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मुस्लिमों से चर्चा करेंगे लेकिन जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर पूरी तरह प्रतिबद्ध: असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जनसंख्या नियंत्रण नीति को लेकर गंभीर नजर आ रहे हैं। रविवार (04 जुलाई) को सीएम सरमा मुस्लिम समुदाय के 150 बुद्धिजीवियों और प्रतिष्ठित नागरिकों से जनसंख्या नियंत्रण नीति और परिवार नियोजन के विषय में चर्चा करेंगे। सीएम सरमा ने यह भी कहा कि वह मुस्लिम समुदाय से चर्चा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं, लेकिन जनसंख्या नियंत्रण पर उनका रुख स्पष्ट है।

सीएम के साथ बैठक में शामिल होने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों को 8 समूहों में बाँटा गया है। इनसे शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, मुस्लिम महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण और स्वयं सहायता समूह के बारे में चर्चा की जाएगी तथा उनसे सुझाव लिए जाएँगे।

न्यूज18 से चर्चा करते हुए सीएम सरमा ने कहा, “असम की जनसंख्या में अल्पसंख्यकों का योगदान 37% है। इस जनसंख्या का एक बड़ा भाग वंचित और अशिक्षित है। बीते कुछ सालों में असम आर्थिक और सामाजिक पैमाने पर और भी बेहतर स्थिति में हो सकता था। आप महिलाओं को दोष नहीं दे सकते, क्योंकि उनके ऊपर परिवार का दबाव है। हालाँकि, यह समय है कि महिलाएँ अपना विरोध दर्ज करें और समाज के तौर पर हम उनके सशक्तिकरण का प्रयास करें।“

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सख्त नजर आ रहे हैं, इसके लिए वह लगातार समाज के प्रत्येक वर्ग से चर्चा कर रहे हैं और उनका यह मानना है कि इस नीतिगत निर्णय में सब की सहमति शामिल रहे। सीएम सरमा ने इस मुद्दे पर युवाओं से भी चर्चा की थी और उन्होंने यह भी दावा किया है कि उन्हें ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट यूनियन (AAMSU) के दोनों गुटों का समर्थन प्राप्त है।    

सीएम सरमा ने कहा कि वह मुस्लिम समुदाय के सशक्तिकरण के लिए प्रयास करते रहेंगे और उनसे लगातार बातचीत होती रहेगी लेकिन जनसंख्या नियंत्रण नीति और परिवार नियोजन को लेकर उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट है। इस मुद्दे पर उठने वाले राजनैतिक विरोध पर उन्होंने यह भी कहा, “वो मुझे कुछ भी कह सकते हैं। मुझ पर एक समुदाय विशेष के खिलाफ कार्य करने का आरोप भी लगा सकते हैं, लेकिन मुझे उससे फर्क नहीं पड़ता। मेरी सरकार ने वही किया, जो तार्किक है। मुस्लिम महिलाओं का सशक्तिकरण मेरी सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है।“

हाल ही में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने असम में राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए 2 बच्चों की नीति (Two-Child Policy) को लागू करने का फैसला किया। घोषणा के अनुसार, कर्जमाफी या अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ लेने के लिए इस नीति का परिपालन करना अनिवार्य होगा। हालाँकि, यह भी निर्णय लिया गया कि चाय बागानों में काम करने वाले मजदूर और अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों पर फिलहाल यह नीति लागू नहीं होगी। असम सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए 2 बच्चों की नीति (Two-Child Policy) सबके लिए अनिवार्य होगी और सभी समुदायों पर इसे लागू करने के लिए चरणबद्ध तरीका अपनाया जाएगा।

सीएम सरमा ने अल्पसंख्यक समुदाय से अपील करते हुए कहा था कि वे जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन की नीति अपनाएँ। उन्होंने कहा था कि गरीबी का मुख्य कारण लगातार आबादी बढ़ना है, लिहाजा समुदाय के सभी प्रतिनिधियों को आगे आकर इस दिशा में सरकार का समर्थन करना चाहिए।

पैरों में गिर पड़े पूर्व सपा सांसद: भतीजे को जिताने के लिए ‘राजनीति’, वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के नतीजे आने लगे हैं। हाथरस, महाराजगंज और मुलायम सिंह यादव के गढ़ मैनपुरी में बीजेपी की जीत हुई है, तो वहीं समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। इसी क्रम में चंदौली से एक वीडियो सामने आया, जिसमें पूर्व सांसद और समाजवादी पार्टी के नेता रामकिशुन यादव सपा के जिला पंचायत उम्मीदवार और अपने भतीजे की जीत के लिए पार्टी के जिला पंचायत सदस्यों के पैर पड़ रहे हैं। रामकिशुन को चंदौली का कद्दावर नेता माना जाता है।

पकड़े सदस्यों के पैर

सपा नेता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह सपा सदस्यों से एकजुट रहने की विनती कर रहे हैं और अध्यक्ष पद के उम्मीदवार तेज नारायण यादव को जिताने की अपील कर रहे हैं। अपने इज्जत की दुहाई देते हुए रामकिशुन ने सदस्यों के पैर पकड़ लिए। जब उनसे पूछा गया कि वह पैर क्यों पकड़े तो रामकिशुन ने कहा कि पार्टी के सम्मान की खातिर वह किसी का भी पैर छू सकते हैं।

रामकिशुन यादव ने कहा, “मैं समाजवादी पार्टी के लिए पैरों पर गिर सकता हूँ। मैंने कोई माँग नहीं की। पार्टी की खातिर मैंने पैर पकड़े।” उन्होंने आगे कि कहा कि पैर पर गिरना कोई बड़ी बात नहीं है। वह कोई दूसरे नहीं, बल्कि हमारी ही पार्टी के सिपाही हैं। आपसी विवाद था, इसलिए वे उनको समझा-बुझा रहे थे।

जानकारी के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के जिला पंचायत सदस्य जिले कार्यालय में बैठक कर रहे थे। इसी दौरान कुछ नेताओं के आपस में किसी बात को लेकर विवाद होने लगा। तभी पूर्व सांसद रामकिशुन ने अपने सदस्यों को काफी समझाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन वह विवाद करते रहे। यह सब देख पूर्व सांसद जी सदस्यों के पैरों पर  गिर पड़े और कहने लगे कि वह अपनी ही पार्टी के सदस्य को ही वोट करें।

पूर्व सांसद का भतीजा सपा से अध्यक्ष पद का उम्मीदवार

सपा ने चंदौली जिला पंचायत अध्यक्ष पद का उम्मीदवार तेज नारायण यादव को बनाया है। तेज नारायण निर्दलीय लड़कर जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीते थे। बाद में सपा ने उन्हें टिकट देकर अध्यक्ष पद के लिए अधिकृत प्रत्याशी बनाया। तेज नारायण यादव पूर्व सांसद रामकिशुन यादव के भतीजे हैं। 

चंदौली में जिला पंचायत सदस्यों की कुल संख्या 35 है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद की जीत के लिए कुल 18 का आँकड़ा चाहिए, जबकि समाजवादी पार्टी के पास 14 सदस्य हैं। वहीं, बीजेपी के पास 08 सदस्य हैं। इसके अलावा 09 निर्दलीय व अन्य हैं। ऐसे में सपा के पास सबसे अधिक सदस्य हैं। सपा के अधिकृत प्रत्याशी तेज नारायण को मिलने वाले वोटों की संख्या सपा से जीते जिला पंचायत सदस्यों की पार्टी के प्रति निष्ठा को तय कर देगी। 

धर्मांतरण गिरोह के 6 ठिकानों पर ED की छापेमारी, कई करोड़ की विदेशी फंडिंग: IDC का दफ्तर भी खँगाला

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस्लामी धर्मांतरण गिरोह से जुड़े 6 ठिकानों पर छापेमारी की। ED ने शनिवार (जुलाई 3, 2021) को दिल्ली और उत्तर प्रदेश के इन ठिकानों पर छापा मारा। जाँच एजेंसी ने अपनी इस कार्रवाई के दौरान कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए, जिससे बड़े स्तर पर इस्लामी धर्मांतरण की बात पता चली। मौलाना मोहम्मद उमर गौतम कई संगठनों के साथ मिल कर ये काला कारोबार चला रहा था।

साथ ही ED को इस मामले में विदेशी फंडिंग के भी सबूत मिले हैं। केंद्रीय जाँच एजेंसी का आकलन है कि अवैध धर्मांतरण के लिए इन संगठनों को कई करोड़ रुपए विदेश से मिले हो सकते हैं। ये खुलासा इन्हीं दस्तावेजों से हुआ है। दिल्ली में तीन और यूपी में 3 ठिकानों पे ED की छापेमारी हुई। इसमें दिल्ली के जामिया नगर स्थित ‘इस्लामिक दावा सेंटर (IDC)’ का मुख्य दफ्तर भी शामिल है, जो इन अवैध गतिविधियों का गढ़ था।

यहीं से मौलाना मोहम्मद उमर गौतम और मुफ़्ती काजी जहाँगीर कासमी ऑपरेट करते थे। फ़िलहाल दोनों उत्तर प्रदेश पुलिस की गिरफ्त में हैं। ‘अल हसन एजुकेशन एंड वेलफेयर फाउंडेशन’ के लखनऊ और ‘गाइडेंस एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी’ के संत कबीर नगर स्थित ठिकानों को भी ED ने खँगाला। इन संगठनों के साथ उमर गौतम और जहाँगीर कासमी का सम्बन्ध था। ये अवैध धर्मांतरण में बड़ी भूमिका निभा रहे थे।

ED ने ये कार्रवाई ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ के आरोपों की जाँच के तहत शुरू की है। ATS द्वारा दर्ज की गई FIR को ही इसके लिए आधार बनाया गया है, जिसमें इसका जिक्र है कि कैसे धन का लालच देकर पिछड़ों और दिव्यांगों का धर्मांतरण कराया जा रहा था। ED ने बयान जारी कर इस कार्रवाई की जानकारी दी। अभी इस मामले में आगे की जाँच की जा रही है, जिससे कई राज़ निकलने की संभावना है।

इधर ATS भी उत्तर प्रदेश के 32 जिलों में धर्मांतरण गिरोह का नेटवर्क खँगालने में जुटी है। ये इतना बड़ा नेटवर्क है कि इसके लिए 100 से अधिक अधिकारियों की ज़रूरत पड़ रही है। जाँच के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो आरोपितों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। इरफान शेख, राहुल भोला और अब्दुल मन्नान उर्फ मन्नू यादव को लखनऊ जिला जेल से कस्टडी में लिया गया है।

वहीं मौलाना मोहम्मद उमर गौतम ने इलाहबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच में याचिका दायर कर के जाँच को रोकने की माँग की है, जिस पर रमेश सिन्हा और विकास कुंवर श्रीवास्तव की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई भी हुई। इस दौरान आदेश को सुरक्षित रख लिया गया है। ये भी सामने आया है कि उमर और जहाँगीर ने सीएए-एनआरसी के विरोध के दौरान भी 300 से अधिक लोगों का धर्म परिवर्तन कराया। अपनी सभाओं में ये लोग कहते थे कि CAA और NRC को हटाना है तो इस्लाम को मजबूत बनाना होगा।

इस्लाम कुबूल करने से आर्थिक-सामाजिक रूप से बेशुमार ताकत: CAA-NRC हटाने के नाम पर 300+ हिंदुओं का धर्मांतरण

हाल ही में उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण रैकेट के बारे में बड़ा खुलासा हुआ है। रैकेट से जुड़े आरोपितों से पूछताछ में ये बात सामने आई है कि धर्मांतरण कराने वाले मोहम्मद उमर गौतम और काजी जहाँगीर ने सीएए-एनआरसी के विरोध के दौरान भी 300 से अधिक लोगों का धर्म परिवर्तन कराया।

जाँच में ये भी बात सामने आई कि लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने के लिए उमर गौतम ने एक-एक दिन में कई-कई सभाएँ कीं। इन सभाओं में लोगों से कहा गया कि CAA और NRC को हटाना है तो इस्लाम को मजबूत बनाना होगा।

300+ लोगों का धर्म परिवर्तन

जानकारी के मुताबिक, एटीएस धर्म परिवर्तन के मामले में सख्ती से जाँच कर रही है। एजेंसी को पूछताछ में पता चला कि पिछले साल सीएए-एनआरसी का विरोध करने वालों में बहुत सारे लोग दूसरे धर्म के भी थे। उन्हीं को उमर गौतम की संस्था आईडीसी (इस्लामिक दावा सेंटर) ने टारगेट किया। उस दौरान उमर ने एक-एक दिन में 10 से 12 सभाएँ कीं। उसने लोगों को बताया कि अगर उन्हें सीएए-एनआरसी का कानून रोकना है तो इस्लाम को मजबूती देनी होगी।

इसके साथ ही सभाओं में मौजूद लोगों को ये समझाया जा रहा था कि इस्लाम कुबूल करने में उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से बेशुमार ताकत मिलेगी। मोहम्मद उमर गौतम की इस तरह की सभाओं का असर भी दिखा। यही वह वक्त था, जब सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे लोगों ने भी इस्लाम कुबूल अपना लिया था। इस जाँच में अभी तक 300 से ज्यादा लोगों के धर्म परिवर्तन की खबरें सामने आई हैं।

विदेशों से फंडिंग

गौरतलब है कि एटीएस ने हाल ही में अवैध धर्मांतरण मामले में पिछले दिनों एक और आरोपित सलाहुद्दीन शेख को वडोदरा से गिरफ्तार किया था। वह वडोदरा का रहने वाला है और धर्मांतरण गिरोह के सरगना मौलाना मोहम्मद उमर गौतम का खास सहयोगी रहा है। आरोप है कि सलाहुद्दीन ने उमर गौतम के खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर की थी। सलाहुद्दीन ने स्वीकार किया कि वह उमर गौतम को जानता है और धर्मांतरण के लिए उसने हवाला के जरिए पैसे भेजे थे। सलाहुद्दीन के कब्जे से एटीएस ने एक आईपैड और एक मोबाइल फोन बरामद किया है। 

FCRA के अनुसार 2016-21 के दौरान सलाहुद्दीन शेख के एनजीओ को लगभग 10 करोड़ रुपए की विदेशी फंडिंग मिली। देश गुजरात की रिपोर्ट के अनुसार, शेख के संगठन AFMI को 2016-17, 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के दौरान क्रमशः 1.62 करोड़, 1.4 करोड़, 2.75 करोड़ रुपए और 4 करोड़ रुपए की फंडिंग प्राप्त हुई। हालाँकि, अभी 2020-21 के आँकड़े प्राप्त नहीं हो सके हैं।

अधिकांश फंड यूके और अमेरिका के संगठनों से प्राप्त हुए हैं। इनमें यूके के जुलेखा जिंगा फाउंडेशन, मजिलिस अल फतह ट्रस्ट, फ़िरदौस फाउंडेशन, इखार विलेज वेल्फेयर ट्रस्ट, नॉर्थ वेस्ट रिलीफ़ ट्रस्ट और गुजराती मुस्लिम एसोसिएशन ऑफ अमेरिका शामिल हैं।  

जाँच एजेंसी अब तक पकड़े गए आरोपितों से मिली जानकारियों के आधार पर धर्मांतरण गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों तक पहुँचने का प्रयास कर रही है। इसके लिए कई जिलों में लगातार छानबीन की जा रही है। हवाला नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों की भी तलाश की जा रही है। एटीएस जल्द कुछ अन्य गिरफ्तारियाँ कर सकती है।

ऑनलाइन क्लास के दौरान ही गर्लफ्रेंड के साथ सेक्स करने लगा छात्र, शिक्षक के चिल्लाने के बाद हुआ गलती का एहसास: वीडियो वायरल

वियतनाम से एक अजीबोगरीब वाकया सामने आया है, जहाँ एक छात्र ऑनलाइन क्लास के दौरान ही सेक्स करने लगा। ये घटना वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी की है। दुनिया भर में कई देशों की तरह वहाँ भी कोरोना वायरस संक्रमण के कारण स्कूल-कॉलेजों को बंद करने का आदेश दिया गया था, जिसके बाद कक्षाएँ ऑनलाइन ही चल रही हैं। इसी तरह वहाँ की एक यूनिवर्सिटी में एक छात्र के साथ ये वाकया हुआ।

उक्त छात्र ऑनलाइन क्लास में हिस्सा ले रहा था। उस समय उसकी गर्लफ्रेंड भी उसके ही साथ थी। अचानक से ऑनलाइन क्लास के दौरान ही दोनों करीब आ गए और सेक्स करने लगे, ये जाने बिना ही कि उनके अंतरंग मोमेंट्स कैमरे में कैद हो रहे थे। इस दौरान एक लेक्चरर ने कहा, “ये तुम क्या कर रहे हो? क्लासरूम में तुम अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रहते हो। अब ऑनलाइन क्लास में सेक्स ही करने लगे!”

उक्त लेक्चरर ने ये भी कहा कि उसके हाथ बँधे हुए हैं, वरना वो इसके खिलाफ कार्रवाई करता। जैसे ही लेक्चरर ने ऐसा कहा, उक्त छात्र को पता चल गया कि वो जो भी कर रहा है, उसे पूरा क्लास देख रहा है। इसका एहसास होते ही उसने जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उठाए और उसे पहनने लगा। तुरंत ही उसे अपना कैमरा भी ऑफ कर दिया। लेकिन, इसका वीडियो फुटेज सोशल मीडिया पर आ गया।

वियतनाम के स्थानीय मीडिया संस्थान ‘Lao Dong’ की खबर के अनुसार, इस घटना के बाद उक्त छात्र ने शिक्षक और अपने क्लासमेट्स से माफ़ी भी माँगी। साथ ही उसे इस वीडियो फुटेज के सोशल मीडिया पर वायरल होने को लेकर नाराजगी जताई। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने अपील की है कि इस फुटेज को शेयर न किया जाए। वियतनाम के कानून के अनुसार किसी के अंतरंग क्षणों को बिना उसकी सहमति के शेयर करना अपराध है।

ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 3 साल की सज़ा का प्रावधान भी है। इस यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी ने भी पुष्टि की है कि ये घटना वहाँ हुई है और उक्त छात्र वहीं पढ़ता है। अधिकारी ने कहा कि जब छात्र ने अपनी गलती मान ली है, यूनिवर्सिटी अपेक्षा करता है कि उसके क्लिप ऑनलाइन शेयर नहीं किए जाएँगे। स्कूल ने एक बार फिर से सभी छात्रों को ऑनलाइन क्लासेज के कंडक्ट को लेकर आगाह किया है।

फरवरी 2021 में भारत में भी इसी तरह की एक गलती के कारण श्वेता नाम की एक लड़की सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुई थी। श्वेता की एक रिकॉर्डिंग वायरल हुई थी। ये रिकॉर्डिंग ऑनलाइन क्लास की थी, जिसमें कई सारे लोग जुड़े हुए थे। इसमें श्वेता अपने दोस्त को उसके दूसरे करीबी दोस्त के साथ उसकी बातचीत सुना रही थी। वो कह रही थी कि उसके दोस्त ने बताया कि वह अपनी ‘सेक्स-एडिक्ट गर्लफ्रेंड’ के साथ जब भी बार जाता था, वह करता था और उसने ऐसा ‘कई बार किया’ है।

Covaxin गंभीर केस में 93% और माइल्ड केस में 77.8% तक प्रभावी: भारत बायोटेक ने जारी किया फेज 3 ट्रायल डाटा

भारत बायोटेक ने शनिवार (03 जुलाई) को स्वदेशी Covid-19 वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ के तीसरे फेज के ट्रायल के बाद प्राप्त हुए डाटा के आधार पर वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावकारिता (Efficacy) की घोषणा की। देश में सबसे ज्यादा समय तक चलने वाले ट्रायल के डाटा के आधार पर भारत बायोटेक ने बताया कि भारत में निर्मित कोवैक्सीन ने लक्षण वाले Covid-19 संक्रमित मरीजों में लगभग 77.8% की प्रभावकारिता दिखाई है। 

हैदराबाद स्थित बायोटेक कंपनी ने एनालिसिस में यह पाया कि कोवैक्सीन गंभीर लक्षण वाले Covid-19 मामलों में 93.4% प्रभावी रही है। इसके अलावा देश में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के जिम्मेदार रहे B.1.617.2 या डेल्टा स्ट्रेन के लिए भी कोवैक्सीन लगभग 65% प्रभावी है।

कोवैक्सीन के तीसरे फेज के ट्रायल के परिणामों के बारे भारत बायोटेक ने बताया कि कोवैक्सीन बिना लक्षण वाले संक्रमित मरीजों के लिए 63.6% तक प्रभावी है। गौरतलब कि दूसरे फेज का ट्रायल वैक्सीन की सुरक्षा को परखने के लिए हुआ था जबकि तीसरे फेज का ट्रायल वैक्सीन की प्रभावकारिता पर आधारित था।

भारत बायोटेक के द्वारा कोवैक्सीन के तीसरे फेज के ट्रायल के बाद जारी किए गए प्री-प्रिन्ट एनालिसिस के कुछ आँकड़े यहाँ बताए जा रहे हैं;

  1. बिना लक्षण वाले मामलों में : 63% efficacy (प्रभावकारिता)
  2. माइल्ड, मॉडरेट और गंभीर मामलों में : 78% efficacy
  3. गंभीर Covid-19 मामलों में : 93% efficacy
  4. डेल्टा वैरिएन्ट के खिलाफ : 65% efficacy    

कोवैक्सीन के तीसरे फेज के ट्रायल का एनालिसिस डाटा medRxiv प्री-प्रिन्ट सर्वर पर पब्लिश किया गया। यह ट्रायल भारत के लगभग 25 अस्पतालों में हुआ।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार तीसरे फेज के ट्रायल के दौरान एक डबल-ब्लाइंड, रैंडमाइज्ड, मल्टी-सेंटर क्लिनिकल ट्रायल में स्पॉन्सर्ड सप्लाइड रैंडमाइजेशन स्कीम का उपयोग किया गया जहाँ वालेंटियर्स को चार सप्ताह की अवधि में Covid-19 वैक्सीन या एक प्लेसबो की दो इंट्रामस्क्युलर डोज दी गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें 18 से 98 वर्ष के आयु वर्ग के 25,800 वालेंटियर्स शामिल थे।

भारत बायोटेक की कोवैक्सीन इस समय भारत में लगाई जा रही तीन Covid-19 वैक्सीनों में से एक है। दो अन्य हैं सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की बनाई गई कोविशील्ड और रूस की स्पूतनिक V. कोवैक्सीन को जनवरी में आपातकालीन उपयोग की मंजूरी प्रदान की गई थी।

भारत बायोटेक के द्वारा तीसरे फेज के ट्रायल का परिणाम ऐसे समय में घोषित किया गया है जब इसे अमेरिका की टॉप मेडिकल रिसर्च एजेंसी के द्वारा अच्छी-खासी प्रशंसा मिली। अमेरिका के शीर्ष स्वास्थ्य शोध संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) ने बताया था कि भारत की स्वदेशी कंपनी भारत बॉयोटेक द्वारा बनाई गई कोवैक्सीन (COVAXIN) कोविड-19 वायरस के अल्फा और डेल्टा वैरिएंट को प्रभावी तरीके से बेअसर करती है। एनआईएच (NIH) ने बताया कि दो शोधों के डाटा के आधार पर ये दावा किया जा रहा है।

संस्था ने कहा कि कोवैक्सीन लगवाने वाले लोगों के रक्त सीरम के दो अध्ययनों के परिणाम बताते हैं कि यह वैक्सीन ऐसे एंटीबॉडी विकसित करती है, जो कोरोना वायरस (SARS-CoV-2) के बी.1.1.7 (अल्फा) और बी.1.617 (डेल्टा) स्वरूपों को प्रभावी तरीके से बेअसर करते हैं। ये स्वरूप सबसे पहले ब्रिटेन और भारत में पाए गए थे।

एम्स में दिखी वो दुबली-पतली लड़की और ‘लगान’ माँगते आमिर खान: 15 साल बाद ‘आजाद’

2021 की 3 जुलाई को जब आमिर खान और किरण राव की तलाक की खबर आई तो स्मृतियों में 15 साल पीछे चला गया। मेधा पाटकर याद आ गईं। उनका वो नर्मदा वाला आंदोलन और उसके पीछे छिपी मोदी घृणा याद आ गई। जंतर-मंतर याद आ गया। रंग दे बसंती याद आ गई। और याद आ गई वो दुबली-पतली लड़की जो शायद एम्स में लगे उस जमावड़े से सहज नहीं थी।

यह सब 2006 में हो रहा था। केंद्र में वह सरकार थी जिसकी बागडोर पर्दे के पीछे से सोनिया गाँधी के हाथों में थी। तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी को घेरने के लिए तरह-तरह के हथकंडों का दौर था। सोशल मीडिया बस आई थी तो ‘ट्रेंड’ वाला आज जैसा शोर नहीं था। ये प्रोपेगेंडा जिस रणनीति का हिस्सा थे उस ‘टूलकिट’ का भी शोर नहीं दिखता था। लेकिन जमीन पर तब भी हलचल होती थी।

उस वक्त मेरा नाता देश की राजधानी से जुड़ा नहीं था। पत्रकारिता की शुरुआत हो गई थी। पर मुतमइन नहीं था कि यही करना है। राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में जगह की तलाश थी। नियति का खेल था कि जब यह सब चल रहा था मैं दिल्ली आया हुआ था। उन सालों में जब भी दिल्ली आता तो जंतर-मंतर मेरा पसंदीदा ठिकाना होता। घंटों वहाँ बैठ देश के अलग-अलग हिस्सों से अलग-अलग माँग लेकर पहुँचे लोगों को देखता, उनसे बतियाता। सबकी अपनी अलग-अलग कहानी। हर इलाका दूसरे से अलग। उन सालों के जंतर-मंतर के इन कुछेक दिनों ने बाद के सालों में राजनीतिक दृष्टि को बढ़ाने का काम किया।

तो 2006 में जब मैं आया तो मेधा पाटकर का आंदोलन जंतर-मंतर पर चल रहा था। फिर खबर आई कि उनके समर्थन में आमिर खान आ रहे हैं। रंग दे बसंती के निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा और फिल्म के को-स्टार अतुल कुलकर्णी तथा कुणाल के साथ आमिर जिस दिन जंतर-मंतर पहुँचे थे, उस दिन शायद 14 अप्रैल थी। वहाँ वे कुछ देर प्रदर्शनकारियों के साथ बैठे। इस दौरान आमिर खान के चेहरे से पसीने टपकते रहे और वे मौन बने रहे। फिर वे एम्स गए जहाँ मेधा पाटकर भर्ती थीं। असल में मेधा पाटकर ने उपवास शुरू किया था और तबीयत बिगड़ने पर उन्हें एम्स ले जाया गया था।

मेधा पाटकर से मिल कर जब आमिर बाहर निकले तो उनके साथ पहली बार किरण राव को देखा था। तब दोनों की शादी को कुछ महीने ही हुए थे। आमिर की मिस्टर परफेक्शनिस्ट की छवि गढ़ी जा रही थी। यह भी चर्चा थी कि लगान की शूटिंग के दौरान करीब आईं किरण राव की ‘बौद्धिकता’ से प्रभावित होकर आमिर ने पहली पत्नी को तलाक दे उनके साथ घर बसाने का फैसला किया था।

एम्स में इस दंपती की बौद्धिकता की कोई झलक नहीं दिखी थी। किरण राव मीडिया के जमावड़े से नाखुश दिख रहीं थी और उन्होंने आमिर के कानों में कुछ फुसफुसाया भी था। फिर वे चलते बने। बाद में आमिर ने मेधा पाटकर की लाइन को आगे बढ़ाते हुए नर्मदा बाँध की ऊँचाई बढ़ाने का विरोध और विस्थापितों के लिए ‘लगान’ की माँग भी की थी।

आमिर खान और किरण राव का तलाक को लेकर संयुक्त बयान

बाद में यह भी समझ आया कि आमिर खान का वहाँ आना मोदी विरोधी राजनीति के तहत एक स्ट्रेटजी थी। उसी तरह की स्ट्रेटजी जो हमने हाल के समय में जेएनयू पहुँची दीपिका पादुकोण के मामले में देखा था। फर्क यह था कि सोशल मीडिया का आज जैसा जोर न होने के कारण उस समय लगे हाथ प्रतिक्रिया का वैसा शोर नहीं था। पर बाद के सालों में मोदी का उदय बताता है कि तब भी लोग इन प्रपंचों को भली-भाँति समझ रहे थे।

बाद के वर्षों में आमिर खान की परफेक्शनिस्ट वाले मुखौटे के पीछे छिपा असली चेहरा और हिंदूफोबिया कई मौकों पर सामने आया भी। किरण राव को तो इस देश में रहने से ही डर लगने लगा था।

आज जब दोनों एक-दूसरे से ‘आजाद’ हो चुके हैं तो इस बौद्धिकता और उनकी मोदी घृणा को सलाम करिए, भले ही यह उनका निजी मसला हो।

जानिए कौन हैं उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, रह चुके हैं BJYM के प्रदेश अध्यक्ष

भाजपा विधायक दल ने उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी को अपना नया नेता चुना है, जिसके बाद ये तय हो गया है कि वो राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे। भाजपा के आलाकमान ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को पर्यवेक्षक के रूप में देहरादून भेजा था, जिनकी उपस्थिति में ये निर्णय लिया गया। पुष्कर सिंह धामी खटीमा से विधायक हैं, जो उधम सिंह नगर में पड़ता है। वो वहाँ से लगातार दूसरी बार विधायक बने हैं।

पुष्कर सिंह धामी विधायक हैं, ऐसे में उनके आड़े कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं आएगी। तीरथ सिंह रावत को 6 महीने के भीतर विधायक चुना जाना था, जो न होने के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का करीबी माना जाता है। वो भाजपा जनता युवा मोर्चा (BJYM) के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। जल्द ही उनके शपथग्रहण का समय फाइनल किया जाएगा।

युवाओं के बीच पुष्कर सिंह धामी की अच्छी लोकप्रियता और पकड़ है। बेरोजगारी समेत अन्य मुद्दों पर वो खासे मुखर रहते हैं। 2002 से 2008 के दौर में उन्होंने पूरे प्रदेश में भ्रमण कर के कई बेरोजगार युवाओं को संगठित किया था और कई विशाल रैलियाँ की थीं। राज्य के उद्योगों में युवाओं को 70% आरक्षण दिलाने में उनकी ही सबसे बड़ी भूमिका रही थी। ऐसे कई कारणों से पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है।

‘किसानों’ ने BJP नेता की खेत से उखाड़ा धान, PM मोदी को दी गाली: ‘किसान’+कॉन्ग्रेस+माओवादी गिरोह का एकजुट षड्यंत्र

पंजाब के बरनाला में तथाकथित किसानों ने बीजेपी नेता हरजीत सिंह ग्रेवाल के खेत में घुसकर रोपी हुई फसल को उखाड़कर फेंक दिया। इतना ही नहीं, किसानों ने ट्रैक्टर से जमीन भी जोत डाली। इस दौरान उन्होंने बीजेपी विरोधी नारे भी लगाए। बीजेपी नेता ने पंजाब के डीजीपी से मामले की शिकायत की है।

शुक्रवार (2 जुलाई 2021) को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के झंडे लिए कुछ महिलाओं समेत गुस्साए किसानों ने ग्रेवाल के खेत में घुसकर धान के पौधे उखाड़ दिए और ट्रैक्टर से पूरी 1.5 एकड़ जमीन जोत दी। यूनियन के नेताओं ने दावा किया कि वे केवल उस किसान से बात करने गए थे, जिसने ग्रेवाल की जमीन किराए पर ली थी, लेकिन कुछ नाराज प्रदर्शनकारियों ने पौधों को उखाड़ फेंका। साथ ही केंद्र सरकार और बीजेपी नेता हरजीत सिंह का कड़ा विरोध किया।

एक किसान नेता बलवंत सिंह उपली ने कहा, “हमने किसान से ग्रेवाल की जमीन पर बुआई नहीं करने की अपील की थी। हालाँकि, उन्होंने धान की रोपाई कर दी। आज जब हम बातचीत के लिए गए तो भीड़ ने अचानक पौधे उखाड़ दिए। भाजपा नेता के खिलाफ हमारा कोई व्यक्तिगत प्रतिशोध नहीं है, लेकिन उन्हें किसानों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।”

यूनियन के एक अन्य सदस्य जगसीर सिंह ने कहा, “किसानों ने पहले ही उनकी लगभग पाँच एकड़ जमीन लीज पर लेने से इनकार कर दिया है, लेकिन उन्होंने एक किसान को मुफ्त में जमीन देने की पेशकश की। भाजपा नेता किसानों को बाँटना चाहते हैं।”

इस पूरे मामले में हरजीत सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गुंडागर्दी करके आतंक फैलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के वक्त पुलिस वहाँ मूकदर्शक बनकर खड़ी रही और कुछ लोग फसल नष्ट करके चले गए। उन्होंने मामले में डीजीपी दिनकर गुप्ता से मिलकर शिकायत की है।

‘ये आतंकी, कॉन्ग्रेस और माओवादी सब मिले हुए हैं’: हरजीत सिंह ग्रेवाल

इस बीच, ऑपइंडिया ने पूरी घटना पर भाजपा नेता हरजीत सिंह ग्रेवाल से संपर्क किया। भाजपा नेता ने बताया कि खुद को किसान बताने वाले 100-200 लोगों का एक दल शुक्रवार दोपहर खेत में घुस गया। ग्रेवाल ने कहा, “पहले तो उन्होंने सोशल मीडिया पर लाइव होने के दौरान गालियाँ दीं। उन्होंने धान की फसल को नष्ट कर दिया और खुले तौर पर पीएम मोदी और मुझे धमकाया और गाली दी। ये लोग किसान नहीं बल्कि आतंकवादी हैं। ये आतंकी किसान, कॉन्ग्रेस और माओवादी सब मिले हुए हैं।”

‘किसानों’ को पंजाब पुलिस का समर्थन: भाजपा नेता

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि ये लोग पंजाब पुलिस के समर्थन से इस तरह की जघन्य गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि इन बदमाशों के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज करना उनके लिए कितना मुश्किल था, क्योंकि राज्य में कॉन्ग्रेस सरकार के इशारे पर काम कर रही पंजाब पुलिस उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करने से हिचक रही थी। उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के कारण ही मामला दर्ज किया जा सका।

‘पंजाब पुलिस ‘किसानों’ के खिलाफ शिकायत दर्ज करने से हिचकिचा रही है’

खुद को किसान बताने वाले इन अपराधियों के साथ पूरी व्यवस्था की कैसी मिलीभगत है, इस पर बोलते हुए ग्रेवाल ने कहा कि पंजाब पुलिस उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज करने को तैयार नहीं थी। इन किसानों के पास फ्री हैंड है और वे जो चाहें कर सकते हैं। वे किसान नहीं बल्कि एक तरह के जबरन वसूली करने वाले लोग हैं। वे समाज के लिए कलंक हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या यह घटना उनके कृषि समर्थक कानून का समर्थन करने का प्रतिशोध है, ग्रेवाल ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन शांति से, हिंसा का सहारा लेकर नहीं, जैसा कि ये बदमाश करते रहे हैं।

भाजपा नेता ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को भी यह बताया कि इस घटना का उन पर कोई वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि उन्हें इस जमीन का वार्षिक अनुबंध पहले ही मिल गया है। एक गरीब किसान नछत्तर सिंह, जिन्होंने 1.5 एकड़ जमीन किराए पर ली है उनका नुकसान हुआ है। ग्रेवाल ने कहा कि उन्होंने नछत्तर सिंह को आश्वासन दिया है कि वह उनके नुकसान की भरपाई करेंगे, क्योंकि इसमें उनकी गलती नहीं है और वह एक गरीब किसान हैं।

ग्रेवाल ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, “नुकसान नछत्तर सिंह का होगा, क्योंकि मुझे इस जमीन का वार्षिक अनुबंध पहले ही मिल चुका है। मेरे पास अलग-अलग हिस्सों में कुल 17 एकड़ पारिवारिक भूमि है, जिसमें से धान की रोपाई इसी हिस्से में की गई थी। यह जमीन मेरे भाई की है, जो यूके में है। मैंने नछत्तर को उसके नुकसान की भरपाई करने का वादा किया है, क्योंकि यह उसकी गलती नहीं थी और वह एक गरीब किसान है।”

हरजीत सिंह के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन

बता दें कि बीजेपी नेता हरजीत सिंह ग्रेवाल किसान आंदोलन के वक्त काफी सक्रिय रहे। उन्होंने कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन की आलोचना की और किसानों पर कई बयान दिए। हरजीत सिंह से नाराज किसानों ने कई बार उनके खिलाफ प्रदर्शन भी किया।

फातिमा सना शेख (‘तीसरी बीवी’) को बधाई और आमिर खान का तलाक: सोशल मीडिया पर ‘रिश्ता लंबा चले’ की शुभकामनाएँ

आमिर खान और उनकी दूसरी पत्नी किरण राव ने अपनी 15 साल की शादी को ख़त्म कर के तलाक लेने का फैसला लिया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर ‘दंगल’ फेम अभिनेत्री फातिमा सना शेख ट्रेंड होने लगीं। लोग आमिर खान के साथ उनका नाम जोड़ने लगे। लोगों ने तो फातिमा सना शेख को आमिर खान और किरण राव की तलाक की वजह तक बता दिया। वहीं कई लोग इससे अचंभित दिखे कि आखिर फातिमा सना शेख अभी ट्विटर पर क्यों ट्रेंड हो रही हैं।

एक सोशल मीडिया यूजर ने तो फातिमा सना शेख और आमिर खान को बधाई देते हुए ये कामना तक कर डाली कि उनका रिश्ता लंबा चलेगा।

वहीं एक अन्य यूजर ने शाहरुख़ खान की ‘रईस’ फिल्म का पोस्टर शेयर करते हुए उसके डायलॉग का जिक्र किया और लिखा कि आमिर अभी फातिमा से यही कह रहे होंगे – “मैं आ रहा हूँ।”

वहीं कुछ यूजर्स ने लिखा कि अब फातिमा सना शेख ही आमिर खान का नया ‘टारगेट’ हैं।

बता दें कि न सिर्फ ‘दंगल (2016)’, बल्कि ‘ठग्स ऑफ हिंदुस्तान’ में भी साथ काम किया था। जहाँ पहली फिल्म ब्लॉकबस्टर रही थी, दूसरी फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हो गई। यूजर्स ने फातिमा सना शेख को बधाई भी दे दी। वहीं कुछ ने अन्य लोगों से गेस करने को कहा कि आमिर खान की तीसरी बीवी कौन होगी। बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब दोनों के बीच लिंकअप की ख़बरें सुर्खियाँ बनी हैं।

इससे पहले जब इस तरह की अटकलों का बाजार गर्म था, तब फातिमा सना शेख ने इसे नकारते हुए आमिर खान को अपना गुरु और मार्गदर्शक बताया था। उन्होंने कहा था कि लोग बिना कुछ जाने-समझे ही गलत चीजों का अनुमान लगा लेते हैं। उन्होंने कहा था, “कुछ अपरिचित लोग, जो मुझसे कभी मिले तक नहीं हैं – वहीं ये सब चीजें मेरे बारे में लिख रहे हैं। मैं इससे परेशान हूँ क्योंकि मैं नहीं चाहती कि लोग मरे बारे में गलत सोचें, लेकिन मैंने इन चीजों को नजरअंदाज करना सीख लिया है।”

एक यूजर ने लिखा कि आमिर खान की तीसरी बीवी और कोरोना वायरस की तीसरी लहर, दोनों का आना तय माना जा रहा है। एक अन्य यूजर ने सवाल किया कि प्रत्येक 15 साल पर बीवी बदलने का ये कौन सा रिवाज है? कुछ ने कहा कि फमिता बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान की बेटी की उम्र की है। हालाँकि, इस पर आमिर खान या फातिमा सना शेख की तरफ से कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है।

आमिर खान और किरण राव ने संयुक्त बयान भी जारी किया है, जिसमें दोनों ने कहा है कि ये 15 वर्ष इतने अच्छे बीते कि हमने इस दौरान आजीवन साथ रहने वाले अनुभव एक-दूसरे के साथ साझा किया। उन्होंने कहा, “हम साथ में खुश रहे, हँसे। हमारा रिश्ता विश्वास, प्यार और सम्मान के मामले में लगातार बढ़ता ही रहा। अब हमने निर्णय लिया है कि अब हम जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करेंगे, लेकिन पति-पत्नी के रूप में नहीं, ये बेटे आज़ाद के अभिभावक के रूप में होगा, एक परिवार के रूप में होगा।।”