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‘डायरेक्टर के साथ नहीं सोई, डिमांड नहीं पूरी की, इसलिए कई प्रोजेक्ट हाथ से निकल गए’: पूर्व पोर्न स्टार के साथ साक्षात्कार में नरगिस फाखरी

बॉलीवुड अभिनेत्री नरगिस फाखरी ने कहा है कि पूर्व एडल्ट स्टार ब्रिटनी डी ला मोरा को दिए इंटरव्यू में अपनी जिंदगी और करियर को लेकर कई खुलासे किए हैं। उन्होंने कहा, “मुझे हमेशा से पता था कि मुझे किस चीज की भूख है। मुझे शोहरत की भूख नहीं है। इसलिए कुछ भी करने के लिए सहमत नहीं हो सकती। मैं न्यूड नहीं हो सकती या फिर डायरेक्टर के साथ नहीं सो सकती। इसी कारण मुझसे कई प्रोजेक्ट छूट गए।”

उन्होंने पूर्व एडल्ट स्टार ब्रिटनी डी ला मोरा के यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में इस राज का खुलासा किया। एक्ट्रेस ने कहा, “यह काफी दिल तोड़ने वाला है, लेकिन मैं हाई स्टैंडर्ड पर टिके रहने की कोशिश कर रही हूँ।” नरगिस का कहना है कि जब उनके हाथ से कई प्रोजेक्ट्स छूटे थे तो उन्हें बहुत बुरा लगा था, लेकिन वह खुद से हमेशा यह कहती थीं अपनी वैल्यूज को बनाए रखने वाले लोग ही आखिर में जीतेंगे।

अभिनेत्री ने कहा, “मेरे लिए मेरी मॉरल वैल्यूज (नैतिक मूल्यों) से अधिक कुछ भी नहीं है। मैं हमेशा खुद के लिए ईमानदार रहती हूँ और किसी चीज के लिए मुझे किसी को मनाने की आवश्यकता नहीं है।” बॉलीवुड में अपने स्ट्रगल को लेकर उनका कहना है कि उन्होंने कुछ लोगों की डिमाँड पूरी नहीं की थी। इसीलिए उनके हाथ से कई काम चले गए।

‘मैं तेरा हीरो’ फिल्म की अभिनेत्री ने खुलासा किया कि उन्हें ‘प्लेबॉय मैगजीन’ में मॉडलिंग के लिए भी ऑफर मिला था। हालाँकि, बड़ी रकम के बावजूद उन्होंने उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि एजेंट न्यूड शूटिंग करने वाली लड़कियों को ढूंढ रहे थे, लेकिन वह इसे करने में सहज नहीं थीं।

गौरतलब है कि साल 2011 में रणबीर कपूर के साथ इम्तियाज अली की फिल्म ‘रॉकस्टार’ से बॉलीवुड में अपनी शुरुआत करने के बाद नरगिस फाखरी रातों-रात सनसनी बन गईं थीं। इसके अलावा उन्होंने ‘मद्रास कैफे’, ‘किक’, ‘हाउसफुल 3’, ‘तोरबाज’ समेत कई अन्य फिल्में भी की हैं। हालाँकि, फिलहाल वे बॉलीवुड की दुनिया से दूर अपने ब्वॉयफ्रेंड जस्टिन सैंटोस के साथ समय व्यतीत कर रही हैं। बता दें कि नरगिस अमेरिका में जन्मीं और पली-बढ़ी हैं।

‘बजरंग पुनिया ब्रॉन्ज मेडल जरूर जीतेंगे’ – टोक्यो ओलंपिक में सेमीफाइनल हार के बाद पिताजी की उम्मीद पक्की

टोक्यो ओलंपिक में भारत के स्टार रेसलर बजरंग पूनिया को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा। अज़रबैजान के हाजी एलियेव से हारने के बाद उनकी गोल्ड और सिल्वर मेडल की उम्मीदें समाप्त हो चुकी हैं लेकिन अभी भी वो ब्रॉन्ज मेडल जीत सकते हैं। उनके पिताजी ने कहा है कि खेल में हार-जीत लगी रहती है लेकिन बजरंग कल ब्रॉन्ज मेडल जरूर जीतेंगे।

ज्ञात हो कि बजरंग ने 65 किग्रा वेट कैटेगरी के क्वार्टर फाइनल में ईरान के मोर्टेजा घियासी को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। बजरंग शुरुआत में पिछड़ गए थे लेकिन वापसी करते हुए उन्होंने ईरानी पहलवान को चित कर दिया। इसके बाद बजरंग को विक्ट्री बाय फॉल रूल से विजेता घोषित किया गया। क्वार्टर फाइनल में मिली जीत के बाद उनका मुकाबला अजरबैजान के हाजी अलीयेव से तय हुआ।

हरियाणा के झज्जर के रहने वाले बजरंग शुरुआत से ही मेडल का दावेदार माना जा रहा था। सेमीफाइनल में जिन अज़रबैजान के हाजी एलियेव से बजरंग का मुकाबला हुआ, वह तीन बार के वर्ल्ड चैम्पियन हैं।

टोक्यो ओलंपिक में भारत अब तक 5 मेडल जीत चुका है। मीराबाई चानू ने वेटलिफ्टिंग में सिल्वर, पीवी सिंधु ने बैडमिंटन में ब्रॉन्ज और लवलिना बोरगोहेन ने बॉक्सिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। इसके अलावा गुरुवार (05 अगस्त 2021) को भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने ब्रॉन्ज और कुश्ती में रवि दहिया ने सिल्वर मेडल जीता। ओलंपिक खेलों में भारत को कुश्ती में अब तक 6 मेडल मिल चुके हैं।

’15+ साल की पत्नी से सेक्स रेप नहीं’: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज मोहम्मद असलम का फैसला, अली को मिली जमानत

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुरुवार (6 अगस्त 2021) को अप्राकृतिक सेक्स और दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने के एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि 15 वर्ष से अधिक उम्र की नाबालिग ‘पत्नी’ के साथ यौन संबंध को ‘बलात्कार’ नहीं माना जाएगा। इसी के साथ हाईकोर्ट ने आरोपित खुशाबे अली को जमानत दे दी।

दरअसल, नाबालिग लड़की ने अपने वयस्क पति खुशाबे अली के खिलाफ दहेज, मारपीट, आपराधिक धमकी और जबरन यौन संबंध बनाने के आरोप में मुरादाबाद के भोजपुर थाने में केस दर्ज कराया था। इसके बाद आरोपित ने जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने के आरोपित पति की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस मोहम्मद असलम ने यह फैसला सुनाया।

जस्टिस असलम ने 2013 में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 (बलात्कार के लिए सजा) में संशोधन जिक्र किया। जज ने कहा कि धारा 375 में लिखा है, “किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध या यौन क्रिया, जिसमें पत्नी पंद्रह वर्ष से कम उम्र की न हो, बलात्कार नहीं है।” मामले में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पति के वकील ने दावा किया कि पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने अली और उसके भाइयों द्वारा उसका यौन शोषण करने के आरोपों को नकार दिया था। इसके बाद जस्टिस मोहम्मद असलम ने आरोपित को जमानत दे दी।

‘अगर आप शादी करना चाहें तो हम आपकी मदद कर सकते हैं: पूर्व सीजेआई एसए बोबडे

इसी साल मार्च में देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने महाराष्ट्र सरकार के एक 23 वर्षीय कर्मचारी को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की थी। जबकि, उस पर 2014-15 में 16 साल की एक स्कूली छात्रा के साथ कथित तौर पर बलात्कार का आरोप था। इस मामले में आरोपित के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। मामले में पूर्व CJI ने आरोपित से पूछा था कि क्या वह पीड़िता से शादी करेगा? गौरतलब है कि आरोपित मोहित सुभाष चव्हाण महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिक प्रोडक्शन कंपनी में टेक्नीशियन था।

उस मामले में सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायधीश ने आरोपित से पूछा था, “क्या आप उससे शादी करेंगे?” कोर्ट ने कहा, “आपको नाबालिग लड़की को बहकाने और बलात्कार करने से पहले सोचना चाहिए था। आप जानते थे कि आप एक सरकारी कर्मचारी हैं।” जवाब में आरोपित ने कहा, “शुरू में मैं उससे शादी करना चाहता था, लेकिन उसने मना कर दिया। अब मैं शादी नहीं कर सकता, क्योंकि मैं पहले से ही शादीशुदा हूँ।” इस पर बोबडे ने आगे कहा, “अगर आप शादी करना चाहते हैं, तो हम आपकी मदद कर सकते हैं। यदि नहीं तो आप अपनी नौकरी खो देंगे और जेल जाएँगे।”

उल्लेखनीय है कि भारतीय कानून के मुताबिक बाल विवाह अपराध है और 18 वर्ष की आयु से पहले विवाह को कानूनी नहीं माना जाता है। इसलिए किसी नाबालिग के साथ शारीरिक संबंध बनाना दंडनीय अपराध माना गया है। हालाँकि, मुस्लिम पर्सनल लॉ में ऐसा नहीं है। इसमें शादी और यौन संबंधों की अनुमति दी गई है, बशर्ते लड़की का यौवन आरंभ (puberty) हो गया हो। कानूनी प्रावधानों के इन अंतर्विरोधों को अभी भी बदला जाना बाकी है।

24 घंटे में 303 आतंकियों का सफाया, 125 गंभीर रूप से घायल: तालिबानियों पर अफगानी सेना का कहर

अफगानिस्तान की सेना तालिबान के खिलाफ लगातार अपना अभियान मजबूत करती जा रही है। तालिबान के प्रभाव को खत्म करने और देश के विभिन्न इलाकों को कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकी संगठन से आजाद करने के इसी क्रम में अफगानी सेना ने बड़ी कार्रवाई की और पिछले 24 घंटों में 300 से अधिक तालिबानी लड़ाकों को मार गिराया। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी।

रक्षा मंत्रालय के द्वारा ट्वीट में यह जानकारी दी गई कि अफगानिस्तान नेशनल डिफेंस सिक्योरिटी फोर्स (ANDSF) के द्वारा की गई कार्रवाई में पिछले 24 घंटों में 303 तालिबानी आतंकी मारे गए हैं जबकि लगभग 125 आतंकी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। ट्वीट में जानकारी दी गई कि ANDSF का तालिबान विरोधी यह ऑपरेशन नांगरहार, लघमान, गजनी, पक्तिका, कंधार, हेरात, हेलमंड और कुंडुज समेत कई अन्य शहरों में चलाया गया।

अफगानिस्तान की न्यूज एजेंसी एरियाना न्यूज के मुताबिक हेरात में अफगानी सेना को सबसे बड़ी कामयाबी मिली, जहाँ एयर फोर्स की सहायता से शहर में घुसने की कोशिश कर रहे तालिबानी आतंकियों को मार गिराया गया। जानकारी के मुताबिक तालिबान विरोधी एयरस्ट्राइक में लगभग 100 आतंकी मारे गए हैं और दर्जनों घायल हुए हैं।

हेलमंड की राजधानी लश्करगाह और लघमान में भी अफगानिस्तान की सेना ने तालिबान को शहर से निकालने के लिए ऑपरेशन चलाया। लघमान के गवर्नर के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि अफगानी सेना ने कड़ी कार्रवाई करते हुए प्रांत के बदाख जिले को तालिबान के नियंत्रण से मुक्त करा लिया।

जुलाई का आखिर में भी ANDSF ने अफगान वायुसेना (AAF) के साथ एक संयुक्त अभियान चलाया, जिसमें 24 घंटों में ही 400 से अधिक तालिबान आतंकियों का सफाया हुआ। बता दें कि मध्य एशियाई देश अफगानिस्तान की सेना जुलाई 31, 2021 से तालिबान के ठिकानों पर लगातार हमले कर रही है, जिससे सैकड़ों आतंकी मारे गए। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर गोला-बारूद को नष्ट किया गया। अफगान रक्षा मंत्रालय ने ही इस कार्रवाई की पुष्टि की थी। जानकारी दी गई थी कि इस ऑपरेशन में कुल 455 आतंकवादी मारे गए, जबकि 232 अन्य घायल हुए।

‘माता की कृपा से मिला ब्रॉन्ज’: कनक दुर्गा मंदिर पहुँच पीवी सिंधु ने माँगा 2024 ओलंपिक में गोल्ड का आशीर्वाद

टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु दो ओलंपिक खेलों में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उन्होंने साल 2016 में रियो में आयोजित ओलंपिक खेलों में भी सिल्वर मेडल जीता था। टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल के लिए खेले गए मुकाबले में उन्होंने चीन की ही बिंगजिआओ को 21-13, 21-15 से हराया।

अपनी इस ऐतिहासिक जीत के बाद शुक्रवार (06 अगस्त 2021) को सिंधु विजयवाड़ा के कनक दुर्गा मंदिर गई जहाँ उन्होंने 2024 में होने वाले ओलंपिक में गोल्ड मेडल के लिए प्रार्थना की।

मंदिर पहुँचने पर सिंधु का ‘पूर्ण कुंभ स्वागत‘ किया गया जो वहाँ की परंपरागत स्वागत प्रथा है। मंदिर के कार्यकारी अधिकारी भ्रमरम्बा ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच सिंधु को उपहार स्वरूप माता कनक दुर्गा की तस्वीर, प्रसादम और सिल्क के वस्त्र प्रदान किए। मंदिर में दर्शन करने के बाद उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य 2024 में गोल्ड मेडल जीतना है उन्होंने माता से प्रार्थना की है ताकि वो अगली बार देश के लिए गोल्ड मेडल जीत सकें। सिंधु ने यह भी बताया कि टोक्यो जाने से पहले उन्होंने माँ दुर्गा के दर्शन किए थे और उन्हीं के आशीर्वाद से ब्रॉन्ज मेडल जीता।

इससे पहले देश के लिए गौरवशाली विजय प्राप्त करने के बाद सिंधु अपने घर पहुँची जहाँ परिवार ने उनका पारंपरिक रूप से स्वागत किया।

मेडल जीतने के बाद जब राज्य सरकार ने विजयवाड़ा में सिंधु का स्वागत किया था तो उन्होंने कहा था, “मुझे आज बहुत खुशी हो रही है। मैं अपने परिवार का आभार प्रकट करती हूँ क्योंकि वो हमेशा से साथ रहे। वो खुद भी बॉलीबॉल के खिलाड़ी रह चुके हैं।”

नाइजीरिया: फुलानी मुस्लिम आतंकियों ने 22 किसानों की हत्या की, 134 घरों को जलाया, कई हेक्टेयर फसलों को किया नष्ट

अफ्रीकी देश नाइजीरिया में मुस्लिम आतंकी संगठन फुलानी द्वारा 22 निर्दोष किसानों की हत्या कर दी गई और 134 घरों को जला दिया गया है। स्थानीय पुलिस ने बताया कि यह घटना 3 अगस्त 2021 को दक्षिणी कडूना के चार गाँवों में हुई। सशस्त्र हमलावरों ने गाँवों में घुसकर खेत में पक कर तैयार हो चुकी फसलों को भी नष्ट कर दिया।

कडुना स्टेट पुलिस के कमांड के प्रवक्ता (एएसपी) मोहम्मद जलिगे ने मंगलवार (3 अगस्त 2021) दोपहर कडुना में द एपोच टाइम्स को बताया, “ये हमले संभवत: पड़ोसी पठारी राज्य बासा एलजीए (स्थानीय सरकार का क्षेत्र) में हुई हिंसा के कारण हो सकते हैं।” पुलिस अधिकारी ने हालात के नियंत्रण में होने का दावा करते हुए कहा कि उन्होंने पड़ोसी राज्य में अपने समकक्ष बासा एलजीए में घटित घटनाक्रम के बारे में जानकारी माँगी है, ताकि कडुना में हुई वारदात को समझा जा सके।

इंटरनेशनल कमिटी ऑन नाइजीरिया (ICON) के सह-संस्थापक काइल एब्स ने कहा, “कडुना और पठारी राज्य दोनों में हुआ ये हमला कोई संयोग नहीं है, बल्कि यह टारगेटेड अटैक है और फुलानी आतंकियों का यह कोई पहला हमला भी नहीं है।” एब्स का कहना है कि हाल के दिनों, हफ्तों और महीनों में हर गाँव को निशाना बनाया गया है और सरकार को समझना होगा कि यह व्यवस्थित तरीके से किया गया हमला है। ये लुटेरे न केवल घरों, समुदायों और फसलों को नष्ट कर रहे हैं, बल्कि बड़ी संख्या में हत्याएँ भी कर रहे हैं।

पठारी राज्य बासा एलजीए में मियांगो जिले के इरिगवे लोगों की पहाड़ी सीमा चवई चीफडम के साथ लगती है। यहाँ के लोगों को बीते 3 दिनों में सिलसिलेवार घातक हमले झेलने पड़े हैं।

दक्षिणी कडुना पीपुल्स यूनियन (SOKAPU) के प्रेसीडेंट जोनाथन असके ने ‘द एपोच टाइम्स’ को बताया कि सौकड़ों की संख्या में आए हमलावरों ने घरों और फसलों को जलाकर नष्ट कर दिया। इस वारदात में 27 लोग मारे गए हैं। उन्होंने कहा, “दक्षिणी कडुना में ईसाई आबादी को टारगेट बनाकर उनका नरसंहार किया जा रहा है। इसकी वजह उनका धर्म परिवर्तन कराना, उन्हें उनकी जमीनों से बेदखल करना और डराना है।”

असके ने कहा, “बीते 6 सालों में किगाम और उन्गुवान मगजी जैसे कई गाँवों में कम से कम तीन बार हमला किया गया और लोगों की हत्याएँ की गई। यहाँ की सामूहिक कब्रें जो मैं कह रहा हूँ, उसकी गवाह हैं। यहाँ एक भी चर्च या स्कूल नहीं बचा है। बावजूद इसके इतने सालों में एक को भी नहीं पकड़ा गया।”

उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कडूना की राज्य सरकार और केंद्र सरकार अभी भी आँखें मूँदे बैठी है और पश्चिमी मीडिया को हमारा जीवन खबर के लायक नहीं लगता है।”

पीड़ित की कहानी

मुस्लिम आतंकियों के हमले में घायल उन्गुवान मगजी के मार्कस जोसेफ अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने एपोच टाइम्स को बताया कि भाग्य की वजह से उनकी जान बच गई। पीड़ित ने कहा, “हमें जानकारी मिली थी कि हमलावर पठारी राज्य के बासा एलजीए के रिकवे से भागकर चवाई चीफडोम की ओर जा रहे थे। हमारे पास स्थानीय रूप से बनाई गई डेन गन, माचे, भाले और पत्थरों के अलावा कोई हथियार नहीं हैं।”

मार्कस ने कहा, “हम उन पर हमले के लिए रात भर घात लगाकर बैठे रहे और सुबह करीब 3 बजे सबसे पहले भारी संख्या में उनके मवेशी आए। इसके बाद हमने गोलियों की आवाज गूँज सुनी तो लगा कि वो गायों के झुंड में छिप कर आए हैं। वे हमारे गाँव तक पहुँच चुके थे। हमने जवाबी फायरिंग की और दोबारा से गन लोड करने लगा इतने में दो गोलियाँ मेरी जाँघ पर लगी और मेरी हड्डियाँ टूट गईं।

SOKAPU के प्रेसीडेंट जोनाथन असके के अनुसार, मार्कस के गाँव उन्गुवान मगजी में पाँच लोग मारे गए हैं और एक व्यक्ति लापता है। 76 घरों को जला दिया गया था और लगभग 20 हेक्टेयर फसलों को नष्ट कर दिया गया। किकोबा-सामा गाँव में छह लोग मारे गए और 45 घर जला दिए गए। इसके अलावा 16 हेक्टेयर फसलों को तबाह कर दिया गया। वहीं, किगाम गाँव में पाँच लोगों की हत्या कर दी गई। किशिशो गाँव में छह मारे गए और 23 हेक्टेयर कृषि भूमि नष्ट कर दी गई। जबकि, किशोहो गाँव में कम से कम 90 घर जल गए।

नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर एक फुलानी नेता ने द एपोच टाइम्स को बताया, “फुलानी चरवाहे दक्षिणी कडुना राज्य के सभी ईसाई गाँवों पर बदले की भावना से हमले कर रहे थे। वे भूल गए कि वे भाई और बहनों के रूप में उनके साथ रहते आए हैं, क्योंकि हम में से अधिकाँश का जन्म और पालन-पोषण उनके बीच हुआ था।”

योगी तो आएँगे ही… मुनव्वर राना को विदा करने मुझे जाना पड़ेगा: UP के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने विवादित शायर मुनव्वर राना के प्रदेश छोड़ने वाले बयान पर कहा है कि उन्हें बाहर जाने की तैयारी कर लेनी चाहिए, क्योंकि एक बार फिर से बीजेपी की सरकार बनेगी। शर्मा ने कहा, “योगी जी तो आएँगे ही आएँगे और अगर कोई बाहर जाने की घोषणा करेगा तो उसको जाना ही पड़ेगा।”

आज तक के कार्यक्रम पंचायत यूपी में दिनेश शर्मा ने कहा, “मुनव्वर राणा हमारे बुजुर्ग हैं। उन्होंने माँ पर अच्छी कविताएँ भी कही हैं। मुझे अफसोस होगा, क्योंकि उत्तर प्रदेश में चुनाव के बाद जब वो बाहर जा रहे होंगे तो उन्हें विदाई देने के लिए मुझे जाना होगा। क्योंकि मैं उनका (मुनव्वर राना) सम्मान करता हूँ। योगी जी आएँगे ही आएँगे और अगर कोई घोषणा करेगा बाहर जाने की तो उसे जाना ही होगा।”

शर्मा ने आगे कहा, “मैं उनकी विदाई नहीं करना चाहता हूँ, मैं तो चाहता हूँ कि वो लखनऊ में रहें। लेकिन अगर वो खुद से कोई घोषणा करते हैं तो उसका सम्मान करता हूँ। वो जो माँ पर कविता सुनाते हैं तो उसे भी मैं सुनता हूँ। अगर किसी के बहकावे में आकर वो ऐसा बोल रहे हैं तो उसका सम्मान तो करना पड़ेगा।”

मुनव्वर राना के बयानबाजी पर उप मुख्यमंत्री ने कहा, “लोग छद्म रूप में प्रचार कर रहे हैं। अगर हम लखनऊ की बात करें तो हम 110 वार्ड में से 106 में चुनाव जीते। मैं महापौर बना। खास बात यह है कि इसमें कई मुस्लिम बाहुल्य हैं। राजनाथ सिंह भी यहीं से चुनाव जीतकर आए हैं, क्योंकि पार्टी ने कभी हिंदू और मुस्लिम के आधार पर काम ही नहीं किया।”

भाजपा नेता ने कहा कि जो लोग नहीं चाहते हैं कि मुस्लिम समुदाय पढ़े, जो लोग चाहते हैं कि मुस्लिम गरीब रहे, दर्जी का ही काम करता रहे या पंचर ही बनाता रहे, उन्हीं लोगों को भरोसे में कमी नजर आती है। सपा, बसपा और कॉन्ग्रेस हमेशा से यही करती आई हैं। जबकि, बीजेपी ने मदरसों की शिक्षा का आधुनिकीकरण किया, उसे राष्ट्रीय शिक्षा में शामिल करने की कोशिश की ताकि मुस्लिमों को भी बराबरी का दर्जा मिले और वो भी अच्छी जिंदगी जिएँ। अगर हमारी सोच नकारात्मक होती तो हम ये सकारात्मक पहले क्यों करते?

शर्मा ने आगे कहा, “हमने ये सब इसलिए किया क्योंकि हम उत्तर प्रदेश को जातिवाद औऱ सम्प्रदायवाद से ऊपर उठाकर राष्ट्रवाद की ओर ले जाना चाहते हैं। अगर हम भारतीय संस्कृति और परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखने की कोशिश करते हैं तो लोग उसे साम्प्रदायिक कहते हैं। कहाँ से हम साम्प्रादायिक हैं?”

गौरतलब है कि मुनव्वर राना ने 17 जुलाई को कहा था, ”अगर औवेसी की मदद से यूपी में योगी आदित्यनाथ दोबारा मुख्यमंत्री बने तो मैं प्रदेश छोड़कर चला जाऊँगा। ये भी मान लूँगा कि ये राज्य मुसलमानों के रहने लायक नहीं है।” शायर ने मीडिया में कहा था कि बीजेपी और ओवैसी दोनों ऐसे पहलवान हैं जो सिर्फ जनता को और अन्य सियासी दलों को दिखाने के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन मामला कुछ और ही है। 

अब हॉकी के जादूगर ध्यानचंद के नाम होगा खेल रत्न: PM मोदी का ऐलान, राजीव गाँधी का नाम हटा

केंद्र की मोदी सरकार ने शुक्रवार (6 अगस्त 2021) को खेल से जुड़ा बड़ा फैसला लिया। खेल रत्न पुरस्कार अब मेजर ध्यानचंद के नाम पर दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा की है। उन्होंने बताया है कि इसके लिए देश भर से नागरिकों का आग्रह मिला है। खेल रत्न अब तक पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गॉंधी के नाम पर था।

प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा है, “मेजर ध्यानचंद के नाम पर खेल रत्न पुरस्कार का नाम रखने के लिए देशभर से नागरिकों का अनुरोध मिले हैं। मैं उनके विचारों के लिए उनका धन्यवाद करता हूँ। उनकी भावना का सम्मान करते हुए, खेल रत्न पुरस्कार को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कहा जाएगा! जय हिंद!”

पीएम ने आगे कहा, “ओलंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रयासों से हम सभी अभिभूत हैं। विशेषकर हॉकी में हमारे बेटे-बेटियों ने जो इच्छाशक्ति दिखाई है, जीत के प्रति जो ललक दिखाई है, वो वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि ध्यानचंद भारत के पहले खिलाड़ी थे, जो देश के लिए सम्मान और गर्व लाए। देश में खेल का सर्वोच्च पुरस्कार उनके नाम पर रखा जाना ही उचित है। गौरतलब है कि मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को प्रयागराज में हुआ था। भारत में यह दिन राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्हें हॉकी का जादूगर कहा जाता है।

राजीव गाँधी खेल रत्न भारत में खेल के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है। 1992 में इसकी शुरुआत की गई थी। पहला खेल रत्न ग्रैंड मास्टर विश्वनाथन आनंद को मिला था। अब तक 45 लोगों को ये पुरस्कार मिल चुका है। इनमें तीन हॉकी खिलाड़ी भी हैं। इनके नाम हैं- धनराज पिल्लै, सरदार सिंह और रानी रामपाल।

नए दलदल में ‘हाथी’, विप्रों को साधने में बिदके बसपा के मुस्लिम नेता: क्या मायावती के लिए फिर से शंख बजाएँगे ‘ब्राह्मण’

यह बता पाना कठिन है कि उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रबुद्ध वर्ग विचार गोष्ठी के नाम पर ब्राह्मण सम्मेलन करवा रही है कि ब्राह्मण सम्मेलन के नाम पर प्रबुद्ध वर्ग विचार गोष्ठी। पहले सम्मेलन को ब्राह्मण सम्मेलन का नाम दिया गया और बताया गया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्र ब्राह्मणों के इन सम्मेलनों का आयोजन कर रहे हैं। बाद में उसे प्रबुद्ध वर्ग विचार गोष्ठी का नाम दिया गया। इसलिए यह भ्रम बना कि दल क्या करना चाहता है। हाल ही में अलीगढ़ में हुई गोष्ठी के बाद वहाँ दल के मुस्लिम नेता नाराज़ हो गए हैं। इन मुस्लिम नेताओं का कहना है कि गोष्ठी के लिए छपवाए गए बैनर और होर्डिंग्स में मुस्लिम नेताओं को नहीं रखा गया। नाराजगी इसलिए भी है कि इन बैनर में शहर के मेयर मोहम्मद फुरकान को भी जगह नहीं मिली।

बसपा के मुस्लिम नेताओं का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व द्वारा दल के कार्यक्रमों में मुस्लिम समाज के नेताओं की अनदेखी की जा रही है और यदि ऐसा होता रहा तो यह दल के लिए घातक होगा। इन नेताओं का मानना है कि कार्यक्रम के लिए बने बैनरों और अखबारों में छपे विज्ञापनों में कम से कम मेयर का नाम और चेहरा लगाया जाना चाहिए था। नेताओं ने बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती को आगाह किया कि ऐसा करना दल के हित में नहीं है। एक स्थानीय नेता तो यहाँ तक प्रश्न उठाया है कि क्या मुस्लिम नेता प्रबुद्ध नहीं हो सकते? यह प्रश्न काफी हद तक सही है। आखिर बहुजन समाज का प्रतिनिधित्व करते हुए उसे समाज में उचित स्थान दिलाने का दावा करने वाला दल यदि यह मानने लगे कि प्रबुद्ध वर्ग में केवल ब्राह्मणों को स्थान मिलना चाहिए तो उसके भीतर का वैचारिक भ्रम जनता को दिखेगा।

मुस्लिम नेताओं की ऐसी प्रतिक्रिया के पीछे क्या केवल यही कारण है कि इन गोष्ठियों, बैनर और होर्डिंग्स पर उन्हें स्थान नहीं दिया जा रहा या यह असंतोष इससे कहीं आगे की बात है? उत्तर प्रदेश में बसपा की ओर से ब्राह्मणों को खुश रखने और साथ लेकर चलने की कोशिश बहुत समय के अंतराल के बाद ही सही, एक बार फिर से आरंभ हो गई है। सतीश चंद्र मिश्र को आगे रखकर दल अलग-अलग तरीकों से प्रदेश के ब्राह्मणों के साथ संवाद स्थापित करने की कोशिश में जुट गया है। अपने इस प्रयास के बावजूद दल की यह समस्या है कि वह किसी भी मंच पर ब्राह्मणों के साथ अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को रखने का खतरा मोल नहीं ले सकता। यही कारण है कि प्रबुद्ध वर्ग विचार गोष्ठी में मंच पर मुस्लिम नेताओं को जगह नहीं मिल रही है। इस विषय पर दल के वरिष्ठ मुस्लिम नेता तो चुप रह सकते हैं पर कम अनुभवी और स्थानीय नेताओं को बोलने से रोक पाना चुनौती होगी।

बहुजन समाज पार्टी एक बार पहले भी ब्राह्मणों को सफलतापूर्वक अपने साथ लाने में कामयाब हुई थी। दल उसी सफलता को फिर से दोहराना चाहता है, बस प्रश्न यह है कि ऐसा करना उसके लिए कितना आसान या मुश्किल होगा? प्रदेश के ब्राह्मण इससे पहले जब दल के पक्ष में थे तब और आज की राजनीति में बड़ा अंतर है। तब से अब तक प्रदेश की राजनीति में जातिगत समीकरणों में काफी उथल-पुथल हुई है। 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में भी यह देखा जा चुका है। वैसे भी जब बसपा की सरकार थी उस समय ब्राह्मणों को कुछ ख़ास मिला नहीं था। उल्टा तत्कालीन प्रशासन का रवैया ब्राह्मणों के लिए कुछ सुखद नहीं रहा था। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि इस बार ब्राह्मण बसपा के पक्ष में खड़े होने के लिए कितने उत्सुक होंगे?

प्रश्न यह भी उठता है कि उसी सफलता को दोहराने की कोशिशों के दौरान दल के लिए अपने मुस्लिम वोट की रक्षा कर पाना संभव हो सकेगा? यह प्रश्न इसलिए भी उठेगा क्योंकि हाल में संपन्न हुए अलग-अलग चुनावों में मुस्लिम वोट के पैटर्न में बड़ा बदलाव आया है। यह माना जाने लगा है कि मुसलमान अपना वोट उसी दल को देंगे जो भाजपा को हराने की क्षमता रखता हो। उत्तर प्रदेश में भी मुस्लिम वोट बैंक यदि उस दल के साथ रहेगा जो भाजपा को हराने की क्षमता रखता हो तो बहुजन समाज पार्टी का मुस्लिम मतदाता क्या उसके साथ ही रहेगा? यह प्रश्न तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब ब्राह्मणों को साथ लेकर चलने के प्रयास में बसपा अभी से मुस्लिम नेताओं को नाराज़ करने का जोखिम उठा रहा है।

’48 घंटे में जमा करिए ₹3030757′: टैक्स छूट माँगने पर रजनीकांत के अभिनेता दामाद धनुष को हाईकोर्ट ने फटकारा

लग्जरी कार रॉल्स रॉयस से जुड़े मामले को लेकर हाईकोर्ट ने दक्षिण के एक और स्टार को फटकार लगाई है। रजनीकांत के दामाद और अभिनेता धनुष ने ब्रिटेन से कार के आयात पर एंट्री टैक्स में छूट माँगते हुए मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने इस संबंध में 2015 में याचिका दायर की थी, जिसे निरस्त करने से इनकार करते हुए अदालत ने 48 घंटे के भीतर टैक्स का बकाया 30,30,757 रुपए जमा कराने के निर्देश दिए। इससे पहले साउथ के ही अभिनेता विजय को फटकार लगाते हुए अदालत ने एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया था।

हाईकोर्ट ने धनुष को फटकारते हुए कहा कि 2018 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले के निपटारे के बाद भी अभी तक टैक्‍स का भुगतान नहीं किया गया है। इसके बाद उनके वकील ने अदालत को बताया कि वे पहले ही 50 फीसदी टैक्स दे चुके हैं और बकाया भुगतान भी 9 अगस्त तक कर देंगे।

कोर्ट ने कहा कि ‘अमीर, संपन्न और प्रतिष्ठित व्यक्तियों’ द्वारा दूसरे देशों से गाड़ियाँ आयात करने के बाद उसे तमिलनाडु की सड़कों बिना एंट्री टैक्स भरे चलाया जाता है। एंट्री टैक्स भरने से मना करने की एक परंपरा बन चुकी है। इससे राज्य के राजस्व को खासा नुकसान झेलना पड़ता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम ने कहा कि ये लोग इम्पोर्टेड लग्जरी कार में टैक्स छूट की माँग करते हैं, जबकि आम आदमी साबुन खरीदने पर भी टैक्स भरता है। इसके साथ ही कोर्ट ने अभिनेता धनुष के वकील को भी कड़ी फटकार लगाई। जस्टिस सुब्रमण्यम ने कहा, “फिल्म अभिनेता तो हेलीकॉप्टर भी खरीद सकते हैं, लेकिन इसके लिए टैक्स भरना पड़ेगा। आम आदमी पेट्रोल की कीमतें बढ़ने के बाद भी टैक्स भर रहा है, फिर आपको ऐसी दिक्कतें क्यों हो रही हैं।” अपने एफिडेविड में धनुष ने अपने प्रोफेशन का खुलासा नहीं किया था, जिसको लेकर कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए इसका कारण पूछा।

अभिनेता विजय ने भी माँगी थी छूट

इससे पहले रॉल्स रॉयस को इम्पोर्ट करने में लगने वाले एंट्री टैक्स पर छूट माँगने के कारण अभिनेता विजय को मद्रास हाईकोर्ट कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने 13 जुलाई 2021 को एक्टर विजय की याचिका को खारिज कर​ दिया था। इसके साथ ही उन पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया था।