Home Blog Page 3843

ममता बनर्जी को कोविड के नाम पर चाहिए वो ‘छूट’ जो पहले ही केंद्र दे चुकी है, निर्मला सीतारमण ने हकीकत से कराया साक्षात्कार

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने डोनर्स के अनुरोध पर केंद्र सरकार से ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर, सिलेंडर और कोरोना से जुड़ी दवाओं पर जीएसटी/सीमा शुल्क समेत अन्य ऐसे करों में छूट देने की माँग की है। इसको लेकर उन्होंने 9 मई, 2021 को पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था।

पत्र में ममता ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के बीच माँग और आपूर्ति के अंतर को कम करने के लिए बड़ी संख्या में संगठन, व्यक्ति और एजेंसियाँ जरूरी मेडिकल सेवाओं की आपूर्ति के लिए आगे आए हैं। इन दानदाताओं ने राज्य से एसजीएसटी/सीजीएसटी/आईजीएसटी और कस्टम में छूट देने की माँग की है।

ममता द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा गया पत्र

हालाँकि, सीएम के पत्र से ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें केंद्र की योजनाओं के बारे में जानकारी ही नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि जिस छूट की माँग वो केंद्र से कर रही हैं वो पहले से ही राज्यों को दी गई हैं। लेकिन, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा की गई माँग को सार्वजनिक किए जाने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उन्हें जवाब दिया। वित्त मंत्री ने ट्विटर पर नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जानकारी दी कि कोविड-19 राहत वस्तुओं की सूची को आयात के लिए IGST से छूट 3 मई को ही दी गई थी जबकि सीमा शुल्क/हेल्थ सेस से छूट बहुत पहले दी गई थी।

सीतारमण ने ममता बनर्जी से उस लिस्ट को दोबारा चेक करने का आग्रह किया है, क्योंकि सूची में जिन सामानों का जिक्र है उनमें पहले से ही छूट दी गई थी।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने ममता को इस बात की भी जानकारी दी कि भारतीय रेड क्रॉस द्वारा देश में बिल्कुल मुफ्त वितरण के लिए आयात की गईं सभी कोरोना राहत सामग्री को IGST समेत सभी प्रकार के टैक्स से छूट दी गई थी।

केंद्र द्वारा बनाए गए प्रावधानों के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए सीतारमण ने स्पष्ट किया कि परीक्षण किटों, ऑक्सीजन उपकरणों, महत्वपूर्ण दवाओं इत्यादि विभिन्न वस्तुओं पर टैक्स छूट तब लागू होती है जब किसी भी संस्था, राज्य सरकार, राहत एजेंसी, या स्वायत्त निकाय द्वारा किसी भी राज्य सरकार द्वारा जारी प्रमाण पत्र के आधार पर देश में मुफ्त वितरण के लिए नि: शुल्क आयात किया जाता है।

वैक्सीन पर टैक्स स्लैब को स्पष्ट करते हुए, वित्त मंत्री ने मूल्य निर्धारण, टैक्सेशन और छूट का एक विस्तृत ब्यौरा दिया, जिसमें बताया गया कि क्यों वैक्सीन पर जीएसटी की पूरी छूट संभव नहीं है।

पश्चिम बंगाल में बीते 24 घंटों में लगभग कोरोना वायरस के 20,000 नए संक्रमित मिले। वहीं एक दिन में सर्वाधिक 127 मरीजों की मौत भी हुई है।

डॉक्टर के साथ मिल रेमडेसिविर की कालाबाजारी कर रहा था वेल्डर शाहरुख: इंदौर से 3 गिरफ्तार

कोरोना संकट के बीच कहीं ऑक्सीजन सिलिंडर की ब्लैक मार्केंटिंग पकड़ी जा रही है तो कहीं जरूरी दवाइयाँ मनमानी कीमतों पर बिक रही हैं। इसी क्रम में एक नया मामला मध्य प्रदेश के इंदौर से उजागर हुआ। यहाँ रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में 3 आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं। इनके पास से 4 इंजेक्शन बरामद हुए, जिसे यह 30 हजार रुपए में बेच रहे थे।

आरोपितों की पहचान डॉ. राकेश मालवीय, मेडिकल स्टोर चलाने वाले अमन ताज और वेल्डिंग का काम करने वाले शाहरुख खान के तौर पर हुई। बाणगंगा टीआई राजेंद्र सोनी ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ लोग कार में रेमडेसिविर इंजेक्शन रखे हुए हैं और ग्राहक ढूँढ रहे हैं। इस सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम बनाई गई और आरोपितों की घेराबंदी कर उन्हें पकड़ा गया।

न्यूज 18 की खबर के अनुसार, टीआई ने बताया कि अमन का सांवेर में मेडिकल स्टोर है। अमन और डॉ. राकेश मालवीय की पुरानी पहचान है। वहीं आरोपित शाहरुख वेल्डिंग का काम करता है। अब तक क्राइम ब्रांच 18 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनके पास से 417 रेमडेसिविर इंजेक्शन भी जब्त हुए हैं।

बता दें कि मध्यप्रदेश में कोरोना की रफ्तार बढ़ने से धोखाधड़ी करने वाले खुलेआम लोगों को लूटने का काम करने लगे हैं। पिछले दिनों इंदौर में ही ऑक्सी फ्लोमीटर की ब्लैक मार्केंटिंग करते हुए कॉन्ग्रेस के मंडल अध्यक्ष यतींद्र वर्मा को राजेंद्र नगर टीआई ने एक फोन कॉल से पकड़ा था।

राजेंद्र नगर टीआई अमृता सोलंकी ने वर्मा को पकड़ने के लिए एक मरीज की परिजन बनकर उससे संपर्क किया और उसे मनगढ़ंत कहानी में फँसाकर सबूतों के साथ धर दबोचा। इसके बाद सख्ती से पूछताछ में यतींद्र ने सारी सच्चाई उगल दी। उसने बताया कि अरबिंदो अस्पताल के पास उसका किराए का मकान है। उसने वहीं ऑक्सी फ्लोमीटर रखे हुए हैं। जब पुलिस टीम बताई जगह पर पहुँची तो ऑक्सी फ्लोमीटर बरामद हो गए। 

इसके अलावा इंदौर के विजय नगर में रेमडेसिविर की कालाबाजरी में 11 अन्य लोग गिरफ्तार हुए हैं। ये सारे लोग कोरोना संक्रमण में उपयोगी जीवनरक्षक दवा टोसी और रेमडेसिविर इंजेक्शन की ब्लैक मार्केटिंग कर रहे थे। पुलिस ने सबको 4 अलग-अलग जगह से पकड़ा। इनके पास से 14 इंजेक्शन और 5 डिब्बे फेबी फ्लू के जब्त हुए। इस गैंग के सरगना सुनील मिश्रा को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस को संदेह है कि सुनील मिश्रा गुजरात की नकली रेमडेसिविर फैक्ट्री से जुड़ा हो सकता है। ये लोग सोशल मीडिया के जरिए जरूरतमंदों से संपर्क करके उन्हें महंगे दामों में इन्जेक्शन बेचते थे।

उत्तर प्रदेश: ग्राम प्रधानी जीतने वाले रकमुद्दीन समेत 5 गौहत्या में गिरफ्तार, चुनावी जीत पर ‘बीफ’ पार्टी का किया था वादा

उत्तर प्रदेश में हाल ही में पंचायत चुनाव संपन्न हुए हैं। इन चुनावों में जीत हासिल करने वाले सोनभद्र जिले के बरवाखड़ गाँव के नवनिर्वाचित प्रधान रकमुद्दीन को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया। एक अधिकारी के अनुसार रकमुद्दीन के अलावा चार अन्य लोग भी गौहत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए हैं।

स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, उसने कथित तौर पर चुनाव जीतने पर मतदाताओं को बीफ पार्टी देने का वादा किया था। गुरुवार (6 मई 2021) की देर रात बीफ पार्टी और गौहत्या की खबर जैसे ही ग्रामीणों को लगी तो उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया है कि गौहत्या के आरोप में ग्राम प्रधान को चार अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया।

जिले के एसपी अमरेन्द्र प्रसाद सिंह ने बताया कि पुलिस ने घटनास्थल से संदिग्ध माँस, जानवरों की खाल और कत्ल के सामानों को बरामद किया गया है। पाँच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। ग्राम प्रधान के अलावा अकरम अली, साहेब जान, नजमुल और रहीस चार अन्य आरोपित हैं।

इस घटना के बाद से ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। वहीं गौहत्या की जानकारी मिलने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं सहित बजरंग दल, विश्व हिंदू महासंघ और विश्व हिंदू परिषद के कुछ नेता भी अपना विरोध दर्ज कराने के लिए मौके पर पहुँचे थे। जानकारी के मुताबिक, गाँव का माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है।

गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के नतीजे आने के बाद दो जगहों से कथित तौर पर खुलेआम पाकिस्तान के समर्थन में नारे सुनाई देने का मामला सामने आया था। रिपोर्टों के मुताबिक एक मामला सीतापुर के थानगाँव के बेलौता का है। वहीं अमेठी के रामगंज के मंगरा से एक वीडियो सामने आया था जिसमें देशविरोधी गाने तेज आवाज में बजते सुनाई दिए। इन दोनों घटनाओं का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने केस दर्ज करके पड़ताल शुरू की थी।

विमान बनाने वाली ‘बोइंग’ गोरखपुर में बनाएगी कोविड हॉस्पिटल, CM योगी आदित्यनाथ ने जगह का किया निरीक्षण

विमान निर्माता कंपनी बोइंग ने कोविड के खिलाफ लड़ाई में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 200 बेड वाला कोविड अस्पताल बनाने का फैसला किया है। बोइंग ने यह कदम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर उठाया है। इससे पहले बोइंग ने हाल ही में कोरोना की दूसरी लहर झेल रहे भारत की मदद के लिए एक करोड़ डॉलर (करीब 74 करोड़ रुपये) देने की घोषणा भी की थी।

यह योगी सरकार द्वारा सरकारी संसाधनों के साथ ही विभिन्न कॉर्पोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ मिलकर चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक और बड़ा कदम है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार (9 मई) को अपने गृह क्षेत्र गोरखपुर का दौरा किया। हाल ही में कोरोना वायरस संक्रमण से उबरने वाले योगी ने जिला प्रशासन के साथ एक समीक्षा बैठक की और एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र का भी निरीक्षण किया। सीएम योगी ने इन नियंत्रण केंद्रों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जिले में कोविड संकट से प्रभावित रोगियों के लिए किए जा रहे प्रबंधों का निरीक्षण करें।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोइंग ने कोविड के खिलाफ लड़ाई में सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रयासों को देखते हुए राज्य में अस्पताल बनाने का प्रस्ताव दिया था। सीएम योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से चर्चा के बाद गोरखपुर एम्स को कोविड अस्पताल के लिए चुना है।

इस आईसीयू युक्त हॉस्पिटल में वेंटिलेटर से लेकर कोविड मरीजों के लिए आवश्यक सभी सुविधाएँ उपलब्ध करवाई जाएँगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार को बोइंग कंपनी द्वारा प्रस्तावित आईसीयू अस्पताल के निर्माण स्थल का निरीक्षण किया।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने साथ ही अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि कोविड अस्पताल के लिए अन्य विकल्प भी तलाशे जाएँ। उन्होंने कहा कि कि कई बड़ी कॉर्पोरेट और मल्टी-नेशनल कंपनियाँ कोविड अस्पताल निर्माण के लिए आगे आ रही हैं, ऐसे में उन्हें इसके लिए उचित जगह देने के लिए भी विकल्प तैयार रखे जाने चाहिए।

सीएम योगी के ट्विटर हैंडल से साझा संदेश में कहा गया, “कोरोना के विरुद्ध प्रत्येक स्तर पर आमजन की स्वास्थ्य सुरक्षा हेतु पूरी ऊर्जा और संवेदनशीलता के साथ प्रदेश सरकार कार्य कर रही है। उसी क्रम में आज जनपद गोरखपुर में ‘कोविड हेल्प डेस्क’ एवं कंट्रोल सेन्टर का निरीक्षण किया। मैं पूरी तरह आश्वस्त हूँ कि कोरोना हारेगा, हम जीतेंगे।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को एम्स का निरीक्षण करेंगे। कोविड मामलों में बढ़ोतरी के मद्देनजर वे चिकित्सा सुविधाओं के निरीक्षण के लिए गोरखपुर के बाद अयोध्या भी जाएँगे।

‘सरकारी खजाने से प्रशांत किशोर को वेतन’: प्रधान सलाहकार नियुक्त करने पर SC ने पंजाब सरकार से माँगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का ‘प्रधान सलाहकार’ नियुक्त किए जाने के विरोध में दायर याचिका को लेकर गुरुवार (मई 6, 2021) को पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया। याचिका में प्रशांत किशोर की नियुक्ति और उन्हें सरकारी खजाने से वेतन तथा सुविधाएँ दिए जाने पर आपत्ति जताई गई है।

कुछ दिन पहले इसी याचिका को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने ये कहते हुए खारिज कर दिया था कि सीएम को पूरा अधिकार है कि वे जिसे चाहें उसे अपना सलाहकार चुने। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। 

SC में मामले की सुनाई जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच ने की। पंजाब सरकार समेत सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जवाब माँगा गया है। याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी दलील में कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने उनके केस में तथ्यों को ठीक से नहीं सुना और उनकी याचिका खारिज कर दी गई।

याचिका में क्या कहा गया?

इस केस में लभ सिंह और सतिंदर सिंह ने पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका में प्रशांत किशोर की प्रधान सलाहकार पद पर नियुक्ति को निरस्त करने की अपील की गई थी।

अपनी याचिका में याचिकाकर्ताओं ने अनुच्छेद 16(1) का हवाला देते हुए कहा था कि राज्य सरकार के कार्यालय में कोई भी अपॉइंटमेंट, इससे (अनुच्छेद में निहित प्रावधानों) अलग नहीं हो सकता। इस आर्टिकल में हर नागरिक को रोजगार में अवसर की समानता और नियुक्ति का अधिकार है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि राज्य सरकार के लिए ये जरूरी है कि वो ऐसी नियुक्ति के लिए कोई विज्ञापन निकाले, क्योंकि याचिकार्ता समेत भारी तादाद में पढ़े-लिखे समझदार लोग राज्य में बैठे हैं।

याचिका में ये भी कहा गया था कि किशोर की नियुक्ति मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार पद पर होगी। इस तरह उन्हें कैबिनेट मंत्री का पद मिल जाएगा। उन्हें वेतन और अन्य सुविधाएँ राज्य के खजाने से दिया जाएगा।

प्रशांत किशोर को क्या मिलेंगी सुविधाएँ?

कुछ समय पहले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को अपने प्रमुख सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया था। पंजाब सरकार की ओर से जारी आदेश में बताया गया था कि प्रशांत किशोर अपनी सैलरी के तौर पर सिर्फ एक रुपया लेंगे। इसके अलावा उन्हें प्राइवेट सेक्रेटरी, पर्सनल असिस्टेंट, डाटा एंट्री ऑपरेटर, एक क्लर्क और दो चपरासी दिए जाएँगे। किशोर को राज्य ट्रांसपोर्ट कमिश्नर की ओर से वाहन मुहैया कराया जाएगा और उनके आतिथ्य के लिए प्रति माह 5000 रुपए खर्च किए जाएँगे।

हिन्दुओ… इस आदेश को रट लो, क्योंकि यह केवल एक गाँव-एक प्रांत की समस्या नहीं

1995 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में हिंदुत्व की व्याख्या ‘जीवनशैली’ के तौर पर की थी। दो दशक बाद शीर्ष अदालत ने इस पर पुनर्विचार का फैसला किया। अब मद्रास हाई कोर्ट का एक फैसला आया है। उस फैसले पर गौर करने से पहले एक परिस्थितिजन्य सवाल। ऐसी परिस्थिति जो आपमें से बहुतों के लिए काल्पनिक होगी। ठीक उसी वक्त आप जैसे बहुतों के लिए हकीकत।

आप एक गाँव/कस्बे/शहर में रहते हैं। बचपन से आप देख रहे थे कि राम जानकी मोहल्ले से रामनवमी की जुलूस हर साल निकलती है। विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए जिला स्कूल मैदान में समाप्त हो जाती है। कभी कोई बवाल नहीं। अचानक से एक बार यात्रा मार्ग में पड़ने वाले इस्लाम नगर के लोग आपके जुलूस पर आपत्ति जताते हैं। इसके बाद उनकी भावनाओं का हवाला दे आपकी धार्मिक यात्रा का मार्ग बदल/छोटा कर दिया जाता है। सालों से चली आ रही एक परंपरा पर विराम लग जाता है, क्योंकि एक खास इलाके के बहुसंख्यकों को आपके धार्मिक आयोजन से दिक्कत है।।

ऐसी किसी भी स्थिति के लिए मद्रास हाई कोर्ट का एक फैसला जो हाल में चुनाव आयोग पर तल्ख टिप्पणी के लेकर चर्चा में रहा है, नजीर बन सकता है। सरल शब्दों में कहें तो हाई कोर्ट ने कहा है;

  • मजहबी असहिष्णुता की अनुमति दिया जाना एक धर्मनिरपेक्ष देश के लिए अच्छा नहीं है। किसी भी मजहबी समूह के किसी भी तरह की असहिष्णुता पर रोक लगनी चाहिए
  • भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। यदि क्षेत्र विशेष में एक मजहबी समूह बहुसंख्यक है तो यह उस क्षेत्र में अन्य धर्म के लोगों के त्योहारों या जुलूस की अनुमति नहीं दिए जाने का आधार नहीं हो सकता
  • प्रत्येक समुदाय को दूसरे धर्मों की भावनाओं का अपमान किए बिना धार्मिक जुलूस निकालने का मौलिक अधिकार है
  • क्षेत्र विशेष का बहुसंख्यक समूह दूसरे धर्म के लोगों को धार्मिक जुलूस निकालने या त्योहार मनाने से नहीं रोक सकते
  • यदि इसे स्वीकार किया गया तो वह दिन भी आ सकता है जब क्षेत्र विशेष के बहुसंख्यक अपने इलाके में अन्य धार्मिक समूह के लोगों को सड़कों पर आवाजाही, परिवहन या अन्य सामान्य गतिविधियों से भी रोक सकते हैं
  • क्षेत्र विशेष के मजहबी बहुसंख्यकों के इस रवैए के विरोध में अन्य धार्मिक समूह भी इसी तरह का रुख दिखाएँ तो अराजकता फैल सकती है। दंगे हो सकते हैं। इसे जानमाल का नुकसान होगा। हमारे देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को नुकसान हो सकता है

अब यह जानते हैं कि मद्रास हाई कोर्ट को आखिरकार ये टिप्पणियाँ क्यों करनी पड़ी?

जस्टिस एन किरुबाकरण (N. Kirubakaran) और जस्टिस पी वेलुमुरुगन (P. Velumurugan) की खंडपीठ ने एक गाँव में कुछ हिंदू त्योहारों/धार्मिक जुलूसों को लेकर मुस्लिमों की आपत्ति को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर सुनवाई के दौरान ये बातें कही। लाइव लॉ की रिपोर्ट बताती है कि सरकारी जमीन के इस्तेमाल को लेकर 1951 से ही हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच विवाद चल रहा था। इसके कारण कई सांप्रदायिक विवाद हुए और दोनों पक्षों की ओर से कई मामले भी दर्ज किए गए।

बावजूद इसके ​2011 तक हिंदुओं के कुछ त्योहारों के आयोजन को लेकर कोई विवाद नहीं रहा। तीन मंदिरों का तीन दिवसीय आयोजन शांति से 2011 तक निपटता रहा। 2012 में मुस्लिमों ने इन आयोजनों को ‘पाप’ करार देते हुए विरोध किया। वे इलाके में खुद के बहुसंख्यक होने और अपनी भावनाओं का भी हवाला दे रहे थे। इसकी वजह से 2012 के बाद ये आयोजन कई तरह के प्रतिबंधों के साथ होने लगे। 2018 में रेवेन्यू डिवीजनल आफिसर ने कुछ शर्तों के साथ आयोजन को अनुमति दी थी। इसे मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट का ताजा फैसला इसी आलोक में आया है।

ऊपर जो परिस्थितिजन्य सवाल है उस तरह के हालात में अमूमन देखने को मिलता है कि हिंदू मन मसोस कर रह जाते हैं। या फिर उनके साथ वही होता है जो चंदन गुप्ता या अनुराग पोद्दार के साथ हुआ। अब इनसे इतर मद्रास हाई कोर्ट ने एक रास्ता दिखाया है, जो मौजूँ है!

WB: राज्यपाल धनखड़ ने CBI को दी TMC के 4 शीर्ष नेताओं के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति, ममता बनर्जी सरकार में थे मंत्री

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने रविवार (9 मई) को नारद स्टिंग टेप मामले में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के शीर्ष नेताओं पर मुकदमा चलाने के लिए केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को मंजूरी दे दी। राजभवन ने कहा, पश्चिम बंगाल के गवर्नर जगदीप धनखड़ ने फिरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और शोवन चटर्जी के खिलाफ एक घोटाले में सीबीआई को मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है।

ये आदेश सीबीआई द्वारा पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री के रूप में कर चुके चार टीएमसी नेताओं के खिलाफ जाँच की अनुमति दिए जाने का निवेदन करने के बाद दिया गया है।

एक प्रेस विज्ञप्ति में, राजभवन ने कहा, “माननीय राज्यपाल कानून के संदर्भ में अनुमोदन देने के लिए सक्षम प्राधिकारी हैं क्योंकि वे संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत ऐसे मंत्रियों के लिए नियुक्ति प्राधिकारी होते हैं।”

बयान में कहा गया है कि चार नेताओं के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी धनखड़ द्वारा दी गई है और ऐसा “सीबीआई द्वारा ऐसा अनुरोध किए जाने और माननीय राज्यपाल को मामले से संबंधित संपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने के बाद किया गया” और इस तरह की मंजूरी देने के लिए सक्षम अधिकारी होने के नाते उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 163 और 164 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग किया।”

2016 में सार्वजनिक किए गए थे नारद स्टिंग ऑपरेशन

सीबीआई अब फिरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और शोवन चटर्जी के खिलाफ कार्रवाई शुरू करेगी। ये सभी तब ममता बनर्जी मंत्रिमंडल में मंत्री थे जब 2014 में कथित रूप से नारद स्टिंग टेप बनाए गए थे।

हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हाकिम, मुखर्जी और मित्रा को टीएमसी विधायक के रूप में फिर से चुना गया है, जबकि बीजेपी में शामिल होने के लिए टीएमसी छोड़ चुके चटर्जी ने चुनाव के बाद दोनों दलों से संबंध तोड़ लिए हैं।

पश्चिम बंगाल 2016 विधानसभा चुनावों से पहले सार्वजनिक किए गए नारद स्टिंग टेप में दावा किया गया था कि 2014 में टीएमसी के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों से मिलते-जुलते लोग कथित रूप से वादा किए गए अहसान के बदले में एक काल्पनिक कंपनी के प्रतिनिधियों से पैसे लेते नजर आए थे।

यह स्टिंग ऑपरेशन कथित तौर पर नारद न्यूज पोर्टल के मैथ्यू सैमुअल द्वारा किया गया था। कलकत्ता हाई कोर्ट ने मार्च, 2017 में स्टिंग ऑपरेशन मामले में सीबीआई जाँच का आदेश दिया था।

Covid से ठीक हुए मरीजों में अब Black Fungus का खतरा, महाराष्ट्र और गुजरात में सामने आए कई मामले

देश फिलहाल कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर से लड़ रहा है लेकिन अब एक नया खतरा सामने आ रहा है। यह खतरा है ब्लैक फंगस (Black Fungus) या म्यूकरमाइकोसिस (Mucormycosis) का। यह एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक फंगस इन्फेक्शन है। गुजरात और महाराष्ट्र में ब्लैक फंगस के कई मरीज सामने आ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि यह फंगल इन्फेक्शन कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक हुए मरीजों को फिर से बीमार कर रहा है।

गुजरात में ब्लैक फंगस (Black Fungus) से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। राज्य में इस इन्फेक्शन से पीड़ित मरीजों की संख्या 100 से अधिक हो चुकी है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार अकेले सूरत में ही ब्लैक फंगस या म्यूकरमाइकोसिस के कारण 8 मरीजों की आँखों की रोशनी चली गई। ये सभी मरीज हाल ही में कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक हुए थे। गुजरात सरकार ने इस पर संज्ञान लेते हुए सभी सिविल अस्पतालों में इस इन्फेक्शन से पीड़ित मरीजों के लिए अलग वार्ड बनाने का आदेश दिया है।

महाराष्ट्र में भी ब्लैक फंगस के मामले बढ़ते जा रहे हैं। राज्य में इस इन्फेक्शन से पीड़ित 8 मरीजों की मौत हो गई है लगभग 200 मरीजों का इलाज चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार महाराष्ट्र में 200 में से 8 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लैक फंगस या म्यूकरमाइकोसिस का इलाज संभव है लेकिन यदि इलाज में देरी की गई तो यह खतरनाक साबित हो सकता है। इस इन्फेक्शन के कारण मरीजों की आँखों की रोशनी जा सकती है और सबसे बुरे केस में मौत भी हो सकती है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) इसके पीछे एक बड़ा कारण है।

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वीके पाल ने शुक्रवार को पीटीआई से चर्चा करते हुए कहा कि म्यूकरमाइकोसिस इन्फेक्शन म्यूकर नाम के फंगस के कारण होता है। यह फंगस नम सतह पर पाया जाता है। पाल ने बताया कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज को जो ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जाता है उसमें ह्यूमिडिफायर होता है जिसमें पानी की मात्रा होती है। इससे उत्पन्न नमी के कारण मरीज ब्लैक फंगस का शिकार हो सकता है। सरदर्द, बुखार, आँखों के नीचे दर्द और कम दिखाई देना इस इन्फेक्शन के प्रमुख लक्षण हैं जो कोरोना वायरस संक्रमण से स्वस्थ हुए मरीज में उभर सकते हैं।

कोरोना संक्रमित आजम खान की तबीयत बिगड़ी, बेटे अब्दुल्ला संग जेल से शिफ्ट किए गए मेदांता, पहले कर दिया था मना

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जेल में बंद समाजवादी पार्टी के नेता एवं रामपुर के सांसद आजम खान की तबीयत अचानक बिगड़ने के कारण उन्हें लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। आजम खान सीतापुर में अपने बेटे अब्दुल्ला के साथ जेल में बंद थे। दोनों ही कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। आजम खान को उनके बेटे अब्दुल्ला के साथ ही मेदांता में शिफ्ट किया गया है।

सीतापुर जेल प्रशासन के अनुसार Covid-19 से पीड़ित आजम खान कई दिनों से बीमार थे लेकिन शनिवार रात से ही उनका ऑक्सीजन लेवल 90 तक पहुँच गया और दोपहर होते-होते उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। हालाँकि, कई दिनों से बीमार चल रहे आजम खान ने संक्रमित पाए जाने पर जेल से बाहर निकलने से मना कर दिया था। उनकी माँग थी कि उनका इलाज जेल में ही कराया जाए।

आजम खान द्वारा इलाज के लिए जेल से बाहर जाने से मना करने की खबर जब प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुँची तो उन्होंने आजम खान को लखनऊ के ही पीजीआई में भर्ती कराने के लिए कहा लेकिन आजम खान इसके लिए भी राजी नहीं हुए। हालाँकि, इसके बाद आजम खान लखनऊ के मेदांता अस्पताल में उपचार कराने के लिए तैयार हो गए जिसके बाद उन्हें बेटे अब्दुल्ला के साथ एम्बुलेंस के माध्यम से लखनऊ ले जाया गया।

सपा सांसद आजम खान, बेटे व पत्नी सहित फरवरी 2020 से ही जेल में हैं। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिला कारागार में बंद अखिलेश सरकार के पूर्व मंत्री आजम खान 29 अप्रैल को कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए। इसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए लखनऊ के केजीएमयू ले जाने के लिए पुलिस अधिकारियों के साथ एंबुलेंस जेल के गेट पर पहुँची थी लेकिन आजम खान ने सड़क के रास्ते जाने से साफ इनकार कर दिया था। हालाँकि, इस बार आजम खान लखनऊ के मेदांता अस्पताल जाने के लिए तैयार हो गए।  

टीकरी बॉर्डर: आंदोलन में शामिल होने आई युवती के साथ दुष्‍कर्म मामले में 4 किसान नेताओं सहित 6 पर FIR

टीकरी बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन में शामिल होने आई पश्चिम बंगाल की 25 वर्षीय युवती की 30 अप्रैल को टीकरी बॉर्डर के ही एक निजी अस्पताल में मृत्यु हो गई थी। युवती कोरोना वायरस से संक्रमित थी। इस मामले ने अब नया मोड़ लिया है। खबर आ रही है कि युवती के साथ रेप सहित अन्य धाराओं में 6 लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन 6 लोगों में 2 किसान नेता, 2 आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता और किसान आंदोलन से जुड़ी 2 महिला वॉलंटियर शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल से आंदोलन में शामिल होने आई इस युवती की मृत्यु कोरोना वायरस के संक्रमण से हुई थी लेकिन अब युवती के पिता के बयान के आधार पर बहादुरगढ़ शहर थाना क्षेत्र में रेप का मामला दर्ज हुआ है। आरोपित किसान सोशल आर्मी से जुड़े थे। आरोपितों में अनिल मलिक, अनूप सिंह, अंकुश सांगवान, जगदीश बराड़, कविता आर्य और योगिता सुहाग शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आरोपित अनूप सिंह हिसार क्षेत्र का है और आम आदमी पार्टी (AAP) का सक्रिय कार्यकर्ता भी है जिसकी पुष्टि आप सांसद सुशील गुप्ता ने की। अनिल मलिक भी दिल्ली में AAP का कार्यकर्ता बताया जा रहा है।

आरोपितों पर रेप के अलावा अपहरण, ब्लैकमेलिंग और धमकी देने की धाराएँ भी लगाई गई हैं। युवती की मौत के बाद से ही अनूप सिंह गायब है। हालाँकि, युवती के माता-पिता टीकरी और सिंघू बॉर्डर पर आए थे। उन्होंने शनिवार रात ही बहादुरगढ़ शहर थाना क्षेत्र में मामला दर्ज करवाया।

इसके बाद ही संयुक्त किसान मोर्चा ने अनूप सिंह से अपना पल्ला झाड़ लिया था। थाना प्रभारी विजय कुमार के अनुसार महिला थाना प्रभारी को इस मामले की जाँच सौंप दी गई है। हालाँकि, युवती कोरोना वायरस से संक्रमित थी, मगर किसानों का कहना था कि उन्‍हें बदनाम करने के लिए दुष्‍कर्म होने जैसी बातें की जा रही हैं।

इस घटना के बाद से लगातार किसान आंदोलन पर सवाल उठ रहे हैं। हालाँकि, किसान आंदोलन के नेता यही दावा करते रहे कि युवती की मौत फेफड़ों में संक्रमण के कारण हुई है लेकिन संदीप सिंह नाम के एक पत्रकार ने ट्विटर पर यह पुष्टि की थी कि युवती की मौत कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण हुई है। अब इस मामले में युवती के साथ दुष्कर्म होने की बात भी सामने आ रही है। फिलहाल अभी तक किसी आरोपित के गिरफ्तार होने की बात सामने नहीं आई है।

इससे पहले भी किसान आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगते आए हैं। इनमें मोहम्मद जुबेर, वरुण चौहान (ट्रॉली टाइम्स का सदस्य), अंतरप्रीत सिंह (स्टूडेंट फॉर सोसायटी का नेता) और स्वराज फॉर यूथ का अध्यक्ष मनीष कुमार भी शामिल है।

एक ओर जहाँ देश में लगातार बढ़ रहे कोरोना वायरस के संक्रमण के बावजूद भी किसान आंदोलन में भीड़ बढ़ रही है, वहीं अब किसान आंदोलन के कार्यकर्ताओं द्वारा यौन शोषण की खबरें भी आ रही हैं। ऐसे में लगातार किसान आंदोलन पर प्रश्न उठ रहे हैं।