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5 और 15 अगस्त का पाकिस्तान का टेरर प्लान, जम्मू-कश्मीर में मंदिरों को निशाना बना सकते हैं आतंकी: रिपोर्ट

आतंकी भारत में मंदिरों को निशाना बनाकर धार्मिक उन्माद फैलाने की साजिश रच रहे हैं। पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद देश में साम्प्रदायिक तनाव फैलाने के लिए जम्मू-कश्मीर में हिंदू मंदिरों को निशाना बना सकते हैं। भारतीय खुफिया एजेंसियों को मिले इनपुट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने की दूसरी बरसी (5 अगस्त) और स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर हिंदू मंदिरों पर हमले हो सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकी ड्रोन के जरिए आईईडी अटैक कर सकते हैं। हालात को देखते हुए घाटी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। घाटी में 5 अगस्त और 15 अगस्त को लेकर हाई अलर्ट जारी किया गया है। दरअसल, 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से विवादित अनुच्छेद 370 को हटाया गया था और 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस है।

वहीं, गुरुवार (29 जुलाई 2021) को जम्मू-कश्मीर में तीन अलग-अलग जगहों पर ड्रोन देखे गए। इनमें से पहला सांबा सेक्टर के गजवाल थाना क्षेत्र और ITBP केंद्र के पास देखा गया, जबकि दूसरा छलियारी अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में और तीसरा बारी ब्रह्मा क्षेत्र में देखा गया।

घाटी में ड्रोन के जरिए घुसपैठ की घटनाएँ तेजी से बढ़ी हैं। 22 जुलाई 2021 (शुक्रवार) को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जम्मू के पास कनाचक क्षेत्र में 5 किलो विस्फोटक ले जा रहे एक पाकिस्तानी ड्रोन को भी मार गिराया था।

उससे पहले 27 जून 2021 को जम्मू में भारतीय वायुसेना के एयरबेस पर ड्रोन से ही हमला किया गया था। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने ट्वीट किया था कि जम्मू वायुसेना स्टेशन के तकनीकी क्षेत्र में दो कम तीव्रता वाले विस्फोट हुए। विस्फोट रविवार सुबह करीब 1:37 बजे और 1:43 बजे हुए और वे इतने शक्तिशाली थे कि उन्हें 1 किमी की दूरी तक सुना जा सकता था। ड्रोन ने हेलीकॉप्टर हैंगर के पास एक स्थान पर बम गिराए थे। IAF ने संदेह जताया था कि इन ड्रोन हमलों का उद्देश्य भारतीय वायुसेना की रणनीतिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना था।

बहरहाल, 5 अगस्त और स्वतंत्रता दिवस नजदीक आने के साथ ही सीमा पार से आतंकवादियों द्वारा राज्यों में किसी भी संभावित घुसपैठ को रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

‘2 से अधिक बच्चे तो छीन लें आरक्षण और वोटिंग का अधिकार’: UP के जनसंख्या नियंत्रण कानून के पक्ष में 97% लोग

उत्तर प्रदेश जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण एवं कल्याण) एक्ट 2021 का मसौदा तैयार करने में जुटे राज्य विधि आयोग को अधिकतर लोगों ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए सख्त कानून बनाने की सलाह दी है। मसौदे पर प्राप्त सुझावों के आधार पर आकलन करें तो बहुमत सख्त जनसंख्या कानून के पक्ष में खड़ा दिखाई देता है। बड़ी संख्या में लोगों ने आयोग के प्रस्तावों से भी ज्यादा सख्त प्रावधानों की जरूरत बताई है।

आयोग ने प्रस्तावित मसौदे में वन चाइल्ड पॉलिसी को प्रोत्साहित करने तथा दो से ज्यादा बच्चों वाले माता-पिता को कुछ सरकारी सुविधाओं से वंचित करने का प्रावधान किया है। आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किए गए मसौदे पर लगभग 8500 सुझाव प्राप्त हुए हैं, जिसमें 300 के करीब कानून के विरोध में हैं।

आठ हजार से ज्यादा सुझाव जनसंख्या कानून के पक्ष में हैं, जिसमें ऐसे सुझावों की संख्या ज्यादा है जो ज्यादा सख्त कानून के पक्ष में हैं। बहुत से लोग चाहते हैं कि दो से ज्यादा बच्चे वाले लोगों को आरक्षण से वंचित कर दिया जाए। इसी तरह कई लोगों ने दो से ज्यादा बच्चों के माता-पिता को मताधिकार से ही वंचित किए जाने का सुझाव दिया है।

राज्य विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एएन मित्तल ने कहा, “राज्य विधि आयोग को जनसंख्या नियंत्रण पर मसौदा विधेयक पर ईमेल के जरिये 8,500 प्रतिक्रियाएँ मिली हैं। उनमें से कुछ ने प्रस्तावित कानून की आलोचना की है और कुछ ने विधि आयोग द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की है।”

न्यायमूर्ति मित्तल ने कहा, “हमें जनसंख्या नियंत्रण पर मसौदा विधेयक के लिए बड़ी संख्या में सुझाव भी मिले हैं। आयोग सभी ईमेल डाउनलोड करेगा। हम सभी सुझावों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करेंगे। यदि वे व्यवहारिक व महत्वपूर्ण पाए जाते हैं तो जनसंख्या नियंत्रण पर मसौदा विधेयक तैयार करते समय उन्हें ध्यान में रखा जाएगा।” मसौदा विधेयक पर न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के राजनीतिक दलों और यहाँ तक कि सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

आयोग ने अपने प्रस्ताव में दो से ज्यादा बच्चों के माता-पिता को केवल स्थानीय निकाय का चुनाव लड़ने से रोकने का प्रावधान किया है, जबकि प्राप्त सुझावों में यह प्रतिबंध विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भी लागू किए जाने की जरूरत बताई गई है। इसी तरह कई लोगों ने दो से ज्यादा बच्चों के माता-पिता को मुफ्त राशन एवं अन्य सरकारी सुविधाएँ भी न देने का सुझाव दिया है। फिलहाल आयोग सभी प्राप्त सुझावों को श्रेणीवार बाँटकर उन पर विचार-विमर्श कर रहा है, जिसमें सुझाव से जुड़े विधिक पहलुओं को भी परखा जा रहा है। माना जा रहा है कि एक्ट का प्रारूप अगस्त माह में प्रदेश सरकार को सौंपा जा सकता है।

बलिया: हिंदू युवती को बुर्का पहनाकर कोर्ट ले गया दिलशाद, पिता की शिकायत के बाद FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के बलिया में बुधवार (जुलाई 28, 2021) को अंतर्धार्मिक विवाह (Interfaith wedding) के नाम पर एक समुदाय विशेष का युवक हिंदू युवती को बुर्का पहनाकर कोर्ट मैरिज के लिए ले गया। हालाँकि, वहाँ मौजूद करणी सेना के लोगों को उस पर शक हुआ और पूछताछ के बाद यह शादी रुकवा दी गई।

पूछताछ के दौरान युवक काफी बहस करता नजर आया। लेकिन केस लव जिहाद जैसा होने के कारण युवक हिरासत में ले लिया गया। युवक की पहचान दिलशाद सिद्दीकी के तौर पर हुई है। वहीं लड़की के परिजन भी खबर को सुनकर हैरान हैं। उनका कहना है लड़की दो दिन पहले गायब हो गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, युवती गरीब परिवार से है। उसके पिता एक रिक्शा चालक हैं। छह भाई-बहनों में वह अपने पिता की पाँचवी संतान है। युवती की शादी तीन महीने पहले हिंदू युवक से हुई थी। लेकिन कुछ दिन पहले वह अपने मायके आई और फिर अचानक गायब हो गई। घरवालों ने इस बाबत पुलिस में शिकायत भी दी लेकिन दो दिन बाद पता चला कि वह दिलशाद के साथ शादी के लिए कोर्ट पहुँची है। उभाँव पुलिस ने पूरे केस को बहला-फुसला कर भगाने का मामला दर्ज किया है।

बलिया के पुलिस अधीक्षक विपिन टाडा ने कहा, “हमने उसके पिता की शिकायत पर मामला दर्ज किया है कि उनकी बेटी का अपहरण कर लिया गया था। हम उसे जल्द ही अदालत में पेश करेंगे, जहाँ वह अपना बयान दर्ज कराएगी। युवती के वयस्क होने के कारण उसके बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।” 

सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर एक वीडियो शेयर हो रही है। इसमें लड़की बताती है कि वह दलित समुदाय से आती है, बालिग है और अपनी मर्जी से दिलशाद सिद्दीकी नामक युवक से शादी करना चाहती है। वीडियो से पता चलता है कि युवक पादरी गाँव का रहने वाला है, जो कथिततौर पर हल्ला होने पर कोर्ट परिसर से भाग गया था। लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया। वहीं लड़की को उसके घरवालों को सौंप दिया गया है।

शिवसैनिकों ने मुंबई में अब डिलीवरी बॉय के साथ की गुंडई: मारपीट मामले में 4 गिरफ्तार, 2 फरार

महाराष्ट्र पुलिस ने मुंबई के कांदीवली इलाके में डिलीवरी बॉय के साथ मारपीट करने के आरोप में 4 शिवसेना कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार गुरुवार (29 जुलाई 2021) को कांदीवली ईस्ट के पोइसर इलाके के जय हिंद चॉल में रहने वाले ई-कॉमर्स डिलीवरी एजेंट राहुल शर्मा ने समता नगर पुलिस स्टेशन में शिवसेना कार्यकर्ताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में शर्मा ने बताया कि वह एक ई-कॉमर्स साइट के लिए डिलीवरी एजेंट का काम करते हैं। वह एक पार्सल की डिलीवरी के लिए पोइसर इलाके में गया हुआ था। तेज बारिश होने पर भीगने से बचने के लिए उसने शिवसेना के पोइसर शिवाजी मैदान स्थित ब्रांच ऑफिस के शेल्टर के नीचे शरण ली।

इसी दौरान ऑफिस में मौजूद शिवसेना नेता चंद्रकांत निनेवे, शर्मा के पास आया और डिलीवरी पार्सल ले लिया। शर्मा ने बताया कि जब उन्होंने निनेवे से पार्सल को सुरक्षित तौर पर पकड़ने के लिए कहा तो शिवसेना नेता ने गालियाँ देनी शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार दोनों के बीच बातचीत बढ़ गई और निनेवे ने 5 अन्य शिवसेना कार्यकर्ताओं के साथ शर्मा के साथ मारपीट की।

पुलिस ने बताया कि घटना की शिकायत दर्ज होने के बाद 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है, जिनमें से 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है और 2 आरोपित अभी भी फरार चल रहे हैं। महाराष्ट्र पुलिस ने बताया कि आईपीसी की संगत धाराओं के अंतर्गत 6 शिवसेना कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज किया गया है और मामले की जाँच की जा रही है।

ज्ञात हो कि पिछले महीने दादर में शिवसेना और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई थी। इसके बाद शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा था कि ‘शिवसैनिक सर्टिफाइड गुंडे होते हैं और हमें किसी से भी सर्टिफिकेट लेने की ज़रूरत नहीं है।’ उन्होंने दावा किया था कि शिवसैनिक ये ‘गुंडागिरी’ मराठी लोगों के लिए करते हैं। राउत ने इस दौरान भाजपा युवा मोर्चा को चेताया भी था।

रोज के ₹300, शराब के साथ शबाब भी: देह व्यापार का अड्डा बना टिकरी बॉर्डर, टेंट में नंगे पड़े रहते हैं ‘किसान’

केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में कथित किसान बीते 9 महीने से दिल्ली की सीमाओं को बाधित किए हुए हैं। हालाँकि, वक्त के साथ अब इस प्रदर्शन में किसान कम और किसानों का चोला पहने आंदोलनजीवी या यूँ कहें कि अय्याशजीवियों ने अपनी पैठ बना ली है।

इन फर्जी किसानों की अय्याशियों का खुलासा समय-समय पर होता रहा है। इसी कड़ी में जी हिंदुस्तान के अंडर कवर रिपोर्टर ने एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए टीकरी बॉर्डर पर डेरा डाले इन फर्जी किसानों की सच्चाई को उजागर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे टीकरी बॉर्डर पर रोहतक हाईवे (नेशनल हाईवे नंबर 9) के पास स्थित है बहादुरगढ़ का इलाका। जब से फर्जी किसानों ने यहाँ डेरा डाला है, तब से इस इलाके में देह व्यापार की एक अलग तरह की मंडी शुरू हो गई है। यहीं पास में एक गंदा नाला बहता है और उसी के आसपास की झाड़ियाँ इन फर्जी किसानों की अय्याशी का अड्डा बन गई हैं।

इन झाड़ियों के पीछे पैसे देकर लाए गए सेक्स वर्करों के साथ फर्जी किसान अय्याशी करते देखे जा सकते हैं। स्टिंग के दौरान रिपोर्टर ने सेक्स वर्कर समेत कई लोगों से बात की। एक फर्जी किसान के मुताबिक, आंदोलन साइट पर रुकने के लिए उसे प्रतिदिन 300 रुपए मिलते हैं। उसे ये पैसे टेंट का मालिक देता है, उसमें रहने के लिए। अगर दो लोग आंदोलन में शामिल होते हैं तो उन्हें संयुक्त रूप से 500 रुपए दिए जाते हैं।

एक सेक्स वर्कर ने बताया कि फर्जी किसान उनके पास आते हैं और 100 से लेकर 500 रुपए प्रति व्यक्ति देकर जाते हैं। रिपोर्टर ने जब फर्जी किसान (आंदोलनजीवियों का दलाल) से पूछा कि अगर वो भी आंदोलन में शामिल होता है तो उसका क्या फायदा होगा? इस पर फर्जी किसान ने कहा कि शराब और शबाब, यहाँ दोनों उपलब्ध है।

जी हिंदुस्तान के ऑपरेशन अय्याशजीवी के दौरान वही फर्जी किसान रिपोर्टर को टीकरी बॉर्डर पर गंदे नाले के पास स्थित फैक्ट्रियों में ले गया। वहाँ पर फैक्ट्री के चश्मदीद लोगों ने रिपोर्टर को बताया कि जंगल से लगी दीवार के पास देह व्यापार की ये मंडी बीते 8-10 सालों से चल रही है, लेकिन जब से ये कथित किसान यहाँ आंदोलन के लिए आए हैं तब से इसके रेट काफी बढ़ गए हैं।

टेंट में बिना कपड़ों के पड़े रहते हैं

चश्मदीदों के मुताबिक, यहाँ आने वाले फर्जी किसान अपने लोगों को वीडियो कॉलिंग कर बताते हैं कि वहाँ पर अय्याशी के सारे इंतजाम हैं और वो लोग भी इस कथित किसान आंदोलन में शामिल हो सकते हैं। नग्नता की हद तो ये है कि ये लोग नहाने के बाद टेंट में ऐसे ही नंगे ही रहते हैं। शरीर पर कपड़े के नाम पर कुछ भी नहीं होता।

रिपोर्ट के मुताबिक, टीकरी बॉर्डर पर खुलेआम शराब पीकर लोग झूमते दिखे। एक फर्जी किसान सड़क पर पड़ा दिखा। चश्मदीद ने बताया कि इसने अफीम या डोडापोस्त (इसे भुख्खी भी कहते हैं) खाया हुआ था। ये सभी किराए पर लाए गए फर्जी किसान हैं।

चश्मदीद के मुताबिक, यहाँ किसान आंदोलन के बहाने लोग अपनी शारीरिक भूख मिटाने के लिए आते हैं। इस रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि किस तरह से किसान आंदोलन के नाम पर लोगों को बहकाकर आसपास के राज्यों से यहाँ लाया जाता है। राकेश टिकैत और गुरुनाम सिंह चढूनी जैसे किसान नेताओं की साजिश का पर्दाफाश हो चुका है कि किस तरह से किसान आंदोलन के बहाने ये सरकार और व्यवस्था को चुनौती देने की साजिश रच रहे हैं। यही नहीं, इन्होंने तो यहाँ तक ऐलान कर रखा है कि स्वतंत्रता दिवस पर वो हरियाणा में इस बार नेताओं को तिरंगा तक नहीं फहराने देंगे।

धनबाद में जज की दिनदहाड़े हत्या पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, स्वत: संज्ञान ले झारखंड सरकार से हफ्ते भर में माँगी रिपोर्ट

झारखंड के धनबाद में बुधवार (जुलाई 28, 2021) को दिनदहाड़े अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी से एक हफ्ते में रिपोर्ट माँगी है। साथ ही कहा है कि देश भर में न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के संबंध में निश्चित तौर पर सुनवाई की जाएगी।

धनबाद में हुई सत्र न्यायाधीश की हत्या पर मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा है कि देश भर से कई ऐसे मामले सामने आए जहाँ न्यायिक व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों और वकीलों पर कोर्ट के अंदर और बाहर हमले हुए। ऐसे में कोर्ट भी इन न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के संबंध में सुनवाई करने के लिए तैयार है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सत्र न्यायाधीश आनंद की हत्या के मामले में भी झारखंड सरकार से जवाब माँगा है और मुख्य सचिव एवं डीजीपी को घटना के संबंध में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।

इसके अलावा मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने यह भी कहा, “जो निडर होकर अपना काम करते हैं, उनक लिए हम स्वतः संज्ञान लेते हैं। लेकिन हम हाईकोर्ट की कार्रवाई में कोई हस्तक्षेप नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि हमें पता है कि झारखंड हाईकोर्ट ने इस घटना के संबंध में पहले ही संज्ञान लिया है।” बेंच ने यह भी कहा कि राज्यों को चाहिए कि वो न्यायिक अधिकारियों और वकीलों की सुरक्षा का दायित्व निभाएँ जिससे बिना डरे हुए लोगों को न्याय दिलाने का कार्य किया जा सके।

ज्ञात हो कि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद, धनबाद में सुबह की सैर के लिए निकले थे तब एक ऑटो रिक्शा ने उन्हें टक्कर मारी थी। घटना का वीडियो भी सामने आया था। इससे साफ था कि उन्हें जान बूझकर टक्कर मारी गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से उनके सिर पर किसी भारी चीज से वार करने का पता चला। यह बात भी सामने आई है कि जिस ऑटो से उन्हें टक्कर मारी गई वह पाथरडीह की सुगनी देवी का है। सुगनी के अनुसार उसका ऑटो चोरी हो गया था।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद धनबाद के चर्चित रंजय हत्याकांड की सुनवाई कर रहे थे। 3 दिन पहले ही उन्होंने यूपी के ईनामी शूटर अभिनव सिंह व अमन सिंह के गुंडे रवि ठाकुर व आनंद वर्मा की जमानत खारिज की थी। वह हजारीबाग के रहने वाले थे और 6 महीने पहले ही बोकारो से धनबाद आए थे।

‘तब तक आराम नहीं… जब तक ओलंपिक स्वर्ण नहीं’ – लवलिना बोरगोहेन ने चोट लगने पर कहा, अब मंजिल की ओर

टोक्यो ओलंपिक में बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने देश के लिए दूसरा मेडल पक्का कर लिया है। लवलीना ने आज (30 जुलाई 2021) क्वाटर फाइनल में ने चीनी ताइपे की बॉक्सर को हरा दिया। अब 4 अगस्त को सेमीफाइनल में वो अपने अगले मैच में गोल्ड मेडल की राह पर होंगी।

चीनी ताइपे की बॉक्सर के खिलाफ लवलीना ने 4-1 से मैच जीता। इस जीत के साथ ही टोक्यो ओलिंपिक में भारत के लिए दूसरा मेडल लवलीना बोरगोहेन ने फिक्स कर दिया। सेमीफाइनल में लवलीना का मुकाबला अब तुर्की की मुक्केबाज से होगा।

आपको बता दें कि लवलीना बोरगोहेन का यह पहला ओलंपिक है। इससे पहले उनकी उपलब्धियों की बात करें तो 2019 में विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर 2021 ओलंपिक खेलों के लिए जगह बनाने में कामयाब रही थीं।

बॉक्सिंग में व्यक्तिगत उपलब्धि की बात की जाए तो विजेंद्र सिंह और मैरी कॉम के बाद लवलीना बोरगोहेन तीसरी भारतीय बॉक्सर हैं, जिन्होंने ओलंपिक पदक जीता (मतलब पक्का तो हो ही गया है अभी तक के लिए) है। 2019 में चोटिल होने के बाद उन्होंने कहा था :

“मैं तब तक आराम नहीं करूँगी, जब तक मैं ओलंपिक स्वर्ण नहीं जीत लेती। कोई फर्क नहीं पड़ता कि ब्रह्मांड ने मेरे लिए क्या योजना बनाई है, यह सच है कि मैं चोट के बाद भी मजबूत हूँ, मुझे बहुत बेहतर और अधिक करने की उम्मीद है।”

इससे पहले पहली बार ओलंपिक में भाग ले रही भारतीय मुक्केबाज लवलिना बोरगोहेन (Lovlina Borgohain) ने टोक्यो ओलंपिक में जोरदार आगाज किया। उन्होंने मंगलवार (27 जुलाई) को जर्मनी की दिग्गज खिलाड़ी नेदिन एपेट्ज (35 वर्षीय) को कड़े मुकाबले में करारी शिकस्त देते हुए क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। 23 वर्षीय लवलिना ने प्री क्वार्टर फाइनल में अपने से 12 साल बड़ी एपेट्ज को मात देकर 3-2 से यह मैच जीता है। अब वह मेडल से केवल एक कदम दूर हैं। भारत की नौ सदस्यीय टीम से अंतिम 8 में जगह बनाने वाली लवलिना पहली खिलाड़ी हैं।

लवलिना ने क्वार्टर फाइनल में चीनी ताइपे की निएन चिन चेन को हराया। चिन चेन पूर्व वर्ल्ड चैंपियन हैं और मौजूदा खेलों में उन्हें चौथी वरीयता प्राप्त है। इस मुकाबले में अपनी प्रतिद्वंद्वी को शिकस्त देने के बाद भारतीय खिलाड़ी का पदक पक्का हो गया है।

कौन हैं भारतीय मुक्केबाज लवलिना बोरगोहेन

लवलिना बोरगोहेन की उम्र 24 साल है। वह असम के गोलाघाट जिले के सरुपथर विधानसभा के छोटे से गाँव बरोमुखिया की रहने वाली हैं। उनके गाँव में महज 2 हजार लोग रहते हैं। यहीं से उन्होंने ओलंपिक तक का सफर अपनी कड़ी मेहनत के दम पर तय किया है। ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने वाली लवलिना असम की पहली महिला बॉक्सर हैं। 1.77 मीटर लंबी लवलिना बोरगोहेन टोक्यो ओलंपिक में 69 किग्रा वर्ग में हिस्सा ले रही हैं। उन्हें देश की दूसरी मैरीकॉम कहा जा रहा है, जो देश का नाम रौशन करने के लिए बेजोड़ प्रयास कर रही हैं।

अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है

लवलिना को अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2018 और 2019 में हुए वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। वह 2018 कॉमनेवल्थ गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इसके अलावा लवलिना 2017 में एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भी ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं।

इस समय लवलिना का दैनिक भास्कर को दिया गया एक इंटरव्यू खासा चर्चा में हैं। उन्होंने कहा था, ”हम तीन बहनें हैं। सब लोग यही कहते थे कि लड़कियाँ कुछ नहीं कर पाएँगी। लेकिन मेरी माँ ममोनी बोरगोहेन हमेशा कहती हैं कि कुछ ऐसा करना है, जिसे लोग आपको याद रखें।” लवलिना अपनी माँ के बताए रास्ते पर चल रही हैं, ओलंपिक में मेडल जीतकर वह साबित कर देंगी कि लडकियाँ भी अपने देश का नाम रौशन कर सकती हैं।

शुरुआती दौर में लवलिना के पास ट्रैकसूट तक नहीं था

बताया जाता है कि लवलिना को बचपन से ही काफी संघर्ष करना पड़ा है। उनके पिता टिकेन बोरगोहेन की छोटी सी दुकान थी। शुरुआती दौर में लवलिना के पास ट्रैकसूट तक नहीं था। इक्विपमेंट और डाइट के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ता था।

बहनें भी नेशनल स्तर पर जीत चुकी हैं मेडल

लवलिना ने मीडिया को बताया था कि उन्हें अपनी जुड़वा बहनों से इस क्षेत्र में आने की प्रेरणा मिली थी। उन्होंने कहा कि मैंने लीचा और लीमा को देखकर किक बॉक्सिंग करना शुरू किया था। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) के असम रीजनल सेंटर में सिलेक्शन होने के बाद मैं बॉक्सिंग की ट्रेनिंग लेने लगी थीं। उनकी दोनों बहनें किक बॉक्सिंग में नेशनल स्तर पर मेडल जीत चुकी हैं।

इलाज के बहाने हिंदुओं का धर्मान्तरण, असम से ईसाई मिशनरी Ranjan Chutia गिरफ्तार: देता था पैसों का भी लालच

असम में हिमंत बिस्व सरमा सरकार के धर्मान्तरण के मामले में कड़े रुख के बाद भी चोरी-छिपे धर्मान्तरण कराने की गतिविधियाँ चलाई जा रही हैं। इस बीच राज्य पुलिस ने गुरुवार (29 जुलाई 2021) को कुख्यात ईसाई मिशनरी रंजन सूतिया (Ranjan Chutia) को असम के डिब्रूगढ़ जिले में जबरन धर्म परिवर्तन की गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, डिब्रूगढ़ पुलिस ने ईसाई धर्म प्रचारक रंजन सूतिया को मोरन स्थित उसके चिकित्सा केंद्र से गिरफ्तार किया। धर्म परिवर्तन के लिए श्रीमंत शंकर देव की धार्मिक और सांस्कृतिक कृतियों का दुरुपयोग करने का आरोप रंजन पर है। इस मामले में हिंदू युवा छात्र परिषद ने मोरन थाने में कुख्यात ईसाई धर्म प्रचारक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि रंजन सूतिया ने धर्म परिवर्तन के लिए श्रीमंत शंकरदेव की धार्मिक और सांस्कृतिक रचनाओं का दुरुपयोग करते हुए बोरगीत, नाम, घुशा (असमिया धार्मिक भक्ति गीत) को फिर से अपने तरीके से बनाया था। ईसाई मिशनरी ने इन वैष्णव भक्ति गीतों में ईसा मसीह का नाम जोड़ने के लिए गानों को पूरी तरह से बदल दिया था।

रंजन सूतिया समेत दूसरे मिशनरी मिलकर कथित तौर पर ‘वर्ल्ड हीलिंग प्रेयर सेंटर’ नाम से एक प्रार्थना घर चला रहे हैं। यहाँ पर ईसा मसीह की शक्ति से रोगियों को ठीक करने के बहाने उनका ब्रेनवाश किया जाता था। इसके जरिए इन मिशनरियों ने हजारों हिंदुओं का ब्रेनवाश कर उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित कर दिया।

स्थानीय संगठनों का आरोप है कि रंजन सूतिया ने स्वास्थ्य और आर्थिक मदद के नाम पर हजारों लोगों का धर्मान्तरण करवाया है। हिंदू युवा छात्र परिषद के महासचिव बाबुल बोरा ने राज्य सरकार से मिशनरियों की जघन्य धर्मान्तरण कराने की गतिविधियों को रोकने के लिए इस मामले में हस्तक्षेप करने की माँग की है।

इस बीच, श्रीमंत शंकरदेव की जन्मस्थली बटाद्रव सत्र में मिशनरियों को शंकरदेव की रचनाओं का उपयोग करके निर्दोष लोगों का धर्म परिवर्तन कराने के मामले में कड़ी चेतावनी दी गई है। बटाद्रव सत्र के सत्राधिकारी देवानंद देब गोस्वामी ने ईसाई मिशनरियों के इस कुकृत्य की कड़ी आलोचना करते हुए राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

बहारहाल, डिब्रूगढ़ पुलिस ने रंजन सूतिया को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 153 (A) और 195 (A) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपित कोरोना पॉजिटिव भी पाया गया है।

राजस्थान: चुनाव में कर्जमाफी का वादा… अब मुकर गई कॉन्ग्रेसी सरकार, किसानों को मिल रहे कुर्की के नोटिस

राजस्थान में किसानों से कर्जमाफी का वादा करके साल 2018 में सत्ता में आने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी अब एक दम से अपने वादे से मुकर गई है। चुनावों के समय राहुल गाँधी ने कहा था कि उनकी सरकार बनने के मात्र दस दिन के अंदर सारे कर्जे माफ हो जाएँगे, लेकिन करीब ढाई साल बाद भी वादा पूरा नहीं हुआ और जब किसानों को बैंकों ने नोटिस भेजना शुरू किया, तो प्रदेश सरकार ने ये कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उन्होंने ऐसा कोई वादा ही नहीं किया था।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर जिले के किसान रामगोपाल जाट ने बताया कि उन्होंने आज से 5 साल पहले दो बार में साढ़े 3 लाख और 6 लाख करके, 9 लाख रुपए का लोन लिया था और अब तक 6 लाख रुपए से ज्यादा का ब्याज चुका चुके हैं, मगर अब बैंक ने भी साढ़े 13 लाख 7 हजार 756 की डिमांड निकालकर, घर के कुर्की का नोटिस भेज दिया है। रामगोपाल के पास इतने रुपए देने के लिए नहीं हैं और दूसरी ओर बैंक मानने के लिए तैयार नहीं है।

रिपोर्ट बताती है कि रामगोपाल जाट कोई अकेले व्यक्ति नहीं है। ऐसे तमाम किसान हैं जिन्होंने 1 लाख रुपए से लेकर साढ़े 3 लाख रुपए तक लोन लिया, और अब उन सभी के पास नोटिस गए हैं। गाँव में कई किसानों के पास अलग-अलग बैंकों से कुर्की के नोटिस आए हुए हैं। मुंडियारामसर के 80 साल के गंगाराम के ऊपर 5 सालों में 14 फीसदी के ब्याज से 8 लाख का लोन 14 लाख का हो गया है।

इस बीच राजस्थान सरकार के सहकारिता मंत्री उदय लाल आंजना ने साफ कहा है, “हमने कोई वादा नहीं किया था कि सभी किसानों को लोन माफ करेंगे।” सरकार का कहना है कि उनके पास इतने पैसे नहीं है कि सभी किसानों का लोन माफ कर सकें जबकि केंद्र सरकार बताती है कि राज्य में किसानों पर 1,20, 979 करोड़ रुपए का कर्ज बाकी है।

बता दें कि कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा सत्ता में आने के लिए बोले गए झूठ से आहत होकर कई किसान अपनी जान गँवा चुके हैं। पार्टी कहती है कि उन्होंने सत्ता संभालते ही सभी किसानों के बैंको से लोन माफ किए थे। लेकिन रिपोर्ट कहती है कि सरकार ने भूमि विकास बैंक और सहाकारी बैंक के लघु एवं सीमांत किसानों को लोन माफ किए थे और बाकी किसानों को कर्ज तले दबा ही छोड़ दिया।

वीडियो में कॉन्ग्रेस द्वारा किए गए वादे का प्रमाण है

2018 की वीडियो देखें तो पता चलेगा कि कैसे दावे के साथ राहुल गाँधी ने कर्जमाफी के वादे पर मोदी सरकार को चुनौती दी थी। लेकिन साल 2019 की शुरुआत में ही किसानों की मौत की खबरें आने लगीं। कर्ज न माफ होने के कारण साल 2019 में रघुनाथपुरा के 40 वर्षीय किसान नेतराम नाथ ने सुसाइड की थी।

उससे पूर्व राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के ठीकरी गाँव में 23 जून 2019 को 45 वर्षीय किसान सोहनलाल ने कर्जमाफी न होने के कारण जहर खाकर अपनी जान दे दी थी। सोहनलाल ने मरने से पहले एक वीडियो और दो पेज का सुसाइड नोट भी छोड़ा था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि गहलोत सरकार चुनाव से पहले किए अपने वादों को पूरा करने में असफल रही और उन्हीं के कारण वह आत्महत्या कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस पार्टी का किसान कर्जमाफी को लेकर कहा गया झूठ उस समय भी सामने आया था जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी में रहते हुए ही कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ मध्य प्रदेश में मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने उस दौरान माना था कि प्रदेश सरकार ने कर्जमाफी का वादा पूरा नहीं किया।

सिंधिया ने किसानों की कर्जमाफी को लेकर कॉन्ग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था, “किसानों का कर्ज पूरी तरह से माफ नहीं किया गया है। केवल 50 हजार रुपए का कर्ज माफ किया गया है, जबकि हमने कहा था कि 2 लाख तक का कर्ज माफ किया जाएगा। 2 लाख रुपए तक के कर्ज को माफ किया जाना चाहिए।”

सिद्धू के नाम ऑडियो, कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता की आत्महत्या: कहा – ‘पार्टी को 30 साल दिए, शादी भी नहीं… कोई फायदा नहीं’

पंजाब के लुधियाना जिले के दाखा विधानसभा के जंगपुर गाँव में गुरुवार (जुलाई 29, 2021) को कॉन्ग्रेस महासचिव हैप्पी बाजवा/दिलजीत सिंह ने जहर खाकर सुसाइड कर ली। सुसाइड से पहले उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिंद्धू को अपना 10 मिनट का ऑडियो संदेश भेजा।

बाजवा ने इसमें बताया कि कैसे वह पिछले 30 साल से कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ जुड़े हैं लेकिन उन्हें और उनके घरवालों को कभी इसका लाभ नहीं मिला जबकि पार्टी के लिए काम करने पर उनके ख़िलाफ़ केस होते रहे। ऑडियो के मुताबिक किसी प्लॉट संबंधी एक मामले में उन्हें फँसाने की तैयारी चल रही थी, इसी से आहत होकर उन्होंने आत्महत्या का फैसला किया।

बाजवा ने अपनी ऑडियो में सिद्धू से अनुरोध किया है कि उनके जाने के बाद सिद्धू उनके परिवार को संभाल लें। अपनी मौत के लिए उन्होंने तीन लोगों को जिम्मेदार कहा है। इनमें से दो को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है, जिनकी पहचान प्रीतम सिंह और महिंदर सिंह के तौर पर हुई है। वहीं एक आरोपित बलजिंदर सिंह फरार है।

बाजवा के परिजनों से मिले सिद्धू, CM ने जताया दुख

सुसाइड से पहले जारी की गई बाजवा की ऑडियो से प्रदेश में हड़कंप है। कॉन्ग्रेस नेताओं का कहना है कि बाजवा ने पार्टी को दोषी नहीं कहा जबकि ऑडियो कुछ और ही बयान कर रही है। वहीं सिद्धू भी घटना की सूचना पाते ही कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता के घर पहुँचे।

पीड़ित परिवार के साथ शोक व्यक्त करते हुए सिद्धू ने कहा कि वह हमेशा इस परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़े रहेंगे। पंजाब प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी की तरफ से पीड़ित परिवार को दस लाख रुपए दिए जाएँगे। इस मामले में जितने भी आरोपित हैं, किसी को नहीं छोड़ा जाएगा।

मुख्‍यमंत्री कैप्‍टेन अमरिंदर सिंह ने भी ट्वीट कर हैप्‍पी के आत्‍महत्‍या करने पर दुख जताया। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लिखा, “लुधियाना जिले से हमारे पार्टी कार्यकर्ता की आत्महत्या की दुखद खबर। हैप्पी बाजवा ने सुसाइड कर ली। पंजाब पुलिस के डीजीपी को तत्काल जाँच के निर्देश दिए हैं और आरोपितों को गिरफ्तार करने को कहा है। जो कोई भी दोषी होगा उसे छोड़ा नहीं जाएगा।”

ऑडियो में बाजवा ने क्या कहा

बता दें कि हैप्पी बाजवा कॉन्ग्रेस के स्पोर्टस एंड कल्चरल सेल देहाती के जिला चेयरमैन थे। उन्होंने आत्महत्या करने से पहले पंजाब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह के लिए जो ऑडियो रिकॉर्ड की, उसमें उन्होंने कहा कि वह तीस साल तक कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़े रहे, लेकिन अभी तक अपने परिवार को दाल आटा योजना का लाभ तक नहीं दिला सके। इसके अलावा कॉन्ग्रेस के लिए काम करते हुए उन पर कई मामले दर्ज हुए, 4 साल के शासन में उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ है।

बाजवा ने बताया कि वह हरियाणा, हिमाचल, गुजरात सहित कई प्रदेशों में कॉन्ग्रेस के लिए प्रचार कर चुके हैं। पार्टी प्रचार के लिए घर से 6 महीने तक बाहर रहना पड़ता था। इसलिए उन्होंने शादी भी नहीं की। इस दौरान उनके खिलाफ विरोधी दलों ने कई झूठे मामले दर्ज करवाए और अब एक प्लाट, जो उन्होंने कुछ समय पहले लिया था, उसको लेकर चल रहे विवाद में उन पर फिर से मामला दर्ज करने की तैयारी है। इसलिए इन सबसे तंग आकर वह आत्महत्या कर रहे हैं। वह बताते हैं कि इन सबके लिए गाँव निवासी प्रीतम सिंह, उसका भतीजा बलजिंदर सिंह और पंच महिंदर सिंह जिम्मेदार है।

उल्लेखनीय है कि बाजवा की आत्महत्या के बाद दाखा प्रभारी इंस्पेक्टर जगजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने शव को बरामद कर लिया है, उसे अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। एक ऑडियो की जानकारी उनके पास भी पहुँची है, फिलहाल मामले की जाँच की जा रही है। आरोपितों के खिलाफ उचित कार्रवाई होगी।