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‘हिजाब में माँ दुर्गा… और नाम सनातन’: कोलकाता के कलाकार की करनी पर भड़के नेटिजन्स, बताया- बंगाल का भविष्य

दुर्गा पूजा से प​हले पश्चिम बंगाल में इसको लेकर राजनीतिक और मजहबी प्रोपेगेंडा शुरू हो गया है। इसी कड़ी में एक कलाकार के स्केच को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। इसमें माँ दुर्गा को हिजाब में दिखाया गया है। प्रसिद्ध बंगाली कलाकार सनातन डिंडा ने 2 सितंबर को फेसबुक पर एक महिला की तस्वीर पोस्ट की। महिला का सिर हिजाब और मुँह नकाब से ढका था।

विवादित ड्राइंग को चारकोल ड्राई पेस्टल का इस्तेमाल कर स्केच किया गया था। इसके साथ कैप्शन में ‘माँ आशेन’ (Ma aschen) लिखा हुआ था। बंगाली में ‘माँ आशेन’ का अर्थ देवी दुर्गा की अपने मायके घर वापसी से है। इसका उपयोग हिंदू त्योहार को मनाने और इस दौरान हर्षोल्लास का वर्णन करने के लिए किया जाता है।

सनातन डिंडा के फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनग्रैब

कलाकार सनातन डिंडा द्वारा हिजाब में देवी दुर्गा का चित्रण करने और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करने को लेकर नेटिजन्स काफी आक्रोशित हैं। भाजपा महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष केया घोष ने लिखा, “हिजाब में माँ दुर्गा… कलाकार सनातन डिंडा द्वारा।”

उन्होंने कहा, “वह जानता है कि इससे वह नजरों में आ सकता है क्योंकि कई बंगाली बुद्धिजीवी इस पर गदगद हो रहे हैं।” भाजपा नेता ने इस मामले में हिंदू आईटी सेल, शिवसेना के पूर्व नेता राजपूत रमेश और वास्तुकार विकास पांडे से मदद माँगी थी।

नेटिज़न्स ने की खिंचाई

एक ट्विटर यूजर (@vighosh) ने कलाकार को आड़े हाथों लेते हुए उसके नाम पर संदेह जताया। उसने लिखा, “और इसका नाम सनातन है।”

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

एक अन्य यूजर ने लिखा, “उसने पश्चिम बंगाल का भविष्य दिखाने की कोशिश की है और कुछ नहीं।” उन्होंने कहा कि सभी धर्मों की महिलाओं को अंततः हिजाब पहनने के लिए मजबूर किया जाएगा, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो।

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

एक यूजर ने लिखा, “अब यह क्या है।”

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

एक ने अफसोस जताते हुए लिखा, “उसने राज्य के भविष्य का स्केच किया है। स्केच में दिख रही महिला की आँखों के आँसू हमें भविष्य के बारे में बता रहा है।”

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

गौरतलब है कि अक्टूबर 2019 में कोलकाता के बेलियाघाटा 33 पल्ली क्षेत्र में दुर्गा पूजा पंडाल में अज़ान का एक वीडियो चलाया गया था, जिसको लेकर सोशल मीडिया यूजर्स ने काफी नाराजगी जताई थी। यूजर्स ने आयोजकों के खिलाफ तुष्टिकरण और धर्मनिरपेक्षता दिखाने का नारा लगाया था। इसके बाद एक स्थानीय वकील ने शिकायत दर्ज की थी, जिसके बाद पूजा पंडाल के क्लब सचिव और स्थानीय टीएमसी नेता परेश पॉल सहित दस लोगों को नामजद किया गया था। कथित तौर पर पॉल इस सामुदायिक पूजा के मुख्य आयोजक थे।

करीना नहीं, कंगना बनेंगी ‘सीता’: जावेद अख्तर गिरफ्तारी की माँग लेकर पहुँच गए कोर्ट

तमिल फिल्म ‘थलाईवी’ के जरिए तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के किरदार को फ़िल्मी पर्दे पर अमर करने वाली कंगना रनौत अपनी अगली फिल्म में माँ सीता का किरदार निभाएँगी। कंगना रनौत ने अपनी अगली फिल्म की घोषणा करते हुए उसका फर्स्ट लुक पोस्टर जारी कर दिया है, जिसका नाम ‘The Incarnation – SITA’ होगा। अलौकिक देसाई इस फिल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी संभालेंगे।

कंगना रनौत ने कहा कि वो एक प्रतिभाशाली लोगों की टीम के साथ इस किरदार को अदा करने को लेकर काफी ऊर्जावान महसूस कर रही हैं। उन्होंने लिखा कि भगवान राम और माँ सीता के आशीर्वाद से नया प्रोजेक्ट शुरू होने जा रहा है। कंगना रनौत ने ‘जय सियाराम’ लिखते हुए इंस्टाग्राम के जरिए इस नई फिल्म के बारे में सूचना दी। निर्देशक देसाई ने कहा कि इस फिल्म के बाद हमारे प्राचीन साहित्य को देखने का हमारा नजरिया बदलेगा।

सलोनी शर्मा इस फिल्म का निर्माण करेंगी। उन्होंने कहा कि एक महिला होने के नाते वो VFX से सजी इस बड़ी फिल्म में कंगना रनौत का स्वागत करते हुए काफी खुश हैं। उन्होंने कहा कि कंगना रनौत एक भारतीय महिला की खूबियों को दर्शाती हैं – निडर, हिम्मती और बहादुर। इस फिल्म की कहानी केवी विजयेंद्र प्रसाद लिखेंगे, जिन्होंने ‘मणिकर्णिका’ और ‘थलाईवी’ की कहानी लिखी है। कंगना रनौत ‘तेजस’ में भी दिखेंगी।

कंगना रनौत ने अपनी अगली फिल्म की घोषणा की

उधर गीतकार जावेद अख्तर ने कंगना रनौत के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कर रखा है, जिस पर सुनवाई करते हुए एक मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने मंगलवार (13 सितंबर, 2021) को कहा कि अगर वो अगली सुनवाई से अनुपस्थित रहती हैं तो उनके खिलाफ गिरफ़्तारी का वॉरंट जारी किया जा सकता है। जावेद अख्तर ने कंगना रनौत पर इस मामले की लंबा खींचने का आरोप लगाया।

इससे पहले करीना कपूर को ये भूमिका ऑफर किए जाने की खबरें आई थी, जिसके बाद इसका लगातार विरोध हो रहा था। इसी कड़ी ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं ने नागपुर में अभिनेत्री के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी थी कि फिल्म बनने पर इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। संगठन ने पूछा था, “बार-बार मुस्लिम समाज के लोग ही हिंदू चरित्रों को क्यों निभाते हैं? इससे हमारे समाज में क्षति आती है। ये जिहादी मानसिकता के लोग हैं, जो हिन्दुओं से कमाई कर हिंदू समाज को ही गली देते हैं।”

NHRC ने ‘किसान आंदोलन’ से हुए आर्थिक नुकसान सहित इन मुद्दों पर माँगी रिपोर्ट: दिल्ली, यूपी, हरियाणा, राजस्थान सरकार को नोटिस

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने तथाकथित किसानों के विरोध प्रदर्शनों के संबंध में कई शिकायतें मिलने के बाद दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को नोटिस जारी कर इस पर विस्तृत रिपोर्ट माँगी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के मुताबिक, उन्हें शिकायत मिली है कि इन राज्यों में चल रहे तथाकथित किसान आंदोलन की वजह से उद्योग धंधों और परिवहन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। साथ ही प्रदर्शन स्थलों पर कोविड-19 सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया गया है।

विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), केंद्रीय गृह मंत्रालय व स्वास्थ्य मंत्रालय से किसान आंदोलन के प्रतिकूल प्रभाव और कोविड-19 नियमों के उल्लंघन के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

NHRC’s press note. Image Source: NHRC website

उन्होंने कहा, “एनएचआरसी को शिकायतें मिली हैं। इन राज्यों में चल रहे तथाकथित किसान आंदोलन की वजह से 9 हजार उद्योग धंधे ठप हो चुके हैं। यातायात पर भीषण असर पड़ा है, जिसकी वजह से लोगों को, मरीजों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है साथ ही बॉर्डर पर जाम होने की वजह से लोगों को ज्यादा दूरी तय करनी पड़ रही है।”

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के मुताबिक, इस आंदोलन की वजह से कुछ जगहों पर लोगों को उनके घरों से भी नहीं निकलने दिया जा रहा है। उन्हें यह भी शिकायत मिली है कि इन प्रदर्शन स्थलों पर कोविड प्रोटोकॉल की भी धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।

इसके चलते एनएचआरसी ने चारों राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को नोटिस जारी कर उनसे संबंधित ‘कार्रवाई रिपोर्ट’ जमा करने को कहा है। राज्यों और केंद्र सरकार को नोटिस देने के अलावा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने Institute of Economic Growth (IEG) से 10 अक्टूबर तक इस तथाकथित आंदोलन की वजह से उद्योगों पर पड़े प्रभाव पर एक रिपोर्ट माँगी है।

इसके साथ ही एनएचआरसी ने हरियाणा के झज्जर जिले के डीएम को बहादुरगढ़ के किसान प्रदर्शनस्थल पर मानवाधिकार कार्यकर्ता के साथ हुए कथित सामूहिक बलात्कार पर पीड़ित पक्ष को मुआवजे पर 10 अक्टूबर तक आयोग को रिपोर्ट सौंपने को भी कहा है, जो उन्होंने अभी तक नहीं सौंपी है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क से कहा कि वो इन प्रदर्शनस्थलों पर अपनी एक टीम भेजें जो उन्हें सर्वे करके रिपोर्ट दें कि इस तथाकथित आंदोलन की वजह से लोगों की कमाई, उनके जीवन और बुजुर्गों पर क्या-क्या असर पड़ा है। दरअसल, तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में कई महीनों से विभिन्न राज्यों के किसान दिल्ली-हरियाणा के सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि कैसे पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य को आर्थिक रूप से नुकसान पहुँचाने के लिए प्रदर्शन कर रहे किसानों को दोषी ठहराया था। उन्होंने कहा था, “मैं पंजाब के किसानों को बताना चाहता हूँ कि यह उनकी जमीन है। यहाँ चल रहा उनका विरोध प्रदर्शन राज्य के हित में नहीं है।” उन्‍होंने किसान संगठनों से कहा था कि वे अपना आंदोलन हरियाणा और दिल्‍ली में करें, लेकिन पंजाब में धरना आद‍ि न दें।

‘मैं खुल कर कहता हूँ… किसान प्रदर्शन को कॉन्ग्रेस कर रही है स्पांसर’: पंजाब के MLA ने खोल दी पोल

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के भड़काऊ बयान के एक दिन बाद अब कॉन्ग्रेस पार्टी के एक और नेता ने पूरे किसान प्रदर्शन की पोल खोली है। मीडिया से बातचीत में कॉन्ग्रेस नेता राज कुमार वेरका ने स्वीकार किया ये पूरा आंदोलन कॉन्ग्रेस द्वारा प्रायोजित है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि ये प्रदर्शन सारी पार्टियों द्वारा स्पांसर किया गया। ये बीजेपी के ख़िलाफ़ आंदोलन है जो काले कानून लेकर आए। ये संघर्ष सारा उनके ख़िलाफ़ है।

किसान प्रदर्शन के पीछे कॉन्ग्रेस की ‘साजिश’ स्वीकारते हुए उन्होंने कहा, “ये सच है कि ये आंदोलन पंजाब स्पांसर है। ये पंजाब के किसानों का आंदोलन है। ये सभी पार्टी द्वारा स्पांसर है। ये बात आपको मैं कहता हूँ ये आंदोलन भाजपा के ख़िलाफ़ है जो हमारी खेती के लिए काले कानून लेकर आए। ये तमाम संघर्ष उनके ख़िलाफ़ है। इसमें क्या शक है कि कॉन्ग्रेस किसानों के साथ है। इस संघर्ष के साथ है। तो हमारी साजिश है इसके साथ। मैं खुल कर कहता हूँ हम किसानों के साथ हैं और पूरी तरह से साथ हैं।”

दिल्ली-हरियाणा में प्रदर्शन करें किसान: कॉन्ग्रेसी ‘नैतिकता’ का ही दर्शन अमरिंदर सिंह का बयान, पर क्या इससे बुझेगी पंजाब की घरेलू आग

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों से अपील की है कि वे पंजाब में प्रदर्शन न करें, क्योंकि यह उनकी जमीन है और इससे राज्य को आर्थिक क्षति पहुँचती है। वे यदि केवल इतना कहते तो गनीमत थी। उन्होंने अपनी इस बात में आगे यह भी जोड़ा कि पंजाब में प्रदर्शन और धरना दे रहे किसान यह सब कुछ वहाँ न करके हरियाणा और दिल्ली में करें और कृषि कानूनों को रद्द करने के उद्देश्य से दिल्ली में प्रदर्शन कर केंद्र सरकार पर दबाव बनाएँ।

अमरिंदर सिंह की इस बात को सुनकर लगता है जैसे किसानों के प्रदर्शन और धरने से पंजाब को आर्थिक क्षति तो होगी पर यदि यही प्रदर्शन हरियाणा और दिल्ली में किए जाएँ तो उन राज्यों को आर्थिक लाभ होगा।  

मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का यह वक्तव्य शपथ लेकर संवैधानिक पद पर बैठे एक कॉन्ग्रेसी की मानसिकता दर्शाता है। यह भी दर्शाता है कि संवैधानिक पद पर बैठे और मौखिक तौर पर संविधान के प्रति आस्था प्रकट करने वाले कॉन्ग्रेसियों के मन में संविधान और देश के कानून के प्रति कितनी इज्जत है।

इतिहास गवाह है कि कॉन्ग्रेस की राजनीतिक संस्कृति में सरकारों, राज्यों और राजनीतिक दलों के विरुद्ध आंदोलन और आंदोलनजीवियों को खड़ा करना आम बात रही है। कॉन्ग्रेस और कॉन्ग्रेसियों के लिए दूसरी आम बात यह रही है कि इस तरह के आंदोलन का बुरा असर जब खुद पर होता है, तब पार्टी ऐसे आंदोलनों से अपना पल्ला झाड़ लेती है। अमरिंदर सिंह द्वारा किसानों को दी गई सलाह इस बात का सबूत है कि पार्टी के लिए नैतिकता कभी भी राजनीतिक रोटी सेंकने के आड़े नहीं आती।

हाल के वर्षों में पार्टी ने ऐसे कई आंदोलनों का न केवल समर्थन किया, बल्कि उसे खड़ा करने में मुख्य भूमिका भी निभाई। CAA के विरुद्ध शाहीन बाग़ में खड़े किए गए आंदोलन को पार्टी का समर्थन हो या हरियाणा में जाट आंदोलन के पीछे पार्टी की भूमिका, सब को लेकर सार्वजनिक मंचों पर बहुत कुछ कहा और लिखा गया। ऐसे आंदोलनों के पीछे पार्टी की भूमिका किसी से छिपी नहीं है।

कृषि कानूनों के विरुद्ध धरना और प्रदर्शन कर रहे किसानों को पार्टी की ओर से किस-किस स्तर पर समर्थन मिला यह भी किसी से छिपा नहीं है। पंजाब प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नवजोत सिंह सिद्धू की ताजपोशी के समय पार्टी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने खुद अमरिंदर सिंह की सराहना करते हुए कहा था कि किसान आंदोलन को राज्य से बाहर भेजने में कप्तान साहब की प्रमुख भूमिका रही है। 

आज जब किसान पंजाब में धरना दे रहे हैं तब मुख्यमंत्री सिंह को उनसे समस्या हो रही है पर जब सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन शुरू हुआ था, तब उत्सव मनाने कॉन्ग्रेस के नेताओं की भीड़ लग गई थी। यह समर्थन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से लेकर प्रदेश स्तर के नेताओं तक से दिखाई दिया था। उस समय इन नेताओं ने यह अंदाजा लगाने की आवश्यकता नहीं समझी कि सिंघु बॉर्डर या उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर लगातार चल रहे प्रदर्शन से हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश को हो रही आर्थिक क्षति का भी हिसाब लगाया जाना चाहिए। आर्थिक हानि का हिसाब तो अमरिंदर सिंह को तब भी करना चाहिए था जब आंदोलन के नाम पर उनके राज्य में प्राइवेट कंपनी के कम्युनिकेशन टॉवर उखाड़े जा रहे थे या वहाँ प्राइवेट एसेट लूटे जा रहे थे? 26 जनवरी के दिन देश की राजधानी दिल्ली में जो कुछ हुआ कॉन्ग्रेस पार्टी की ओर से उसकी आलोचना तक न की गई। 

प्रश्न यह है कि राज्य को होने वाले आर्थिक क्षति की बात इस समय क्यों? इस बात की चर्चा पहले क्यों नहीं की गई? अचानक क्या अमरिंदर सिंह को स्थिति हाथ से निकलती दिखाई दे रही है या वे इस बात से चिंतित हैं कि प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू पर नियंत्रण रखना उनके बस में नहीं है और ऊपर से किसानों ने अपनी राजनीतिक पार्टी बना ली है। या फिर इसलिए कि चिंगारी को हवा देने से आग पंजाब में ही लगने की संभावना है? अभी तक की घटनाओं से यही लगता है कि जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहे हैं न केवल अमरिंदर सिंह के लिए, बल्कि उनकी पार्टी के लिए भी चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं और फिलहाल इसके कम होने के आसार नजर नहीं आ रहे।

अलीगढ़ का ताला, पिता के दोस्त, जाट राजा और कल्याण सिंह: PM मोदी ने एक साथ साधे कई मोर्चे, बताया कैसे बदल रहा UP

अलीगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (14 सितम्बर, 2021) महाराजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय का बटन दबाकर शिलान्‍यास करते हुए यूपी सरकार की तारीफ के साथ ही एक साथ कई निशाने साधे। इस दौरान राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौज़ूद रहीं। विश्वविद्यालय पर बनाई गई फिल्म दिखााई गई। फिल्म में राजा महेंद्र प्रताप के संक्षिप्त इतिहास के साथ ही शिक्षा के गुणवत्ता के बारे में भी बताया गया है।

पीएम मोदी ने देश के नौजवानों का आह्वान किया कि जब भी उन्‍हें कोई मुश्किल नज़र आए तो वे राजा महेन्‍द्र प्रताप सिंह के जीवन और उनकी वीर गाथा से प्रेरणा लें। अपने संबोधन की शुरुआत में उन्‍होंने देशवासियों को राधाष्‍टमी की बधाई भी दी। कहा कि आज ब्रज क्षेत्र के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण दिन है। ब्रज के कण-कण में राधा जी हैं। कार्यक्रम में राजा महेन्‍द्र प्रताप सिंह विवि और डिफेंस कॉरिडोर के अलीगढ़ नोड के बारे में दो संक्षिप्‍त डॉक्‍यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा कि आज राधाष्‍टमी के दिन ब्रज क्षेत्र को बड़ी सौगात मिल रही है

शिलान्यास करते हुए PM मोदी ने कहा, “आज देश के प्रधानमंत्री के नाते मुझे फिर से एक बार ये सौभाग्य मिला है कि मैं राजा महेंद्र प्रताप सिंह जैसे विजनरी और महान स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर बन रहे विश्वविद्यालय का शिलान्यास कर रहा हूँ। राजा महेन्द्र प्रताप सिंह जी सिर्फ भारत की आजादी के लिए ही नहीं लड़े थे, बल्कि उन्होंने भारत के भविष्य के निर्माण की नींव में भी सक्रिय योगदान दिया था। उन्होंने अपनी देश-विदेश की यात्राओं में मिले अनुभवों का उपयोग भारत की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए किया था।”

साथ ही डिफेंस कॉरिडोर के निर्माण को बड़ी उपलब्‍धि बताते हुए PM मोदी कहा कि यूपी डिफेंस के बड़े आयातक की छवि से उबरकर बड़ा निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय डिफेंस से सम्बंधित पढ़ाई भी होगी।

पीएम मोदी ने अलीगढ़ में इस मौके पर उन्‍होंने कल्‍याण सिंह को शिद्दत से याद किया। पीएम मोदी ने कहा, “आज का दिन पश्चिमी यूपी के लिए बहुत बड़ा दिन है। हमारा संस्कार है कि जब कोई शुभ कार्य हो तो हमें अपने बड़े याद आते हैं। मैं आज धरती के महान सपूत स्व. कल्याण सिंह जी की अनुपस्थिति महसूस कर रहा हूँ। आज कल्याण सिंह हमारे साथ होते तो यूनिवर्सिटी और डिफेंस कॉरिडोर देखकर बहुत खुश होते। उनकी आत्मा जहाँ भी होगी, हमें आशीर्वाद दे रही होगी।”

स्‍वतंत्रता संग्राम में राजा महेन्‍द्र सिंह के योगदान का उल्‍लेख करते हुए उन्‍होंने कहा कि यह दुर्भाग्‍य है कि राष्‍ट्रनायकों से देश की पीढ़ियों को परिचित ही नहीं कराया गया। 20 वीं सदी की उन गलतियों को 21 वीं सदी का भारत सुधार रहा है।”

पीएम ने कहा कि आज जब देश अपनी आजादी के 75 वर्ष का पर्व मना रहा है, आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, तो इन कोशिशों को और गति दी गई है। भारत की आजादी में राजा महेन्द्र प्रताप सिंह जी के योगदान को नमन करने का ये प्रयास ऐसा ही एक पावन अवसर है।

पीएम ने कहा कि कल तक जो अलीगढ़ तालों के जरिए घरों, दुकानों की रक्षा करता था, वो 21वीं सदी में हिंदुस्तान की सीमाओं की रक्षा करने का काम करेगा। वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट के माध्यम से यूपी सरकार ने अलीगढ़ के तालों और हार्डवेयर को एक नई पहचान दिलाने का काम किया है। पीएम ने कहा कि अलीगढ़ में ही रक्षा उत्पादन से जुड़ी डेढ़ दर्जन कंपनियां सैकड़ों करोड़ रुपए के निवेश से हजारों नए रोजगार बनाने वाली है। अलीगढ़ नोड में छोटे हथियार, आयुध, ड्रोन, एयरोस्पेस, मैटर कंपोनेंट्स, एंटी ड्रोन सिस्टम जैसे उत्पाद बन सकें, इसके लिए नए उद्योग लगाए जा रहे हैं।

आज देश ही नहीं दुनिया भी देख रही है कि आधुनिक ग्रेनेड और राइफल से लेकर लड़ाकू विमान, ड्रोन, युद्धपोत तक भारत में ही निर्मित किए जा रहे है। भारत दुनिया के एक बड़े डिफेंस इंपोर्टर की छवि से बाहर निकलकर दुनिया के एक अहम डिफेंस एक्सपोर्टर की नई पहचान बनाने की तरफ बढ़ रहा है। पीएम ने कहा कि वृंदावन में आधुनिक टेक्निकल कॉलेज, उन्होंने अपने संसाधनों, अपनी पैतृक संपत्ति दान करके बनवाया था। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए भी बड़ी जमीन राजा महेन्द्र प्रताप सिंह जी ने ही दी थी।

साथ ही अलीगढ़ के कार्यक्रम में पीएम मोदी ने एक बार फिर सीएम योगी की सरकार की जमकर तारीफ की। उन्‍होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार में यूपी तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहाँ निवेश का माहौल बना है। प्रदेश में पहले परिवार अपराधियों के डर से घरों में कैद रहते थे। आज अपराधी सलाखों के पीछे पहुँच गए हैं। एक समय में यहाँ गुंडों-माफियाओं की मनमानी थी। राजकाज भ्रष्‍टाचार के हवाले था। अब वसूली करने वाले पकड़े जा रहे हैं। योगी सरकार में गरीब की सुनवाई हो रही है।

पीएम ने कहा कि मुझे आज ये देखकर बहुत खुशी होती है कि जिस यूपी को देश के विकास में एक रुकावट के रूप में देखा जाता था, वही यूपी आज देश के बड़े अभियानों का नेतृत्व कर रहा है। यूपी के लोग भूल नहीं सकते कि पहले यहाँ किस तरह के घोटाले होते थे, किस तरह राज-काज को भ्रष्टाचारियों के हवाले कर दिया गया था। आज योगी जी की सरकार पूरी ईमानदारी से यूपी के विकास में जुटी हुई है। एक दौर था जब यहाँ शासन-प्रशासन, गुंडों और माफियाओं की मनमानी से चलता था। लेकिन अब वसूली करने वाले, माफियाराज चलाने वाले सलाखों के पीछे हैं।

पीएम ने कहा कि केंद्र सरकार का निरंतर प्रयास है कि छोटी जोत वालों को ताकत दी जाए.डेढ़ गुणा MSP हो, किसान क्रेडिट कार्ड का विस्तार हो, बीमा योजना में सुधार हो, 3 हज़ार रुपए की पेंशन की व्यवस्था हो, ऐसे अनेक फैसले छोटे किसानों को सशक्त कर रहे हैं।

गौरतलब है कि अलीगढ़ पहुँचे प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी का मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने स्‍वागत किया। उन्‍होंने कहा कि आज राधाष्‍टमी के दिन ब्रज क्षेत्र को सौगात मिल रही है। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने फरवरी 2018 में यूपी के पहले इन्वेस्टर समिट का उद्घाटन स्वयं आकर किया था। आज उसी का परिणाम है कि यूपी में तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश हुआ है। यूपी के 1.61 करोड़ नौजवानों को अपने ही गाँव में, अपने ही जिले में रोज़गार और नौकरी मिल रही है।

राजा महेन्‍द्र प्रताप विश्‍वविद्यालय का शिलान्‍यास करने अलीगढ़ आए पीएम मोदी का स्‍वागत करते हुए डिप्‍टी सीएम दिनेश शर्मा ने यूपी में शिक्षा व्‍यवस्‍था के सुधार और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर खड़ा करने की कोशिशों का विस्‍तार से उल्लेख किया। उन्‍होंने कहा कि राज्‍य सरकार ने पीएम मोदी के सपनों के अनुरूप यूपी में एजुकेशन सिस्‍टम खड़ा करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

दलित की बाइक पर मुस्लिम महिला, तेलंगाना में अगवा कर युवक को टॉर्चर किया: डॉक्यूमेंट्स लेने जा रहे थे अस्पताल

तेलंगाना के निजामाबाद जिले में मुस्लिम भीड़ ने सिर्फ इसीलिए एक हिन्दू युवक की पिटाई कर दी, क्योंकि वो एक मुस्लिम महिला के साथ घूम रहा था। वो जोर-जबरदस्ती से ऐसा नहीं कर रहा था बल्कि हिन्दू युवक व मुस्लिम महिला स्वेच्छा से एक-दूसरे के साथ घूम रहे थे। युवक बाइक चला रहा था और महिला उसके पीछे बैठी थी। उक्त हिन्दू युवक का मुस्लिम गुंडों ने अपहरण भी कर लिया और उसकी पिटाई की।

ये दोनों ही निज़ामाबाद में स्थित IIIT Basara में कार्यरत हैं। 8 सितंबर, 2021 को दोनों एक बाइक से निज़ामाबाद के सरकारी अस्पताल में जा रहे थे। तभी पाँच मुस्लिम युवकों ने उन्हें घेर लिया। ये पाँचों एक कार से जा रहे थे, तभी उन्होंने इन दोनों को बाइक से आते देखा और उन्हें घेर लिया। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें पाँचों मुस्लिम गुंडों को उक्त हिन्दू युवक की पिटाई करते हुए देखा जा सकता है।

इसके बाद उक्त हिन्दू युवक का अपहरण कर लिया गया और उसे एक मुस्लिम बहुल इलाके में ले जाया गया। वहाँ उसे कई घंटों तक न सिर्फ बंधक बना कर रखा गया, बल्कि लगातार पिटाई भी की गई। ये दोनों अस्पताल में कुछ डॉक्युमेंट्स लेने जा रहे थे। दोनों की सैलरी आ गई थी, जिसे उठाने के लिए उन्हें उन डॉक्युमेंट्स की आवश्यकता थी, इसीलिए वो IIIT Basara से सरकारी अस्पताल जा रहे थे।

‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस घटना का वीडियो साझा करते हुए टिप्पणी की, “हिन्दू लड़के के साथ मुस्लिम लड़की को देखते ही बौखलाए कट्टरपंथियों ने हिन्दू युवक को बेरहमी से पीटा। वीडियो वायरल। किन्तु, तेलंगाना पुलिस-प्रशासन, सेक्युलर व जिहादी नेताओं के साथ-साथ ईसाई-वामपंथी गिरोह को साँप सूँघ गया?” सारे आरोपित तेलंगाना के भैंसा शहर के रहने वाले हैं।’

अंत में उक्त मुस्लिम महिला के भाई ने घटनास्थल पर जाकर आरोपितों को समझाया कि उसने ही अपनी बहन को युवक के साथ बाइक से भेजा था, ताकि वो डॉक्युमेंट्स लेकर वापस आए। इसके बाद ही आरोपितों ने युवक को छोड़ा। इस घटना के 3 दिन बाद शनिवार (11 सितंबर, 2021) को ये मामला पुलिस के संज्ञान में आया, जिसके बाद ‘भारतीय दंड संहिता (IPC)’ की धाराओं में FIR दर्ज की गई।

FIR में IPC की धारा-295A (भारत के नागरिकों के किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के विमर्शित और विद्वेषपूर्ण आशय से उस वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान) और धारा-365 (किसी व्यक्ति का गुप्त और अनुचित रूप से सीमित/क़ैद करने के आशय से व्यपहरण या अपहरण करना) के साथ-साथ SC/ST एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया, क्योंकि पीड़ित दलित समुदाय से आता है।

पुलिस ने बताया है कि वो मामले की जाँच कर रही है और अब तक पाँच में से चार आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इन चारों को फ़िलहाल न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस दो अन्य आरोपितों की भी तलाश कर रही है, क्योंकि आशंका है कि पूरे घटनाक्रम में कुल 6 लोग शामिल थे। भैंसा शहर इससे पहले भी दंगा पीड़ित रहा है और कई बार यहाँ हिन्दुओं की संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया जा चुका है।

NEET परीक्षा बिन डॉक्टरी की पढ़ाई: तमिलनाडु के बिल में क्या है, विधानसभा से बिल पारित होते ही छात्रा ने क्यों की सुसाइड

तमिलनाडु में NEET की परीक्षा के विरोध में विधानसभा में सोमवार (13 सितंबर 2021) को एक विधेयक पारित किया गया। ये विधेयक एक 19 साल के नीट अभ्यार्थी (धनुष) द्वारा आत्महत्या कर लेने के बाद आया। इस बिल के पेश होने के बाद भी राज्य में सुसाइड का सिलसिला रुका नहीं। खबर है कि अरियालुर जिले में एक छात्रा ने परीक्षा ठीक न होने के कारण आत्महत्या की।

मेडिकल फील्ड में अपना करियर बनाने का सपना देखने वाले छात्र 12 वीं के बाद से NEET परीक्षा को पास करना अपना सबसे बड़ा लक्ष्य मानते हैं। ये NEET की परीक्षा यानी राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा चिकित्सा क्षेत्र में जाने के लिए उत्तीर्ण करनी अनिवार्य होती है। साल 2013 से इसकी आधिकारिक तौर पर शुरुआत हुई थी। इसी के नतीजे देख छात्रों को केंद्र सरकार द्वारा संचालित तमाम मेडिकल संस्थानों में प्रवेश दिए जाने का प्रावधान किया गया।

अब तमिलनाडु विधानसभा में इसी NEET की परीक्षा पर एक विधेयक पारित किया गया है जिसके बनने से राज्य में NEET एग्जाम को ही आयोजित नहीं किया जाएगा। राज्य के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस की डिग्री के लिए 12वीं के मार्क्स के आधार पर एडमिशन दिया जाएगा। सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स को 7.5% हॉरिजेंटल आरक्षण का लाभ भी दिया जाएगा। 

उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने इस बिल को पेश किया जिसका कॉन्ग्रेस AIADMK, PMK और अन्य दलों ने समर्थन किया। हालाँकि भारतीय जनता पार्टी इस दौरान विरोध में रही और सदन से वॉकआउट कर लिया। विपक्ष के लोग इस दौरान काले बिल्ले लगाए दिखाई पड़े। सबने मौजूदा सरकार के फैसले की आलोचना की।

मालूम हो कि नीट परीक्षा के आधिकारिक तौर पर लागू होने के बाद से इसके नुकसान और फायदे दोनों अक्सर गिनाए जाते रहे हैं। 2013 से पहले के संदर्भ में बात करें तो इस NEET परीक्षा को शुरू करने का उद्देश्य था कि छात्रों के भीतर से 7-8 एग्जाम देने का स्ट्रेस कम किया जा सके। नीट से पहले उनको हर संस्थान के लिए अलग परीक्षा देनी पड़ती थी।

मगर, इस परीक्षा ने ये परेशानी को खत्म किया और एक एग्जाम में अर्जित अंकों के बदौलत तय किया जाने लगा कि किस छात्र को कहाँ एडमिशन मिलेगा। इन नंबरों के आधार पर छात्रों को राज्य के मेडिकल कॉलेज में भी एडमिशन लेने की बात है। ये परीक्षा करीबन 10 क्षेत्रीय भाषाओं में होती है। इसका आयोजन सीबीएसई करवाता है और सिलेबस भी उसी आधार पर होता है। लोग इन बातों को पॉजिटिवली भी लेते हैं और कुछ इसके नकारात्मक पक्ष पर बात करते हैं।

अब इस परीक्षा का विरोध देखें तो पता चलता है कि कई राज्यों के कई स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू नहीं होता लेकिन उन्हें मेडिकल एग्जाम उत्तीर्ण करने की इच्छा होती है। ऐसे में उन्हें अलग से तैयारी करनी पड़ती है। उसके लिए फीस भी देनी पड़ती है। हालाँकि, नीट परीक्षा ने छात्रों की सारी मेहनत एक एग्जाम के लिए केंद्रित कर दी। तमिलनाडु जैसे राज्य में नीट का विरोध शुरुआती दौर में भी हुआ था। कहते हैं कि वहाँ पहले भी 12वीं परीक्षा के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिया जाता था। लेकिन नीट के बाद ये चलन खत्म हो गया और छात्र व अभिभावक इस कदम से नाराज हो गए। कुछ सुसाइड के मामले भी सामने आए और इसी मुद्दे पर डीएमके ने चुनावी वायदा भी किया।

राज्य चुनावों के दौरान  DMK ने नीट (NEET) को ‘रद्द’ करने का वायदा किया था। लेकिन हाल में जब ऐसा नहीं हुआ तो एक छात्र ने आत्महत्या तक कर ली। इस घटना के बाद मौजूदा सरकार के विरोध में आवाजें उठीं। नतीजन विधानसभा में नीट परीक्षा न आयोजित कराने को लेकर बिल पास हो गया। अब सोशल मीडिया पर एक धड़ा इस कदम पर चलने के लिए बाकी राज्यों को भी कह रहा है। वहीं दूसरा धड़ा कह रहा है कि तमिलनाडु को ऐसा फैसला नहीं लेना चाहिए क्योंकि कई बार 12वीं के नंबर ये तय नहीं करते कि छात्र मेडिकल फील्ड में कैसा पर्फॉर्म करेगा।

USAID के तहत अफगानिस्तान को ₹4714192000 की ‘मानवीय’ मदद करेगा अमेरिका, कहा- यह अफगान लोगों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता

अफगानिस्तान में तालिबान की अंतरिम सरकार बनने के एक हफ्ते बाद संयुक्त राज्य अमेरिका ने युद्धग्रस्त देश को आर्थिक मदद पहुँचाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफगानिस्तान के लोगों को मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए 64 मिलियन डॉलर यानी करीब 471 करोड़ रुपए से ज्यादा की मदद की घोषणा की है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय और यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएआईडी) द्वारा संयुक्त राष्ट्र के गैर सरकारी संगठनों और एजेंसियों सहित स्वतंत्र संगठनों को फंड ट्रांसफर किया जाएगा। सोमवार (13 सितंबर 2021) को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में यूएसएआईडी (USAID) ने इस मदद के बारे में बताया है।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि कोरोना वायरस महामारी, असुरक्षा और प्राकृतिक आपदाओं के बाद युद्धग्रस्त देश सबसे खतरनाक समय का सामना कर रहा है। अतंरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अब उनके साथ खड़े होने का समय आ गया है। हमें उनकी सहायता के लिए अनुकूल वातावरण देने की आवश्यकता है। महिला और पुरुष सहायताकर्मियों दोनों को बेहतर माहौल देना होगा ताकि वह स्वतंत्र रूप से काम सकें। यह योगदान अफगान लोगों के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता को सुनिश्चित करता है।

प्रेस विज्ञप्ति

यूएसएआईडी (USAID) ने बताया है कि वह मौजूदा संकट और ‘हाल की असुरक्षा’ से पहले भी अफगानिस्तान में 18 मिलियन (1 करोड़ 80 लाख) से अधिक लोगों का समर्थन कर रहा है। इसमें कहा गया है कि नए स्वीकृत फंड के तहत अफगान नागरिकों को भोजन, दवा, स्वास्थ्य सेवाएँ, सुरक्षित पानी, स्वच्छता और सुरक्षा सहित बहुत जरूरी राहत प्रदान किया जाएगा।

USAID ने इसके लिए डिजास्टर असिस्टेंस रेस्पॉन्स टीम (DART) को भी सक्रिय किया है, जो अमेरिकी सरकार की प्रतिक्रिया का नेतृत्व करने के लिए अफगानिस्तान के बाहर स्थित है। यह टीम, जो अफगानिस्तान के बाहर स्थित है, नए वातावरण में वहाँ के लोगों को सहायता प्रदान करने और कार्यक्रमों को प्रभावी ढ़ग से चलाने के लिए भागीदारों के साथ काम कर रही है

प्रेस विज्ञप्ति में, यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट ने दावा किया है कि अफगानिस्तान में केवल अमेरिका ने अकेले 2021 में करीब 330 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता प्रदान की है। यूएसएआईडी ने कहा कि वह अफगानिस्तान की असहाय और कमजोर आबादी को महत्वपूर्ण सहायता देना और उनकी पीड़ा को कम करना जारी रखेगा।

बता दें कि एक हफ्ते पहले ही अफगानिस्तान में तालिबान ने अपनी अंतरिम सरकार बनाई थी। उसने काउंसिल का हेड व प्रधानमंत्री मुल्ला हसन अखुंद को बनाया है। वह तालिबान की शीर्ष निर्णयकारी संस्था ‘रहबरी शूरा’ का प्रमुख था। वहीं, अब्दुल गनी बरादर को डिप्टी पीएम बनाया गया है। मुल्ला याकूब रक्षा मंत्री और अल्हाज मुल्ला फजल को मिलिट्री चीफ बनाया गया है।

किसान महापंचायत में जिसके कमर में डाला हाथ, वो पूनम पंडित कभी थी सपना चौधरी की बाउंसर

मुजफ्फरनगर में हुए ‘भारतीय किसान यूनियन (BKU)’ के ‘किसान महापंचायत’ में एक महिला किसान नेता के साथ बदसलूकी हुई। इसके बाद पूनम पंडित नाम की ये महिला नेता चर्चा में आईं। कभी हरियाणा के करनाल में नौकरी के लिए गईं पूनम पंडित मशहूर डांसर व मॉडल सपना चौधरी की बाउंसर हुआ करती थीं। सपना चौधरी के कई कार्यक्रमों में उन्हें बाउंसर की वेशभूषा में मंच पर देखा जाता था।

जब पूनम पंडित से पूछा गया कि कई युवा आपसे शादी करने के लिए कतार लगाए खड़े हैं, तो उन्होंने मुस्कुरा कर कहा कि वो शादी भी कर लेंगी। बकौल पूनम पंडित, कोई अगर सीधे आकर उनसे कहे कि उसे शादी करनी है और क्यों करनी है, तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन, उन्होंने चेताया कि वो किसी की हनक बर्दाश्त नहीं कर सकती हैं। उन्होंने कोई निर्देशित नहीं कर सकता कि ‘ये करो, वो करो’।

पूनम पंडित का कहना है कि उन्हें खुले व्यक्तित्व वाला पति चाहिए, जो उन पर किसी तरह की बंदिशें न लगाए। हाँ, पूनम पंडित ये भी कहती हैं कि वो अच्छी तरह से घर संभाल सकती हैं। हालाँकि, वो ये भी कहती हैं कि जब तीनों कृषि कानून वापस हो जाएँगे, वो तभी शादी करेंगी। हाल ही में उनकी कुछ तस्वीरें व वीडियोज वायरल हुए हैं, जिसमें वो मेरठ भाजपा कार्यालय में बैठी हुई दिख रही हैं।

इसके बाद कई ‘किसान आंदोलन’ समर्थक उन्हें भाजपा का एजेंट बताते हुए कह रहे हैं कि उन्होंने ‘किसान महापंचायत’ को बदनाम करने के लिए जानबूझ कर वहाँ अभद्रता के आरोप लगाए। पूनम ने कहा कि सोमवार को मेरठ के मोदीपुरम में खिलाड़ी विनोद के ऑफिस में संयुक्त खेल मोर्चा की बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें भाजपा के पोस्टर एडिट कर के लगा कर वायरल किए जा रहे हैं। BKU का कहना है कि पूनम पंडित उसके संगठन से जुड़ी हुई नहीं हैं।

BKU  के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि वो समय-समय पर गाजीपुर सीमा पर चल रहे प्रदर्शन में आती रही हैं। उन्होंने कहा कि तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं और उस बैठक में पूनम पंडित ने भाजपा विधायक के साथ हिस्सा लिया था। उन्होंने पूनम पंडित पर किसानों की हर बैठक में पहुँच कर हंगामा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी गतिविधियाँ शुरू से ही संदिग्ध रही हैं।बुलंदशहर जिले में सिकंदराबाद क्षेत्र के इस्माइलपुर गाँव की रहने वाली पूनम पंडित के सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोवर्स हैं।

पूनम पंडित का एक इंटरव्यू

हाल ही में पूनम पंडित गजरौली में एक हादसे का शिकार होते-होते बची थीं। गलत दिशा में जा रहे एक ट्रक से उनकी कार का टक्कर होते-होते बचा, लेकिन उनके चालक की सूझबूझ से हादसा टल गया। ट्रक चालक ट्रक छोड़ कर फरार हो गया, जिसके बाद पुलिस ने ट्रक को अपने कब्जे में ले लिया। उस समय वो रिश्तेदारों के साथ मेरठ से लौट रही थीं। जानबूझ कर उन पर ट्रक चढ़ाने की कोशिश के आरोप लगे थे।

हाल ही में राकेश टिकैत सहित ‘भारतीय किसान यूनियन (BKU)’ ने मुजफ्फरनगर में भाजपा के खिलाफ रैली आयोजित की थी, जहाँ से ‘अल्लाहु अकबर’ का भी नारा दिया गया। वहाँ पूनम पंडित को मंच पर चढ़ने से रोक दिया गया। इसके बाद कई मीडिया संस्थानों से बात करते हुए पूनम पंडित ने कुछ गंभीर आरोप लगाए। कभी हरियाणा के करनाल में नौकरी करने वाली पूनम पंडित का कहना है कि कृषि कानूनों की बारीकियों को समझने के बाद वो ‘किसान आंदोलन’ से जुड़ीं।

पूनम पंडित खुद को अंतरराष्ट्रीय शूटर भी बताती हैं। नेपाल में स्वर्ण पदक जीतने का दावा करने वाली पूनम पंडित को इस बात का मलाल है कि एक कलाकार होने के बावजूद सपना चौधरी किसानों के समर्थन में नहीं आईं। उन्होंने कुछ लोगों पर ज़हर फैला कर ‘किसान आंदोलन’ को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यही कारण है कि मुजफ्फरनगर में उनके साथ बदतमीजी की गई थी।

इस सम्बन्ध में इस सम्बन्ध में पूनम पंडित ने बताया, “एक लड़के ने मुझे कोली भर के, अर्थात कमर में हाथ डालकर नीचे खींच लिया। इसके बाद मुझे मंच पर चढ़ने से रोक दिया गया। उसने धमकाया कि मैं किसी भी हालत में तुम्‍हें मंच पर नहीं चढ़ने दूँगा। मेरे साथ धक्‍का-मुक्‍की भी की गई। मैं पसीने से तरबतर हो गई और मेरी तबीयत भी खराब हो गई थी। मैं कुछ समझ ही नहीं पाई की मेरे साथ ये क्या किया जा रहा है।”

पूनम पंडित ने दावा किया कि खुद BKU प्रवक्ता राकेश टिकैत ने उन्हें महापंचायत में आमंत्रित किया था। बाद में राकेश टिकैत ने उन्हें मंच पर भी जगह दी। आखिरी दम तक ‘किसान आंदोलन’ से जुड़ी रहने की बात करते हुए पूनम पंडित ने बताया कि वो अभी 25 साल की हैं और उन्होंने हाल ही में अपनी छोटी बहन की शादी की है। उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं और माँ ने ही बच्चों की परवरिश की है।

हरियाणवी और यूपी के लहजे में भाषण देने वाली पूनम पंडित का कहना है कि कई लोग उन्हें पसंद नहीं करते और उनके साथ पहले भी दुर्व्यवहार हो चुका है। टिकरी सीमा पर चल रहे प्रदर्शन में भी उन्हें रोक दिया गया था। करनाल में किसानों पर लाठीचार्ज का आरोप लगा कर हुए आंदोलन में भी वो सक्रिय रही थीं। हरियाणा को अपने घर जैसा बताने वाली पूनम पंडित ने कहा कि कुछ लोगों की नफरत के कारण वो हार नहीं मान सकतीं