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मुंबई के पूर्व CP परमबीर सिंह पर SC/ST एक्ट के तहत केस, उद्धव सरकार में गृहमंत्री रहे देशमुख के ‘वसूली’ को किया था उजागर

पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। महाराष्ट्र पुलिस के ही एक इंस्पेक्टर भीमराव घडगे की शिकायत पर उनके खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। एफआईआर विदर्भ के अकोला जिले में दर्ज की गई है। पुलिस इंस्पेक्टर भीमराव घडगे की शिकायत पर परमबीर सिंह, डीसीपी पराग मनेरे और 31 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, परमबीर और अन्य पुलिसकर्मियों पर 27 धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई है। इनमें आपराधिक षड्यंत्र, सबूतों को नष्ट करने और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण अधिनियम), 1989 भी शामिल हैं। अकोला पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज कर केस ठाणे शहर पुलिस को हस्तांतरित कर दिया है।

इंस्पेक्टर घडगे ने अपनी शिकायत में सिंह और अन्य अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए हैं। यह मामला तब का है जब वे ठाणे पुलिस में तैनात थे। घडगे 2015-2018 तक ठाणे पुलिस कमिश्नरेट में तैनात थे। उनका आरोप है कि इस दौरान परमबीर सिंह के अधीन कई अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त था। उन्होंने यह भी दावा किया है कि सिंह ने उनसे कुछ ऐसे लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं करने को कहा था, जिन पर एफआईआर दर्ज थी। घडगे का आरोप है कि पिछड़ी जाति के होने के कारण उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।

घडगे फिलहाल अकोला पुलिस नियंत्रण कक्ष में तैनात हैं। उनका आरोप है कि परमबीर सिंह के निर्देशों को मानने से इनकार करने पर उनके खिलाफ पाँच प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें निलंबित कर दिया गया। अपने आरोपों को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राज्य के गृहमंत्री को पत्र भी लिख है।

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस कमिश्नर पद से हटाए जाने के बाद परमबीर सिंह ने सीएम उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा था। इसमें उस समय राज्य के गृहमंत्री रहे अनिल देशमुख पर निलंबित इंस्पेक्टर सचिन वाजे के जरिए वसूली का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि देशमुख ने वाजे को सौ करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट दे रखा था। शुरुआत में टालमटोल के बाद बाद देशमुख को इन आरोपों के कारण इस्तीफा देना पड़ा था। पिछले दिनों सीबीआई ने इस मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। वहीं वाजे इस समय एंटीलिया बम केस में एनआईए की गिरफ्त में है।

मिली रेमडेसिविर की 52000 शीशियाँ, बताया मात्र 2500: दिल्ली हाई कोर्ट ने गलत आँकड़ों पर AAP सरकार को फटकारा

एंटी-वायरल ड्रैग रेमडेसिविर की अनुपलब्धता को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई है। इस ड्रग का प्रयोग सामान्य या गंभीर स्थिति वाले कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए किया जा रहा है। फ़िलहाल इसकी सप्लाई काफी कम है और माँग कई गुना ज्यादा। इस दौरान हाई कोर्ट ने गलत आँकड़े पेश करने के लिए भी AAP सरकार की क्लास लगाई।

दिल्ली सरकार ने दावा किया था कि उसे रेमडेसिविर ड्रग की मात्र 2500 शीशियाँ ही दी गई थीं, जबकि वास्तविकता में उसे 52,000 शीशियाँ उपलब्ध कराई गई थीं। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि ऑक्सीजन सिलिंडरों और दवाओं की जमाखोरी से इन चीजों की बनावटी अनुपलब्धता का माहौल बनता है, जबकि असल में ये उपलब्ध होते हैं। उच्च न्यायालय ने चेताया कि लोग इस तरह की हरकतों में न उलझें।

मंगलवार (अप्रैल 27, 2021) को दिल्ली उच्च-न्यायालय ने AAP सरकार से प्रदेश में हुए RT-PCR टेस्ट्स के आँकड़े भी माँगे थे। चूँकि दिल्ली में RT-PCR टेस्ट्स की संख्या घट रही है और कई प्राइवेट लैब्स को ये टेस्ट करने से मना कर दिया गया है, इसलिए हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की सरकार से इसका कारण भी पूछा है। हाई कोर्ट ने दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी की भी चर्चा की और कहा कि एक दिन भी दिल्ली में एलोकेशन की सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुँची।

कोर्ट ने लंबी दूरी को इसका कारण बताया। उसने केंद्र सरकार से कहा कि लॉजिस्टिक्स को लेकर आ रही समस्याओं को केंद्र सरकार को देखना चाहिए। साथ ही दिल्ली सरकार से शवों को ले जाने के लिए DTC के बसों के इस्तेमाल पर विचार करने को कहा। इसी बीच अपोलो अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद उसके परिजनों ने जम कर हंगामा और तोड़फोड़ की। कोर्ट ने दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण की चर्चा करते हुए इस घटना का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाओं से उन स्वास्थ्यकर्मियों का मनोबल कम होता है, जो बिना थके-रुके लोगों की सेवा कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने कहा, “हमें उम्मीद है कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी। पुलिस-प्रशासन को ऐसी प्रतिकूल घटनाओं को दिमाग में रखते हुए इसके प्रति सतर्क रहना चाहिए और इन्हें रोकने के लिए कार्य करना चाहिए।” ये घटना दिल्ली के सरिता विहार की है, जहाँ मरीज के परिजनों ने हॉस्पिटल कर्मचारियों, डॉक्टरों और नर्सों पर हमले किए। दिल्ली हाई कोर्ट में कोरोना से जुड़े कई मामलों की सुनवाई हो रही है।

कोलकाता में बम फेंकने के साथ शुरू हुआ बंगाल में आखिरी चरण का मतदान, BJP प्रत्याशी ने कहा- मुझे रैली में मारी गई थी गोली

पश्चिम बंगाल में गुरुवार (अप्रैल 29, 2021) को 8वें और आखिरी चरण की सीटों के लिए वोट डाले जा रहे हैं। सुबह 7 बजे से ही मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई। इस चरण में 35 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है। इसके साथ ही 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान संपन्न हो जाएगा। 2 मई को मतगणना होगी। आज शाम 7:30 के बाद विभिन्न खबरिया चैनल अपने-अपने एग्जिट पोल्स के साथ भी सामने आएँगे।

मालदा से भाजपा उम्मीदवार गोपाल चंद्र साहा ने भी मतदान किया। उन्होंने बताया कि अप्रैल 18 को साहापुर में एक सार्वजनिक रैली हुई थी, जिसमें उन्हें गोली मारी गई थी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के बाद वो ठीक हुए। साहा ने कहा कि इस साजिश के पीछे कॉन्ग्रेस या TMC के लोग थे। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जंगलराज है। बता दें कि मालदा पहले से ही एक संवेदनशील इलाका रहा है।

पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान मार्च 27 को हुआ था। इसके बाद  1, 6, 10, 17, 22 और 26 अप्रैल को बाकी के चरणों के मतदान हुए। आज मतदान संपन्न होने के साथ ही 294 सीटों के सभी उम्मीदवारों की किस्मत मतपेटी में बंद हो जाएगी। पश्चिम बंगाल में आखिरी चरण में सुबह 9:31 बजे तक 16% मतदान हो चुका था।

हर चरण की तरह आठवें चरण में भी हिंसा की खबरें आ रही है। नॉर्थ कोलकाता के महजाति सदन ऑडिटोरियम में बम फेंके गए। चुनाव आयोग ने इस घटना पर रिपोर्ट तलब की है। बीरभूम में पोलिंग बूथ संख्या 188 पर EVM में कुछ तकनीकी खराबी के कारण वोटिंग आधे घंटे की देरी से शुरू हुआ। काशीपुर-बेलगछिया में अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने भी मतदान किया। पीएम मोदी ने भी लोगों से लोकतंत्र के इस त्योहार में भाग लेने की अपील की है।

‘माँ के लिए लेकर आया ऑक्सीजन सिलेंडर, VIP के लिए छीनकर ले गई यूपी पुलिस’: जानिए, वायरल वीडियो की हकीकत

टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) के पत्रकार दीपक लवानिया ने बुधवार (28 अप्रैल 2021) को ट्विटर पर एक वीडियो साझा किया। दावा किया कि एक व्यक्ति अपनी माँ के लिए लाए ऑक्सीजन सिलेंडर पुलिस से नहीं ले जाने की गुहार लगाता रहा। लवानिया का दावा था कि पुलिस ने आगरा के निजी अस्पताल से ऑक्सीजन सिलेंडर जब्त कर उसे ‘एक वीआईपी को सप्लाई’ कर दिया। उनके मुताबिक यह यह घटना मंगलवार शाम को हुई थी।

इसके बाद के ट्वीट में, लवानिया ने दावा किया है कि वह आदमी और उसकी माँ जो गंभीर हालत में थे, अब ‘उनका कोई पता’ नहीं है।

यूपी पुलिस ने किया वायरल वीडियो के दावे का खंडन

यूपी पुलिस ने लवानिया के दावों का खंडन किया है। आगरा के एसपी ने कहा कि उपरोक्त वीडियो उपाध्याय हॉस्पिटल का है। कुछ दिनों पहले आगरा में ऑक्सजीन की कमी की वजह से, कुछ लोग अपनों के इलाज के लिए निजी सिलेंडर हॉस्पिटल को दे रहे थे। दो लोग जो सिलेंडर लेकर जा रहे हैं वे वास्तव में खाली थे। पुलिस से निवेदन करता नजर आ रहा व्यक्ति कोविड मरीज का रिश्तेदार है और वास्तव में अपनी माँ के लिए सिलेंडर प्राप्त करने के लिए पुलिसवालों से मदद माँग रहा था।

इस सप्ताह की शुरुआत में, सोशल मीडिया पर एक संदेश वायरल हुआ था जिसमें दावा किया गया था कि गाजियाबाद की एक लड़की ने अपने गुल्लक से पीएम केयर फंड में 5,000 रुपए का दान दिया था, लेकिन खुद ही ऑक्सीजन के इंतजार में मर गई थी। हालाँकि, लड़की के पिता ने खुलासा किया कि उनकी बेटी जीवित और स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

चीनी कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के बीच, भारत में ऑक्सीजन आपूर्ति संकट पैदा हो गया है। हालाँकि, इस समस्या से निपटने की कोशिश जा रही है, क्योंकि प्लान्ट्स में ऑक्सीजन उत्पादन बढ़ाया गया है। साथ ही सरकार ने पूरे भारत में ऑक्सीजन के परिवहन में मदद करने के लिए क्रायोजेनिक टैंक आयात किए हैं। भारतीय रेलवे ‘ऑक्सीजन एक्सप्रेस’ भी चला रही है और ऑक्सीजन संकट से निपटने के लिए इंडियन एयरफोर्स ऑक्सीजन को एयरलिफ्ट कर रही है।

PFI पर बैन की तैयारी में केंद्र सरकार: सुप्रीम कोर्ट को बताया- SIMI से जुड़े हैं इसके पदाधिकारियों के तार

केंद्र सरकार ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI)’ को प्रतिबंधित करने की तैयारी कर रही है। इस कट्टरपंथी इस्लामी संगठन को पहले ही कई राज्यों में बैन किया जा चुका है। बुधवार (अप्रैल 28, 2021) को सुप्रीम कोर्ट को ये जानकारी दी गई। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपनी सूचनाओं के हवाले से ये जानकारी दी। सीएए विरोधी हिंसा और दिल्ली दंगों के दौरान भी इस संगठन का नाम आया था।

तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उन्होंने बताया कि केरल का पत्रकार सिद्दीकी कप्पन PFI से जुड़ा हुआ है। इस संगठन के कई पदाधिकारी पहले से ही प्रतिबंधित संगठन ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI)’ से सम्बन्ध रखते हैं।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तुषार मेहता से पूछा कि क्या PFI को प्रतिबंधित किया गया है? मेहता ने बताया कि ये कई राज्यों में प्रतिबंधित है। साथ ही उन्होंने जानकारी दी, “जहाँ तक मुझे सूचना है, केंद्र सरकार ने भी इसे प्रतिबंधित करने की प्रक्रिया चालू कर दी है।” इसके बाद पीठ ने नोट किया कि PFI को अब तक प्रतिबंधित नहीं किया गया है।

ये पूरा मामला हाथरस केस से जुड़ा हुआ है। पिछले साल हाथरस में एक दलित युवती की हत्या के बाद जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन की आड़ में व्यापक हिंसा की साजिश रची गई थी। इसी दौरान कप्पन को भी वहाँ जाते हुए गिरफ्तार किया गया था।

सिद्दीकी कप्पन का कहना है कि वो कई बीमारियों से जूझ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि उसे दिल्ली के किसी अच्छे अस्पताल में बेहतर इलाज के लिए शिफ्ट किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने ‘मूलभूत मानवाधिकार’ की बात करते हुए यूपी सरकार को सिद्दीकी कप्पन के बेहतर इलाज का निर्देश दिया। ‘केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (KUWJ)’ और कप्पन की पत्नी ने उसकी रिहाई के लिए याचिका दायर की है।

सुप्रीम कोर्ट ने सिद्दीकी कप्पन से कहा कि वो अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देने या फिर अन्य प्रकार की राहत के लिए उपयुक्त संस्था से संपर्क करे। सिद्दीकी कप्पन सहित PFI से जुड़े 4 आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। उसके खिलाफ IPC और UAPA की विभिन्न धाराएँ लगाई गई हैं। उसके अलावा मुजफ्फरनगर से अतिकुर रहमान, बहराइच से मसूद अहमद और रामपुर से आलम को गिरफ्तार किया गया था।

कॉन्ग्रेस शासित पाँच राज्य कोरोना से बेहाल, लेकिन पी चिदंबरम को चाहिए डॉ. हर्षवर्धन की इस्तीफा, लोगों को विद्रोह के लिए उकसाया

कॉन्ग्रेस ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के एक बयान को लेकर बुधवार (अप्रैल 28, 2021) को उन पर निशाना साधा और उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त करने की माँग की। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने यह भी कहा कि भारत के सभी लोगों को मूर्ख समझ रही सरकार के खिलाफ जनता को विद्रोह कर देना चाहिए। 

उन्होंने ट्वीट किया, ”मैं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के बयान से आक्रोशित हूँ। मैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान से भी आक्रोशित हूँ कि प्रदेश में टीके की कोई कमी नहीं है।” चिदंबरम ने कहा कि जनता को उस सरकार के खिलाफ विद्रोह करना चाहिए जो यह मानकर चल रही है कि भारत के सभी लोग मूर्ख हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या सभी टीवी चैनल झूठे व्यूजुअल्स चला रहे हैं? क्या सभी न्यूजपेपर्स की खबरें गलत हैं? क्या सभी डॉक्टर्स झूठ बोल रहे हैं? परिवार के सदस्य क्या गलत बयान दे रहे हैं? सभी तस्वीरें क्या झूठी हैं? 

वहीं, कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा, ”अस्पतालों में उपचार नहीं मिल रहा है। ऑक्सीजन की कमी बरकरार है। लोग त्राहिमाम कर रहे हैं। श्मशान और कब्रिस्तानों में जगह नहीं बची है। इस स्थिति के बावजूद स्वास्थ्य मंत्री कहते हैं कि इस साल स्थिति पिछले साल से बेहतर है।”

उन्होंने आरोप लगाया, ”ऐसा लगता है कि वो मानवता का मूल धर्म भूल चुके हैं। सत्ता के अहंकार में इतने चूर हैं कि वो लोगों की वेदना भूल गए हैं।” सुप्रिया ने कहा, ”हर्षवर्धन के अंदर नैतिकता नहीं है कि इस्तीफा देंगे। इनको तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए।” गौरतलब है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन मंगलवार को एक वेबिनार में कहा था कि 2021 में देश पिछले साल की तुलना में महामारी को हराने के लिए अधिक अनुभव के साथ मानसिक और भौतिक रूप से बेहतर तैयार है।

बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर से पूरा देश जूझ रहा है। कहीं ऑक्सीजन की कमी है तो कहीं मरीजों के लिए अस्पतालों में बेड कम पड़ने लगे हैं। हर दिन कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या रिकॉर्ड तोड़ रही है और देश की स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव पड़ रहा है, जिससे अफरा-तफरी दिखाई दे रही है। ऐसे में हालात ने सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर ऐसा क्‍या हुआ कि करोना ने इतना खतरनाक रूप धारण कर लिया और पिछले साल से भी इस साल की स्थिति ज्‍यादा खराब हो गई।

जब पिछले कुछ महीनों पर नजर डालते हैं तो पता चलता है कि कोरोना संक्रमण के मामले कम आने से कई राज्यों ने मान लिया था कि अब कोरोना जा चुका है। कोरोना के मरीज न होने के कारण राज्‍य सरकारों ने जो कोविड सेंटर पिछली बार तैयार किए थे उसे बंद कर दिया। वहाँ लगे वेंटिलेटर और मशीनों को पैक कर दिया गया। जब जनवरी में वैक्सीनेशन की शुरुआत हुई तो इसको कोरोना पर अंतिम प्रहार माना गया। लेकिन इसके साथ ही शुरू हुई लापरवाही और सियासत।

कॉन्ग्रेस शासित राज्यों ने वैक्सीन को लेकर सियासत शुरू की। केंद्र सरकार पर हमले होने लगे। जहाँ महाराष्ट्र की उद्धव सरकार वसूली और अन्य मामलों पर ध्यान देने लगी, तो वहीं दिल्ली की केजरीवाल सरकार को पंजाब और उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव नजर आने लगा। इस सियासी बिसात पर किसान नेताओं को आगे किया गया और दिल्ली को बंधक बना लिया गया। कृषि कानूनों के विऱोध के नाम पर सियासत को प्राथमिकता दी गई और कोरोना को नजरअंदाज किया जाने लगा। इसका नतीजा हुआ कि कोरोना ने फिर वापसी की।

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी है, तो मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है। यहाँ की गतिविधियों का असर पूरे देश पर पड़ता है। कोरोना की दूसरी लहर ने सबसे पहले इन दो शहरों को अपने आगोश में लिया। इसके बाद छत्तीसगढ़ में हालता बिड़ने लगे। राजस्थान और अन्य राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने लगे। 1 अप्रैल, 2021 के बाद से इतनी तेजी से संक्रमण हुआ कि पूरे देश में हाहाकार मच गया। कॉन्ग्रेस शासित महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हालात काफी बिगड़ गए। पूरे देश के कोरोना संक्रमण के कुल मामलों में आधे से अधिक कॉन्ग्रेस शासित पाँच राज्यों में है। मगर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम अपनी पार्टी के राज्यों में सुधार करने की बजाय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन पर निशाना साध रहे हैं और जनता को विद्रोह के लिए उकसा रहे हैं।

मोदी सरकार ने महामारी के मामले में जरूरी चीजों से लैस करने के लिए पेशेवर तरीके से कदम उठाए हैं। महामारी की दूसरी लहर के नागरिकों की दिक्कतों और कष्टों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। केंद्र ने कहा, रेमडेसिविर की माँग बढ़ने पर सेंट्रल औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने सात मैन्युफैक्चरर्स की 22 मैन्युफैक्चरिंग साइट को अनुमति दी। साथ ही 12 अप्रैल को तत्काल अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग साइट को मंजूरी दी है। सरकार ने कहा कि हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

आइए जानते हैं मोदी सरकार ऑक्सीजन के लिए क्या कर रही है ?

  • 7 अप्रैल, 2020 को मेडिकल ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए 24 घंटे में लाइसेंस देने का इंतजाम किया।
  • अप्रैल-मई 2020 में 1,02,400 ऑक्सीजन सिलेंडर राज्यों को दिए गए।
  • 20 सितंबर, 2020 को लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन के दाम निर्धारित किए गए।
  • 5 जनवरी, 2021 को 162 PSA प्लांट लगाने के लिए 201 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
  • 16 अप्रैल, 2021 को 50, 000 एमटी ऑक्सीजन के लिए ग्लोबल टेंडर दिए गए।
  • 18 अप्रैल, 2021 को ऑक्सीजन के औद्योगिक इस्तेमाल पर रोक लगाई गई और ग्रीन कॉरिडोर बनाकर ऑक्सीजन एक्सप्रेस की शुरुआत की गई।
  • 22 अप्रैल, 2021 को ‘ऑपरेशन ऑक्सीजन’ की शुरुआत की गई।
  • 25 अप्रैल, 2021 को हर जिले में ऑक्सीजन प्लांट लगाने का फैसला लिया गया।

WTF! लड़की ने टॉयलेट सीट में आइसक्रीम, कैंडी डालकर दोस्तों के लिए बना दिया जूस: Video वायरल

कोरोना वायरस के कारण केवल भारत में हाहाकार नहीं मचा बल्कि विदेशों में लोग इस संक्रमण से बुरी तरह प्रभावित हैं। लोग कोशिश कर रहे हैं कि जितना स्वच्छता अपनाई जाए उतना बेहतर है। हालाँकि, इस बीच सोशल मीडिया पर एक बड़ी अजीब वीडियो वायरल हुई है। वीडियो में हाइजिन का ख्याल रखना तो दूर एक लड़की टॉयलेट पॉट में अपने मेहमानों के लिए फ्रूट ड्रिंक तैयार कर रही है।

ये वीडियो 3 मिनट 7 सेकेंड की है। हम देख सकते हैं कि लड़की कैसे पहले पॉट में भरे पानी को कपड़ा लगाकर बंद करती है। फिर उसमें तमाम बर्फ डालती है। इसके बाद आइसक्रीम डालती है। उसमें कैंडी ऐड करती है। फिर फ्लश टैंक में कुछ रंग बिरंगी कैंडी डालती है। उसे जूस ऐड करती है। कोल्ड ड्रिंक मिलाती है। 

वीडियो में सुन सकते हैं कि लड़की ये सब करते हुए वीडियो बनाने वालों को ये भी कह रही है कि ये बहुत अच्छा तरीका है। देखो रंग भी कितना बढ़िया आ रहा है। इसके बाद टैंक बंद करके वह उसे खुद टेस्ट करती है। उसे अच्छा बताती है। फिर फ्लश ऑन कर देती है। उसका दोस्त इस तरीके को गजब बताता है और तीनों मिलकर उसे सर्व करने के लिए ग्लास में सेपरेट कर लेते हैं।

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बाद में यह ड्रिंक बाहर खड़े साथियों को पिला दी जाती है। सब चीयर्स करके इसे खुशी खुशी पीना शुरू करते हैं, तभी वह बताती है कि उसने ये कैसे बनाया। सब जाकर टॉयलेट सीट देखते हैं और ड्रिंक को उसी में डाल देते हैं। लड़की सफाई देती रहती है कि उसने ये बनाने से पहले पॉट को क्लिन किया था। हालाँकि, दोस्तों का मुँह देख कर साफ पता चल रहा है कि उनके साथ कितना घटिया मजाक हुआ है।

इस वीडियो को द एना शो नाम के फेकबुक अकॉउंट पर 21 अप्रैल को अपलोड किया गया। अब तक इस पर 39 हजार रिएक्शन हैं। 57 हजार से ज्यादा कमेंट हैं। टाइमलाइन पर लिखा है कि ये वीडियो मनोरंजन के लिहाज से बनाई गई। लेकिन लोग इसे देख अपना गुस्सा उतार रहे हैं।

एडवर्ड नाम के यूजर ने पूछा कि वो खुद एक लाइंसेस वाला प्लंबर है और उसे ये बहुत बेहूदा लगा। उसने पूछा, “क्या तुम जानती हो इस टॉयलेट सीट पर कितने संक्रमण होंगे? कोई मतलब नहीं कि तुमने इसे साफ किया या नहीं। ये इसके लिए नहीं बनी।” वहीं कई यूजर ने इसे घटिया करार देते हुए कहा कि ये कोई मेंटल इशू है। क्या हो अगर बच्चे इसे देख घर पर करने लगे?

बता दें कि इंटरनेट आज के जमाने में हर यूजर पर एक गहरा प्रभाव छोड़ता है। कोई अजीब ट्रेंड यहाँ शुरू होता है कि लोग उसी पर वीडियो बनाने लगते हैं। इस समय कोरोना संक्रमण बुरी तरह फैला है। अगर कोई भी यूजर ऐसे घिनौने मजाक करने की सोचता है तो सोचिए दूसरे की सेहत से कितना बड़ा खिलवाड़ होगा।

पिछले वर्ष भी ऐसे मामले उजागर हुए थे। कोरोना चैलेंज के नाम पर युवक टॉयलेट सीट चाट रहा था। कुछ दिन बाद पता चला कि वह कोरोना संक्रमित हो गया है। ऐसे ही एक अन्य टिकटॉक स्टार ने फ्लाइट में टॉयलेट सीट को चाटा था और खुशी से विक्ट्री साइन बनाती भी दिखी थी।।

गुल्लक तोड़कर PM CARES FUND में दान करने वाली बच्ची स्वस्थ, लगातार एक जैसे ट्वीट कर फैलाई गई थी उसके मौत की झूठी खबर

यूपी पुलिस ने बुधवार (अप्रैल 28, 2021) को ट्विटर पर जानकारी दी कि गाजियाबाद की एक लड़की की मौत के बारे में किए सभी ट्वीट्स फर्जी थे। बता दें कि हाल ही में, कई ट्वीट वायरल हुए थे, जिसमें यह दावा किया गया था कि एक लड़की ने अपने गुल्लक को तोड़ कर पीएम केयर्स फंड को 5,000 रुपए का दान दिया, लेकिन ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण उसकी मृत्यु हो गई।

इस तरह के कुछ ट्वीट्स में यह भी दावा किया गया कि लड़की गाजियाबाद की थी। हालाँकि, यह सच नहीं है। यूपी पुलिस ने बुधवार को मामलों के बारे में जानकारी देने के लिए ट्विटर का सहारा लिया।

उत्तर प्रदेश के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट करते हुए बताया गया कि कोविड महामारी के बीच, कुछ निहित स्वार्थ प्रशासन को बदनाम करने के लिए त्रासदियों से संबंधित फेक न्यूज फैला रहे हैं।

क्लिप में, लड़की के पिता का कहना है कि उनकी 18 साल की बेटी स्वस्थ है और फिलहाल वह अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुकी है।

यूपी पुलिस ने आरोप लगाया है कि बदमाशों द्वारा अफवाह फैलाने और COVID-19 के फैलने के बीच दहशत पैदा करने के लिए ‘टूल किट ट्वीट’ का इस्तेमाल किया जा रहा था। एक अन्य ट्वीट में, पुलिस ने कहा कि नोएडा पुलिस के बारे में ऐसे ही ’टूल किट ट्वीट’ का इस्तेमाल कर कई लोगों ने प्रशासन को बदनाम करने के लिए त्रासदियों के बारे में फर्जी खबरें पोस्ट कीं। इसमें यह भी कहा गया है कि इंटरनेट पर अफवाह फैलाने के लिए जिम्मेदार दोषियों के खिलाफ मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

यूपी पुलिस सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ दर्ज किया एफआईआर

पिछले शनिवार को, उत्तर प्रदेश पुलिस ने यूपी सरकार और नोएडा पुलिस की छवि को धूमिल करने के लिए फर्जी एकाउंट्स का उपयोग करके अफवाह फैलाने और कोविड -19 के प्रकोप के बीच दहशत पैदा करने की कोशिश के लिए सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की

बता दें कि जिन ट्विट्स के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई, उसमें सोशल मीडिया यूजर्स ने जोर देकर महामारी के कारण उनके प्रियजनों की मौत का दोष प्रशासन पर लगाया था। ट्वीट में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, पीएम मोदी और कई अन्य प्रमुख हस्तियों का जिक्र किया गया था। पुलिस ने कॉपी-पेस्ट किए गए संदेशों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया वेबसाइटों पर भी शेयर किए। स्क्रीनशॉट में महामारी के कारण अपने प्रियजनों के नुकसान पर शोक व्यक्त करते हुए कई यूजर्स के ट्वीट अक्षरश: एक जैसे थे।

पीएम केयर्स से 1 लाख पोर्टेबल ऑक्सीजन कॅान्संट्रेटर के लिए PM मोदी ने जारी किया फंड, नाइट्रोजन टैंकर बदले जाएँगे ऑक्सीजन टैंकर में

देश में कोरोनावायरस संक्रमण की दूसरी लहर के बीच कई राज्यों से ऑक्सीजन की आपूर्ति और उसके परिवहन से संबंधित टैंकरों की कमी सामने आ रही है। ऐसे में ऑक्सीजन की इन समस्याओं से निपटने के लिए दो प्रमुख फैसले लिए गए हैं। पहला फैसला पीएम केयर्स फंड से 1 लाख पोर्टेबल ऑक्सीजन कॅान्संट्रेटर की खरीद और ऑक्सीजन संयंत्रों की स्थापना का है और दूसरा फैसला यह है कि लिक्विड नाइट्रोजन गैस के टैंकरों को लिक्विड ऑक्सीजन टैंकरों में बदलने की अनुमति दे दी गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (28 अप्रैल) को पीएम केयर्स फंड से 1 लाख पोर्टेबल ऑक्सीजन कॅान्संट्रेटर की खरीद को अनुमति दे दी है। पीएम मोदी ने यह भी कहा है कि यह पोर्टेबल ऑक्सीजन कॅान्संट्रेटर शीघ्रता से खरीदे जाएँ और जिन राज्यों में संक्रमित मरीजों की संख्या अधिक है उन्हें उपलब्ध कराया जाए।

इससे पहले पीएम केयर्स फंड से 713 प्रेशर स्विंग एडसॉरप्शन (PSA) ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए फंड जारी किया गया था लेकिन आज 500 ऐसे ही PSA ऑक्सीजन प्लांट्स के लिए फिर से फंड जारी किया गया है।

ऑक्सीजन के संयंत्रों की स्थापना के साथ ही उनके त्वरित परिवहन के लिए भी सरकार लगातार प्रयास कर रही है। ऑक्सीजन के परिवहन में उपयोगी टैंकरों की कमी को दूर करने के लिए निर्णय लिया गया है कि लिक्विड नाइट्रोजन गैस (LNG) टैंकरों को लिक्विड ऑक्सीजन टैंकरों में बदल दिया जाएगा।

हालाँकि, यह प्रक्रिया संवेदनशील और खतरनाक है, ऐसे में भारत सरकार ने LNG टैंकरों को ऑक्सीजन टैंकर में परिवर्तित करने की प्रक्रिया के लिए कुछ विशेष स्टैन्डर्ड प्रोसीजर ऑपरेशन (SOP) जारी किए हैं। पेट्रोलियम एण्ड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) ने जानकारी देते हुए बताया है कि LNG टैंकरों को ऑक्सीजन टैंकर में बदलने की प्रक्रिया खतरनाक तो है लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया गया है। PESO के अनुसार वर्तमान में देश में 138 ऐसे टैंकर हैं। LNG टैंकरों को ऑक्सीजन सेवा के लिए सहज बनाने के लिए PESO द्वारा जारी किए गए SOP की संक्षिप्त जानकारी यहाँ दी जा रही है :

  • SOP में कहा गया है कि सबसे पहले टैंकरों को गरम करके हइड्रोकार्बन फ्री नाइट्रोजन से शुद्ध किया जाएगा।
  • इसके बाद यह सुनिश्चित किया जाएगा कि टैंकर का एक छोटा से छोटा हिस्सा भी हइड्रोकार्बन रहित हो जाए।
  • इस पूरी प्रक्रिया में दक्ष एवं अनुभवी व्यक्तियों को ही जिम्मेदारी दी जाएगी।
  • टैंकर के वॉल्व, पाइप और अन्य भागों को ऑक्सीजन के अनुकूल बनाया जाएगा अथवा ऐसे उपकरणों का उपयोग किया जाएगा जो ऑक्सीजन के अनुकूल हैं।
  • SOP में यह भी कहा गया है कि LNG टैंकरों को ऑक्सीजन टैंकर में बदलने की प्रक्रिया की जानकारी PESO को उपलब्ध करानी होगी। आवेदक को PESO के द्वारा जारी की गई SOP के अनुसार ही प्रक्रिया को अंजाम देना होगा।

PESO के द्वारा जारी की गई SOP की जानकारी विस्तृत रूप से PESO की अधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है।

भारत में 27 अप्रैल को 3,62,913 नए संक्रमित मरीज मिले जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,79,88,793 हो गई है। देश में वर्तमान में 29,71,959 सक्रिय मरीज हैं। हालाँकि 27 अप्रैल को ही देश भर में 2,62,539 मरीज स्वस्थ हुए।

क्लबहाउस चर्चा में पत्रकार साक्षी जोशी ने माना- ‘बीजेपी ने बंगाल में जमीन पर किया है बहुत काम, हासिल कर सकती है बढ़त’

हाल ही में प्रशांत किशोर के साथ क्लबहाउस चर्चा के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बॉथरूम ब्रेक और टॉयलेट रूटीन पूछने वाली पत्रकार साक्षी जोशी ने माना है कि बंगाल चुनावों में बीजेपी को बढ़त मिल सकती है और ऐसा इसलिए है क्योंकि उसने जमीन पर सच में काफी काम किया है।

ट्विटर पर वायरल हो रही उनकी एक बातचीत में साक्षी जोशी कहती हैं, ”जिस तरह से उन्होंने पश्चिम बंगाल में जगह बनाई है। सोचिए जिस पार्टी की राज्य में कोई जगह नहीं थी से उस जगह पहुँचना जहाँ वे आज हैं। आपको इसका श्रेय बीजेपी को देना ही होगा। उन्होंने लेफ्ट को किनारे लगा दिया है, राज्य में कोई भी कॉन्ग्रेस पार्टी के बारे में बात नहीं कर रहा है।”

साक्षी ने बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी द्वारा जमीन पर किए गए काम की तारीफ करते हुए कहा, आप लोगों को बीजेपी के बारे में बात करते हुए पाते हैं। लड़ाई बीजेपी और टीएमसी के बीच है। यह सब उनकी कड़ी मेहनत के कारण है। उनका कैडर बहुत मजबूत है।

जोशी ने कॉन्ग्रेस पार्टी की भी आलोचना की, कुछ ट्वीट पोस्ट करने से जमीन पर काम नहीं होता है। उन्होंने कहा कि बीजेपी को जमीन पर लोगों से समर्थन मिल रहा है क्योंकि उन्होंने उनके लिए काम किया है।

बीजेपी की कट्टर आलोचक रहीं साक्षी जोशी की पार्टी के लिए ये तारीफ भरे शब्द, एक और ऑडियो बातचीत के कुछ दिनों बाद आए हैं, जिसका वह हिस्सा थी पर लीक हो गया था। उस ऑडियो बातचीत में, चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कथित तौर पर स्वीकार किया था कि उनके द्वारा किए गए एक आंतरिक सर्वेक्षण में सामने आया कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी जीत रही है।

7 अप्रैल को, लुटियंस के पत्रकारों और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर के बीच एक क्लब हाउस की बातचीत के ऑडियो क्लिप ट्विटर पर वायरल हुए थे। सत्तारूढ़ टीएमसी के लिए काम कर रहे किशोर ने स्वीकार किया था कि उनके आंतरिक सर्वेक्षण के नतीजे पश्चिम बंगाल राज्य विधान सभा चुनावों में भाजपा की आरामदायक जीत का संकेत दे रहे थे।

जैसे-जैसे बातचीत का ऑडियो जंगल की आग की तरह फैला, किशोर और उस चर्चा में हिस्सा लेने वाले साक्षी जोशी समेत सभी पत्रकार यह कहते हुए डैमेज कंट्रोल में जुट गए कि उन्होंने बीजेपी की जीत की भविष्यवाणी नहीं की थी।

साक्षी जोशी ने पूछी थी ममता बनर्जी की टॉयलेट रूटीन

उस बातचीत का सबसे मजेदार पल तब आया जब साक्षी जोशी ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की टॉयलेट रूटीन के बारे में पूछा। जोशी टॉयलेट पर नियंत्रण करने की ममता बनर्जी की क्षमता से प्रभावित दिखीं।

उन्होंने पूछा, “मैं एक महिला के रूप में सोच रही थी। ममता बनर्जी हेलीकॉप्टर में आती हैं, एक घंटे मंच पर बोलती हैं, अपने हेलीकॉप्टर में लौटती हैं और फिर एक अलग जगह पर लैंड करती हैं। वहाँ भी वह मंच पर एक घंटे तक बोलती है। वह वॉशरूम कब जाती हैं? वह अपने लिए कब समय निकालती हैं? यही मेरा सवाल है।”

जोशी ने कहा, ”मैं सोच रही थी कि हमें (पत्रकारों को) अधिक गर्मी और अधिक मात्रा में पानी के सेवन के कारण (बार-बार वॉशरूम) जाना होता है। हमें कहीं न कहीं जाना होता है। मैंने उन्हें कभी कोई ब्रेक लेते नहीं देखा।” साक्षी के इस सवाल पर शर्मिंदा प्रशांत किशोर ने मजाक में पूछा, “क्या मुझसे इसका भी जवाब देने की उम्मीद है?”