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दो समुद्री तटों और चार पहाड़ियों के बीच स्थित रायगढ़ का हरिहरेश्वर मंदिर, जहाँ विराजमान हैं पेशवाओं के कुलदेवता

मराठा योद्धाओं की शौर्यगाथा और छत्रपति शिवाजी महाराज के हिंदवी स्वराज के महान स्वप्न का साक्षी रहा है महाराष्ट्र। राज्य को प्रकृति का विशेष स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त है क्योंकि यहाँ प्रकृति की गोद में स्थित हैं कई ऐसे दिव्य और आध्यात्मिक स्थान, जो सैकड़ों वर्ष पुराने हैं और जिनका हिंदुओं में विशेष महत्व है। ऐसा ही एक मंदिर महाराष्ट्र के रायगढ़ में स्थित है, जो हरिहरेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है।

हरिहरेश्वर मंदिर की स्थिति  

महाबलेश्वर से निकलने वाली सावित्री नदी हरिहरेश्वर के निकट अरब सागर से मिलती है। नदी रत्नागिरी और रायगढ़ जिलों की सीमा है। चार पहाड़ियों हरिहरेश्वर, हर्षिनाचल, ब्रह्माद्रि और पुष्पाद्रि के बीच स्थित है हरिहरेश्वर कस्बा, जिसके उत्तर में स्थित है हरिहरेश्वर मंदिर। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है लेकिन मंदिर में ब्रह्मा जी, भगवान विष्णु और माता पार्वती की प्रतिमाएँ भी स्थापित हैं। हरिहरेश्वर में दो समुद्री तट हैं, एक बालू का और एक चट्टान का। यह दोनों तट मंदिर के उत्तर और दक्षिण में स्थित हैं।

फोटो साभार : महाराष्ट्र पर्यटन

मुख्य मंदिर के अलावा हरिहरेश्वर में कालभैरव और माता योगेश्वरी के मंदिर भी विद्यमान हैं। यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि अक्सर कालभैरव की प्रतिमा दक्षिण की ओर मुख किए हुए मिलती है लेकिन हरिहरेश्वर में स्थित मंदिर में कालभैरव की प्रतिमा उत्तरमुखी है। मंदिर की मान्यता के अनुसार पहले कालभैरव के ही दर्शन करने होते हैं उसके बाद हरिहरेश्वर भगवान के। इस स्थान को भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त है, इसलिए इस स्थान को ‘देवघर’ भी कहा जाता है।   

मंदिर का निर्माण

ऐसा कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी में हुआ है। पेशवाओं द्वारा मंदिर के कई हिस्सों के निर्माण और जीर्णोद्धार की जानकारी प्राप्त होती है। मंदिर के देवता पेशवाओं के कुलदेवता थे, इसलिए उन्होंने इस मंदिर के रखरखाव और निर्माण के लिए बहुत से योगदान दिए। आग लगने के कारण मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद 1723 में बाजीराव पेशवा प्रथम ने मंदिर का पूरी तरह से निर्माण कराया।

महाराष्ट्र के रायगढ़ स्थित इस मंदिर में भगवान के आशीर्वाद के साथ प्रकृति का सुरम्य वातावरण भी मिलता है। हरिहरेश्वर में मंदिर के अलावा जंगल, समुद्र के तट, पहाड़ों की श्रृंखला और सावित्री नदी की सुरम्यता भी स्थित है। दक्षिण की काशी कहा जाने वाला यह हरिहरेश्वर मंदिर अपनी इसी विशेषता के कारण न केवल हिन्दू श्रद्धालुओं बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए भी एक पसंदीदा स्थान है।

कैसे पहुँचे?

हरिहरेश्वर के सबसे निकट स्थित हवाईअड्डे हैं पुणे और मुंबई जो क्रमशः 170 किमी और 200 किमी की दूरी पर स्थित हैं। माणगाँव, हरिहरेश्वर के सबसे निकट स्थित रेलवे स्टेशन है, जो लगभग 64 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मुंबई से मांडोवी एक्सप्रेस, मत्स्यगंधा एक्सप्रेस और कोंकण कन्या एक्सप्रेस माणगाँव तक जाती हैं। मुंबई, पुणे और पनवेल से हरिहरेश्वर पहुँचने के लिए सरकार की बस सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा इन स्थानों से हरिहरेश्वर पहुँचने के लिए टैक्सी आदि की सहायता भी ली जा सकती है।

मोदी कैबिनेट में वरुण गाँधी की एंट्री के आसार, राजनाथ बोले- UP में 2022 का चुनाव योगी के नाम

मोदी सरकार में जल्द फेरबदल की अटकलें कई दिनों से लग रही है। मीडिया में कई नामों पर चर्चा हो रही है जिन्हें केंद्रीय कैबिनेट में जगह मिल सकती है। टाइम्स नाउ ने सूत्रों के हवाले से ऐसे 6 नाम बताए हैं। इनमें सबसे चौंकाने वाला नाम वरुण गाँधी का है। दूसरी ओर आज तक से बातचीत में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में 2022 का विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम पर ही लड़ा जाएगा।

टाइम्स नाऊ की मानें तो उन्हें उच्च सरकारी सूत्रों से 6 नाम मिले हैं जिन्हें मोदी कैबिनेट में जगह मिलने की उम्‍मीद है। ये नाम हैं: ज्योतिरादित्य सिंधिया, वरुण गाँधी, भूपेन्द्र यादव, दिनेश त्रिवेदी, अश्विनी वैष्णव, जामग्याल सेरिंग नामग्याल।

संभावित चेहरों के तौर पर जो नाम बताए गए हैं उनमें से ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिनेश त्रिवेदी मनमोहन सरकार में भी मंत्री रहे हैं। सिंधिया कॉन्ग्रेस छोड़कर तो त्रिवेदी तृणमूल कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे बीजेपी में शामिल हुए हैं।

भूपेन्द्र यादव भाजपा के उन प्रमुख वरिष्ठ रणनीतिकारों में से एक हैं जिनके कारण पार्टी बिहार और हैदराबाद में बेहतर प्रदर्शन कर पाई। वरुण गाँधी पीलीभीत से सांसद हैं और उनकी छवि कट्टर हिंदुत्ववादी नेता की रही है।

जामग्याल सेरिंग नामग्याल लद्दाख से भाजपा सांसद हैं। लद्दाख हिल काउंसिल चुनाव में बीजेपी का दबदबा बनाने में उनका अहम रोल रहा है। इनके अलावा अश्विनी वैष्णव भी कैबिनेट के संभावितों में से एक हैं। पूर्व आईएएस अधिकारी वैष्णव ओडिशा से बीजू जनता दल की सहायता से राज्य सभा सांसद चुने गए हैं।

दूसरी तरफ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट तौर पर यह कहा है कि भाजपा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ही लड़ेगी। सीएम योगी की तारीफ करते हुए पूर्व भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना संक्रमित होने के बावजूद भी वह आइसोलेशन से काम करते रहे। उनके परिश्रम पर कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। यूपी में सीएम का चेहरा वही होंगे।

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से मीडिया के एक खास वर्ग की तरफ ये यह प्रोपेगेंडा चलाया जा रहा था कि बीजेपी आलाकमान यूपी के नेतृत्व में बदलाव कर सकता है। लेकिन राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि योगी ही यूपी में मुख्यमंत्री पद के इकलौते दावेदार हैं।

70 साल का मौलाना, नाम: मुफ्ती अजीजुर रहमान; मदरसे के बच्चे से सेक्स: Video वायरल होने पर केस

पाकिस्तान के लाहौर में एक 70 वर्षीय मौलाना का सेक्स वीडियो वायरल हुआ है। वीडियो में मौलाना मदरसे के एक छात्र के साथ यौन संबंध बनाते दिख रहा है। वीडियो को संज्ञान में लेते हुए लाहौर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। मामले में पीड़ित छात्र का कहना है कि मदरसे ने उसके परीक्षा देने पर रोक लगा दी थी। ऐसे में उसने मुफ्ती से मदद माँगी तो उसने बदले में सेक्स कर खुश करने को कहा। लेकिन लगातार उसके साथ संबंध बनाने के बावजूद मौलवी ने कुछ किया, बल्कि और सेक्स की डिमांड करता रहा।

छात्र का यौन शोषण करने वाले मुफ्ती की पहचान अजीजुर रहमान के तौर पर हुई है। वह लाहौर में जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम का उपाध्यक्ष था। उसके विरुद्ध 17 जून को नॉर्थ कैंट थाने में पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध) और धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, पीड़ित छात्र ने बताया कि उसे 2013 में लाहौर के जामिया मंजूरुल इस्लामिया में प्रवेश मिला था। इसके बाद उसने यह भी बताया कि परीक्षा के दौरान मुफ्ती रहमान ने उस पर और एक अन्य छात्र पर चीटिंग का आरोप लगाया था। इस आरोप के बाद पीड़ित को तीन साल के लिए वफाकुल मदारिस में परीक्षा देने पर रोक लगा दी गई।

छात्र बताता है,

“मदरसे के इस फैसले के बाद मैंने मुफ्ती अजीजुर रहमान से रहम की गुहार लगाई। पहले तो वह अपने फैसले पर टिके रहे। बाद में उन्होंने मुझसे कहा कि अगर मैं उनके साथ सेक्स कर उन्हें खुश करता हूँ तो वह कुछ सोच सकते हैं। उनके इस प्रस्ताव के बाद मेरे पास अपना यौन उत्पीड़न करवाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। मुफ्ती रहमान ने मेरे से वादा किया था कि सेक्स के बाद मेरे ऊपर लगे प्रतिबंधों को हटा दिया जाएगा। इतना ही नहीं, मुफ्ती ने यह भी कहा था कि वह मुझे परीक्षा में पास भी कर देगा। इस दौरान तीन साल तक हर शुक्रवार को मेरे साथ सेक्स करने के बावजूद मुफ्ती ने कुछ नहीं किया। उसने और सेक्स की डिमांड करते हुए मुझे ब्लैकमेल तक करना शुरू कर दिया।”

बता दें कि सोशल मीडिया पर मुफ्ती का ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग वायरल होने के बाद जामिया मंजूरुल इस्लामिया के प्रशासन ने मुफ्ती रहमान को पद से हटा दिया। वहीं पाकिस्तान के कई अन्य मौलवी इस घटना पर नाराजगी दिखा रहे हैं। पीड़ित छात्र का कहना है कि अब उसे मुफ्ती रहमान और उनके बेटों से धमकी मिल रही है। वह कहता है कि अगर उसे इंसाफ नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेगा। 

पीड़ित ने यह भी बताया कि उसने इस संबंध में मदरसा प्रशासन से शिकायत की थी, लेकिन उन्होंने उस पर विश्वास नहीं किया। अजीजुर रहमान मदरसे का बड़ा और पाक समझा जाने वाला मौलवी था। इस कारण प्रशासन ने छात्र पर ही झूठा बयान देने का आरोप लगा। जब कहीं से छात्र की कोई सुनवाई नहीं हुई तो उसने मुफ्ती का वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे वफाकुल मदारिस अल अरब नाजिम को दिखाया। इसके बाद मुफ्ती रहमान ने उसे धमकी देना शुरू कर दिया।

वामपंथी नेता, अभिनेता, पुलिस… कुल 14: साउथ की हिरोइन ने खोल दिए यौन शोषण करने वालों के नाम

मलयालम फिल्मों की एक्ट्रेस रेवती संपत (Revathy Sampath) ने एक फेसबुक पोस्ट में बड़ा खुलासा किया है। रेवती ने पोस्ट में 14 लोगों की लिस्ट जारी करके कहा कि इन सबने उनका यौन शोषण किया। सूची में एक्टर, डायरेक्टर, फोटोग्राफर डॉक्टर, नेता और सब इंस्पेक्टर सहित कई लोगों के नाम शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक्ट्रेस ने पोस्ट शेयर करते हुए लिखा है, “मैं यहाँ प्रोफेशनल/व्यक्तिगत/ साइबर स्पेस के जरिए दुर्व्यवहार करने वाले उन अपराधियों के नामों का खुलासा कर रही हूँ, जिन्होंने अब तक मेरा शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से शोषण किया है।”

रिपब्लिक वर्ल्ड के मुताबिक, रेवती ने इन 14 लोगों के खिलाफ यौन शोषण के आरोप लगाए हैं:

  1. राजेश टचरिवर (निर्देशक)
  2. सिद्दीकी (एक्टर)
  3. आशिक माही (फॉटोग्राफर)
  4. शिजू ए आर (एक्टर)
  5. अभिल देव (केरल फैशन लीग, संस्थापक)
  6. अजय प्रभाकर (डॉक्टर)
  7. एम यसएसएस।
  8. सौरभ कृष्णन (साइबर बुली)
  9. नंदू अशोकन ( डीवाईएफआई यूनिट कमेटी सदस्य, नेदुमकाड)
  10. मैक्सवेल जोस (शॉर्ट फिल्म के निर्देशक)
  11. शानूब करुवथ और चाकोस केक (विज्ञापन निदेशक)
  12. राकेंट पाई (कास्टिंग डायरेक्टर)
  13. सरुन लियो (ईएसएएफ बैंक एजेंट, वलियाथुरा)
  14. सब इंस्पेक्टर बीनू (पुनथुरा पुलिस स्टेशन, त्रिवेंद्रम)

इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मामले में कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और सच सामने आना चाहिए। कुछ इस पोस्ट के लिए रेवती की हिम्मत को सलाम करके समर्थन देने की बात कर रहे हैं। वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो इसे रेवती का पब्लिक स्टंट बता रहे हैं।

बता दें कि रेवती 27 वर्षीय मलयालम एक्ट्रेस हैं। उन्होंने साल 2019 में पटनागढ़ से अपने फिल्मी करियार की शुरुआत की थी। एक एक्ट्रेस होने के साथ उनकी पहचान एक एक्टिविस्ट और मनोवैज्ञानिक के तौर पर भी है। उन्होंने कोयंबटूर के आर्ट्स एंड साइंस केएसजी कॉलेज से साइकोलॉजी में डिग्री ली थी। रेवती वफ्त जैसी शॉर्ट फिल्मों में नजर आ चुकी हैं।

ताबीज की लड़ाई को दिया जय श्रीराम का रंग: गाजियाबाद केस की पूरी डिटेल, जुबैर से लेकर बौना सद्दाम तक की बात

गाजियाबाद में मुस्लिम बुजुर्ग के साथ हुई मारपीट की घटना में अब तक कई दावे हो चुके हैं। कुछ का कहना है कि उनका अपहरण करके उनसे ‘जय श्रीराम’ बुलवाया गया और कुछ का कहना है कि उन्हें ‘वंदे मातरम’ बोलने को भी मजबूर किया गया।  मामले में प्रोपेगेंडा फैलाने वालों ने तरह-तरह के एंगल दिए हैं। बस छिपाया गया है तो पुलिस की शुरुआती पड़ताल को और आरोपितों के नाम को। 

अब इस पूरे केस का घटनाक्रम क्या है और कैसे वामपंथी मीडिया ने इसे रिपोर्ट किया, आइए शुरू से समझें …

अब्दुल के ताबीज का प्रतिकूल प्रभाव देखकर हुई मारपीट

5 जून 2021 को गाजियाबाद में अब्दुल समद को परवेश गुर्जर, आरिफ, आदिल, मुशाहिद और कल्लू नाम के लड़कों ने बुरी तरह पीटा। आरोपितों का कहना था कि जो ताबीज अब्दुल ने उन्हें दी उसका उनके परिवार पर बुरा असर पड़ा जिसके बाद उन्होंने चोरी-छिपे अब्दुल से बदला लेने की योजना बनाई।

पुलिस में समद के बेटे ने की शिकायत, दिया विरोधाभासी बयान

द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, समद के बड़े बेटे ने गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर पुलिस थाने पर सपा नेता उमेद पहलवान इदरिसी की मदद से मामले में शिकायत करवाई। शिकायत में उसने कहा कि उसके घर में ताबीज बनाने का काम कोई नहीं करता जबकि घटना की वीडियो में दिखा कि आरोपित और अब्दुल दोनों ही इस बात को कह रहे हैं कि अब्दुल ने ताबीज बनाई थी।

शिकायत में अब्दुल के बेटे बब्बू सैफी ने कहा कि उनके अब्बा को कुछ अंजान लोगों के समूह ने उठाया, वो भी तब जब वह अपनी दरगाह पर थे। इसके बाद उन्हें अंजान जगह पर ले जाया गया और उनकी दाढ़ी काट दी गई। साथ ही मारते हुए उनके जबरन जय श्रीराम के नारे लगवाए गए और उन्हें पेशाब पीने को दिया गया।

वायर की रिपोर्ट में इस्तेमाल की गई शिकायत में पुलिस की कोई मुहर नजर नहीं आती। इसलिए ये कहना तो मुश्किल है कि इसी शिकायत को पुलिस में दर्ज किया गया।

7 जून को FIR दर्ज हुई

7 जून को लोनी बॉर्डर के पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज हुई और पुलिस ने अपनी पड़ताल शुरू कर दी। मामले में गाजियाबाद पुलिस ने बताया कि वह 5 जून को हुई इस कथित घटना में पहले ही प्राथमिकी दर्ज कर चुके है। घटना के दो दिन बाद सात जून को पुलिस को इसकी सूचना दी गई। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमित पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर के निवासी अब्दुल समद ने अपनी शिकायत में इस तरह के आरोप नहीं लगाए हैं जैसे कि वीडियो के आधार पर सोशल मीडिया में दावा किया जा रहा। उन्होंने बताया कि इस मामले में पुलिस परवेश गुर्जर नाम के एक व्यक्ति को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, जिसने आलिम के रूप में काम करने वाले समद से ताबीज लिया था।

ऑल्ट न्यूज के मोहम्मद जुबैर ने मामले को दिया साम्प्रदायिक एंगल

14 जून को ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मज जुबैर ने पीड़ित बुजुर्ग का वीडियो ट्वीट किया (जो वह अब डिलीट कर चुका है)। इसके साथ उसने लिखा, “एक बुजुर्ग आदमी, सूफी अब्दुल समद सैफी पर गाजियाबाद के लोनी में 5 गुंडों ने हमला किया। उन्हें बंदूक की नोंक पर मारा गया, प्रताड़ित किया गया और जबरदस्ती उनकी दाढ़ी काट दी गई।”

इसके बाद पीड़ित का पक्ष रखते हुए जुबैर ने एक और वीडियो डाली और साथ ही पीड़ित पक्ष के नाम पर ये लिखा, “ये अब्दुल समद सैफी की घटना को बयान करते हुए पूरी वीडियो है। उनका दावा है कि उनसे जबरदस्ती जय श्रीराम का नारा बुलवाया गया।”

गौर करने वाली बात ये है कि इन वीडियोज को अपलोड और वायरल वामपंथी धड़े ने ही किया।

द क्विंट में तो ऐसे हिंदूफोबिक कार्टून भी छप गए जिन्हें बाद में उन्हें हटाना पड़ा।

गाजियाबाद पुलिस ने जारी किया बयान

14 जून को ही पुलिस ने पूरे मामले के संबंध में अपनी जाँच के बाद पक्ष रखा। बताया गया ये घटना जून 5, 2021 की है, जिसके बारे में पुलिस के समक्ष 2 दिन बाद रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने जाँच की तो पाया कि पीड़ित अब्दुल समद बुलंदशहर से लोनी बॉर्डर स्थित बेहटा आया था। वो एक अन्य व्यक्ति के साथ मुख्य आरोपित परवेश गुज्जर के घर बंथना गया था। वहीं पर कल्लू, पोली, आरिफ, आदिल और मुशाहिद आ गए।

वहाँ पर बुजुर्ग के साथ मारपीट शुरू कर दी गई। अब्दुल समद ताबीज बनाने का काम करता है। आरोपितों का कहना है उसके ताबीज से उनके परिवार पर बुरा असर पड़ा। अब्दुल समद गाँव में कई लोगों को ताबीज दे चुका था। आरोपित उसे पहले से ही जानते थे। पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपित पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। कल्लू और आदिल भी गिरफ्तार कर लिए गए। अन्य अभियुक्तों की जल्द गिरफ़्तारी का आश्वासन भी पुलिस ने दिया।

यूपी सरकार हुई सक्रिय

मामले में कोई सांप्रदायिक एंगल न होने पर और बार-बार पुलिस द्वारा स्पष्टीकरण देने पर भी मामले में झूठ फैलाया जाता रहा। एक आप नेता ने तो इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने का प्रयास किया और अपील की कि इसे विदेशी मीडिया पर संज्ञान दिलवाया जाए।

इस बीच यूपी सरकार ने झूठ फैलाने वालों पर कार्रवाई करनी शुरू की। जय श्रीराम का एंगल न होने के बावजूद जिन्होंने झूठ फैलाया उनके विरुद्ध मुकदमे दर्ज हुए और ट्विटर पर इस आधार पर केस किया गया कि उन्होंने बिना प्रमाणिकता जाने वीडियो को शेयर होने दिया और उसका मैनिपुलेटेड मीडिया का टैग नहीं लगाया।

जिन प्रोपगेंडाबाजों पर कार्रवाई हुई उनमें राणा अय्यूब, द वायर, सलमान निजामी, मकसूर उस्मानी, समा मोहम्मद और सबा नकवी के नाम शामिल हैं।

जुबैर को हटानी पड़ी वीडियो

एफआईआर के बाद मोहम्मद जुबैर ने 15 जून को उस वीडियो को हटा दिया जिसमें बिन कोई आवाज के दावा हो रहा था कि जय श्रीराम का नारा लगाने के लिए बुजुर्ग को मजबूर किया गया।

वहीं मुकदमे के बाद सबा नकवी और राणा अय्यूब ने भी ऐलान कर दिया कि मामले में कुछ भी बोलने से पहले पुलिस जाँच के पूरे होने का इंतजार करेंगी।

गाजियाबाद पुलिस ने 16 जून को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मामले में झूठी खबर फैलाने वालों पर हुई एफआईआर के बारे में बताया। इनमें ट्विटर, द वायर और 7 अलग-अलग लोगों के नाम थे।

पुलिस ने नैरेटिव गढ़ने वालों को चेताया

एसएसपी अमित पाठक ने चेतावनी दी, “हम अभी भी सतर्क हैं और अगर कोई भी नैरेटिव को आगे बढ़ाता हुआ पाया जाता है और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने के लिए जानबूझकर घृणित सामग्री प्रकाशित करता है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बौना सद्दाम ने खोले राज

मामले में लगातार जाँच आगे बढ़ रही है। एक बौना सद्दाम नाम के शख्स ने बताया कि उसके जीजा इंतज़ार ने अब्दुल समद को परवेश गुज्जर से मिलवाया था। इंतजार, अब्दुल समद का एजेंट के रूप में काम करता था। अपने बयान में सद्दाम ने बताया है कि अब्दुल समद के ताबीज़ से उसके बेटे पर भी बुरा असर हुआ था। उसके बेटे की भी तबीयत खराब हुई थी। अब्दुल समद तीन बार परवेश गुज्जर से मिल चुका था, जबकि अपनी शिकायत में उसने बताया था कि उसे ऑटो से अज्ञात लोग पकड़ कर ले गए थे, जिसके बाद मारपीट की गई थी। सद्दाम ने बताया कि उस वक़्त वो भी वहाँ मौजूद था।

सपा नेता के विरुद्ध केस दर्ज

इस केस में ‘जय श्री राम’ को बदनाम करने की साजिश रचने वाले स्थानीय सपा नेता उम्मेद इदरिश पहलवान के खिलाफ FIR दर्ज कर उसकी तलाश शुरू हुई। FIR के अनुसार, उसने ही सबसे पहले बुजुर्ग के साथ अनावश्यक वीडियो बनाया और इसे वायरल करने के लिए इसमें धार्मिक वैमनस्यता फैलाने वाली बातें कही। आरोप है कि घटना की सत्यता जाँचे बिना ही वीडियो में धार्मिक आधार पर बातें की गईं।

प्रतीक सिन्हा का रोना

बता दें कि गाजियाबाद घटना का ये पूरा घटनाक्रम है जो अब तक यही दर्शा रहा है कि जय श्रीराम वाला एंगल मामले में जबरदस्ती घुसाया गया और इसे फैलाने का काम लेफ्ट इकोसिस्टम ने सक्रियता से किया। हालाँकि, मामले में जाँच के बाद हकीकत सामने आई तो गलती मानने की बजाया पीड़ित का पक्ष दिखाकर इसे फैलाया।

ऐसे में पुलिस ने कार्रवाई कि तो ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक प्रतीक सिन्हा अपने साथी के लिए बोल पड़े कि ये जाहिर है कि मोहम्मद जुबैर को केवल पीड़ित का पक्ष रखने पर निशाना बनाया जा रहा है। इसलिए ऑल्ट न्यूज की टीम जुबैर के साथ खड़ी है।

दिलचस्प बात ये है कि करीब एक साल पहले ऐसे ही एक मामले को लेकर ऑल्ट न्यूज खेल का अलग नियम चाहता था। यह मामला बिहार के गोपालगंज से जुड़ा था। रोहित जायसवाल नाम के एक बच्चे की मौत के मामले में उसके पिता का दावा था कि उनके बेटे की मस्जिद में बलि दी गई और पुलिस इस मामले में कार्रवाई नहीं कर रही। ऑपइंडिया ने उस समय पीड़ित पिता के दावे को प्रकाशित किया था। साथ ही लगातार इस मामले की रिपोर्टिंग करते हुए हमने पुलिस, जॉंच और बाद में पिता के बयान बदलने को लेकर भी रिर्पोटें की थी। उस समय यही इकोसिस्टम अलग सुर में बात कर रहा था।

‘बॉयो वेपन’ वाली आयशा सुल्ताना को पुलिस के पास हाजिर होने के निर्देश, लक्षद्वीप पर कॉन्ग्रेस नेता की याचिका खारिज

केरल हाईकोर्ट ने लक्षद्वीप में सुधारों के विरुद्ध दायर कॉन्ग्रेस नेता केपी नौशाद अली की याचिका खारिज कर दी है। वहीं, लक्षद्वीप की फिल्म निर्माता आयशा सुल्ताना को ‘बॉयो वेपन’ वाली टिप्पणी से जुड़े मामले में गिरफ्तारी से एक सप्ताह की राहत दे दी है। दोनों फैसले गुरुवार (जून 17, 2021) को आए।

कॉन्ग्रेस नेता की याचिका खारिज करते हुए कहा हाईकोर्ट ने कहा कि सुधार के लिए उठाए जाने वाले कदम अभी मसौदा के चरण में हैं। इससे पहले इस मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब माँगा था। जस्टिस एसवी भाटी और जस्टिस मुरली पुरुषोत्तम की बेंच ने कॉन्ग्रेस नेता नौशाद अली की याचिका पर सुनवाई की। बता दें कि इस याचिका में लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन 2021 और द्वीपों में असामाजिक गतिविधि अधिनियम (PASA) पर रोक की माँग की गई थी।

याचिका में कॉन्ग्रेस नेता ने आरोप लगाया था कि PASA प्रशासन को एक साल तक की अवधि के लिए बिना किसी सार्वजनिक खुलासे के किसी को भी हिरासत में रखने का अधिकार देता है।

कॉन्ग्रेस नेता की जनहित याचिका के अलावा लक्षद्वीप में सुधारों का विरोध करने वाली फिल्म निर्माता आयशा सुल्ताना के मामले में भी केरल हाईकोर्ट ने सुनवाई की। उन्होंने एक टीवी शो में कोरोना को केंद्र का बॉयो वेपन बताया था। इसके बाद उनके विरुद्ध राजद्रोह का मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद उन्होंने अंतरिम जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 

उनकी याचिका का विरोध करते हुए प्रशासन ने कहा आयशा सुल्ताना की जमानत याचिका विचार करने योग्‍य नहीं है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद सुल्ताना की अग्रिम जमानत की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। जस्टिस अशोक मेनन की एकल पीठ ने उन्हें एक हफ्ते तक राजद्रोह मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया कि उनको कवरत्ती पुलिस थाने में 20 जून को पूछताछ के हाजिर होना होगा। सुल्ताना ने अपनी याचिका में कहा था कि अगर वह वहाँ गई तो उनके गिरफ्तार होने की आशंका है।

113 एनकाउंटर, शिवसेना के निशान पर विधायकी का चुनाव; अब एंटीलिया केस में प्रदीप शर्मा गिरफ्तार

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने शिवसेना नेता और पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा को मनसुख हिरेन मर्डर केस और मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटक रखे जाने के मामले में गुरुवार (17 जून) को गिरफ्तार किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गुरुवार सुबह मुंबई के उपनगरीय इलाके अंधेरी में शर्मा के निवास पर एनआईए ने छापेमारी की। इसके अलावा शर्मा के एनजीओ पर भी छापेमारी की गई।

कई रिपोर्ट में यह बताया गया है कि शर्मा से इस मामले में एनआईए द्वारा पूछताछ की जाती रही है। इंडिया टुडे द्वारा भी यह रिपोर्ट दी गई थी कि डाटा के तौर पर प्राप्त हुए सबूतों से भी एंटीलिया और मनसुख हिरेन मर्डर केस में प्रदीप शर्मा की संलिप्तता की जानकारी मिली है।

इन मामलों में अब तक पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे, रियाजुद्दीन काजी, सुनील माने, पूर्व पुलिस कॉन्स्टेबल विनायक शिंदे, क्रिकेट सट्टेबाज नरेश गौर, संतोष शेलार और आनंद जाधव की गिरफ्तार हो चुकी है। एनआईए के अनुसार संतोष और आनंद मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक से भरी एसयूवी खड़ी करने के आरोपित हैं। प्रदीप शर्मा को 28 जून तक की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। शर्मा के नाम पर 113 एनकाउंटर दर्ज हैं। वे 2019 में ​शिवसेना के टिकट पर मुंबई की नालासोपारा सीट से विधानसभा चुनाव भी लड़ा था।

मनसुख हिरेन मर्डर केस और एंटीलिया मामला  

25 फरवरी को देश के जाने-माने उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक से लदी एक एसयूवी पार्क की गई थी। सचिन वाजे ने सबसे पहले इस केस का भार अपने ऊपर लिया था और उस जगह पर भी सबसे पहले भी वही पहुँचा था। उसने बताया था कि घटनास्थल पर एक एसयूवी है जिसमें जिलेटिन रॉड और एक धमकी भरा पत्र मिला है। हालाँकि बाद में वह पत्र फर्जी निकला था।

एंटीलिया के बाहर मिली एसयूवी ठाणे के एक व्यापारी मनसुख हिरेन की थी जो रहस्यमयी परिस्थितियों में बाद में मृत मिला था। वाजे और मनसुख हिरेन के बीच संबंध सामने आने पर महाराष्ट्र एटीएस ने केस अपने हाथ में ले लिया था। वाजे को 15 साल निलंबित रहने के बाद अचानक ही मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच में बहाल किया गया था।

बाद में इस मामले को एनआईए को सौंप दिया गया। एनआईए ने वाजे के पूर्व सहयोगी असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर रियाजुद्दीन काजी, पुलिस कॉन्स्टेबल विनायक शिंदे और क्रिकेट सट्टेबाज नरेश गौर को गिरफ्तार किया। जाँच के दौरान वाजे ने महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख पर 2 करोड़ रुपए की माँग करने का आरोप लगाया था। 24 अप्रैल को सीबीआई ने देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार और शक्तियों के गलत इस्तेमाल का मामला दर्ज किया। ईडी ने भी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग ऐक्ट के तहत देशमुख के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

टिकरी बॉर्डर पर शराब पिला जिंदा जलाया, शहीद बताने की साजिश: जातिसूचक शब्दों के साथ धमकी भी

कृषि कानून के विरोध में चल रहे ‘किसान’ आंदोलन के प्रदर्शन स्थल से चौंकाने वाला मामला आया है। खबर है कि टिकरी बॉर्डर के पास एक व्यक्ति को शहीद बताकर जिंदा जला दिया गया और बाद में उसे लेकर जातीय टिप्पणी की गई। अब मृतक के भाई के बयान पर मामला दर्ज हुआ है।

प्रदर्शन के नाम पर हुई ये भयानक घटना बहादुरगढ़ बाईपास पर स्थित गाँव कसार के पास बुधवार (जून 17, 2021) रात 3 बजे की है। मुकेश कसार का ही रहने वाला था और शाम को घूमते हुए प्रदर्शन में शामिल होने आया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुकेश को पहले शराब पिलाई गई। फिर लड़ाई-झगड़ा होने पर उसे शहीद बता कर उस पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी गई।

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स बता रहे हैं कि कसार ब्राह्मणों का गाँव है और मुकेश पर कृष्ण व एक अन्य आरोपित ने आग यह कह कर लगाई कि ब्राह्मण किसान आंदोलन में नहीं आते।

इलाज के दौरान मौत

घटना के बाद मुकेश को फौरन पास के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनका इलाज चला और फिर हालत गंभीर देख उन्हें रेफर कर दिया गया। इसके बाद परिजन उन्हें ब्रह्मशक्ति संजीवनी अस्पताल लेकर गए। लेकिन कुछ घंटों बाद वहाँ उनकी मौत हो गई। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस को दी शिकायत में मुकेश के भाई मदनलाल ने बताया,

“मेरा भाई मुकेश बुधवार शाम लगभग 5 बजे घर से घूमने के लिए निकला था। घूमते-घूमते वह किसान प्रदर्शनकारियों के पास पहुँच गया। मुझे फोन कॉल से पता चला कि भाई पर आंदोलनकारियों ने जान से मारने की नीयत से तेल छिड़क कर आग लगा दी। मैं तुरंत पूर्व सरपंच टोनी को लेकर मौके पर पहुँचा तो मेरा भाई मुकेश गंभीर रूप से झुलसा हुआ था। उसे हम तुरंत सिविल अस्पताल लेकर आए। यहाँ उपचार के दौरान मुकेश ने बताया कि आंदोलन में कृष्ण नामक एक व्यक्ति (सफेद कपड़े पहने हुए था) ने पहले शराब पिलाई और फिर उसे आग लगा दी। इससे वह बुरी तरह झुलस गया।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सफेद कपड़े वाले आरोपित का नाम कृष्ण है, जिसने मुकेश पर तेल डालकर आग लगाई

मुकेश की मृत्यु के बाद पुलिस ने मदनलाल के बयान के आधार पर मुकदमा दर्ज करके कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपित फिलहाल फरार है। पुलिस दावा कर रही है कि उसे जल्द पकड़ा जाएगा। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें आरोपित जातिगत टिप्पणी करता दिख रहा है। मुकेश के भाई का कहना है कि इसी व्यक्ति ने उनके भाई को शराब पिलाई और बाद में तेल छिड़क कर उनको आग के हवाले कर दिया।

मृतक मुकेश के गाँव कसार के लोगों ने एक स्थानीय न्यूज टीम को इस मामले से संबंधित कई जानकारियाँ दीं। उनके अनुसार जले हालात में भी मुकेश ने उसे बचाने आए गाँव वालों को बताया कि किसने उसके साथ ऐसा किया। ‘किसान’ आंदोलन से जुड़ा कृष्ण नामक व्यक्ति (जिसकी फोटो ऊपर है, जो मुकेश को जिंदा जलाने का आरोपित भी है) ने ही जातिसूचक शब्द का भी प्रयोग किया। साथ ही वो यह भी कह रहा था कि इसे शहीद हो जाने दो, इसके परिवार वालों को कुछ (पैसे) मिल जाएगा।

डीएसपी पवन कुमार ने बताया कि इस संबंध में पहले संदीप और कृष्ण नाम के दो आरोपितों के खिलाफ जान से मारने के प्रयास का मामला दर्ज किया गया था। मगर मौत होने के बाद हत्या की धारा भी जोड़ दी गई है।

अस्पताल के बाहर इकट्ठा हुए ग्रामीण

पुलिस मामले की जाँच कर रही है। शव का सिविल अस्पताल में पोस्टमॉर्टम किया जाएगा। मृतक की उम्र 42 साल थी। वह दस साल की एक बेटी के पिता थे। उनके शव को पोस्टमॉर्टम के लिए बहादुरगढ़ के नागरिक अस्पताल में रखा गया है। अस्पताल में काफी संख्या में ग्रामीण जुटे हुए हैं।

‘अब मूत्रालय का भी फीता काट दो’: AAP का ‘स्पीडब्रेकर’ देख नेटिजन्स बोले- नारियल फोड़ने से धँस तो नहीं गया

आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अक्सर किसी न किसी घालमेल के कारण चर्चा में छाए रहते हैं। हालाँकि दावा इनका हर बार एक ही होता है कि दिल्ली में हुए हर विकास के पीछे इनका हाथ है। इनके लिए विकास का अर्थ क्या है? इसका पता AAP नेता शिव चरण गोयल के एक हालिया ट्वीट से चलता है। 

बुधवार (16 जून 2021) को किए अपने ट्वीट में गोयल बता रहे हैं कि उन्होंने स्पीड ब्रेकर का उद्घाटन करवाया है। हालाँकि, स्पीड ब्रेकर कहाँ है ये तस्वीर में नहीं दिख रहा। ऐसे में लोग पूछ रहे हैं कि कहीं नारियल फोड़ने से स्पीड ब्रेकर धँस तो नहीं गया। कुछ को इस बात पर भी हँसी आ रही है कि स्पीड ब्रेकर का भी कोई उद्घाटन करवाता है क्या। अगर हाँ, तो क्या आगे चलकर शौचालय या मूत्रालय का भी उद्घाटन करते हुए फीता काटा जाएगा।

गोयल ने स्पीड ब्रेकर बनने की खुशी में सारा श्रेय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिया। उन्होंने 4 तस्वीरें साझा करते हुए कहा, “माननीय मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल जी के नेतृत्व में कोरोना कॉल में भी जारी है मोती नगर में विकास कार्य। स्पीड और दुर्घटना को रोकने के लिए फन सिनेमा, मोतीनगर रेड लाइट चौराहे पर टेबल टॉप स्पीड ब्रेकर का उद्धघाटन।”

ट्वीट के साथ साझा की गई तस्वीरों में ठीक-ठाक संख्या में लोग बिना कोई सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किए खड़े हैं। वहीं आप नेता सबको माइक लेकर संबोधित कर रहे हैं।

एक स्पीड ब्रेकर के बनने पर ऐसा आयोजन और उसका इस तरह ऐलान देखकर सोशल मीडिया यूजर्स हैरान हैं। वह तंज कसते हुए इसे बड़ा काम बताकर गोयल को आभार दे रहे हैं और पूछ रहे हैं कि अगर इतने बड़े काम का ढंग से मीडिया कवरेज न हुआ हो तो वापस से उद्घाटन करवाकर बीबीसी को बुलवा लो। 

एक यूजर मजाक उड़ाते हुए कहता है कि ये विकास बहुत दुर्लभ है। बहुत कम पार्टी ऐसा विकास कर पाती है। वहीं दूसरा यूजर कहता है कि इतने कठिन समय में इतने मुश्किल भरे कार्य को संपन्न करने के लिए आपियों को देश के सर्वोच्च पुरस्कार मिलने चाहिए।

कुछ यूजर्स केजरीवाल सरकार की विज्ञापन देने की आदत का मजाक बनाकर याद दिलाते हैं कि एक स्पीड ब्रेकर 5000 रुपए का बना होगा, लेकिन आप पार्टी इसके विज्ञापन पर 50 लाख रुपए का बजट देगी।

बता दें कि आप नेताओं का सोशल मीडिया पर इस तरह मजाक उड़ना कोई नई बात नहीं है। पार्टी की पहचान धीरे-धीरे यही बनती जा रही है कि वह काम कम और प्रचार-प्रसार ज्यादा करते हैं।

पिछले दिनों सोशल मीडिया में एक तस्वीर वायरल हुई जिसमें एक ट्रैक्टर पर अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियाँ रखी नजर आ रही थी और उस पर लगे पोस्टर में लिखा था कि इन लकड़ियों का इंतजाम आम आदमी पार्टी ने कोविड से जान गँवाने वालों के अंतिम संस्कार के लिए किया है।

हालाँकि, जब ऑपइंडिया ने पोस्टर पर दिए गए नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की, तो कॉल एक अनजान महिला तक पहुँच गई, जिसे पता तक नहीं था कि हम किस बारे में बात कर रहे हैं। इस बात का भी ट्विटर यूजर ने खूब मजाक उड़ाया था कि पार्टी को विज्ञापन देने की इतनी जल्दी होती है कि गलत नंबर तक छप जाता है।

इसी तरह ऑक्सीजन प्लांट को लेकर भी दिल्ली की आप सरकार ने दिल्ली वासियों को बरगलाया था। पिछले साल दिल्ली सरकार ने दावा कर दिया था कि दिल्ली कोरोना की आने वाली लहर के लिए तैयार है। हालाँकि जब कोरोना की दूसरी लहर शुरू हुई तो केजरीवाल सरकार केंद्र को बताने लगी कि दिल्ली में ऑक्सीजन की भारी किल्लत है। अगर यहाँ ऑक्सीजन का प्लांट नहीं है तो क्या दिल्ली के लोगों को ऑक्सीजन नहीं मिलेगी?

गाजा पर हमला करने वाले इजरायली दस्ते में गुजरात की नित्शा भी: अत्याधुनिक हथियार चलाने में ट्रेंड, कई भाषाओं की जानकार भी

नेफ्ताली बेनेट के इजरायल का प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार मंगलवार (15 जून 2021) को सेना ने गाजा पट्टी पर हवाई हमला किया। इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने इस हमले को अंजाम देने के लिए जो टीम चुनी थी उसमें भारतीय मूल की गुजराती लड़की 20 वर्षीय नित्शा मुलियाशा भी शामिल थीं। वह आईडीएफ की बहादुर रंगरूटों में से एक हैं।

तेल अवीव में बसा नित्शा का परिवार मूल रूप से राजकोट के मनावदार तहसील को कोठाड़ी गाँव का रहने वाला है। इजरायल में कुल 45 गुजराती परिवार हैं, जिनमें से अधिकांश हीरा कंपनियों में काम करते हैं। नित्शा इजरायली सेना में शामिल होने वाली पहली गुजराती लड़की हैं।

अहमदाबाद मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, नित्शा के पिता जीवाभाई मुलियाशा ने बताया है कि इजरायली शिक्षा प्रणाली एक बच्चे के अंदर लीडरशिप की क्वालिटी डेवलप करती है। एक सिक्योरिटी कंपनी चलाने वाले जीवाभाई कहते हैं कि स्कूली शिक्षा बच्चों की योग्यता और स्किल की परीक्षा करने के लिए टेस्ट सीरीज तैयार करती है, जिससे उन्हें एक उपयुक्त पाठ्यक्रम और करियर चुनने में मदद मिलती है।

नित्शा के पिता ने कहा कि इज़रायल में 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों के लिए सैन्य सेवा में भर्ती अनिवार्य है। नित्शा को दो साल पहले आईडीएफ ने चुना था। अपनी ड्यूटी के दौरान उसे सेना के वाहनों के साथ घूमना पड़ता है और लोकेशन बदलते रहना पड़ता है। नित्शा पिछले दो साल में लेबनान, सीरिया, जॉर्डन और मिस्र की सीमा पर तैनात रह चुकी हैं। मौजूदा समय में नित्शा गश डैन में तैनात हैं, क्योंकि इजरायली सेनाएँ पलटवार कर रही हैं।

नित्शा के पिता ने बताया कि सामान्यतया वह दिन में 8 घंटे काम करती हैं, लेकिन इस तरह के समय में 24 घंटे या उससे अधिक भी काम करना पड़ता है। नित्शा के कैरियर की पसंद उनके परिवार को गौरवान्वित करती है, लेकिन वो उसे याद भी बहुत करते हैं। जीवाभाई ने कहा, “नित्शा अपनी सर्विस के लिए पूरी तरह से समर्पित है। अगर वह आसपास होती है तो हम सप्ताह के अंत में उससे मिल भी लेते हैं, लेकिन कभी-कभी तो महीनों बीत जाते हैं।”

अत्याधुनिक हथियारों के इस्तेमाल में ट्रेंड हैं निशा

नित्शा के पिता बताते हैं कि उसने बैटलफील्ड में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश अत्याधुनिक हथियारों और बहुआयामी युद्धाभ्यास की ट्रेनिंग ली है। नित्शा के पिता ने बताया, “एक बार सेना में 2.4 साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद, उन्हें 5 या 10 साल का एक अग्रीमेंट साइन करना होगा, जिसके बाद उन्हें इंजीनियरिंग, मेडिसिन या अपनी मर्जी का कोर्स करने की इजाजत होगी। नित्शा की पढ़ाई का पूरा खर्च इजरायल की सेना उठाएगी।”

कई भाषाएँ जानती हैं नित्शा

इजरायल में रहने वाली नित्शा का कोई भारतीय मित्र नहीं है। उनके पिता ने बताया कि वह अंग्रेजी, हिंदी, गुजराती, हिब्रू और स्पेनिश की अच्छी जानकार हैं। नित्शा ने कई बार भारत की यात्रा की है। भारत के लिए ये उनका प्यार ही है जो हर तीन साल में उन्हें उनके गृहनगर खींच लाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जीवाभाई का परिवार तेल अवीव में पाँच-बेडरूम वाले एक शानदार घर में रहता है। इसमें रॉकेट या अपरंपरागत हथियारों के हमले का सामना करने के लिए ब्लास्ट-प्रूफ खिड़कियों के साथ तहखाने में एक सुरक्षित कमरा भी है। गाजा से लगातार मिसाइल हमले की धमकी के बाद पिछले कुछ महीनों से परिवार सुरक्षित कमरे में ज्यादा समय बिता रहा है।

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और उनकी पत्नी अंजलीबेन ने अपनी पिछली इज़रायल की यात्रा के दौरान जीवाभाई के घर का दौरा किया था और परिवार के साथ दोपहर का भोजन किया था।