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‘मुस्लिम महिला अधिकार दिवस’ पर भड़के ओवैसी, कहा- ‘तीन तलाक कानून असंवैधानिक, मुसलमानों को बदनाम करता है’

तीन तलाक कानून के दो साल पूरे होने पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार रविवार (अगस्त 1, 2021) को ‘मुस्लिम महिला अधिकार दिवस’ ( Muslim Women’s Rights Day ) मना रही है। 1 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने तीन तलाक (Triple Talaq) को कानूनी अपराध घोषित किया था। इस दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तीन तलाक कानून को लेकर मोदी सरकार पर कटाक्ष किया है। ओवैसी ने कहा कि इस कानून से मुस्लिम महिलाओं का और अधिक शोषण होगा और उनकी समस्याओं में इजाफा होगा। उन्होंने कहा कि इससे जुड़े केवल मामले दर्ज किए जाएँगे और कोई न्याय नहीं दिया जाएगा। मुसलमानों ने इस आधार को स्वीकार नहीं किया है। 

‘यह कानून (तीन तलाक) असंवैधानिक है’

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह कानून (तीन तलाक) असंवैधानिक है और इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई है। यह समानता के खिलाफ है, मुसलमानों को बदनाम करता है। ओवैसी ने पूछा कि क्या मोदी सरकार केवल मुस्लिम महिला (अधिकार) दिवस मनाएगी? हिंदू, दलित और ओबीसी महिलाओं के सशक्तिकरण के बारे में क्या? 

वहीं ओवैसी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा, “सरकार आज ‘मुस्लिम महिला अधिकार दिवस’ मना रही है। मोदी मुस्लिम खवातीन से हमदर्दी का ढोंग कर रहे हैं। मोदी जी, 7 साल से मुस्लिम खवातीन अपने अधिकारों के लिए लड़ रही है। इस ‘दिवस’ के बहाने ही सही, आपको इनकी बातें सुननी चाहिए।”

बता दें कि इससे पहले केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा था कि एक अगस्त को मुस्लिम महिला अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाएगा। नकवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 1 अगस्त 2019 के दिन तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को कानूनी अपराध घोषित किया था। 

नकवी के अनुसार, तीन तलाक के कानूनी अपराध बनाए जाने के बाद बड़े पैमाने पर तीन तलाक की घटनाओं में कमी आई है। देश भर की मुस्लिम महिलाओं ने इसका स्वागत किया है। 1 अगस्त को देश भर में विभिन्न संगठनों द्वारा मुस्लिम महिला अधिकार दिवस मनाया जाएगा।

गौरतलब है कि लोकसभा में 25 जुलाई 2019 को दिन भर चली चर्चा के बाद बहुप्रतिक्षित मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक यानी तीन तलाक पर रोक सम्बन्धी बिल पास हो गया था। मत विभाजन के दौरान पक्ष में 303 और विपक्ष में 82 वोट पड़े थे। बिल में संशोधन के लिए विपक्षी दलों के तरफ से लाए गए प्रस्ताव भी ख़ारिज हो गए थे।

हादसा या हत्या: धनबाद जज उत्तम आनंद मामले में ऑटो के पीछे जा रहे बाइक सवार की तलाश, आखिर रुका क्यों नहीं?

धनबाद सिविल कोर्ट के जज उत्तम आनंद की मौत की गुत्थी सुलझाने में एसआइटी लगी हुई है। इस मामले में एक बात सामने आई है कि 28 जुलाई की सुबह मॉर्निंग वॉक के दौरान न्यायाधीश को ऑटो ने जिस वक्त टक्कर मारी थी, ठीक उसी समय बाइक से एक शख्स हेलमेट पहने जा रहा था।

उसका चेहरा और मोटरसाइकल नंबर सीसीटीवी में पता नहीं चल पा रहा है, लेकिन यह शख्स घटना के बाद एक पल के लिए भी मौका-ए-वारदात पर नहीं रुका, न ही एक बार भी पलट कर सड़क किनारे पड़े न्यायाधीश को देखा। यह ऑटो के पीछे-पीछे चला जा रहा था। बाइक सवार युवक की गतिविधि प्रथम दृष्टया संदेहास्पद लग रही है। पुलिस इसकी तलाश कर रही है।

इस बीच इस मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी आ गई है। इसमें बताया गया है कि उनके सिर पर लोहे की किसी भारी चीज से वार किया गया था। साथ ही सीने पर भी गहरी चोट थी। ऑटो की टक्कर से जज को मुँह के बल गिरना चाहिए था, जबकि वे पीछे की तरफ गिरे थे।

पुलिस हर एंगल से सुराग तलाशने में जुटी हुई है। पीडब्लूडी की मदद से पुलिस ने ये भी पता लगाने की कोशिश की कि कहीं सड़क पर फिसलन के कारण वे पीछे की तरफ तो नहीं गिरे, लेकिन जाँच में ऐसा कुछ नहीं पाया गया।

इधर जज की मौत के मामले में लापरवाह पुलिस पदाधिकारियों पर गाज गिरनी शुरू हो गई है। धनबाद एसएसपी संजीव कुमार ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश-8 उत्तम आनंद की मौत के मामले में पाथरडीह थाना प्रभारी उमेश मांझी को निलंबित कर दिया है। इससे पहले  एसआईटी (SIT)  की टीम ने शनिवार (जुलाई 31, 2021) की देर रात पाथरडीट भोरिक खटाल निवासी ऑटो मालकिन सुगनी देवी के पति रामदेव लोहार को पाथरडीह के जंगल से धर दबोचा। रामदेव लोहार डकैती सहित कई अपराधिक वारदातों में शामिल रहा है।

गौरतलब है कि झारखंड के धनबाद में बुधवार (जुलाई 28, 2021) को दिनदहाड़े अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी से एक हफ्ते में रिपोर्ट माँगी है। साथ ही कहा कि देश भर में न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के संबंध में निश्चित तौर पर सुनवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने  मामले में झारखंड सरकार से जवाब भी माँगा है।

पीवी सिंधु ने ओलम्पिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता: वेटलिफ्टिंग और बॉक्सिंग के बाद बैडमिंटन ने दिलाया देश को तीसरा मेडल

भारत की महिला स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू ने ब्रॉन्ज मेडल के लिए हुए मुकाबले में चीन की हे बिंगजियाओ को हराकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर लिया है। पीवी सिंधू ने टोक्यो ओलिंपिक 2020 में भारत के लिए दूसरा मेडल जीता। उन्होंने रविवार को ब्रॉन्ज मेडल मैच में चीन की हे बिंग जियाओ (He Bing Jiao) को 21-13, 21-15 से मात दी। इस जीत के साथ वह ओलंपिक खेलों में दो मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी भी बन गईं है।

रियो ओलिंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वीली पीवी सिंधू को सेमीफाइनल मुकाबले में चीनी ताइपे ताई जु यिंग से हार का सामना करना पड़ा था और वो फाइनल में पहुँचने से चूक गई थीं, लेकिन ब्रॉन्ज मेडल के लिए खेले गए मुकाबले में उन्होंने जीत हासिल कर भारत की सिर गर्व से ऊँचा कर दिया। बता दें कि वेटलिफ्टर मीराबाई चानू के बाद वो टोक्यो ओलिंपिक में भारत के लिए दूसरा मेडल जीतने वाली खिलाड़ी बनीं है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन की बिंग जियाओ के खिलाफ मुकाबले में सिंधु ने शुरू से ही आक्रामक खेल दिखाया और पहले गेम में 11-8 की बढ़त बनाई। इसके बाद बढ़त को 16-10, 19-12 किया और पहला गेम 21-13 से जीत लिया। दूसरे गेम में भी भारतीय शटलर ने अच्छी शुरुआत की और देखते ही देखते 5-2 की बढ़त बना ली। बिंग जियाओ पहला गेम हारने के बाद कुछ दबाव में नजर आईं जिससे उनके शॉट बाहर भी पड़े।

हैदराबाद की 26 साल की शटलर सिंधु के खिलाफ दूसरे गेम में बिंग जियाओ ने वापसी की भी कोशिशें की और स्कोर 6-8 किया। सिंधु ने हालाँकि कम गलतियाँ करते हुए बढ़त को बरकरार रखा और स्कोर 11-8 कर दिया। बिंग जियाओ ने फिर 11-11 से बराबरी की लेकिन वर्ल्ड चैंपियन सिंधु ने 16-13 से बढ़त ली और फिर 21-15 से गेम जीतकर मेडल पर कब्जा जमाया।

इस जीत पर पी वी सिंधु को प्रधानमंत्री मोदी ने भी ट्वीट कर बधाई दी।

भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी सिंधु को इस जीत पर बधाई दी।

PM मोदी रचने जा रहे एक और इतिहास: 75 साल में सुरक्षा परिषद बैठक की अध्यक्षता करने वाले बनेंगे पहले भारतीय प्रधानमंत्री

अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक और इतिहास रचने जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनि​धि सैयद अकबरुद्दीन ने रविवार (1 अगस्त 2021) को बताया कि देश के आजाद होने के बाद पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक की अध्यक्षता करने वाले हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभाल ली है।

सैयद अकबरुद्दीन के मुताबिक, 9 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक की अध्यक्षता पीएम मोदी कर सकते हैं। 75 साल में ये पहला मौका होगा, जब एक भारतीय प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र के 15 सदस्यीय निकाय के एक कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। अकबरुद्दीन ने साल 2019 की पीएम मोदी की संयुक्त राष्ट्र की अंतिम तस्वीर साझा करते हुए ट्वीट किया, ”हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक की अध्यक्षता करने में दिलचस्पी दिखाई है। इससे ये साबित होता है कि हमारे लीडर अब फ्रंट से लीड करना चाहते हैं।”

उन्होंने बताया कि सुरक्षा परिषद में भारत का ये 8वाँ कार्यकाल है। नरेंद्र मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे, जो सुरक्षा परिषद की किसी मीटिंग की अध्यक्षता करेंगे। उन्होंने कहा कि भले ही ये वर्चुअल मीटिंग होगी, लेकिन हमारे लिए ऐतिहासिक है।

भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे टीएम तिरुमूर्ति ने बताया कि इस दौरान भारत तीन हाई लेवल मीटिंग करने जा रही है, जिसमें समुद्री सुरक्षा, शांति स्थापना और आतंकवाद का मुकाबला जैसे गंभीर मामलों पर चर्चा की जाएगी।

गौरतलब है कि सुरक्षा परिषद का हर सदस्य देश, एक महीने के लिए परिषद की अध्यक्षता संभालता है। अगस्त 2021 में सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता भारत के पास रहेगी। सुरक्षा परिषद के 15 सदस्य हैं, जिनमें से 5 चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका स्थायी हैं। वहीं 10 अस्थायी सदस्य हैं।

भारत भी इसके अस्थायी देशों में से एक है। अस्थायी सदस्य के तौर पर भारत को दो साल का कार्यकाल मिला है, जो 1 जनवरी 2021 से शुरू हो चुका है। वहीं, भारत ने सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष की कमान संभाल ली है, जो एक महीने (अगस्त 2021) तक रहेगी। बताया जाता है कि हर महीने अंग्रेजी के लैटर के आधार पर अध्यक्षता बदलती रहती है। अब भारत को दिसंबर 2022 में फिर से अध्यक्षता करने का मौका मिलेगा।

UP में सपा-बसपा बेचैन क्यों: कोरोना प्रबंधन पर WHO की तारीफ या मुजफ्फरनगर दंगे और कैराना पलायन को भूल आगे बढ़ने का डर?

भारतीय राजनीति में कॉन्ग्रेस के बाद ऐसा पहली बार हुआ है की गैर-कॉन्ग्रेसी सरकार इतनी मजबूत बहुमत के साथ सत्ता में काबिज है। कभी 2 सीटों वाली भाजपा आज विश्व की सबसे बड़ी जनाधार वाली राजनीतिक पार्टी है। विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में आज विपक्ष ना के बराबर है। देश भर में गैर-भाजपा नेताओं की मुलाकात सिर्फ BJP को रोकने के लिए चरम पर है। राज्य की राजनीति में जो एक-दूसरे को देखना पसंद नहीं करते, देश की राजनीति में एक-दूसरे के साथ सिर्फ इस बात को लेकर गठबंधन कर रहें है ताकि 2024 में वो बीजेपी की सत्ता में आने से रोक सकें।

उस से पहले 2022 में भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा का चुनाव होने वाले है। एक ऐसा राज्य जिसे 5 साल पहले तक एक दंगाई और बदनाम राज्य का दर्जा प्राप्त था। जो आज देश में सबसे अग्रणी राज्यों में से है। उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह से पिछले 4 वर्षों में काम किया है, उसकी प्रशंसा देश और विदेशों में भी हुई है। योगी सरकार द्वारा कोरोना काल में किए गए काम की प्रशंसा WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) तक हुई है।

कोरोना काल में प्रदेश में लौटे लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार देने से लेकर देश के सबसे बड़े जनसंख्या वाले राज्य में कोरोना जैसी महामारी ना ही कभी विकराल रूप से फैली और ना ही स्थानीय लोगों में कभी भय का माहौल बना। एक सक्षम और कुशल नेतृत्व ने इस बात को साबित कर दिया की अगर संसाधनों का सही इस्तेमाल किया जाए तो कोई भी कार्य मुश्किल नहीं है। केंद्र और राज्य में बीजेपी की सरकार होने से एक अच्छा समन्वय और संबंध बना रहा।

केंद्र की सहायता और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ द्वारा लिए गए सकारात्मक निर्णयों से राज्य प्रगति की तरफ अग्रसर है। आज उत्तर प्रदेश में दंगाइयों पर जिस तरह से नकेल कसा गया है, वहाँ की कानून व्यवस्था दुरुस्त की गई है, यह सिर्फ एक कुशल मुख्यमंत्री के द्वारा ही संभव था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद लगातार कह रहे हैं कि हमारी उत्तर प्रदेश की सरकार को 4 साल हो गए हैं, लेकिन एक भी दंगा इन चार सालों के दौरान नहीं हुआ।

जबकि पहले इसी राज्य में हमसब ने 2017 में मुज्ज़फरनगर का दंगा भी देखा है, और ‘कैराना पलायन’ भी देखा है। लेकिन, योगी सरकार में हम सब ने उत्तर प्रदेश को आगे बढ़ते और आत्मनिर्भर बनते देखा है। आज पर्यटकों के लिए भी यूपी एक केंद्र बना हुआ है। आगरा के बाद आज के समय में अयोध्या, काशी, लखनऊ, वाराणसी और कुशीनगर समेत अनेक पर्यटन केंद्र हैं। देश भर में सबसे ज़्यादा एयरपोर्ट वाला राज्य यूपी है।

अयोध्या का नवीनीकरण और ‘राम मंदिर’ का भव्यता पर्यटकों को और ज्यादा आकर्षित करेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, और सभी वर्गों के विकास में जिस तरह से कार्य हुए है, वह प्रशंसनीय है। साथ ही साथ ग्रेटर नोएडा, लखनऊ और अयोध्या फिल्म शूटिंग के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। आज का उत्तर प्रदेश ‘आधुनिक उत्तर प्रदेश’ है, जो पिछले 4 वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किए गए कार्यों के उदाहरण है।

सपा, बसपा और छोटे दलों की बेचैनी

सपा और बसपा की बेचैनी इस बार अधिक है। अभी उनके सामने 2022 में होने वाला यूपी विधानसभा चुनाव सबसे मुश्किल चुनाव है। वर्तमान में केंद्र की बीजेपी की सरकार और यूपी की बीजेपी की सरकार जिस मजबूती और दृढता से जन-कल्याण के लिए कार्य कर रही है, जिसे देखकर जनता का उसे अपार समर्थन मिल रहा है। जहाँ एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अभी उत्तर प्रदेश के वाराणसी से वर्तमान सांसद हैं और उनके द्वारा देश और वाराणसी में किए गए अकल्पनीय विकास के कार्य उत्तर प्रदेश को दिन प्रति दिन वैश्विक स्तर पर अलग पहचान दे रहे हैं।

2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को रोकने के लिए एक दूसरे के सालों से विपक्षी रहे सपा और बसपा एकसाथ आए थे। लेकिन, उनको करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने यह स्पष्ट किया है, इसबार बसपा से गठबंधन नहीं होगा। 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के सहयोगी रहे कॉन्ग्रेस भी इस बार सपा के साथ नहीं होगी। हालाँकि, सपा ने आम आदमी पार्टी और छोटे दलों से गठबंधन को नाकारा नहीं है।

सत्ता में आने के लिए और बीजेपी को रोकने के लिए ये दल किसी से भी गठबंधन कर सकते है। इसे आप सत्ता का लोभ कहें या फिर बीजेपी को रोकने के लिए तमाम पैंतरे, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी की जोड़ी को आज के समय में सबसे ताकतवर ‘राजनीतिक जोड़ी’ के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में मोदी के बाद देश योगी को प्रधानमंत्री के अगले चेहरे के रूप में भी देख रहा है।

यह वजह यह भी हो सकता है की प्रधानमंत्री मोदी की तरह ही मुख्यमंत्री योगी भी कड़े फैसले लेने में किसी तरह के संकोच नहीं करते हैं। इस तरह सपा, बसपा, और कॉन्ग्रेस समेत अनेक छोटे दलों के लिए यह चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है| भारतीय राजनीति में उत्तर प्रदेश की का एक बड़ा किरदार है| इसलिए भी 2022 का विधानसभा चुनाव अहम हो जाता है। बीजेपी के लिए भी यह चुनाव अहम है, क्योंकि इस इस चुनाव के नतीजे पक्ष में आते हैं तो उसे 2024 के लिए बड़ी मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलेगी।

(ये लेखक के अपने विचार हैं गुलशन कुमार बिहार के मोतिहारी स्थित महात्मा गाँधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय (MGCUB) के ‘गाँधी एवं शांति अध्ययन विभाग’ में M.Phil के शोधार्थी हैं।)

रसगुल्ला के कारण राजदीप ने बंगाल हिंसा पर नहीं पूछा सवाल: TheLallantop के शो में कबूली बात, देखें वीडियो-समझें पत्रकारिता

समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ के वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने कहा है कि उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से वहाँ हो रही हिंसा पर इसीलिए सवाल नहीं पूछे, क्योंकि ऐसा करने पर उन्हें रसगुल्ला नहीं मिलता। उन्होंने ‘दी लल्लनटॉप’ के यूट्यूब चैनल में संपादक सौरभ द्विवेदी के साथ चर्चा के दौरान ये बात कही। ‘नेता नगरी’ नामक कार्यक्रम के इस एपिसोड में ममता बनर्जी के हालिया दिल्ली दौरे को लेकर चर्चा हो रही थी।

सौरभ द्विवेदी ने राजदीप सरदेसाई से सवाल पूछा था कि पश्चिम बंगाल में जिस तरह चुनाव बाद हिंसा हो रही है और भाजपा कार्यकर्ताओं को TMC के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रकट रूप से निशाना बनाया जा रहा है, क्या इसके बारे में ममता बनर्जी के साथ उनका कोई सवाल-जवाब हुआ? क्या ममता बनर्जी को इसकी कोई फ़िक्र है? इस पर राजदीप सरदेसाई ने सफाई दी कि उन्होंने ममता बनर्जी का कोई टीवी इंटरव्यू नहीं किया है।

राजदीप ने कहा कि वो ममता बनर्जी के साथ ‘चाय पर चर्चा’ के लिए गए थे, जहाँ उन्होंने पूछा कि क्या बंगाल हिंसा से आपकी छवि को कोई नुकसान पहुँचा है? बकौल राजदीप सरदेसाई, ममता बनर्जी ने उन्हें जवाब दिया कि भाजपा उन्हें घेरने के लिए ये सब कह रही है और ये कहना गलत है कि उनकी ही वजह से ये सब हो रहा। ममता बनर्जी ने ये भी कहा कि उन्होंने तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के कैडर को शांत बनाए रखने के निर्देश दे दिए थे।

ममता बनर्जी ने राजदीप सरदेसाई से ये भी कहा कि पश्चिम बंगाल में जो भी हिंसा हुई, उसमें से अधिकतर उनकी जीत और उनके मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बीच वाले समयावधि में हुई।राजदीप सरदेसाई ने कहा कि अगर वो सिर्फ हिंसा हिंसा पर सवाल पूछते तो ये ‘चाय पर चर्चा’ की दिशा कहीं और भटक जाती। साथ ही ये भी दावा किया कि उन्होंने ममता बनर्जी से कहा कि हिंसा में TMC के बड़े नेताओं के नाम सामने आए हैं।

राजदीप सरदेसाई ने सौरभ द्विवेदी से कहा, “मैं आपको आश्वासन देता हूँ। अगर ये टीवी इंटरव्यू होता तो सीधे सवाल-जवाब होते। अब ममता बनर्जी जीत कर आई हैं तो बधाई देने जाना पड़ता है न।” इस पर द्विवेदी ने कहा कि उन्हें आश्वासन देने की जरूरत नहीं है, ये सवाल बस उत्सुकतावश किया गया था। इसके बाद राजदीप सरदेसाई ने कहा, “इस तरह के सवाल पूछता तो रसगुल्ला नहीं मिलता।”

खाली ‘रसगुल्ला पत्रकारिता’ सुननी है तो 8 मिनट 5 सेकंड से 8 मिनट 10 सेकंड तक सुनें। मम्मी कसम ‘मारक मजा’ देगी!

वैसे राजदीप सरदेसाई, ममता बनर्जी और रसगुल्ला साथ में पहली बार चर्चा में नहीं आए हैं। 2 मई, 2021 को पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम की कवरेज के दौरान राजदीप सरदेसाई ने टिप्पणी की थी कि यदि तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) बंगाल में जीत जाती है तो उसे कॉन्ग्रेस को रसगुल्ला का ट्रीट देना चाहिए। उन्होंने ध्रुवीकरण की बात करते हुए कहा था कि मतदाताओं ने सोचा कि कॉन्ग्रेस जीतेगी नहीं, इसीलिए उन्होंने अपना वोट TMC को दिया।

जम्मू-कश्मीर में अब पत्थरबाजाें, देशद्रोहियों को नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी और पासपोर्ट: सरकार का आदेश, सर्कुलर जारी

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने रविवार (1 अगस्त) को देशद्रोहियों और पत्थरबाजों पर नकेल कसने के लिए बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने आदेश दिया है कि पत्थरबाजों और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने वाले लोगों को ना तो सरकारी नौकरी दी जाएगी और न ही उनके पासपोर्ट का वेरिफिकेशन किया जाएगा। इससे राज्य और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले इन लोगों को विदेश जाने का मौका नहीं मिलेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीआईडी की स्पेशल ब्रांच कश्मीर के एसएसपी ने अपने अधीनस्थ सभी अधिकारियों और कर्मियों को इस संबंध में सर्कुलर जारी किया है। सर्कुलर में उन्होंने कहा है कि पासपोर्ट, सरकारी नौकरी या सरकारी योजनाओं से जुड़े मामलों में किसी व्यक्ति की सिक्योरिटी क्लियरेंस की रिपोर्ट तैयार करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखा जाए। जैसे वो व्यक्ति पत्थरबाजी, कानून-व्यवस्था भंग करने या किसी दूसरे अपराध में शामिल न रहा हो। यदि वह ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो उसे सिक्योरिटी क्लियरेंस न दिया जाए।

सीआईडी की स्पेशल ब्रांच ने जारी किया सर्कुलर

इसके साथ ही सर्कुलर में ये भी कहा गया है कि ऐसे व्यक्तियों की पहचान के लिए संबंधित पुलिस स्टेशन से भी रिपोर्ट ली जा सकती है। सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस के पास भी ऐसे लोगों की सीसीटीवी फुटेज, तस्वीरें, वीडियो, ऑडियो और क्वाडकॉप्टर के जरिए ली गईं तस्वीरें रहती हैं, इसलिए उनकी भी मदद ली जाए।

गौरतलब है कि ​साल 2020 में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति ने सीआईडी द्वारा चरित्र और पूर्ववृत्त के उचित सत्यापन की सिफारिश की थी, जिसके बाद जम्मू और कश्मीर सिविल सेवा (चरित्र और पूर्ववृत्त सत्यापन) नियम, 1997 में एक संशोधन किया गया था। इसके तहत सरकारी नौकरी पाने के लिए सीआईडी रिपोर्ट अनिवार्य कर दी गई थी।

रिपोर्ट्स में बताया गया था कि लोगों को यह खुलासा करना अनिवार्य होगा कि उनके परिवार का कोई सदस्य या करीबी किसी राजनीतिक दल या संगठन से जुड़ा है। या फिर वह विदेशी मिशन, संगठन या जमात-ए-इस्लामी जैसे किसी निर्धारित/प्रतिबंधित संगठन के साथ तो नहीं जुड़ा है।

देश में चल रही 44 विकास योजनाओं में सबसे आगे UP, भ्रष्टाचारियों को CM योगी का भय: अमित शाह

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में गृह तथा सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार (अगस्त 1, 2021) को लखनऊ को बड़ी सौगात दी। उन्होंने पिपरसंड में यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज का शिलान्यास तथा भूमि पूजन करने के साथ ही लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर अमित शाह ने योगी आदित्यनाथ सरकार के काम को जम कर सराहा। 

उन्होंने कहा कि राज्यों के लिए केंद्र सरकार की सभी 44 बड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है। अमित शाह ने बताया कि किसी भी योजना को बनाना तो आसान होता है, लेकिन उसका शत-प्रतिशत क्रियान्वयन बेहतर कार्यशैली का सबसे बड़ा उदाहरण है। उनके अनुसार देश में चल रही विकास की 44 योजनाओं में सबसे आगे उत्तर प्रदेश है। योगी आदित्यनाथ और उनकी टीम ने पूरे देश में इन 44 योजनाओं में सबसे पहला स्थान हासिल किया है। उत्तर प्रदेश ने हर क्षेत्र में विकास किया है।

गृह मंत्री ने कहा, “अब भ्रष्टाचारियों के दिल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भय है, जिसकी वजह से भ्रष्टाचार कम हुआ है। पहले का यूपी मुझे ठीक तरह से याद है। महिलाएँ असुरक्षित थीं, यहाँ पर दिनदहाड़े गोलियाँ चलती थीं, माफियाओं का राज था। माफिया अवैध तरह से जमीनों पर कब्जा करते थे। 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश को विकसित बनाने का वादा किया था। आज योगी आदित्यनाथ और उनकी टीम ने उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को आगे ले जाने का काम किया है।”

अमित शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जिनको सरकार बनाने के सपने आ रहे हैं, उनके कानों तक ‘भारत माता की जय’ की आवाज जानी चाहिए। भाजपा की सरकारें जातियों और परिवारों के आधार पर नहीं चलतीं, नजदीक के व्यक्तियों के लिए नहीं चलतीं।

उन्होंने विपक्ष के नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि यूपी में जैसे ही चुनाव आते हैं, नेता घर से निकल आते हैं और बयानबाजी करते हैं। ये नेता कोरोना के दौरान मुश्किलों से जूझती जनता की मदद नहीं करते। ये किसानों की मुश्किलों में काम नहीं आते लेकिन चुनाव आते ही बयानबाजी में लग जाते हैं। भाजपा ने उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित किया है। प्रदेश को विकास के रास्ते पर ले जाने का काम किया है। 

2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार आने से पहले पश्चिमी यूपी से लोग पलायन कर रहे थे। प्रदेश दंगा ग्रस्त था पर चार साल के शासन के बाद उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था का राज स्थापित हो चुका है। योगी के नेतृत्व में प्रदेश तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “मैं उनसे कहना चाहता हूँ कि विपक्ष के नेता एक बार फिर से 2022 में करारी हार के लिए मन बना लें। भाजपा यहाँ फिर से प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने जा रही है।”

SDM अबुल की कार में शहादत, इनायत, दाऊद… लड़की ने बीच सड़क पीटा: वायरल वीडियो पर मीडिया रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जहाँ एक लड़की को एक युवक की पिटाई करते हुए देखा जा सकता है। ये वीडियो अवध चौक का है। इस घटना को देखने के लिए जमा हुई भीड़ के कारण काफी देर तक जाम भी लगा रहा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एटा के एसडीएम अबुल कलाम की कार से जा रहे युवकों ने लड़की को टक्कर मारी थी, जिसके बाद आक्रोशित लड़की ने उन युवकों को जम कर पीटा।

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि लड़की कूद-कूद कर एक युवक को एक के बाद एक कई तमाचे जड़ रही है। कृष्णानगर कोतवाली क्षेत्र का ये वीडियो शनिवार (31 जुलाई, 2021) की रात का है। लड़की को कार ने ठोकर मारी थी, जिससे वो काफी गुस्से में थी। उसके गुस्से को देख कर वहाँ तैनात पुलिसकर्मी भी बीच-बचाव के लिए पास नहीं जा पाए। वहाँ तमाशा देखने के लिए भीड़ जमा हो गई।

इसी दौरान लोगों ने मोबाइल फोन पर इस पूरी घटना का वीडियो शूट कर लिया। लड़की ने ड्राइवर को गाड़ी से खींच कर निकाला और फिर उसे पीटा। जब उसका बीच-बचाव करने के लिए उसके साथ सामने आए तो लड़की ने उन्हें भी एकाध थप्पड़ रसीद किए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि लड़की पैदल थी, वहीं उक्त युवक गाड़ी में बैठे हुए थे। टक्कर लगने के बाद पुलिस ने जैसे ही गाड़ी रुकवाई, लड़की ने ड्राइवर को घसीट कर बाहर निकाला।

इससे पहले कि वहाँ मौजूद लोग समझ पाते कि हो क्या रहा है, उक्त युवक कई तमाचे खा चुका था। कोतवाल महेश दुबे इसकी सूचना मिलते ही वहाँ पहुँचे और पूरे मामले को शांत कराया। पुलिस को देख कर सभी युवक भी वहाँ से भाग खड़े हुए। पुलिस ने इनमें से दो युवकों को उनके जगत नारायण रोड स्थित घर से दबोचा। हालाँकि, लड़की ने किसी प्रकार की तहरीर देने से इनकार कर दिया है।

मीडिया में आई खबरों के अनुसार युवकों का नाम शहादत अली, इनायत अली और दाऊद अली है। इन तीनों पर शांति भंग करने के आरोप लगे हैं। उनका चालान काट दिया गया है। लड़की का कहना है कि गाड़ी में सवार युवक उसे परेशान भी कर रहे थे। गाड़ी पीछे से काफी तेज़ रफ़्तार में भी आई थी। लड़की के आरोपों के उलट ड्राइवर ने युवती पर साइड मिरर और फोन तोड़ने का आरोप लगाया है। वीडियो में वो खुद को गरीब बताते हुए कह रहा है कि उसका 25,000 रुपए का फोन टूट गया।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गाड़ी से टक्कर लगने पर जब लड़की ने उन युवकों को गाड़ी ठीक से चलाने को कहा तो वो लोग बहस करने लगे। ड्राइवर ने युवती को गाली देकर वहाँ से भागने की कोशिश भी की थी। आगे ट्रैफिक पुलिस ने गाड़ी को रोकने का इशारा किया। गाड़ी रुकते ही लड़की ने ड्राइवर को घसीट कर निकाला और उसकी पिटाई शुरू कर दी। लड़की को कानून हाथ में न लेने की चेतावनी देकर छोड़ दिया है।

‘…अब नोएडा नहीं आएँगे, माफ कर दो’: UP पुलिस की गोली से घायल बदमाश, RSS पदाधिकारी के घर की थी डकैती

उत्तर प्रदेश के नोएडा में आरएसएस के पदाधिकारी के घर में डकैती करने वाले बदमाशों और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई है। इस दौरान पुलिस की गोली लगने से तीन बदमाश घायल हो गए। तीनों को बाद में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, एनकाउंटर 26 जुलाई की रात को नोएडा के सेक्टर-24 थाना इलाके में स्पाइस मॉल के पीछे सर्विस रोड पर हुआ था।

मुठभेड़ के दौरान बदमाशों के पैर में गोली लगी है। गोली लगने के बाद जब पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार किया तो इन्होंने रोते हुए हाथ जोड़कर पुलिस से छोड़ने की गुहार लगाई और कहा कि वो दोबारा नोएडा नहीं आएँगे।

जिन तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें विष्णु, मोनू उर्फ आमिर हुसैन और गौतम शामिल है, जबकि हर्षित नाम का बदमाश वहाँ से भागने में कामयाब रहा है। फिलहाल घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं फरार हुए आरोपित की तलाश की जा रही है।

नोएडा पुलिस के ट्वीट के मुताबिक, ये सभी थाना सेक्टर-58 पुलिस व सेक्टर-55 स्थित मकान में हुई लूट की घटना में शामिल थे। इन आऱोपितों के कब्जे से 1 लाख 80 हजार रुपए नकद व अवैध हथियार बरामद किए गए हैं।

इससे पहले शनिवार (31 जुलाई 2021) को आरएसएस पदाधिकारी के घर में लूट के मामले में नोएडा पुलिस ने 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इसी के साथ इस मामले 9 आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

इस मामले में नोएडा के एडिशनल डीसीपी ने बताया, “आरोपित ज्वेलरी या कुछ सामानों को कहीं शिफ्ट करने की कोशिश में थे। इसकी सूचना मिलने पर चारों तरफ से इनकी घेराबंदी की गई। दो बाइक पर दो-दो बदमाश थे, लेकिन जब इन्हें लगा कि ये घिर चुके हैं तो इन्होंने पुलिस पर फायरिंग कर दी। पुलिस की ओर से जवाबी कार्रवाई में करीब 4-5 राउंड फायर किया गया। इस दौरान तीन घायल हो गए और एक बदमाश बाइक लेकर वहाँ से फरार हो गया।”

पुलिस अधिकारी ने आगे कहा, “पुलिस की गोली से तीनों बदमाश घायल हो गए थे। इन तीनों बदमाशों के पास से लगभग 1,80,000 रुपए बरामद किए गए हैं। इसके अलावा इतने ही पैसे पहले गिरफ्तार किए गए 6 लोगों के पास से भी बरामद हुए थे।” कुल मिलाकर आरोपितों के पास से करीब 3,63,000 बरामद किए गए हैं।

इस पुलिस एनकाउंटर पर उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी ने ट्वीट किया, “दर्द से कलपते हुए चीख-चीख कर गुहार लगे रहे ये तीनों छँटे हुए बदमाश हैं, इन्होंने नोएडा में लूटपाट करने की गलती कर डाली, तत्काल माक़ूल इलाज हुआ। कहते हैं भागते वक़्त फ़ायर झोंक रहे थे, नतीजा पुलिस की गोली से विकलाँग हो गए।”