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लोकमाता अहिल्याबाई के सम्मान में PM मोदी ने ₹300 का सिक्का किया जारी, नारी शक्ति का भी बखान: ऑपरेशन सिंदूर पर बोले- बहादुर महिला सिपाहियों ने की देश की रक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने लोकमाता देवी अहिल्याबाई महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन में हिस्सा लिया, जो जंबूरी मैदान में आयोजित हुआ। जंबूरी मैदान में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर को याद किया।

पीएम मोदी ने कहा, “लोकमाता अहिल्याबाई का नाम सुनते ही मन में श्रद्धा का भाव उमड़ पड़ता है। उनके महान व्यक्तित्व के बारे में बोलने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं। 250-300 साल पहले, जब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा था, तब उन्होंने न सिर्फ अपने राज्य को समृद्ध किया, बल्कि देश की संस्कृति और परंपराओं को भी बचाया।”

पीएम ने बताया कि अहिल्याबाई ने काशी विश्वनाथ मंदिर सहित देश के कई मंदिरों और तीर्थ स्थलों का पुनर्निर्माण करवाया। उन्होंने कहा, “यह मेरा सौभाग्य है कि जिस काशी में लोकमाता ने इतने विकास कार्य किए, वहाँ मुझे भी सेवा का मौका मिला। आज अगर आप काशी विश्वनाथ मंदिर जाएँगे, तो वहाँ आपको अहिल्याबाई की मूर्ति भी दिखेगी।”

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर लोकमाता अहिल्याबाई को समर्पित एक स्मारक डाक टिकट और 300 रुपये का विशेष सिक्का भी जारी किया। इस सिक्के पर अहिल्याबाई होलकर का चित्र अंकित है। साथ ही उन्होंने आदिवासी, लोक और पारंपरिक कलाओं में योगदान देने वाली महिला कलाकारों को राष्ट्रीय देवी अहिल्याबाई पुरस्कार से सम्मानित किया।

ऑपरेशन सिंदूर को बताया भारत की बहादुरी का प्रतीक

पीएम मोदी ने अपने भाषण में ऑपरेशन सिंदूर की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “पहलगाम में आतंकियों ने न सिर्फ भारतीयों का खून बहाया, बल्कि हमारी संस्कृति और समाज को बाँटने की कोशिश की। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर भारत के इतिहास का सबसे बड़ा और सफल ऑपरेशन है। हमारी सेना ने उन आतंकी ठिकानों को मिट्टी में मिला दिया, जहाँ पाकिस्तानी फौज ने सोचा भी नहीं था।”

उन्होंने जोर देकर कहा, “अब भारत का हर नागरिक कह रहा है कि अगर तुम गोली चलाओगे, तो गोली का जवाब गोले से दिया जाएगा।” पीएम ने सिंदूर को नारी शक्ति और भारत की बहादुरी का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “हमारी संस्कृति में सिंदूर का विशेष महत्व है। हनुमान जी इसे लगाते हैं, शक्ति पूजा में इसका इस्तेमाल होता है। आज ऑपरेशन सिंदूर के जरिए यह भारत की ताकत का प्रतीक बन गया है।”

पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महिला शक्ति की अप्रतिम बहादुरी का भी बखान किया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी फौज की भारी गोलाबारी के बीच भी बीएसएफ की बहादुर महिला सिपाहियों ने देश की रक्षा की।

पीएम मोदी ने कहा, “स्कूल से लेकर युद्ध के मैदान तक…. आज देश अपनी बेटियों के शौर्य पर अभूतपूर्व भरोसा कर रहा है। नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन हों या फिर सीमापार का आतंक हो… आज हमारी बेटियाँ भारत की सुरक्षा की ढाल बन रही हैं।”

महिला सशक्तिकरण पर सरकार का जौर

पीएम मोदी ने अपने भाषण में महिला सशक्तिकरण पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने तीन करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाने का संकल्प लिया है, जिसमें से डेढ़ करोड़ से ज्यादा बहनें इस लक्ष्य को हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि गाँवों में बैंक सखियां और बीमा सखियाँ लोगों को बैंकिंग और बीमा की सुविधाओं से जोड़ रही हैं।

उन्होंने कहा, “आज हमारी बहनें और बेटियाँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। पहले नई टेक्नोलॉजी से महिलाओं को दूर रखा जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। हमारी सरकार महिलाओं को टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। आज महिलाएँ वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर और पायलट बन रही हैं।”

पीएम ने ‘नमो ड्रोन दीदी’ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि इससे गाँव की महिलाओं को नई पहचान और कमाई का जरिया मिल रहा है। उन्होंने चंद्रयान-3 मिशन का उदाहरण देते हुए बताया कि इसमें 100 से ज्यादा महिला वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने अहम भूमिका निभाई।

लोकमाता अहिल्याबाई के मूल्यों पर चल रही सरकार

पीएम ने कहा कि उनकी सरकार लोकमाता अहिल्याबाई के मूल्यों पर चल रही है। उन्होंने बताया कि अहिल्याबाई ने गवर्नेंस का ऐसा मॉडल अपनाया, जिसमें गरीबों और वंचितों को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने खेती को बढ़ावा देने के लिए नहरों का जाल बिछाया और कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित किया। पीएम ने कहा, “आज हमारी सरकार भी ‘नागरिक देवो भवः’ के मंत्र के साथ काम कर रही है। हमारी हर योजना में महिलाएँ केंद्र में हैं।”

उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने लाखों महिलाओं को पहली बार अपने घर का मालिक बनाया है। साथ ही, स्टार्टअप और स्पेस मिशनों में भी महिलाएं अहम योगदान दे रही हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का बयान

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “प्रधानमंत्री का यह दौरा लोकमाता अहिल्याबाई को समर्पित है। हम उनके दिखाए रास्ते पर चलकर महिला सशक्तिकरण के संकल्प को पूरा कर रहे हैं। पीएम मोदी जिस तरह से काम कर रहे हैं, वह अहिल्याबाई के आदर्शों को जीवंत कर रहा है।”

महिलाओं ने संभाली आयोजन की कमा

इस आयोजन की एक और खास बात थी कि इसकी पूरी जिम्मेदारी महिलाओं ने संभाली। दतिया से भोपाल तक पीएम के विमान को महिला पायलट ने उड़ाया। इंदौर में मेट्रो की पहली ट्रिप में सिर्फ महिलाएँ सवार थीं। भोपाल में सुरक्षा, मंच संचालन और अन्य सभी काम महिलाओं ने बखूबी निभाए।

इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में महिलाएँ, बहनें और बेटियाँ शामिल हुईं, जिन्होंने पीएम मोदी का जोरदार स्वागत किया। भोपाल की सड़कों पर पीएम का भव्य रोड शो हुआ, जिसमें सिंदूरी रंग की साड़ियों में सजी महिलाओं ने उनका अभिवादन किया। इस दौरान पूरे शहर में तिरंगे लहराए और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े पोस्टर लगे दिखे।

प्रधानमंत्री भोपाल पहुँचते ही एक शानदार रोड शो शुरू हुआ। उनके साथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे। सड़कों के दोनों ओर खड़ी भीड़ ने तालियों और नारों के साथ पीएम का स्वागत किया। खास बात यह थी कि इस रोड शो में 15,000 से ज्यादा महिलाओं ने सिंदूर रंग की साड़ियाँ पहनकर पीएम का स्वागत किया। यह स्वागत ऑपरेशन सिंदूर के प्रति आभार जताने का एक अनोखा तरीका था। पूरे शहर में ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े पोस्टर लगाए गए थे, जो भारत की बहादुरी और महिला शक्ति का प्रतीक बने।

रोड शो का समापन जंबूरी मैदान में हुआ, जहाँ पीएम ने विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस आयोजन की सबसे खास बात यह थी कि इसकी पूरी जिम्मेदारी महिलाओं ने सँभाली। सुरक्षा से लेकर मंच संचालन, साइट मैनेजमेंट और हेलीपैड तक हर काम महिला अधिकारियों और कर्मचारियों ने बखूबी निभाया। यह नजारा महिला सशक्तिकरण का एक जीता-जागता उदाहरण था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भोपाल दौरा न सिर्फ एक राजनैतिक आयोजन था, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण और भारत की ताकत का एक मजबूत संदेश भी था। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और लोकमाता अहिल्याबाई के योगदान को याद करते हुए पीएम ने देश की महिलाओं को प्रेरित किया। भोपाल की सड़कों पर लहराते तिरंगे और सिंदूरी रंग में सजी महिलाओं ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। यह दौरा नारी शक्ति और भारत की एकता का प्रतीक बनकर उभरा।

‘जो 27 साल में नहीं हुआ, वो BJP ने 100 दिन में कर दिखाया’: दिल्ली में रेखा सरकार ने जारी की अपनी ‘वर्कबुक’, जानें अब तक क्या-क्या हुए बदलाव

दिल्ली में सीएम रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने 20 फरवरी 2025 को शपथ ग्रहण करने के बाद अपने पहले 100 दिन पूरे कर लिए हैं। 27 साल बाद राष्ट्रीय राजधानी में भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई, विधानसभा चुनाव में 48 सीटें जीतकर आम आदमी पार्टी (आप) को विपक्ष में धकेल दिया।

इस मौके पर सरकार ने एक रिपोर्ट (जिसे ‘वर्कबुक’ कहा गया) जारी की है, जिसमें बताया गया है कि इन 100 दिनों में सरकार ने क्या-क्या काम किए हैं। इसमें खास तौर पर स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़कें, रोशनी और गरीबों की भलाई से जुड़ी योजनाओं पर ध्यान दिया गया है।

सीएम रेखा गुप्ता और उनके कैबिनेट मंत्रियों आशीष सूद और कपिल मिश्रा द्वारा जारी ‘वर्कबुक’ में सरकार की कई महत्वपूर्ण लोक कल्याणकारी पहलों का विस्तृत विवरण दिया गया है।

स्वास्थ्य से जुड़े काम

  • आयुष्मान भारत योजना- गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज दिलाने के लिए इस योजना को दिल्ली में लागू किया गया है।
  • आयुष्मान आरोग्य मंदिर- अच्छे इलाज की सुविधा देने के लिए ऐसे स्वास्थ्य केंद्र बनाए जा रहे हैं।

जन-कल्याण योजनाएँ

  • महिला सम्मान योजना- गरीब महिलाओं को हर महीने आर्थिक मदद देने के लिए 51,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।
  • वाय वंदना योजना- 70 साल से ऊपर के बुजुर्गों को 10 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मदद और सुरक्षा देने के लिए यह योजना शुरू की गई है।
  • DEVI बसों को हरी झंडी- महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए DEVI (Delhi Express Van for Improved Safety) बसों को हरी झंडी दिखाई गई है।
  • यमुना सफाई- यमुना नदी को साफ करने का बड़ा अभियान शुरू किया गया है।
  • स्ट्रीट लाइटें- दिल्ली की सड़कों पर ज्यादा और बेहतर स्ट्रीट लाइटें लगाई जा रही हैं, जिससे रात में रोशनी और सुरक्षा बेहतर हो।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि उन्हें खुशी है कि सरकार जनता के हक के लिए मेहनत कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली भी विकसित भारत के साथ आगे बढ़ेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नारे ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ को दोहराया।

वहीं दिल्ली के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि उनकी सरकार ने 27 साल में जो नहीं हुआ, वो 100 दिन में कर दिखाया है। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर में ‘ऐतिहासिक काम’ का दावा किया, जिससे दिल्ली की जनता ‘बहुत खुश’ है।

रेखा गुप्ता की राजनीतिक पृष्ठभूमि

रेखा गुप्ता ने राजनीति की शुरुआत छात्र संगठन ABVP से की थी। वो दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र संघ अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। बाद में पार्षद बनीं और कई सामाजिक काम किए। हालांकि 2023 में वह आम आदमी पार्टी की शैली ओबेरॉय से महापौर का चुनाव हार गई थीं।

नक्सल चीफ बसवराजू के मरने पर छूटा तुर्की के वामपंथियों का रोना, श्रद्धांजलि देकर की भारत की निंदा: वीडियो में बोले नकाबपोश- ‘वो क्रांतिकारी योद्धा’, फिलीपींस के ‘कम्युनिस्ट गुरिल्ला’ भी तड़पे

नक्सल चीफ बसवराजू की मौत के बाद एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। तुर्की के एक वामपंथी उग्रवादी संगठन ने भारत सरकार की निंदा करते हुए एक वीडियो बयान जारी किया, जिसमें एक नकाबपोश ने बसव राजू को ‘क्रांतिकारी योद्धा’ बताते हुए श्रद्धांजलि दी।

भारत सरकार के ऑपरेशन को ‘राज्य प्रायोजित हिंसा’ करार दिया गया। वीडियो ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय नक्सलियों और तुर्की के वामपंथी उग्रवादियों के बीच वैचारिक और नैरेटिव कनेक्शन मौजूद हैं।

इसके अतिरिक्त, तुर्की के राजनयिक कदम भी भारत के लिए चिंता का विषय बने। तुर्की के राजदूत ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से मुलाकात कर भारत के खिलाफ एकजुटता जताई। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन बताया और कथित निर्दोष नागरिकों की मौत पर शोक व्यक्त किया।

तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने भी पाकिस्तानी उप प्रधानमंत्री से बात कर कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के आधार पर हल निकालने की बात कही।

अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ

तुर्की के अलावा, फिलीपींस के कुछ वामपंथी समूहों द्वारा भी बसवराजू को श्रद्धांजलि दी गई है। सोशल मीडिया पर फिलीपींस के कम्युनिस्ट गुरिल्ला संगठनों और कुछ मानवाधिकार समूहों ने भी भारत की कार्रवाई की आलोचना की है।

जानकारी के अनुसार, दक्षिण अमेरिका, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया में सक्रिय कई लेफ्ट विंग उग्रवादी संगठनों ने भी बसव राजू के समर्थन में बयान दिए हैं। इससे यह पुष्टि होती है कि भारतीय माओवादी संगठनों के अंतरराष्ट्रीय विचारधारात्मक और नैरेटिव कनेक्शन मौजूद हैं।

बसवराजू कौन था?

नम्बाला केशव राव उर्फ बसवराजू उर्फ गगन्ना, आंध्र प्रदेश का रहने वाला था। उसने इंजीनियरिंग (B.TECH) की पढ़ाई की थी, लेकिन युवावस्था में वामपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर CPI (माओवादी) से जुड़ गया।

2018 में, उसने संगठन के तत्कालीन महासचिव गणपति की जगह ली और नक्सल संगठन का महासचिव बन गया, जो संगठन में सबसे बड़ा पद होता है। वह संगठन की सेंट्रल कमेटी और पॉलिट ब्यूरो का प्रमुख सदस्य था।

बसवराजू को ताड़मेटला, झीरम घाटी, बुरकापाल और जेल ब्रेक जैसे कई बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है। बसवराजू पर छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से 1.5 करोड़, और केंद्र सरकार की ओर से 10 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।

वह माओवादी नेटवर्क का रणनीतिकार था और न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विचारधारा, हथियारों की आपूर्ति और फंडिंग जैसे मसलों पर भी सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

बसवराजू की मौत और मुठभेड़ की जानकारी

21 मई 2025, बुधवार को छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ के जंगलों में DRG (District Reserve Guard) और सुरक्षाबलों ने एंटी नक्सल ऑपरेशन में बड़ी सफलता हासिल की। मुठभेड़ में करीब 30 नक्सली ढेर किए गए, जिनमें कई शीर्ष नेता भी शामिल थे। इस ऑपरेशन में बसवराजू की भी मौत हो गई, जिसकी पुष्टि बाद में हुई।

यह ऑपरेशन नक्सली आंदोलन के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। इसे उसी तरह का ऑपरेशन बताया जा रहा है जैसे अमेरिका द्वारा ओसामा बिन लादेन या श्रीलंका द्वारा प्रभाकरन के खिलाफ चलाया गया था।

भारत में बसवराजू की गतिविधियाँ

भारत के कई राज्यों जैसे छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, झारखंड, ओडिशा आदि में नक्सली हमलों की साजिश और संचालन में उसकी भूमिका रही है। 2010 से लेकर अब तक हुए कई बड़े नक्सली हमलों की योजना और नेतृत्व उसी ने किया। वह लंबे समय से भूमिगत था और कहा जाता है कि वह जंगलों में घूम-घूमकर रणनीति बनाता था, जिससे उसे पकड़ना बेहद मुश्किल था।

बसवराजू की मौत, भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक ऐतिहासिक सफलता है। इससे न केवल नक्सल नेटवर्क का शीर्ष नेतृत्व ध्वस्त हुआ है, बल्कि इससे संगठन के वैचारिक मनोबल को भी भारी नुकसान पहुँचा है।

लेकिन, जिस प्रकार तुर्की, फिलीपींस और अन्य देशों में बसवराजू की मौत पर प्रतिक्रियाएँ आई हैं, उससे यह स्पष्ट होता है कि नक्सल आंदोलन अब केवल भारत की आंतरिक चुनौती नहीं है। यह एक अंतरराष्ट्रीय वैचारिक नेटवर्क का हिस्सा बन चुका है, जिसमें वामपंथी उग्रवादियों, मानवाधिकार संगठनों और राजनीतिक विरोधियों का समर्थन मौजूद है।

आने वाले समय में भारत को इस अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव को चुनौती देने के लिए राजनयिक मोर्चे पर सख्त नीति, सोशल मीडिया पर निगरानी, और विचारधारात्मक काउंटर नैरेटिव विकसित करने की आवश्यकता होगी।

धर्म, शासन और सेवा का दुर्लभ संगम लोकमाता अहल्याबाई होल्कर: काशी से केदारनाथ तक जिनकी छाप, आत्ममंथन माँगती है 300वीं जयंती

भारतीय इतिहास में जब-जब लोक कल्याण की बात आती है, तब-तब कुछ व्यक्तित्व नक्षत्रों की भाँति चमकते हैं – ऐसे ही एक तेजस्वी नक्षत्र थीं लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर, जिनका जन्म 31 मई, 1725 को महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के चौड़ी गांव में हुआ था। उनके पिता माणकोजी शिंदे एक सामान्य कृषक थे, लेकिन अत्यंत धार्मिक और संस्कारी व्यक्ति थे। माता सुशीला बाई ने बचपन से ही अहिल्याबाई को धर्म, तप, सेवा और सहनशीलता के संस्कार दिए, जो उनके पूरे जीवन की आधारशिला बने।

एक असाधारण जीवन की शुरुआत

सामाजिक रीतियों से अलग, अहिल्याबाई को बाल्यकाल में ही होलकर राजवंश के अधिपति मल्हारराव होलकर की दृष्टि में आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मल्हारराव ने उनके संस्कार, बुद्धिमत्ता और व्यवहार से प्रभावित होकर उन्हें अपने पुत्र खांडेराव से विवाह के लिए वरण किया। इस प्रकार वे इंदौर स्थित होलकर राजघराने की बहू बनीं।

अहिल्याबाई का जीवन प्रारंभ से ही संघर्ष से भरा रहा। पति खांडेराव की युद्ध में असमय मृत्यु (1754), फिर ससुर मल्हारराव होलकर का निधन (1766), और उसके बाद अपने इकलौते पुत्र मालेराव की मृत्यु – ये सारे आघात किसी भी सामान्य स्त्री को तोड़ सकते थे। लेकिन अहिल्याबाई, सहनशीलता, धैर्य और शासन-प्रबंधन में अपनी विलक्षण क्षमता के बल पर न केवल स्वयं को संभाल पाईं, बल्कि पूरे होलकर साम्राज्य को भी।

त्याग और तपस्या का प्रतीक नेतृत्व: 1767 में अहिल्याबाई ने होलकर साम्राज्य की बागडोर संभाली। उन्होंने प्रशासनिक खर्च में कटौती कर व्यक्तिगत जीवन को अत्यंत साधारण रखा। उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी कि वे कभी भी राज्य कोष का दुरुपयोग नहीं करती थीं। उन्होंने आमजन की भलाई को ही शासन का मूल उद्देश्य माना और यही दृष्टिकोण उन्हें ‘लोकमाता’ की उपाधि तक ले गया।

उनके शासनकाल में महेश्वर को राजधानी बनाया गया, जहाँ उन्होंने एक सादगीपूर्ण जीवन बिताया। उनका निवास आज भी वहाँ मौजूद है जो नेताओं, प्रशासकों और न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों के लिए एक आदर्श जीवनशैली का प्रतीक बन सकता है।

न्यायप्रियता और प्रजावत्सलता का आदर्श

अहिल्याबाई की न्याय प्रणाली इतनी पारदर्शी और त्वरित थी कि उनकी तुलना प्राचीन काल के राजा हरिश्चन्द्र से की जाती है। वे व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में बैठकर मामलों की सुनवाई करती थीं। उनका दृष्टिकोण था, “राजा का पहला कर्तव्य प्रजा का पालन है, अपने लाभ का नहीं।”

उन्होंने सैनिकों की उचित वेतन व्यवस्था, कृषकों की सहायता हेतु करों में कटौती, और व्यापारिक सुविधाओं का विस्तार करके समाज के सभी वर्गों को सशक्त किया।

भारतीय संस्कृति की संरक्षिका थीं लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर

देवी अहिल्याबाई केवल एक कुशल प्रशासिका ही नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक पुनरुत्थान की एक प्रमुख प्रेरणा भी थीं। उन्होंने देश भर में सैकड़ों मंदिरों, घाटों, कुओं, धर्मशालाओं, यात्रियों की सहायता हेतु सदाव्रत (निःशुल्क भोजनालयों) का निर्माण कराया। उनके द्वारा बनवाए गए धार्मिक स्थलों की सूची इतनी विस्तृत है कि उसका संकलन स्वयं में एक शोध का विषय हो सकता है।

काशी, अयोध्या, मथुरा, वृंदावन, सोमनाथ, द्वारका, रामेश्वरम, बद्रीनाथ, केदारनाथ, त्र्यंबकेश्वर, उज्जैन, गंगासागर, तिरुपति, जगन्नाथ पुरी – भारत का शायद ही कोई प्रमुख तीर्थस्थल हो जहाँ देवी अहिल्याबाई के योगदान की छाप न हो।

विशेष रूप से काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण (1780) उनकी धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जब 1669 में औरंगज़ेब ने इस मंदिर को ध्वस्त किया था, तब लंबी अवधि तक यह उपेक्षित पड़ा रहा। अहिल्याबाई ने न केवल इसका पुनर्निर्माण कराया, बल्कि वहाँ के पुजारियों, यात्रियों, धर्मशालाओं और तीर्थयात्रियों के समुचित प्रबंधन की संपूर्ण व्यवस्था भी की।

एक आधुनिक दृष्टिकोण युक्त शासिका

उन्होंने सड़कों, जल प्रबंधन, आवागमन, सुरक्षा और संचार व्यवस्था में भी नवाचार किया। उनके शासनकाल में काशी से कलकत्ता तक सड़क बनाई गई, ताकि तीर्थयात्री सुविधापूर्वक यात्रा कर सकें। ब्रिटिश अधिकारी सर जॉन माल्कम ने अपनी पुस्तक Memoirs of Central India (1823) में देवी अहिल्याबाई की तारीफ़ करते हुए लिखा कि उनके सहायक कप्तान डी.टी. स्टुअर्ट ने केदारनाथ और देवप्रयाग जैसे दुर्गम तीर्थों में देवी द्वारा निर्मित धर्मशालाएँ और कुएँ देखे।

सनातन संस्कृति में नारी की महिमा: भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति को जगद्जननी, अर्धनारीश्वर, शक्ति-स्वरूपा माना गया है। देवी अहिल्याबाई उसी परंपरा की मूर्त प्रतिमा थीं। वे एक साथ माँ, विधवा, प्रशासक, न्यायाधीश, दानी, योगिनी, शास्त्रज्ञ और सत थीं। उन्होंने अपने जीवन से सिद्ध कर दिया कि धर्म और सत्ता का समन्वय संभव है, जब उद्देश्य लोकमंगल हो।

आज के युग में क्यों प्रासंगिक हैं अहिल्याबाई? आज जब राजनीति, प्रशासन और धर्म – तीनों में नैतिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है, तब अहिल्याबाई जैसी विभूतियाँ प्रेरणा देती हैं कि ईमानदारी, त्याग और सेवा भाव से भी शासन चलाया जा सकता है।

उनके जीवन का प्रत्येक पहलू आधुनिक सार्वजनिक जीवन के लिए एक पाठशाला है कि कैसे सीमित साधनों में भी जनकल्याण किया जा सकता है, कैसे सत्ता का उपयोग स्वहित की बजाय राष्ट्रहित में किया जाना चाहिए, और कैसे नारी होते हुए भी सर्वोच्च नेतृत्व की कसौटियों पर खरा उतरा जा सकता है।

त्रिशताब्दी जयंती: केवल उत्सव नहीं, आत्ममंथन का अवसर

शनिवार (31 मई, 2025) को देवी अहिल्याबाई होलकर के धरती पर अवतरण के 300 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह केवल एक तथ्य नहीं, बल्कि एक राष्ट्र के लिए आत्ममंथन का अवसर है।

यह सोचने का समय है कि:
● क्या हम उनके न्याय और प्रशासनिक आदर्शों से कुछ सीख पा रहे हैं?
● क्या हमने उनकी प्रजावत्सलता को अपने व्यवहार में उतारा है?
● क्या हम धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति वैसी ही श्रद्धा और सेवा भाव रखते हैं?
● क्या आज के नेताओं और प्रशासकों में उनका आदर्श प्रेरणा बन सकता है?

जब तक इन प्रश्नों का उत्तर ‘हाँ’ नहीं बनता, तब तक देवी अहिल्याबाई की त्रिशताब्दी जयंती का उत्सव केवल रस्म अदायगी बन कर रह जाएगा।

एक युगद्रष्टा का अमर संदेश

अहिल्याबाई का सम्पूर्ण जीवन एक ग्रंथ है, जिसमें त्याग है, धर्म है, नीति है, नेतृत्व है और सबसे बढ़कर है लोकमंगल की भावना। उनके लिए सत्ता सेवा का माध्यम थी, न कि भोग का।

आज आवश्यकता है कि हम अपने बच्चों को उनके जीवन की गाथा सुनाएँ, अपने नेताओं को उनके सिद्धांतों से अवगत कराएँ, और अपने समाज को उनके जीवन से जोड़ें। तभी ‘लोकमाता’ की यह विरासत यथार्थ में जीवित रह पाएगी।

(लेखक हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव सामाजिक एवं राजनीतिक चिंतक हैं)

ज्योति मल्होत्रा और मोहम्मद कासिम एक ही थैली के चट्टे-बट्टे, दोनों भारत से निकाले गए दानिश के इशारे पर कर रहे थे काम: बड़ा भाई हसीन भी पाकिस्तान जाकर ले चुका है ट्रेनिंग

राजस्थान के भरतपुर जिले के डीग से पाकिस्तानी जासूस मोहम्मद कासिम को पकड़ा गया है। मोहम्मद कासिम भी ज्योति मल्होत्रा से जुड़े पाकिस्तानी एंबेसी में तैनात ISI एजेंट एहसान-उर-रहमान उर्फ दानिश के संपर्क में था। वो दानिश को सेना से जुड़ी जानकारियाँ देता था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ISI के ज्योति मल्होत्रा जासूसी नेटवर्क से जुड़ा कासिम 2 बार पाकिस्तान जा चुका है। कासिम पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने, भारतीय सेना के ठिकानों की जानकारी देने और भारतीय सिम कार्ड पाकिस्तान भेजने के आरोप है। कासिम का बड़ा भाई हसीन पुराना पाकिस्तानी एजेंट है। वो पाकिस्तान में ट्रेनिंग ले चुका है। बाद में उसके वीजा से जुड़ी दिक्कतें आई, इसलिए उसने छोटे भाई कासिम को ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भेजा था।

पाकिस्तान जाकर ली जासूसी की ट्रेनिंग

मोहम्मद कासिम अगस्त 2024 और मार्च 2025 में दो बार पाकिस्तान गया। वहाँ उसने लाहौर के एक सैन्य अड्डे पर आईएसआई से जासूसी की ट्रेनिंग ली। वह करीब 90 दिन पाकिस्तान में रहा और वहाँ ‘शाह जी’, ‘ताऊ जी’ और वकास जैसे आईएसआई हैंडलर्स से मिला।

जाँच में पता चला कि कासिम ने भारतीय सिम कार्ड पाकिस्तान भेजे। इन सिम कार्ड का इस्तेमाल पाकिस्तानी जासूसों ने व्हाट्सएप के जरिए भारतीय लोगों से संपर्क करने और सेना व सरकार की गोपनीय जानकारी इकट्ठा करने के लिए किया।

कासिम का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी है। वह दिल्ली में अपहरण के एक मामले में पाँच साल तिहाड़ जेल में सजा काट चुका है। जेल से छूटने के बाद वह अपने गाँव गँगौरा में झाड़-फूँक और तंत्र-मंत्र के बहाने अपनी हरकतों को अंजाम देता था।

कासिम की गिरफ्तारी के बाद उसके तीन भाई हसीन, अफजल मौलाना और इश्तियाक फरार हैं। सूत्रों के मुताबिक, हसीन भी पाकिस्तान जाकर आईएसआई से जासूसी की ट्रेनिंग ले चुका है। वह दोबारा पाकिस्तान जाना चाहता था, लेकिन वीजा की दिक्कतों की वजह से नहीं जा सका। इसके बाद उसने अपने छोटे भाई कासिम को पाकिस्तान भेजा।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान गिरफ्तार

कासिम को ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ के दौरान पकड़ा गया है। जो अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया है। इस अभियान के दौरान ही देशभर में कई जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। अब तक हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश से 11 लोगों को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में पकड़ा जा चुका है।

जानकी जन्मस्थली के उद्धार का मार्ग बिहार सरकार ने किया प्रशस्त, अयोध्या की तर्ज पर पुनौरा धाम का होगा विकास: बोले PM मोदी- यह सनातन गौरव का प्रतीक बनेगा

अयोध्या रामजन्मभूमि के भव्य मंदिर में भगवान श्रीराम के विराजमान होने के बाद से ही यह पूछा जा रहा था कि सीतामढ़ी के पुनौरा धाम स्थित जानकी जन्मस्थली का उद्धार कब होगा। इसकी घड़ी भी आ गई है।

नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार की एनडीए सरकार ने 1950 के बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम में संशोधन करते हुए पुनौरा धाम मंदिर और उससे जुड़ी संपत्तियों को अपने नियंत्रण में ले लिया है। इस जगह को अयोध्या की तरह विकसित करने के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (30 मई 2025) को बिहार के काराकाट में रैली को संबोधित करते हुए भी इसका जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पुनौरा धाम का विकास धार्मिक परियोजना नहीं है। यह भारत की सांस्कृतिक पहचान और सनातन परंपरा के वैश्विक गौरव का प्रतीक बनेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की सरकारें मिलकर इस परियोजना को सफल बनाएँगी।

अध्यादेश से जुड़ी खास बातें

  1. अधिनियम की धारा 32 में संशोधन: बिहार हिंदू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 32 में उपधारा 32(5) जोड़ी गई है, जिससे राज्य सरकार को पुनौराधाम मंदिर के विकास के लिए योजना बनाने का अधिकार प्राप्त हुआ है।
  2. विकास योजना का दायरा: इस योजना में भूमि और सभी परिसंपत्तियों का प्रशासन शामिल होगा, जिसका उद्देश्य मंदिर को राष्ट्रीय महत्व का धार्मिक और पर्यटन आकर्षण बनाना है।
  3. समिति का गठन: राज्य सरकार इस योजना के प्रशासन के लिए प्रतिष्ठित व्यक्तियों की एक समिति गठित करेगी।
  4. वर्तमान न्यास समिति का विघटन: अधिनियम के लागू होने की तिथि से पुनौराधाम मंदिर की वर्तमान न्यास समिति भंग मानी जाएगी, और सभी पदाधिकारी कार्य करना बंद कर देंगे।
  5. न्यास के कर्मचारियों की स्थिति: न्यास के सभी कर्मचारी अनुशासनात्मक कार्रवाई सहित समिति के पूर्ण नियंत्रण के अधीन रहते हुए न्यास की सेवा करते रहेंगे।
  6. समिति का नियंत्रण: राज्य सरकार द्वारा गठित समिति न्यास और उसकी सभी मूर्त और अमूर्त परिसंपत्तियों के प्रबंधन का पूर्ण नियंत्रण अपने हाथ में लेगी।
  7. समिति की रिपोर्टिंग: समिति राज्य सरकार को समय-समय पर रिपोर्ट करेगी।
  8. निर्देशों की बाध्यता: राज्य सरकार योजना के उचित कार्यान्वयन के हित में समिति को निर्देश जारी कर सकती है, और ऐसे निर्देश बाध्यकारी होंगे।
  9. योजना में संशोधन का अधिकार: राज्य सरकार न्यास के समुचित विकास के हित में वर्तमान योजना को संशोधित, परिवर्तित या प्रतिस्थापित कर सकेगी।
  10. समिति का पुनर्गठन: राज्य सरकार किसी भी समय समिति का पुनर्गठन कर सकती है, जिसमें नए सदस्यों को शामिल करना या वर्तमान सदस्यों को बाहर करना शामिल है।
  11. धारा 28 रहेगी लागू: अधिनियम की धारा 28 के अंतर्गत परिषद की सामान्य शक्तियाँ और कर्तव्य न्यास पर लागू रहेंगे।

गौरतलब है कि अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण के बाद केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार से जानकी जन्मस्थली पर भी भव्य मंदिर के निर्माण का वादा किया था। इसके बाद इस दिश में बिहार ने कैबिनेट ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। अप्रैल 2025 में बिहार सरकार के पर्यटन विभाग ने पुनौरा धाम के विकास के लिए करीब 143 करोड़ की योजना स्वीकृत की थी। यह रामायण सर्किट का हिस्सा होगा।

हिंदू विरोधी हिंसा को छिपाने की कोशिश में बुरी तरह एक्सपोज हुआ बांग्लादेश का सलाहकार मोहम्मद यूनुस, ऑपइंडिया ने खोली पोल तो ट्वीट डिलीट कर भागा: इस्लामी कट्टरपंथ का भी उतर गया नकाब

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस को अपना ही ट्वीट हटाना पड़ा, जिसमें उसने ऑपइंडिया की हिंदुओं पर हमले की खबर को ‘गलत’ ठहराने की कोशिश की थी।

बता दें कि 27 मई 2025 को यूनुस ने ट्वीट किया था कि ऑपइंडिया ने एक लेख छापा, जिसका शीर्षक था, ‘बांग्लादेश में हिंदुओं पर फिर टूटा मुस्लिम भीड़ का कहर, घरों में लगाई आग-मचाई लूटमार: इस बार लोकल नेता की मौत को बनाया हिंसा का बहाना‘ इस लेख में जेसोर जिले के अभयनगर में हिंदुओं पर हमले और पत्रकार मुन्नी शाहा की गिरफ्तारी का जिक्र था।

अमेरिका समर्थित सत्ता परिवर्तन के बाद सत्ता में आए यूनुस ने हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा को ‘गुस्से और बदले’ की प्रतिक्रिया बताया, न कि ‘टारगेटेड कम्युनल रायट्स’ यानी सांप्रदायिक नफरत की बात को उसने खारिज करने की कोशिश की। हालाँकि बाद में उसे अपना ट्वीट डिलीट करना पड़ा, क्योंकि ऑपइंडिया ने उसे फिर से आईना दिखा दिया।

मोहम्मद यूनुस के अब हटाये जा चुके ट्वीट का स्क्रीनशॉट

ऑपइंडिया ने यह स्पष्ट किया कि मुहम्मद यूनुस ने अनजाने में हमारी रिपोर्ट की पुष्टि कर दी, इसके बावजूद यूनुस ने जेसोर में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार की खबरों को दबाने की बेतहाशा कोशिश की।

ऑपइंडिया की संपादक नुपुर जे शर्मा ने यूनुस की आलोचना की और कहा कि उनके शासन में इस्लामी कट्टरपंथियों का हौसला बढ़ा है, जिससे हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं। शर्मा ने यूनुस पर आरोप लगाया कि उसके शासन में इस्लामी कट्टरपंथियों का हौसला बढ़ा है और हिंसक इस्लामी भीड़ों को धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर अत्याचार करने की खुली छूट मिल गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि यूनुस का प्रयास न केवल सच्चाई को दबाने वाला था, बल्कि उनके भीतर के इस्लामी कट्टरपंथी इरादे को भी उजागर कर गया। ऑपइंडिया की संपादक की प्रतिक्रिया के बाद यूनुस को ये बात समझ आ गई कि वो पूरी तरह से एक्सपोज हो गया है, तब जाकर उसने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया।

ऑपइंडिया की खबर तथ्यों पर आधारित थी और बांग्लादेशी अखबार प्रोथोम आलो की रिपोर्ट पर थी, जिसमें जेसोर में हिंदुओं के घर जलाए जाने की बात थी। ऑपइंडिया ने न केवल इस घटना को उजागर किया, बल्कि बांग्लादेश में लंबे समय से हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों की सच्चाई को भी सामने लाने का काम किया है।

मुहम्मद यूनुस द्वारा ऑपइंडिया पर लगाया गया आरोप उसकी हताशा और सच्चाई से बचने की कोशिश को दर्शाता है। वह नहीं चाहता कि उसकी सरकार की विफलता और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार दुनिया के सामने आएँ। यूनुस की सरकार इन हमलों को नजरअंदाज कर रही है और मीडिया के जरिए सच्चाई को छिपाने या गलत बताने की कोशिश कर रही है।

जिसका नाम ‘मुबारिक मंसूरी’, जो पढ़ता है ‘इस्लाम और सेक्स’, जो करता है हिंदू महिलाओं का शोषण… उसे बताया ‘तांत्रिक’: कब सुधरोगे दैनिक भास्कर?

शब्दों का हेरफेर करके लोगों को भ्रम में डालना मीडिया का पुराना काम है। सामान्य पाठक तो शायद समझ भी न पाए जो शब्द उसे परोसा जा रहा है उसके पीछे क्या खेल होगा और उसका असर उसकी मानसिकता पर कैसे पड़ेगा। ‘मुस्लिम आलिमों/मौलवियों/मौलानाओं’ को रिपोर्ट में ‘तांत्रिक/साधु/पुजारी’ लिखते आना इसी बात का एक उदाहरण है जिसपर मीडिया सालों से प्रोपगेंडा चलाता आया है।

इस बार भी यही हुआ है। दैनिक भास्कर ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसका शीर्षक है- “मंदसौर में 40-50 महिलाएँ बनीं तांत्रिक का शिकार: महिला के पति को पागल बताकर किया यौन शोषण, गाँव में दहशत।”

इस खबर में जिस आरोपित को ‘तांत्रिक’ बताया जा रहा है उसका नाम मुबारिक मंसूरी है। रिपोर्ट के भीतर स्थानीयों के हवाले से बताया गय है कि मध्य प्रदेश के मंदसौर में मुबारिक मंसूरी ने 40-50 महिलाओं को अपना शिकार बनाया था। ये झाड़-फूँक, वशीकरण आदि का झांसा देकर उन्हें अपने अड्डे पर बुलाता और फिर उन्हें नशीला पदार्थ सुंघाकर उनसे गंदी हरकत करता, उनका रेप करता और उनकी वीडियो बनाता था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस पड़ताल में उसके पास से फर्जी पहचान पत्र मिला और साथ में अश्लील साहित्य भी मिला है। बरामद किताबों की जो सामने जो तस्वीर आई है उसमें साफ-साफ शीर्षक ‘शाम-ए-करबला’ ,’इस्लाम और सेक्स’ लिखा है। बावजूद इन सब सबूतों के मीडिया इसे ऐसे दिखा रहा है जैसे ये कारनामा किसी ‘हिंदू तांत्रिक’ ने किया हो।

दैनिक भास्कर की खबर का स्क्रीनशॉट

दैनिक भास्कर की हेडलाइन पढ़िए। अगर एक अंजान व्यक्ति इसे एकदम से पढ़े तो क्या उसके मन में तांत्रिक की एक छवि नहीं बनेगी। क्या वो ये नहीं सोचेगा कि ये कांड किसी ऐसे व्यक्ति ने किया होगा जिसके माथ पर विभूति, हाथ में कपाल, मुख पर मत्रोंच्चार और सामने अग्रि होगी… लेकिन, अब असली आरोपित की तस्वीर देखिए।

मुबारिक मंसूरी की फोटो

क्या इसका भेष तांत्रिक का है। नहीं, मगर पाठक अपने मन में ये सोच चुका होगा कि 40-50 महिलाओं का रेप वैसे ही तांत्रिक ने किया होगा जिसकी उसने कल्पना की।

मेनस्ट्रीम मीडिया बस यही चाहता है पाठक को भ्रमित करके अपना ऐसा एजेंडा चलाना जिसमें हिंदू संस्कार और उससे जुड़ी परंपराएँ सिर्फ धूमिल होती रहें। फिर चाहें उसके लिए उन्हें एक मजहब और नाम सब छिपाना पड़े। सोचने वाली बात ये है कि ये कोई ऐसा मुद्दा नहीं है जिसपर हिंदुओं को अभी से आपत्ति हो।

स्वयं ऑपइंडिया इस मुद्दे पर 2019 से लगातार खबरें लिख रहा है, इस दौरान तमाम बार ये हाईलाइट किया जा चुका है कि अगर झाड़-फूँक करने वाला मुस्लिम है तो उसे तांत्रिक तो बिलकुल नहीं कहा जाएगा, क्योंकि वो अपना टोना में न मंत्र पढ़ता है और तंत्र विद्या इस्तेमाल करता है।

इतनी आपत्तियों के बाद भी दैनिक भास्कर जैसा अखबर, जिन्होंने इस मुद्दे पर जाकर ग्राउंड रिपोर्टिंग की, वो अपनी एक खबर में जान-बूझकर हेडलाइन में ‘हिंदू तांत्रिक’ शब्द लिखते हैं। देखिए, इसी मामले में 3 दिन पहले भी दैनिक भास्कर ने रिपोर्ट पब्लिश की थी, जिसका शीर्षक था- गरोठ में हिंदू तांत्रिक बना मुबारक मंसूरी, गिरफ्तार:हिंदू महिलाएं थी टारगेट पर, 10 साल से कर रहा था तंत्र-मंत्र का धंधा

दैनिक भास्कर की खबर का स्क्रीनशॉट

बाद में इसी मुद्दे पर की गई दूसरी खबर में भास्कर खुद बताता है कि स्थानीयों ने उन्हें जानकारी दी है कि करीब 30 साल पहले एक मुस्लिम परिवार उनके यहाँ आया था, जिनका का बेटा मुबारिक खान है।

दैनिक भास्कर की खबर में मुबारिक मंसूरी पर स्थानीय का बयान

अब अगर ये भी माना जाए कि पड़ताल के दौरान संस्थान को मुबारिक के मजहब के बारे में पता चला और पहले उन्हें गलत सूचना थी, तो क्या पूर्व में प्रकाशित खबर में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए था।

ये कोई पहली बार नहीं है जब किसी मीडिया संस्थान ने ऐसी हरकत की हो। सिर्फ दैनिक भास्कर की बात करें तो इससे पहले जब मेरठ में नाबालिग के अपहरण और ठगी का मामला आया था। उस समय भी हेडलाइन में ‘तांत्रिक’ शब्द लिखा हुआ था जबकि आरोपित राशिद खान था।

इसी तरह सीतापुर में भी जब एक इश्तियाक नाम के आलिम ने एक किशोरी को झाड़-फूँक के नाम पर सिर से लेकर पाँव तक अगरबत्ती से दाग दिया था और बेल्ट से पीटा तक था उस समय भी मीडिया ने उसे तांत्रिक बनाया था।

इसके बाद अगला मामला सुल्तानपुर का था। तब भी हिंदू महिला को एक मौलवी ने ठगा था, मगर भास्कर ने हेडलाइन में शब्द इस्तेमाल किया था ‘तांत्रिक।’

2019 की खबरों में और 2025 की खबरों में कोई अंतर नहीं है। आज भी खबरों में ‘तांत्रिक’ शब्द धड़ल्ले से लिखा जा रहा है। अनुवाद के नाम ‘प्रीस्ट’ को उस जगह भी पुजारी लिख दिया जाता है जहाँ अपराध किसी ईसाई पादरी ने किया हो…। कोई सवाल उठता है तो उसे गंगा-जमुनी तहजीब से जोड़कर सही साबित करने के प्रयास होते हैं, फिर इसी क्रम में पाठकों का ब्रेनवॉश होता है और उनके जहन में बसाया जाता है कि अपराध करने वाला किसी अन्य मजहब नहीं हिंदू है।

पहलगाम में इस्लामी आतंकियों ने जिस शुभम को मार डाला, कानपुर में उनके परिवार से मिले PM मोदी: कहा- ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ, दुश्मन कहीं भी हो होंक दिया जाएगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (30 मई 2025) को कानपुर के चकेरी एयरपोर्ट पर पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए कारोबारी शुभम द्विवेदी के परिवार से मुलाकात की। इस भावुक मुलाकात में पीएम मोदी ने शुभम की पत्नी ऐशान्या, पिता संजय और माँ सीमा से बात की।

शुभम की पत्नी ऐशान्या ने कहा, “प्रधानमंत्री से मिलकर ऐसा लगा जैसे घर का बड़ा सिर पर हाथ रख देता है।” उन्होंने बताया कि पीएम ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को और तेज करने का भरोसा दिलाया।

ऐशान्या ने बताया कि पीएम ने उनसे हमले की पूरी जानकारी ली और करीब 10 मिनट तक परिवार के साथ रहे। उन्होंने कहा, “पीएम बहुत दुखी थे। उन्होंने कहा कि आतंकी कश्मीर में बढ़ते टूरिज्म और खुशहाली को बिगाड़ना चाहते थे।” उन्होंने बताया कि पीएम मोदी ने परिवार से आगे भी मिलने का भरोसा दिया है।

शुभम के पिता संजय द्विवेदी ने कहा, “हमने पीएम का आभार जताया कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकियों को जवाब दिया। पूरा देश आतंकवाद के खिलाफ उनकी इस लड़ाई में साथ है।” संजय ने बताया कि पीएम ने उनके कंधे पर हाथ रखकर सांत्वना दी और कहा कि शहीदों की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। उन्होंने कहा, “पीएम भी भावुक हो गए। उनकी बातें ऐसी थीं जैसे परिवार का मुखिया बोल रहा हो।”

परिवार से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसभा में कहा, “पाकिस्तान का कोई भी खेल अब नहीं चलेगा। कानपुरिया अंदाज में कहें तो दुश्मन कहीं भी हो, उसे होंक दिया जाएगा।” पीएम ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर अभी रुका है, खत्म नहीं हुआ। आतंकवाद के खिलाफ यह लंबी लड़ाई है और इसे हम जीतेंगे।” पीएम ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को अपनी हरकतों की सजा मिलेगी और भारत का ‘मेक इन इंडिया’ हथियारों की ताकत दुनिया ने देखी है।

कानपुर में पीएम मोदी ने 47,573 करोड़ रुपये की 15 मेगा विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। इनमें कानपुर मेट्रो के चुन्नीगंज से कानपुर सेंट्रल तक के नए अंडरग्राउंड सेक्शन, घाटमपुर में 660 मेगावाट की तीन बिजली इकाइयाँ और पनकी में तापीय विद्युत परियोजना शामिल हैं।

गौरतलब है कि पीएम मोदी की रैली कानपुर में बीते माह ही होनी थी, लेकिन पहलगाम हमले की वजह से ये रैली रद्द कर दी गई। कानपुर के शुभम द्विवेदी (31) उन 26 लोगों में शामिल थे, जिनकी 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में जान चली गई थी। शुभम की शादी इसी साल 12 फरवरी को हुई थी। वह अपनी पत्नी और रिश्तेदारों के साथ पहलगाम घूमने गए थे, जब आतंकियों ने उनकी हत्या की।

पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने 6 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों को तो नष्ट किया ही, साथ ही पाकिस्तान के एयरबेस को भी निशाना बनाया।

बांग्लादेश भागने वाला था ‘जिहाद का इंजीनियर’ हुमायूँ कबीर, अम्मी-अब्बू को चाकुओं से गोदा, फिर मदरसे में किया अटैक: बंगाल पुलिस से बचाना चाहती थी इस्लामी भीड़

बंगाल में अपने अम्मी-अब्बू की चाकू से बेहरमी से हत्या करने वाले हूमायूँ कबीर को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अपनी जिहादी सोच की वजह से उसने न सिर्फ अम्मी-अब्बू का मर्डर किया बल्कि मदरसा के 4 आलिमों को मारने की कोशिश की।

वह बांग्लादेश भागना चाहता था लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को शक है कि वो कई विदेशी कट्टरपंथी संगठनों के संपर्क में था।

जाधवपुर यूनिवर्सिटी से इंजीनियर की डिग्री लेने वाला हुमायूँ कबीर ने बुधवार (28 मई 2025) को अपने अब्बू मुसफतिजुर रहमान और अम्मी मुमताज परवीन की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी, क्योंकि वे उसे जिहादी मानसिकता से अलग होने और सामान्य जीवन जीने के लिए समझाया करते थे। घटना वाले दिन भी अम्मी-अब्बू ने उसे समझाने की कोशिश की थी।

जिहादी सोच की वजह से बीवी ने छोड़ा साथ

कबीर का पिछले साल तलाक हुआ था। पड़ोसियों के मुताबिक कबीर की जिहादी सोच की वजह से ही बीवी ने उसे तलाक दे दिया। बीवी पढ़ी-लिखी थी और उसे जिहादी सोच से बाहर निकलने के लिए कहती थी। बीवी के अम्मी-अब्बू दुबई में रहते हैं। जब कबीर ने जिहादी मानसिकता नहीं छोड़ा तो बीवी उसे छोड़कर दुबई चली गई। इसके बाद वह और भी जिद्दी और गुस्सैल हो गया।

कबीर नोएडा में काम करता था, लेकिन 5 महीने पहले उसकी नौकरी चली गई और वह वापस कोलकाता चला गया। वह अक्सर लैपटॉप और मोबाइल पर जेहादी कंटेंट देखता था। 2012 में यूनिवर्सिटी से पास आउट हुमायूँ पर जिहादी साहित्य का काफी असर पड़ा।

अम्मी-अब्बू ने की थी समझाने की कोशिश

मेमारी में घर पर अम्मी-अब्बू की हत्या से पहले भी उसकी बहस उनसे हुई थी। बहस के बाद अम्मी-अब्बू ने हावड़ा में स्कूल टीचर बेटी तमन्ना रहमान से बात की और भाई को समझाने को कहा था।
यहाँ तक कि अम्मी-अब्बू ने पड़ोसियों को भी बेटे को समझाने के लिए कहा था, लेकिन किसी की नहीं चली।

सवाल नहीं देने पर की आलिमों पर हमला

पुलिस के मुताबिक उसने मदरसे के आलिमों पर ‘जवाब नहीं देने पर’ हमला किया था। आलिमों ने इस्लाम और जिहाद से संबंधित उसके सवालों का जवाब देने से मना कर दिया था। हुमायूँ बांग्लादेश भागना चाहता था इसलिए सीमा से सटे क्षेत्र बनगाँव के मदरसे में पहुँचा था। पुलिस जब उसे गिरफ्तार करने पहुँची तो मुस्लिम भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। भीड़ हुमायूँ को छुड़वाना चाहती थी।