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‘अलीबाबा और 40 चोर’ : सिद्धू के सलाहकार मलविंदर सिंह ने दिया इस्तीफा, पंजाब CM पर की थी विवादित टिप्पणी

पंजाब कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार मलविंदर सिंह माली ने शुक्रवार (अगस्त 27, 2021) को इस्तीफा दे दिया। माली बहुत समय से कैप्टन अमरिंदर सिंह और गाँधी परिवार पर विवादित टिप्पणी देने के कारण चर्चा में थे। 

ऐसी खबरें थीं कि कश्मीर पर विवादित बयान देने के बाद भी माली की मुसीबतें बढ़ीं थीं। वहीं कुछ समय पहले तक वह पूर्व पीएम इंदिरा गाँधी की एक विवादित फोटो पोस्ट करने और टिप्पणी करने के कारण चर्चा में थे।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, अपने पत्र में मलविंदर सिंह माली ने लिखा, “मैं पंजाब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को सलाह देने के लिए दी गई अपनी सहमति को वापस लेता हूँ।”

मलविंदर सिंह माली ने अपने इस्तीफे में कहा है, “मैं पूरी तरह से मानता हूँ कि जम्मू-कश्मीर भारत का ही हिस्सा है, लेकिन अनुच्छेद 370 और 35 ए को लेकर मेरा मानना है कि इन्हें जिस तरह से हटाया गया, वह संविधान का उल्लंघन है।”

उन्होंने कहा, “भारत का संविधान उन्हें अलग राय रखने का भी अधिकार देता है। मैं उन सभी याचिकाओं का समर्थन करता हूँ, जिसमें केंद्र सरकार के अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है।”

इस पूरे मामले पर पंजाब कॉन्ग्रेस प्रभारी हरीश रावत ने कहा है, “पंजाब में सब चीज़ें ठीक से चल रही हैं, चुनाव जब नज़दीक होते हैं तो थोड़ी हलचल होती है। इसका मतलब ये नहीं है कि सबकुछ सामान्य नहीं है।”

उल्लेखनीय है कि नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार रहे मलविंदर सिंह माली ने सबसे पहले जम्मू-कश्मीर को लेकर अपना विवादित बयान दिया था। इसमें उन्होंने कश्मीर मसले को संयुक्त राष्ट्र में होने की बात कही थी।

इसके अलावा उन्होंने पूर्व पीएम इंदिरा गाँधी से जुड़ा एक विवादित कार्टून साझा किया था। ऐसे ही उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके साथियों की तुलना ‘अली बाबा और 40 चोरों’ से की थी और कहा था कि कैप्टन समर्थक ये भूल जाएँ कि नवजोत सिंह सिद्धू ‘अली बाबा और चालीस चोर’ की अगुवाई में ‘दूल्हे’ की भूमिका निभाएँगे

इन्हीं वाकयों के बाद पार्टी हाईकमान ने नवजोत सिंह सिद्धू को अपने सलाहकारों को हटाने के लिए कहा था। पंजाब के प्रभारी हरीश रावत भी इस संबंध में संदेश दिए थे। वहीं, कॉन्ग्रेस भी उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के बारे में भी सोच रही थी।

दिल्ली में छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस की लड़ाई: CM होंगे सिंहदेव या बघेल बचा लेंगे कुर्सी, समर्थक विधायकों की परेड संभव

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री पद को लेकर अरसे से चल रही लड़ाई अब दिल्ली में लड़ी जा रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जहाँ अपनी कुर्सी बचाने की जुगत में हैं, वहीं उनकी कैबिनेट के मंत्री टीएम सिंहदेव भी समर्थकों को लगातार संकेत दे रहे हैं कि उनकी ताजपोशी करीब-करीब तय है। इस बीच दिल्ली में छत्तीसगढ़ के कॉन्ग्रेसी विधायकों का जमावड़ा भी लग गया है। संभावना जताई जा रही है कि दोनों नेता समर्थक विधायकों की पार्टी मुख्यालय में परेड भी करवा सकते हैं।

बघेल और सिंहदेव भी राजधानी में ही हैं। बघेल शुक्रवार (अगस्त 27, 2021) को राहुल गाँधी से मुलाकात करेंगे। बघेल के मुताबिक उन्‍हें कॉन्ग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल का संदेश मिला है, जिसमें कहा गया है कि उन्‍हें आज राहुल गाँधी से मुलाकात करनी है।

दोनों के बीच ये मुलाकात शाम चार बजे हो सकती है। इस बीच छत्तीसगढ़ के मंत्री सहित 35 विधायक भी दिल्ली पहुँच गए हैं।

वहीं दिल्ली पहुँचे बघेल सरकार में मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि जब कोई टीम अच्छा प्रदर्शन नहीं करती है तो उसके कप्तान को बदलने की माँग उठती है, लेकिन छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की टीम अच्छा काम कर रही है।

मुख्यमंत्री बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के बीच चल रहे टकराव की स्थिति को देखते हुए विधायकों के दिल्ली पहुँचने को लेकर चर्चा गर्म है। कहा जा रहा है कि विधायकों को दिल्ली लाना मुख्यमंत्री की ओर से आलाकमान के समक्ष शक्ति प्रदर्शन करने का प्रयास है। हालाँकि बघेल के करीबियों ने इससे इनकार किया है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री को सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी में पूरा विश्वास है तथा शक्ति प्रदर्शन जैसी कोई बात नहीं है।

भूपेश बघेल के समर्थक विधायक देवेंद्र यादव ने कहा है, “मुख्यमंत्री बघेल के नेतृत्व में हम छत्तीसगढ़ की जनता की सेवा कर रहे हैं। हम आलाकमान से बात करेंगे। सभी विधायक एकजुट हैं।” दूसरी तरफ, छत्तीसगढ़ प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है, “आलाकमान ने किसी कॉन्ग्रेस विधायक को दिल्ली नहीं बुलाया है। प्रभारी पीएल पुनिया ने कहा है कि किसी विधायक को दिल्ली नहीं बुलाया गया। विधायक आलाकमान के निर्देशों का पालन करें और अनुशासन में रहें।”

वहीं बघेल पर चुटकी लेते हुए टीएस सिंहदेव ने कहा है क‍ि टीम का हर खिलाड़ी कप्तान बनना चाहता है। ये उसकी सोच का नहीं, बल्कि क्षमता का सवाल है। पार्टी हाईकमान जिसको जिस भूमिका में रखता है उसको वो निभाता है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ में कुछ समय से राजनीतिक खींचतान चल रही है। सीएम बघेल ने अपने ऊपर ऊँगली उठाने वालों पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि राज्‍य में राजनीतिक अस्थिरता लाने वालों के मंसूबे कभी सफल नहीं हो सकेंगे। गौरतलब है कि दो दिन पहले भी उन्‍होंने राहुल गाँधी से मुलाकात की थी

नाम- सलमान खान, अब्बा- सलीम खान: हिंदू लड़की पर डाला इस्लाम कबूलने और निकाह का दबाव, पूरे परिवार को मारने की धमकी

मध्य प्रदेश के खंडवा से एक हिंदू लड़की पर धर्मांतरण और निकाह के लिए दबाव डालने का मामला सामने आया है। आरोपित सलमान खान लड़की के मोबाइल पर गंदे मैसेज भी भेजता था। रिपोर्ट के अनुसार निकाह नहीं करने पर लड़की के पूरे परिवार की हत्या की धमकी भी दी।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने सलमान को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश-2020 के तहत कार्रवाई की गई है। खबर के अनुसार घटना खंडवा जिले के पिपलोद क्षेत्र की है। पिपलिया कला गाँव की रहने वाली पीड़िता को आऱोपित लंबे समय से परेशान कर रहा था। एक दिन जब वह शहर के एसएन कॉलेज में एडमिशन लेने के लिए गई तो सिंगोट के रहने वाले सलीम खान के बेटे सलमान खान (22) ने उसे गेट पर ही रोक लिया। आरोपित ने पीड़िता के साथ छेड़छाड़ की और धमकी दी कि अगर वह धर्म परिवर्तन कर उससे निकाह नहीं करती है तो वह उसे और उसके परिवार की हत्या कर देगा।

प्रताड़ना से तंग युवती ने इसकी जानकारी अपने परिजनों को दी। इसके बाद परिवार के लोगों के साथ वह शहर कोतवाली गई और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस को दिए अपने बयान में पीड़िता ने बताया कि सलमान खान उसे कई दिनों पर परेशान कर रहा है औऱ मोबाइल पर आपत्तिजनक मैसेज भेजता था। पीड़िता ने कहा, “वह मुझ पर बार-बार धर्म परिवर्तन कर इस्लाम कबूल और निकाह करने का दबाव डाल रहा है।”

पीड़िता ने कहा कि गुरुवार (26 अगस्त 2021) को जब मैं एसएन कॉलेज में ऑनलाइन एडमिशन के लिए आई थी तो गेट के बाहर उसने मेरे साछ छेड़खानी की। पीड़िता ने पुलिस से उसे और उसके परिवार को सुरक्षा देने की माँग की है। बहरहाल इंडियन पीनल कोड की धारा 354 डी (किसी का पीछा करना), 354 (स्त्री का मानभंग करने के इरादे से उसपर हमला), 354 क (यौन उत्पीड़न), 506 (धमकी देना) और धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 के तहत केस दर्ज किया गया है।

मुंबई पुलिस का कॉन्स्टेबल, कमाई ₹1.5 करोड़/साल: अमिताभ बच्चन का है बॉडीगार्ड, अब किया गया ट्रांसफर

बॉलीवुड हीरो अमिताभ बच्चन के बॉडीगार्ड जितेंद्र शिंदे द्वारा 1.5 करोड़ रुपए की सालाना कमाई करने का मामला सामने आया है। इसके बाद आरोपित कॉन्स्टेबल का ट्रांसफर कर दिया गया है। इस बीच मुंबई पुलिस ने मामले की विभागीय जाँच शुरू कर दी है। पुलिस ये जानने की कोशिश कर रही है कि शिंदे ने बिग बी से ये पैसे कमाए या किसी और से।

रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई पुलिस के अंतर्गत काम करने वाले शिंदे लंबे अरसे से अमिताभ बच्चन के बॉडीगार्ड के तौर पर तैनात थे। इस मामले में शिंदे का कहना है कि वो एक सिक्यॉरिटी एजेंसी भी चलाते हैं। उस बिजनेस को उनकी पत्नी उनके नाम से चलाती हैं। इसके साथ ही शिंदे ने मुबंई पुलिस को बताया है कि अभिनेता अमिताभ बच्चन ने उन्हें डेढ़ करोड़ रुपए नहीं दिए। जितेंद्र शिंदे अमिताभ बच्चन के साथ हर वक्त साए की तरह रहते थे।

जितेंद्र शिंदे वर्ष 2015 से बिग बी के बॉडीगार्ड हैं और मुंबई पुलिस के मुताबिक, एक पुलिस वाले को पाँच साल से ज्यादा एक जगह तैनात नहीं किया जा सकता है। अमिताभ बच्चन को सिक्योरिटी दी गई है। इसी कारण उनके साथ हमेशा दो सिपाही तैनात रहते हैं। बताया जाता है कि शिंदे बिग बी के पसंदीदा बॉडीगार्ड में से एक थे। फिलहाल शिंदे का ट्रांसफर साउथ मुंबई के ही एक पुलिस स्टेशन में कर दिया गया है।

वहीं अगर बिग बी के प्रोजेक्ट्स पर नजर डालें तो उनकी फिल्म ‘चेहरे’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म का निर्देशन रूमी जाफरी ने किया है। फिल्म में अमिताभ बच्चन के साथ इमरान हाशमी, रिया चक्रवर्ती, अन्नू कपूर और रघुबीर यादव मुख्य भूमिका में हैं। साथ ही उनकी अगली फिल्म ‘झुंड’ भी रिलीज के लिए तैयार है। इसके अलावा अमिताभ बच्चन ‘ब्रह्मास्त्र’, ‘मेडे’ और ‘गुडबाय’ जैसी फिल्मों में भी नजर आ सकते हैं।

ISKP – काबुल एयरपोर्ट पर हमला करने वाला आतंकी संगठन: कब पैदा हुआ, ISIS और तालिबान का दोस्त है या दुश्मन?

अफगानिस्तान के काबुल स्थित हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के अंदर गुरुवार (26 अगस्त 2021) को हुए बम विस्फोटों में 13 अमेरिकी सैनिकों सहित 100 से अधिक लोग मारे गए। इस हमले के कारण काबुल से लोगों को निकालने का अभियान भी प्रभावित हुआ। अमेरिकी अधिकारियों ने इसके लिए इस्लामिक स्टेट के क्षेत्रीय सहयोगी इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) को इस हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

आतंकी संगठन ISKP ने काबुल हवाई अड्डे पर बमबारी की भी ज़िम्मेदारी ले ली है और उस आतंकवादी की तस्वीरें जारी की हैं, जिसने काबुल हवाई अड्डे के अंदर खुद को उड़ा लिया था। आईएसकेपी का अब्दुल रहमान अल-लोहरी कथित तौर पर आत्मघाती हमलावर था।

इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISKP) क्या है?

ISIS-K या इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) – ISIS या इस्लामिक स्टेट का क्षेत्रीय सहयोगी है, जिसकी स्थापना ईराक और सीरिया में हुई थी। इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत, या ISKP, इस्लामिक स्टेट आतंकी समूह की अफगान शाखा है। यह अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत में सक्रिय है।

साल 2015 में ISKP की स्थापना अफगान तालिबान के असंतुष्ट सदस्यों और उसके पाकिस्तानी समकक्ष TTP को मिलाकर की गई थी। इस खतरनाक इस्लामिक आतंकी संगठन के अधिकतर रंगरूट अफगानिस्तान और पाकिस्तान के मदरसों से निकलते हैं। ये अफगानिस्तान और पाकिस्तान के दल बदलने वाले सदस्य हैं, जो कि खुद को उदारवादी मानते हैं। आईएसकेपी अफगानिस्तान के सभी जिहादी आतंकवादी समूहों में सबसे अधिक कट्टरपंथी और हिंसक है।

अब यह शहरी मध्यवर्गीय मुस्लिमों को अपने संगठन में भर्ती करके विश्वविद्यालयों को टार्गेट कर रहा है, ताकि युवा मुस्लिमों को आतंकवादी नेटवर्क में शामिल कर सके। कई भारतीय मुस्लिम, खास तौर पर केरल के रहने वाले हाल के दिनों में इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) में शामिल होने के लिए अफगानिस्तान गए थे। भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठानों ने बीते दो सालों में भारत की धरती पर सक्रिय कई ISKP आतंकवादियों का पता लगाने में कामयाबी हासिल की है।

ISKP कथित तौर पर नंगरहार के पूर्वी प्रांत से ऑपरेट किया जाता है। यह जगह रणनीतिक तौर पर अफगानिस्तान और पाकिस्तान में उसके आसपास नशीली दवाओं और मानव तस्करी का मार्ह है।

इस्लामिक स्टेट में सबसे अधिक कट्टर है ISKP

आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISKP ) हाल के वर्षों में लड़कियों के स्कूलों, अस्पतालों और एक प्रसूति वार्ड को निशाना बनाकर किए गए आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार है, जहाँ उन्होंने कथित तौर पर गर्भवती महिलाओं और नर्सों की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

आईएसकेपी आईएस के वैश्विक नेटवर्क का एक हिस्सा मात्र है और यह तालिबान के विपरीत आईएसकेपी अफगानिस्तान पर नियंत्रण करना चाहता है। यह संगठन वैश्विक स्तर पर ‘जिहाद’ छेड़ने की कोशिश में है और यह पश्चिमी, अंतरराष्ट्रीय और मानवीय टार्गेट पर हमला करता है। बताया जाता है कि अकेले अफगानिस्तान में इसके करीब 2,000-3,000 लड़ाके हैं, लेकिन हाल के वर्षों में इसे काफी नुकसान भी हुआ है।

आईएसकेपी के 9/11 हमले को अंजाम देने वाले अल-कायदा के साथ मजबूत संबंध हैं।

तालिबान के साथ संबंध

ISKP ने हक्कानी नेटवर्क के माध्यम से तालिबान के साथ संबंध स्थापित किए हैं और उसके अल-कायदा के साथ लंबे समय से जुड़े हुए विदेशी इस्लामिक आतंकवादी समूहों के साथ घनिष्ठ संबंध हैं। विशेषज्ञों का मानना ​​​​है कि तालिबान के सहयोगी हक्कानी नेटवर्क और ISKP ने 2019 और 2021 के बीच पाकिस्तान स्थित अन्य आतंकी समूहों के लॉजिस्टिक सपोर्ट से कई बड़े हमलों को अंजाम दिया है।

अफगानिस्तान के काबुल शहर में तालिबान के कब्जे के बाद जिहादी संगठन ने पुल-ए-चरकी जेल से बड़ी संख्या में कैदियों को रिहा कर दिया था, जिनमें कथित तौर पर ISKP और अल-कायदा के आतंकवादी शामिल थे। इससे अब इन आतंकियों की संख्या भी काफी बढ़ गई है।

हालाँकि, ISKP के तालिबान के साथ बड़े मतभेद हैं। आईएसकेपी ने तालिबान पर जिहाद और युद्ध के मैदान को छोड़कर कतर के दोहा में ‘पॉश होटलों’ में अमेरिका के साथ बातचीत के जरिए शांति समझौता करने का आरोप लगाया है।

पति को बोली ओरल सेक्स करो… प्राइवेट पार्ट में लगा रखी थी जहर: वायरल है यह खबर, लेकिन जानिए इसकी सच्चाई

इन दिनों लगभग हर हिंदी मीडिया चैनल/वेबसाइट (कुछ तो अंग्रेजी वाले भी) पर एक खबर चलाई जा रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि ब्राजील में एक महिला ने अपने प्राइवेट पार्ट में जहर लगा कर ओरल सेक्स के दौरान पति को मारने की योजना बनाई थी।

खबर शॉकिंग थी, हमने भी करने की सोची। खबर के ऑरिजनल सोर्स तक पहुँचने के लिए गूगल का सहारा लिया। जो सोर्स मिला, उसे देख कर माथा पीट लिया।

प्राइवेट पार्ट में जहर लगा मारने वाली खबर झूठी?

पड़ताल करने पर पता चला कि यह खबर तो सही है लेकिन ऐसा अभी नहीं हुआ। यह 8 साल पुरानी घटना है। 2-4 सिंपल कीवर्ड से 2013 की खबर गूगल सर्च के पहले पन्ने पर ही मिल गई। अपने यहाँ की मीडिया को इससे क्या लेना-देना? तमाम मीडिया हाउस ने इसे बिना क्रॉस चेक किए चलाया। सोशल मीडिया पर भी बिना सच्चाई जाने इस खबर को खूब शेयर किया गया।

poison private part oral sex
poison private part oral sex – सिंपल कीवर्ड से 2013 की खबर गूगल सर्च के पहले पन्ने पर ही मिल गई लेकिन तमाम इंडियन मीडिया ने इसे बिना क्रॉस चेक किए चलाया

आखिर खबर है क्या?

समाज में कई दंपत्ति के रिश्तों में खटास आ जाती है। जिसका हल आपस में बातचीत कर के और समस्याओं को सुलझा कर निकाला जा सकता है। मगर कुछ कपल्स के बीच झगड़े इस हद तक बढ़ जाते हैं कि वो हिंसक मोड़ ले लेते हैं। ऐसा ही कुछ एक महिला के साथ साल 2013 में हुआ था, जो अपने पति से नाखुश थी और उससे तलाक लेना चाहती थी मगर उसका पति उसे तलाक नहीं दे रहा था। तब पत्नी ने पति के खिलाफ जानलेवा चाल चली मगर उसका खामियाजा उसे खुद भुगतना पड़ गया। 

द वीक के मुताबिक ये घटना 2013 की है, जो हाल ही में सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियों में है। ब्राजील की एक महिला अपने पति से नाखुश थी, जिसके चलते वो उससे तलाक लेना चाहती थी। उसने कई बार अपने पति से इस बारे में कहा था मगर उसका पति उसे तलाक देने के लिए राजी नहीं थी। जब महिला उससे बोल-बोल कर थक गई तब उसने अपने पति की हत्या करने की ठानी। काफी दिन विचार करने के बाद महिला को बेहद ही खतरनाक तरीका सूझा, जिससे उसने पति की जान लेने का निर्णय लिया।

रिपोर्ट के अनुसार पत्नी ने अपने प्राइवेट पार्ट पर जहर लगा लिया। संबंध बनाते वक्त पति को अजीब सी बदबू आई। पति को लगा कि पत्नी को शारीरिक रूप से कोई समस्या है और उसने तुरंत जिद किया कि वो उसके साथ चलकर डॉक्टर को दिखाए। जब दोनों डॉक्टर के पास पहुँचे और पत्नी का टेस्ट हुआ तो डॉक्टर भी हैरान रह गईं। 

रिपोर्ट से पता चला कि महिला ने अपने प्राइवेट पार्ट के अपनी काफी मात्रा में जहर डाल रखा है, जिससे उसके पति की मौत तो हो ही जाती साथ ही महिला की भी मौत निश्चित थी। पत्नी का इलाज हुआ और डॉक्टर ने जहर निकाल दिया मगर पति ने पत्नी को माफ नहीं किया। उसने तुरंत हत्या की कोशिश करने का आरोप पत्नी पर लगाते हुए पुलिस में केस दर्ज कर दिया था।

इससे साबित होता है कि यह खबर सही है लेकिन अभी ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। अभी 8 साल पुरानी खबर वायरल की जा रही है।

13 अमेरिकी सैनिकों की मौत, कुल 90 की गई जान: काबुल एयरपोर्ट हमले के बाद बायडेन बोले – ‘चुन-चुन कर मारेंगे’

अफगानिस्तान के काबुल एयरपोर्ट पर गुरुवार (26 अगस्त 2021) को हुए आत्मघाती हमले में 13 अमेरिकी सैनिकों समेत कुल 90 लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है। इसके अलावा करीब 150 लोग घायल भी हुए हैं। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत ने ली है। आतंकी संगठन ने इस हमले को अंजाम देने वाले आतंकी की तस्वीर भी जारी कर दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह तस्वीर आत्मघाती हमलावर अब्दुल रहमान अल लोगहरि की है, जो लोगार प्रांत का रहने वाला माना जा रहा है। हमलावर की तस्वीर के साथ जारी संदेश में आतंकी संगठन ने दावा किया है कि ISIS के इस हमले 160 अमेरिकी सैनिक और उनके सहयोगी मारे गए हैं।

इस घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन में अपने बयान में आतंकियों का चुन-चुन कर शिकार करने की बात कही है। उन्होंने कहा, “हम माफ नहीं करेंगे। हम नहीं भूलेंगे। हम चुन-चुनकर तुम्हारा शिकार करेंगे और मारेंगे। तुम्हें इसका अंजाम भुगतना ही होगा।” बाइडेन ने स्पष्ट कर दिया है कि इन हमलों के बावजूद अमेरिका अपने अभियान को नहीं रोकेगा और लोगों को अफगानिस्तान से बाहर निकालना जारी रखेगा।

इस हमले को लेकर अमेरिकी मध्य कमान के प्रमुख जनरल केनेथ एफ मैकेंजी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौतों की पुष्टि करते हुए दावा किया कि बीते 10 सालों में अमेरिकी सेना के खिलाफ यह सबसे घातक हमला किया गया है। जनरल मैकेंजी ने संवाददाताओं से कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, दो आत्मघाती हमलावरों, जो आईएसआईएस लड़ाके थे, हवाई अड्डे पर एबी गेट के आसपास और बैरन होटल के आसपास के क्षेत्र में विस्फोट किया।”

उन्होंने आगे कहा, “एबी गेट पर हमले के बाद आईएसआईएस बंदूकधारियों ने हमला किया, जिन्होंने नागरिकों और अमेरिकी सेना पर गोलियाँ चलाईं। इस समय हम जानते हैं कि हमले में 12 अमेरिकी सेवा सदस्य मारे गए हैं और 15 अन्य घायल हुए हैं। कई अफगान नागरिक भी मारे गए या घायल हुए।”

गौरतलब है कि विस्फोट से पहले बृहस्पतिवार को ब्रिटिश सरकार ने कहा था कि इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के आतंकवादियों द्वारा हवाई अड्डे पर जमा लोगों को निशाना बनाकर हमला करने की बेहद विश्वसनीय खुफिया रिपोर्ट मिली है। वहीं, इस सप्ताह के शुरू में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने भी अफगानिस्तान में आईएसआईएस से संबद्ध ISIS-K द्वारा हमला करने की आशंका जताई थी।

टीचर ने नहीं काटा 8 साले के छात्र का रक्षा सूत्र, फीस की वजह से पूरा ड्रामा: दिल्ली मॉडल पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल दावा

बिहार की राजधानी पटना के दिल्ली मॉडल पब्लिक स्कूल (DMPS) में 8 साल के बच्चे का ‘कलावा’ (लाल रंग का रक्षा सूत्र) काटने के मामले में अब स्कूल ने अपना पक्ष सामने रखा है। हमने इस मामले में स्कूल के प्रिंसिपल दीपक कुमार सिंह से बात की। उनका कहना है कि बच्चे की कलाई पर बँधे कलावा को स्कूल के टीचर ने नहीं काटा है। उन्होंने बस बच्चों से रक्षा सूत्र काट कर आने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि बच्चे ने घर पर खुद से कलावा काट लिया और इसी दौरान उसकी कलाई कट गई होगी। 

इतना ही नहीं, दिल्ली मॉडल पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल दीपक कुमार सिंह का तो यहाँ तक कहना है कि प्रज्ञा भूमिहार (जिस बच्चे का कलावा कटने पर बवाल, उसकी बड़ी बहन) ने जो कटे हुए निशान के साथ वाले हाथ की फोटो शेयर की है, वह भी बच्चे का नहीं है, बल्कि वह किसी 20-22 साल के लड़के का है। हालाँकि जब ऑपइंडिया ने इस पर प्रज्ञा से पूछा तो उनका कहना है कि वह उसी बच्चे का हाथ है और उनके पास उस बच्चे का पूरा वीडियो भी है, लेकिन नाबालिग होने की वजह से हम वह वीडियो इस्तेमाल नहीं कर सकते।

इस पूरे विवाद के पीछे की वजह पूछे जाने पर स्कूल के प्रिंसिपल दीपक कुमार सिंह ने इसे फीस का मामला बताया। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला स्कूल फीस को लेकर है। उनके अनुसार बच्चे के परिवार ने अप्रैल से लेकर अभी तक फीस जमा नहीं करवाया है। इसके लिए वो उन्हें बार-बार नोटिस देते रहते हैं, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आता और जब मिलने के लिए बुलाया जाता है तो कहते हैं कि टाइम नहीं है। वहीं इस आरोप पर प्रज्ञा का कहना है कि स्कूल तो अप्रैल से बंद है तो फीस का तो सवाल ही नहीं उठता। प्रज्ञा के अनुसार स्कूल अभी खुली है और इस दौरान स्कूल की तरफ से ऑनलाइन क्लास भी नहीं चल रही थी तो फीस किस बात की?

आरोप-प्रत्यारोप का दौर यहीं पर नहीं रूका। प्रिंसिपल दीपक कुमार सिंह का कहना है कि स्कूल में उनसे मिलने के दौरान प्रज्ञा का व्यवहार काफी गंदा रहा तो वहीं प्रज्ञा का कहना है कि स्कूल के टीचर ने उनसे अच्छे से बात नहीं की। प्रज्ञा के अनुसार स्कूल के लोग उनकी बात सुनने में आना-कानी कर रहे थे। प्रज्ञा ने कहा कि स्कूल ने उनका फोन भी छीन लिया था। इस पर प्रिंसिपल का कहना है कि प्रज्ञा स्कूल में आते के साथ ही बात करने के बजाय वीडियो बनाने लगी और वो लगातार ट्वीट व लाइव कर रही थी, इसलिए उनका फोन जब्त किया गया था, लेकिन फिर वापस कर दिया गया। वहीं प्रज्ञा ने कहा कि फोन छीन लेने के बाद उन्होंने कंकड़बाग पत्रकार नगर थाने से पुलिस को बुलाया, जिन्होंने उनका फोन वापस दिलवाया।

बच्चे के कलावा काटे जाने वाले मुद्दे पर दिल्ली मॉडल पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल ने कहा कि उन्होंने पुलिस को सीसीटीवी फुटेज भी दिखाया, जिसमें टीचर सभी बच्चे की कलाई चेक रहे थे। इसके बाद पुलिस ने प्रज्ञा भूमिहार और उनके साथ आए लोगों से पूछा कि इसमें तो कुछ भी नहीं दिख रहा है तो फिर आप किस आधार पर आरोप लगा रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने निरीक्षण के बाद मामले को वहीं पर खत्म कर दिया। मगर प्रज्ञा का कहना है कि पुलिस ने कुछ भी नहीं किया, बस उनका फोन वापस दिलवा दिया। इसके अलावा उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

बता दें कि प्रज्ञा ने बताया था कि कलावा पहनने की वजह से उनकी बहन को भी सजा दी गई थी, फील्ड में राउंड में लगवाया गया था। इस बारे में पूछने पर प्रिंसिपल का कहना है कि उसे कलावा पहनने पर नहीं, लेट आने की वजह से राउंड लगवाया गया था। इसके अलावा प्रिंसिपल ने कहा कि प्रज्ञा का भाई कक्षा 4 नहीं बल्कि कक्षा 5 और बहन कक्षा 7 नहीं, बल्कि कक्षा 8 में पढ़ती है। इस पर प्रज्ञा का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से बिना परीक्षा के अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया गया, इसलिए उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी।

उल्लेखनीय है कि प्रज्ञा ने हमारे साथ बातचीत में बताया था कि उनका भाई कक्षा 4 में पढ़ता है। उसने अपनी कलाई पर ‘कलावा’ बाँध रखा था। जिसे देख कर स्कूल के दीप नारायण नाम के शिक्षक को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने पिलास (एक प्रकार का औजार, जो तार को मोड़ने, काटने और ऐंठने आदि के लिए इस्तेमाल किया जाता है) से इस तरह कलावा काटा कि बच्चे की कलाई पर गहरी चोट आई। उन्होंने कलाई पर आई निशान वाली फोटो भी  ट्विटर पर डाली थी।

सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर: 1500 साल से अडिग एक रानी के प्रेम की निशानी Vs 500 साल पुराना ताजमहल

छत्तीसगढ़ राज्य हमेशा से ही अपनी जनजातीय संस्कृति के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन राज्य में कई ऐसे स्थान हैं जो आज भी मुख्यधारा से कहीं दूर हैं। ऐसा ही एक स्थान है महासमुंद जिले में स्थित सिरपुर, जिसे प्राचीनकाल में श्रीपुर कहा जाता था। पौराणिक भूमि श्रीपुर में कई ऐसे देवस्थानों के अंश मिलते हैं जो कई सदियों पुराने माने जाते हैं। इन्हीं देवस्थानों में से एक है, सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर।

इतिहास में दर्ज कई विनाशकारी आपदाओं को झेलने वाला यह मंदिर भारत का पहला लाल ईंटों से बना मंदिर है। साथ ही प्रेम की निशानी छत्तीसगढ़ के इस मंदिर को नारी के मौन प्रेम का साक्षी माना जाता है।

मंदिर का इतिहास एवं संरचना

सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर का निर्माण सन् 525 से 540 के बीच हुआ। सिरपुर (श्रीपुर) में शैव राजाओं का शासन हुआ करता था। इन्हीं शैव राजाओं में एक थे सोमवंशी राजा हर्षगुप्त। हर्षगुप्त की पत्नी रानी वासटादेवी, वैष्णव संप्रदाय से संबंध रखती थीं, जो मगध नरेश सूर्यवर्मा की बेटी थीं। राजा हर्षगुप्त की मृत्यु के बाद ही रानी ने उनकी याद में इस मंदिर का निर्माण कराया था। यही कारण है कि लक्ष्मण मंदिर को एक हिन्दू मंदिर के साथ नारी के मौन प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है।

नागर शैली में बनाया गया यह मंदिर भारत का पहला ऐसा मंदिर माना जाता है, जिसका निर्माण लाल ईंटों से हुआ था। लक्ष्मण मंदिर की विशेषता है कि इस मंदिर में ईंटों पर नक्काशी करके कलाकृतियाँ निर्मित की गई हैं, जो अत्यंत सुन्दर हैं क्योंकि अक्सर पत्थर पर ही ऐसी सुन्दर नक्काशी की जाती है। गर्भगृह, अंतराल और मंडप, मंदिर की संरचना के मुख्य अंग हैं। साथ ही मंदिर का तोरण भी उसकी प्रमुख विशेषता है।

मंदिर के तोरण के ऊपर शेषशैय्या पर लेटे भगवान विष्णु की अद्भुत प्रतिमा है। इस प्रतिमा की नाभि से ब्रह्मा जी के उद्भव को दिखाया गया है और साथ ही भगवान विष्णु के चरणों में माता लक्ष्मी विराजमान हैं। इसके साथ ही मंदिर में भगवान विष्णु के दशावतारों को चित्रित किया गया है। हालाँकि यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है लेकिन यहाँ गर्भगृह में लक्ष्मण जी की प्रतिमा विराजमान है। यह प्रतिमा 5 फन वाले शेषनाग पर आसीन है।

विनाशकारी आपदाओं को झेलने वाला प्रेम का प्रतीक

अक्सर हमें प्रेम के प्रतीक में आगरा के ताजमहल के बारे में ही बताया गया लेकिन एक नारी और पुरुष के वास्तविक प्रेम के प्रतीक सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर को हमारी जानकारी से हमेशा दूर रखा गया क्योंकि यह एक हिन्दू मंदिर था। एक रानी का अपने राजा के प्रति प्रेम इतना प्रगाढ़ था कि उन्होंने एक ऐसे मंदिर का निर्माण कराया, जो कई आपदाओं को झेलने के बाद भी आज उसी स्वरूप में है, जैसे आज से 1,500 वर्ष पहले था।

ऐतिहासिक जानकारियों के अनुसार 12वीं शताब्दी में सिरपुर में आए विनाशकारी भूकंप ने तत्कालीन श्रीपुर का पूरा वैभव छीन लिया था। इस भूकंप में पूरा श्रीपुर नष्ट हो गया था लेकिन यह लक्ष्मण मंदिर अप्रभावित रहा। उसके बाद 14वीं-15वीं शताब्दी के दौरान महानदी की भयानक बाढ़ ने सिरपुर में तबाही मचा दी थी। इन दोनों विनाशकारी आपदाओं के चलते सिरपुर के अनेकों मंदिर और धर्मस्थल तबाह हो गए लेकिन एक पत्नी के निश्छल प्रेम का यह प्रतीक बिना किसी नुकसान के सदियों से भक्ति और श्रद्धा की कहानी कहता आ रहा है।

कैसे पहुँचें?

सिरपुर स्थित लक्ष्मण मंदिर से महासमुंद जिला मुख्यालय की दूरी लगभग 38 किलोमीटर (किमी) है। यहाँ का नजदीकी हवाईअड्डा रायपुर में स्थित है, जो मंदिर से 75 किमी की दूरी पर है।

महासमुंद रेलवे स्टेशन, मंदिर का नजदीकी रेलवे स्टेशन है, जिसकी दूरी लगभग 40 किमी है। रायपुर जंक्शन से मंदिर की दूरी लगभग 83 किमी है। इसके अलावा लक्ष्मण मंदिर स्टेट हाइवे 9 पर स्थित है, जिसके माध्यम से यहाँ राज्य के विभिन्न शहरों से पहुँचा जा सकता है।

कुरान को WhatsApp यूनिवर्सिटी मानती हैं RJ सायमा? प्रोफेसर आनंद रंगनाथन के सवालों से भागीं

रेडियो मिर्ची की आरजे सायमा का गुरुवार (अगस्त 26, 2021) को ट्विटर पर उन बातों से आमना-सामना हुआ जो ‘गैर-मुसलमानों’ या ‘काफिरों’ के लिए इस्लाम में कही गई हैं। इसके दौरान सायमा ने पहले पूरे मुद्दे में अपनी टांग खुद घुसाई और उसके बाद दूसरों को कट्टर करार देकर चलती बनीं। अब उनके हालिया ट्वीट में बस ये लिखा गया है, “बात उनसे कीजिए जो सुनने को तैयार हों, न कि उनसे जो सुनाने को आतुर हों।”

पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब कवि मनोज मुंतशिर ने अपनी एक आने वाली वीडियो की क्लिप को शेयर किया और बताया कि कैसे हम भारतीयों ने अपनी विरासत के साथ हुई छेड़छाड़ को आसानी से स्वीकार कर लिया। वीडियो में उन्होंने याद दिलाया कि हम भारतीय उन आक्रमणकारियों, लुटेरों को नायक मानते हैं जिन्होंने कभी सैंकड़ों भारतीयों को मारा। मुंतशिर अपनी कविता में मुगलों को डकैत कहते हैं और साथ में अपनी धरोहरों की पहचान करने की बात कहते हैं।

इस वीडियो के पोस्ट होने के बाद कई लिबरल और कट्टरपंथी नाराज हो गए। सबने मुंतशिर को मुगलों की बर्बरता के ख़िलाफ़ बोलने के लिए सुनाया। इसमें एक आरजे सायमा भी थीं। उन्होंने ट्वीट करते हुए मुंतशिर को ‘कट्टर’ कहा और बताया कि कट्टरता का शिक्षा से कोई लेना-देना नहीं होता। सायमा ने लिखा, “अगर आप साक्षर हैं और कट्टर हैं तो ये बहुत घातक कॉकटेल है।”

सायमा के इस ट्वीट के बाद कई नेटीजन्स का ध्यान उनकी ओर गया। लोगों ने उन्हें बताया कि मुंतशिर को अधिकार है कि वो अपने ख्याल इस मुद्दे पर रखें और इसी के साथ सायमा को सलाह दी कि अगर काउंटर करना ही है तो फिर तथ्यों के साथ किया जाए।

इस बीच वैज्ञानिक व प्रोफेसर आनंद रंगनाथन ने भी सायमा की चालाकी की पोल खोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनके ट्वीट के बदले प्रोफेसर आनंद रंगनाथन ने कुरान की आयतें पेश की और दिखाया कि कैसे इस्लाम में काफिरों के ख़िलाफ़ हिंसा की बातें लिखी गई है। उन्होंने तीन आयतें सायमा के सामने रखीं ताकि सायमा अपनी बुद्धि में ये सबूतों के साथ डाल पाएँ कि वाकई इस्लाम में काफिरों के विरुद्ध हिंसा की बात है।

प्रोफेसर आनंद रंगनाथन ने जिन आयतों को सायमा के समक्ष पेश किया वह इस तरह हैं:

सूरा 4(अन-निसा) आयत 56:

“जिन लोगों ने हमारी आयतों का इनकार किया, उन्हें हम जल्द ही आग में झोंकेंगे। जब भी उनकी खालें पक जाएँगी, तो हम उन्हें दूसरी खालों में बदल दिया करेंगे, ताकि वे यातना का मज़ा चखते ही रहें। निस्संदेह अल्लाह प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।”

सूरा-98 (अल-बय्यानह) आयत 6:

बेशक जिन लोगों ने कुफ़ किया अहले किताब और मुश्रिकों में से, वह जहन्नुम की आग में हमेशा रहेंगे, यही लोग बदतरीन मखलूक हैं।

सूरा 4 (अन-निसा) आयत 34:

“पुरुष स्त्रियों के व्यवस्थापक हैं, इस कारण कि अल्लाह ने उनमें से एक को दूसरे पर प्रधानता दी है तथा इस कारण कि उन्होंने अपने धनों को उनपर ख़र्च किया है। अतः सदाचारी औरतें वो हैं, जो आज्ञाकारी तथा उनकी (अर्थात, पतियों की) अनुपस्थिति में अल्लाह की रक्षा में उनके अधिकारों की रक्षा करती हों। फिर तुम्हें जिनकी अवज्ञा का डर हो, तो उन्हें समझाओ और शयनागारों (सोने के स्थानों) में उनसे अलग हो जाओ तथा उन्हें मारो। फिर यदि वे तुम्हारी बात मानें, तो उनपर अत्याचार का बहाना न खोजो और अल्लाह सबसे ऊपर, सबसे बड़ा है।”

प्रोफेसर आनंद रंगनाथन के इन तर्कों के बाद सायमा ने प्रतिक्रिया में दोबारा ट्वीट किया और उन्हें कहा कि वो आभार व्यक्त करती हैं इस बात को साबित करने के लिए जो उन्होंने कहा था वह सही बात है कि कट्टरता का शिक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बाद वह आनंद रंगनाथन को भी एक ‘शिक्षित कट्टर’ कहकर बात खत्म कर देती हैं।

मात्र एक घंटे के भीतर आरजे सायमा के लिए दो पढ़े लिखे लोग- डॉ आनंद रंगनाथन और मनोज मुंतशिर, अचानक से कट्टर बन जाते हैं। कारण बस यही होता है कि वो इस्लाम और मुगलों के ऊपर अपना पक्ष या सच्चाई रख रहे होते हैं।

इसके बाद प्रोफेसर आनंद रंगनाथन दोबारा से आरजे सायमा को जवाब देते हैं और कहते हैं कि इसका मतलब ये है कि कुरान की आयत पढ़ना कट्टरता होता है? रंगनाथन सवाल करते हैं कि क्या उन्होंने खुद कुरान की आयतों को पढ़ा है। फिर वो पूछते हैं, “क्या तुम अल्लाह के शब्दों की आलोचना कर रही हो?” 

जेएनयू प्रोफेसर उन्हें यह भी कहते हैं कि अगर ऐसा है तो इस्लाम के ख़िलाफ़ किए गए ट्वीट को डिलीट कर दें वरना फतवा जारी हो सकता है। अपने ट्वीट में वह कहते हैं, “मैं नहीं चाहता कि ‘सिर तन से जुदा गैंग’ तुम्हारे पास आए।” 

इसी बीच, रंगनाथन के बाद एक अन्य यूजर भी सायमा के ट्वीट पर पूछता है कि क्या उन्होंने पवित्र किताब में लिखी बातों को ‘कट्टर’ कहा है? इस ट्वीट पर आनंद रंगनाथन ने कहा कि आरजे सायमा को इसीलिए कहा था कि वो अपने ट्विटर से इन ट्वीट्स को डिलीट कर दें।

इतना कहने के साथ ही प्रोफेसर आनंद रंगनाथन ने एक और आयत (33:77) का जिक्र किया, जिसमें लिखा है, “जो लोग अल्लाह और उसके रसूल को दुख पहुँचाते हैं, अल्लाह ने उनपर दुनिया और आख़िर में लानत की है और उनके लिए अपमानजनक यातना तैयार कर रखी है।”

अब इतने सारे तथ्यों के बाद जब सायमा के पास कुछ नहीं बचा तो उन्होंने शर्मिंदगी से बचने के लिए वॉट्सएप यूनिवर्सिटी का हवाला दे दिया। बेहद लिबरल तरीके से सायमा ने प्रतिक्रिया में कहा कि क्या प्रोफेसर आनंद रंगनाथन ने वॉट्सएप यूनिवर्सिटी से यह सारा ज्ञान अर्जित किया है।

ध्यान देने वाली बात है कि आनंद रंगनाथन द्वारा प्रमाण के तौर पर पेश की गई आयतों को तर्कों से काटने के बजाय सायमा निजी होने लगीं। उन्होंने ये बताना चाहा कि रंगनाथन की बातें वॉट्सएप यूनिवर्सिटी से ली गई हैं और हिंसा की बातें फेक हैं।

मगर, प्रोफेसर आनंद रंगनाथन यहाँ भी नहीं रुके। इस बार सायमा का पैंतरा भाँपते हुए उन्होंने चुनौती दी कि सायमा बस उन्हें साबित कर दें कि जो आयतें उन्होंने पेश की हैं वो कुरान से नहीं हैं। उन्होंने यहाँ तक कहा कि सायमा जहाँ से चाहें वहाँ से उन्हें गलत साबित कर सकती हैं। ये उनके लिए खुली चुनौती हैं।

अब, वो सायमा जो इस्लाम के बचाव में मैदान में उतर आई थीं, वो पूरी बातचीत से पल्ला झाड़ कर भाग खड़ी हुईं और बिना प्रोफेसर रंगनाथन को गलत साबित किए, उन्होंने जवाब देना बंद कर दिया।

अब यह तो जाहिर है कि आरजे सायमा के पास कोई भी विश्वसनीय स्रोत नहीं हैं कि वो प्रोफेसर रंगनाथन को गलत साबित कर सकें। ऐसे में प्रोफेसर ने सोशल मीडिया यूजर्स और आरजे को सुनने वालों से अपील की है कि जब भी वो कॉल-इन पर लें तो उनसे पूछा जरूर जाए कि कुरान की सूरा 4 की आयत 34 में क्या लिखा है।