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लखीमपुर खीरी हिंसा: ड्राइवर समेत 4 लोगों की हत्या करने वाले 6 संदिग्धों की हुई पहचान, SIT ने जारी की तस्वीर

लखीमपुर खीरी हिंसा में 4 लोगों की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में शामिल 6 आरोपितों की पहचान कर ली गई है। इस घटना की जाँच के लिए गठित की गई एसआईटी ने की टीम ने संदिग्धों की तस्वीरें भी जारी की हैं। मामले की जाँच कर रही कमिटी 25 अक्टूबर को अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी और उसे 26 अक्टूबर को इसे सुप्रीम कोर्ट में सौंपेगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश पुलिस ये हत्याएँ करने वाले आरोपितों की तस्वीरें जारी कर इनके बारे में जानकारी देने वालों को अवॉर्ड भी देगी। जाँच एजेंसी ने आरोपितों की जानकारी देने वाले की जानकारी देने की अपील की थी। पुलिस ने कहा है कि जानकारी देने वालों की पहचान को गुप्त रखा जाएगा।

गौरतलब है कि बीते 3 अक्टूबर 2021 को लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में थार जीप से कुचल कर 4 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद गुस्साए किसानों ने पीट-पीट कर चार लोगों की हत्या कर दी थी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेष जाँच दल (एसआईटी) ने शनिवार को तीन लोगों को गिरफ्तार किया, जो 3 अक्टूबर को किसानों पर गाड़ी चढ़ाने वाली एसयूवी में सवार थे। इसमें एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी।

एसआईटी ने गिरफ्तार लोगों की पहचान मोहित त्रिवेदी, रिंकू राणा और धर्मेंद्र के रूप में की है। सभी लखीमपुर खीरी के रहने वाले हैं। इसके साथ ही किसानों और पत्रकार की हत्या के मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या बढ़कर 13 हो गई।

एसआईटी के एक अधिकारी ने कहा, “हमने किसानों और एक पत्रकार की हत्या में शामिल पाए गए सभी आरोपितों को लगभग गिरफ्तार कर लिया है। अगर कोई और नया नाम सामने आता है तो हम उनके खिलाफ भी कार्रवाई करेंगे। हम आरोपितों के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी एकत्र कर रहे हैं।” जाँच एजेंसी ने तीनों को स्थानीय अदालत में पेश किया, जहाँ से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “गिरफ्तार व्यक्ति एक स्कॉर्पियो की पिछली सीट पर थे। घटना में शामिल अन्य दो गाड़ियाँ महिंद्रा थार थी, जो केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा से संबंधित है। उनके ही बेटे आशीष मिश्रा इस मामले में मुख्य आरोपित हैं।”

इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश के भतीजे अंकित दास की एक फॉर्च्यूनर है। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के अनुसार कहा गया है कि एसआईटी को शिशु पाल से पूछताछ के दौरान त्रिवेदी, राणा और धर्मेंद्र की संलिप्तता के बारे में पता चला था, जिन्होंने कथित तौर पर स्कॉर्पियो चलाई थी।

राहुल-प्रियंका का करीबी अल्लू मियां लखनऊ से गिरफ्तार: बिल्डर से मुफ्त माँग रहा था पत्नी-बेटे के लिए फ्लैट, नहीं देने पर दी थी धमकी

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा के करीबी कॉन्ग्रेस नेता मोहम्मद रफीक उर्फ अल्लू मियां को कई वारदातों को अंजाम देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार (23 अक्टूबर) रात को वजीरगंज पुलिस ने अल्लू मियां को जमीन कब्जा करने, जालसाजी व रंगदारी माँगने के आरोप में फन मॉल के पास से पकड़ा है। बताया जा रहा है कि अल्लू मियां शनिवार को लखनऊ में प्रियंका गाँधी वाड्रा की कॉन्ग्रेस प्रतिज्ञा यात्रा में शामिल होने के लिए आया था।

दरअसल, अमेठी के जगदीशपुर के निहालगढ़ के रहने वाले अल्लू मियां, उसकी पत्नी मेहरुनिशा और बेटे आदिल के खिलाफ कैसरबाग के कसाईबाड़ा में रहने वाले वैभव श्रीवास्तव ने 8 मई 2020 को मुकदमा दर्ज कराया था। गिरफ्तारी की पुष्टि इंस्पेक्टर वजीरगंज धनंजय पांडेय ने की है। वैभव ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था, ”उन्होंने अगस्त 2019 में गोमतीनगर के विशालखंड में रहने वाली मंजू रावत से उनका खरगापुर स्थित प्लॉट खरीदा था। वैभव के साथ ही उस प्लॉट में उसका दोस्त माजिन खान भी पार्टनर था।”

वैभव ने शिकायत में आगे बताया, ”माजिन खान और वह प्लॉट पर अपार्टमेंट बनवा रहे थे। इस बीच अल्लू मियां के बेटे आदिल ने दावा किया कि यह प्लॉट उसका है। उसने फर्जी दस्तावेज के माध्यम से किसी से प्लॉट की रजिस्ट्री कराने का दावा किया। इस बात को लेकर उनमें विवाद हुआ था। प्लॉट छोड़ने के लिए उसने रुपए माँगे थे। माँग पूरी न होने पर उसने (अल्लू) धमकी दी थी। वैभव का कहना है कि प्लॉट ममता सहकारी गृह निर्माण समिति का था।”

पुलिस के बताया कि विवाद के बाद कॉन्ग्रेस नेता अल्लू ने दिसंबर 2020 में वैभव को फोन करके समझौते के लिए बुलाया था। वहाँ पर अल्लू ने उन्हें निर्माणाधीन अपार्टमेंट से दो फ्लैट बेटे और पत्नी के नाम करने को कहा था। जब इसके लिए वैभव और उसका पार्टनर तैयार नहीं हुए तो उन्हें धमकी दी थी। इसके बाद वैभव ने अधिकारियों से शिकायत की। अधिकारियों के आदेश पर पूरे मामले की जाँच एसीपी चौक आईपी सिंह को सौंपी गई। मालूम हो कि जाँच में वैभव के सभी आरोप सही पाए गए थे। इसके बाद अल्लू, उसकी पत्नी और बेटे के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

अल्लू, उसकी पत्नी और बेटे के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। (साभार: दैनिक जागरण)

वजीरगंज पुलिस ने बताया कि अल्लू मियां 5 महीने से फरार चल रहा था। वह शनिवार को प्रियंका गाँधी की प्रतिज्ञा यात्रा में शामिल होने के लिए लखनऊ आया था। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस ने उसे फन मॉल के पास से गिरफ्तार कर लिया।

अंकित बन नसीम ने हिंदू युवती को फँसाया, रेप के बाद बनाया वीडियो: मौलवी बुलाकर जबरन कलमा पढ़वा करवाया धर्मान्तरण

मध्य प्रदेश के जबलपुर से लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। नसीम अहमद नाम के एक व्यक्ति ने अंकित ठाकुर बनकर 20 साल की हिंदू युवती को झूठे प्रेमजाल में फँसा लिया और उसके बाद झाँसा देकर उसका रेप किया और उसका वीडियो बना लिया। वह लगातार युवती का शोषण करता रहा। इस बीच एक दिन जब पीड़िता को उसकी सच्चाई का पता चला तो उसने जबरन कलमा पढ़वाकर उसका इस्लाम में धर्मान्तरण करवा दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना आधारताल थाना क्षेत्र की है। आधारताल थाने में विश्व हिंदू परिषद, धर्म सेना और धर्म जागरण जैसे हिंदू संगठनों के साथ पहुँची और आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ रेप की संगत धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, सोमवार को पीड़िता का बयान दर्ज होने के बाद लव जिहाद के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि एक बार वह जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने के लिए अपनी सहेली के घर गई थी। वहीं पर आरोपित नसीम अहमद भी आया था। उसी दौरान उन दोनों की पहचान हुई थी। उसने पीड़िता से अपनी पहचान अंकित ठाकुर के रूप में बताई। धीरे-धीरे दोनों की पहचान बढ़ी और उन्होंने एक दूसरे के नंबर ले लिए। 6 महीने तक दोनों फोन पर बात करते रहे। इसके बाद एक दिन मौका देखकर आरोपित ने युवती से अपने झूठे प्यार का इजहार किया।

पीड़िता के मुताबिक, बीते 10 जून को आरोपित उसे घुमाने के बहाने संजय नगर भड़पुरा पहाड़ी के जंगल में ले गया और वहीं पर उसके साथ बलात्कार किया। इसी बीच आरोपित के दोस्तों से उसकी असलियत का पता युवती को चल गया। युवती को यह भी पता चला है आरोपी पहले से ही शादीशुदा है।

पीड़िता ने जब विरोध किया तो आरोपित ने उसका वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे अपने घर ले गया। वहाँ आरोपी ने एक मौलवी को अपने घर बुलाया और पीड़िता को डरा-धमका कर जबरन कलमा पढ़वा दिया। फिलहाल आरोपित के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। हालाँकि, उसे अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। आधारताल थाने के टीआई के मुताबिक, पीड़िता के बयान के आधार पर आगे और धाराएँ भी जोड़ी जाएँगी।

15+ मामलों के अपराधी तौफीक के लिए रो रहे कॉन्ग्रेस-सपा वाले, एनकाउंटर में गंभीर घायल 2 पुलिस वालों पर ‘चुप्पी’

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में शनिवार (16 अक्टूबर 2021) रात दर्जन भर से अधिक मुकदमों में वांछित अपराधी तौफीक की पुलिस से मुठभेड़ हुई। यह मुठभेड़ प्रतापगढ़ के बाबूतारा इलाके में हुई। पुलिस के अनुसार दोनों तरफ से चली गोलीबारी में तौफीक घायल हो गया और अस्पताल ले जाते समय रविवार (17 अक्टूबर 2021) को उसकी मौत हो गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रतापगढ़ पुलिस के लालगंज थाने की टीम और जिले की स्वाट टीम ने इस मुठभेड़ में सामूहिक रूप से हिस्सा लिया था। यह मुठभेड़ तब हुई, जब पुलिस को जिले के बाबूतारा गाँव में एक अपराधी के होने की सूचना मिली थी। सूचना इस बात की भी थी कि अपराधी किसी बड़ी योजना को अंजाम देने वाले हैं।

पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ UP

पुलिस ने मौके पर पहुँच कर अपराधी की घेराबंदी की और सरेंडर करने को कहा। जवाब में सामने से गोलियाँ चलने लगी। इस अप्रत्याशित हमले में कॉन्स्टेबल सत्यम यादव और कॉन्स्टेबल श्रीराम घायल हो गए। दोनों को प्रयागराज के SRN अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

अपराधियों की ओर से जब सरेंडर के बजाय गोली चलाई जाने लगी तो जवाब में पुलिस ने भी आत्मरक्षा में गोली चलाई। इसी जवाबी फायरिंग में तौफीक घायल हुआ और उसकी मौत हुई।

एनकाउंटर के बाद तौफिक के परिवार वालों ने पुलिस पर आरोप लगाए हैं। कानूनी प्रक्रियाओं को पूरी कर तौफीक का शव जब उसके गाँव लाया गया तो तनाव फैल गया। मृतक की पत्नी ने पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाया। वरिष्ठ अधिकारियों के समझाने पर 20 घंटे बाद उसका जनाजा उठा।

गाँव-परिवार वालों के हंगामे के बाद इस घटना ने राजनैतिक रूप ले लिया। सबसे पहले AIMIM पार्टी इसमें कूदी। इस मामले में पार्टी मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने भी बयानबाजी की। भीड़ को सम्बोधित करते हुए उन्होंने इसको फेक एनकाउंटर बताया।

इसके बाद राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने भी इसे लपक लिया। इस मुद्दे पर इसने समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस की धर्मनिरपेक्षता पर ही सवाल खड़े कर दिए। राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने लिखा, “प्रतापगढ़ के बाबूतारा गाँव के निवासी तौफीक खान के एनकाउंटर पर सभी तथाकथित सेक्युलर नेता एवं पार्टियाँ खामोश हैं। क्योंकि मरने वाला दुबे, मिश्रा या गुप्ता नहीं है। प्रियंका, राहुल, अखिलेश या और कोई तथाकथित सेक्युलर कैसे बोले? हिंदू वोटर नाराज़ हो जाएगा?”

सब कुछ हो रहा। आरोप गढ़े जा रहे लेकिन घायल पुलिस वालों के लिए कोई नहीं लिख-बोल रहा। ना ओवैसी ना ही उलेमा। जो पुलिस वाले घायल हुए हैं, जरा उनका वीडियो भी देख लेते हैं।

उत्तर प्रदेश में चुनावी मौसम है, कॉन्ग्रेस कैसे नहीं कूदती? इसके अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रभारी इमरान प्रतापगढ़ी ने मोर्चा संभाल लिया। ट्वीट में लिखा, “प्रतापगढ़ में तौफीक नामक व्यक्ति को गोली मारने की पुलिसिया कहानी में इतना झोल है कि पहली नज़र में फ़र्ज़ी लगती है, मृतक तौफीक की पत्नी के आरोप पूरे प्रतापगढ़ पुलिस को कटघरे में खड़ा करती है।”

इमरान प्रतापगढ़ी वही कॉन्ग्रेसी नेता हैं, जिन्होंने कहा था कि ब्यूरोक्रेसी पर कब्जा करो। इनके अनुसार कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चा जल्द ही तौफीक के परिवार से मिलने जाएगा। कॉन्ग्रेस के बाद समाजवादी पार्टी ने भी इस घटना को भुनाना चाहा।

समाजवादी पार्टी के कई नेता तौफीक के परिवार से मिलने भी गए। पार्टी ने ट्वीट करके आरोप के बजाय “पुलिस ने दौड़ा कर मारी गोली” जैसे शब्द लिख कर फैसला भी सुना दिया। मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों को बर्खास्त करने तक की माँग की लेकिन घायल पुलिस वालों के लिए एक शब्द नहीं लिखा।

इस घटनाक्रम पर ऑप इंडिया ने प्रतापगढ़ पुलिस से मृतक तौफीक के आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाई। पुलिस के अनुसार अब तक उत्तर प्रदेश के ही अलग-अलग जिलों में लगभग एक दर्जन से अधिक मुकदमों उस पर हैं। अन्य प्रदेशों में तौफीक पर जो मुकदमे दर्ज हैं, उनकी भी जानकारी जुटाई जा रही है। तौफीक पर दर्ज मुकदमों में एक POCSO एक्ट भी है।

मृत तौफीक द्वारा किए गए अब तक ज्ञात अपराधों की लिस्ट

इस मामले में ऑप इंडिया न्यूज़ ने प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल से बातचीत की। उन्होंने बताया कि अब तक प्रतापगढ़ और आस-पास के जिलों को ही मिला कर तौफीक पर 16 मुकदमों की जानकारी जुटाई जा चुकी है। तौफीक एक पेशेवर अपराधी था, जिस पर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात में भी केस होना संभावित है। पुलिस इन राज्यों से भी उसके बारे में सूचना मँगवा रही है।

जिसकी माँ थी बीमार, मदद के लिए सोनू सूद ने उसको भेज दी नपुंसकता की दवा? जानिए क्या है पूरा मामला

23 अक्टूबर 2021 (शनिवार) को फिल्म अभिनेता सोनू सूद को ट्विटर पर भानु नाम के शख्स ने अपनी बीमार माँ के लिए दवा भेजने पर धन्यवाद दिया। सोनू सूद ने इसको अपना कर्तव्य बता कर भानु के धन्यवाद का जवाब भी दिया। इसी बीच सोनू सूद और उनके फाउंडेशन द्वारा भेजी गई दवाओं की तस्वीर वायरल हो गई। ये दवाएँ फिलहाल चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

दवा मँगाने वाले भानु को सोनू सूद का जवाब

ट्वीट की गई फोटो में तडोरा-20 नाम की दवा दिखाई दे रही है। इस दवा के पैकेट पर ‘प्रेम की मूर्ति’ की तस्वीर साफ दिखाई दे रही है। दरअसल, जिस दवा को भानु ने अपनी माँ की दवा बताते हुए ट्वीट किया है, वो असल में पुरुषों के गुप्त रोगों में प्रयोग की जाती है। इसका प्रयोग स्तंभन दोष के ईलाज के लिए किया जाता है।

भानु द्वारा ट्वीट की गई तडोरा – 20 दवा की तस्वीर

इस ट्वीट के बाद नेटीजेन्स ने मज़ाकिया अंदाज में जवाब दिया

एक यूजर @anu_raj ने लिखा है कि सोनू सूद अब नया ‘हकीम साहब’ हैं, जो जरूरतमंद लोगों को वियाग्रा (तडलाफिल) भेज रहे हैं।

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देवेंद्र पांचाल ने सवाल किया है, “गजब की ड्यूटी… omg तडलाफिल्स भी भेजते हैं….. मतलब युवाओं में जोश भरते हैं।”

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कासिम ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है – ‘वियाग्रा भी’

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यूजर @iam_hashmi ने भी इस पर व्यंग किया कि इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के लिए दवाएँ भेजते हैं।

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दवा डाक्टर द्वारा लिखी की गई थी

हमने इस बात की पड़ताल किया कि क्या सच में ये दवा सोनू सूद द्वारा ही भेजी गई है या इसमें कोई गड़बड़ है। हमने पाया कि यह दवा डॉक्टर द्वारा लिखी गई थी। मिले पर्चे में पहली दवा के रूप में टैडैक्ट 20mg (Tadact 20mg) टैबलेट लिखा हुआ है। इस खास दवा में तडलाफिल (Tadalafil) नमक होता है।

भानु द्वारा शेयर की गई दवा की पर्ची

थोड़ी और पड़ताल में हमने पाया कि इस खास नमक का इस्तेमाल इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (स्तंभन दोष) के इलाज के लिए किया जाता है। हालाँकि, यह फेफड़ों में हाई ब्लडप्रेशर के इलाज में भी काम आता है। इसमें रोगी पल्मोनरी आर्टेरियल हाईपरटेंशन या गंभीर PAH से पीड़ित है। तडालाफिल एक फॉस्फोडिएस्टरेज़ -5 (पीडीई 5) है, जिसे पीएएच के इलाज के लिए डॉक्टरों की सलाह पर लिया जाता है।

वो फोटो जिसने गलतफहमी पैदा की

यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि मरीज के लिए डॉक्टर ने आईपीसीए फार्मास्यूटिकल्स का टडैक्ट-20 लिखा था। इस दवा के डिब्बे पर कोई खास छवि नहीं होती। इसकी पैकिंग सामान्य डिब्बों जैसी ही होती है।

यह दवा थी निर्धारित

सँभावना इस बात की भी जताई जा रही है कि दवा बेचने वाले केमिस्ट के पास डॉक्टर द्वारा लिखा ब्राँड उपलब्ध नहीं था। इसलिए उसने दूसरे ब्राँड की टैडोरा 20 दे दिया। इस ब्राँड की निर्माता ज़ायडस कैडिला फार्मास्यूटिकल्स (Zydus Cadila pharmaceuticals) की सहायक कंपनी जर्मन रेमेडीज़ (German Remedies) है। इन दवाओं की पैकिंग पर छपी तस्वीरों के चलते ही ये पूरी गलतफहमी पैदा हुई।

Tadora- 20 medicine. Source – IndiaMart.com

तडलाफिल (Tadalafil) वियाग्रा नहीं है

वियाग्रा एक ब्राँड का नाम है, लेकिन इसका प्रयोग अक्सर स्तंभन दोष की दवा के रूप में किया जाता है। भानु के ट्वीट में कई लोगों ने टडैक्ट-20 या टडोरा-20 को वियाग्रा समझ लिया, जबकि ऐसा मानना गलत है।

वियाग्रा में तडालाफिल के बजाय सिल्डेनाफिल साइट्रेट होता है। स्रोत: Drugs.com

वियाग्रा में सिल्डेनाफिल साइट्रेट (sildenafil citrate) नामक नमक होता है, जिसका उपयोग पुरुषों में शीघ्रपतन के इलाज के लिए किया जाता है। तडालाफिल को वियाग्रा कहना बाजार में उपलब्ध हर डिटर्जेंट को सर्फ कहने के जैसा ही है।

सोनू सूद और उनसे जुड़े विवाद

सोनू सूद का विवादों से पुराना नाता रहा है। सितंबर 2021 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने सोनू सूद से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह छापेमारी लगातार 3 दिन चली थी। एक लम्बी तलाशी लेने के बाद इनकम टैक्स विभाग ने सोनू सूद को 20 करोड़ रुपये से अधिक टैक्स चोरी का आरोपित बताया था। इससे पहले भी कई बार यह आरोप लगे हैं कि सोनू सूद ने कोविड-19 संकट का उपयोग अपनी छवि सुधारने में किया है। मई 2021 में जब मेडिकल ऑक्सीजन की माँग बहुत अधिक बढ़ गई थी, तब सोनू सूद पर भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या के कार्यालय से मदद मिलने के बाद भी ऑक्सीजन का सारा क्रेडिट खुद लेने का आरोप लगा था।

‘जमानत जब्त कराने के लिए कॉन्ग्रेस को सीट दें? क्या होता है गठबंधन?’: 41 महीने बाद बिहार जा रहे लालू ने प्रदेश प्रभारी को बताया ‘भकचोन्हर’

बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के मुखिया लालू यादव ने कॉन्ग्रेस के प्रदेश प्रभारी भक्तचरण दास को ‘भकचोन्हर’ करार दिया है। जमानत पर जेल से छूटने के बाद पहली बार बिहार दौरे पर जा रहे लालू यादव ने मीडिया से ये बात कही। लालू यादव आज रविवार (24 अक्टूबर, 2021) को पटना पहुँच रहे हैं। बिहार में कुशेश्वर स्थान और तारापुर – इन दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहा है।

इससे पहले लालू यादव ने कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन की बातों को नकार दिया। उन्होंने कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन के सवाल पर कहा, “अरे, बेकार की बात है। गठबंधन क्या होता है? क्या होता है कॉन्ग्रेस का गठबंधन? हारने के लिए उसे सीट दे देते हम? जमानत जब्त करवाने के लिए? भक्तचरण दास तो ‘भकचोन्हर’ है ही। उसे कुछ पता है क्या? मैं पटना जा रहा हूँ।” लालू यादव पर आरोप लगे हैं कि उन्हें स्वास्थ्य के आधार पर जमानत मिला है, इसीलिए वो चुनाव प्रचार नहीं कर सकते।

हालाँकि, उन्होंने इन आरोपों को नकार दिया है। बता दें कि बिहार कॉन्ग्रेस के प्रभारी भक्तचरण दास ने कहा था कि आगामी लोकसभा चुनाव में बिहार की सभी 40 सीटों पर कॉन्ग्रेस अकेले लड़ेगी। साथ ही उन्होंने राजद पर साथ न देने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि राजद ने महागठबंधन धर्म नहीं निभाया। साथ ही बताया कि कॉन्ग्रेस नेता चुनाव प्रचार के लिए बिहार पहुँच चुके हैं। राजद और कॉन्ग्रेस, दोनों इस उपचुनाव में अलग-अलग लड़ रहे हैं।

41 महीने बाद बिहार पहुँच रहे लालू यादव के स्वागत के लिए राजद कार्यकर्ता भी जोश में हैं और राबड़ी देवी के सरकारी आवास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। 27 अक्टूबर को उनकी रैलियाँ हो सकती हैं। 30 अप्रैल को जमानत मिलने के बाद से ही वो अपनी बेटी मीसा भारती के दिल्ली स्थित आवास पर रह रहे थे। वो अक्टूबर में ही बिहार आने वाले थे, लेकिन तब डॉक्टरों ने उन्हें मना कर दिया था। राबड़ी-मीसा भी उनके साथ बिहार आ रही हैं।

वो लगभग साढ़े 3 साल जेल में बंद रहने के बाद निकले हैं। हालाँकि, इस दौरान राँची में उन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट देने के आरोप भी हेमंत सोरेन की सरकार पर लगे। राबड़ी देवी के पटना स्थित आवास पर मेडिकल टीम की निगरानी में उनकी देखरेख के लिए एक अलग कमरा तैयार किया गया है। केवल परिवार के सदस्यों को उनके कमरे में जाने की इजाजत होगी। कोशिश रहेगी कि उन्हें भीड़ का सामना न करना पड़े, इसीलिए इस पर संशय है कि वो कार्यकर्ताओं से मिलेंगे या नहीं।

‘मर्सिडीज में SRK की मैनेजर से मुलाकात, समीर वानखेड़े को ₹8 करोड़ देने की बात’: आर्यन खान मामले में ‘पंच’ के आरोप से नया ट्विस्ट

आर्यन खान मामले में रोज एक के बाद एक सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। अब इस मामले के गवाह केपी गोसावी के बॉडीगार्ड ने एक एफिडेविट देकर दावा किया है कि मुंबई में NCB के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े को 8 करोड़ रुपए पहुँचाए जाने थे। साथ ही उसने ये भी आरोप लगाया है कि केपी गोसावी ने आर्यन खान की मुलाकात के बाद अभिनेता शाहरुख़ खान के मैनेजर पूजा डडलानी से मुलाकात की थी।

किरण प्रकाश गोसावी का बॉडीगार्ड प्रभाकर राघोजी सेल अँधेरी ईस्ट में रहता है। 22 जुलाई, 2021 से उसने केपी गोसावी के यहाँ बॉडीगार्ड की नौकरी शुरू की थी। उसने बताया है कि 30 जुलाई, 2021 को वो ठाणे स्थित केपी गोसावी के घर पर शिफ्ट हुआ था। बकौल प्रभाकर, गोसावी ने उसे बताया था कि उनका आयात-निर्यात का व्यापार है और व्यक्तिगत बॉडीगार्ड के रूप में वो उनकी बैठकों में भी साथ जाता था।

उसने बताया है कि 8 सितंबर को केपी गोसावी वाशी में शिफ्ट हो गए और उनके साथ वो भी अपने सारे सामान वहाँ ले गया और नौकरी करता रहा। उसने कहा है कि 27 सितंबर को गोसावी इनोवा गाड़ी से अहमदाबाद के लिए निकले, लेकिन उन्हें यहाँ ही रहने को कहा गया। उसने बताया है कि 1 अक्टूबर को गोसावी का कॉल आया कि वो आ रहे हैं और सुबह 7:30 बजे तक वो तैयार रहे। अगले दिन 7:35 में उन्होंने एक लोकेशन का अड्रेस भेज कर उसे आने को कहा और 500 रुपए भेजे।

बॉडीगार्ड प्रभार के अनुसार, “जब मैंने देखा तो वो लोकेशन NCB के दफ्तर का था। जब मैं वहाँ पहुँचा तो ड्राइवर ने मुझे बताया कि गोसावी NCB अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। इसके बाद मैंने गोसावी को इनोवा से एक NCB अधिकारी के साथ कहीं जाते देखा और मुझे इंतजार करने को कहा गया। इसके कुछ देर बाद मुझे समीर वानखेड़े सहित अन्य NCB अधिकारियों को नाश्ता बाँटने को कहा गया।”

बॉडीगार्ड का दावा है कि उसे भी उस जहाज पर ले जाया गया था, जहाँ ड्रग्स पार्टी की बातें कही जा रही थीं। वहाँ उसे कुछ फोटोग्राफ्स दिए गए थे और दरवाजे पर खड़ा करा कर कहा गया था कि इनमें से कोई अंदर जाए तो सूचित करना। इसके बाद 13 लोगों की गिरफ़्तारी की खबर आई। उसका दावा है कि उसी इनोवा कार में NCB अधिकारी आर्यन खान को लेकर गए। उसने बड़ा आरोप लगाया है कि पंच के रूप में उससे 10 खाली कागज पर NCB ने हस्ताक्षर ले लिए।

इसके बाद उससे आधार कार्ड माँगा गया, जिसे उसने व्हाट्सएप्प के माध्यम से भेजा। बॉडीगार्ड प्रभाकर ने बड़ा आरोप लगाया है कि उसने केपी गोसावी को किसी से 25 करोड़ रुपए की बात करते हुए सुना, जिसमें वो कह रहे थे कि 18 करोड़ रुपए पर बात बन सकती है, क्योंकि 8 करोड़ समीर वानखेड़े को देने हैं। उसने बताया है कि कुछ देर बाद एक मर्सिडीज में पूजा डडलानी और केपी गोसावी की मुलाकात हुई।

बॉडीगार्ड का आरोप है कि उसे ही कैश लाने के लिए भेजा गया था और एक लोकेशन से उसे दो बैग ले जाने थे। वहीं समीर वानखेड़े ने प्रभाकर सैल की बातों का जवाब भी देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि हम सैल के दावों का करारा जवाब देंगे। वानखेड़े ने ‘इंडिया टुडे’ से बात करते हुए इन आरोपों को दुखद और खेदजनक करार दिया। प्रभाकर का कहना है कि उसके पास एक वीडियो भी है, जिसमें गोसावी आर्यन खान को किसी से बात करा रहे हैं।

हिंदू लड़की से छुपाई खुद के मुस्लिम होने की बात, शादी के बाद शारीरिक-मानसिक शोषण: असम पुलिस ने किया गिरफ्तार

असम के होजई जिले से लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। अपनी पहचान छिपाकर हिंदू महिला से शादी करने के आरोप में एक शख्स को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि 35 वर्षीय आरोपित मुसलमान है। महिला की शिकायत के आधार पर होजई पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लुमडिंग पुलिस थाना प्रभारी (ओसी) एसके सरमा ने शनिवार (23 अक्टूबर) को मीडिया को बताया कि महिला ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) की मदद से अपने शौहर के खिलाफ होजई के पुलिस अधीक्षक के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई है। असम के धेमाजी जिले की रहने वाली पीड़ित महिला ने बताया कि तमिलनाडु में साथ काम करने के दौरान वह उस शख्स के संपर्क में आई थी। महिला ने बताया कि वह होजई जिले के लुमडिंग थाने के नखुटी के 2 सरके बस्ती इलाके का रहने वाला है। उसने अपनी धार्मिक पहचान छिपाई और खुद को हिंदू बताकर उससे निकाह किया।

पीड़िता ने बताया निकाह के बाद शख्स ने उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। निकाह के कुछ महीनों बाद उसका शौहर कथित तौर पर उससे बड़ी रकम लेकर तमिलनाडु से असम के नखुटी इलाके में भाग गया था।

बताया जा रहा है कि आरोपित व्यक्ति ने इसके बाद से महिला से संपर्क नहीं किया। पीड़िता ने जब खोजबीन की तो उसे होजई के डोबोका इलाके में शौहर की वास्तविक धार्मिक पहचान और अन्य बातों का पता चला। महिला ने इसकी शिकायत होजई के पुलिस अधीक्षक बरुन पुरकायस्थ से की। पुलिस अधीक्षक ने बुधवार रात लुमडिंग थाने से एक टीम को आरोपित को उसके गाँव से पकड़ने के लिए भेजा था।

बता दें कि लुमडिंग पुलिस थाने में इससे संबंधित एक मामला दर्ज किया गया और आरोपित को उसी रात गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उसे गुरुवार को होजई की एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया। पुलिस इस मामले की विस्तृत जाँच कर रही है।

’22 करोड़ मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं, लेने के बजाय अब समाज को दें’: कॉन्ग्रेस नेता रहमान खान ने कहा- मुस्लिम राष्ट्र निर्माण में सहयोग दें

देश में खुद को अल्पसंख्यक बताने वाले मुस्लिमों को कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता के रहमान खान ने आईना दिखाया है। उन्होंने शनिवार (23 अक्टूबर 2021) को कहा कि देश में मुस्लिम अब अल्पसंख्यक नहीं रहे। उन्होंने कहा कि 22 करोड़ लोग अल्पसंख्यक कैसे हो सकते हैं। अब इन्हें राष्ट्र के निर्माण में अपनी भागीदारी देनी चाहिए।

मीडिया से बात करते हुए वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने ‘इंडियन मुस्लिम्स: द वे फॉरवर्ड’ भी लिखी है। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को समाज के विकास में योगदान देकर अच्छा नागरिक बनना चाहिए। सरकार से माँगने के बजाय अब समाज को देना चाहिए। कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के अनुसार, अगर कोई तबका पिछड़ा है और उसे मदद की जरूरत होती है तो इसके लिए संविधान ने सरकार को सकारात्मक तरीके से कार्रवाई करने का अधिकार दिया है।

रहमान खान कर्नाटक के हंगल और सिंदगी सीटों पर 30 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए मुस्लिमों के समर्थन पर कॉन्ग्रेस और जेडीएस के आरोप-प्रत्यारोप पर पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे। इसके साथ ही उन्होंने राजनेताओं पर वोट बैंक के लिए मुस्लिमों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

कॉन्ग्रेस को बताया धर्मनिरपेक्ष

मीडिया से बात करते हुए वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता ने कॉन्ग्रेस पार्टी को धर्मनिरपेक्ष बताया और दावा किया कि कॉन्ग्रेस बीते 70 साल से धर्मनिरपेक्षता की रक्षा कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कॉन्ग्रेस आज सेक्युलर नहीं रहेगी तो उसके पास राष्ट्र को देने के लिए कुछ भी नहीं रहेगा।

संविधान को संरक्षक बताते हुए रहमान खान ने कहा कि संविधान कोई राजनीतिक दल नहीं है। यही हमारा संरक्षक है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी भी पार्टी में शामिल हो सकता है, लेकिन वो ये दावा नहीं कर सकता कि मुस्लिम उसके साथ हैं।

‘देवी-देवताओं को ढक देता था मेरा दोस्त राजेश, ताकि मैं उसके यहाँ नमाज पढ़ सकूँ’: रिफत जावेद से सवाल – अपने घर में हनुमान चालीसा पढ़ने दोगे?

प्रोपेगंडा पोर्टल ‘जनता का रिपोर्टर’ के संस्थापक रिफत जावेद ने एक अजीबोगरीब वाकया सुनाया है। आम आदमी पार्टी (AAP) समर्थक ब्लॉगर ने लिखा है कि जब वो पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक विश्वविद्यालय छात्र हुआ करते थे, तब वो अपने दोस्त राजेश के यहाँ अक्सर पढ़ने जाया करते थे, जिसका घर बड़ा बाजार में था। रिफत जावेद की मानें तो राजेश के दादाजी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का हिस्सा थे।

BBC के साथ 12 वर्षों तक काम कर चुके रिफत जावेद ने आगे लिखा है, “मेरे दोस्त राजेश का परिवार हमेशा मुझे अपने घर पर नमाज पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता था। इसके लिए वो हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरें ढक देते थे। अब ये नया भारत मुझे पहचान में ही नहीं आ रहा है।” बता दें कि इस तरह की सेक्युलरिज्म वाली बातें अक्सर मीडिया के गिरोह विशेष के पत्रकार सुनाते रहते हैं और कहते हैं कि ये वो भारत नहीं है, जहाँ वो बड़े हुए हैं।

यहाँ लोगों के मन में सबसे पहला सवाल तो यही खटक रहा है कि अगर राजेश ने अपने दोस्त रिफत जावेद को अपने घर पर नमाज पढ़ने देकर तथाकथित सेक्युलरिज्म की मिसाल पेश की, फिर हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरें ढकने की क्या जरूरत पड़ गई? क्या रिफत जावेद को हिन्दू देवी-देवताओं से समस्या थी? इसका सीधा अर्थ है कि सेक्युलरिज्म सिर्फ हिन्दुओं के दिखाने की चीज है, मुस्लिमों को इससे कोई लेनादेना नहीं।

‘टीवी टुडे’ के मैनेजिंग एडिटर रहे रिफत जावेद से दूसरा सवाल लोग ये पूछ रहे हैं कि क्या उन्होंने कभी अपने किसी हिन्दू दोस्त को अपने घर में पूजा-पाठ या यज्ञ-हवन करने की अनुमति दी है और इसके लिए अपने घर में स्थित इस्लामी प्रतीक चिह्नों को हटाया है? जाहिर है, कोई मुस्लिम ऐसा करने का सोच भी नहीं सकता। यही कारण है कि रिफत जावेद ने इन प्रश्नों का जवाब नहीं दिया है। इनका ‘सेक्युलरिज्म’ एकतरफा है, जिसमें सिर्फ हिन्दुओं को ही परीक्षाएँ पास करनी होती है।

कुछ लोगों ने इसे ‘कैब ड्राइवर स्टोरी’ का ही एक रूप बताया। गिरोह विशेष के पत्रकार अक्सर कोई बात कहलवाने के लिए किसी कैब ड्राइवर का हवाला देते हैं कि उसने मुझसे ऐसा कहा। एक यूजर ने रिफत जावेद से पूछा कि वो राजेश को अपने घर में हनुमान चालीसा पढ़ने देंगे? कइयों ने मूर्तिपूजा के प्रति उनकी असहिष्णुता का ध्यान दिलाया। क्या वो राजेश से कह नहीं सकते थे कि प्रतिमाओं को ढकने की आवश्यकता नहीं है, उन्हें उनसे असुविधा नहीं हो रही है?