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बंगाल में डर के साये में जी रहे हैं आदिवासी: चुनाव के बाद हिंसा पर TMC सरकार को NCST की लताड़

पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजे आने के बाद राज्य में हुई हिंसा पर मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अलावा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने भी प्रदेश का जुलाई में दौरा किया और अपने निष्कर्षों की 11 पेज की रिपोर्ट राज्य के चीफ सेक्रेट्री और डीजीपी के पास दाखिल की। इससे पहले NHRC ने अपनी रिपोर्ट में टीएमसी नेताओं को गुंडा कहा था। साथ ही मामले में सीबीआई जाँच की माँग की थी।

रिपोर्ट में आयोग ने बताया कि उन्हें इस बात के सबूत मिले हैं कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने चुनाव में जीत के बाद हिंदुओं के घरों को निशाना बनाकर लगातार हिंसा की। आयोग ने कहा कि अनुसूचित जनजाति समुदाय राज्य में चुनाव के बाद से डर में जी रहा है। वह पुलिस के समक्ष या रेवेन्यू अधिकारियों के पास शिकायत भी नहीं कर पा रहे हैं।

राज्य भर में हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़, जातिगत भेदभाव के मामले उजागर हुए: NCST

मिदनापुर जिले में आयोग ने पाया कि मुंडा जनजाति के लोगों को हिंसक भीड़ ने निशाना बनाया और उन्हें उनके घर में घुसे रहने को इतना मजबूर किया कि वह बाजारों में अपनी कृषि उपज बेचने भी नहीं जा पाए। रिपोर्ट में शारीरिक हमले और जातिगत भेदभाव के अपराधों पर ध्यान दिलाया गया।

आयोग के मुताबिक ऐसे कई आदिवासी मिले जिन्होंने कहा कि उनके वाहन को सड़कों पर चलाने की अनुमति तक नहीं दी गई। वहीं अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को समाज के कुछ वर्गों से बहिष्कार का सामना करना पड़ा जिससे उन्हें कोरोना काल में आर्थिक संकट से जूझना पड़ा।

इसी प्रकार अन्य जगहों पर जहाँ टीमें गई उन्होंने पाया कि स्थानीय आदिवासी लोगों पर हमले हुए और उन्हें टीएमसी ने जीत के बाद प्रताड़ित किया। आयोग ने यह भी कहा कि राजनीतिक हत्याओं पर कोई रिपोर्ट नहीं हुई क्योंकि स्थानीय पुलिस ने आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई करने से मना कर दिया।

झरगाम जिले में संतल जनजाति का एक व्यक्ति संदिग्ध परिस्थितयों में मृत मिला। उसके घरवालों ने भी कहा कि ये हत्या है लेकिन पुलिस ने उस पूरे केस को ही सड़क दुर्घटना की तरह लिया। जब आयोग ने उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट जाँची तो पता चला कि उसके सिर पर दोनों तरफ पत्थरों और किसी अन्य चीज से मारा गया था।

हुगली में भी संतल जनजाति पर कई तरह के अत्याचार रिपोर्ट किए गए। वहाँ 25 संतल जनजाति वाले परिवारों पर हमला हुआ, जहाँ उनको उनके घरों में घुसे रहने को मजबूर किया गया, साथ ही महिलाओं पर भी अटैक हुए।

पूर्वी वर्धमान जिले में NCST टीम ने स्थानीय लोगों से मुलाकात की। कुछ ने बताया कि हिंसक भीड़ ने उनके घरों को नतीजे आने के बाद फूँक डाला। इसके अलावा क्षेत्र में अत्याचार, बलात्कार की भी घटनाएँ हुईं। लोगों ने आयोग को कहा कि आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हुई जबकि आरोपित जाने पहचाने थे।

नॉर्थ 24 परगना जिले के कई इलाकों में भी चुनाव के बाद हुई हिंसा के मामले आए। इन जिलों में महतो, मुंडा, बेडिया और उरांव समुदाय के लोगों के साथ हिंसा हुई। कहीं जरूरी सामान की लूटपात हुई, कहीं घरों और दुकानों को नष्ट कर दिया गया और कहीं-कहीं सोने की चेन, साइकल, किचन के सामानो की चोरी के मामले भी आए। टीम ने अपनी जाँच में पाया कि यहाँ भी किसी प्रकार की शिकायत पुलिस ने दर्ज करने से मना कर दी और उलटा स्थानीयों को धमकाया। आयोग ने पाया कि जिन लोगों ने उन्हें आपबीती सुनाई उनके साथ भी मारपीट हुई। उन्हें टीम से न मिलने के लिए धमकाया गया और मोबाइल फोन जबरन लेकर स्विच ऑफ किया गया।

NCST की माँग

राज्य में ऐसे कुप्रबंधन और कानून-व्यवस्था की चरमराई स्थिति को देखकर एनसीएसटी आयोग ने उन अधिकारियों के लिए जवाबदेही तय करने की सिफारिश की है जो या तो संबंधित समय पर ड्यूटी थे या फिर उस स्टेशन के प्रभारी थे, जिन्होंने हिंसा रोकने में कोई कार्रवाई नहीं की। इसमें यह भी कहा गया कि आदिवासियों के जहन में आत्मविश्वास जगाने के लिए सारी शिकायतों को स्वतंत्र एजेंसियों को ट्रांस्फर किया जाना चाहिए।

आयोग ने प्रभावित इलाकों में पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करने की माँग की है क्योंकि स्थानीय लोग पुलिस पर से अपना विश्वास खो चुके हैं। इसके अलावा माना जा रहा है कि आयोग ने जनजातीय लोगों की बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने की माँग की है ताकि वे सम्मानजन जीवन जी सकें। आयोग ने मामले में जाँच हेतु एसआईटी के गठन की माँग की है। साथ ही राज्य द्वारा सीधे लाभार्थी के खाते में उचित मुआवजा प्रदान करने और आगजनी और तोड़फोड़ के कारण अपने घरों को खोने वाले आदिवासी लोगों के पुनर्वास को भी कहा है।

NHRC ने कलकत्ता HC में सौंपी रिपोर्ट

उल्लेखनीय है कि NCST से पहले NHRC ने इस मामले पर अपनी जाँच के बाद रिपोर्ट कलकत्ता हाई कोर्ट में दी थी। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि राज्य में ‘कानून का शासन’ नहीं बल्कि ‘शासक का कानून’ है। NHRC की इस रिपोर्ट में राज्य प्रशासन की कड़ी आलोचना की गई थी और कहा गया था कि राज्य प्रशासन ने जनता में अपना विश्वास खो दिया है।

NHRC की 7 सदस्यीय टीम ने 20 दिन में 311 से अधिक जगहों का मुआयना करने के बाद राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा पर अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में हिंसा की जाँच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी। इसके अलावा, यह भी कहा गया था कि मामलों की सुनवाई राज्य के बाहर फास्ट ट्रैक अदालत गठित कर हो। रिपोर्ट में पीड़ितों की आर्थिक सहायता के साथ पुनर्वास, सुरक्षा और आजीविका की व्यवस्था करने को कहा गया था।

67% लोगों में एंटीबॉडी विकसित, कोविड संक्रमण से लड़ने में सक्षम हैं बच्चे: चौथे राष्ट्रीय सीरो सर्वे के आँकड़े जारी

कोरोना वायरस की संभावित तीसरी लहर के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार (20 जुलाई 2021) को चौथे राष्ट्रीय सीरोसर्वे के आँकड़े जारी किए। इसके इसके मुताबिक, बच्चों समेत देश की 67% आबादी में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी विकसित हो चुकी है। हालाँकि, लगभग 40 करोड़ लोग अभी भी वायरस के संक्रमण की चपेट में हैं।

इस बार के राष्ट्रीय सीरोसर्वे के दौरान भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने बच्चों को भी शामिल किया है। ताकि कोरोना से लड़ने की उनकी शारीरिक क्षमताओं का आकलन किया जा सके।

इस सर्वे के दौरान यह पता चला है कि 6-17 वर्ष की आयु के 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे कोरोना से संक्रमित हुए थे, जिनमें वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी विकसित हो चुकी है। इस सर्वेक्षण के दौरान बच्चों को दो आयु वर्गों के समूहों में बाँटा गया था। पहला 6-9 वर्ष और दूसरा 10-17 वर्ष आयु के थे। इनमें 6-9 वर्ष की क्रम में सीरो-प्रचलन 57.2 फीसदी था, जबकि 10-17 वर्ष के वर्ग में यह 61.6 प्रतिशत था।

रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे अधिक सीरो-प्रचलन 45-60 वर्ष (77.6 प्रतिशत) आयु वर्ग में पाया गया, इसके बाद 60 वर्ष से अधिक (76.7 प्रतिशत) और 18-44 वर्ष (66.7 प्रतिशत) आयु वर्ग के लोग थे।

आईसीएमआर के डीजी डॉ बलराम भार्गव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि राष्ट्रीय सीरोसर्वे का चौथा दौर जून-जुलाई में 70 जिलों में आयोजित किया गया था और इसमें 6-17 वर्ष की आयु के बच्चे शामिल थे।

उन्होंने कहा कि पुरुष-महिला, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सीरोप्रवलेंस में कोई अंतर नहीं था। जिन लोगों ने टीके नही लगवाए थे उनमें सीरोप्रवलेंस 62.3% था, जबकि टीके की एक खुराक लेने वालों में यह 81% था। इसके अलावा जिन लोगों ने वैक्सीन की दोनों डोज ली थी, उनमें यह 89.8% थी।

स्कूलों को खोले जाने के मुद्दे पर डॉ बलराम भार्गव ने कहा, हम अच्छी तरह से जानते हैं कि बच्चे वयस्कों की तुलना में वायरल इन्फेक्शंस को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं। वयस्कों की तरह बच्चों में भी एंटीबॉडी एक्सपोजर समान है। कुछ स्कैंडिनेवियाई देशों ने अपने प्राथमिक स्कूलों को किसी भी कोविड लहर में बंद नहीं किया है।”

‘इस समय मेरा दिल शिल्पा शेट्टी और उनके बच्चों के लिए परेशान है’: राज कुंद्रा की गिरफ्तारी पर पूनम पांडे

बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के पति और कारोबारी राज कुंद्रा को पोर्न फिल्‍म मामले में 23 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। सोमवार (19 जुलाई 2021) रात को हुई कुंद्रा की गिरफ्तारी के बाद से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अब एक्ट्रेस पूनम पांडे ने एक वीडियो बयान जारी कर पूरे मामले पर चुप्पी तोड़ी है।

पूर्व में राज कुंद्रा पर धोखाधड़ी और पैसे का भुगतान नहीं करने का आरोप लगा चुकी एक्ट्रेस पूनम पांडे ने कहा है कि फिलहाल उन्हें शिल्पा शेट्टी और उनके बच्चों की चिंता सता रही है। लिहाजा इस मौके पर वह अपने मामले को तूल नहीं देना चाहती।

उन्होंने कहा है, “इस समय मेरा दिल शिल्पा शेट्टी और उनके बच्चों के लिए परेशान है। मैं सोच भी नहीं सकती कि वह किस दौर से गुजर रही होगीं। मैं अभी के घटनाक्रम के बीच अपने मामले उजागर कर कोई अवसर नहीं तलाशना चाहती। मैं इस बारे में फ‍िलहाल कुछ नहीं कहना चाहूँगी। केवल एक चीज जोड़ना चाहती हूँ कि मैंने 2019 में राज कुंद्रा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और बाद में उनके खिलाफ धोखाधड़ी और चोरी के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में भी मामला दर्ज करवाया। यह मामला अभी विचाराधीन है, इसलिए मैं कुछ नहीं कहना चाहती।”

गौरतलब है कि पूनम पांडे ने राज कुंद्रा के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में केस फ़ाइल किया था। उनका आरोप था कि करार ख़त्म होने के बावजूद राज कुंद्रा और उनके सहयोगी उनके कंटेंट्स का बिना अनुमति इस्तेमाल कर रहे थे। कुंद्रा और उनके सहयोगियों की कंपनी ‘Armsprime Media’ ने पांडे के एप के कंटेंट्स का प्रबंधन का जिम्मा लिया था। आरोप था कि करार ख़त्म होने के 8 महीने बाद भी इन कंटेंट्स का इस्तेमाल कमाई के लिए किया जाता रहा। हालाँकि, तब राज और सौरभ कुशवाहा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था।

बता दें कि इस मामले में मॉडल शर्लिन चोपड़ा का नाम भी सामने आया है, जो अश्लील कंटेंट्स बना कर अपने एप पर डालने के लिए जानी जाती हैं। इस मामले में एकता कपूर तक अपना बयान दर्ज करा चुकी हैं। उनके पोर्टल ‘AltBalaji’ पर अश्लीलता परोसने के आरोप लगते रहे हैं।

139 अपराधी मार गिराए गए, ₹1500 करोड़ से ज्यादा की अवैध संपत्ति जब्त: योगी राज में अपराध का एनकाउंटर

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 हुए विधानसभा चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रदेश में शानदार जीत हासिल की थी। इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। पद सँभालते ही उन्होंने राज्य को अपराध मुक्त बनाने के अपने इरादे जाहिर किए। उसके बाद से वे लगातार इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए काम कर रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2017 में योगी आदित्यनाथ की सरकार के बनने के बाद से उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ मुठभेड़ में कुल 139 अपराधी मारे गए हैं और 3196 घायल हुए हैं। इस दौरान 13 पुलिसकर्मियों ने भी अपनी जान गँवाई, जबकि 1112 घायल हुए।

अपराध और अपराधियों को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के बारे में बताते हुए गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा, “राज्य सरकार के निर्देश पर कुख्यात अपराधियों, उनके सहयोगियों और माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। 20 मार्च 2017 से इस साल 20 जून तक पुलिस एनकाउंटर में 139 अपराधियों का खात्मा किया गया और इस दौरान 3196 घायल हुए। इन कार्रवाइयों के दौरान 13 पुलिसकर्मियों ने अपना बलिदान दिया, जबकि 1122 घायल हुए थे।”

अवस्थी ने आगे कहा, “राज्य सरकार की अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है और अब संगठित अपराध को समाप्त कर दिया गया है।” उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर एक्ट के तहत अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए 1574 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध संपत्तियों को जब्त किया गया है। इसमें से 1322 करोड़ रुपए कीमत की अवैध संपत्ति को पिछले साल जनवरी से अब तक या तो जब्त किया गया है या फिर उसे धवस्त किया गया है।

गृह विभाग के अतिरित सचिव ने बताया है कि सीएम योगी आदित्यनाथ के पिछले चार साल के कार्यकाल में गैंगस्टर एक्ट के तहत 13700 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें 43000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक जब्ती वाराणसी क्षेत्र में की गई, जहाँ सर्वाधिक 420 मामले दर्ज किए गए और 200 करोड़ रुपए की कीमत की संपत्तियों को जब्त किया गया। गोरखपुर मंडल में 208 मामलों केस दर्ज हुए थे, जिसमें 264 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई।

अवस्थी के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महीने के हर दूसरे और चौथे शनिवार को ‘थाना/समाधान दिवस’ आयोजित करने का आदेश दिया है। महीने के इन दिनों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे लोगों की शिकायतों को सुनने और उनका निवारण करने के लिए उपलब्ध रहें। इसके अलावा इन कार्यक्रमों के दौरान सभी को सख्त कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने का निर्देश भी दिया गया है।

योगी सरकार को उनके पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों मायावती, मुलायम सिंह औऱ अखिलेश यादव से अपराध औऱ अपराधियों से भरा राज्य विरासत में मिला था। ऐसे में योगी आदित्यनाथ के लिए इस मील के पत्थर को हासिल करना आसान नहीं था। गोरखपुर से पाँच बार के सांसद रहे योगी आदित्यनाथ को ये बात अच्छे से पता थी कि प्रदेश में समृद्धि, विकास औऱ उद्यमियों का विश्वास हासिल करने के लिए कानून-व्यवस्था को पहले दुरुस्त करना होगा। इसे उन्होंने बेहद गंभीरता से लिया। 1.5 लाख पुलिसकर्मियों की भर्ती कर हर जिले में हिस्ट्रीशीटरों को पकड़ने का काम किया। इससे जमीन हड़पने वालों और जबरन वसूली करने वालों से व्यवसाइयों को राहत मिली।

योगी सरकार के अपराधियों के प्रति सख्त रुख से उद्योगपतियों को उत्तर प्रदेश वापस आकर बिजनेस का विस्तार करने का भरोसा मिला। गौरतलब है कि सख्त कानून-व्यवस्था के दम पर उत्तर प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में बीते 4 वर्षों में तमिलनाडु, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे औद्योगिक राज्यों को पछाड़ते हुए दूसरे स्थान पर पहुँच गया है।

दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में पहला फैसला: सुरेश बरी, आसिफ ने कहा था- मेरी दुकान पर हमला कर लूटा

दिल्ली दंगों के मामले में पहला फैसला सुनाते हुए दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार (20 जुलाई, 2021) को सुरेश नाम के एक व्यक्ति को उसके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से बरी कर दिया। 9 मार्च, 2021 को सुरेश उर्फ भटूरा पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 143 (गैरकानूनी सभा), 147 (दंगा करने) और 395 (डकैती) के तहत आरोप तय किए थे।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने सभी गवाहों के बयानों में विरोधाभास के आधार पर सुरेश को बरी कर दिया है। न्यायाधीश रावत ने कहा, “आरोपित को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है। यह स्पष्ट रूप से बरी होने वाला मामला है।” सुरेश की ओर से वकील राजीव प्रताप सिंह के साथ-साथ अन्य वकील अक्षय सागर, हिमांशु कुमार, हितेश पांडे और आशीष प्रजापति पेश हुए।

आसिफ की शिकायत पर सुरेश के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में कहा गया था कि 25 फरवरी, 2020 को शाम करीब 4 बजे आरोपित सुरेश ने लोहे की रॉड और लाठियों से लैस दंगाइयों की भारी भीड़ के साथ दिल्ली के बाबरपुर रोड पर स्थित उनकी दुकान का ताला तोड़कर उसमें लूटपाट की थी। दुकान भगत सिंह की थी और आसिफ को किराए पर दी गई थी, जो इस मामले में शिकायतकर्ता है।

जाँच के दौरान सिंह ने पुलिस को बताया कि “दंगाई आक्रामक थे और उस दुकान को लूटना चाहते थे, क्योंकि यह एक मुस्लिम की थी। सिंह ने यह भी दावा किया कि उन्होंने उन्हें रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका।” दुकान के मालिक ने 7 अप्रैल 2020 को सुरेश की आरोपित के रूप में पहचान की थी।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने 21 अप्रैल 2021 को यह फैसला सुरक्षित रख लिया था। तब से सात बार इस फैसले को टाला जा चुका है। उस दौरान अदालत ने यह माना था कि आरोपित भीड़ का हिस्सा था, जिसने अपराध किया था। लेकिन आज दिल्ली दंगे मामले में अदालत ने अपना पहला फैसला सुनाते हुए पाया कि गवाहों के बयानों में विरोधाभास है। इसके चलते उन्होंने सुरेश को बरी कर दिया।

बकरीद पर 725 गायों की हत्या करेंगे रोहिंग्या, सब को 2-2 Kg बीफ: कुर्बानी से पहले गायों को सजा कर रैली भी निकाली

जहाँ एक तरफ हिन्दू गाय को पवित्र मानते हैं, वहीं दूसरी तरफ बांग्लादेश के रोहिंग्या मुस्लिम बकरीद के मौके पर गायों की ‘कुर्बानी’ की तैयारी में लगे हैं। बकरीद पर बांग्लादेश के ‘भाषण चार’ क्षेत्र में ही 200 गायों की हत्या की जानी है। ये वही इलाका है, जहाँ रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाया गया है। वहाँ की सरकार ने इन रोहिंग्या मुस्लिमों को कमाई के लिए सिलाई मशीन से लेकर अन्य साधन दिए हैं।

इतना ही नहीं, बांग्लादेश की सरकार ने ‘भाषण चार’ द्वीप पर 200 गायों को भेजा है, ताकि ये लोग बकरीद मना सकें। शुक्रवार (16 जुलाई, 2021) को इन गायों को एक जहाज से द्वीप पर लाया गया। इन्हें बोगुरा इलाके से हटिया होकर लाया गया। कई रोहिंग्या मुस्लिमों ने इसके बाद मुल्क की प्रधानमंत्री शेख हसीना के पोस्टर लेकर ख़ुशी मनाते हुए एक रैली भी निकाली, जिसमें सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया

वीडियो में देखा जा सकता है कि सैकड़ों रोहिंग्या मुस्लिम गायों को माला पहना कर और उनके ऊपर गुब्बारे लगा कर रैली निकाल रहे हैं, जिनमें कई बुर्कानशीं महिलाएँ व बच्चे भी शामिल हैं। इन्होंने हाथ में गुलदस्ते भी ले रखे थे। 200 में से 135 गायों की व्यवस्था स्थानीय अधिकारियों व सरकार ने ‘Islamic Relief’ नामक NGO के माध्यम से की है। बकरीद के दिन इनकी हत्या के बाद बीफ बना कर लोगों में बाँटा जाएगा।

यहाँ के कुल 35 परिवारों में इन गायों के बीफ बाँटे जाएँगे। अनुमान है कि प्रत्येक परिवार को 2 किलो बीफ मिलेगा। जब इन गायों को लाया गया और जहाज से उतारा जा रहा था, तब कुछ वरिष्ठ अधिकारी मौके पर इसकी निगरानी के लिए मौजूद थे। इसके अलावा यही NGO ‘कॉक्स बाजार’ के रोहिंग्या मुस्लिमों को भी 375 गायें दे रहा है। साथ ही रोहिंग्या कैम्पस के आसपास रहने वाले मूलनिवासियों को भी 150 गायों की बीफ दी जाएगी। इस तरह कुल 725 गायें रोहिंग्या व इनके मेजबानों को दी गई हैं।

बता दें कि कॉक्स बाजार में ही अधिकतर रोहिंग्या शरणार्थी रहते हैं, जिनमें से 18,521 को 8 चरणों में भाषण चार द्वीप पर लाया जा चुका है। बाकी के बचे 80,000 को भी इस वर्ष सितंबर तक द्वीप पर लाकर बसाने की योजना है। बांग्लादेश एक मुस्लिम मुल्क है और वहाँ से बकरीद के दौरान खून से नहीं सड़कों की तस्वीरें अक्सर वायरल होती हैं। हालाँकि, पेटा जैसे कथित पशु-अधिकार संगठन इस पर नहीं बोलते।

‘मुझे न्यूड ऑडिशन देने को कहा’: पूनम पांडे और शर्लिन चोपड़ा ने भी बताया कसूरवार, 23 जुलाई तक पुलिस कस्टडी में राज कुंद्रा

पोर्न कंटेंट बनाने और उसे बेचने के आरोप में 19 जुलाई 2021 को गिरफ्तार हुए कारोबारी राज कुंद्रा को 23 जुलाई 2021 तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। इस बीच उनसे जुड़े कुछ नए खुलासे हुए हैं। सागरिका शोना सुमन नामक एक एक्ट्रेस ने आरोप लगाया है कि कुंद्रा ने उनको वीडियो कॉल पर न्यूड ऑडिशन देने को कहा था।

सागरिका बताती हैं कि वह मॉडल हैं और 3-4 साल से इंडस्ट्री में काम कर रही हैं। उन्होंने ज्यादा काम नहीं किया लेकिन लॉकडाउन में उनके साथ कुछ ऐसा हुआ जिसमें वह शेयर करना चाहती हैं। वह कहती हैं, “अगस्त 2020 में मुझे उमेश कामत ने फोन करके वेब सीरिज ऑफर की जिसे राज कुंद्रा प्रोड्यूस करने जा रहे थे। मैंने राज कुंद्रा के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि शिल्पा शेट्टी के पति हैं।”

वह कहती हैं,

“उन्होंने कहा कि मैंने वेब सीरिज की तो मुझे काम मिलेगा और मैं ऊँचाइयों पर जाऊँगी। ऐसी बात सुन मैं मान गई। फिर उन्होंने मुझे ऑडिशन के लिए कहा। मैंने उनसे कहा कि कोरोना में ऑडिशन कैसे दूँगी। उन्होंने कहा कि आप इसे वीडियो-कॉल के जरिए कर सकती हैं। जब मैं वीडियो कॉल में शामिल हुई तो उन्होंने मुझसे न्यूड ऑडिशन देने की माँग की। मैं चौंक गई और मैंने मना कर दिया। वीडियो कॉल में तीन लोग थे- जिनमें से एक ने अपना चेहरा ढका हुआ था और मुझे ऐसा लगता है कि उनमें एक राज कुंद्रा ही थे। मैं चाहती हूँ कि अगर वह ऐसी चीजों में शामिल है तो उसे गिरफ्तार किया जाए और इस तरह के रैकेट का पर्दाफाश किया जाए।”

यहाँ उल्लेखनीय है कि जिस उमेश कामत का जिक्र सागरिका ने किया है वह कुंद्रा की कंपनी में कर्मचारी था और मुंबई पुलिस ने उसे 9 फरवरी को पोर्न रैकेट मामले में गिरफ्तार किया था। उस पर ऑफिस मशीनरी का इस्तेमाल करके 8 पोर्न वीडियो अपलोड करने का आरोप था।

इससे पहले पूनम पांडे और शर्लिन चोपड़ा ने भी राज कुंद्रा पर ऐसे आरोप लगाए हैं। पूनम पांडे का कहना है कि उनका राज कुंद्रा की Armsprime Media फर्म के साथ कॉन्ट्रैक्ट था, लेकिन जब ये कॉन्ट्रैक्ट खत्म हुआ तो उनसे जुड़े कंटेंट का गलत इस्तेमाल हुआ। इसी तरह शर्लिन चोपड़ा ने भी बताया कि एडल्ट इंडस्ट्री में उन्हें कुंद्रा लेकर आए। उन्होंने 30 लाख रुपए में कुंद्रा के 15-20 प्रोजेक्ट किए हैं।

बता दें कि राज कुंद्रा को पोर्न फ़िल्में बनाने और फिर उन्हें कुछ एप्स के जरिए बेचने के आरोप में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 19 जुलाई 2021 गिरफ्तार किया। राज कुंद्रा के खिलाफ IPC और IT एक्ट के अलावा ‘स्त्री अशिष्ट रूपण प्रतिषेध अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। अब तक पूरे केस में 11 गिरफ्तारी हुई हैं। कुंद्रा के साथ रियान थार्प को 23 जुलाई तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है।

बकरीद से पहले मुंबई में खुले अवैध बाजार, पशु अधिकारों का हो रहा उल्लंघन; मुस्लिम समुदाय ने कुर्बानी को इस्लाम में बताया हराम

सुप्रीम कोर्ट के वकील और पशु अधिकार कार्यकर्ता शिराज कुरैशी ने मुस्लिमों के सबसे बड़े त्यौहार बकरीद से एक दिन पहले कहा, ”इस्लाम में जानवरों के साथ क्रूरता करना ‘हराम’ है।” न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार बकरीद के जश्न में लाखों बेजुबान जानवरों की कुर्बानी को लेकर कुरैशी ने कहा कि जानवरों के प्रति क्रूरता, उन्हें प्रजनन के लिए बाधित करना, उनका वध करना, परिवहन और अपने फायदे के लिए उनको बंधक बनाना व उनका मांस खाना इस्लाम में हराम है।

वहीं, पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया के अनुसार, बकरीद से पहले पूरे मुंबई शहर में अनगिनत अस्थायी और अवैध बकरी बाजार खुल गए हैं। ऐसे भीड़-भाड़ वाले बाजार न केवल महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी किए गए सर्कुलर का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि कोरोना संकटकाल में ऐसे माहौल में स्थिति बेहद भयावह हो सकती है।

महाराष्ट्र सरकार द्वारा कोविड-19 महामारी के मद्देनजर जारी किए गए सर्कुलर के अनुसार, जानवरों की खरीद की अनुमति केवल ऑनलाइन और टेलीफोन के जरिए ही की जा सकती है। ईद के दौरान सभी मौजूदा पशु बाजारों को बंद रखने की अनुमति दी गई है।

पेटा इंडिया ने कहा कि उन्होंने मुंबई के अंधेरी, भायखला, गोवंडी, जोगेश्वरी, कुर्ला और मानखुर्द सहित विभिन्न क्षेत्रों में 23 अवैध पशु बाजारों की जाँच की। उन्होंने पाया कि एक लाख से अधिक बकरों को बिक्री के लिए असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात सहित कई राज्यों से यहाँ लाया गया है। पेटा ने सीएमओ को दी शिकायत में आरोप लगाया कि ऐसे बाजार और विभिन्न राज्यों से जानवरों का परिवहन कोविड प्रोटोकॉल और द प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (पीसीए) एक्ट 1960, ट्रांसपोर्ट ऑफ एनिमल्स रूल्स, 1978 का उल्लंघन है।

पेटा इंडिया एडवोकेसी एसोसिएट प्रदीप रंजन डोले बर्मन ने कहा, “कोई भी धर्म किसी भी जीव की हत्या करना नहीं सिखाता। साल भर पशु संरक्षण कानूनों का पालन किया जाना चाहिए। खासतौर पर ईद के दौरान। पेटा इंडिया ईद के जश्न को पैसे, कपड़े, मिठाई, फल बाँटकर या अन्य तरीकों से मनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। इससे जानवरों को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है।”

जाँच के दौरान पेटा ने पाया कि कई जानवरों को छोटे स्थानों पर कैद करके रखा गया था, जहाँ वे ठीक से खड़े नहीं हो पा रहे थे, बैठ भी नहीं पा रहे थे। उनमें से कुछ आपस में लड़ रहे थे। इन बाजारों में कोई पशु चिकित्सक भी नहीं था, जिससे इन बाजारों में ऐसे पशुओं को साँस लेने में तकलीफ होती है। पेटा ने आरोप लगाया कि इन जानवरों को भोजन और पानी से भी वंचित रखा गया था।”

जाँच टीम ने जब खरीदारों और विक्रेताओं से बकरियों के परिवहन के लिए पशुओं के फिटनेस प्रमाण पत्र माँगे तो वे इसे नहीं दिखा पाए। यह जानवरों के परिवहन नियम, 1978 का उल्लंघन है। इस दौरान अधिकांश विक्रेता न तो मास्क नहीं पहने हुए थे और ना ही कोरोना गाइडलाइन का पालन कर रहे थे।

वेल्डिंग करने वाले अफजल ने बदला नाम, कारोबारी बन 15 साल की हिंदू लड़की से की दोस्ती: रेप, धर्मांतरण की फिराक में था

मध्य प्रदेश के इंदौर से लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। वेल्डिंग करने वाले अफजल ने ‘गोलू’ नाम से इंस्टाग्राम पर फर्जी आईडी बनाई। फिर एक नाबालिग हिंदू लड़की को प्रेम जाल में फँसाया। 13 जुलाई 2021 को अफजल (24) लड़की को भगा भी ले गया। इसके बाद जब लड़की के माता-पिता पुलिस के पास पहुँचे तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। बताया जा रहा है कि खुद को फ्रीज-कूलर का कारोबारी बता अफजल ने लड़की से दोस्ती की थी।

मामला राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के चंदन नगर का है। यहीं की रहने वाली 15 वर्षीय लड़की की इंस्टाग्राम के जरिए 6 महीने पहले गोलू (अफजल) से दोस्ती हुई। दोनों के बीच करीबियाँ बढ़ीं। इसी दौरान गोलू बने अफजल ने लड़की को खुद के कारोबारी होने के बारे में विश्वास दिलाया, जबकि हकीकत में वो वेल्डिंग का काम करता है।

लड़की के गायब होने के बाद उसके माता-पिता ने राजेंद्र नगर थाने में गायब होने की शिकायत की। थाना प्रभारी का कहना है कि शिकायत दर्ज होने के बाद लड़की 17 जुलाई को चोरी-छिपे अपने कागजात लेने के लिए घर आई थी। इसी माता-पिता ने उससे बातचीत की तो उसने बताया कि 6 महीने पहले उसकी दोस्ती गोलू नाम के युवक से हुई थी। लड़की ने बताया है कि वो गोलू (अफजल) के घर भी जाती थी। उसने लड़की के साथ शारीरिक संबंध भी बनाए हैं। नाबालिग लड़की ने माता-पिता को बताया कि कुछ ही दिन पहले उसे पता चला कि वो मुस्लिम है। हालाँकि वो नशा नहीं करता है इसलिए वो उसके साथ शादी करना चाहती है।

बहरहाल, पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट, रेप औऱ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 के तहत केस दर्ज किया गया है। नई दुनिया की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित लड़की का धर्मान्तरण करवाना चाहता था। इसके अलावा लड़की ने पुलिस को बताया है कि उसकी कई सहेलियाँ इसी तरह से लव जिहाद के चंगुल में फँसी हुई हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

साभार: नई दुनिया

‘बंगाल में 6 महीने में BJP के 162 कार्यकर्ता की हत्या’: एक और वर्कर पेड़ से लटका मिला, TMC पर हत्या का आरोप

पश्चिम बंगाल में एक और भाजपा कार्यकर्ता की हत्या हुई है, जिसका आरोप राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) पर लगा है। राज्य में 2 मई को चुनाव परिणाम आने के साथ ही भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ जो हिंसा का दौर शुरू हुआ था, वो अब भी थमता नहीं दिख रहा। दक्षिणी रायगंज (विष्णुपुर) में भाजपा के एक सक्रिय सदस्य देबेश बर्मन का शव पेड़ से लटकता हुआ मिला। सूचना मिलते ही वहाँ भारी भीड़ जुट गई।

भाजपा की पश्चिम बंगाल यूनिट ने कहा है कि वो घृणा की राजनीति का शिकार बन गए। पार्टी ने इसे TMC के गुंडों द्वारा की गई हत्या करार देते हुए कहा कि ममता बनर्जी की निगरानी में भाजपा कार्यकर्ताओं का क्रूर नरसंहार चल रहा है। भाजपा के आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने भी कहा कि पश्चिम बंगाल में रोजाना ऐसी घटनाएँ हो रही हैं। उन्होंने ‘सत्ताधारी पार्टी के संरक्षण’ में होने वाली हत्याएँ तुरंत रोकने की माँग की।

वहीं भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं की हत्या के आँकड़े जारी किए हैं। पार्टी ने कहा कि पिछले 6 महीने में 162 भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्याएँ हुई हैं। भाजपा नेता समीक भट्टाचार्य ने ये आँकड़े देते हुए कहा कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के नेतृत्व में भाजपा नेता पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा के खिलाफ धरना देंगे। उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)’ की रिपोर्ट तो सिर्फ एक झाँकी है।

उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि कई इलाकों में भाजपा कार्यकर्ताओं को जबरन TMC का झंडा थामने के लिए मजबूर किया गया। बुधवार (20 जुलाई, 2021) को महात्मा गाँधी की समाधि राजघाट पर ये धरना प्रदर्शन होगा। पार्टी ने कहा कि 2 मई के बाद से 38 भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है। वहीं 21 जुलाई को तृणमूल हर साल ‘शहीद दिवस’ मनाती है। इस दिन यूथ कॉन्ग्रेस के 13 कार्यकर्ता 1993 में हुई एक पुलिस फायरिंग में मारे गए थे।

भाजपा ने ये भी कहा है कि उसके 20,000 कार्यकर्ताओं को TMC के सत्ता में आने के बाद से बेघर होना पड़ा है। भाजपा नेता आज अपने मृतक कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि भी देंगे। वहीं पश्चिम बंगाल में इलाकों में स्थानीय भाजपा पदाधिकारी विरोध प्रदर्शन करेंगे। वहीं तृणमूल कॉन्ग्रेस ने भाजपा पर ममता बनर्जी की सरकार को बदनाम करने का आरोप लगाया। NHRC ने कलकत्ता हाईकोर्ट को दी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राज्य में ‘कानून का राज’ की जगह ‘राज करने वालों का कानून’ चल रहा है।

NHRC की 7 सदस्यीय टीम ने 20 दिन में 311 से अधिक जगहों का मुआयना करने के बाद राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा पर अपनी रिपोर्ट सौंपी है। जाँच के दौरान टीम को राज्य के 23 जिलों से 1979 शिकायतें मिलीं। इनमें ढेर सारे मामले गंभीर अपराध से संबंधित थे। इनमें से अधिकांश शिकायतें कूच बिहार, बीरभूम, बर्धमान, उत्तरी 24 परगना और कोलकाता की हैं। इनमें से अधिकांश मामले दुष्कर्म, छेड़खानी व आगजनी की हैं और ये शिकायतें टीम के दौरा के वक्त लोगों ने बताई हैं।