बैठक भी होनी है। IB, CRPF, RAW, NIA, NSG, BSF और जम्मू कश्मीर पुलिस के उच्चाधिकारी इस बैठक में शामिल रहेंगे

घाटी में इस दौरे को लेकर सतर्कता बरती जा रही है और कई अधिकारी कैम्प कर रहे हैं, जो हर एक खुड़िया इनपुट पर नजर रख रहे हैं। CRPF की 10 और BSF की 15 अतिरिक्त कंपनियाँ वहाँ लगाई गई हैं। डल झील और झेलम नदी में CRPF की टुकड़ियाँ पेट्रोलिंग कर रही हैं। UAE को जोड़ने वाली शारजाह की पहली फ्लाइट का भी उद्घाटन होगा, जिसकी घोषणा नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने कश्मीर दौरे में की थी।

श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में राजनीतिक दलों, पर्यटन संस्थाओं और कारोबारियों के प्रतिनिधियों से भी अमित शाह मिलेंगे। 24 अक्टूबर को जम्मू और 25 को श्रीनगर में रैली को सम्बोधित करेंगे। डल झील के पास एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी अमित शाह हिस्सा बनेंगे। आतंकियों द्वारा मारे गए नागरिकों के परिजनों से भी वो मिल सकते हैं। इस महीने जहाँ आतंकियों ने 11 नागरिकों को मार डाला है, वहीं 17 आतंकियों का भी सफाया हुआ है।

अमित शाह के स्वागत में श्रीनगर में बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए गए हैं और तिरंगे से सड़कों के दोनों तरफ सजाया गया है। आतंकी हमले में मारे गए कश्मीरी पंडित माखन लाल बिंदरू और एक सिख शिक्षिका के परिजनों से भी उनके मिलने की संभावना है। पुलवामा के लेथपोरा जाकर वो फरवरी 2019 में बलिदान हुए 40 CRPF जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। जम्मू में IIT के दीक्षांत समारोह का भी वो हिस्सा बनेंगे। वो जम्मू कश्मीर के विभिन्न यूथ क्लब्स के साथ भी बैठक करेंगे।

परमवीर सूबेदार जोगिंदर सिंह: जो बिना हथियार 200 चीनी सैनिकों से लड़े… पापा से प्यार इतना कि बलिदान पर बेटी का भी निधन

1962 के भारत-चीन युद्ध में अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहूति देने वाले भारतीय सेना के परमवीर विजेता सूबेदार जोगिंदर सिंह की आज (23 अक्टूबर) पुण्यतिथि है। अकेले 200 चीनी सैनिकों के छक्के छुड़ाने वाले जोगिंदर सिंह की बहादुरी को चीन ने भी सलाम किया था। आज हम आपको भारत माँ के लाल सूबेदार जोगिंदर सिंह की वीरगाथा के बारे में बताने जा रहे हैं।

इनका जन्म 26 सितंबर 1921 को पंजाब के फरीदकोट जिले में मोगा के एक गाँव मेहला कलां में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई नाथू आला गाँव के प्राइमरी स्कूल और फिर दरौली गाँव के मिडिल स्कूल से पूरी की थी। उन्होंने महज 15 साल की उम्र में ब्रिटिश इंडियन आर्मी को ज्वॉइन कर लिया था।

28 सितंबर 1936 को वह सिख रेजीमेंट की पहली बटालियन का हिस्सा बन गए। फौज का हिस्सा बनने के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आर्मी एजुकेशन एग्जामिनेशन भी पास किया। उनको पढ़ाई में हमेशा से ही रूचि थी और इ​सलिए उनको यूनिट का एजुकेशन इंस्ट्रक्टर भी नियुक्त किया गया था।

फौज का हिस्सा बनने के बाद उन्होंने कई युद्ध लड़े। इनमें साल 1962 में हुआ भारत-चीन का युद्ध भी शामिल है। इस युद्ध में वह चीनी सेना से लोहा लेते हुए बलिदान हो गए थे।

पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया

बात है 9 सितंबर 1962 की। उस समय भारत और चीन के बीच युद्ध चल रहा था। इस दौरान 7 इन्फैंट्री ब्रिगेड को नामका चू में कमान संभालने का आदेश मिला था। इसमें एक सिख रेजिमेंट के सैनिक सूबेदार जोगिंदर सिंह भी शामिल थे।

सूबेदार सिंह को बुम ला के पास स्थित पोस्ट को संभालने का आदेश मिला था और उनके पास एक सिख रेजिमेंट के केवल 20 ही सैनिक थे। चीन की सेना ने इस पोस्ट पर लगातार तीन बार ​हमला किया और हर हमले में उन्होंने 200 सैनिक भेजे। पहला और दूसरा हमला जोगिंदर सिंह की प्लाटून ने नाकाम कर दिया था।

चीनी सैनिकों के तीसरे हमले से पहले हालाँकि सूबेदार जोगिंदर सिंह की आधी प्लाटून भी वीरगति को प्राप्त हो चुकी थी। उनकी गोलियाँ भी खत्म हो चुकी थीं और उनको पीछे हटने का आदेश भी मिल चुका था… लेकिन उन्होंने और उनके सैनिकों ने पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद वे चीन के तीसरे हमले का इंतजार करने लग गए।

थोड़ी ही देर बाद ही चीन के 200 सैनिकों ने तीसरा हमला भी कर दिया। भारतीय सैनिक भी सूबेदार जोगिंदर सिंह के नेतृत्व में बिना हथियारों के ही उन पर टूट पड़े। वो आखिरी दम तक चीनी सेना से डटकर लड़ते रहे और चीन के 50 से अधिक सैनिकों को भी मार गिराया। हालाँकि बुरी तरह घायल सूबेदार को चीनी सैनिकों ने बंदी बना लिया था।

23 अक्टूबर 1962 को सूबेदार जोगिंदर सिंह चीन द्वारा युद्धबंदी की हालत में ही बलिदान हो गए। उनके शव का अंतिम संस्कार चीनी सैनिकों ने ही किया था। चीन ने 17 मई 1963 को भारत को उनकी अस्थियाँ सौंपी थीं। सूबेदार जोगिंदर सिंह को इस असाधारण वीरता के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

सदमे से बड़ी बेटी ने भी दम तोड़ दिया

सूबेदार जोगिंदर सिंह के बलिदान होने की खबर जब उनके परिवार को पता चली, तो उस सदमे से उनकी बड़ी बेटी ने भी दम तोड़ दिया था। उनका नाम सरजीत कौर था। बस 11 साल की उम्र थी उनकी। अपने पिता से इतना प्यार करती थीं कि उनके बलिदान की खबर और सदमे को सह न सकीं और उनका भी निधन हो गया था।

आपको बता दें कि हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में 1962 के भारत-चीन युद्ध में बलिदान देने वाले सूबेदार जोगिंदर सिंह के सम्मान में बुम ला, सिख रेजिमेंट में युद्ध स्मारक भी बनाया गया है।

राजा के सेक्स की भूख से परेशान था ख़ुफ़िया विभाग, हमेशा रहते थे ‘हॉर्नी’: इंजेक्शन से शरीर में भर दी फीमेल हॉर्मोन्स, अब कुछ नहीं कर सकते

स्पेन के पूर्व राजा जुआन कार्लोस के बारे में पता चला है कि उनकी सेक्स की भूख इतनी बढ़ गई थी कि ख़ुफ़िया एजेंसियों को इंजेक्शन के माध्यम से उनके शरीर में फीमेल हार्मोन्स डालने पड़े। स्पेनिश सीक्रेट सर्विस का मानना था कि जुआन कार्लोस की सेक्स ड्राइव देश के लिए खतरा बन सकती है, इसीलिए ऐसा किया गया। जुआन कार्लोस फ़िलहाल स्पेन से बाहर निर्वासन में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

ब्लैकमेल और भ्रष्टाचार के आरोपित पूर्व पुलिस कमिश्नर जोस मानुएल विलरेजो ने सुनवाई के दौरान संसद में ये खुलासा किया। उन्होंने बताया, “नेशनल इंटेलिजेंस सेंटर ने तत्कालीन राजा जुआन कार्लोस की सेक्स की भूख को दबाने के लिए फीमेल हार्मोन्स और टेस्टोस्टेरोन ब्लॉकर्स के इंजेक्शन दिए। वो सेक्स के लिए इतने भूखे रहते थे कि इसे राजकाज के लिए समस्या और ख़तरा माना जा रहा था।”

उन्होंने कहा, “इन लोगों ने उनसे सब कुछ छीन लिया। इसके बाद वो किसी महिला के साथ नहीं रह सकते थे और ना कुछ कर सकते थे।” हालाँकि, 70 वर्षीय पूर्व पुलिस कमिश्नर ने जुआन कार्लोस के सेक्स ड्राइव को मैनेज करने में खुद की किसी प्रकार की भूमिका होने से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि पूर्व राजा की पूर्व प्रेमिका कोरिन्ना लार्सन से उन्हें ये जानकारी मिली। स्पेन की मीडिया पहले से ही कह रही है कि सत्ताधारियों में इस बात को लेकर भय व्याप्त है कि पूर्व पुलिस कमिश्नर और क्या-क्या खुलासे कर सकते हैं।

चूँकि वो कई दशकों तक सत्ता के करीब रहे हैं, इसीलिए उन्हें कई अंदरूनी राज मालूम हैं। बताया जा रहा है कि उनके क्रियाकलापों से न सिर्फ अधिकारियों, बल्कि नेताओं, न्यायपालिका और राजपरिवार तक के लोगों की छवि को नुकसान पहुँचा है। 83 वर्षीय पूर्व राजा को लेकर हुए खुलासे पर जहाँ स्पेन के सांसदों में चर्चा गर्म है, वहीं कइयों ने इसे ‘ताज़ा जेम्स बॉन्ड की कहानी’ तक भी करार दिया।

विलरेजो ने खुलासा किया है कि इसके पीछे ‘नेशनल इंटेलिजेंस सेंटर (NIC)’ के तत्कालीन मुखिया और पूर्व राजा के करीबी रहे फेलिक्स सन्ज़ रोल्डन का दिमाग था। जबकि रोल्डन का कहना है कि उन्हें ये बात कोरिन्ना से पता चली। जुआन कार्लोस की पूर्व प्रेमिका ने कहा था कि राजपरिवार के करीबियों ने पूर्व राजा के अंदर इतने फीमेल हार्मोन्स भर दिए कि उनकी ताकत ही जाती रही। कारोबारी कोरिन्ना 2004-09 के दौरान पूर्व राजा की प्रेमिका रही थीं।

2011 में हुई उनकी सर्जरी के बाद उन्हें बड़ी मात्रा में स्लीपिंग पिल्स भी दिए जाते थे। उनके भीतर ‘टेस्टोस्टेरोन इन्हिबिटर्स’ बड़ी मात्रा में पाए गए थे। जुआन कार्लोस की पूर्व प्रेमिका CNI और पूर्व राजा के साथ स्विट्जरलैंड में मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है। सऊदी अरब के साथ £6 बिलियन (61,915 करोड़ रुपए) की एक रेल डील को लेकर ये विवाद चल रहा है। जुआन कार्लोस 1975-2014 तक स्पेन के राजा रहे थे।

आर्यन को गिरफ्तार करने वाले NCB अधिकारी की छवि खराब करने को बॉलीवुड वेबसाइट चला रहे भ्रामक खबर, पत्नी ने Koimoi को लताड़ा

एंटी-ड्रग्स एजेंसी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधिकारी समीर वानखेड़े की टीम ने जब से कॉर्डेलिया क्रूज पर ड्रग्स पार्टी का भंडाफोड़ कर बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को गिरफ्तार किया है, तब से वो सुर्खियों में बने हुए हैं। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक द्वारा एनसीबी के जोनल निदेशक पर आरोप लगाने के बाद अब उनकी पत्नी क्रांति रेडकर वानखेड़े ने ट्विटर पर एक बॉलीवुड वेबसाइट को समीर और उनके परिवार की छवि खराब करने के इरादे से दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक खबरें फैलाने के लिए फटकार लगाई है।

समीर वानखेड़े की पत्नी क्रांति रेडकर वानखेड़े पेशे से मराठी एक्ट्रेस हैं। उन्होंने 6 अक्टूबर 2021 को बॉलीवुड वेबसाइट Koimoi.com द्वारा प्रकाशित एक समाचार की क्लिपिंग साझा की। इसमें उन्होंने न्यूज वेबसाइट पर उनकी और उनके पति की इमेज को खराब करने के इरादे से भ्रामक हेडलाइन देने का आरोप लगाया है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि यह रिपोर्ट शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी के तीन दिन बाद प्रकाशित हुई थी, जिसे सात अन्य लोगों के साथ 2 अक्टूबर को कॉर्डेलिया क्रूज से समीर वानखेड़े के नेतृत्व में एनसीबी टीम ने पकड़ा था।

Koimoi.com द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के शीर्षक का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए क्रांति रेडकर वानखेड़े ने ट्वीट किया, “प्रिय @Koimoi आप यहाँ क्या कर रहे हैं? केवल कुछ व्यूज के लिए आपने भ्रामक शीर्षक दिया है, क्यों? इस कोस को मैं पहले ही अदालत में लड़कर जीत चुकी हूँ। मैंने पूरी रिपोर्ट पढ़ी, इसमें गलत पहचान की बात कही गई है, फिर भी यह शीर्षक क्यों? मेरी या समीर की प्रतिष्ठा को चोट पहुँचाने के लिए। सिर्फ पैसे के लिए?”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, “@Koimoi हर कोई पूरी रिपोर्ट नहीं पढ़ता है। आपके लापरवाह और असंवेदनशील लेखन के कारण लोग मुझे ट्रोल करते हैं। हम भावनाओं के साथ वास्तविकता में जीने वाले लोग हैं। आपके उपभोग की वस्तु नहीं। अगर मैं दोषी होती तो मैं दोष झेल लेती, लेकिन मैं नहीं दोषी हूँ, इसलिए मैं नहीं झेलूँगी।”

दरअसल, Koimoi.com की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है, “क्रांति रेडकर पर आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग विवाद में शामिल होने का आरोप लगा था। यह 2013 की बात है, जब एस श्रीसंत भी रडार पर आए थे। बाद में इसे ‘गलत पहचान’ का मामला करार दिया गया।” हालाँकि, जैसा कि मराठी अभिनेत्री ने बताया शीर्षक को इस तरह से बनाया गया कि इससे ऐसा लगता है कि क्रांति रेडकर मैच फिक्सिंग की दोषी हैं। रिपोर्ट का संग्रह संस्करण यहां देखा जा सकता है।

कोईमोई.कॉम के आर्टिकल का स्क्रीनशॉट

जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, एनसीबी के निदेशक समीर वानखेड़े, जिन्होंने जून में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद ड्रग्स का मामला संभाला था, ने हाल ही में हाई-प्रोफाइल आर्यन खान मामले के कारण लोगों का आकर्षित किया है। छापेमारी के बाद आरोप लगे हैं कि वानखेड़े आर्यन खान को चुन कर निशाना बना रहे हैं। इसके बाद कई लोगों ने उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए उनके व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन पर उँगली उठाना शुरू किया है।

इससे पहले एनसीबी नेता नवाब मलिक भी समीर वानखेड़े पर कई आरोप लगा चुके हैं, लेकिन कोई तथ्य नहीं पेश किए। मलिक ने आरोप लगाया कि समीर वानखेड़े महामारी के दौरान मालदीव में थे, जब कई बॉलीवुड हस्तियाँ वहाँ भी छुट्टियाँ मना रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि मालदीव और दुबई में ‘वसूली’ (जबरन वसूली) हुई। उन्होंने दावा किया उनके पास इसका सबूत भी है।

‘परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर’: जलती आग से 3 लोगों की जिंदगी बचा लाए अरुण तिवारी, खुद की गँवा बैठे जान, VIDEO वायरल

कबीर दास का एक दोहा है – ‘परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर”। इसका अर्थ है, ‘सज्जन व्यक्तियों का जन्म दूसरों की सेवा के लिए ही होता है’। बहुत कम लोग अपने जीवन में इस सिद्धांत पर चल पाते हैं। उन्हीं लोगों में से एक अरुण तिवारी भी थे, जिन्होंने दूसरे का जीवन बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। दरअसल, अरुण तिवारी मुंबई की एक बिल्डिंग में लगी आग में दूसरों को बचाने के लिए घुस गए थे। उन्होंने 2 बच्चों के प्राण भी बचाए, लेकिन इस प्रयास में वह स्वयं दुनिया से विदा हो गए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 22 अक्टूबर 2021 (शुक्रवार) की है। मुंबई के लोवर परेल स्थित आवासीय अपार्टमेंट वन अविघ्ना पार्क में अचानक आग लग गई। यह आग बिल्डिंग की 19वीं मंजिल पर लगी थी। घटना के समय कई लोग उस इमारत में मौजूद थे। इन लोगों में कई महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे।

अपार्टमेंट में आग 12 बजे के आसपास शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी थी। आनन-फानन में पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी गई, लेकिन उससे पहले ही बिल्डिंग के सिक्योरिटी गार्ड अरुण तिवारी 19वीं मंजिल पर पहुँच गए। उन्होंने जलते फ्लैट से 1 महिला और 2 बच्चों को बाहर निकाला। इसके बाद वो उस फ्लैट में किसी अन्य व्यक्ति की फँसे होने की आशंका के कारण अंदर चले गए। तब तक आग पूरे फ़्लैट में फ़ैल चुकी थी।

फ्लैट में हर तरफ आग और धुआँ भर जाने के कारण गार्ड अरुण तिवारी बालकनी में आ गए। जब आग बालकनी की तरफ भी फैलने लगी, तब मजबूरन अरुण तिवारी 19वीं मंजिल की रेलिंग पकड़ कर नीचे लटक गए।

अरुण तिवारी अरुण तिवारी बहुत देर तक खुद को उस हालत में नहीं रोक पाए। कुछ देर बाद उनका हाथ छूट गया और वो 19वीं मंजिल से नीचे गिर गए। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने उनको स्थानीय केईएम अस्पताल में भर्ती करवाया। लेकिन वहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हालाँकि, तब तक दमकल की भी गाड़ियाँ घटनास्थल पर पहुँच चुकी थीं, फिर भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।

अरुण तिवारी के साथी गार्डों ने बताया कि अरुण तिवारी लगभग 8 वर्ष से बिल्डिंग में सुरक्षा गार्ड थे। घटना वाले दिन वो नियमित चक्कर लगा रहे थे। अचानक ही बिल्डिंग का अलार्म बज गया। इसी के बाद 19 वीं मंजिल स्थित फ़्लैट में आग लगने का पता चला। फ़्लैट के मालिक ने पूरी घटना की जानकारी दी। अरुण तिवारी का 19वीं मंजिल से लटकते हुए वीडियो भी वायरल हो गया है।

अरुण तिवारी बिना पुलिस या फायर ब्रिगेड की प्रतीक्षा किए घटनास्थल की तरफ दौड़ पड़े थे। वो 1 महिला और 2 बच्चों को बचाने में सफल रहे पर खुद को नहीं बचा पाए। अरुण तिवारी के एक साथी गार्ड के अनुसार, उन्होंने आग से घिरे होने के दौरान उन्हें फोन भी किया था। साथी गार्ड के अनुसार, मुख्य दरवाजे से निकलना नामुमकिन था। उन्होंने फ़्लैट में मौजूद आग बुझाने वाले उपकरण का भी इस्तेमाल किया, लेकिन धुआँ अधिक होने के चलते उनका दम घुटने लगा। धुएँ के चलते ही उनको निकलने का रास्ता भी ठीक से नहीं दिखाई दिया था।

माना जा रहा है कि अरुण ने नीचे की मंज़िल पर स्थित बालकनी पर उतरने की कोशिश की, लेकिन वो सफल नहीं हो पाए और 19वीं मंज़िल से जमीन में गिर गए। इमारत में अधिकतर फ़्लैट 3 से लेकर 5 BHK तक हैं। यहाँ कई व्यापारी और सरकारी व प्राइवेट सेक्टर के अधिकारी रहते हैं। बाद में आदित्य ठाकरे ने भी घटनास्थल का दौरा किया और स्थिति की जानकारी ली थी।

अविघ्ना अपार्टमेंट में हर कोई उन्हें एक नेक और अच्छे इंसान के रूप में जानता था। मृत अरुण तिवारी की उम्र लगभग 30 वर्ष थी और वो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के निवासी थे। उनका गाँव हथिगनी, प्रयागराज शहर से थोड़ी दूरी पर स्थित है। अरुण तिवारी के 40 वर्षीय भाई विनय तिवारी ने बताया कि उनके भाई की बिल्डिंग से लटकी वीडियो उन्हें भी मोबाईल पर मिली। दुखी भाई ने बताया कि वो उस वीडियो को देखने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। अरुण की शादी अभी नहीं हुई थी और वह मुंबई के माटुंगा में रहते थे। उनका परिवार उनकी कमाई पर आश्रित था।

अरुण के भाई विनय ने बताया कि कुछ समय पहले ही भाई से फोन पर अंतिम बातचीत हुई थी। उन्होंने घर के खर्च के लिए 2,000 रुपये भी भेजे थे। इसमें से उन्होंने आधा माँ के इलाज पर खर्च करने को कहा था। अरुण की 51 वर्षीया माँ कमला देवी अस्थमा की मरीज हैं। अरुण अंतिम बार अपने घर लगभग एक वर्ष पूर्व अपनी बहन शिल्पा की शादी में गए थे। परिवार वालों के अनुसार उन्होंने इस शादी में अपनी तरफ से बहुत सहयोग किया था।

अरुण के पिता ललिता प्रसाद की 10 वर्ष पहले ही मृत्यु हो चुकी है। अरुण के चाचा मुकेश घटना की सूचना पाते ही केईएम अस्पताल की तरफ निकल चुके हैं। उनका कहना है कि सिक्योरिटी कम्पनी को अरुण के परिवार वालों को मुआवजा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा गार्डों को कम्पनी ने सुरक्षा संबंधी उचित संसाधन नहीं दिए हैं। वहीं, मुंबई पुलिस ने इस घटना की FIR कालाचौकी पुलिस स्टेशन में दुर्घटना के रूप में दर्ज की है।

‘खालिस्तान’ के नक़्शे में UP और राजस्थान भी, भारत से अलग देश बनाने का ‘खेल’ सोशल मीडिया पर… लोगों ने वहीं दिखाई औकात

‘सिख्स फॉर जस्टिस’ नाम की कट्टरवादी सिख संस्था ने तथाकथित खालिस्तान का नक्शा जारी किया है, जिसके बाद से लोग सोशल मीडिया पर उसकी आलोचना कर रहे हैं। उसने कहा है कि भारत को काट कर इस क्षेत्र को सिखों का अपना मुल्क बनाया जाएगा। अक्टूबर 2021 के अंत में इसके लिए उसने लंदन में रेफेरेंडम आयोजित करने का भी निर्णय लिया है। ‘क्वीन एलिजाबेथ सेंटर’ में ये भारत विरोधी कार्यक्रम होगा।

इस तथकथित खालिस्तान के नक़्शे में पंजाब और हरियाणा के अलावा दिल्ली के हिस्सों को भी रखा गया है। साथ ही उत्तर प्रदेश का तराई इलाका और राजस्थान का जोधपुर-बीकानेर भी इसमें है। इतना ही नहीं, हिमाचल प्रदेश को भी इसमें शामिल कर लिया गया है। साथ ही राजस्थान में सुदूर बूँदी और कोटा को भी ‘खालिस्तान’ में ही गिना गया है। दावा है कि भारत से काट कर इन हिस्सों को अलग कर दिया जाएगा।

जिन इलाकों को तथाकथित खालिस्तान में शामिल किया गया है, उन्हीं क्षेत्रों के लोगों ने इस नक्शा को जारी करने वाले ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ को जम कर सुनाया है। एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “जोधपुर? %$# में चाकरी डाल कर घुमाएँगे, एक बार आकर तो देखो।”

डॉक्टर शुभम नाम के यूजर ने लिखा, “#@% जोधपुर वाले गोटे मुँह में अटका देंगे।”

एक अन्य यूजर ने तंज कसा, “$%# कोटा ले जाओगे तो हमारे बच्चे प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कैसे करेंगे?”

वहीं एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “इन $$@ को पता ही नहीं है भरतपुर के बारे में। ऐसे ही नक़्शे में जोड़ दिया। भरतपुरिये ऐसे $#% मारेंगे कि इनके पिताजी खालिस्तान भूल जाएँगे।”

वहीं ‘द स्किन डॉक्टर’ ने लिखा, “विभाजन के बाद पंजाब का 52% हिस्सा पाकिस्तान में चला गया। पाकिस्तान वो जगह है, जहाँ सिखों पर लगातार अत्याचार हो रहे हैं। लेकिन, इन दोनों की हिम्मत नहीं है कि इन हिस्सों को अपना बताएँ, क्योंकि वहीं से इन्हें भोजन आता है।”

एक अन्य ट्विटर हैंडल ने पूछा, “करतारपुर और ननकाना साहिब के बिना ही खालिस्तान? लगता है कि ISI ने इस नक़्शे को बनाया है।”

कई लोगों ने ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ को याद दिलाया कि वो पाकिस्तान वाले पंजाब का हिस्सा भी अपने ‘खालिस्तान’ में जोड़ कर दिखाएँ। लोगों ने पूछा कि महाराज रणजीत सिंह के जिस सिख साम्राज्य की राजधानी लाहौर में थी, उस इलाके को खालिस्तान वाले कैसे भूल गए? बता दें कि ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ अक्सर भड़काऊ बातें कर के भारत को तोड़ने की बातें करता रहता है और पाकिस्तान के एजेंडे को आगे बढ़ाता है।

जेल में रोते रहते हैं आर्यन, जेल का ही खाते हैं खाना: जेल के एक कैदी ने सुनाई ड्रग्स मामले में बंद कैदी नंबर 956 की कहानी

मुंबई में क्रूज पार्टी में ड्रग्स लेने के आरोप में गिरफ्तार किए गए बॉलीवुड ऐक्टर शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान आर्थर रोड जेल में बंद हैं। उनकी जमानत याचिकाओं के ख़ारिज होने के चलते वो जेल से बाहर नहीं आ पाए हैं। जेल में कैदी नंबर 956 के रूप में बंद आर्यन की दिनचर्या आम कैदियों जैसी ही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जेल में आर्यन खान को कोई स्पेशल सुविधा नहीं दी जा रही है। उनके साथ जेल में बंद रहे एक बंदी ने कथित रूप से बताया कि आर्यन जेल की बैरक में अक्सर रोते रहते हैं। आर्यन को जेल में अन्य कैदियों वाला ही खाना दिया जाता है। इस खाने में बिस्किट भी शामिल है।

इसी के साथ घर वालों से मिले पैसे से आर्यन जेल की कैंटीन से सामान खरीद कर खाते हैं। आर्यन खान को जेल में लगभग 2 सप्ताह से अधिक हो चुके हैं। आर्यन न तो ढंग से खाना खा रहे हैं और न ही उचित मात्रा में पानी पी रहे हैं। इसीलिए जेल के अधिकारी उनके स्वास्थ्य को ले कर चिंतित हैं।

बताया जा रहा है कि आर्यन अक्सर दुखी रहते हैं। जेल के टॉयलेट का भी वह बहुत ही कम इस्तेमाल करते हैं। जेल सुपरिटेंडेंट के अनुसार, शाहरुख़ खान ने आर्यन को खर्च के लिए 4500 रुपये दिए हैं। शाहरुख़ इसी दिन आर्यन से मिलने जेल में भी आए थे।

दरअसल, 2 बार जमानत याचिका ख़ारिज होने के बाद आर्यन खान के वकील ने मुंबई हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है। याचिका में आर्यन खान की तरफ से कहा गया है कि क्रूज पर ड्रग्स बरामदगी के मामले में NCB उनके व्हाट्सएप चैट को गलत तरीके से पेश कर रही है। इसी के साथ आर्यन खान ने कहा कि उनके पास से कोई भी ड्रग्स नहीं मिला है। पकड़े गए 20 आरोपितों में से उन्होंने अपना संबंध सिर्फ अरबाज़ मर्चेंट और आचित कुमार से बताया।

आर्यन खान ने अपनी व्हाट्सएप चैट को घटना से पहले की बताया है। उन्होंने NCB पर अपनी बातचीत को गलत तरीके से तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया है। वहीं, आर्यन की जमानत याचिका का विरोध करते हुए NCB ने कहा है कि यदि उन्हें जमानत दी गई तो वो सबूतों को प्रभावित कर सकते हैं। इस मामले की सुनवाई 26 अक्टूबर को होनी है।

रिपोर्ट के अनुसार, आर्यन के बैरक में एक मंदिर है और आर्यन इस मंदिर में रोज सुबह 7 बजे होने वाली आरती में शामिल होते हैं। पूजा खत्म होने तक वो वहीं रहते हैं। इस दौरान वो किसी से ज्यादा बात भी नहीं करते।