Home Blog Page 340

‘सतर्क रहने की जरूरत’- निज्जर मामले पर बोले कनाडाई पीएम, दोस्ती बढ़ाने पर की कवायद: G7 सम्मेलन में मार्क कार्नी से मिले पीएम मोदी, कई मुद्दों पर हुई चर्चा

G7 शिखर सम्मेलन के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत के पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसके बाद मीडिया ने कार्नी से हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर सवाल किया। इस पर कनाडाई पीएम ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया चल रही है, पर मुझे बोलने से पहले सतर्क रहना होगा।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार तीन देशों के दौरे पर हैं। इनमें साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया शामिल है। G7 शिखर सम्मेलन में भी कनाडा ने पीएम मोदी को आमंत्रित किया था।

भारत G-7 देशों का हिस्सा नहीं है, पर आमंत्रण के बाद आउटरीच पार्टनर के तौर पर भारत शिखर सम्मेलन में शामिल हुआ। इस दौरान पीएम मोदी G7 सम्मेलन के लिए आए कई देशों के नेताओं से मिले और द्विपक्षीय वार्ता भी की।

मीडिया से बात करते हुए कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि पीएम मोदी के साथ उन्होंने प्रवर्तन (law enforcement) के महत्व और उसके प्रत्यक्ष सहयोग पर चर्चा की इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय दमन पर भी बात की गई।

इस दौरान मीडिया ने सवाल पूछा कि निज्जर हत्या के मामले को लेकर क्या पीएम मोदी से कोई चर्चा की गई। इस पर कार्नी ने कहा, “मामले की कानूनी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इस पर कुछ और कहने से पहले मुझे सावधानी बरतनी होगी।”

वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक पर कनाडा पीएम से मुलाकात के बाद लिखा कि दोनों देशों के बीच दोस्ती बढ़ाने पर काम किया जाएगा। इसके अलावा दोनों नेताओं ने व्यापार, एनर्जी, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा, दुर्लभ मिनरल्स और फर्टिलाइजर्स समेत कई अन्य मुद्दों पर चर्चा कर इस पर आगे काम करने की बात कही।

प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ शानदार बैठक हुई। भारत और कनाडा लोकतंत्र, स्वतंत्रता और कानून के शासन के साथ विश्वास से जुड़े हुए हैं और दोनों देशों की दोस्ती को आगे बढ़ाने पर काम करेंगे।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा घोषित आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की 18 जून 2023 को एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। यहाँ तक कि कनाडा के पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो ने दावा किया था कि निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंट जुड़े हुए हैं। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव का माहौल बन गया था।

अक्टूबर 2024 में भारत ने कनाडा से अपने 6 डिप्लोमेट्स वापस बुला लिए थे। वहीं, कनाडा के डिप्लोमेट्स को भी भारत से वापस भेज दिया गया था। इसके बाद मार्च में चुने गए कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने दोनों देशों के बीच के तनाव को खत्म करने के लिए G7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित कर दोबारा दोस्ताना माहौल शुरू करने की कोशिश की है।

G-7 दुनिया की 7 उन्नत अर्थव्यवस्थाओं और यूरोपीय संघ का एक अनौपचारिक समूह है। इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। रूस भी पहले इस समूह का हिस्सा था, लेकिन क्रीमिया देश पर कब्जा करने के बाद समूह से उसे निष्कासित कर दिया गया।

G7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री अल्बनीज समेत अन्य नेताओं के साथ मुलाकात कर द्विपक्षीय वार्ता की। G7 में प्रतिभाग करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी क्रोशिया के दौरे पर निकल गए हैं।

‘हमें पता है ईरान के नेता कहाँ छुपे हैं पर अभी उन्हें नहीं मारेंगे’: ट्रंप ने दी खुली चुनौती, खामेनेई ने भी किया युद्ध का ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपनी बयानबाजी काफी तेज कर दी है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर सीधा संदेश देकर कहा, “अमेरिका जानता है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई कहाँ छिपे हैं, लेकिन ‘फिलहाल’ उन्हें मारेंगे नहीं।”

ट्रंप ने ईरान से ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ करने की माँग की है, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या अमेरिका, इजरायल के हमलों में शामिल होगा।

वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने युद्ध का ऐलान करते हुए X (पहले ट्वीटर) कर कहा, “हमें आतंकवादी इजरायली शासन को करारा जवाब देना होगा। हम इजरायली समर्थकों पर कोई रहम नहीं दिखाएंगे।”

ट्रंप का अल्टीमेटम और ‘आसमान पर कब्जा’

ट्रंप ने अपने ‘ट्रूथ सोशल’ प्लेटफॉर्म पर साफ शब्दों में लिखा, “हमें पता है कि तथाकथित ‘सर्वोच्च नेता’ कहाँ छिपा है। वो एक आसान निशाना है, पर फिलहाल सुरक्षित है, हम उसे मारेंगे नहीं।” ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि अगर मिसाइलें नागरिकों या अमेरिकी सैनिकों पर दागी गईं तो अमेरिका का धैर्य जवाब दे जाएगा।

एक और चौंकाने वाले दावे में ट्रंप ने कहा कि ‘हमारे पास ईरान के आसमान पर पूरा और संपूर्ण कंट्रोल है’, और फिर ट्रंप ने अमेरिकी हथियारों की जमकर तारीफ की। ट्रंप का इशारा साफ था कि ईरान का डिफेंस सिस्टम अमेरिकी तकनीक के सामने कुछ भी नहीं है।

सो कर जागा चीन

जी-7 शिखर सम्मेलन से लौटते हुए ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें ईरान-इजरायल संघर्ष में ‘युद्धविराम नहीं, बल्कि एक वास्तविक अंत’ चाहिए और वह ‘बातचीत के मूड में नहीं’ हैं। ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को ख़त्म करने के लिए पहले प्रस्तावित समझौते पर हस्ताक्षर न करने पर भी निराशा जताई।

इस बीच, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी इस लड़ाई पर पहली बार अपनी बात रखी है। शी जिनपिंग ने कहा कि चीन को मीडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते तनाव की बहुत चिंता है। शी जिनपिंग ने साफ किया कि चीन किसी भी ऐसे काम के खिलाफ है, जो किसी देश की आज़ादी या उसकी सीमाओं को नुकसान पहुँचाए।

ट्रंप के लगातार बयान बताते हैं कि अमेरिका का इस संघर्ष में सीधा हस्तक्षेप अब नज़दीक हो सकता है, जिससे इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।

डियर खान सर, 4 बजे तक 1.5 GB डाटा फूँक देने वाली पीढ़ी ने ही आपको बनाया है… सवाल पूछने के उसके साहस पर गर्व नहीं कर सकते तो हगिए भी नहीं

न्यूज एजेंसी एएनआई (ANI) की एडिटर इन चीफ स्मिता प्रकाश ने खान सर (Khan Sir) के साथ एक पॉडकास्ट किया है। ANI के यूट्यूब चैनल पर 14 जून 2025 को अपलोड किए गए इस पॉडकास्ट को 15 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। पर उससे भी अधिक इस पॉडकास्ट के क्लिप सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे हैं जो छात्रों के खान सर की ‘बौद्धिक क्षमता’ का बखान कर रहे हैं।

सामान्य तौर पर हर व्यक्ति को अपने से पहले की पीढ़ी पिछड़ी और अपने बाद की पीढ़ी निखट्टू लगती है, पर एक कथित कोचिंग गुरु से ऐसे विषयों पर गंभीरता की अपेक्षा की जाती है। लेकिन हाल ही में गुपचुप निकाह करने वाले खान सर से जब पॉडकास्ट के दौरान स्मिता प्रकाश ने इसी को लेकर सवाल किया तो उनका जवाब हैरान करने वाला था।

उन्होंने इस सवाल को खारिज करने की कोशिश की। उसी पीढ़ी को गैर जिम्मेदार, लापरवाह बताने की कोशिश की जिसके कारण वे ‘खान सर’ बने हैं। सवाल करने की नई पीढ़ी के साहस और आत्मविश्वास का जिक्र करते हुए स्मिता प्रकाश ने पूछा कि हम जब बच्चे थे तो गाँधी-नेहरू को हीरो की तरह देखते थे। कोई दूसरा विचार नहीं हो सकता था। लेकिन आज के बच्चे बहस करते हैं, पढ़ते-सुनते हैं और कई मसलों पर उनके फैसलों को लेकर सवाल भी उठाते हैं।

इसके जवाब में खान सर कहते हैं, “आजकल की जेनरेशन जो 4 बजे तक अपना डेढ़ जीबी डाटा खत्म कर देती है। हफ्ते में जिनको कोई काम नहीं करना है, फिर भी संडे को आराम करते हैं। ये जेनरेशन जो आज अपने मुखिया के खिलाफ सवाल नहीं उठाता। जिसके सामने दो कौड़ी का ठेकेदार घटिया मसाला डालकर नालियाँ बना देता है, जिसका ढक्कन टूट जाता है, ये उसके खिलाफ आवाज नहीं उठाता है। ये जेनरेशन गाँधी पर आवाज उठाती है जो गुलामी में महारानी से लड़ गया था। जो अपने विधायक से नहीं लड़ सकता है, बिना पैसा खिलाए प्रधानमंत्री आवास योजना से घर नहीं बनवा सकता है, वो आवाज उठाता है कि गाँधी सही थे या गलत।”

नीचे लगे वीडियो में आप 2:40 से यह बातचीत सुन सकते हैं।

जैसा कि अपने सवाल में ही स्मिता प्रकाश ने गाँधी-नेहरू को लेकर अपनी पीढ़ी की समस्या के बारे में बताया है, यह माना जा सकता है कि ‘खान सर’ के पास भी इनको लेकर दूसरा कोई विचार नहीं हो। इसमें कोई बुराई नहीं है। लेकिन गाँधी-नेहरू पर सवाल करने वालों को जिस गंभीरता से उन्होंने खारिज किया है, यह मसखरी से अधिक कुछ नहीं है।

बिहारी टोन वाली अपनी मसखरी में बात करते हुए ‘खान सर’ यह भी भूल गए कि जिस पीढ़ी को वे खारिज कर रहे हैं, उसने ही अपना डाटा फूँक-फूँक कर फैसल खान को ‘खान सर’ बनाया है। वे भूल गए यही पीढ़ी गाँव-गाँव गलियों का मोबाइल से वीडियो बनाकर भ्रष्टाचार उजागर करती है। यह पीढ़ी आरटीआई का इस्तेमाल कर जवाब माँगती है। सालभर सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए अपने जन प्रतिनिधियों का निकम्मापन उजागर करती है।

इस पीढ़ी के सवालों/विचारों से सहमत/असहमत होना ‘खान सर’ का अधिकार है। पर वे इस बात को खारिज नहीं कर सकते कि इस पीढ़ी के पास अपने पुरानी पीढ़ियों से सवाल पूछने का कहीं अधिक साहस है। यह पीढ़ी कहीं अधिक आत्मविश्वास से भरी हुई है। तकनीक और ज्ञान को सहजता से ग्रहण कर लेने की उसकी क्षमता पुरानी पीढ़ियों से कहीं अधिक है। यह पीढ़ी यह सब कुछ उस समयकाल में कर रही है जो पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है। वह उस दौर में फल-फूल रही है जब दुनिया ने कोरोना जैसा वैश्विक संकट देखा है। जब गाँव के दायरे फैलकर ग्लोबल विलेज का विस्तार पा चुकी है।

ऐसा नहीं है कि ढाई घंटे से लंबे इस पॉडकास्ट में ‘खान सर’ का छिछलापन/​मसखरापन केवल इसी एक सवाल के जवाब में उजागर होता है। ऑपरेशन सिंदूर से लेकर अग्निवीर तक, नेहरू-पटेल जैसे से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों से लेकर मौजूदा समय से जुड़े सवालों तक उन्होंने इसका भरपूर प्रदर्शन किया है।

ऐसा भी नहीं है कि ‘खान सर’ को इस नई पीढ़ी की क्षमता का पता नहीं है। उनके पास कोचिंग के लिए आने वाले लोग इसी पीढ़ी के हैं। इस पीढ़ी से ‘खान सर’ का हम जैसों से कहीं अधिक रोजाना का सीधा संवाद है। इस पीढ़ी की मेहनत की प्रशंसा करते हुए वे हाल में तब भी दिखे थे जब NEET में उनके ही संस्थान के कुछ बच्चों ने सफलता हासिल की। इस नतीजे से पहले तक ‘खान सर’ की छवि ग्रुप डी के एग्जाम क्लियर कराने वाले मास्टर के तौर पर ही थी।

बावजूद इसके इस पॉडकास्ट में जिस तरह से ‘खान सर’ ने जवाब दिए हैं, उससे पता चलता है कि वे नई पीढ़ी के डाटा से बनी प्रसिद्धि को भुनाकर उसी ‘महीन एजेंडा’ को अब आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे यह देश कहीं आगे की यात्रा कर चुका है। उनकी यह कोशिश बिहार में BPSC परीक्षा के नियमों में बदलाव के विरुद्ध छात्रों के प्रदर्शन के दौरान भी दिखी थी।

पर ‘खान सर’ को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनके अंतर्मन की दबी-कुचली इच्छाओं का भार डाटा फूँकने वाली पीढ़ी क्लासरूम की चौहद्दी के बाहर शायद ही उठाने को तैयार हो। बेहतर होगा कि अपना डाटा फूँक वे नई पीढ़ी से इस पॉडकास्ट से दूर रहने की अपील करें, क्योंकि इसमें उन्होंने जो हगा उसका दुर्गंध फैलाने के लिए नई पीढ़ी ने अपने डाटा का इस्तेमाल कर दिया तो संकट ‘खान जीएस रिसर्च सेंटर’ के जरिए फुलाए गए गुब्बारे की हवा भी निकाल सकता है।

ममता सरकार की नई OBC आरक्षण लिस्ट पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक, 76 जातियाँ की थी शामिल: भाजपा ने बताया- इनमें 67 मुस्लिमों की

कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की नई आरक्षण सूची जारी करने पर रोक लगा दी है। यह नई सूची राज्य की सत्तारूढ़ ममता बनर्जी सरकार ने बनाई है। इसमें 76 जातियों को जगह दी गई है। इनमें से 85%+ जातियाँ मुस्लिम थीं। कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले पर भाजपा नेताओं ने प्रसन्नता व्यक्त की है।

कलकत्ता हाई कोर्ट की जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस राजशेखर मंथा की बेंच ने मंगलवार (17 जून, 2025) को यह निर्णय सुनाया। बेंच ने बंगाल सरकार की इस नई OBC आरक्षण लिस्ट के जारी किए जाने पर रोक लगाई है। यह रोक अंतरिम तौर पर लगाई गई है जो 31 जुलाई, 2025 तक जारी रहेगी।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने इसी के साथ बंगाल सरकार के पोर्टल पर भी रोक लगा दी है। बंगाल सरकार ने इस पोर्टल के जरिए जातियों के आवेदन खोले थे। इस मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई, 2025 तक है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने यह निर्णय एक याचिका पर सुनाया है।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल नई सूची में फिर से उन जातियों को जोड़ रही है, जिनका आरक्षण पिछली बार कलकत्ता हाई कोर्ट ने खत्म कर दिया था। इस फैसले का राज्य के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने स्वागत किया है।

उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “मैं ममता बनर्जी सरकार द्वारा तैयार की गई नई OBC सूची में 76 मुस्लिम वर्गों को शामिल करने पर रोक लगाने के ऐतिहासिक निर्णय के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ। यह एक अहंकारी राज्य सरकार के खिलाफ न्यायपालिका की एक शानदार जीत है… ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC सरकार की तुष्टिकरण की राजनीति, OBC सूची में लगभग 90% नए मुस्लिम वर्गों के शामिल करने से स्पष्ट है और यह समानता तथा निष्पक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन है।”

उन्होंने कहा कि 2010 में TMC के आने से पहले OBC वर्गों में केवल 20% मुस्लिम थे लेकिन ममता बनर्जी के शासन में यह संख्या आसमान छू गई है। उन्होंने कहा कि इसके चलते आरक्षण के हक़दार हिन्दुओं का हक़ मारा जा रहा है।

भाजपा नेता अमित मालवीय ने इस फैसले को तुष्टिकरण की राजनीति पर चोट बताया है। अमित मालवीय ने इससे पहले कहा था कि ममता बनर्जी की सरकार द्वारा बनाई गई नई 2 सूचियों में 76 में 67 जातियाँ मुस्लिम हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि लिस्ट A में मुस्लिमों को 84% जबकि लिस्ट B में 90% जगह दी गई है।

वहीं मीडिया रिपोर्ट्स ने बताया है ममता सरकार ने 76 में से 74 जातियाँ वही रखी हैं जिनका आरक्षण मई, 2024 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने खत्म कर दिया था। ममता बनर्जी की सरकार इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँची थी।

पेपरलेस होगी जनगणना, जाति के आँकड़े भी किए जाएँगे इकट्ठा, घर से लेकर रोजगार तक हर डिटेल होगी दर्ज: जानिए कौन से नए सवाल पूछे जाएँगे, कितनी लंबी होगी प्रक्रिया

भारत के इतिहास में पहली बार 2027 की जनगणना डिजिटल तरीके से होने जा रही है। केन्द्र सरकार ने इसके लिए नोटिफिकेशन 16 जून 2025 को जारी किया गया । गृह मंत्री अमित शाह ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 16वीं जनगणना में पहली बार जाति गणना भी होगी।

दो फेज में होगी जनगणना

नोटिफिकेशन में कहा गया है कि भारत की जनसंख्या की जनगणना वर्ष 2027 के दौरान की जाएगी। इस जनगणना की शुरुआत 1 अक्टूबर 2026 को देश के चार पहाड़ी राज्यों जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में होगी। बाकी जगहों पर 1 मार्च 2027 से जनगणना की शुरुआत की जाएगी। डेटा इक्ठ्ठा हो जाने के बाद दिसंबर 2027 तक इसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा। इसके लिए मोबाइल ऐप, ऑनलाइन और दूसरे डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा। खास बात ये है कि जनगणना अधिनियम 1948 के तहत जनगणना और जातीय जनगणना दोनों कराई जाएगी।

कोरोना की वजह से हुई देरी

भारत में जनगणना 10 साल पर होती है। 2011 में आजादी के बाद की 7वीं जनगणना हुई थी। इस आधार पर 2021 में जनगणना होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से इसे टाल दिया गया और अब 2025 में जनगणना के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इससे सर्किल भी बदल रहा है। इसकी वजह से अब अगली जनगणना का नोटिफिकेशन 2035 में जारी की जा सकती है।

कितने लोग जनगणना कराने में होंगे शामिल?

16वीं जनगणना में पहली बार जाति गणना भी होगी। इसके लिए 34 लाख काउंटर और सुपरवाइजर , 1.3 लाख जनगणना पदाधिकारी काम करेंगे। इसके लिए स्टाफ की नियुक्ति और ट्रेनिंग होगी। पर्यवेक्षक नियुक्त किया जाएगा और करीब 2 महीने तक सभी का प्रशिक्षण होगा। इस दौरान डिजिटल डिवाइस और मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल करना सिखाया जाएगा। जनगणना में 13 हजार करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना है।

परिसीमन आयोग का गठन होगा

2028 में लोकसभा और राज्यसभा में सीटों के परिसीमन शुरू होने की उम्मीद है। जानकारों की मानें तो इसके बाद महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू किया जा सकता है। जनगणना के बाद परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा और आबादी को ध्यान में रखते हुए लोकसभा सीटों का पुनर्निधारण किया जाएगा। ऐसे में दक्षिण भारतीय राज्य काफी चिंतित हैं। हालाँकि केन्द्र सरकार ने आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु जैसे राज्यों को भरोसा दिलाया है कि परिसीमन की प्रक्रिया में दक्षिण राज्यों की चिंता पर विचार किया जाएगा।

कैसे अलग है 2027 की जनगणना?

2011 में हुई पिछली जनगणना के 16 साल बाद देश में जनगणना कराई जा रही है। इसमें जातियों, उपजातियों और ओबीसी के लिए नए कॉलम और मेन्यू शामिल किये जा रहे हैं। पूरी तरह पेपरलेस होने वाली इस जनगणना की प्रश्नावली में इससे जुड़े सवाल पूछे जाएँगे। डेटा पूरी तरह डिजिटल होगा और इसके लिए मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल किया जाएगा। ये ऐप्स हिन्दी, अंग्रेजी के अलावा 14 क्षेत्रीय भाषाओं में होंगी। 2011 में घर-घर जाकर डेटा एकत्रित किए गए थे, लेकिन तकनीक का इस्तेमाल काफी कम हुआ था।

सेहत से जुड़े भी होंगे सवाल

जनगणना की प्रक्रिया दो चरणों में 2011 की तरह ही पूरी की जाएगी। पहले चरण में परिवार की आवासीय स्थिति, संपत्ति और सुविधाओं के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। इसके बाद दूसरा चरण शुरू होगा। इस चरण में हर मकान में रहने वाले व्यक्ति की उम्र, जाति, शिक्षा, लिंग, रोजगार और दूसरी जानकारियाँ इकट्ठा की जाएगी। इसमें डेमोग्राफिक अनुपात, सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति के साथ- साथ लोगों के जीवन स्तर का अंदाज मिलेगा। इससे सरकार को योजनाएँ बनाने और नीति तैयार करने में मदद मिलेगी। भारत में डायबिटीज के मरीज दुनिया में सबसे अधिक हैं इसलिए सेहत से जुड़े सवाल भी पूछे जाएँगे। आप डायबिटीज के मरीज हैं या नहीं, ये भी पूछा जाएगा।

जनगणना से जुड़ी तमाम जानकारियों का ट्रांसफर और स्टोर करने की खास व्यवस्था की जाएगी, ताकि डेटा लीक न हो। व्यक्ति की निजता का भी पूरा ख्याल रखा जाएगा। जनगणना कराने की जिम्मेदारी भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त की होती है। ये दोनों गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं।

1881 में पहली बार हुई थी जनगणना

देश में पहली बार 1881 में जनगणना हुई थी। उस वक्त देश की जनसंख्या 25.38 करोड़ थी। इसके बाद हर 10 साल बाद जनगणना हो रही है। 1941 में जातीय आँकड़े जुटाए गये थे लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया गया। आजादी के बाद 1951 में पहली जनगणना कराई गई। उस वक्त ये माना गया कि जाति जनगणना से देश विभाजित होगा और देश की एकता अखंडता को नुकसान होगा। इसलिए सिर्फ एससी-एसटी के आँकड़े जुटाए गए।

देश में पहली बार एक साथ जाति जनगणना

जनगणना 2027 में जाति जनगणना भी होगी। यानी लोगों की जातीय पहचान के आधार पर आँकड़े जुटाए जाएंगे। इससे पता चलेगा की कौन-सी जाति किस क्षेत्र में कितनी है और उनकी सामाजिक आर्थिक स्थिति कैसी है? इसका इस्तेमाल सामाजिक कल्याण और दूसरी योजनाओं को बनाने और लोगों के जीवन स्तर को सुधारने में किया जा सकेगा। देश में पहली बार होगा जब एक साथ सभी जातियों का आँकड़ा सरकार के पास होगा।

इंदौर में लव जिहाद के लिए मुस्लिम लड़कों को पैसा देने वाला कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी अब भी फरार, ‘डकैत’ नाम से भी पहचान: हत्या-लूट में भाई भी जा चुका है जेल

इंदौर की बाणगंगा पुलिस अनवर डकैत उर्फ कादरी की तलाश कर रही है। पुलिस ने उसके घर और रिश्तेदारों के यहाँ भी दबिश दी है, लेकिन अभी तक उसकी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। पकड़े गए आरोपितों ने पुलिस को बताया कि साहिल के पिता की अनवर से दोस्ती थी और साहिल भी अनवर से मिलता-जुलता था।

इसी दौरान अनवर ने साहिल और उसके साथी अफजल को हिंदू लड़कियों को प्रेम जाल में फँसाने के लिए पैसे का लालच दिया। इसके बाद साहिल और अफजल ने सोशल मीडिया पर हिंदू लड़कियों से दोस्ती कर उन्हें अपने जाल में फँसाया। अनवर के भाई अज्जू डकैत और फिरोज पर भी कई अपराधिक मामले दर्ज हैं। अज्जू हत्या और लूट के मामले में जेल जा चुका है।

मामला क्या है?

यह मामला 15 जून 2025 को सामने आया, जब लव जिहाद के आरोप में पकड़े गए दो लड़कों ने कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी पर गंभीर आरोप लगाए। लड़कों का कहना है कि कादरी ने उन्हें हिंदू लड़कियों से शादी करने और उनसे देह व्यापार करवाने के लिए पैसे दिए थे।

इंदौर में हिंदू युवतियों से दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन के बढ़ते मामलों के बीच, कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी का नाम एक नई साजिश में सामने आया है। पुलिस ने कादरी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश कर रही है।

पुलिस कार्रवाई और खुलासा

शनिवार (14 जून 2025) रात को बाणगंगा पुलिस ने दो युवतियों की शिकायत पर अल्ताफ खान और साहिल खान के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया था। ये युवतियाँ सांवेर रोड पर रहती हैं। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपितों ने पार्षद अनवर कादरी का नाम लिया।

आरोपितों ने पुलिस को बताया कि अनवर कादरी ने उनसे कहा था कि वे हिंदू युवतियों से शादी करें और उन्हें देह व्यापार के धंधे में धकेलें। TI सियारामसिंह गुर्जर ने मीडिया को बताया कि आरोपितों के बयानों के आधार पर अनवर कादरी को इस साजिश का मुख्य आरोपित बनाया गया है।

पुलिस ने कादरी के घर पर छापा मारा, लेकिन वह फरार हो गया। दोनों आरोपितों को सोमवार (16 जून 2025) तक पुलिस रिमांड पर रखा गया और उनसे आगे की पूछताछ की जा रही है।

साहिल खान का मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक आरोपित साहिल खान पर 18 वर्षीय युवती से दुष्कर्म का आरोप है। साहिल ने करीब पाँच महीने पहले इंस्टाग्राम पर खुद को हिंदू बताकर युवती से दोस्ती की थी। 12 मई 2025 को वह युवती को बातचीत के लिए दोस्त के कमरे पर ले गया और शादी का झाँसा देकर उसका रेप किया।

इसके बाद 30 मई 2025 को उसने युवती को स्कीम-54 में एक कैफे पर बुलाया और वहाँ भी जबरदस्ती की। साहिल ने युवती को बताया कि वह मुस्लिम है और उसे भी इस्लाम अपनाने के लिए कहा। साहिल ने युवती को यह भी कहा कि ‘तू जितना पैसा माँगेगी मैं दूँगा।’ इसके बाद उसने युवती को जबरदस्ती बुर्का भी पहनाया।

गिरफ्तारी के बाद साहिल ने बताया कि उसकी मुलाकात अनवर कादरी से एक सामाजिक कार्यक्रम में हुई थी। कादरी ने उसे दो लाख रुपये दिए थे और कहा था कि इस ‘काम को आगे बढ़ाओ।’

टीआई के मुताबिक, दूसरे आरोपित अल्ताफ ने भी अनवर कादरी से एक लाख रुपए लेने की बात कबूली है। पुलिस अब आरोपितों के बैंक खातों की जाँच कर रही है। पुलिस कादरी के अलावा अन्य लोगों की भी जाँच कर रही है जो इस मामले में शामिल हो सकते हैं।

तेल को तरस जाएगी दुनिया, इस्लामी मुल्कों की ही कमाई हो जाएगी बंद: क्या है ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’, ईरान-इजरायल युद्ध के बीच चर्चा में क्यों?

इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई समस्या भी मुँह बाए खड़ी है। समस्या की जड़ असल में ईरान से जुड़ी है। दोनों देशों का युद्ध में दुनिया भर के लिए गैस और तेल की कीमतें बढ़ा सकता है।

असल में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) को लेकर कयास लग रहे हैं कि ईरान इस रास्ते को बंद कर सकता है। हालाँकि अब तक तो ऐसा नहीं हुआ है लेकिन भविष्य में अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनियाभर के लिए काफी महत्वपूर्ण रास्ता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित है। ये फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। ये इतना गहरा और चौड़ा है कि दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के टैंकर्स को भी आराम से संभाल सकता है। इसके साथ ही यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल चोकपॉइंट्स में भी शामिल है।

क्यों जरूरी है ये जलडमरूमध्य

इस रास्ते से काफी बड़ी मात्रा में तेल को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाया जाता है। अगर ईरान इस रास्ते को बंद करता है तो दुनियाभर के कई देशों को इसका नुकसान झेलना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस तेल के लिए रास्ते से परे अन्य वैकल्पिक रास्ते काफी कम और लंबे हैं।

अगर किसी एक चोकप्वाइंट से दूसरे तक के बीच कोई भी परेशानी होती है तो सबसे पहले आपूर्ति में देरी होगी। इसके चलते शिपिंग की लाग बढ़ेगी और अतंतः वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में इजाफा होगा।

इस बात को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी नौसेना का पाँचवाँ बेड़ा बहरीन के मनामा में रहकर जलडमरूमध्य की निगरानी करता है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह से रुकावट आती है या इसे अस्थायी रूप से बंद किया जाता है, तो इससे वैश्विक तेल बाजार में झटके लग सकते हैं।

अगर आँकड़ों की बात करें तो इस जलडमरूमध्य से 2024 में प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल तेल का आवागमन हुआ था। ये आँकड़ा वैश्विक पेट्रोलियम खपत का लगभग 20% के बराबर था। वहीं 2025 के शुरुआती तीन महीनों में पेट्रोल का कारोबार 2024 की अपेक्षा स्थिर ही रहा। 2024 और 2025 के आँकड़ों में होर्मुज से होकर जाने वाले तेल वैश्विक तेल व्यापार का एक चौथाई से अधिक और पेट्रोलियम उत्पाद और तेल के खपत का लगभग 5वाँ हिस्सा होगा।

बैरल, पेट्रोल या कच्चे तेल को मापने की इकाई है जिसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार का लिए होता है। एक बैरल 159 लीटर के बराबर होता है।

वोर्टेक्सा द्वारा प्रकाशित टैंकर ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, सऊदी अरब होर्मुज जलडमरूमध्य से किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे अधिक कच्चा तेल और कंडेनसेट का आवागमन करता है। 2024 में सऊदी अरब से कच्चे तेल और कंडेनसेट का निर्यात पूरे कारोबार का 38% था।

अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कार्रवाई करता है तो सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को नुकसान पहुँचेगा। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए सऊदी और UAE ने इस रास्ते को बायपास करने का एक बुनियादी ढाँचा तैयार कर रखा है।

इसके तहत पाइपलाइनें बिछाई गई हैं जो इस रास्ते में आने वाले अड़ंगों को कुछ हद तक कम कर सकता है। हालाँकि ये पाइपलाइनें पूरी तरह से संचालित नहीं होतीं, फिर भी किसी तरह के व्यवधान होने पर सऊदी अरब और UAE होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास कर प्रतिदिन 260 लाख बैरल प्रतिदिन के आवागमन की क्षमता रखती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में आठ प्रमुख द्वीप हैं। इनमें से सात पर ईरान का नियंत्रण है। अबू मूसा, ग्रेटर टुंब और लेसर टुंब द्वीपों को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच विवाद है। ये तीनों द्वीप रणनीतिक रूप से दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

1970 के दशक से, ईरान ने इन द्वीपों पर अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखी है। इसके अलावा, चाबहार, बंदर अब्बास और बुशहर में स्थित नौसैनिक अड्डों से ईरान की नौसेना सागर पर नियंत्रण करती है। इससे जलडमरूमध्य पर इसका मजबूत प्रभाव देखने को मिलता है।

ईरानी खाड़ी के तट पर जलवायु अत्यधिक गर्म और शुष्क है। जुलाई और अगस्त के महीने इस क्षेत्र के लिए सबसे अधिक गर्म होते हैं। इसके चलते वहाँ रहना मुश्किल है। फिर भी तेल का क्षेत्र होने के कारण थोड़ा बहुत विकास किया गया है। जलडमरूमध्य के आसपास के क्षेत्रों में धूल, सुबह की धुंध और धुंधलापन होता है। इससे भी वहाँ की दृश्यता प्रभावित होती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का भू-राजनीतिक महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक स्थिति इसे काफी अहम बना देती है। ओमान और ईरान के बीच होने के कारण ये कुवैत, सऊदी अरब, इराक, कतर, बहरीन और UAE को अरब सागर और उससे आगे जोड़ता है।

जैसे-जैसे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है, होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व भी बढ़ता जा रहा है। भारत के लिए यह संकट देश की रणनीतिक साझेदारी को बेहतर बनाने और नए ऊर्जा स्रोतों पर काम करने की जरूरत बता रहा है।

होर्मुज को बंद करने पर ईरान की क्या है स्थिति

इजरायल की ओर से ईरान पर हमले किए जाने के बाद शिया मुल्क के कई सैन्य ठिकाने और परमाणु कार्यक्रम तबाह हो गए हैं। बौखलाए ईरान ने जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी दी है। हालाँकि इस रास्ते को पूरी तरह से बंद करने की आशंका कुछ कम ही जताई जा रही है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इन कारणों में ईरान के कुछ देशों के साथ बेहतर संबंध और आर्थिक स्थिरता समेत कई पहलू शामिल हैं।

ईरान और चीन के संबंध काफी बेहतर हैं। चीन ईरान के तेल का तीन- चौथाई हिस्से का आयात करता है जो कि सबसे अधिक है। ऐसे में जलडमरूमध्य का रास्ता बंद होने से चीन के लिए भी आपूर्ति बाधित होगी।

इसके अलावा इस रास्ते के बंद होने से ईरान के ओमान के साथ रिश्ते खराब हो सकते हैं। ओमान समुद्री रास्तों के जरिए कारोबार की आजादी का समर्थन करता रहा है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से पर अपना नियंत्रण भी रखता है।

इजरायल के साथ तनाव के चलते ईरान पहले से ही कई संघर्षों का सामना कर रहा है। ऐसे में अगर ये रास्ता बंद होता है तो ईरान को ही भारी कीमतों को ईरान को भी झेलना पड़ेगा। इससे ये मुल्क भी आर्थिक अस्थिरता के संकट से दो चार होगा।

असल में दुनिया के ज्यादातर देश इस बात को जान चुके हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई भी रुकावट वैश्विक संकट को जन्म दे सकता है। ऐसे में ईरान अपनी धमकी को मूर्त रूप में देने से पहले कई देशों के साथ अपने बचे कुचे रिश्तों से भी हाथ धो सकता है।

मुस्लिम महिला से बात कर रहा था देवेंद्र, चाकुओं से गोद डाला-सिर में मारी गोली: एनकाउंटर के बाद नदीम गिरफ्तार, हिंदुओं के पलायन के लिए कुख्यात कैराना की घटना

उत्तर प्रदेश के कैराना के मामौर गाँव में सोमवार (16 जून 2025) सुबह देवेंद्र देशवाल (45) नाम के एक किसान की चाकू और सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह किसान हरियाणा के पानीपत जिले के कुराड़ गाँव का रहने वाला था। हमले में देवेंद्र का दोस्त इस्लाम, उसका बेटा शहजाद और एक आरोपित नदीम भी घायल हुआ है।

पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 4 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इसमें 2 आरोपित नदीम और सोबान को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित नदीम के पास से तमंचा, जिंदा कारतूस, खोखा कारतूस बरामद हुए है। पुलिस मुठभेड़ में नदीम को पैर में गोली लगी।

गिरफ्तार किए गए आरोपितों ने अवैध संबंधों के शक में देवेंद्र की हत्या करने की बात कबूली है। पुलिस अन्य फरार आरोपितों की तलाश में जुटी हुई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक किसान की हत्या जमीनी विवाद को लेकर हुई है।

क्या है पूरा मामला?

इस मामले में मृतक किसान देवेंद्र देशवाल के बेटे रोहित ने कैराना थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। रोहित ने बताया कि सोमवार (16 जून 2025) सुबह करीब 9 बजे देवेंद्र अपने दोस्त इस्लाम के साथ बाइक से खेत के पास जा रहे थे।

रास्ते में मामौर के दो सगे भाई फरमान और सोबान, और दो अन्य लोगों ने उन्हें रोक लिया। उन्होंने देवेंद्र के साथ मारपीट की और फिर चाकू से हमला किया। इसके बाद तमंचे से गोलियाँ भी चलाई गईं।

देवेंद्र को बचाने आए उनके दोस्त इस्लाम और इस्लाम के बेटे शहजाद पर भी हमला हुआ और वे घायल हो गए। आरोपितों ने देवेंद्र को सिर और पैर समेत तीन गोलियाँ मारीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हमले में आरोपित पक्ष का सोबान भी घायल हुआ था।

सूचना मिलते ही SP रामसेवक गौतम, ASP संतोष कुमार और CO अमरदीप मौर्य मौके पर पहुँचे। घायल देवेंद्र, इस्लाम और शहजाद को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने देवेंद्र देशवाल को मृत घोषित कर दिया। आपको बता दें, कि कैराना हिंदूओं के पलायन के लिए काफी चर्चित रहा है। योगी सरकार के आने के बाद से स्थिति में सुधार हुआ है।

लड़कियों से गंदी बातें करता था खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह, पंजाब पुलिस ने टिंडर से माँगा डाटा: रिपोर्ट, शक- अश्लील चैट के कारण ही हुई सिख एक्टिविस्ट गुरप्रीत की हत्या

खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल सिंह टिंडर ऐप पर लड़कियों से अश्लील बातें करता था। वह एक से अधिक लड़कियों से सम्पर्क में था। यह जानकारी पंजाब पुलिस को मिली है। पुलिस ने इस मामले में टिंडर से जानकारी जुटाई है। सिख एक्टिविस्ट गुरप्रीत सिंह की हत्या के मामले में यह सारी बातें पता की जा रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फरीदकोट पुलिस ने अमृतपाल सिंह के एक अकाउंट ‘अमृत संधू’ की जानकारी टिंडर से बीते दिनों में माँगी थी। टिंडर से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, अमृतपाल इस अकाउंट के ज़रिए 6 लड़कियों से अश्लील चैट्स करता था। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अमृतपाल रिश्तेदारों और दोस्तों से सबंध बनाने की बात करता था।

फरीदकोट की SSP डॉ प्रज्ञा जैन ने बताया है कि टिंडर से हासिल इन चैट्स और वीडियो में कुछ ऐसे सबूत हो सकते हैं, जो गुरप्रीत सिंह की हत्या से जुड़े हों। पुलिस का मानना है कि गुरप्रीत सिंह के पास अमृतपाल की इन अश्लील चैट्स या वीडियो से जुड़े कुछ ऐसे राज थे जो अमृतपाल की प्रतिष्ठा को धूमिल कर सकते थे और यही गुरप्रीत की मौत का कारण बने।

पुलिस अब उन 6 लड़कियों से भी पूछताछ करने की तैयारी में है जिनके साथ अमृतपाल की अश्लील चैट्स सामने आई हैं। फरीदकोट पुलिस ने टिंडर ऐप से उन लड़कियों के खातों की पूरी जानकारी, उनकी लोकेशन समेत बाकी जानकारी माँगी है।

इसके साथ ही पुलिस वीडियो कंटेंट और साझा की गई इमेजेज का पूरा डाटा बैकअप भी माँग रही है ताकि जाँच को आगे बढ़ाया जा सके। गुरप्रीत सिंह हत्याकांड में अमृतपाल सिंह के शामिल होने के सबूत में पंजाब पुलिस अब अमृतपाल सिंह से पूछताछ भी कर सकती है। पुलिस ने गुरप्रीत सिंह की हत्या करने वाले शूटरों की पहचान कर ली है।

अमृतपाल सिंह पर फिलहाल राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत मामला दर्ज है और वह असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद है। पंजाब पुलिस ने फरीदकोट में अक्टूबर 2024 में हुई सिख एक्टिविस्ट गुरप्रीत सिंह की हत्या के मामले में अमृतपाल सिंह और 11 अन्य लोगों पर गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) लगा दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला 9 अक्टूबर 2024 को फरीदकोट में सिख एक्टिविस्ट गुरप्रीत सिंह हरि नौ उर्फ ​​भोडी की गोली मारकर हत्या से जुड़ा है। गुरप्रीत की हत्या उस समय हुई जब वह अपने मोटरसाइकिल से गाँव के गुरूद्वारे से घर की तरफ लौट रहा था। गुरप्रीत, उसी वारिस पंजाब दे का हिस्सा था जिसका अमृतपाल प्रमुख बनाया गया था।

गुरप्रीत सिंह बेहबलकलाँ इन्साफ मोर्चा का सदस्य था और बेअदबी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे दो युवकों के पुलिस फायरिंग में मारे जाने पर कार्रवाई की माँग करता आया था। पंजाब पुलिस के DGP गौरव यादव ने इससे पहले बताया था कि गुरप्रीत की हत्या अमृतपाल सिंह के कहने पर की गई थी।

इस हत्या का साजिशकर्ता गैंगस्टर से आतंकवादी बना अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला बताया गया है, जो कनाडा में रहता है। यह भी सामने आया था है कि जिन शूटरों ने यह हत्या की उनके हैंडलर भी विदेशों में ही रहते हैं। इस जाँच के दौरान पंजाब पुलिस को सांसद अमृतपाल सिंह के इस हत्या में शामिल होने के भी सबूत मिले थे।

पत्नी ने बेटी से पति पर लगवाया यौन शोषण का आरोप, POCSO का मामला भी दर्ज करवाया: कर्नाटक हाई कोर्ट ने किया शख्स को बरी, कहा- फँसाने के लिए हुआ लड़की का इस्तेमाल

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने नाबालिग बच्चे के साथ यौन उत्पीड़न के आरोपी पिता को बरी करने के निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट का कहना है कि पत्नी ने पति को फँसाने के लिए बेटी का इस्तेमाल किया। पति पर पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज था

न्यायमूर्ति श्रीनिवास हरीश कुमार और न्यायमूर्ति के एस हेमलेखा की खंडपीठ ने मामले में शिकायतकर्ता सुजा जोन्स मजूरियर की अपील को खारिज करते हुए कहा, ” शिकायतकर्ता ने 13.06.2012 को कथित घटना से पहले विभिन्न एनजीओ, डॉक्टरों और कानूनी पेशेवरों से मुलाकात की थी, अगले दिन यानी 14.06.2012 को उसने शिकायत दर्ज करवाई। इससे रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाता है। यह समय बताता है कि वह उस दिन सिर्फ मामला बनाने की तैयारी कर रही थी।”

शिकायत में कहा गया है कि आरोपित पिता पास्कल माजुरियर ने अप्रैल, 2010 में अपने नाबालिग बेटी का यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद फिर मई, 2012 के आखिरी सप्ताह और 13 जून, 2012 को यौन उत्पीड़न किया। उस समय बच्चे की उम्र 3 साल 10 महीने थी। लेकिन शिकायतकर्ता अपने आरोप को साबित करने के लिए सबूत नहीं दे पाया। इसके आधार पर ट्रायल कोर्ट ने आरोपित पिता को बरी कर दिया।

कोर्ट का मानना है कि ये मामला पति और पत्नी के बीच गलतफहमी की वजह से पैदा हुआ है। इसके अलावा पत्नी ने पति को देश छोड़ने से रोकने के लिए बेटी का इस्तेमाल किया था।

ट्रायल कोर्ट ने माना कि उसने शिकायत दर्ज करने से पहले ही सबूत जमा करना शुरू कर दिया था। पूरे मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य के मूल्यांकन के आधार पर अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष अपने आरोप साबित करने में विफल रहा। इसके बाद आरोपी को बरी कर दिया गया।

बरी करने के आदेश को चुनौती देते हुए पत्नी ने कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख किया। शिकायतकर्ता ने तर्क दिया कि चूँकि संदिग्ध उसका पति था यानी पीड़िता का पिता, इसलिए शिकायतकर्ता के लिए सावधानी से काम करना जरूरी था। पुलिस से तुरंत संपर्क करने से पहले उसका आवश्यक कदम उठाना जरूरी था। शिकायतकर्ता के मुताबिक मेडिकल सबूत का मूल्यांकन सही से नहीं किया गया।

इसके जवाब में आरोपित पति के वकील ने कहा कि पति और पत्नी के बीच संबंध अच्छे नहीं थे। शादी टूटने के कगार पर थी, इसलिए दूसरे सबूतों और गवाहों पर भी गौर किया जाना चाहिए।
वकील ने कहा कि पहली सूचना रिपोर्ट झूठी थी । नौकरानी गीता के बयान की जाँच नहीं की गई, ये एक बहुत बड़ी भूल थी।

कोर्ट ने दोनों तरफ की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि अभियोजन पक्ष ने स्वतंत्र गवाह गीता से पूछताछ नहीं की और कोर्ट में उसे पेश भी नहीं किया गया। मेडिकल रिपोर्ट भी आरोप का समर्थन नहीं करते हैं और साक्ष्य में कई विसंगतियाँ मौजूद हैं। इसलिए आरोपित को बरी किया जाता है।