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दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों की ‘साजिशकर्ता’ नताशा नरवाल को 3 हफ्तों की अंतरिम जमानत, Covid-19 से हुई पिता की मौत

फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सीएए और हिन्दू विरोधी दंगों में साजिश रचने के आरोप में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद ‘पिंजरा तोड़’ की कार्यकर्ता नताशा नरवाल को दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार (10 मई) को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी। उन्हें यह जमानत अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए दी गई है जिनकी कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मृत्यु हो गई थी।

एक दिन पहले ही नताशा के पिता महावीर नरवाल की मृत्यु कोरोना वायरस के चलते हो गई। महावीर नरवाल भारतीय मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPIM) के वरिष्ठ सदस्य थे। नताशा नरवाल के भाई आकाश भी कोरोना वायरस से संक्रमित हैं, इसी कारण नताशा को दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत दी। हालाँकि दिल्ली पुलिस ने भी मानवीय आधार पर नताशा की जमानत याचिका का कोई विरोध नहीं किया।

आपको बता दें कि सीएए विरोधी और पिंजरा तोड़ की कार्यकर्ता नताशा नरवाल मई 2020 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन पर फरवरी 2020 में हुए हिन्दू विरोधी दिल्ली दंगों में साजिश रचने का गंभीर आरोप है। नताशा पर UAPA के तहत मामला दर्ज हुआ था।

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिन्दू विरोधी हिंसा भड़क उठी थी। सीएए के विरोध में महीनों से जारी आंदोलन फरवरी 2020 में हिंसक हो गया था। तीन दिनों तक चली इस हिन्दू विरोधी हिंसा में 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। दिल्ली की गलियों में हो रही इस हिंसा में इस्लामी भीड़ ने ऐसा क्रूर प्रदर्शन किया था, जो हाल के दिनों में नहीं देखने को मिला था।  

गैर बीजेपी मुख्यमंत्रियों की ‘हरकतों’ में मोदी विरोध का ‘हीरो’ तलाशता इकोसिस्टम: संघीय ढाँचे में राजनीतिक परंपराओं की ये कैसी नींव?

तीसरी बार सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीन पत्र लिख चुकी हैं। पहले पत्र में उन्होंने केंद्र सरकार से अपने राज्य के लिए कोविड की महामारी से निपटने के लिए अधिक ऑक्सीजन, दवाइयाँ और वैक्सीन की माँग की। दूसरे पत्र में अधिक ऑक्सीजन की माँग करते हुए उन्होंने लिखा कि यदि राज्य के लिए मेडिकल ऑक्सीजन की मात्रा न बढ़ाई गई तो अधिक लोगों की मौत हो सकती है। तीसरे पत्र में उन्होंने लिखा कि केंद्र सरकार कोविड संबंधित दवाइयों के साथ-साथ ऑक्सीजन टैंक, क्रायोजेनिक टैंक, टैंकर, कॉन्सेंट्रेटर और सिलेंडर पर टैक्स की छूट दे। साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल में उत्पादित ऑक्सीजन से दूसरे राज्यों का कोटा बढ़ाने पर केंद्र सरकार की आलोचना की।

केंद्र सरकार के सामने ये माँगें रखने के बाद वे एक माँग लेकर सुप्रीम कोर्ट भी पहुँच गई हैं। सुप्रीम कोर्ट से उनकी माँग है कि केंद्र द्वारा 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के लिए घोषित टीकाकरण अभियान पर रोक लगे और एक नया यूनिवर्सल टीकाकरण अभियान शुरू किया जाए जिसमें सबका मुफ्त में टीकाकरण हो।  

केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय की ओर से उनके एक पत्र के उत्तर में बताया गया कि कोविड की रोकथाम और इलाज के लिए देश में बनने वाली दवाइयों और उपकरणों पर जीएसटी आवश्यक क्यों है। साथ ही कोविड की राहत सामग्री, आयात होने वाले उपकरणों, दवाइयों और संबंधित चीजों पर आयात शुल्क 30 जून तक हटा लिया गया है।

बढ़ते संक्रमण को देखते हुए किसी भी राज्य के लिए अधिक ऑक्सीजन की माँग स्वाभाविक है। पर इस माँग को कैसे जायज ठहराया जा सकता है कि केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल में उत्पादित ऑक्सीजन से अन्य राज्यों का कोटा न बढ़ाए? इस बात को देखते हुए कि ऑक्सीजन का उत्पादन अन्य राज्यों में भी होता है, कल और राज्य ऐसी माँगे उठाने लगेंगे तो उसका क्या परिणाम होगा?

ओडिशा से देश के अन्य राज्यों को ऑक्सीजन मिल रही है। क्या ऐसी ही माँग ओडिशा से आई? वेदांता को उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु के उसके प्लांट में ऑक्सीजन के उत्पादन की अनुमति दी ताकि बढ़ते संक्रमण के चलते ऑक्सीजन की कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सके। पश्चिम बंगाल से प्रभावित होकर यदि तमिलनाडु भी यह माँग कर दे तो?

जिन राज्यों में वैक्सीन का उत्पादन होता है, क्या वे राज्य माँग कर सकते है कि चूँकि वैक्सीन उन राज्यों में बनती है इसलिए उस पर पहला अधिकार उनका है? वहाँ के नागरिकों के टीकाकरण के बाद यदि वैक्सीन बची तभी दूसरे राज्यों को दी जा सकेगी? क्या होगा यदि दवाइयों का उत्पादन करने वाले राज्य यह माँग करें कि दवाइयाँ पहले उन राज्य के नागरिकों को मिलेंगी और बाकी राज्यों को उसी स्थिति में मिलेंगी जब अतिरिक्त होंगी?

प्रश्न यह उठता है कि भारत के संघीय ढाँचे में यह कैसी राजनीतिक परंपराओं की नींव रखी जा रही है? अपने ही पत्र में खुद ममता बनर्जी लिखती हैं कि महामारी से यदि हम मिलकर लड़ेंगे तभी उसे परास्त कर सकेंगे। ऐसी माँगों से मिलकर लड़ने वाली सोच की ख़ुशबू आ रही है? यह कैसा मिलकर लड़ना है जिसमें संघीय ढाँचे, उद्योग और व्यापार के मूलभूत नियमों और परंपराओं को ताक पर रखने की कोशिशें आरंभ हो गई हैं?

दवाइयों, उपकरणों और संबंधित चीजों पर आयात शुल्क हटाने की माँग पर केंद्र सरकार की ओर से यह बताया गया कि शुल्क पहले ही हटा लिया गया है। एक राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखने से पहले क्या यह जानकारी नहीं ले लेनी चाहिए कि जिन शुल्कों को वे हटाने की माँग कर रही हैं वे वर्तमान में लगते हैं या नहीं? यह जानकारी लेने में क्या समस्या है कि जिन शुल्क को हटाने की माँग होने जा रही है, उन्हें लेकर वर्तमान सरकारी नीति क्या है? यह जानना कितना कठिन है?

इन मुख्यमंत्रियों के साथ ‘सहानुभूति’ रखने वाला मीडिया ऐसे पत्र पर बढ़-चढ़कर रिपोर्टिंग करता है। लेकिन इन पत्रों के जवाब गोल कर जाता है। विरोधी मुख्यमंत्रियों के ऐसे प्रश्नों पर जो हल्ला मचाया जाता है उसे लेकर आम नागरिकों के मन में एक धारणा जन्म लेती है कि केंद्र सरकार इतनी ख़तरनाक महामारी से लड़ने को लेकर उतनी गंभीर नहीं है जितने राज्यों के ये मुख्यमंत्री हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति दिल्ली उच्च न्यायालय में दिखाई दी जब दिल्ली सरकार के वकील ने माँग रखी कि न्यायालय केंद्र सरकार को आदेश देकर रेमडेसिविर के निर्यात पर रोक लगाए। जवाब में उन्हें जब यह सुनने को मिला कि निर्यात पहले से ही बंद है तो उसके बाद उनके पास कुछ कहने को नहीं था।

इस तरह से उठाए जाने वाले प्रश्न क्या अनभिज्ञता का परिणाम हैं? यदि यह राज्य सरकारों की अनभिज्ञता का ही परिणाम है तो क्या राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों की ज़िम्मेदारी नहीं बनती कि वे अपना होमवर्क करके प्रधानमंत्री को पत्र लिखें? पत्र लिखने की ऐसी क्या जल्दी है कि एक मुख्यमंत्री एक ही विषय पर सप्ताह भर में तीन पत्र लिखे, साथ मिलकर काम करने की वकालत भी करे और उसके बाद भी अपनी एक माँग लेकर सुप्रीम कोर्ट भी पहुँच जाए?

दरअसल इस तरह की घटनाएँ केंद्र विरोधी राज्यों की सोच, उनकी प्राथमिकता और उनकी गंभीरता दर्शाती हैं। वे ऐसी हरकतें कर खुद कुछ करते हुए दिखना चाहते हैं, साथ ही यह भी साबित करना चाहते हैं कि केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री गंभीर नहीं हैं। यही सोच झारखंड के मुख्यमंत्री से ट्वीट करवाती है कि प्रधानमंत्री ने फ़ोन कर अपने मन की बात की। काश वे काम की बात करते। ये ऐसा कर सकते हैं, क्योंकि इन्हें पता है कि इनकी विफलताओं की चर्चा नहीं होगी। इनसे सवाल नहीं पूछे जाएँगे क्योंकि मीडिया इनमें वह हीरो खोजने में लगा है जो नरेंद्र मोदी को कुछ भी करके नीचा दिखा दे।

‘एलियंस ने 50 बार किया मेरा अपहरण, साबित करने के लिए हैं खरोंच के निशान’, ब्रिटिश महिला का हैरान करने वाला दावा

ब्रिटेन की एक 50 वर्षीय महिला पाउला स्मिथ (Paula Smith) ने दावा किया है कि एलियंस उनका कई बार अपहरण कर चुके हैं। पाउला का दावा है कि एलियंस ने एक या दो बार नहीं बल्कि पचास से भी अधिक बार न केवल उनका अपहरण किया है बल्कि उन्हें अपने यूएफओ में भी ले जा चुके हैं। स्मिथ ने अपने शरीर पर बने कुछ खरोंच के निशान भी दिखाएँ हैं जो अपहरण के बाद एलियंस के द्वारा उनके शरीर पर बना दिए जाते थे। स्मिथ के अनुसार जब वो छोटी थीं तभी से उनके साथ इस तरह की घटनाएं घटती रही हैं।

ब्रिटेन के यॉर्कशर के ब्रैडफोर्ड की रहने वाली पाउला स्मिथ ट्रांसपोर्ट सेक्टर में काम करती हैं। स्मिथ ने दावा किया है कि उन्होंने पहली बार 1982 में एलियंस का विमान देखा। उन्होंने बताया कि बचपन से ही एलियंस उनका अपहरण करके यूएफओ में ले जाते थे और पूरी दुनिया की सैर कराते थे। स्मिथ का यह भी कहना है कि एलियंस उन्हें ऐसी तकनीकि दिखाते थे जो पृथ्वी पर मौजूद नहीं है। इसके अलावा एलियंस उन्हें एक वीडियो क्लिप दिखाते थे जिसमें एक नदी होती है जो अचानक काली हो जाती थी और नीला आसमान अचानक से लाल हो जाता था।

डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार स्मिथ ने बताया कि बचपन से लेकर अब तक 52 बार एलियंस उन्हें अपने साथ ले जा चुके हैं। स्मिथ के घरवालों का भी कहना है कि स्मिथ अक्सर 4 या 5 घंटे के लिए गायब हो जाती थीं लेकिन इसके बाद फिर से घर लौट आती थीं। स्मिथ के अनुसार एलियंस उन्हें उनके बेडरूम की खिड़की से और बेड से ले जाते थे।

स्मिथ ने कहा कि उनके पास अपनी बात साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है सिवाय उन खरोंचों के जो एलियंस उनके शरीर पर बना देते थे। उन्होंने एक सिल्वर एलियन की तस्वीर भी बनाई है।

पौला स्मिथ द्वारा बनाई गई एलियंस की ऑइल पेंटिंग (फोटो : डेली स्टार)

पहली बार के अपने अनुभव के बारे में बताते हुए स्मिथ एलियंस के विमान के बारे में कहती हैं कि वह एक तीन भुजाओं वाला विमान था जिसकी प्रत्येक भुजा के अंत में एक लाइट होती थी। एक लाइट का रंग नीला जबकि दूसरी भुजा के अंत में हरे रंग की लाइट थी। स्मिथ ने कहा कि तीसरी भुजा की लाइट के बारे में उन्हें कुछ याद नहीं है। स्मिथ के अनुसार वह विमान 30 फुट ऊँचा और 30 फुट चौड़ा था। नीली और हरे रंग की लाइट वाला वह विमान काले रंग का था।

पाउला स्मिथ कहती हैं, “मैंने यह घटना कभी किसी को नहीं बताई क्योंकि लोग मुझे पागल कहेंगे लेकिन कई ऐसे लोग हैं जिनके साथ ऐसे अनुभव हो चुके हैं। ऐसे लोगों को सामने आना चाहिए और अपने अनुभव सबके साथ साझा करने चाहिए।“   

क्या मोदी सरकार ने 12 साल के बच्चों को कोवैक्सीन लगाने की मंजूरी दे दी? जानें क्या है सच

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ चल रहे टीकाकरण अभियान के बीच इन दिनों सोशल मीडिया पर एक फैक मैसेज वायरल हो रहा है। मैसेज में दावा किया गया है कि मोदी सरकार ने 12 साल से ऊपर के बच्चों के लिए भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को मंजूरी दे दी है।

व्हाट्सएप मैसेज का स्क्रीनशॉट

यह मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। हालाँकि, इस अफवाह पर सरकार ने आधिकारिक बयान दिया है। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के एक ट्वीट में यह स्पष्ट किया गया है, “यह दावा #Fake है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। सरकार ने ऐसे किसी टीकाकरण अभियान को मंजूरी नहीं दी है। हाल ही में केवल 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को ही कोविड-19 वैक्सीनेशन के लिए अनुमति दी गई है।”

मालूम हो कि सरकार ने 1 मई से 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को कोविड-19 वैक्सीनेशन की अनुमति दी थी। हाल ही में, डीसीजीआई (DGCI) ने इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए डीआरडीओ-विकसित एंटी-कोविड दवा को भी मंजूरी दी है। रक्षा मंत्रालय ने शनिवार (8 मई, 2021) को मुँह के जरिए ली जाने वाली इस दवा को कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में इस्तेमाल करने की अनुमति दी, ताकि वे जल्दी से ठीक हो सकें।

मंत्रालय के मुताबिक, क्लिनिकल टेस्ट में सामने आया है कि 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) दवा कोरोना की चपेट में आए मरीजों को जल्द ठीक होने में मदद कर रही है। साथ ही यह दवा अतिरिक्त ऑक्सीजन की निर्भरता को भी कम करती है। इस दवा को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रतिष्ठित प्रयोगशाला नामिकीय औषधि तथा संबद्ध विज्ञान संस्थान (आईएनएमएएस) ने हैदराबाद के डॉ.रेड्डी लेबोरेटरी के साथ मिलकर विकसित किया है।

गौरतलब है कि मोदी सरकार द्वारा कोविशिल्ड और कोवैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी देने के बाद 16 जनवरी को भारत में टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था। पहले सरकार ने केवल फ्रंटलाइन श्रमिकों और 45 से ऊपर के लोगों के लिए टीकाकरण की अनुमति दी थी। लेकिन अब देश भर में 18 से ज्यादा की उम्र के लोगों का भी वैक्सीनेशन शुरू हो गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, सोमवार को (10 मई 2021) कुल 17,01,76,603 लोगों को वैक्सीन की खुराक दी गई है।

हिमंत बिस्वा सरमा और शुभेंदु अधिकारी को कमान दे BJP ने खींची नई लकीर, कॉन्ग्रेस अब भी अधर में लटकी

2021 की 10 मई भारतीय राजनीति में एक नई लकीर खींच गया। असम में हिमंत बिस्वा सरमा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उसके पड़ोस के पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी को बीजेपी ने अपने विधायक दल का नेता चुन लिया। इन फैसलों खासकर सरमा की ताजपोशी से बीजेपी ने झटके में वो धारणा खत्म कर दी, जिसके आधार पर अब तक माना जाता रहा था कि पार्टी बाहरी नेताओं को शीर्ष नेतृत्व की भूमिका नहीं देगी।

ऐसा नहीं है कि इस सोमवार को केवल सियासी पिच पर बीजेपी में ही हलचल रही। कॉन्ग्रेस की कथित शीर्ष नीति निर्धारक ईकाई सीडब्ल्यूसी (CWC) की बैठक भी हुई। पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कहा, “समझना होगा कि हम केरल और असम में मौजूदा सरकारों को हटाने में विफल क्यों रहे? बंगाल में हमारा खाता तक क्यों नहीं खुला?” लेकिन, इन पराजयों से सीख की बजाए सोनिया ने पराजय के हर पहलू पर गौर करने के लिए एक छोटे समूह के गठन की बात कही। जैसा कि कॉन्ग्रेस की परंपरा रही है ऐसी किसी भी कमिटी की रिपोर्ट पर शायद ही कभी गौर किया जाता है। अमल तो दूर की बात है। इतना ही नहीं, कॉन्ग्रेस को उसका पूर्णकालिक अध्यक्ष कब तक मिल जाएगा इसको लेकर भी यह बैठक स्पष्ट तस्वीर खींचने में नाकामयाब ही रही।

कायदे से इस बैठक में कॉन्ग्रेस को असम में सरमा की ताजपोशी से मिली सीख पर चर्चा करनी थी। सरमा कुछ साल पहले तक कॉन्ग्रेसी ही थे। राजनीति में उनकी एंट्री असम के कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री रहे हितेश्वर सैकिया ने कराई थी। पहला विधानसभा चुनाव हारने वाले सरमा तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेसी सरकार में मंत्री रहे। इसी दौरान असम की राजनीति में उनका उभार हुआ।

कहा जाता है कि कॉन्ग्रेस के दुर्दिन शुरू होने पर सरमा नेतृत्व की भूमिका की आस लेकर पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के पास गए थे। लेकिन, कथित तौर उन्होंने सरमा की बात सुनने से ज्यादा तवज्जो अपने कुत्ते के साथ खेलने को दी। आहत सरमा बीजेपी में चले गए। 2016 के असम विधानसभा चुनावों के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारा दिया, ‘असम का आनंद, सर्बानंद’ और उस चुनाव का संयोजक बनाया गया सरमा को। उन चुनावों में बीजेपी को पहली बार असम की सत्ता मिली और सरमा मंत्री बने। लगातार 5 सालों तक उत्तर-पूर्व में वे बीजेपी के चेहरे बने रहे और पार्टी को कई राज्यों में सत्ता में लाने में अहम भूमिका निभाई। 2021 के चुनावों में बीजेपी ने जब सत्ता बरकरार रखी तो पार्टी ने सर्बानंद सोनोवाल की जगह उन्हें राज्य की कमान सौंप दी है।

ऐसा नहीं है कि सरमा ऐसे पहले नेता हैं जो दूसरे दल से आकर भी बीजेपी में खुद को साबित करने में सफल रहे हैं। ऐसे नेताओं की फेहरिस्त लंबी है। ऐसे में सरमा को आगे कर बीजेपी ने तमाम राज्यों में विपक्ष के उन संभावनाशील चेहरों को एक संदेश दिया है, जो अपनी पार्टी में छटपटा रहे हैं।

मसलन, सचिन पायलट जैसे नेताओं को एक तरह से संदेश दिया गया है कि आप हमारे साथ आइए। खुद को साबित करिए और नेतृत्व की भूमिका लेकर जाइए। मार्च 2020 में बीजेपी का हिस्सा बने ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेताओं को जो महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पाने की प्रतीक्षा में हैं, उन्हें भी बताया गया है कि खुद को साबित करने वालों को कमान देने से अब पार्टी को गुरेज नहीं रही।

सरमा से पहले एन बिरेन सिंह जैसे कुछेक नाम हैं जो बीजेपी में आकर मुख्यमंत्री बनने में कामयाब रहे। लेकिन, इन राज्यों में बीजेपी के पास न तो वैसा संगठन था और न वैसे नेता। असम या बंगाल जैसे राज्य में बीजेपी अरसे से संघर्षरत रही है। उसके पास संगठन और अपनी रीति-नीति वाले नेता भी रहे हैं। ऐसे में सरमा और अधिकारी को आगे कर बीजेपी ने उन तमाम राज्यों को भी संदेश दिया है जहाँ उसका संगठन बेहद मजबूत है और उसके पास नेताओं की लंबी कतार है। इससे पार्टी को फैलाव में और मदद मिल सकती है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले जब तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) छोड़ बीजेपी में आने की भगदड़ मची थी, तब शायद ही किसी ने ये अंदाजा लगाया था कि बीजेपी का राज्य में आने वाले समय में चेहरा टीएमसी से आया नेता होगा। राज्य में हालाँकि 3 से 77 सीटों पर पहुँचने के बावजूद बीजेपी अपेक्षित परिणाम हासिल करने में सफल नहीं रही। लेकिन, नंदीग्राम के मैदान में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को परास्त करने वाले अधिकारी को आगे कर उसने बता दिया है कि टीएमसी के लिए सत्ता के 5 साल आसान नहीं रहने वाले हैं। ध्यान रहे कि अधिकारी चुनावों से पहले तक ममता की कैबिनेट में थे। जिस नंदीग्राम ने टीएमसी को सत्ता का रास्ता दिखाया, वहाँ ममता को ले जाने और ताकत देने वाले भी अधिकारी ही थे।

इसमें कोई दो मत नहीं है कि 2014 के बाद बीजेपी ने कई धारणाओं को तोड़ा है। राष्ट्रीय राजनीतिक फलक पर मोदी-शाह के उदय के बाद से वह हर चुनाव एक युद्ध की तरह लड़ती दिखी है। इसने भारतीय राजनीति के समीकरण और मायने उलटपुलट कर रख दिए हैं। ऐसे में सरमा और अधिकारी जैसों को आगे करना एक ऐसे राजनीतिक दल के लिए जो राष्ट्रव्यापी फैलाव के लिए हर सेकेंड जोर लगा रही हो, जो पूरे भारत पर छाने के लिए मिशन मोड में हो और जो इस सपने को पूरा करने के लिए एक पल भी विश्राम करने को तैयार नहीं दिखती, इससे बेहतरीन फैसला इन चुनावों के बाद शायद ही कुछ होता।

फराह खान ने खुलेआम की मोदी समर्थकों की मौत की कामना- माँगी दुआ, पहले भी कर चुकी हैं RSS की ISIS से तुलना

कोरोना महामारी के प्रकोप के बीच रविवार (मई 9, 2021) को ज्वेलरी डिजाइनर फराह खान अली ने ट्विटर पर मोदी समर्थकों और उनके परिजनों के लिए मृत्यु की कामना की। मोदी सरकार की बुराई न करने वालों पर अपना गुस्सा निकालते हुए फराह खान ने कहा कि वह दुआ करती हैं कि भक्तों का कोई परिजन मरे ताकि उनका भी खून सरकार के विरुद्ध खौल सके।

अपने ट्वीट में फराह खान ने लिखा, “कोरोना वायरस महामारी से निपटने में पीएम की विफलता के मद्देनजर हर भक्त के लिए, मैं दुआ करती हूँ कि तुम्हारा कोई परिजन मरे ताकि तुम्हें वो गुस्सा महसूस हो जो कुप्रबंधन और सत्ता की भूखे एजेंडे के कारण अपनों को न बचा पाने की वजह से पैदा होता है।”

बता दें कि ट्विटर पर 7 लाख से ज्यादा फॉलोवर्स वाली फराह अली खान उन्हीं संजय खान की बेटी हैं, जिन्होंने एक टीवी सीरिज में टीपू सुल्तान की भूमिका निभाई। वह फिरोज खान की भतीजी और ऋतिक रौशन की पूर्व पत्नी सुजैन खान की बहन हैं।

लोगों का इस ट्वीट को देखकर कहना है कि जब मोदी सरकार से भरोसा उठने लगता है वैसे ही ऐसे लोग आकर ऐसी बातें कर देते हैं कि दोबारा उनपर विश्वास बन जाता है। एक यूजर ने फराह खान के साथ ट्वीट पर हुई बातचीत के स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं।

वघीशा नाम की ट्विटर यूजर का कहना है कि इस बातचीत के बाद ही फराह ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। इस ट्वीट में वघीशा ने पूछा था कि आखिर वो ऐसी दुआ कैसे कर सकती हैं जो कोई दुश्मनों के लिए भी न करें।

फराह ने वघीशा के ट्वीट के जवाब में लिखा, “जब मैंने ट्वीट किया मैं बहुत ज्यादा परेशान थी क्योंकि कई लोग हैं जिन्हें मैं जानती थी और खो दिया। मुझे अफसोस है कि मैंने क्या ट्वीट किया और ये स्पष्ट भी किया है कि किसी की मौत की कामना नहीं करनी चाहिए। मैंने जो भी कहा वो गुस्से और पीड़ा में कहा।”

उल्लेखनीय है कि कोरोना के कारण मोदी समर्थकों या फिर संघियों की मौत की कामना पहली बार नहीं की गई। इससे पहले बंगाल में हिंसा के वक्त कई लोगों ने भाजपा कार्यकर्ताओं की मौत या फिर संघियों पर हो रही बर्बरता पर अपनी खुशी खुलकर मनाई थी। अब भी कई लिबरल आज अपनी कुंठा संवेदनाओं की आड़ में निकाल रहे हैं और खुलेआम उन लोगों की मृत्यु की कामना कर रहे हैं जिन्हें वह जानते तक नहीं।

जाहिर है कि कोई इस बात से इंकार नहीं कर सकता कि हमारा प्रशासन कोविड की दूसरी लहर को संभालने में असमर्थ रहा और स्वास्थ्य असुविधाओं के कारण असमय लोगों की जानें गईं। लेकिन, इस दौरान ऐसे संदेश जिनमें संघियों और उनके प्रियजनों की मौत की कामना की गई हो, वह भी कहीं से कहीं तक इंसानियत की मिसाल पेश नहीं कर रहे। किसी की जान जाने पर खुशी मनाना या फिर किसी की मरने की ही कामना कर लेना, इस बात को बताता है कि महामारी के समय भी एक निश्चित विचाराधारा के प्रति लिबरलों, वामपंथियों और कट्टरपंथियों में गुस्सा उतना भरा हुआ है जितना की इस महामारी से पहले था।

फराह खान अली के बारे में मालूम हो कि वह पहले भी आरएसएस की ISIS आतंकी संगठन के साथ तुलना कर चुकी हैं। इसके अलावा वह महाराष्ट्र की बदहाली के बावजूद उद्धव सरकार की तारीफ करती रही हैं।

ओलंपियन सुशील कुमार के खिलाफ ‘लुक आउट नोटिस’ जारी, नेशनल जूनियर चैंपियन रहे पहलवान की हत्या के मामले में तलाश

दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में हुई मारपीट और 23 साल के एक पहलवान की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने ओलंपियन सुशील कुमार के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया है। पुलिस का कहना है कि छत्रसाल स्टेडियम में हुई मारपीट में 23 वर्षीय रेसलर सागर राणा की मौत के बाद से सुशील कुमार फरार हैं।

दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम से 4 मई 2021 को मारपीट की खबर आई थी। इस दौरान मारपीट में सागर राणा की मौत हो गई थी। वह जूनियर नेशनल चैंपियनशिप विजेता थे और उनके पिता दिल्ली पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल हैं।

इस मामले में एडिशनल DCP (नॉर्थ-वेस्ट) डॉक्टर गुरइकबाल सिंह सिद्धू ने बताया था कि इस मारपीट में कई पहलवान जख्मी हुए थे और पुलिस ओलंपियन सुशील कुमार के घर भी गई थी, लेकिन वो वहाँ से नदारद थे। फिलहाल उनकी तलाश की जा रही है।

एक आरोपी हो चुका है गिरफ्तार

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में 24 साल के प्रिंस दलाल को गिरफ्तार किया गया है। वह हरियाणा के झज्जर का रहने वाला है। छत्रसाल स्टेडियम में हुई झड़प के दौरान फायरिंग भी हुई थी। दलाल को डबल बैरेल लोडेड बंदूक के साथ दबोचा गया। मामले के एक अन्य आरोपित सोनू महल के बारे में पता चला है कि वो गैंगस्टर काला जठेड़ी का करीबी है। वह इससे पहले भी हत्या और डकैती के मामलों में जेल जा चुका है।

सिद्धू के मुताबिक पुलिस को पता चला है कि सुशील कुमार, अजय, प्रिंस, सोनू, सागर, अमित और अन्‍य लोगों के बीच स्‍टेडियम के पार्किंग क्षेत्र में झगड़ा हुआ था। मॉडल टाउन पुलिस थाने में FIR दर्ज की गई है। FSL (फॉरेंसिक साइंस लैब) रोहिणी के विशेषज्ञों ने घटनास्थल से फोरेंसिक सबूत भी जुटाए हैं।

फिलहाल, इस मामले में सुशील कुमार समेत अन्य लोगों के खिलाफ दिल्ली के मॉडल टाउन पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। फिलहाल आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं। एडिशनल डीसीपी सिद्धू ने कहा है कि इस घटना में हम सुशील कुमार की भूमिका की जाँच कर रहे हैं।

सुशील कुमार ने खुद को बताया था निर्दोष

इस घटना को लेकर बुधवार (5 मई 2021) को सुशील कुमार ने कहा था कि इस मामले से उनके पहलवानों का कोई लेना-देना नहीं है। इसके लिए बाहरी लोग जिम्मेदार हैं। उनका दावा है कि उन्होंने इसके बारे में पुलिस को बताया था कि कुछ बाहरी लोग उनके इलाके में घुस आए थे और उन्होंने मारपीट की थी।

गौरतलब है कि रेसलर सुशील कुमार ने वर्ष 2012 में लंदन ओलंपिक में रेसलिंग में सिल्वर मेडल जीता था। इससे पहले उन्होंने बीजिंग ओलंपिक 2008 में कांस्य पदक जीता था।

असम में 13 मंत्रियों संग हिमंत बिस्वा सरमा ने ली CM पद की शपथ, बंगाल में ममता ने बनाए 43 मंत्री

हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार (10 मई 2021) असम के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। उन्होंने सर्बानंद सोनोवाल की जगह ली है। असम विधानसभा चुनावों में बीजेपी की जीत के शिल्पकार रहे सरमा को राज्यपाल जगदीश मुखी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। उनके साथ 13 मंत्रियों ने भी शपथ ली।

शपथ ग्रहण समारोह में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, असम के पूर्व सीएम सर्बानंद सोनोवाल, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देव, मेघालय के सीएम कोनराड संगमा, मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह और नगालैंड के सीएम निफिउ रियो भी मौजूद थे।

सरमा को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में दिल्ली में रविवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में असम में पार्टी के विधायक दल का नेता चुना गया था। बीजेपी ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल करते हुए सत्ता में वापसी की थी और इस जीत में उनकी भूमिका काफी अहम रही थी।

सरमा को उत्तर-पूर्व राज्यों में बीजेपी की मजबूत होती स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने 2015 में कॉन्गेस में नजरअंदाज किए जाने के बाद पार्टी छोड़ दी थी, जबकि उन्हें सीएम तरुण गोगोई का करीबी माना जाता था।

वहीं 5 मई को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के तौर पर लगातार तीसरी बार शपथ लेने वाली ममता बनर्जी सरकार के कैबिनेट के 43 मंत्रियों ने सोमवार (10 मई) को मंत्री पद की शपथ ली। हालांकि मंत्रियों के विभागों के बँटवारे की घोषणा अभी नहीं हुई और इसका ऐलान जल्द किया जाएगा।

योगेंद्र यादव को पता था कि ‘किसानों’ के टेंट में हुआ है गैंगरेप, AAP के दो नेता भी आरोपित: टिकरी बॉर्डर पर हुई थी घटना

दिल्ली के टिकरी बॉर्डर स्थित ‘किसानों’ के प्रदर्शन स्थल पर बंगाल से आई युवती की कोरोना से मृत्यु के बाद मामले में नया मोड़ आया है। युवती के पिता का कहना है कि उन्हें उनकी बेटी ने खुद फोन पर कहा था कि उसका शारीरिक शोषण किया गया था।

गैंगरेप के इस मामले के आरोपितों में से दो आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता हैं। इतना ही नहीं, दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में दावा किया गया है योगेंद्र यादव को किसानों के टेंट में हुई इस घटना के बारे में पता था।

पिता की शिकायत पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 120बी, 342, 354,365, 376D और 506 के तहत 6 लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है। इनमें किसान नेता और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता भी शामिल हैं। कहा जा रहा है कि घटना की जानकारी योगेंद्र यादव तक को थी। लेकिन उन्होंने पीड़िता की मृत्यु के बाद भी इसे पुलिस से साझा नहीं किया।

30 अप्रैल को झज्जर के अस्पताल में युवती की मृत्यु के बाद उसके पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। अब पुलिस मामले में जाँच कर रही है। बहादुरगढ़ थाने के पुलिस अधिकारी विजय कुमार का कहना है,”युवती की मृत्यु कोरोना से हुई। उसका उपचार कोरोना मरीजों की तरह किया गया। हमने दस्तावेजों के लिए अप्लाई किया है। जैसे ही कुछ डॉक्यूमेंट हमें मिलते हैं हम तभी पुष्टि कर पाएँगे कि ये मौत कोरोना संबंधी थी।”

पीड़िता के पिता की शिकायत

मृतका के पिता ने अपनी शिकायत में 6 लोगों का नाम लिया। इनकी पहचान अनिल मलिक, अनूप सिंह छनौत, अंकुर सांगवान, कविता आर्या, जगदीश ब्रार और योगिता सुहाग के तौर पर हुई है। ये सारे लोग संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से बंगाल गए थे। वहीं इनकी मुलाकात लड़की और उसके पिता से हुई थी। लड़की ने इनके सामने प्रदर्शन में शामिल होने की इच्छा जताई। इसके बाद वह उनके साथ 11 अप्रैल को हावड़ा से रवाना हो गई।

पीड़िता के पिता की शिकायत

शिकायत के अनुसार, युवती ने पिता को बताया कि अनिल और अनूप अच्छे लोग नहीं हैं। यात्रा के दौरान जब सब सो रहे थे तब उनमें से अनिल ने पास आकर उसे जबरन चूमा। उसने हड़बड़ी में उसे अपने से दूर होने को कहा और दोबारा हरकत न दोहराने की चेतावनी दी। मगर, इसके बाद अनिल और अनूप उसे ब्लैकमेल करने लगे, उस पर प्रेशर बनाने लगे।

पिता के मुताबिक, उनकी बेटी के साथ ट्रेन में भी जबरदस्ती हुई और बाद में प्रदर्शनस्थल पर भी उसे आरोपितों के साथ जबरदस्ती टेंट शेयर करने को कहा गया। युवती ने जब सारी आपबीती पिता को बताई तो उन्होंने उसे सलाह दी कि वह कुछ महिलाओं को विश्वास में लेकर अपनी बातें बताए।

16 अप्रैल को उसने योगिता और जगदीश को घटना के बारे में बताया, जिसके बाद उसका बयान वीडियो में कैद किया गया। पिता ने फोन कर ये वीडियो माँगी। 17 अप्रैल को बताया गया कि युवती को यूरीन के साथ खून आया है। इसके बाद 18 अप्रैल को उसे महिलाओं के साथ टेंट में शिफ्ट कर दिया गया। 21 अप्रैल को उसमें कोविड के लक्षण दिखने लगे और हल्का बुखार भी आया। 24 अप्रैल उसे साँस लेने में दिक्कत हुई और 26 अप्रैल उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

AAP से आरोपितों का लिंक

रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले में आरोपित बनाया गया अनूप सिंह हिसार क्षेत्र में AAP का सक्रिय कार्यकर्ता है। वहीं अनिल मलिक दिल्ली में AAP का कार्यकर्ता है। आप विधायक सुशील कुमार का इस मामले में कहना है कि उन्हें इस घटना का कुछ नहीं पता लेकिन ये दोनों किसान प्रदर्शनस्थल पर सक्रिय थे। किसान सोशल बैनर आर्मी के बैनर तले ये साइट पर काम कर रहे थे। लेकिन जब से युवती की मृत्यु हुई, तभी से अनूप प्रदर्शनस्थल से फरार है। 

योगेंद्र यादव को थी सारी जानकारी

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, युवती की मृत्यु के बाद उसके पिता द्वारा कराई गई एफआईआर में संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य योगेंद्र यादव का नाम भी सामने आया है। पिता का कहना है कि योगेंद्र यादव को इस बात की जानकारी थी कि किसान नेता युवती के साथ गलत कर रहे हैं। वह 24 अप्रैल से युवती के संपर्क में रहे, लेकिन उसकी मौत से पहले या बाद में पुलिस को पूरे घटनाक्रम की सूचना नहीं दी।

दैनिक भास्कर के रोहतक संस्करण में 10 मई 2021 को प्रकाशित संबंधित खबर

संयुक्त किसान मोर्चा का बयान

बता दें कि कोरोना संक्रमण के चलते युवती की 30 अप्रैल को मौत हो गई थी। इसके बाद किसान नेताओं ने सभी कोविड नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए उसे शहीद करार दिया और उसका शव खुली जीप में रखकर घुमाया। हालाँकि, बाद में युवती के साथ रेप वाला एंगल उजागर हुआ, जिसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने इस संबंध में बयान जारी किया।

बयान में कहा गया कि वह आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई करेंगे। उन्होंने किसान सोशल आर्मी का टेंट भी कथित तौर पर प्रदर्शनस्थल से हटा दिया है। पंजाब किसान यूनियन के नेता ने कहा, “ये गंभीर चिंता का विषय है जिस पर बात होनी चाहिए। यहाँ प्रदर्शन पर पुरुष और महिलाओं में कोई अंतर नहीं है। महिलाएँ बड़े तादाद में भाग ले रही हैं। किसान मामले में पड़ताल कर रहे हैं और सुनिश्चित कर रहे हैं कि दोबारा ऐसा न हो।”

मालूम हो कि यौन उत्पीड़न का पहला मामला किसान आंदोलन के बीच प्रदर्शनस्थल से नहीं आया है। इससे पहले मोहम्मद जुबेर, वरुण चौहान, अंतरप्रीत सिंह और मनीष कुमार का नाम भी यौन उत्पीड़न केस में उछला था। इन लोगों ने कथित तौर पर कई पीड़िताओं का शोषण किया था।

‘खान चाचा’: नवनीत कालरा के खिलाफ दिल्ली पुलिस का लुक आउट नोटिस, अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट पहुँचा

ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर की कालाबाजारी के आरोपित बिजनेसमैन नवनीत कालरा के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने लुक आउट नोटिस जारी किया है। दूसरी ओर कालरा ने दिल्ली की साकेत कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। कोर्ट मंगलवार (11 मई 2021) को इस पर सुनवाई करेगा। कालरा की याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब माँगा गया है। साथ ही उसे किसी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार किया।

इससे पहले पुलिस के हाथ कालरा की ऑडियो क्लिप लगी थी, जिसमें वह खान मार्केट के अपने दोस्तों के साथ ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर को लेकर बात करते सुना गया था।

नवनीत कालरा को यह कहते सुना गया था कि उसके ऊपर ‘बहुत अधिक दबाव’ है और वह सभी कॉल्स का जवाब नहीं दे सकता। वह कहता है, “मेरे पास 2 लाख कॉल्स हैं। इसलिए मैं हर किसी के पर्सनल सवालों का जवाब नहीं दे सकता हूँ। आपको कौन सा मॉडल (ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर) भेजा गया है, इसकी डिटेल्स मैसेज में दी गई है। मैं खान मार्केट के लोगों को उनके उपयोग के लिए प्रति व्यक्ति एक मशीन दे सकता हूँ।”

कालरा के दिल्ली में तीन रेस्टोरेंट हैं, जहाँ शुक्रवार (7 मई 2021) को छापा मारकर पुलिस ने 524 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर बरामद किए थे। दिल्ली पुलिस ने रविवार (9 मई 2021) को जानकारी दी थी कि बिजनेसमैन नवनीत कालरा गिरफ्तारी के डर से फरार हो गया है। उसने अपने मोबाइल बंद कर रखा है। ‘खान चाचा’ रेस्टोरेंटट की 96 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर बरामद किए जाने के बाद सील कर दिया गया था। बीजेपी ने आरोप लगाया था कि इस रेस्टोरेंट का मालिक कालरा है।

केजरीवाल ने ‘दिल्ली का निर्माता’ कहा था

गौरतलब है कि वर्ष 2020 में अरविंद केजरीवाल ने सीएम पद की शपथ लेते हुए 48 लोगों को “दिल्ली के निर्माता” के तौर पर सम्मानित किया था। नवनीत कालरा उन्हीं 48 लोगों में शामिल था। हालाँकि, अब दिल्ली के इस कथित निर्माता पर कोरोना संक्रमण से पैदा हालात का फायदा उठाते हुए कालाबाजारी का आरोप है।