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‘एक पॉइंट बराबर कपड़े नहीं पहने हैं, बताइए ये पोर्न है?’: न्यूड होकर लाइव आईं गहना वशिष्ठ, फ्रेंडशिप डे की बधाई दी

लोग रविवार (1 अगस्त, 2021) को तब हैरान हो गए, जब अभिनेत्री गहना वशिष्ठ अचानक से इंस्टाग्राम के लाइव वीडियो सेशन में न्यूड होकर आ गईं। उन्होंने कहा, “मैं इस वीडियो में बिना कपड़ों के हूँ, लेकिन कोई इसे पोर्न नहीं बता रहा।” उन्होंने दावा किया कि जब इसके उलट वो कपड़े पहनती हैं तो लोग इसे पोर्न बताने लगते हैं। उन्होंने इसे ‘दोहरे रवैये की पराकाष्ठा’ करार देते हुए अपने ऊपर लगे आरोपों पर सवाल उठाया।

इंस्टाग्राम पर बिना कपड़ों के लाइव आ गईं गहना वशिष्ठ

उन्होंने दावा किया कि जिन वीडियोज में उन्होंने कपड़े पहन रखे हैं, उन्हें पोर्न क्यों बताया जा रहा है? 3 मिनट 8 सेकेंड के इस वीडियो में गहना वशिष्ठ बिस्तर पर लेटी हुई हैं। उन्होंने कहा, “हेलो दोस्‍तो, मैं आप लोगों से पूछता चाहती हूँ कि क्‍या वल्‍गर लग रही हूँ? क्‍या मैं चीप लग रही हूँ? या मैं ऐसी कहीं लग रही हूँ, जिसे आप पॉर्न कंटेंट में गिन सकते हैं? ऐसी कहीं से मैं लग रही हूँ? मैं आप लोगों से यही जानना चाहती हूँ कि क्‍या अभी मेरी कोई हरकत ऐसी लग रही है, जिसे आप पॉर्न की कैटेगरी में काउंट कर सकें, मुझे बताएँ।”

गहना वशिष्ठ ने आगे कहा, “मेरा यकीन कीजिए मैंने कुछ नहीं पहना हुआ है। मैंने एक पॉइंट भी कहते हैं ना, कुछ नहीं पहना हुआ है। मेरा कहना ये है कि मैंने अभी कुछ नहीं पहना है, लेकिन फिर भी आप इसे पॉर्न की कैटेगरी में काउंट नहीं कर रहे हैं, पर मेरे जो बाकी वीडियोज हैं, जहाँ मैंने अच्‍छे से कपड़े पहन रखे हैं, उसे पॉर्न कह रहे हैं। ये तो गलत बात है ना। सभी लोग कह रहे हैं पॉर्न शूट किया, पॉर्न शूट किया।”

गहना वशिष्ठ ने लोगों को सम्बोधित करते हुए इस वीडियो में आगे कहा, “अभी मैंने एक भी कपड़ा नहीं पहन रखा है। लेकिन मेरे जो बाकी वीडियोज हैं, जिसमें मैंने पूरे कपड़े पहन रखे हैं, फिर चाहे वह किसी भी प्‍लेटफॉर्म की सीरीज हो, सब कह रहे हैं पॉर्न शूट किया, पॉर्न शूट किया.. ये तो दोहरे रवैये की हद है ना।” इस दौरान उन्होंने लोगों के कमेंट्स के जवाब भी दिए। उन्होंने फॉलोवर्स को ‘फ्रेंडशिप डे’ की बधाई भी दी।

बता दें कि पोर्न फ़िल्में शूट कर एप पर बेचने के मामले में फँसे राज कुंद्रा के साथ गहना वशिष्ठ का नाम भी जुड़ा है। हाल ही में गहना वशिष्ठ ने कहा था कि मुंबई पुलिस ने उनसे 15 लाख रुपए देने की माँग की थी। गहना ने आरोप लगाया था “वे मुझे रिहा करने के लिए 15 लाख रुपए लेना चाहते थे। उन्होंने मुझसे पैसे देने को कहा। लेकिन जब मैंने कहा कि मैं गलत नहीं हूँ तो उन्होंने कहा कि हम किसी के भी खिलाफ मामला बना सकते हैं।”

4 साल में 4.5 करोड़ को मरवाया, हिटलर-स्टालिन से भी बड़ा तानाशाह: ओलंपिक में चीन के खिलाड़ियों ने पहना उसका बैज

जापान की राजधानी टोक्यो में चल रहे ओलंपिक खेलों में चीन के दो खिलाड़ियों को स्वर्ण पदक जीतने के बाद माओ का बैज पहने हुए देखा गया, जिसके बाद विवाद शुरू हो गया है। माओ से-तुंग, जिसे माओ जेदोंग भी कहा जाता है, नरसंहार के मामले में वो जर्मनी के हिटलर और रूस के स्टालिन से भी चार कदम आगे था। माओ को 5-8 करोड़ो मौतें के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है। उसे दुनिया का सबसे बड़ा नरसंहारक भी कहा जाता है।

चीनी-ऑस्ट्रेलियाई एक्टिविस्ट बडीकॉओ ने टोक्यो ओलंपिक से आईं इन तस्वीरों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि चीन में खूँखार ‘कल्चरल रेवोलुशन’ के लिए जिम्मेदार माओ का बैज पहनना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि ये बैच चीन के उसी खूनी अभियान का प्रतीक है, जिसने करोड़ों लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। दुर्भाग्य से उनमें बडीकॉओ के दादा-दादी भी शामिल थे। उन्होंने माओ को तानाशाह बताते हुए लिखा कि सत्ता के नशे में चूर होकर उसने अपने पागलपन भरे ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के लिए ये सब किया था।

चीन की ट्रैक साइक्लिस्ट जोंग टीआंशी और बाओ शांजू नामक महिला खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक लेते समय चीन का तानाशाह माओ का बैज पहन रखा था। ओलंपिक खेलों का नियम है कि उसके माध्यम से किसी राजनीतिक एजेंडे को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। लोग पूछ रहे हैं कि क्या दोनों खिलाड़ियों की ये हरकत इस नियम का उल्लंघन नहीं? ‘राजनीतिक प्रोपेगंडा’ के लिए उनका मेडल वापस लेने की माँग की जा रही है।

बता दें कि 1958-62 में माओ ने सबसे ज्यादा कत्लेआम करवाया था। लोगों से उनके घर और उनकी संपत्तियाँ छीन ली गई थीं। लोगों को भोजन तक सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी से ही मिलता था और इसी की एवज में लोगों से मनचाहे काम कराए जाते थे। सरकार के काम में किसानों और मजदूरों का उपयोग किया जाता था, जिन्हें इसकी एवज में कोई मेहनताना तक नहीं मिलता था। 30 लाख लोग ऐसे थे, जिन्हें कड़ी प्रताड़ना देकर उनकी हत्या की गई थी।

इन 4 वर्षों में ही माओ के कारण 4.5 करोड़ लोगों की मौत हुई थी। इनमें अधिकतर को भूखे रख कर मारा गया था। माओ के इस अभियान का नाम था ‘द ग्रेट लीप फॉरवर्ड’, जिसके तहत इतने लोग मारे गए थे। हालाँकि, इतिहास में इसकी उतनी चर्चा नहीं होती जितनी हिटलर और स्टालिन की। जब एक क्षेत्र में माओ के कुछ विरोधी सक्रिय हो गए थे तो सिर्फ उस एक इलाके में मात्र 3 सप्ताह में 13,000 सरकार विरोधियों को मार डाला गया था।

लेकिन, इस पर ज्यादा बात नहीं हुई क्योंकि चीन में इस मुद्दे पर किताब लिखने की किसी की हिम्मत नहीं है और इसके लिए रिसर्च करना भी मुश्किल है। माओ ही ‘पीपल्स रिपलब्लिक ऑफ चाइना’ का संस्थापक था। माओ और उसके साथी कम्युनिस्ट नेताओं ने चीन के समाज को ‘पुनर्गठित’ करने की बात कहते हुए तमाम क्रूरता की थी। 1967 में जब चीन के कई शहरों में उसकी नीतियों के कारण अराजकता फैली थी तो उसने अपनी ही जनता के साथ क्रूरता के लिए सेना लगा दी थी।

12 गोलियों के निशान, सिर-छाती को भारी वाहन से कुचल लाश को घसीटा: दानिश सिद्दीकी के साथ तालिबानी बर्बरता की नई डिटेल

अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के लिए काम करने वाले फोटोजर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की अफगानिस्तान में तालिबान के द्वारा की गई हत्या के संबंध में नया खुलासा हुआ है। सिद्दीकी की मेडिकल रिपोर्ट और X-Ray से यह पता चला है कि उन्हें 12 गोलियाँ मारी गई थी और उनके सिर एवं छाती को भारी वाहन से कुचला गया था।

News18 ने सिद्दीकी की मेडिकल रिपोर्ट एक्सेस करने का दावा किया है। मेडिकल रिपोर्ट के साथ सिद्दीकी की लाश की कई फोटोग्राफ हैं और साथ ही X-Ray रिपोर्ट भी है। इसके माध्यम से यह दावा किया गया है कि मरने के बाद सिद्दीकी की लाश के साथ बर्बरता की गई। रिपोर्ट्स में अफगानी खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सिद्दीकी के शरीर में 12 गोलियों के निशान मिले हैं। इसके अलावा उनके शरीर में कई गोलियाँ मौजूद थीं।

News18 की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सिद्दीकी के शरीर पर घसीटने के निशान मौजूद हैं। इसके अलावा उनकी हत्या के बाद उनकी लाश को किसी भारी वाहन से क्षत-विक्षत किया गया, क्योंकि उनके चेहरे और छाती पर गाड़ी के टायर के निशान थे। सिद्दीकी की रिपोर्ट से साफ़ तौर पर यह पता चलता है कि उनके शरीर पर कई फ्रैक्चर भी हुए थे जो तालिबान के आतंकियों के द्वारा उनके साथ की गई बर्बरता की कहानी बताते हैं।

हालाँकि सिद्दीकी की हत्या के बारे में अफगानिस्तान के कमांडर बिलाल अहमद ने पहले ही खुलासा किया था कि उनके शव के साथ भी बर्बरता की गई थी। उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा था कि चूँकि दानिश सिद्दीकी भारतीय थे और तालिबानी भारत से नफरत करते थे, इसीलिए उनके शव के साथ भी बर्बरता की गई थी। उन्होंने बताया कि सबसे पहले तो गोली मार के दानिश सिद्दीकी की हत्या की गई, फिर जैसे ही तालिबानियों को पता चला कि वो भारतीय हैं उनके सिर के ऊपर गाड़ी चढ़ा दी।

16 जुलाई को हुई इस वारदात के बारे में भारतीय वामपंथी मीडिया ने ‘गोलीबारी में मारे जाने’ की बात कही थी। लिबरल गिरोह ने तालिबान को दोष देने की बजाए हिन्दुओं को भला-बुरा कहा था। रवीश सरीखे पत्रकारों ने ‘बंदूक से निकली गोली’ को लानतें भेजीं थी। लेकिन तालिबान ने सिद्दीकी की मौत पर कहा था कि वो अपनी मौत के लिए खुद ही जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने युद्ध क्षेत्र में आने से पहले तालिबान की अनुमति नहीं ली थी। साथ ही तालिबान ने सिद्दीकी की हत्या के लिए माफी माँगने से भी इनकार कर दिया था।

‘भाई (दाऊद) के घर से बात कर रहा हूँ, कराची से रॉकेट मारूँगा’: रिपोर्ट में दावा- छोटा शकील ने किया कॉल, परमबीर सिंह से जुड़ा मामला

मुंबई पुलिस ने एक कॉल ट्रांसक्रिप्ट जुटाया है, जो अंडरवर्ल्ड के अपराधी छोटा शकील का बताया जा रहा है। छोटा शकील ने फोन कर के मुंबई के एक कारोबारी को धमकी दी थी। मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहे परमबीर सिंह और उनके कुछ साथी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दर्ज रंगदारी के मामले में उस कारोबारी का नाम आया था। छोटा शकील ने श्याम सुंदर अग्रवाल की तरफ से उक्त कारोबारी को धमकी दी थी।

‘मिड डे’ की खबर के अनुसार, उसके द्वारा एक्सेस किए गए ट्रांसक्रिप्ट से ये चीजें पता चली हैं। छोटा शकील से कनेक्शन को लेकर श्याम सुंदर अग्रवाल को मुंबई पुलिस ने महाराष्ट्र के सख्त कानून MCOCA (Maharashtra Control of Organised Crime Act) के तहत बुक किया था। अब मुंबई पुलिस SIT को शक है कि अग्रवाल के खिलाफ वाला मामला फर्जी था। परमबीर सिंह के खिलाफ शिकायतकर्ताओं में एक अग्रवाल का भी नाम है।

मुंबई पुलिस का कहना है कि दाऊद इब्राहिम के करीबी गुर्गे छोटा शकील के ये रिकॉर्डिंग्स हाल के ही हैं। संजय पुनमिया नाम के कारोबारी को फोन पर धमकी मिली थी। जिस फोन नंबर से कॉल किया गया था, वो मुंबई पुलिस के क्राइम क्राइम ब्रांच में दर्ज है और छोटा शकील का ही है। छोटा शकील कराची से इस नंबर का इस्तेमाल रंगदारी माँगने में कर रहा है। इस फोन कॉल में जो आवाज़ है, वो भी उसकी ही बताई जा रही है।

हालाँकि, MCOCA कोर्ट में ये साबित किया जाना है कि ये छोटा शकील की ही आवाज़ है, जिसके लिए उसकी आवाज़ के एक सैम्पल से इसे मैच कराया जाएगा। लेकिन, लॉकडाउन की वजह से इसमें देरी हो रही है। पुनमिया को ये फोन कॉल नवंबर-दिसंबर 2016 में किए गए थे। उन्हें कहा गया था कि वो अपने बिजनेस पार्टनर श्याम सुंदर अग्रवाल के साथ एक डील पर हस्ताक्षर करें। कुछ संपत्तियों को लेकर ये डील होनी थी।

फरवरी 2021 में पीड़ित कारोबारी ने जुहू पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर FIR दर्ज किया गया। परमबीर सिंह के खिलाफ रंगदारी मामलों की जाँच कर रही DCP निमित गोयल के नेतृत्व वाली SIT इस बात की जाँच में लगी है कि 2016 के मामले की FIR 2021 में क्यों हुई। शक है कि ये FIR फर्जी है और बिजनेस डील पर साइन करने हेतु दबाव बनाने के लिए ऐसा किया गया है।

SIT द्वारा जिन अधिकारियों की जाँच की जा रही है, उन्होंने ही इस FIR को दर्ज किया था। मैरीन ड्राइव थाने में परमबीर सिंह के खिलाफ मामला चल रहा है। पिछले महीने उसने पुनमिया और सुनील जैन को गिरफ्तार भी किया था। शक है कि पुलिस अधिकारियों ने ही छोटा शकील को कहा होगा कि वो ऐसा दिखाए कि अग्रवाल की तरफ से फोन कॉल कर रहा है। दाऊद इब्राहिम के भाई इक़बाल कसकर के खिलाफ अग्रवाल ने ही शिकायत दर्ज कराई थी।

इकबाल को 2017 में ठाणे पुलिस ने धर-दबोचा था। उस समय परमबीर सिंह वहाँ के पुलिस कमिश्नर थे और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ठाणे के रंगदारी निरोधी सेल के प्रमुख थे। हाल ही में एंटीलिया बम केस और कारोबारी मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में शर्मा को NIA ने गिरफ्तार किया था। अग्रवाल के भतीजे शरद की शिकायत के बाद सिंह के खिलाफ कोपरी पुलिस थाने में पिछले महीने एक और FIR हुई थी। छोटा शकील और संजय पुनमिया में कुछ इस तरह बात हुई थी:

संजय पुनमिया: हैलो
छोटा शकील: हैलो, संजय बोल रहा है?
संजय पुनमिया: हाँ जी, संजय बात कर रहा हूँ।
छोटा शकील: पहचाना तूने?
संजय पुनमिया: जी
छोटा शकील: तो तूने श्याम को अंदर क्यों कराया?
संजय पुनमिया: मैंने थोड़ी न शिकायत की है।
छोटा शकील: मैं भाई (दाऊद) के घर से बात कर रहा हूँ। तेरे को इधर कराची से ही रॉकेट मारूँगा।
संजय पुनमिया: आप थोड़ा तमीज से बात कर सकते हो न?
छोटा शकील: तेरे को तमीज सिखाएँगे, तू औकात में आ जा। (छोटा शकील का कोई गुर्गा: मुंबई नॉर्मल होगी तो तेरे को फिर से ठोकते हैं।)

जहाँ तक शरद द्वारा दर्ज FIR की बात है, उन्होंने आरोप लगाया था कि परमबीर सिंह के बँगले पर एक DCP ने उनसे 20 करोड़ रुपए की रंगदारी की माँग की थी। साथ ही कहा था कि रुपए देने पर उसके खिलाफ MCOCA नहीं लगाया जाएगा। तब सिंह ठाणे के कमिश्नर थे। शरद का कहना है कि पुनमिया के जरिए उन्होंने 9 करोड़ रुपए दिए भी थे। जब छोटा शकील ने धमकी भरे कॉल किए, तब 2016 में सिंह ठाणे के और 2020 में मुंबई के पुलिस कमिश्नर थे। 2016 के एक दूसरे कॉल में कुछ इस तरह से बातचीत हुई:

संजय पुनमिया: हैलो
छोटा शकील: हाँ संजय, संजय दत्त का छोटा भाई
संजय पुनमिया: हैलो
छोटा शकील: हाँ, बेटा तू सँभल जा
संजय पुनमिया: मैं कर रहा हूँ न सेटलमेंट। मुझे 2-4 दिन का समय दो। आप एकदम क्यों परेशान कर रहे हो मुझे?
छोटा शकील: नहीं, नहीं नहीं नहीं… देखो एक बात क्लियर बताओ। पाकिस्तान का तो तुझे पता ही है न.. क्या है पाकिस्तान?
संजय पुनमिया: अरे मुझे क्या करना है कौन हिंदुस्तान में है और कौन पाकिस्तान में?
छोटा शकील: इधर बम बाँधेगा और उधर जाएगा। उड़ा देगा तेरे को और ख़त्म हो जाएगी बात।
संजय पुनमिया: अरे मैं आपको कुछ बोल रहा हूँ?
छोटा शकील: तू आराम से सेटल कर। आज रात तक फोन कर के मुझे बता। समझ गया?

इसके बाद कारोबारी संजय पुनमिया को छोटा शकील का तीसरा धमकी भरा फोन कॉल नवंबर 2020 में आया था। जहाँ तक अग्रवाल की बात है, उसके खिलाफ भी मुंबई और ठाणे पुलिस में 19 FIR दर्ज हैं। 2016 में कई करोड़ के जमीन के घोटाले में उसे ठाणे क्राइम ब्रांच ने उसे गिरफ्तार भी किया था। उसी साल नवंबर में इस घोटाले का खुलासा हुआ था। SIT अब इस पूरे मामले को जोड़ कर जाँच कर रही है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस की हिट लिस्ट में 10 (7 पुराने-3 नए) आतंकी, नाम: सलीम, युसूफ, फारूक, जुबैर, अब्बास…

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 10 आतंकियों की नई हिट लिस्ट जारी की है। यह लिस्ट पुलवामा हमले में शामिल रहे जैश-ए-मोहम्मद के टॉप कमांडर पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद इस्माइल अल्वी उर्फ लंबू उर्फ अदनान और समीर डार को मुठभेड़ में मार गिराने के बाद जारी किया गया है। हिट लिस्ट में शामिल आतंकियों में 3 नई एंट्री है।

कश्मीर के इंस्पेक्टर जनरल आफ पुलिस (IGP) विजय कुमार ने आतंकियों की नई लिस्ट जारी की है। इसमें शामिल 7 पुराने आतंकियों के नाम हैं: सलीम पर्रे, यूसुफ कंतरू, अब्बास शेख, रियाज शितेरगुंड, फारूक नाली, जुबैर वाली और अशरफ मौलवी। लिस्ट में जो तीन नए आतंकी शामिल किए गए हैं वे हैं, शाकिब मंजूर, उमर मुश्ताक खांडे और वकील शेख।

इन आतंकियों में से ज्यादातर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हैं। इनमें बांदीपोरा का रहने वाला सलीम, युसूफ, रियाज वगैरह शामिल हैं। आईजीपी ने कहा कि जल्द ही इन आतंकियों को पकड़ा जाएगा या उन्हें मुठभेड़ में मार गिराया जाएगा। इनकी सूचना देने पर पुलिस ने पहचान गुप्त रखने और ईनाम देने की भी घोषणा की है।

गौरतलब है कि कश्मीर में इस साल सुरक्षा बलों ने 89 आतंकवादियों को मार गिराया है। इनमें कई शीर्ष कमांडर थे। मार गिराए गए आतंकियों में सबसे ज्यादा 42 लश्कर से थे। ढेर आतंकियों में से 7 विदेशी थे। आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से कश्मीर में आतंकवाद की कमर लगातार टूटी रही है। यही कारण है कि फिलहाल घाटी में करीब 225 आतंकी सक्रिय बताए जा रहे हैं। 2019 में यह संख्या 400 तो 2020 में 300 थी।

हाल ही में यह बात सामने आई थी कि 15 अगस्त से पहले पाकिस्तान ने आतंकी हमलों की बड़ी साजिश रची है। इसके मुताबिक लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद देश में साम्प्रदायिक तनाव फैलाने के लिए जम्मू-कश्मीर में हिंदू मंदिरों को निशाना बना सकते हैं। भारतीय खुफिया एजेंसियों को मिले इनपुट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने की दूसरी बरसी (5 अगस्त) और स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर हिंदू मंदिरों पर हमले हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकी ड्रोन के जरिए आईईडी अटैक कर सकते हैं। हालात को देखते हुए घाटी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। घाटी में 5 अगस्त और 15 अगस्त को लेकर हाई अलर्ट जारी किया गया है।

टोक्यो ओलंपिक सेमीफाइनल: बेल्जियम से हारी भारतीय हॉकी टीम, 41 साल बाद सोने का ख्वाब टूटा

टोक्यो ओलंपिक सेमीफाइनल के मैच में भारत को बेल्जियम ने 5-2 से हरा दिया है। जहाँ पहले 3 क्वार्टर में भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा, अंतिम क्वार्टर में बेल्जियम की टीम का प्रदर्शन शानदार रहा। इस तरह से 41 साल बाद स्वर्ण पदक जीतने का भारत का सपना भी टूट गया। हालाँकि, कांस्य पदक के लिए भारतीय हॉकी टीम की उम्मीदें अब भी बची हुई हैं।

भारतीय हॉकी टीम का मुकाबला टोक्यो ओलंपिक के सेमीफाइनल में बेल्जियम के साथ हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर के जानकारी दी कि वो भी इस मैच को देख रहे हैं। पूरे देश की नजरें इस मैच पर टिकी हुई थीं। जहाँ दूसरे क्वार्टर के बाद मैच 2-2 की बराबरी पर था, वहीं तीसरा क्वार्टर बिना गोल के ही रहा। उससे पहले भारत ने 2-1 की बढ़त बनाई हुई थी। मैच का फैसला अंतिम क्वार्टर में हुआ।

हालाँकि, इस मैच में भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही और शुरू में ही एक पेनल्टी कॉर्नर में बेल्जियम ने गोल कर दिया। लुइक लुइपेर्ट ने बेल्जियम के लिए पहला गोल किया। ये मैच का भी पहला गोल था। हालाँकि, लगभग 9 मिनट बाद हरमनप्रीत सिंह ने एक ड्रैग फ्लिकर के जरिए गोल स्कोर किया। इसके 2 मिनट बाद अमित रोहिदास ने सर्कल के भीतर मनदीप सिंह को बॉल पास किया। इसके बाद मनदीप सिंह ने गोल कर के भारत को लीड दिलाई।

लेकिन, दूसरे क्वार्टर में बेल्जियम ने मजबूती से वापसी की। उन्हें कुछ ही मिनटों में 4 पेनल्टी कॉर्नर मिल गए। हेंड्रिक्स ने इस टोक्यो ओलंपिक टूर्नामेंट में अपना 12वाँ गोल किया और मुकाबला बराबरी पर आ गया। हेंड्रिक्स इस मैच में पूरी लय में नजर आए। अंतिम क्वार्टर में भी उन्होंने एक गोल दाग कर बेल्जियम को लीड दिलाई, जिसके बाद मुकाबला 3-2 से बेल्जियम के पक्ष में हो गया। ये इस टूर्नामेंट में हेंड्रिक्स का 13वाँ गोल था।

एलेक्जेंडर हेंड्रिक्स यहीं नहीं रुके। उन्होंने अंतिम 8 मिनट में एक और गोल किया, जो इस टूर्नामेंट में उनका 14वाँ गोल था और इस मैच में बेल्जियम का चौथा। इसके बाद भारत 4-2 से पीछे हो गया। बेल्जियम ने इसके बाद 5वाँ गोल किया।

याद दिला दें कि भारतीय पुरुष हॉकी एएम ने ग्रेट ब्रिटेन को 3-1 से हरा कर टोक्यो ओलंपिक सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। दिलप्रीत सिंह, गुरजंत सिंह और हार्दिक सिंह ने क्वार्टरफाइनल मैच में 3 गोल किए थे। पिछले 41 वर्षों में देश को इस तरह का मौका देखने को नहीं मिला था। फाइनल में जगह बनाने के लिए हमें बेल्जियम को हराना ज़रूरी था, जो नहीं हो पाया। 1972 के बाद भारतीय टीम पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल खेली।

सागर धनखड़ मर्डर केस में सुशील कुमार मुख्य आरोपित: दिल्ली पुलिस ने 20 लोगों के खिलाफ फाइल की 170 पेज की चार्जशीट

दिल्ली पुलिस ने छत्रसाल स्टेडियम में पहलवान सागर धनखड़ हत्याकांड में 170 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें सुशील कुमार को मुख्य आरोपित बनाया गया है। 3 महीने की तहकीकात के बाद अब दिल्ली क्राइम ब्रांच के पास सुशील कुमार के खिलाफ सबूतों और गवाहों की पूरी लिस्ट तैयार हो गई है। 

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने सुशील कुमार समेत कुल 20 आरोपित बनाए हैं। इनमें से अब तक 15 आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि 5 अभी भी फरार हैं। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में पहलवान सुशील कुमार पर जो आरोप लगाए गए हैं, अगर वो साबित हो गए तो ओलंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार के लिए जेल में लंबा वक्त बिताना पड़ सकता है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों पहलवान और भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS) के अधिकारी सुशील कुमार को रेलवे की नौकरी से सस्पेंड कर दिया गया था। उत्तर रेलवे के सीपीआरओ दीपक कुमार ने इसकी जानकारी दी थी। बता दें कि सुशील कुमार पर एक पहलवान की हत्या में संलिप्तता का आरोप है, जिसकी जाँच चल रही है। 

उल्लेखनीय है कि दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में चार मई की रात सागर पहलवान की हत्या हुई थी। हत्या का आरोप सुशील कुमार और उसके साथियों पर लगा था। इसके बाद से सुशील कुमार अपने साथी अजय के साथ फरार चल रहा था। दिल्ली पुलिस ने सुशील कुमार पर एक लाख व उसके साथी अजय पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। रविवार (23 मई 2021) को दोनों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक छत्रसाल स्टेडियम में पहलवान सागर धनकड़ की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार और उसके साथी अजय उर्फ सुनील की मदद राष्ट्रीय स्तर की एक महिला खिलाड़ी ने की थी। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि रविवार (मई 23, 2021) को गिरफ्तारी के समय सुशील व अजय के पास से बरामद स्कूटी इसी महिला खिलाड़ी के नाम पर रजिस्टर्ड बताया गया।

शनिवार (मई 22, 2021) शाम को सुशील व अजय इसी महिला खिलाड़ी के पश्चिम दिल्ली के हरि नगर स्थित घर पर रुके। रविवार को इस खिलाड़ी की स्कूटी लेकर दोनों मुंडका में किसी से रुपए लेने जा रहे थे। उसी समय पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। सुशील कुमार का दिल्ली के वांटेड अपराधियों के साथ क्राइम कनेक्शन भी सामने आया था। 

नूर इस्लाम ने नशा के लिए शराब को बनाया जहरीला, 172 लोगों की ले ली जान: अब मौत आने तक रहेगा सलाखों के पीछे

कोलकाता की एक अदालत ने वर्ष 2011 में जहरीली शराब पीने से हुई 172 लोगों की मौत के मामले में मुख्य आरोपित खोड़ा बादशाह उर्फ नूर इस्लाम फकीर को सोमवार (2 अगस्त, 2021) को उम्रकैद की सजा सुनाई। अलीपुर जिला सत्र न्यायालय ने बादशाह उर्फ नूर इस्लाम फाकीर को हत्या का दोषी करार दिया। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि बादशाह की मृत्यु होने तक सजा जारी रहेगी और वह जेल में ही रहेगा। खोड़ा बादशाह को लोगों को जहर देने का भी दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई गई। अदालत ने कहा कि दोनों सजा एक साथ चलेंगी।

अभियोजन ने अदालत के समक्ष बताया कि 14 दिसंबर 2011 को बादशाह द्वारा बेची गई जहरीली शराब पीने से दक्षिण 24 परगना जिले के मगराहट, उस्थी और मंदिर बाजार में रहने वाले कम से कम 172 लोगों की मौत हो गई थी जबकि कई लोग अंधेपन जैसे स्थायी विकलांगता के शिकार हुए थे। बादशाह ने बेगुनाह होने का दावा करते हुए कहा था कि वह ऐसा कोई व्यापार नहीं करता था।

आपराधिक जाँच विभाग (CID) ने पाया कि मिथाइल अल्कोहल और कुछ जहरीले रसायनों का इस्तेमाल अवैध शराब को और अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए किया गया था, जिससे शराब विषाक्त हो गई। अपने कई सहयोगियों की गिरफ्तारी के बाद आत्मसमर्पण करने वाला फकीर 2012 से न्यायिक हिरासत में है।

शनिवार (31 जुलाई, 2021) को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश पुष्पल सतपती ने उन्हें दोषी करार दिया, जिन्होंने सोमवार तक सजा सुरक्षित रखी। फकीर के वकील, राम्पदा जाना ने कहा, “मेरे मुवक्किल ने अदालत को बताया कि व्यापार अन्य लोगों द्वारा चलाया जाता था और वह सीधे तौर पर उसमें शामिल नहीं था। हम इस आदेश को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।” वहीं, लोक अभियोजक तमल मुखर्जी ने कहा, “आदेश ने समाज को एक कड़ा संदेश दिया है।”

उल्लेखनीय है कि 2018 में अलीपुर अदालत ने फकीर की पत्नी शकीला बीबी, अयूब अली लश्कर, जियासुद्दीन लश्कर, खैरुन्निसा बेवा, मोइनुद्दीन गाज़ी और रबीउल लश्कर को बरी कर दिया, लेकिन चार अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

बता दें कि राज्य में साल 2011 में ममता बनर्जी के कॉन्ग्रेस के साथ सरकार बनाने के कुछ महीनों बाद ही जहरीली शराब कांड हुआ था। ममता बनर्जी ने 34 सालों तक बंगाल पर राज करने वाले वाम मोर्चे को सत्ता से बेदखल कर सरकार बनाया था। उन्होंने प्रत्येक पीड़ित के परिजन को 2-2 लाख रुपए के मुआवजे की घोषणा की थी।

इससे वामपंथी नेताओं ने एक राजनीतिक बहस छेड़ दी और आरोप लगाया गया कि प्राकृतिक आपदाओं के पीड़ितों के लिए धन का राजनीतिक कारणों से दुरुपयोग किया जा रहा है। वहीं, तृणमूल कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया था कि शराब की घटना माकपा की करतूत थी।

जेपी नड्डा से मिलने के बाद बाबुल सुप्रियो ने पलटा फैसला, कहा- सांसद के पद पर बना रहूँगा, लेकिन राजनीति नहीं करूँगा

हाल ही में राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा करने वाले पश्चिम बंगाल के आसनसोल से सांसद बाबुल सुप्रियो अब अपने पद पर बने रहेंगे। दरअसल, सोमवार (2 अगस्त) को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात करने के बाद बाबुल सुप्रियो ने कहा, “वे सांसद बने रहेंगे, लेकिन राजनीति नहीं करेंगे। सांसद एक संवैधानिक पद है।” उन्होंने कहा कि वे किसी पार्टी में भी नहीं जाएँगे और सामाजिक कार्य करना जारी रखेंगे। सुप्रियो ने कहा कि वह आसनसोल में कई विकास कार्यों को कराने में जुटे हुए हैं और ऐसा करते रहेंगे।

बाबुल ने कहा, ”मैंने नड्डा सर को अपनी बातें पहले भी बता दी थीं। आज फिर मैंने उन्हें अपने फैसले के बारे में बताया और कहा कि राजनीति छोड़ने का फैसला मन से ले चुका है और इससे पीछे नहीं हट सकता हूँ। उन्होंने मुझे बहुत प्यार दिया।” उन्होंने आगे कहा, “मैं दिल्ली में सांसद का बंगला खाली कर दूँगा और सुरक्षाकर्मियों को जल्द ही उनकी ड्यूटी से मुक्त कर दूँगा।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक भाजपा नेता बाबुल सुप्रियो ने कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया के जरिए राजनीति छोड़ने का इशारा किया था। उनके खुद के ही फेसबुक पोस्ट की मानें तो पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की थी। सुप्रियो ने फेसबुक के जरिए लिखा ‘अलविदा’। इस दौरान उन्होंने आश्वासन दिया था कि वो किसी और पार्टी में नहीं जा रहे हैं। वो लगातार दूसरी बार पश्चिम बंगाल के आसनसोल से सांसद बने हैं।

बता दें कि 51 वर्षीय बाबुल सुप्रियो गायक भी रह चुके हैं। उन्होंने 90 के दशक के मध्य में हिंदी, बंगाली और उड़िया गानों के जरिए अपनी पहचान बनाई थी। साल 2014 में वो राजनीति में आए थे और उन्हें शहरी विकास राज्यमंत्री बनाया गया था। उन्हें भारी उद्योग मंत्रालय राज्यमंत्री भी बनाया गया था। संगीत उन्हें विरासत में मिला था। उनके दादा भी संगीतकार थे। हालाँकि, हाल ही में उनके विधानसभा चुनाव हारने के बाद हुए मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें जगह नहीं मिल सकी थी।

यूपी में मुहर्रम सर्कुलर की भाषा पर घमासान: भड़के शिया मौलाना कल्बे जव्वाद ने बहिष्कार का जारी किया फरमान

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा मुहर्रम को लेकर जारी किए गए सर्कुलर पर हंगामा शुरू हो गया है। दरअसल, प्रदेश डीजीपी मुकुल गोयल की ओर से जारी किए गए सर्कुलर में किसी भी तरह के जुलूस-ताजिया व अन्य आयोजन पर रोक लगा दी गई है। इसी बीच सर्कुलर की भाषा पर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने नाराजगी व्यक्त की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि डीजीपी अपना बयान वापस लें और सर्कुलर को लेकर माफी माँगे। जव्वाद का आरोप है कि सर्कुलर में गलत भाषा का इस्तेमाल किया गया है और साथ ही गौहत्या, यौन संबंधी कई घटनाओं का भी जिक्र किया गया है। मौलाना ने प्रदेश की मुहर्रम कमेटियों को पुलिस की किसी भी मीटिंग में शामिल नहीं होने का फरमान जारी किया है।

गौरतलब है कि योगी सरकार की तरफ से मुहर्रम के लिए जारी किए गए सर्कुलर के अनुसार, 19 अगस्त को प्रशासन ने किसी भी तरह का जुलूस निकालने पर पाबंदी लगाई है। इसमें ताजिया का न जुलूस निकलेगा और ना ही कर्बला में मेला लगेगा। दो-तीन की संख्या में लोग ताजिया की मिट्टी ले जाकर कर्बला में ठंडा करेंगे। रास्ते से अतिक्रमण हटवा दिया जाएगा।

ताजिया चौक की सफाई भी कराई जाएगी। इस बार कोविड को देखते हुए जिलों में मुहर्रम जुलूस की अनुमति नहीं दी गई है। डीजीपी ने जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि यूपी के सभी जरूरी स्थानों पर चेकिंग की जाए, मौलानाओं से संवाद बनाने और बीट स्तर पर हालातों का जायजा लेकर व्यवस्था बनाएँ।

बता दें कि मुहर्रम के सर्कुलर में प्रशासन की भाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सर्कुलर में भाषा के इस्तेमाल को लेकर शिया समुदाय के मौलानाओं, इमामों में आक्रोश है। शिया मौलाना कल्बे सिब्तैन नूरी ने गाइडलाइन के ड्राफ्ट को तुरंत बदलने की माँग की है। मौलाना कल्बे सिब्तैन नूरी ने कहा कि मुहर्रम के संबंध में पुलिस प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइन से शिया समुदाय के धार्मिक जज़्बात को ठेस पहुँची है। इसमें मुहर्रम व शिया समुदाय पर सीधे तौर पर बेबुनियाद इल्ज़ाम लगाए गए हैं। इस ड्राफ्ट को तुरंत बदला जाए।