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जेल में रामायण की कहानी पढ़ कर समय व्यतीत कर रहे हैं आर्यन खान, लाइब्रेरी से मँगाई किताबें: सामान्य कैदी की तरह ही रखा जा रहा

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ खान के बेटे आर्यन खान फ़िलहाल मुंबई के आर्थर रोड जेल में बंद हैं। मीडिया में जेल सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि ड्रग्स मामले में जेल में बंद आर्यन खान भगवान श्रीराम और माँ सीता की कहानी पढ़ रहे हैं। जेल में वो ‘गोल्डन लायन’ और रामायण की कहानी से जुड़ी एक पुस्तक पढ़ रहे हैं। उन्हें पहले क्वारंटाइन वार्ड में रखा गया था, लेकिन अब वो सामान्य वार्ड में हैं।

आर्यन खान एक धार्मिक और एक फिक्शन की पुस्तक पढ़ कर अपन समय व्यतीत कर रहे हैं। जेल प्रशासन का कहना है कि अन्य कैदियों की तरह ही उन्हें रखा गया है, जैसा कि जेल का नियम है। आर्यन ने ये पुस्तकें जेल अधिकारियों से माँगी। इसके बाद जेल प्रशासन ने उन्हें जेल की लाइब्रेरी से ये पुस्तकें दिलाई। जेल लाइब्रेरी में सैकड़ों पुस्तकें हैं। कइयों का इंतजाम अधिकारियों ने किया है तो कई कैदी यहाँ छोड़ कर चले जाते हैं।

कभी-कभी कैदियों को अपने सम्बन्धियों से भी पुस्तकें लेने की अनुमति दी जाती है। ऐसे मामलों में पुस्तक धार्मिक या मनोवैज्ञानिक रूप से प्रेरक होनी चाहिए। आर्यन खान 8 अक्टूबर, 2021 से ही जेल में हैं। आर्यन खान अन्य कैदियों की तरह वो सुबह के 6 बजे उठते हैं। 7 से सवा 7 के बीच कैदियों को चाय दी जाती है। 8 बजे सुबह का नाश्ता और 11:30 में दिन का भोजन दिया जाता है। दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक कैदियों को अपने-अपने बैरक में बंद रहना पड़ता है।

शाम के 5:30 बजे ही कैदियों को रात का भोजन दे दिया जाता है और फिर उन्हें अपने-अपने बैरकों में बंद कर दिया जाता है। रात का भोजन पहले जरूर दे दिया जाता है, लेकिन कैदी इसे शाम 7 से 8 के बीच ही खाते हैं। दोपहर और शाम को आर्यन खान किताबें पढ़ते हुए समय व्यतीत करते हैं। बैरक में टीवी भी है, जिसमें ख़बरें, खेल और क्रिकेट चलता रहता है। कैदी वॉलीबॉल और फुटबॉल भी खेल सकते हैं, लेकिन आर्यन खान को सुरक्षा कारणों से फ़िलहाल अन्य कैदियों से ज्यादा घुलने-मिलने नहीं दिया जा रहा है।

उधर एंटी-ड्रग्स एजेंसी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधिकारी समीर वानखेड़े की टीम ने जब से कॉर्डेलिया क्रूज पर ड्रग्स पार्टी का भंडाफोड़ कर बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को गिरफ्तार किया है, तब से वो सुर्खियों में बने हुए हैं। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक द्वारा एनसीबी के जोनल निदेशक पर आरोप लगाने के बाद अब उनकी पत्नी क्रांति रेडकर वानखेड़े ने ट्विटर पर Koimoi नामक बॉलीवुड वेबसाइट को समीर और उनके परिवार की छवि खराब करने के इरादे से दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक खबरें फैलाने के लिए फटकार लगाई है।

‘सुकेश चंद्रशेखर और जैकलीन फर्नांडिस एक-दूसरे को डेट कर रहे थे’: वकील का दावा, जेल में बंद अपराधी ने कहा- गिफ्ट की दी थी लग्जरी कारें

बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस और 200 करोड़ रुपए की वसूली के मामले में जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर के रिश्ते को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। सुकेश के वकील ने दावा किया है कि सुकेश और जैकलीन फर्नांडिस एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। इससे पहले भी इस बात का दावा किया गया था कि सुकेश तिहाड़ जेल से ही जैकलीन को गिफ्ट और चॉकलेट भेजता था।

ताजा मामले में सुकेश चंद्रशेखर का केस लड़ने वाले वकील अनंत मलिक ने मीडिया से कहा, “जैकलीन और सुकेश डेटिंग कर रहे थे। मैं ये जानता हूँ।” वहीं, नोरा फतेही के बारे में वकील ने कहा कि नोरा फतेही इस मामले में भले ही खुद को पीड़ित बताने का दावा करती हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि उन्हें बीएमडब्ल्यू कार गिफ्ट की गई थी।

ईडी द्वारा नोरा फतेही को पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर सुकेश के वकील का कहना है कि वे (नोरा और जैकलीन) लाभार्थी हैं, इसलिए उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है। इस बीच आज (शनिवार) दिल्ली की एक अदालत ने सुकेश चंद्रशेखर और उसकी पत्नी लीना मारिया पॉल समेत सभी आरोपितों को 1 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। ये सभी तिहाड़ जेल में रहेंगे। इससे पहले नोरा फतेही और जैकलीन फर्नांडिस का आमना-सामना सुकेश चंद्रशेखर से कराया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, सुकेश ने इस बात को स्वीकार कर लिया है कि उसने जैकलीन और नोरा फतेही को लग्जरी कारें और महँगे गिफ्ट किए थे। उसने मीडिया के सामने यह खुलासा किया। सूत्रों का कहना है कि सुकेश चंद्रशेखर ने नोरा फतेही और जैकलीन फर्नांडिस को महँगे तोहफे भेजने के लिए जबरन वसूली के पैसे का इस्तेमाल किया था। बताया जा रहा है कि सुकेश अब दोनों अभिनेत्रियों को बड़े बँगले गिफ्ट करने वाला था।

वहीं नोरा फतेही ने एक बयान में कहा था कि वह पीड़ित हैं और उन्होंने सुकेश चंद्रशेखर के खिलाफ मामले में गवाह के रूप में जाँचकर्ताओं की मदद करने का फैसला किया था। फिलहाल एजेंसी इस बात की जाँच कर रही है कि आखिर दोनों अभिनेत्रियों ने इतने महँगे गिफ्ट क्यों लिए थे।

गौरतलब है कि पिछले महीने ही इस बात का खुलासा हुआ था कि सुकेश चंद्रशेखर तिहाड़ जेल के अंदर से स्पूफिंग के जरिए जैकलिन फर्नांडिस को कॉल करता था। वह अपनी पहचान सुकेश चंद्रशेखर की बजाय कुछ और बताता था। उसने जैकलीन को फोन पर बताया वह रसूखदार और बड़े ओहदे पर है। सूत्रों के मुताबिक, “जब जैकलीन उसके झाँसे में आ गई तो उसने उन्हें महँगे फूल और चॉकलेट भेजना शुरू कर दिया था।”

लड़की के रेप का आरोप, फिर ब्लैकमेल और वसूली: ‘सेक्सटॉरशन’ रैकेट का मास्टरमाइंड नासिर धराया, यूट्यूब अधिकारी बन करता था कॉल

दिल्ली पुलिस ने एक ‘सेक्सटॉरशन’ रैकेट का पर्दाफाश करते हुए नासिर को गिरफ्तार किया है। वो फर्जी यूट्यूब अधिकारी बन कर लोगों को ब्लैकमेल करता था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी ने इसकी शिकायत की थी, जिसके बाद ये कार्रवाई की गई। नासिर इस रैकेट का मास्टरमाइंड है। पिछले दो वर्षों से वो राजस्थान के मेवात में रह कर इस रैकेट का संचालन कर रहा था।

दिल्ली पुलिस ने जानकारी दी है कि पीड़ितों ने अपनी शिकायत में बताया था कि उन्हें खुद को यूट्यूब अधिकारी बता रहे कुछ लोगों से जबरन वसूली के फोन कॉल्स आ रहे थे। फोन करने वाले लोग कहते थे कि उन्हें एक लड़की से शिकायत मिली है कि आपने फलाँ लड़की का यौन शोषण किया है। एक पीड़ित ने तो डर के मारे ब्लैकमेल करने वालों के कहने पर उन्हें 4 लाख रुपए भी ट्रांसफर कर दिए।

आरोपित के पास से पुलिस ने 2 लाख रुपए कैश बरामद किए हैं। साथ ही उसके पास से एक SUV गाड़ी भी मिली है, जो उसने अपराध की काली कमाई से खरीदी है। आरोपितों से जुड़े 6 बैंक खातों को सीज कर दिया गया है। इसी महीने राजस्थान से ही ऐसे ही एक और रैकेट का पर्दाफाश किया गया था, जब भरतपुर से 24 वर्षीय हकीमुद्दीन गिरफ्तार हुआ था। पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं।

ये रैकेट पूरी साजिश के तहत काम करता था। पहले तो फेसबुक पर एक लड़की की आईडी बनाई जाती थी और उससे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजा जाता था। फेसबुक के बाद व्हाट्सएप्प पर बात होने लगती थी। चैटिंग करते-करते सामने वाले को यौन कृत्यों में शामिल होने के लिए उकसाया जाता था। बाद में उस पूरे वीडियो कॉल को रिकॉर्ड कर के जबरन वसूली की जाती थी। ऐसे कर के कई पीड़ितों से रुपए वसूले गए थे।

‘मुझे हिन्दू होने पर शर्म आ रही है’: सड़क पर नमाज के विरोध से भड़कीं स्वरा भास्कर, गुरुग्राम में हर जुमे को लगता है बड़ा ट्रैफिक जाम

वामपंथ समर्थक स्वरा भास्कर का हिंदू विरोधी चेहरा एक बार फिर से सामने आ गया है। उन्हें एक बार फिर से अपने हिंदू होने पर शर्म आने लगी है। इस बार बॉलीवुड अभिनेत्री को अपने हिंदू होने पर शर्म गुरुग्राम की एक घटना पर आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें खुले आसमान के नीचे कुछ मुस्लिम नमाज अदा कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग जय श्री राम के नारे लगाते सुनाई दे रहे हैं। इसी घटना को स्वरा ने कट्टरता का नाम दिया और उन्हें हिंदू होने पर शर्म आने लगी। उन्होंने ट्वीट किया, “एक हिंदू के रूप में मैं शर्मिंदा हूँ।”

वायरल वीडियो गुरुग्राम के सेक्टर-12A का है, जहाँ सार्वजनिक स्थल पर कुछ मुस्लिम नमाज पढ़ रहे थे। वहीं पर बजरंग दल और अन्य लोगों ने जय श्री राम व भारत माता की जय व वंदे मातरम के नारे लगाए। इसके साथ ही वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कई पुलिसकर्मी नजर आ रहे हैं। बता दें कि हर सप्ताह जुमे के दिन इस तरह की हरकत से गुरुग्राम में बड़ा ट्रैफिक जाम लग जाता है।

इस बयान को लेकर लोग स्वरा भास्कर की खिंचाई कर रहे हैं, जिस पर अब स्वरा भास्कर ने एक अन्य ट्वीट कर हिंदुत्व का मतलब समझाने की कोशिश की है। स्वरा ने बताया कि वह किस मुद्दे पर शर्मिंदा हैं। उन्होंने संस्कृत का एक श्लोक ट्वीट किया, “मेरा हिंदुत्व मुझे सिखाता है कि पेड़ों पर फल दूसरों पर उपकार के लिए लगते हैं, नदी दूसरों को फायदा देने के लिए बहती है। गाय दूसरों के भले के लिए दूध देती है और मनुष्य का शरीर दूसरों के भले के लिए होता है।”

स्वरा ने आगे यह भी बताने की कोशिश की है कि उनका धर्म उन्हें क्या नहीं सिखाता है। उन्होंने लिखा, “मेरा हिंदुत्व दूसरे धर्म के लोगों को परेशान करना नहीं सिखाता। जब मैं कुछ लोगों को मेरे भगवान (श्री राम) का नाम लेकर दूसरे धर्म के लोगों को परेशान करते देखती हूँ वो भी तब जब वो शांति से प्रार्थना कर रहे होते हैं। ऐसे में यह मेरे भगवान और मेरे हिंदुत्व का अनादर है। मैं ऐसे लोगों को लेकर शर्मिंदा हूँ। जब वे लोग हमारे भगवान का नाम लेकर अपराध करते हैं तो एक हिंदू होने पर मैं शर्मिंदा हूँ।”

भले ही इस तरह का स्पष्टीकरण देकर वामपंथी स्वरा भास्कर सोशल मीडिया पर लोगों का कोपभाजन बनने से बचना चाहती हैं, लेकिन हिंदू और हिंदुत्व के खिलाफ उनकी नफरत जगजाहिर है। इससे पहले इसी साल वामपंथी स्वरा ने हिंदुत्व की तुलना कट्टर जिहादी संगठन तालिबान से की थी। उन्होंने ट्वीट किया था, “हम तालिबान के आतंक पर हैरानी और दुःख जताते हुए ‘हिंदुत्व आतंकवाद’ की तारीफ नहीं कर सकते। ऐसा भी नहीं हो सकता कि हम तालिबान के आतंक पर चुप बैठें और ‘हिंदुत्व आतंकवाद’ पर आक्रोश जताएँ। हमारे मानवीय व नैतिक मूल्य इस पर आधारित नहीं होने चाहिए कि अत्याचारी कौन है और पीड़ित कौन है।” हालाँकि इस घटना के बाद स्वरा के खिलाफ केस भी दर्ज किया गया था।

मिलाद-उल-नबी का जुलूस, Pak में महिला को ‘हूर’ बना कर लगाई प्रदर्शनी: वायरल वीडियो को मौलाना ने बताया रसूल अल्लाह का अपमान

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से एक अजीबोगरीब वाकया सामने आया है। मुल्तान शहर का ये वीडियो मिलाद-उल-नबी त्योहार के दिन का है। चेनाब नदी के किनारे स्थित इस पाकिस्तान के सातवें सबसे बड़े शहर से आए वीडियो में एक महिला को सजा-धजा कर बैठे दिखाया गया है और उसके आसपास कुछ लोग खड़े हैं। वहाँ एक प्रदर्शनी सी लगाई गई है। बताया जा रहा है कि उक्त महिला को ‘हूर’ बना कर वहाँ बिठाया गया था।

पाक अधिकृत कश्मीर के मानवाधिकार कार्यकर्ता आरिफ आजाकिया ने भी इस वीडियो को शेयर किया और इसकी निंदा की। वीडियो में देखा जा सकता है कि इस्लामी जुलूस में कई लोग हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। महिला को ‘हूर’ बना कर बिठाया गया है और वहाँ कई फोटोग्राफर मौजूद हैं। बता दें कि इस्लामी कट्टरपंथियों में मान्यता है कि जिहाद करते हुए मरने के बाद जन्नत में 72 हूरें मिलती हैं।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की विधानसभा में भी ये मामला उठा, जहाँ PTI (पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ) के एक विधायक ने इस हरकत के खिलाफ ‘मोशन ऑफ एडजर्नमेंट’ फ़ाइल किया। अल्लामा हिशाम इलाही जहीर नाम के एक मौलवी ने इस घटना की निंदा करते हुए इस्लाम के तमाम बड़े मौलानाओं और संस्थाओं को आड़े हाथों लिया है कि वो इसके खिलाफ आवाज़ क्यों नहीं उठा रहे।

नाराज़ मौलवी ने उलेमाओं को खरी-खरी सुनाई

वीडियो में देखा जा सकता है कि लाउडस्पीकर बजा कर कई लोग नाच रहे हैं, जिनमें कुछ महिलाएँ भी शामिल हैं। उक्त मौलवी ने कहा कि एक महिला को बिना हिजाब-बुर्का के बिठा कर तमाशा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मस्जिदों में अजान हो रही है और बाहर नाच-गाना और भांगड़ा चल रहा है, जो रसूल अल्लाह का अपमान है। उन्होंने कहा कि तमाम उलेमा और मौलाना इन्हें रोक क्यों नहीं रहे हैं?

जब महात्मा गाँधी जेल में थे और वीर सावरकर ने रिहाई की माँग की थी… वो इतिहास जो छिपा लिया जाता है

जब विनायक दामोदर ‘वीर’ सावरकर के भाई गणेश दामोदर सावरकर का निधन 16 मार्च, 1945 को हुआ, तो शोक संवेदनाओं वाले पत्रों में से एक पत्र महात्मा गाँधी का भी शामिल था। उन्होंने वह पत्र सेवाग्राम से 22 मार्च को वीर सावरकर को संबोधित करते हुए लिखा, “आपके भाई के निधन का समाचार सुनकर यह पत्र लिख रहा हूँ। उनकी रिहाई के बारे में मैंने कुछ किया था, तब से उनके बारे में मेरी रूचि बनी हुई है।”

महात्मा गाँधी का यह पहला और आखिरी पत्र नहीं था, जिसमें उन्होंने सावरकर बंधुओं की रिहाई में अपनी कोशिशों का जिक्र किया हो। इससे पहले, शंकरराव देव को 20 जुलाई, 1937 को लिखे पत्र में उन्होंने कहा, “जब मैं यह कहूँगा कि मेरी ताकत में जो कुछ भी था, वह सब मैंने रिहाई के लिए अपने ढंग से किया तो शायद डॉ. सावरकर भी मेरी बात का अनुमोदन करेंगे।” इसी पत्र में उन्होंने यह भी लिखा कि “सावरकर बन्धु कम-से-कम यह तो जानते हैं कि हममें चाहे कुछ सिद्धांतों को लेकर जो भी मतभेद रहे हो, लेकिन मेरी कभी यह इच्छा नहीं हो सकती थी कि वे जेल में ही पड़े रहें।”

उपरोक्त दोनों पत्र महात्मा गाँधी के सम्पूर्ण वांग्मय में सार्वजानिक रूप से मौजूद है। जहाँ एक तरफ महात्मा गाँधी कई सालों बाद सावरकर बंधुओं की रिहाई के अपने प्रयासों का उल्लेख करते हैं तो दूसरी तरफ एक अन्य पत्र में वे उनकी रिहाई के लिए दया याचिका का मार्ग सुझाते हैं। लाहौर से 25 जनवरी 1920 को वीर सावरकर के भाई नारायण दामोदर सावरकर को लिखे एक पत्र में महात्मा गाँधी कहते हैं, “मेरा सुझाव है कि आप एक संक्षिप्त याचिका तैयार करें जिसमें तथ्यों को इस प्रकार प्रस्तुत करें ताकि यह बात बिलकुल स्पष्ट रुप से उभर आए कि आपके भाई ने जो अपराध किया था, उसका स्वरुप बिलकुल राजनीतिक था। मैं यह सुझाव इसलिए दे रहा हूँ कि तब जनता का ध्यान उस ओर केन्द्रित करना संभव हो जाएगा। इस बीच, जैसा कि मैं अपने एक पहले पत्र में आपसे कह चुका हूँ, मैं अपने ढंग से इस मामले में कदम उठा रहा हूँ।”

महात्मा गाँधी द्वारा वीर सावरकर को क्षमा/दया याचना लिखने का सुझाव नया नहीं था। उन्होंने अली बंधुओं – शौकत अली और मोहम्मद अली को भी ब्रिटिश सरकार से क्षमा याचना करने की राय दी थी। यही नहीं, उनकी रिहाई के लिए वे स्वयं वायसराय रीडिंग से भी मिले थे। हालाँकि, ‘यंग इंडिया’ में 27 जुलाई, 1921 को उन्होंने अपने ही प्रयास अथवा सुझाव को राजनीतिक दृष्टि से बहुत बड़ी भूल माना था।

इसी प्रकार, सावरकर बंधुओं के लिए उनके प्रयास ज्यादा सफल नहीं रहे क्योंकि वीर सावरकर की कालेपानी की सजा के दौरान असहयोग आन्दोलन अपने चरम पर था। इस आन्दोलन के चलते सावरकर बंधुओं की रिहाई में बाधा पैदा हुई थी। ‘यंग इंडिया’ में 18 मई, 1921 को गाँधी लिखते हैं, “अगर सहयोग आन्दोलन न होता तो दोनों सावरकर बंधु भी कालेपानी से बहुत पहले छूट कर आ जाते लेकिन अभी तो असहयोग बाधक है।” दरअसल, असहयोग आन्दोलन का स्वरुप ही ऐसा था कि पूर्ण स्वराज्य की माँग के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों को जेलों में भरा जा रहा था और ऐसे में महात्मा गाँधी चाहते हुए भी उनकी रिहाई के प्रयासों को अधिक बल नहीं दे सकते थे।

असहयोग आन्दोलन 1922 में समाप्त हो गया और फिर एक बार फिर कॉन्ग्रेस में हलचल शुरू हो गई। इस बार महात्मा गाँधी के करीबी माने जाने वाले मौलाना मोहम्मद अली ने वीर सावरकर की रिहाई का खुल कर समर्थन किया। साल 1923 में मौलाना कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष बने तो उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण की शुरुआत ही ‘अल्लाह हू अकबर’ और ‘महात्मा गाँधी की जय’ के नारों से की थी। यह वही मौलाना थे जो खिलाफत आन्दोलन के सूत्रधार और मुस्लिम लीग के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। अपनी “सांप्रदायिक महत्वाकांक्षाओं” के बावजूद उन्होंने अधिवेशन के दौरान वीर सावरकर की रिहाई के लिए स्वयं एक प्रस्ताव पेश किया, जिसे पूरी कॉन्ग्रेस ने सर्वसम्मति से पारित किया था। उन्होंने कहा था, “विनायक दामोदर सावरकर को सर्वाधिक तिरस्कारपूर्वक जेल में रखा जा रहा है, जबकि वे रिहा होने के हकदार हैं।” इस प्रस्ताव का जिक्र ‘गाँधी और गाँधीवाद’ जैसी पुस्तक लिखने वाले पट्टाभि सीतारमैया ने साल 1935 में प्रकाशित अपनी अन्य पुस्तक ‘द हिस्ट्री ऑफ़ द इंडियन नेशनल कॉन्ग्रेस’ के प्रथम खंड में किया है।

अभी तक तो महात्मा गाँधी द्वारा सावरकर बंधुओं की रिहाई के सन्दर्भों का जिक्र पढ़ने को मिलता है लेकिन एक अवसर ऐसा भी है जब वीर सावरकर ने महात्मा गाँधी की रिहाई की माँग की थी। 7 अक्टूबर, 1908 को दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गाँधी को गिरफ्तार कर लिया गया था। डीजी तेंदुलकर अपनी पुस्तक ‘महात्मा, लाइफ ऑफ मोहनदास करमचंद गाँधी’ के प्रथम खंड में बताते हैं कि 16 अक्तूबर को लन्दन में वीर सावरकर सहित लाला लाजपत राय, बिपिन चन्द्र पाल, आनंद के कुमारस्वामी, और जीएस खारपड़े ने महात्मा गाँधी के समर्थन में एक सभा का आयोजन किया था।

इस घटना के बाद, साल 1909 में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दोनों महानायकों की पहली प्रत्यक्ष मुलाकात लन्दन में दशहरा के एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। वीर सावरकर की जीवनी लिखने वाले प्रख्यात लेखक धनंजय कीर के अनुसार महात्मा गाँधी ने उस दिन अपने भाषण में कहा कि उन्हें सावरकर के साथ बैठने का सम्मान मिलने पर बहुत गर्व है। कीर, सावरकर के साथ-साथ लोकमान्य तिलक, डॉ. भीमराव आंबेडकर और ज्योतिराव फुले के भी जीवनीकार हैं।

साल 1924 के बेलगाँव अधिवेशन में महात्मा गाँधी को कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया, तो वहाँ वीर सावरकर के भाई नारायण सावरकर ने महाराष्ट्र प्रदेश की तरफ से अधिवेशन में हिस्सा लिया था। साल 1927 में महात्मा गाँधी ने अपने रत्नागिरी प्रवास के दौरान वीर सावरकर से मुलाकात की थी।

दरअसल, महात्मा गाँधी की वीर सावरकर सहित उनके भाइयों से सालों पुरानी जान-पहचान थी और उन्होंने एक नहीं बल्कि कई मौकों पर एकसाथ मंच साझा किया और एक-दूसरे की रिहाई के लिए भी आगे आए। दोनों में आपसी मतभेद भी थे लेकिन यह कोई विवादित मुद्दा नहीं है। राजनीतिक विचारधारा को लेकर दोनों की अपनी-अपनी समझ थी लेकिन व्यक्तिगत रूप से कभी एक-दूसरे का अनादर नहीं किया।

जब वीर सावरकर रत्नागिरी में नजरबंद थे तो कुछ दिनों के लिए वहाँ के एक प्रसिद्ध परिवार – पटवर्धन के यहाँ रुके थे। धनंजय कीर इस सन्दर्भ में लिखते हैं कि इस परिवार के एक सदस्य अप्पासाहेब पटवर्धन जोकि गाँधी के अनुयायी थे लेकिन सावरकर को अपनी प्रेरणा मानते थे। वे आगे लिखते हैं कि गाँधी ने कभी अप्पासाहेब का सावरकर के साथ काम करने पर ऐतराज नहीं जताया।

वैसे भी, यह ध्यान में रखना चाहिए कि कई मौकों पर महात्मा गाँधी के कॉन्ग्रेस और उनके नेताओं के साथ ही मतभेद और विवाद रहे हैं। सबसे बड़ा उदाहरण तो भारत के विभाजन का है। उस दौरान महात्मा गाँधी का पूरी कॉन्ग्रेस से ही मतभेद हो गया था। मनु गाँधी को 1 जून, 1947 को लिखे एक पत्र में उन्होंने खुल कर अपने मन की बात करते हुए कहा, “आज मैं अपने को अकेला पाता हूँ। लोगों को लगता है कि मैं जो सोच रहा हूँ वह एक भूल है… भले ही मैं कॉन्ग्रेस का चवन्नी का सदस्य नहीं हूँ लेकिन वे सब लोग मुझे पूछते हैं, मेरी सलाह लेते हैं… आजादी के कदम उलटे पड़ रहे हैं, ऐसा मुझे लगता है। हो सकता है आज इसके परिणाम तत्काल दिखाई न दें, लेकिन हिन्दुस्तान का भविष्य मुझे अच्छा नहीं दिखाई देता… हिन्दुस्तान की भावी पीढ़ी की आह मुझे न लगे कि हिंदुस्तान के विभाजन में गाँधी ने भी साथ दिया था।”

‘जन्नत से फरिश्ते आ रहे हैं मुझे लेने, जिब्राइल से रोज होती है बात’: अपनी खुदवाई कब्र पर कफन ओढ़ मौत का इंतजार करते रहे 109 साल के बुजुर्ग, पुलिस ने घर भेजा

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में 109 साल के मोहम्मद शफी ने अपने मौत की भविष्यवाणी की तो उन्हें देखने वालों की भीड़ जुट गई। शफी ने बाकायदा अपनी मौत का समय भी बता दिया था। उन्होंने अपनी कब्र तक खुदवा डाली। लेकिन उनकी भविष्यवाणी झूठी साबित हुई। यह घटना 22 अक्टूबर 2021 (शुक्रवार) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला सफ़दरजंग थाना क्षेत्र के नूरगंज गाँव का है। मोहम्मद शफी के घर जुमे के दिन यानि शुक्रवार को सुबह से ही लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। वजह शफी द्वारा की गई अपनी मौत की भविष्यवाणी थी। शफी ने कहा था कि दोपहर 1 बज कर 10 मिनट पर उनकी मौत होनी है।

मोहम्मद शफी बाकायदा नहा धो कर तैयार हो चुके थे। उन्होंने अपने लिए कब्र भी खुदवा ली थी और कफन ओढ़कर अपनी मौत का इंतजार कर रहे थे। मोहम्मद शफी का दावा था कि उन्हें लेने के लिए जन्नत से फ़रिश्ते आएँगे। जैसे-जैसे शफी द्वारा बताया गया मौत का समय नजदीक आ रहा था, वैसे-वैसे वहाँ लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही थी।

खबर मिलते ही पुलिस और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुँच गए। जब मोहम्मद शफी की भविष्यवाणी झूठी साबित हुई, तब वह घर लौटने को तैयार नहीं थे। इसके बाद SDM सिरौली गौसपुर सुरेेंद्रपाल विश्वकर्मा सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने किसी तरह समझा-बुझा कर उन्हें घर भेजा।

इसी के साथ भीड़ भी वहाँ से चली गई। एक रिपोर्ट के अनुसार अपनी मौत की भविष्यवाणी करने वाले मोहम्मद शफी का दावा है कि वह पांच वक्त का नमाज पढ़ते हैं और उनकी मुलाक़ात जिब्राइल से हर दिन होती है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मौत 5 साल पहले ही मुकर्रर थी, लेकिन किसी वजह से नहीं हुई।

इस मामले में जब शफी के बेटों से बातचीत की गई तो उन्होंने अपने अब्बा का मानसिक संतुलन सही नहीं बताया। उनके बेटों ने कहा कि सुबह उनके अब्बा खुद की कब्र खुदवा डाले। इसी के साथ वो कफ़न पहन कर कब्रिस्तान भी पहुँच गए थे।

बांग्लादेश के जैसा असम में हिंसा फैलाने की कोशिश: भगवान गणेश के सिर पर अरबास ने रखा पैर, सोशल मीडिया पर फोटो किया वायरल

बांग्लादेश में कट्टरपंथी इस्लामवादियों की उन्मादी भीड़ द्वारा मंदिरों में तोड़फोड़ किए जाने के बाद अब असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले से हिंदू देवता की मूर्ति को अपवित्र करने की एक और घटना सामने आई है। शहर में साम्प्रदायिक उन्माद भड़काने के लिए अरबास खान नाम के आरोपित ने भगवान गणेश की प्राचीन मूर्ति के सिर पर पैर रखकर फोटो ली और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना असम के नागाँव के पास पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले के तेंगालाँगसो क्षेत्र में स्थित एक धार्मिक स्थान पर हुई। यहाँ स्थानीय लोग भगवान गणेश की पूजा करते हैं। मूर्ति को तेंगलाँगसो में अरलोंग कुँड नामक एक धारा के बीच में रखा गया है। उस जगह पर हिंदू देवता को समर्पित एक मंदिर भी है।

सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई तस्वीरों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि आरोपित भगवान गणेश की मूर्ति के सिर पर अपना एक पैर रखकर पोज देता हुआ नजर आ रहा है। उसने अपने पैरों में जूते भी पहने हैं।

आरोपित अरबास खान द्वारा अपलोड की गई फेसबुक पोस्ट, साभार: फेसबुक यूजर मोनीराम टेरोन कोंगकट

सोशल मीडिया पर अपलोड की गई इस तस्वीर के सामने आने के बाद से हिंदुओं में काफी उबाल है। कई स्थानीय संगठनों समेत बजरंग दल और कार्बी छात्र संघ ने इस कुकृत्य की भर्त्सना की और आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। उन्होंने अरबास खान की गिरफ्तारी की माँग को लेकर प्रदर्शन भी किया। इस दौरान उन्होंने आरोपित द्वारा अपलोड की गई फोटो की हार्ड कॉपी भी ले रखा था। गणेश मंदिर समिति के सदस्यों ने भी इस घृणित कृत्य की निंदा की और युवक के खिलाफ बैथलांगसो थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

अरबास खान के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन (साभार: ime8 न्यूज)

स्थानीय मीडिया से बात करते हुए मंदिर समिति के एक सदस्य ने कहा, “हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का कृत्य बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” मंदिर समिति के सदस्य ने कहा कि वे अन्य धर्मों के लोगों के यहाँ पर आने के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने आगे कहा कि कई मुस्लिम, ईसाई और कई धर्मों के लोग पिकनिक के लिए यहाँ आते हैं। यह कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई मस्जिदों और चर्चों के साथ-साथ ईद जैसे धार्मिक त्योहारों में भी गए हैं, लेकिन इस तरह के अनैतिक व्यवहार से हिंदू धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है, जिसे माफ नहीं किया जाएगा।

आरोपित गिरफ्तार

इस वारदात के बाद लोगों की शिकायत पर पुलिस ने अरबास खान उर्फ ​​गुलाम अब्बास पटोवारी की तलाश शुरू की और उसे कचुआ गाँव से शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में हमरेन एसपी अजगरावन बसुमतारी ने आरोपित की युवक की तलाश का आदेश दिया था। इसके बाद उसे नगाँव, होजई और कार्बी आंगलोंग पुलिस ने एक ज्वाइंट ऑपरेशन चलाकर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, आरोपित घटना वाली जगह अपने तीन दोस्तों के साथ गया था और इसके बाद उसने मूर्ति पर अपना पैर रखकर फोटो खिंचवाई थी।

वह होजई जिले के जमुनामुख के भेरभेरी गाँव का रहने वाला है। जमुनामुख पुलिस उसकी तलाश में उसके घर गई थी, जहाँ उसके आंगलोंग जिले के ठिकाने का पता चला। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल पुलिस अरबास खान से पूछताछ कर रही है।

बांग्लादेश में क्या हुआ था?

उल्लेखनीय है कि हाल ही में दुर्गा पूजा समारोह के दौरान बांग्लादेश में कट्टरपंथियों द्वारा मूर्तियों में तोड़फोड़ की कई वारदातों को अंजाम दिया गया। रविवार 10 अक्टूबर को इस्लामिक चरमपंथियों ने बांग्लादेश के चटगाँव के फिरंगी बाजार इलाके में श्री श्मशानेश्वर शिव विग्रह मंदिर की दुर्गा मूर्ति को तोड़ दिया।

फिर 14 अक्टूबर को कई अन्य पूजा पंडालों में तोड़फोड़ की गई। हिंदुओं पर हमले के अन्य वीडियो के साथ-साथ टूटी हुई मूर्तियों, ध्वस्त किए गए पंडालों और माँ दुर्गा की मूर्ति को तालाब में फेंके जाने के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए।

इसके बाद 16 अक्टूबर को 400-500 चरमपंथियों की भीड़ ने इस्कॉन मंदिर पर हमला कर दिया। उनका यह हमला 17 और 18 अक्टूबर को भी जारी रहा। इस दौरान उन्मादियों ने हिंदुओं के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई। इस हमले में कई हिंदू मारे गए और कई घायल हुए।

मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं पर ये हमले कथित कुरान के अपमान के कारण किए गए थे। बाद में पुलिस की जाँच में पता चला कि दुर्गा पूजा स्थल में कुरान की प्रति रखने वाला और कोई नहीं, बल्कि इकबाल हुसैन नाम का एक मुस्लिम ही था।

‘हिन्दुओ, औकात में रहो! तुम्हारी महिलाएँ हमारी हरम का हिस्सा थीं, दासी थीं’: यूपी पुलिस के हत्थे चढ़ा सपा नेता अदनान खान, हो रही पूछताछ

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के एक नेता का आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट वायरल हो रहा है। उक्त फेसबुक पोस्ट आंबेडकर नगर के टांडा विधानसभा क्षेत्र में सपा यूथ विंग के विधानसभा अध्यक्ष अदनान खान का है, जिसमें हिन्दुओं को धमकी दी गई है। आंबेडकर नगर पुलिस ने जानकारी दी है कि सन्दर्भित प्रकरण के सम्बन्ध में थाना स्थानीय पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है और अभियुक्त को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है।

अदनान खान ने 70 लोगों को टैग करते हुए अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा था, “हिन्दुओं, अपनी औकात में रहो। कल बसखारी में जो भारत-मिलाप में चिल्ला-चिल्ला के उड़ रहे हो लाउडस्पीकर साउंड लगा कर। आने दो अखिलेश भैया को, सब अंदर हो जाएगा। तब योगी घंटी बजाएगा। हिन्दू औरतें हमारी हरम का हिस्सा थीं, हमारी दासी थीं। जानवरों को पूजने वाले जानवर ही रहेंगे। जय समाजवाद। जय अखिलेश यादव ज़िंदाबाद। 22 में बाइसिकिल। मुलायम ज़िंदाबाद।”

हालाँकि, इस फेसबुक पोस्ट के वायरल होने के बाद अदनान खान ने इसे लिखे जाने से इनकार किया है। उसने आंबेडकर नगर पुलिस अधीक्षक को लिखे गए पत्र में कहा है कि 21-22 अक्टूबर, 2021 को उसकी फेसबुक आईडी हैक हो गई थी। उसने बताया है कि 22 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे जैसे ही उसे इसका पता चला, उसने पासवर्ड रिसेट कर के इस पोस्ट को डिलीट किया। उसने उलटा आरोप लगाया है कि कुछ लोग उस पोस्ट का स्क्रीनशॉट फैला कर माहौल खराब कर सकते हैं।

‘आईडी हैक हो गई थी’ – सपा नेता अदनान खान का नया दावा

एक अन्य फेसबुक पोस्ट में उसने लिखा, “मेरे फेसबुक अकाउंट से कुछ शरारती तत्वों द्वारा कुछ आपत्तिजनक पोस्ट किए जा रहे थे। असुविधा क लिए खेद है। आगे से ऐसी स्थिति या शिकायत का मौका नहीं उत्पन्न होगा।” अदनान खान ने अपने फेसबुक हैंडल पर सपा की लाल टोपी पहने तस्वीरें भी लगा रखी हैं। एक तस्वीर में वो पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ भी दिख रहा है।

वो क्षेत्र में अदनान खान ‘अद्दू’ के नाम से जाना जाता है, जो कई दिनों से अखिलेश यादव के संपर्क में रहा है। उसे अक्टूबर 2020 में ‘समाजवादी युवजन सभा’ का टांडा विधानसभा क्षेत्र का अध्यक्ष बनाया गया था। जिलाध्यक्ष प्रद्युम्न यादव ‘बब्लू’ ने उसकी नियुक्ति की थी। उसे बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी। आंबेडकर नगर क्षेत्र में ही बसखारी प्रखंड आता है, जहाँ का वो रहने वाला है।

मुस्लिम छात्रा ने 3 हिन्दू प्रोफेसरों के खिलाफ रची साजिश… जाँच में तीनों निर्दोष निकले, अमेरिकी कॉलेज में हिंदू घृणा चरम पर

‘हिन्दू ऑन कैम्पस’ नामक ट्विटर हैंडल से शुक्रवार (22 अक्टूबर 2021) को संयुक्त राज्य अमेरिका के डार्टमाउथ शहर में एक मुस्लिम छात्रा द्वारा 3 हिन्दू प्रोफेसरों के खिलाफ रची गई एक असफल साजिश का खुलासा किया गया है। छात्रों द्वारा संचालित ट्विटर हैंडल हिन्दू ऑन कैम्पस ने बताया कि कॉलेज की मुस्लिम समुदाय की पूर्व Ph.D छात्रा माहा हसन अलशावी ने कॉलेज के 3 हिन्दू प्रोफ़ेसरों को निकलवाने की साजिश रची थी। जाँच के बाद सभी प्रोफेसर बेदाग निकले हैं। इसे डार्टमाउथ शहर के इतिहास का सबसे बड़ा ‘हिंदूफोबिक स्कैंडल’ बताया गया है।

हिन्दू ऑन कैम्पस ट्विटर एकाउंट द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, माहा हसन अलशावी ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वो तीनों प्रोफेसर हिन्दू हैं। कंप्यूटर साइंस पीएचडी की पूर्व छात्रा माहा हसन अलशावी द्वारा यह आरोप सितंबर 2019 और नवंबर 2020 के बीच लगाए गए थे। इन आरोपों में माहा हसन अलशावी ने कहा गया था कि उसके रिसर्च सलाहकार अल्बर्टो क्वाट्रिनी ली ने बिना अनुमति के उसके कार्यालय में प्रवेश किया। इसके साथ ही उन्होंने 20-30 सेकंड तक दो बार अपने प्राइवेट पार्ट को उसके सामने छुआ।

इसके साथ ही माहा हसन अलशावी ने कंप्यूटर साइंस विभाग के अपने 3 हिन्दू प्रोफेसरों पर धर्म के आधार पर उसके साथ भेदभाव करने का भी आरोप लगाया था। इन प्रोफेसरों के नाम दीपर्णब चक्रवर्ती, अमित चक्रवर्ती और प्रसाद जयंती हैं।

अपनी शिकायत में अलशावी ने कहा था कि प्रोफेसर जयंती ने जानबूझ कर उसे ‘लो पास’ ग्रेड दिया था और उसके लिए समस्याएँ खड़ी की थी। इसके साथ ही उन्होंने एडवांस एल्गोरिदम की क्लास लेने से भी उसे रोक दिया था। एक अन्य हिन्दू प्रोफेसर अमित चक्रवर्ती पर अलशावी ने आरोप लगाया था कि प्रोफेसर अमित चक्रवर्ती ने उसके रिसर्च एडवाइजर से खुद को अलग कर लिया थाऔर 3 अक्टूबर 2020 तक नया एडवाइजर खोजने के लिए कहा था। अलशावी ने कहा कि उसके साथ ऐसा बदला इसलिए लिया जा रहा था, क्योंकि उसने अपने रिसर्च सलाहकार अल्बर्टो के खिलाफ यौन शोषण की शिकायत की थी।

अलशावी ने इस मामले को तूल देने की पूरी कोशिश की। उसने भूख हड़ताल का भी एलान किया था। साथ ही अपनी विचारधारा के समर्थक कई छात्रों को भी उसने अपने साथ जमा कर लिया था। इस घटना को लेकर बाकायदा विरोध प्रदर्शन भी किए गए थे।

प्रोफेसरों पर लगाया मुसलमानों से नफरत करने का आरोप

इस मामले की जाँच कॉलेज के विविधता और समानता (IDE) निदेशक एंटोनियो फेरेंटिनों ने की। उन्होंने माहा हसन अलशावी के 16 जून 2020 में भेजे गए एक ईमेल का उल्लेख किया। इस ईमेल में अलशावी द्वारा आरोप लगाया गया था कि उसकी धार्मिक पहचान के खिलाफ प्रोफेसर दीपर्णब चक्रवर्ती, अमित चक्रवर्ती और प्रसाद जयंती ने अशोभनीय टिप्पणी की। शिकायत में तीनों प्रोफेसरों के अलावा अलशावी ने 3 छात्रों का भी नाम लेते हुए उन्हें हिन्दू होने के नाते मित्र और सहकर्मी बताया था।

हिंदू ऑन कैंपस द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

जाँच के दौरान जाँचकर्ता एंटोनियो फेरेंटिनो ने पाया कि प्रोफेसर दीपर्णब चक्रवर्ती के खिलाफ कोई विशेष शिकायत नहीं है। तब अलशावी ने कहा कि उसे मुस्लिम होने के चलते परेशान किया गया। जब जाँचकर्ता ने उत्पीड़न के सबूत मांगे तब महाहसन अलशावी उसे देने में नाकाम रहीं। फेरेंटिनो ने बताया कि इसके बदले में अलशावी ने जवाब दिया कि हिन्दुओं को मुसलमानों का प्रताड़ित होते देखना पसंद है और ऐसा उसका मानना है। इन आरोपों पर जाँचकर्ता का निष्कर्ष था कि ऐसा अलशावी का मानना भर है, बाकी कुछ नहीं।

फेरेंटिनो को भेजी गई ईमेल में अलशावी ने लिखा था, “मुझे ऐसा लगता है कि वो सब मुझे गाली देने में जयंती की मदद इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि मैं एक मुस्लिम हूँ। आप बताईये कि उन्होंने ऐसा सिर्फ मेरे ही साथ क्यों किया, बाकी किसी को उन्होंने गाली क्यों नहीं दी?” निष्कर्ष के तौर पर जाँच में यह माना गया कि शिकायत करने वाली छात्रा को यह लगता है कि हिन्दू प्रोफेसर दीपर्णब चक्रवर्ती, अमित चक्रवर्ती और प्रसाद जयंती मुस्लिम होने के कारण उससे नफरत करते हैं। उन सभी की शिकायत के पीछे उसकी यही भावना थी।

हिन्दू प्रोफेसरों पर लगाया RSS का सदस्य होने का आरोप

एक अन्य आरोप में पूर्व छात्रा अलशावी ने यह भी कहा था कि प्रोफेसर प्रसाद जयंती राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) नामक एक मुस्लिम विरोधी संगठन के सदस्य हैं। इसी के साथ उसने यह भी दावा किया कि एक ग्रेजुएट छात्र को उसके धर्म के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए कहा था। जब जाँचकर्ताओं ने इन आरोपों के प्रमाण माँगे तब अलशावी ने सबूत न होने की बात कही और बताया कि उसे एक भारतीय स्रोत से पता चला था।

हिंदू ऑन कैंपस द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

जब जाँचकर्ताओं ने अलशावी से उस भारतीय स्रोत के बारे में सवाल किया तो उसने इसके लिए भी मना कर दिया। जब अलशावी के धर्म की प्रोफेसर जयंती द्वारा जानकारी जुटाने की शिकायत पर ग्रेजुएट छात्र से सवाल किए गए तो उसने इससे इंकार कर दिया। उसके अनुसार उस से ऐसा करने के लिए किसी ने भी कभी नहीं कहा। इसी के साथ इन आरोपों के समर्थन में भी अलशावी कोई अन्य सबूत नहीं दे पाई।

हिन्दू प्रोफेसरों के खिलाफ आधारहीन आरोपों का असर

जाँचकर्ताओं की अंतिम रिपोर्ट में प्रोफेसर प्रसाद जयंती बेगुनाह साबित हुए थे, लेकिन इसके बाद भी उनके खिलाफ इस्लामिक चरमपंथियों ने उनके खिलाफ अभियान छेड़ दिया। बाकायदा ट्विटर पर हैशटैग #justice4mahahasan चलाया गया। कई लोगों द्वारा माहा हसन अलशावी के समर्थन में ट्वीट भी किए गए। एक कट्टरपंथी हैंडल (@wassimhds) ने प्रोफेसर जयंती के प्रोफाइल लिंक को शेयर किया। इसी के साथ उन्हें ‘अपमानजनक हिंदुत्व घोटाला’ बता कर उन्हें धमकी भरे फोन करने को उकसाया गया। इसका असर भी हुआ और प्रोफेसर जयंती को अज्ञात व्यक्तियों की धमकियां ईमेल और ट्विटर से आने लगीं। अपनी सुरक्षा को देखते हुए प्रोफेसर जयंती ने 26 जुलाई 2021 को हनोवर पुलिस विभाग में शिकायत दर्ज कराई।

हिंदू ऑन कैंपस द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इस मामले में किए गए अंतिम ट्वीट में हिंदू ऑन कैंपस लिखता है, “हालात का सार: एक छात्र ने एक हिंदू प्रोफेसर के खिलाफ ‘मुसलमानों को प्रताड़ित देखना हिंदुओं को अच्छा लगता है’ की शिकायत की। प्रोफेसर भारतीय पृष्ठभूमि से आया था। इस हरकत से हिंदू प्रोफेसर और छात्र चरमपंथियों के शिकार बने, उन्हें परेशान किया गया, उन्हें धमकाया गया और उनके खिलाफ हिंसा की भी धमकी दी गई।”