Home Blog Page 3461

जीसस का हैंडपंप, जीसस की बाल्टी: बांका के SC/ST इलाकों में 3 साल में 10000 हिंदू बना दिए गए ईसाई

बिहार में ईसाई धर्मांतरण के जोर पकड़ने को लेकर ऑपइंडिया लगातार आगाह करता रहा है। खासकर, ग्रामीण इलाकों से गरीबों को प्रलोभन देकर धर्मांतरित करने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। हाल ही में गया और सारण से इस तरह के मामले सामने आए थे। कुछ समय पहले हमने अपनी वीडियो रिपोर्टों में बताया था कि कैसे हिंदुओं को उनके धर्मग्रंथों के नाम पर बरगला कर चर्च अपनी ओर आकर्षित करते हैं। अब एक रिपोर्ट सामने आई है जिससे बता चलता है कि बिहार के बांका जिले के अनुसूचित जाति और जनजाति (SC/ST) की बहुलता वाले जंगली-पहाड़ी इलाकों में ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार जोरों पर है।

बांका में जारी धर्मांतरण को लेकर दैनिक जागरण ने डॉ. राहुल कुमार की एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसमें बताया गया है कि पिछले दो-तीन सालों के अंदर लगभग 10000 अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को ईसाई बनाया गया है। खराब आर्थिक स्थिति का फायदा उठाते हुए यह चर्च धर्मांतरण करवा रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक बांका के चांदन, कटोरिया और बौंसी में चर्च, धर्मांतरण के कार्य में संलिप्त हैं। चर्च, धर्मांतरण के लिए ऐसी बस्तियों का चयन कर रहे हैं जहाँ संसाधनों की कमी है। इन जगहों पर ईसाई धर्म के प्रचार के लिए हर रविवार को चर्च के प्रतिनिधि बैठक का आयोजन करते हैं। साथ ही धर्म बदलने वालों के लिए हर रविवार को जीसस की एक प्रार्थना सभा का आयोजन भी होता है। इसके अनुसार जयपुर, भैरोगंज, बाबूमहल, बेलहरिया, आमगाछी, बसमत्ता, चांदन सहित कई अन्य इलाकों के चर्च वर्षों से ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार और धर्मांतरण का केंद्र बने हुए हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि जब लॉकडाउन में लोगों की परेशानियाँ बढ़ीं तो यहाँ हैंडपंप (चापाकल) लगाए जाने लगे और उन्हें ‘जीसस वेल’ कहा जाने लगा। लोगों से कहा गया कि हैंडपंप में जीसस प्रवेश कर गए हैं जिससे यह जल का एक प्राकृतिक स्त्रोत बन जाएगा। साथ ही गरीबों को यह बताया जा रहा है कि जीसस ही असली भगवान हैं और जो परिवार ईसाई बन जाता है उसे जीसस वेल और बाल्टियाँ दी जाती हैं। ईसाई धर्म स्वीकार करने वाले परिवार के बच्चों को पढ़ाई के लिए चर्च बुलाया जाता है जहाँ उन्हें आवश्यक शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा इन परिवारों की लड़कियों की शादी के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।

रिपोर्ट में बांका के पुलिस अधीक्षक अरविन्द कुमार गुप्ता के हवाले से कहा गया है, “लोकतंत्र धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है, ऐसे में कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को अपनाने के लिए स्वतंत्र है।” धर्मांतरण के मामले पर उन्होंने कहा कि जबरन धर्मांतरण अपराध है, लेकिन अभी तक इसकी कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले ही बिहार के ही सारण से धर्मांतरण की खबरें आई थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार सारण के इसुआपुर प्रखंड के सुम्हां रामचौड़ा गाँव और मढ़ौरा में ईसाई मिशनरी हिंदुओं को तरह-तरह के प्रलोभन देकर पिछले एक साल से ग्रामीणों का धर्मांतरण करा रही है। ग्रामीणों का कहना था कि एक साल में 500 से अधिक लोग धर्म परिवर्तन कर चुके हैं। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने धर्मांतरण किया है।

बता दें कि जुलाई 2021 में दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि गया में पिछले दो साल में करीब आधा दर्जन गाँवों में धर्मांतरण हुआ है। वहीं, जिन लोगों पर धर्मांतरण कराने का आरोप लगा था, वो खुद भी कभी हिंदू थे।

‘The Empire में बाबर का महिमामंडन नहीं किया गया’- ट्रेलर देख हुई थी शिकायत, हॉटस्टार ने एक्शन लेने से किया इनकार

डिज्नी प्लस हॉटस्टार की आने वाली वेब सीरीज/शो ‘द एम्पायर’ को लेकर विवाद थमा नहीं है। लोग इस बात से नाराज हैं कि इस सीरीज के जरिए लाखों हिंदुओं को मारने वाले ‘बाबर’ का महिमामंडन किया जा रहा है। इस संबंध में प्लेटफॉर्म के ग्रीवांस ऑफिसर के पास कई शिकायतें पहुँची हैं, लेकिन सुनवाई करना तो दूर, इस मुद्दे पर ये कह दिया गया है कि ट्रेलर देख कर ये नहीं कहा जा सकता है कि इसमें बाबर का या किसी समुदाय का महिमामंडन हुआ है।

द एम्पायर को लेकर की गई शिकायत

कुल मिलाकर डिज्नी प्लस हॉटस्टार (नोवी डिजिटल एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड) के ग्रीवांस अधिकारी कनिष्क कुमार ने ‘द एम्पायर’ सीरीज को लेकर मिलीं शिकायतों पर किसी प्रकार की सुनवाई या कार्रवाई करने से मना कर दिया है। प्लेटफॉर्म का ऐसा रवैया तब है, जब आईटी रूल्स 2021 के तहत नियुक्त ग्रीवांस अधिकारी को शिकायतें भेजी गईं, जैसा कि नियम बताता है।

अधिकारी ने प्लेटफॉर्म की ओर से साफ कहा है कि उन्होंने सीरीज में बाबर का महिमामंडन नहीं किया और न ही सीरीज में अयोध्या का जिक्र है। शिकायतों पर संज्ञान लेने से इंकार करते हुए ग्रीवांस अधिकारी की ओर से ‘ऑब्जर्वेशन’ के नाम पर कहा गया है कि सिर्फ यूट्यूब पर सीरीज के छोटे-छोटे सीन देख कर ये नहीं कह सकते कि इससे किसी समुदाय की भावनाएँ आहत होंगी।

अधिकारी द्वारा जारी बयान का एक बिंदु

उल्लेखनीय है कि ‘द एम्पायर’ को देश की सबसे महंगी और ग्रैंड वेब सीरीज बताया जा रहा है। इस फिल्म में शबाना आजमी, कुणाल कपूर, डिनो मोरिया, दृष्टि धामी और राहुल देव प्रमुख भूमिका में नजर आएँगे। 8 एपिसोड की यह सीरीज पाश्चात्य लेखिका एलेक्स रदरफोर्ड की किताब ‘एम्पायर ऑफ द मोगुल: रेडर्स फ्रॉम द नॉर्थ’ पर आधारित है और यह 27 अगस्त को OTT पर रिलीज होने जा रही है। 

डिज्नी प्लस हॉटस्टार के यूट्यूब चैनल पर इस सीरीज का ट्रेलर 7 अगस्त 2021 को जारी किया गया था। इसके बाद ही इस पर प्रतिक्रियाएँ आनी शुरू हुईं। नोवी डिजिटल एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के ग्रीवांस अधिकारी कनिष्क कुमार द्वारा जारी बयान में भी उल्लेख किया गया है कि उन्हें 10 अगस्त 2021 को ‘द एम्पायर’ के संबंध में शिकायत वाला ईमेल आया था। इसी के जवाब में उन्होंने शिकायतकर्ता के पक्ष को खारिज करते हुए उसे ‘प्रीमैच्योर’ करार दिया और लिखा कि चाहे फिल्म हो या सीरीज, बिना उसे पूरी देखे राय निर्मित नहीं करनी चाहिए।

ग्रीवांस अधिकारी द्वारा लिया गया निर्णय

ट्रेलर के बाद हुई शिकायतों को खारिज करने का है अधिकार?

दिलचस्प बात यह है कि कंपनी के ग्रीवांस अधिकारी अपने आप इस बात को मान चुके हैं कि अगर कोई शख्स ट्रेलर देख कर शिकायतें करता है तो उन्हें उसे खारिज करने का अधिकार है। अपनी बात को सही साबित करने के लिए उन्होंने ‘ग्रहण’ का उदाहरण दिया है। इसमें बताया गया है कि उन्हें ‘ग्रहण’ सीरीज को लेकर भी ऐसी शिकायतें मिली थीं, लेकिन तब भी यही बात निकल कर आई थी कि छोटे ट्रेलर से धारणा नहीं बनानी चाहिए। इसके बाद उस अपील को प्रीमैच्योर कहकर खारिज कर दिया गया था।

कोर्ट से मिली डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को राहत

उल्लेखनीय है कि इसी साल भारत सरकार ने डिजिटल मीडिया यूजर्स की शिकायतों और उनकी समस्याओं के मद्देनजर नए आईटी रूल्स लागू किए थे। लेकिन कुछ दिन पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरीज और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड के लिए गाइडलाइंस) रूल्स, 2021 के दो प्रावधानों के पालन करने पर रोक लगाकर इन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को राहत प्रदान कर दी। हाईकोर्ट ने नियम 9(1) और 9(3) पर रोक लगाते हुए पाया था कि प्रथम दृष्टतया ये प्रावधान फ्रीडम ऑफ स्पीच के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करते हैं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2002 के मूल प्रावधानों के खिलाफ भी हैं।

नीरज चोपड़ा का भाला पाकिस्तानी अरशद नदीम के हाथ में: वीडियो से सारी शंकाओं को दूर किया गोल्डन बॉय ने

टोक्यो ओलंपिक के गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा ने टाइम्स ऑफ इंडिया को एक इंटरव्यू दिया था। इसके बाद सोशल मीडिया में इसे लेकर कुछ शंकाएँ एक पाकिस्तानी जैवलिन थ्रोअर अरशद नदीम को लेकर हो गई थी। अब नीरज चोपड़ा ने एक वीडियो ट्वीट कर सारी शंकाओं को विराम दे दिया है।

नीरज ने वीडियो में कहा:

“सभी को नमस्कार। सबसे पहले तो सभी का नमस्कार करता हूँ कि आप लोगों ने इतना सपोर्ट किया, इतनी दुआएँ दीं, इतना प्यार दिया। काफी अच्छा लग रहा है।

साथ में मैं बताना चाहूँगा कि अभी एक मुद्दा उठ रहा है, जो अभी मैंने एक इंटरव्यू में कहा कि जो जैवलिन है, वो पहली थ्रो करने से पहले अरशद नदीम जो पाकिस्तानी जैवलिन थ्रोअर है, उससे जैवलिन ली… तो उसका काफी बड़ा मुद्दा बना दिया है, जोकि एक बहुत ही सिंपल सी बात है कि हम जो हमारी पर्सनल जैवलिन होती है, वो हम उसको उसमें रखते हैं, जिसे सभी थ्रोअर उसे यूज कर सकते हैं। ये रूल है। इसमें ऐसा बिल्कुल कुछ भी गलत नहीं है कि वो जैवलिन लेके प्रिरेअर कर रहा था अपनी थ्रो के लिए और मैंने अपनी थ्रो के लिए उसको माँगा।

ये इतनी बड़ी बात नहीं है। मुझे काफी दुख है कि इस बात को मेरा सहारा लेके इतना बड़ा मुद्दा बना रहे हैं। आप सभी से यही विनती करता हूँ कि ऐसा ना करें। स्पोर्ट्स सभी को मिल कर चलना सिखाता है। हम सभी जैवलिन थ्रोअर प्यार से रहते हैं, सभी आपस में अच्छे से बात करते हैं, तो कोई भी ऐसी बात न कहें, जिससे हमको ठेस पहुँचे। थैंक यू।”

नीरज चोपड़ा-अरशद नदी-जैवलीन मामला

नीरज चोपड़ा ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया था कि वह फाइनल राउंड की शुरुआत में अपने भाले को खोज रहे थे और उन्हें वह मिल नहीं रहा था। तभी, उन्होंने पाकिस्तानी एथलीट अरशद नदीम को अपने जैवलीन के साथ घूमते देखा। चोपड़ा ने नदीम से फौरन उनका भाला लौटाने को कहा। नदीम ने उन्हें उस भाले को दिया और फिर चोपड़ा ने खेल में पार्टिसिपेट किया। चोपड़ा कहते हैं कि इसी वाकये की वजह से वह पहली थ्रो के समय थोड़ा हड़बड़ाहट में थे।

पत्नी की इच्छा के विरुद्ध यौन संबंध बनाना बलात्कार नहीं… लेकिन यौन सुख के लिए निजी अंग में ऊँगली व मूली करना अपराध: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक फैसले में कहा है कि पति द्वारा पत्नी के साथ जबरदस्ती बनाया गया शारीरिक संबंध दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आएगा। कोर्ट ने एक केस की सुनवाई के दौरान ये फैसला दिया और पति को ‘वैवाहिक बलात्कार’ (Marital Rape) के आरोपों से मुक्त कर दिया है। हालाँकि, कोर्ट ने व्यक्ति के खिलाफ अपनी पत्नी से अप्राकृतिक शारीरिक संबंध बनाने के आरोप में धारा 377 के तहत मामला चलाने की अनुमति दी।

कोर्ट का कहना है कि किसी व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध या यौन क्रिया बलात्कार नहीं है, भले ही वह बलपूर्वक या उसकी इच्छा के विरुद्ध हो, अगर पत्नी की उम्र अठारह वर्ष से अधिक है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “किसी व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध या यौन कृत्य, जिसकी पत्नी अठारह वर्ष से कम उम्र की न हो, बलात्कार नहीं है। इस मामले में शिकायतकर्ता आवेदक नंबर 1 की कानूनी रूप से विवाहित पत्नी है, इसलिए आवेदक नंबर 1/पति द्वारा उसके साथ संभोग करना या कोई भी यौन कृत्य करना, बलात्कार का अपराध नहीं माना जाएगा, भले ही वह बलपूर्वक या उसकी इच्छा के विरुद्ध हो।”

कोर्ट ने यह भी कहा, “हालाँकि, प्राइवेट पार्ट में उँगली और मूली डालने के अलावा उसने और क्या अप्राकृतिक शारीरिक संबंध बनाए, शिकायतकर्ता ने यह नहीं बताया। केवल इस आधार पर आईपीसी की धारा 377 के तहत तय किए गए लगाए गए आरोपों को गलत नहीं कहा जा सकता है। खासकर आईपीसी की धारा 377 के संदर्भ में, जहाँ अपराधी का इरादा बार-बार पीड़ित के प्राइवेट पार्ट में किसी वस्तु को डाल कर अप्राकृतिक यौन संतुष्टि पाना था और ऐसा कृत्य आईपीसी की धारा 377 के तहत अपराध है।”

बता दें कि इस मामले में सत्र न्यायालय के आदेश के खिलाफ एक आपराधिक रिवीजन दायर की गई थी। सत्र न्यायालय ने पत्नी की शिकायत पर पति के खिलाफ आईपीसी की धारा 498-ए, 34, 376 और 377 के तहत और ससुराल पक्ष के खिलाफ 498ए के तहत आरोप तय किए थे। शिकायतकर्ता का आरोप था कि शादी के कुछ दिनों बाद ही वे उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे और उसके साथ शारीरिक हिंसा की। पति के खिलाफ आरोप यह था कि उसने विरोध के बावजूद पत्नी की योनि (Vagina) में उँगलियाँ और मूली डालकर उसके साथ अप्राकृतिक शारीरिक संबंध बनाए।

रिवीजन याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए न्यायालय ने पति को आईपीसी की धारा 376 के तहत आरोपमुक्त कर दिया और आईपीसी की धारा 377, 498ए और 34 के तहत आरोपों को बरकरार रखा है।

गौरतलब है कि हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अप्राकृतिक सेक्स और दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने के एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा था कि 15 वर्ष से अधिक उम्र की नाबालिग ‘पत्नी’ के साथ यौन संबंध को ‘बलात्कार’ नहीं माना जाएगा। इसी के साथ हाईकोर्ट ने आरोपित खुशाबे अली को जमानत दे दी थी।

दरअसल, नाबालिग लड़की ने अपने वयस्क पति खुशाबे अली के खिलाफ दहेज, मारपीट, आपराधिक धमकी और जबरन यौन संबंध बनाने के आरोप में मुरादाबाद के भोजपुर थाने में केस दर्ज कराया था। इसके बाद आरोपित ने जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने के आरोपित पति की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस मोहम्मद असलम ने यह फैसला सुनाया।

हिरोइन और TMC सांसद नुसरत जहां ने दिया बेटे को जन्म, पति ने कहा था – ‘6 महीने से साथ नहीं, मेरा बच्चा नहीं’

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सांसद और अभिनेत्री नुसरत जहां ने गुरुवार (26 अगस्त 2021) को एक बेटे को जन्म दिया। एक दिन पहले ही उन्हें कोलकाता के न्योटिया (Neotia) हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। मिली जानकारी के मुताबिक, भाजपा उम्मीदवार रहे एक्टर यश दासगुप्ता उन्हें हॉस्पिटल लेकर गए थे।

कुछ महीने पहले नुसरत जहां की प्रेग्नेंसी की खबरों के बीच नुसरत के पति निखिल ने मीडिया से कहा था कि उन्हें नुसरत की प्रेग्नेंसी के बारे में कुछ नहीं पता है। उन्होंने नुसरत के बच्चे का पिता होने से भी इनकार किया था। निखिल ने दावा किया था कि नुसरत की प्रेग्नेंसी की खबर से वह खुद भी हैरान हैं। नुसरत के पति निखिल ने एबीपी आनंदा से कहा था कि उनकी और नुसरत की शादी टूट गई है और वे छह महीने से ज्यादा समय से साथ नहीं रह रहे हैं। ऐसे में किसी भी तरह से ये बच्चा उनका नहीं है। निखिल ने ये भी कहा था कि उनके और नुसरत के बीच कोई संपर्क नहीं है।

हालाँकि, काफी समय से नुसरत के बीजेपी उम्मीदवार रहे एक्टर यश दासगुप्ता के साथ कथित तौर रिलेशनशिप की खबरें भी आती रही हैं। ये दोनों ‘एसओएस कोलकाता’ की शूटिंग के दौरान करीब आए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नुसरत और यश दिसंबर में अजमेर शरीफ गए थे और उन्होंने नया साल साथ में राजस्थान में मनाया था। इसके अलावा, दोनों एक साथ दक्षिणेश्वर मंदिर भी गए थे। दोनों को कई बार साथ में वक्त गुजारते हुए देखा गया है। नुसरत और यश सोशल मीडिया पर एक दूसरे के साथ काफी तस्वीरें पोस्ट करते रहते हैं।

‘हिंदुओं का कत्लेआम करने वाले अकबर का शासनकाल सर्वश्रेष्ठ तो रामराज्य क्या?’: मनोज मुंतशिर ने पूछा तो गालीबाजी पर उतरे कट्टरपंथी

कवि मनोज मुंतशिर ने अपने हालिया वीडियो में मुगल बर्बरता का खुलासा किया है, जिसके बाद उन्हें लिबरलों, इस्लामियों और वामपंथी ‘इतिहासकारों’ के नफरतों का सामना करना पड़ रहा है। जिस पोस्ट में उन्होंने वीडियो को प्रमोट किया, उस पर काफी सारे अभद्र कमेंट्स किए गए। इतना ही नहीं, ‘इतिहासकार’ इरफान हबीब, तथाकथित पौराणिक कथाकार देवदत्त पटनायक और आरजे फहद उन लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने भारतीयों के खिलाफ मुगल आक्रमणकारियों की बर्बरता के बारे में बोलने पर कवि मनोज को खारिज किया।

कवि द्वारा शेयर किए गए वीडियो की एक क्लिप में वह यह पूछते हुए दिखाई दे रहे थे कि हम भारतीय अपनी विरासत की विकृति को कैसे स्वीकार कर सकते हैं। उन्होंने पूछा कि हजारों भारतीयों को मारने वाले आक्रमणकारियों और लुटेरों को नायक के रूप में कैसे दिखाया जा सकता है। उन्होंने मुगलों की ‘महिमामंडित डकैतों’ (‘glorified dacoits’) के रूप में आलोचना की। उन्होंने लोगों से अपनी विरासत को पहचानने और बर्बर एवं लुटेरों को नायकों के रूप में महिमामंडित करने से बचने के लिए कहा।

वामपंथी ‘इतिहासकार’ इरफान हबीब ने कहा, “एक कवि और लेखक को इतिहास के रूप में संदिग्ध और काल्पनिक तर्कों का उपयोग करके जहर उगलते हुए देखना दुखद है।”

दिलचस्प बात यह है कि तथाकथित पौराणिक कथाकार देवदत्त पटनायक ने मनोज को इतिहास का पाठ पढ़ाने के लिए विकिपीडिया का इस्तेमाल किया। उसने कहा, “इस आदमी को इतिहास किसने पढ़ाया? वह बंगाल पर मराठा आक्रमण को क्या कहेंगे?” इस दौरान पटनायक ने विकिपीडिया का लिंक भी शेयर किया।

आरजे फहद ने रेख्ता के लिए मनोज का साक्षात्कार लेने पर खेद व्यक्त किया और कहा, “मुझे खेद है कि मैंने रेख्ता के लिए इस नफरत फैलाने वाले और धर्मांध व्यक्ति का साक्षात्कार लिया। इतना जहर कहाँ से लाते हैं ये लोग?”

वहीं, इस्लामी हुसैन हैदरी ने कहा, “यह पहली बार नहीं है जब वह नफरत या झूठ फैला रहे हैं और यह आखिरी बार भी नहीं होगा। यह कोई आउट ऑफ ब्लू (अप्रत्याशित) वीडियो नहीं है। खैर, सरकार और समाज ने दंडित करने के बजाय मुस्लिम विरोधी जहर उगलने के लिए प्रोत्साहित किया हुआ है, सो उगल रहा है।”

मनोज द्वारा शेयर किए गए हालिया वीडियो में क्या है?

हाल ही में मनोज मुंतशिर ने अपने यूट्यूब चैनल पर जो वीडियो शेयर किया है उसमें उन्होंने धर्म, जाति और अन्य बाधाओं से परे नायकों को चुनने की बात की। उन्होंने मुगलों के इतिहास को ‘गौरवशाली’ बताकर पढ़ाने और हिंदुओं के खिलाफ हुए अत्याचारों को छुपाने पर इतिहासकारों और शिक्षकों से सवाल किया। मनोज ने पूछा कि अकबर द्वारा हिंदुओं पर जजिया हटाने का जिक्र क्यों है, जबकि इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि शासक के रूप में उसने अपने कार्यकाल के दौरान फिर से जजिया लगाया था।

साथ ही, उन्होंने सवाल किया कि जब किताबों में ‘ग’ से गणेश हटा कर ‘ग’ से गधा लिख दिया गया तो किसी ने आपत्ति क्यों नहीं की। मनोज ने कहा कि रावण के ब्राह्मण होने के बावजूद कोई भी ब्राह्मण उसकी पूजा नहीं करता, क्योंकि वह दुष्ट था। उन्होंने कहा कि हमें अपने नायकों को उनके कर्मों के आधार पर चुनना चाहिए, न कि उनकी पहचान के आधार पर। उन्होंने वर्षों से तथाकथित इतिहासकारों और सरकारों द्वारा किए गए ज़बरदस्त मुगल महिमामंडन के खिलाफ बात की थी।

उन्होंने अकबर के कार्यकाल को भारतीय इतिहास में सर्वश्रेष्ठ कहने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “शासक के रूप में उनका कार्यकाल इतिहास में सबसे अच्छा कैसे होगा जब हजारों हिंदुओं को इस्लाम में परिवर्तित नहीं करने के लिए मार दिया गया था। अगर उनका कार्यकाल सबसे अच्छा था, तो राम राज्य क्या था?” मनोज ने उन नेताओं पर सवाल उठाया जिन्होंने इस तथ्य की अनदेखी करते हुए कि मुगलों ने हजारों हिंदुओं को बेरहमी से मार डाला और मंदिरों को नष्ट कर दिया, मुगलों के नाम पर सड़कों का खुशी-खुशी उद्घाटन किया।

8 साल का बच्चा, हाथ में रक्षा सूत्र… दिल्ली मॉडल पब्लिक स्कूल के टीचर ने जबदस्ती पिलास से काटा… जख्मी हुआ हाथ

बिहार की राजधानी पटना में एक स्कूल है- दिल्ली मॉडल पब्लिक स्कूल (DMPS)। इस स्कूल से झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। स्कूल में 8 साल के एक बच्चे को इसलिए सजा दी गई, क्योंकि उसने अपनी कलाई पर ‘कलावा’ (लाल रंग का रक्षा सूत्र) बाँध रखा था। बच्चा कक्षा 4 में पढ़ता है। स्कूल के दीप नारायण नाम के शिक्षक ने गुस्से में पिलास (एक प्रकार का औजार, जो तार को मोड़ने, काटने और ऐंठने आदि के लिए इस्तेमाल किया जाता है) से इस तरह कलावा काटा कि बच्चे की कलाई पर गहरी चोट आई। उसकी कलाई पर कटने के निशान साफ तौर पर देखी जा सकती है।

इस बात की जानकारी बच्चे की बड़ी बहन प्रज्ञा भूमिहार ने ट्विटर के माध्यम से दी। ऑपइंडिया ने इस मामले की अधिक और सही जानकारी के लिए प्रज्ञा से संपर्क किया। प्रज्ञा ने जो हमें बताया, वह और भी हैरान करने वाला था। उन्होंने बताया कि घटना मंगलवार (अगस्त 24, 2021) की है, जिसकी जानकारी उन्हें बुधवार (अगस्त 25, 2021) को तब हुई, जब वह अपने भाई को स्कूल के लिए तैयार करते हुए स्कूल ड्रेस पहना रही थीं। उन्होंने बताया कि उनका भाई इस घटना से इतना ज्यादा डरा हुआ था कि उसने किसी को भी कुछ नहीं बताया।

घटना के बारे में पूरी जानकारी देते हुए प्रज्ञा ने बताया कि दो दिन पहले स्कूल के पीटी टीचर ने सभी बच्चों को लाल धागा (रक्षा सूत्र) काट कर आने के लिए कहा था। टीचर ने कहा था कि धागा बाँध कर स्कूल नहीं आना है। वह बताती हैं कि उनके भाई के हाथ में पतला सा धागा था, जो कि वाराणसी का प्रसाद था। प्रज्ञा ने कहा,

“जब मेरे भाई ने इस बारे में बताया तो मैंने कहा कि जाओ टीचर को बोलना कि यह वाराणसी का प्रसाद है, मैं इसे नहीं काटूँगा। दूसरे दिन सारे छात्र धागा काट करके गए थे, लेकिन मेरा भाई नहीं गया था, क्योंकि हम लोग वो धागा नहीं काटते हैं, मेरे परिवार में हर कोई वह रक्षा सूत्र हमेशा बाँधता है। मेरे भाई के हाथ में रक्षा सूत्र देख कर उसे (टीचर) इतना गुस्सा आया कि उसने पिलास लेकर उसे ऐसे खींचा कि उसका हाथ भी कट गया और उसने धागा भी काट कर फेंक दिया। इसके बाद उसने बोला कि देखते हो न मैं सीनियर भैया लोग को कैसे पीटता हूँ, वैसे ही तुम लोग को भी सजा मिलेगी।”

इतना ही नहीं, स्कूल में उसी टीचर ने उनकी बहन को भी रक्षा सूत्र पहनने के लिए सजा दिया। प्रज्ञा बताती हैं,

“उसने रक्षा सूत्र पहनने के लिए मेरी बहन को 2-4 राउंड दौड़ाया। उसने सभी से रक्षा सूत्र काटने के लिए कहा। सभी लड़कियों ने काट लिया, लेकिन मेरी बहन ने नहीं काटा। उसने कहा कि सर, आप मुझे जो भी सजा देंगे, दे दीजिए, लेकिन मैं धागा नहीं काटूँगी। तो उसने उसे फील्ड में दौड़ाया। चूँकि वह बड़ी है तो उसने मना कर दिया, लेकिन भाई अभी छोटा है, तो गुस्से में उसका धागा इस तरह काटा कि उसका हाथ भी कट गया। इससे वह इतना डरा हुआ था कि उसने घर में किसी को कुछ नहीं बताया। दूसरे दिन जब मैं स्कूल ड्रेस पहना रही थी, तब मैंने देखा। जिसके बाद पूछने पर उसने सारी घटना बताई।”

प्रज्ञा का कहना है कि वह आज (अगस्त 26, 2021) इस मामले पर बात करने के लिए स्कूल जा रही हैं। उन्होंने बताया कि फोन पर स्कूल प्रशासन से बात हुई है, लेकिन वह लोग इसे हल्के में ले रहे हैं। उनका कहना है कि स्कूल में धागा काट दिया जाता है। प्रज्ञा ने कहा कि उनके पास उस पीटी टीचर का तो नंबर नहीं है, लेकिन उन्होंने स्कूल के एक अन्य सीनियर टीचर से इस बारे में बात की तो उनका कहना है कि स्कूल में धागा बाँध कर आने की अनुमति नहीं है, धागा ज्यादा था तो हमने काट दिया। लेकिन प्रज्ञा का कहना है,

“वह बहुत पतला सा धागा था। ज्यादा नहीं था और ज्यादा था भी तो उससे क्या दिक्कत थी, वह एक धागा था और उसे हाथ में बाँधने से किसी को क्या असहज महसूस हो सकता है? जब बच्चे को उससे असहज महसूस नहीं हो रहा है, तो उन्हें क्यों दिक्कत हो रहा है? वह कोई बड़ा सा तलवार, कटारी या एके 47 थोड़े है, जो किसी को असहज महसूस होगा।”

हमने भी मामले पर स्कूल का पक्ष जानने के लिए स्कूल प्रशासन से बात करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। संपर्क होते ही स्कूल प्रशासन का पक्ष भी लिखा जाएगा। 

प्रज्ञा से बातचीत में एक और हैरानी की बात सामने आई कि इनके अलावा किसी भी बच्चे के माता-पिता ने इस पर आपत्ति नहीं जताई। सभी ने अपने-अपने बच्चों को धागा काट कर स्कूल भेजा था। आजकल लोगों में नास्तिकता न जानें क्यों घर कर रही है और आपको जानकर ताज्जुब होगा कि नास्तिकों में सबसे आगे हिंदू हैं, वो हिंदू जिनकी संस्कृति-संस्कारों का लोहा पूरा विश्व मानता है। यदि आप उन नास्तिकों से बात करें और उनको समझाने की कोशिश करें तो उनका जवाब आता है, “I don’t believe in bhagwan or God and all this, just don’t try to impose your believe to us or me.” ये उन नई पीढ़ी के अंग्रेज हिंदुओ की आवाज में है, जो आजकल ज़्यादा ही ‘मॉडर्न’ हो रहे हैं, जो चर्च जाने को शान समझते हैं, परंतु मंदिर जाना और पूजा पाठ करना उन्हें ढोंग से कम नहीं लगता।

इसी का फायदा उठाते हुए जान-बूझकर हिंदू समाज की भावनाओं से खिलवाड़ करने से कोई झिझकता नहीं है। भारत हिंदू बहुल देश है, लेकिन इसके बावजूद हिन्दुओं की भावनाओं से खिलवाड़ होता है, ऐसा क्यों? इस पर हिंदू समाज को आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है। जाति व सम्प्रदाओं में बँटे हिंदू समाज की कमजोरी का लाभ हिंदू विरोधी लेते हैं। समाज जब किसी मामले पर विरोध करता है तो दोषी के माफी माँगने पर मामला समाप्त हो जाता है।

देश के संविधान अनुसार कोई भी दूसरे की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ नहीं कर सकता, लेकिन हिंदू भावनाओं से स्वतंत्रता मिलने से लेकर आज तक खिलवाड़ होता चला आ रहा है। इसका बड़ा कारण तुष्टिकरण की नीति भी है। मत प्राप्त करने हेतु सत्ता में बैठे लोग हिंदू भावनाओं से होते खिलवाड़ की अनदेखी करते आए, जबकि अगर जाने-अनजाने में अल्पमत समाज के धर्म को लेकर किसी ने टिप्पणी कर दी है तो सरकार कठोर कार्रवाई करती है और समाज तो मरने-मारने तक पहुँच जाता है।

जितनी आसानी से हिंदू धर्म को निशाना बनाकर उनके देवी-देवताओं, पूजास्थलों की गरिमा, आस्था को ठेस पहुँचाने के बाद भी ठेठी दिखाई जाती है, क्या उतनी ही आसानी से अन्य धर्मों पर भी ऐसा कुछ बना लेने का साहस होगा? यदि हिंदू इस पर प्रतिकार करने उठता है तो वह असहिष्णु हो जाता है। इस देश में गजब का तमाशा चल रहा है। एक तो हिंदू धर्म से घृणा कर उसके धर्म पर विमर्श या कला के नाम पर अनर्गल टीका, टिप्पणी, फिल्म, वेब सीरीज बनाकर अपमानित करना और दूजा कि वह चुपचाप सब कुछ बैठकर सहता रहा आए। क्यों भाई तथाकथित ठेकेदारों क्यों? इतनी नफरत और घृणा क्यों? क्या हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं, धर्म का कोई भी स्थान नहीं है? यदि धर्म की रक्षा करनी है तो इन सबकी जड़ों में प्रहार करना होगा, अन्यथा ये विधर्मी इसी तरह से अपमानित एवं आस्था से खिलवाड़ करते रहेंगे।

स्कूल प्रशासन से संपर्क हो गया है। इस पूरे मामले पर उनका पक्ष जानने के लिए पढ़ें

मैसूर में पहली बार BJP का कब्जा, सुनंदा पलनेत्रा बनीं मेयर: टूट गया कॉन्ग्रेस-जेडी (एस) गठबंधन

कर्नाटक में मैसूर शहर के मेयर पद के लिए हुए चुनाव में ऐतिहासिक रूप से पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की है। इसी के साथ शहर की नई मेयर बीजेपी की सुनंदा पलनेत्रा बन गई हैं। 65 सदस्यों वाले मैसूर सिटी कार्पोरेशन (एमसीसी) में बीजेपी की सुनंदा को 26 वोट मिले। इसके बाद कॉन्ग्रेस के 19 और जेडीएस के 17 सदस्य हैं।

मैसूर में पाँच निर्दलीय और बीएसपी का एक सदस्य है। रिपोर्ट के मुताबिक, आखिरी मिनट तक ऐसी अटकलें थीं कि जेडी (एस) और कॉन्ग्रेस एमसीसी में अपना गठबंधन जारी रखेंगे। इस समीकरण के लिए कॉन्ग्रेस ने छह महीने के लिए मेयर पद की माँग की थी, जबकि शेष दो साल के लिए जेडी (एस) को यह पद दिया जाना था।

हालाँकि, भाजपा नेताओं ने जेडी (एस) नेता और पूर्व मंत्री एसआर महेश से चुनाव में अपने लिए समर्थन माँगा था। इससे सियासी माहौल बीजेपी के पाले में चला गया और पिछली बार मेयर बनने से चूँकी सुनंदा पलनेत्रा ने इस बार मेयर का पद हासिल कर लिया।

बीजेपी नेता और मैसूर के प्रभारी मंत्री एसटी सोमशेखर ने किसी भी तरह के गुप्त समझौते से इनकार किया है। उन्होने कहा, “भाजपा के उम्मीदवार ने अपना नामाँकन दाखिल किया और सबसे अधिक वोट हासिल कर जीत दर्ज की।”

उन्होंने आगे कहा, “जब से एमसीसी अस्तित्व में आया है, तब से कोई भी भाजपा सदस्य मेयर नहीं बना था। मैं सुश्री पलनेत्रा को उनके चुनाव के लिए बधाई देता हूँ और अपनी पार्टी के नेताओं को पहली बार ऐसा करने में उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद देता हूँ।”

पिछले चुनाव में अहम भूमिका निभाने वाले केपीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष आर ध्रुवनारायण और विधायक तनवीर सैत सहित कॉन्ग्रेस नेताओं ने चुनाव की योजना बनाने के लिए एक बैठक में हिस्सा लिया था। भाजपा के मेयर की जीत को रोकने के लिए पार्टी जेडी (एस) के साथ गठबंधन में थी।

गौरतलब है कि इससे पहले जेडी (एस) की रुक्मिणी मेड गौड़ा शहर की मेयर थीं। उन्हें कर्नाटक हाई कोर्ट ने झूठा संपत्ति हलफनामा पेश करने पर अयोग्य घोषित कर दिया था, जिससे मेयर पद खाली हो गया था।

‘रुस्तम अली मेरी मौत का जिम्मेदार… पिताजी आप बदला जरूर लेना’ – सुसाइड नोट लिख 15 साल की हिंदू लड़की फाँसी पर झूली

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में मुस्लिम समुदाय के कुछ युवकों की छेड़खानी से तंग आकर नाबालिग हिंदू युवती ने फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मरने से पहले पीड़िता ने एक सुसाइड नोट लिखकर अपनी व्यथा अपने पिता से बताई थी। उसने अपने पिता को आरोपितों से बदला लेने का अनुरोध किया। साथ ही लिखा कि उन लोगों (आरोपितों) ने उसके साथ बहुत ही गलत काम किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना सुरेरी थाना क्षेत्र के कमरुद्दीनपुर गाँव की है। यहाँ के निवासी सूरज (बदला हुआ नाम) की 15 साल की बेटी ने मंगलवार (24 अगस्त 2021) की देर रात अपने कमरे में साड़ी से फाँसी लगा ली। बुधवार की सुबह जब उसकी माँ उसके कमरे में गईं, तो उन्होंने देखा कि बेटी फाँसी लगा चुकी है। वो दृश्य देखकर वो चीख उठीं। उनकी चीखें सुनकर बाकी के लोग भी वहाँ पहुँचे तो देखा कि छात्र की मृत्यु हो चुकी थी।

मौका ए वारदात से एक सुसाइड नोट भी मिला है। इसमें पीड़िता ने गाँव के मुस्लिम समुदाय के आरोपितों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पीड़िता ने अपने पिता से आरोपितों से बदला जरूर लेने को कहा है। सुसाइड नोट में पीड़िता ने लिखा, “पिताजी मेरी मौत का कारण रुस्तम अली है, आप उससे बदला जरूर लेना। उसने मेरे साथ बहुत गलत किया है और मेरी मौत का जिम्मेदार भी वही है।”

दो समुदायों के बीच का मामला देख मणियाहूँ के क्षेत्राधिकारी एसपी उपाध्याय, रामपुर, नेवढ़िया थाने की पुलिस के साथ ही पीएसी बल भी वहाँ पहुँच गया। पुलिस ने पीड़िता के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।

इस मामले को लेकर सुरेरी थानाध्यक्ष देवीवर शुक्ला के मुताबिक, मृतक नाबालिग युवती के पिता की शिकायत पर रुस्तम अली, उसके दादा अलीरजा और चाचा वारिफ उर्फ गोरख के खिलाफ इंडियन पीनल कोड (IPC) की धारा 534 (स्त्री की लज्जा भंग करने के इरादे से उस पर हमला) और 306 (आत्महत्या के लिए मजबूर करना) के तहत केस दर्ज किया गया है।

‘तुमको और पूरे परिवार को मार डालेंगे’ – मुस्लिम लीग के MLA को 24 घंटे का समय, लिखा था तालिबान विरोधी पोस्ट

केरल के पूर्व मंत्री और मुस्लिम लीग के वरिष्ठ विधायक एमके मुनीर को तालिबान की तरफ से जान से मारने की धमकी दी गई है। एम के मुनीर ने दावा किया है कि तालिबान के नाम पर एक चिट्ठी भेज कर उन्हें धमकी दी गई है कि वो उन्हें और उनके पूरे परिवार को मार डालेगा। 

उनका दावा है कि उन्हें यह धमकी तालिबान की ओर से अफगानिस्तान के लोगों के साथ बर्बर सलूक करने के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखने की वजह से मिली है। दरअसल हाल ही में विधायक ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा था। इस पोस्ट में एमके मुनीर ने इस बात का जिक्र किया था कि तालिबान ने अफगानिस्तान के लोगों पर क्रूरतापूर्वक कार्रवाई की है।

एमके मुनीर का कहना है कि बुधवार (अगस्त 25, 2021) की सुबह उन्हें यह खत मिला। इस खत में कहा गया था कि अगर उन्होंने 24 घंटे में अपना सोशल मीडिया पोस्ट नहीं हटाया तो उनकी और उनके पूरे परिवार की हत्या कर दी जाएगी। यह खत ‘Taliban Oru Vismayam’ (तालिबान, एक विस्मय) शीर्षक से लिखी गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि मुनीर का यह फेसबुक पोस्ट उनके ‘मुस्लिम विरोधी’ विचारों पर आधारित है। यह खत सरकारी मेडिकल कॉलेज इलाके से पोस्ट की गई थी।

इसमें प्रोफेसर टीजे जोसेफ का भी जिक्र किया गया है और कहा गया कि उन पर भी प्रोफेसर जैसा ही हमला किया जाएगा। बता दें कि जोसेफ पर ईशनिंदा का आरोप लगा था और साल 2010 में उनके हाथ काट दिए गए थे।

4 जुलाई 2010 को ईशनिंदा के आरोप में मुस्लिम कट्टरपंथियों ने उनका दाहिना हाथ काट दिया था। कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन के 7 युवकों ने ​उन पर तब हमला किया था, जब वे अपने परिवार के साथ चर्च से प्रार्थना कर लौट रहे थे। कट्टरपंथियों का आरोप था कि जोसेफ ने परीक्षा के लिए जो प्रश्न तैयार किए थे, उसमें ईशनिंदा वाले सवाल पूछे गए थे।

एम के मुनीर ने कहा है कि इस मामले में वो थाने में शिकायत दर्ज कराएँगे और जाँच की माँग करेंगे। आपको बता दें कि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता ने कई एंटी-तालिबान पोस्ट किए थे जिसके बाद सोशल मीडिया के जरिए पर उन पर हमले जारी हैं। 

तमाल भट्टाचार्य के खिलाफ याचिका दायर

वहीं ‘अच्छा खाना’ और ‘क्रिकेट खेलने’ के लिए तालिबान की तारीफो के पुल बाँध चुके कोलकाता के तमाल भट्टाचार्य के खिलाफ याचिका दायर की गई है। गृह मंत्रालय के शिकायत प्रकोष्ठ को याचिका मिली है। कोलकाता के एक व्यक्ति ने यह याचिका गृह मंत्रालय को सौंपी है।

तमाल ने कट्टरपंथी इस्लामी संगठन को ‘भरोसेमंद’ भी बताया था। बता दें कि तमाल उन 10 बंगालियों में से एक हैं, जिन्हें 21 अगस्त की रात भारत सरकार अफगानिस्तान के हामिद करजई इंटरनेशल एयरपोर्ट से सुरक्षित बचाकर लाई थी। टीवी9 को दिए इंटरव्यू में तमाल ने तालिबान की भरोसेमंद होने के लिए की सराहना की थी।

गौरतलब है कि उत्तरी दमदम इलाके के निमटा में रहने वाले 34 वर्षीय तमाल अफगानिस्तान में तब से फँसे हुए थे, जब से तालिबान ने काबुल पर कब्जा जमा लिया था। मैकेनिकल इंजीनियर तमाल काबुल के कर्दन इंटरनेशनल स्कूल में फिजिक्स और केमिस्ट्री पढ़ाते थे। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की ट्रेनिंग के वक्त से तमाल अपने स्कूल के स्टाफ क्वार्टर में रह रहे थे। हालाँकि, तालिबान के काबुल शहर पर कब्जा करने के बाद उन्हें खुद को प्रिंसिपल के आवास के अंदर बंद होने के लिए मजबूर होना पड़ा था। बाद में तमाल को 10 अन्य बंगाल निवासियों के साथ भारतीय वायु सेना (IAF) के कर्मियों ने वहाँ से बाहर निकाला था।