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वरिष्ठ चीनी परमाणु वैज्ञानिक की संदिग्ध परिस्थितियों में बिल्डिंग से गिरकर मौत, हत्या-आत्महत्या के बीच उलझी गुत्थी

चीन के टॉप न्यूक्लियर साइंटिस्ट में से एक झाँग झिजियान की गुरुवार (17 जून 2021) संदिग्ध परिस्थितियों में एक इमारत से गिरकर मौत हो गई। वैज्ञानिक झाँग झिजियान हार्बिन इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी के न्यूक्लियर साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी कॉलेज के प्रोफेसर थे। इसके अलावा, वह विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष और चाइनीज न्यूक्लियर सोसायटी के भी उपाध्यक्ष थे।

उन्होंने आत्महत्या की थी या उनकी हत्या हुई है, इस बात का खुलासा नहीं हुआ है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, पुलिस ने घटना स्थल से ज्यादा सबूत नहीं मिलने के कारण इसके हत्या का मामला होने से इनकार कर दिया है।

वहीं वरिष्ठ वैज्ञानिक की मौत की खबर के बाद यूनिवर्सिटी ने एक बयान जारी कर शोक व्यक्त किया। विश्वविद्यालय ने कहा कि बड़े दुख की बात है कि 17 जून 2021 को सुबह 9.34 बजे एक इमारत से गिरने के कारण झाँग झजियान की मौत हो गई। विश्वविद्यालय ने उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदना जाहिर की है। इसके अलावा, झाँग की मौत पर कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।

झाँग को उनके इनोवेशन के लिए पिछले साल सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, सरकारी स्वामित्व वाली नेशनल न्यूक्लियर कॉरपोरेशन द्वारा वर्ष 2019 में उन्हें चीन के परमाणु जनक माने जाने वाले कियांग सैनकियांग के नाम पर स्थापित कियांग सैनकियांग टेक्नोलॉजी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

मौत पर शक गहराया

वैज्ञानिक झाँग झिजियांग की मौत से दो दिन पहले ही यूनिवर्सिटी 41 वर्षीय यंग जिंगवेई को विश्वविद्यालय का नया वॉइस प्रेसीडेंट नियुक्त किया था। इससे पहले तक वो कॉलेज ऑफ अंडरवॉटर एकोएस्टिक इंजिनियरिंग के डीन थे।

हार्बिन इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी उन दो चीनी विश्वविद्यालयों में से एक था, जिनका सेना के साथ घनिष्ठ संबंध था। चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच प्रौद्योगिकी पर तनाव के बीच इन्हें पिछले जून में अमेरिका द्वारा विकसित कंप्यूटर सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म का उपयोग करने से प्रतिबंधित कर दिया गया था।

अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने एक साल पहले विश्वविद्यालय और हार्बिन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को अपनी ‘एंटिटी लिस्ट’ में जोड़ा था। विभाग ने आरोप लगाया था कि हार्बिन इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय ने पीएलए को सपोर्ट करने के लिए अमेरिकी वस्तुओं का इस्तेमाल किया है।

आदिपुरुष की ‘सीता’ की तैयारी में जुटी कृति सेनन ने शेयर किया वीडियो, लोगों ने कहा- करीना से अच्छा विकल्प

एक तरफ जहाँ ‘सीता’ फिल्म में करीना कपूर की कास्टिंग की बातें सुनकर आम जनता भड़की हुई है, वहीं दूसरी ओर अभिनेत्री कृति सेनन हैं जो ‘आदिपुरूष’ में सीता के रोल के लिए कास्ट हो गई हैं और रोल को शिद्दत से निभाने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रही है।

400 करोड़ रुपए के बजट में बनने जा रही आदिपुरुष को लेकर माना जा रहा है कि इसके बाद कृति सेनन की लोकप्रियता अलग स्तर पर पहुँच जाएगी। इस रोल में सटीक दिखने के लिए कृति सेनन लगातार अपनी बॉडी लैंग्वेज पर काम कर रही हैं।

उन्होंने हाल में वर्कआउट करते हुए इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर की थी। इसमें वह डेड लिफ्ट और वेटलिफ्टिंग करती दिख रही हैं। इस वीडियो के साथ उन्होंने एक वीडियो और शेयर की थी जिसमें दिखा था कि ये वर्कआउट वगैरह कृति के लिए इतना आसान काम नहीं है।

इस वीडियो को शेयर करते हुए कृति सेनन ने कैप्शन में लिखा है, “लेग डे और मैं। उम्मीद वर्सेज वास्तविकता या फिर इंस्टाग्राम वर्सेज सच्चाई।” कृति सेनन ने ये भी बताया कि अपने बॅाडी को खूबसूरत बनाने के लिए उन्हें जो मेहनत करनी पड़ती है उससे नफरत है।

कृति की इस मेहनत की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। लेकिन उसके साथ-साथ करीना कपूर का विरोध भी जोरों पर है। कुछ लोग करीना कपूर की सीता में कास्टिंग की बात सुन कर माँग कर रहे हैं कि आदिपुरुष में तो कृति काम कर ही रही हैं। सीता फिल्म भी कृति को दे देनी चाहिए।

किरण कुमार सोनी लिखती हैं, “करीना कपूर से अच्छा है कि कृति सेनन को यह दे दिया जाए उसके लायक नहीं है वो रोल क्योंकि उसको हिंदू धर्म शास्त्र में आस्था नही है।”

विनय सिंह #boycottkareenakapoor में लिखते हैं कि करीना कपूर इस पवित्र रोल के लिए सटीक नहीं है। ये रोल या तो कंगना रनौत को दिया जाना चाहिए या फिर कृति सेनन को। लेकिन करीना को बिलकुल भी नहीं।

इसी प्रकार कुछ अन्य यूजर्स भी हैं जिन्हें कृति सेनन सीता के रोल में उचित कास्टिंग नहीं लग रहीं, लेकिन फिर ये देख कर कि सीता फिल्म में करीना को रोल ऑफर हुआ है, लोग कृति को बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि आदिपुरुष 11 अगस्त 2022 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। जल्द ही इस फिल्म के लिए शूटिंग शुरू होगी। लुक और कहानी को लेकर ये फिल्म काफी विशाल बताई जा रही है। ये रामायण की कहानी से प्रेरित है। इसमें श्रीराम का चरित्र प्रभास द्वारा निभाया जाएगा वहीं रावण के किरदार को सैफ अली खान निभाएँगे।

वहीं ‘सीता- द इनकार्नेशन’ फिल्म के लिए कास्टिंग होना अभी शुरुआती चरण में ही है। इसकी कहानी ‘बाहुबली’ फिल्म के मशहूर लेखक केवी विजेंद्र प्रसाद ने लिखी है।  बताया जा रहा है कि फिल्म में सीता के दृष्टिकोण से रामायण की कहानी को फिल्माया जाएगा। फिल्म को अस्थायी रूप से ‘सीता- द इनकार्नेशन’ (Sita– The Incarnation) टाइटल दिया गया है।

PM मोदी के करीबी पूर्व IAS एके शर्मा बने यूपी BJP के प्रदेश उपाध्यक्ष, राज्य में कोरोना नियंत्रण में रहा अहम योगदान

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले चुनाव से पहले बीजेपी ने पूर्व आईएएस अधिकारी एके शर्मा को पार्टी का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी रहे शर्मा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाते हैं। उन्होंने इसी साल जनवरी 2021 में प्रशासनिक सेवा से वीआरएस लेकर बीजेपी ज्वाइन किया था।

अरविंद कुमार शर्मा के अलावा भाजपा ने अर्चना मिश्रा और अमित वाल्मीकि को प्रदेश मंत्री नियुक्त किया है। बता दें कि बीते कुछ समय से ही उन्हें योगी सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चर्चा थी। एमएलसी बनने के बाद से ही वो लगातार उत्तर प्रदेश में सक्रिय थे और अलग-अलग जिलों में कोरोना संक्रमण पर रोकथाम के लिए लगातार काम कर रहे थे।

पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कोविड संक्रमण को रोकने के लिए उन्हें जाना जाता है। कोरोना रोकथाम में बनारस मॉडल का जिक्र खुद प्रधानमंत्री भी कर चुके हैं।

मूलरूप से यूपी में मऊ जिले के काझाखुर्द गाँव के रहने वाले 58 वर्षीय अरविंद कुमार शर्मा की स्कूलिंग गाँव से ही हुई थी। इसके अलावा ग्रेजुएशन और पॉलिटिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से किया था। वह 1988 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।

2001 से पीएम मोदी के साथ हैं शर्मा

वर्ष 2001 में नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सीएम के तौर पर जब शपथ ली थी। तभी से शर्मा उनके साथ हैं। गुजरात में वो सचिव और सीएम के अतिरिक्त प्रमुख सचिव भी रहे थे। उन्हें वाइब्रेंट गुजरात समिट को करवाने के लिए जाना जाता है। इसके बाद 2014 में जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो शर्मा को भी सेंट्रल डेप्युटेशन पर दिल्ली लाया गया।

पार्टी का उपाध्यक्ष बनाए जाने पर भाजपा प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने कहा कि इससे पार्टी को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि एके शर्मा मऊ से आते हैं, जहाँ उनका खासा वर्चस्व है। उनके आने से पार्टी पूर्वान्चल में काफी मजबूत होगी।

केजरीवाल सरकार को 30 जून तक राशन दुकानों पर ePoS मशीन लगाने का केंद्र ने दिया अल्टीमेटम, विफल रहने पर होगी कार्रवाई

केंद्र सरकार ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर अपनी राशन की दुकानों पर इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ़ सेल (ePoS) उपकरणों को नहीं लगाने और ‘वन नेशन-वन राशन कार्ड’ योजना को लागू करने में विफल रहने पर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। खाद्य मंत्रालय ने गुरुवार (17 जून 2021) को एक पत्र में राज्य सरकार को 30 जून 2021 तक एनएफएसए के तहत कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दिया है।

हालाँकि, ऐसा करने में विफल रहने पर क्या कार्रवाई की जाएगी यह नहीं बताया गया है। दिल्ली को एनएफएसए के तहत लाभार्थियों को बाँटने के लिए हर महीने 36,000 टन चावल और गेहूँ मिलता है।

एनएफएसए की धारा 12 में कहा गया है कि केंद्र और राज्य लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) में सुधार करने का प्रयास करेंगे। इसमें एंड-टू-एंड कंप्यूटराइजेशन और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी माध्यमों का उपयोग भी शामिल है, ताकि लेन-देन के सभी स्तरों पर पारदर्शिता बनी रहे।

इस मामले में खाद्य मंत्रालय ने बीते 3 वर्षों में 12 पत्र लिखे हैं। इसमें कहा गया है, “उचित मूल्य की दुकानों पर ईपीओएस उपकरणों का संचालन नहीं करना GNCTD अधिनियम की धारा-12 का उल्लंघन है। पारदर्शिता और सही लक्ष्यीकरण को बढ़ावा देने के लिए अधिनियम के अनुसार TPDS के तहत सुधार अनिवार्य हैं।”

साभार: सुरेश नखुआ बीजेपी प्रवक्ता, मुंबई

प्रवासियों को नहीं मिल पा रहा ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ का लाभ

इसमें आगे कहा गया है, “दिल्ली में खाद्यान्न का वितरण अभी भी पुराने तरीके से ही किया जा रहा है। एनएफएसए का पालन नहीं होने से राष्ट्रीय राजधानी में कई प्रवासी लाभार्थियों को ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ (ONORC) की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है।”

उचित मूल्य की दुकानों पर ईपीओएस सिस्टम लगाने में देरी की वजह से राशन की दुकानों में पारदर्शिता लाने का इसका मूलभूत उद्देश्य नहीं पूरा हो पा रहा है। यह एनएफएसए एक्ट 2013 का उल्लंघन भी है।

केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच फूड सप्लाई को लेकर विवाद

हाल ही में सीएम अरविंद केजरीवाल ने घर-घर राशन पहुँचाने की दिल्ली सरकार की योजना को रोकने का आरोप केंद्र सरकार पर लगाया था। इस पर एक हफ्ते पहले केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अरविंद केजरीवाल पर पलटवार करते हुए कहा था कि घर-घर राशन पहुँचाने की उनकी योजना एक ‘जुमला’ है।

पिछले शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रविशंकर प्रसाद ने दिल्ली में केजरीवाल सरकार को ‘राशन माफिया’ के नियंत्रण में होने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि लोगों के घरों तक सब्सिडी वाला राशन पहुँचाने का प्रस्ताव एक प्रचार स्टंट से ज्यादा कुछ नहीं है। इससे घोटाले को बढ़ावा मिलेगा।

इतना ही नहीं, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने केजरीवाल से पूछा था कि अगर हकीकत में अपने लोगों की चिंता है तो उन्होंने दिल्ली में केंद्र की ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ योजना को लागू क्यों नहीं किया। प्रसाद ने दिल्ली के सीएम को फटकार लगाते हुए कहा कि अब तक 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस योजना को लागू किया है।

‘शार्क्स के साथ मुझे फिश टैंक में घंटों बैठाया’: पूनम पांडे ने पति सैम अहमद के लिए क्यों कही ये बात, पहले लगाए थे मोलेस्टेशन के आरोप

अभिनेत्री पूनम पांडे का जल्द ही एक गाना रिलीज होने वाला है। इससे पहले उनके पति सैम बॉम्बे उर्फ सैम अहमद ने सोशल मीडिया पर इसे लेकर एक वीडियो शेयर की। वीडियो में पूनम मोनोकिनी में बारिश का मजा लेते दिख रही थी।

बाद में दोनों ने एक कार्यक्रम में इसे लेकर खुलासा किया कि वो वीडियो गाने की शूटिंग के वक्त की थी। इस दौरान पूनम पांडे ने बताया कि उनके पति चीजें डायरेक्ट करने में इतने माहिर हैं कि उन्होंने गाने के लिए पूनम को फिश टैंक में घंटो बैठाए रखा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पूनम कहती हैं, “यह काफी परफैक्शनिस्ट हैं। जब भी यह चीजें डायरेक्ट करते हैं तो वह शानदार साबित होती हैं। इन्होंने मुझे चार घंटों तक फिश टैंक में बिठाकर रखा, वह भी शार्क्स के साथ। इतनी देर बिठाया कि मैं काँपने लगी थी।”

पूनम की यह बात सुनने के बाद सैम ने मीडिया को साफ किया कि बहुत बड़ा फिश टैंक है छोटा सा नहीं है। इसलिए ऐसा मत सोचिए कि छोटे से फिश टैंक में इसे डाल दिया।

सैम अहमद ने बताया कि वह लोग अभी सॉन्ग को शूट कर रहे हैं। इस गाने के सिंगर और कंपोजर उनके दोस्त हैं जो इस समय लंदन में हैं। उन्होंने ही पूनम और सैम को दो गाने भेजे हैं। सैम कहते हैं कि एक गाने के लिए बड़ा क्रू और डांसर्स चाहिए, इसलिए उस पर काम शुरू नहीं हुआ है लेकिन दूसरा गाना शूट होना शुरू हो गया है। ये गाना इन्टिमेट गाना है। इसमें सैम और पूनम शूटिंग कर रहे हैं। उन्होंने इस गाने के लिए 70 फीसद शूटिंग कर ली है।

शादी के 11 दिन बाद आई थी पूनम और सैम के रिश्ते में खटास, अब सब ठीक है?

बता दें कि पिछले साल 10 सितंबर को शादी करने के बाद दोनों पति पत्नी काफी विवादों में थे। गुपचुप तरीके से शादी करने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री पूनम पांडे के पति सैम अहमद बॉम्बे को पुलिस ने गोवा में (सितंबर 22, 2020) गिरफ्तार कर लिया था। उनके ख़िलाफ़ पूनम ने मोलेस्टेशन, धमकी देने और मारपीट करने का आरोप लगाया था।

पुलिस में दर्ज श‍िकायत के मुताबिक, दक्ष‍िण गोवा के कानाकोना गाँव में पूनम पांडे किसी फिल्‍म की शूटिंग कर रही थीं। यह घटना तभी हुई। कानाकोना पुलिस थाने के इंस्‍पेक्‍टर तुकाराम चव्‍हाण के अनुसार, पूनम ने अपनी श‍िकायत में कहा था कि सितंबर 21, 2020 की रात उनके पति सैम अहमद ने उन्‍हें मोलेस्‍ट किया और मारपीट की। इतना ही नहीं, पूनम ने यह भी कहा था कि सैम अहमद बॉम्‍बे ने उन्‍हें अंजाम भुगतने की भी धमकी दी।

इसके अलावा पूनम पांडे ने कहा था कि अब वह सैम अहमद बॉम्बे के पास वापस नहीं जाएँगी। उन्होंने इस बात के भी संकेत दिए थे कि वह बहुत जल्द आधिकारिक तौर पर अपना रिश्ता ख़त्म कर लेंगी। हालाँकि भारी विवाद के बाद भी दोनों साथ हैं।

पूनम ने हाल में मीडिया को दिए बयान में सैम की तमाम तारीफें की हैं। पूनम पांडे से जब यह सवाल पूछा गया तो एक्ट्रेस ने कहा, “अगर यह मेरे पति नहीं होते तो मैं तब भी यही कहती कि यह एक बेहतरीन डायरेक्टर हैं। मुझे 10 गुना ज्यादा सुंदर दिखाया है। मैं काफी खराब दिखती थी, लेकिन यह मुझे बहुत अच्छा दिखाते हैं। मैं इनके साथ बहुत खुश हूँ।”

शादी के लिए हिंदू बने बिट्‌टू खान को मुस्लिम परिवार ने 10 साल बाद पत्नी सहित घर से निकाला, कहा- मुस्लिम बनो तो ही घर में रहो

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में धर्म परिवर्तन न करने पर महिला को प्रताड़ित कर घर से निकाल दिया गया। मामला ग्वालियर के विश्वविद्यालय क्षेत्र के सरस्वती नगर की है। पीड़िता मधु बाथम का कहना है कि करीब 10 साल पहले बिट्टू खान से प्रेम हुआ। दोनों ने धर्म के बंधन का तोड़कर लव मैरिज की। उस समय तय हुआ था कि बिट्‌टू खान अपना धर्म परिवर्तन कर हिंदू रिति रिवाज से मधु से शादी करेगा और हुआ भी ऐसा ही। दोनों के तीन बच्चे हैं।

हालाँकि बिट्टू खान का हिंदू धर्म अपनाना उसके परिवार को रास नहीं आया। उन्हें यह बात शुरू से ही खटक रही थी। वो लोग मधु बाथम पर लगातार धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम धर्म अपनाने का दबाव डाल रहे हैं। जानकारी के मुताबिक बिट्टू का बड़ा भाई टीटू खान, उसकी बीबी रेशमा, दूसरा जेठ भैया खान, उसकी बीबी साइना खान, सास अनीशा बेगम, देवर गोली, ननद रीना, ननदोई नदीम व छोटी ननद निशा खान बीते वर्षों से लगातार धर्म बदलने के लिए उसकी पत्नी को प्रताड़ित कर रहे हैं।

मधु ने 10 साल के वैवाहिक जीवन में ससुरालीजन से गाली-गलौज, मारपीट के साथ ही दुष्कर्म करने तक की धमकियाँ झेलीं। लेकिन, हिंदू धर्म से आस्था नहीं छोड़ी। इससे नाराज ससुराल वालों ने दो दिन पहले मधु, उसके पति बिट्‌टू व बच्चों को घर से बाहर निकाल दिया।

मधु जब इसकी शिकायत करने पहुँची तो उसे फोन कर धमकी दिया गया। कहा गया कि अगर वह शिकायत करेगी तो पति-बच्चों समेत जान से हाथ धोना पड़ेगा। इतना ही नहीं, जब पुलिस बल उसे घर छोड़ने पहुँचा तो उनकी मौजूदगी में भी गाली-गलौज और धमकियाँ दी गईं। पुलिस से न्याय की माँग की है। मधु बच्चे पति सहित रानी लक्ष्मी बाई समाधि स्थल पर धरने बैठ गई। यह पता चलते ही पुलिस अफसर वहाँ पहुँचे और उसे न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है।

ग्वालियर के ASP हितिका वासल ने जानकारी देते हुए बताया, “एक महिला के द्वारा शिकायत की गई है उसकी शादी को 10 साल हो गए हैं। ससुराल के लोगों द्वारा उसे पति, बच्चों सहित घर से निकाल दिया है। शिकायत मिली है जाँच कर कार्रवाई की जा रही है।”

केरल में कोविड से हुई मौतों का छिपाया जा रहा असल डेटा, ज्यादातर जिलों के आँकड़े से मिलान पर खुली राज्य सरकार की पोल

कोरोना काल में मृत्यु के आँकड़ों को छिपाने का इल्जाम कई राज्य सरकारों पर लगा। ताजा मामले की बात करें तो केरल में ये अनियमितता पकड़ी गई है। वहाँ जिलों में दर्ज की गई मौत की गिनती राज्य सरकार द्वारा दर्शाई जा रही संख्या से बहुत ज्यादा अलग है। आरोप है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने कई जिलों से केवल आधी मौतों को काउंट किया है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तिरुवनंतपुरम में स्थानीय निकाय के आँकड़े कहते हैं कि यहाँ कोविड से हुई मौतें की गिनती अपेक्षाकृत सटीक है। वहाँ शुक्रवार तक कुल 2501 मौतें रिकॉर्ड की गई। लेकिन कोल्लम में 2306 संक्रमितों की मौत हुई जबकि आधिकारिक साइट पर ये डेटा केवल 710 का है। 

इसी तरह एर्नाकुलम में 2250 मौतें हुईं लेकिन ऑफिशियल आँकड़ा सिर्फ 1160 बताता है। इडुक्की में 588 मौत हुई और सरकार के हिसाब से वहाँ केवल 125 लोगों ने अपनी जान गवाई। पठनमिट्ठा में 482 मरे और रिकॉर्ड सिर्फ 355 को किया गया। कोटय्यम में भी लगभग मृत्यु की संख्या 1000 है और सरकार इसे सिर्फ 508 दिखा रही है। मलप्पुरम में 1046 मौत हुई और प्रशासन ने उन्हें 883 दिखाया।

कोजिकोड़े में असल संख्या 2,096 मानी जा रही है लेकिन सरकार सिर्फ 919 की पुष्टि कर रही है। कसारगोड़ में 500 के आसपास मरीजों की कोरोना से डेथ हुई जबकि आँकड़ों में ये डेथ रेट 191 है।

बता दें कि मौत के आँकड़ों में इतनी विसंगति का खुलासा होने के बाद इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव से स्पष्टीकरण माँगा। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी इन विसंगतियों को दूर करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई मामले में मृत्यु दर (सीएफआर) की जाँच करता है, तो यह स्पष्ट है कि आधिकारिक मृत्यु दर में विसंगतियाँ हैं। तिरुवनंतपुरम में, जहाँ रिपोर्ट की गई मौतें अपेक्षाकृत सटीक मिली और सीएफआर 0.88% है। वहीं सबसे अधिक कोविड संक्रमित जिलों में से एक मलप्पुरम में सीएफआर केवल 0.28% दिखाया। यह राज्य के औसत 0.42 प्रतिशत से भी कम है।

आगरा के पारस अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई थी 22 मौतें: जाँच में खुलासा, पर्याप्त थे सिलेंडर

उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित पारस अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से 22 मरीजों की मौत के मामले में प्रशासन की जाँच रिपोर्ट आ गई है। इसमें प्रशासन ने अस्पताल को क्लीन चिट दे दी है। जाँच रिपोर्ट में कहा गया है कि मॉक ड्रिल का कोई सबूत नहीं है, जिसके दौरान ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप हो गई और अस्पताल में 22 लोगों की मौत हो गई।

दरअसल, आगरा के पारस अस्पताल में ऑक्सीजन की कथित कमी से 22 कोरोना मरीजों की मौत पर काफी हंगामा हुआ था। इस मामले में सियासत भी काफी हुई थी। अस्पताल के मालिक डॉ अरिंजय जैन का एक वीडियो सामने आया था। उसमें कथित तौर पर एक ‘मॉक ड्रिल’ का जिक्र करते हुए कहा गया था कि ‘मॉक ड्रिल’ के दौरान अस्पताल में 5 मिनट के लिए ऑक्सीजन सप्लाई रोक दी गई थी। इसके बाद के घटनाक्रम में मरने वाले 22 मरीजों में हाइपोक्सिया के गंभीर लक्षण दिखाई दिए थे और अस्पताल पर मौतों को छुपाने का आरोप लगा था।

इसके बाद आगरा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने ‘पारस अस्पताल’ को सील कर उसके मालिक के खिलाफ महामारी रोग अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।

प्रशासन की जाँच रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

प्रशासन की जाँच में पता चली हकीकत

पारस अस्पताल की घटना के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इसके जाँच के आदेश दिए थे। इन्वेस्टिगेशन टीम ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि 15 से 25 अप्रैल के बीच संबंधित अस्पताल में 16 मौतें हुई थीं। इन 16 मौतों में से कोई भी ‘मॉक ड्रिल’ के कारण नहीं हुई। रिपोर्ट के अनुसार, सभी रोगियों की मृत्यु या तो हालत गंभीर होने के कारण हुई थी, या उन्हें गंभीर बीमारी थी।

जाँच टीम के मुताबिक, अस्पताल में 25 अप्रैल 2021 को 149 ऑक्सीजन सिलेंडर इस्तेमाल किए जा रहे थे, जिसमें 20 रिजर्व में रखे गए थे। 26 अप्रैल को 121 सिलेंडरों का इस्तेमाल किया गया था और 15 रिजर्व में थे। इतना ऑक्सीजन अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए यह पर्याप्त पाया गया था। इसके अलावा जाँच में यह भी सामने आया है कि कुछ मरीजों के अटेंडेंट अपने साथ ही ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर आए थे।

जाँच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जिस वीडियो को लेकर बवाल हो रहा है, उसमें अस्पताल संचालक ने कहा है, “पैसे ले लो, गाड़ी ले लो, भोपाल-वोपाल जहाँ से भी मिले वहाँ से ले लो, कितने पैसे चाहिए, कैसे बचे 96 जिन्दगी, करियर बचे, सोने का भाव लगा लो, कैसे भी मिले, बस ऑक्सीजन का टैंकर उठाओ” – इससे अस्पताल की हर संभव कोशिश करने की मंशा जाहिर होती है। माना जा रहा है कि यह वीडियो 28 अप्रैल 2021 को रिकॉर्ड किया गया था।

प्रशासन की जाँच रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

बयानों का गलत मतलब निकाला गया: अस्पताल का मालिक

8 जून 2021 को आगरा के जिला मजिस्ट्रेट प्रभु एन सिंह ने कहा था कि जिस दिन कथित वीडियो रिकॉर्ड किया गया था, उस दिन ऑक्सीजन की कमी के कारण कोई मौत नहीं हुई थी। अस्पताल के मालिक अरिंजय जैन ने भी दावा किया था कि उनके बयानों का गलत अर्थ निकाला गया।

जैन ने कहा था, “मेरे वीडियो में मैंने कहीं भी मरीजों की मौत का जिक्र नहीं किया। हाँ, यह पता लगाने के लिए एक मॉक ड्रिल की गई थी कि कितने मरीज गंभीर हैं और अगर ऑक्सीजन खत्म हो जाए तो उन्हें बचाया नहीं जा सकता। कोई मरीज नहीं मरा। मैं एक डॉक्टर हूँ और कोई डॉक्टर ऐसी बात नहीं करेगा। मैसेज को मैनिपुलेट किया गया।” जैन ने वायरल मॉक ड्रिल वीडियो के आधार पर 22 कोविड मरीजों के मरने के दावे को ख़ारिज किया था।

Video: उत्तराखंड में नदियाँ उफान पर, अलकनंदा में डूबे गढ़वाल के निचले इलाके; अलर्ट जारी

उत्तराखंड के कई हिस्‍सों में बीते कुछ दिनों से जबरदस्‍त बारिश हो रही है। भारी वर्षा के कारण नदियों का जलस्‍तर बढ़ गया है, जगह-जगह भूस्‍खलन का खतरा भी पैदा हो गया है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, शनिवार (19 जून 2021) को अलकनंदा नदी का प्रवाह बढ़ जाने से निचले इलाके चपेट में आ गए हैं और बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। भारी बारिश की वजह से उत्‍तराखंड के पौड़ी-गढ़वाल में कई इलाके पानी में डूब गए हैं।

वीडियो में आप देख सकते है कि श्रीनगर में निचले इलाकों में जगह-जगह पानी भरा हुआ है। बताया जा रहा है कि ऋषिकेश में भी गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुँच जाने से हड़कंप मच गया है। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने यहाँ अलर्ट जारी कर दिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले अलकनंदा के जलस्तर को लेकर स्टेट कंट्रोल रूम द्वारा अलर्ट जारी किया गया था। ऋषिकेश के साथ ही पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल और चमोली में नदियों के रौद्र रूप धारण करने की खबरें आ रही हैं। वहीं, उत्‍तराखंड में भारी वर्षा के बीच टिहरी गढ़वाल में ब्यासी के पास जबरदस्‍त भूस्‍खलन हुआ है, जिसके कारण राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्‍या 58 बंद हो गया है। यह राजमार्ग ऋषिकेश-श्रीनगर हाईवे के तौर पर मशहूर है। वीडियो में भूस्‍खलन के बाद भारी मात्रा में मलबे को नीचे सड़क पर गिरते देखा जा सकता है।

इसके अलावा बागेश्‍वर जिले के कपकोट क्षेत्र में एक जेसीबी भूस्‍खलन की चपेट में आ गया। बताया जा रहा है कि पिंडरघाटी के बधियाकोट-किलपारा मोटर मार्ग में सड़क निर्माण कार्य चल रहा था, लेकिन तभी वहाँ जमीन धँसने और भूस्‍खलन के कारण जेसीबी गहरी खाई में गिर गई। इस हादसे में जेसीबी चालक की जान चली गई।

बता दें कि राज्य के पहाड़ी जिलों में कई जगह भू-कटाव और भूस्खलन की खबरें आ रही हैं। ऐसे में लगातार यात्रियों और लोगों से बेहद सतर्क रहने की अपील की जा रही है।

नंदीग्राम चुनाव: बंगाल फतह के बाद भी ममता का परिणाम में गड़बड़ी का आरोप, जज को बताया ‘भाजपा सदस्य’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल को एक पत्र लिखकर अपनी याचिका जस्टिस कौशिक चंदा के अलावा किसी दूसरी पीठ को सौंपने का अनुरोध किया है। इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह गुरुवार (24 जून 2021) को होगी।

दरअसल, ममता बनर्जी ने नंदीग्राम चुनाव परिणाम में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। टीएमसी सुप्रीमो ने शुक्रवार (18 जून 2021) को याचिका पर सुनवाई करने वाले जज पर सवाल खड़े करते हुए उन्हें भाजपा का सदस्य बताया था।

मुख्यमंत्री के वकील संजय बसु ने दावा किया, “मेरी मुवक्किल को न्यायिक प्रणाली और न्यायालय पर बहुत विश्वास है। हालाँकि, माननीय न्यायाधीश की ओर से पूर्वाग्रह की आशंका है।” पत्र में उन्होंने आरोप लगाया, ”याचिका पर सुनवाई कर रहे जस्टिस कौशिक चंदा भाजपा के सक्रिय सदस्य रह चुके हैं। ऐसे में चुनाव याचिका पर फैसले के राजनीतिक निहितार्थ होंगे।” बसु ने अदालत से नंदीग्राम चुनाव मामले को चुनौती देने वाली ममता की याचिका को दूसरी पीठ को सौंपे जाने का अनुरोध किया है।

उन्होंने आगे कहा, ”यदि न्यायाधीश के समक्ष चुनाव याचिका पर सुनवाई होती है, तो मेरे मुवक्किल के मन में प्रतिवादी के पक्ष में और उसके खिलाफ न्यायाधीश की ओर से पूर्वाग्रह की संभावना है।”

पत्र में कहा गया कि जस्टिस कौशिक चंदा की कलकत्ता उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में पुष्टि की जानी अभी बाकी है। ममता ने माननीय न्यायाधीश के नाम की कलकत्ता के माननीय उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में मंजूरी देने पर भी आपत्ति जताई थी। बसु का कहना है कि मेरे मुवक्किल को लगता है कि न्यायाधीश को इन आपत्तियों के बारे में पता है और इसलिए इस तरह न्यायाधीश की ओर से पूर्वाग्रह की आशंका है।

संजय बसु ने कहा कि न्यायपालिका में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए इस मामले को किसी दूसरी पीठ को सौंप दिया जाना चाहिए। ताकि ऐसा न लगे कि जस्टिस कौशिक चंदा अपने ही मामले में न्यायाधीश के रूप में फैसला सुनाएँगे।

गौरतलब है कि शुक्रवार (18 जून) को जस्टिस कौशिक चंदा ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 24 जून को तय की है। उन्होंने इस दौरान मुख्यमंत्री को उपस्थित रहने का निर्देश दिया। साथ ही कोर्ट ने यह भी जानकारी माँगी थी कि क्या ममता बनर्जी द्वारा दायर याचिका जनप्रतिनिधित्व कानून (Representation of People Act) के अनुरूप है। सुनवाई टलने के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) ने जज के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया। टीएमसी ने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर जज कौशिक चंदा की दो तस्वीरें शेयर कीं। इसमें जस्टिस कौशिक चंदा भाजपा के दिलीप घोष के साथ एक मंच साझा करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

वहीं, टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने ट्वीट करके एक तस्वीर शेयर की। इस तस्वीर को शेयर करते हुए डेरेक ने लिखा, ”वह व्यक्ति कौन है जो दोनों तस्वीरों में है? क्या वह कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति कौशिक चंदा हैं? क्या उन्हें नंदीग्राम चुनाव मामले की सुनवाई के लिए नियुक्त किया गया है? क्या न्यायपालिका और नीचे गिर सकती है?”

एक और ट्वीट में टीएमसी सांसद ब्रायन ने वकील रहते हुए कौशिक चंदा के कलकत्ता हाईकोर्ट में बीजेपी की ओर से पेश होने के दस्तावेज पेश किए हैं। डेरेक ने लिखा, ”ये वह मामले हैं जहाँ न्यायमूर्ति कौशिक चंदा कलकत्ता हाईकोर्ट के समक्ष भारतीय जनता पार्टी के लिए पेश हुए हैं और अब उन्हें नंदीग्राम चुनाव मामले की सुनवाई का जिम्मा सौंपा गया है।”

वहीं, टीएमसी प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने कहा, ”हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। हम न्यायमूर्ति चंदा की योग्यता पर सवाल नहीं उठाते।” टीएमसी नेता ने कहा, ”न्यायपालिका के प्रति सम्मान के साथ न्यायमूर्ति कौशिक चंदा को नंदीग्राम केस की सुनवाई का जिम्मा सौंपा गया है।”

दिलचस्प बात यह है कि टीएमसी को यह समझ नहीं आ रहा है कि जज बनने से पहले कौशिक चंदा कलकत्ता हाईकोर्ट में वरिष्ठ वकील थे। अगर उन्होंने किसी मामले में बीजेपी का प्रतिनिधित्व किया है, तो बतौर वकील उन्होंने ऐसा किया।

पश्चिम बंगाल में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व सांसद दिलीप घोष ने कहा, ”कलकत्ता हाईकोर्ट में एक वरिष्ठ वकील होने के नाते उन्हें आमंत्रित किया गया था। उन्होंने हमारे कानूनी प्रकोष्ठ (Cell) के कार्यक्रमों में भाग लिया। मुझे तारीख के बारे में अच्छे से याद नहीं है, लेकिन यह 2015 के आसपास की बात है। इसमें गलत क्या है?” उन्होंने कहा कि इसके बाद वह एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बने। एक वरिष्ठ वकील होने के नाते हो सकता है कि उन्होंने कई मामलों में हमारी पार्टी का प्रतिनिधित्व किया हो। उसमें गलत क्या है? ऐसे कई वकील हैं, जो राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों में शामिल होते हैं और केस लड़ते हैं। उन्होंने आगे कहा कि एक न्यायाधीश के रूप में उनकी ‘तटस्थता’ पर सवाल उठाना गलत था।

घोष ने जोर देकर कहा, “क्या इसका मतलब यह है कि एक वरिष्ठ वकील कभी न्यायाधीश नहीं हो सकता। राज्य विधानसभा में स्पीकर तृणमूल कॉन्ग्रेस से हैं, लेकिन हम उनकी तटस्थता के लिए उनका सम्मान करते हैं।” भाजपा के बंगाल में कानूनी सेल के अध्यक्ष पार्थ घोष ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा है कि ट्वीट की गई तस्वीर असली है या नहीं। उन्होंने तब तक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, जब तक कि तस्वीरें प्रमाणित नहीं हो जातीं। कानूनी सेल की सदस्य प्रियंका टिबरेवाल ने कहा कि न्यायमूर्ति कौशिक चंदा कभी पार्टी में नहीं थे और न ही भाजपा के भीतर किसी पद पर रहे।

इस मामले पर वकील और कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ सांसद विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा, “जब कोई न्यायाधीश बनता है, तो उसे संविधान के तहत शपथ लेनी होती है। मुद्दा यह नहीं है कि उन्होंने एक वकील के रूप में किन मामलों में लड़ाई लड़ी, बल्कि एक न्यायाधीश के रूप में उनकी भूमिका क्या थी। किसी को भी जज की निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठाना चाहिए।”

बता दें कि जस्टिस चंदा ने 1997 में लॉ कॉलेज से स्नातक किया। 18 दिसंबर 1998 को एक वकील के रूप में कार्यभार संभाला। उन्हें 10 जून 2014 को ‘वरिष्ठ वकील’ बनाया गया था। अप्रैल 2015 और सितंबर 2019 के बीच जस्टिस सतीश चंदा ने भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के रूप में कार्य किया। इसके बाद कौशिक चंदा को 1 अक्टूबर 2019 को एक एडिशनल जज के रूप में कलकत्ता हाईकोर्ट में पदोन्नत किया गया था।