न्यूज 18 गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार तीनों पाकिस्तानी नागरिक नरोडा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने में सफल रहे। रिपोर्ट के अनुसार तीनों अहमदाबाद के कुबेरनगर इलाके में रह रहे थे। मेघानीनगर पुलिस स्टेशन में इस मामले में शिकायत दर्ज की गई है।
तीनों पाकिस्तानी नागरिकों के नाम महेश पर्पियानी, सुरेश पर्पियानी और हरेश पर्पियानी है। चुनाव अधिकारी चेतन गाँधी के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग को तीनों पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से भारत की नागरिकता लेने के सम्बन्ध में लिखित शिकायत मिली थी। शिकायत मिलने के बाद जाँच की गई जिससे पता चला कि तीनों ही भारतीय नागरिक नहीं हैं।
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने एंटीलिया के बाहर विस्फोटक मिलने के मामले और मनसुख हिरेन हत्याकांड में चार्जशीट दायर करने के लिए 30 दिनों का और समय माँगा है। एनआईए ने विशेष अदालत को बताया कि मामले में मनसुख हिरेन की हत्या के लिए आरोपितों को 45 लाख रुपए दिए गए थे।
Maharashtra: National Investigation Agency (NIA) seeks 30 more days to file chargesheet in Antilia bomb scare and Mansukh Hiren murder cases. NIA told the special court that the accused were paid Rs 45 lakhs to eliminate Mansukh Hiren after the Antilia bomb scare. pic.twitter.com/ypnI5quDOM
इससे पहले विशेष अदालत ने एनआईए को 9 जून को शपथ पत्र दाखिल करने के लिए दो महीने का समय दिया था। एनआईए ने विशेष अदालत को बताया कि इस मामले में फंडिंग किसने की थी, ये पता लगाए जाने की जरूरत है। एनआईए ने अदालत को ये भी बताया कि 150 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। एक टीम ने जाँच के लिए दिल्ली जाकर भी बयान दर्ज किए हैं।
इसके अलावा एंटीलिया विस्फोटक मामले में एनआईए ने दिल्ली तिहाड़ जेल से दो फोन भी अपने कब्जे में लिए हैं। यह फोन जेल में बंद इंडियन मुजाहिदीन के कथित प्रमुख तहसीन अख्तर के पास से ज़ब्त किए गए हैं। खुद अख्तर ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि दोनों फोन उसके ही हैं। हालाँकि टेलीग्राम से मैसेज भेजने की बात पर उसने इनकार किया है।
मनसुख हिरेन की हत्या के कुछ दिन बाद उनका शव मुंब्रा की खाड़ी में मिला था। हालाँकि तब इसे आत्महत्या कहा जा रहा था। लेकिन उनकी पत्नी ने कहा था कि उनके पति की हत्या की गई है। मनसुख हिरेन की पत्नी विमला हिरेन ने अपने पति की हत्या के मामले में वाजे को दोषी ठहराया था। वाजे के खिलाफ आईपीसी की धारा 285, 465, 473, 506(2), 120(बी) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। जिसके बाद मामले में सचिन वाजे समेत एक बाद एक कई गिरफ्तारियाँ हुईं।
मनसुख हिरेन हत्याकांड और एंटीलिया विस्फोटक मामले में एनआईए ने मुंबई पुलिस के कई पुलिस अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया है। जिनमें सचिन वाजे, रियाजुद्दीन काजी, सुनील माने और कॉन्स्टेबल विनायक शिंदे का नाम शामिल है। इन सभी पुलिस अधिकारियों को महाराष्ट्र पुलिस ने भी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इनके अलावा क्रिकेट सट्टेबाज नरेश गौर को भी गिरफ्तार किया गया है। यह सभी आरोपित फिलहाल ज्यूडिशियल कस्टडी में है। पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा समेत भी कुछ लोग गिरफ्तार किए गए थे।
गौरतलब है कि NIA ने पिछले दिनों बताया था कि उसे सीसीटीवी फुटेज मिला है, जिसमें हत्यारोपित चार मार्च को ठाणे के घोडबांदर रोड पर मनसुख के साथ देखे गए। आरोपित सतीश मुटकोरी और मनीष सोनी को पेश करते हुए एजेंसी ने उनकी हिरासत बढ़ाने की माँग की थी। एजेंसी ने कहा था कि 45 लाख रुपए के लेनदेन के साक्ष्य मिले हैं। आशंका है कि इन पैसों का इस्तेमाल हिरेन की हत्या के लिए किया गया, क्योंकि वह बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे का आदेश नहीं मान रहा था।
एनआईए ने यह भी बताया था कि इस मामले में गिरफ्तार पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने आरोपी संतोष शेलार, आनंद जाधव, सतीश और मनीष को फर्जी सिम कार्ड मुहैया कराए थे। इसके अलावा सतीश, मनीष, सतीश और आनंद हत्या के बाद छुपने के लिए नेपाल भी गए थे।
दिल्ली में आजादपुर फ्लाईओवर के ऊपर बनी मजार के संबंध में ओ न्यूज ने 02 अगस्त 2021 को वीडियो प्रकाशित किया था। इस वीडियो में आदर्श नगर के एसएचओ के द्वारा कथित तौर पर अवैध मजार के खिलाफ आवाज उठाने वाले हिंदू युवक को कानूनी कार्रवाई के लिए धमकाते हुए देखा गया था। बाद में उस युवक को पुलिस खींचकर गाड़ी में बैठाकर ले गई।
सोशल मीडिया पर मजार की तस्वीरों के वायरल होने के बाद यह आरोप लगाया गया कि सड़क पर इस मजार का निर्माण अवैध रूप से किया गया है। इसके बाद ओ न्यूज के पत्रकार मजार के विषय में जानने के लिए गए। मजार की देखरेख करने वाले सिकंदर ने दावा किया कि मजार 1950 के पहले से बनी हुई है और उसके बाप-दादा भी इसकी देखरेख करते थे।
सिकंदर ने बताया कि फ्लाईओवर के नीचे भी एक मजार है जहाँ पीर बाबा की कब्र है। फ्लाईओवर के ऊपर बनी मजार 1982-83 के दौरान बनी। जब पत्रकार ने कहा कि 1982 में यह फ्लाईओवर था ही नहीं तब सिकंदर ने दावा किया कि मजार तब बनी जब फ्लाईओवर का निर्माण शुरू हुआ था। सिकंदर के दावे के विपरीत फ्लाईओवर का संचालन 2009 में शुरू हुआ था और 1982 में इसका निर्माण शुरू भी नहीं हुआ था।
सड़क पर बनी इस मजार के कारण हमेशा ही ट्रैफिक जाम की समस्या रही। पत्रकार ने जब मजार का विरोध कर रहे हिंदू युवक विजय गड़ारिया से चर्चा की तो विजय ने बताया कि उन्होंने खुद इस मजार को मात्र 10-12 साल पहले ही देखा। विजय ने यह भी कहा कि फ्लाईओवर पर जमीन कब्जाने के बाद उस पर मजार का निर्माण कर दिया गया।
इस बात को लेकर विजय की सिकंदर से बहस हुई, जिस पर आदर्श नगर के एसएचओ सीपी भारद्वाज ने विजय को रोका और कहा कि अगर उसे कोई समस्या है तो वह कानूनी रास्ता अपनाए। भारद्वाज ने कहा कि ऐसी समस्याओं के निपटारे के लिए दिल्ली सरकार ने धार्मिक कमेटी का निर्माण किया है और उसे (विजय) को वहाँ आवेदन देना चाहिए।
विजय, एसएचओ की बात से असंतुष्ट दिखाई दिए और उनसे चाँदनी चौक में मंदिर पर की गई कार्रवाई के बारे में पूछा तब एसएचओ भारद्वाज भड़क गए और उन्होंने कानूनी एक्शन की धमकी देते हुए विजय को पकड़ा और एक अन्य पुलिसकर्मी को उन्हें थाने ले चलने के लिए कहा। साथ ही रिपोर्टर के साथ गए कैमरामैन को भी धक्का दे दिया गया।
इसके बाद एसएचओ को आईपीसी की कुछ धाराओं के अंतर्गत गिरफ्तार करने की बात कहते हुए सुना गया। जब रिपोर्टर ने उनसे इस एक्शन के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि किसी के साथ (सिकंदर के लिए) ऐसे पेश नहीं आना चाहिए। इसके बाद जब सिकंदर के पक्ष लेने के बारे में पूछा गया तो एसएचओ भारद्वाज ने रिपोर्टर को ही सलाह दे डाली कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों को सड़क पर नहीं उठाना चाहिए।
एक दूसरे हिंदू व्यक्ति ने पत्रकार से कहा कि वो हिंदू हैं इसलिए उनकी बात नहीं सुनी जा रही है अगर मुस्लिम यही बात कहते तो यही दिल्ली पुलिस हाथ जोड़कर उनकी बात सुनती और उनसे कहती कि वो वही करें जो उनका मन करे। विजय को एक दिन के लिए हिरासत में रखा गया। हालाँकि उन्होंने और कुछ अन्य हिंदू कार्यकर्ताओं ने यह कहा है कि वो मजार को हटाने के लिए कदम उठाएँगे और अगर कोर्ट अथवा प्रशासन द्वारा इसे हटाने का निर्णय नहीं लिया गया तो वो खुद इसे हटा देंगे।
सोशल मीडिया पर फ्लाईओवर के ऊपर बनाई गई मजार और एसएचओ के द्वारा किए गए बर्ताव की जमकर आलोचना हुई और एसएचओ के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग भी की गई।
Amazing .. a Mazar on believe it or not on Flyover and you need a religious committee to remove it .. @dtptraffic Have some shame when you refer it to @DelhiPolicehttps://t.co/rPaZXaN1Xh
हालाँकि यह पहली बार नहीं है जब किसी सरकारी जमीन पर या रोड के किनारे मजार बना दी गई हो। इसके पहले मुरादाबाद में ताहिर ने सुंदरलाल की जमीन पर यह कहते हुए मजार बना दी थी कि पीर बाबा ने उसे ऐसा करने के लिए सपने में कहा है।
झारखंड के धनबाद में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की हत्या के मामले में अब जाँच का जिम्मा सीबीआई ने ले लिया है। मंगलवार (03 अगस्त 2021) को झारखंड हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डॉ. रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने राज्य सरकार की अनुशंसा पर न्यायधीश की मौत की जाँच करने के लिए CBI को आदेशित किया।
सत्र न्यायाधीश आनंद की मौत के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एसआईटी को घटना की जाँच करने और 03 अगस्त तक उसकी रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि उसके द्वारा लगातार निगरानी की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जाँच एसआईटी ही करेगी या फिर किसी अन्य जाँच एजेंसी को इसमें शामिल किया जाएगा।
हालाँकि मंगलवार को ही सुनवाई के दौरान केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) ने कोर्ट को सूचना दी कि उसे झारखंड राज्य सरकार के द्वारा मामले की जाँच के संबंध में पत्र प्राप्त हुआ है। इसके बाद कोर्ट ने CBI को मामले की जाँच की अनुमति दे दी। इसके बाद CBI इस मामले में एफआईआर दर्ज करेगी और राज्य सरकार को मामले से सम्बंधित सभी दस्तावेज CBI को सौंपने होंगे। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को यह आदेशित किया है कि उसके द्वारा CBI का पूरा सहयोग किया जाए।
ज्ञात हो कि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद, धनबाद में सुबह की सैर के लिए निकले थे तब एक ऑटो रिक्शा ने उन्हें टक्कर मारी थी। घटना का वीडियो भी सामने आया था। इससे साफ था कि उन्हें जानबूझकर टक्कर मारी गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से उनके सिर पर किसी भारी चीज से वार करने का पता चला। यह बात भी सामने आई है कि जिस ऑटो से उन्हें टक्कर मारी गई वह पाथरडीह की सुगनी देवी का है। सुगनी के अनुसार उसका ऑटो चोरी हो गया था।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी से एक हफ्ते में रिपोर्ट माँगी थी। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद धनबाद के चर्चित रंजय हत्याकांड की सुनवाई कर रहे थे। कुछ दिन पहले ही उन्होंने यूपी के ईनामी शूटर अभिनव सिंह व अमन सिंह के गुंडे रवि ठाकुर व आनंद वर्मा की जमानत खारिज की थी। वह हजारीबाग के रहने वाले थे और 6 महीने पहले ही बोकारो से धनबाद आए थे।
राम मंदिर के पूरे परिसर का निर्माण भले ही 2025 तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए खुशी की बात ये है कि वो दिसंबर 2023 से ही राम मंदिर में पूजा शुरू कर सकेंगे। मंदिर परिसर में ही म्यूजियम, डिजिटल आर्काइव और एक रिसर्च सेंटर भी स्थापित किया जाएगा। म्यूजियम और आर्काइव के माध्य से लोग अयोध्या और राम मंदिर के इतिहास के बारे में जान सकेंगे। इसके अलावा हिंदू संस्कृति के बारे में भी बताया जाएगा।
Completion of entire Ram Temple complex in Ayodhya is expected by the year 2025; A museum, digital archives and a research centre also to come up in the temple complex: Sources
2025 तक भव्य राम मंदिर बनकर पूरा तैयार हो जाएगा। गर्भ गृह में भगवान राम अपने बाल रूप में विराजमान होंगे लेकिन पहली मंजिल पर राम का दरबार होगा। जिसमें श्रीराम के साथ माता सीता भी विराजमान रहेंगी। 15 सितम्बर तक राम मंदिर के प्लिंथ से पहले तक का काम पूरा हो जाएगा। पूरा परिसर 110 एकड़ का होगा। राम मंदिर परिसर का मुख्य मंदिर पूरी तरह से स्टोन का बनेगा।
राम मंदिर परिसर के निर्माण पर लगभग 1000 करोड़ रुपए खर्च होंगे। राम मंदिर ट्रस्ट को दान के रूप में अभी तक लगभग 3000 करोड़ रुपए प्राप्त हो चुके हैं। राम मंदिर निर्माण में स्टील का इस्तेमाल नहीं होगा। मंदिर में स्टील की जगह कॉपर का इस्तेमाल किया जाएगा। कार सेवक पुरम में तराशे गए पत्थरों में से 70 फीसदी का इस्तेमाल होगा। बाकी पत्थर राजस्थान के बंशी पहाड़पुर से मँगाए जाएँगे।
CM योगी आदित्यनाथ जाएँगे अयोध्या, PM मोदी कर सकते हैं संबोधित
बता दें कि गुरुवार (5 अगस्त, 2021) को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की शुरुआत हुए एक साल पूरा हो रहा है। इस मौके पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ अयोध्या का दौरा करेंगे। बताया जा रहा है कि इस इवेंट को पीएम नरेंद्र मोदी भी वर्चुअली संबोधित कर सकते हैं।
5 अगस्त, 2020 को पीएम मोदी ने किया था भूमि पूजन
बीते साल कोरोना पाबंदियों के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया था। अयोध्या में आयोजित सरकारी कार्यक्रम के तहत 100 से अधिक लोगों को पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ दिया जाएगा। इससे पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात में योजना के लाभार्थियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की थी।
टोक्यो ओलंपिक्स 2020 में ऑस्ट्रेलिया को हराकर सेमीफाइनल्स में एंट्री लेने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम पहले ही हर किसी के दिल में उतर चुकी थीं, लेकिन आज अर्जेंटीना से उनके मुकाबले के बाद जो मायूसी उनके चेहरों पर दिखी उसने सबको निराश कर दिया। ये मायूसी सिर्फ सेमीफाइनल में 2-1 से पिछड़ जाने की थी, क्योंकि उनकी कोशिशें तो ऐसी थी कि जिसने सभी का दिल जीत लिया।
59' Final 17 seconds and India have requested for a Penalty Corner.
मैच के शुरुआती 5 मिनट में ही भारतीय टीम ने अपना दबदबा कायम कर लिया था। सबसे पहले गुरजीत कौर ने पेनल्टी कॉनर्र को गोल में बदलकर भारतीय टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। हालाँकि मैच के दूसरे क्वार्टर में अर्जेंटीना ने वापसी की। अर्जेंटीना की कप्तान मारिया बैरियोन्यूवो ने 18वें मिनट में एक पेनल्टी को गोल किया और मुकाबला बराबरी पर पहुँच गया।
You win some, you lose some! But the performance was nonetheless awesome! ??
Though India lost to Argentina 1-2 in the semi-finals of Women's #Hockey, they will fight for #Bronze on 6th August, against Great Britain! ?
इसके बाद भारत को तीन पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन टीम को उसका फायदा नहीं हुआ। तीसरे क्वार्टर में मारिया बैरियोन्यूवो ने अर्जेंटीना को बढ़त दिलाने के लिए फिर एक और पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला। इसी गोल के साथ उन्होंने बढ़त बनाई और जो मैच शुरुआत में भारत के हिस्से नजर आ रहा था वह अंत तक पूरा पलट गया। इस मैच में भारतीय डिफेंडरों ने अच्छा खेला। अब आगे कास्य पदक के लिए टीम 6 अगस्त को मैच खेलेगी।
खेल में हार-जीत लगा रहा है, पर सबसे बड़ी बात है हारकर भी दिल जीतना आप सभी ने अपने खेल से करोड़ों देशवासियों का दिल जीता हैं..!!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुकाबले के बाद ट्वीट कर टीम के संघर्ष की सराहना की। उन्होंने ट्वीट किया, “एक चीज जिसे हम टोक्यो ओलंपिक में याद रखेंगे, वह है हमारी हॉकी टीमों का शानदार प्रदर्शन। आज हमारी महिला हॉकी टीम ने धैर्य के साथ खेला और शानदार कौशल दिखाया। टीम पर गर्व है। आगे के खेल और भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएँ।”
One of the things we will remember #Tokyo2020 for is the stupendous performance by our Hockey teams.
Today and through the Games, our Women’s Hockey team played with grit and showcased great skill. Proud of the team. Best of luck for the game ahead and for future endeavours.
भारत में इस्लामी पत्रकारिता की सबसे बड़ी वाहक के तौर पर अपनी पहचान स्थापित कर चुकीं राणा अयूब अब पाकिस्तान के काम आ रही हैं। उनके द्वारा परोसा गया प्रोपगेंडा पाकिस्तान की खुराक बन रहा है और इसी के बूते वह अब उन बुद्धिजीवियों को ट्रोल कर रहा है जो भारत के पक्ष में अपनी बात रखते हैं।
हाल में ऐसा मामला उस समय देखने को मिला जब माइकल रुबीन ने खुद का एक लेख अपने ट्वीट पर शेयर किया। इस ट्वीट के साथ उन्होंने वो हेडलाइन भी डाली जो उनके लेख का सार थी। उन्होंने लिखा, “कश्मीर पर भारत ने आलोचकों को गलत साबित कर दिया।” उनके इसी ट्वीट पर कई लोग आए जो विस्तृत लेख के लिए आभार व्यक्त करते दिखे। लेकिन तभी पाकिस्तान से यह चीज बर्दाश्त नहीं हुई।
माइकल के ट्वीट पर उनको ट्रोल करने के लिए पाकिस्तान वाणिज्य दूतावास जनरल वैंकूवर (कनाडा) ने उसे रीट्वीट किया और तर्कों के नाम पर जोड़ा राणा अयूब का एक पूरा लेख। ये लेख वाशिंगटन पोस्ट में 11 मार्च 2021 को प्रकाशित हुआ था। इसे शेयर करते हुए अकॉउंट से माइकल को कहा गया, “भारत के लोकतंत्र के लगातार पतन को नकारना असंभव है। आर्थिक विकास के बारे में कई कहानियाँ वास्तविकता को छुपा नहीं सकती है। ” अगले ट्वीट में इन्होंने पूछा कि आखिर उन नरसंहारों, युद्धों, अपराधों का क्या हुआ जो भारत ने कश्मीर में किए।
— Pakistan Consulate General Vancouver (@PakinVancouver) August 4, 2021
पाकिस्तान दूतावास के इस हैंडल पर पिछले कुछ समय में ऐसे कई ट्वीट शेयर किए गए हैं। किसी में भारत आतंकवाद जैसे शब्द का इस्तेमाल हैं तो किसी में बताया गया है कि भारत ने 5 अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को पाकिस्तान जाने से मना कर दिया है क्योंकि वह 5 अगस्त को ‘आजाद कश्मीर’ पर होने वाली असेंबली में भाग लेने वाले थे। लेकिन बावजूद इसके ये बात सोचने वाली नहीं है कि आखिर एक पाकिस्तानी दूतावास का हैंडल कश्मीर पर लेख लिखने वाले शख्स को ट्रोल कर रहा है, सोचने वाली बात यह है कि आखिर एक भारत की पत्रकार का लिखा प्रोपेगेंडा से भरा लेख पाकिस्तान के लिए कितना फिट बैठता है कि वो उसे ट्रोल करने के लिए इस्तेमाल करने लगते हैं।
क्या था राणा अयूब के लेख में
राणा अयूब ने यह लेख दिशा रवि को बेल मिलने के समय लिखा था। उसी दिशा रवि को जिस पर टूलकिट का मामला खुलने के दौरान इल्जाम लगे थे। इस आर्टिकल में अयूब ने एक जगह लिखा है, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काल में देशद्रोह के आरोप डराने-धमकाने का एक उपकरण बन गए हैं।” एक रिपोर्ट् का हवाला देते हुए अयूब ने कहा था कि 2014 में मोदी सरकार के सत्ता संभालने के बाद से 405 भारतीयों के खिलाफ राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों की आलोचना करने के लिए 96 प्रतिशत देशद्रोह के मामले दर्ज हुए।
इसके बाद वह उस फ्रीडम हाउस डेमोक्रेसी रिपोर्ट की वकालत करती दिखीं जिसमें भारत को आंशिक रूप से स्वतंत्र बताया गया था। साथ ही कश्मीर को लेकर भी कई बातें कही गई थी। अपने लेख के अंत में राणा ने लिखा था, “एक पत्रकार और एक मुसलमान के तौर पर इस देश के लिए मेरी उम्मीदें हर दिन कुचली जा रही हैं। लेकिन कई भारतीयों की तरह, जिन्होंने इस समावेशी बहुल राष्ट्र के सपने को संजोया है, मैं फ्रीडम हाउस की रिपोर्ट को एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में देखती हूँ…।”
पाकिस्तान को मिला भारतीय पत्रकारों का सहारा
मालूम हो कि यह पहली दफा नहीं हुआ है जब भारतीय प्रोपगेंडाबाजों ने पाकिस्तान को इस तरह उनके अनुकूल कंटेंट प्रदान किया हो। इससे पहले दिशा रवि की गिरफ्तारी मामले में ही भारतीय मीडिया गिरोह की रिपोर्टिंग को पाकिस्तान से हवा मिली थी। पीटीआई ने तब लिखा था,“मोदी/आरएसएस शासन में भारत अपने खिलाफ सभी आवाजों को चुप कराने में विश्वास रखता है… अब, उन्होंने दिशा रवि को भी ट्विटर टूलकिट मामले में हिरासत में ले लिया है।”
इसके अलावा पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने ‘मुस्लिम पत्रकार राणा अयूब’ की तारीफ ‘फासिस्ट मोदी सरकार का पर्दाफाश’ करने के लिए की थी। पकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने अपने आधिकारिक अकाउंट से लिखा था कि सूचना एवं प्रसारण में विशेष सहयोगी डॉक्टर फिरदौस आशिक अवान ने मोदी के फासिस्ट एजेंडा को बेनक़ाब करने वाली मुस्लिम महिला जर्नलिस्ट राणा अयूब की तारीफ की। डॉक्टर फिरदौस आशिक अवान ने लिखा था– “शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वालों को इतिहास के सुनहरे पन्नों में याद रखा जाता है। जो साहस भारतीय मुस्लिम जर्नलिस्ट ने अपनी ड्यूटी में दिखाया है वह तारीफ के लायक है।“
एनडीटीवी भी इस दौड़ में पीछे नहीं है। एनडीटीवी की कश्मीर रिपोर्टिंग को हमेशा से पाकिस्तान का समर्थन मिलता रहा है। कुछ समय पहले पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पार्टी ने एनडीटीवी की रिपोर्टिंग की क्लिप को शेयर करते हुए चैनल की बातों का समर्थन किया था। इस वीडियो क्लिप में एक पत्रकार श्रीनगर से रिपोर्ट करते हुए दावा करता दिखा था कि वो और उसकी टीम एक बूढ़े और अंधे व्यक्ति से मिले थे। उस व्यक्ति ने उनसे कहा कि नई दिल्ली में कहा जा रहा है कि कश्मीर में हर कोई जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने से खुश है। मगर कर्फ्यू हटने के बाद वहाँ के लोग बता देंगे कि वो कितने खुश हैं। पत्रकार का इशारा हिंसा की तरफ था, मगर माइक और कैमरा होते हुए भी उन्होंने उस बूढ़े शख्स को नहीं दिखाया। उन्होंने सिर्फ दावा किया कि एक व्यक्ति ने ऐसा कहा।
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने केरल के ISIS मॉड्यूल केस में जम्मू और कश्मीर एवं कर्नाटक में छापामारी की। बुधवार (04 अगस्त 2021) की सुबह शुरू हुई इस छापामारी में NIA, जम्मू और कश्मीर में 3 जगह पहुँची। वहीं कर्नाटक के बेंगलुरु और मंगलौर में भी सर्च ऑपरेशन किया गया। जाँच एजेंसी मैंगलोर में स्वर्गवासी कॉन्ग्रेस नेता बीएम इदिनब्बा के घर पहुँची जहाँ उनके बेटे और बहू के ISIS से कथित संबंधों के बारे में पूछताछ की।
जाँच एजेंसी ने जानकारी दी कि केरल के ISIS मॉड्यूल केस के सम्बन्ध में जम्मू और कश्मीर में 3 स्थानों पर छापामारी की गई है जिनमें बांदीपोरा में हार्डवेयर स्टोर के सेल्समैन का घर भी शामिल है। इसके अलावा कर्नाटक के बेंगलुरु में भी छापामारी की गई है।
This morning, NIA conducted raids at three locations in Jammu and Kashmir, including the residence of a hardware store salesman in Bandipora. The raids are still on: National Investigation Agency (NIA)
मंगलौर में स्वर्गवासी कॉन्ग्रेस नेता बीएम इदिनब्बा के घर पर भी NIA की टीम पहुँची। NIA की यह छापेमारी की कार्रवाई इदिनब्बा के बेटे बीएम बाशा के ISIS से कथित संबंधों के चलते की गई। इस मामले में बाशा के साथ उनकी पत्नी से भी पूछताछ जारी है। रियल इस्टेट का बिजनेस करने वाले बाशा के घर पर बेंगलुरु NIA की टीम द्वारा छापामारी की गई। बाशा के दो और बेटे भी हैं जो विदेश में रहते हैं।
NIA raids late Congress leader BM Idinabba’s residence in Mangaluru, Dakshina Kannada district in Karnataka. NIA is questioning his son and daughter-in-law in connection with an ISIS case. The raids are ongoing since morning: National Investigation Agency (NIA) pic.twitter.com/GkBMDjwcf7
बाशा के परिवार के सदस्यों के द्वारा ISIS से जुड़े यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करने के बाद वो NIA के शक के दायरे में आए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बाशा और उनके परिवार के सदस्यों के मन में कट्टरपंथी आतंकी संगठन ISIS के लिए सहानुभूति है और जाँच एजेंसी को बाशा के परिवार के द्वारा जम्मू और कश्मीर के आतंकी संगठन के एक सदस्य से संपर्क करने की खुफिया जानकारी भी मिली थी।
ज्ञात हो कि पिछले ही महीने NIA ने जम्मू और कश्मीर में ISIS मॉड्यूल और आतंकी फंडिंग के मामले में कई जगह सर्च ऑपरेशन किया था। इस दौरान श्रीनगर, अनंतनाग और बारामूला जिलों में एजेंसी द्वारा छापामारी कार्रवाई हुई। कार्रवाई के बाद ISIS से संबंधों के आरोप में 5 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था।
दिल्ली में 9 साल की एक बच्ची की संदेहास्पद हालत में मौत पर चौतरफा सियासत जारी है। इस बीच राहुल गाँधी बच्ची के परिजनों से मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर मुश्किलों में घिर गए हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने राहुल गाँधी के ट्वीट पर संज्ञान लिया है और ट्विटर से इसके खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के चेयरपर्सन प्रियंक कानूनगो ने ट्वीट करते हुए लिखा, “एक पीड़ित बच्ची के माता पिता की फ़ोटो ट्वीट कर उनकी पहचान उजागर कर POCSO ऐक्ट का उल्लंघन करने पर NCPCR ने संज्ञान लेते हुए ट्विटर इंडिया को नोटिस जारी कर राहुल गाँधी के ट्विटर हैंडल के विरुद्ध कार्यवाही करने एवं पोस्ट हटाने के लिए नोटिस जारी किया है।”
एक पीड़ित बच्ची के माता पिता की फ़ोटो ट्वीट कर उनकी पहचान उजागर कर #POCSO ऐक्ट का उल्लंघन करने पर @NCPCR_ ने संज्ञान लेते हुए @TwitterIndia को नोटिस जारी कर श्री राहुल गांधी के ट्विटर हैंडल के विरुद्ध कार्यवाही करने एवं पोस्ट हटाने के लिए नोटिस जारी किया है। pic.twitter.com/cVquij6jx3
— प्रियंक कानूनगो Priyank Kanoongo (@KanoongoPriyank) August 4, 2021
बता दें कि बीजेपी ने तस्वीरें साझा करने को कानून का उल्लंघन बताते हुए उनके खिलाफ NCPCR से संज्ञान लेने और कार्रवाई करने का निवेदन किया था। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गाँधी ने अपने ट्वीट में पीड़िता के परिजनों का चेहरा सार्वजनिक किया है, जो पोक्सो एक्ट की धारा 23 जुवेनाइल जस्टिस केयर के तहत चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 74 का उल्लंघन है। NCPCR इसका संज्ञान लें और राहुुल गाँधी को नोटिस जारी करे।
गौरतलब है कि दिल्ली के ओल्ड नांगल में 9 साल की एक बच्ची की संदेहास्पद हालत में मौत हो गई। आरोप है कि श्मशान घाट के भीतर रेप करने के बाद बच्ची को जला दिया गया। इस मामले में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। साथ ही बताया है कि पोस्टमॉर्टम से भी मौत की वजह से पर्दा नहीं उठ पाया है।
गिरफ्तार लोगों में से एक राधेश्याम को मीडिया रिपोर्टों में श्मशान घाट का पुजारी बताया जा रहा है। वहीं तीन अन्य आरोपित सलीम, लक्ष्मीनारायण और कुलदीप श्मशान घाट के कर्मचारी बताए जा रहे हैं। इन पर हत्या, बलात्कार और आपराधिक धमकी के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 376 और 506 के तहत यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम और SC/ ST एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पंजाब ऐंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सुरक्षा की गुहार लेकर पहुँचे एक जोड़े की निकाह के जाँच के आदेश दिए हैं। असल में इस मामले में बीवी की उम्र 19 साल तो शौहर की 67 साल है। इससे हैरान अदालत ने पलवल के एसपी को निकाह की परिस्थितियों की जाँच करने का निर्देश दिया है।
रिश्तेदारों से जान का खतरा बताते हुए इस जोड़े ने हाईकोर्ट में सुरक्षा देने के लिए याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट दोनों के बीच उम्र का अंतर देख हैरान रह गया औऱ स्थानीय पुलिस को मामले की जाँच कर हकीकत का पता लगाने के लिए एसआईटी गठित करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा, “यह एक चौंकाने वाला मामला है। याचिकाकर्ता में से एक 19 वर्ष की लड़की है और दूसरा 67 वर्ष का पुरुष है और कहा जाता है कि उन्होंने एक-दूसरे से शादी कर ली है।” कोर्ट ने जाँच का आदेश देते हुए कहा कि इस मामले में जबरन विवाह की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है।
“Can’t Rule Out Possibility Of Forced Marriage”: P&H High Court Directs Inquiry Into Marriage Of 19 Yr Old Girl With 67 Yr Old Man @ISparshUpadhyayhttps://t.co/xhzLZmGelR
जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के वकीलों की दलीलों से साफ नहीं हो पा रहा है कि पुरुष की यह पहली शादी है या उसने इससे पहले भी शादियाँ की हैं। या फिर किन हालातों में 19 साल की लड़की को 67 साल के बुजुर्ग व्यक्ति के साथ विवाह करना पड़ा है?
यह सब देखने के बाद हाई कोर्ट ने पलवल के पुलिस अधीक्षक को एसआईटी गठित कर इस बात की जाँच करने को कहा है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, टीम में महिला अधिकारी का भी होना आवश्यक है। पलवल पुलिस अधीक्षक के द्वारा गठित टीम 67 साल के व्यक्ति की न केवल वर्तमान, बल्कि पिछली जानकारियों के बारे में जाँच करेंगे। हाईकोर्ट ने पुलिस को लड़की को सुरक्षा मुहैया कराने के साथ ही एक सप्ताह के भीतर जाँच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही मामले की सुनवाई 10 अगस्त 2021 तक के लिए टाल दी।