गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर स्पेन से एक वीडियो वायरल हुई है। इस वीडियो में गणपति बप्पा चर्च में जाकर जीसस से मुलाकात करते नजर आ रहे हैं। इसे फिल्म निर्माता विवेक रंजन अग्निहोत्री समेत कई लोगों ने शेयर किया है। सबसे दिलचस्प बात ये है खुद चर्च प्रशासन ने ही हिंदू समुदाय से कहा कि वो गणेश भगवान को चर्च लाएँ ताकि दोनों भगवान एक दूसरे से मिल सकें।
फिल्म निर्माता विवेक अग्रिहोत्री ने 8 सितंबर को ट्वीट कर बताया कि स्पेन में रहने वाले लोग गणपति भगवान की यात्रा निकाल रहे थे। मगर तभी उनको रास्ते के बीच में चर्च दिखा और उन्होंने संबंधित प्रशासन से अनुमति लेकर आगे बढ़ना चाहा। जिसके बाद नेक इच्छा के साथ चर्च ने कहा कि वो भगवान गणेश को अंदर भी लेकर आएँ ताकि दोनों भगवान एक दूसरे से मिल सकें।
In Spain, Indians who organized the Ganesh festival asked the Church if they could take the Ganesh ji from the Church’s way. The church asked them to bring Ganpati Bappa inside the church so that both Gods can meet with each other. (From a friend in Spain) pic.twitter.com/cub9krjnS3
वीडियो में देख सकते हैं कि गणेश भगवान के चर्च में प्रवेश के साथ ही चर्च के लोग एक गाना गाते हैं और पूरा माहौल उत्साह से भर जाता है। शेयर हो रही वीडियो को लेकर विवेक अग्निहोत्री का कहना है कि ये वीडियो उनके किसी दोस्त ने भेजी है।
कुछ लोग इस वीडियो को देख अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं और कुछ भावुक भी हैं। जीवन सिंह बिष्ट कहते हैं, “मुस्लिम ऐसा करने की सोचते भी नहीं। उनके लिए ये हराम है कि किसी भी भगवान की मूर्ति को मस्जिद में लाया जाए।”
Muslims can't even think of this. It's Haram for them to allow other religion Gods in the mosque. https://t.co/anA05ZCHPr
दिनेश अग्रवाल कहते हैं, “नफरत से भरे इस संसार में ऐसा व्यवहार बहुत कम होता है। जो ऐसा कर रहे हैं उन्हें सराहा जाना चाहिए और जागरूकता फैलानी चाहिए।”
In this world full of hatred this jesture & accommodation is rare & must be applauded & awareness be spread fir world to follow https://t.co/AlG35i6J2a
जैन धर्म का प्रमुख पर्व पर्युषण जिसका उद्देश्य न सिर्फ आत्मिक उन्नति है बल्कि कहीं न कहीं खुद को मानवता के उच्च शिखर पर स्थापित करना भी है। कहते हैं आत्मोथान के दसलक्षण अर्थात पर्युषण- क्रोध, मान, माया, लोभ आदि विकारों से मुक्त होते हुए संयमपूर्वक धर्म की आराधना करने का अवसर है। पर्युषण शब्द में ही इसका मूल अर्थ समाहित है परि यानी चारों ओर से, उषण अर्थात धर्म की आराधना।
यह पर्व महावीर स्वामी के मूल सिद्धांत ‘अहिंसा परमो धर्म’ और ‘जिओ और जीने दो’ की राह पर चलना सिखाता है तथा मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। जैन धर्म के दो पंथ श्वेतांबर और दिगंबर समाज में तप का पर्व पर्युषण, भाद्रपद महीने अर्थात भादो (अगस्त-सितम्बर) में मनाए जाते हैं। अंतर बस ये है कि श्वेतांबर के व्रत समाप्त होने के बाद दिगंबर समाज के व्रत प्रारंभ होते हैं।
जैन शास्त्रों के अनुसार- ‘संपिक्खए अप्पगमप्पएणं’ अर्थात आत्मा के द्वारा आत्मा को देखो। यह सभी के जीवन में आनंदमय परिवर्तन का कारण बन सकता है। यह मन, आत्मा या अपने मूल स्वरुप पर पड़ी बुराई रूपी बाहरी कालिमा को धोने का अवसर है। दूसरे शब्दों में कहें तो जो हमने जो तमाम बुराइयाँ, विकृतियाँ इस संसार में कार्य-व्यवहार के दौरान जाने-अनजाने में अर्जित किए हैं, उनका विनाश और विशुद्धि का विकास ही पर्युषण पर्व का मूल ध्येय है।
दस दिन चलने वाले इस पर्व में प्रतिदिन धर्म के एक अंग या लक्षण को जीवन में उतारने का प्रयास किया जाता है। इसलिए इसे दसलक्षण पर्व भी कहा जाता है। श्वेतांबर जहाँ 8 दिन तक पर्युषण पर्व मनाते हैं वहीं दिगंबर के लिए 10 दिन का होता है, जिसे ‘दसलक्षण’ कहते हैं। ये दसलक्षण हैं- क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन एवं ब्रह्मचर्य।
जैन धर्म के जिन दस लक्षणों की आराधना की जाती हैं, वे इस प्रकार हैं:
उत्तम क्षमा : उत्तम क्षमा की आराधना से पर्युषण पर्व की शुरुआत होती है। व्यक्ति के अंदर सहनशीलता का विकास इसका केंद्रीय उद्देश्य है। प्रकृति के रूप के प्रति क्षमाभाव रखना।
उत्तम मार्दव,: चित्त अर्थात मन में मृदुता व व्यवहार में नम्रता का होना। सभी के प्रति विनय का भाव रखना।
उत्तम आर्जव : इसका अर्थ है भाव की शुद्धता। जो सोचना वही कहना। जो कहना, वही करना। छल, कपट या किसी भी प्रकार के चालाकी का त्याग करना। कथनी और करनी में अंतर नहीं होना।
उत्तम शौच : मन में किसी भी तरह का लोभ या लालच न रखना। आसक्तिभाव को घटाना। न्याय और नीति पूर्वक धन अर्जन करना।
उत्तम सत्य : सत्य बोलना। हितकारी बोलना। कम बोलना। प्रिय और अच्छे वचन बोलना।
उत्तम संयम : मन, वचन और शरीर पर नियंत्रण रखना। संयम का पालन करना। मन तथा इंद्रियों को काबू में रखना।
उत्तम तप : मलिन वृत्तियों को दूर करने के लिए तपस्या करना। यहाँ तप का उद्देश्य मन की शुद्धि है।
उत्तम त्याग : सुपात्र को ज्ञान, अभय, आहार और औषधि का दान देना तथा राग-द्वेषादि का त्याग करना।
उत्तम आकिंचन : अपरिग्रह को स्वीकार करना। अर्थात आवश्यकता से अधिक इकठ्ठा नहीं करना।
उत्तम ब्रह्मचर्य : सद्गुणों का अभ्यास करना और पवित्रता का पालन करना। दूसरे अर्थों में चिदानंद आत्मा में लीन होना।
एक तरह से देखा जाए तो आज हम वर्षपर्यन्त भौतिकता की जिस अंधी रेस में दौड़ रहे हैं उसमें हर वर्ष आने वाला 8 या 10 दिन का यह पर्व जिंदगी को थोड़ा ठहरकर देखने, खुद का विश्लेषण करने, अपनी गलतियों के लिए पश्च्याताप करने का अवसर देकर फिर से नए अंदाज और अहोभाव से भरकर जीने का रास्ता दिखलाती है। यह पर्व व्यक्ति की चेतना का परिष्कार कर खुद को जागृत करने, होश पूर्वक जीने में सहायक बनता है। कुलमिलाकर, देखा जाए तो पर्युषण पर्व आमोद-प्रमोद का नहीं है बल्कि तप और त्याग के माध्यम से आत्मिक उन्नति का एक सुनहरा अवसर है।
बता दें कि श्वेतांबर परंपरा के जैन मतावलंबी इस वर्ष 3 से 10 सितंबर तक इस साधना में हैं। आज उनका समापन है तो वहीं दिगंबर परंपरा को मानने वाले इसे आज 10 सितम्बर से शुरू करके 19 सितंबर तक यह महापर्व मनाएँगे। संयम और आत्मशुद्धि के इस पावन पर्व पर भगवान जिनेन्द्र की आराधना, अभिषेक, शांतिधारा, विधान, जप, उपवास, प्रवचन श्रवण आदि किया जाता है। साथ ही कठिन व्रत और तप के नियमों का पालन किया जाता है।
पिछले साल की तरह इस वर्ष भी कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए जैन धर्म के अनुयायी अपने घरों में ही जहाँ तक संभव हो सुबह छह से शाम छह बजे तक (12 घंटे) णमोकार मंत्र का जप करते हैं। अंतगड सूत्र वाचन के साथ ही कई लोग इस दौरान उपवास भी रखते हैं। सूर्यास्त के बाद हल्के भोजन के साथ व्रत खोला जाता है। पर्युषण पर्व पर कुछ लोग सिर्फ शाम के वक्त सरासू पानी (राख मिश्रित पानी) पीते हैं। जैन मंदिरों या स्थानक (मुनियों के ठहरने का स्थान) में जैन मुनि हर दिन एक-एक घंटे का प्रवचन कर अनुयायियों को इस पर्व का महत्व भी बताते हैं।
पर्युषण पर्व के समापन पर ‘विश्व-मैत्री दिवस’ अर्थात संवत्सरी पर्व मनाया जाता है। पर्युषण पर्व के अंतिम दिन जहाँ दिगंबर ‘उत्तम क्षमा’ तो श्वेतांबर ‘मिच्छामि दुक्कड़म्’ कहते हुए लोगों से क्षमा माँगते हैं।
नोट- यह लेख दर्शन सांखला (संस्थापक- RolBol: Rest Of Life Best of Life) ने लिखा है।
वह करीब 40 साल की है। 2011 में उसका निकाह माफिजुद्दीन के साथ हुआ। उसके तीन बच्चे भी हैं। निकाह के बाद से अब तक वह अलग-अलग मर्दों के साथ 25 बार भाग चुकी है। हर बार जब वह घर लौटती है तो शौहर उसे कबूल भी कर लेता है। हालाँकि उसे अफसोस भी है कि उसकी बीवी अब तक अपने कमिटमेंट पर खरी नहीं उतर सकी है।
हैरान करने वाली यह घटना असम के नगाँव की है। महिला ढिंग की रहने वाली है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आखिरी बार जब वह घर से भागी थी तो अपने तीन महीने के बच्चे को पड़ोसी के घर में छोड़ गई थी। हर बार वापस लौटने पर शौहर ने उसे स्वीकार कर लिया। भागने के बाद वह जब भी वापस आती है तो दोबारा ऐसा नहीं करने का वादा करती है, लेकिन बाद में फिर भाग जाती है।
रिपोर्ट के मुताबिक महिला के तीन बच्चे हैं। इनमें सबसे छोटा केवल तीन महीने का है। अभी हाल ही में वो अपने ही गाँव के एक व्यक्ति के साथ भाग गई थी। घर से भागते वक्त उसने अपने तीन महीने के बच्चे को पड़ोसी के घर छोड़ दिया और कहा कि बकरियों के लिए चारा लेने जा रही है। जाते-जाते अपने 22,000 रुपए और कुछ गहने भी साथ ले गई।
महिला के पति के मुताबिक, “आखिरी बार इसी महीने वो 4 सितंबर को भागी थी। 2011 में हमारा निकाह होने के बाद 10 वर्षों में मेरी बीवी लगभग 25 बार दूसरों के साथ भागी है। हर बार परिवार में वापस आने के बाद उसने वादा किया कि वह फिर से ऐसा नहीं करेगी, लेकिन अब तक वह अपना वादा निभाने में विफल रही है।”
माफिजुद्दीन ने आगे कहा, “कभी मेरी बीवी ने दावा किया कि वह अपने रिश्तेदारों के घर गई थी। कभी उसने कहा कि वह अपने बीमार रिश्तेदारों को देखने गई थी। मैं उसे स्वीकार करूँगा, क्योंकि मैं उससे सच्चा प्यार करता हूँ और हमारे तीन छोटे बच्चे भी हैं। अगर मैं अपनी बीवी को स्वीकार नहीं करता तो उनकी देखभाल कौन करेगा? मैंने कानूनी और अन्य परेशानियों से बचने के लिए पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं की।”
महिला के दो नाबालिग बेटे और एक बेटी है। उसके सबसे छोटे बेटे की उम्र महज 3 महीने है और सबसे बड़ी बच्ची की उम्र 6 साल है। उसका दूसरा बेटा 3 साल का है। मुस्लिम बहुल सुदूर ढिंग लहकार गाँव के पड़ोसियों के मुताबिक महिला के गाँव के कई युवकों से अवैध संबंध हैं और वह अलग-अलग प्रेमियों के साथ भाग जाती है। बाद में कुछ हफ्तों या महीनों के बाद वह वापस आ जाती है।
अफगानिस्तान में शरिया कानून लागू होने के बाद महिलाओं के साथ-साथ पत्रकारों की सुरक्षा भी एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। खबर आई है कि मात्र 48 घंटों के भीतर तालिबान ने 24 पत्रकारों को अपनी हिरासत में लिया और कई घंटों बाद उन्हें गिरफ्त से रिहा किया गया।
टोलो न्यूज पर 9 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान डेस्क के हेड रेजा मोइनी ने कहा कि बीते 48 घंटों में 24 पत्रकारों को तालिबान ने हिरासत में लिया और कई घंटों बाद जाकर उन्हें छोड़ा।
इससे पहले बुधवार (8 सितंबर) को एतिलात्रोज़ (Etilaatroz) अखबार ने दावा किया था महिलाओं का प्रोटेस्ट कवर करने पहुँचे उनके 5 रिपोर्टर को तालिबान ने हिरासत में लिया था। इनमें दो को तो इतनी बुरा पीटा गया था कि उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। उनकी तस्वीरें भी सामने आई थी।
8 सितंबर को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक एतिलात्रोज़ (Etilaatroz) से जुड़े दो पत्रकार- तकी दरयाबी (Taqi Daryabi) और नेमातुल्लाह नक़दी (Nematullah Naqdi) को तालिबान ने बेरहमी से मारा था। दोनों पत्रकार महिलाओं का प्रदर्शन कवर करने मौके पर पहुँचे थे। इसी बीच तालिबानियों ने दोनों को पकड़ा और अंधाधुंध पीटा। पत्रकारों की पीठ पर केबल की तार और डंडों के निशान पाए गए थे।
दोनों का इलाज अस्पताल में हुआ था। नक़दी ने हिरासत से रिहा होने के बाद बताया था कि तालिबानियों में से किसी एक ने उनके सिर पर पाँव रखा और जमीन से मसलने लगे। उन्हें लगा कि वे मार दिए जाएँगे। हालाँकि, घंटों बाद जब उन्हें छोड़ा गया तो ये भी कहा गया, “तुम खुशकिस्मत हो तुम्हारा सिर कलम नहीं हुआ।”
इस बीच कुछ रिपोर्टर ऐसे भी हैं जिनका कहना है कि तालिबान ने ऊपर लिमिटेशन लगा दी है। इस बाबत तालिबान ने कहा है कि उन्होंने रिपोर्टर्स के साथ होते व्यवहार मामले में संज्ञान लिया है और आगे ऐसी घटनाएँ रोकने का वो प्रयास कर करेंगे।
तालिबान के सांस्कृतिक आयोग के एक सदस्य अनामुल्ला समांगानी ने कहा, “पिछले दिनों जो पत्रकार शिकार हुए, हमें उसका खेद हैं। हमने उनकी चुनौतियों का समाधान करने की कोशिश की। अगर मुजाहिद्दीनों द्वारा उन्हें किसी सुरक्षित स्थान भेजा जाता है और इस काम को हिरासत में लेना समझते हैं तो हम इस पर भी काम करेंगे और कोशिश करेंगे उनसे सही व्यवहार किया जाए।”
बता दें कि अफगानिस्तान में कुछ दिन पहले टोलो न्यूज के रिपोर्टर जियार याद और उनके कैमरा मैन बेस मजीदी को काबुल में बेरहमी से पीटा गया था। बेस मजीदी उस समय उन लोगों को कैमरे में शूट कर रहे थे जो बेरोजगार थे या मजदूर थे। इसी बीच तालिबानी उनके पास आए उन्हें मारने लगे और उनका कैमरा-फोन सब छीन लिया।
सोशल मीडिया यूट्यूब ने कवि और गीतकार मनोज मुंतशिर के उस वीडियो को अपने प्लेटफॉर्म पर से हटा दिया है, जिसमें उन्होंने मुगल बर्बरता का खुलासा किया और बताया कि कैसे हम भारतीयों ने अपनी विरासत के साथ हुई छेड़छाड़ को आसानी से स्वीकार कर लिया। हालाँकि, इस वीडियो को हटाने के पीछे कॉपीराइट का आरोप लगाया गया है। मनोज मुंतशिर ने इस आरोप को आधारहीन बताया है।
एक यूजर द्वारा इस वीडियो के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “कुछ लोगों को चुभने वाली आवाज को नुकसान पहुँचाना कोई नई प्रथा नहीं है। इसकी पहुँच को कम करने के लिए ‘आप किस वंशज हैं’ के खिलाफ एक निराधार कॉपीराइट दावा किया जाता है। हमने दावे को चुनौती दी है। वीडियो जल्द वापस आना चाहिए। समर्थन के लिए आप सभी को धन्यवाद।”
It’s not a new practise to sabotage a voice which makes some people uncomfortable. A baseless copyright claim is raised against ‘Aap Kiske Vanshaj Hain’ to curtail its reach. We have challenged the claim. The video should be back soon. Thanks to each one of you for the support. https://t.co/bOcPPsCizL
मनोज मुंतशिर के इस ट्वीट पर अन्य लोगों ने भी अपनी प्रतिक्रियाएँ दी है।
हैरानी और परेशानी होती है ये देख के हिंदू आज भी एकजुट नहीं है । आज भी बहुत से लोग सच बोलना और सुन ना पसंद नहीं करते ।वो चाहते हैं की आने वाली नस्ल भी सेक्युलरिज़म की ग़ुलाम रहे और हम “ अकबर दी ग्रेट “ के गुण गाते रहें ।अफ़सोस की आज भी नींद में रहना चाहता है हिंदू ??
एक यूजर ने लिखा, “हैरानी और परेशानी होती है ये देख के हिंदू आज भी एकजुट नहीं है। आज भी बहुत से लोग सच बोलना और सुनना पसंद नहीं करते। वो चाहते हैं कि आने वाली नस्ल भी सेक्युलरिज़म की ग़ुलाम रहे और हम “अकबर दी ग्रेट“ के गुण गाते रहें। अफ़सोस कि आज भी नींद में रहना चाहता है हिंदू।”
Sir it is a part of Dismantling Global Hindutva ,University of Toronto is initiating this program to demoralize hindus around the world . The whole idea is to weaken Modi as PM . If Hindus unite BJp will keep winning in coming elections n India will become Super Power.
एक दूसरे यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, “यह वैश्विक हिंदुत्व को खत्म करने का एक हिस्सा है। टोरंटो विश्वविद्यालय दुनिया भर के हिंदुओं को हतोत्साहित करने के लिए इस कार्यक्रम की शुरुआत कर रहा है। मोदी को पीएम के रूप में कमजोर करने का विचार है। हिंदुओं को एकजुट करने के लिए बीजेपी आने वाले चुनावों में जीतती रहेगी और भारत सुपर पावर बन जाएगा। इसलिए हिंदू आवाजों को दबाया जा रहा है।”
एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “उन गद्दारों में भगदड़ मच गई है, जिनकी परदादियों पर नारियों के साथ मुगल लुटेरों ने रातें रंगीन की थी।” इस ट्वीट में यूजर ने सबा नकवी और आरफा खानम शेरवानी समेत कई लिबरलों को टैग किया है।
You will find such kind of people everywhere who doesn’t like someone who is saying the truth. They search for a way to bend you down. We know that these people have raised a complaint on your video. But, they don’t know that they can’t bend you down.Loveyou @manojmuntashir sir.
रोहित माने लिखते हैं, “आपको हर जगह ऐसे लोग मिल जाएँगे जो सच बोलने वाले को पसंद नहीं करते। वे आपको झुकाने का रास्ता खोजते हैं। हम जानते हैं कि इन लोगों ने आपके वीडियो पर शिकायत की है। लेकिन, वे नहीं जानते कि वे तुम्हें झुका नहीं सकते। लव यू।”
गौरतलब है कि कवि द्वारा शेयर किए गए वीडियो की एक क्लिप में वह यह पूछते हुए दिखाई दे रहे थे कि हम भारतीय अपनी विरासत की विकृति को कैसे स्वीकार कर सकते हैं। उन्होंने पूछा कि हजारों भारतीयों को मारने वाले आक्रमणकारियों और लुटेरों को नायक के रूप में कैसे दिखाया जा सकता है। उन्होंने मुगलों की ‘महिमामंडित डकैतों’ (‘glorified dacoits’) के रूप में आलोचना की। उन्होंने लोगों से अपनी विरासत को पहचानने और बर्बर एवं लुटेरों को नायकों के रूप में महिमामंडित करने से बचने के लिए कहा। मनोज मुंतशिर ने अपने यूट्यूब चैनल पर शेयर किए गए वीडियो में उन्होंने धर्म, जाति और अन्य बाधाओं से परे नायकों को चुनने की बात की।
इस वीडियो के पोस्ट होने के बाद कई लिबरल और कट्टरपंथी नाराज हो गए। सबने मुंतशिर को मुगलों की बर्बरता के ख़िलाफ़ बोलने के लिए सुनाया। इसमें एक आरजे सायमा भी थीं। उन्होंने ट्वीट करते हुए मुंतशिर को ‘कट्टर’ कहा और बताया कि कट्टरता का शिक्षा से कोई लेना-देना नहीं होता। सायमा ने लिखा, “अगर आप साक्षर हैं और कट्टर हैं तो ये बहुत घातक कॉकटेल है।” इसके बाद एक अन्य ट्वीट में सायमा ने बस इतना लिखा, “बात उनसे कीजिए जो सुनने को तैयार हों, न कि उनसे जो सुनाने को आतुर हों।”
पाकिस्तान के संघीय शिक्षा निदेशालय (FDE) ने एक अधिसूचना जारी कर महिला शिक्षकों के जींस और टाइट कपड़े पहनने पर रोक लगा दी है। इसके अलावा पुरुष शिक्षकों को जींस और टी-शर्ट पहनने से रोकने के लिए भी अधिसूचना जारी की है।
डॉन न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संबंध में शिक्षा निदेशक ने स्कूल और कॉलेजों के प्राचार्यों को एक पत्र भेजा है। पत्र में प्राचार्यों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि प्रत्येक स्टाफ अपना पहनावा सही करे जिससे कि समाज में एक अच्छा संदेश जाए। पत्र में नियमित बाल कटवाने, दाढ़ी ट्रिमिंग, नाखून काटने, शॉवर और इत्र के उपयोग जैसे अच्छे उपायों के बारे में भी कहा गया है।
पत्र के मुताबिक, पाकिस्तान में शिक्षकों द्वारा ऑफिस समय के दौरान और आधिकारिक सभाओं एवं बैठकों में भी इन उपायों का पालने करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा महिला टीचर्स को सलवार, कमीज, दुपट्टा शाल पहनना अनिवार्य है। वो हिजाब भी पहन सकती हैं और चप्पल पहनकर स्कूल आने के लिए कहा गया है। वहीं, पुरुष शिक्षकों के भी जींस और टी-शर्ट पहनने पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जा रही है। उन्हें क्लास रूम और लैब्स में टीचिंग गाउन्स या कोट्स पहनना जरूरी होगा।
पाकिस्तान के न्यूज चैनलों पर शिक्षा विभाग के इस फरमान के खिलाफ विरोध की आवाजें उठने लगी हैं। कुछ लोगों का कहना है कि जिस मुल्क का प्रधानमंत्री ही यौन शोषण के लिए महिलाओं के लिबास को दोष देता हो, वहाँ तो इस तरह के फरमान जारी होने ही थे। लेकिन, उन्हें यह बताना चाहिए कि तीन साल की बच्चियों के साथ होने वाले रेप और मर्डर के लिए कौन से नियम लागू होते हैं। कुछ लोग इसे तालिबान का असर भी बता रहे हैं।
वहीं ताजा जानकारी के मुताबिक अफगानिस्तान में तालिबान शासन के गठन के बाद वहाँ पर महिलाओं की सरकार में भागीदारी को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। हालाँकि स्थानीय मीडिया ने तालिबान प्रवक्ता के हवाले से दावा किया है कि किसी भी महिला को वहाँ पर मंत्री नहीं बनाया जाएगा। उन्हें सिर्फ बच्चे पैदा करना चाहिए। स्थानीय मीडिया टोलो न्यूज ने तालिबान के प्रवक्ता के हवाले से ट्वीट कर कहा, “एक महिला मंत्री नहीं हो सकती, यह ऐसा है जैसे आप उसके गले में कुछ डालते हैं जिसे वह सँभाल नहीं सकती। एक महिला के लिए कैबिनेट में होना जरूरी नहीं है, उन्हें बच्चे पैदा करना चाहिए। महिला प्रदर्शनकारी पूरे अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं।”
उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान में तालिबान शासन के आने के बाद से ही आम लोगों में काफी दहशत है। पिछले कुछ दिनों से काबुल समेत कई अन्य शहरों में तालिबान की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। खास बात यह है कि इन प्रदर्शनों की अगुवाई महिलाएँ कर रही हैं। लेकिन तालिबान को ये प्रदर्शन रास नहीं आ रहा है।
यही वजह है कि वहाँ प्रदर्शन कर रही महिलाओं, आम लोगों और उन प्रदर्शनों को कवर कर रहे पत्रकारों पर तालिबान का गुस्सा बरस पड़ा है। तालिबान द्वारा अंतरिम सरकार के ऐलान करने के बाद काबुल में अलग-अलग जगहों पर महिलाओं द्वारा प्रदर्शन किया गया और सरकार में हिस्सेदारी की माँग की गई। सोशल मीडिया में कई ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहाँ तालिबान के लड़ाकों द्वारा महिलाओं को पीटा जा रहा है। तालिबान ने महिलाओं और पत्रकारों को डंडों और रायफल की बट से मारा। साथ ही कई पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया और उन्हें बुरी तरह से पीटा गया।
अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता व सांसद राहुल गाँधी गुरुवार (सितंबर 9, 2021) से जम्मू के दो दिवसीय दौरे पर पहुँच चुके हैं। वह जम्मू पहुँच कर सबसे पहले माँ वैष्णो के दर्शन के लिए रवाना हुए। उनके यात्रा मार्ग पर जाने का एक वीडियो वायरल है, जहाँ माता वैष्णो देवी के जयकारों की गूँज है।
राहुल गाँधी के इस दौरे को लेकर सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “मन्दिर नहीं बनाएँगे लेकिन हिन्दू लोग को उल्लू बनाने के लिए चुनाव के नजदीक आने पर मन्दिर जाकर नाटक बाजी करेंगे। कौवा दूध से नहाएगा तो भी सफेद नहीं बनने वाला।”
मन्दिर नहीं बनाएंगे लेकिन हिन्दू लोग को उलु बनाने के लिए election के नजदीक आने पर मन्दिर जाके नाटक बाजी करेंगे।
लेहरीलाल नाम के यूजर ने लिखा, “मोदी और योगी जी ने सब कुछ बदलकर रख दिया है। राहुल गाँधी माता वैष्णव देवी के दर्शन को गए हैं, प्रियंका गाँधी अयोध्या जा रही हैं, मायावती अपने मंच से हर हर महादेव का नारा लगा रही हैं और टीपू सुल्तान के चहक अखिलेश यादव मथुरा में मंदिर बनाने की घोषणा कर रहे हैं। हमारा वोट सार्थक हुआ।”
मोदी और योगी जी ने सबकुछ बदलकर रख दिया है.. राहुल गांधी माता वैष्णव देवी के दर्शन को गए हैं, प्रियंका गांधी अयोध्या जा रही हैं, मायावती अपने मंच से हर हर महादेव का नारा लगा रही हैं और टीपू सुल्तान के चहक अखिलेश यादव मथुरा में मंदिर बनाने की घोषणा कर रहे हैं हमारा वोट सार्थक हुआ
एक यूजर ने लिखा, “पहले जो सिर्फ मस्जिद-मजारों पर ही नजर आते थे उन्हें अब हर चुनाव से पहले हिंदूओं को रिझाने के लिए मंदिर-मंदिर घूमना पड़ रहा है। मोदी है तो मुमकिन है।”
पहले जो सिर्फ मशीद – मजारों पर ही नजर आते थे उन्हें अब हर चुनाव से पहले हिंदूओं को रिझाने के लिए मंदीर मंदीर घूमना पड़ रहा है। #मोदी_है_तो_मुमकिन_है#BJP4UP
एक अन्य ने लिखा, “मंदिर में लोग लड़कियाँ छेड़ने जाते है यह बयान देने वाला जनेऊ धारी फर्जी ब्राह्मण आज मंदिर घूम रहा है। यह आदमी स्वार्थ के लिए कोई भी रोल कर लेता है।” गौतलब है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी भी कह चुके हैं कि मंदिर जाने वाले लोग ही छेड़खानी करते हैं।
राहुल जी कहते थे मंदिरों मैं तो लोग लड़की छेड़ने जाते है अब क्या राहुल जी आप ने भी लड़की छेड़ी या नहीं
अरुण सिंह ने लिखा, “आखिर राहुल जी के किसी भी कदम को कोई भी सीरियसली क्यो नहीं लेता, इतना तो बढिया नाटक कर रहे है मंदिर जाने का लेकिन फिर जनता इनको एक समझदार नेता नहीं मानती। बंगाल के पंडाल पर, यूपी के काँवड़ पर, जगन्ननाथ पुरी की यात्रा पर भी अगर बोलते तो शायद सच लगता।”
आखिर राहुलजी के किसी भी कदम को कोई भी सीरियसली क्यो नहीं लेता, इतना तो बढिया नाटक कर रहे है मंदिर जाने का लेकिन फिर जनता इनको एक समझदार नेता नहीं मानती। बंगाल के पंडाल पर, उपी के कांवड़ पर, जगन्ननाथ पुरी की यात्रा पर भी अगर बोलते तो शायद सच लगता।
उल्लेखनीय है कि चुनाव के समय में कॉन्ग्रेस पार्टी का हिंदू धर्म के प्रति आस्था उमड़-उमड़ कर सामने आती रहती है। वे विभिन्न मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर मत्था टेकते नजर आते हैं। पिछले कई वर्षों में इस तरह के शॉर्टकट ही कॉन्ग्रेस की वर्तमान राजनीतिक सोच को परिभाषित करते रहे हैं।
पिछले दिनों केरल की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री शैलजा टीचर ने कॉन्ग्रेस पार्टी पर ‘सॉफ्ट हिन्दुत्व’ के जरिए देश को बर्बाद करने का आरोप लगाया। केके शैलजा ने इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी के समय को याद किया और उसी के आधार पर राहुल गाँधी पर भी आरोप लगाया।
सीपीआईएम नेता शैलजा टीचर ने कहा कि गाँधी मंदिर-मंदिर घूमते हैं, यहाँ तक कि शिव मंदिर भी। जबकि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि भारत एक ‘सेक्युलर’ देश है। शैलजा ने इसे नौटंकी बताया और केरल की प्रदेश कॉन्ग्रेस से यह अपेक्षा की कि वह सेक्युलर केरल बनाए रखने के लिए यह सब नौटंकी नहीं करेगी।
उत्तर प्रदेश के मेरठ में सरधना थाना क्षेत्र के मोहल्ला इस्लामाबाद में एक युवक ने अपनी बहन के प्रेम संबंधों से नाराज होने के चलते देर रात अपनी बहन की सोते समय गोली मारकर हत्या कर दी। युवक ने बुधवार (सितंबर 8, 2021) देर रात ऑनर किलिंग की वारदात को अंजाम दिया। भाई ने हत्या को अंजाम देने के बाद कहा कि आज के बाद परिवार की बदनामी नहीं होगी। हत्या के बाद आरोपित तमंचा लेकर घर से भाग निकला, जिसको पुलिस ने कुछ ही देर बाद गिरफ्तार कर लिया। हत्या की सूचना पर सरधना पुलिस मौके पर पहुँच कर शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
प्रेमी के साथ बहन को देख लिया था
सरधना के इस्लामाबाद में अपने मामा के पास रह रही सिमरन (पिता- सलीम) का अपने पड़ोस के रहने वाले युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। लड़की के परिवार वाले इसका विरोध करते थे, लेकिन लड़की अपने प्रेमी से शादी करना चाहती थी। तीन माह पहले जब परिवार के लोगों को पता चला तो परिजनों ने लड़की के घर से निकलने पर रोक लगा दी। उसके बाद भी लड़की मोबाइल से अपने प्रेमी से चोरी छिपे बात करती थी। 3 दिन पहले लड़की के छोटे भाई आरिफ ने अपनी बहन सिमरन को प्रेमी के साथ देख लिया था। कुछ मीडिया रिपोर्ट में लड़की के भाई का नाम आरिश बताया गया है।
सोते वक्त बहन को गोली मार दी
बुधवार की देर रात ढाई बजे जब सिमरन गहरी नींद में सोई थी, तभी उसका छोटा भाई आरिफ तमंचा लेकर कमरे में पहुँचा और गोली मारकर हत्या कर दी। युवती की मौके पर ही मौत हो गई। गोली चलने की आवाज सुनकर परिवार व आसपास के लोग भी जाग गए। केशव मिश्रा एसपी देहात मेरठ ने बताया कि पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
बहन की वजह से लोग करते थे कमेंट
पूछताछ में पता चला है कि आरोपित आरिफ का कहना था कि सिमरन की वजह से उसे लड़के कमेंट करते थे। वो इससे ज्यादा बदनामी नहीं झेल सकता। जिसके बाद आरिफ ने यह भी कहा था कि वो सिमरन को जिंदा नहीं छोड़ेगा। बहन की हत्या करने के बाद आरिफ को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले में कार्रवाई करने में जुटी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता करने का सम्मान देने के लिए संगठन से जुड़े देशों को धन्यवाद दिया। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले कई दशकों में ब्रिक्स ने शानदार काम किए हैं। इस साल ब्रिक्स में कई नई चीजें हुईं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की 15वीं वर्षगाँठ पर इस समिट की अध्यक्षता करना उनके और भारत के लिए खुशी की बात है। आज की इस बैठक के लिए हमारे पास विस्तृत एजेंडा है।
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले डेढ़ दशक में ब्रिक्स ने कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं। आज हम विश्व की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक असरदार आवाज हैं। विकासशील देशों की प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए भी यह मंच उपयोगी रहा है।
पिछले डेढ़ दशक में ब्रिक्स ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं।
आज हम विश्व की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक प्रभावकारी आवाज़ है।
विकासशील देशों की प्राथमिकताओं पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए भी यह मंच उपयोगी रहा है: PM @narendramodi
प्रधानमंत्री ने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना है कि ब्रिक्स अगले 15 वर्षों में और परिणामदायी हो। भारत ने अपनी अध्यक्षता के लिए जो थीम चुनी है, वह यही प्राथमिकता दर्शाती है। यह थीम है ब्रिक्स@15: इंट्रा-ब्रिक्स कोऑपरेशन फॉर कंटीन्यूटी, कॉन्सॉलिडेशन एंड कंसेन्सस।”
हमें यह सुनिश्चित करना है कि ब्रिक्स अगले 15 वर्षों में और परिणामदायी हो।
भारत ने अपनी अध्यक्षता के लिए जो थीम चुना है, वह यही प्राथमिकता दर्शाता है – “BRICS at 15: Intra-BRICS Cooperation for Continuity, Consolidation and Consensus”: PM @narendramodi
पीएम मोदी ने आगे कहा कि यह भी पहली बार हुआ कि BRICS ने “Multilateral systems की मजबूती और सुधार” पर एक साझा स्टैंड लिया है। हमने ब्रिक्स “Counter Terrorism Action Plan” भी अडॉप्ट किया है।
यह भी पहली बार हुआ कि BRICS ने “Multilateral systems की मजबूती और सुधार” पर एक साझा position ली।
हमने ब्रिक्स “Counter Terrorism Action Plan” भी अडॉप्ट किया है: PM @narendramodi
उन्होंने कहा कि हाल ही में पहले ब्रिक्स डिजिटल हेल्थ सम्मेलन का आयोजन हुआ। तकनीक की मदद से स्वास्थ्य तक पहुँच बढ़ाने के लिए यह एक नया कदम है। नवंबर में हमारे जल संसाधन मंत्री ब्रिक्स फॉर्मेट में पहली बार मिलेंगे। इस बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्राध्यक्षों ने बैठक की।
हाल ही में पहले “ब्रिक्स डिजिटल हेल्थ सम्मेलन” का आयोजन हुआ। Technology की मदद से health access बढ़ाने के लिए यह एक innovative कदम है।
नवंबर में हमारे जल संसाधन मंत्री ब्रिक्स फॉर्मेट में पहली बार मिलेंगे: PM @narendramodi
बता दें कि यह दूसरी बार है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने 2016 में गोवा में शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की थी। जबकि, यह तीसरी बार है जब भारत 2012 और 2016 के बाद ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इस बैठक का आयोजन ऐसे समय हुआ जब अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद नई अंतरिम सरकार में कई ऐसे नाम हैं शामिल जो मोस्ट वॉन्टेड की सूची में हैं।
इस बैठक में ब्राजील के राष्ट्रपति जाइर बोलसोनारो, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा उपस्थित हैं। डिजिटल माध्यम से हो रही इस बैठक में अफगानिस्तान के ताजा हालात पर चर्चा की संभावना जताई जा रही है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुरुवार (9 सितंबर 2021) को ज्ञानवापी-काशी विश्वनाथ मंदिर भूमि विवाद मामले में वाराणसी की निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उसने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को उत्तर प्रदेश में काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का व्यापक भौतिक सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया था।
दरअसल, इस मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड और मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने इलाहाबाद HC में याचिका दायर कर पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 के आदेश की अनदेखी का आरोप लगाया था। 1991 के पूजा स्थल अधिनियम के अनुसार, 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी पूजा स्थल को दूसरे मंदिर में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। इसी के आधार पर एएसआई के सर्वे को चुनौती दी गई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि इस विवाद से जुड़ा एक मामला पहले से ही जब हाईकोर्ट में पेंडिंग है तो वाराणसी की अदालत को इस मामले में फैसला सुनाने का कोई अधिकार नहीं है। मामले में अपना फैसला सुनाते हुए जस्टिस प्रकाश पाडिया की सिंगल बेंच ने कहा कि यह फैसला गलत है औऱ इसे रद्द कर देना चाहिए।
मुस्लिम संगठनों की ओर से वरिष्ठ वकील एसएफए नकवी ने इसको लोवर कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा था, “उच्च न्यायालय ने मुकदमे की स्थिरता के मुद्दे पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। निचली अदालत को तब तक वाद में कोई आदेश पारित नहीं करना चाहिए था जब तक कि उच्च न्यायालय द्वारा मुकदमे की स्थिरता के मुद्दे पर फैसला नहीं किया जाता है।”
मंदिर पक्षकारों का कहना है कि मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर को तोड़कर उसके अवशेषों पर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कराया था जिसकी वास्तविकता जानने के लिए मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण कराना जरूरी है। मंदिर पक्ष का दावा है कि मस्जिद परिसर की खुदाई के बाद मंदिर के अवशेषों पर तामीर मस्जिद के सबूत अवश्य मिलेंगें। इसलिए एएसआई सर्वेक्षण किया जाना बेहद जरूरी है। मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण से यह साफ हो सकेगा कि मस्जिद जिस जगह तामीर हुई है वह जमीन मंदिर को तोड़कर बनाई गई है या नहीं।
गौरतलब है कि वाराणसी की अदालत में ज्ञानवापी मस्जिद की उस विवादित भूमि को लेकर याचिका दायर की गई थी जिसको लेकर दावा किया गया था कि मुगल आक्रान्ता औरंगजेब ने 2000 साल पुराने काशी विश्वनाथ मंदिर के एक हिस्से को ज्ञानवापी मस्जिद बनाने के लिए सन 1669 में ढहा दिया था।
उल्लेखनीय है कि वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातात्विक सर्वेक्षण करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपना फैसला इसी साल अप्रैल महीने में सुनाया था। कोर्ट ने मस्जिद के एएसआई सर्वे का आदेश देते हुए कहा था कि इसका सारा खर्च सरकार को वहन करना होगा।