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चित्रकूट के प्राचीन बालाजी मंदिर के बैनर में मुगल शासक औरंगजेब की तस्वीर, बवाल के बाद महंत सहित 3 पर मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में मंदाकिनी तट पर स्थित प्राचीन बालाजी मंदिर के बैनर में क्रूर मुगल शासक औरंगजेब की तस्वीर लगाने के बाद बवाल हो गया है। मंदिर के साथ-साथ खुद का प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य से यज्ञवेदी के महंत ने अपनी और औरंगजेब की तस्वीरों वाले इस बैनर को बनवाया था। महंत की हरकत को देेखते हुए हिंदू युवा वाहिनी ने मामले की शिकायत की और शिकायत मिलने पर पुलिस ने महंत समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, हिदू युवा वाहिनी के जिलाध्यक्ष बुद्ध प्रकाश ने गुरुवार को कर्वी कोतवाली में तहरीर दी कि यज्ञवेदी के महंत सत्यप्रकाश दास, उनके सहयोगी चरण दास और मंदिर के पुजारी ने मंदिर और खुद का प्रचार करने के लिए बैनर बनवाया था। इस बैनर में इन लोगों ने अपनी तस्वीर के साथ-साथ मुगल शासक औरंगजेब की तस्वीर भी लगवा दी। बुद्ध प्रकाश ने कहा कि 16वीं सदी में पन्ना नरेश द्वारा बनवाए गए इस मंदिर की प्रचार सामग्री में तस्वीर लगाकर मुगल शासक को महान दर्शाने का घृणित काम किया गया है।

बैनर में औरंगजेब की फोटो देखकर संगठन के लोगों ने महंत से मिलकर आपत्ति जताई और इसका कारण पूछा। कारण पूछने पर महंत सत्यप्रकाश दास ने कहा कि मंदिर में औरंगजेब का ताम्रपत्र है। उन्होंने बताया कि मंदिर को लेकर उन्होंने जो लोगों से सुना था और पढ़ा था, उसी के अनुसार उन्होंने बैनर में फोटो लगवाई थी।

महंत सत्यप्रकाश दास ने बताया कि हिंदू युवा वाहिनी के करीब 24 लोग उनके पास आए थे और बैनर को लेकर आपत्ति जताई थी। उन लोगों ने कहा था कि इस बैनर को हटा दें। महंत सत्यप्रकास ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि बात यहाँ तक पहुँच जाएगी।

वहीं, थाना कोतवाली के प्रभारी वीरेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि तहरीर के आधार पर मंदिर के महंत समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि मामले की जाँच सीतापुर चौकी के प्रभारी को सौंपी गई है।

कुरान का पाठ पढ़ 33 साल की गर्लफ्रेंड को 60 साल का डॉक्टर देता था जहरीला इंजेक्शन, छाती में घुसा दिया था ट्यूब

इंग्लैंड के साउथ यॉर्कशायर से एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है, जहाँ एक डॉक्टर ने एक कथित इस्लामी रस्म की प्रक्रिया अपनाते हुए अपनी गर्लफ्रेंड की हत्या करने की कोशिश की। 60 वर्षीय डॉक्टर होस्साम मेटवल्ली को जेल भेज दिया गया है। ये घटना शेफील्ड की है, जहाँ के क्राउन कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया। ‘इस्लामी रस्म’ अपनाते हुए उसने अपनी 33 वर्षीय गर्लफ्रेंड केली विल्सन को सैकड़ों बार जहरीला इंजेक्शन दिया।

डॉक्टर की इस कथित इस्लामी ‘झाड़-फूँक’ के कारण उसकी गर्लफ्रेंड के शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया। डॉक्टर इस सम्बन्ध में यूट्यूब पर वीडियोज देखता था और फिर उन्हें जो प्रक्रिया बताई जाती थी, उसे अपनी गर्लफ्रेंड पर आजमाता था। इसी तरह उसने ऐसी कई रस्में की और इंजेक्शन के माध्यम से खतरनाक पदार्थ अपनी गर्लफ्रेंड के शरीर में डालता रहा। उसके घर से भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद हुए हैं।

इनमें से कई तो खतरनाक व जहरीले ड्रग्स भी हैं। वरिष्ठ जज जेरेमी रिचर्डसन ने कहा कि ये उनके 41 साल के करियर का सबसे अजीबोगरीब मामला है। डॉक्टर ने लगभग 4 वर्षों तक अपनी गर्लफ्रेंड के साथ ऐसा किया था। इस दौरान उसने 200 वीडियोज रिकॉर्ड किए, जिन्हें कोर्ट में जूरी को भी दिखाया गया। उत्तर-पूर्वी लिंकनशायर के ग्रिम्स्बी नामक इलाके में स्थित अपने घर में उसने ये ‘इस्लामी झाड़-फूँक’ की।

वीडियो में देखा जा सकता है कि जहाँ एक तरफ डॉक्टर होस्साम मेटवल्ली कुरानशरीफ का पाठ कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अपनी गर्लफ्रेंड की छाती में ट्यूब लगा कर उसके शरीर में ड्रग्स डाल रहा है। इस दौरान उसे इस्लाम की ‘रुक़्या रस्म’ के तहत गर्लफ्रेंड का झाड़-फूँक किया। इसके तहत सफ़ेद ग्लव्स पहले मौलवियों को मरीज के सिर पर हाथ रख कर कुरान पढ़ते हुए देखा जा सकता है।

इससे जीन वगैरह भगाने व रोग नाश करने के दावे किए जाते रहे हैं। साथ ही ‘रूह के शुद्धिकरण के लिए’ शहद व पानी का इस्तेमाल किया जाता है। चूँकि ये वीडियोज व्यथित करने वाले थे, इसीलिए जूरी को पहले ही इसके बारे में बता दिया गया था और फिर दिखाया गया था। कुछ वीडियोज में तो केली विल्सन को बिस्तर से बाँध कर या बाथरूम में ले जाकर एक इलेक्ट्रॉनिक यंत्र से उसके भीतर केमिकल डालते हुए देखा जा सकता है।

एक वीडियो में केली डॉक्टर से ये पूछती नजर आ रही हैं कि क्या उसने उनके साथ बलात्कार किया है? डॉक्टर का कहना है कि अपनी गर्लफ्रेंड के शरीर पर आए बुरे जिन्न को भगाने के लिए वो ऐसा कर रहा था। आरोपित डॉक्टर मूल रूप से इटली का रहने वाला है। केली विल्सन का अब भी अस्पताल में इलाज चल रहा है। वो एक अस्पताल में एनेस्थीसिया के डॉक्टर के रूप में कार्यरत था। अब उसे जेल भेज दिया गया है।

‘मुझे नंगी कर के बनवाते थे वीडियोज, कहते थे शिल्पा को पसंद आया’: 8 घंटे में शर्लिन चोपड़ा ने खोले कई राज, मुस्कुराते हुए निकलीं

पोर्न फिल्मों की शूटिंग कर के उन्हें एप के माध्यम से बेचने के मामले में फँसे राज कुंद्रा के बारे में अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा ने कई खुलासे किए हैं। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार (6 अगस्त, 2021) को पूछताछ की। ये पूछताछ 8 घंटे तक चली। प्रॉपर्टी सेल विभाग ने एक्ट्रेस-मॉडल शर्लिन चोपड़ा को समन भेजा था। शर्लिन चोपड़ा ने पुलिस को बताया कि राज कुंद्रा ने उन्हें ये कह कर गुमराह किया था कि शिल्पा शेट्टी को उनके वीडियोज पसंद आ रहे हैं।

बता दें कि हाल ही में ‘हंगामा 2’ से 14 सालों बाद बॉलीवुड में वापसी करने वाली अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी, राज कुंद्रा की पत्नी हैं। शर्लिन चोपड़ा ने बताया कि राज कुंद्रा उनके मेंटर हुआ करते थे और उन्होंने ये कह कर वीडियों शूट कराए थे कि ये ग्लेमर के लिए है। राज कुंद्रा ने पोर्न को ‘सेमी न्यूड एवं कैजुअल’ बताते हुए कहा था कि चूँकि हर कोई ऐसा कर रहा है, इसीलिए शर्लिन चोपड़ा को भी करना चाहिए।

शर्लिन चोपड़ा ने मीडिया से बात करते हुए पुलिस को दिए अपने बयान के बारे में बताया। उन्होंने कहा, मुझे नहीं पता था कि कहाँ से शुरुआत करनी है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं एक दिन इस तरह के स्कैंडल में फँस जाऊँगी और मुझे क्राइम ब्रांच के समक्ष बयान देना पड़ेगा। जब मैं पहली बार राज कुंद्रा से मिली थी तो मैंने सोचा था कि मेरी पूरी जिंदगी बदल जाएगी। मुझे लगा था मुझे बड़ा ब्रेक मिला है लेकिन मैंने ये कभी नहीं सोचा था कि वो मुझसे गलत चीजें करवाएँगे।”

शर्लिन ने बताया कहा कि उन्होंने आर्म्सप्राइम नामक कंपनी के साथ करार पर हस्ताक्षर किए थे फिर और वीडियोज बनाने लगी थीं। उनका कहना है कि शुरुआत में ये ग्लैमरस वीडियो थी, लेकिन उसके बाद ये बोल्ड फिल्में बनने लगीं और बाद में उन्हें सेमी न्यूड और न्यूड वीडियोज बनाने पड़े। बकौल शर्लिन चोपड़ा, उन्हें हमेशा कहा जाता था कि इसमें कुछ गलत नहीं है क्योंकि सभी ऐसा ही करते हैं।

शर्लिन चोपड़ा ने कहा कि जब-जब वो राज कुंद्रा के मुँह से सुनती थीं कि शिल्पा शेट्टी को उनके वीडियोज अच्छे लगे हैं, उन्हें एक प्रकार का मोटिवेशन मिलता था। इससे वो और बेहतर करने की कोशिश करती थीं। शिल्पा शेट्टी ने राज कुंद्रा मामले में कोई जानकारी होने की बात नकार दी थी। इस पर शर्लिन ने कहा कि काफी व्यस्त रहने के कारण वो भूल गई होंगी। शर्लिन चोपड़ा से आर्म्सप्राइम के साथ उनके करार और कंटेंट बनाने में शामिल लोगों के बारे में भी पूछताछ हुई।

शर्लिन चोपड़ा ने बताया कि उनसे पुलिस ने पूछा कि राज कुंद्रा के साथ उनके कैसे सम्बन्ध थे। साथ ही अभिनेत्री ने दावा किया कि वो पूछताछ के लिए और समय देने को भी तैयार थीं, क्योंकि वो महिलाओं के लिए न्याय चाहती हैं। साथ ही अपील की कि इस केस के बारे में कोई कुछ भी जानता हो तो पुलिस से शेयर करे। शर्लिन चोपड़ा ने पुलिस को व्हाट्सएप्प चैट्स भी सौंपे। साथ ही कई जानकारियाँ दीं। शर्लिन चोपड़ा पूछताछ के बाद मुस्कुराते हुए बाहर निकलीं।

786 फीट तकिया फेंका, देश के लिए लाया पहला ओलंपिक गोल्ड: वो GK जिसे इतिहासकारों ने छिपाया

बहुत समय पहले की बात है। तब सोशल मीडिया नहीं हुआ करता था। लोग खेल-कूद कर समय बिताते थे। भारत तब खेल-कूद की चिड़िया हुआ करती थी। एक पर एक उस्ताद… लेकिन इन सब के एक सरदार भी थे। बड़े रौबदार।

सरदार के रौब के किस्से अभी भी मशहूर हैं… संसद से लेकर गलियों तक, किताब से लेकर यूनिवर्सिटी तक। जो मशहूर (भयंकर वाला) नहीं, वही आज हाजिर है।

रौबदार सरदार का किस्सा लेकिन गुम कैसे हुआ? इसी उत्तर की तलाश में लेखक ने भटकते हुए ‘भारत एक खोज’ कर डाला। भटकते-भटकते 1928 तक जाना पड़ा, तब जाकर पता चला तकिया-फेंक प्रतियोगिता के बारे में!

तकिया-फेंक प्रतियोगिता

तकिया-फेंक प्रतियोगिता! चौंक गए? लेकिन यही सत्य है। वो सत्य, जिसे वामपंथी इतिहासकारों ने छिपाया… या यूँ कह लें कि छिपवाया गया। त्याग देकर… देश की खातिर। किस्सा तो यह भी मशहूर है कि सरदार की नस्लों ने भी त्याग किया

खैर। 26 मई 1928 का दिन था। ओलंपिक में भारत ने हॉकी का गोल्ड जीता था। इस इतिहास को सभी जानते हैं। नहीं जानते हैं तो गूगल वाली किताब में खोजने पर मिल ही जाएगा। तो फिर देश के लिए सरदार ने पहला गोल्ड मेडल जीता था, यह कहानी मोहन काका (कुछ लोग उन्हें बापू काका भी कहते हैं) ने क्यों सुनाई थी?

त्याग, बलिदान, देशहित… यही सब भाव थे, जिनके कारण मोहन काका चाहते थे कि यह कहानी इतिहास के पन्नों के बजाय किंवदंती बने। हुआ भी यही। NCERT से लेकर ICSE तक और उसके बाद कॉलेज-पीएचडी की पढ़ाई तक… यह स्वर्णिम इतिहास आपको ढूँढे नहीं मिलेगा। लेखक को कैसे मिला? नीदरलैंड जाकर। पुराने अखबार में।

हुआ यह कि मैं भारत के पहले ओलंपिक गोल्ड मतलब हॉकी गोल्ड के बारे में जानता था। यानी मोहन काका की कहानी अगर सच है तो इसके पहले के खेलों के इतिहास को खँगालना होगा – यह तर्क मेरे भीतर धँस गई। पहुँच गया एम्सटर्डम। यहीं भारत ने हॉकी का गोल्ड जीता था – 26 मई 1928 को। यानी जगह और दिनांक दोनों मिल गए थे, जहाँ से पीछे की ओर जाकर मुझे कहानी को इतिहास में बदलना था।

शाम में एक जगह झालमूढ़ी खा रहा था। खा क्या रहा था, समझिए सारी कायनात मिल कर खिला रहा था। क्यों? क्योंकि मैं दिल से चाह रहा था। वरना एम्सटर्डम में कोई झालमूढ़ी क्यों खाएगा भला? तो हुआ यूँ कि जिस पेपर के ठोंगे में झालमूढ़ी थी, वो पेपर बहुत ही पुराना था। एक फोटो भी उसमें। फोटो पर नजर अटक गई। हिंदुस्तानी कपड़ों वाला आदमी नीदरलैंड के स्थानीय भाषा वाले अखबार में क्यों? वो भी चेहरा जाना-पहचाना! मेरी खोज शायद सही रास्ते पर थी, मंजिल भी नजदीक थी, ऐसा जान पड़ा।

786 फीट तक फेंका गया था तकिया, हिंदुस्तानी सरदार ने सबको चौंका दिया था

झालमूढ़ी वाले से पढ़वाया। टूटी-फूटी अंग्रेजी में उसने जो बताया, रौबदार सरदार से मेल खा गया… मोहन काका की कहानी अब मेरे सामने थी। 25 मई 1928 का अखबार था, मतलब खबर 24 मई की थी। भारत गोल्ड जीत चुका था… बिना हो-हल्ला के, यह आश्चर्य की बात थी।

त्याग-देशहित में प्रेस से छिपाई बात

भारत के लिए पहला गोल्ड जीतने वाले शख्स को पता था कि 2 दिन बाद टीम गेम हॉकी का फाइनल है। टीम में गोरे बिलायती लोग भी थे। कुछ देशी भी थे। सबका ध्यान अचानक से सरदार को कौंध गया। सात समंदर पार भी उन्होंने अपने चाहने वाली को सेट किया। चाहने वाली पावरफुल थी। उन्होंने प्रेस को सेट किया। बात अंतरराष्ट्रीय प्रेस में जा ही नहीं पाई। खबर हिंदुस्तान तक आती कैसे?

भला हो उस स्थानीय पत्रकार का, जिसने प्रेस पर लगी रोक (सिर्फ इस खबर के लिए, यह सिर्फ सरदार जानते थे और बाद में उनकी बेटी ने जाना-समझा और प्रेस पर अंकुश लगाया… वो भी सिर्फ देशहित में!) के बावजूद यह खबर छाप दी थी लेकिन जेल जाने के डर से अखबार को अगले दिन मार्केट में नहीं भेजा था। ऑफिस की लाइब्रेरी में छिपा ली थी सारी कॉपी… उन्हीं कॉपी में से एक, जिस पर मैं झालमूढ़ी खा रहा था क्योंकि इस प्रेस के वर्तमान मालिक ने अब इसे कूड़ा समझ फेंक दिया था, जो मेरे लिए सोना था, देश के लिए इतिहास।

खैर मेरी यात्रा राहुल सांकृत्यायन की जितनी महान तो नहीं लेकिन इतिहास के योगदान में जानी तो जरूर जाएगी। वो इतिहास, जिसे वामपंथियों तक ने छिपाया। वो इतिहास, जिसे खुद इतिहास रचने वाले ने छिपाया… और देश आज इनसे 60-70 सालों का हिसाब माँग रहा है? देश की इतनी हिम्मत?

अनुच्छेद-370 हटने का कमाल: अब बिना परमिट लद्दाख में कहीं भी जाइए, तिरंगे से रोशन हुआ लाल चौक का घंटाघर

जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त करने और लद्दाख के रूप में एक अलग केंद्र शासित प्रदेश के गठन के साथ ही लोगों को बदलाव दिखने शुरू हो गए थे। अब इस फैसले के 2 साल पूरे होने पर ये बदलाव स्पष्ट रूप से नज़र आ रहा है। राजधानी श्रीनगर के लाल चौक पर स्थित घंटाघर तिरंगे के रंग से जगमगा रहा है। वहीं लद्दाख में यात्रा के लिए पर्यटकों को अब ILP (इनर लाइन परमिट) लेने की कोई ज़रूरत नहीं है।

लद्दाख: अब बिना परमिट बेधड़क कीजिए पर्यटन

अब लद्दाख के किसी भी क्षेत्र में पर्यटन के लिए भारतीय नागरिकों को किसी प्रकार का कोई परमिट लेने की आवश्यकता नहीं है। ‘प्रोटेक्टेड क्षेत्रों’ में भी आप घूम सकते हैं। इससे पहले लद्दाख के आंतरिक हिस्सों में जाने के लिए ILP लेना अनिवार्य था। बिना परमिट के भारतीय नागरिक सिर्फ पनामिक से आगे वर्षी तक जा सकते थे। इसमें लेह की नुब्रा घाटी में स्थित यर्मा गोम्पा/गोंबो मठ भी शामिल है।

साथ ही लद्दाख के एक ‘प्रोटेक्टेड क्षेत्र’ के लोग अब बिना किसी परमिट के किसी दूसरे ‘प्रोटेक्टेड क्षेत्र’ में जा सकते हैं। लद्दाख के उप-राज्यपाल दफ्तर ने ये आदेश जारी किया है। इसके तहत ‘प्रोटेक्टेड एरियाज’ के नागरिकों को पहचान का दस्तावेज मिलेगा और पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वो ऐसे तहसील और जिलों के बारे में विवरण जारी करें, जिन्हें ‘प्रोटेक्टेड’ की श्रेणी में रखा गया है।

साथ ही उप-राज्यपाल आरके माथुर ने लद्दाख पुलिस के ‘टूरिस्ट विंग’ का भी गठन किया। पुलिस की ये शाखा पर्यटकों से जुड़ी समस्याओं को देखेगी और साथ ही पर्यटकों के लिए एक उचित माहौल तैयार करने के लिए काम करेगी। पर्यटकों को कोई मेडिकल इमरजेंसी होती है या वो कहीं फँस जाते हैं तो लद्दाख पुलिस की ‘टूरिस्ट विंग’ तकनीक की सहायता से उनकी मदद करेगी। उन्हें पर्यटकों और पर्यटन एजेंसियों से कम्युनिकेशन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

जम्मू कश्मीर: तिरंगे से रोशन हुआ श्रीनगर के लाल चौक का घंटाघर

उधर जम्मू कश्मीर में स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के लिए भी खास तैयारियाँ की जा रही हैं। श्रीनगर का घंटाघर चौक तिरंगे से रोशन हो गया है और रात को इसकी शोभा देखते ही बन रही है। ये वही जगह है, जहाँ 1992 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी और तब ‘एकता यात्रा’ के संयोजक रहे नरेंद्र मोदी ने आतंकियों की धमकी के बावजूद तिरंगा झंडा फहराया था। श्रीनगर नगर निगम ने चौक की साफ़-सफाई की है।’

साथ ही घंटाघर में नई घड़ियाँ भी लगा दी गई हैं। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इस पर ख़ुशी जताते हुए लिखा कि वो कहते थे लाल चौक पर तिरंगा नहीं फहराने देंगे, पीएम मोदी ने लाल चौक ही तिरंगा कर दिया। वहीं फ़िल्मकार अशोक पंडित ने लिखा कि आज़ादी के बाद जम्मू कश्मीर में ऐसा पहली बार हो रहा है। लोगों ने अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाएं को इसका श्रेय दिया।

‘फेसबुक पोस्ट डिलीट करो, आगे से सावधान रहो’: इलाहाबाद HC का आदेश, चंपत राय के खिलाफ पत्रकार ने लगाए थे आरोप

‘विश्व हिंदू परिषद (VHP)’ के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष और ‘राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में 3 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई थी। आरोपितों में दूरदर्शन के एंकर रहे विनीत नारायण का नाम भी शामिल था। कुछ दिनों पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में विनीत नारायण को गिरफ़्तारी से राहत प्रदान की थी। चंपत राय के भाई ने विनीत नारायण के आरोपों को झूठा और साजिश करार दिया था।

अब इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्रकार विनीत नारायण को आदेश दिया है कि वो चंपत राय और उनके परिवार के खिलाफ पोस्ट किए गए फेसबुक पोस्ट को डिलीट करें। चंपत राय के भाई संजय कुमार बंसल ने भी कहा है कि फेसबुक पोस्ट हटा लिए जाने के बाद वो इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने अपने अधिवक्ता के जरिए उच्च न्यायालय को बताया कि ये फेसबुक पोस्ट गलत और तथ्यों से परे है।

उन्होंने ये भी कहा कि बुरी नीयत से इस फेसबुक पोस्ट को लिखा गया था। बिजनौर के एसपी धर्मवीर सिंह ने इस मामले में काउंटर एफिडेविट दायर किया था। विनीत नारायण के वकील ने कोर्ट में ही 10 मिनट का समय माँग कर फेसबुक पोस्ट को डिलीट किया। साथ ही आश्वस्त किया कि आरोपित आगे से इस तरह के फेसबुक पोस्ट लिखने में सावधानी बरतेंगे। इस पर बंसल ने कहा कि फेसबुक पोस्ट डिलीट किए जाने के बाद वो आरोपितों के खिलाफ केस आगे नहीं बढ़ाना चाहते।

हालाँकि, एसपी के एफिडेविट को लेकर कोर्ट ने उन्हें फटकार भी लगाई और कहा कि ये पुलिस के गिरते स्टैण्डर्ड को दिखाता है। इस एफिडेविट को पढ़ने के बाद कोर्ट ने लापरवाही को लेकर ये टिप्पणी की। हालाँकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विनीत नारायण को भी आगाह किया कि वो आगे से इस तरह से फेसबुक पोस्ट लिखने में सावधानी बरतें। विनीत के आरोपों के बाद चंपत राय के खिलाफ मीडिया में भी काफी नेगेटिव कवरेज हुई थी।

फेसबुक पोस्ट में गाली-गलौज की भाषा का भी उपयोग किया गया था और साथ ही हिन्दुओं को ठेस पहुँचाने वाली बातें थीं। दरअसल, संजय बंसल को उनके मित्र राजीव गुप्ता ने ये पोस्ट व्हाट्सएप्प के माध्यम से भेजा था और कहा था कि वो उनके परिवार का पहले काफी सम्मान करते थे, लेकिन ये पढ़ कर लगता है कि चंपत राय और उनके परिवार सम्मान के योग्य नहीं है। इससे संजय बंसल को खासी ठेस पहुँची थी।

विनीत नारायण ‘DD1’ के एंकर रहे हैं और फ़िलहाल ‘द ब्रज फाउंडेशन’ के अध्यक्ष हैं। JNU से पढ़े विनीत नारायण ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में भी रिपोर्टर और ‘हिंदुस्तान’ में कॉरेस्पोंडेंट रहे हैं। उन्होंने अलका लाहोटी नामक महिला की संपत्ति पर कब्ज़ा करने का आरोप चंपत राय पर लगाया था। बता दें कि चंपत राय अविवाहित हैं और अपने घर न के बराबर ही आते-जाते हैं। चंपत राय सुप्रीम कोर्ट में चली राम मंदिर के मुकदमे की सुनवाई में मुख्य पैरोकार एवं पक्षकार रहे हैं।

‘मेरा पति अलग-अलग महिलाओं से करता है सेक्स’: पत्नी के आरोपों पर यो यो ने तोड़ी चुप्पी – ‘दुःखी और व्यथित हूँ’

रैपर हृदेश सिंह उर्फ़ यो यो हनी सिंह ने अपनी पत्नी शालिनी तलवार द्वारा अपने ऊपर लगाए गए आरोपों पर बयान जारी कर प्रतिक्रिया दी है। अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को उन्होंने दुर्भावनापूर्ण करार देते हुए कहा कि वो इसी दुःखी और व्यथित हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर लिखा कि शालिनी तलवार पिछले 20 वर्षों से उनकी पत्नी/साथी रही हैं। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को ‘काफी घृणित’ बताया।

यो यो हनी सिंह ने पिछली बातों को याद करते हुए कहा कि उनके गानों के बोल को लेकर उनकी काफी आलोचना हुई, उनके स्वास्थ्य को लेकर अटकलें लगाई गईं और नेगेटिव मीडिया कवरेज किया गया, लेकिन उन्होंने किसी भी विवाद पर इससे पहले बयान जारी कर सफाई नहीं दी है। उन्होंने कहा कि इस बार वो जानबूझ कर चुप नहीं रह सकते क्योंकि अबकी आरोप उनके परिवार पर भी है – बुजुर्ग माता-पिता और छोटी बहन पर।

यो यो हनी सिंह ने कहा कि उनके परिवार के लोग कठिन समय में भी उनके साथ खड़े रहे हैं, और वो उनकी दुनिया हैं। उन्होंने पत्नी शालिनी तलवार के आरोपों को कुटिल और बदनाम करने वाला बताया। यो यो हनी सिंह ने कहा कि वो पिछले 15 वर्षों से इस मनोरंजन इंडस्ट्री के साथ जुड़े हुए हैं और इस अवधि में देश के कई कलाकारों व संगीतकारों के साथ काम किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि ये सभी लोग उनकी पत्नी के साथ उनके रिश्ते से वाकिफ हैं।

यो यो हनी सिंह ने अपने बयान में कहा, “पिछले एक दशक से भी अधिक समय से मेरी पत्नी मेरे क्रू का अहम हिस्सा रही हैं। मेरे बैठकों, शूट्स और कार्यक्रमों में भी वो साथ जाती रही हैं। मैं इन सारे आरोपों को नकारता हूँ, लेकिन इससे आगे कोई टिप्पणी नहीं करूँगा क्योंकि मामला न्यायालय के अधीन है। देश की न्यायिक व्यवस्था में मेरी पूरी आस्था है। मुझे यकीन है कि सच बाहर आएगा। अभी आरोप साबित नहीं हुए हैं।”

‘लव डोज’ और ‘ब्लू आइज’ जैसे गाने गा चुके हनी सिंह ने जानकारी दी कि न्यायलय ने उन्हें उनके ऊपर लगे आरोपों पर जवाब देने का मौका दिया है। साथ ही गायक ने अपने फैंस और जनता से अनुरोध किया है कि वो जब तक कोर्ट दोनों पक्षों को सुन कर किसी निर्णय पर नहीं पहुँचती, वो उनके बारे में कोई गलत राय न बनाएँ। फैंस के समर्थन का धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि ईमानदारी की जीत होगी।

बता दें कि शालिनी तलवार ने हाल में अपने पति और ससुराल वालों के ख़िलाफ़ घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज कराया था। तलवार का कहना है कि पिछले कुछ सालों में उनसे साथ कई बार मारपीट हुई। वह लगातार डर में जी रही थीं। शालिनी तलवार का आरोप है कि उनका पति कई अलग-अलग महिलाओं के साथ सेक्स करता है। उनका आरोप है कि एक बार उनके ससुर भी शराब की हालत में उनके कमरे में घुसे, वो भी तब जब वह कपड़े बदल रही थीं, इसके बाद वह छाती पर हाथ फेरने लगे।

डूँगरपुर का देव सोमनाथ मंदिर: 108 खम्भों पर टिकी 3 मंजिलें, संरचना ऐसी कि भूकंप भी बेअसर

भारत के मंदिरों की संरचना उनकी एक प्रमुख विशेषता मानी जाती है। हाल ही में ऑपइंडिया की मंदिरों की श्रृंखला में हमने होयसलेश्वर मंदिर के बारे में बताया था, जिसकी संरचना ही कुछ ऐसी थी कि उसके निर्माण में मशीनों के उपयोग की संभावना भी जताई जाती है। राजस्थान के डूँगरपुर में भी एक ऐसा शिव मंदिर स्थित है, जो 108 खम्भों पर टिका हुआ है और जिस पर भूकंप के झटकों का भी कोई असर नहीं होता है। हम बात कर रहे हैं देव सोमनाथ मंदिर की, जिसका नामकरण गाँव और वहाँ स्थित नदी के नाम पर हुआ है।

इतिहास

डूँगरपुर के उत्तर-पूर्व में 20 किमी दूर देव नामक गाँव में सोम नदी के किनारे स्थित होने के कारण ही मंदिर का नाम देव सोमनाथ पड़ा। मंदिर में प्राप्त शिलालेखों से यह जानकारी मिलती है कि इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी के दौरान राजा अमृतपाल के द्वारा कराया गया था। मंदिर में 14वीं शताब्दी के अस्पष्ट शिलालेख भी प्राप्त होते हैं, जिनसे यह संभावना व्यक्त की जाती है कि इस दौरान मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ होगा। वर्तमान में मंदिर भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन है।

मंदिर के गर्भगृह में दो शिवलिंग स्थापित हैं। दोनों ही शिवलिंग स्वयंभू हैं और इनके विषय में कोई भी इतिहास ज्ञात नहीं है। गर्भगृह में इन दो शिवलिंगों के अलावा अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ भी स्थापित की गई हैं, जिनका निर्माण पत्थरों की सहायता से किया गया है।

मंदिर की संरचना

देव सोमनाथ मंदिर के विषय में पुरातत्व विभाग के द्वारा प्रदान की गई जानकारी से यह ज्ञात होता है कि इस मंदिर को मालवा शैली के अनुसार बनाया गया है। योजन आकार में निर्मित इस मंदिर में गर्भगृह, अंतराल और सभा मंडप हैं और साथ ही मंदिर में प्रवेश के लिए 3 द्वार हैं। मंदिर की छत पर भी शानदार नक्काशी की गई है।

यह मंदिर तीन मंजिला है, जो 108 खम्भों पर टिका हुआ है। इन खम्भों का निर्माण चूने और मिट्टी के गारे से हुआ है। मंदिर की खासियत है कि इसे बनाने में उपयोग हुए पत्थरों को इन खम्भों से जोड़ने में किसी भी प्रकार के पदार्थ का उपयोग नहीं किया गया है। बल्कि ये पत्थर आपस में और इन खम्भों के साथ क्लैंप तकनीक के माध्यम से जुड़े हुए हैं। इस तकनीक से जुड़े होने का फायदा यह है कि न तो मंदिर के पत्थर और न ही खम्भों पर भूकंप का कोई असर होता है।

देव सोमनाथ मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण मात्र एक रात में ही हुआ था। साथ ही गर्भगृह में स्थापित दोनों शिवलिंग के विषय में भी यही स्थानीय मान्यता है कि ये दोनों शिवलिंग अपने आप प्रकट हुए थे। जिस प्रकार मंदिर की स्थापत्य कला है, उससे अंदाजा लगाया जाता है कि इसका निर्माण गुजरात के प्रसिद्द सोमपुरा शिल्पकारों ने किया था लेकिन इसके विषय में स्पष्ट साक्ष्यों का अभाव है।

कैसे पहुँचें?

डूँगरपुर पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी हवाईअड्डा उदयपुर में स्थित है, जो मंदिर से लगभग 128 (किलोमीटर) किमी की दूरी पर है। इसके आलावा अहमदाबाद के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से मंदिर की दूरी लगभग 200 किमी है।

डूँगरपुर रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग 30 किमी की दूरी पर है, जो देश के लगभग सभी बड़े शहरों से रेलमार्ग के माध्यम से जुड़ा हुआ है। राजस्थान, गुजरात और अन्य उत्तर भारतीय इलाकों से डूँगरपुर सड़क मार्ग से भी जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन बस सेवा का उपयोग करके आसानी से डूँगरपुर पहुँचा जा सकता है।

‘रेप-सेक्स को लेकर हिन्दू राष्ट्रवादी सबसे ज्यादा जुनूनी’: पूर्व कॉन्ग्रेसी सांसद शाहिद सिद्दीकी ने दिखाई हिन्दू घृणा, विदेशी लेखक का ट्वीट

खुद को इस्लामोफोबिया के विरुद्ध काम करने वाला एक्टिविस्ट बताने वाले ऑस्ट्रेलियाई लेखक सीजे वर्लमैन ने एक बार फिर से अपनी हिन्दू घृणा का प्रदर्शन किया है। उन्होंने ट्वीट किया, “दुनिया का कोई भी जाति-मजहब-राष्ट्रवादी समूह सेक्स और रेप को लेकर उतना जुनूनी नहीं है, जितने कि हिन्दू राष्ट्रवादी।” उनके इस ट्ववीट को राज्यसभा के पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी ने आगे बढ़ाया। उन्होंने इसे लाइक और रीट्वीट किया।

सीजे वर्लमैन का हिन्दू घृणा वाला ट्वीट, शाहिद सिद्दीकी ने आगे बढ़ाया

पाकिस्तान सहित कई देशों के मुस्लिमों ने सीजे वर्लमैन के इस ट्वीट का समर्थन किया। खुद को मानवाधिकार कार्यकर्ता बताने वाले मीर रसूल ने दावा किया कि हिन्दुओं के पुस्तकों में रेप के बारे में लिखा हुआ है। हालाँकि, कई लोगों ने उन्हें आईना भी दिखाया। लोगों ने उन्हें ऐसी कई घटनाएँ दिखाईं, जहाँ मदरसों में मौलवियों द्वारा रेप किया गया। साथ ही ऑस्ट्रेलिया में रेप की घटनाओं पर भी लोगों ने सवाल दागे।

वैसे, ये पहली बार नहीं है जब सीजे वर्लमैन ने इस तरह की हरकत की हो। कुछ ही हफ़्तों पहले सीजे वर्लमैन ने लिखा था, “मैं ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मैच में न्यूजीलैंड का समर्थन कर रहा हूँ। ऐसा इसीलिए, क्योंकि 50 करोड़ हिंदुत्व कट्टरपंथियों को मैं एक सेकेंड के लिए भी खुश नहीं देख सकता। उनके खुश होने से मैं असहज महसूस करता हूँ।” भारत-न्यूजीलैंड में होने वाले WTC फाइनल से पहले उनका ये ट्वीट आया था।

जहाँ तक शाहिद सिद्दीकी की बात है, हाल ही में वायरल हुए उनके एक वीडियो में वो कहते दिखे थे कि उनके जितने भी फंड्स थे, उनमें से एक-एक पैसा उन्होंने मदरसों, स्कूलों और कॉलेजों को दिया। 90 के दशक के अंत में वो कॉन्ग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हुआ करते थे। पेशे से पत्रकार 71 वर्षीय शाहिद सिद्दीकी अभी भी ‘नई दुनिया’ नाम की साप्ताहिक उर्दू पत्रिका के संपादक हैं। वो सपा-बसपा का भी हिस्सा रहे हैं।

अक्सर हिंदू घृणा से सने ट्वीट करने वाले और इस्लामी समर्थक सीजे वेरलेमैन के ऊपर शेखर गुप्ता की वेबसाइट द प्रिंट ने प्रोफाइल किया, उसे एक पत्रकार के रूप में घोषित किया। सच्चाई यह है कि सीजे वर्लमैन एक स्तंभकार है और जगह-जगह अपने लेख छपवाता है।

Navarasa के पोस्टर में कुरान, नेटफ्लिक्स बैन और बवाल: पहले भी दी थी कानून-व्यवस्था की धमकी

ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स अपने कंटेंट के चलते अक्सर विवादों में घिरा रहता है, लेकिन इस बार यह अपने शो के पोस्टर से ही मुस्लिमों के निशाने पर आ गया है। दरअसल ‘नवरस’ नाम के शो के पोस्टर पर कुरान की आयतें दिखाई गई हैं, जिनके चलते नेटफ्लिक्स को मुस्लिमों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यह पोस्टर दैनिक अखबार तांथी (Thanthi) में प्रकाशित हुआ है।

पोस्टर प्रकाशन के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में मुस्लिम नेटफ्लिक्स के खिलाफ अपशब्दों का उपयोग कर रहे हैं और उस पर कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। नेटफ्लिक्स के खिलाफ चलाए जा रहे इस कैम्पेन में इस्लामिक संगठन रजा एकेडमी सबसे आगे है, जो ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहा है।

रजा एकेडमी अपने कट्टरपंथी सोच एवं व्यवहार के लिए जाना जाता रहा है। इसी इस्लामिक संगठन ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करने के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों के खिलाफ फतवा जारी किया था। रजा एकेडमी ने ही धमकी दी थी कि अगर ‘मोहम्मद: द मैसेंजर ऑफ गॉड’ को बैन नहीं किया गया तो कानून-व्यवस्था खराब हो सकती है। इस फिल्म में इस्लाम के पैगम्बर मोहम्मद के जन्म से 13 साल तक के जीवन को दिखाया गया था।

अगस्त 2011 में इस संगठन से जुड़े लोगों ने मुंबई के आजाद मैदान में प्रदर्शन का आयोजन किया था और हिंसा फैलाई थी। रजा एकेडमी के अलावा कई अन्य मुस्लिम संगठनों ने नवरस के पोस्टर पर नाराजगी व्यक्त की है। मुस्लिमों ने सीधे तौर पर नेटफ्लिक्स को चेतावनी दी कि उसके द्वारा मजहबी भावनाओं के साथ खिलवाड़ न किया जाए। साथ ही कई यूजर्स ने अपशब्दों का भी उपयोग किया और नेटफ्लिक्स के लिए ‘हराम की पैदाइश’ और ‘हराम**’ जैसे शब्दों का उपयोग किया।

हाल के समय में कई बार यह देखने को मिला कि इस्लामिक कट्टरपंथियों की असहिष्णुता के कारण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में आ गई। इसी से बचने के लिए ओटीटी प्लेटफॉर्म और मनोरंजन जगत अक्सर ही सेल्फ सेंसरशिप कर लेता है। फिलहाल देखना होगा कि नेटफ्लिक्स किस तरह से इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देता है।