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‘EC अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए, 2 मई की काउंटिंग भी रोक देंगे’: मद्रास HC ने कोरोना की दूसरी लहर का बताया जिम्मेदार

मद्रास हाईकोर्ट ने देश में कोरोना की दूसरी लहर के लिए पूरी तरह से चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया है। उच्च न्यायालय ने सोमवार (अप्रैल 26, 2021) को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि EC के अधिकारियों पर हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए। उसने राजनीतिक रैलियों में आयोजन की अनुमति देने के लिए भी EC को फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी पूरी तरह से EC से खिन्न दिखे।

उन्होंने चुनाव आयोग से कहा, “आपका संस्थान अकेले कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार है। आपके अधिकारियों पर शायद हत्या के आरोप में मामला दर्ज करना चाहिए।” उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान फेस मास्क पहनने, सैनिटाइजर का प्रयोग करने और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे दिशा-निर्देशों का पालन कराने में चुनाव आयोग संपूर्ण रूप से विफल रहा है।

उन्होंने कहा कि कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए आदेश के बावजूद ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने ECI के वकील से पूछा, “जब रैलियाँ हो रही थीं तब क्या आप किसी और ग्रह पर थे?” मद्रास उच्च-न्यायालय ने ये भी चेतावनी दी है कि 2 मई को होने वाले मतगणना के दौरान कोरोना के दिशा-निर्देशों का पालन कराने की योजना का खाका आयोग नहीं पेश कर पाया तो वह इस पर रोक लगा देगा।

चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी ने कहा, “लोगों के स्वास्थ्य को उच्चतम दर्जे की प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ये बात विक्षुब्ध कर देने वाली है कि संवैधानिक संस्थाओं को भी इस सम्बन्ध में बातें याद दिलानी पड़ रही है। अगर कोई नागरिक ज़िंदा बचेगा तभी तो वो एक लोकतांत्रिक राष्ट्र में मिलने वाले अधिकारों का इस्तेमाल करेगा। परिस्थिति ज़िंदा बचने और सुरक्षा के लिए संघर्षों पर पहुँच गई है। अन्य कोई भी चीज इसके बाद ही आती है।”

इस पीठ में जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति भी शामिल थे। उन्होंने भारत और तमिलनाडु के मुख्य चुनाव आयुक्तों को निर्देश दिया कि वे राज्य और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिवों के साथ विचार-विमर्श करें और मतगणना के दिन कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित कराने के लिए खाका तैयार करें। शुक्रवार को इस मामले पर फिर सुनवाई होगी। उस दिन कोर्ट देखेगा कि क्या योजना बनाई गई है और क्या कदम उठाए गए हैं।

तमिलनाडु में रविवार को दूसरी लहर के दौरान पहली बार पूर्ण लॉकडाउन लगा। केवल ज़रूरी सेवाओं को ही छूट दी गई थी। 1,05,180 सक्रिय कोरोना मामलों के साथ तमिलनाडु भारतीय राज्यों में 8वें स्थान पर है। राज्य में 13,557 लोग अब तक कोरोना के कारण अपनी जान गँवा चुके हैं। तमिलनाडु में चुनाव संपन्न हो चुका है और सत्ताधारी AIADMK और विपक्षी DMK के बीच मुख्य मुकाबला है।

कोरोना से मौत, हिंदुओं की जलती चिताएँ: Reuters की पत्रकारिता या हिंदू-घृणा?

किसी भी त्रासदी के वक्त लोगों का पहला कर्तव्य क्या होना चाहिए? त्रासदी में जानमाल की क्षति की तस्वीरें वायरल करके पब्लिसिटी बटोरना या फिर लोगों में आत्मविश्वास जगाना कि वो इससे बाहर निकलेंगे? आज हम आपको अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters के भारत में चीफ फोटोग्राफर दानिश सिद्दीकी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें उसकी तस्वीरों के लिए ‘पुलित्जर प्राइस’ से भी नवाजा जा चुका है।

हिन्दू लाशों के जलने की तस्वीरें शेयर कर के दानिश सिद्दीकी ने पूरी दुनिया में भारत की ऐसी छवि बनाने का प्रयास किया है, जैसे कोरोना वायरस संक्रमण के लिए हिन्दू ही जिम्मेदार हों और वही मर रहे हों। उसने नई दिल्ली के एक श्मशान में जलती चिताओं की तस्वीरें शेयर की, जो सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो रहा है। Reuters ने भी अपनी वेबसाइट पर इसे जगह दी। कइयों ने इसे सनसनी फैलाने की कोशिश करार दिया है।

दुःख और विपत्ति की इस घड़ी में जलती चिताओं की फोटो शेयर करने के पीछे क्या उद्देश्य रहा होगा, आप समझ सकते हैं। वैसे दानिश सिद्दीकी का हिन्दू-विरोधी इतिहास ही रहा है। उन्होंने हरिद्वार में लगे उस कुम्भ मेले को लेकर भी प्रोपेगंडा फैलाया था, जिसका भारत सरकार के आग्रह के बाद समय पूर्व ही समापन कर दिया गया और जहाँ नेगेटिव कोरोना रिपोर्ट व दिशानिर्देशों का पालन करने वाले ही लोग थे।

Reuters पर दानिश सिद्दीकी की ली हुई कुम्भ की जो तस्वीरें प्रकाशित की गईं उसके हैडिंग में लिखा गया कि ‘कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार के बीच’ कुम्भ का आयोजन हो रहा है। साथ ही साधुओं की तस्वीरों के जरिए नकारात्मकता फैलाने की कोशिश की गई। दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के दौरान भी उन्होंने जो तस्वीर शेयर की थी, उसमें ये दिखाने की कोशिश की गई थी कि बहुत सारे हिन्दू मिल कर एक मुस्लिम को पीट रहे हैं।

अब दानिश सिद्दीकी का दोहरा रवैया देखिए। उन्होंने अप्रैल 12 को कुम्भ की तस्वीरें शेयर की और उसके 9 दिन बाद अप्रैल 21 को ‘किसान आंदोलन’ की। ‘किसान आंदोलन’ की उस तस्वीर में प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ दिख रही थी। पंजाब के बरनाला में हुई इस रैली की तस्वीरों को शेयर करते वक़्त कहीं भी कोरोना वायरस का नाम नहीं लिया गया, जबकि कुम्भ में इससे छोटी और नियमों का पालन करने वाली भीड़ की तस्वीरों के जरिए हिन्दू विरोधी प्रोपेगंडा फैलाया गया।

स्पष्ट है, जहाँ भी मौतें होंगी वहाँ मृतकों का अंतिम संस्कार होगा। इसी दौरान एक पत्रकार की, या सभ्य समाज में जिम्मेदारी निभा रहे किसी भी व्यक्ति की परीक्षा होती है। अब पत्रकार ही गिद्ध बन जाएँ तो क्या कहना। कोरोना के कारण दुनिया भर में दुर्भाग्यपूर्ण मौतें हुई हैं और हो रही हैं, लेकिन इन पत्रकारों को भारत में हिन्दुओं की जलती चिताओं से ही मतलब है। इस दौरान कइयों ने दानिश को ‘नायक’ बता कर उनकी प्रशंसा भी की।

दानिश सिद्दीकी ने लगभग एक हफ्ते में ऐसी 6-7 तस्वीरें क्लिक की हैं, जिन्हें Reuters ने कई मीडिया संस्थानों को ख़बरों में प्रयोग करने के लिए दिया है। कुछ ही दिनों पहले हमने बरखा दत्त को कैमरे और लैपटॉप सहित सभी साजोसामान के साथ ऐसे ही एक श्मशान में देखा था। सभी हिन्दुओं के ही अंतिम संस्कार के स्थल में घूम रहे हैं। एक-एक मौत दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इसका इस्तेमाल भी ब्रांडिंग और प्रोपेगंडा के लिए हो रहा।

भारत में किसी नेता/सेलेब्रिटी से आक्रोशित होने पर उनके पुतला दहन करने की बात आम रही है। आपको याद होगा जब ग्रेटा थनबर्ग और मीना हैरिस जैसों ने खालिस्तानी टूलकिट के हिसाब से भारत के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप किया तब तब भारत में विरोध प्रदर्शन के रूप में कहीं उनकी तस्वीरें जलाई गईं। उसकी तस्वीर भी दानिश सिद्दीकी ने ही वायरल की थी। खास तौर पर बताया गया था कि ये काम एक हिन्दू संगठन का है।

लेकिन, अगर आप दानिश सिद्दीकी की पूरी टाइमलाइन पर कहीं भी तबलीगी जमात से जुड़ी कोई तस्वीर खोजेंगे तो वो नहीं मिलेगा। पिछले साल जमातियों की वजह से कोरोना पूरे देश में फैला था और उनके द्वारा पथराव से लेकर कोरोना के दिशानिर्देशों के उल्लंघन की एक भी तस्वीर दानिश सिद्दीकी ने नहीं ली, क्योंकि इससे उनका प्रोपेगंडा कमजोर होता। कोरोना त्रासदी का इस्तेमाल भी ऐसे ही किया जा रहा है।

इसका दुष्परिणाम ये हो रहा है कि सोशल मीडिया पर कई पूर्वाग्रही लोग पुरानी त्रासदियों की तस्वीरें या फेक तस्वीरें भी पोस्ट कर के मोदी सरकार को अनाप-शनाप बक रहे हैं। भारत सरकार ने ट्विटर से ऐसी फेक न्यूज से भरी पोस्ट को अपने प्लेटफॉर्म से डिलीट करने का आदेश दिया। इसमें अविनाश दास, आशुतोष मिश्रा, विनोद कापरी और डॉक्टर कफील खान जैसे लोग शामिल थे। जलती हिन्दू चिताओं की तस्वीरों पर ये सारा खेल किया जा रहा है।

बंगाल चुनाव: मुर्शिदाबाद में बमबारी, मतदान से पहले BJP दफ्तर पर हमला करने का TMC के गुंडों पर आरोप

पश्चिम बंगाल में आज (26 अप्रैल 2021) सातवें चरण का मतदान हो रहा है। उससे पहले मुर्शिदाबाद के तेंतुलिया में बॉर्डरपारा क्षेत्र से बमबारी की घटना सामने आई। जी 24 घंटा की खबर के मुताबिक हमला रविवार (25 अप्रैल 2021) देर रात हुआ था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अज्ञात गुंडों ने तेंतुलिया में भाजपा कार्यालय को निशाना बनाया और पार्टी के झंडे-बैनर फाड़ दिए। घटना पर एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया, “हमला तृणमूल कॉन्ग्रेस द्वारा किया गया था। इलाके में बमबारी हुई है। टीएमसी के गुंडों ने हमें सार्वजनिक रूप से धमकी भी दी।”

जिस स्थान पर बमबारी की घटना हुई उसके बारे में पूछे जाने पर एक अन्य स्थानीय ने कहा, “बमबारी हमारे गाँव में ठीक मेरे चाचा के घर के सामने हुई। शुरू में (गुंडों) मेरे चाचा को पकड़ लिया था। हमले को अंजाम देने के लिए करीब 25-30 बदमाश आए थे। यही अब वे कई रातों से कर रहे हैं। उन्होंने हमारी रातों की नींद छीन ली है।”

(वीडियो साभार: Youtube / ZEE 24 Ghanta)

उन्होंने आगे कहा कि वे हमें अपना वोट देने से मना कर रहे हैं। गुंडे भाजपा के लोगों को धमका रहे हैं। स्थानीय व्यक्ति के अनुसार, “उन्होंने भाजपा कार्यालय में तोड़फोड़ की कोशिश की। लेकिन हमारे वहाँ होने से वे लोग इसमें सफल नहीं हो पाए। उन्होंने बम फेंका और वहाँ से भाग गए। इस डर से कि कहीं वोट देने से पहले उन्हें कोई चोट न पहुँच जाए। इसके बावजूद तेंतुलिया में कई महिलाओं ने सुबह-सुबह अपना वोट डालने का फैसला किया। मैं भी जल्दी मतदान करने जा रहा हूँ। हर कोई कह रहा है कि दिन में हंगामा हो सकता है।”

बमबारी की घटना के बाद स्थानीय लोगों में भय का माहौल है। पश्चिम बंगाल में 34 सीटों पर होने वाल मतदान में 81 लाख से ज्यादा वोटर 284 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। इनमें कोलकाता के 4 निर्वाचन क्षेत्र, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा के 6 निर्वाचन क्षेत्र और मुर्शिदाबाद और पश्चिम बर्धमान के 9 निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।

इससे पहले पश्चिम बंगाल में पाँचवें चरण के मतदान के दौरान बमबारी की घटना सामने आई थी। राज्य के उत्तर 24 परगना में स्थित मिनाखान के पोल बूथ 114 पर बम से हमला किया गया था। इसके अलावा बर्द्धमान उत्तर विधानसभा क्षेत्र के सरायटीकर प्राथमिक विद्यालय की बूथ संख्या 60, 61, 63 व 72 से और नदिया जिले से छिटपुट हिंसा व झड़प की खबरें सामने आई थीं। तृणमूल कॉन्ग्रेस ने पीरजादा शरीफ अब्बास सिद्दीकी की पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट के सदस्यों पर हमला करने का आरोप लगाया था।

वहीं, एक अन्य घटना में पश्चिम बंगाल के उत्तरी बर्धमान जिले में बीजेपी पोलिंग एजेंट द्वारा कथित रूप से हमला किए जाने के बाद भाजपा और टीएमसी कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए थे। तृणमूल कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया था कि कम से कम 35 बाहरी और भाजपा के गुंडे नादिया के कल्याणी में मतदान केंद्र पर मौजूद टीएमसी के मतदाताओं को धमकी दे रहे थे।

बता दें कि सोमवार सुबह मतदान शुरू होने के थोड़ी देर बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वोटरों से कोविड प्रोटोकॉल का अनुसरण करने की अपील की। पीएम मोदी ने ट्विटर पर मतदाताओं के नाम संदेश में कहा, “पश्चिम बंगाल चुनावों के सातवें चरण का मतदान आज हो रहा है। लोगों से उनके मताधिकार का प्रयोग करने और कोविड से संबंधित प्रोटोकॉल का अनुसरण करने की अपील करता हूँ।”

कोविड मरीजों के लिए हेमकुंट फाउंडेशन के ऑक्सीजन ट्रक को राजस्थान पुलिस ने रोका, सोशल मीडिया पर आक्रोश के बाद छोड़ा

देश में कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के बीच, कई एनजीओ मुफ्त मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति के साथ जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। ऐसा ही एक गैर-सरकारी संगठन हेमकुंट फाउंडेशन है, जिसने ₹ 10,000 के रिफंडेबल सिक्योरिटी पर अब तक 1000 से अधिक सिलेंडरों की आपूर्ति की है।

तरल ऑक्सीजन की माँग और आपूर्ति के बीच की गहरी खाई को पाटने के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के बावजूद, फाउंडेशन ने आरोप लगाया है कि उन्हें राजस्थान पुलिस द्वारा परेशान किया जा रहा है। कल एक ट्वीट में कहा उन्होंने कहा, “भिवाड़ी पुलिस स्टेशन पर हमारे ड्राइवर और ट्रक को हिरासत में ले लिया गया है। इस बीच गंभीर मरीज हमारे गुड़गाँव के मुहीम के तहत इंतजार कर रहे हैं।”

एक अन्य ट्वीट में, एनजीओ ने बताया कि जबकि कोरोनोवायरस के गंभीर मरीज ऑक्सीजन सिलेंडरों की प्रतीक्षा कर रहे थे और क्योंकि उनके रिसोर्स ख़त्म हो रहे थे। पुलिस ने सभी ट्रकों को रोक दिया है। हम इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते, पृष्ठभूमि में एक व्यक्ति को इसके लिए दुख व्यक्त करते हुए भी देखा जा सकता है।

सोशल मीडिया पर लोगों की नाराजगी के बाद, राजस्थान पुलिस ने हस्तक्षेप किया और भिवाड़ी पुलिस शाखा को मामले में तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया। जिसके बाद हेमकुंट फाउंडेशन ने जवाब दिया, “अभी भी हम प्रतीक्षा कर रहे हैं।”

राजस्थान पुलिस हेल्प डेस्क ने पुलिस महानिरीक्षक को इस मामले के बारे में अपडेट देने का निर्देश दिया। जवाब में, IGP जयपुर के ट्विटर हैंडल ने सूचित किया, “भिवाड़ी पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक पिकअप वाहन घाटाल गाँव के पास खड़ी थी। कार में कुल 5 खाली ऑक्सीजन सिलेंडर मिले। वाहन के चालक से संतोषजनक जवाब नहीं देने पर उसे पुलिस स्टेशन लाया गया और रात में 2:56 बजे पूछताछ के बाद रिहा कर दिया गया। ”

ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी के मामलों का हवाला देते हुए, भिवाड़ी पुलिस ने हेमकुंट फाउंडेशन के खिलाफ अपनी कार्रवाई को सही ठहराया। इस तथ्य को आसानी से नजरअंदाज करते हुए कि राजस्थान पुलिस के कारण गंभीर कोरोनावायरस रोगियों को मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति में देरी हुई, पुलिस के उच्चाधिकारियों ने कहा, “ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी के मामलों को ध्यान में रखते हुए, ड्राइवर को पुलिस स्टेशन लाया गया था क्योंकि उसने संतोषजनक जवाब नहीं दिया था। हालाँकि, पूछताछ के बाद उन्हें 2:56 बजे जाने की अनुमति दे दी गई थी और वाहन को भी ले जाने की अनुमति थी।

आईपीएस अरुण बोथरा द्वारा भी इस बात की पुष्टि की गई थी। उन्होंने ट्वीट किया, “वाहनों को छोड़ दिया गया है। आप इसकी पुष्टि कर सकते हैं।”

दिल्लीः कोरोना की दस्तक के बाद रिलीफ फंड में आए ₹35 करोड़, संक्रमण रोकने पर केजरीवाल सरकार का खर्च ‘शून्य’

दिल्ली सरकार के एलजी/सीएम रिलीफ फण्ड मार्च 2020 से जनवरी 2021 के बीच करीब 35 करोड़ रुपए आए। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने इसमें से 17 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए। लेकिन इसी दौरान इस फण्ड से कितना को रोकने पर खर्च हुआ, इसकी जानकारी देने में सरकार विफल रही है। यह तथ्य सूचना का अधिकार (RTI) के जवाब से सामने आया है। खास बात ये है कि दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी में महामारी के कुप्रबंधन का आरोप केंद्र सरकार पर लगा रही है।

आरटीआई कार्यकर्ता विवेक पांडे ने इस संबंध में जानकारी माँगी थी। ऑपइंडिया से बात करते हुए विवेक ने बताया कि उन्होंने मार्च 2020 से सीएम/एलजी राहत कोष में आए धन और उसके उपयोग को लेकर जानकारी माँगी थी। इसके लिए उन्होंने दिल्ली सरकार के पास दो आरटीआई आवेदन दिए थे।

पहला आरटीआई नवंबर 2020 में और दूसरा फरवरी 2021 में दाखिल किया गया। उन्होंने यह भी पूछा कि आप सरकार ने इस अवधि के दौरान कोविड-19 महामारी को नियंत्रित करने पर कितना खर्च किया है।

दोनों के मिले लगभग समान जवाब

दोनों आरटीआई में उल्लेखित सवालों और मिले जवाबों का स्क्रीनशॉट विवेक ने शेयर किया है। 16 नवंबर 2020 के आरटीआई आवेदन में उन्होंने सरकार से मार्च 2020 तक एलजी/सीएम राहत कोष में जमा राशि का विवरण देने के लिए कहा था। जवाब में बताया गया कि इस दौरान फण्ड में 34.69 करोड़ रुपए जमा हुए।

नवंबर 2020 में विवेक पांडे द्वारा दायर आरटीआई आवेदन और दिल्ली सरकार का जवाब

सरकार ने फण्ड से कितना खर्च किया, इस सवाल के जवाब में बताया गया कि अब तक 17.02 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। हालाँकि दिल्ली सरकार यह बताने में विफल रही कि उन्होंने पैसा कहाँ खर्च किया। जवाब में कहा गया कि अभी डाटा को अंतिम रूप नहीं दिया गया है और इसका मिलान करना बाकी है। कोविड महामारी नियंत्रण पर कितना पैसा खर्च किया गया, इसका जवाब ‘शून्य’ बताया गया।

फरवरी 2021 में विवेक पांडे द्वारा दायर आरटीआई आवेदन और दिल्ली सरकार का जवाब

तीन महीने इंतजार करने के बाद, विवेक ने केजरीवाल सरकार से बेहतर जवाब पाने की आशा में एक और आवेदन प्रस्तुत किया। दिल्ली सरकार द्वारा दिए गए उत्तरों में एकमात्र अंतर उन्हें प्राप्त राशि (34.77 करोड़ रुपये) और उनके द्वारा खर्च की गई राशि (17.27 करोड़ रुपये) में था। इस प्रश्न के लिए कि कोविड महामारी नियंत्रण पर कितना पैसा खर्च किया, जवाब फिर से वही था NIL (शून्य)।

ऑपइंडिया से बात करते हुए, विवेक ने कहा कि कोविड मामलों की बढ़ती संख्या के बीच राष्ट्रीय राजधानी में स्वास्थ्य ढाँचे के कुप्रबंधन के लिए दिल्ली सरकार लगातार केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है। हालाँकि, केजरीवाल के हाथ में धन होने के बावजूद, उन्होंने महामारी को नियंत्रित करने के लिए कुछ नहीं किया। विवेक ने कहा, “वह सीएम रिलीफ फण्ड से ऑक्सीजन प्लांट स्थापित कर सकते थे या कुछ अन्य व्यवस्था कर सकते थे।” विशेष रूप से, केजरीवाल सरकार ने उस राहत कार्य का श्रेय लेने की कोशिश की, जो पिछले साल दिल्ली सरकार के महामारी का प्रबंधन करने में विफल रहने के बाद केंद्र सरकार द्वारा किया गया था। महामारी की दूसरी लहार के दौरान भी, उन्होंने (केजरीवाल) उसी रणनीति को अपनाने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे।

दिल्ली सरकार ने 2021 में विज्ञापनों पर खर्च किए 150 करोड़

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार ने पिछले कुछ महीनों में प्रिंट, टेलीविजन और ऑनलाइन मीडिया के विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च किए हैं। केवल 2021 में विज्ञापनों पर 150 करोड़ रुपए खर्च किए गए, जो दिखाते हैं कि दिल्ली सरकार की प्राथमिकताएँ क्या हैं। अकेले मार्च में, सरकार ने विज्ञापनों पर 92.48 करोड़ रुपए खर्च किए। एक ट्विटर उपयोगकर्ता ने कहा कि उसने गिना कि टीवी पर छह घंटे के भीतर 15 बार विज्ञापन चलाए गए।

25 अप्रैल को दिल्ली में 22933 नए कोरोना केस सामने आए। अब तक राज्य में 10,27,715 कोविड-19 के मामले आ चुके हैं, जिनमें से 9,18,143 ठीक हो चुके हैं। राज्य में 94,592 ऐक्टिव केस हैं और 14248 लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। 25 अप्रैल को ही 350 लोगों की मौत हुई है। पिछले एक हफ्ते के दौरान पॉजिटिव रेट बढ़कर 30 फीसदी हो गया है। पिछले दो हफ्ते के दौरान वैक्सीन लगाए जाने वालों की भी संख्या घटी है। 10 अप्रैल से राज्य द्वारा 1,05,918 डोज जारी किए गए, जिनमें से दिल्ली 1 लाख/दिन का आँकड़ा भी नहीं पार कर पाई। कई दिन तो 50 हजार टीके भी नहीं लग सके।

इधर डोभाल की जय-जय, उधर डैमेज कंट्रोल में जुटा अमेरिकी अमला: रॉ मेटेरियल के साथ भारत का ‘सच्चा साथी’ दिखने की होड़

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने अपने अमेरिकी समकक्ष जेक सुल्लिवन से बात की। इसके 24 घंटे के भीतर भारतीय डिप्लोमेसी ने कमाल कर दिया और अमेरिका कोरोना वैक्सीन के लिए कच्चा माल देने को राजी हो गया। इसके बाद से डोभाल ट्विटर पर ट्रेंड में हैं और उनके प्रभाव की चौतरफा सराहना हो रही है। दूसरी ओर, रॉ मेटेरियल की सप्लाई रोकने के कारण चौतरफा दबाव में आया अमेरिकी प्रशासन डैमेज कंट्रोल में जुटा हुआ है।

NSA लेवल की वार्ता के बाद खुद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने ट्वीट कर कहा कि जिस तरह से भारत ने अमेरिका को तब सहायता भेजी थी, जब वहाँ के अस्पताल कोरोना की शुरुआती लहर के दौरान ही गहरे तनाव में थे, ठीक उसी तरह ज़रूरत के इस समय में वे भारत की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अमेरिकी उप-राष्ट्रपति, स्टेट सेक्रेटरी और डिप्टी स्टेट सेक्रेटरी, NSA जैसे शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों ने भी भारत के समर्थन में ट्वीट किया है। हर ट्वीट में त्वरित मदद का आश्वासन और भारत के लोगों के साथ अमेरिका के होने की बात कही गई है।

पहले तो अमेरिका ने भारत को वैक्सीन बनाने के लिए ज़रूरी रॉ मैटेरियल्स की सप्लाई देने से इनकार कर दिया था, वहीं अब वहाँ की पूरी की पूरी सरकार ही डैमेज कंट्रोल मोड में है और राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, स्टेट सेक्रेटरी और डिप्टी स्टेट सेक्रेटरी के अलावा NSA ने भी भारत के समर्थन में ट्वीट किया। हर ट्वीट में त्वरित मदद का आश्वासन और भारत के लोगों के साथ अमेरिका के होने की बात कही गई।

अमेरिकी NSA जेक सुल्लिवन ने कहा कि उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष अजीत डोभाल से बात की है और लगातार बढ़ रहे कोविड-19 संक्रमण के मामलों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि इस दौरान दोनों अधिकारियों में एक-दूसरे के करीबी संपर्क में रहने पर सहमति बनी। जेक ने कहा कि अमेरिका इस परिस्थिति में भारत के साथ खड़ा है और हम उसकी सहायता के लिए अधिक संसाधन और सप्लाई उपलब्ध करा रहे हैं।

उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस ने लिखा, “इस भयानक कोविड-19 संक्रमण के दौरान ज़रूरी चीजों की अतिरिक्त त्वरित सपोर्ट एवं सप्लाई के लिए अमेरिकी सरकार भारत के साथ मिल कर काम कर रही है। जहाँ हम सहायता भी कर रहे हैं, हम भारत के लोगों के लिए प्रार्थना भी करते हैं, वहाँ के बहादुर स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी।” जैसा कि आप देख सकते हैं, अमेरिकी सरकार के नेताओं और अधिकारियों में भारत के समर्थन में ट्वीट्स करने की होड़ सी मची है।

अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एंटोनी ब्लिंकेन ने लिखा, “इस भयानक कोविड-19 लहर में हमारा हृदय भारतीयों के साथ है। हम भारत सरकार में अपने साझेदारों के साथ मिल कर काम कर रहे हैं। हम त्वरित रूप से भारत के लोगों और वहाँ के स्वास्थ्य सिस्टम के नायकों को अतिरिक्त सहायता मुहैया कराएँगे।” डिप्टी स्टेट सेक्रेटरी वेंडी आर शरमन ने कहा कि वो विदेश सचिव हर्ष शृंगला और एम्बेसडर तरनजीत सिंह संधू से लगातार संपर्क में हैं।

यूनाइटेड स्टेटस ने थेराप्यूटिक्स, रैपिड डायग्नोसिस टेस्ट किट्स, वेंटिलेटर्स और PPE भी उपलब्ध कराने की भी बात कही है। 2022 के अंत तक भारत में वैक्सीन बनाने वाली BioE कम से कम 100 करोड़ वैक्सीन के डोज का निर्माण कर सके, इसके लिए US का डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन (DFC) वित्तीय सहायता मुहैया कराएगा। इसके अलावा वहाँ के सेंटर ऑफ डिजीज कंट्रोल (CDC) और USAID के विशेषज्ञों की एक टीम भारत के साथ मिल कर काम करेगी।

american officials in damage control mode tweets in support of india after vaccine raw materials export

प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना के उपचार का खर्च उठाएगी योगी सरकार: नोएडा में 200 बेड खाली कराए, बेवजह भर्ती कर रखे थे मरीज

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार कोरोना के खिलाफ लड़ाई में लगातार जोर-शोर से लगी हुई है। बेड उपलब्ध होने पर कोई भी सरकारी या निजी अस्पताल संक्रमित को भर्ती करने से मना करे यह सुनिश्चित करने को मुख्यमंत्री ने कहा है। साथ ही सरकारी अस्पताल में बेड उपलब्ध नहीं होने पर संबंधित अस्पताल मरीज को निजी चिकित्सालय में भेजे, ऐसी व्यवस्था को भी कहा है।

उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्राइवेट हॉस्पिटल में मरीज भुगतान के आधार पर उपचार कराने में यदि सक्षम नहीं होगा, तो उस दशा में राज्य सरकार ‘आयुष्मान भारत योजना’ के तहत कम से कम दर पर वहाँ उसके इलाज का भुगतान करेगी। सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि उपचार के अभाव में किसी भी मरीज का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। अगर दुर्भाग्य से मरीज की मौत होती है तो सरकार अपने खर्च से उसके धर्म के हिसाब से अंतिम संस्कार कराएगी।

यूपी सरकार ने कहा है कि राज्य में ऑक्सीजन की कमी नहीं है। कई अख़बारों के संपादकों के साथ हुए वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य के किसी भी सरकारी या निजी कोविड अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी नहीं है। उन्होंने ब्लैक मार्केटिंग और होर्डिंग को ज़रूर समस्या बताया, साथ इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही। ऑक्सीजन की डिमांड, सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन की लाइव ट्रैकिंग और ऑडिट के लिए IIT कानपुर, IIT BHU और IIM लखनऊ के साथ मिल कर काम किया जा रहा है।

खबर ये भी है कि सनसनी पैदा करने के लिए नोएडा के कुछ निजी अस्पतालों ने ऑक्सीजन व मेडिकल उपकरणों की कमी की बात फैलाई थी, जबकि ऐसी बात नहीं थी। उन्होंने कई ऐसे मरीजों को भर्ती कर रखा था, जिन्हें हॉस्पिटल में रहने की ज़रूरत ही नहीं। ऐसे कई अस्पतालों का निरीक्षण कर DM ने उनकी खिंचाई की और करीब 200 ऐसे बेड्स खाली कराने को कहा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बिना ज़रूरत के ही कई लोग अस्पताल के बेड्स पर कब्ज़ा कर के बैठे हुए थे।

जिन अस्पतालों में इस प्रकार की गड़बड़ी पाई गई, वे हैं – GIMS यथार्थ, कैलाश, शारदा, जेपी, फोर्टिस, प्रकाश, सेक्टर 39 कोविड अस्पताल, इण्डोगल्फ, JR हॉस्पिटल, SRS, सूर्या और मेट्रो हॉस्पिटल शामिल हैं। ऐसे अस्पतालों पर कार्रवाई होगी जो बिना ज़रूरत के मरीजों को बेड्स दे रहे हैं। साथ ही कोविड मरीजों को लौटाने पर भी कार्रवाई होगी।

बंगाल में 7वें चरण का मतदान जारीः PM ने कहा- कोविड प्रोटोकॉल का ध्यान रख करें मतदान, ममता बोलीं- कोरोना की चिंता न करें

पश्चिम बंगाल में सोमवार (26 अप्रैल 2021) को सातवें चरण का मतदान हो रहा है। कोविड के मामलों में तेज उछाल के बीच इस चरण में राज्य की 34 सीटों पर मतदान हो रहा है। इनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की परंपरागत सीट भवानीपुर भी है।

34 सीटों पर होने वाल मतदान में 81 लाख से ज्यादा वोटर 284 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। इन सीटों पर मुख्य मुकाबला सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस और बीजेपी के बीच है। वहीं कॉन्ग्रेस-लेफ्ट गठबंधन ने राष्ट्रीय सेक्युलर मजलिस पार्टी (RSMP) के साथ सीटों का बँटवारा किया है। चुनाव आयोग के मुताबिक, सातवें चरण में सुबह 11 बजे तक 37.72 फीसदी मतदान हुआ था।

बीजेपी पोल एजेंट को जबरन बूथ से हटाने का आरोप

मालदा के रतुआ के बखरा गाँव के बूथ नं-91 पर बीजेपी पोलिंग एजेंट शंकर सरकार ने तृणमूल के कार्यकर्ताओं पर उन्हें जबरन बूथ से हटाने का आरोप लगाया। वहीं टीएमसी के सदस्य ने कहा, “वे यहाँ के मतदाता नहीं है, इसलिए हमने उन्हें जाने को कहा। किसी ने उन्हें धमकी नहीं दी।”

पीएम ने की कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए वोट डालने की अपील

सोमवार सुबह मतदान शुरू होने के थोड़ी देर बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वोटरों से कोविड प्रोटोकॉल का अनुसरण करने की अपील की। पीएम मोदी ने ट्विटर पर मतदाताओं के नाम साझा संदेश में कहा, “पश्चिम बंगाल चुनावों के सातवें चरण का मतदान आज हो रहा है। लोगों से उनके मताधिकार का प्रयोग करने और कोविड से संबंधित प्रोटोकॉल का अनुसरण करने की अपील करता हूँ।”

कोविड की चिंता न करें, वोट डालें: ममता बनर्जी

वहीं ममता बनर्जी ने रविवार शाम को कोविड महामारी से निपटने को लेकर केंद्र पर जोरदार हमला बोला और ऑक्सीजन की कमी और वैक्सीन की कीमतों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। ममता ने लोगों से कोविड के खतरे को नजरंदाज करते हुए वोट डालने की अपील की। उन्होंने कहा, “कोविड की चिंता मत कीजिए। मैं आपकी पहरेदार हूँ।”

इन सीटों पर रहेगी नजर

तृणमूल नेता और बंगाल के ऊर्जा मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय, भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामना बीजेपी के रुद्रनील घोष से है, जो अभिनेता और TMC के पूर्व सदस्य रहे हैं।

वहीं शहरी विकास मंत्री और कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम कोलकाता पोर्ट सीट से लगातार तीसरी बार चुनाव जीतने के इरादे से मैदान में हैं। इस सीट पर उन्हें त्रिकोणीय टक्कर का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें बीजेपी के अवध किशोर और कॉन्ग्रेस के मोहम्मद मुख्तार भी जीत के दावेदारों में शामिल हैं, इस सीट पर अल्पसंख्यक वोटर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

बढ़ते कोविड मामलों से फीका रहा सातवें चरण का प्रचार

राज्य में बढ़ते हुए कोविड के मामलों को देखते हुए चुनाव आयोग द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से सातवें चरण में प्रचार अभियान फीका रहा। चुनाव आयोग द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों में रोड शो और रैलियों पर प्रतिबंध, रोज के चुनाव प्रचार के घंटों को सीमित करना और प्रचार थमने की अवधि (‘मौन काल’) को 48 से बढ़ाकर 72 घंटे करना शामिल है।

देश के बाकी हिस्सों की तरह की बंगाल में भी कोरोना का कहर जारी है। रविवार को बंगाल में 24 घंटों के दौरान 15889 नए मामले सामने आए, जोकि एक दिन में आने वाले केसों का नया रिकॉर्ड, इससे पहले एक दिन में 14281 मामले सामने आए थे। इस अवधि के दौरान राज्य में कोरोना से 57 लोगों की मौत हुई, शनिवार को 59 लोगों की मौत हुई थी।

2016 में कैसा रहा था प्रदर्शन

2016 के बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कॉन्ग्रेस ने इन 34 में से 14 सीटों पर कब्जा जमाया था और उसे 36.8 फीसदी वोट मिले थे। वहीं 22.4 फीसदी वोटों के साथ कॉन्ग्रेस ने 12 सीटों पर कब्जा जमाया था, जबकि लेफ्ट को 21.6 फीसदी वोट के साथ 10 सीटें मिली थी। बीजेपी को पिछले चुनावों में 13.1 फीसदी वोट मिले थे। लेकिन तीन साल बाद हुए 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए 16 विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल करते हुए 37 फीसदी वोट हासिल किए थे, जबकि तृणमूल कॉन्ग्रेस को 38.9 फीसदी वोट ही मिले थे।

पश्चिम बंगाल में आठवें और अंतिम चरण के लिए मतदान गुरुवार (29 अप्रैल) को होगा। नतीजे चार अन्य राज्यों, असम, केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी के साथ 2 मई को घोषित किए जाएँगे।

महाराष्ट्र से सिर्फ 12 दिन में 9 लाख+ लोगों का पलायन, 82000 करोड़ रुपए का घाटा: साल भर क्यों सोती रह गई ठाकरे सरकार?

कोरोना महामारी से देश जूझ रहा है – यह सच्चाई है। सच लेकिन एक और भी है – राज्य सरकारों की निष्क्रियता। यह आरोप नहीं है – आँकड़े हैं। आँकड़े जो कोरोना महामारी से ज्यादा भयावह स्थिति की ओर देश को धकेलने का इशारा कर रहे हैं।

राज्य सरकारों ने कोरोना महामारी से निपटने में पिछले एक साल में जो निष्क्रियता दिखाई है, उसका परिणाम है पलायन। पलायन मजदूरों-कामगारों का। यह पलायन अकेले नहीं आया है। साथ लाया है बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने वाले आँकड़े। SBI की 41 पन्नों की रिपोर्ट में इसका पूरा लेखा-जोखा है।

Thwarting the Second Wave: Rapid Vaccination should be the primary tool and not Lockdown नाम की इस रिपोर्ट में देश के हालात और आने वाली अर्थव्यवस्था को लेकर हर आँकड़े दिए गए हैं। इसके अनुसार 1,49,970 करोड़ रुपए का घाटा देश को अभी लगाए गए लॉकडॉउन (विभिन्न राज्यों के द्वारा) के कारण हो सकता है।

महाराष्ट्र को अकेले 81,672 करोड़ रुपए का घाटा

देश के विभिन्न राज्यों ने जो अभी तक लॉकडाउन लगाए हैं, उससे कुल 1,49,970 करोड़ रुपए के घाटे का अनुमान लगाया गया है। अकेले महाराष्ट्र की बात करें तो देश के कुल घाटे का 54% मतलब 81,672 करोड़ रुपए का वित्तीय घाटा यहाँ हो सकता है। रिपोर्ट में इस बात की भी चिंता जाहिर की गई है कि अगर महाराष्ट्र में और अधिक कड़ा या लॉकडाउन की अवधि बढ़ाई गई तो घाटे का यह आँकड़ा और भी बढ़ सकता है।

SBI की रिपोर्ट के पेज 3 का स्क्रीनशॉट

महाराष्ट्र के बाद 21,712 करोड़ रुपए के साथ सबसे अधिक घाटा वाला राज्य मध्य प्रदेश होगा। दिल्ली के 6 दिनों के लॉकडाउन में इसे 5,178 करोड़ रुपए के घाटे का अनुमान लगाया गया है। हालाँकि इसके बाद केजरीवाल सरकार ने एक सप्ताह का और जो लॉकडाउन बढ़ाया है, उससे होने वाला घाटा इसमें शामिल नहीं है।

महाराष्ट्र से 12 दिनों में 9 लाख 2 हजार लोगों का पलायन

महाराष्ट्र देश की आर्थिक राजधानी है। यहीं सबसे कड़ा लॉकडाउन भी लगाया गया है। नतीजा सबके सामने है। पलायन चरम पर है। सिर्फ 1 से 12 अप्रैल के बीच महाराष्ट्र से 9,02,000 लोगों का पलायन हुआ है – यह आँकड़ा सिर्फ रेलवे का है।

SBI की रिपोर्ट के पेज 4 का स्क्रीनशॉ

वेस्टर्न रेलवे के आँकड़ों के अनुसार 4,32,000 लोग रेलगाड़ियों से उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और ओडिशा की ओर लौटे हैं, इनमें उत्तर प्रदेश और बिहार के 3,23,000 लोग हैं। सेंट्रल रेलवे के आँकड़ों की बात करें तो 4,70,000 लोग महाराष्ट्र से उत्तरी और पूर्वी राज्यों की ओर लौट चुके हैं सिर्फ 12 दिनों में। सड़क से जो लोग लौटे होंगे, उनका सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है।

लॉकडाउन की स्थिति क्यों?

कोरोना महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए पहले फेज में जो निर्णायक कदम उठाए गए थे, उसके रिजल्ट बाकी दुनिया से बेहतर थे। इसके विपरीत दूसरे फेज में बाकी दुनिया के देशों ने अच्छा प्रदर्शन किया। यहीं पर भारत की विभिन्न राज्य सरकारें मात खा गईं। साल 2021 में जनवरी के बाद अब तक जो 31 लाख कोरोना के मामले आए हैं, उसमें 52% अकेले महाराष्ट्र से हैं जबकि टॉप के 5 राज्यों को मिला दें तो देश के कुल संक्रमण का 75% इन्हीं से है।

SBI की रिपोर्ट के पेज 38 का स्क्रीनशॉट

देश के सबसे ज्यादा संक्रमित 15 जिलों (13 शहरी, 2 ग्रामीण) में से 6 महाराष्ट्र से हैं और 3 छत्तीसगढ़ से। अगर सिर्फ सबसे ज्यादा ग्रामीण जिलों (देश में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमण से प्रभावित) की बात करें तो इनमें 9 महाराष्ट्र से हैं, जबकि 3 छत्तीसगढ़ से।

Thwarting the Second Wave: Rapid Vaccination should be the primary tool and not Lockdown नाम की इस रिपोर्ट को आप यहाँ पूरा पढ़ सकते हैं

ऑक्सीजन सिलिंडर फटने से कोरोना अस्पताल में भीषण आग, 82 की मौत: बगदाद की घटना

इराक की राजधानी बगदाद के एक कोरोना अस्पताल में आग लगने के कारण 82 लोगों की मौत हो गई है। इनमें से अधिकतर कोरोना संक्रमित मरीज और उनके परिजन थे। एक ऑक्सीजन सिलिंडर फटने के कारण ये हादसा हुआ। भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और जीर्ण-शीर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर से बेहाल अरब के इस मुल्क में शनिवार (अप्रैल 24, 2021) को हुई इस घटना के बाद शोक का माहौल है। आंतरिक मंत्रालय ने कहा कि 110 लोग घायल भी हैं।

मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। हादसा इब्न-अल-खातिब अस्पताल में हुआ। ये अस्पताल बगदाद से सटे एक पिछड़े इलाके में है, जिसे कोविड डेडिकेटेड अस्पताल बना दिया गया था। इसके पास स्मोक डिटेक्टर, स्प्रिंकलर सिस्टम या फायर होसेस जैसी कोई सुविधा नहीं है।

इराक के सिविल डिफेंस फोर्सेज के मुखिया खादिम बोहान ने कहा कि फॉल्स सीलिंग और ICU में कई ऐसे मेटेरियल्स का प्रयोग किया गया था, जो जल्दी आग पकड़ते हैं। इसी कारण आग काफी तेज़ी से फैली। उन्होंने कहा कि अगर स्मोक डिटेक्टर होता तो काफी लोगों की जान बचाई जा सकती थी। पिछले साल सिविल डिफेंस ने 18,500 इंस्पेक्शन किए थे, जिनमें से एक इस अस्पताल में भी था। लेकिन, सिफारिशों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया।

अस्पताल से बचाए गए डॉक्टरों और अन्य लोगों ने कहा कि आग लगने के बाद अराजकता का माहौल हो गया था। अस्पताल में कोविड-19 मरीजों और उनके परिजनों की भीड़ थी। आधिकारिक रूप से परिजनों को कोरोना मरीजों को देखने आने पर प्रतिबंध है। लेकिन, अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ्सस्टफ्स की कमी के कारण परिजन ही देखभाल करते हैं। इराक में रोज 6000 से ज्यादा कोरोना केस आ रहे हैं और 50 लोगों की लगभग रोज मौत हो रही है।

1990 की शुरुआत से ही यहाँ के तानाशाह सद्दाम हुसैन पर कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण स्वास्थ्य सेवा को ठीक होने का मौका ही नहीं मिला। 2003 में अमेरिकी हमला और लूटपाट की घटनाओं के बाद मुल्क सिविल वार में फँस गया। इसके बाद खूँखार आतंकी संगठन ISIS ने लगभग एक तिहाई इलाके पर कब्ज़ा जमा लिया। सैकड़ों करोड़ डॉलर्स खर्च किए जाने के बावजूद अब यहाँ हालत ज्यों के त्यों है।

कई ऐसे अस्पताल हैं, जो भ्रष्टाचार के कारण सालों से निर्माणाधीन हैं। ऑक्सीजन का इस्तेमाल दुनिया भर के अस्पतालों में बढ़ रहा है, ऐसे में विशेषज्ञों ने आग से बचाव को लेकर पहले ही चेताया था। इस घटना के जाँच के आदेश दे दिए गए हैं। जिस अस्पताल में आग लगी, पिछले साल ही उसका जीर्णोद्धार हुआ था। अस्पताल के डायरेक्टर और इंजीनियरिंग मेंटेनेंस हेड को गिरफ्तार कर लिया गया है। कई परिजन तो मृतकों का चेहरा तक नहीं पहचान पाए।