बॉम्बे हाई कोर्ट ने कोल्हापुर जिले के विशालगढ़ किले में कुर्बानी देने की अनुमति दे दी है। यह कुर्बानी विवादित दरगाह पर दी जाएगी। यह फैसला बकरीद और इस दरगाह पर होने वालेउर्स के मद्देनजर दिया गया है। इस किले के अंदर हिन्दू लगातार मुस्लिम अतिक्रमण की बात दोहराते रहे हैं।
मंगलवार (03 जून, 2025) को कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस डॉ नीला गोखले और फिरदोस पूनीवाला की बेंच ने यह आदेश दिया। बेंच ने कहा, “ध्यान दिया जाए कि 14 जून 2024 को जारी एक आदेश में दरगाह के पास ‘एक बंद और निजी क्षेत्र’ में पशुओं और पक्षियों की कुर्बानी देने की अनुमति दी गई थी। न कि किसी ‘खुले या सार्वजनिक स्थान’ पर।”
कोर्ट ने कहा कि पिछले साल की तरह का आदेश इस साल भी लागू होगा। इस साल भी 07 जून को बकरीद के त्योहार और 08 जून से 12 जून तक उर्स पर किले के भीतर पशुओं की कुर्बानी दी जा सकेगी। कोर्ट ने कहा कि किले के बाहर सार्वजनिक स्थान पर कुर्बानी नहीं होनी चाहिए।
दरगाह ने सरकार के आदेश को दी थी चुनौती
बता दें कि साल 2023 में विशालगढ़ के हजरत पीर मलिक रेहान मीरा साहेब दरगाह ट्रस्ट ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। ट्रस्ट ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों पुरातत्व निदेशालय, कोल्हापुर पुलिस अधीक्षक और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा दरगाह परिसर में पशुओं की कुर्बानी पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती दी थी।
प्रशासन ने कहा था कि विशालगढ़ किला एक संरक्षित स्मारक है और महाराष्ट्र प्राचीन स्मारक और पुरातत्व अधिनियम 1962 के मुताबिक ऐसे स्थलों पर खाना पकाना और खाना परोसना भी प्रतिबंधित है। प्रशासन ने जानवरों की कुर्बानी को इस नियम का उल्लंघन बताया था।
वहीं मुस्लिम इसका विरोध कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि कुर्बानी का स्थान दरगाह परिसर के अंदर नहीं, बल्कि उससे लगभग 1.4 किलोमीटर दूर एक निजी भूमि पर है।
छत्रपति शिवाजी महाराज का है किला, बनाई अवैध दरगाह
विशालगढ़ किला लगभग 1000 साल पुराना है। यह किला छत्रपति शिवाजी महाराज के वीरतापूर्ण जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है। किले में मुस्लिम समुदाय ने अवैध अतिक्रमण कर लिए हैं। वहीं किले के भीतर मंदिर जीर्ण शीर्ण अवस्था में छोड़ दिया गया है। वर्तमान में यहाँ 20 से 24 हिन्दू मंदिर है, लेकिन यह काफी खराब हालत में हैं।
आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, विशालगढ़ किले के भीतर 156 ऐसे ढाँचे हैं, जिनको अवैध रूप से बनाया गया है। इनमें से 100 से अधिक मुस्लिम समुदाय के हैं। यहाँ लोहे की शीट लगाकर अतिक्रमण किया गया है।
“यहाँ किसी ने गोली नहीं चलाई। वह (सिपाही सौरभ देशवाल) पुलिस की गोली से मरा है और पुलिस अब हमें परेशान कर रही है। हम क्या तुम्हें बदमाश लगते हैं?” ये शब्द हैं उस गाँव के मुस्लिमों के, जहाँ हिस्ट्रीशीटर कादिर को पकड़ने गई SOG के सिपाही सौरभ देशवाल की गुंडों ने घेरकर हत्या की थी।
यह घटना 25 मई, 2025 को गाजियाबाद के नाहल गाँव में हुई थी। ऑपइंडिया इस घटना के बाद 28 मई, 2025 को इस नाहल गाँव पहुँची। यहाँ हमें कादिर के कुछ पड़ोसी मिले, जिनसे बातचीत हुई। कादिर की चार मंजिला कोठी से करीब 300 मीटर की दूरी में सभी मकानों पर ताले लगे हुए हैं।
यहाँ रहने वाले लोग अपने-अपने रिश्तेदारों या फिर जान पहचान वालों के यहाँ जा चुके हैं। भले ही कादिर के कुछ पड़ोसी हमसे पुलिस प्रशासन की कार्रवाई में मदद करने की बात कैमरे पर कर रहे थे। लेकिन हकीकत यह है कि पूरे बाजार में सन्नाटा पसरा हुआ है।
कादिर की कोठी से करीब 200 मीटर पहले हमारी मुलाकात यहाँ मौजूद मस्जिद के इमाम से हुई। घटना से खुद को अनजान बताते हुए इमाम मोहम्मद फकरूद्दीन ने बताया, “मैं बाहर का रहने वाला हूँ और यहाँ करीब डेढ़ वर्ष से मस्जिद में रहकर नमाज पढ़ाता हूँ लेकिन घटना के बाद से लोग मस्जिद नहीं आ रहे हैं।” इमाम ने कहा कि जो हुआ है गलत हुआ है।
नाहल गाँव की 90% आबादी मुस्लिम
ऑपइंडिया इसके बाद हिस्ट्रीशीटर कादिर के चार मंजिला कोठी के बाहर पहुँचा। हमें दिखा कि यहाँ भारी पुलिसबल तैनात है। कुछ पुलिसवाले आराम कर रहे थे तो कुछ पुलिस वाले गश्त कर रहे थे। कुछ कोठी के सामने कुर्सियों पर बैठे हुए थे।
इस बीच कोठी के सामने मिले एक बुजुर्ग फतेह मोहम्मद ने बताया कि वह बाजार में छोले भटूरे की दुकान लगाते हैं, लेकिन जब से यह घटना हुई है तब से यह दुकान बंद है। कादिर के बारे में पूछने पर बोले कि हम कादिर को नहीं जानते लेकिन इस घटना में हम किसी को दोषी नहीं मानते।
फ़तेह मोहम्मद ने कहा कि अब पुलिस परेशान कर रही है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस बेगुनाहों को घरों से उठा रही है। फ़तेह मोहम्मद ने बताया कि गाँव में 90% मुस्लिम एवं 10% गैर मुस्लिम आबादी हैं। यहीं हमारी टीम को टोपी लगाए एक मुस्लिम युवा मिला। वह बाइक पर बैठा हुआ था।
उसने भी फ़तेह मोहम्मद का दावा ही दोहराया। उसने कादिर को पहचानने से इनकार किया। ऑपइंडिया को यहीं पर इरफान नाम के बुजुर्ग मिले। उन्होंने बताया कि कादिर उनका भतीजा है और उसने सात दिन पहले ही जान से मारने की धमकी दी थी।
रिपोर्टर के सवाल से भड़का कादिर का पड़ोसी दुकानदार
ऑपइंडिया को कादिर का पड़ोसी दुकानदार भी मिला। उसने घटना के बारे में जानने से इनकार किया लेकिन पुलिस पर आरोप जड़ दिए। उसने दावा किया कि सौरभ देशवाल पुलिसकी गोली से मरा है। उसने कहा, “सौरभ पुलिस की गोली से मरा है हम क्या रात को गोली लेकर बैठे थे?”
In Ghaziabad, locals from the Muslim community are spreading rumours over Constable Saurabh Deshwal's murder. When @Keshavmalan93 questioned them, some turned aggressive and even got physical. pic.twitter.com/Li9sHgQWs7
उसने हमारी टीम से बदतमीजी भी की। दुकानदार ने सवालों से भड़कते हुए हमें धक्का दिया और हिंसक होने का प्रयास किया। वहीं इसके बाद हमने 15-20 लोगों से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन अधिकांश लोग खुद को घटना से अंजान बताते हुए आरोपित कादिर के खिलाफ कुछ भी बोलने से बचते रहे।
सौरभ देशवाल के गाँव में पसरा सन्नाटा
नाहल, गाजियाबाद से निकलने के बाद ऑपइंडिया की टीम शामली के बधेव गाँव में पहुँची। यह सौरभ देशवाल का गाँव है। गाँव में चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ है दोपहर के समय सुनसान पड़ी गाँव की गलियाँ सौरभ के बलिदान का शोक मनाते दिखीं।
गाँव का हर व्यक्ति इस हत्या से स्तब्ध था। यहाँ हम गाँव के बीचों बीच बने बने सौरभ देशवाल के घर पहुँचे। 3 मंजिला अधूरे से मकान के बरामदे में 10-15 लोग गमगीन बैठे हुए थे। उनके बीच एक पुराना सा कुर्ता पहने(जिस पर दाग लगे है) पिता उत्तम कुमार बैठे हुए थे।
उत्तम कुमार की आँखों में आँसू सूख चुके हैं। गहरे गम में डूबे पिता को देख लगता है कि उन्हें यकीन ही नहीं कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। पूछने पर कहते हैं वह बहुत बहादुर था। उन्हें योगी सरकार से न्याय उम्मीद है।
बगल में चारपाई पर बैठे सौरभ की बुआ के लड़के की आँखों में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था। वह कहते हैं कि सौरभ बेहद मिलनसार और बहादुर था। सौरभ देशवाल के परिजनों ने बताया कि वह अपना समय गायों की सेवा में लगाते थे। यहीं बैठे एक और रिश्तेदार कादिर का हश्र विकास दुबे और अतीक अहमद जैसा चाहते हैं।
घर के अंदर बैठी सौरभ की माँ और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। सौरभ का खुद का परिवार बसने से पहले उजड़ गया। उनकी पत्नी बदहवास थीं। सौरभ का विवाह 2020 में ही हुआ था। उनकी पत्नी और माँ के गले में बात करने के लिए जान नहीं थी। ऑपइंडिया ने उनसे बात नहीं की।
सौरभ के घर से वापस आते हुए एक महिला ने कहा कि सभी आरोपितों का एनकाउंटर होना चाहिए और कादिर के घर पर बुलडोजर भी चलना चाहिए। आप ऑपइंडिया की यह ग्राउंड रिपोर्ट नीचे लगे लिंक पर देख सकते हैं।
गौरतलब है कि इस मामले में पुलिस कादिर, उसके भाई आदिल समेत कई अपराधियों को पकड़ चुकी है। सौरभ देशवाल के परिवार को ₹50 लाख दिए जाने की घोषणा की जा चुकी है। हालाँकि, उनका परिवार कहता है कि उन्हें उनका बेटा वापस चाहिए।
विश्व पर्यावरण दिवस से दो दिन पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार (3 जून 2025) को दिल्ली के प्रदूषण को खत्म करने के लिहाज से एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन प्लान-2025 जारी किया है। इसके तहत दिल्ली में 5 जून 2025 से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ से अभियान चलाया जाएगा। इसमें साल भर में पूरी दिल्ली में 70 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है।
मीडिया ब्रीफिंग में CM रेखा ने कहा, “पर्यावरण दिवस नजदीक है। दिल्ली में वायु प्रदूषण हम सबसे जुड़ा हुए विषय है। एयर पॉल्यूशन का दंश वर्षों से हम सबको डस रहा है। दिल्ली वासियों को अनेक प्रकार की तकलीफें कई वर्षों से झेलनी पड़ रही हैं। हम सबका एक ही सपना है- क्लीन दिल्ली, ग्रीन दिल्ली, हेल्दी दिल्ली।”
#WATCH | Delhi CM Rekha Gupta says, "Environment Day is very close and air pollution in Delhi is a matter related to all of us. For years, we have been suffering from air pollution. Air pollution has troubled the people of Delhi for years. We have a dream – Clean Delhi, Green… https://t.co/8EHjAq1msMpic.twitter.com/1wFNjK4zkx
सीएम ने आगे कहा, ” हमारे पर्यावरण विभाग और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने अन्य विभागों के साथ मिलकर एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन प्लान-2025 तैयार किया है।”
गौरतलब है कि 31 मई 2025 को सीएम रेखा गुप्ता ने अपनी सरकार के 100 दिन पूरे होने पर वर्क बुक जारी की थी। इसमें अब तक स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़कें, रोशनी और गरीबों की भलाई से जुड़ी योजनाओं पर जो काम किया है उसकी जानकारी दी गई है।
यातायात पर विशेष ध्यान
मिटिगेशन प्लान के तहत दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए अलग-अलग पहलुओं पर काम किया जाएगा। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में ट्रैफिक जाम की समस्या सबसे प्रमुख है। इसके लिए 250 प्रमुख सड़कों को चिन्हित किया गया है।
इन सड़कों पर यातायात पुलिस और अन्य विभागों के साथ जाम की समस्या को हल करने के लिए योजना बन रही है। कुछ मुख्य चौराहों और जंक्शन्स पर ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम सुधारा जाएगा ताकि वाहनों की आवाजाही निर्बाधित रहे और प्रदूषण कम हो।
इसके अलावा मेट्रो स्टेशनों पर 2300 इलेक्ट्रिक ऑटो तैनात किए जाएँगे। ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए 200 नई इलेक्ट्रॉनिक बसें शुरू की जाएँगी। इसके साथ ही 1 नवंबर से BS-4 वाहनों, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को ही दिल्ली में प्रवेश मिलेगा। इसके अलावा प्रदूषण बढ़ाने वाले 16 हॉटस्पॉट को चिह्नित किया जाएगा।
इस योजना के तहत जिन जगहों पर 500 वर्ग मीटर से अधिक हो, उन्हें DPCC (दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति) के पोर्टल पर रेजिस्ट्रेशन भी करवाना पड़ेगा।
हरियाली बढ़ाने का लक्ष्य
सीएम रेखा का कहना है कि हरियाली को बढ़ाने से ही प्रदूषण की समस्या का हल निकल सकता है। इसके लिए ही 5 जून से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को शुरू किया जाएगा। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभियान है, जिसके जरिए माँओं के सम्मान को पर्यावरण जिम्मेदारियों के सात जोड़ना ही मुख्य ध्येय है। इसके तहत पूरी दिल्ली में साल भर में 70 लाख पेड़ लगाए जाएँगे।
वायु की गुणवत्ता को परखने के लिए 6 नए एयर मॉनिटरिंग स्टेशन बनाए जाएँगे। साथ ही 4 वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स का निर्माण किया जाएगा। ग्रीन एनर्जी के बुनियादी ढाँचें को मजबूत करने के लिए 18,000 पब्लिक और सेमी-पब्लिक EV चार्जिंग स्टेशन तैयार होंगे।
इन सबके साथ-साथ दिल्ली को नवाचार में आगे बढ़ाने के लिए भी मिटिगेशन प्लान में बिंदु शामिल किए गए हैं। इसके तहत दिल्ली सरकार IIT कानपुर का साथ कृत्रिम बारिश करवाने के लिए क्लाउड सीडिंग का MOU करेगी। प्रदूषण की समस्या खत्म करने के लिए स्टार्टअप के जरिए युवा विचारों को आमंत्रित किया जाएगा। साथ ही प्रदूषण के अलग-अलग पहलुओं पर वैज्ञानिक संस्थानों के साथ मिलकर शोध किया जाएगा।
वायु प्रदूषण कम करने के लिहाज से मिटिगेशन प्लान में नई मशीनों को लगाने का भी प्रावधान शामिल किया गया है। इसके तहत 140 एंटी-स्मॉग गन, 1000 वाटर स्प्रिंकलर और सड़कों की सफाई के लिए 70 नई क्लीनिंग मशीनें आएँगी। 3000 वर्ग मीटर से बड़ी वाणिज्यिक इमारतों के लिए एंटी स्मॉग-गन को अनिवार्य किया जाएगा।
भारत में लगातार बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचान कर वापस भेजने की प्रक्रिया जारी है। देश के अलग-अलग हिस्सों से घुसपैठिए पकड़ कर ‘ऑपरेशन पुश-बैक’ में वापस भेजे जा रहे हैं। इसी बीच सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने बताया है कि उन्होंने पिछले तीन सालों से लगातार 5,000 घुसपैठिए सीमा पर पकड़े हैं। यह चोरी-छिपे भारत में घुसने की कोशिश कर रहे थे।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, BSF के अधिकारियों ने बताया कि 2023 में 2406 लोगों को पकड़ा गया और वापस भेजा गया। अगले साल 2024 में यह संख्या थोड़ी बढ़ी और 2425 लोगों को वापस भेजा गया। वहीं मई 2025 तक 557 ऐसे लोगों को पकड़ कर वापस भेजा जा चुका है।
रिपोर्ट बताती है कि BSF ने अधिकांश घुसपैठिए पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों में पकड़े हैं। इसमें भी सबसे अधिक घुसपैठ पश्चिम बंगाल में दर्ज की गई है। यहाँ पिछले 3 सालों में 2688 लोगों को पकड़ा गया। इनमें से 90% पश्चिम बंगाल के सीमाई इलाकों में पकड़े गए थे।
पश्चिम बंगाल के अलावा मिजोरम जैसे राज्यों में भी काफी घुसपैठ देखी गई। वहीं असम और त्रिपुरा में ऐसे मामले कम मिले। हालाँकि, बीते दिनों में घुसपैठिए त्रिपुरा से भी अंदर आने का प्रयास कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, त्रिपुरा में पिछले तीन सालों में घुसपैठ की कोशिशों की संख्या 771 रही।
पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों के बड़ी संख्या में आने का मुद्दा गृह मंत्री अमित शाह भी हाल ही में उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों को TMC सरकार का आशीर्वाद मिला हुआ है। उन्होंने कहा था कि CM ममता बनर्जी ने घुसपैठियों के लिए सीमाएँ खोल हैं।
ऑपरेशन पुश-बैक भी जारी
जहाँ BSF ने बताया है कि वह सीमा पर पकड़ घुसपैठियों को वापस भेज रही है, वहीं इसी दौरान ‘ऑपरेशन पुश-बैक’ भी चल रहा है। इसके तहत अब तक 2000 अवैध घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश भेजा जा चुका है। इसके अलावा देश के अलग-अलग जगहों पर छुपकर रह रहे लगभग 2000 घुसपैठिए अब सामने से वतन वापसी के लिए तैयार हो गए हैं।
सुरक्षा एजेंसियाँ अब घुसपैठियों की जानकारी बॉयोमेट्रिक के जरिए भी सहेज रही है। इसे राष्ट्रीय डेटाबेस से भी जोड़ा जाएगा। इससे दोबारा देश में घुसपैठियों के घुसने पर जानकारी निकालना और कार्रवाई करना आसान हो जाएगा।
ऑपरेशन पुश-बैक क्या है?
‘ऑपरेशन पुश-बैक’ अप्रैल 2025 से चल रहा है। ये भारत सरकार की एक नई रणनीति है, जिसका उद्देश्य अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं से त्वरित रूप से निपटना है। ये वे लोग हैं जो कई वर्षों से अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं।
इस ऑपरेशन के तहत अब पुलिस को सौंपना, FIR दर्ज करना, अदालत में पेश करना, मुकदमा चलाना और फिर निर्वासन प्रोटोकॉल की लंबी प्रक्रिया से भारत सरकार ने किनारा कर लिया है।
भारत के गृह मंत्रालय (MHA) ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की पहचान और राष्ट्रीयता की पुष्टि के लिए 30 दिन की समय सीमा तय की है। इसके बाद भारतीय सुरक्षाबल घुसपैठियों को तुरंत सीमा पार बांग्लादेश की ओर धकेल रहे हैं।
उसे (बांग्लादेशी महिला को) बाहर निकाल दिया। उसे बांग्लादेश भेज दिया गया।
यह दलील कपिल सिब्बल ने 2 जून 2025 को सुप्रीम कोर्ट में मोनोवरा बेवा, नाम की एक बांग्लादेशी महिला के पक्ष में दिया। इस महिला को असम पुलिस ने उसके मुल्क वापस भेज दिया है। उसके बेटे अनच अली (Iunuch Ali) ने इसे चुनौती दी है।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार सिब्बल की इस दलील के जवाब में जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने कहा, “यदि वह (मोनोवरा बेवा) पहले से ही देश में नहीं है तो हम उसे वापस नहीं बुला सकते।” इस महिला की पैरवी करते हुए सिब्बल ने ‘ऑपरेशन पुशबैक’ की वैधता पर भी सवाल उठाए।
वैसे यह पहला मौका नहीं है जब देश विरोधी या हिंदू-विरोधी मामले पर कोर्ट में कपिल सिब्बल खड़े दिखे हों। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में मस्जिद की पैरवी हो, वक्फ का मामला हो या आरजी कर अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर के रेप केस और हत्या के मामले में आरोपित को बचाने का, हिंदू- विरोधी एजेंडे को भुनाने में कोर्ट के सामने काला कोट पहने कपिल सिब्बल का चेहरा रेडिमेड तरीके से उठकर सामने आ जाता है।
इसी तरह सोमवार (2 जून 2025) को भी सुप्रीम कोर्ट में मोनोवरा बेवा के बेटे अनच अली की याचिका के लिए कपिल सिब्बल कोर्ट में खड़े दिखे। अनच ने याचिका में आरोप लगाया कि पुलिस ने उसकी माँ को जबरन बांग्लादेश भेज दिया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया है।
कोर्ट से सिब्बल ने कहा कि महिला मोनोवरा बेवा को धुबरी पुलिस ने उठाया और जबरन बांग्लादेश भेज दिया। याचिका पर जस्टिस संजय करोल और सतीश चंद्र शर्मा सुनवाई कर रहे थे।
सिब्बल ने कोर्ट से सवाल किया कि धुबरी एसपी किस आधार पर किसी व्यक्ति को बांग्लादेशी नागरिक घोषित कर सकते हैं? क्या महिला को हिरासत में लेने के बाद किसी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया? क्या कोर्ट इस पर भरोसा कर सकती है?
सिब्बल यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि अनच को ये तक नहीं पता है कि उसकी माँ भारत में है भी या बांग्लादेश भेज दी गई। सरकार को अनच की माँ की मौजूदा स्थिति के बारे में बताना चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने याचिका के तहत केंद्र सरकार को नोटिस जारी की।
अनच अली का ये भी कहना है कि ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ उसकी माँ की याचिका 2017 से अब तक सुप्रीम कोर्ट में अब तक लंबित है।
क्या था लंबित मामला
26 साल के अनच अली ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उसका दावा है कि उसकी माँ मोनोवरा बेवा को असम पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखा है। साथ ही देश से रातों रात लोगों को बांग्लादेश भेज दिया जा रहा है।
बता दें कि मोनोवरा बेवा को 17 मार्च 2016 को धुबरी फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित कर दिया था। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 28 फरवरी 2017 के आदेश में भी ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद बेवा ने सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी। तब से अब तक ये मामला लंबित है।
2019 में सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में ये आदेश दिया था कि विदेशी नागरिकों को हमेशा के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता। या तो उन्हें डिपोर्ट किया जाए या जमानत पर रिहा कर दिया जाए।
हालाँकि निर्वासन तभी संभव है जब वह देश अपने नागरिक को स्वीकार करे। इस फैसले के आधार पर मोनोवरा को दिसंबर 2019 में हिरासत से रिहा कर दिया गया।
फिर सामने आए कपिल सिब्बल
पहलगाम हमलों के बाद अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को वापस खदेड़ने के लिए अनौपचारिक रूप से शुरू किए गए ऑपरेशन पुश-बैक की प्रक्रिया तेज कर दी गई। इसके तहत 24 मई को मोनोवरा को फिर से हिरासत में लिया गया।
इसके बाद बेवा के बेटे अनच अली ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की कि मोनेवरा की हिरासत गैर कानूनी है।
सिब्बल ने ऑपरेशन पुशबैक पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के वापस भेजे जाने की ये प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य नहीं है। कानूनी तौर पर सिर्फ डिपोर्टेशन यानी निर्वासन ही सही मानी जा सकती है।
अनच का कहना है कि विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार करके उन्हें बिना किसी सत्यापन और दूसरे देश की मंजूरी के प्रशासन द्वारा वहाँ छोड़ देना गैर कानूनी है। किसी भी तरह से मान्य नहीं है।
कपिल सिब्बल यूँ ही काला कोट नहीं पहनते बल्कि जहाँ राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को हवा मिल रही हो, वहाँ पहुँचते हैं। उनका नाम नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हुए 2020 दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी उमर खालिद की पैरवी में भी खूब उछला।
इसके अलावा गैंगस्टर से राजनेता बने अतीक अहमद के बेटे असद अहमद की पुलिस मुठभेड़ में मौत पर कपिल सिब्बल ने असद के पक्ष में सहानुभूति जताई। इसके कारण विवाद को भी हवा मिली।
कपिल सिब्बल, जो खुद को ‘गंगा-जमुनी तहज़ीब’ और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का पैरोकार बताते आए हैं लेकिन अलग-अलग मसलों पर दिए गए उनके बयान शांति व्यवस्था को चरमराने के लिए काफी होते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के 20 नहीं बल्कि 28 ठिकानों को ध्वस्त किया था। ये खुलासा खुद पाकिस्तान ने अपने डोजियर में किया है।
पाकिस्तान ने अपने आधिकारिक डोजियर में माना है कि ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान को जितना नुकसान हुआ है वो भारत द्वारा बताए गए नुकसान से कहीं अधिक था। पाकिस्तान ने भारतीय वायु सेना द्वारा मारे गए 8 अतिरिक्त लक्ष्यों की सूची भी दी है।
पाकिस्तान के ‘ऑपरेशन बनियान उन मार्सोस’ पर तैयार किए गए डोजियर के मानचित्रों में पेशावर, झंग, हैदराबाद (सिंध), गुजरात, पंजाब, गुजरांवाला, भवालनगर, अटक और छोर पर हुए हमलों को दर्शाया गया है। भारतीय वायु सेना और सैन्य संचालन महानिदेशक ने पिछले महीने के हमलों के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन जगहों पर हुए हमलों का खुलासा नहीं किया था।
(भारत ने इन ठिकानों को किया ध्वस्त फोटो साभार- टीवी9)
हाल ही में हुए इस खुलासे से नई दिल्ली से सीजफायर के लिए इस्लामाबाद की अपील को समझा जा सकता है। इसके अलावा डोजियर से पाकिस्तान की कलई भी खुल रही है। पाकिस्तान ने भारतीय पक्ष को काफी नुकसान पहुँचाने का दावा किया था और भारतीय हमलों में उसे कोई नुकसान नहीं हुआ है, ये भी कहा था।
भारतीय सेना की प्रेस ब्रीफिंग में भारतीय जवाबी हमले के दायरे और उसकी व्यापकता को अच्छी तरह से समझाया जा सकता है। इस स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान ने 8 अतिरिक्त लक्ष्यों की जानकारी दी है।
मैक्सार टेक्नोलॉजीज द्वारा उपलब्ध कराई गई सैटेलाइट तस्वीरों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढाँचे के खिलाफ भारत द्वारा किए गए सटीक हमलों से होने वाले विनाश को दिखाया था। इसमें मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा का प्रशिक्षण केंद्र और बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय सहित नौ लक्ष्यों को निशाना बनाया गया था। मुजफ्फराबाद, कोटली, रावलकोट, चकस्वारी, भिंबर, नीलम घाटी, झेलम और चकवाल उन जगहों में शामिल थे, जिन पर ऑपरेशन के दौरान हमला किया गया था।
(भारत ने इन ठिकानों को किया ध्वस्त फोटो साभार- टीवी9)
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, पाकिस्तान ने भारत के पश्चिमी हिस्से में रिहायशी इलाकों और सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। जबकि नई दिल्ली ने साफ कहा था कि उसने सिर्फ आतंकी ठिकानों पर हमला किया है।
पाकिस्तान पर जवाबी हमले में भारत ने 11 सैन्य ठिकानों पर हमला किया। नूर खान, रफीकी, मुरीद, सुक्कुर, सियालकोट, पसरूर, चुनियन, सरगोधा, स्कारू, भोलारी और जैकबाबाद उन ग्यारह हवाई ठिकानों में शामिल थे जिन्हें निशाना बनाया गया। तीन दिनों तक चली यह तनातनी तब खत्म हुई जब पाकिस्तान ने भारत से सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाया।
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से आतंकवाद के खिलाफ एक रेडलाइन खींच दी है। भारत में अब कोई भी आतंकवादी हमला युद्ध अपराध माना जाएगा, जिसके लिए कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।
हाल में हुए संघर्ष के दौरान भारतीय सैन्य क्षमताओं का स्पष्ट रूप से प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा, जैसा कि पाकिस्तान के डोजियर से पता चलता है, भारत ने जितना स्वीकार किया है, उससे कहीं ज़्यादा जोरदार और दूर तक हमला किया।
भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर बदले की कार्रवाई की थी। पहलगाम में 26 मासूम लोगों की आतंकियों ने हत्या कर दी थी। इसका जवाब देते हुए भारत ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया।
मुस्लिमों की मजहबी भावनाएँ आहत करने के नाम पर गिरफ्तार इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली को जेल के भीतर धमकियाँ मिल रही हैं। जेल के भीतर ही लोग उसकी जान के लिए खतरा बने हुए हैं। यह बातें शर्मिष्ठा ने एक याचिका में कहीं हैं। इस बीच कलकत्ता हाई कोर्ट ने शर्मिष्ठा को जमानत देने से इनकार कर दिया है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, शर्मिष्ठा की तरफ से अलीपुर (कोलकाता) की जिला अदालत में दायर एक याचिका में समस्याएँ बताई गईं थी। शर्मिष्ठा ने इस याचिका में कहा था कि उन्हें जेल के अंदर अन्य कैदियों से कई तरह की धमकियाँ मिल रही हैं। शर्मिष्ठा ने कहा था कि उन्हें अपनी सुरक्षा का डर सता रहा है।
शर्मिष्ठा को अलीपुर के महिला सुधार गृह में रखा गया है। उन्होंने याचिका में कहा कि इस महिला सुधार गृह में ना सही से साफ़-सफाई होती है ना ही यहाँ पीने का साफ़ पानी है। शर्मिष्ठा ने यह भी बताया कि उन्हें बीमारियाँ भी हैं और इस महिला सुधार गृह में उन्हें कोई भी सुविधा नहीं मिल रही है।
शर्मिष्ठा ने अलीपुर कोर्ट में याचिका दायर खुद को सुरक्षा दिए जाने की माँग की है। अलीपुर कोर्ट में इस पर अभी सुनवाई नहीं हुई है। इस बीच शर्मिष्ठा की जमानत याचिका को सोमवार (3 जून, 2025) को कलकत्ता हाई कोर्ट ने सुना। कलकत्ता हाई कोर्ट ने शर्मिष्ठा को अंतरिम तौर पर जमानत देने से इनकार कर दिया।
हाई कोर्ट ने शर्मिष्ठा के वीडियो ने लोगों की भावनाएँ आहत की हैं। हाई कोर्ट ने राहत माँगने पर यह भी कहा कि अगर शर्मिष्ठा को जेल में दो दिन रहना पड़ेगा तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा। कोर्ट ने इस दौरान बोलने की आजादी को लेकर टिप्पणियाँ की।
वहीं इस दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने शर्मिष्ठा को राहत देने का पुरजोर विरोध किया और कहा कि उन्हें यह वीडियो बनाने से पहले सोचना चाहिए था। पश्चिम बंगाल सरकार ने यह भी प्रयास किया कि यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में अब छुट्टियों के बाद सुना जाए। इस मामले की सुनवाई अब गुरुवार (5 जून, 2025) को है।
शर्मिष्ठा को शुक्रवार (30 मई, 2025) को गिरफ्तार किया था। उसे पश्चिम बंगाल पुलिस ने गुरुग्राम से गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ इस्लामी कट्टरपंथियों ने इससे पहले अभियान चलाया था।
फिल्म टॉप गन में मेवरिक में एड हैरिस का किरदार टॉम क्रूज से कहता है, “ये विमान जिनका आप परीक्षण कर रहे हैं, कैप्टन एक दिन इन्हें पायलटों की बिल्कुल भी जरूरत नहीं होगी। पायलट को सोने, खाने, टॉयलेट करने की जरूरत होती है। पायलट तो कभी-कभी आदेश की अवहेलना करेंगे। आपने बस उन लोगों के लिए कुछ समय खरीदा है।” यह सिर्फ जिम कैश और जैक एप्स जूनियर द्वारा लिखी गई पंक्ति ही नहीं थी, बल्कि यह एक भविष्यवाणी थी।
बॉर्डर फिल्म में जैकी श्रॉफ द्वारा अभिनीत विंग कमांडर एंडी बाजवा, सनी देओल द्वारा अभिनीत मेजर कुलदीप सिंह चाँदपुरी से कहते हैं कि यह वायुसेना ही है जो दुश्मन को उसके इलाके में मार गिराती है। एक समय था जब यह हकीकत थी। कारगिल युद्ध में वायुसेना ने पाकिस्तानी चौकियों और बंकरों को ध्वस्त करने में अहम भूमिका निभाई थी।
युद्ध की कहानियाँ और फिल्मों की पटकथाएँ वास्तविक जीवन के अनुभवों के आधार पर बनती हैं, लेकिन तकनीक में तेजी से बदलाव हुआ है। अब किफायती ड्रोन युद्ध के मैदान में बेहद कारगर हथियार बन गए हैं।
दुनियाभर में युद्ध का तरीका बदल रहा है। कॉकपिट डॉगफाइट्स में नहीं, बल्कि कंटेनर, ट्रकों, गुफाओं और बंकरों से किए जाने वाले हमलों में है। ड्रोन, घूमते हुए हथियार, एफपीवी, मशीनें जो न सोती हैं, न खाती हैं, न सवाल करती हैं। ये बस आज्ञा मानती हैं और अब युद्ध की कहानियाँ लिख रही हैं।
ड्रोन युद्ध का युग आ गया है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या लड़ाकू विमान अब संग्रहालय की शोभा बढ़ाएँगी? यूक्रेन-रूस युद्ध में नई तस्वीर सामने आई है। यूक्रेन के ड्रोन ने रूस में तबाही मचा दी। हाई-टेक राफेल, एफ-35, मिग इंजन या सुखोई की गड़गड़ाहट को अब भूल जाइए। रूस-यूक्रेन युद्ध ने इतिहास में जंग की नई दास्तान लिखी है। इसमें सस्ते ड्रोन, और सस्ते एफपीवी क्वाडकॉप्टर ने न केवल ऑपरेशन को अंजाम दिया, बल्कि उन्हें परिभाषित भी किया।
अचानक दुनिया भर के देशों ने ऐसे ड्रोन खरीदना शुरू कर दिया है, जो लड़ाकू जेट और महंगी मिसाइलों के काम को सस्ते, सटीक और जोखिम-मुक्त तरीके से कर सकते हैं।
ऐसा नहीं है कि ड्रोन कभी युद्ध का हिस्सा नहीं रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश सीरिया सहित मध्य पूर्व देशों पर हमला करने के लिए उनका उपयोग करते रहे हैं। हालाँकि वे जिन ड्रोन का उपयोग करते हैं, वे महंगे हैं और उन्हें हासिल करना मुश्किल है। अब जिन ड्रोनों का उपयोग किया जा रहा है वे लड़ाकू जेट की तुलना में बहुत सस्ते हैं।
ड्रोन अब सहायक हथियार नहीं, युद्ध विजेता हैं
युद्ध के शुरुआती दिनों से ही, तुर्की के बायरकटर टीबी2 ने यूक्रेन को रूसी बख्तरबंद गाड़ियों को नष्ट करने में मदद की। जवाबी कार्रवाई में रूस की ओर से ईरानी शाहद-136 ड्रोन यूक्रेनी शहरों को निशाना बनाया। फिर ग्रेनेड के साथ रेट्रोफिट किए गए व्यावसायिक रेसिंग ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। ये केवल तभी विस्फोट करते थे जब टारगेट सुनिश्चित होती थी। युद्ध शुरू होने के बाद से रूस और यूक्रेन दोनों ने सैकड़ों वीडियो साझा किए गए, जिसमें दिखाया गया था कि कैसे सस्ते ड्रोन सफलतापूर्वक दुश्मन को मार गिराते हैं।
हाल ही में यूक्रेन ने ‘ऑपरेशन स्पाइडरवेब’ में दिखाया कि ड्रोन युद्ध कुछ ही दिनों में कितना विकसित हो गया है। यूक्रेन ने करीब डेढ़ साल पहले कथित तौर पर रूस के अंदर स्थित एयरबेस पर हमला करने की तैयारी शुरू कर दी थी। ड्रोन्स को लकड़ी के कंटेनरों और मोबाइल केबिनों में छिपाकर रूस में तस्करी की गई। हमले के समय इन कंटेनरों की छतें रिमोट से खोली गईं। ड्रोन्स ने रूसी विमानों पर सटीक हमला किया। अब सीमा पार कर हमले के लिए किसी जेट की जरूरत नहीं थी। बस योजना, धैर्य और एक लैपटॉप की जरूरत थी। यह कोई साइंस फिक्शन नहीं है। यह ड्रोन युद्ध का नया तरीका है।
This will be in textbooks. Ukraine secretly delivered FPV drones and wooden mobile cabins into Russia. The drones were hidden under the roofs of the cabins, which were later mounted on trucks.
At the signal, the roofs opened remotely. Dozens of drones launched directly from the… pic.twitter.com/sJyG3WyYYI
हाल ही में, भारत ने पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। पहलगाम में 26 निर्दोष हिंदुओं की जान चली गई थी। भारत ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी शिविरों पर हमला किया। इसके बाद पाकिस्तान ने अपने सहयोगी देशों से प्राप्त ड्रोन का इस्तेमाल किया। भारतीय नागरिकों और सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की गई। लेकिन, भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने इसे रोक दिया।
A 100% Indian-designed suicide drone called the JM-1 made its combat debut in Operation Sindoor becoming the first ‘Atmanirbhar’ loitering munition to strike Pakistani targets. The Indian drone warfare story is probably this conflict’s biggest takeaway: pic.twitter.com/u6SUDjHqOD
फिर भारत के लिए जवाबी कार्रवाई करने का समय आ गया। भारतीय सशस्त्र बलों ने भारत में बने एफपीवी ड्रोन, हेरॉन यूएवी और सामरिक लोइटरिंग मुनिशन पर बहुत अधिक भरोसा किया। भारत द्वारा निर्मित लोइटरिंग मुनिशन जेएम-1 ने भी ऑपरेशन में अपनी क्षमता साबित की। हाई रिज़ॉल्यूशन वाले ड्रोन निगरानी प्रणाली का उपयोग करके लक्ष्यों की मैपिंग की गई। खुफिया इनपुट के साथ क्रॉस वेरिफाई किया गया और फिर सटीक हमले किए गए।
साथ ही भारतीय मिसाइलों ने पाकिस्तानी हवाई ठिकानों को तबाह कर दिया। इस दौरान भारतीय नकली ड्रोन ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, खासकर भारतीय लड़ाकू विमानों से मेल खाने वाले ड्रोन्स ने पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणाली को भ्रमित कर दिया।
अजरबैजान आर्मेनिया युद्ध में ड्रोन का इस्तेमाल
यूक्रेन-रूस जंग से पहले 2020 के नागोर्नो-करबाख युद्ध में पहली बार मानव रहित ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। तुर्की के बायरकटर टीबी2 ड्रोन से लैस अजरबैजान ने अर्मेनियाई सेना को अपने अधीन कर लिया। अजरबैजान ने कथित तौर पर वायु रक्षा प्रणाली की जानकारी प्राप्त करने के लिए ‘चारा ड्रोन’ का इस्तेमाल किया और फिर उन्हें नष्ट करने के लिए आधुनिक ड्रोन का इस्तेमाल किया।
सिर्फ 44 दिनों में आर्मेनिया ने सैकड़ों टैंक, तोपें और मोबाइल एयर डिफेंस यूनिट खो दिए। उनमें से कई ड्रोन द्वारा रिकॉर्ड किए गए फुल एचडी फुटेज में नष्ट हो गए।
Azerbaijan’s use of Turkish drones gave it a decisive edge and victory over Armenia in the Nagorno-Karabakh conflict in 2020.
Here’s a look at why the world is now taking notice of Turkish drone and defence technology pic.twitter.com/7P5EXhVoDm
MQ 9 रीपर जैसे ड्रोन लक्ष्य पर हमला करने के बाद घर लौट आते हैं। हालाँकि, घूमते-फिरते हथियार या LM, प्रतीक्षा करने के लिए बनाए गए हैं। ये एक भिक्षु के धैर्य और एक फिदायीन के स्वभाव जैसे उड़ने वाले स्नाइपर की तरह हैं। एक बार लॉन्च होने के बाद, वे कभी-कभी घंटों तक युद्ध के मैदान के ऊपर चक्कर लगाते हैं, हरकतों को स्कैन करते हैं। जिस समय सैनिकों का ग्रुप, टैंक या रडार सिग्नल पर लॉक होते हैं और बगैर चेतावनी के टारगेट को ध्वस्त कर देते हैं। इससे बचना काफी मुश्किल होता है।
Russia turned Oekainian armoured vehicles into scrap metal. The footage shows several armoured vehicles destroyed by Russian UAVs and Lancet loitering munitions of the Sever Group of Forces in the border area of Kursk region. pic.twitter.com/u1Mob5T3zG
भारत के नागस्त्र-1 की कीमत मात्र 5,500 डॉलर या लगभग 4.69 लाख रुपये है। जबकि एक राफेल की कीमत लगभग 242 मिलियन डॉलर है। यानी एक राफेल की तुलना में भारत उसी कीमत पर 44,000 नागस्त्र-1 ड्रोन अपने शस्त्रागार में जोड़ सकता है।
इजरायल जैसे देशों ने हारोप जैसी प्रणालियों के साथ प्रौद्योगिकी का बीड़ा उठाया, लेकिन अब ईरान के शाहेद 131 और 136 भी प्रतिस्पर्धा दे रहे हैं। युद्ध अब हवाई युद्ध में लगे लड़ाकू विमानों से नहीं लड़े जाते। वे ऊपर से निगरानी करने वाले ड्रोनों से लड़े जा रहे हैं और लड़े जाते रहेंगे।
DPR quadcopter drone grenade strikes against Ukrainian soldiers near Pervomaisk pic.twitter.com/pWhXsxiFfQ
भविष्य में नई वायु सेना को अरबों डॉलर के जेट, विशाल हवाई पट्टी और पायलटों की ज़रूरत नहीं होगी, जिन्हें युद्ध में प्रशिक्षित होने में सालों लग जाते हैं। यह शिपिंग कंटेनरों में फिट हो जाता है और मांग पर लॉन्च होता है।
बायरकटर टीबी2 तुर्की निर्मित ड्रोन है जो सस्ता, कैमरा युक्त और घातक है। इसका इस्तेमाल सीरिया, लीबिया, यूक्रेन और अजरबैजान में किया जा चुका है।
बायरकटर टीबी2 स्रोत: Wiki
शाहेद 136 और 131 ईरान निर्मित कामिकेज़ ड्रोन हैं जिन्हें यमन से लेकर रूस तक को बेचा जाता है। वे अविश्वसनीय हैं लेकिन ग्रुप में इस्तेमाल किए जाने पर ख़तरनाक है।
शाहेद 136 स्रोत-wiki
एमक्यू 9 रीपर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा निर्मित ड्रोन है। ये लंबे समय तक चलने वाला और सैटेलाइट से जुड़ा हंटर किलर ड्रोन है। ये महंगे हैं लेकिन रेंज और सटीकता में बेजोड़ हैं।
एमक्यू 9 रीपर स्रोत- GAAS
विंग लूंग II और CH सीरीज चीन निर्मित ड्रोन हैं, जिन्हें रीपर्स को बीजिंग का जवाब माना जाता है। इन्हें अफ्रीका और मध्य पूर्व में बड़े पैमाने पर बेचा गया है।
विंग लूंग II स्रोत- Wiki
इजरायल निर्मित आईएआई हारोप और हेरोन ड्रोन भी बेजोड़ हैं। फिलिस्तीन- इजरायल युद्ध में इसका इस्तेमाल किया गया है। इनकी उड़ान क्षमता उल्लेखनीय है।
आईएआई हारोप स्रोत- wiki
भारत घातक और CATS वारियर जैसे विश्व स्तरीय ड्रोन भी विकसित कर रहा है। भारत के नागस्त्र-1 का हाल ही में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान इस्तेमाल किया गया।
घातक ड्रोन स्रोत- wiki
सबसे अच्छी बात यह है कि इनमें से ज़्यादातर ड्रोन किफ़ायती हैं। इनमें से कुछ की कीमत मिसाइल से भी कम है। युद्ध का मैदान अब सबसे बड़े लोगों और देशों का नहीं, बल्कि सबसे होशियार लोगों और देशों का है।
क्या लड़ाकू विमान खत्म हो गए हैं?
यह घोषणा करना जल्दीबाजी है कि लड़ाकू विमानों का समय खत्म हो गया है। आखिरकार अगर कुछ हज़ार डॉलर का ड्रोन एक छिपे हुए ट्रक से सैकड़ों मिलियन डॉलर के विमान को नष्ट कर सकता है, तो हवाई पट्टी बनाने की क्या ज़रूरत है? हालाँकि, अभी लड़ाकू विमानों को छोड़ने का समय नहीं आया है।
जब बात गहरी पैठ वाले हमलों, हवाई श्रेष्ठता और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की आती है, तो लड़ाकू विमान अभी भी हावी हैं। ये दुश्मन का मनोबल तोड़ते हैं, तेज गति से बचाव करने वाले मिशन चलाते हैं और ऐसे पेलोड ले जाते हैं जिन्हें ड्रोन अभी भी संभाल नहीं सकते। सुखोई 30, राफेल या यहां तक कि भारत का आगामी एएमसीए की जरूरत और विश्वसनीयता बनी रहेगी।
भविष्य लड़ाकू विमान के साथ-साथ ड्रोन युग का होगा यानी लड़ाकू विमानों के ऊपर से बोझ कम हो जाएगा।
ड्रोन सिद्धांत या डायनासोर सिद्धांत
दुनिया भर की सेनाओं के लिए असली सवाल यह नहीं है कि ड्रोन काम करते हैं या नहीं। सवाल यह है कि क्या उन्होंने ड्रोन के साथ नेतृत्व करने के लिए खुद में तेजी से बदलाव किया है?
अब सवाल यह उठता है कि क्या भारत को डेढ़ लाख करोड़ रुपये अधिक राफेल में निवेश करना चाहिए या आधी राशि स्वदेशी ड्रोन और एआई – आधारित युद्ध प्रणाली बनाने में खर्च करनी चाहिए। क्या भारत पर्याप्त ड्रोन ऑपरेटरों, कोडर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध रणनीतिकारों को ट्रेनिंग दे रहा है, या सिर्फ अधिक लड़ाकू पायलटों को? बीसवीं सदी में जिसने भी आसमान को नियंत्रित किया, उसने युद्ध को नियंत्रित किया।
इक्कीसवीं सदी में डेटा भी काफी अहम है। साइबर सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता, ड्रोन रक्षा ग्रिड और स्वायत्त हत्या प्राधिकरण अब सैन्य आवश्यकताएँ हैं, लग्जरी नहीं।
अब दहाड़ने का नहीं, मौन आक्रमण का है जमाना
एक समय था जब युद्ध की जीत गरजते जेट इंजनों के रूप में आकाश में गूँजती थी। दुश्मन के दिलों में ये दहशत पैदा करता था । युद्ध का मैदान अब दहाड़ता नहीं है। यह गुनगुनाता है। युद्ध के मैदान में सैनिकों द्वारा सुनी जाने वाली प्रोपेलर की मच्छर जैसी भनभनाहट, उन्हें बैठ कर अपने भाग्य का इंतजार करने पर मजबूर कर देती है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा रूस यूक्रेन युद्ध में देखा गया है।
लड़ाकू विमान खत्म नहीं हुए हैं और वे लंबे समय तक यहाँ रहने वाले हैं। हालाँकि उनकी सर्वश्रेष्ठता को ड्रोन ने चुनौती दी है। वे अब उन मशीनों के साथ हवा साझा करते हैं जो साँस नहीं लेती हैं, पलक नहीं झपकाती हैं और संकोच नहीं करती हैं। ड्रोन ध्वनि अवरोध को नहीं तोड़ते हैं। वे पारंपरिक युद्ध के नियमों को तोड़ते हैं।
ड्रोन युद्ध का युग आ गया है। जो देश इसके मुताबिक अपनी कार्यशैली बदलेंगे, वे नेतृत्व करेंगे। जो नहीं करेंगे, वे अपने विनाश को आमंत्रित करेंगे। इतना ही नहीं पूरी हाई डेफिनिशन में रीप्ले देखेंगे, जिसे उसी ड्रोन द्वारा फिल्माया गया है, जिसने युद्ध के मैदान में उनके साथियों को मार डाला था।
इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली पर FIR करवाने वाला वजाहत खान गायब हो गया है। इस्लामी कट्टरपंथी वजाहत खान ने इस्लाम के कथित अपमान पर शर्मिष्ठा पर FIR करवाई थी। इसके बाद सामने आया था वजाहत खुद ही माँ कामाख्या, भगवान कृष्ण समेत तमाम हिन्दू देवी-देवताओं पर अपमानजक टिप्पणियाँ करता था। इसके बाद उसके खिलाफ असम समेत कई जगह मामले में दर्ज हुए थे। इसके बाद वह कोलकाता से गायब हो गया है।
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, वजाहत खान के घरवालों ने बताया है कि वह गायब है। वजाहत खान तब से ही गायब है जबसे उसके खिलाफ शिकायतें होना चालू हुई है। वजाहत खान के खिलाफ कोलकाता में भी एक शिकायत 2 जून, 2025 को दर्ज करवाई गई है। यह शिकायत एक हिन्दू संगठन ने दर्ज करवाई है।
इस शिकायत में बताया गया है कि वजाहत खान ने हिन्दुओं को लेकर ‘रेप कल्चर’ और गौमूत्र से जुड़ा मजाक उड़ाया। रिपोर्ट में उसके खिलाफ और भी कई आरोप लगाए गए हैं। कोलकाता में यह FIR गार्डन रीच थाने में हुई है। पुलिस ने अभी इस पर क्या एक्शन लिया है, यह स्पष्ट नहीं है।
वहीं वजाहत खान के खिलाफ असम में भी एक FIR करवाई गई है। यह FIR उसके माँ कामाख्या पर की गई टिप्पणियों को लेकर करवाई गई है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस मामले में गिरफ्तारी की बात कही है।
उन्होंने मीडिया को बताया, “वजाहत खान के खिलाफ माँ कामाख्या पर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के मामले में एक केस दर्ज किया गया है। अब असम पुलिस पश्चिम बंगाल जाएगी और आगे की कार्रवाई करेगी। हम पश्चिम बंगाल पुलिस से इस मामले में सहयोग माँगेगे ताकि आरोपित को असम में कार्रवाई के लिए लाया जा सके।”
Reference to unacceptable comments made by an individual against Devi Maa Kamakhya, a case has been registered by @assampolice and we will seek West Bengal Govt's cooperation in bringing the individual to Assam to face the law. pic.twitter.com/0jpyhLHmCL
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) June 2, 2025
वजाहत खान पर कार्रवाई होने को देखते हुए उसके घरवाले बता रहे हैं कि उनका बेटा एकदम ‘सेक्युलर’ है। उन्होंने दावा किया है कि वजाहत खान के अकाउंट से हिन्दू देवी-देवताओं के विरुद्ध जो टिप्पणियाँ की गईं थी, वह अकाउंट हैक होने चलते हुईं।
वजाहत खान सने अपनी पोस्ट में हिंदू देवी-देवताओं और सनातन धर्म के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। उसके कुछ पोस्ट इस प्रकार हैं-
“एक हिंदू अपनी साली को अंग अंग पर रंग लगाते हुए और अपने दोस्तों को भी उसके साथ ऐसा करने का निमंत्रण देते हुए… सी हिंदुओं… यहीं है इनकी असलियत… बलात्कारी संस्कृति”
“नहीं वो उसकी बात कर रहा है जिसकी 16108 रखेलो के साथ रंग रसिया मनाता था…या चुपके-चुपके लड़कियों को नहाते हुए देखता था…”
“मेरे पास आपके लिए कुछ है… पहले अपने धर्म के बारे में पढ़ो। मूत्र पीने वाले मैल हैं।”
“तुझ जैसी &^$^&* पेट की औलाद रसूल के बारे में बारे में बात करे ये जेब नहीं देता…तू इसकी बात कर, तेरा कृष्णा कैसा रंगीला था देख…सच्चाई देख, वहम में मत जी… $%टू साले, तूने जो भी कहा वो सब तो झूठ और बहुत है लेकिन ये तेरे ही किताब का है सच पढ़, सुवर के पिल्ले”
गौरतलब है कि वजाहत खान की शिकायत के आधार पर ही शर्मिष्ठा पनोली को गिरफ्तार किया गया था। वह रशीदी फाउंडेशन नाम के एक संगठन से जुड़ा हुआ है। लेकिन कार्रवाई की बात सामने आते ही वह गायब हो गया है। वहीं शर्मिष्ठा अभी पुलिस की हिरासत में है।
पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार की गई यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) पूछताछ के लिए सीधे भगवान शिव की नगरी वाराणसी (काशी) लेकर जा रही है। NIA का कहना है कि ज्योति मल्होत्रा जब भी पाकिस्तान का दौरा करती थी, तो उसके ठीक पहले या बाद में वह काशी ज़रूर जाती थी। यह अजीबोगरीब दोहराव अब जाँच एजेंसियों के लिए एक बड़ी पहेली बन गया है, जिसके तार सुलझाने के लिए NIA वाराणसी पहुँचेगी।
एक ट्रैवल व्लॉगर होने के नाते वह देश के किसी भी हिस्से में जा सकती थी, लेकिन काशी पर उसका लगातार ध्यान संदेह पैदा करता है। क्या उसने किसी के निर्देश पर वाराणसी के कुछ खास, चुनिंदा स्थानों के वीडियो बनाए और अपने यूट्यूब चैनल ‘ट्रेवल विद जो’ पर पोस्ट किए? इन वीडियो में क्या कोई गुप्त संदेश या संवेदनशील जानकारी छिपी हो सकती है जिसे कोड वर्ड में भेजा गया हो? ऐसे कई सवालों के जवाब NIA अब काशी से खोजेगी।
ज्योति का ‘ट्रेवल विद जो’ और संदिग्ध काशी यात्राएँ
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ज्योति मल्होत्रा ने 2022 के बाद से 4 बार पाकिस्तान की यात्रा की, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि हर बार पाकिस्तान जाने से पहले या बाद में वह काशी जरूर गई। इन यात्राओं के वीडियो उसने अपने यूट्यूब चैनल ‘ट्रेवल विद जो’ पर पोस्ट भी किए हैं।
ज्योति पहली बार पाकिस्तान के करतारपुर कॉरिडोर सितंबर 2022 में गई थी। लौटते ही ज्योति ने अक्टूबर 2022 में वाराणसी आकर उसने शहर के अलग-अलग जगहों के वीडियो अपने चैनल पर बनाकर डाले।
इसके बाद ज्योति अप्रैल 2023 में फिर पाकिस्तान गई और वापस आकर जुलाई 2023 में काशी पहुँची। 9 दिसंबर 2023 को ज्योति मल्होत्रा ने बस से एक बार फिर काशी का दौरा किया था। दिलचस्प बात यह है कि 19 दिसंबर 2023 को जब प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी में थे और उन्होंने वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई, तो ज्योति भी उसी ट्रेन में वाराणसी से दिल्ली तक बैठी थी और ज्योति ने ट्रेन के पायलट केबिन का वीडियो भी बनाया और क्लोज-अप शॉट लिए।
फिर ज्योति जनवरी-फरवरी 2025 को काशी में रहकर अलग-अलग जगहों पर घूमती रही। मार्च 2025 में ज्योति कश्मीर और फिर वहाँ से पाकिस्तान गई। इसका वीडियो भी उसने अपने यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किया था।
कौन है ज्योति मल्होत्रा?
ज्योति मल्होत्रा हरियाणा के हिसार की रहने वाली एक यूट्यूबर और ट्रैवल व्लॉगर है। उसका यूट्यूब चैनल ‘ट्रेवल विद जो’ और इंस्टाग्राम अकाउंट ‘@travelwithjoone’ काफी लोकप्रिय हैं। उसके यूट्यूब पर 3.77 लाख से ज़्यादा सब्सक्राइबर और इंस्टाग्राम पर 1.31 लाख फॉलोअर्स हैं।
ज्योति मल्होत्रा को भारतीय खुफिया जानकारी पाकिस्तान को देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उस पर आरोप है कि उसने भारत के सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और सेना से जुड़ी कई गुप्त सूचनाएँ पाकिस्तान भेजी हैं।
जाँच में पता चला है कि वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के संपर्क में थी और पाकिस्तान हाई कमीशन, दिल्ली में उसकी मुलाकात एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से हुई थी। दानिश को बाद में भारत से निष्कासित कर दिया गया था।
ज्योति ने कई बार पाकिस्तान की यात्रा की है और अपनी यात्राओं के वीडियो भी बनाए हैं। उसके वीडियो और रील्स में भारत और पाकिस्तान की तुलना करते हुए संवेदनशील सूचनाएँ साझा करने का भी आरोप है। पुलिस ने उसके डिजिटल डिवाइस और खातों से 12 टेराबाइट्स से अधिक डिजिटल फॉरेंसिक डेटा बरामद किया है, जिसमें पाकिस्तानी कनेक्शन के सबूत शामिल हैं। उस पर सरकारी गोपनीयता अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।