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दिग्विजय सिंह को ‘कश्मीरी बहू’ ने फटकारा, कहा- हमें छोड़ना पड़ा था घर, दुश्मन देश के पत्रकार के सामने जलील किया

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को पुनः बहाल करने की ओर इशारा किया था। कॉन्ग्रेस नेता ने एक पाकिस्तानी पत्रकार से कहा था कि उनकी पार्टी की सरकार बनने पर अनुच्छेद-370 पर पुनर्विचार होगा। उनके इस बयान पर उनके छोटे भाई लक्ष्मण सिंह की पत्नी रूबीना ने ही उनकी आलोचना करते हुए कहा है कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है और कश्मीरी पंडितों को लेकर गैर-जरूरी बातें की जा रही हैं।

इससे पहले रूबीना शर्मा सिंह ने ट्वीट कर लिखा था, “कश्मीरी पंडितों और कथित आरक्षण को लेकर दुर्भाग्यपूर्ण बातें की गई हैं। ऊपर से ये बातें सीमा पार के एक पत्रकार को कही गईं। एक ऐसे देश के पत्रकार को, जिसने हमें कभी शांति से नहीं रहने दिया। जैसे कि हमने अब तक कम पीड़ा ही सही है! ये दुःखी करने वाला और गैर-जरूरी है।” अब उन्होंने कहा है कि ये सब क्या हो रहा है, इस बारे में कॉन्ग्रेस को सोचना चाहिए।

‘दैनिक भास्कर’ से इंटरव्यू में रूबीना शर्मा सिंह ने कहा कि वो इसे एक मुद्दा नहीं बनाना चाहती हैं, इसीलिए ट्वीट में अपनी बात रख चुकी हैं। उन्होंने कश्मीरी पंडितों के आरक्षण पर चल रही बातों को तर्कहीन करार देते हुए कहा कि उन्हें कभी आरक्षण मिला ही नहीं। साथ ही उन्होंने पूछा कि उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है कि ये मामला उठाया क्यों जा रहा है। उन्होंने अनुच्छेद-370 हटने से ख़ुशी जताते हुए कहा कि इससे पहले कश्मीरी पंडितों के साथ कैसा व्यवहार होता था, ये किसी से छिपा नहीं है।

रूबीना सिंह ने कहा कि कश्मीरी पंडित पहले खुश नहीं थे और कॉन्ग्रेस या भाजपा ने उनके लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने दिग्विजय सिंह के बयान को लेकर कॉन्ग्रेस से ये साफ़ करने को कहा कि क्या ऐसी कोई योजना है? उन्होंने दिग्विजय सिंह को अपने ‘जेठ’ बताते हुए कहा कि वो इसे परिवारिक मुद्दा नहीं बनाना चाहतीं और न ही उनसे झगड़ा कर रही हैं, लेकिन ऐसे बयानों से कश्मीर की जनता की भावनाएँ आहत हुई हैं।

उन्होंने इस बयान को गलत बताते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह को लोकतंत्र में अपनी बात रखने की पूरी आज़ादी है, लेकिन इससे उन्हें दुःख पहुँचा है। कश्मीरी मूल की रूबीना की माँ भी कश्मीरी ही थीं। उन्होंने बताया, “हमारे दो घर थे वहाँ। कश्मीरी पंडितों का दमन शुरू हुआ तो हमें दोनों घर छोड़ने पड़े। हमें दिल्ली आना पड़ा। सरकार ने हमारी कोई चिंता नहीं की। न ही नुकसान की भरपाई हुई। उस भयानक दौर के बाद जीवन फिर से शुरू करने के लिए कोई सहायता नहीं मिली।”

रूबीना शर्मा सिंह ने बताया कि उनके परिवार के पास तो दिल्ली में घर था, लेकिन जिनका कश्मीर से बाहर घर नहीं था उन्हें दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं। उन्होंने कहा कि उनका ट्वीट गुस्सा नहीं, पीड़ा दिखाता है। उन्होंने कहा कि जिस देश से हम लड़ रहे हैं, उसके पत्रकार के सामने हमें अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के कई नेता ऐसे बयान देते हैं। उन्होंने कश्मीर को एक बड़ा मुद्दा बताया।

साथ ही सरकार से कश्मीर पर ध्यान देने का भी निवेदन दिया। रूबीना ने चिंता जताई कि अगर कश्मीरी उधर चले गए तो दुश्मन पंजाब के लिए आएगा। उन्होंने अब्दुल्ला परिवार पर वोट के लिए कश्मीर में सीमा पार के लोगों को बसाने का आरोप लगाया। वहाँ हिन्दुओं की प्रताड़ना को याद करते हुए रूबीना शर्मा सिंह ने कहा कि चुनावी फायदों के लिए कश्मीरियों का इस्तेमाल हुआ, लेकिन हमें कुछ नहीं मिला।

दिग्विजय सिंह ने कहा था कि अनुच्छेद 370 को खत्म करना और जम्मू-कश्मीर से राज्य का दर्जा छीनना दुःखद है और कॉन्ग्रेस इस पर पुनर्विचार करेगी। इस पर उनके ही छोटे भाई लक्ष्मण सिंह ने कहा कि अनुच्छेद 370 को फिर से लागू करना संभव नहीं है। केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने ट्वीट करके कॉन्ग्रेस से इस मामले पर अपना पक्ष साफ करने की माँग की। कॉन्ग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि दिग्विजय सिंह का यह बयान कॉन्ग्रेस को नुकसान पहुँचाने वाला है। 

6 साल के पोते के सामने 60 साल की दादी को चारपाई से बाँधा, TMC के गुंडों ने किया रेप: बंगाल हिंसा की पीड़िताओं ने सुप्रीम कोर्ट को सुनाया दर्द

पश्चिम बंगाल की सत्ता में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की वापसी के महीनेभर बाद हिंसा की कई खौफनाक तस्वीरें सामने आ रही है। रेप, यौन प्रताड़ना और पुलिस की उदासीनता से बंगाल की महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया है। सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं पर गैंगरेप के आरोप लगाते हुए इन महिलाओं ने शीर्ष अदालत से एसआईटी जाँच की गुहार लगाई है।

बंगाल में 2 मई 2021 को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद हिंसा भड़क उठी थी। विपक्ष खासकर बीजेपी समर्थकों को चुन चुनकर निशाना बनाने के आरोप टीएमसी समर्थकों पर लगे थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार गोधरा मामले का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से उसी तरह अपनी निगरानी में बंगाल में गैंगरेप और हत्याओं की एसआईटी जाँच की माँग की गई है।

60 साल की महिला से उसके पोते के सामने किया गैंगरेप

एक 60 वर्षीय महिला ने शीर्ष अदालत को बताया है कि 4-5 मई को पूर्व मेदिनीपुर में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद टीएमसी के कार्यकर्ता उसके घर में जबरन घुस गए। लूटपाट करने से पहले 6 साल के पोते सामने ही उसका गैंगरेप किया। पीड़ित महिला ने बताया है कि 3 मई को खेजुरी विधानसभा सीट से बीजेपी की जीत के बाद 100-200 टीएमसी कार्यकर्ताओं की भीड़ ने उसके घर को घेर लिया और उसे बम से उड़ाने की धमकी दी। इस डर से उसकी बहू अगले दिन घर छोड़कर चली गई। इसके बाद 4-5 मई को पाँच टीएमसी कार्यकर्ताओं ने चारपाई से बाँधकर 6 साल के पोते से सामने उनका गैंगरेप किया।

महिला ने बताया कि वारदात के दूसरे दिन वह अचेत अवस्था में पड़ोसियों को मिली। इसके बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनका आरोप है कि पुलिस ने एफआईआर लिखने से भी मना कर दिया था। पीड़िता का कहना है कि विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी के कार्यकर्ता बदला लेने के लिए रेप को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।

पीड़िता ने मामले की जाँच एसआईटी या सीबीआई से कराने की माँग करते हुए कहा कि लोकल पुलिस की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पाँच नामजद आरोपितों द्वारा गैंगरेप किया गया। इसकी पुष्टि मेडकल रिपोर्ट में भी हुई थी। बावजूद इसके पुलिस ने जानबूझकर एफआईआर में केवल एक ही आरोपित का नाम लिखा, क्योंकि वे सत्ताधारी दल (टीएमसी) से जुड़े हैं।

दलित नाबालिग से गैंगरेप

अनुसूचित जाति की एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की ने भी अपने साथ टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा कथित गैंगरेप के मामले की सीबीआई या एसआईटी से जाँच करवाने की माँग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। पीड़िता ने मामले का ट्रायल राज्य से बाहर करवाने की भी माँग की। पीड़िता ने आरोप लगाया कि टीएमसी के गुंडों ने उसे घसीटने के बाद न केवल उसका गैंगरेप किया, बल्कि उसे जंगल में मरने के लिए फेंक दिया था। वारदात के अगले दिन सत्ताधारी पार्टी के एक स्थानीय नेता ने पीड़िता के घर आकर शिकायत नहीं करने के लिए परिजनों को धमकी भी दी थी।

युवती ने कहा कि गैंगरेप की वारदात के बाद उसे चाइल्ड वेलफेयर होम में शिफ्ट कर दिया गया, जहाँ उसके परिजनों को उससे मिलने की इजाजत नहीं थी। मामले की स्वतंत्र जाँच की माँग करते हुए पीड़िता ने कहा कि पुलिस वाले उसके परिवार को सांत्वना के बजाय कह रहे हैं कि उनकी दूसरी बेटी के साथ भी इसी तरह की वारदात हो सकती है।

पति की हत्या की कोशिश

पूर्णिमा मंडल ने अपनी याचिका में कहा है कि 14 मई को उनके पति धर्मा मंडल पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया क्योंकि उन्होंने बीजेपी के लिए प्रचार किया था। 16 मई को उनके पति की मौत हो गई। उनके साथ भी रेप की कोशिश की गई। पूर्णिमा के मुताबिक हिंसक भीड़ का नेतृत्व स्थानीय नेता कालू शेख कर रहा था। उनका आरोप है कि पुलिस ने उन पर मामले को कमजोर करने का दबाव बनाया और कालू शेख की भूमिका को अनदेखा कर दिया।

इससे पहले हिंसा में मारे गए बीजेपी कार्यकर्ता अभिजीत सरकार और हारन अधिकारी के परिजनों ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हिंसा की सीबीआई या SIT जाँच की अपील की थी। अभिजीत सरकार की पत्नी जो उनकी हत्या की चश्मदीद भी हैं ने बताया था, “भीड़ ने उनके पति के गले में सीसीटीवी कैमरे का तार बाँध दिया। गला दबाया। ईंट और डंडों से पीटा। सिर फाड़ दिया और माँ के सामने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। आँखों के सामने बेटे की हत्या होते देख उनकी माँ बेहोश होकर मौके पर ही गिर गईं।”

अनुराग कश्यप के घर ‘फिरंगी’ बॉयफ्रेंड लेकर पहुँची बेटी आलिया, चावल-दाल और पनीर से खातिरदारी

अनुराग कश्यप का स्वास्थ्य ठीक न रहने के कारण हाल ही में उनकी एंजायोप्लास्टी हुई है और डॉक्टरों का कहना है कि अब वो ठीक हो रहे हैं। उनकी बेटी आलिया कश्यप अमेरिका में पढ़ती हैं। अब वो अपने पिता के साथ समय बिताने के लिए भारत लौट आई हैं और उनके साथ ही रह रही हैं। उनके बॉयफ्रेंड शेन ग्रेगोइरे भी मुंबई में ही हैं। इस तरह से अनुराग कश्यप अपनी बेटी के बॉयफ्रेंड के मेजबान बने हैं।

आलिया कश्यप यूट्यूब पर अक्सर सक्रिय रहती हैं और वीलॉग्स बनाती रहती हैं। इसी दौरान वो भारत में अपने अनुभवों को लेकर भी वीडियो साझा कर रही हैं। उन्होंने एक वीडियो में दिखाया कि कैसे उनके पिता ने उनकी और उनके बॉयफ्रेंड की मेजबानी की। इस वीडियो में शेन भारतीय भोजन का लुत्फ़ उठाते दिख रहे हैं। उनके प्लेट में चावल-दाल और पनीर की सब्जी दिख रही है। अनुराग कश्यप ने उनके लिए भोजन का प्रबंध किया था।

शेन की थाली में इस दौरान छोले-भठूरे, समोसा, भेल-पूरी और गोलगप्पे जैसे भारतीय फ़ास्ट-फूड्स भी देखे गए। उनके साथ आलिया भी भारतीय व्यंजनों का मजा लेते दिखीं। अनुराग कश्यप ने दोनों को इस तरह खाते देख कर कहा कि वो तेल में पकी इन चीजों को नहीं खा सकते, क्योंकि उन्हें दिल की बीमारी है। जब शेन ने पानी-पूरी खाना शुरू किया तो अनुराग कश्यप ने कहा कि ये एक अलग तरह का अनुभव है।

आलिया कश्यप ने यूट्यूब पर अपलोड किया वीडियो

आलिया ने बताया है कि वो अपने भारत दौरे में और भी वीलॉग्स लेकर आएँगी, जिनमें वीडियो के जरिए भारत में अपने अनुभवों को दिखाएँगी। अनुराग कश्यप की बात करें तो वो फ़िलहाल तापसी पन्नू के साथ ‘दोबारा’ दिलम की शूटिंग में लगे हुए थे। ‘मनमर्जियाँ’ के बाद अब वो फिर से तापसी के साथ काम कर रहे हैं। इस फिल्म के प्रोडक्शन का काम ख़त्म हो चुका है और जल्द ही कोई घोषणा की जाएगी।

शमशेर अली ने हिंदू महिला को कमरे में बंद कर पीटा, पैसे लिए-अगरबत्ती से दागा: तांत्रिक बता रहा भास्कर

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में अंधविश्वास के एक मामले में ‘दैनिक भास्कर’ ने मौलवी को ‘तांत्रिक’ लिख कर भ्रम फैलाया है। ये घटना दोस्तपुर थाना क्षेत्र के खलिसपुर दुर्गा गाँव की है। सविता प्रजापति नाम की महिला अपने पति कपिल देव के साथ अपनी बीमार माँ के कहने पर मायके आई थी। उक्त महिला को कई बीमारियाँ थीं। ‘दैनिक भास्कर’ ने लिखा है कि उस महिला को ‘बाबा’ के पास ले जाया गया, जबकि वो एक मौलवी/फकीर था।

ढोंगी बाप-बेटा था और दोनों ने महिला पर भूत-प्रेत का साया होने की बात कही। उन्होंने पीड़ित परिवार से 25,000 रुपए भी ले लिए और महिला को एक कमरे में बंद कर के पीटा। साथ ही अगरबत्तियों से भी दाग दिया। गाँव के कुछ लोगों ने ही महिला को झाड़-फूँक की सलाह दी थी। बिशुनपुर छीतेपट्टी गाँव के शमशेर अली और उसका बेटा निन्हे किस हिसाब से ‘तांत्रिक’ हुआ, ये बात ‘दैनिक भास्कर’ से पूछना चाहिए।

इस मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोप है कि शमशेर अली ने 25,000 रुपए लेकर आश्वासन दिया कि वो महिला को झाड़-फूँक के जरिए ठीक कर देगा। इस पर परिजन राजी हो गए और बाप-बेटे पीड़ित महिला को अपने आवास के एक कमरे में झाड़-फूँक के लिए लेकर गए और उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। यहाँ भी ‘दैनिक भास्कर’ ने ‘तंत्र-मंत्र’ शब्द का प्रयोग किया है, जो हिन्दुओं की प्रक्रिया है।

महिला के बुरी तरह घायल होने के बाद उसे परिजन किसी तरह घर लेकर गए। शनिवार (जून 5, 2021) को महिला की हालत खराब हो गई और वो बेहोश हो गई। परिजनों ने 112 डायल कर के पुलिस को इसकी सूचना दी। यूपी पुलिस ने घायल महिला को अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उसका इलाज चल रहा है। पीड़िता की माँ की तहरीर पर शमशेर अली और उसके बेटे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

‘दैनिक भास्कर’ ने शमशेर अली को बताया तांत्रिक

मीडिया अक्सर मौलवियों को और फकीरों को ‘बाबा’ या ‘तांत्रिक’ लिख कर चलाता है, जिससे ऐसा लगता है जैसे आरोपित कोई हिन्दू साधु-संत ही हो। साथ ही फकीरों के झाड़-फूँक को भी ‘तंत्र-मंत्र’ लिख कर चलाता है। क्या आपने किसी मस्जिद में तंत्र- मंत्र होते देखा है या कोई मौलवी ‘बाबा’ हो सकता है? इससे पहले भी NDTV से लेकर कई मीडिया संस्थान भ्रामक हेडिंग्स के जरिए हिन्दुओं को बदनाम करते रहे हैं।

इसी तरह उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हर्ष विहार में एक मस्जिद में बलात्कार की घटना सामने आई थी। मस्जिद में पानी लेने गई 12 साल की लड़की का मौलवी इलियास ने रेप किया था। ‘दैनिक भास्कर’ ने लिखा था – ‘धार्मिक स्थल पर हुई वारदात। जब किसी छोटे से छोटे मामले में भी मंदिर की पहचान नहीं छिपाई जाती, तो फिर मस्जिद की पहचान छिपाने का क्या उद्देश्य था? कई अन्य मीडिया संस्थान ने भी ऐसा किया था।

सिख विधवा के पति का दोस्त था महफूज, सहारा देने के नाम पर धर्मांतरण करा किया निकाह; दो बेटों का भी करा दिया खतना

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के बेरुआ गाँव से धर्मांतरण का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक सिख महिला की पति की मौत के बाद महफूज ने सहारा देने के नाम पर धर्मांतरण कर उसके साथ निकाह कर लिया। इतना ही नहीं उसके दोनों बेटों का खतना भी करवाया। मामले में 5 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

महफूज पीड़ित महिला हरजिंदर कौर के पति का दोस्त था। रिपोर्ट के मुताबिक घटना शाहाबाद क्षेत्र की है। इस मामले में सेफनी चौकी के इंचार्ज प्रवीण कटियार की तहरीर पर केस दर्ज किया गया है। पुलिस को शनिवार 12 मई 2021 की रात इस घटना की सूचना मिली थी। जानकारी मिलने के बाद पुलिस गाँव पहुँची तो एक चरपाई पर हरजिंदर और दूसरे पर उसके दो बेटे लेटे हुए थे जिनका खतना कराया गया था। उसका बड़ा बेटा 12 तो छोटा 10 साल का है।

महिला ने पुलिस को बताया कि 8 मई 2021 को उसके पति का उत्तराखंड में एक सड़क हादसे में निधन हो गया। इसके बाद सहारा देने के नाम पर उसके पति का दोस्त महफूज उसे अपने गाँव ले आया। यहाँ उसने महिला का धर्म परिवर्तन कराने के लिए उससे निकाह कर लिया। उसका नाम हरजिंदर कौर से बदलकर गुलिस्ता रख दिया। महिला आरोपित को 2-3 सालों से जानती है। उसके दोनों बेटों का भी खतना कराने के बाद एक का नाम फरमान और दूसरे का अनस रख दिया।

इस मामले पर अपर पुलिस अधीक्षक संसार सिंह ने बताया कि शाहाबाद के बेरुआ गाँव में एक महिला को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराया गया है। आरोपित उसे बाहर से लाए थे। मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

राम मंदिर में अड़ंगा डालने में लगी AAP, ट्रस्ट को बदनाम करने की कोशिश: जानिए, ‘जमीन घोटाले’ की हकीकत

उत्तर प्रदेश में राजनीतिक संभावनाओं की तलाश में जुटी आम आदमी पार्टी (AAP) हिंदुओं को विभाजित करने और अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण कार्य में अड़ंगा डालने की कोशिशों में लगी है। पार्टी सांसद संजय सिंह ने राम मंदिर के लिए जमीन की खरीद में का आरोप लगाया है। AAP नेता संजय सिंह ने विकास दुबे की पत्नी ख़ुशी दुबे से प्रेस कॉन्फ्रेंस करा कर ‘ब्राह्मण कार्ड’ भी खेला। संजय सिंह देशद्रोह में नामजद रहे हैं और राज्यसभा से उन्हें निलंबित भी किया गया था।

जमीन खरीद में लगाया घोटाले का आरोप

संजय सिंह ने रविवार (जून 13, 2021) को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या में जमीन की गाटा संख्या 243, 244, 246, जिसकी कीमत 5 करोड़ 80 लाख रुपए है, उसे 2 करोड़ रुपये में पहले खरीदा गया, इसके बाद सुल्तान अंसारी ने इस जमीन की खरीदारी में करोड़ों का हेरफेर किया

दिल्ली में इमामों का वेतन बढ़ाने वाली पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने यूपी आते ही ‘हिन्दू कार्ड’ खेलते हुए राम मंदिर के लिए चिंता जताई और दावा किया कि अयोध्या के मेयर तक इस घोटाले में शामिल थे। संजय सिंह के अनुसार, 18 मार्च 2021 को ये जमीन शाम को 7 बजकर 10 मिनट पर खरीदी गई और 5 मिनट बाद 2 करोड़ रुपए में खरीदी गई जमीन को राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने साढ़े 18 करोड़ रुपए में खरीदा।

बकौल संजय सिंह, इसमें से 17 करोड़ रुपए मात्र 5 मिनट में RTGS किए गए। उन्होंने एक सेकंड में साढ़े 5 लाख रुपए की दर से गबन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट द्वारा खरीददारी और बैनामा में डॉक्टर अनिल मिश्रा और मेयर ऋषिकेश उपाध्याय गवाह बने। उन्होंने इसे ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ और भ्रष्टाचार का मामला बताते हुए कहा कि राम मंदिर के लिए करोड़ों रुपए का चंदा देने वाली जनता को इससे आघात लगा है।

इस मामले की जाँच CBI और ED से कराने की माँग करते हुए संजय सिंह ने एंग्रीमेंट व बैनामा के स्टाम्प और समय, सब में हेरफेर का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट की जमीन का एग्रीमेंट 5:11 में खरीदा गया और जमीन का स्टाम्प 5:22 में। साथ ही ट्रस्ट में प्रस्ताव पारित कराए बिना 5 मिनट में जमीन बेचना का फैसला लेने का आरोप भी लगाया। कुल मिला कर उनका सवाल ये था कि 18 मार्च को जिस जमीन को 2 करोड़ रुपए में खरीदा गया, उसी जमीन का 10 मिनट बाद साढ़े 18 करोड़ रुपए में एग्रीमेंट क्यों हुआ?

ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने दिया जवाब

अब चंपत राय ने खुद इसका जवाब देकर दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट ने निर्माणाधीन राम मंदिर के आसपास के छोटे-मोटे मंदिरों और गृहस्थों की जमीन खरीदी। परकोटा व रीटेनिंग दीवार की वस्तु में सुधार, पूर्व-पश्चिम दिशा में आवागमन की सुविधा, खुला मैदान रखने के लिए और सुरक्षा की दृष्टि से ऐसा आवश्यक था। साथ ही जिनसे भूमि ली गई है, उनके पुनर्वास की भी समुचित व्यवस्था की जा रही है।

उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए भी जमीन की खरीददारी चालू है। उन्होंने कहा कि क्रय-विक्रय का कार्य सहमति के आधार पर किया जाता है और सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी होते हैं। यहाँ तक कि कोर्ट फी और स्टाम्प तक की खरीददारी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऑनलाइन की जा रही है। विक्रेता के खाते में रुपए भी ऑनलाइन ही भुगतान किए जा रहे हैं। चंपत राय ने बताया कि सहमति पत्र के हिसाब से ही कार्य हो हो रहा है।

चंपत राय ने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के साथ ही यहाँ जमीन के भाव यकायक बढ़ गए, क्योंकि कई इलाकों से लोग आकर यहाँ भूमि खरीदने लगे। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भी अयोध्या के सर्वांगीण विकास के लिए भूमि खरीद रही है। जिस भूखंड को लेकर संजय सिंह से आरोप लगाया, उसे रेलवे लाइन के पास खरीदा गया। ये एक प्रमुख स्थान है।

चंपत राय ने स्पष्ट किया कि ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट ने अब एक जितनी भी भूमि खरीदी है, उसे खुले बाजार की कीमत से कम पर ही लिया गया है। उन्होंने कहा, “उस भूमि को बेचने वालों ने वर्षों पूर्व अनुबंध करा लिया था। मार्च 18, 2021 को इसका बैनामा हुआ। फिर ट्रस्ट के साथ अनुबंध किया गया।” चंपत राय ने आरोपों को भ्रामक, गुमराह करने वाला और राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित करार दिया।

क्यों संजय सिंह के आरोपों में नहीं है दम

मोटा-मोटी AAP का आरोप यही है कि मिनटों में 2 करोड़ रुपए की जमीन 18 करोड़ रुपए की हो गई। किस-किस खाते से 17 करोड़ रुपए RTGS किए गए, इसकी जाँच की माँग भी की गई है। 1.208 हेक्टेयर जमीन का बैनामा और एंग्रीमेंट हुआ। पूर्व सपा नेता पवन पांडेय का आरोप है कि बाबा हरिदास ने उस जमीन को सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी को बेचा और उसी को ट्रस्ट ने खरीदा। मतलब, आरोप है कि 2 करोड़ की जमीन खरीद कर ट्रस्ट के साथ 18 करोड़ में एग्रीमेंट की गई और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा दोनों में गवाह हैं।

अधिवक्ता अभिषेक द्विवेदी ने राम मंदिर पर संजय सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए चीजों को समझाया है। उन्होंने ‘एग्रीमेंट टू सेल’ और ‘सेल डीड’ का अंतर समझाते हुए कहा कि एग्रीमेंट का अर्थ हुआ कि किसी बाद की तारीख को जमीन बेचने का वादा किया गया, वहीं डीड मतलब सेल पूर्ण हो गया। सितंबर 17, 2019 को कुसुम पाठक नामक महिला ने सुल्तान अंसारी समेत कुछ लोगों के साथ ‘एग्रीमेंट टू सेल’ किया।

गौर कीजिए, तब उस समय के बाजार मूल्य के आधार पर ऐसा किया गया क्योंकि राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने में अब भी 2 महीने बाकी थे। ये एग्रीमेंट 2 करोड़ रुपए का हुआ। मार्च 18, 2021 को ही सुल्तान अंसारी ने उसी ‘एग्रीमेंट टू सेल’ को आधार बना कर ‘सेल एग्रीमेंट’ किया (बेचने के लिए), जिसमें 2021 के बाजार मूल्य के हिसाब से 18 करोड़ रुपए की बात हुई। ठीक उसी दिन, कुसुम पाठक ने 2019 वाला सेल एग्रीमेंट लागू किया, जो सुल्तान अंसारी के साथ हुआ था।

याद कीजिए, कुसुम पाठक और सुल्तान अंसारी वाला ये ‘एग्रीमेंट टू सेल’ 2019 के बाजार मूल्य पर ही था। अब ट्रस्ट ने जब इस जमीन को खरीद लिया (सेल एग्रीमेंट) है, इसका अधिग्रहण भी हो गया है और कुछ ही दिनों में सेल डीड भी एग्जिक्यूट किया जाएगा। अयोध्या में 2019 और 2021 – इन दो वर्षों में जमीन के दाम अच्छे-खासे बढ़े हैं। राम मंदिर जजमेंट और यूपी सरकार द्वारा कई विकास परियोजनाओं की घोषणाओं के कारण ऐसा हुआ, ये सभी जानते हैं।

विराजमान भगवान विष्णु, प्रसिद्धि माता पार्वती और भगवान शिव को लेकर: त्रियुगीनारायण मंदिर की कहानी

देवभूमि उत्तराखंड कई प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ स्थलों की भूमि है। यहाँ के गाँव, कस्बे, नदियाँ, पहाड़ और जंगल सभी सनातन धर्म की कई मान्यताओं और परंपराओं को अपने में समेटे हुए हैं। यह वही भूमि हैं जहाँ केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे दिव्य और आध्यात्मिक स्थान हैं। ऐसा ही एक मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। एक ऐसा अनूठा मंदिर जहाँ विराजमान हैं भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी के साथ लेकिन मंदिर जाना जाता है, भगवान शिव और माता पार्वती के कारण। ऐसा इसलिए क्योंकि यहाँ हुआ था भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह और दुल्हन के भाई बने थे, भगवान विष्णु। हम बात कर रहे हैं त्रियुगीनारायण मंदिर की जो अपने आप में एक दिव्य और अद्वितीय धर्म स्थान है।

त्रेतायुगीन है मंदिर

त्रिजुगीनरायण गाँव पौराणिक क्षेत्र हिमवत की राजधानी था। यहीं स्थित है त्रियुगीनारायण मंदिर जहाँ सतयुग में माता पार्वती का विवाह भगवान शिव के साथ हुआ था। इस दिव्य विवाह में समस्त ऋषि-मुनि और देवी देवताओं ने भाग लिया था। इस मंदिर में सम्पन्न हुए विवाह की पूरी जिम्मेदारी भगवान विष्णु ने स्वयं की थी और विवाह में माता पार्वती के भाई के रूप में सभी परंपराओं का निर्वहन भी भगवान विष्णु ने ही किया था। मंदिर की संरचना बिल्कुल केदारनाथ मंदिर के समान ही है। ऐसी मान्यता है कि यह मंदिर त्रेतायुगीन है।

त्रियुगीनारायण मंदिर, रुद्रप्रयाग (फोटो : अमर उजाला)

मंदिर में एक हवन कुंड हैं जहाँ सदैव अग्नि प्रज्ज्वलित रहती है। ऐसी मान्यता है कि यह अग्नि उसी विवाह समारोह की है और इसी अग्नि के चारों ओर माता पार्वती और भगवान शिव ने फेरे लिए थे। तब से ही यह निरंतर प्रज्ज्वलित है। तीन युगों से इस अग्नि का अस्तित्व है, संभवतः यही कारण है कि मंदिर त्रियुगीनारायण कहलाता है।

मंदिर में स्थित हवन कुंड

गाँव में मंदिर के आसपास तीन कुंड हैं, रुद्र कुंड, विष्णु कुंड और ब्रह्म कुंड। ऐसा कहा जाता है कि ब्रह्म कुंड में ही स्नान करके ब्रह्मा जी ने माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह सम्पन्न कराया था। विष्णु कुंड में स्नान करने के बाद भगवान विष्णु ने माता पार्वती के भाई के नाते सभी परंपराओं का निर्वहन किया था और रुद्र कुंड में स्नान करके भगवान शिव विवाह में शामिल हुए। मंदिर में ही एक स्तम्भ भी है। इसके बारे में कहा जाता है कि भगवान शिव को उपहार स्वरूप जो गाय मिली थी उसे इसी स्तम्भ में बाँधा गया था।

माना जाता है कि वर्तमान मंदिर की स्थापना आदि शंकराचार्य ने की थी। उन्होंने पूरे उत्तराखंड में कई मंदिरों की स्थापना की थी जिनमें केदारनाथ और बद्रीनाथ भी शामिल हैं। मंदिर में चाँदी की एक दो फुट की भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित है।

सुखी वैवाहिक जीवन की कामना

वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाने के लिए जोड़े दूर-दूर से यहाँ आते हैं। मान्यता है कि यहाँ विवाह करने वालों के दाम्पत्य जीवन को सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं। इतना ही नहीं मंदिर में सहस्त्राब्दियों से जल रही अग्नि की राख को भी लोग अपने घरों को लेकर जाते हैं और किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले उसी राख को भगवान का आशीर्वाद समझ कर ग्रहण करते हैं।

मंदिर में भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी के साथ विराजित हैं लेकिन यह मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती के लिए ही प्रसिद्ध है। देश के कोने-कोने से आने वाले शिव भक्तों और विष्णु भक्तों के लिए यह एक ऐसा स्थान है जहाँ दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

कैसे पहुँचे?

सबसे नजदीकी हवाई अड्डा देहरादून में है। यह रुद्रप्रयाग से 159 किमी की दूरी पर है। रुद्रप्रयाग से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है जो लगभग 152 किमी की दूरी पर है। देहरादून और ऋषिकेश तक पहुँचने के बाद सड़क मार्ग से रुद्रप्रयाग पहुँचना आसान है, क्योंकि सड़क मार्ग से यात्रा करने के लिए कई बसें और टैक्सियाँ सरलता से उपलब्ध हो जाती हैं।

क्या है UP सरकार का ‘प्रोजेक्ट एल्डरलाइन’, जिसके लिए PM मोदी ने की CM योगी आदित्यनाथ की सराहना

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सभी वर्गों को ध्यान में रखकर नीतियों का निर्माण सुनिश्चित किया है। जनकल्याण के इसी क्रम में यूपी की योगी सरकार ने राज्य के बेसहारा बुजुर्गों के लिए ‘एल्डरलाइन प्रोजेक्ट (Elder Line Project)’ लॉन्च किया। इसके तहत बुजुर्गों की सहायता करने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके इस योजना की सराहना की।

क्या है एल्डरलाइन प्रोजेक्ट?

सीएम आदित्यनाथ के आदेश पर राज्य के सभी 75 जिलों में बुजुर्गों की सहायता के लिए यह योजना शुरू की गई। 14 मई 2021 से लागू इस योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में बेसहारा बुजुर्ग नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और उन्हें बीमारी से बचाने के लिए प्रोजेक्ट एल्डरलाइन के तहत टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 14567 की व्यवस्था की गई है। यह हेल्पलाइन सुविधा सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक सभी नागरिकों के लिए उपलब्ध रहती है।

इस हेल्पलाइन नंबर की सहायता से उत्तर प्रदेश की सरकार सूचना मिलने पर बुजुर्गों की सहायता करती है। इस योजना के तहत बड़े पैमाने पर यूपी सरकार बुजुर्ग नागरिकों के स्वास्थ्य की चिंता करना, उन्हें उचित इलाज देना और साथ ही उन्हें भावनात्मक सहयोग प्रदान करना सुनिश्चित कर रही है।

प्रोजेक्ट एल्डरलाइन के तहत कार्यरत कर्मचारियों के अनुसार इस योजना के लागू होने के बाद से प्रतिदिन लगभग 80 से 90 फोन आते हैं, जिनके माध्यम से बुजुर्गों की सहायता के लिए यूपी सरकार हर संभव सहायता करती है। यह प्रोजेक्ट टाटा ट्रस्ट और एनएसई फाउंडेशन की सहायता से संचालित किया जा रहा है।

एक उदाहरण के तौर पर देखें तो कासगंज के पंचायत बाग में सड़क के किनारे भूख से तड़प रही एक 70 वर्षीय वृद्धा की जानकारी टोल फ्री नंबर 14567 के जरिए सरकार को दी गई। इसके बाद फील्ड रिस्पॉन्स लीडर ने मौके पर पहुँचकर पुलिस और तहसीलदार की मदद से वृद्धा को ओल्ड एज होम पहुँचाया और साथ ही उसकी कोरोना वायरस जाँच भी कराई गई जो निगेटिव आई। ऐसे ही न जाने कितने ही बेसहारा बुजुर्गों के लिए वरदान साबित हो रहा है ‘प्रोजेक्ट एल्डरलाइन’।

क्या कॉन्ग्रेस A-370 फिर से बहाल करना चाहती है? दिग्विजय सिंह के बयान पर रविशंकर प्रसाद ने माँगा जवाब

हाल ही में क्लबहाउस की एक बातचीत तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुई जहाँ वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह यह कहते हुए सुने गए कि अनुच्छेद 370 को खत्म करना और जम्मू-कश्मीर से राज्य का दर्जा छीनना दुःखद है और कॉन्ग्रेस इस पर पुनर्विचार करेगी। इस पर उनके ही छोटे भाई लक्ष्मण सिंह ने कहा कि अनुच्छेद 370 को फिर से लागू करना संभव नहीं है।  

हालाँकि इस क्लबहाउस ऑडियो के वायरल हो जाने के बाद से ही कॉन्ग्रेस बैकफुट पर नजर आ रही है और उसके नेता किसी भी तरीके से दिग्विजय सिंह का बचाव नहीं कर पा रहे हैं। कई कॉन्ग्रेस नेता इसे दिग्विजय सिंह की निजी राय बता रहे हैं। इस मामले पर भाजपा लगातार दिग्विजय सिंह पर प्रश्न उठा रही है लेकिन मध्य प्रदेश राज्य इकाई समेत पूरी कॉन्ग्रेस पार्टी, भाजपा के आरोपों पर खुलकर जवाब नहीं दे पा रही है।

वरिष्ठ भाजपा नेता एवं केन्द्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने ट्वीट करके कॉन्ग्रेस से इस मामले पर अपना पक्ष साफ करने की माँग की। उन्होंने कहा, “अनुच्छेद 370 के विषय में जो भी दिग्विजय सिंह ने कहा, कॉन्ग्रेस उस पर अब भी चुप्पी साधे हुए है। क्या कॉन्ग्रेस अनुच्छेद 370 को फिर से बहाल करना चाहती है? कॉन्ग्रेस अपनी मंशा साफ करे।“ उन्होंने यह भी कहा कि जब अनुच्छेद 370 को समाप्त किया जा रहा था तब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों से बेहतर प्रशासन का वादा किया गया था। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जिस तेजी से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सुदूर इलाकों में भी Covid-19 टीकाकरण तेजी से चल रहा है, वह बेहतर प्रशासन की ही निशानी है।

हालाँकि दिग्विजय सिंह के बयान पर कॉन्ग्रेस के ही कई नेता नाराज दिखाई दे रहे हैं। दैनिक जागरण की खबर के अनुसार नाम न छापने की शर्त पर कॉन्ग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि दिग्विजय सिंह का यह बयान कॉन्ग्रेस को नुकसान पहुँचाने वाला है। पार्टी नेताओं का यहाँ तक मानना है कि सिंह पर कार्रवाई की जानी चाहिए जिससे इस तरह की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जा सके।

हालाँकि खुद दिग्विजय सिंह के छोटे भाई और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता लक्ष्मण सिंह ने भी दिग्विजय सिंह के बयान का विरोध किया है। 5 बार सांसद रह चुके लक्ष्मण सिंह ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में अब अनुच्छेद 370 को फिर से लागू करना अब संभव नहीं है। लक्ष्मण सिंह के ट्वीट से यह अंदाज लगाया जा सकता है कि दिग्विजय सिंह ने अपने बयान से कॉन्ग्रेस के लिए एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है।

ज्ञात हो कि राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह देश-विदेश के कुछ पत्रकारों से वर्चुअली बात कर रहे थे। इस दौरान पाकिस्तानी पत्रकार शाहजेब जिल्लानी ने अनुच्छेद-370 से जुड़ा एक सवाल कॉन्ग्रेस महासचिव से पूछा था। इस पर जवाब देते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा था कि अनुच्छेद-370 को रद्द करना और जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा कम करना अत्यंत दुखद निर्णय है। हमें निश्चित रूप से इस मुद्दे पर फिर से विचार करना होगा।   

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने जताई थी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा, भड़के संजय राउत ने कहा- उद्धव ही रहेंगे CM

“जब तीन पार्टियों ने सरकार मिलकर बनाई थी तब यही फैसला किया गया था कि उद्धव ठाकरे पूरे 5 साल तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहेंगे।“ यह बात कही है शिवसेना के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने।

2.5 सालों में महाराष्ट्र में शिवसेना के मुख्यमंत्री के बदले जाने की अफवाहों पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा कि जब महाराष्ट्र में 3 पार्टियों ने मिलकर सरकार बनाई थी, तब उन्होंने प्रतिबद्धता जाहिर की थी और यह निर्णय लिया था कि उद्धव ठाकरे ही पूरे 5 सालों तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री होंगे। राउत ने कहा कि यदि कोई मुख्यमंत्री बदले जाने की बात कर रहा है तो यह झूठ है और अफवाह है।

राउत ने यह भी कहा कि 3 पार्टियों का एक साथ आना मर्जर (विलय) नहीं था बल्कि एक गठबंधन था और सभी पार्टियाँ अपना विस्तार करने के लिए स्वतंत्र हैं। राउत ने यह भी कहा कि वो हर चुनाव साथ लड़ने के लिए प्रतिबद्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय चुनावों के बारे में फैसला स्थानीय नेता ही करेंगे और वो केवल लोकसभा और राज्य के चुनावों पर ही रणनीतियाँ बनाते हैं।

नासिक में चर्चा करते हुए संजय राउत ने कहा कि जब मुख्यमंत्री को लेकर तीनों पार्टियों के विधायकों की चर्चा हो रही थी तब वो वहाँ उपस्थित थे और वह इस बात के साक्षी हैं कि सभी ने इस बात पर मुहर लगाई थी कि उद्धव ठाकरे ही पूरे 5 साल मुख्यमंत्री रहेंगे इसलिए किसी और के मुख्यमंत्री बनने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है।

ज्ञात हो कि महाराष्ट्र प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा था कि उनकी इच्छा मुख्यमंत्री बनने की है। इस पर अपनी राय रखते हुए संजय राउत ने कहा कि कॉन्ग्रेस में कई ऐसे नेता हैं जो मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री भी बन सकते हैं। यह राजनीति है और यहाँ बड़े सपने और बड़ी इच्छाएं रखना गलत नहीं है।

इससे पहले संजय राउत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी तारीफ कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि इस समय नरेंद्र मोदी ही देश और भाजपा के सबसे बड़े नेता हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि भाजपा ने अपनी सर्वोच्च सफलता नरेंद्र मोदी के पिछले 7 साल के कार्यकाल के दौरान ही हासिल की है। संजय राउत का यह बयान तब आया था जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में पीएम मोदी से व्यक्तिगत मुलाकात की थी।

हालाँकि संजय राउत ने उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बने रहने की बात तब कही है जब मराठी दैनिक तरुण भारत ने रिपोर्ट छापी थी। इसमें बताया गया था कि पवार को अब पछतावा हो रहा है और उन्हें लगता है कि उद्धव ठाकरे को सीएम बनाना ‘भारी भूल’ थी।

रिपोर्ट में कहा गया था कि उद्धव ठाकरे द्वारा शरद पवार के फोन कॉल का जवाब नहीं देने के बाद, एनसीपी प्रमुख ने संजय राउत के सामने इस बात को स्वीकारा था कि उन्होंने ठाकरे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाकर बहुत बड़ी गलती कर दी।