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गुजरात के 108 मंदिरों में लाउडस्पीकर से दिन में 2 बार हनुमान चालीसा, सोशल मीडिया यूजर बोले- ‘पूरे भारत में ऐसा हो’

गुजरात में अब मंदिरों में लाउडस्पीकर लगाकर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा। प्रदेश के तीसरे सबसे बड़े शहर वडोदरा में 108 मंदिरों में हनुमान चालीसा और दिन में दो बार आरती करने के लिए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया जाएगा। देश गुजरात की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल जिले के एक स्थानीय संगठन ‘मिशन राम सेतु’ द्वारा शुरू की गई है।

शहर के कालाघोड़ा क्षेत्र के पंचमुखी हनुमान मंदिर में श्रावण मास के पहले सोमवार को लाउडस्पीकर वितरण का कार्यक्रम शुरू हुआ था। लाउडस्पीकर वितरण करने की पहल पर टिप्पणी करते हुए राम सेतु मिशन के अध्यक्ष दीप अग्रवाल ने बताया, “लाउडस्पीकर लगाने का इरादा इसलिए है, ताकि भक्त घर बैठे हनुमान चालीसा, आरती और अन्य भक्ति गीत सुनने का लाभ उठा सकें। दरअसल, कोरोना महामारी को देखते हुए सरकार के कई दिशा-निर्देशों और प्रतिबंधों के कारण लोगों से मंदिरों या भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचने के लिए कहा जा रहा है।”

इस कार्यक्रम में संगठन के पदाधिकारियों के अलावा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुछ नेताओं ने भी भाग लिया, जिनमें शहर के अध्यक्ष डॉ विजय शाह, शहर के महासचिव सुनील और जसवंत सोलंकी भी शामिल थे।

दीपक अग्रवाल ने कहा, “78 मंदिरों ने लाउडस्पीकर प्राप्त करने के लिए हमारे पास अपना रजिस्ट्रेशन कराया था। अगले लॉट का वितरण बुधवार से शुरू हो गया है। इसके तहत छोटे मंदिरों में एक लाउडस्पीकर और बड़े मंदिरों को दो लाउडस्पीकर दिए जाएँगे।” इस खबर को विश्व हिंदू परिषद ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर साझा किया।

साभार: सोशल मीडिया

रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने पिछले साल भी कुछ मंदिरों में श्रावण के महीने में लाउडस्पीकर दिए थे।

इस खबर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग इसका समर्थन कर रहे हैं और माँग कर रहे हैं कि ऐसा देश के हर शहर में होना चाहिए। ‘मेघ अपडेट्स’ नाम के सोशल मीडिया यूजर की पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए अभिजीत ने कहा, “ऐसा ही पूरे भारत में करने की आवश्यकता है।”

एक अन्य यूजर आकर्ष वर्मा ने कहा कि जल्द ही उत्तर प्रदेश में भी ऐसा ही होगा।

‘आप सरकार के प्रवक्ता हो क्या? सरकार ने आपको ये बोलने को कहा है?’: सवाल पूछने वाले पत्रकार पर ही भड़के राहुल गाँधी

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी मीडिया के एक सवाल को लेकर भड़क गए और उन्होंने पत्रकार पर ही टिप्पणी शुरू कर दी। दरअसल, गुरुवार (12 अगस्त, 2021) को विपक्षी नेताओं ने मोदी सरकार के खिलाफ विजय चौक से लेकर संसद तक मार्च निकाली। इस दौरान वायनाड के सांसद राहुल गाँधी भी उनके साथ थे। उनका आरोप था कि सांसदों के साथ सदन में दुर्व्यवहार हुआ है। इसी दौरान राहुल गाँधी को भड़कते हुए देखा गया।

पत्रकार के सवाल पर क्रोधित होकर राहुल गाँधी ने उससे पूछा डाला कि आप सरकार के प्रवक्ता हैं क्या? क्या सरकार ने आपको ये बोलने को कहा है? इस पर उक्त पत्रकार ने कहा कि वो मीडिया का आदमी है। इस पर राहुल गाँधी ने कहा, “नहीं, आप मीडिया के आदमी नहीं हो। आप सरकार के आदमी हो। मीडिया की सच्चाई मैं आपको बताता हूँ। मुझे बताने दीजिए।” इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि पहली बार राज्यसभा में सांसदों की पिटाई की गई है।

राहुल गाँधी ने दावा किया कि बाहर से लोगों को बुला कर वर्दी पहनाई गई और फिर सांसदों के साथ मारपीट हुई। उन्होंने कहा, “और आप ये सवाल पूछ रहे हो कि स्पीकर को दुःख हो रहा है? चेयरमैन की क्या जिम्मेदारी है? हाउस चलाने की। उन्होंने हाउस को पिछले दिनों क्यों नहीं चलाया? विपक्ष के लोग अपनी बात क्यों नहीं रख सकते? हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री इस देश को बेचने का काम कर रहा है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी उद्योगपतियों को देश की आत्मा बेच रहे हैं, लेकिन विपक्ष सदन में पेगासस, किसानों और गरीबों की बात नहीं कर सकता है। बता दें कि सदन में उपद्रव पर राज्यसभा के सभापति व उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू भावुक हो गए थे। उन्होंने कहा कि जब कृषि कानूनों का विरोध करते हुए कुछ सांसद मेज पर बैठ गए और अन्य सदस्य सदन की मेज पर चढ़ गए, तब इस राज्यसभा की सारी पवित्रता खत्म हो गई।

साथ ही वेंकैया नायडू ने उपद्रवियों को चेताया कि सदन में हंगामा करने वाले विपक्षी सांसदों को कार्रवाई का सामना करना होगा। राहुल गाँधी इसी से जुड़े सवाल पर भड़क गए। पिछले कुछ दिनों से राहुल गाँधी का ट्विटर हैंडल भी लॉक्ड है। अब खबर आई है कि कॉन्ग्रेस पार्टी के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल को भी लॉक कर दिया है। इस बात का खुलासा खुद कॉन्ग्रेस ने ही किया है। कई अन्य नेताओं के खिलाफ भी ये कार्रवाई की गई है।

कॉन्ग्रेस का ट्विटर अकाउंट लॉक, राहुल गाँधी समेत कई नेताओं का किया जा चुका है पहले ही – पार्टी ने फेसबुक पर बताया

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के बाद अब ट्विटर ने कॉन्ग्रेस पार्टी के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल को भी लॉक कर दिया है। इस बात का खुलासा खुद कॉन्ग्रेस ने ही किया है। दरअसल, ट्विटर ने ये कार्रवाई उसके नियमों का उल्लंघन करने के मामले में की है। पार्टी ने दावा किया है कि रणदीप सुरजेवाला समेत पाँच सीनियर लीडर्स के अकाउंट्स को भी ट्विटर ने लॉक कर दिया है।

जिन पाँच लोगों के अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई हुई है, उनमें रणदीप सुरजेवाला, अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन, लोकसभा में पार्टी के सचेतक मनिकम टैगोर, असम प्रभारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और महिला कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सुष्मिता देव शामिल हैं। इसके अलावा पार्टी के प्रवक्ता गौरव वल्लभ के अकाउंट को भी लॉक किया गया है।

इस मामले की जानकारी कॉन्ग्रेस ने फेसबुक के जरिए दी है। अपनी पोस्ट में कॉन्ग्रेस ने कहा है कि उसके नेताओं को जब जेलों में बंद कर दिया गया था तो वो डरी नहीं। अब ट्विटर अकाउंट बंद करने से क्या खाक डरेगी।

कॉन्ग्रेस ने फेसबुक पेज पर लिखा, “जब हमारे नेताओं को जेलों में बंद कर दिया गया, हम तब नहीं डरे तो अब ट्विटर अकाउंट बंद करने से क्या ख़ाक डरेंगे। हम कॉन्ग्रेस हैं, जनता का संदेश है, हम लड़ेंगे, लड़ते रहेंगे। अगर बलात्कार पीड़िता बच्ची को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाना अपराध है, तो ये अपराध हम सौ बार करेंगे। जय हिंद… सत्यमेव जयते।”

साभार: फेसबुक

गौरतलब है कि दिल्ली में 9 साल की बच्ची से कथित बलात्कार और हत्या के मामले को लेकर कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पीड़ित परिवार से मिले थे। इसके बाद उन्होंने इसकी तस्वीर ट्विटर पर शेयर कर दी थी। इसके बाद राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने मामले में संज्ञान लेते हुए ट्विटर को राहुल गाँधी के खिलाफ एक्शन लेने को कहा था। इसके बाद ट्विटर ने राहुल गाँधी के अकाउंट को लॉक कर दिया।

सरकार के दवाब में काम करने का आरोप

कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया हेड रोहन गुप्ता ने ट्विटर पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इसने पूरे भारत में उनके नेताओं और कार्यकर्ताओं के 5,000 अकाउंट को पहले ही ब्लॉक कर दिया है। उन्होंने कहा कि ट्विटर को यह समझने की जरूरत है कि ट्विटर या सरकार द्वारा उन पर दबाव नहीं डाला जा सकता है।

14 साल की लड़की साथ अश्लील हरकत, धर्मांतरण का दबाव: ‘बजरंग दल’ ने आरोपित के परिजन को पीटा, UP पुलिस कर रही जाँच

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक नाबालिग लड़की पर इस्लामी धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने का मामला सामने आया है। ये घटना कानपुर के बर्रा आठ इलाके की है। ‘बजरंग दल’ के आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने इस घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया। उनका आरोप है कि पुलिस ने इस मामले सिर्फ छेड़छाड़ का ही मामला दर्ज किया है, जबकि पीड़ित बच्ची पर धर्मांतरण के लिए भी दबाव बनाया गया था। रामगोपाल चौराहे पर बुधवार (11 अगस्त, 2021) को ये प्रदर्शन हुई।

इस दौरान हिन्दू कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। ये मामला 14 साल की लड़की से छेड़छाड़ व अश्लील हरकतें करने से जुड़ा है। आरोप है कि जब परिवार ने इसका विरोध किया तो मुस्लिम समाज से ताल्लुक रखने वाले तीन भाइयों ने धर्मांतरण का दबाव बनाया। आरोपितों और पीड़िता का परिवार आस-पड़ोस में ही रहता है। पीड़िता की माँ ने स्थानीय विधायक से न्याय के लिए गुहार लगाई थी।

पुलिस ने इस मामले में छेड़छाड़ की धाराओं के तहत FIR भी दर्ज कर ली थी। लेकिन, इसके बावजूद तीनों भाई पीड़िता के परिवार को धमका रहे थे। जानकारी मिलते ही ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामला सांप्रदायिक होने के कारण महल खराब होने का डर था, इसीलिए पुलिस के साथ-साथ CRPF को भी तैनात किया गया। विधायक महेश त्रिवेदी के बेटे शुभम त्रिवेदी भी मौके पर मौजूद थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने भी पीड़िता से अभद्र व्यवहार किया है। हिन्दू कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन ख़त्म करने को कहा गया, जिसके बाद उनके और पुलिस के बीच तीखी नोंकझोंक हुई। शुभम त्रिवेदी ने बर्रा थाने के अतिरिक्त निरीक्षक से माँग की कि चौकी प्रभारी व वहाँ तैनात सिपाहियों पर कार्रवाई की जाए। ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ता उग्र हो गए और नारेबाजी करते हुए व जुलूस निकालने हुए आरोपितों के घर पहुँचे।

आरोपितों के घर से एक शख्स को निकाल कर उसकी पिटाई भी की गई। आनन-फानन में पुलिस ने हस्तक्षेप किया और उक्त व्यक्ति को हिरासत में लेकर थाने ले आई। इस दौरान उसके घर की महिलाएँ भी हंगामा करने लगीं। ‘अमर उजाला’ की खबर के अनुसार, अतिरिक्त निरीक्षक मोहम्मद आसिफ ने बताया कि आरोपितों की तलाश जारी है। उन्होंने बताया कि धाराएँ बढ़ाने की जो माँग है, उस दिशा में भी जाँच जारी है।

जिस वरुण विहार इलाके की ये घटना है, वहाँ मुस्लिमों की भी अच्छी जनसंख्या है। ‘भारत खबर’ के अनुसार, परिवार का आरोप है कि आसपास के रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग हमारे परिवार को पैसे देकर धर्म परिवर्तन कराने का दबाव बनाते हैं। बेटियों के साथ अक्सर छेड़छाड़ करते हैं। हम जब उनकी इस हरकत का विरोध करते हैं तो वे गाली-गलौज करते हैं। छेड़छाड़ के डर से बेटियाँ भी घर से बाहर नहीं निकलती हैं।

केरल गोल्ड स्मगलिंग: CM ले जा रहे थे डॉलर की गठरी, गलती से छूटा… कर्मचारी ने X-रे मशीन में डाला… ऐसे खुला राज

केरल के गोल्ड और डॉलर स्मलिंग केस के आरोपित स्वप्न सुरेश और पीएस सरिथ ने कस्टम डिपार्टमेंट के सामने बड़ा खुलासा किया है। आरोपितों ने सीमा शुल्क विभाग को बताया है कि केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन 2017 में संयुक्त अरब अमीरात की अपनी यात्रा के दौरान यूएई डॉलर का बंडल लेकर जाने वाले थे। जिसने ये जानकारी दी है, उसका नाम पीएस सरिथ है।

पीएस सरिथ के अनुसार, स्वप्ना ने उन्हें कॉल किया था। CM विजयन के संयुक्त अरब अमीरात के लिए रवाना होने के बाद कॉल पर सरित ने कहा था कि सीएम एक पैकेट अपने साथ ले जाना भूल गए हैं और महावाणिज्य दूत चाहते हैं कि वह उसे अपने साथ ले जाएँ। सरित ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग के एक कर्मचारी ने सचिवालय में उन्हें वो पैकेट दिया था। जिज्ञासावश सरिथ ने उस पैकेट को X-रे मशीन में डाला तो पता चला कि उसमें करेंसी और कुछ अन्य चीजें हैं।

सीमा शुल्क विभाग के मुताबिक, वाणिज्य दूतावास के पूर्व कर्मचारी पीएस सरिथ ने पिछले साल अक्टूबर में इसको लेकर बयान दिया था। दरअसल, कस्टम डिपार्टमेंट गोल्ड स्मगलिंग के मामले की जाँच कर रहा था तो उसी दौरान विभाग को कॉन्सुलेट के पूर्व फाइनैंशियल हेड खालेद मोहम्मद अल शौकरी ने अवैध तरीके से 1,90,000 अमेरिकन डॉलर (करीब 1,40,96,100 भारतीय रुपए) के बारे में जानकारी दी थी।

इसके अलावा कस्टम डिपार्टमेंट ने डॉलर के अवैध निर्यात के मामले में पिछले महीने 29 जुलाई 2021 को 6 लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें सीएम विजयन के खिलाफ दावे का उल्लेख किया गया था। मामले में सबूतों के आधार पर फैसला सुनाए जाने से पहले शौकरी, सरिथ, स्वप्ना सुरेश (तत्कालीन वाणिज्य दूतावास में कार्यकारी सचिव) और विजयन पी शिवशंकर के पूर्व प्रधान सचिव सहित छह को 30 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। स्वप्ना सोने की तस्करी के मामले में भी आरोपित है।

इससे पहले सीपीएम नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पी श्रीरामकृष्णन का नाम भी डॉलर की तस्करी के मामले में सामने आया था। हालाँकि, उन्होंने बुधवार (11 अगस्त 2021) को कहा कि सीमा शुल्क ने उन्हें कोई नोटिस जारी नहीं किया था। श्रीरामकृष्णन ने कहा, “सीमा शुल्क मेरे बयान और मेरी बेगुनाही के बारे में आश्वस्त है। नहीं तो वे मुझे भी नोटिस देते।” वहीं गोल्ड स्मगलिंग के आरोपों के बाद शिवशंकर को निलंबित कर दिया गया था।

विजयन सरकार के इन्क्वायरी कमीशन पर रोक

केरल हाई कोर्ट ने बुधवार (11 अगस्त 2021) को विजयन सरकार द्वारा गठित किए गए इन्क्वायरी कमीशन पर यह कहते हुए रोक लगा दिया कि इसके समानांतर जाँच मामले की जाँच को पटरी से उतार देगा। दरअसल, गोल्ड स्मगलिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय भी जाँच कर रहा है। इसके बावजूद उन्होंने इन्क्वायरी कमीशन का गठन किया था।

इन्क्वायरी कमीशन पर रोक लगाते हुए उच्च न्यायालय ने कहा, “यदि उक्त प्रकृति के प्रश्नों में समानांतर जाँच और पूछताछ की जाती है, तो यह जाँच को बाधित करेगा और उसे पटरी से उतार देगा, जिससे आरोपित को इसका फायदा मिलेगा।”

गौरतलब है कि केरल का वामपंथी सरकार ने इसी साल 7 मई 2021 को इन्क्वायरी कमीशन का गठन किया था। इसके बाद ईडी की याचिका पर अदालत ने इस पर रोक लगा दी।

इस पर बयान की आवश्यकता नहीं: मुख्यमंत्री कार्यालय

सरिथ द्वारा विजयन का नाम लेने की खबरों पर सीएम कार्यालय ने कहा, “इस मुद्दे पर किसी बयान की जरूरत नहीं है। पहले भी इस पर काफी बहस हुई थी। इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। कारण बताओ नोटिस पिछले महीने जारी किया गया था, लेकिन आज अदालत के फैसले (राज्य सरकार के इन्क्वायरी कमीशन पर रोक लगाने वाले उच्च न्यायालय) की पृष्ठभूमि में यह लीक किया गया है।”

नाश्ते में बिस्किट, एक कमरे में 4 खिलाड़ी, खुद कपड़े साफ: टीम एनालिस्ट (पूर्व) ने बताई क्या थी भारतीय हॉकी की दुर्दशा

भारतीय हॉकी टीम के एनालिस्ट रहे प्रसन्ना लारा ने एक वीडियो में स्पिन गेंदबाज आर अश्विन से बात करते हुए कुछ बड़े खुलासे किए। उन्होंने बताया कि पहले हॉकी की राष्ट्रीय टीम की क्या दुर्दशा थी। प्रसन्ना लारा क्रिकेट एनालिस्ट के रूप में भी जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि ये एक दिल को पसीजा देने वाली कहानी है, क्योंकि हमारे हॉकी खिलाड़ियों ने काफी मेहनत व कष्ट सहने के बाद कांस्य पदक हासिल किया है।

उन्होंने अपना व्यक्तिगत अनुभव शेयर करते हुए बताया कि जब वो भारतीय हॉकी टीम के साथ काम कर रहे थे, तब उन्होंने देखा था कि एक कमरे में चार-चार खिलाड़ियों को रहने के लिए मजबूर किया जाता था। उन्होंने बताया कि साधारण होटल में उनके रहने की व्यवस्था की जाती थी। प्रसन्ना लारा ने बताया कि इसके उलट जब वो भारत की अंडर-19 क्रिकेट टीम के साथ काम करते थे, तो खिलाड़ियों को पाँच सितारा होटल में अलग-अलग कमरे दिए जाते थे।

प्रत्येक कमरे के लिए रोज 5000 रुपए का खर्च आता था। मैच फी अलग से मिलती थी। पाकिस्तान से हार के बावजूद टीम को रुपए मिले। आश्विन ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि जब वो अंडर-17 टीम की तरफ से खेल रहे थे तो श्रीलंका की राजधानी कोलंबो स्थित ‘ताज समुद्र’ होटल में खिलाड़ियों को ठहराया गया था और एक कमरे में दो खिलाड़ी होते थे। जबकि हॉकी के साथ इसका उलटा था।

प्रसन्ना लारा ने बताया कि जब वो भारतीय हॉकी टीम के साथ नए-नए जुड़े थे तो खिलाड़ी सरदारा सिंह ने उन्हें बताया कि शाम के 6:30 में डिनर मिलता है। सरदारा सिंह भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे हैं। लारा ने कहा कि उन्हें इतनी जल्दी खाने की आदत नहीं थी, लेकिन फिर पता चला कि अगर उस समय खाना मिस हो गया तो कैंटीन बंद कर दिया जाता है। सुबह के 7 बजे नाश्ता और दोपहर के 12:30 में भोजन दिया जाता था।

जब प्रसन्ना लारा ने अपने ‘डेली अलाउएंस’ के इस्तेमाल की बात कही तो वो ये जान कर हैरान रह गए कि हॉकी के खिलाड़ियों के लिए इस तरह की किसी चीज का प्रावधान ही नहीं था। अगले दिन जब उन्होंने लॉन्ड्री की खोज की तो पता चला कि खिलाड़ियों को अपने कपड़े भी खुद ही साफ़ करने पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि जब वो जुड़े थे तब हॉकी टीम कई विदेशी टीमों को हरा चुकी थी और ओलंपिक के लिए प्रबल दावेदार थी, लेकिन फिर भी उनके लिए इस तरह की व्यवस्था थी।

उन्होंने बताया कि 2008 में ओलंपिक क्वालीफायर खेलने के लिए टीम को बेंगलुरु से मुंबई और फिर वहाँ से जोहान्सबर्ग के लिए जाना था। लेकिन, मुंबई एयरपोर्ट पर 6:30 घंटे का वेटिंग टाइम था। क्रिकेटरों को ऐसे में समय बिताने के लिए लाउन्ज मिलते हैं, लेकिन हॉकी के खिलाड़ियों को एयरपोर्ट पर बैठ कर ही समय व्यतीत करना था। जोहान्सबर्ग के लिए 11:30 घंटे की यात्रा थी, जिसके बाद ब्राजील के साओ पाउलो जाने के लिए 12 घंटे का वेटिंग टाइम था।

इसके बाद उन्हें चिली जाना था, जहाँ की यात्रा में ब्राजील से 4:30 घंटे का समय लगा। इस तरह से बेंगलुरु से चिली जाने के लिए भारतीय हॉकी टीम को 72 घंटे सफर में गुजारने पड़े थे। इसके अगले ही दिन मैच था, लेकिन नाश्ते की कोई व्यवस्था नहीं थी। 12:30 से मैच था। ऐसे में 11 बजे नाश्ते में बिस्किट दी गई। फिर ग्राउंड पर केला, बिस्किट और पानी ले जाने को कहा गया, क्योंकि वहाँ खाने की कुछ भी व्यवस्था नहीं थी।

आर आश्विन से बात करते हुए प्रसन्ना लारा ने बताई क्या थी भारतीय हॉकी टीम की दुर्दशा

प्रसन्ना लारा ने कहा कि मेडल विजेता राष्ट्रीय हॉकी टीम की ये स्थिति थी। उन्होंने बताया कि उन्हें मैच फी तक नहीं मिलता था, वो बस अपने पैशन के कारण वहाँ गए थे। उन्होंने कहा कि क्रिकेट टीम के साथ जब यही एनालिस्ट काम करते हैं तो एक हाथ से कॉफी पीते रहते हैं और दूसरे से टाइप करते रहते हैं। वहीं हॉकी टीम के साथ रहते हुए उन्हें अपने सारे समान लेकर 100 फ़ीट ऊपर चढ़ना पड़ा।

उन्होंने बताया कि मैच के दौरान सिर्फ पानी ही उपलब्ध रहता था। उन्होंने कहा कि कई हॉकी मैचों का लाइव टेलीकास्ट नहीं होता है, इसीलिए IPL की तरह वहाँ घर से देख कर डेटा नहीं तैयार किए जा सकते। अपनी सीट से एक बार उठने का मतलब है कि आपने वो सीट खो दी। ऐसी स्थिति में भी भारत ने ऑस्ट्रिया, मेक्सिको और रूस को हराया। उन्होंने बताया कि भारतीय हॉकी टीम इकोनॉमी क्लास में यात्रा करती थी।

‘लॉर्ड मोदी का गुलाम है जैक’: राहुल गाँधी के बाद अब 5 अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं के ट्विटर हैंडल लॉक्ड, सुरजेवाला-माकन भी लिस्ट में

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के बाद अब माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर ने 5 अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं के ट्विटर हैंडल लॉक कर दिए हैं। पार्टी ने बताया कि दिल्ली कॉन्ग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष रणदीप सुरजेवाला, राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला, ‘महिला कॉन्ग्रेस’ की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुष्मिता देव, असम के प्रभारी जितेंद्र सिंह अलवर और तमिलनाडु के विरुधुनगर से सांसद मणिकम टैगोर बी के ट्विटर हैंडल लॉक कर दिए गए हैं।

कॉन्ग्रेस के कम्युनिकेशंस इंचार्ज प्रणव झा ने ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि ‘लॉर्ड नरेंद्र मोदी के इशारे पर उनकी कठपुतली ट्विटर’ इस तरह की हरकतें कर रहा है। उन्होंने ट्विटर के CEO जैक डॉर्सी को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘गुलाम’ बता दिया। उन्होंने दावा किया कि कॉन्ग्रेस के लोग तो कालापानी में बंद होकर भी लड़ाई लड़ते थे। साथ ही पूछा कि क्या पीएम मोदी सोचते हैं कि वर्चुअल ट्विटर लॉक से हम झुक जाएँगे?

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अजय माकन ने कहा कि तो ट्विटर ने उनका भी अकाउंट लॉक कर दिया है, क्योंकि उन्होंने भी ‘महिला एवं दलित उत्पीड़न के खिलाफ’ राहुल गाँधी का समर्थन किया था। उन्होंने कहा, “जल्द ही असली वाले अच्छे दिन आएँगे और तब ट्विटर को डर नहीं लगेगा। ये मेरी भविष्यवाणी है।” कॉन्ग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के इशारे पर ट्विटर ये सब कर रहा है।

ट्विटर ने बुधवार (11 अगस्त, 2021) को दिल्ली हाईकोर्ट में जानकारी दी कि राहुल गाँधी का हैंडल इसीलिए अस्थायी रूप से लॉक किया गया है क्योंकि उन्होंने दक्षिणी-पश्चिमी दिल्ली में 9 साल की नाबालिग के बलात्कार व हत्या के मामले में पीड़िता के माता-पिता की तस्वीर शेयर कर दी थी। कंपनी ने इसे प्लेटफॉर्म की नीतियों का उल्लंघन बताया। उस ट्वीट को भी डिलीट कर दिया गया है। उच्च-न्यायालय ने ट्विटर की इस त्वरित कार्रवाई से संतुष्टि जताई।

इससे पहले कॉन्ग्रेस ने #मैं_भी_Rahul हैशटैग के साथ ट्वीट किया था, ”ट्विटर इंडिया हमारा भी अकाउंट लॉक कर दो। हम आपको चुनौती देते हैं। न्याय के लिए लड़ने और सच को उजागर करने से हमें कुछ नहीं रोक सकता है।” कॉन्ग्रेस ने एक बार फिर विवादित तस्वीर को शेयर किया था, जिसकी वजह से राहुल गाँधी के ट्विटर हैंडल को लॉक किया गया है। ‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR)’ ने ट्विटर इंडिया को नोटिस जारी कर राहुल गाँधी के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की थी।

कासगंज के वनखंडेश्वर महादेव: चोर ले गए शिवलिंग, मरने लगे तो थाने पहुँचाया… पुलिस को ₹8 लाख देकर लौटे मंदिर

मंदिरों का है हमारा देश। कोई भी गली या कस्बा ऐसा नहीं होगा, जहाँ कोई मंदिर न हो या पहले न रहा हो। वाराणसी में गंगा घाट से बाबा विश्वनाथ के मंदिर तक पहुँचने के लिए जब कॉरिडोर का निर्माण किया जाने लगा, तब सैकड़ों वर्ष पुराने मंदिर लोगों के घरों के अंदर से निकले और ये ऐसे मंदिर हैं, जिनकी चर्चा आमतौर पर बहुत कम होती है। ऐसा ही एक मंदिर उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में स्थित है, जो तब चर्चा में आया, जब मंदिर में स्थापित महादेव को पुलिस थाने से वापस लाने के लिए 8 लाख रुपए की जमानत देनी पड़ी थी। यह मंदिर वनखंडेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।

मंदिर का इतिहास

वैसे तो वनखंडेश्वर महादेव मंदिर और यहाँ स्थापित शिवलिंग के बारे में इतिहास से सम्बंधित कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है लेकिन इसे कई सदियों वर्ष पुराना माना जाता है। स्थानीय लोग मानते हैं कि यहाँ स्थापित शिवलिंग भागीरथ के समय का है। सोरों गाँव के लोग पीढ़ियों से यहाँ भगवान शिव की उपासना करते आ रहे हैं। कासगंज के भागीरथ गुफा के समीप स्थित वनखंडेश्वर महादेव को इलाके के लोग अपना इष्टदेव मानते हैं। लगभग 5 फुट ऊँचे इस शिवलिंग की खासियत यह है कि इसमें एक चेहरे की आकृति बनी हुई है।

शिवलिंग की चोरी और 8 लाख की जमानत

आज से करीबन 48 साल पहले अलीगढ़ के 6 चोरों को शिवलिंग के नीचे खजाना होने का पता चला। ऐसे में उन्होंने खजाना प्राप्त करने के प्रयास के चलते मंदिर में स्थपित शिवलिंग ही चुरा लिया। ग्रामीणों को इस खबर की जानकारी हुई तो उन्होंने शिवलिंग को प्राप्त करने के प्रयास शुरू कर दिए। इसके लिए ग्रामीणों ने पुलिस थाने में रिपोर्ट भी लिखवाई।

कुछ समय बीतने के बाद शिवलिंग को चुराने वाले चोर संक्रमित बीमारियों से पीड़ित हो गए और उनकी जान पर बन आई। इसके बाद चोरों ने पाली मुकीमपुर थाने को चोरी की सूचना दी और शिवलिंग भी थाने के सुपुर्द कर दिया। चोरी की घटना के 20 साल बाद पुलिस ने कार्रवाई की और शिवलिंग को अंततः थाना के परिसर में ही स्थापित कर दिया गया।

कुछ समय बाद जब गाँव के लोगों को वनखंडेश्वर महादेव के पाली मुकीमपुर थाने में होने की सूचना मिली तो उन्होंने थाने में जाकर शिवलिंग की माँग की। लेकिन पुलिस ने भी ग्रामीणों को शिवलिंग वापस करने से मना कर दिया। इसके बाद सोरों ग्राम के निवासी अपने इष्टदेव को वापस प्राप्त करने के लिए अदालत पहुँच गए, जहाँ ग्रामीणों ने शिवलिंग अपने गाँव में स्थित होने का प्रमाण दिया। अदालत शिवलिंग को ग्रामीणों को सौंपने के लिए राजी हो गई लेकिन इसके लिए 8 लाख रुपए की जमानत अदा करने के लिए भी आदेशित किया।

अदालत के फैसले के बाद गाँव के 4 किसानों ने अपनी जमीन के एवज में 2-2 लाख रुपए इकट्ठा किए और वनखंडेश्वर महादेव को छुड़ाया। इसके बाद उन्हें वापस मंदिर लाया गया, जहाँ उनकी पुनर्स्थापना की गई। इस घटना के बाद से ही कासगंज के वनखंडेश्वर महादेव उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य हिस्सों में भी प्रसिद्ध हो गए। वनखंडेश्वर महादेव को अपने भक्तों की इच्छा पूरी करने वाला माना जाता है। यही कारण है कि यहाँ श्रावण महीने में बहुत अधिक संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं।

कैसे पहुँचें?

कासगंज का नजदीकी हवाईअड्डा आगरा में है, जो यहाँ से लगभग 100 किमी की दूरी पर है। दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से कासगंज की दूरी लगभग 205 किमी है। वायुमार्ग के अलावा रेलमार्ग से कासगंज पहुँचना आसान है क्योंकि कासगंज में ही रेलवे स्टेशन है, जो 3 दिशाओं से लखनऊ, बरेली और मथुरा से रेलमार्ग के द्वारा जुड़ा हुआ है। हालाँकि इन सभी स्थानों से सड़क मार्ग के जरिए भी कासगंज पहुँचना काफी आसान है क्योंकि यूपी राज्य परिवहन की बसें नियमित तौर पर पूरे प्रदेश में संचालित होती हैं।

एक हाथ से गर्दन संभाली और एक हाथ से आँतें, चीखते हुए दौड़ रहे थे: जानिए कौन हैं नरेशानंद, जिन पर डासना मंदिर में हुआ हमला

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद अंतर्गत डासना में स्थित शिव-शक्ति पीठ में तब खलबली मच गई, जब बुधवार (11 अगस्त, 2021) को तड़के सुबह पेपर कटर से किए गए ताबड़तोड़ हमले में समस्तीपुर के संत नरेशानंद सरस्वती बुरी तरह घायल हो गए। उन पर एक के बाद एक 10 से अधिक वार किए गए। जिस समय ये हमला हुआ, महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती बराबर के कमरे में ही सो रहे थे। मंदिर की सुरक्षा में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था, इसके बावजूद ये सब हुआ।

संत नरेशानंद के बारे में बता दें कि वो बिहार के समस्तीपुर जिले के पटोरी थाना क्षेत्र स्थित शाहपुर उंडी के निवासी हैं। गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है, जहाँ वो ज़िंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। उनकी गर्दन और पेट पर सबसे ज्यादा वार किए गए। घटना की सूचना मिलने के बाद समस्तीपुर में उनके परिजन खासे बेचैन हैं। 53 वर्षीय संत नरेशानंद सरस्वती ने स्नातक की पढ़ाई के बाद सन् 1990 में ही संन्यास ग्रहण कर लिया था।

स्वामी विवेकानंद से प्रभावित रहे संत नरेशानंद सरस्वती ने युवा उम्र में ही भगवा वस्त्र धारण कर लिए थे। वो अविवाहित हैं और ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। वो देश के कई इलाकों में घूम-घूम कर हिन्दू धर्म का प्रचार-प्रसार करते थे। उनके पिता का निधन हो चुका है। उनकी माँ उनके पैतृक घर में ही रहती हैं। घर त्याग चुके नरेशानंद लगभग डेढ़ वर्ष पहले अपनी माँ से मिलने आए थे। लेकिन, फिर वो ईश्वर के कार्य के लिए निकल पड़े।

पटोरी के लोग इस घटना से मर्माहत हैं और उनमें आक्रोश भी है। रोती हुई माँ देवकली देवी अपने इष्टदेव से अपने पुत्र के जल्दी ठीक होने की कामना कर रही हैं। स्थानीय लोग दिल्ली में उन लोगों से संपर्क में हैं, जो नरेशानंद के करीबी हैं। उनके भाई गाजियाबाद रवाना होने की तैयारी कर रहे हैं। स्थानीय भाजपा व विहिप नेताओं ने इस हमले की निंदा की है। सीसीटीवी कैमरे और 22 पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में इस हमले के होने की बात सुन कर लोग आक्रोशित हैं।

संत नरेशानंद पर जब चाकुओं से ताबड़तोड़ वार किया गया, जब वो जख्मी अवस्था में ही चीखते हुए दौड़ पड़े। बदहवास नरेशानंद अपने एक हाथ से गर्दन और दूसरे हाथ से अपनी आँत को संभालते हुए दौड़ने लगे। उनकी आँतें पेट से बाहर निकल कर आ गई थीं। सीने पर भी वार किए गए थे। हमलावर ने पेपर कटर का हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। मनोज नाम के साधु उनके बगल में ही सो रहे थे।

असल में भाजपा नेता व सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय के आंदोलन में शामिल होने आए कुछ साधु महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के डासना मंदिर में ही ठहरे हुए थे और रात्रि प्रवास कर रहे थे। आश्रम में उस वक़्त 50 से अधिक लोग मौजूद थे। मनोज का कहना है कि एक पल तो उन्हें ऐसा लगा जैसे वो सपना देख रहे हों और सपने में उन्हें कोई मारने आया हो। चादर ओढ़े होने के कारण उन्हें कुछ साफ़-साफ़ नहीं दिखा।

हमले के समय मंदिर परिसर व इसके आसपास 22 पुलिसकर्मियों के अलावा 8 निजी सुरक्षाकर्मी भी मौजूद थे। मंदिर के भीतर प्रबंधन ने सीसीटीवी कैमरे लगवा रखे हैं, जो काम नहीं कर रहे। पुलिस अब भी सुराग तलाश रही है। मनोज ने बताया कि नरेशानंद के चीखने से उनकी आवाज़ खुली। वो पुलिसकर्मियों की तरफ भाग रहे थे। यूपी पुलिस लापरवाह कर्मियों पर कार्रवाई की तैयारी में है। एसपी देहात ने एसएसपी को रिपोर्ट भेज दी है।

‘केजरीवाल दिल्ली को जिहादियों की राजधानी बना रहे हैं, द्वारका में हज हाउस नहीं बनने देंगे’: VHP ने दी चेतावनी

दिल्ली के द्वारका के सेक्टर 22 में हज हाउस के निर्माण को लेकर विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार को चेतावनी दी है। VHP के द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि सरकारी जमीन पर सरकारी पैसे से हज हाउस नहीं बनाने दिया जाएगा। साथ ही VHP द्वारा यह भी कहा गया है कि दिल्ली को जिहादियों एवं हिन्दू-द्रोहियों की राजधानी नहीं बनने देंगे।

VHP के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा है कि पिछले कुछ समय से दिल्ली की सरकार मुस्लिम तुष्टिकरण और आतंकियों की पैरोकारी में संलिप्त है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में स्थानीय आरडब्ल्यूए, स्थानीय ग्राम पंचायतों और जन-प्रतिनिधियों के विरोध और अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे की सुरक्षा को ताक पर रखते हुए दिल्ली सरकार जिस प्रकार से सरकारी जमीन पर सरकारी पैसे से हज हाउस बनाने के लिए उतारू है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल मुस्लिम वोट बैंक के लालच में औरंगजेब का अवतार बनने का सपना देख रहे हैं।

VHP द्वारा जारी प्रेस वक्तव्य में कहा गया है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल उत्तर प्रदेश जाकर अखलाक और अन्य जिहादियों पर तो दिल खोल कर धन लुटाते हैं लेकिन जिहादियों के शिकार हुए अंकित शर्मा, रिया गौतम, रतनलाल, डॉ. पंकज नारंग और अंकित सक्सेना जैसे लोगों के लिए वो मुँह मोड़ लेते हैं। VHP द्वारा यह भी कहा गया कि कोरोना से मृत्यु होने पर डॉ. अनस मुजाहिद के परिजनों को एक करोड़ रुपए दे दिए जाते हैं लेकिन दर्जनों हिन्दू डॉक्टरों को कितनी सहायता मिली इसकी कोई जानकारी नहीं है। VHP के इस वक्तव्य में मुख्यमंत्री केजरीवाल और उनकी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा गया है कि राज्य सरकार हज हाउस का विचार त्याग कर हिन्दू समाज की भी चिंता करे।

ज्ञात हो कि दिल्ली के द्वारका इलाके में हज हाउस का निर्माण प्रस्तावित किया गया है। इसके बाद उस इलाके के निवासियों और आसपास के कई अन्य ग्रामीणों ने भी इस निर्णय का जमकर विरोध किया। प्रस्तावित स्थान पर कई गाँवों के प्रधान भी पहुँचे और कहा कि वो यहाँ हज हाउस का निर्माण नहीं होने देंगे। ऑल द्वारका रेसिडेंट फेडरेशन के सचिव बीपी वैष्णव द्वारा इसके संबंध में उपराज्यपाल अनिल बैजल को पत्र भी भेजा गया। उन्होंने लिखा कि इस निर्णय के बाद यहाँ दंगा और हिन्दुओं के पलायन की संभावना उत्पन्न होती है।