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राजस्थान में 4 ऑक्सीजन टैंकरों को जब्त करने का मामला: केंद्र ने कहा- कार्रवाई कर दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण पेश करेंगे

राजस्थान में Inox के ऑक्सीजन टैंकरों को जब्त करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कंपनी ने आरोप लगाया है कि राजस्थान में उसके 4 टैंकरों को पुलिस ने जब्त कर लिया। Inox कंपनी अस्पतालों को मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन की सप्लाई करती है। मामले के सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने इस घटना के मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट में भी कंपनी ने ये मामला उठाया था।

उच्च न्यायालय ने सलाह दी कि दिल्ली सरकार को एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करनी चाहिए, जिनसे ऐसी किसी भी स्थिति में सप्लायर कंपनियाँ संपर्क कर सकें। वहीं केंद्र सरकार ने कहा कि राजस्थान में टैंकरों को जब्त किए जाने के मामले के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

पिछले एकाध सप्ताह से ऐसी कई ख़बरें आई हैं, जहाँ ऑक्सीजन टैंकरों का रूट बदल दिया गया है या फिर उन्हें जब्त कर लिया गया है। ऑक्सीजन के टैंकरों के रास्ते में व्यवधान डालने के मामले में हाई कोर्ट ने केंद्र को सही व्यवस्था करने के लिए कहा। इसके बाद केंद्र सरकार ने कहा है कि इस मामले में कार्रवाई की जाएगी, ताकि दूसरे राज्यों के लिए भी एक उदाहरण पेश किया जा सके। ऐसी घटनाओं को लेकर सख्ती अपनाई जाएगी।

केंद्र सरकार ने कंपनियों को आश्वासन देते हुए कहा, “अगर कोई भी सरकार आपको रोकती है, तो हमें बताइए। ऐसे मामलों में हम आपराधिक मुकदमा दर्ज करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कह चुके हैं कि ऑक्सीजन टैंकरों को कोई छू भी नहीं सकता और इसके सुरक्षित आवागमन के लिए ग्रीन कॉरिडोर विकसित किया जाए। इसके लिए हमने GPS ट्रैकिंग सिस्टम भी अपनाया है, जिससे सरकार को टैंकरों का लोकेशन जानने में मदद मिलेगी।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में 11 ऐसे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की थी, जो कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर से सर्वाधिक पीड़ित हैं। इस बैठक में उन्होंने इस बात पर ध्यान रखने को कहा था कि दूसरे राज्यों में जा रहे ऑक्सीजन टैंकरों को किसी भी राज्य में रोका न जाए। दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले ही सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि ऑक्सीजन की सप्लाई बाधा उत्पन्न करने वालों को फाँसी पर लटकाया जाएगा।

वहीं इस घटना को लेकर राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने भी प्रतिक्रिया दी है। कॉन्ग्रेस सरकार ने कहा कि वहाँ ऑक्सीजन टैंकरों की भारी कमी थी, इसलिए उसे मजबूरन ये कदम उठाना पड़ा। केंद्रीय गृह सचिव ने राजस्थान के मुख्य सचिव से बात कर इन टैंकरों को छोड़ने को कहा। ऑक्सीजन का न सिर्फ उत्पादन, बल्कि आवागमन भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। दिल्ली सरकार को भी टैंकरों की व्यवस्था के लिए एक नोडल ऑफिसर की नियुक्ति करने को कहा गया है।

नतीजों के बाद जश्न नहीं: विजय जुलूस पर चुनाव आयोग का प्रतिबंध, 2 मई को आएगा 5 राज्यों का रिजल्ट

कोरोना संक्रमण के मद्देनजर चुनाव आयोग ने आज (अप्रैल 27, 2021) बड़ा फैसला करते हुए 2 मई को चुनावी नतीजों के बाद किसी भी प्रकार के विजय जुलूस पर बैन लगा दिया। आयोग ने स्पष्ट कहा कि जीतने वाला कैंडिडेट सिर्फ दो लोगों के साथ ही जीत का सर्टिफिकेट लेने जा सकता है। 

बता दें कि केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हो चुका है। पश्चिम बंगाल में आखिरी चरण की वोटिंग होनी है। इन 5 राज्यों के नतीजे एक साथ 2 मई को आने हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि आयोग ने यह फैसला मद्रास हाई कोर्ट की चेतावनी के मद्देनजर लिया है। गौरतलब है कि कोविड संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए पहले से ही आयोग जरूरी फैसले ले रहा है। कुछ दिन पहले उसने बंगाल में रोड शो, पदयात्रा पर प्रतिबंध लगाया था। 

सोमवार को मद्रास हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को कोरोना की दूसरी लहर का जिम्मेदार बताया था। हाई कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा था कि 2 मई को होने वाले मतगणना के दौरान कोरोना के दिशा-निर्देशों का पालन कराने की योजना का खाका आयोग नहीं पेश कर पाया तो वह इस पर रोक लगा देगा। इससे पहले चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में होने वाले रोड शो पर रोक लगा दी थी। आयोग ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में जनसभाओं में 500 से ज्यादा लोग शामिल नहीं हो सकेंगे।

कुछ दिन पहले राज्य में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे। ममता बनर्जी ने राज्य विधानसभा चुनावों में चुनाव आयोग की भूमिका पर प्रश्न खड़ा किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि चुनाव एजेंसी ने भाजपा की सहायता करने का कार्य किया। मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करने का कार्य करता रहा कि टीएमसी के कार्यकर्ता भाजपा के खिलाफ वोटिंग न कर पाएँ।  

टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने अपने समर्थकों को एक संवैधानिक संस्था के खिलाफ उकसाते हुए कहा, “मैं बीरभूम, मुर्शिदाबाद और मालदा समेत जहाँ भी चुनाव होने हैं वहाँ के लोगों से अपील करती हूँ कि अभी से तैयारी कर लें क्योंकि एक तरफ हमें Covid-19 संक्रमण से लड़ना है वहीं दूसरी ओर हमें चुनाव आयोग से भी लड़ना है जो यह षड्यंत्र कर रहा है कि हमारे लोग वोटिंग न कर पाएँ।“

उन्होंने कहा, “यदि पुलिस किसी को अवैध रूप से गिरफ्तार करती है तो उनके परिवार वालों को पुलिस स्टेशन में जाकर बैठना चाहिए और पुलिस स्टेशन का घेराव करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर न्यायालय भी जाएँ। हम उच्च न्यायालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएँगे और किसी की भी अवैध गिरफ़्तारी के विरुद्ध शिकायत करेंगे।”

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने जब से 8 चरणों में चुनाव कराने का फैसला सुनाया था, तभी से तृणमूल कॉन्ग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी उन पर तरह तरह के आरोप लगा रही थीं। अभी हाल में उन्होंने कहा था महामारी के संकट के बाद भी चुनाव आयोग बाकी बचे चुनाव को एक ही चरण में निपटाने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहा, जबकि इस मुद्दे पर चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि एक बार चुनावों की घोषणा होने के बाद उसमें बदलाव नहीं किया जा सकता है।  

₹1 करोड़ की फ्लाइट-₹55 लाख का टीकाः देश को कोरोना में छोड़ लंदन-दुबई निकल रहे VVIP, प्राइवेट जेट कंपनियों की बल्ले-बल्ले

कहते हैं, हर देश में दो दुनिया एक साथ चल रही होती है। खासकर विकासशील और गरीब देशों में। एक दुनिया होती है अमीरों की, यानी VVIPs की। दूसरी दुनिया होती है गरीबों की। एक तरफ संसाधनों के अभाव में लोग कोरोना संक्रमण से दम तोड़ रहे हैं, दूसरी ओर एक जमात ऐसी भी है जो करोड़ों खर्च कर विदेश जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक देश के अमीर 1 करोड़ रुपए के आसपास खर्च कर लंदन जा रहे हैं। बॉलीवुड सेलेब्स मालदीव में छुट्टियाँ मना रहे।

दुनिया भर के कई देशों ने संक्रमण के डर से भारत से आने वाले फ्लाइट्स पर पाबंदी लगा दी है। लेकिन देश के VVIPs प्राइवेट जेट्स किराया पर लेकर लंदन की सैर को जा रहे हैं, ताकि स्थिति ठीक होने पर वापस आ सकें। इससे प्राइवेट जेट्स का किराया आसमान छू रहा है।

‘द टाइम्स’ की एक खबर के अनुसार, पिछले हफ्ते यूके में भारत को ‘रेड लिस्ट’ की सूची में शामिल किया गया। यहाँ के नागरिकों को ब्रिटेन जाने पर होटल में क्वारंटाइन की अनिवार्यता लागू कर दी गई। फिर भी कम से कम 9 VVIPs ने प्राइवेट जेट्स बुक कर 9 घंटे का सफर तय किया। ये सभी फ्लाइट्स यूके के लिए थीं। ये प्लेन्स रेड लिस्ट डेडलाइन्स से 45 मिनट पहले तक पहुँचते रहे।

बताया जा रहा है कि इसके लिए अमीरों ने प्रत्येक फ्लाइट पर करीब £100,000 (1.03 करोड़ रुपए) खर्च किए। इस महीने की शुरुआत में ही एयर इंडिया, विस्तारा, ब्रिटिश एयरवेज और वर्जिन अटलांटिक जैसी कंपनियों की वेबसाइटों पर यूके जाने के लिए टिकट उपलब्ध नहीं थे। वर्जिन अटलांटिक का कहना है कि उसे सरकार की तरफ से फ्लाइट की संख्या कम रखने का आदेश मिला है, इसलिए न तो फ्लाइट्स और न ही सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

19 अप्रैल 2021 को 4 दिनों के नोटिस के साथ यूके ने भारत को ‘रेड लिस्ट’ में शामिल किया। अप्रैल 23 को सुबह 4 बजे के बाद से सिर्फ यूके के नागरिकों को ही भारत से वहाँ की यात्रा करने की अनुमति है। उन्हें भी होम क्वारंटाइन में रहना पड़ेगा। यूके में भारतीय वैरिएंट के 100 से अधिक कोरोना मामले मिल चुके हैं। फ्रांस, UAE, इंडोनेशिया, अमेरिका, हॉन्गकॉन्ग, कनाडा, मालदीव, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर ने भी भारतीय पर्यटकों को लेकर ऐसे ही प्रतिबंध लगाए हैं।

एक प्राइवेट चार्टर्ड फ्लाइट सर्विस का तो कहना है कि प्राइवेट जेट्स किराया पर लेने के लिए लोगों में पागलपन सवार है। उक्त कंपनी ने एक दिन में ऐसी 12 फ्लाइट्स दुबई भेजी और सभी फुल थे। इस तरह एन्ट्रल एविएशन ने बताया कि 80 लोगों ने उससे संपर्क साधा। इसके लिए विदेश से और भी एयरक्राफ्ट्स मँगाए जा रहे हैं। मुंबई से दुबई 13 सीटर के £27,337 (28.31 लाख रुपए) और 6 सीटों वाले एयरक्राफ्ट के लिए £22,301 (23.10 लाख रुपए) देने होते हैं।

इससे पहले खबर आई थी कि भारत के कुछ ऐसे रईस भी हैं जो कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए दुबई जा रहे हैं और इसके लिए 55 लाख रुपए तक खर्च कर रहे हैं। इसके लिए वो चार्टर्ड फ्लाइट्स तक बुक करा रहे हैं। UAE में एस्ट्राजेनेका, साइनोफार्म और फाइजर जैसे वैक्सीन उपलब्ध हैं, लेकिन लोग फाइजर को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। चार्टर ऑपरेटर्स का कहना है कि कुछ लोग वैक्सीन की दो डोज लगाने के लिए दुबई में ही रह रहे हैं, जबकि कुछ लोग वहाँ के दो चक्कर लगा रहे हैं।

दुनिया को कोरोना बाँट चीन ने खुद सेना पर खर्च किए ₹1877992 करोड़, लगातार 26वें साल किया इजाफा

चीन के वुहान से निकलने कोरोना संक्रमण ने पिछले साल पूरी दुनिया में हाहाकार मचा रखा था। भारत फिलहाल इसकी दूसरी लहर से जूझ रहा है। वैश्विक महामारी के इस काल में भी सैन्य खर्च पर भारी इजाफा देखने को मिला है। इस दौरान कई देशों ने अपने बजट का अच्छा-खासा हिस्सा हथियार खरीदने में लगाया। यह बात स्टॉकहॉम इंटरनेशनल पीस रिसचर्स इंस्टीट्यूट (सिपरी) की रिपोर्ट से हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार 2020 में वैश्विक सैन्य खर्च बढ़कर 1981 अरब डॉलर (करीब 147 लाख करोड़ रुपए) हो गया। 2019 के मुकाबले यह 2.6% ज्यादा है। विभिन्न देश अपना सैन्य खर्च लगतार बढ़ रहे हैं। लेकिन वैश्विक महामारी के दौर में यह इजाफा चौंकाने वाला है।

रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक सैन्य खर्च का 62 प्रतिशत केवल 5 देश ने किया है। ये हैं: अमेरिका, चीन, भारत, रूस, और ब्रिटेन। चीन ऐसा देश है जिसके सैन्य खर्च में लगातार 26वें साल इजाफा हुआ है।

हैरानी की बात ये हैं कि वैश्विक स्तर पर सैन्य खर्च में ये इजाफा उस समय दर्ज किया गया जब जीडीपी 4.4% नीचे हुई। रिपोर्ट के अनुसार इससे जीडीपी में सैन्य खर्च की हिस्सेदारी का 2020 में वैश्विक औसत 2.4 प्रतिशत तक पहुँच गया, जो 2019 में 2.2 प्रतिशत था।

चिली और साउथ कोरिया ऐसे देश हैं जिन्होंने अपने सैन्य खर्च का हिस्सा महामारी से निपटने में खर्च किया। ब्राजील, रूस ने 2020 के मुकाबले अपने प्रारंभिक सैन्य बजटों की तुलना में इस बार काफी कम खर्च किया है।

सिपरी के शस्त्र और सैन्य खर्च कार्यक्रम के रिसर्चर डिएगो लोपेस द सिल्वा के मुताबिक, “हम निश्चित रूप से कह सकते हैं कि साल 2020 में महामारी का महत्वपूर्ण प्रभाव सैन्य खर्च पर नहीं पड़ा।” वह आगे कहते हैं, “यह देखने लायक होगा कि क्या देश महामारी के दूसरे साल भी इस तरह से सैन्य खर्च को बनाए रखते हैं।”

किस देश ने किया कितना खर्च?

सिपरी के मुताबिक भारत का सैन्य खर्च 2020 में 2019 की तुलना में 2% ज्यादा रहा। इसके पीछे भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा विवाद और तनाव हो सकता है। भारत ने 72.9 अरब डॉलर (₹5.39 लाख करोड़), रूस ने 61.7 अरब डॉलर (करीब ₹4.56 लाख करोड़) और ब्रिटेन ने 59.2 अरब डॉलर (₹4.38 लाख करोड़) खर्च किए। सबसे ज्यादा खर्च अमेरिका ने किए हैं।

7 साल तक लगातार इस खर्च में कमी के बाद अमेरिका सैन्य खर्च लगातार तीन सालों से बढ़ रहा है। रिपोर्ट बताती है कि 2020 में अमेरिका ने कुल सैन्य खर्च का 39 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया। इससे अमेरिकी सैन्य खर्च अनुमानित 778 अरब डॉलर (करीब ₹57 लाख करोड़) तक पहुँच गया है। 2019 की तुलना में इसमें 4.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

वहीं चीन के सैन्य खर्च में 1.9 फीसदी का इजाफा हुआ है। उसने 2020 में 252 अरब डॉलर (करीब ₹18. 64 लाख करोड़) खर्च किए। दशक भर में उसका सैन्य खर्च 76 फीसदी बढ़ा है।

सिपरी के मुताबिक पिछले साल नॉटोनॉटोनॉटो(नॉर्थ एटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) के सभी सदस्यों पर सैन्य बोझ बढ़ा। नतीजन, नाटो के 12 सदस्यों ने अपनी जीडीपी का 2 प्रतिशत या उससे अधिक खर्च रक्षा पर किया। 2019 में सिर्फ 9 सदस्यों का खर्च लक्ष्य के भीतर था। उदाहरण के लिए, फ्रांस, वैश्विक स्तर पर 8 वाँ सबसे बड़ा देश है, जिसने 2009 के बाद पहली बार 2 प्रतिशत की सीमा पार की।

क्या है SIPRI?

बता दें कि  SIPRI एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय संस्थान है। इसकी स्थापना 1966 में हुई थी। यह संस्था युद्धों तथा संघर्ष, युद्धक सामग्रियों, हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण के क्षेत्र में शोध का कार्य करती है और नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, मीडिया और इच्छुक लोगों को आँकड़ों का विश्लेषण और सुझाव उपलब्ध कराती है। 

इसका मुख्यालय स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में है। इसे विश्व के सर्वाधिक सम्मानित थिंक टैंकों की सूची में शामिल किया जाता है। इसका डेटाबेस हर वर्ष अपडेट होता है। हाल में आए आँकड़े इस साइट (https://www.sipri.org) पर क्लिक करके देख सकते हैं।

नोट: इस साइट पर सैन्य खर्च (Military expenditure) का मतलब, वर्तमान सैन्य बलों और गतिविधियों पर सभी सरकारी खर्चों को संदर्भित करता है। इसमें वेतन और लाभ, परिचालन व्यय, हथियार और उपकरण खरीद, सैन्य निर्माण, अनुसंधान और विकास, केंद्रीय प्रशासन, कमान और समर्थन शामिल हैं। SIPRI सैन्य खर्च को केवल हथियारों पर होने वाला खर्च नहीं बताता, बल्कि उनके अनुसार, हथियार खरीद इसका एक हिस्सा है।

ब्रिटेन से आई वेंटिलेटर-ऑक्सीजन की पहली खेप, 40 US कंपनियों ने मदद को बनाई टास्क फोर्स: हालात पर मोदी-बायडेन ने की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (अप्रैल 26, 2021) की रात अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन के साथ फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति पर विस्तृत चर्चा की। पीएम मोदी ने अमेरिका द्वारा की जा रही मदद के लिए जो बायडेन को धन्यवाद भी दिया। इस बातचीत के बाद दोनों ही नेताओं ने ट्वीट कर एक-दूसरे को धन्यवाद दिया और साथ मिल कर काम करने की बात कही।

पीएम मोदी ने कहा, “राष्ट्रपति बायडेन के साथ चर्चा के दौरान वैक्सीन रॉ मैटेरियल्स और दवाओं की सुगम व सटीक सप्लाई चेन के महत्व पर भी बातचीत हुई। भारत-अमेरिका का स्वास्थ्य पार्टनरशिप कोविड-19 की वैश्विक चुनौती से निपटने में सक्षम हो सकता है।” वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में कहा, “पीएम मोदी से बातचीत के दौरान मैंने कोविड-19 से लड़ने हेतु आपात सहायता और संसाधनों की सप्लाई के लिए अमेरिका के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।”

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन ने कहा कि भारत हमारे साथ खड़ा था, इसीलिए अब हम भी भारत के साथ हैं। भारत में कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए USA की 40 कंपनियों ने एक टास्क फोर्स भी बनाया है। ये ग्लोबल टास्क फोर्स वैश्विक संसाधनों को मुहैया कराने में भारत की मदद करेगा। यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स के ‘यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल’ ने अगले कुछ हफ़्तों में यहाँ 20,000 ऑक्सीजन कन्सेंट्रेटर्स भेजने का लक्ष्य तय किया।

इस बीच ब्रिटेन से मदद की पहली खेप मंगलवार (27 अप्रैल 2021) को दिल्ली पहुँच गई। इसमें 100 वेंटिलेटर और 95 ऑक्सीजन कंसट्रेटर हैं। उधर फ्रांस ने भी कहा है कि वो भारत को पर्याप्त ऑक्सीजन की सहायता मुहैया कराएगा। साथ ही ऑक्सीजन वेंटिलेटर्स भी दिए जाएँगे। यूरोपियन यूनियन ने कहा है कि भारत की त्वरित सहायता के लिए यूरोप के सभी देश एक योजना तैयार कर रहे हैं। यूके से तो मदद की पहली खेप पहुँच भी चुकी है। सऊदी अरब और अडानी के बीच हुए करार के बाद वहाँ से भी ऑक्सीजन की खेप पहुँची है। कई अन्य देशों ने भी मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं।

दुबई से लौटा, निधि का करने लगा पीछा: निकाह के लिए नहीं मानी तो हैदर ने साथियों संग घर में घुस गला रेता

उत्तराखंड के रुड़की में 19 वर्षीय निधि पासवान की घर में घुसकर बेहरमी से हत्या कर दी गई। घटना को अंजाम देने वाला युवक कई दिनों से उसका पीछा कर रहा था। शनिवार (24 अप्रैल 2021) को मौका देख युवक ने अपने दो साथियों के साथ निधि को मारा। वारदात गंगानगर थानाक्षेत्र कृष्णनगर सड़क नंबर 20 की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैदर अली नाम का युवक निधि का पिछले कई दिनों से पीछा कर रहा था। वह उस पर भद्दे कमेंट करता और उसे निकाह के लिए बोलता। एक दिन निधि ने तंग आकर हैदर के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इसी गुस्से में हैदर ने अपने दो दोस्त- सरीक और रियान के साथ उसे मारने की पूरी साजिश रची।

शनिवार को तीनों, निधि के घर बाइक से पहुँचे और घर में घुसकर दिनदहाड़े निधि की हत्या कर दी। उसका गला रेत दिया गया। शोर मचते ही रियान और सरीक मौके से भाग गए। वहीं हैदर को रंगे हाथों पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया गया।

24 घंटे के भीतर सुलझा मामला

जानकारी के अनुसार, निधि पासवान बीबीए की छात्रा थी और एक लोकल ब्यूटी पार्लर में काम करती थी। उसकी हत्या पर भाजपा सांसद देशराज करणवाल का कहना है, “इन लोगों ने एक मासूम लड़की की दिनदहाड़े हत्या की है। इन्हें जेल में बंद करके इनके खिलाफ़ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

मृतका के परिजनों ने भी तीनों आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग की, जिसके बाद एसपी (ग्रामीण) परमिंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि मामले में लड़की के भाई दिनेश ने मुकदमा दर्ज करवाया था। हैदर के बाद उन्होंने बाकी दो फरार आरोपितों को भी रहीमपुर गेट से गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस ने बताया कि निधि को हैदर तीन साल से जानता था। दुबई से लौटने के बाद वह निधि का पीछा करता था। लेकिन लड़की ने उसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसलिए उसने अपने दो दोस्तों के साथ मिल उसकी (निधि) हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक, आरोपितों ने पहले निधि की बेरहमी से पिटाई की। बाद में पेपर काटने वाले चाकू से उसकी हत्या कर दी।

एसपी डोबाल ने बताया कि इस मामले को 24 घंटे के भीतर सुलझाने के लिए उन्होंने संबंधित पुलिस टीम को ढाई हजार इनाम भी दिया है। टीम में इंस्पेक्टर मनोज मनवाल, सब इन्सपेक्टर मनोज सिरौला, सुनील रमोला, विनोद गोला, दीप कुमार, नवीन पुरोहित, लोकपाल परमान, प्रीति तोमर, जहाँगीर अली, समेत कई पुलिसकर्मी शामिल थे।

निकिता तोमर हत्याकांड

बता दें कि पिछले साल ऐसा ही मामला हरियाणा के बल्लभगढ़ से आया था। अक्टूबर 2020 में 21 साल की निकिता तोमर की उसके कॉलेज के सामने गोली मारकर हत्या की गई थी। सारी वारदात सीसीटीवी में कैद हुई थी। वीडियो में साफ नजर आया था कि कैसे निकिता ने खुद को बचाने के प्रयास किए लेकिन जब तक वो वहाँ से भागती, आरोपित ने गोली चला दी।

निकिता तोमर की हत्या के बाद भी यही तथ्य सामने आए थे कि तौफीक नाम का लड़का उसका बहुत समय से पीछा करता था और उसपर इस्लाम कबूल करके उससे निकाह करने का दबाव बनाता था। इस मामले में पिछले ही महीने फरीदाबाद की जिला कोर्ट ने तौफीक और रेहान को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

दिल्ली का 5 स्टार होटल, 100 कमरे: हाई कोर्ट जज और कर्मचारियों के लिए केजरीवाल सरकार का कोविड सेंटर, फैमिली के लिए भी

दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय के जज और अन्य न्यायिक कर्मचारियों के लिए अशोक होटल में 100 कमरों का कोविड हेल्थ फैसिलिटी स्थापित करने का निर्णय लिया है। जज और न्यायिक कर्मचारियों के परिवार भी इसका प्रयोग कर पाएँगे। सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के निवेदन के बाद ये फैसला लिया। बता दें कि चाणक्यपुरी स्थित अशोक होटल 5 स्टार दर्जे का है।

चाणक्यपुरी के SDM द्वारा इस सम्बन्ध में सोमवार (अप्रैल 26, 2021) को नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। इस कोविड फैसिलिटी को प्राइमस हॉस्पिटल द्वारा संचालित किया जाएगा। वहाँ जो भी बायोमेडिकल वेस्ट होंगे, उन्हें ठिकाने लगाना होटल की जिम्मेदारी होगी। होटल के कर्मचारियों को सुरक्षा के सभी उपकरण दिए जाएँगे और उनकी विशेष ट्रेनिंग भी होगी। अगर होटल में कर्मचारियों की कमी है तो हॉस्पिटल से स्वास्थ्यकर्मी बुलाए जाएँगे।

कमरों, हाउसकीपिंग, सैनिटाइजेशन, मरीजों के लिए भोजन इत्यादि की व्यवस्था होटल ही करेगा। इसमें जो भी खर्च आएगा, वो हॉस्पिटल को बताया जाएगा और हॉस्पिटल ही होटल को पूरे खर्च का वहन करेगा। हॉस्पिटल अतिरिक्त खर्चे पर अलग से डॉक्टर्स और पैरामेडिकल कर्मचारियों को वहाँ भेज सकता है। दिल्ली हाईकोर्ट में एक PIL भी दाखिल की गई है, जिसमें जजों और न्यायिककर्मियों को फ्रंटलाइन वर्कर्स घोषित करने की माँग की गई है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश ने भी 60 बेड्स की एक मेडिकल फैसिलिटी की स्थापना की सहमति दी है, जिसमें RT-PCR टेस्ट की भी सुविधा होगी और टीकाकरण की भी व्यवस्था की जाएगी। बता दें कि दिल्ली में फ़िलहाल 3 मई 2021 तक लॉकडाउन है। दिल्ली सरकार ने 18 की उम्र से ऊपर के लोगों को मुफ्त वैक्सीनेशन की सुविधा देने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने माँग की है कि 18 से कम उम्र वालों के लिए भी वैक्सीन की व्यवस्था हो, क्योंकि उन पर भी इसका असर पड़ रहा है।

अशोक होटल में कोविड सेंटर को लेकर भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दिल्ली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि मीडिया के बाद अब न्यायपालिका की बारी है। उन्होंने पूछा कि क्या न्यायपालिका इसे स्वीकार करेगी, पूरा भारत देख रहा है। बता दें कि दिल्ली में हॉस्पिटल बेड्स की भारी कमी है और ऑक्सीजन की कमी खुद सरकार भी बार-बार स्वीकार कर रही है।

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर पैट कमिंस ने पीएम केयर्स में दिए ₹38 लाख: बिलबिलाए लिबरलों ने कोसा, जमकर फैलाया झूठ

कोलकाता नाइट राइडर्स के ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज पैट कमिंस सोमवार को कोरोना महामारी से जूझ रहे भारत के लिए आगे आए हैं। उन्होंने यहाँ के अस्पतालों में ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए पीएम केयर्स फंड में 50,000 डॉलर (लगभग 38 लाख रुपए) दान देने की घोषणा की है। कमिंस ने इस मदद का ऐलान सोशल मीडिया पर किया है।

उन्होंने ट्वीट किया, “भारत एक ऐसा देश है, जहाँ पिछले कुछ वर्षों से मुझे बहुत प्यार मिला है और यहाँ के लोग भी बहुत प्यारे और सपोर्टिंग हैं। मैं जानता हूँ कि पिछले कुछ समय से इस देश में कोरोना वायरस की वजह से काफी दिक्कतें पैदा हो गई हैं, जिससे यहाँ के अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी कमी देखने को मिली है। ऐसे में एक खिलाड़ी होने के नाते मैं पीएम केयर्स फंड में 50 हजार यूएस डॉलर (लगभग 38 लाख रुपए) सहायता राशि के रूप में देना चाहता हूँ और मैं अपने साथी खिलाड़ियों से भी गुजारिश करता हूँ कि वे भी मदद के लिए आगे आएँ।”

कमिंस की इस घोषणा के बाद से सोशल मीडिया पर काफी सकारात्मक रिएक्शन देखने को मिले थे, लेकिन ट्विटर पर कुछ लिबरल ने पैट कमिंस के इस कदम को लेकर हो रही राजनीति और अभद्र जवाब देने वालों का विरोध तक नहीं किया। ईएसपीएन के पत्रकारों से लेकर ऑनलाइन फिल्म समीक्षकों तक सभी रूपों में लिबरल्स लोग पीएम केयर्स फंड के फाउन्डेशन में कमिंस के दान को पचा नहीं पा रहे हैं, जबकि यह विशेष रूप से COVID-19 संकट से निपटने के लिए बनाया गया फंड है।

कमिंस के दान पर फ्यूमिंग लिबरल प्रतिक्रिया

बेंगलुरु स्थित एक ईएसपीएन पत्रकार अर्जुन नम्बूथरी ने ट्विटर पर बेहद नफरत फ़ैलाने वाली प्रतिक्रिया दी। उसने लिखा कि पीएम केयर्स फंड गलत जगह है दान करने के लिए। इतना ही नहीं नम्बूथरी ने Google डॉक का लिंक शेयर करते हुए कमिंस को पीएम केयर फंड की बजाय Google डॉक में सूचीबद्ध संगठनों को दान करने के लिए कहा।

एक अन्य लिबरल अपने भीतर की पीड़ा को छुपाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने खिलाड़ी को तथाकथित योग्य, प्रामाणिक मूवमेंट को जोड़ने के लिए आगे बढ़ने की सलाह दी, जहाँ उन्हें लगता है कि पैट कमिंस को वास्तव में दान करना चाहिए। यह एक और उदाहरण है अपने देश को नीचा दिखाने का।

एक कॉन्ग्रेस समर्थक ने पैट कमिंस को उनकी उदारता के लिए सराहते हुए भी अपनी तुच्छता पर उतर आया। उसने कहा कि उन्होंने इसे गलत हाथों में दे दिया है। वह व्यक्ति बिना किसी तथ्य के दावा कर रहा है कि पीएम केयर्स फंड का इस्तेमाल मुख्य रूप से चुनाव जीतने के लिए किया जाता है।

ट्विटर पर एक यूजर ने काफी बेरूखी से जवाब देते हुए कमिंस का दान स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

पर्ल शाह ने ट्विटर पर कमिंस के इस काम के लिए उन्हें धन्यवाद दिया, लेकिन पीएम केयर फंड में जाने वाले इस धन पर सवाल उठाया।

सुचरिता त्यागी, जो एक छोटी सी YouTuber हैं और फिल्मों की समीक्षा करती हैं उन्होंने भी कमिंस से आग्रह किया कि वे पीएम केयर फंड में दान न करें। बाद में उसने भी अपना ट्वीट डिलीट कर दिया।

बता दें कि पैट कमिंस ने साथी क्रिकेटरों से भी कोरोनो वायरस महामारी के दौरान भारत को दान करने और मदद करने का आह्वान किया है। यह देखना दुखद है कि गैर भारतीय पिछले मतभेदों को भुलाकर आगे आ रहे हैं, ताकि भारत को कोरोना संकट से निपटने में मदद मिल सके, लेकिन हमारे भारतीय साथी इस मामले में बिल्कुल भी उदार नहीं हो सकते हैं।

संक्रमण काल की राजनीति में निचले पायदान पर उतरी कॉन्ग्रेस: झूठ, अफवाह, फेक न्यूज़ बना हथियार

राहुल गाँधी का वह प्रसिद्ध वक्तव्य कि; पॉलिटिक्स सब जगह है, आपके पैंट और शर्ट में भी है, आए दिन चरितार्थ होता रहता है। लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष के बीच जिस समन्वय की बात अक्सर की जाती है, वह सरल नहीं होता, पर इतना कठिन भी नहीं होता जितना आए दिन हम अपने देश की राजनीति में देखते हैं।

एक आम भारतीय को लगता होगा कि पिछले एक वर्ष से दुनियाँ के अन्य देशों के साथ-साथ भारत जिस महामारी की चपेट में है, उससे लड़ने में जो प्रमुख बातें आड़े आ रही हैं, उनमें स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियाँ ही प्रमुख हैं। पर यदि पिछले एक वर्ष में केंद्र और राज्य के बीच या फिर राजनीतिक दलों के बीच समन्वय के बिंदु देखे जाएँ तो समझ में आएगा कि कैसे राजनीतिक समन्वय का न रहना इस महामारी से लड़ने में एक प्रमुख कारण है।

इस एक वर्ष में विपक्षी दलों द्वारा शासित कई राज्यों और केंद्र सरकार के बीच समन्वय कई बार अपने निम्न स्तर पर दिखाई दिया। लॉकडाउन पर हुए फ़ैसले से लेकर टीकाकरण और मूलभूत सुविधाएँ बनाने की बात पर सरकारों के बीच कई बिंदुओं पर सहमति की कमी नज़र आई। कई राज्यों से प्रवासी मजदूरों का पलायन राजनीतिक समन्वय की इसी कमी का नतीजा था जिसमें कई राज्य सरकारें प्रवासी मजदूरों से अपना पल्ला झाड़ते हुए बरामद हुईं।

इसके अलावा टीके को लेकर विपक्षी राजनीतिक दलों द्वारा शंका व्यक्त करने से लेकर भारत में बनने वाले टीकों के प्रति देश के नागरिकों के मन में अपने बयानों से संदेह पैदा करने का काम भी हुआ। ऐसा भी हुआ कि विपक्ष के कई नेताओं ने कोरोना रोकने के लिए आविष्कार किए गए इन टीकों को भाजपा का टीका तक बता डाला। कई नेता अफ़वाहें फैलाते दिखे जिसका जिक्र केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने भूतपूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह को लिखे गए अपने पत्र में भी किया।

जबसे टीकाकरण के तृतीय चरण की घोषणा हुई है तब से बहस और अफवाहों का बाजार फिर से गर्म है। कभी टीके के निर्धारित मूल्यों को लेकर बहस और अफवाहें उड़ाई जा रही हैं तो कभी टीके बनाने वाली कम्पनियों पर आम भारतीय से अनुपयुक्त प्रॉफिट कमाने का आरोप लगाया जा रहा है। पहले से चल रही इन बहसों के बीच एक नया विषय आ गया जिसमें कॉन्ग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने टीकाकरण के तृतीय चरण के अभियान में अपने राज्यों की भागीदारी से इंकार कर दिया है। तृतीय चरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें अट्ठारह से लेकर पैंतालीस वर्ष तक के नागरिकों को टीका लगेगा।

तृतीय चरण के टीकाकरण को लेकर जहाँ अन्य राज्यों ने समय पर टीका निर्माताओं जैसे सिरम इन्स्टिटूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक को अपने ऑर्डर दे दिए हैं वहीं पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे कॉन्ग्रेस शासित राज्यों ने इस चरण के टीकाकरण को शुरू करने से इंकार कर दिया है। इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों का कहना है कि वे अपने राज्य में तृतीय चरण इसलिए शुरू नहीं कर सकते क्योंकि टीका निर्माता कंपनियों ने उन्हें टीके का स्टॉक उपलब्ध न होने की जानकारी दी है। इन राज्यों ने केंद्र पर यह आरोप लगाया कि केंद्र ने पहले से ही सारे टीके खरीद लिए हैं जिसके चलते इन राज्यों के लिए टीके बचे ही नहीं हैं।

यह गंभीर आरोप है पर यहाँ प्रश्न यह है कि ऐसा आरोप केवल कॉन्ग्रेस शासित राज्यों से ही क्यों आ रहा है? जब तृतीय चरण के टीकाकरण का निर्णय हर राज्य को एक ही दिन बताया गया तो फिर ऐसा कैसे हैं कि बहुत से और राज्यों ने टीके की खरीद का अपना ऑर्डर निर्माता कम्पनियों को दे दिया पर वही निर्माता कॉन्ग्रेस शासित राज्यों को टीका देने से मना कर रहे हैं?

उत्तर प्रदेश और बिहार ने भी अपने ऑर्डर और उसके साथ एडवांस भी निर्माता कंपनियों को दे दिए हैं। ऐसी शिकायत ओड़िसा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना जैसे विपक्ष शासित राज्यों से नहीं आई है पर ऐसा क्यों है कि केवल कॉन्ग्रेस शासित राज्यों से आई?

ऐसे में इसके पीछे राजनीति नहीं तो और क्या है? राज्यों की माँग पर ही केंद्र सरकार ने अट्ठारह और पैंतालीस वर्ष के बीच के नागरिकों के लिए टीकाकरण की रज़ामंदी दी थी, इस शर्त के साथ कि इसका खर्च राज्य सरकारों को उठाना होगा क्योंकि केंद्र सरकार पहले से ही पैंतालीस वर्ष और उससे ऊपर के नागरिकों के लिए टीकाकरण का खर्च उठा रही है।

टीके को लेकर केंद्र सरकार की नीति एक मायने में स्पष्ट रही है जहाँ वह प्राथमिकता की दृष्टि से पैंतालीस वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों को हाई रिस्क ग्रुप मानती है और इसलिए इस ग्रुप को पहले टीका देना चाहती है।

अट्ठारह और पैंतालीस वर्ष की उम्र के नागरिकों के टीकाकरण के अलावा विपक्ष और कॉन्ग्रेस के नेता की ओर से विदेशी टीकों के आयात की अनुमति की माँग भी ज़ोर-शोर के साथ उठाई गई थी जिसे केंद्र सरकार ने मान ली थी। जिन भारतीय टीकों के निर्माताओं द्वारा समय पर टीके न दिए जाने का आरोप कॉन्ग्रेस शासित राज्यों के नेता लगा रहे हैं, उन्हीं टीकों के स्तर को लेकर एक कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री और उनके मंत्री पहले बहुत हल्ला मचा चुके हैं। टीके की इस कमी की बात राजस्थान की सरकार ने भी किया है। राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री ने भी तृतीय चरण के टीकाकरण की शुरुआत एक मई से करने में अपनी असमर्थता जताई।

राहुल गाँधी ने एक ट्वीट अपील करके हर कॉन्ग्रेसी को दिन-रात काम करने के लिए प्रेरित करने की कोशिश भी की पर उसका असर दिखाई नहीं दे रहा।

देश में चीनी वाइरस की दूसरी लहर बहुत तेज रही है और उसकी वजह से हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर उसका व्यापक प्रभाव पड़ा है। ऐसे में यह आवश्यक है कि राज्य सरकारें अपने दायित्व का पालन करें और नागरिकों को मूलभूत सुविधाएँ मुहैया कराने के अलावा तृतीय चरण के टीकाकरण की शुरुआत अपने-अपने राज्यों में करें। संक्रमण के लगातार बढ़ते ख़तरे को देखते हुए यह आवश्यक है कि यह काम युद्ध स्तर पर हो ताकि देश जल्द से जल्द इस महामारी पर काबू पा सके।

‘दवाई भी-कड़ाई भी’ के सूत्र से मिली UP में 8 लाख लोगों को कोविड से मुक्ति: 24 घंटे में डिस्चार्ज हुए 25 हजार से ज्यादा लोग

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार कोरोना की बेकाबू रफ्तार को रोकने के लिए जीतोड़ मेहनत कर रही है। राज्य सरकार की मेहनत रंग लाती भी नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते दिनों में प्रदेश में कोरोना के नए मामलों की तुलना में ठीक होकर घर वापस जाने वाले मरीजों की संख्या अधिक पाई गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले 3 दिनों में उत्तर प्रदेश में COVID-19 के नए मामलों में कमी आई है। राज्य में बेड, ऑक्सीजन और जीवन रक्षक दवाओं की कोई कमी नहीं है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मुख्यमंत्री ने सोमवार को टीम इलेवन के साथ कोरोना स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऑक्सीजन और जीवन रक्षक दवाओं की कोई कमी नहीं है। बीते 24 घंटों में उत्तर प्रदेश में 25,633 लोग डिस्चार्ज हुए हैं।

प्रदेश में अब तक 8.04 लाख से अधिक लोग कोविड संक्रमण से ठीक हो चुके हैं। यह सब केवल ‘दवाई भी-कड़ाई भी’ के सूत्र को प्रभावी ढंग से अमल में लाने का परिणाम है। हमें टेस्टिंग और ट्रेसिंग को दोगुनी क्षमता में बढ़ाने की जरूरत है। इस दिशा में कार्रवाई की जाए।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में प्रदेश के अस्पतालों में ओपीडी सेवाएँ स्थगित हैं। ऐसे में टेलीकन्सल्टेशन को बढ़ावा दिया जाए। कोविड होम आइसोलेशन और नॉन कोविड मरीजों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की सूची व संपर्क माध्यम का व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए।

सीएम ने प्रत्येक जिले में कोविड संक्रमण से किसी भी मरीज की मृत्यु होने पर उसके अंतिम संस्कार के लिए कोई शुल्क न लिए जाने का भी निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार की क्रिया मृतक की धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप होगी। इसकी सभी आवश्यक व्यवस्था प्रशासन सुनिश्चित कराएगा।

गौरतलब है कि बीते 24 घंटों में उत्तर प्रदेश में कोरोना के 35,614 नए केस सामने आए हैं। यह आँकड़ा एक दिन पहले आए मरीजों से करीब 2500 कम है। सरकार का दावा है कि इस दौरान 25,633 मरीज ठीक हुए हैं। यानी प्रदेश में कोरोना को मात देने वालों का आँकड़ा बढ़ा है। 24 घंटे में यूपी में 2 लाख 30 हजार टेस्ट किए गए, जो अब तक का सबसे अधिक आँकड़ा है। इसमें 1 लाख 7 हजार से ज्यादा लोगों का RT-PCR टेस्ट हुआ है।

बता दें कि लखनऊ में लगातार चौथे दिन यानी नए संक्रमितों के मुकाबले ठीक होने वालों का आँकड़ा ज्यादा रहा। रविवार को यहाँ 5187 नए मामले मिले, जबकि 6247 मरीजों ने कोरोना को मात दी। वहीं, 14 मरीजों की मौत हुई।