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सर्वे की आड़ में बहराइच में बिछाया जा रहा था विस्फोटक, CM योगी के दौरे से पहले 500 किलो का जखीरा मिला; बंगाल के 70 लोग गिरफ्तार: मजार को बुलडोजर से किया समतल

बहराइच में हाल ही में दो बड़ी खबरें सामने आई हैं। एक तरफ 500 किलो विस्फोटक पकड़ा गया है, तो दूसरी तरफ 700 साल पुरानी मजार पर बुलडोजर चला है। ये ऐसे समय विस्फोटक मिला है, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 10 जून 2025 को बहराइच के दौरे पर है।

सर्वे के नाम पर बिछाया विस्फोटक

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बहराइच जाने वाले हैं, लेकिन उनके दौरे से ठीक पहले ही जिले में एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने करीब 500 किलो विस्फोटक पकड़ा है और इस मामले में पश्चिम बंगाल के 70 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

यह सब तब शुरू हुआ जब हरदी इलाके के सिकंदरपुर गाँव के पास करीब 200 लोग तीन गाड़ियों में आए। पकड़े गए लोगों ने खुद को एक तेल कंपनी का सर्वे करने वाला बताया। जब गाँव वालों ने उनसे पूछा कि वे क्या कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि वे भेड़िए ढूँढने आए हैं।

इसके बाद उन्होंने करीब 20 किलोमीटर के इलाके में जमीन में छेद करके अमोनियम नाइट्रेट विस्फोटक बिछाना शुरू कर दिया। ये विस्फोटक बालासराय, लखनापुर, सधुवापुर, सिकंदरपुर और औराही जैसे कई गाँवों में बिछाए गए थे।

ग्रामीणों की शिकायत से मचा हड़कंप

रविवार (8 जून 2025) को जब गाँव वालों को इस बारे में पता चला तो उन्होंने तुरंत महसी के विधायक सुरेश्वर सिंह को बताया। विधायक तुरंत मौके पर पहुँचे और अधिकारियों को सूचना दी, लेकिन शुरुआत में कोई नहीं आया।

जब इसकी जानकारी बड़े अधिकारियों तक पहुँची, तो हड़कंप मच गया। तुरंत एसडीएम, एसपी और अन्य बड़े अधिकारी मौके पर पहुँचे। वहाँ गाड़ियों में भारी मात्रा में विस्फोटक लदा हुआ मिला। विधायक सुरेश्वर सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि इतना विस्फोटक मिलने के बाद भी स्थानीय पुलिस अधिकारी गाँव वालों पर गाड़ियों को छोड़ने का दबाव डाल रहे थे।

सीएम के दौरे से पहले विस्फोटक मिलना एक साजिश?

विधायक सुरेश्वर सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री के दौरे से ठीक एक दिन पहले इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक का मिलना किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। वहीं, बहराइच के ग्रामीण एएसपी डीपी तिवारी ने बताया कि अब तक 70 लोगों को पकड़ा गया है और इनमें से ज़्यादातर पश्चिम बंगाल के हैं।

वहीं सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने पहले ही सुरक्षा एजेंसियों को चेतावनी दी थी कि 37 लोग नेपाल की सीमा से होते हुए बहराइच में घुसपैठ कर सकते हैं। इनमें बांग्लादेशी और रोहिंग्या भी हो सकते थे।

700 साल पुरानी मजार पर चला बुलडोजर

बहराइच में सिर्फ विस्फोटक ही नहीं, बल्कि 700 साल पुरानी लक्कड़ शाह बाबा की मजार पर भी बुलडोजर चला है। इसके अलावा चमन शाह, भंवर शाह और शहंशाह बाबा की मजारें भी हटा दी गई हैं। यह दावा किया जा रहा है कि मजार 700 साल पुरानी है।

वन विभाग ने मजार कमेटी को पहले ही बता दिया था कि उन्हें ये मजारें हटानी होंगी, क्योंकि उनके पास जमीन के कोई कानूनी कागज़ात नहीं थे। यह कार्रवाई कतर्नियाघाट जंगल में हुई है। मजार को चलाने वाले लोग कह रहे थे कि यह जमीन वक्फ की है (जो धार्मिक कामों के लिए दी जाती है), लेकिन वे इसका कोई सबूत नहीं दिखा पाए।

लक्कड़ शाह मजार चलाने वाली कमेटी के अध्यक्ष रईस अहमद ने इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि यह दरगाह हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक थी और यहाँ ज़्यादातर हिंदू लोग आते थे।

सरकार का क्या कहना है?

प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई सरकारी ज़मीन से कब्ज़ा हटाने के अभियान का हिस्सा है। वे बता रहे हैं कि यह बिना किसी भेदभाव के किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पूरे उत्तर प्रदेश में सरकारी ज़मीनों से अवैध कब्ज़े हटाने पर ज़ोर दे रही है।

विदेशों से हथियार खरीदने वाला भारत विश्व को बेच रहा ब्रह्मोस-पिनाका, 11 साल में डिफेन्स सेक्टर में मोदी सरकार ने किया आत्मनिर्भर: कॉन्ग्रेस राज में व्याप्त था भ्रष्टाचार-पॉलिसी पैरालिसिस

देश की सैन्य आत्मनिर्भरता ना केवल देश की आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है बल्कि बाह्य सुरक्षा की नजरिए से भी महत्वपूर्ण है। किसी भी देश का खुद के हथियार बनाना सबसे महत्वपूर्ण होता है। भारत हथियारों के मामले में दुनिया के आत्मनिर्भर देशों में शामिल हो गया है।

यह परिवर्तन 2014 के बाद सामने आया है। 2014 से पहले भारत का रक्षा निर्यात काफी बदहाली के दौर से गुजर रहा था और हम आयात पर निर्भर थे। लेकिन इस निर्भरता को आत्मनिर्भरता में बदलने का काम 2014 के बाद आई मोदी सरकार ने किया।

सैन्य आयात पर निर्भर था भारत

स्कॉटहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के मुताबिक, 2009 से 2013 तक भारत पूरे दुनिया केहथियारों का 13% आयात किया करता था। इसका परिणाम यह हुआ कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली सैन्य क्षमताओं वाला देश हथियारों की आपूर्ति के मामले में दूसरे देशों पर निर्भर होता चला गया।

विदेशी सप्लायर भारत के घरेलू उत्पादन उद्योग को कमजोर करते चले गए। रक्षा निर्यात की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2004-2005 से 2013-14 तक रक्षा निर्यात की कुल राशि ₹4,312 करोड़ थी जो अब बढ़ कर ₹23,622 करोड़ हो गई है।

सेना के पूर्व अफसर ने खोली कॉन्ग्रेस की पोल पट्टी

रक्षा निर्यात की रिपोर्ट में साफ बताया गया है कि किस तरह कॉन्ग्रेस ने देश की सुरक्षा को हाशिये पर रख दिया। रक्षा निर्यात की रिपोर्ट में उत्तरी सेवा के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एच.एस पनाग ने इस रिपोर्ट में बताया है कि 2013-14 तक हमारा निर्यात मात्र 110 मिलियन डॉलर था।

उन्होने बताया कि हमारे देश की रक्षा निर्यात का कोई अस्तित्व ही नहीं था। उनके अनुसार, पहले की सरकार में रक्षा मंत्रालय से एनओसी लेने के बाद व्यापार करने की व्यवस्था थी, उस वक्त भी सरकार ने रक्षा निर्यात पर गंभीरता से विचार नहीं किया। यही कारण है कि 2014 के बाद भी एनडीए सरकार के गंभीर प्रयासों के बावजूद रक्षा निर्यात इतना कम है।

कॉन्ग्रेस सरकार में DRDO की भी टूट चुकी थी कमर

DRDO जो भारत की रक्षा प्रणाली को सशक्त करने के लिए जानी जाती है, उसकी हालत कॉन्ग्रेस सरकार में बद से बदतर हो चुकी थी। रिपोर्ट के अनुसार 6000 वैज्ञानिकों में केवल 3% वैज्ञानिक ही ऐसे थे जिन्होंने इंजीनियरिंग में पीएचडी कर रखी थी।

यह बात खुद इस रिपोर्ट में विज्ञान और प्रद्योगिकी विभाग के पूर्व सचिव पी.रामा राव की अध्यक्षता वाली समीक्षा समिति ने कही है। अन्य कई देश अपनी सैन्य शक्ति को मजबूत करने के लिए अपने देश में उत्पादन और नौकरी को बढ़ावा दे रहे थे। उसी वक्त भारत एक खरीदार के रूप में फंसा हुआ था और आयात पर अरबों डॉलर खर्च कर रहा था।

बोफोर्स जैसे घोटालों से कमजोर होता गया देश

रक्षा निर्यात की रिपोर्ट में 2014 से पहले कॉन्ग्रेस की सरकार में हुए लूट और भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया गया है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि 1980 का बोफोर्स घोटाला में 64 करोड़ की रिश्वत का मामला सीधे राजीव गाँधी से जाकर जुड़ता है।

इसका खुलासा खुद स्वीडिश रेडियो कार्यक्रम में किया गया जिसमें खुद बोफोर्स के कर्मचारियों ने कहा कि इसके लिए रिश्वत दी गई थी। बयान के अनुसार उस वक्त कॉन्ग्रेस के कई वरिष्ठ सदस्यों और राजनेताओं को 8.2 बिलियन की रिश्वत दी गई थी।

इसके अलावा अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में भी कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेताओं के शामिल होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में शामिल टाट्रा ट्रक और बाराक मिसाइल स्कैम ने भी कांग्रेस की बकिय उधेर कर रख दी है। उस वक्त कॉन्ग्रेस के द्वारा किए गए इस सुरक्षा खिलवाड़ के नतीजे ने भारत की सैन्य ताकत को भीतर से कमजोर कर दिया था।

2014 के बाद रक्षा जगत में आया सकारात्मक परिवर्तन

रक्षा निर्यात रिपोर्ट के अनुसार 2014 के बाद भारत सरकार ने आयात निर्भरता में लगातार कमी लाई। भारतीय कंपनियों को निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया गया और उनका आत्मविश्वास बढ़ाया गया।

2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा शुरू ‘मेक इन इंडिया’ ने भारत में निर्मित डिजाइन को विकसित करने में काफी मदद पहुंचाई। इसके अलावा DAP(रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया) के तहत खरीदी में भी बदलाव किया गया। 500 से अधिक हथियारों के आयात पर रोक दी लगा दी गई जिसमें टैंक, आर्टिलरी मशीन और रडार भी शामिल है।

देश के रक्षा उत्पादन का मूल्य 174% की वृद्धि के साथ ₹1,27,434 करोड़ तक पहुँच गया जो 2014-15 में 46,429 करोड़ था। सरकार के द्वारा सैन्य प्लेटफार्म का विकास किया गया। नौसेना को सशक्त बनाने के लिए स्वदेशी विमान वाहक, पनडुब्बी और फास्ट अटैक क्राफ्ट आदि के निर्माण पर जोड़ दिया गया। यह सब मेक इन इंडिया की पहल के सकारात्मक परिणाम का स्वरूप है।

निजी कंपनियों को भी सरकार द्वारा दिया गया प्रोत्साहन

कॉन्ग्रेस के कार्यकाल में हाशिये पर पहुँच चुकी निजी कंपनियां को मोदी सरकार में बल मिला। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व सचिव पी.रामा राव के अध्यक्षता वाली समीक्षा समिति की रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि कॉन्ग्रेस की सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण प्राइवेट कंपनियों को रक्षा तकनीक के उत्पादन से दूर रखा गया था।

लेकिन अब ऐसा नहीं है। सैन्य सुरक्षा के विकास को देखते हुए सरकार ने निजी कंपनियों से सहयोग लिया ताकि देश की रक्षा प्रणाली को ज्यादा से ज्यादा मजबूत बनाया जा सके। सरकार के इस निर्णायक बदलाव के फलस्वरूप रक्षा क्षेत्र के जगत में कई बड़ी कंपनियों का प्रवेश हुआ।

टाटा, एलएनटी डिफेंस, भारत फोर्ज, कल्याणी ग्रुप और महिंद्रा जैसी बड़ी कंपनियां आर्टिलरी सिस्टम, बख्तर बंद वाहन, रडार सिस्टम, पनडुब्बी विमान के पुर्जे और ड्रोन सहित कई रक्षा सामग्रियों का निर्माण कर रही हैं।

इसका नतीजा यह हुआ कि वित्त वर्ष 2024-25 में निजी क्षेत्र में ₹15,233 करोड़ का रक्षा निर्यात किया जिसे किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण कहा जाना गलत नहीं है।

लड़ाकू विमान तेजस बना घरेलू क्षमता का प्रतीक

देश के रक्षा उत्पादन और तकनीक का सार्थक उदाहरण, स्व-निर्मित लड़ाकू विमान तेजस भारत की शान बना। विश्व के कई देशों से इसकी माँग और तेज हो गई। दरअसल तेजस एक भारतीय फाइटर जेट है जो सिंगल इंजन, डेल्टा विंग और मल्टी रोल लाइट फाइटर जेट है।

सुपरसोनिक लड़ाकू विमानों की श्रेणी में सबसे यह छोटा और हल्का है। इसकी मारक क्षमता को देखते हुए विश्व के कई देश इसे खरीदने में अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

100+ देशों को हथियार निर्यात करने वाला देश बना भारत

भारतीय रक्षा प्रणाली और सैनिक उपकरणों का लोहा पूरी दुनिया मान रही है। यही कारण है कि आज भारत 100 से ज्यादा देशों को हथियार निर्यात करता है। इसी के साथ भारत विश्व के रक्षा निर्यातक देशों में 25वें स्थान पर पहुँच चुका है।

रक्षा निर्यात रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2025 में भारत ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल का दूसरा बेंच फिलिपींस को भेजा। इसके अलावा आर्मेनिया, ब्राजील और इंडोनेशिया भी भारत के साथ रक्षा सौदा कर रहे हैं।

म्यांमार गोला-बारूद, इसराइल ड्रोन और आर्मेनिया आर्टिलरी सिस्टम हमसे खरीद रहा है। भारत में आर्मेनिया को 6 एडवांस्ड आर्टिलरी गन सिस्टम निर्यात किए हैं। रिपोर्ट से यह साफ है कि भारत का कद रक्षा निर्यातकों में विश्व के जाने-माने देशों तक बढ़ चुका है।

ऑपरेशन सिंदूर ने भी भारतीय हथियारों की बढ़ाई माँग

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता ने भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट को और ज्यादा मजबूती दी है। भारत की लगभग 100 कंपनियां रक्षा उत्पादों का निर्यात कर रही हैं। मोदी सरकार 2019 तक रक्षा निर्यात को दुगना करके 6 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की तैयारी में है।

केंद्र सरकार ने साल 2024-25 के रक्षा बजट के लिए ₹6.21 लाख करोड़ आवंटित किए हैं। यह पिछले वित्तीय वर्ष में आवंटित ₹5.94 लाख करोड़ रुपये से 4.3% अधिक है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पिनाका, तेजस और ब्रह्मोस मिसाइल की माँग में काफी तेजी आई है।

भारत अपने रक्षा उत्पादों का विस्तार अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका तक करने की तैयारी में है। यह मोदी सरकार की सफलता ही है कि विश्व गुरु बनने की राह में भारत अब वैश्विक हथियार के बाजार में भी एक भरोसेमंद निर्यातक बनकर उभरा है।

हड़प्पा से भी 5000 साल पहले बस चुका था कच्छ, रहने वाले समुद्र से जुटाते थे खाना: शंख-सीप पर हुई नई रिसर्च से आया सामने

गुजरात के कच्छ में भारतीय पुरातत्व के लिए एक महत्वपूर्ण खोज सामने आई है। इससे भारत के मानव इतिहास की समय रेखा को और भी पीछे धकेल दिया है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गांधीनगर (IITGN) के नेतृत्व में किए गए इस शोध में यह पाया गया कि इस क्षेत्र में इंसानों की मौजूदगी हड़प्पा सभ्यता से लगभग 5,000 साल पहले भी थी।

यह जानकारी खोज में मिले शैल मिडेंस (सीपों के ढेर), पत्थर के औजारों और अन्य सांस्कृतिक अवशेषों की जाँच सामने आई है।

इस अध्ययन में IIT कानपुर, PRL अहमदाबाद और IUAC दिल्ली जैसे संस्थानों के वैज्ञानिकों ने भी सहयोग किया है। इस शोध से पता चला है कि उस समय के शिकार और भोजन जुटाने वाले समुदय तटीय संसाधनों पर निर्भर थे और अपने पर्यावरण के अनुसार जीवनशैली अपनाए हुए थे।

यह शोध कच्छ के सांस्कृतिक विकास को समझने और भारत की प्राचीन सभ्यताओं के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

ऐतिहासिक खोज: क्या मिला और क्यों है खास

शोधकर्ताओं ने कच्छ के खादिर द्वीप और उसके आस-पास के क्षेत्रों में गहराई से खुदाई करके कई अद्भुत चीजें खोजीं। जिनमें सबसे अहम सीपों के ढेर और पत्थर के औजार है। इन दोनों चीजों यह जानकारी मिलती हैं कि यहाँ कोई इंसानी आबादी बहुत पहले रह रही थी, जो समुद्र से मिलने वाले जीव-जंतुओं को खाकर जीवन यापन करती थी।

ये असल में शंख, सीप, गैस्ट्रोपोड जैसे समुद्री जीवों के खोलों के ढेर होते हैं जिन्हें इंसान खाकर फेंक देता है। इस बात का अंदाजा तब लगा जब खुदाई में खुरचने, काटने और चीरने जैसे रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल होने वाले उपकरण मिले।

शोध में बताया गया है कि इन औजारों के लिए इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल अंदाजन खादिर द्वीप से लाया गया होगा, जो बाद में हड़प्पा शहर धोलावीरा के लिए प्रसिद्ध हुआ। इस खोज से यह भी पता लगता है कि यह वस्तुएं संभवतः हड़प्पा काल से भी 5,000 साल पहले के समय की है।

पहले यह माना जाता था कि कच्छ क्षेत्र में मानव बस्तियाँ मुख्य रूप से सिंधु घाटी सभ्यता के प्रभाव से आईं, लेकिन यह खोज बताती है कि यहाँ का विकास स्थानीय स्तर पर और बहुत पहले शुरू हो चुका था।  शोधकर्ताओं ने कितनी पुरानी हैं ये वस्तुएँ, इसका वैज्ञानिक प्रमाण मिला है।

जिसके लिए उन्होंने एक्सेलेरेटर मास स्पेक्ट्रोमेट्री (AMS) तकनीक का इस्तेमाल किया। विशेषज्ञों की भूमिका की बात करें तो PRL अहमदाबाद के प्रो रवि भूषण और IUAC दिल्ली के डॉ. पंकज कुमार जैसे विशेषज्ञों ने इसकी जाँच पड़ताल में सहयोग किया। इन वैज्ञानिकों ने इस बात का ध्यान रखा की जो भी परिणाम है, वो विश्वसनीय और सटीक है।

इस पूरी तकनीक से न सिर्फ खोज की उम्र का पता लगता है, बल्कि यह भी पता चलता है की भारत में वैज्ञानिक पुरातत्व का स्तर किस हद तक आगे बढ़ चुका है।

कैसे रहते थे उस वक्त के लोग

शोध में यह भी सामने आया कि इस क्षेत्र में रहने वाले लोग प्राचीन शिकारी और भोजन जुटाने वाले समुदाय से थे। ये लोग मैंग्रोव वनों से घिरे इलाकों में रहते थे और समुद्र से मिलने वाले जीवों जैसे सीप और शंख पर निर्भर थे। इससे पता चलता है कि उन्होंने अपने वातावरण के अनुसार अपने जीवनशैली को विकसित कर लिया था।

जिससे इस समुदाय के लोग स्थायी खेती करने वाले नहीं थे, बल्कि ये लोग तटीय संसाधनों को इकट्ठा करके अपने जीवन को जिया करते थे। उन्होंने शायद मौसमी रूप से विभिन्न क्षेत्रों में जाकर शिकार करना और भोजन को इकट्ठा करना सीख लिया हो।

इन लोगों ने स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर के पत्थर के औजार भी बनाए जिनका इस्तेमाल किया जो सामग्री इस्तेमाल हुई, वह भी स्थानीय थी। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि उस समय के लोग न सिर्फ संसाधनों का उपयोग कर रहे थे, बल्कि उनके उपयोग के बारे में पूरी जानकारी भी रखते थे।

डॉ शिखा राय ने बताया कि इस अध्ययन ने हमें सोचने पर मजबूर करता है कि जब उस दौर में तकनीक नाम मात्र की थी, तब भी लोग जलवायु और परिस्थिति के अनुसार जीवन जीने में सफल थे।

शोध टीम अब गुजरात में प्रागैतिहासिक काल से लेकर ऐतिहासिक काल तक के सांस्कृतिक विकास का अध्ययन करना चाहती है, ताकि यह समझा जा सके कि समय के साथ मानव जीवन कैसे बदला।

इस अध्ययन के महत्वपूर्ण निष्कर्षों को 2025 में आयोजित होने वाले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत किया जाएगा, जिनमें हार्टविक कॉलेज और शिकागो विश्वविद्यालय की वार्षिक कार्यशाला, सोरबोन विश्वविद्यालय (पेरिस) की सेमिनार श्रृंखला और आईएसपीक्यूएस (रायपुर) का 50वां वार्षिक सम्मेलन शामिल हैं।

50 का बनाया टारगेट, 23 लड़कियों को फँसाया… इमरान ने वीडियो भी वायरल किए: हिन्दू नाम रख बनाता था निशाना, पुलिस ने किया गिरफ्तार

“कुछ लोगों की उतनी उम्र नहीं, उतनी मेरी गर्लफ्रेंड रह चुकी हैं। 23 गर्लफ्रेंड, वो भी मैंने 2 साल में बनाई हैं, वैसे तो मुझे 50 गर्लफ्रेंड पटानी थीं”… यह शब्द हैं मथुरा के एक ऑटो ड्राइवर इमरान के। वैसे तो उसका पेशा सवारी छोड़ना है, लेकिन उसने अपने जीवन का टारगेट बनाया हिंदू लड़कियों को फँसाना।

इमरान खुद को हिंदू बताकर कॉलेज की लड़कियों से दोस्ती करता था, फिर प्रेम-जाल में फँसाता था। इमरान अपने ऑटो में बैठने वाली हर लड़की पर डोरे डालता था। वह खासकर कॉलेज की लड़कियों को निशाना बनाता था।

इमरान छात्राओं को मुफ्त में ऑटो में बिठाता था और उनको अपने जाल में फँसाता। वह फिर शादी का झाँसा देकर अश्लील वीडियो बनाता था। उसने इन वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट भी कर दिया है।

इमरान द्वारा किया गया पोस्ट (साभार: VHP)

यह पूरा मामला मामला तब सामने आया जब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने शुरू हो गए। इनमें इमरान हिंदू लड़कियों के साथ आपत्तिजनक हालात में दिख रहा है। जब यह वीडियो हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं तक पहुँची तब उन्होंने कार्रवाई की माँग की। कार्यकर्ताओं ने इमरान की गिरफ्तारी की माँग उठाई।

इमरान ने बकरीद पर किया विवादित पोस्ट

इमरान पर धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले पोस्ट करने के भी आरोप हैं। बकरीद पर भी इमरान ने एक पोस्ट किया। इसमें लिखा, “तुमने (हिंदू) भी तो कहा था होली पर बाहर मत निकलो, तुम्हें भी ईद पर बाहर नहीं जाना चाहिए। यही ‘भाईचारा’ है। अगर किसी को खून और कुर्बानी से परेशानी है, तो बाहर मत जाओ। बाहर खून की नदियाँ बहेंगी।”

बकरीद पर इमरान द्वारा किया गया पोस्ट (साभार: VHP)

इस पोस्ट के साथ इमरान ने दो वीडियो भी शेयर किए थे। इनमें एक वीडियो में एक औरत मीट काटते दिख रही है। वहीं, दूसरी वीडियो में गलियों की सड़कों पर खून बह रहा है।

हिंदू संगठनों ने मामले में की शिकायत

इमरान के आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद हिंदू संगठन ने संज्ञान लिया। राष्ट्र स्वयं सेवक संघ (RSS) के संगठन धर्म जागरण संघ, बजरंग दल, धर्म जागरण समन्वय और बाँके बिहारी गौ सेना संस्थान ने विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस चौकी के बाहर इमरान की गिरफ्तारी की माँग की गई।

संगठन के नेताओं ने कहा, “इमरान खुद को हिंदू नाम से परिचित कराता था। हिंदू लड़कियों से नजदीकियाँ बढ़ाता। भरोसा जीतने के बाद वह उनके साथ आपत्तिजनक वीडियो बनाता और फिर सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करता।”

धर्म जागरण संघ के विष्णु चौहान ने ऑपइंडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा, “हमने इमरान के फोन पर कई पीड़ितों के वीडियो और फोटो देखे। हालाँकि, जब हम उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग करने दोबारा गए तो पुलिस ने कहा कि डेटा मिटा दिया गया है। अब पुलिस कह रही है कि डेटा रिकवर करने के लिए उसका फोन फोरेंसिक को भेजा जाएगा।”

विष्णु चौहान ने पुलिस से लिखित में शिकायत कर दी है। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी है। इसमें लिखा गया है कि इमरान आए दिन धार्मिक भावना आहत करने वाली पोस्ट डालता है। इसी के साथ हिंदू समाज की लड़कियों के खिलाफ अश्लील टिप्पणी भी करता है। इससे हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएँ आहत हो रही हैं।

कार्यकर्ता विष्णु चौहान द्वारा दर्ज की गई शिकायत (साभार: VHP)

पुलिस ने शिकायत के आधार पर इमरान के खिलाफ कोतवाली पुलिस थाने में FIR दर्ज की है। इमरान पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296 और 299 लगाकर केस दर्ज किया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR की भी कॉपी है।

इमरान के खिलाफ दर्ज एफआईआर की कॉपी (साभार: VHP)

पूरे मामले को लेकर सीओ भूषण कुमार ने बयान भी जारी किया है। उन्होंने बताया कि इमरान को भरतपुर गेट से रविवार (08 जून 2025) को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने उसका मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस सीज किए हैं। उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। साथ ही उससे जुड़े नेटवर्क की खोज में जाँच की जा रही है।

हामिद ने किया नाबालिग के साथ लगातार रेप, 2 बार किया प्रेग्नेंट: अब ओडिशा हाई कोर्ट ने पीड़ित से निकाह के लिए दी जमानत, कहा- POCSO का उद्देश्य किशोरों के बीच ‘प्रेम’ को अपराध बनाना नहीं

ओडिशा हाई कोर्ट ने एक नाबालिग लड़की का लगातार रेप करने वाले एक शख्स को अंतरिम जमानत दे दी है। आरोपित ने लड़की को 2 बार प्रेग्नेंट भी कर दिया था। उसका जबरदस्ती गर्भपात भी करवाया गया। अब कोर्ट ने पीड़िता से निकाह करने के लिए ही आरोपित को अंतरिम जमानत दी है।

ओडिशा हाई कोर्ट में ने 26 साल के आरोपित युवक हामिद को एक महीने के लिए यह अंतरिम जमानत दी है। ओडिशा हाई ने कहा है कि दोनों का रिश्ता किसी दबाव से नहीं बल्कि आपसी सहमति से बना था। हाई कोर्ट ने कहा है कि निकाह करने और जमानत खत्म होने के बाद हामिद को वापस लौटना होगा।

कोर्ट का कहना है कि दोनों के परिवार वाले उनकी शादी के लिए राजी हैं, इसलिए उसको जमानत दी जा रही है। ओडिशा हाई कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस दौरान लड़की के लगाए आरोपों पर जाँच चलती रहेगी।

ओडिशा हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाने के दौरान किशोरों के प्रेम संबंध को लेकर टिप्पणियाँ भी की और POCSO के मामलों के विषय में भी बताया। हाँलाकि मामले की गंभीरता को समझते हुए जाँच लगातार जारी रहेगी।

क्या था मामला?

आरोपित को POCSO एक्ट के तहत 2023 में गिरफ्तार किया गया था। महिला का आरोप था कि 2019 में उसने शादी का वादा किया था और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। महिला ने बताया कि 2020 और 2022 में वह दो बार प्रेग्नेंट भी हुई थी, लेकिन उसने जबरदस्ती उसका गर्भपात करा दिया।

आरोपित के खिलाफ इसके बाद POCSO का मामला दर्ज हुआ था। आरोपित ने खुद को निर्दोष बताया और कहा कि पीड़िता से शादी करने से इंकार करने के बाद उसे झूठे केस में फँसाया जा रहा है। कुछ दिनों पहले आरोपित ने अंतरिम जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी देते हुए कहा कि उसके और पीड़िता के परिवार वाले चाहते हैं कि उसकी शादी हो जाए।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

ओडिशा हाई कोर्ट ने इस सुनवाई के दौरान जमानत देते हुए कहा कि POCSO अधिनियम का उद्देश्य किशोरों की आपसी सहमति से बने प्रेम संबंधों को अपराध बनाना नहीं, बल्कि उसका उद्देश्य नाबालिगों की सुरक्षा और यौन शोषण पर रोक लगाना है।

फैसला सुनाते हुए जस्टिस संजीव कुमार पाणिग्रही ने कहा कि इस मामले में कानून को मशीनी तरीके से ना लागू किया जाए बल्कि सही दृष्टिकोण अपनाया जाए। हाई कोर्ट ने यह इस आधार पर कहा क्योंकि पीड़िता और आरोपित की उम्र आस-पास है और उनके बीच संबंध आपसी सहमति से बना था।

ओडिशा हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कभी कभार परिवार इसलिए केस दर्ज करवाते हैं क्योंकि उन्हें सामाजिक मूल्यों का भय होता है ना कि असल में अपने बच्चे की चिंता। हाई कोर्ट ने कहा कि कानून कभी-कभार परिवारों की लड़ाई का हथियार बन जाता है।

25 करोड़ गरीबी से बाहर, धारा 370 को बाय-बाय… पाकिस्तान को दिया जवाब: JP नड्डा ने गिनाईं मोदी सरकार की 11 साल की उपलब्धियाँ, कहा- पीएम ने बदली देश की राजनीतिक संस्कृति

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मोदी सरकार के 11 साल पूरे करने पर सरकार की उपलब्धियाँ गिनवाईं। उन्होने कहा कि सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ रही है। पीएम मोदी ने देश की राजनीतिक संस्कृति को बदला है और नीतियों में परफॉर्म, रिफॉर्म और ट्रांसफॉर्म तीनों दिखता है।

पाकिस्तान को दिया मुँह तोड़ जवाब

जेपी नड्डा ने कहा, “जब उरी की घटना घटी तब पीएम मोदी ने कहा था, इसका जवाब दिया जाएगा और उसके बाद सर्जिकल स्ट्राइक हुई। पुलवामा की घटना घटी तो पीएम मोदी ने कहा था कि बहुत बड़ी गलती कर दी और इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा और बालाकोट एयर स्ट्राइक हुई। जब पहलगाम की घटना घटी, तब पीएम मोदी ने बिहार में कहा था कि कल्पना से परे जवाब दिया जाएगा और ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से आतंकियों के 9 ठिकाने ध्वस्त कर दिए गए।”

महिला सशक्तिकरण

बीजेपी अध्यक्ष के मुताबिक, “बीते एक दशक में मोदी सरकार ने समाज के सभी वर्गों की चिंता की। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएँ चलाई गई। पायलट से आर्मी में कमीशन तक, सैनिक स्कूलों में दाखिले से लेकर एनडीए में भर्ती तक, लखपति दीदी से लेकर SHGs को प्रमोट करने तक हर क्षेत्र में मोदी सरकार में महिलाओं और SC-ST-OBC सभी को मुख्यधारा से जोड़ा है।”

प्रो एक्टिव सरकार

जेपी नड्डा ने कहा कि मोदी सरकार प्रो एक्टिव रही है। दूसरे देशों में आपदा की स्थिति में भारतीयों की सुरक्षित वापसी मोदी सरकार ने कराई। वहीं कोविड-19 महामारी के समय स्वदेशी वैक्सीन का निर्माण कर करोड़ो नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की।

धारा 370 को अलविदा किया गया

पिछले 11 सालों में मोदी सरकार ने कई बोल्ड डिसीजन लिए हैं। “जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाने की बात हो या तीन तलाक हटाने की बाद, मोदी सरकार ने फैसले लेने में गुरेज नहीं की। धारा 370 हटाए जाने का जिक्र करते हुए उन्होने कहा कि लोगों ने कहा कि खून की नदियाँ बह जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। जम्मू कश्मीर में लोकसभा चुनाव के दौरान 58.46 फीसदी रहा जबकि जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में 63 फीसदी वोटिंग टर्नआउट रहा। वक्फ बोर्ड कानून लाने जैसे बड़े फैसले भी लिए गए। वहीं, भारत को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दृष्टि से बड़े निर्णय मोदी सरकार में हुए हैं।”

2014 से पहले भ्रष्टाचार में डूबी थी सरकार

बीजेपी अध्यक्ष नड्डा के मुताबिक, “2014 से पहले की सरकार भ्रष्टाचार में डूबी हुई थी। कांग्रेस के दौर में नकारात्मक माहौल बना था, लेकिन वर्ष-2014 के बाद देश में सकारात्मक बदलाव आया है। आज भारत का आम नागरिक ये कहता है कि मोदी है तो मुमकिन है।”

25 करोड़ लोग आए गरीबी रेखा से बाहर

सरकार की अलग-अलग योजनाओं से गरीबी हटाने में मदद मिली है। उन्होने कहा, “गरीब कल्याण योजना, पीएम आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, पीएम किसान सम्मान निधि और उजाला योजना जैसी हमारी प्रमुख योजनाओं ने जीवन बदल दिया है। हमने लगभग 40 करोड़ लोगों को जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा कवरेज भी प्रदान किया है। नेतृत्व में मजबूत भरोसे के कारण मोदी सरकार के तहत लोगों की भागीदारी काफी बढ़ गई है। “

नोटबंदी में जनता ने दिया पूरा सहयोग

नड्डा के मुताबिक, ” मैं नोटबंदी की बात करता हूं, तो मुझे याद है कि कैसे हमारे राजनीतिक दल जनता को फायदा उठाने के लिए उकसा रहे थे। आप भूल गए होंगे, लेकिन मैं नहीं भूलता। लेकिन भारत का आम आदमी घंटों बैंक के सामने खड़ा रहा और मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले का समर्थन किया। जब नेतृत्व पर भरोसा होता है, तो जनता साथ देती है।”

दुनिया के सबसे ऊँचे पूलों में एक चिनाव ब्रिज का जिक्र करते हुए बीजेपी अध्यक्ष नड्डा ने कहा कि 1995 में नरसिम्हा राव सरकार के वक्त पुल का शिलान्यास हुआ था और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में इसे ‘देश के लिए बहुमूल्य प्रोजेक्ट’ घोषित किया गया और पीएम मोदी ने इस प्रोजेक्ट को पूरा किया।

सुप्रीम कोर्ट ने रोकी जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ जाँच, राज्यसभा से पत्र के बाद फैसला: ‘कठमुल्ला’ बयान देने वाले इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज पर राष्ट्रपति-संसद लेंगे निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यसभा की तरफ से मिले एक पत्र के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज शेखर कुमार यादव के खिलाफ जाँच को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट को राज्यसभा सचिवालय से मिली एक चिट्ठी में कहा गया कि यह मामला अब संसद के अधीन है।

इस आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी जाँच रोक दी। दरअसल राज्यसभा द्वारा भेजे गए पत्र में यह कहा गया था कि इस तरह की किसी भी कार्यवाही के लिए राज्यसभा के सभापति के पास अधिकार है। इसलिए राष्ट्रपति और संसद को ही अब इस मामले में निर्णय लेने का विशेषाधिकार है।

फिर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर अपनी इन-हाउस जाँच रोक दी और कॉलेजियम को इसकी जानकारी दी। पूरा मामला 8 दिसम्बर, 2024 को विश्व हिन्दू परिषद् के विधि प्रकोष्ठ के द्वारा आयोजित कार्यक्रम का है जहाँ उन्होंने मुस्लिमों में कट्टरपंथ और रूढ़िवादिता को लेकर कुछ बातें कही थीं।

जस्टिस यादव ने यूनिफार्म सिविल कोड की वकालत करते हुए मुस्लिम समुदाय में मौज़ूद ट्रिपल तलाक और हलाला की आलोचना भी की। इतना ही नहीं उन्होंने बहुसंख्यक के अनुसार कानून बनाने की बात कही। उन्होंने कहा था, “हिंदुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यक के अनुसार ही देश चलेग। एक से ज्यादा पत्नी रखने, तीन तलाक और हलाला के लिए कोई बहाना नहीं है और अब ये प्रथाएं नहीं चलेंगी।”

विभिन्न राजनीतिक दलों, वरिष्ठ वकीलों, नागरिक संगठनों और कुछ पूर्व न्यायाधीशों ने इस बयान को न्यायिक गरिमा और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ बता दिया। कपिल सिब्बल के नेतृत्व में 55 विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव भी दायर किया।

सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से रिपोर्ट माँगी। इसके बाद 17 दिसंबर को तत्कालीन चीफ जस्टिस संजय खन्ना और चार अन्य वरिष्ठ न्यायाधीशों की कॉलेजियम बैठक में जस्टिस यादव को बुलाया गया।

जस्टिस यादव ने अपने ऊपर उठे विवाद को लेकर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिख कर अपना जवाब दिया था। इस पत्र में जस्टिस यादव ने अपने संबोधन को नियमों के अनुसार बताया और इसे न्यायिक मर्यादा का उल्लंघन मानने से साफ इनकार कर दिया।

जिस न्यूटन दास ने बांग्लादेश में किया शेख हसीना के खिलाफ प्रदर्शन, वह अब पश्चिम बंगाल का नागरिक: TMC के साथ है लिंक, खुद को बता रहा बेगुनाह

बांग्लादेशी नागरिकों को बंगाल की नागरिकता दिये जाने के सबूत सामने आए हैं। शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से हटाने के लिए बांग्लादेश में ‘छात्र विरोध प्रदर्शन’ में भाग लेने वाला न्यूटन दास अब बंगाल का नागरिक है।

यह खुलासा सबसे पहले टीवी9 बांग्ला ने शनिवार (7 जून 2025) को प्रकाशित एक रिपोर्ट में किया था। बांग्लादेशी नागरिक का नाम पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के काकद्वीप शहर की मतदाता सूची में शामिल है।

न्यूटन दास का विधानसभा क्षेत्र काकद्वीप है, जबकि संसदीय क्षेत्र मथुरापुर आरक्षित सीट है। भारत में रहने वाले न्यूटन दास के भाई तपस दास ने माना है कि वह बांग्लादेशी नागरिक है।

न्यूटन दास को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार ने नागरिकता दी है। उसका नाम वोटर सूची में भी मौजूद है यानी मतदान का अधिकार हासिल करने में वह कामयाब रहा है। उनके भाई तपस दास ने पुष्टि की, “उसे (न्यूटन दास) बांग्लादेश का मतदाता होना चाहिए। उनका जन्म वहीं हुआ था। वह कोविड-19 प्रकोप के बाद कुछ भूमि विवादों को निपटाने के लिए भारत आया था। मुझे नहीं पता कि वह अब कहाँ रहता है। मुझे नहीं पता कि वह यहाँ मतदाता कैसे बन गया?”

काकद्वीप पंचायत के सदस्य ने पुष्टि की है कि न्यूटन दास एक स्थानीय मतदाता हैं, लेकिन उन्होंने दावा किया कि उन्हें उनके बांग्लादेश से संबंधों के बारे में पता नहीं है।

बांग्लादेश में 2024 के छात्र विरोध प्रदर्शन में भाग लेने की तस्वीरें ऑनलाइन सामने आने के बाद आरोपित मुश्किल में पड़ गया। शेख हसीना सरकार के खिलाफ आयोजित प्रदर्शनों के दौरान उसे लाठी और झंडों के साथ पोज देते देखा गया था।

बीजेपी नेता सुकांत मजुमदार ने कहा, “असफल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विशेष प्रोत्साहन के कारण, सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी ने न केवल बम बनाने के उद्योग और कट मनी उद्योग में अग्रणी भूमिका निभाई है – बल्कि ‘अवैध घुसपैठ उद्योग’ भी काफी फल-फूल रहा है। तृणमूल कांग्रेस के बिना बंगाल के लोग कभी भी इस मॉडल को सही मायने में नहीं समझ पाते।”

उन्होने कहा कि ममता बनर्जी की घुसपैठ सिद्धांत और तुष्टिकरण की राजनीति की वजह से हजारों बांग्लादेशी ‘न्यूटन’ बंगाल में मतदान करते हैं। अवैध मतदाताओं और इन लाठीधारी बदमाशों को अपना समर्थन आधार बनाकर, वह पश्चिम बंगाल नहीं चला रही हैं… वह ग्रेटर बांग्लादेश के लिए खाका तैयार कर रही हैं,”

इस बीच सोशल मीडिया पर न्यूटन दास की तृणमूल कांग्रेस के नेता सुभाशीष दास के साथ एक तस्वीर सामने आई है। सुंदरबन के टीएमसी नेता आरोपी का जन्मदिन मनाते नजर आए।

टीवी9 बांग्ला से बात करते हुए सुभाशीष दास ने दावा किया कि न्यूटन के बांग्लादेशी नागरिक होने के बारे में उसे कोई खबर नहीं है।

आरोपित न्यूटन दास ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर घड़ियाली आँसू बहाता हुआ दिखा।


न्यूटन ने आरोप लगाया कि 2024 में वारिस बनाए जाने के बाद वह भूमि विवादों को निपटाने के लिए बांग्लादेश गया था। ये महज संयोग है कि उसकी यात्रा और बांग्लादेश के ‘छात्र प्रदर्शन’ का वक्त एक ही था।

आरोपी ने दावा किया, “मैं 2014 से काकद्वीप में मतदाता हूँ। मैंने 2016 के विधानसभा चुनाव में भी भाग लिया था। हालाँकि, 2017 में मेरा वोटर कार्ड खो गया था, लेकिन हमारे विधायक की मदद से 2018 तक मुझे नया कार्ड मिल गया।”

इससे पहले मई 2022 में यह बात सामने आई थी कि तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार अलो रानी सरकार, जिन्होंने 2021 का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ा था, वह बांग्लादेश में अपने पति के साथ रहती है।

जिस 70 साल पुराने कानून को सब भूले, उसकी बदौलत घुसपैठियों को बाहर करेगा असम: CM हिमंता बिस्वा ने किया ऐलान, धड़ाधड़ डिपोर्ट होंगे बांग्लादेशी-रोहिंग्या

असम से घुसपैठियों को निकालने के लिए अब एक 7 दशक पुराना एक कानून उपयोग किया जाएगा। इस कानून के तहत घुसपैठियों को निकालने के लिए अदालत जाने की जरूरत नहीं होगी। इस कानून का इस्तेमाल करने की अनुमति सुप्रीम कोर्ट ने भी दी हुई है। वर्तमान में देश भर से बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकालने के लिए ऑपरेशन पुशबैक चल रहा है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस कानून को अमल में लाए जाने की जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि अवैध विदेशियों को निर्वासित करने के लिए अब हर बार अदालत जाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि असम सरकार 1950 के अप्रवासी निष्कासन आदेश का इस्तेमाल कर सकती है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में वैध माना है।

CM सरमा ने बताया कि इस कानून के तहत कलेक्टर को भी यह अधिकार है कि वह अवैध प्रवासियों को सीधे देश से बाहर भेजने का आदेश दे सकता है। CM सरमा ने यह सारी जानकारी शनिवार (7 जून, 2025) को नलबाड़ी जिले के दौरे के में दी है।

CM हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि किसी कारण से 1950 के इस कानून को भुला दिया गया था और सरकारी वकील भी इसका जिक्र नहीं करते थे। हाल ही में सरकार को इस कानून के अस्तित्व का पता चला है।

अब राज्य सरकार इसका इस्तेमाल अवैध प्रवासियों को वापस भेजने के लिए करेगी। उन्होंने कहा कि अब से अवैध प्रवासियों की पहचान होने पर उन्हें ट्रिब्यूनल भेजने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि सीधे सीमा पार भेजा जाएगा।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम में NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) के कारण अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया धीमी हो गई थी लेकिन अब इसे तेज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जैसे ही किसी अवैध प्रवासी की पहचान होगी, उसे बांग्लादेश भेज दिया जाएगा।

CM सरमा ने कहा कि अब इन मामलों को ट्रिब्यूनल में भेजने की जरूरत नहीं होगी और प्रक्रिया जल्दी शुरू की जाएगी, जिसके लिए तैयारियाँ चल रही हैं। हालाँकि, जिन लोगों ने अपने निष्कासन आदेश को अदालत में चुनौती दी है, उन्हें तब तक नहीं भेजा जाएगा जब तक अदालत फैसला नहीं देती।

सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2024 में दिए गए फैसले में नागरिकता कानून की धारा 6ए को वैध बताया था। साथ ही कोर्ट ने कहा कि अप्रवासी (असम से निष्कासन) अधिनियम,1950 के प्रावधान भी इसमें शामिल माने जाएँगे और इनका इस्तेमाल अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि निष्कासन कानून और धारा 6ए एक-दूसरे के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि दोनों कानून साथ-साथ लागू हो सकते हैं। कोर्ट ने कहा था कि संसद द्वारा कानून पारित किया जाना यह दर्शाता है कि बांग्लादेश से असम में प्रवासियों का भारी प्रवाह हमेशा से चिंता का कारण रहा है।

गौर करने वाली बात यह है कि पश्चिमी सीमा से पाकिस्तान से आने वाले लोगों के लिए बना कानून ‘आवागमन नियंत्रण अधिनियम, 1952’ को जनवरी 1952 में खत्म कर दिया गया था। लेकिन पूर्वी सीमा के लिए बनाया गया कानून अप्रवासी (असम से निष्कासन) अधिनियम, 1950 आज भी लागू है। यह सिर्फ असम में लागू होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यह कानून इसलिए बनाया गया था क्योंकि विदेशी अधिनियम में पाकिस्तान से आए लोगों को शामिल नहीं किया गया था, इसलिए इनके लिए अलग से नियम की जरूरत थी।

इस कानून के अनुसार, अगर केंद्र सरकार को लगता है कि असम में बाहर से आया कोई व्यक्ति आम जनता या वहाँ की किसी अनुसूचित जनजाति के लिए नुकसानदायक है, तो सरकार उसे असम छोड़ने का आदेश दे सकती है और उसे बाहर निकाल सकती है।

यह अधिकार केंद्र सरकार के पास है। केंद्र सरकार इस शक्ति को अपने अधिकारियों या असम, मेघालय और नागालैंड की राज्य सरकारों के अधिकारियों को भी दे सकती है।

पोर्न शूट नहीं किया तो प्राइवेट पार्ट में डाली रॉड, 6 महीने फ़्लैट में बनाया बंधक… खाना भी नहीं नहीं दिया: अरियन खान और उसकी अम्मी के खिलाफ FIR, पश्चिम बंगाल का मामला

पश्चिम बंगाल के हावड़ा में अरियन खान ने एक हिन्दू महिला को 6 महीने तक एक फ्लैट में बंधक बनाकर रखा गया। महिला पॉर्न शूट करने से इनकार कर रही थी इसलिए आरोपित ने अपनी माँ श्वेता खान के साथ मिलकर उससे जमकर मारपीट की। उत्तर 24 परगना जिले की रहने वाली महिला को कई दिनों तक खाना नहीं दिया गया और महीनों तक बेरहमी से पीटा। उसके प्राइवेट पार्ट में लोहे के रॉड घुसाने की कोशिश की गई।

अच्छी नौकरी और पैसे का दिया झाँसा

पीड़िता एक इवेंट मैनेजमेंट फर्म में काम करती थी। पीड़िता की मुलाकात अरियन खान से काम के दौरान हुई। उसने पीड़िता को हावड़ा में नौकरी देने का प्रस्ताव दिया, जहाँ उसे ज्यादा पैसे मिलेंगे। पीड़िता अरियन खान के बातों में आ गई और हावड़ा चली गई। उसे नौकरी पाने के बजाय आरोपित ने उसे बार डांसर के तौर पर काम करने का प्रस्ताव दिया। उसे पॉर्न शूट करने के लिए कहा गया। ऐसा नहीं करने पर पीड़िता को एक फ्लैट में कैद कर दिया गया।

इस दौरान अरियन खान अपनी अम्मी श्वेता खान के साथ वहाँ आता और पीड़िता को प्रताड़ित करता। उसके प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डालने की कोशिश भी की गई। मारपीट के दौरान पीड़िता के सिर में चोट भी आई।

पीड़िता कुछ दिन पहले फ्लैट से भागने में कामयाब रही। उसे सागर दत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है। उसने अधिकारियों को अपनी आपबीती सुनाई। इसके बाद पुलिस ने महिला के परिवार की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया। पुलिस ने अरियन खान और उसकी माँ श्वेता खान को पकड़ने की कोशिश कर रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक श्वेता खान और अरियन खान ने मिलकर ‘इसारा एंटरटेनमेंट’ नाम से प्रोडक्शन कंपनी बनाई थी। 2021 में उन्होंने एक यूट्यूब चैनल भी लॉन्च किया था। हालाँकि चार साल के दौरान केवल 11 म्यूजिक वीडियो अपलोड किए गए। स्थानीय लोगों का दावा है कि अरियन और उनकी माँ ने अपने फ्लैट का किराया नहीं दिया। उनका यह भी कहना है कि श्वेता, जिसे स्थानीय तौर पर फुलटूशी बेगम के नाम से जाना जाता है, एक बार डांसर के तौर पर काम करती थी।