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‘वैक्सीन के लिए देश क्यों दे इतना पैसा? कंपनी के पास नहीं होना चाहिए मूल्य तय करने का अधिकार’: SC ने केंद्र से कहा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वो कोरोना वैक्सीन का मूल्य निर्धारण करने का अधिकार इसके निर्माताओं को न दे। सर्वोच्च न्यायालय ने पूछा कि जब वैक्सीन निर्माताओं के पास ही इसका दाम तय करने के अधिकार होंगे तो वो कैसे बराबरी सुनिश्चित करेंगे? जस्टिस चंद्रचूड़ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के जरिए केंद्र सरकार को वैक्सीन के निर्माण के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को 10 सवालों की सूची दी थी। सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि केंद्र सरकार ही सारे वैक्सीन खरीदे और फिर राज्यों को दे। सवालों की सूची में ये भी पूछा गया कि केंद्र सरकार ने वैक्सीन निर्माता कंपनियों में कितना निवेश किया है और उन्हें क्या सहूलियतें दी हैं। साथ ही ऑक्सीजन की उपलब्धता के लिए एक रियल टाइम मेकेनिज्म विकसित करने की सलाह दी

SG ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार हर वो कुछ करने के लिए तैयार है, जिसकी नागरिकों को ज़रूरत हो। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक ‘राष्ट्रीय टीकाकरण नीति’ का अनुसरण करने की सलाह दी। उन्होंने वैक्सीन की पहुँच से SC/ST समुदाय के बाहर होने की आशंकाओं पर चिंता व्यक्त की। वहीं जस्टिस रवींद्र भट ने कहा कि जो स्वास्थ्यकर्मी अधिक कार्य कर रहे हैं, उन्हें रुपए भी उसी हिसाब से मिलने चाहिए।

उन्होंने कहा कि हम सिर्फ ये कह कर इतिश्री नहीं कर सकते कि वो कोविड वॉरियर्स हैं क्योंकि कई नर्सों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि अब स्वास्थ्यकर्मियों के लिए आभार जताने का समय है। उन्होंने केंद्र सरकार से ये भी पूछा कि जब AstraZeneca अमेरिका के नागरिकों को कम दाम पर वैक्सीन दे रही है तो हम क्यों इसका ज्यादा मूल्य दें? उन्होंने आँकड़े गिनाए कि इससे 30-40 हज़ार करोड़ रुपयों का अंतर आ रहा है।

जस्टिस रवींद्र भट ने पूछा, “एक राष्ट्र के रूप में हम इतना पैसा क्यों दें?” उन्होंने इस बात से आपत्ति जताई कि वैक्सीन के लिए जहाँ कंपनियाँ केंद्र से 150 रुपए प्रति डोज मूल्य ले रहा है, वहीं राज्यों को 300-400 रुपए प्रति डोज चुकाने पड़ रहे हैं। उन्होंने ‘ड्रग्स प्राइस कंट्रोल’ के नियम 19 एवं 20 की याद दिलाते हुए कहा कि केंद्र सरकार दवाओं का दाम निर्धारित कर सकती है। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि 4500 करोड़ कहाँ और कैसे दिए गए।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि सोशल मीडिया के माध्यम से आपात मदद माँगने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई नागरिक सोशल मीडिया या इंटरनेट के माध्यम से अपनी शिकायतें कहता है या मदद माँगता है तो इसे ‘गलत सूचना’ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों के DGP ये समझ लें कि ऐसी शिकायत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हुई तो इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मानी जाएगी।

राजदीप फिर फिसले, कहा- TMC को बंगाल जीतने पर कॉन्ग्रेस को रसगुल्ला खिलाना चाहिए, राहुल कँवल ने कराया- चुप

2 मई को चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए वोटों की गिनती की प्रक्रिया चल रही है। पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम कवरेज के दौरान, इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने टिप्पणी की कि यदि तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) बंगाल में जीत जाती है तो उसे कॉन्ग्रेस को रसगुल्ला का ट्रीट देना चाहिए।

सरदेसाई ने कहा, “जैसे-जैसे चुनाव अभियान छठे, सातवें और आठवें दौर में पहुँचा, हर बार जब एक बड़ा ध्रुवीकरण देखने को मिला। जब तक मालदा, मुर्शिदाबाद आता है तब तक ध्रुवीकरण इतना हो चुका होता है कि कॉन्ग्रेस का मतदाता कहता है कि कॉन्ग्रेस तो जीतने वाली नहीं है, इसलिए मैं इसे ममता को वोट दूँगा। मैं भाजपा को हराना चाहता हूँ। इसलिए कॉन्ग्रेस ने भी चुनाव प्रचार करना बंद कर दिया। बंगाल में कॉन्ग्रेस किसी भी स्थिति में हारने वाली थी और ममता कॉन्ग्रेस की हार से लाभान्वित हुई हैं। इसलिए जीतने पर उन्हें कॉन्ग्रेस को रसगुल्ला खिलाना चाहिए।”

जिस पर राहुल कँवल ने जवाब दिया, “आप कॉन्ग्रेस को बहुत अधिक श्रेय दे रहे हैं। कॉन्ग्रेस कभी रेस में थी ही नहीं।” यह स्पष्ट है कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में एक लोकप्रिय स्थानीय नेता बनी हुई हैं। हालाँकि कॉन्ग्रेस के अस्तित्व को बचाने के लिए बेताब सरदेसाई को राहुल कंवल ने यह कह कर चुप करा दिया कि कॉन्ग्रेस तो कभी रेस में थी ही नहीं।

राजदीप सरदेसाई का इतिहास शर्मनाक पलों से भरा है

यह पहली बार नहीं है जब सरदेसाई की टिप्पणियों की वजह से सहकर्मियों को शर्मिंदा होना पड़ा है। हाल ही में, 26 जनवरी के दंगों की कवरेज के दौरान, उन्होंने बहुत सी भ्रामक और फर्जी रिपोर्टिंग की, जिसकी भारी आलोचना हुई। स्थिति इतनी खराब हो गई कि उन्हें कुछ समय के लिए इंडिया टुडे से सस्पेंड करना पड़ा।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम

चुनाव आयोग के अनुसार, 2 मई को दोपहर 12:00 बजे तक, टीएमसी 194 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि बीजेपी 80 पर आगे चल रही है। अब तक तीन दौर पूरे हो चुके हैं, और वास्तविक परिणाम शाम 6 बजे तक आ जाने चाहिए। आप यहाँ हमारी लाइव कवरेज देख सकते हैं

फिलीपींस की देखादेखी कर न्यूजीलैंड उच्चायोग ने कराई फजीहत, कॉन्ग्रेस की ‘ऑक्सीजन स्टंट’ पर माँगी माफी

कॉन्ग्रेस की ‘ऑक्सीजन स्टंट’ में उलझने की वजह से फिलीपींस के बाद अब न्यूजीलैंड उच्चायोग की भी किरकिरी हो रही है। फिलीपींस दूतावास के अगले ही दिन न्यूजीलैंड के उच्चायोग ने भी यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी से ऑक्सीजन के लिए मदद माँगी।

भारत के न्यूजीलैंड उच्चायोग ने रविवार (2 मई) को किए गए एक ट्वीट में विदेश मंत्रालय दरकिनार करते हुए विपक्षी कॉन्ग्रेस पार्टी की यूथ विंग से ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए मदद माँगी। इस ट्वीट में कहा गया है, “श्रीनिवास बीवी, क्या आप न्यूजीलैंड उच्चायोग में तत्काल ऑक्सीजन सिलेंडर की मदद कर सकते हैं? धन्यवाद।”

श्रीनिवास बीवी इसके बाद अन्य कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं के साथ ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ न्यूजीलैंड उच्चायोग पहुँचे। उन्होंने ट्वीट किया, “हम ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ न्यूजीलैंड उच्चायोग पहुँचे हैं। कृपया द्वार खोलें और समय पर एक जान बचाएँ। #SOSIYC”

एक अन्य ट्वीट में, उन्होंने सूचित किया, ”अपडेट- न्यूजीलैंड उच्चायोग ने दूतावास के गेट खोल दिए और सिलेंडर स्वीकार कर लिए। साथ ही, उन्होंने इस त्वरित राहत के लिए #SOSIYC टीम को धन्यवाद दिया क्योंकि दूतावास के अंदर रोगी गंभीर रूप से बीमार था।”

इसके बाद नेटिजन्स ने तुरंत ही सोशल मीडिया पर न्यूजीलैंड दूतावास की कार्रवाई पर सवाल उठाए। बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने ट्वीट किया, ”MEA ने स्पष्ट किया है कि फिलीपींस के दूतावास में COVID के जीरो मामले हैं। उस दूतावास को ऑक्सीजन देने की कोशिश कर रहे IYC के स्टंट को देखते हुए, न्यूजीलैंड दूतावास के एक सोशल मीडिया हैंडलर ने MEA से अनुरोध किए बिना ट्वीट किया। न्यूजीलैंड के उच्चायोग ने इस गलत सूचना के लिए अब MEA से माफी माँगी है।”

वयोवृद्ध पत्रकार कंचन गुप्ता ने पूछा कि क्या युवा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष से पूछने से पहले न्यूजीलैंड के उच्चायोग ने विदेश मंत्रालय से संपर्क किया था। उन्होंने ट्वीट किया, “लेकिन किसके लिए @NZinIndia तत्काल ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था करने की कोशिश कर रहा है? उनकी जरूरत किसे है? @MEAIndia से संपर्क किया गया था?”

उन्होंने आगे सवाल किया, “क्या न्यूजीलैंड दूतावास ने अपने दरवाजे खोले हैं? न्यूजीलैंड उच्चायोग को बताना चाहिए 1. उन्होंने ऑक्सीजन किससे माँगी? 2. क्या उन्होंने सार्वजनिक अपील से पहले MEA से संपर्क किया था? 3. यदि हाँ, तो MEA की प्रतिक्रिया क्या थी? (मैं यह भी नहीं पूछूँगा कि दिल्ली में IYC के लोगों को ऑक्सीजन कहाँ मिल रहा है क्योंकि ICUs तक में इसकी कमी है।)”

विवाद के बाद, भारत में न्यूजीलैंड दूतावास ने अपना प्रारंभिक ट्वीट हटा दिया और माफी माँगी। उन्होंने लिखा, “ऑक्सीजन सिलेंडर की तत्काल व्यवस्था के लिए हम सभी स्रोतों से कोशिश कर रहे थे। दुर्भाग्य से हमारी अपील का गलत अर्थ निकाला गया है, जिसके लिए हमें खेद है।”

बांग्लादेशी और रोहिंग्या ममता की सबसे बड़ी ताकत…एक और कश्मीर बन रहा: बंगाल के चुनावी ट्रेंड पर कंगना रनौत

5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के लिए वोटों की गिनती चल रही है। जैसे-जैसे रूझान सामने आते जा रहे है प्रतिक्रियाएँ भी आने लगी हैं। बंगाल की मौजूदा तस्वीर पर बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने ट्वीट कर ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। उन्होंने टीवी पर आ रहे रुझानों को देखते हुए कहा है कि बंगाल में अब कोई इलाका हिंदू बहुल नहीं बचा है।

कंगना रनौत ने अपने ट्वीट में लिखा, “बांग्लादेशी और रोहिंग्या ममता की सबसे बड़ी ताकत हैं…इस ट्रेंड के हिसाब से पता चलता है कि वहाँ कोई हिंदू बहुल इलाका नहीं बचा और डेटा के मुताबिक बंगाली मुसलमान सबसे गरीब और वंचित हैं। बढ़िया है। एक और कश्मीर बन रहा है।”

मालूम हो कि कंगना रनौत 2021 विधानसभा चुनावों के बीच लगातार अपनी राय रखती दिखाई दीं। उनकी आने वाली फिल्म भी तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के ऊपर है। ‘थलाइवी’ के अलावा कंगना ‘धाकड़’ और ‘तेजस’ जैसी फिल्मों में काम कर रही हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर अन्य सेलीब्रिटीज के मुकाबले ज्यादा सक्रिय होकर राजनीति पर बात भी करती हैं।

बंगाल में TMC में सत्ता में वापसी!

विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मतगणना आज सुबह 8 बजे प्रारंभ हुई थी। शुरुआती रुझानों में भाजपा और टीएमसी में काँटे की टक्कर दिखाई जा रही थी। हालाँकि बाद में टीएमसी आगे निकल गई। खबर लिखे जाने तक टीएमसी 190 सीट पर लीड में थी, वहीं भाजपा के पास 94 सीट आती दिख रही हैं।

इन परिणामों के आने के साथ ही टीएमसी समर्थकों ने राज्य में जगह जगह इकट्ठा होकर जश्न मनाना शुरू कर दिया है। इस संबंध में चुनाव आयोग ने किसी भी प्रकार की भीड़भाड़ को रोकने के लिए तत्काल एक्शन लेने को कहा है।

वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी को जीत पर बधाई भी दे दी है। अखिलेश यादव ने लिखा, “बंगाल में भाजपा की नफरत की राजनीति को हराने वाली जागरुक जनता, जुझारू ममता बनर्जी और टीएमसी के समर्पित नेताओं और कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई। ये भाजपाइयों के एक महिला पर किए गए अपमानजनक कटाक्ष ‘दीदी ओ दीदी’ का जनता द्वारा दिया गया मुँहतोड़ जवाब है।”

बेवजह ऑक्सीजन बाँट कॉन्ग्रेस थपथपा रही थी अपनी पीठ, विदेश मंत्री ने खोल दी पोल

कोरोना संकट काल में मदद को लेकर यूपीए सरकार में पर्यावरण मंत्री रहे जयराम रमेश और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच ट्विटर पर बहस छिड़ गई है। बताया जा रहा है कि फिलीपींस दूतावास के आग्रह के बाद यूथ कॉन्ग्रेस की तरफ से ऑक्सीजन सिलेंडर की मदद किए जाने को लेकर जयराम रमेश ने विदेश मंत्रालय पर तंज कसा है।

जयराम रमेश ने शनिवार (1 मई) को ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “भारतीय युवा कॉन्ग्रेस के प्रयासों के लिए मैं उनका धन्यवाद करना चाहूँगा। एक भारतीय नागरिक होने के नाते मैं यह सोचकर स्तब्ध हो गया हूँ कि अब विदेशी दूतावास से आने वाले एसओएस कॉल, विपक्षी पार्टी की युवा शाखा अटेंड कर रही है। विदेश मंत्रालय सो रहा है क्या।”

जयराम रमेश द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

एक दिन बाद यानी रविवार (2 मई) को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जयराम रमेश के ट्वीट का करारा जवाब देते हुए लिखा, ”विदेश मंत्रालय ने फिलीपींस दूतावास से संपर्क कर पता लगाया था। वहाँ कोरोना का कोई भी मामला नहीं है, बेवजह आपूर्ति की जा रही है। आपको पता है कि सस्ती लोकप्रियता के लिए यह सब कौन कर रहा है। इस तरह से ऑक्सीजन का सिलेंडर बाँटना गलत है, वो भी तब जब जरूरतमंद लोग सिलेंडर के लिए परेशान हो रहे हैं।” एस जयशंकर ने आगे जोर देकर कहा कि कैसे कॉन्ग्रेस पार्टी निम्न राजनीति कर रही है। इसके चलते ही वह जरूरतमंद मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर देने से इनकार कर रही थी।

उन्होंने आगे लिखा, “जयरामजी, विदेश मंत्रालय कभी नहीं सोता है। हमारे लोग दुनियाभर में हैं। हम जानते हैं कि कौन क्या करता है।”

हालाँकि, यह पहला मौका नहीं है जब कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता ने अपनी टिप्पणी के जरिए विवादों को हवा दी है। बता दें कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और वहाँ के अन्य राजनेताओं ने पिछले साल दिसंबर में भारत में किसानों के विरोध प्रदर्शन पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद जयराम रमेश ने तर्क दिया था कि नरेंद्र मोदी ने ह्यूस्टन में ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’ कहा है, इसलिए भारतीय आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप भी उचित है।

जीत की आहट में कोरोना भूले, बंगाल-तमिलनाडु में TMC-DMK के कार्यकर्ता मना रहे जश्न: ECI के आदेश को ठेंगा

जिन 5 राज्यों में आज रविवार (मई 2, 2021) को चुनाव परिणाम आ रहे हैं, उनमें से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु दो सबसे बड़े राज्य हैं। दोनों ही जगह से फिलहाल जीतती दिख रही पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटा कर जश्न मनाने की तस्वीरें सामने आ रही हैं। जहाँ चेन्नई में पार्टी मुख्यालय के सामने ही DMK कार्यकर्ताओं की भीड़ जश्न मनाते देखी गई, वहीं कोलकाता के कालीघाट से TMC वालों की ऐसी ही हरकत करते हुए तस्वीरें आईं है।

तमिलनाडु में DMK सुप्रीमो स्टालिन ने अपील की थी कि कोई भी कार्यकर्ता या नेता जश्न मनाने के लिए सड़कों पर नहीं निकलें। लेकिन पार्टी के मुख्यालय पर ही उनकी इस सलाह को धता बताया जा रहा है। वहाँ जम कर पटाखे भी फोड़े गए। बड़ी संख्या में महिलाएँ एवं पुरुष एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हुए दिखे। तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी AIADMK ने भी अपने कार्यकर्ताओं को ऐसी ही सलाह दे रखी है।

वहीं कोलकाता के कालीघाट से भी ऐसी ही एक वीडियो आई, जिसमें तृणमूल कॉन्ग्रेस के समर्थक जम कर नारेबाजी करते हुए पार्टी को मिली बढ़त का जश्न मना रहे हैं। चुनाव आयोग ने इन घटनाओं का संज्ञान लेते हुए पाँचों राज्यों के अधिकारियों से कहा है कि वो ऐसी प्रत्येक घटनाओं के मामले में FIR दर्ज करें। चुनाव आयोग ने जश्न मनाने की इन घटनाओं को लेकर इन राज्यों के मुख्य सचिवों को विशेष निर्देश दिए हैं।

पश्चिम बंगाल के ही आसनसोल से भी ऐसी ही तस्वीरें सामने आई हैं, जहाँ पार्टी का झंडा लेकर TMC कार्यकर्ता सड़कों पर जश्न मनाते हुए दिखे। बता दें कि मद्रास हाई कोर्ट ने ECI को फटकारते हुए कहा था कि रैलियों की अनुमति देने के लिए उसके अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए। साथ ही 2 मई की मतगणना रोकने की भी चेतावनी दी थी। ECI हाई कोर्ट के इस बयान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गया है।

चुनाव आयोग ने मतगणना के दौरान या इसके बाद होने वाले किसी भी प्रकार के जश्न पर पाबंदी लगा दी थी। सभी दलों से कहा गया था कि वो सड़क पर निकल कर भीड़ न जुटाएँ। देश में कोरोना वायरस संक्रमण की बढ़ती घटनाओं को लेकर चहुँओर से घिरे चुनाव आयोग की आलोचना कई विपक्षी दलों ने भी की थी। इन सबके बावजूद विभिन्न राज्यों में बढ़त में दिख रही पार्टी के कार्यकर्ता मानने को तैयार नहीं दिख रहे।

CM योगी ने 2 करोड़ श्रमिकों को दी सौगात: ₹2 लाख का सुरक्षा बीमा, आयुष्मान भारत से ₹5 लाख, बच्चों को निःशुल्क कोचिंग

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के श्रमिकों को दो बड़ी सौगात दी। सीएम योगी की इन योजनाओं से उत्तर प्रदेश के दो करोड़ मजदूरों को फायदा पहुँचेगा।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा घोषित पहली योजना के तहत राज्य के किसी भी श्रमिक की किसी दुर्घटना में मृत्यु हो जाने या उसका अंग-भंग हो जाने पर या स्थाई विकलांगता के मामले में उसे दो लाख रुपए का सुरक्षा बीमा कवर मिलेगा। वहीं अब तक आयुष्मान भारत योजना में शामिल नहीं हो पाए श्रमिकों को भी पाँच लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मुहैया कराया जाएगा।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पिछले साल कोरोना की पहली लहर के दौरान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत निःशुल्क खाद्यान वितरण की व्यवस्था की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार कोरोना की दूसरी लहर के दौरान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत निःशुल्क खाद्यान वितरण की व्यवस्था पाँच मई से शुरू होगी।

वहीं पिछले साल कोविड के दौरान योगी सरकार ने 40 लाख से अधिक प्रवासी श्रमिकों को रोजगार व अन्य सुविधाएँ मुहैया कराई थीं।

श्रमिकों के बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा और कोचिंग

राज्य के श्रमिकों के बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा मुहैया कराने की योजना का ऐलान भी किया गया। सीएम योगी ने बताया कि प्रदेश के 18 मंडल मुख्यालयों में शुरू होने जा रही अटल आवासीय विद्यालय योजना के तहत प्रदेश के निर्माण श्रमिकों के बच्चों को सीबीएसई आधारिक निःशुल्क आवासीय शिक्षा उपलब्ध करवाई जाएगी।

सीएम योगी ने श्रमिकों के लिए एक और योजना की घोषणा करते हुए कहा कि श्रमिकों के बच्चों को मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त में कोचिंग की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

सीएम योगी ने कहा कि साप्ताहिक कोरोना कर्फ्यू के दौरान औद्योगिक इकाइयाँ चलती रहेंगी। उन्होंने कहा कि कार्यस्थलों पर श्रमिकों को संक्रमण से बचाने को उनके लिए सैनिटाइजर, थर्मल स्कैनिंग, पल्स ऑक्सीमीटर आदि की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही वहाँ कोविड हेल्पडेस्क की व्यवस्था करने को भी कहा गया है।

वेंटिलेंटर पर कॉन्ग्रेस, TMC को ऑक्सीजन: ABP के चुनावी कवरेज पर भड़के यूजर्स, कहा- पीक पर असंवेदनशीलता

आपने कई बार देखा होगा कि क्रिएटिव होने के चक्कर में न्यूज चैनल कुछ ऐसा कर देते हैं जिससे न केवल उनका मजाक बनता है, बल्कि संवेदनाएँ भी आहत होती हैं। कभी टाइम मशीन में बैठकर कवरेज होती है तो कभी लाइव टीवी पर एंकर ही रॉकेट में उड़ने लगता है।

सामान्य दिनों में ये सब मीडिया चैनलों पर दिखना बेहद आम है। लेकिन कोविड जैसे संवेदशील समय में यदि इस तरह के प्रयास किए जाएँ तो थू-थू के अलावा कुछ नहीं मिलेगी। एबीपी के साथ कुछ यही हुआ है।

कोविड की गंभीरता को देखते हुए जहाँ कुछ चैनलों ने चुनावी कवरेज तक पर रोक लगा दी। वहीं एबीपी थोड़ा हटके दिखने के चक्कर में हर नैतिकता भूल गया। इस समय एबीपी के चुनावी कवरेज की कुछ क्लिप्स सोशल मीडिया पर वायरल हैं।

मास्क लगाकर इसमें एंकर को देख सकते हैं कि वो रुझानों का विश्लेषण कर रही हैं। देखा जा सकता है कि कैसे चुनावों को ऑक्सीजन से जोड़कर बंगाल के रुझान बताए गए। क्लिप में एंकर कहती हैं, “देश में ऑक्सीजन के लिए इस समय हाहाकार मचा हुआ है। तो अब ये सीटों की जो ऑक्सीजन है ये किसको मिली ये हम ग्राफिक्स के जरिए अपने दर्शकों को बता रहे हैं।”

इसके बाद क्लिप में पीछे देख सकते हैं कि ऑक्सीजन टैंकर प्लेन से बाहर आता है और एंकर कहती हैं, “इस ऑक्सीजन टैंकर से बीजेपी को बिलकुल ऑक्सीजन नहीं मिली है। सीटों की जो बात हो रही है वो टीएमसी को 194 सीटें मिल रही हैं और कॉन्ग्रेस के हाथ 4 सीटें आई हैं। कॉन्ग्रेस को देख लग रहा है कि वो वेंटिलेटर पर है। उन्हें बिलकुल ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। सीटों की ऑक्सीजन में टीएमसी बाजी मारती दिखाई दे रही है।”

एबीपी न्यूज की इस क्लिप को मशहूर कॉमेडियन सलोनी गौर ने अपने ट्वीट पर शेयर किया है। उन्होंने एबीपी की कवरेज पर हताशा दिखाते हुए कहा कि असंवेदनशीलता यहाँ पीक पर है। स्वाति भासीन नाम की यूजर ने एबीपी की इस क्लिप को देख कहा कि इन लोगों को लगता है कि देश में ऑक्सीजन की कमी एक मजाक है।

‘2 मई को नहीं हो चुनावी कवरेज’: रवीश कुमार ने दिया था ज्ञान, NDTV ठेंगा दिखा सुबह से चला रही दुकान

समाचार चैनल NDTV पहले से ही मोदी विरोधी पत्रकारिता के लिए कुख्यात है। इसके पत्रकार रवीश कुमार सोशल मीडिया से लेकर अपने चैनल तक पर भाजपा विरोधी प्रोपेगंडा को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। जो रवीश कुमार कल तक डींगें हाँक रहे थे कि समाचार चैनलों को रविवार (मई 2, 2021) को आने वाले 5 राज्यों के चुनावी नतीजों को कवर नहीं करना चाहिए, लेकिन आज उनके ही चैनल पर केवल चुनाव की ही चर्चा है।

रवीश कुमार ने ‘भारत समाचार’ की तारीफ़ की थी और अन्य समाचार चैनलों पर निशाना साधते हुए कहा था कि वो चुनाव की कवरेज न करें लेकिन इसकी आड़ में नैतिकता का भी दावा न करें। अपने फेसबुक पोस्ट में रवीश ने लिखा था, “अब सवाल आता है कि क्या चुनावी नतीजों को कवर करना चाहिए? मेरी राय में नहीं करना चाहिए। हमने जिन हुक्मरानों पर भरोसा किया उन्होंने सबको फँसा दिया। कितने परिवारों में कितने लोग खत्म हो गए। आपके हमारे प्रधानमंत्री ने संवेदना के दो शब्द नहीं कहे हैं। चुनाव आयोग भी दोषी है।”

रवीश कुमार ने अपनी राय बताते हुए स्पष्ट लिखा था कि किसी चैनल को चुनावी नतीजे के दिन कवर नहीं करना चाहिए और किसी नेता का इंटरव्यू नहीं चलाना चाहिए क्योंकि ये अब डिज़र्व नहीं करते हैं। उन्होंने दावा किया था कि भाजपा के नेता/समर्थक भी खुद के लिए हॉस्पिटल में बेड्स का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने सलाह दी थी कि चुनावी नतीजों का कवरेज न हो। साथ ही लोगों को न्यूज़ चैनल ऑन न करने की सलाह भी दी थी।

रवीश कुमार ने की थी चुनावी नतीजों को कवर न करने की अपील

लेकिन, क्या खुद रवीश कुमार जिस चैनल में कार्यरत हैं वो उनकी बातों के हिसाब से चल रहा है? जवाब है – नहीं। NDTV पर चुनावी नतीजों की कवरेज हो रही है। खूब हो रही है। नीचे हम जो स्क्रीनशॉट दिखा रहे हैं, उनमें से एक NDTV के अंग्रेजी चैनल का है और एक हिंदी का। ‘NDTV इंडिया’ पर एंकर इस बात पर चटखारे लेते दिखे कि भाजपा पश्चिम बंगाल में 100 के पार जा पाएगी भी या नहीं।

NDTV के अंग्रेजी चैनल पर चुनावी नतीजों की कवरेज
NDTV की हिंदी चैनल पर भी चल रही चुनावी कवरेज

NDTV के इन दोनों चैनलों पर सुबह से ही चुनावी नतीजों के आँकड़े चल रहे हैं और साथ ही इसी पर बातचीत भी हो रही है। हाँ, बीच-बीच में कुछ अन्य ख़बरें दिखा दी जा रही हैं लेकिन आँकड़े लगातार प्रदर्शित हो रहे हैं। दूसरों को चुनावी नतीजों की कवरेज न करने की सलाह देने वाले रवीश कुमार की बात उनका अपना ही चैनल नहीं मानता? या फिर पश्चिम बंगाल में TMC को आगे देख कर उन्होंने मन बदल लिया? ये भी हो सकता है कि रवीश को लगता हो कि किसी को उनका दोहरा रवैया पता नहीं चलेगा।

कोरोना वैक्सीन फैक्ट्री को शिवसेना के गुंडों ने घेरा, पहले दो की धमकी: पूनावाला को ‘आक्रामक मुख्यमंत्रियों’ का भी फोन

देश में लगातार वैक्सीन की माँग बढ़ती जा रही है। इसी बीच, कोविशील्ड वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने कोविड-19 की वैक्सीन की आपूर्ति बढ़ाने को लेकर अपने ऊपर भारी दबाव की बात कही है।

पत्रकार राहुल कंवल ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा है कि अदार पूनावाला ने उन्हें वीडियो भेजे हैं, जिसमें शिव सेना के गुंडे उनकी फैक्ट्री के बाहर खड़े होकर उन्हें धमका रहे थे और वैक्सीन की माँग कर रहे थे।

द टाइम्स को दिए इंटरव्यू में पूनावाला ने यह आरोप लगाया है कि वैक्सीन को लेकर भारत के कई शक्तिशाली लोग उन्हें परेशान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सब भार उनके कंधों पर पड़ रहा है, जबकि यह काम उनके अकेले के वश का नहीं है।

केंद्र सरकार से सिक्योरिटी मिलने के बाद पहली बार इस बारे में बात करते हुए पूनावाला ने बताया कि भारत के पावरफुल लोग आक्रामक रूप से कॉल करके कोविशील्ड वैक्सीन की माँग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास भारत के कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों, व्यावसायिक लोगों के आक्रामक फोन आ रहे हैं। सब के सब उन्हें जल्द से जल्द कोविशील्ड की आपूर्ति के लिए कह रहे हैं।

वहीं, पूनावाला ने इंग्लैंड में अपने बिजनेस पार्टनर के साथ इसको लेकर बैठक की। उन्होंने शनिवार (1 मई) रात को बताया, “इंग्लैंड में हमारे सभी साझेदारों और हितधारकों के साथ एक बैठक हुई। इस बीच, COVISHIELD का उत्पादन पुणे में पूरे जोरों पर है। उन्होंने यह भी संकेत दिए हैं कि वो वैक्सीन के निर्माण के विस्तार की योजना के साथ लंदन आए हैं। जल्द ही भारत वापस लौटूँगा।”

इसके पहले 40 वर्षीय पूनावाला ने बताया था कि वह दबाव के चलते वह अपनी बेटी और पत्नी के साथ लंदन आ गए। एसआईआई के प्रमुख ने कहा, ”मैं यहाँ ज्यादा समय तक इसलिए रुका हूँ, क्योंकि मैं उस स्थिति में फिर से नहीं जाना चाहता। सब कुछ मेरे कंधे पर आ गया है, लेकिन मैं अकेले कुछ नहीं कर सकता। मैं ऐसी स्थिति में नहीं रहना चाहता, जहाँ आप सिर्फ अपना काम करने की कोशिश कर रहे हों और सिर्फ इसलिए कि आप हर किसी की जरूरत को पूरा नहीं कर सकते, आप अंदाजा नहीं लगा सकते कि बदले में वे क्या करेंगे।”

मालूम हो कि कोविशील्ड पहली वैक्सीन है, जिसे डीसीजीआई ने कोरोना के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी थी। कोविशील्ड का उत्पादन दुनिया की वैक्सीन बनाने वाली प्रमुख कंपनियों में से एक सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कर रही है। भारत में जारी टीकाकरण में अभी कोविशील्ड व भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन को ही मुख्य रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। 

दरअसल, कंपनी ने वैक्सीन ब्रिटेन सहित 68 देशों को निर्यात करना शुरू कर दिया था, लेकिन इसी दौरान भारत में कोरोना से स्थिति खराब होने लगी। पूनावाला ने इंटरव्यू में कहा, ”हम वास्तव में सभी की मदद करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि भगवान भी पूर्वानुमान लगा सकते थे कि ऐसा होने वाला था।”

अदार पूनावाला ने ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए कोविशील्ड की कीमत को बढ़ाए जाने के आरोप को नकारते हुए कहा कि यह पूरी तरह से गलत है। उन्होंने इस वैक्सीन को दुनिया भर में सबसे सस्ती वैक्सीन बताया है। उन्होंने कहा, ”हमने मुनाफाखोरी करने के बजाय जो भी बेहतर हो सकता था, वह किया है।”

बता दें कि हाल ही में पूनावाला को केंद्र सरकार ने वाई श्रेणी की सुरक्षा भी मुहैया करवाई है। अब से पूनावाला की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) की होगी। सरकार का यह फैसला सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह द्वारा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लिखे एक पत्र के बाद आया है। पत्र में प्रकाश कुमार सिंह ने लिखा था कि पूनावाला को कई ग्रुप की तरफ से धमकी मिल रही है।

जब से केंद्र सरकार ने टीकाकरण के तृतीय चरण की घोषणा की है, भारत में बनने वाली वैक्सीन की कीमतों को लेकर एक तीखी बहस छिड़ गई है। ऐसा नहीं है कि केवल कुछ राज्य सरकारों ने ही बार-बार वैक्सीन की कीमतों को अधिक बताया। ऐक्टिविस्ट, सिनेमा स्टार और सोशल मीडिया सेलेब ने भी क़ीमतों पर बयान दिए हैं, जिन पर काफी लंबी बहसें हुई हैं। कुछ ऐक्टिविस्ट तो यह माँग भी उठा चुके हैं कि सीरम इंस्टीट्यूट हर भारतीय को मुफ़्त में वैक्सीन दे।