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नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता, रचा इतिहास: मेडल टैली में भारत ने तोड़े पिछले सारे रिकॉर्ड

नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता। इस जीत के साथ ही उन्होंने इतिहास रच दिया। जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) में इससे पहले किसी भारतीय खिलाड़ी को ओलंपिक का मेडल नहीं मिला था। नीरज चोपड़ा के गोल्ड मेडल की जीत के साथ ही भारत ने टोक्यो ओलंपिक में अपने मेडल टैली में पहली गोल्ड हासिल कर ली है।

23 वर्षीय नीरज चोपड़ा ने क्वालिफिकेशन राउंड में पहले ही प्रयास में 86.65 मीटर दूर भाला फेंककर फाइनल में प्रवेश कर लिया था। इस दौरान नीरज अपने ग्रुप में टॉप पर रहे थे। इससे पहले 2016 में पोलैंड में हुए आईएएएफ U-20 विश्व चैम्पियनशिप में नीरज ने 86.48 मीटर के जूनियर रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता था, जिसके बाद उन्हें आर्मी में जूनियर कमिशन्ड ऑफिसर के तौर पर नियुक्ति मिली थी।

24 दिसंबर 1997 को हरियाणा के खांद्रा गाँव में जन्मे नीरज चोपड़ा एक किसान परिवार से आते हैं। बचपन में मोटापे के शिकार हुए नीरज को उनके घर वालों ने वजन कम करने के उद्देश्य से खेल खेलने के लिए भेजा था। शुरुआत में क्रिकेट खेलने वाले नीरज ने कई खिलाडियों को भाला फेंकते हुए देखा, तभी उनके मन में इस खेल के प्रति रूचि पैदा हुई और आज वो इस खेल में ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर लिए।

टोक्यो ओलंपिक में भारत अब तक 6 मेडल जीत चुका है। मीराबाई चानू ने वेटलिफ्टिंग में सिल्वर, पीवी सिंधु ने बैडमिंटन में ब्रॉन्ज और लवलिना बोरगोहेन ने बॉक्सिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। इसके अलावा गुरुवार (05 अगस्त 2021) को भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने ब्रॉन्ज और कुश्ती में रवि दहिया ने सिल्वर मेडल जीता। बजरंग पूनिया ने नीरज चोपड़ा के मैच से कुछ ही मिनट पहले ब्रॉन्ज मेडल जीत कर देश के नाम छठा मेडल किया था।

जंतर-मंतर पर किसानों का असंवैधानिक कारनामा, राहुल गाँधी के नेतृत्व में विपक्षी भी पहुँचे: मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी के नेतृत्व में विपक्षी दल शुक्रवार (06 अगस्त 2021) को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी किसानों द्वारा जमाई गई ‘किसान संसद’ में पहुँचे। रिपोर्ट्स के अनुसार, 14 विपक्षी दलों के सदस्य जंतर-मंतर पर केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए कृषि सुधार कानूनों के विरोध में 22 जुलाई 2021 से बैठे प्रदर्शनकारी ‘किसानों’ का समर्थन करने पहुँचे।

विपक्षी दलों की उपस्थिति में प्रदर्शनकारियों द्वारा केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ किसान संसद में ‘अविश्वास प्रस्ताव’ लाया गया और उसे पास भी किया गया। हालाँकि, लोकतान्त्रिक रूप से चुनी गई सरकार के खिलाफ किए जा रहे इस तरह के गैर-संवैधानिक क्रियाकलापों की निंदा करने के स्थान पर विपक्षी दलों ने इसका समर्थन किया।

जुलाई में किसान संसद के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा के द्वारा एक प्रदर्शनकारी रवनीत सिंह बराड़ को सांकेतिक रूप से कृषि मंत्री बनाया गया था, ताकि बाद में उनका इस्तीफा लिया जा सके। इसके बाद ‘APMC Bypass Act’ पर किसान संसद में चर्चा भी हुई। इस चर्चा के दौरान बाकी सदस्यों के सवालों का जवाब देने में असमर्थ रहने पर आखिरकार ‘कृषि मंत्री’ ने अपना इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा, किसान संसद में कुछ प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।

किसान संसद पहुँचे राहुल गाँधी ने तीनों कृषि सुधार कानूनों को खत्म करने की माँग की। उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी पार्टियों ने किसानों का समर्थन करने का निर्णय लिया है और केंद्र सरकार से माँग किया है कि तीनों कृषि कानूनों को तुरंत ही वापस लिया जाए। राहुल गाँधी के अलावा राजद नेता मनोज झा, कॉन्ग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, शिवसेना के संजय राउत, सीपीआईएम नेता इलामाराम करीम, सीपीआई नेता बिनॉय विश्वम, आईयूएमएल नेता मोहम्मद बशीर और डीएमके नेता तिरुचि शिवा मौजूद रहे। हालाँकि, विपक्षी नेता किसान संसद के ना ही डायस पर बैठे और न कुछ कहा।

बजरंग पूनिया ने अपने नाम किया कांस्य पदक: माँ ने रखा था शिवरात्रि का व्रत, पिता ने कहा था – खाली हाथ नहीं आएगा बेटा

बजरंग पूनिया ने टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक अपने नाम कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी है। उन्होंने कजाकस्तान के दौलेट नियाज़बेको को ब्रॉन्ज मेडल (कांस्य पदक) के मुकाबले में हराया।

टोक्यो ओलंपिक में भारत के पहलवान बजरंग पूनिया का मुकाबला आज शनिवार (7 अगस्त, 2021) को कजाकस्तान के दौलेट नियाज़बेको से हुआ। बजरंग पूनिया की माँ ने अपने बेटे की जीत के लिए शिवरात्रि का व्रत रखा था। वहीं उनके पिता भी अपने बेटे की जीत को लेकर आश्वस्त थे। उन्होंने भरोसा जताया था कि बेटा देश के लिए मेडल ज़रूर लेकर आएगा। उनके पिता ने ही उन्हें पहलवानी का ककहरा सिखाया था।

इससे पहले सेमीफाइनल में बजरंग पूनिया को हार मिली थी। लेकिन, उस मैच में भी उन्होंने वापसी का पूरा प्रयास किया था। इससे पहले हुए दो मैचों में उनका प्रदर्शन शानदार रहा था। इससे पहले बजरंग पूनिया पिछले 10 अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में पदक जीतने में कामयाब रहे थे। उन्होंने 6 स्वर्ण, 3 रजत और 1 कांस्य पदक अपने नाम किया था। बता दें कि टोक्यो ओलंपिक में गए मनु भाकर, सुमित नागल, दीपक पूनिया और राहुल रोहिल्ला झज्जर के ही हैं।

याद दिलाते चलें कि बजरंग पूनिया ने 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल के क्वार्टर फाइनल में इरान के मोर्तेजा चेका को 2-1 से हरा कर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। खुड्डन गाँव निवासी बजरंग पूनिया का परिवार उनके बेहतर प्रशिक्षण के लिए सोनीपत शिफ्ट हो गया था। अपने गुरु योगेश्वर दत्त से उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला। बजरंग पूनिया के पिता ने मैच से पहले बताया था कि सुबह उनकी बेटे से बात हुई थी।

इस बातचीत में पिता ने बजरंग पूनिया को बताया था कि उन्होंने पिछले तीनों मैच देखे हैं और उन्हें लगता है कि वो अपना गेम नहीं खेल रहे हैं। पिता ने नोटिस किया था कि बजरंग पूनिया सटीक अटैक नहीं कर पा रहे हैं। अजरबैजान के हाजी अलीयेव ने बजरंग पूनिया को सेमीफाइनल में 12-5 से हरा दिया था, जिसके बाद उनकी गोल्ड और सिल्वर की उम्मीदें ख़त्म हो गई थीं। बजरंग पूनिया के पिता ने कहा था कि वो खाली हाथ नहीं लौटेंगे।

जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन को भारत में इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मिली मंजूरी: स्वास्थ्य मंत्री ने दी जानकारी

कोरोना की तीसरी लहर से पहले अच्छी खबर सामने आई है। मोदी सरकार ने अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन के इमजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी है। स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा की है। मनसुख मंडाविया ने शनिवार (7 अगस्त) को ट्वीट किया, ”भारत ने अपनी वैक्सीन बास्केट का विस्तार कर लिया है। जॉनसन एंड जॉनसन को भारत में इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिल गई है। अब तक भारत में 5 वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिल चुकी है।” उन्होंने कहा कि इससे कोरोना के खिलाफ हमारे देश की जंग को बढ़ावा मिलेगा।

वहीं मंजूरी मिलने के बाद जॉनसन एंड जॉनसन इंडिया के प्रवक्ता ने भी खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि 7 अगस्त 2021 को, भारत सरकार ने जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज कोरोना वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दे दी। इससे अब 18 वर्ष और उससे अधिक उम्र के व्यक्तियों में कोरोना संक्रमण को तेजी से रोका जा सकेगा।  

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉनसन एंड जॉनसन की एक डोज में ही काम हो सकेगा और वैक्सीन को फ्रीज करने की भी जरूरत नहीं होगी। दरअसल, अमेरिका की कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन ऐसे फॉर्मूले का इस्तेमाल कर रही है, जिसका दूसरी बीमारियों से लड़ने में बेहतरीन रिकॉर्ड रहा है। जॉनसन एंड जॉनसन जिस वैक्सीन का निर्माण कर रही है, उसे अस्पताल भेजे जाने तक फ्रीजर में रखने की भी जरूरत नहीं होगी।

बता दें कि जॉनसन एंड जॉनसन के अलावा देश में पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड, हैदराबाद के भारत बायोटेक की कोवैक्सिन, रूस की स्पूतनिक-V और ब्रिटेन की मॉडर्ना की वैक्सीन भी शामिल है। हालाँकि, जॉनसन एंड जॉनसन में खास बात यह है कि यह वैक्सीन सिंगल डोज वैक्सीन है। यानी कोरोना के खिलाफ इसकी एक ही डोज काफी होगी। वहीं, इससे पहले भारत में अब तक जितनी भी वैक्सीन इस्तेमाल में लाई जा रही हैं, वे सभी डबल डोज हैं।

अब्बा की तीसरी बीवी हिन्दू, उनकी हिरोइन बेटी नेहा खान: माँ को इतना पीटा कि 370 टाँके लगे… YouTube पर बताई पूरी कहानी

भले ही बॉलीवुड फ़िल्में देखने वालों ने उनका नाम ज्यादा न सुना हो, लेकिन मराठी में अब वो एक जाना-पहचाना नाम बन गई हैं। हम बात कर रहे हैं अभिनेत्री नेहा खान की, जो मराठी टीवी सीरियल ‘देवमानुष’ में ACP दिव्या के किरदार से सबका दिल जीत रही हैं। उन्होंने हिंदी व मलयालम फिल्मों में भी काम किया है। अमरावती में जन्मीं नेहा खान ने 8वीं कक्षा के बाद ही मॉडलिंग शुरू कर दी थी और मात्र 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने ‘प्रिंसेज ऑफ महाराष्ट्र’ का खिलाब अपने नाम किया था।

हालाँकि, नेहा खान का ये सफर आसान नहीं रहा है। उन्होंने अपने जीवन व संघर्षों के बारे में फरवरी 2020 में ‘लोकमत’ से बात की थी। उन्होंने बताया था कि वो बचपन से ही अभिनेत्री बनना चाहती थीं। उनका परिवार वित्तीय रूप से सक्षम नहीं था। नेहा खान का कहना है कि पैदा होने के साथ ही उनका संघर्ष शुरू हो गया था। नेहा खान के अब्बा ने तीन शादियाँ की थीं। उनकी तीसरी बीवी की बेटी हैं।

नेहा खान के अब्बा और माँ ने लव मैरिज की थी। उनके अब्बा मुस्लिम थे और माँ मराठी। उनका कहना है कि उन्हें न तो उनके अब्बा के परिवार ने स्वीकार किया, न ही माँ के परिवार ने। नेहा खान की माँ अपने एक बेटे और एक बेटी के साथ अकेली रहती थी। जब नेहा खान के अब्बा की तीसरी शादी हुई, तब उनकी एक बेटी की उम्र तीसरी बीवी के बराबर ही थी। नेहा का कहना है कि उनके अब्बा की दूसरी बीवी संपत्ति हथियाना चाहती थीं।

बकौल नेहा, उनके अब्बा की दूसरी बीवी ने तलवार लेकर गुंडों को उनकी माँ को पीटने के लिए भेजा। उन्हें इतना पीटा गया कि 370 टाँके लगाने पड़े। उस समय नेहा खान के अब्बा भी फरार हो गए थे। नेहा का कहना है कि इलाज के लिए उनके भाई ने भीख तक माँगे और कोई खाने तक के लिए पूछने नहीं आता था। वो लोग कुल्फी बेचते थे और दूसरे के घरों में मात्र 40 रुपए के महीने पर बर्तन माँजने जाते थे।

नेहा खान ने बताया था कि 2 वर्ष से भी अधिक समय के बाद उनकी माँ जब ठीक हुईं तो वो और उनके भाई ने मेस के डब्बे पहुँचाने शुरू किए। उनका कहना था कि उनके अब्बा ने भी कोई मदद नहीं की और माँ ये सोच कर चुप रहीं कि आवाज़ उठाने पर कहीं उनके बच्चे को कुछ न हो जाए। कुछ सालों बाद उनके अब्बा को परलाइसिस हो गया। एकाध कर उनकी माँ पुलिस के पास भी गईं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

नेहा खान ने बताया कि उनके नाना की मौत के बाद उनकी माँ को लगा कि वो उनके अब्बा से लव मैरिज कर लेंगी तो वित्तीय समस्याएँ भी ख़त्म हो जाएँगी और उनकी बहनों की शादी भी हो जाएगी। हालाँकि, उन्होंने जैसा सोचा था वैसा नहीं हुआ। उनकी माँ ने कभी उनके अब्बा पर केस नहीं किया, जबकि उन्होंने उन्हें छोड़ दिया था। तब उन्हें कोई कारोबार शुरू करने का ख्याल आया। किसी तरह उन्होंने दो-तीन भैंसे ली।

नेहा खान की मानें तो वो अपने भाई और माँ के साथ मिल कर भैंसें धोती थीं। शरीर से गोबर की बास आने के कारण स्कूल में कोई उनका दोस्त नहीं बनता था। ऊपर से उनके अब्बा के तरफ के लोग खतरनाक थे, जो हमेशा दबाव देते थे कि मुस्लिम हो तो मुस्लिम की तरह रहो, हमारा नाम खराब मत करो। नेहा ने जब स्कूल में मॉडलिंग शुरू की तो उनकी एक परिचित महिला ने पहली बार उनकी फोटो निकलवाई।

वहीं एक फोटोग्राफर ने एक अख़बार के एक कॉलम में उन तस्वीरों को भेजा। नेहा खान का कहना है कि उस समय उन्हें पता चला कि वो खूबसूरत हैं, वरना उससे पहले उन्होंने खुद को ठीक से देना ही नहीं था। उस समय डर के मारे उन्होंने अपना नाम ‘खान’ न देकर अपनी माँ की तरफ का सरनेम दिया। इसी दौरान कुछ लोगों ने अभिनेत्री बनने के लिए प्रोत्साहित किया। तभी उन्होंने अपनी माँ व भाई के लिए कुछ करने की चाहत में मुंबई जाकर ऑडिशन देने का निर्णय लिया।

वो मुंबई आ गईं। उनके अब्बा को झूठ बताया गया कि वो नानी के घर गई हैं, नहीं तो वो लोग इसका विरोध करते। वो घर से खाली हाथ सिर्फ एक बैग लेकर मुंबई निकलती थीं, ताकि किसी को शक न हो। मुंबई में उन्होंने ट्रेन से सफर किया। कई बार उन्हें अख़बार डाल कर स्टेशनों पर सोना पड़ा। अंत में हार कर उन्हें लगा कि शायद काम नहीं मिलेगा। उन्होंने मुंबई में लोगों को देखा और फिर कपड़े वगैरह उसी हिसाब से पहनना सीखा।

नेहा खान ने फरवरी 2020 में ‘लोकमत’ के साथ बातचीत में अपने संघर्षों के बारे में बताया था

नेहा खान ने तब बताया था कि उन्हें ऐसा लगता था कि उन्हें एक्टिंग आती है, लेकिन फिर पता चला कि अभिनय सीखना पड़ेगा। अनुपम खेर के संस्थान में एक बुजुर्ग शिक्षक मिले, जिन्होंने नेहा खान की मदद की। वो शिक्षक सतीश कौशिक जैसे बड़े नामों के साथ काम कर चुके थे। उनका बेटा भी फिल्म निर्देशक थे। उनके कहने पर ही वो मुंबई शिफ्ट हुईं। उन्होंने ही घर वगैरह लेने में नेहा खान की मदद की।

नेहा खान को पहली फिल्म ‘युवा’ मिली, जिसमें उन्हें जिमि शेरगिल के अगेंस्ट कास्ट किया गया था। इसके बाद कई लोगों से उनकी मुलाकात हुईं। हालाँकि, नेहा ने बताया था कि इस दौरान उन्हें कई फेक तो कई अच्छे लोग भी मिले। वो शनि देवल के साथ ‘घायल वंस अगेन’ में भी काम कर चुकी हैं। अब तक वो 10 फिल्मों में काम कर चुकी हैं। OTT में भी उनकी डेब्यू हो चुकी है। 2015 में मराठी फिल्म ‘गुरुकुल’ से उन्हें पहचान मिली।

नाम- अमीनुल इस्लाम, लत- ड्रग्स की… 40000 रुपए में बेच दिया ढाई साल का बेटा: साजिदा बेगम के साथ गिरफ्तार

असम के मोरीगाँव जिले से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। लहरियाघाट के रहने वाले अमीनुल इस्लाम ने अवैध ड्रग्स खरीदने के लिए अपने ही ढ़ाई साल के बच्चे को 40,000 रूपए में बेच दिया। पुलिस ने बच्चे के पिता और उसे खरीदने वाले को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्चे की माँ रुक्मिना बेगम ने गुरुवार (05 अगस्त 2021) को एफआईआर दर्ज कराई थी। इस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने बरबरी की रहने वाली साजिदा बेगम के पास से रुक्मिना के बेटे को बरामद कर लिया और साजिदा व अमीनुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया।

रुक्मिना द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अमीनुल के ड्रग तस्करी में संलिप्त रहने के कारण रुक्मिना की उससे रोज लड़ाई होती रहती थी। इसी कारण पिछले कुछ समय से रुक्मिना अपने पिता के घर रह रही थी। एफआईआर के मुताबिक, कुछ दिन पहले अमीनुल, रुक्मिना के पिता के घर पहुँचा और बच्चे को यह कहते हुए अपने साथ ले आया कि उसका आधार कार्ड बनवाना है। लेकिन दो-तीन दिन बीत जाने के बाद भी अमीनुल बच्चे को लेकर वापस उसकी माँ के पास नहीं पहुँचा।

अमीनुल ड्रग्स लेने का आदी है और पिछले तीन सालों से ड्रग्स की तस्करी समेत कई अन्य गंभीर अपराधों में संलिप्त है। इसके अलावा, उसके ऊपर सेक्स रैकेट चलाने का भी आरोप है। पुलिस का कहना है कि इन सभी आरोपों की पूरी जाँच की जा रही है।

ज्ञात हो कि असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में ड्रग और नशीले पदार्थों की तस्करी पर जबरदस्त कार्रवाई की जा रही है। सीएम सरमा खुद भी ड्रग, हेरोइन और नशीली गोलियों को सार्वजनिक रूप से नष्ट करते हुए देखे गए। कभी उन्होंने ड्रग निस्तारण कार्यक्रम में नशीले पदार्थों को आग लगाई तो कभी उन पर बुलडोजर चलाकर उन्हें नष्ट किया। जुलाई महीने में ही असम में लगभग 163 करोड़ रुपए की ड्रग को नष्ट किया जा चुका है। इसके साथ ही ड्रग तस्करी से जुड़े लगभग 900 मामलों में 2,000 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

‘बहुसंख्यक मुस्लिमों को मंदिरों के बाहर गाय काटने का अधिकार’: MYC ने पाकिस्तान में गणेश मंदिर पर हमले की निंदा से किया इनकार

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रहीमयार खान गाँव के गणेश मंदिर में कट्टरपंथी इस्लामवादियों द्वारा हमला करने और उसे अपवित्र करने के दो दिन बाद शुक्रवार (6 अगस्त) को पाक का चेहरा फिर बेनकाब हो गया। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, 22 धार्मिक और राजनीतिक दलों के गठबंधन ने हिंदुओं पर हिंसा और हिंदू मंदिर को निशाना बनाने के कुकृत्य की निंदा तक नहीं की।

राजनीतिक पार्टियों के गठबंधन ने मिल्ली याकजेहटी काउंसिल (MYC) को कहा, ”उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि हिंदू मंदिर पर हमला किया गया था।” इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान साहिबजादा अबुल खैर जुबैर ने इस विषय को हैदराबाद की एक अन्य घटना से जोड़ दिया। उन्होंने आरोप लगाया, ”हैदराबाद में एक मंदिर के सामने एक मुस्लिम परिवार रहता है। इस क्षेत्र में कुछ हिंदू परिवार भी रहते थे और उन्होंने अधिकारियों को शिकायत दर्ज कराई कि मंदिर के सामने बलि देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। जबकि बहुसंख्यकों को इसका अधिकार है।”

जुबैर ने आगे कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों को इस्लामी कानूनों (शरिया) के तहत ‘संरक्षित’ किया जाता है, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि बहुसंख्यक समुदाय (मुसलमानों) के ‘अधिकारों’ से भी इनकार नहीं किया जाना चाहिए। मालूम हो कि जुबैर कट्टरपंथी इस्लामी संगठन जमीयत उलेमा-ए-पाकिस्तान (JUP) के सदस्य हैं और MYC की सर्वोच्च परिषद के नव निर्वाचित अध्यक्ष हैं। जब पाकिस्तानी पत्रकारों ने मिल्ली याकजेहटी परिषद के नेताओं को और उकसाया, तो महासचिव लियाकत बलूच ने कहा, “देश में अल्पसंख्यक समुदाय को पूरी स्वतंत्रता है।”

प्रताड़ना के डर से 150 हिंदू परिवार गाँव छोड़कर भागे

जमात-ए-इस्लामी के एक सदस्य बलूच ने तथ्यों से अवगत न होने के बहाने मंदिर हमले की निंदा करने से इनकार कर दिया। जब पत्रकारों ने मंदिर की घटना के बारे में MYC नेताओं से सवाल किए, तो पूर्व उप महासचिव डॉ. साकिब अकबर ने उन्हें किसी अन्य विषय पर आगे बढ़ने और मंदिर के मुद्दे पर चर्चा करने से परहेज करने के लिए कहा।

इस तथ्य के बावजूद है कि मिल्ली याकजेहटी परिषद ने मुहर्रम के महीने से पहले उत्तेजक भाषणों और बयानों को नहीं देने की कसम खाई थी। हिंदू अधिकार कार्यकर्ता (Hindu rights activist) राहत ऑस्टिन (Rahat Austin) के अनुसार, रहीमयार खान के भोंग में लगभग 150 हिंदू परिवारों को अपने घरों से भागने के लिए मजबूर किया गया था। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “पंजाब एक समय में हिंदू बहुसंख्यक प्रांत था, लेकिन अब रहीमयार खान एकमात्र ऐसा शहर है, जहाँ हिंदू बड़ी संख्या में मौजूद हैं।”

गौरतलब है कि बुधवार (4 अगस्त 2021) को कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवादियों ने हिंदुओं के मंदिर में घुसकर भगवान गणेश, शिव-पार्वती की मूर्तियों को तोड़ दिया था। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर में लगे झूमर, घंटे को भी तहस-नहस कर दिया और मंदिर परिसर को भी काफी नुकसान पहुँचाया था।

इसका वीडियो पाकिस्तान में ‘द राइज न्यूज’ की पत्रकार और संस्थापक संपादक वींगास (Veengas) ने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया था। उन्होंने लिखा था, ”पंजाब के रहीमयार खान के गाँव भोंग के गणेश मंदिर में तोड़फोड़ की गई है। एक बार फिर पाकिस्तान में हिंदुओं पर हमला किया गया है।”

बताया जाता है कि इसके बाद पाकिस्‍तानी कट्टरपंथ‍ियों ने इस पूरी घटना को फेसबुक पर लाइव भी किया था। घटना को अंजाम देने के बाद उन्होंने मंदिर को आग के हवाले कर दिया था। वहीं, जब स्‍थानीय लोगों ने इसकी शिकायत पुलिस में की, तो उन्होंने हिंदुओं की बात पर कोई ध्‍यान नहीं दिया।

मेजर ध्यानचंद के नाम पर जो पुरस्कार है, उसका क्या… उसका नाम नेता के नाम पर रख दोगे? रवीश कुमार का सवाल

PM नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट किया – खेल रत्न पुरस्कार अब मेजर ध्यानचंद के नाम पर होगा। 6 अगस्त के ट्वीट में उन्होंने बताया कि इसके लिए देश भर से नागरिकों का आग्रह मिला।

प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा, “मेजर ध्यानचंद के नाम पर खेल रत्न पुरस्कार का नाम रखने के लिए देशभर से नागरिकों के अनुरोध मिले हैं। मैं उनके विचारों के लिए उनका धन्यवाद करता हूँ। उनकी भावना का सम्मान करते हुए, खेल रत्न पुरस्कार को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कहा जाएगा! जय हिंद!”

इसके बाद जनता खुश हो गई। सोशल मीडिया में कॉन्ग्रेस मुक्त भारत के जयकारे लगे। लेकिन दूसरा पक्ष शांत रहा, इस भुलावे में न रहें। मिर्ची लगी है उन्हें, लाल वाली। यह ट्वीट देखिए। इसमें अंकुर नाम के व्यक्ति ने लिखा है – “राजीव गाँधी खेल रत्न अवार्ड का नाम बदल दिए जाने पर जितना दुःख रवीश को हुआ, उतना शायद राहुल गाँधी को भी नहीं हुआ होगा।”

निश्चित ही नहीं हुआ है। लेकिन इतना दृढ़ होकर कैसे कह रहा हूँ? यह रहा जवाब:

“यह दुर्भाग्यपूर्ण है। राजीव गाँधी ने 21वीं सदी में देश का नेतृत्व किया। उन्होंने खेल, युवाओं को प्रोत्साहित किया… राजीव गाँधी जी इस देश के नायक थे, नायक रहेंगे।”

इस तरह की टिप्पणी कॉन्ग्रेसी सांसदों-नेताओं की ओर से जरूर आई लेकिन राहुल गाँधी अपने चिर-परिचित अंदाज में कुर्ते की बाँह उठा कर चलते बने इसी सवाल (राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार) पर।

खैर। बात रवीश कुमार के दुख पर। पूरी प्राइम टाइम ही कर डाली। यह काम उस रवीश कुमार ने किया है, जो पहले मजदूरों-विद्यार्थियों की आवाज उठाने वाली पत्रकारिता करते थे और बाकी टीवी मीडिया से दूर रहने की सलाह देते थे। 31 मिनट 16 सेकंड का प्राइम टाइम खेल-खिलाड़ी-राजनीति कर दिया जिस रवीश ने, शायद वो यह भूल गए कि 6 अगस्त को पूरे देश में कहीं न कहीं बारिश हुई होगी, बाढ़ भी आई होगी… लेकिन दुख उनको हुआ खेल-खिलाड़ी वाले मुद्दे पर? पत्रकार की सोच शायद मर गई है उनकी!

सवाल कैसे-कैसे पूछ रहे हैं रवीश कुमार, यह भी देखा जाए: संबित पात्रा के ट्वीट में ध्यानचंद से ज्यादा बड़ी तस्वीर प्रधानमंत्री की क्यों? रवीश बाबू, फोटो तो आपकी भी मायावती के साथ थी, क्या कीजिएगा! और अखिलेश के साथ तो आपने हद ही कर दी थी… एक सीएम से ज्यादा बड़ी तस्वीर आपने खींच ली थी, शायद धोखा देते हुए उन्हें पीछे धकेल कर? जवाब तो स्वयं आप ही दे सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे आपके सवाल का जवाब सिर्फ संबित पात्रा दे सकते हैं।

प्राइम टाइम PM मोदी और उनकी राजनीति के नाम पर ताकि माल बिक सके… लेकिन सवाल और जवाब किसी दूसरे के कंधे पर रख कर? मानिए या न मानिए, एक पत्रकार तो आपके अंदर बसता ही है रवीश ‘कौन जात हो’ कुमार!

तिरंगा फहराने पर CM अमरिंदर और राज्यपाल मरेंगे राजनीतिक मौत: खालिस्तान आतंकी की धमकी

हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को धमकी देने के बाद खालिस्तान समर्थक सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के गुरपतवंत सिंह पन्नू ने अब पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर को भी धमकी दी है। पन्नू के ऑडियो मैसेज में कहा गया है कि अगर स्वतंत्रता दिवस को तिरंगा फहराया गया तो अच्छा नहीं होगा और ऐसा करने पर CM एवं राज्यपाल अपनी राजनीतिक मौत के जिम्मेदार खुद होंगे।

पन्नू के इस ऑडियो मैसेज में किसान आंदोलन की चर्चा की गई है और कहा गया है, “हमारे किसान मर रहे हैं, ऐसे में किसी भी हालत में स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया जाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” पिछले कुछ दिनों से ऐसे ही मैसेज हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए। इसके बाद हिमाचल प्रदेश में शिमला के साइबर थाने में खालिस्तान समर्थक एवं SFJ के नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज किया गया। इसमें आईटी एक्ट समेत कई और धाराएँ भी जोड़ी गई हैं।

हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर को भी पन्नू ने इसी तरह के फोन कॉल के माध्यम से धमकाया है। इस धमकी के कारण गुरुग्राम के साइबर क्राइम थाने में पन्नू के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है। शुक्रवार (06 अगस्त 2021) को ही पन्नू के नाम से यूपी पुलिस के पास आए फोन कॉल में सीएम आदित्यनाथ को भी धमकी दी गई। SFJ ने कहा है कि योगी आदित्यनाथ को स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा नहीं फहराने दिया जाएगा। साथ ही यह भी कहा कि उसी दिन थर्मल पावर प्लांट भी बंद कर दिए जाएँगे। इस कॉल में यह भी धमकी दी गई कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और रामपुर समेत कई इलाकों को खालिस्तान द्वारा आजाद कराया जाएगा।

हाल ही में हिमाचल प्रदेश में श्री नयना देवी-कोलां वाला टोबा सड़क पर खालिस्तानी आतंकवादी संगठन और जरनैल सिंह भिंडरावाले के समर्थन में नारे लिखे देखे गए थे। जगह-जगह पेंट और मार्कर पेन से ‘खालिस्तान जिंदाबाद’, ‘खालिस्तान में शामिल हों‘ और पंजाबी भाषा में ‘जनमत संग्रह 2021‘ व ‘SFJ में शामिल हों’ लिखा हुआ देखा गया था। इस तरह की घटनाओं को देखते हुए राज्यों में सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं और खुफिया एजेंसियाँ भी सतर्क हो चुकी हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

ट्विटर ने राहुल गाँधी का ट्वीट किया डिलीट: बलात्कार पीड़िता के माता-पिता की तस्वीर की थी शेयर, NCPCR के नोटिस पर एक्शन

दिल्ली में कथित रेप पीड़िता के माता-पिता की फोटो ट्वीट कर पहचान उजागर करने के मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने ट्विटर इंडिया को नोटिस जारी कर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की थी। जिसके बाद कार्रवाई करते हुए ट्विटर ने उनके विवादित ट्वीट को हटा लिया है।

स्क्रीनशॉट

बुधवार (4 अगस्त, 2021) को राहुल गाँधी ने दिल्ली में नाबालिग लड़की के परिवार से मुलाकात की थी और मृतक नाबालिग लड़की के माता-पिता की एक तस्वीर ट्वीट की थी। नौ साल की दलित पीड़िता के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया गया, उसकी हत्या कर दी गई और फिर अपराधियों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया, जो कि अब पुलिस हिरासत में हैं।

राहुल गाँधी के ट्वीट के बाद, कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ दिल्ली की नांगल बलात्कार पीड़िता की पहचान का खुलासा करने और इस प्रकार यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की धारा 23, किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम की धारा 74, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) का अधिनियम 228 ए का उल्लंघन करने के लिए दिल्ली पुलिस में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के चेयरपर्सन प्रियंक कानूनगो ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “एक पीड़ित बच्ची के माता पिता की फ़ोटो ट्वीट कर उनकी पहचान उजागर कर POCSO ऐक्ट का उल्लंघन करने पर NCPCR ने संज्ञान लेते हुए ट्विटर इंडिया को नोटिस जारी कर राहुल गाँधी के ट्विटर हैंडल के विरुद्ध कार्यवाही करने एवं पोस्ट हटाने के लिए नोटिस जारी किया है।”

बता दें कि बीजेपी ने तस्वीरें साझा करने को POCSO कानून का उल्लंघन बताते हुए उनके खिलाफ NCPCR से संज्ञान लेने और कार्रवाई करने का निवेदन किया था।  बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गाँधी ने अपने ट्वीट में पीड़िता के परिजनों का चेहरा सार्वजनिक किया है, जो पोक्सो एक्ट की धारा 23 जुवेनाइल जस्टिस केयर के तहत चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 74 का उल्लंघन है। NCPCR इसका संज्ञान लें और राहुुल गाँधी को नोटिस जारी करे।

गौरतलब है कि दिल्ली के ओल्ड नांगल में 9 साल की एक बच्ची की संदेहास्पद हालत में मौत हो गई। आरोप है कि श्मशान घाट के भीतर रेप करने के बाद बच्ची को जला दिया गया। इस मामले में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। साथ ही बताया है कि पोस्टमॉर्टम से भी मौत की वजह से पर्दा नहीं उठ पाया है।