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राजस्थान: चुनाव में कर्जमाफी का वादा… अब मुकर गई कॉन्ग्रेसी सरकार, किसानों को मिल रहे कुर्की के नोटिस

राजस्थान में किसानों से कर्जमाफी का वादा करके साल 2018 में सत्ता में आने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी अब एक दम से अपने वादे से मुकर गई है। चुनावों के समय राहुल गाँधी ने कहा था कि उनकी सरकार बनने के मात्र दस दिन के अंदर सारे कर्जे माफ हो जाएँगे, लेकिन करीब ढाई साल बाद भी वादा पूरा नहीं हुआ और जब किसानों को बैंकों ने नोटिस भेजना शुरू किया, तो प्रदेश सरकार ने ये कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उन्होंने ऐसा कोई वादा ही नहीं किया था।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर जिले के किसान रामगोपाल जाट ने बताया कि उन्होंने आज से 5 साल पहले दो बार में साढ़े 3 लाख और 6 लाख करके, 9 लाख रुपए का लोन लिया था और अब तक 6 लाख रुपए से ज्यादा का ब्याज चुका चुके हैं, मगर अब बैंक ने भी साढ़े 13 लाख 7 हजार 756 की डिमांड निकालकर, घर के कुर्की का नोटिस भेज दिया है। रामगोपाल के पास इतने रुपए देने के लिए नहीं हैं और दूसरी ओर बैंक मानने के लिए तैयार नहीं है।

रिपोर्ट बताती है कि रामगोपाल जाट कोई अकेले व्यक्ति नहीं है। ऐसे तमाम किसान हैं जिन्होंने 1 लाख रुपए से लेकर साढ़े 3 लाख रुपए तक लोन लिया, और अब उन सभी के पास नोटिस गए हैं। गाँव में कई किसानों के पास अलग-अलग बैंकों से कुर्की के नोटिस आए हुए हैं। मुंडियारामसर के 80 साल के गंगाराम के ऊपर 5 सालों में 14 फीसदी के ब्याज से 8 लाख का लोन 14 लाख का हो गया है।

इस बीच राजस्थान सरकार के सहकारिता मंत्री उदय लाल आंजना ने साफ कहा है, “हमने कोई वादा नहीं किया था कि सभी किसानों को लोन माफ करेंगे।” सरकार का कहना है कि उनके पास इतने पैसे नहीं है कि सभी किसानों का लोन माफ कर सकें जबकि केंद्र सरकार बताती है कि राज्य में किसानों पर 1,20, 979 करोड़ रुपए का कर्ज बाकी है।

बता दें कि कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा सत्ता में आने के लिए बोले गए झूठ से आहत होकर कई किसान अपनी जान गँवा चुके हैं। पार्टी कहती है कि उन्होंने सत्ता संभालते ही सभी किसानों के बैंको से लोन माफ किए थे। लेकिन रिपोर्ट कहती है कि सरकार ने भूमि विकास बैंक और सहाकारी बैंक के लघु एवं सीमांत किसानों को लोन माफ किए थे और बाकी किसानों को कर्ज तले दबा ही छोड़ दिया।

वीडियो में कॉन्ग्रेस द्वारा किए गए वादे का प्रमाण है

2018 की वीडियो देखें तो पता चलेगा कि कैसे दावे के साथ राहुल गाँधी ने कर्जमाफी के वादे पर मोदी सरकार को चुनौती दी थी। लेकिन साल 2019 की शुरुआत में ही किसानों की मौत की खबरें आने लगीं। कर्ज न माफ होने के कारण साल 2019 में रघुनाथपुरा के 40 वर्षीय किसान नेतराम नाथ ने सुसाइड की थी।

उससे पूर्व राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के ठीकरी गाँव में 23 जून 2019 को 45 वर्षीय किसान सोहनलाल ने कर्जमाफी न होने के कारण जहर खाकर अपनी जान दे दी थी। सोहनलाल ने मरने से पहले एक वीडियो और दो पेज का सुसाइड नोट भी छोड़ा था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि गहलोत सरकार चुनाव से पहले किए अपने वादों को पूरा करने में असफल रही और उन्हीं के कारण वह आत्महत्या कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस पार्टी का किसान कर्जमाफी को लेकर कहा गया झूठ उस समय भी सामने आया था जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी में रहते हुए ही कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ मध्य प्रदेश में मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने उस दौरान माना था कि प्रदेश सरकार ने कर्जमाफी का वादा पूरा नहीं किया।

सिंधिया ने किसानों की कर्जमाफी को लेकर कॉन्ग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था, “किसानों का कर्ज पूरी तरह से माफ नहीं किया गया है। केवल 50 हजार रुपए का कर्ज माफ किया गया है, जबकि हमने कहा था कि 2 लाख तक का कर्ज माफ किया जाएगा। 2 लाख रुपए तक के कर्ज को माफ किया जाना चाहिए।”

सिद्धू के नाम ऑडियो, कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता की आत्महत्या: कहा – ‘पार्टी को 30 साल दिए, शादी भी नहीं… कोई फायदा नहीं’

पंजाब के लुधियाना जिले के दाखा विधानसभा के जंगपुर गाँव में गुरुवार (जुलाई 29, 2021) को कॉन्ग्रेस महासचिव हैप्पी बाजवा/दिलजीत सिंह ने जहर खाकर सुसाइड कर ली। सुसाइड से पहले उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिंद्धू को अपना 10 मिनट का ऑडियो संदेश भेजा।

बाजवा ने इसमें बताया कि कैसे वह पिछले 30 साल से कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ जुड़े हैं लेकिन उन्हें और उनके घरवालों को कभी इसका लाभ नहीं मिला जबकि पार्टी के लिए काम करने पर उनके ख़िलाफ़ केस होते रहे। ऑडियो के मुताबिक किसी प्लॉट संबंधी एक मामले में उन्हें फँसाने की तैयारी चल रही थी, इसी से आहत होकर उन्होंने आत्महत्या का फैसला किया।

बाजवा ने अपनी ऑडियो में सिद्धू से अनुरोध किया है कि उनके जाने के बाद सिद्धू उनके परिवार को संभाल लें। अपनी मौत के लिए उन्होंने तीन लोगों को जिम्मेदार कहा है। इनमें से दो को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है, जिनकी पहचान प्रीतम सिंह और महिंदर सिंह के तौर पर हुई है। वहीं एक आरोपित बलजिंदर सिंह फरार है।

बाजवा के परिजनों से मिले सिद्धू, CM ने जताया दुख

सुसाइड से पहले जारी की गई बाजवा की ऑडियो से प्रदेश में हड़कंप है। कॉन्ग्रेस नेताओं का कहना है कि बाजवा ने पार्टी को दोषी नहीं कहा जबकि ऑडियो कुछ और ही बयान कर रही है। वहीं सिद्धू भी घटना की सूचना पाते ही कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता के घर पहुँचे।

पीड़ित परिवार के साथ शोक व्यक्त करते हुए सिद्धू ने कहा कि वह हमेशा इस परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़े रहेंगे। पंजाब प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी की तरफ से पीड़ित परिवार को दस लाख रुपए दिए जाएँगे। इस मामले में जितने भी आरोपित हैं, किसी को नहीं छोड़ा जाएगा।

मुख्‍यमंत्री कैप्‍टेन अमरिंदर सिंह ने भी ट्वीट कर हैप्‍पी के आत्‍महत्‍या करने पर दुख जताया। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लिखा, “लुधियाना जिले से हमारे पार्टी कार्यकर्ता की आत्महत्या की दुखद खबर। हैप्पी बाजवा ने सुसाइड कर ली। पंजाब पुलिस के डीजीपी को तत्काल जाँच के निर्देश दिए हैं और आरोपितों को गिरफ्तार करने को कहा है। जो कोई भी दोषी होगा उसे छोड़ा नहीं जाएगा।”

ऑडियो में बाजवा ने क्या कहा

बता दें कि हैप्पी बाजवा कॉन्ग्रेस के स्पोर्टस एंड कल्चरल सेल देहाती के जिला चेयरमैन थे। उन्होंने आत्महत्या करने से पहले पंजाब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह के लिए जो ऑडियो रिकॉर्ड की, उसमें उन्होंने कहा कि वह तीस साल तक कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़े रहे, लेकिन अभी तक अपने परिवार को दाल आटा योजना का लाभ तक नहीं दिला सके। इसके अलावा कॉन्ग्रेस के लिए काम करते हुए उन पर कई मामले दर्ज हुए, 4 साल के शासन में उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ है।

बाजवा ने बताया कि वह हरियाणा, हिमाचल, गुजरात सहित कई प्रदेशों में कॉन्ग्रेस के लिए प्रचार कर चुके हैं। पार्टी प्रचार के लिए घर से 6 महीने तक बाहर रहना पड़ता था। इसलिए उन्होंने शादी भी नहीं की। इस दौरान उनके खिलाफ विरोधी दलों ने कई झूठे मामले दर्ज करवाए और अब एक प्लाट, जो उन्होंने कुछ समय पहले लिया था, उसको लेकर चल रहे विवाद में उन पर फिर से मामला दर्ज करने की तैयारी है। इसलिए इन सबसे तंग आकर वह आत्महत्या कर रहे हैं। वह बताते हैं कि इन सबके लिए गाँव निवासी प्रीतम सिंह, उसका भतीजा बलजिंदर सिंह और पंच महिंदर सिंह जिम्मेदार है।

उल्लेखनीय है कि बाजवा की आत्महत्या के बाद दाखा प्रभारी इंस्पेक्टर जगजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने शव को बरामद कर लिया है, उसे अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। एक ऑडियो की जानकारी उनके पास भी पहुँची है, फिलहाल मामले की जाँच की जा रही है। आरोपितों के खिलाफ उचित कार्रवाई होगी।

कॉन्ग्रेसी CM, बेटी के ससुराल का मेडिकल कॉलेज और विधानसभा से बिल पास: धोखाधड़ी, ₹125 करोड़ का कर्ज – आरोप ही आरोप

छत्तीसगढ़ के दुर्ग स्थित चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण का रास्ता अब साफ हो गया है। प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने गुरुवार (29 जुलाई 2021) को कॉलेज अधिग्रहण विधेयक को विधानसभा से पास करा लिया। बीजेपी ने इसका कड़ा विरोध भी किया है। जबकि, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने इसे लोकहित का कार्य करार दिया है।

चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज अधिग्रहण विधेयक-2021 को स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने सदन में पेश किया। उन्होंने इस विधेयक को पेश करने का मुख्य उद्देश्य छात्रों के हितों की रक्षा करना बताया है। मंत्री ने कहा कि सामान्यतया एक मेडिकल कॉलेज के निर्माण में 3-4 साल का समय लगता है, लेकिन उनके अनुसार इस कॉलेज के बुनियादी ढाँचे पर काम शुरू कर सकते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने खुलासा किया है कि इस संस्था को चलाने के लिए हर साल करीब 140 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे। इसके साथ ही उन्होंने दुर्ग और बिलासपुर में मेडिकल कॉलेज को लेकर कहा कि इन दोनों कॉलेजों का खर्च प्रतिवर्ष 200-200 करोड़ रुपए है। उन्होंने ये भी कहा कि जय-वीरू की जोड़ी साथ है तो आपको तकलीफ हो रही है। इस पर पलटवार करते हुए बीजेपी नेता शिवरतन सिंह ने कहा, “मैं आपको जय-वीरू की जोड़ी बोलूँ या वीरू-गब्बर की। पता है न, जय का क्या हाल होता है?”

साभार: नई दुनिया

नई दुनिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सदन में चर्चा के दौरान मुख्य विपक्षी बीजेपी ने इस पर संशोधन के लिए मतदान की माँग की थी, लेकिन विपक्ष का संशोधन प्रस्ताव 16 के मुकाबले 56 मतों से गिर गया।

कर्ज में डूबे कॉलेज का अधिग्रहण क्यों?

इस विधेयक को लेकर भूपेश बघेल सरकार पर निशाना साधते हुए पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह ने पूछा कि जब बजट से ये स्पष्ट हो गया है कि राज्य की आर्थिक हालत खस्ता है तो फिर कर्ज में डूबे मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण की योजना कैसे बनी? उन्होंने कहा कि इसमें कहीं भी छात्रहित नहीं दिख रहा है। इस मेडिकल कॉलेज पहले ही धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं और इस पर 125 करोड़ रुपए का कर्ज भी है।

गौरतलब है कि चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज दुर्ग के संबंध में विवाद इसलिए हो रहा है, क्योंकि कॉलेज का मालिकाना हक उस परिवार के पास है, जिसमें बघेल की बेटी की शादी हुई है। सीएम भूपेश बघेल की बेटी दिव्या की शादी मंगल प्रसाद चंद्राकर के भतीजे क्षितिज चंद्राकर से हुई है। क्षितिज ‘ऑल इंडिया प्रोफेसनल कॉन्ग्रेस’ की छत्तीसगढ़ यूनिट के अध्यक्ष भी हैं।

मस्जिद में छिपे दानिश सिद्दीकी को घेरा, घसीटा… भारतीय पहचान के बाद तालिबानियों ने बर्बरता से मारा: रिपोर्ट्स

अफगानिस्तान के कंधार के स्पिन बोल्डक में कवरेज करने पहुँचे फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की हत्या को लेकर नई जानकारी सामने आई है। अभी तक जहाँ रवीश कुमार उन बंदूक की गोलियों को दोषी ठहरा रहे थे जो दानिश के आकर लगीं और जिनसे उनकी मौत हुई। वहीं इस नई जानकारी से साफ हो गया है कि कैसे तालिबानियों ने जानबूझकर दानिश को अपना निशाना बनाया और उनकी भारतीय पहचान जानने के बाद उनकी निर्मम हत्या की। तालिबानियों ने दानिश को जिंदा पकड़ा वो भी तब जब वो मस्जिद में छिपे थे और अपना इलाज करवा रहे थे।

वाशिंगटन एक्जामिनर में प्रकाशित माइकल रुबीन (Michael Rubin) की रिपोर्ट के अनुसार, न्यूज चैनलों में जो दानिश की मृत्यु को लेकर खबरें चली हैं वह केवल उस बर्बरता को छिपाने का प्रयास है जो तालिबानियों ने की। रिपोर्ट्स में बताया गया था कि अफगानिस्तान और तालिबान के बीच चल रहे संघर्ष को कवर करने पहुँचे दानिश की गोली लगने से मौत हो गई। जबकि माइकल का दावा है कि वो क्रॉस फायरिंग के दौरान नहीं मरे बल्कि तालिबान ने उन्हें जानबूझकर मारा।

अफगान के स्थानीय प्रशासन ने इस बात की जानकारी दी है कि घटना वाले दिन सिद्दीकी स्पिन बोल्डक क्षेत्र में अफगान की सेना के साथ ट्रैवल कर रहे थे। इसी दौरान एक हमला हुआ और पूरी सेना तितर-बितर हो गई। सिद्दीकी के साथ जो कमांडर और सेना के लोग थे वह भी अलग हो गए। उनके साथ केवल तीन सैनिक बचे थे। तभी सिद्दीकी को गोलीबारी के छर्रे आकर लगे।

सिद्दीकी घायल अवस्था में एक स्थानीय मस्जिद में घुसे और अपना प्राथमिक उपचार करवाया। मगर, कुछ देर में यह खबर चारों ओर फैल गई कि मस्जिद में कोई पत्रकार है। तालिबान ने इस खबर को जानने के बाद बकायदा सुनियोजित ढंग से मस्जिद पर ही हमला कर दिया। 

सिद्दीकी जिंदा थे, जब उन्हें तालिबानियों ने पकड़ा… उन्हें घसीट कर मस्जिद से बाहर निकाला। फिर उनसे पूछा गया कि वह कहाँ से हैं। पहचान जानने के बाद न केवल उन्हें मारा गया बल्कि उनके साथ जितने लोग थे सबकी जान ले ली गई। सेना के कमांडर और उनके साथ मौजूद अन्य टीम से सदस्य भी वहीं मार दिए गए। माइकल के अनुसार, दानिश की कुछ फोटो जगह-जगह शेयर हुई, लेकिन उन्होंने भारतीय सरकार के सूत्रों से कुछ ऐसी तस्वीरें प्राप्त की, जिसमें नजर आया कि कैसे तालिबान ने सिद्दीकी के सिर पर मारा और फिर उनको गोलियों से छलनी कर दिया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, सिद्दीकी अपना काम कर रह थे, लेकिन बेहद सामान्य सावधानी के साथ। अफगान सेना ने भी उनको इसलिए युद्ध को कवर करने की अनुमति दी क्योंकि उन्हें लग रहा था कि वही जीतेंगे और अगर ये सब कवर हुआ तो इससे उनका मनोबल बढ़ेगा। लेकिन स्थिति उलटी हो गई।

माइकल ने तालिबान के इस रवैये पर गौर करवाते हुए कहा है कि सिद्दीकी की हत्या, उनकी लाश को क्षत-विक्षत करने का प्रयास दिखाता है कि तालिबान को न तो युद्ध नियमों की परवाह है और न ही उन्हें उन सम्मेलनों का सम्मान है जो वैश्विक समुदाय के व्यवहार को नियंत्रित करते हैं। रिपोर्ट में सवाल किया गया है कि आखिर क्यों सिद्दीकी की मौत को एक दुखद दुर्घटना के तौर पर दिखाया जा रहा है जबकि ये स्पष्ट रूप से हत्या है।

दानिश सिद्दीकी की हत्या और मीडिया गिरोह का प्रपंच

बता दें कि दानिश सिद्दीकी रॉयटर्स समाचार एजेंसी से जुड़े फोटो जर्नलिस्ट थे और अपने असाइनमेंट के कारण युद्ध वाले क्षेत्र में गए थे। 16 जुलाई को खबर आई कि तालिबानियों ने उन्हें मार डाला। हालाँकि, इस बीच रवीश कुमार जैसे मीडिया गिरोह के लोग तालिबान को दोषी न बताकर उन गोलियों को जिम्मेदार ठहराते रहे जो दानिश के सीने में लगी। वहीं गिरोह के अन्य सदस्य उनके द्वारा खींची गई तस्वीरों को सोशल मीडिया पर शेयर करने लगे और तालिबानियों को दोषी बताने से गुरेज करते रहे।

इसके बाद 18 जुलाई की शाम दानिश का शव दिल्ली हवाई अड्डे पर लाया गया और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्दे खाक किया गया। 21 जुलाई को पता चला कि तालिबानियों ने न सिर्फ दानिश की हत्या की थी बल्कि उनका सिर भी कुचल दिया गया था। पुलित्जर अवॉर्ड विजेता फोटोग्राफर के बारे में अफगानिस्तान के कमांडर बिलाल अहमद ने खुलासा किया था कि उनके शव के साथ भी बर्बरता की गई थी। उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा कि चूँकि दानिश सिद्दीकी भारतीय थे और तालिबानी भारत से नफरत करते हैं, इसीलिए उनके शव के साथ भी बर्बरता की गई थी।

कंडोम की मदद से टोक्यो ओलंपिक में मेडल: ऑस्ट्रेलिया की जेसिका फॉक्स ने ऐसे किया यूज, वीडियो वायरल

ऑस्ट्रेलिया की ओलंपियन नाविक जेसिका फॉक्स ने ओलंपिक 2021 में कुछ ऐसा क्रिएटिव किया, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने जापान के टोक्यो में हो रहे ओलंपिक के दौरान अपना खेल शुरू होने से पहले क्षतिग्रस्त हुई कायक (कश्ती) के अगले सिरे पर कार्बन फाइबर को सही करने के लिए कंडोम का इस्तेमाल किया। प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

उन्होंने इंस्टाग्राम पर इसका वीडियो भी शेयर किया है। इसमें 27 वर्षीय एथिलीट ने लिखा, “शायद आप नहीं जानते होंगे कि कंडोम से कश्ती को भी ठीक किया जा सकता है। इससे कॉर्बन फाइबर बहुत ही स्मूथ हो जाता है।” इसके अलावा फॉक्स ने ओलंपिक खेलों की शुरुआत में टिकटॉक पर अपने 18,000 फॉलोवर्स के साथ एक छोटा वीडियो 23 जुलाई 2021 को शेयर किया था, जिसे 47,000 बार देखा गया है।

द गार्जियन के अनुसार, कायक (कश्ती) की मरम्मत के लिए फॉक्स ने जो कंडोम इस्तेमाल किया था, वो जापानी ओलंपिक आयोजकों द्वारा ओलंपिक विलेज (गाँव) में रहने वाले खिलाड़ियों को बाँटे गए 1,60,000 कंडोम में से एक था। आयोजकों ने खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए इसे बाँटा था।

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी की रहने वाली जेसी फॉक्स ने टोक्यो ओलंपिक में K1 कैनो स्लेलम फाइनल में कांस्य पदक हासिल किया है। वो प्रतियोगिता में तीसरे स्थान पर रहीं। प्रतियोगिता में उनकी स्पीड सबसे फास्ट थी और वो खुद को गोल्ड मेडल का हकदार मानती थीं, लेकिन टाइम पेनल्टी के कारण उन्हें तीसरा स्थान मिला।

हालाँकि, महिलाओं की C1 कैनो स्लेलम में ब्रिटेन की सिल्वर मेडलिस्ट मैलोरी फ्रैंकलिन को तीन सेकेंड की मात देकर फॉक्स ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। फॉक्स का एक इवेंट अभी भी बचा हुआ है।

ओलंपिक आयोजकों द्वारा एथलीटों को कंडोम देने के बाद भी अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने इसी साल फरवरी 2021 में जारी ओलंपिक हैंडबुक के पृष्ठ 24 में खिलाड़ियों को शारीरिक संपर्क जैसे अनावश्यक गले लगाना, हाई-फाइव्स या हैंडशेक से बचने के लिए कहा है।

गौरतलब है कि जेसिका फॉक्स तीन बार कैनोन स्लेलम K1 वर्ल्ड चैम्पियन भी रही हैं। इससे पहले उन्होंने वर्ष 2012 में लंदन ओलंपिक के दौरान सिल्वर मेडल जीता था और 2016 में रियो ओलंपिक के दौरान ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था। उनके माता-पिता भी ओलंपियन एथिलीट रहे हैं।

श्री अरुणाचलेश्वर मंदिर: विश्व भर में भगवान शिव का सबसे बड़ा मंदिर, ‘पंच भूत स्थलों’ में एक, 217 फुट ऊँचा ‘राज गोपुरा’

भगवान शिव की पूजा भूतनाथ के रूप में भी की जाती है। भूतनाथ का अर्थ है ब्रह्मांड के पाँच तत्वों, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के स्वामी। इन्हीं पंचतत्वों के स्वामी के रूप में भगवान शिव को समर्पित पाँच मंदिरों की स्थापना दक्षिण भारत के पाँच शहरों में की गई है। ये शिव मंदिर, भारत भर में स्थापित द्वादश ज्योतिर्लिंगों के समान ही पूजनीय हैं। इन्हें संयुक्त रूप से पंच महाभूत स्थल कहा जाता है। तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई में अन्नामलाई की पहाड़ी स्थित श्री अरुणाचलेश्वर मंदिर इन्हीं पंच भूत स्थलों में से एक है, जहाँ अग्नि रूप में भगवान शिव की पूजा होती है और यहाँ स्थापित शिवलिंग को अग्नि लिंगम कहा जाता है।

श्री अरुणाचलेश्वर का पौराणिक इतिहास

मंदिर में भगवान शिव के अग्नि रूप में उत्पन्न होने का इतिहास युगों पुराना है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एक बार जब माता पार्वती ने चंचलतापूर्वक भगवान शिव से अपने नेत्र बंद करने के लिए कहा तो उन्होंने अपने नेत्र बंद कर लिए और इस कारण पूरे ब्रह्मांड में कई हजारों वर्षों के लिए अंधकार छा गया। इस अंधकार को दूर करने के लिए भगवान शिव के भक्तों ने कड़ी तपस्या की, जिसके कारण महादेव अन्नामलाई की पहाड़ी पर एक अग्नि स्तंभ के रूप में दिखाई दिए। इसी कारण यहाँ भगवान शिव की आराधना अरुणाचलेश्वर के रूप में की जाती है और यहाँ स्थापित शिवलिंग को भी अग्नि लिंगम कहा जाता है।

मंदिर की स्थापना की सही तारीख के विषय में मतभेद है लेकिन मंदिर में स्थापित प्रतिमाओं और अन्य पुरातात्विक अध्ययनों से अंदाजा लगाया जाता है कि मंदिर का निर्माण 7वीं शताब्दी में हुआ था, जिसका जीर्णोद्धार 9वीं शताब्दी में चोल राजाओं के द्वारा कराया गया। इसके अलावा पल्लव और विजयनगर साम्राज्य के राजाओं द्वारा भी मंदिर में कराए गए निर्माण कार्य की जानकारी मिलती है। मंदिर का इतिहास तमिल ग्रंथों थेवरम और थिरुवसागम में उपलब्ध है।

संरचना एवं स्थापत्य कला

भगवान शिव की उपासना को समर्पित यह श्री अरुणाचलेश्वर मंदिर, विश्व भर में भगवान शिव का सबसे बड़ा मंदिर है। लगभग 24 एकड़ क्षेत्रफल में अपने विस्तार के कारण यह भारत का आठवाँ सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है। मंदिर के निर्माण के लिए ग्रेनाइट एवं अन्य कीमती पत्थरों का उपयोग किया गया है।

मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के अतिरिक्त 5 अन्य मंदिरों का निर्माण किया गया है। अन्नामलाई की पहाड़ी की तलहटी पर स्थित इस पूर्वाभिमुख मंदिर में चार प्रवेश द्वार हैं और यहाँ चार बड़े गोपुरम बनाए गए हैं, जिनमें से सबसे गोपुरम को ‘राज गोपुरा’ भी कहा जाता है, जिसकी ऊँचाई लगभग 217 फुट है और यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा प्रवेश द्वार है।

श्री अरुणाचलेश्वर मंदिर में हजार स्तंभों का एक हॉल भी है, जिसका निर्माण विजयनगर साम्राज्य के राजा कृष्णदेव राय के द्वारा कराया गया। इस हॉल के इन सभी हजार स्तंभों में नायक वंश के शासकों के द्वारा नक्काशी कराई गई। यह नक्काशी अद्भुत है और भारतीय स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है, जो बहुत कम मंदिरों में देखने को मिलती है।

मुख्य मंदिर तक पहुँचने के मार्ग में कुल 8 शिवलिंग स्थापित हैं। इंद्र, अग्निदेव, यम देव, निरुति, वरुण, वायु, कुबेर और ईशान देव द्वारा पूजा करते हुई आठ शिवलिंगों के दर्शन करना अत्यंत पवित्र माना गया है। मंदिर के गर्भगृह में 3 फुट ऊँचा शिवलिंग स्थापित है, जिसका आकार गोलाई लिए हुए चौकोर है। गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग को लिंगोंत्भव कहा जाता है और यहाँ भगवान शिव अग्नि के रूप में विराजमान हैं, जिनके चरणों में भगवान विष्णु को वाराह और ब्रह्मा जी को हंस के रूप में बताया गया है।

प्रमुख त्यौहार

महाशिवरात्रि के अलावा श्री अरुणाचलेश्वर मंदिर का प्रमुख त्यौहार कार्तिक पूर्णिमा है। इसे मंदिर में कार्तिक दीपम कहा जाता है, जो सदियों से मंदिर में मनाया जा रहा है। इस दिन मंदिर में विशाल दीपदान किया जाता है और हजारों की संख्या में दीपक जलाए जाते हैं। एक विशाल दीपक मंदिर की पहाड़ी पर प्रज्ज्वलित किया जाता है, जिसे 2-3 किमी की दूरी से भी देखा जा सकता है।

इसके अलावा प्रत्येक पूर्णिमा को श्रद्धालु अन्नामलाई पर्वत की 14 किलोमीटर (किमी) लंबी परिक्रमा नंगे पैर करते हैं। इसे ‘गिरिवलम‘ के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा मंदिर में ब्रह्मोत्सवम और तिरुवूडल नाम के त्यौहार भी मनाए जाते हैं, जिनके दौरान मंदिर में कई तरह के अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।

कैसे पहुँचें?

तिरुवन्नामलाई का निकटतम हवाईअड्डा चेन्नई में स्थित है, जो मंदिर से लगभग 175 किमी की दूरी पर स्थित है। यह एक अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा है। इसके अलावा तिरुचिरापल्ली रेल मुख्यालय में स्थित तिरुवन्नामलाई रेलवे स्टेशन मंदिर का निकटतम रेलवे स्टेशन है, जो मंदिर से लगभग 2 किमी दूर है।

सड़क मार्ग से तिरुवन्नामलाई पहुँचना सबसे आसान है क्योंकि यहाँ 8 ऐसी सड़के हैं, जो इसे तमिलनाडु के चेन्नई और विलुप्पुरम समेत बेंगलुरु, पुडुचेरी और मैंगलोर जैसे शहरों से जोड़ती हैं।

Tokyo Olympics: 3 में से 2 राउंड जीतकर भी हार गईं मैरीकॉम, क्या उनके साथ हुई बेईमानी? भड़के फैंस

भारतीय मुक्केबाज मैरीकॉम (Mary Kom) टोक्यो ओलिंपिक 2020 (Tokyo Olympics 2020) से बाहर हो गईं, लेकिन उनकी हार के बाद विवाद खड़ा हो गया है। मैरीकॉम का कहना है कि उन्हें पता ही नहीं था कि वह हार गई हैं। मैच होने के बाद जब उन्होंने सोशल मीडिया देखा तो पता चला कि वह हार गईं। उन्होंने इंटरनेशनल ओलिंपिक कमिटी (IOC) की बॉक्सिंग टास्क फॉर्स को निशाने पर लिया और खराब जज करने का आरोप लगाया। मैरीकॉम को प्री क्वार्टर फाइनल में कोलंबिया की इंग्रिट वलेंसिया के हाथों 3-2 से हार का सामना करना पड़ा। मैरीकॉम ने आखिरी दो राउंड जीते थे, फिर भी उन्हें हारा हुआ घोषित कर दिया गया। 

मैरीकॉम ने इंडिया टुडे को बताया, “जब मैंने लड़ाई के बाद अपना सैंपल देने के लिए डोपिंग सेंटर में प्रवेश किया, तब भी मुझे विश्वास नहीं हुआ कि मैं हार गई। मेरे कोच मुझे बताने की कोशिश कर रहे थे कि मैं जीत गई, लेकिन इसका क्या मतलब है, मैं समझ नहीं पा रही हूँ।”

जजों के फैसले की घोषणा के बाद मैरीकॉम को मुस्कुराते और हाथ उठाते देखा जा सकता है। जब रैफरी ने मुकाबले के अंत में वलेंसिया का हाथ ऊपर उठाया तो मैरीकॉम की आँखों में आँसू और चेहरे पर मुस्कान थी। 6 बार की विश्व चैम्पियन 38 वर्षीया मैरीकॉम ने कहा कि पूर्व खेल मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा उनके मुकाबले के बारे में किए गए ट्वीट को देखकर ही उन्हें एहसास हुआ कि वह हार गई हैं।

मैरीकॉम ने कहा, “मुझे लगा कि मैं लड़ाई जीत रही हूँ। फिर मैंने अपनी हार के बारे में सोशल मीडिया पर किरण रिजिजू का ट्वीट देखा, मैं उसके बाद हैरान और परेशान थी। मुझे नहीं पता कि क्या कहूँ, मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि ऐसा निर्णय लिया गया।” 

उन्होंने कहा, “मैं विरोध भी नहीं कर सकती, क्योंकि हमें बताया गया था कि इस ओलंपिक में इसकी अनुमति नहीं है। इस तरह की चीजें पहले भी मेरे साथ अन्य प्रतियोगिताओं में हुई हैं। अकेले इस ओलंपिक में ऐसा नहीं हुआ है। मेरे साथ आखिरी बॉक्सिंग विश्व चैंपियनशिप में भी ऐसा ही हुआ था।” मैरीकॉम ने टोक्यो ओलंपिक को ‘बहुत बुरी तरह से आयोजित’ बताया।

मैरीकॉम ने टाइम्स नॉउ को बताया, “मुझे अभी भी खुद पर विश्वास नहीं हो रहा है। मुझे लगा कि मैं अभी भी जीत रही हूँ। रिंग के अंदर, मैंने अपना हाथ उठाया, क्योंकि मुझे स्पष्ट रूप से पता था कि मैं जीत रही हूँ।” उन्होंने आगे कहा, “हर कोई मैच देख रहा है, उन्हें पता है कि कौन जीत रहा है। मैं इस फैसले से निराश हूँ।”

मैरीकॉम ने 3 में से 2 राउंड जीते

मुकाबले में शुरू से ही दोनों मुक्केबाज एक दूसरे पर मुक्के जड़ रही थीं, लेकिन वलेंसिया ने शुरुआती राउंड 4-1 से अपने नाम कर दबदबा बना लिया था। मणिपुर की अनुभवी मुक्केबाज मैरीकॉम ने शानदार वापसी कर दूसरे और तीसरे राउंड को 3-2 से अपने नाम किया, लेकिन शुरुआती राउंड की बढ़त से वलेसिंया इस मुकाबले को जीतने में सफल रहीं। भारतीय मुक्केबाज ने दूसरे और तीसरे राउंड में दाहिने ‘हुक’ का बखूबी इस्तेमाल किया।

क्या मैरीकॉम के साथ हुई बेईमानी?

मुकाबले में 2 राउंड जीतने के बाद भी मैरीकॉम को हार का सामना करना पड़ा। इस वजह से उनके फैंस सोशल मीडिया पर भड़क गए हैं। फैंस का मानना है कि मैरीकॉम के साथ बेईमानी की गई है।

‘देश में डर का माहौल, खेला होबे की जरूरत’: ममता से मिले जावेद अख्तर-शबाना आजमी, फिर दिखाई मोदी घृणा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे के बीच गुरुवार (जुलाई 29, 2021) की शाम को गीतकार जावेद अख्तर व उनकी पत्नी अभिनेत्री शबाना आजमी ने उनसे मुलाकात की। बनर्जी से मुलाकात के बाद अख्तर ने कहा, “देश का मिजाज बदलाव का है…उनकी (ममता की) प्राथमिकता ये नहीं है कि वह नेतृत्व करें…उनका मानना है कि परिवर्तन होना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “बंगाल मॉडल एक उदाहरण है…इसमें कोई शक नहीं कि देश में खेला होबे।”

गौर हो कि बंगाल चुनाव जीतने के बाद ममता बनर्जी पहली बार दिल्ली आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मुलाकात के बाद अख्तर ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि दिल्ली में दंगे हुए। उन्होंने कहा कि इस समय पूरे देश में डर का माहौल है और ये खत्म होना चाहिए। हालाँकि, वह इस सवाल को टाल गए कि मोर्चे का नेतृत्व कौन करेगा।

मुलाकात के बाद मीडियाकर्मियों को जानकारी देते हुए अख्तर ने कहा, “यह एक औपचारिक बैठक थी। बंगाल का इतिहास है कि इसने क्रांतिकारी आंदोलनों का नेतृत्व किया था। बंगाल के कलाकार और बुद्धिजीवी ममता जी का समर्थन करते हैं। हमने उनकी जीत पर बधाई दी।” उन्होंने आगे कहा, “हम रॉयल्टी बिल में संशोधन में उनके समर्थन के लिए ममता जी के आभारी हैं, जिससे संगीतकार, गीतकार, गीतकार रॉयल्टी से लाभान्वित हो सकेंगे।”

यह पूछे जाने पर कि ‘क्या ममता बनर्जी को आगे बढ़कर नेतृत्व करना चाहिए’, अख्तर ने कहा, “हमारी छोटी सी बातचीत में उन्होंने कभी नहीं कहा कि नेतृत्व उनकी प्राथमिकता है। वह एक परिवर्तन चाहती हैं। पहले वह बंगाल के लिए लड़ी थीं और अब वह भारत में बदलाव के लिए लड़ना चाहती हैं। देश का नेतृत्व कौन करेगा यह महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन हिंदुस्तान कैसा होगा यह सबसे महत्वपूर्ण है। लोकतंत्र गतिशील और निरंतर होना चाहिए है।”

‘खेला होबे’ नारे के बारे में पूछे जाने पर कि ‘क्या यह भारत में गूँजेगा’, अख्तर ने कहा, “इसे सबूत की जरूरत नहीं है। यह अब चर्चा से परे है।” जावेद स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे थे तो ममता बनर्जी ने पीछे से ब्रीफ करते हुए कहा कि देश में परिवर्तन होना चाहिए और आप इस पर गाना लिखिए। अख्तर ने कहा, “मेरा मानना है कि बदलाव होना चाहिए। अभी देश में बहुत तनाव है… ध्रुवीकरण है। कई लोग आक्रामक बयान देते हैं… हिंसक घटनाएँ हो रही हैं।”

बनर्जी ने मीडियाकर्मियों के सामने गीतकार से कहा, “आपको खेला होबे पर एक गाना बनाना होगा।” 2024 के लोकसभा चुनावों का लक्ष्य रखते हुए बनर्जी ने बुधवार (जुलाई 28, 2021) को कहा था, “पूरे देश में खेला होगा। यह एक सतत प्रक्रिया है … जब आम चुनाव (2024) आएगा, तो यह होगा मोदी बनाम देश होगा।”

पश्चिम बंगाल की सीएम ने कहा कि बीजेपी को हराने के लिए सभी विपक्षी दलों को फिर से एकजुट होकर एक मजबूत ताकत के रूप में लड़ना होगा। उन्होंने कहा, “बीजेपी को हराने के लिए सभी का साथ आना जरूरी है… अकेला, मैं कुछ भी नहीं हूँ, सबको मिलकर काम करना होगा। मैं नेता नहीं हूँ, मैं एक कैडर हूँ। सोनिया गाँधी भी विपक्ष की एकता चाहती हैं। कॉन्ग्रेस को क्षेत्रीय दलों पर और क्षेत्रीय दलों को कॉन्ग्रेस पर भरोसा है।”

सोमवार (जुलाई 26, 2021) शाम दिल्ली पहुँची टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी, कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी, कमलनाथ, आनंद शर्मा, अभिषेक मनु सिंघवी और राजद नेता लालू प्रसाद यादव से मुलाकात कर चुकी हैं।

मीडिया पर फूटा शिल्पा शेट्टी का गुस्सा, फेसबुक-गूगल समेत 29 पर मानहानि केस: शर्लिन चोपड़ा को अग्रिम जमानत नहीं, माँ ने भी की शिकायत

पोर्न रैकेट मामले में गिरफ्तार किए गए राज कुंद्रा की अभिनेत्री बीवी शिल्पा शेट्टी का गुस्सा अब मीडिया कवरेज को लेकर फूटा है। उन्होंने नकारात्मक रिपोर्टिंग और अपनी छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए 29 पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। इस पर शुक्रवार (30 जुलाई 2021) को सुनवाई होगी। दूसरी तरफ अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा की अग्रिम जमानत याचिका मुंबई सत्र न्यायालय ने खारिज कर दी है। वहीं एक अन्य मामले में शिल्पा शेट्टी की माँ ने भी 1.6 करोड़ रुपए की लैंड डील में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई है।

बार ऐंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार शिल्पा ने जिनके खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है उनमें द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, इंडिया टीवी, फ्री प्रेस जर्नल, एनडीटीवी, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब शामिल हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से सभी आपत्तिजनक वीडियो हटाने का निर्देश देने की भी गुहार लगाई है।

बॉलीवुड अभिनेत्री का कहना है कि इन मीडियाकर्मियों और मीडिया समूहों ने पोर्न रैकेट से जुड़े मामले में उनके खिलाफ झूठी मीडिया रिपोर्ट्स प्रकाशित की हैं। शिल्पा ने कहा है कि इन मीडिया समूहों ने न केवल ऐसी रिपोर्ट्स प्रकाशित की है जिनमें उनके बयानों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है, बल्कि कई रिपोर्ट्स में उनके खिलाफ भी आपत्तिजनक बातें कही गई हैं। हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में कहा गया है कि इन रिपोर्ट्स और वीडियो के कारण शिल्पा की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची है और उनके व्यापारिक सहयोगी, फैंस, ब्रांड एंडोर्समेंट कंपनी और कई अन्य लोग भी इन भ्रामक रिपोर्ट्स से प्रभावित हो सकते हैं।

हाईकोर्ट में दायर की याचिका में शिल्पा शेट्टी ने माँग की है कि न केवल उनके खिलाफ ऐसी रिपोर्ट्स और वीडियो के प्रकाशन पर रोक लगाई जाए, बल्कि अभी तक जिस भी तरह की सामग्री का प्रकाशन किया गया है उसे हटाया भी जाए। साथ ही याचिका में उनके द्वारा यह भी कहा गया है कि इन रिपोर्ट्स को प्रकाशित करने वाले मीडिया समूह सार्वजनिक तौर पर माफी भी माँगे।

शर्लिन चोपड़ा को गिरफ्तारी का डर

राज कुंद्रा की गिरफ्तारी के साथ सामने आए पोर्न रैकेट के मामले में गवाह के रूप में बयान दर्ज करने के लिए शर्लिन चोपड़ा को सीआरपीसी की धारा 160 के तहत नोटिस जारी किया गया था। हालाँकि इस मामले में उन्हें अपनी गिरफ्तारी का डर भी है। उनका मानना है कि उन्हें इस मामले में फँसाया भी जा सकता है। उनका कहना था कि वे जाँच में पूरी तरह से सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन गिरफ्तारी के डर से उन्होंने मुंबई सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत की अर्जी दी थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोनाली अग्रवाल ने गुरुवार (29 जुलाई 2021) को अर्जी खारिज कर दी। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपितों के खिलाफ सबूत इकट्ठा करने के लिए चोपड़ा का बयान दर्ज कराना आवश्यक है। इसके लिए चोपड़ा को नोटिस भेजा गया था। लेकिन नोटिस का जवाब देने की बजाय चोपड़ा ने अग्रिम जमानत की अर्जी न्यायालय में दाखिल कर दी।

सुनंदा शेट्टी ने दर्ज कराई धोखाधड़ी की शिकायत

शिल्पा शेट्टी की माँ ने गुरुवार को ही 1.6 करोड़ रुपए की लैंड डील में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई है। मुंबई पुलिस के अनुसार शिल्पा की माँ सुनंदा शेट्टी ने फर्जी कागजात के जरिए उन्हें 1.6 करोड़ रुपए की जमीन बेच देने का आरोप लगाया है। सुनंदा के द्वारा दर्ज की गई शिकायत में सुधाकर घारे का नाम सामने आ रहा है। सुनंदा के अनुसार सुधाकर ने फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करते हुए उन्हें 1.6 करोड़ रुपए की जमीन बेच दी। मुंबई पुलिस ने उनकी शिकायत पर केस दर्ज कर लिया है।

‘आओगे पैर पर, जाओगे चारपाई पर’: ओवैसी के साथी राजभर ने महिलाओं को BJP के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाया

जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आता जा रहा है, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरोधी ओछी हरकतों पर उतर आए हैं। एक ओर चुनाव को ध्यान में रखते हुए जाति आधारित प्रोपेगेंडा चलाया जा रहा है वहीं कई नेता जुबानी तौर पर सीएम आदित्यनाथ और भाजपा पर हमला कर रहे हैं। इसी क्रम में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने आपत्तिजनक बयान देते हुए महिलाओं से वोट माँगने के लिए आने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट करने के लिए कहा है।

वाराणसी में पार्टी मीटिंग में भाग लेते हुए राजभर ने कहा कि भाजपा वाले वोट माँगने दो पैर पर आएँ तो उन्हें चारपाई पर वापस भेजो। बाद में सफाई देते हुए राजभर ने पत्रकारों से कहा, “हाँ, मैंने पार्टी मीटिंग में उपस्थित महिलाओं से कहा है कि यदि भाजपा वाले महिलाओं को 33% आरक्षण और महँगाई कम करने का अपना वादा पूरा नहीं करते हैं और वह वोट माँगने के लिए आते हैं तो उन्हें चारपाई पर भेज देना। यदि भाजपा वाले अपना वादा पूरा करने के लिए मना करते हैं तो उन्हें कह देना कि दोबारा मत आना, आओगे तो जिंदा नहीं जाओगे। आओगे दो पैर पर लेकिन जाओगे चारपाई पर।”

राजभर ने यह भी कहा कि वो (भाजपा) गाँजा और दारू पीते हैं और अपने भाषणों में बड़े-बड़े वादे करते हैं जिससे महिलाएँ उन्हें वोट करती हैं और फिर उनके वादे अधूरे रह जाते हैं। राजभर ने कहा कि हर खाते में 15 लाख रुपए देने का वादा हो या 2 करोड़ नौकरियों का, सब अधूरे हैं और अब महँगाई भी लगातार बढ़ती जा रही है।

2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार से विदाई के बाद से ही ओमप्रकाश राजभर राज्य में भाजपा और सीएम आदित्यनाथ के खिलाफ लगातार मोर्चा खोले हुए हैं। 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों के चलते राजभर ने भागीदारी संकल्प मोर्चा नाम का एक गठबंधन किया है जिसमें कई छोटी पार्टियाँ हैं और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM भी शामिल है। राजभर के इस गठबंधन का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में सीएम आदित्यनाथ को ‘नुकसान’ पहुँचाना है।

403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुनाव फरवरी-मार्च 2022 में होने के आसार हैं। 2017 में चुनी गई विधानसभा का कार्यकाल 14 मार्च 2022 में समाप्त होने जा रहा है।