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महाराष्ट्र पुलिस बल सबसे अधिक भ्रष्ट, करप्शन में 26 फीसदी का इजाफा: ACB के आँकड़ों से खुलासा

2021 की शुरुआत से महाराष्ट्र राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों में 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, यह जानकारी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा जारी सांख्यिकीय रिपोर्ट [पीडीएफ] से सामने आई है।

01 जनवरी, 2021 से 24 अप्रैल, 2021 तक के आँकड़ो का हवाला देने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, भ्रष्टाचार के मामलों में अधिकतम गिरफ्तारी पुलिस विभाग से हुई और उसके बाद राजस्व विभाग के अधिकारियों का नंबर है।

एक चौंकाने वाले खुलासे के मुताबिक, पुलिस विभाग में शामिल रिश्वत की राशि 11,58,100 रुपए और उसके बाद नगर निगमों में 10,05,500 रुपए और राजस्व विभाग में 9,45,400 रुपए दर्ज की गई है।

254 दर्ज मामलों में रिश्वत की कुल राशि 61.89 लाख रुपए है।

आँकड़ों के अनुसार, एसीबी द्वारा इस साल जनवरी की शुरुआत से 24 अप्रैल तक 254 नए मामले दर्ज किए गए और इनमें शामिल 342 लोगों की गिरफ्तारी हुई जो पिछले साल की समान अवधि के 201 नए मामलों और 282 गिरफ्तारियों की तुलना में कहीं अधिक है।

दर्ज किए गए 254 मामलों में से 53 मामले राजस्व विभाग के खिलाफ दायर किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप 73 अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई है।

रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि भ्रष्टाचार के 50 मामलों में पुलिस विभाग से 77 गिरफ्तारियाँ की गई हैं, जबकि विभिन्न नगर निगमों के खिलाफ 22 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 33 अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई है।

अधिकतम मामले औरंगाबाद (79), नासिक (58), पुणे (57), ठाणे (40) और मुंबई (32) जैसे शहरों से दर्ज किए गए हैं।

एसीबी के एक अधिकारी ने एक बयान में खुलासा किया, “पुलिस और राजस्व विभाग पिछले कुछ सालों से भ्रष्टाचार के मामलों में शीर्ष स्थान पर हैं। पिछले साल लॉकडाउन के कारण कम मामले दर्ज किए गए थे और जैसे ही लॉकडाउन हटाया गया, मामले फिर से बढ़ने लगे। हम नागरिकों से अपील करते हैं कि वे भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों द्वारा की जा रही माँगों में न पड़ें और आगे आकर एसीबी से शिकायतें करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज हो सकें। हम नियमित रूप से नागरिकों को भ्रष्टाचार को उखाड़ने के बारे में अधिक जागरूक बनाने के लिए जागरूकता अभियान चलाते हैं।”

CBI ने दर्ज की अनिल देशमुख के खिलाफ FIR

इस बीच, भ्रष्टाचार के आरोपों में महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और एनसीपी नेता अनिल देशमुख के खिलाफ भी सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की है।

पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने देशमुख के खिलाफ जबरन वसूली और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने डॉ. जयश्री पाटिल द्वारा दायर जनहित याचिका के आधार पर सीबीआई जाँच के आदेश के बाद प्रारंभिक जाँच की जा रही है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले को ‘असाधारण और अभूतपूर्व’ करार देते हुए यह भी कहा था कि उसके आदेश के बाद शुरू की गई प्रारंभिक जाँच के बाद सीबीआई कार्रवाई का फैसला करने के लिए स्वतंत्र होगी। इसलिए, इसने सीबीआई को तब मामले में एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी, यदि उसे परमबीर सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों में अनिल देशमुख के खिलाफ सबूत मिला हो।

कोरोना संकट के बीच UP में क्‍यों हो रहे पंचायत चुनाव? जानिए योगी सरकार ने क्या दिया जवाब

देशभर में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इस बीच राज्य में पंचायत चुनाव कराने के योगी सरकार के फैसले की आलोचना का सरकार ने जवाब दिया है। इस फैसले को लेकर योगी सरकार ने कहा है कि वो महामारी के मद्देनजर राज्य में चुनाव नहीं कराना चाहती है, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के चलते ये करना पड़ रहा है।

यूपी सरकार के खिलाफ विनोद उपाध्याय ने याचिका दायर की थी, इस पर हाई कोर्ट ने 4 फरवरी 2021 को राज्य चुनाव आयोग को 30 अप्रैल तक पंचायत चुनाव को कराने का आदेश दिया था। कोर्ट ने राज्य को बीते 15 अप्रैल तक आवंटन और आरक्षण की प्रक्रिया को पूरा करने को कहा था।

योगी सरकार के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि कोर्ट के आदेश के कारण ही महामारी के बीच चुनाव कराने का फैसला लेना पड़ा। ताकि इसे 10 मई तक पूरा किया जा सके। पिछले साल दिसंबर में ही चुनाव होने थे, कोरोना कारण पंचायतों के पुनर्गठन और परिसीमन में देरी हुई। लेकिन, कोर्ट के आदेश ने चुनाव के लिए बाध्य कर दिया।

15 अप्रैल से शुरू हुआ था चुनाव

उत्तर प्रदेश में 15 अप्रैल से पंचायत इलेक्शन शुरू हुए थे, जिसके रिजल्ट 2 मई को आएँगे। राज्य सरकार के स्पोक्सपर्सन ने कहा कि सरकार मतदाताओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कारण इस दौरान ग्राम पंचायतों में उचित स्वच्छता, सैनिटाइजेशन और संक्रमण की रोकथाम के लिए राज्य के 75 जिलों के गाँवों में विशेष सैनिटाइजेशन अभियान चलाया गया।

प्रदेश में पंचायत चुनावों के बीच शनिवार (24 अप्रैल 2021) को उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन ने मुख्य चुनाव आयुक्त और राज्य निर्वाचन आयुक्त से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के शेष चरणों को स्थगित करने की माँग की थी। साथ ही कोरोना के कारण अपनी जान गँवाने वाले मतदान कर्मियों को कोरोना वॉरियर्स की तरह 50 लाख रुपए की धनराशि देने की भी माँग की।

कोरोना से जंग में उतरेंगे 2 साल पहले रिटायर हुए सेना के डॉक्टर, पीएम मोदी से मिले CDS बिपिन रावत

भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर बेहद घातक साबित हो रही है। देश भर में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार हरसंभव कदम उठा रही है। इसी बीच चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। एएनआई के मुताबिक इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए सशस्त्र बलों द्वारा की जा रही तैयारियों और ऑपरेशन की समीक्षा की। 

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक सीडीएस रावत ने प्रधानमंत्री मोदी को जानकारी दी कि सशस्त्र बलों से पिछले 2 साल में सेवानिवृत्त हुए सभी मेडिकल कर्मचारी अपने घरों के पास स्थित कोविड-19 केन्द्रों में काम करेंगे।

उन्होंने बताया कि अस्पतालों में डॉक्टरों की मदद के लिए बड़ी संख्या में नर्सिंग स्टाफ को तैनात किया जा रहा है। सशस्त्र बलों के विभिन्न प्रतिष्ठानों के पास उपलब्ध ऑक्सीजन सिलेंडर अस्पतालों को दिए जाएँगे।

रावत ने पीएम मोदी को यह भी बताया कि वे कोरोना मरीजों के इलाज के लिए बड़ी संख्या में मेडिकल सुविधाएँ तैयार कर रहे हैं। जहाँ संभव होगा वहाँ सेना की मेडिकल सुविधाएँ आम लोगों को उपलब्ध कराई जाएँगी। बैठक में मोदी ने भारत और विदेशों में ऑक्सीजन एवं अन्य जरूरी वस्तुओं के परिवहन के लिए भारतीय वायुसेना की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशनों की भी समीक्षा की। प्रधानमंत्री मोदी को सूचित किया गया कि कमांड हेड क्‍वार्टर, कॉर्प्स हेडक्‍वार्टर, डिवीजन मुख्यालय, नौसेना और वायुसेना के मुख्यालयों में काम करने वाले चिकित्सा अधिकारियों को अस्पतालों में तैनात किया जाएगा।

बता दें कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने के लिए युद्धस्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। देश में अब तक कोरोना की कुल 14.19 करोड़ लोगों को वैक्सीन की डोज दी जा चुकी हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 25 अप्रैल को अभियान का 100वां दिन पूरा हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक 20,44,954 सत्रों के माध्यम से कुल मिलाकार टीकों की 14,19,11,223 खुराकें दी जा चुकी हैं।

ममता बनर्जी ने नए सिरे से चुनाव की माँग के बाद अब किया केंद्रीय सुरक्षा बलों को पश्चिम बंगाल से हटाने की माँग

ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में जारी विधानसभा चुनावों से केंद्रीय बलों को हटाने की माँग एक बार फिर दोहराई है। बंगाल की मुख्यमंत्री राज्य में 8 चरणों के समापन से पहले ही दोबारा चुनाव कराए जाने की माँग भी कर चुकी हैं। हार के डर से, ममता बनर्जी ने अब मद्रास HC के आदेश का सहारा लेते हुए कहा है कि केंद्रीय सुरक्षा बल ही हैं जो राज्य में कोविड-19 का प्रसार कर रहे हैं और इसलिए,केंद्र सरकार द्वारा उन्हें वापस बुलाया जाना चाहिए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ममता बनर्जी ने कहा, ”मैं मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत करती हूँ, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग दोनों (वर्तमान) स्थिति (राज्य में फैले कोविड के) के लिए जिम्मेदार हैं।” बनर्जी ने ये आरोप उत्तरी कोलकाता में कार्यकर्ताओं की एक बैठक में लगाया, जहाँ पार्टी के उम्मीदवार और कार्यकर्ता मौजूद थे।

75 फीसदी केंद्रीय बल कोरोना संक्रमित: ममता बनर्जी

उन्होंने आगे कहा, “मैं अनुरोध कर रही हूँ कि कृपया कोविड-प्रभावित राज्यों से लाई गई लगभग 2 लाख- मजबूत केंद्रीय सेनाओं, जो स्कूलों और कॉलेजों में सुरक्षित घरों में डेरा डाले हुए हैं और कोविड प्रबंधन कार्यों में बाधा डाल रहे हैं, उनमें से 75 प्रतिशत वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। कृपया उन्हें अंतिम चरण से हटा दें।”

ध्यान देने वाली बात ये है कि मद्रास हाईकोर्ट ने अपनी राय देते हुए कहा कि केंद्रीय बलों और चुनाव आयोग को देश में में कोविड-19 के प्रसार के लिए अकेले दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

लेकिन, ममता बनर्जी ने हाई कोर्ट के विचार को एक बार फिर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए तैनात किए गए केंद्रीय बलों को राज्य से हटाए जाने की अपनी माँग को दोहराने के अवसर में तब्दील कर दिया।

यह पहली बार नहीं है कि ममता बनर्जी ने इस तरह की माँग की है, लेकिन सीआरपीएफ की उपस्थिति के कारण चुनावों में निष्पक्षता बरकरार है।

ममता बनर्जी ने दी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की अनुमति

विधानसभा चुनावों के परिणाम का (2 मई) के करीब आने के साथ ही, ममता बनर्जी ने घोषणा की कि चुनाव समाप्त होने के बाद वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी। यह दावा करते हुए कि चुनाव आयोग ने अधिकारियों को विधानसभा चुनावों के दौरान टीएमसी नेताओं को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया था, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि वह राज्य में नए ‘तटस्थ चुनावों’ को कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में, ममता बनर्जी ने राज्य चुनावों में चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बीजेपी की मदद करने के लिए काम कर रहा है। सीएम ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि टीएमसी कार्यकर्ता बीजेपी के खिलाफ वोट न कर पाएँ।

चुनाव आयोग के खिलाफ लड़ें लड़ाई: टीएमसी समर्थकों से ममता

टीएमसी सुप्रीमो ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपने समर्थकों को उकसाते हुए कहा, ”मैं बीरभूम, मुर्शिदाबाद, मालदा, जहाँ हर जगह चुनाव होने हैं, सभी से अपील कर रही हूँ कि सावधान रहें, अभी से एहतियात बरतें, एक तरफ हमें कोविड के खिलाफ जंग लड़नी है, तो दूसरी तरफ हमें चुनाव आयोग के खिलाफ लड़ना है, जो यह सुनिश्चित करने की साजिश कर रहा है कि हमारे लोग मतदान न कर पाएँ।”

उन्होंने आगे कहा, ”अगर पुलिस किसी को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लेती है, तो उनके परिवार के सदस्य पुलिस स्टेशन जाएँ और वहाँ बैठें, पुलिस स्टेशन का घेराव करें, पूछिए अवैध तरीके से हिरासत में क्यों लिया गया, अगर जरूरत पड़े तो कोर्ट जाएँ, हम हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक हर जगह जाएँगे। जैसे ही किसी को अवैध रूप से हिरासत में लिया जाता है, वैसे ही FIR दर्ज कराएँ।”

कोरोना नियमों की केजरीवाल ने उड़ाई धज्जियाँ, किया राधा स्वामी व्यास कोविड सेंटर का दौरा: 5 दिन पहले हुए थे आइसोलेट

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल 5 दिन पहले कोरोना पॉजिटिव पाई गई थीं। ऐसे में उन्हें आईसोलेशन में होना चाहिए था। लेकिन, वह तो खुलेआम कोरोना के बेसिक नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। अनपेक्षित तरीके से केजरीवाल ने सोमवार को छतरपुर में आईटीबीपी द्वारा संचालित सरदार पटेल कोविड केयर सेंटर का दौरा किया।

इस दौरान उनके साथ डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन भी कोविड सेंटर के निरीक्षण के लिए आए थे।

बीते 20 अप्रैल 2021 को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। फिलहाल होम आईसोलेशन में उनका इलाज चल रहा है।

दिलचस्प बात ये है कि सुनीता केजरीवाल के पॉजिटिव पाए जाने के कुछ ही समय बाद केजरीवाल ने घोषणा की थी कि वह खुद को आईसोलेट कर लेंगे। उन्होंने लोगों से भी 6 दिन के लॉकडाउन के दौरान घर पर ही रहने की अपील की थी।

हालाँकि, होम क्वारंटाइन का उल्लंघन करते हुए खुद अरविंद केजरीवाल ने ही राधा स्वामी ब्यास कोविड केयर सेंटर की तस्वीरें शेयर की थी, जहाँ उन्हें कम से कम 10 लोगों के साथ बेहद नजदीक देखा गया था। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का नामोनिशान नहीं था।

500 ऑक्सीजन बेड वाले कोविड केयर सेंटर को आज से चालू कर दिया गया है, जिसे 200 आईसीयू बेड के साथ बढ़ाकर 700 बेड किया जा सकता है।

दिल्ली सरकार की डैमेज कंट्रोल की कोशिश

कोरोना के कुप्रबंधन के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद दिल्ली सरकार अब डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऑक्सीजन की कमी की शिकायत के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार से केंद्र सरकार द्वारा उसे अलॉट किए गए ऑक्सीजन को लेकर सवाल किया था। कोर्ट ने टिप्पणी की, “प्रत्येक राज्य अपने स्वयं के टैंकरों की व्यवस्था कर रहा है, यदि आपके पास अपने स्वयं के टैंक नहीं हैं, तो उसका प्रबंध करें। आपको यह करना होगा, केंद्रीय सरकार के अधिकारियों से संपर्क करें। हम अधिकारियों के बीच संपर्क की सुविधा के लिए यहाँ नहीं हैं। ”

इसके बाद अब अरविंद केजरीवाल अब राष्ट्रीय राजधानी में ऑक्सीजन की आपूर्ति की क्रायोजेनिक टैंकरों के लिए लोगों और संस्थाओं से इसके लिए विज्ञापनों के जरिए निवेदन कर रहे हैं।

32 घंटे से मिजोरम के लुंगलेई के जंगलों में लगी भीषण आग, 12 घर जलकर खाक: वायुसेना मदद के लिए पहुँची

पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम के लुंगलेई और लॉन्गटाई जिलों के जंगलों में बीते 32 घंटे से लगी आग भयावह रूप धारण कर चुकी है। आग इंसानी बस्तियों तक पहुँच गई है।

अधिकारियों के मुताबिक असम राइफल्स, बीएसएफ के जवानों के साथ स्थानीय स्वयंसेवी समूहों के लोग राज्य सरकार के दमकल विभाग के साथ आग बुझाने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं।

रविवार की शाम तक आग लगातार जाल रही थी। मिजोरम सरकार की माँग पर भारतीय वायुसेना ने आग बुझाने के लिए दो एमआई -17 वी 5 हेलीकॉप्टरों को तैनात कर दिया है। इसे विशेष बाँबी बाल्टी से लैस किया गया है। इस बात की जानकारी रक्षा मंत्रालय ने दी है।

कथित तौर पर लुंगलेई कस्बे के पास की जंगली पहाड़ियों में शनिवार सुबह 7 बजे आग लगी थी। रविवार तक यह न केवल लुंगलेई टाउन के 10 गाँवों में फैल गई, बल्कि यह पड़ोसी जिले लॉन्गटेई तीन ब्लॉक्स को भी अपनी चपेट में ले लिया।

इस भयावह जंगली आग को लेकर लुंगलेई जिले के कलेक्टर कुलोथुंगन ने कहा, “कल शाम को हमने आग को पूरी तरह से कंट्रोल कर लिया था, लेकिन यह आज सुबह फिर से भड़क गई और अभी भी जल रही है। हम इस पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हवाएँ और सूखी वनस्पतियों के कारण यह तेजी से फैल रही है। इसी कारण यह काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।”

मिजोरम डीआईपीआर के द्वारा प्रेस को दिए गए बयान के मुताबिक, लुंगलेई शहर के जोटलंग, सेरकॉन, चनमरी जैसे इलाकों में आग कुछ घरों तक पहुँच गई है। इससे बड़ा नुकसान हो सकता है।

जिलाधिकारी कुलोथुंगन ने कहा, “आग मानव बस्तियों के करीब फैल गई थी, प्रशासन ने लोगों के घरों को खाली करा दिया है। किसी भी व्यक्ति को न तो किसी प्रकार की कोई हानि हुई है और न ही संपत्तियों को नुकसान पहुँचा है।”

हालाँकि, लॉंग्टलाई जिले में आग से जानमाल के नुकसान की खबर सामने आई है। जिले की एडीसी मर्लिन रुलजखुमथंगी ने कहा, “बुंगटलाँग दक्षिण में, आग से 12 घर पूरी तरह से जलकर खाक हो गए हैं, जबकि दो को आंशिक नुकसान हुआ है। अच्छी बात यह रही कि किसी भी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन पशुधन की हानि हुई है।” उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने अधिकारियों के साथ ही राहत आपूर्ति को तत्काल गाँव में भेज दिया है।

एडीसी मर्लिन रुलजखुमथंगी ने कहा, “छोटी-मोटी आग अभी भी लगी हुई है। यह माना जा रहा है कि इससे इंसानों के लिए कोई खतरा नहीं होगा, लेकिन इसे खारिज भी नहीं किया जा सकता है। “

डीसी कुलोथुंगन ने कहा कि आग के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। हम शाम तक इसे कंट्रोल कर पाने की उम्मीद कर रहे हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या यह झूमिग खेती के कारण हो सकता है? इस पर डीसी ने कहा कि वह इस मामले की फिलहाल पुष्टि नहीं कर सकते हैं, क्योंकि अभी इसकी जाँच चल रही है।

फरवरी में मिजोरम के वन अधिकारियों ने कहा था कि राज्य में 2020 में लगभग 1,300 जंगल की आग की सूचना मिली थी, जिसमें से झूम खेती के कारण लगभग 1,090 घटनाएँ हुई थीं। इसके अलावा 210 आग की घटनाएं प्राकृतिक कारणों से हुई थीं। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मिजोरम के ग्रामीण इलाके का बड़ा तबका झूम खेती करता है। साथ ही ये लोग स्लेश-एंड-बर्न पद्धति का इस्तेमाल करते हैं। इसमें जमीन के टुकड़े को साफ करके जला दिया जाता है, ताकि जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ जाए। ऐसे में कई बार हवा के झोंके के कारण आसपास के इलाकों में आग लग जाती है।

फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई), देहरादून के अनुसार, पूर्वोत्तर और मध्य भारत के वन जंगल की आग के लिहाज से बहुत ही असुरक्षित हैं। असम, मिजोरम और त्रिपुरा के जंगलों की आग को अत्यधिक खतरनाक माना गया है।

एफएसआई की इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) -2019 के मुताबिक मिजोरम में 85.41 प्रतिशत फॉरेस्ट एरिया है।

जानिए किन-किन देशों ने की भारत की मदद, कहाँ से आया क्या: पैट कमिंस ने पीएम केयर्स में ₹37 लाख देकर कहा- सभी करें योगदान

भारत में कोरोना की दूसरी लहर इतनी बढ़ गई है कि कई राज्यों में ऑक्सीजन और हॉस्पिटल बेड्स के लिए हाहाकार मचा हुआ है। ऐसे में कई देशों ने आगे आकर मदद की पेशकश की है तो कइयों ने मदद भेज भी दी है। अब IPL में पिछले साल सबसे महँगे बिकने वाले ऑस्ट्रेलिया के तेज़ गेंदबाज पैट कमिंस ने पीएम केयर्स फण्ड में 50,000 डॉलर (37.36 लाख रुपए) का योगदान दिया है। उन्होंने अन्य IPL खिलाड़ियों से भी ऐसा करने की अपील की।

अब तक सिंगापुर, यूरोपियन यूनियन, UAE, रूस और सऊदी अरब ने भारत की सहायता की है। सिंगापुर से भारतीय वायुसेना ने 4 क्रायोजेनिक ऑक्सीजन टैंक्स को एयरलिफ्ट किया। इसे सिंगापुर के चंगी से पश्चिम बंगाल के पणगढ़ लाया गया। ये इस तरह का पहला इम्पोर्ट था। भारत के केंद्रीय मंत्री एस जयशंकर ने भी दुनिया भर के देशों से साथ आने की अपील की है। सऊदी अरब से भी 800 मीट्रिक टन लिक्वीड अक्सीजन आया है।

कई देशों में भारतीय दूतावास वहाँ के ऑक्सीजन उत्पादक कंपनियों के साथ संपर्क में हैं। UAE भी भारत में ऑक्सीजन भेज रहा है। रूस और यूरोपियन यूनियन ने ऑक्सीजन के साथ-साथ कई दवाओं की खेप भी भेजने का निर्णय लिया है। पाकिस्तान के भी एक चैरिटी संस्थान ने पीएम मोदी को पत्र लिख कर 50 एम्बुलेंस और इमरजेंसी स्टाफ्स भेजने की पेशकश की। जर्मनी में भारतीय दूतावास भी वहाँ से सहायता के लिए बातचीत कर रहे हैं।

जर्मनी के दूतावास ने कहा है कि कोरोना वैक्सीन बनाने के लिए मैटेरियल्स बनाने वाली कंपनियों के साथ वो संपर्क में है और दुनिया भर में कोरोना टीकाकरण और अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए भारत में वैक्सीनेशन की प्रक्रिया का सफल होना ज़रूरी है। भारत ने फ़िलहाल मेडिकल सप्लाई की एक्सपोर्ट भी रोक दी गई। 10 दिन पहले अल्बानिया और सीरिया में बड़ी सप्लाई भेजी गई थी, उसके बाद से बड़े शिपमेंट्स पर लगभग रोक है।

मंगलवार को यूके से भी मेडिकल सहायता आएगी। इनमें 495 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स आ रहे हैं, जो अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी होने पर हवा में से ऑक्सीजन खींच सकते हैं। 120 नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर और 20 मैन्युअल वेंटलेटर आ रहे हैं। यूरोपियन कमिशन ने भी कहा है कि वो जल्द से जल्द संसाधन जुटा कर भारत भेज रहा है। उधर पहले मना करने के बाद अब अमेरिका ने भी रॉ मैटेरियल्स की सप्लाई की घोषणा कर दी।

कोलकाता नाइटराइडर्स (KKR) के पैट कमिंस ने कहा, “मैं पिछले 10 वर्षों से भारत आ रहा हूँ और इससे काफी प्यार करता हूँ। यहाँ के लोग दयालु और अच्छे हैं। इस पर खासी चर्चा हो रही थी कि इस त्रासदी में IPL हो या नहीं। लेकिन, कइयों का मानना है कि इससे घरों में बैठे लोगों को रोज कुछ घंटे का मनोरंजन मिलेगा। हमें एक खिलाड़ी के रूप में ऐसा प्लेटफॉर्म मिला है, जिससे हम लाखों लोगों तक पहुँच सकते हैं। मेरा योगदान बड़ा नहीं है, लेकिन आइए हम सब मिल कर लोगों के जीवन में उजाला लाएँ।”

यूनाइटेड स्टेटस ने थेराप्यूटिक्स, रैपिड डायग्नोसिस टेस्ट किट्स, वेंटिलेटर्स और PPE भी उपलब्ध कराने की बात कही है। 2022 के अंत तक भारत में वैक्सीन बनाने वाली BioE कम से कम 100 करोड़ वैक्सीन के डोज का निर्माण कर सके, इसके लिए US का डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन (DFC) वित्तीय सहायता मुहैया कराएगा। इसके अलावा वहाँ के सेंटर ऑफ डिजीज कंट्रोल (CDC) और USAID के विशेषज्ञों की एक टीम भारत के साथ मिल कर काम करेगी।

‘इनको ऑक्सीजन सप्लाई चेन की समझ नहीं’: हाई कोर्ट में दिल्ली के अस्पतालों ने फिर केजरीवाल सरकार को घेरा

दिल्ली में जैसे-जैसे कोरोना का संकट गहराता जा रहा है, अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार की अक्षमता भी उजागर होती जा रही है। अस्पतालों में बेड के साथ-साथ ऑक्सीजन का गहरा संकट है। इसको लेकर पिछले कुछ दिनों में कई अस्पतालों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। एक बार फिर दिल्ली हाई कोर्ट में अस्पतालों ने केजरीवाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

सोमवार (26 अप्रैल 2021) को इस मसले पर हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट में जयपुर गोल्डन अस्पताल के वरिष्ठ वकील सचिन दत्ता ने केजरीवाल सरकार को राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया। साथ ही ऑक्सीजन सप्लाई चेन को बाधित करने का भी आरोप लगाया।

हाई कोर्ट में दिल्ली में COVID-19 के प्रकोप और शहर में ऑक्सीजन की आपूर्ति से संबंधित याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान दत्ता ने आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार के कारण ऑक्सीजन की सप्लाई चेन बाधित हुई है। इससे अस्पतालों को ऑक्सीजन मिलने में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि हमें शाम के 5 बजे तक 3.6 एमटी मिलने की उम्मीद थी। लेकिन नहीं मिली। दिल्ली सरकार के अफसर सप्लाई चेन को समझ नहीं रहे हैं। उसे बिगाड़ रहे हैं। अस्पताल ने सप्लायर से सीधे संपर्क की इजाजत माँगी।

वकील ने आगे कहा कि कई एसओएस कॉल किए गए थे। उन्होंने एम्स से कुछ व्यवस्था की, लेकिन उसमें कुछ मिनट की देरी लगी। कमी और अनिश्चितता है। दिल्ली सरकार सप्लाई चेन को नहीं समझती है। उन्होंने दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को भी आड़े हाथों लिया।

वहीं महाराजा अग्रसेन अस्पताल के वकील आलोक अग्रवाल ने भी उनकी बातों से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि दिल्ली के अस्पतालों के सामने समस्या यह है कि उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं है कि उन्हें ऑक्सीजन कितनी और कब मिलेगी। दिल्ली के नोडल अधिकारियों से सीधा संवाद न होने के कारण कोरोना काल में अस्पतालों की चिंता बढ़ गई है।

शांति मुकुंद अस्पताल की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि उनके अस्पताल में पहले से ही ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो रही है। इस समय हालात और भी खराब हैं, जिसके चलते मरीजों को वापस भेजना पड़ रहा है।

शांति मुकुंद अस्पताल के वकील विराज दातार ने कहा, “मेरे पास ऑक्सीजन सपोर्ट पर 96 मरीज हैं। इन सभी के लिए व्यवस्था करनी है। मैंने व्हाट्सएप, कॉल किया है। जल्द ही मेरा बफर स्टॉक भी खत्म हो जाएगा।”

बता दें कि अरविंद केजरीवाल की आपदा में भी राजनीति करने की प्रवृत्ति रही है। हाल ही में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि केंद्र सरकार ने पीएम केयर्स फंड से दिसंबर 2020 में ही केजरीवाल सरकार को ऑक्सीजन के लिए राशि मुहैया कराई थी। केंद्र सरकार द्वारा यह राशि दिल्ली में 8 PSA (Pressure Swing Absorption) ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के लिए दी गई थी, लेकिन केजरीवाल सरकार ने अब तक मात्र एक ऐसा ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया है।  

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले पर केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई थी और कहा था कि सरकार के कुप्रशासन और अक्षमता के कारण आज राजधानी में ऑक्सीजन का संकट उत्पन्न हुआ है। कोर्ट ने सरकार से यह प्रश्न भी किया था कि केंद्र सरकार द्वारा फंड दिए जाने के बाद भी केजरीवाल सरकार अब तक मात्र एक PSA ऑक्सीजन प्लांट क्यों स्थापित कर पाई है?

‘तो क्या करूँ मैं मर जाऊँ?’: मालदीव के बैन के बाद मीम की बौछार, पर बॉलीवुड सितारों पर नहीं होगा इसका असर

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के मद्देनजर मालदीव ने भारतीय पर्यटकों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बाद बॉलीवुड सितारों पर मीम की बौछार हो गई। लेकिन इस बैन का शायद ही इन सितारों पर कोई प्रभाव पड़े।

असल में मालदीव के पर्यटन मंत्रालय ने कहा है कि देश की ‘हेल्थ प्रोटेक्शन एजेंसी (HPA)’ ने मंगलवार (अप्रैल 27, 2021) से लोगों की बसावट वाले द्वीपों पर भारतीय नागरिकों का आगमन प्रतिबंधित कर दिया है। साथ ही मालदीव ने पर्यटन को अधिक सुरक्षित और आसान बनाने के प्रयासों में सहयोग माँगते हुए पर्यटकों को धन्यवाद दिया है।

हाल के समय में मालदीव बॉलीवुड सितारों का छुट्टी मनाने का पसंदीदा डेस्टिनेशन बनकर उभरा है। यहाँ तक कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच भी कई सितारे वहाँ की यात्रा करते दिखे हैं। लिहाजा मालदीव के बैन के बॉलीवुड सेलेब्स पर मीम्स की बौछार आ गई है। पिछले 1 साल में ऐसे कई बॉलीवुड सेलेब्स हैं जिन्होंने मालदीव की यात्रा की है और कई तस्वीरें सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर अपलोड की हैं। कई अभिनेत्रियाँ अपने पार्टनर के साथ वहाँ पहुँची रहीं तो कई अभिनेता पनी गर्लफ्रेंड्स या परिवार के साथ मालदीव गए थे। कोरोना आपदा के बीच इस तरह तस्वीरें शेयर करने पर उनकी आलोचना भी हुई थी।

एक यूजर ने ‘तो क्या करूँ मैं मर जाऊँ?’ वाले गाने के बोल शेयर करते हुए लिखा कि फ़िलहाल बॉलीवुड सेलेब्स के दिल की स्थिति यही होगी। एक अन्य यूजर ने उस बच्चे का इंटरव्यू शेयर किया, जो ‘आई एम फाइन’ बोल कर रोने लगता है। उसने कहा कि बॉलीवुड सेलेब्स की हालत भी इस घोषणा के बाद कुछ ऐसी ही है। एक यूजर ने कहा कि जब पूरी दुनिया भारत की मदद करने में लगी है, हमारे सेलेब्स मालदीव में घूमते रहे।

एक यूजर ने ‘अँधेरा हो गया जीवन में बिलकुल’ वाला मीम शेयर किया। ‘इंडियन मीम्स’ नामक हैंडल ने ‘क्वीन’ फिल्म से कंगना रनौत का डायलॉग ‘मेरा तो इतना लाइफ ख़राब हो गया’ शेयर किया। तो किसी ने ‘बाजीराव मस्तानी’ में प्रियंका चोपड़ा का डायलॉग ‘आपने हमसे हमारा ग़ुरूर छीन लिया’ शेयर किया। एक यूजर ने राजपाल यादव का डायलॉग ‘अब कुछ नहीं हो सकता क्या?’ के जरिए मालदीव को सेलेब्स का ‘नानी का घर’ बताते हुए निशाना साधा।

मीम्स अपनी जगह है लेकिन सच्चाई ये है कि इन प्रतिबंधों का बॉलीवुड सेलेब्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा। केवल ‘इन्हैबिटेड आइलैंड्स’ पर पर्यटन फैसिलिटीज और बजट होटलों का उपयोग करने वाले पर्यटकों को रोका गया है। रिसॉर्ट्स बुक करने वाले या आम लोगों के बसावट में न रह कर अन्य द्वीपों पर जाकर रहने वाले बॉलीवुड सेलेब्स को वहाँ की यात्रा की छूट मिलती रहेगी। उनके लिए वहाँ डेडिकेटेड रिसॉर्ट्स होते हैं।

पिछले 1 साल में कियारा आडवाणी, तापसी पन्नू, टाइगर श्रॉफ, दिशा पाटनी, सिद्धार्थ मल्होत्रा, सोनाक्षी सिन्हा, किम शरण, धीरज धूपर, विवेक ओबेरॉय, हिना खान, सुरेश रैना, तारा सुतरिया, आदर जैन, अरमान जैन, अनिशा मल्होत्रा, सामंथा, रकुल प्रीत सिंह, कैटरीना कैफ, काजल अग्रवाल, वरुण धवन, मॉनी रॉय, नेहा धूपिया-अंगद बेदी सहित कई सेलेब्स मालदीव्स के दौरे पर गए।

कोरोना संकट में काम कर रहे वॉलंटियर्स को परेशान करने के आरोपों का दिल्ली पुलिस ने किया खंडन, वामपंथी-कॉन्ग्रेसियों ने फैलाई फेक न्यूज़

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली जिस तरह से कोरोना की चौथी लहर का सामना कर रही है, उसी तरह मोदी विरोधी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी लगातार फेक न्यूज की लहर चला रहे हैं।

दिल्ली के वकील और कॉलमनिस्ट दुष्यंत ने रविवार को ट्वीट किया कि कई लोग उनके पास यह शिकायत लेकर आए हैं कि दिल्ली पुलिस उन्हें महामारी के बीच अपने व्हाट्सएप ग्रुप समेत दूसरे क्राउडसोर्सिंग प्रयासों को बंद करने के लिए धमकी दे रही है। बता दें कि दुष्यंत राहुल गाँधी के करीबी और कॉन्ग्रेस के कट्टर समर्थक हैं।

दुष्यंत का ट्वीट

दिल्ली की पुलिस के खिलाफ दुष्यंत के ट्वीट के बाद NDTV की गार्गी रावत अंसारी ने सोशल मीडिया पर उन्हें ज्वाइन किया। गार्गी ने ट्वीट किया, “क्या दिल्ली पुलिस इन वॉलंटियर्स के खिलाफ काम कर रही है, क्योंकि वे दुर्लभ संसाधनों को उपलब्ध करवा रहे हैं। दिल्ली पुलिस वॉलंटियर्स द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों को रोकने की कोशिश कर रही है।”

एनडीटीवी की पत्रकार गार्गी रावत अंसारी का ट्वीट

गार्गी रावत अंसारी का विवाह पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मुख्तार अहमद अंसारी के पड़पोते यूसुफ अहमद अंसारी से हुआ है। हाल ही पंजाब से उत्तर प्रदेश लाए गए कुख्यात गैंगस्टर मुख्तार अंसारी की वह करीबी रिश्तेदार हैं।

सोशल मीडिया पर इन मोदी विरोधियों ने इसी तरह के और मैसेज करके दिल्ली पुलिस पर “व्हाट्सएप रिलीफ ग्रुप” को बंद करवाने का आरोप लगाया।

दिल्ली पुलिस के आदेश पर ‘व्हाट्सएप ग्रुप’ को बंद करने के आरोप वाला ट्वीट

दुष्यंत के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए कई अन्य लोगों ने भी दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाया, कि लॉकडाउन के दौरान जब अंतरराज्यीय बस सेवा नहीं चल रही थी तो केजरीवाल सरकार ने प्रवासियों को यूपी की सीमा तक पहुँचाने के लिए बसें चलवाई थी। लेकिन उस, दौरान भी दिल्ली पुलिस ने वॉलंटियर्स को काफी परेशान किया था।

दिल्ली पुलिस पर पिछले साल 2020 में प्रवासियों को भोजन देने वालों को गिरफ्तार करने का आरोप लगाया गया

खास बात यह है कि जितने भी दावे सोशल मीडिया पर किए जा रहे हैं, उनका कोई भी सबूत नहीं है।

गार्गी रावत अंसारी और दुष्यंत के ट्वीट करने के बाद सोशल मीडिया पर कॉपी-पेस्ट टूलकिट गैंग सक्रिय हो गई और इसी तरह के मैसेजेज की सोशल मीडिया पर बाढ़ सी आ गई।

दुष्यंत के ट्वीट का कॉपी पेस्ट

जैसा ट्वीट दुष्यंत ने किया था, ठीक उसी तरह का ट्वीट पीकू नाम की यूजर ने किया। ट्विटर पर राइजिंग सुरभि नाम की यह यूजर आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया कार्यकर्ता हैं और AAP के कई नेता इन्हें फॉलो करते हैं।

पीकू

कई लोगों ने इसी मैसेज को दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैला दिया। इसमें यह दावा किया गया कि पुलिस सहयोग करने के सभी कार्यों को बंद करने के लिए वॉलंटियर्स को मजबूर कर रही है।

ऐसे ही और भी मैसेज शेयर किए गए हैं।

यहाँ हम दिल्ली पुलिस के बारे में फेक न्यूज फैला रहे सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के कुछ ट्वीट दिखाते है।

किस्से कहानियाँ ट्विटर यूजर

Kisse कहानियाँ नाम के यूजर को ट्विटर पर 4,400 लोग फॉलो करते हैं। इसमें कई पत्रकार, नेता भी शामिल हैां

किस्से कहानियाँ के फॉलोवर्स

आप देश सकते हैं कि किस्से कहानियाँ को कई कॉन्ग्रेस के नेता और समर्थक फॉलो करते हैं।

काकुल का ट्वीट

इसी तरह, कई राजनेताओं, पत्रकारों और एक्टिविस्ट काकुल पराशर को भी फॉलो करते हैं।

काकुल के फॉलोवर्स

हालाँकि, दिल्ली पुलिस ने प्रोपागैंडाबाजों के आरोपों का खंडन किया है।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह इस तरह के पूर्वाग्रह से प्रेरित, असत्यापित और निराधार आरोपों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए वॉलंटियर्स से संसाधन और जानकारी बढ़ाने के लिए कहा है। पुलिस ने यह भी कहा कि कोरोनो वायरस संकट के बीच ऑक्सीजन की आपूर्ति और अन्य आवश्यक मदद करने के लिए वे वे घुटनों के बल खड़े हैं और इस तरह के दुष्प्रचार उन्हें अच्छे कार्यों को करने से नहीं रोक सकते हैं।

साजिश के तहत फैलाई गई फेक न्यूज

कोरोना वायरस के संबंध में फेक न्यूज फैलाने के मामले में शनिवार (24 अप्रैल 2021) को केंद्र सरकार ने ट्विटर से फेक, दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक ट्वीट्स को हटाने के लिए कहा था। विनोद कापरी, स्वरा भास्कर और अनारकली जैसी फिल्मों के निर्माता अविनाश दास ने कई सारे पुराने और भ्रामक तस्वीरें शेयर की थी। इसके अलावा हंसराज मीणा जैसे राजनीतिक कार्यकर्ता ने भी अपने प्रभाव का इस्तेमाल यह बताने के लिए किया कि कोरोना वायरस एक धोखा और साजिश है। यह बीमारी है ही नहीं।