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बीमार सपा सांसद आजम खान को कोर्ट का तगड़ा झटका, जल्द टूट सकता है जौहर यूनिवर्सिटी का गेट

समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान को जौहर यूनिवर्सिटी के मामले में तगड़ा झटका लगा है। रामपुर जिला जज ने आजम खान की अपील को खारिज करते हुए जौहर यूनिवर्सिटी के गेट को गिराने के आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट द्वारा अर्जी खारिज किए जाने के बाद अब यूनिवर्सिटी का गेट गिराया जाएगा। हालाँकि, कोर्ट ने जुर्माना की राशि को लेकर राहत दी है। जुर्माने की राशि सवा तीन करोड़ रुपए से घटाकर 1.63 करोड़ रुपए कर दी है।

इस मामले में बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसके बाद एसडीएम सदर की कोर्ट में वाद दर्ज किया गया था। एसडीएम सदर पीवी तिवारी ने गेट को तोड़ने का आदेश दिया था। वहीं, एसडीएम सदर की कोर्ट के आदेश के खिलाफ सपा सांसद आजम खान ने जिला रामपुर की कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

दो सालों तक मुकदमा चलने के बाद सोमवार (2 अगस्त 2021) को जिला सत्र न्यायाधीश कोर्ट ने आजम खान की जौहर विश्वविद्यालय गेट संबंधित अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने तत्कालीन एसडीएम पीपी तिवारी के गेट के गिराने संबंधित आदेश को मान्य रखा है। 

इस संबंध में वादी आकाश सक्सेना ने बताया कि 2019 में उनके द्वारा एक शिकायत की गई थी कि जौहर यूनिवर्सिटी का गेट सरकारी भूमि पर है। उसकी सड़क पीडब्ल्यूडी द्वारा बनाई गई है। इस सड़क को लगभग 13 करोड़ की लागत से बनवाई गई थी, उस पर जौहर यूनिवर्सिटी का गेट बना हुआ है।

अर्जी खारिज होने के बाद बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने कहा कि प्रशासन को कोर्ट के फैसले का संज्ञान लेते हुए जल्द ही सरकारी भूमि पर बने गेट को तोड़ने की कार्यवाही करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण की वजह से गांव के लोगों को आने-जाने में दिक्कत होती है। मालूम हो कि आजम खान के खिलाफ जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर कई मामले दर्ज हैं।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के भू-माफिया आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी की दीवार पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाया था। प्रशासन द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी की दीवार को कई जगह से जेसीबी मशीन से तोड़कर उसके अंदर कब्जा किए गए सरकारी चकरोड से कब्जे को हटाया गया था। अधिकारियों ने इस घटना के संबंध में जौहर यूनिवर्सिटी प्रशासन को पहले ही नोटिस जारी कर दिया था। इस मामले में तीन थानों की फोर्स ने मिलकर लगभग 17 बीघा जमीन पर बनी तीन मीटर दीवार को तोड़कर रास्ता बनाया।

गौरतलब है कि सपा सांसद आजम खान रामपुर स्थित इस यूनिवर्सिटी के कुलपति हैं। आजम पिछले लंबे समय से जेल में बंद थे, जहाँ पर उनकी तबीयत खराब हो गई थी। आजम खान को लखनऊ स्थित अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। जौहर यूनिवर्सिटी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में आजम के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था। केंद्रीय जाँच एजेंसी ने रामपुर के डीएम को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने कई तरह की जानकारियाँ माँगी थीं।

नौशाद ने शादी का झाँसा देकर दलित नाबालिग के साथ 7 महीनों तक किया रेप, गर्भवती होने पर बनाया धर्मांतरण का दबाव

उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण के मामले थम नहीं रहे हैं। ताजा मामला अमेठी के जामो थाना क्षेत्र का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जामो थाना क्षेत्र के एक गाँव में रहने वाली 16 वर्षीय दलित नाबालिग को शादी का झाँसा देकर उसी गाँव के मुस्लिम युवक ने लगातार 7 महीने तक दुष्कर्म किया। बताया जा रहा है ​कि जब लड़की 3 महीने की गर्भवती हुई, तब परिजनों को उसके संबंधों के बारे में जानकारी हुई।

पीड़िता के पिता ने जामो थाने में आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोपित अब्बू और उसके बेटे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि वह अहमदाबाद में नौकरी करते हैं। जब वह शुक्रवार (30 जुलाई) को अपने घर आए तो उन्हें पता ​चला कि उनकी नाबालिग बेटी 3 महीने की गर्भवती है, जिसके साथ नौशाद पिछले 7 महीने से दुष्कर्म कर रहा था।

पीड़िता के पिता ने यह भी आरोप लगाया कि जब नौशाद और उसके अब्बू को यह पता चला कि मेरी बेटी गर्भवती है, तब वह मेरे घर पर आए और उस पर जबरन गर्भपात और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगे। उन्होंने बताया कि जब मैंने उनका विरोध किया, तो उन लोगों ने मुझे जान से मारने की धमकी दी।

वहीं, पीड़िता ने पुलिस को बताया कि जब वह घास लेने के लिए गई थी, तभी वह मुस्लिम लड़का उसके पीछे-पीछे आ गया था। पीड़िता ने बताया कि उसने मुझे शादी का झाँसा दिया और मेरे साथ लगातार 7 महीनों तक दुष्कर्म किया। इसके बाद जब मैं गर्भवती हो गई, तब उसने मुझसे शादी करने से इनकार कर दिया। उसने कहा कि अगर तुम धर्म परिवर्तन करोगी, तभी मैं तुम्हारे साथ निकाह करूँगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जामो पुलिस ने लड़की के पिता की शिकायत पर दोनों के खिलाफ बलात्कार, धमकी देने, धर्म परिवर्तन अधिनियम, पॉक्सो और एससीएसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है। अपर पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार पांडेय ने बताया कि जल्दी ही घटना में शामिल लोगों की गिरफ्तारी कर ली जाएगी। आरोपितों की तलाश में टीमें लगा दी गई है और पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए भेज दिया गया है।

मुंबई के छत्रपति शिवाजी एयरपोर्ट पर शिवसेना कार्यकर्ताओं ने मचाया उपद्रव, डंडों से तोड़ा अडानी का साइनबोर्ड: देखें Video

मुंबई में शिवसेना कार्यकर्ताओं ने सोमवार (अगस्त 2, 2021) को छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास जमकर उपद्रव मचाया। उन्होंने हवाई अड्डे के पास लगे अडानी के साइनबोर्ड को तोड़ते हुए वहाँ अपने पार्टी के झंडे गाड़े।

घटना के संबंध में एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि शिवसेना कार्यकर्ताओं के एक समूह ने सोमवार दोपहर मुंबई में हवाई अड्डे पर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के पास ‘अडानी हवाई अड्डा’ लिखे एक साइनबोर्ड को तोड़ दिया।

इसके बाद कुछ कार्यकर्ता पास में स्थित वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर गए, जिससे शहर की मुख्य उत्तर-दक्षिण सड़क पर कुछ देर के लिए यातायात बाधित हो गया। उन्होंने कहा कि घटना में शामिल कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है और मामला दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।

पुलिस ने बताया कि जब हवाई अड्डे का नाम छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर रखा गया तब भी शिवसेना के ही कार्यकर्ताओं ने इस साइनबोर्ड के विरोध में नारेबाजी की थी। कई रिपोर्टस में कहा गया है कि इस बार भी शिवसेना कार्यकर्ता हवाई अड्डे का नाम अडानी के नाम से बदले जाने पर विरोध कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने ‘शिवाजी महाराज की जय हो के नारे भी लगाए।’ साथ में वहाँ पार्टी झंडा भी लगाया।

इस मामले पर अडानी एयरपोर्ट के प्रवक्ता ने कहा, “मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अडानी एयरपोर्ट्स की ब्रांडिंग के आसपास की घटनाओं के मद्देनजर, हम अडानी एयरपोर्ट्स होल्डिंग लिमिटेड (एएएचएल) को आश्वस्त करते हैं कि अडानी एयरपोर्ट्स ब्रांडिंग के साथ पिछली ब्रांडिंग को बदल दिया गया है और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की ब्रांडिंग या टर्मिनल पर स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया गया है।”

प्रवक्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट में ब्रांडिंग, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के मानदंडों और दिशानिर्देशों के अनुपालन में है। एएएचएल बड़े पैमाने पर विमानन समुदाय के हित में सरकार की ओर से निर्धारित सभी दिशानिर्देशों का पालन करना जारी रखेगा।

प्रेमी जावेद संग मिल कर बेटी ने ही कराया पिता राजेश का कत्ल: वाराणसी हत्याकांड में यूपी पुलिस का सनसनीखेज खुलासा

वाराणसी के रोहनिया स्थित करनाडाडी हाईवे के ओवरब्रिज पर गुरुवार (29 जुलाई 2021) की रात हुए किराना व्यवसायी हत्याकांड का सोमवार (2 अगस्त 2021) को पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया। इस वारदात को किराना व्यवसायी की बेटी के प्रेमी ने अंजाम दिया था। बेटी के प्रेमी ने अपने दोस्त के साथ गोली मारी थी।

क्राइम ब्रांच व थाना रोहनिया पुलिस टीम ने किराना व्यवसायी राजेश जायसवाल की हत्या में आरोपित बेटी, उसके प्रेमी और एक अन्य को गिरफ्तार किया है। उनके पास से घटना में इस्तेमाल किया गया पिस्टल, बाइक और मोबाइल बरामद हुआ है। बता दें कि मिर्जामुराद थाने के तमाचाबाद निवासी किराना व्यवसायी राजेश जायसवाल (46) की हत्या गोली मारकर की गई थी। घटना के वक्त वो अस्पताल में भर्ती अपनी सास के लिए खाना लेकर जा रहे थे।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक एसपी ग्रामीण अमित वर्मा ने कहा कि हत्याकांड के खुलासे के लिए क्राइम ब्रांच वाराणसी ग्रामीण और थाना रोहनिया की संयुक्त टीम को लगाया गया था। शुरुआती जाँच में पता चला कि मृतक किराना व्यवसायी की पुत्री का प्रेम संबंध गाँव के ही मुस्लिम समुदाय के एक लड़के से था। सर्विलांस टीम ने घर के सभी सदस्यों के मोबाइल कॉल डिटेल को खँगालना शुरू किया।

इस जाँच में पता चला कि मृतक की बेटी की एक नंबर पर लगातार बात होती है। घटना वाले दिन भी उस नंबर पर काफी देर तक बात हुई थी। इसके बाद पुलिस ने उस नंबर को सर्विलांस पर लगाया। फिर आस-पास के लोगों से पूछताछ में पता चला बेटी का मुस्लिम समुदाय के युवक के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा है।

जाँच में यह भी पता चला कि एक साल पहले ही व्यवसायी को पता चला कि उसकी बेटी का संबंध जावेद है। जिसके बाद राजेश जायसवाल ने दोनों को बहुत डाँटा। इसके बाद भी दोनों एक दूसरे से शादी के लिए परिवार पर दबाव बनाते रहे। राजेश जायसवाल के नहीं मानने पर पुत्री और उसके प्रेमी ने उसे रास्ते से हटाने की योजना बना ली। बीते बृहस्पतिवार को पुत्री ने अपने प्रेमी को बताया कि उसके पिता नानी के लिए खाना लेकर अस्पताल जा रहे हैं। इस सूचना पर प्रेमी जावेद अहमद ने अपने साथी आकिब अंसारी के साथ बाइक से किराना व्यवसायी का पीछा किया। रोहनिया स्थित करनाडाडी हाईवे के ओवरब्रिज पर मौका देखकर किराना व्यवसायी को दो गोली मारी। मौके पर ही उनकी मौत हो गई।  

फिर उसी रास्ते वो घर लौटा और पूरी जानकारी मृतक की पुत्री को दी। पुलिस की पूछताछ में जावेद ने बताया कि हत्या में इस्तेमाल की गई पिस्टल 6 माह पहले बिहार के विक्रमगंज से खरीद कर लाया था। एसपी ग्रामीण अमित वर्मा ने बताया कि इस घटना के खुलासे में क्राइम ब्रांच प्रभारी अश्वनी चतुर्वेदी और रोहनिया थाना प्रभारी हरिनाथ भारती व उनकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।  

हत्या में करीबी पर ही घूम रही थी शक की सुई, बड़े भाई सहित तीन पर हुआ था मुकदमा

पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में यही सामने आया था कि किसी करीबी ने ही वारदात को अंजाम दिया है। पहले बाकायदा राजेश की रेकी की गई और फिर सुनसान स्थल देख बदमाशों ने गोली मारी। 29 जुलाई की रात हत्याकांड के बाद मृतक के बड़े भाई और भतीजों समेत तीन के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज हुआ था।

बताया गया था कि जमीन विवाद को लेकर हत्या की गई थी। हालाँकि पुलिस की जाँच में मामला बिल्कुल अलग निकला। हत्याकांड के खुलासे के बाद गाँव में चर्चाओं का दौर तेज है। पुलिस ने सभी आरोपितों को जेल भेज दिया है। 

चौटाला से मिल नीतीश पहुँचे पटना, कुशवाहा ने बता दिया ‘पीएम मैटेरियल’, बीजेपी बोली- अगले 10 साल तक वैकेंसी नहीं

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री पद का मैटेरियल बताने वाले जनता दल (यूनाइटेड) के नेता उपेंद्र कुशवाहा के बयान पर राजनीतिक हलके में राजनीति तेज हो गई है। कुशवाहा के बयान पर भाजपा ने कहा है कि अगले दस साल तक प्रधानमंत्री पद के लिए कोई वैकेंसी नहीं है। दरअसल, बीते दिनों उपेंद्र कुशवाहा ने कहा था कि देश में प्रधानमंत्री पद के कई मैटेरियल नेता हैं और नीतीश कुमार उन्हीं में से एक हैं। इस पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अपने पार्टी के साथी कुछ भी बोल देते हैं। हमारे बारे में ऐसा कहने की जरूरत नहीं है।”

इतना ही नहीं, कुशवाहा ने यह दावा भी किया था कि बिहार में अगर आज चुनाव हो तो JDU सबसे बड़ी पार्टी की भूमिका में होगी। कुशवाहा के इन बयानों पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया है। बिहार सरकार में मंत्री और भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने कहा कि अगले दस साल तक प्रधानमंत्री पद के लिए कोई वैकेंसी नहीं हैं।

वहीं, भाजपा प्रवक्ता अरविंद कुमार सिंह ने कहा था कि अगर नीतीश कुमार प्रधानमंत्री पद के मैटेरियल हैं तो भाजपा में भी सीएम पद के कई मैटेरियल हैं। सिंह ने कहा कि मैटेरियल की कमी थोड़े ही है, लेकिन जनता के वोट से सरकारें बनती हैं और पीएम, सीएम बनते हैं। हम बिहार के हित मे गठबंधन की सरकार चला रहे हैं, अगर वे मजबूत होंगे तो गठबंधन भी मजबूत होगा।

कुशवाहा के पीएम मैटेरियल वाले बयान पर नीतीश कुमार ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि हम ये बातें नहीं जानते हैं। हम पीएम पद पर क्यों रहेंगे? ऐसी बात नहीं है, वे (उपेंद्र कुशवाहा) बोल रहे हैं वो अलग चीज है। इन सब बातों में हमारी कोई दिलचस्पी नहीं है।

सम्राट चौधरी ने कुशवाहा को यह भी स्पष्ट किया कि 2020 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को सबसे अ​धिक 74 सीटें मिली और जनता दल यूनाइटेड को केवल 43 सीटें। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी हमने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकारा। चौधरी ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बीजेपी स्वतंत्र सरकार चला रही है। जहाँ पर बीजेपी का नेतृत्व होता है उन राज्यों में सरकार चलाना आसान होता है।

वहीं, हरियाणा के पूर्व मुख्‍यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने रविवार को नीतीश कुमार को लंच पर बुलाया था, जहाँ दोनों के बीच बंद कमरे में चर्चा हुई। इस दौरान जदयू के महासचिव केसी त्‍यागी भी मौजूद थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, ओमप्रकाश चौटाला चाहते हैं कि नीतीश कुमार तीसरे मोर्चे का नेतृत्‍व करें।

PM मोदी ने लॉन्च किया e-RUPI, अब सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को होगा सीधे भुगतान, लीक प्रूफ होगा लेनदेन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (2 अगस्त 2021) को ई-रुपी (e-RUPI) नाम का डिजिटल पेमेंट सिस्टम लॉन्च किया। पीएम मोदी ने कहा कि ई रुपी वाउचर देश में डिजिटल लेनदेन और डीबीटी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह लक्षित, पारदर्शी और लीक प्रूफ वितरण में मदद करेगा। पीएम ने कहा कि ई-रुपी इस बात का उदाहरण है कि कैसे भारत 21वीं सदी में उन्नत तकनीक की मदद से आगे बढ़ रहा है और लोगों को जोड़ रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि इसकी शुरुआत उस साल हुई, जब भारत अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है।

इस डिजिटल वाउचर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार का मौद्रिक लाभ सीधे ‘लीक प्रूफ’ तरीके से नागरिकों तक पहुँचे। नई भुगतान प्रणाली के तहत लाभार्थियों को एक इलेक्ट्रॉनिक वाउचर या कूपन दिया जाएगा। इसका ऑनलाइन बैंकिंग, भुगतान एप्लिकेशन और अन्य पारंपरिक भुगतान मोड के बिना उपयोग किया जा सकेगा।

सीधे शब्दों में कहा जाय तो ई रुपी ऐसा डिजिटल पेमेंट सिस्टम है, जिसमें एक क्यूआर कोड या एसएमएस स्ट्रिंग-आधारित ई-वाउचर होता है। यह सोडेक्सो वाउचर की तरह ही एक डिजिटल कूपन है। इसे एनपीसीआई ने फाइनैंशियल सर्विस डिपार्टमेंट, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय व राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के साथ मिलकर बनाया है। यह पूरी तरह से लीक प्रूफ है।

कैसे काम करता है यह

e-RUPI एक प्रीपेड ई-वाउचर है। यह क्यूआर कोड या एसएमएस स्ट्रिंग के आधार पर ई-वाउचर के रूप में काम करता है, जिसे लाभार्थियों के मोबाइल फोन पर पहुँचाया जाता है। यह प्लेटफॉर्म यूजर को कार्ड, डिजिटल पेमेंट ऐप या इंटरनेट बैंकिंग एक्सेस के बिना वाउचर को कैश कराने की छूट देता है। ई-रुपी सेवाओं के स्पॉन्सर्स को बिना किसी फिजिकल इंटरफेस के डिजिटल तरीके से लाभार्थियों और सेवा प्रदाताओं से जोड़ता है। 

इससे होने वाले लाभ

ई-रुपी पेमेंट मोड किसी ऐप या मोबाइल बैंकिंग से जुड़ा नहीं है। किसी भी तरह के फोन वाला व्यक्ति इसका इस्तेमाल कर सकेगा। सर्विस प्रोवाइडर के माध्यम से यूजर एसएमएस वाउचर को कैश करा सकता है। इतना ही नहीं लेनदेन पूरा होने के बाद ही सर्विस प्रोवाइडर को पेमेंट किया जाएगा। इसे पेमेंट मोड में बिना किसी बिचौलिए सर्विस प्रोवाइडर को समय पर पेमेंट दिया जा सकेगा।

केंद्र सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजनाओं के तहत वित्तीय लाभ देने के लिए ई-रुपी पेमेंट मोड का इस्तेमाल करना चाहती है। इसमें आयुष्मान भारत योजना, माँ और बाल-कल्याण योजना, टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों और पोषण संबंधी सहायता समेत कई सेवाएँ प्रदान करना शामिल हैं। इसके अलावा निजी क्षेत्र भी अपने कर्मचारियों के कल्याण और सीएसआर कार्यक्रमों के लिए ई-रुपी का इस्तेमाल कर सकते हैं।

मौजूदा समय में 11 सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक हैं, जो इस नए डिजिटल भुगतान मोड का समर्थन करते हैं। इनमें भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, एक्सिस बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा पूरी तरह से ई-रुपी वाउचर का समर्थन करते हैं। इन बैंकों में ई-रुपी कूपन जारी करना और भुनाना दोनों उपलब्ध हैं। जबकि केनरा बैंक, इंड्सइंड बैंक, इंडियन बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया समेत दूसरे बैंक केवल ई-रुपी का कूपन जारी कर सकते हैं।

वीर सावरकर के नाम पर फिर बिलबिलाए कॉन्ग्रेसी; कभी इसी कारण से पं हृदयनाथ को करवाया था AIR से बाहर

स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर पर लेखक विक्रम संपत की हालिया किताब, ‘सावरकर: ए कंटेस्टेड लिगेसी, 1924-1966′ के आने के बाद बवाल हो रखा है। इस किताब को लेखक ने 26 जुलाई 2021 को इसे रिलीज किया था। लेकिन इसके बाद से कॉन्ग्रेसियों ने, वामपंथियों ने एक बार फिर वीर सावरकर की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का काम शुरू कर दिया।

इसी क्रम में टाइम्स नाऊ को दिए एक इंटरव्यू में संपत ने वामपंथी विचारधारा वाले बुद्धिजीवियों के पाखंड को उजागर किया और बताया कि कैसे ये लोग मान चुके हैं कि अभिव्यक्ति की आजादी का हक सिर्फ इन्हीं लोगों के पास है। उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में पंडित हृदयनाथ मंगेशकर की बर्खास्तगी का उल्लेख करते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे कॉन्ग्रेस सरकारों और उनके नेताओं ने वीर सावरकर को बहिष्कृत किया और उन लोगों को दंडित किया जो स्वतंत्रता सेनानी की निंदा नहीं करते थे।

इतिहासकार विक्रम संपत कहते हैं, “लिबरल किसी भी अलग दृष्टिकोण को पनपने नहीं देते हैं। भारत में विशेष रूप से, एक बहुत ही संकीर्ण नैरेटिव है जिसे इतिहास के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।”

संपत कहते हैं कि भारतीय इतिहास के कई पहलुओं को छुपाया गया है, विशेष रूप से महात्मा गाँधी की हत्या के बाद महाराष्ट्र में ब्राह्मणों का नरसंहार। उन्होंने तत्कालीन कॉन्ग्रेस नेताओं पर ब्राह्मण विरोधी नरसंहार के पीछे होने का आरोप लगाया और कहा कि इतिहास के पन्नों को जानबूझकर हटा दिया गया है।

सावरकर के बारे में, संपत ने कहा कि जब यह साबित हो गया था कि वीर सावरकर का महात्मा गाँधी की हत्या से कोई संबंध नहीं था। फिर भी उन्हें गाँधी की हत्या के सह-साजिशकर्ताओं में से एक के रूप में पेश करने के लिए नैरेटिव गढ़ा गया। उन्होंने आगे बताया कि कैसे वीर सावरकर के पक्ष में बोलने वाली आवाजों को दबाया था और उन लोगों के खिलाफ “कैंसिल कल्चर” को बढ़ावा दिया गया था जिन्होंने सावरकर का महिमामंडन किया या हिंदुत्व को लेकर जो कॉन्ग्रेस का नैरेटिव था उसे नहीं माना।

उन्होंने बताया कि कैसे कॉन्ग्रेस सरकार के शासनकाल में म्यूजिक डायरेक्टर हृदयनाथ मंगेशकर को ऑल इंडिया रेडियो से निकाल दिया गया था क्योंकि उन्होंने वीर सावरकर के मराठी गाने को संगीत बद्ध किया था।

जब कॉन्ग्रेस ने पंडित हृदयनाथ को AIR से करवाया बाहर

बता दें कि एक समय में हृदयनाथ और उनकी बहनें, लता मंगेशकर और उषा मंगेशकर वीर सावरकर की कविता को संगीतबद्ध कर चुके थे। लेकिन कॉन्ग्रेस को यह चीज नहीं पसंद आई और उन्होंने पंडित हृदयनाथ को AIR से निकलवा दिया। इस बात को स्वयं हृदयनाथ मंगेशकर ने कई सालों बाद एबीपी माझा को दिए इंटरव्यू में कहा था। उन्होंने 53 मिनट के इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें एक बार AIR की नौकरी से हाथ धोना पड़ा था, सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने वीर सावरकर की प्रतिष्ठित कविता का एक संगीतमय गायन बनाने का साहस किया था जिसमें उन्होंने उन्हें मातृभूमि में वापस ले जाने के लिए समुद्र की प्रशंसा की थी।

अपने मराठी इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “मैं उस समय ऑल इंडिया रेडियो में काम कर रहा था। मैं 17 साल का था और मेरी तनख्वाह 500 रुपए प्रति माह थी। यह आज मूंगफली भर हो सकती है, लेकिन उस समय 500 रुपए एक बड़ा मोटा वेतन माना जाता था … संक्षेप में कहूँ तो मुझे ऑल इंडिया रेडियो से निकाल दिया गया था क्योंकि मैंने वीर सावरकर की प्रसिद्ध कविता ‘ने मजसी ने परत मातृभूमि, सागर प्राण’ के लिए एक संगीत रचना बनाने का विकल्प चुना था।”

कपल्स की चुम्मा-चाटी से परेशान हुई मुंबई की ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ सोसायटी, पेंट कर लिख दिया- नो किसिंग जोन

मुंबई के बोरीवली में ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ सोसायटी के लोगों ने कपल्स की गंदी हरकतों से तंग आकर सोसायटी के बाहर ‘नो किसिंग जोन’ का साइन लगा दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोसायटी के लोगों का कहना है कि वे लॉकडाउन के समय से ही शाम 5 बजे से देर रात तक बाइक और कारों में सवार कपल्स को किस करते और आपत्तिजनक स्थिति में देखते आ रहे हैं। उनका कहना है कि लॉकडाउन बढ़ने के बाद इस तरह की घटनाएँ ज्यादा बढ़ गईं। परेशान होकर उन्होंने अपनी सोसायटी के गेट के बाहर पेंट कर ‘नो किसिंग जोन‘ लिख दिया।

‘सत्यम शिवम सुंदरम’ सोसायटी के निवासी कैलाशराव देशमुख ने कहा कि वे लोग कपल्स या किसिंग के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वे अपने घर के पास इस तरह का माहौल नहीं चाहते। इससे हमारे बच्चों पर बुरा असर पड़ता है। उनका कहना है कि शुरुआत में यहाँ के लोगों ने कपल्स को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं माने और यहाँ आकर रोजाना ऐसी हरकतें जारी रखे, उसके बाद उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।

उन्होंने बताया कि शुरुआत में सोसायटी के लोगों ने कपल्स के वीडियो बनाकर स्‍थानीय कॉर्पोरेटर को दिखाए। उस दौरान कॉरपोरेटर ने इस वीडियो को पुलिस को देने को कहा, लेकिन पुलिस की तरफ से कोई भी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद सोसायटी के लोगों ने मिलकर गेट के बाहर ‘नो किसिंग जोन’ का साइन लगाना उचित समझा।

देशमुख ने आगे कहा कि इसके बाद से अब कपल्‍स का आना पहले से काफी कम हो गया है। कुछ लोग यहाँ सेल्फी लेने आते हैं। वे जब गाड़ी पार्क करने के बाद नीचे उतरते हैं और यह साइन देखते हैं तो उन पर इन सबका साइकोलॉजिकल इम्पैक्ट पड़ता है।

आजादी के बाद पहली बार लद्दाख में बटालिक, आर्यन घाटी के गाँवों को होगी निर्बाध बिजली आपूर्ति: PM मोदी ने पूरा किया सपना

देश को आजादी मिलने के बाद से अँधेरे में डूबे रहे लद्दाख के कारगिल जिले की आर्यन घाटी में अब जाकर रौशनी पहुँची है। 75वें स्वतंत्रता दिवस से पहले राज्य की ट्रांसमिशन यूटिलिटी पावरग्रिड द्वारा आर्यन वैली को इलेक्ट्रिसिटी से जोड़ दिया गया है। इससे अब कारगिल जिले में आर्यन घाटी के दूरदराज के गाँव राष्ट्रीय बिजली नेटवर्क से जुड़ गए हैं। ऐसा होने से अब ये क्षेत्र 24X7 बिजली आपूर्ति का आनंद ले सकेंगे। इससे पहले तक यहाँ के लोग डीजल जेनरेटर से मिलने वाली बिजली पर ही निर्भर थे, जिससे यहाँ के लोगों को शाम को केवल 5-6 घंटे बिजली मिलती थी।

ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए प्रधानमंत्री विकास कार्यक्रम के तहत भारत सरकार के बिजली बोर्ड ने लालुंग, सिल्मू, बटालिक, दारचिक, हरदास, सिनिकसी, गारकोन और लालुंग से दारचिक के बीच के गाँवों को जोड़ने वाली 40 किलोमीटर की ट्रांसमिशन लाइन को चालू कर दिया गया है। ऐसा होने से कारगिल जिले की आर्यन घाटी के सभी गाँव अब 220 केवी श्रीनगर-लेह ट्रांसमिशन लाइन के जरिए नेशनल ग्रिड से जुड़ गए हैं। बता दें कि बटालिक 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण फोकस क्षेत्रों में से एक था।

नेशनल पॉवर ग्रिड से जुड़ने के कारण इन गाँवों में अब सप्ताह के सातों दिन और चौबीसों घंटे बिजली रहेगी। इसका फायदा यह होगा कि यहाँ के पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही यहाँ के लोगों की जीवन शैली में भी सुधार आएगा। इसके अलावा यहाँ खाद्य प्रसंस्करण के उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।

आर्यन वैली के लोगों का यह सपना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जनवरी 2019 में श्रीनगर-लेह ट्रांसमिशन लाइन के उद्घाटन के कारण अब हकीकत हो गया है। आजादी के 70 साल बीतने के बाद एनडीए के कार्यकाल में लद्दाख को राष्ट्रीय बिजली नेटवर्क से जोड़ने के लिए 350 किमी लंबी 220-केवी लाइन खींची गई थी। इस नेटवर्क के कारण ‘वन नेशन, वन ग्रिड, वन फ्रीक्वेंसी’ अब वास्तविकता का रूप ले रही है। इस लाइन को लद्दाख में ग्रामीण विद्युतीकरण का आधार बताया जा रहा है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि हाल ही में लद्दाख के दूर-दराज के गाँवों को पॉवर ग्रिड से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने 1309.71 करोड़ रुपए के इंटर स्टेट ट्रांसमिशन के कार्यों को मंजूरी दी थी। मोदी सरकार की इस परियोजना में डी/सी टावर की 220 केवी एस/सी ट्रांसमिशन लाइनें (कुल 307 किमी), कारगिल-पदुम (ज़ांस्कर) (207 किमी) और फ्यांग से डिस्किट (नुब्रा) (100 किमी) व दो 220/33 केवी ग्रिड सबस्टेशन – डिस्किट, नुब्रा (50 एमवीए) और पदुम, ज़ांस्कर (50 एमवीए) की ट्रांसमिशन लाइन शामिल हैं। इन सभी की संयुक्त लागत 1309.71 करोड़ रुपए है।

लद्दाख के उप राज्यपाल आरके माथुर 29 मई 2021 को इस परियोजना को मंजूरी मिलने पर कहा था, “ये ट्रांसमिशन लाइनें दूर-दराज के गाँवों को ग्रिड से जोड़ेंगी और दूर-दराज के गाँवों में उपयोग किए जाने वाले डीजी सेटों को चरणबद्ध तरीके से बाहर करेगी। इस तरह से कार्बन मुक्त लद्दाख की दिशा में यह एक और कदम होगा। इससे सेना और दूर-दराज के गाँवों को चौबीसों घंटे स्वच्छ बिजली मिलेगी।”

इतना ही नहीं मोदी सरकार ने अपनी स्वच्छ ऊर्जा पहल के तहत लद्दाख और कारगिल में क्रमशः 5,000 मेगावाट और 2,500 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएँ भी स्थापित करने फैसला किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, लद्दाख में 5,000 मेगावाट सौर ऊर्जा स्थापित करने की प्रस्तावित योजना के कारण यह स्थान दुनिया का सबसे बड़ा सौर फोटोवोल्टिक संयंत्र बन जाएगा। इन सौर परियोजनाओं को लद्दाख और कारगिल में वर्ष 2023 तक 45,000 करोड़ रुपए की अनुमानित निवेश के जरिए पूरा किया जाएगा।

‘किताब खरीद घोटाला, 1 दिन में 36 संदिग्ध नियुक्तियाँ’: MGCUB कुलपति की रेस में नया नाम, शिक्षा मंत्रालय तक पहुँची शिकायत

मोतिहारी के ‘महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (MGCUB)’ के कुलपति की रेस में जो 5 लोग शामिल हैं और जिनका केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने साक्षात्कार लिया है, उसमें एक नाम प्रोफेसर शील सिंधु पांडे का भी है। उन्हें लेकर यहाँ के छात्र विरोध कर रहे हैं क्योंकि उन पर पहले भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं और मोतिहारी का MGCUB काफी पहले से ही भ्रष्टाचार से पीड़ित रहा है। इसी कारण पिछले कुलपति को इस्तीफा देना पड़ा था।

सामाजिक कार्यकर्ता आलोक राज ने इस बाबत केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र भी लिखा है। इस पत्र में उन्होंने लिखा है कि विश्वविद्यालय के नए कुलपति की नियुक्ति हेतु दिनांक 24 और 25 जून को शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गठित कुलपति चयन समिति के द्वारा विभिन्न उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया। पत्र के अनुसार, इसमें प्रोफेसर शील सिंधु पांडे का नाम कुलपति चयन समिति के द्वारा अंतिम 5 सफल अभ्यर्थियों में शामिल किया गया है।

पत्र में लिखा है, “विदित हो कि प्रोफेसर शील सिंधु पांडे विक्रम विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश में कुलपति रह चुके हैं जहाँ पर वे किताब खरीदने तथा अवैध नियुक्ति करने के मामले में हुए घोटाले के मुख्य आरोपित हैं। मध्य प्रदेश उच्च-न्यायालय में उन पर मुकदमा भी हुआ था। इस बाबत हाईकोर्ट ने उनसे जवाब भी माँगा था, लेकिन तब वो पकड़े जाने के कारण पहले ही इस्तीफा देकर निकल गए थे। वो अक्खड़, शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले और घोटालेबाज किस्म के व्यक्ति हैं।’

समाजसेवी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से निवेदन किया है कि प्रोफेसर शील सिंधु के नाम पर विचार न किया जाए और शीर्ष-5 में शामिल करने के फैसले को निरस्त किया जाए। साथ ही उनकी जगह किसी स्वच्छ छवि वाले प्रोफेसर को कुलपति बनाने की माँग की गई है। कहा गया है कि पहले से ही विवादों में रहे विश्वविद्यालय को बचाने के लिए ये ज़रूरी है कि पठन-पाठन का कार्य सुचारु रूप से करवाने वाले बेदाग़ छवि के व्यक्ति को जिम्मेदारी दी जाए।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इस शिकायत का संज्ञान लिया है और इसे आगे भेजा है। अब छात्रों को इस मामले में आगे कार्रवाई का इंतज़ार है। इस सम्बन्ध में निखिल कुमार नामक छात्र ने RTI भी दायर की है और पूछा है कि अब तक इस शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई। MGCUB के मौजूदा कुलपति का कार्यकाल पूरा हो चुका है और अगले कुलपति का छात्रों व शिक्षकों को इंतजार है। MGCUB अभी भी मोतिहारी के अस्थायी कैंपस में ही चल रहा है। जमीन अधिग्रहण के बावजूद निर्माण कार्य रुका हुआ है।

इससे पहले भी दो अन्य प्रोफेसरों को लेकर विवाद हुआ था। कहा जा रहा था कि उनमें से एक जहाँ वामपंथी विचारधारा के हैं, वहीं दूसरे ने नक्सलियों के प्रति सहानुभूति जताई है। दोनों ही प्रोफेसरों ने इन आरोपों को नकार दिया था। ऑपइंडिया से बात करते हुए उन दोनों ने आरोप लगाए थे कि एक साजिश के तहत ये दुष्प्रचार चलाया जा रहा है। अब सभी को शिक्षा मंत्रालय के अंतिम निर्णय का इंतजार है।

जहाँ तक प्रोफेसर शील सिंधु पांडे की बात है, उन पर 2016 में ‘विक्रम विश्वविद्यालय’ में किताब खरीद में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। RTI कार्यकर्ता डॉक्टर मोहन बैरागी ने इस सम्बन्ध में RTI दायर की थी, जिसके बाद जाँच शुरू हुई थी। इसी बीच हाईकोर्ट में भी याचिका दायर हुई थी। अंततः प्रोफेसर शील सिंधु पांडे को इस्तीफा देना पड़ा था। आरोप लगे थे कि उन्हें विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यों से कोई मतलब नहीं रहता था।

प्रोफेसर शील सिंधु पांडे के खिलाफ शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई – RTI में माँगा गया जवाब

उनके खिलाफ उच्च-न्यायालय में याचिका ‘भारतीय युवा संघ’ ने दायर की थी। फरवरी 2019 में उनके इस्तीफे के बाद मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विक्रम यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों ने नारेबाजी कर के ख़ुशी भी मनाई थी। इसके बाद बीके शर्मा को वहाँ का अगला कुलपति नियुक्त किया गया था। साथ ही उन पर ‘RD गार्डी मेडिकल कॉलेज में 1 दिन में 36 लोगों की नियुक्ति करने का आरोप है, जिसे संदिग्ध बताया गया था।

आरोपों पर क्या कहते हैं प्रोफेसर शील सिंधु पांडे

प्रोफेसर शील सिंधु पांडे ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। ऑपइंडिया ने जब उनसे इस बाबत सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि जब टेंडर रद्द हो गया था और किताब की खरीद ही नहीं हुई थी तो घोटाले की बात कहाँ से आ गई? साथ ही एक दिन में 36 संदिग्ध नियुक्तियों पर उन्होंने सफाई दी कि एक प्राइवेट कॉलेज में इस तरह के निर्णय कुलपति द्वारा सीधे नहीं लिए जाते हैं और वो एक कमिटी भेजता है।

उन्होंने कहा कि इसी तरह उक्त कॉलेज में नियुक्तियों के लिए एक कमिटी बना कर भेजी गई थी, क्योंकि वहाँ कई पद खाली होने के कारण पठन-पाठन का कार्य प्रभावित हो रहा था। उन्होंने कहा कि इस निर्णय में उनकी कोई भागीदारी नहीं थी।